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बुलडोजर ऐक्शन पर SC सख्त, एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने घरों को तोड़े जाने को अत्याचारी कदम बताया है, घर बनाकर देने होंगे

प्रयागराज सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज में कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना लोगों के घर गिराए जाने के मामले पर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार को जमकर फटकार लगाई। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि इस तरह की कार्रवाई चौंकाने वाली है और बेहद गलत उदाहरण पेश करती है। सुनवाई के दौरान जस्टिस अभय ओका और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने घरों को तोड़े जाने को अत्याचारी कदम बताया है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि सरकार को लोगों को मकान वापस बना कर देना होगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, “प्रथम दृष्टया, यह कार्रवाई चौंकाने वाली है और गलत संदेश देती है। इसे ठीक करने की जरूरत है। आप घरों को तोड़कर ऐसे एक्शन क्यों ले रहे हैं। हम जानते हैं कि इस तरह के तकनीकी तर्कों से कैसे निपटना है। आखिरकार अनुच्छेद 21 और आश्रय के अधिकार जैसी कोई चीज होती है।” सुप्रीम कोर्ट में जुल्फिकार हैदर, प्रोफेसर अली अहमद, दो विधवाओं और एक अन्य व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई चल रही थी, जिन्होंने सरकार पर गैर कानूनी तरीके से घरों को गिराने के आरोप लगाए हैं। वहीं सरकार के मुताबिक जमीन गैंगस्टर-राजनेता अतीक अहमद की थी, जो 2023 में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। सरकार का क्या था तर्क? इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज करने कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय से गुहार लगाई थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्हें मार्च 2021 में शनिवार रात को नोटिस दिया गया और रविवार को घर तोड़ दिए गए। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि राज्य को अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए। वहीं सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि लोगों को नोटिस का जवाब देने के लिए उचित समय दिया गया था। हालांकि जस्टिस ओका इससे असहमत थे। जस्टिस ओका ने कहा, “नोटिस इस तरह क्यों चिपकाया गया? कूरियर से क्यों नहीं भेजा गया? कोई भी इस तरह नोटिस देगा और तोड़फोड़ करेगा। यह एक खराब उदाहरण है।” हाईकोर्ट भेजने की मांग खारिज इस दौरान अटॉर्नी जनरल ने मामले को हाईकोर्ट में स्थांतरित करने की मांग की। AG ने कहा, “मैं डिमोलिशन का बचाव नहीं कर रहा हूं, लेकिन इस पर हाईकोर्ट को विचार करने दें।” हालांकि कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, “बिल्कुल नहीं। दोबारा हाईकोर्ट नहीं जाना चाहिए। तब मामला टल जाएगा।” पुनर्निर्माण कराने के आदेश कोर्ट ने कहा कि ध्वस्त किए गए घरों का पुनर्निर्माण करना होगा। कोर्ट ने कहा, “इसका पुनर्निर्माण करना होगा। अगर आप हलफनामा दाखिल करके विरोध करना चाहते हैं तो ठीक है, अन्यथा दूसरा कम शर्मनाक तरीका यह होगा कि उन्हें निर्माण करने दिया जाए और फिर कानून के अनुसार उन्हें नोटिस दिया जाए।”

मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए चलाए विशेष अभियान : गृह राज्य मंत्री

जयपुर, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश के युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध बिक्री रोकने के लिए समय समय पर विशेष अभियान चलाकर अपराधियों की धरपकड़ की जाती है। नशे के खिलाफ जन जागरुकता अभियान चलाए जाते हैं। नारकोटिक ड्रग्स एण्ड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत मादक पदार्थों की जब्ती की कार्रवाई की जाती है। तस्करी तथा अवैध बिक्री में लिप्त अपराधियों को गिरफ्तार किया जाता है। उनकी सम्पत्ति जब्त की जाती है। साथ ही युवाओं को नशे की लत से दूर करने के लिए नशा मुक्ति केन्द्रों का संचालन भी सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा भी इस संबंध में संज्ञान लेते हुए एडवाइजरी जारी की गई है। गृह राज्य मंत्री प्रश्नकाल के दौरान सदस्य द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में मादक पदार्थों की अवैध बिक्री और तस्करी रोकने के लिए सजगता से कार्रवाई की जा रही है। अधिक समस्याग्रस्त जिलों में जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश देकर टीमों का गठन भी किया गया है। साथ ही पकड़े गए अपराधियों के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के साथ पुलिस की मिलीभगत की कोई शिकायत अब तक प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि ऐसी कोई भी शिकायत आने पर कठोर कार्रवाई करना सुनिश्चित किया जाएगा। इससे पहले विधायक रामनिवास गावडिया के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में गृह राज्य मंत्री ने कहा कि जिला हनुमानगढ में विगत 03 वर्षों में चिट्टा मादक पदार्थ की तस्करी के कुल 404 प्रकरण दर्ज हुए हैं। उन्होंने बताया कि उक्त दर्ज 404 प्रकरणों में 894 मुल्जिमों को गिरफ्तार किया गया तथा 354 प्रकरणों मं  चालान न्यायालय में पेश किये गये व 50 प्रकरणों में अनुसंधान जारी है। उन्होंने इसका विवरण सदन के पटल पर रखा। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा अवैध मादक पदार्थों की तस्करी की रोकथाम के लिए किये गये प्रयासों एवं कार्यवाही का विवरण भी सदन के पटल पर रखा।

इंदौर में मंदिरों के बाहर फिर दिखने लगा भिक्षुकों का जमावड़ा, अब भिक्षा मांगने और देने वाले पर आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं होगा

इंदौर  इंदौर। इंदौर जिले में अब भिक्षा मांगने और देने वाले पर आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं होगा। इसे लेकर दो जनवरी को जारी किया गया कलेक्टर का आदेश 28 फरवरी का समाप्त हो गया है। इसके बाद एक बार फिर भिक्षावृत्ति नजर आने लगी है। शनिवार, मंगलवार आदि विशेष दिनों में मंदिरों के बाहर भिक्षुकों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। भिक्षा मुक्त इंदौर अभियान के तीसरे चरण में भिक्षा मांगने और देने वाले आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के लिए कलेक्टर आशीष सिंह ने आदेश जारी किया था। दो जनवरी से 28 फरवरी तक हुई सख्ती में तीन लोगों के खिलाफ भिक्षा देने और लेने पर प्रकरण दर्ज हो चुका है। देश-विदेश तक हुई सराहना भिक्षा मुक्त अभियान की सराहना देश-विदेश तक हो चुकी है। महिला व बाल विकास विभाग द्वारा भिक्षा मुक्त इंदौर अभियान की शुरुआत गत वर्ष की गई थी। पहले चरण में जागरूकता अभियान चलाकर भिक्षुकों को समझाइश दी गई। इसके बाद भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों का रेस्क्यू किया गया। इसमें 700 वयस्कों को सेवाधाम आश्रम भेजा गया है। वहीं भिक्षावृत्ति से जुड़े 60 से अधिक बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलवाया गया। अभियान में सख्ती बरतने के लिए कलेक्टर ने दो जनवरी से 28 फरवरी तक प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किया था। इसमें भिक्षुकों को भिक्षा के रूप में कुछ भी देने पर और उनसे किसी तरह की सामग्री क्रय करने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत प्रकरण दर्ज की बात कही गई थी। इसका असर यह हुआ कि इंदौर में भिक्षावृत्ति तकरीबन पूरी तरह से बंद हो गई थी। 28 लोग हो चुके सम्मानित इसी अभियान में प्रशासन ने नवाचार किया था। भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों की सूचना देने पर एक हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा भी हुई। इसके बाद प्रशासन को हर दिन काल आना शुरू हो गए। अब तक प्रशासन 28 लोगों को एक हजार रुपये देकर सम्मानित कर चुका है। भिक्षुकों की जानकारी देने वालों को मिले एक हजार रुपए इस अभियान में प्रशासन ने एक नवाचार भी किया। भिक्षावृत्ति से जुड़ी सूचना देने वालों को 1 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की गई, जिसके बाद प्रशासन को हर दिन इस तरह की सूचनाएं मिलने लगीं। अब तक 28 लोगों को प्रशासन ने इनाम देकर सम्मानित किया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी राम निवास बुधौलिया के अनुसार, इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। हालांकि, कुछ स्थानों पर अब भी भिक्षावृत्ति की सूचना मिल रही है, जिन्हें तुरंत रेस्क्यू किया जा रहा है। भिक्षा मुक्त इंदौर अभियान की सराहना न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी हो चुकी है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पिछले वर्ष इस अभियान की शुरुआत की गई थी। पहले चरण में भिक्षुकों को समझाइश दी गई और उसके बाद उनके पुनर्वास के प्रयास किए गए। इस दौरान 700 वयस्क भिक्षुकों को सेवाधाम आश्रम भेजा गया, जबकि भिक्षावृत्ति से जुड़े 60 से अधिक बच्चों का स्कूल में दाखिला करवाया गया।  28 फरवरी से खत्म हुई सख्ती इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कलेक्टर आशीष सिंह ने 2 जनवरी से 28 फरवरी तक प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किया था। इसके तहत भीख मांगने और देने दोनों को अपराध माना गया और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत प्रकरण दर्ज करने का प्रावधान किया गया। इस सख्ती के चलते इंदौर में भिक्षावृत्ति लगभग पूरी तरह समाप्त हो गई थी। इस अवधि में तीन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई।  हालांकि, 28 फरवरी को आदेश समाप्त होने के बाद भी भिक्षुकों का रेस्क्यू जारी रहेगा। मंदिरों, सार्वजनिक स्थलों और व्यस्त बाजारों में भिक्षुकों की उपस्थिति दिख रही है। प्रशासन लगातार अभियान की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर फिर से सख्ती बरतने की संभावना जताई जा रही है। अभियान से जुड़ी बड़ी बातें     सूचना देने वाले 28 लोग हो चुके सम्मानित     60 से अधिक बच्चे भिक्षावृत्ति छोड़ शिक्षा से जुड़े     700 से अधिक भिक्षुकों का हो चुका है रेस्क्यू     400 से ज्यादा काल आ चुके भिक्षुकों की सूचना वाले  

पीएम मोदी ने मां गंगा के शीतकालीन निवास स्थल मुखवा में पूजा-अर्चना की, कहा- 60-70 साल रहे खाली

देहरादून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को उत्तराखंड के उत्तरकाशी पहुंचे। यहां पीएम ने मां गंगा के शीतकालीन निवास स्थल मुखवा में पूजा-अर्चना की। इसके बाद पीएम ने हर्षिल में एक जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान अत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई ऐलान किए। पीएम ने चीन सीमा के उन दो गांवों को भी बसाने और वहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों की चर्चा की। पीएम ने कहा कि 1962 में चीन के हमले के बाद खाली कराए गए दोनों गांव 60-70 साल तक खाली रहे। पीएम मोदी ने कहा, ‘देशवासियों को पता होगा, शायद नहीं पता होगा। 1962 में जब चाइना ने भारत पर आक्रमण किया तब दो गांव खाली करा दिए गए थे। 60-70 साल हो गए। लोग भूल गए, हम नहीं भूल सकते। हमने उन दो गांवों को फिर से बसाने का अभियान चलाया है। बहुत बड़ा पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।’ पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या एक दशक में तेजी से बढ़ी है।’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक सुस्ती को दूर करने के लिए बारहमासी पर्यटन पर जोर दिया जिससे हर सीजन ‘ऑन सीजन’ रहे । प्रधानमंत्री ने कहा, ‘अपने पर्यटन क्षेत्र को विविधतापूर्ण बनाना और उसे बारहमासी बनाना उत्तराखंड के लिए बहुत जरूरी है।’ उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उत्तराखंड में पर्यटन के लिहाज से कोई भी सीजन ‘ऑफ सीजन’ न हो और हर सीजन ‘ऑन सीजन’ रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी पहाड़ों में मार्च, अप्रैल और जून में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं लेकिन उसके बाद इनकी संख्या कम हो जाती है। उन्होंने कहा, ‘सर्दियों में होमस्टे और होटल खाली पड़े रहते हैं । यह असंतुलन उत्तराखंड में साल के एक बड़े हिस्से में आर्थिक सुस्ती ला देता है।’ मोदी ने कहा कि अगर सर्दियों में देश-विदेश के लोग प्रदेश में आएं तो उन्हें उत्तराखंड की वास्तविक आभा मिलेगी और ट्रेकिंग और स्कींइंग उन्हें रोमांचित कर देगा। उन्होंने कहा कि सर्दियों में उत्तराखंड की धूप खास होती है जब मैदानी इलाकों में कोहरा होता है। उन्होंने कॉर्पोरेट जगत से भी अपील की कि सर्दियों में अपनी मीटिंग-कॉन्फ्रेंस उत्तराखंड में करें।

जाम्बिया के प्रतिनिधिमंडल ने ली राज्य के सहकारी आन्दोलन और कार्यप्रणाली की जानकारी- ‘सहकार से समृद्धि’ के अंतर्गत किये जा रहे कार्यों की सराहना की

जयपुर, सहकारिता विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के अंतर्गत प्रदेश भर में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में दि जयपुर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लि. द्वारा बुधवार को बैंक के प्रधान कार्यालय में जाम्बिया से आये प्रतिनिधिमंडल को बैंक की कार्यप्रणाली एवं राज्य में संचालित की जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध करवाई गई।       अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अंतर्गत विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडल अन्य देशों का दौरा कर वहां के सहकारी आन्दोलन तथा कार्यप्रणाली का अध्ययन कर रहे हैं। इसी के तहत जाम्बिया का चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भारत के दौरे पर है। प्रतिनिधिमंडल ने दि जयपुर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लि. के साथ ही अपेक्स बैंक, बीलवा ग्राम सेवा सहकारी समिति एवं बड़ का बालाजी प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति का भी दौरा कर कार्यप्रणाली को बारीकी से समझा।       दि जयपुर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के प्रधान कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को राज्य में सहकारी आन्दोलन को प्रभावी और सार्थक बनाने तथा विभिन्न सहकारी योजनाओं की आमजन तक पहुंच सुलभ कराने के उद्देश्य से किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी। साथ ही, योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रचार-प्रसार एवं प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। जाम्बिया से आये प्रतिनिधिमंडल ने भी इस दौरान अपने देश के सहकारी आन्दोलन से सम्बन्धित जानकारी प्रदान की। प्रतिनिधिमंडल ने भारत में ‘सहकार से समृद्धि’ के अंतर्गत किये जा रहे कार्यों की प्रशंसा की।       इस अवसर पर अपेक्स बैंक के प्रबंध निदेशक श्री संजय पाठक, महाप्रबंधक श्री पी.के. नाग, दि जयपुर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक श्री दिनेश कुमार शर्मा एवं अधिशाषी अधिकारी श्री राजेन्द्र कुमार मीणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

राज्यपाल ने जोधपुर में ली जिलास्तरीय अधिकारियों की बैठक, सामुदायिक उत्थान एवं क्षेत्रीय विकास पर दिया जोर

जयपुर, राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने क्षेत्रीय विकास एवं सामुदायिक उत्थान की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों को जरूरतमन्दों तक पहुंचाकर खुशहाली लाने के लिए समर्पित होकर प्रयास करने का आह्वान किया है। राज्यपाल बागडे ने गुरुवार को जोधपुर में मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर में जिलास्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह आह्वान किया। बैठक में पीपीटी के माध्यम से जिले में संचालित केंद्र एवं राज्य प्रायोजित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी दी गई। राज्यपाल ने इस अवसर पर केन्द्र और राज्य प्रायोजित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की अद्यतन प्रगति एवं प्राप्त उपलब्धियों, भौगोलिक परिस्थितियों एवं संसाधनों की कमी से प्रभावित क्षेत्र में सामाजिक आर्थिक स्तर में सुधार हेतु योजना एवं कार्यक्रम, स्थानीय नागारिकों के पलायन को रोके जाने के लिए किये जा रहे प्रयास तथा हिन्दू विस्थापितों की स्थिति एवं सुरक्षा पर्यवेक्षण सहित विभिन्न गतिविधियों की समीक्षा की और सम सामयिक हालातों पर जानकारी ली। राज्यपाल ने इस दौरान वि​भिन्न योजनाओं विशेषकर महात्मा गांधी नरेगा योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, स्वामित्व योजना ग्रामीण, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (जल ग्रहण घटक), पुनरुत्थान वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) आदि की समीक्षा करते इनसे अधिकाधिक लोगों को लाभांवित किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने सॉयल हैल्थ कार्ड योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, उद्यान विभाग की योजनाओं नेशनल हैल्थ मिशन, यूनिसर्वल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी), बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री खनन क्षेत्र कल्याण योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना/जीवन ज्योति बीमा योजना, ई-नाम परियोजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना सहित विभिन्न केन्द्र व राज्य प्रायोजित योजनाओं की बिन्दुवार विस्तार से समीक्षा की और इनमें लक्ष्यों की समय पर प्राप्ति के निर्देश दिए।

भारत के 5 में से 2 बच्चों का बीएमआई दयनीय, स्पोर्ट्ज़ विलेज के 13वें वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण से हुआ खुलासा

नई दिल्ली स्पोर्ट्ज़ विलेज के 13वें वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एएचएस) ने पूरे भारत में स्कूल जाने वाले बच्चों की फिटनेस और सेहत में चिंताजनक अंतर का खुलासा किया है। वर्ष 2010 से हर साल संचालित हो रहे इस सर्वेक्षण का उद्देश्य यह है कि समूचे भारत के स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य व फिटनेस के स्तर का विश्लेषण और मूल्यांकन किया जाए। एडुस्पोर्ट्स द्वारा समर्थित इस सर्वेक्षण के 13वें संस्करण में, देश के 85 स्थानों पर 7 से 17 वर्ष की आयु के 1,16,650 बच्चों का मूल्यांकन किया गया, जिसके तहत स्कूलों में सुगठित शारीरिक शिक्षा कार्यक्रमों की तत्काल जरूरत को हाईलाइट किया गया है। देश का पूर्वी क्षेत्र अपने कुल 56.40% बच्चों की समग्र फिटनेस प्रदर्शित करते हुए, सेकेंड-बेस्ट बन कर उभरा है, जिसमें शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत (54%), शरीर के निचले हिस्से की ताकत (46%), और लचीलेपन (77%) के मामले में उल्लेखनीय मजबूती नजर आई है। सर्वेक्षण से उजागर हुआ है कि उत्तरी क्षेत्र में बच्चों के एक बड़े प्रतिशत का प्रदर्शन बेहद दयनीय रहा, जिसमें फिटनेस के सात में से तीन मापदंडों का प्रतिशत सबसे कम दर्ज किया गया। इस क्षेत्र ने शरीर के निचले हिस्से की ताकत (35%), पेट की ताकत (81%), और एनारोबिक क्षमता (58%) के मामले में सबसे लचर प्रदर्शन किया, जो फिटनेस के प्रमुख संकेतकों में सुधार के जरूरी क्षेत्रों को रेखांकित करता है। दक्षिण क्षेत्र के बच्चों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। बीएमआई (60.12%), एरोबिक क्षमता (31%), एनारोबिक क्षमता (62%), और पेट की ताकत (87%) के मापदंडों में, दक्षिण के बच्चों ने बड़ी संख्या में बढ़िया प्रदर्शन किया है, मगर शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत और लचीलेपन के मापदंडों में सुधार की बड़ी गुंजाइश दिखाई दी। अन्य सभी क्षेत्रों के मुकाबले पश्चिम क्षेत्र ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है, जहाँ शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत (58%) शरीर के निचले हिस्से की ताकत (60%), एनारोबिक क्षमता (81%), पेट की ताकत (93%), एरोबिक क्षमता (52%) और लचीलेपन (81%) के मापदंडों में असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन करने वाले बच्चों का प्रतिशत अधिक है। सर्वेक्षण के मुख्य निष्कर्ष बताते हैं: ●    5 में से 2 बच्चों का बीएमआई खराब है। ●    5 में से 3 बच्चों के शरीर में निचले हिस्से की ताकत पर्याप्त नहीं है। ●    3 में से 1 बच्चे में पर्याप्त लचीलापन नहीं है। ●    5 में से 3 बच्चे जरूरी एरोबिक क्षमता पूरी नहीं करते। ●    5 में से 1 बच्चा पेट या कोर की पर्याप्त ताकत नहीं रखता। ●    5 में से 2 बच्चों के पास पर्याप्त एनारोबिक क्षमता नहीं है। ●    5 में से 3 बच्चों के ऊपरी शरीर में पर्याप्त ताकत नहीं है। ●    लड़कों (57.09%) की तुलना में लड़कियों (62.23%) का बीएमआई अच्छा है। ●    लड़कियों ने लचीलेपन, पेट की ताकत, एनारोबिक क्षमता और शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत के मामले में लड़कों को पछाड़ दिया है, जबकि लड़कों ने एरोबिक क्षमता और शरीर के निचले हिस्से की ताकत के मापदंडों में अच्छा प्रदर्शन किया। एएचएस 2025 के मुख्य निष्कर्ष इसके अलावा, शरीर के ऊपरी हिस्से की शक्ति के मापदंड पर, सरकारी स्कूलों के बच्चों की (37%) तुलना में निजी स्कूलों के बच्चों का प्रतिशत बेहतर (47%) है, और पेट की शक्ति के मापदंड पर सरकारी स्कूलों के बच्चों का प्रतिशत 84% है, जबकि निजी स्कूलों के बच्चों का प्रतिशत इससे अधिक 87% रहा। तुलनात्मक रूप से, सरकारी स्कूलों के बच्चों ने बड़ी संख्या में- बीएमआई (61.64%), शरीर के निचले हिस्से की ताकत (48%), एरोबिक क्षमता (37%), एनारोबिक क्षमता (75%) और लचीलेपन (75%) के मापदंडों में बेहतर प्रदर्शन किया, जो निजी स्कूल के बच्चों की तुलना में बेहतर समग्र फिटनेस दिखाता है। इस सर्वेक्षण ने पी.ई. कक्षाओं की बारंबारता और समग्र फिटनेस स्तरों के सकारात्मक सहसंबंध पर भी प्रकाश डाला है। इसमें पाया गया कि जो बच्चे प्रति सप्ताह पी.ई. की दो से अधिक कक्षाओं में भाग लेते हैं, उनके बीएमआई का स्तर, शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत और लचीलापन, पी.ई. की कम कक्षाओं में भाग लेने वाले बच्चों के मुकाबले बेहतर होता है, जिससे स्कूलों में सुगठित खेल कार्यक्रमों की अहमियत को बल मिलता है। पी.ई. कक्षाओं की बारंबारता का समग्र फिटनेस पर असर स्पोर्ट्ज़ विलेज के को-फाउंडर, सीईओ एवं मैनेजिंग डाइरेक्टर सौमिल मजमुदार ने शिक्षा व खेल के बीच संतुलन बनाने के महत्व पर जोर देते हुए कहा: “बच्चों को स्वाभाविक रूप से खेलना पसंद होता है, फिर भी खेल अक्सर शिक्षा से पीछे रह जाते हैं। 13वें एएचएस से निकले निष्कर्ष इस तात्कालिक आवश्यकता पर प्रकाश डालते हैं कि दोनों के बीच संतुलन बनाने की सख्त जरूरत है। स्कूल के लीडरों को चाहिए कि वे शारीरिक शिक्षा और खेल पाठ्यक्रम में निवेश को प्राथमिकता दें- न केवल बच्चों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य एवं कल्याण की दृष्टि से, बल्कि एक ऐसी मजबूत खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जो भारत को वैश्विक मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की दिशा में ले जाए।” स्पोर्ट्ज़ विलेज के को-फाउंडरऔर फाउंडेशन के मुखिया परमिंदर गिल ने नीतिगत समर्थन और सीएसआर-समर्थित उपायों की जरूरत को हाईलाइट करते हुए अपनी बात आगे बढ़ाई: “सरकारी स्कूल के बच्चों का बेहतर फिटनेस स्तर उत्साहजनक है, जिसके दूरगामी लाभ होंगे। खेल न केवल अकादमिक प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं बल्कि सामाजिक-भावनात्मक कौशल को भी मजबूत करते हैं, समावेश को बढ़ावा देते हैं और लैंगिक समानता को प्रोत्साहन देते हैं। इस प्रगति का लाभ उठाने के लिए, मजबूत नीतियाँ लागू करना और ऐसे संसाधन आबंटित करना जरूरी हो जाता है, जो कॉर्पोरेट्स, सीएसआर पहलों, परोपकारियों और सरकार द्वारा समर्थित उच्च गुणवत्ता वाले खेल कार्यक्रमों तक पहुंच सुनिश्चित करते हैं।” 13वें वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण की विस्तृत रिपोर्ट यहां डाउनलोड की जा सकती है। स्पोर्ट्ज़ विलेज के बारे में स्पोर्ट्ज़ विलेज भारत का सबसे बड़ा स्कूल खेल संगठन है, जो खेल को बच्चों की शिक्षा एवं विकास का अभिन्न अंग बनाने के लिए समर्पित है। वर्ष 2003 में स्थापित, स्पोर्ट्ज़ विलेज का उद्देश्य यह है कि खेलों को स्कूली पाठ्यक्रमों के साथ एकीकृत करके बच्चों के स्वास्थ्य एवं कल्याण में सुधार किया जाए। चाहे अपने अग्रणी सुसंगठित शारीरिक शिक्षा (पी.ई.) कार्यक्रम एडुस्पोर्ट्स के माध्यम से हो, या सरकारी स्कूलों में अपनी #स्पोर्ट्सफॉरचेंज विकास पहलों के माध्यम से, या पाथवेज़ स्पोर्ट्स एक्सीलेंस … Read more

भैयाजी जोशी बोले मुंबई में मराठी सीखने की जरूरत नहीं, गुजराती से भी काम चल जाएगा

 मुंबई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता सुरेश भैयाजी जोशी के हालिया बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है. भैयाजी जोशी ने कहा कि “मुंबई की कोई एक भाषा नहीं है, इसलिए यहां आने के लिए मराठी सीखने की जरूरत नहीं है. यहां गुजराती से भी काम चल जाएगा.” इस बयान पर शिवसेना (UBT) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. गुजराती को बताया घाटकोपर की भाषा आरएसएस नेता के इस बयान का शिवसेना (UBT) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने विरोध किया है. ठाकरे ने कहा,’मुंबई हो या महाराष्ट्र, हमारी जमीन की पहली भाषा मराठी है. तमिलनाडु या किसी दूसरे राज्य में तमिल की तरह मराठी भी हमारा गौरव है. भैयाजी जोशी ने गुजराती को घाटकोपर की भाषा बताया है. लेकिन यह अस्वीकार्य है. मराठी हमारी मुंबई की भाषा है.’ मुंबई को तोड़ने की कोशिश: आव्हाड आरएसएस नेता के बयान पर एनसीपी विधायक जीतेंद्र आव्हाड की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा,’केम छो, केम छो’ ऐसा लगता है कि अब मुंबई में सिर्फ यही सुनने को मिलेगा. भैयाजी जोशी भाषा के मुद्दे पर मुंबई को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.’ मराठी संस्कृति-पहचान का हिस्सा: फडणवीस मराठी भाषा को लेकर छिड़ी बहस के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी इस मुद्दे पर बयान आ गया है. उन्होंने विधानसभा में कहा,’मुंबई, महाराष्ट्र और राज्य सरकार की भाषा मराठी है. यहां रहने वालों को इसे सीखना चाहिए. मराठी भाषा राज्य की संस्कृति और पहचान का हिस्सा है और इसे सीखना हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए.’ विधानसभा में भिड़े बीजेपी और शिवसेना हालांकि, मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सदन में शिवसेना (UBT) और बीजेपी के सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई. यह बहस इस कदर बढ़ गई कि कामकाज 5 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया. भैयाजी जोशी का बयान भैयाजी जोशी ने अपने बयान में कहा, “मुंबई में एक नहीं, कई भाषाएं बोली जाती हैं. मुंबई के हर हिस्से की अपनी अलग भाषा है. घाटकोपर इलाके में गुजराती भाषा प्रमुख रूप से बोली जाती है. इसलिए यदि कोई व्यक्ति मुंबई में रहना चाहता है या यहां आना चाहता है, तो उसे मराठी सीखने की अनिवार्यता नहीं है.” शिवसेना (UBT) का विरोध शिवसेना (UBT) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने इस बयान का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने कहा, “मुंबई हो या महाराष्ट्र, हमारी जमीन की पहली भाषा मराठी है. जिस तरह तमिलनाडु में तमिल को प्राथमिकता दी जाती है, वैसे ही महाराष्ट्र में मराठी हमारी पहचान और गौरव है. भैयाजी जोशी ने गुजराती को घाटकोपर की भाषा बताया है, लेकिन यह पूरी तरह अस्वीकार्य है. मुंबई की भाषा मराठी है.” NCP की प्रतिक्रिया राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने भी इस बयान की निंदा की है. पार्टी नेताओं ने कहा कि मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी है और मराठी यहां की मूल भाषा है. किसी भी भाषा को महत्व देना गलत नहीं है, लेकिन मराठी को दरकिनार करना मराठियों के स्वाभिमान के खिलाफ है. मराठी अस्मिता का मुद्दा महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता (पहचान) हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है. शिवसेना और एनसीपी जैसे दलों ने हमेशा से मराठी भाषा और संस्कृति की रक्षा को अपने एजेंडे में रखा है. इस बयान के बाद राज्य में मराठी भाषा को लेकर नई बहस छिड़ गई है. भैयाजी जोशी के बयान ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है और मराठी अस्मिता के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है. शिवसेना और एनसीपी जैसे दल इसे मराठी संस्कृति पर हमला मान रहे हैं, जबकि आरएसएस नेता का कहना है कि मुंबई बहुभाषी शहर है और हर भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए. यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है.

मार्क्वार्ट ने भारत में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया

•    लगातार विकसित हो रहे इस महत्वपूर्ण बाज़ार में निवेश •    मेकाट्रॉनिक सिस्टम्स की क्षमताओं को बढ़ावा •    साल 2030 तक लगभग 300 नई नौकरियों के अवसर रीथेइम-वेइलहेम/ तलेगांव, मेकाट्रॉनिक्स क्षेत्र की विशेषज्ञ कंपनी, मार्क्वार्ड ने भारत में अपनी मौजूदगी के दायरे को बढ़ाते हुए, आज पुणे के निकट तलेगांव में आधिकारिक तौर पर एक नए प्लांट का शुभारंभ किया है। परिवार के स्वामित्व वाली इस कंपनी ने मुंबई में स्थित अपने प्रोडक्शन साइट की जगह इस नई प्रोडक्शन फैसिलिटी की शुरुआत की है, जिससे इसकी क्षमताओं का काफी विस्तार होगा और तेजी से आगे बढ़ रहे बाज़ार में मुकाबला करने के इसके सामर्थ्य को भी मजबूती मिलेगी। इसकी इमारत, मशीनरी और उपकरणों में 180 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। आने वाले समय में, मार्क्वार्ड अत्याधुनिक सुविधाओं वाले अपने इस प्लांट में मुख्य रूप से भारतीय मोटर-वाहन उद्योग के ग्राहकों के लिए मेकाट्रॉनिक सिस्टम सॉल्यूशंस का निर्माण करेगा। मार्क्वार्ट ग्रुप के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, ब्योर्न ट्विहौस (Björn Twiehaus) इस बारे में बात करते हुए कहते हैं: “मार्क्वार्ट के लिए भारत विकास की असीमित संभावनाओं वाला एक महत्वपूर्ण बाज़ार है। यहाँ हम मोटर वाहन बनाने वाली प्रमुख कंपनियों के साथ मिलकर काम करते हैं और अपनी भारतीय टीम की इनोवेशन करने की काबिलियत और विशेषज्ञता का उपयोग करते हैं। भारत में अपनी सफलता की कहानी को आगे बढ़ाते हुए हमने तलेगांव में इस प्लांट का उद्घाटन किया है। इस तरह, हम भविष्य की आवागमन सुविधाओं के लिए मेकाट्रॉनिक सिस्टम्स उपलब्ध कराने वाली अग्रणी कंपनी के तौर पर अपनी स्थिति को मजबूत कर रहे हैं।” “मेक इन इंडिया” पहल में योगदान मार्क्वार्ट इंडिया के जनरल मैनेजर, विशाल नार्वेकर ने आगे कहा: “तलेगांव में हमारी नई फैसिलिटी का शुभारंभ भारत में मार्क्वार्ट के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। भारत के मोटर-वाहन उद्योग में ग्राहकों के साथ हमारे मजबूत और लंबे समय से कायम रिश्तों ने हमारी प्रगति में अहम भूमिका निभाई है। इस विस्तार से यह जाहिर होता है कि, हम अपने स्थानीय भागीदारों की ज़रूरतों के अनुरूप विश्व स्तरीय मेकट्रॉनिक सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने के अपने संकल्प पर कायम हैं। इसके अलावा, यह फैसिलिटी स्थानीय उत्पादन को बढ़ाकर, इनोवेशन को बढ़ावा देकर और नए रोजगार के अवसर पैदा करके ‘मेक इन इंडिया’ पहल में हमारे योगदान को भी उजागर करती है।” लगभग 300 नई नौकरियों के अवसर मार्क्वार्ड अपनी अत्याधुनिक सुविधाओं वाली असेंबली लाइनों के अलावा, इन-हाउस इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन एवं लॉजिस्टिक्स के साथ तलेगांव के अपने ग्राहकों को संपूर्ण मेक्ट्रोनिक सॉल्यूशंस उपलब्ध कराता है, जिसमें ड्राइव ऑथराइजेशन सिस्टम, गियर सिलेक्टर स्विच और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं। साथ ही, इस निवेश से सप्लाई चेन का आकार छोटा होगा, प्रतिक्रिया का समय तेज़ होगा और लचीलापन बढ़ेगा। आने वाले पाँच सालों में, मार्क्वार्ड की इस नई साइट पर लगभग 300 अतिरिक्त नौकरियों के अवसर सामने आएंगे। भारत के लिए दीर्घकालिक समर्पण                                                                                              मार्क्वार्ड पिछले कुछ दशकों से भारत में सक्रिय है और पुणे में 450 से ज़्यादा कर्मचारियों के साथ एक डेवलपमेंट सेंटर का संचालन कर रहा है। हमारे विशेषज्ञ पूरी दुनिया में मौजूद मार्क्वार्ड इनोवेशन नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो देश और विदेश की परियोजनाओं पर काम करते हैं। मार्क्वार्ट के शेयरधारक एवं बोर्ड के सदस्य, डॉ. हेराल्ड मार्क्वार्ट ने जोर देकर कहा, “भारत में हमारी टीम पूरी दुनिया में हमारी कामयाबी की बुनियाद है। हमारे भारतीय विशेषज्ञों के इनोवेशन, उनकी काबिलियत और सच्ची लगन की कोई मिसाल नहीं है। इस नए प्लांट के शुभारंभ से देश और दुनिया भर में अपने ग्राहकों के लिए हमारा दीर्घकालिक समर्पण उजागर होता है।” ऊँचे पदों पर मौजूद अतिथियों की उपस्थिति में उद्घाटन समारोह उद्घाटन समारोह में कार बनाने वाली अग्रणी कंपनियों, साझेदार कंपनियों के प्रतिनिधियों और कारोबार एवं राजनीतिक जगत के ऊँचे पदों पर मौजूद प्रतिनिधियों ने भाग लिया। डॉ. हेराल्ड मार्क्वार्ट ने साइट पर मौजूद टीम की उपलब्धियों की तारीफ करते हुए कहा: “आज हम इस प्लांट के उद्घाटन में सक्षम हुए हैं, जो अनेक समर्पित लोगों की सच्ची लगन और उनके अटल इरादे का परिणाम है। मैं इस सफलता में योगदान देने वाले सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूँ।”

आकाश एजुकेशनल ने एस्पायरिंग इंजीनियर्स के लिए पेश किया आकाश इनविक्ट– अल्टीमेट जेईई प्रिपरेशन प्रोग्राम

भोपाल परीक्षा की तैयारी में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी, आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड (AESL) ने गर्व के साथ “आकाश इन्विक्टस” का शुभारंभ किया है। यह जेईई की तैयारी के लिए एक अनूठा और अग्रणी एडवांस्ड प्रोग्राम है, जिसे विशेष रूप से सर्वश्रेष्ठ और प्रतिभाशाली इंजीनियरिंग उम्मीदवारों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह उच्च-स्तरीय, व्यक्तिगत, AI आधारित और परिणाम-केंद्रित कार्यक्रम IIT या विदेशों के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश की तैयारी करने वाले छात्रों को सक्षम बनाने के लिए तैयार किया गया है। आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड के ऍमडी एंड सीईओ दीपक मेहरोत्रा ने प्रोग्राम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “आकाश इन्विक्टस” केवल एक कोचिंग प्रोग्राम नहीं है; यह उन छात्रों के लिए एक परिवर्तनकारी यात्रा है, जो शीर्ष आईआईटी रैंक हासिल करने का लक्ष्य रखते हैं। ये प्रोग्राम दशकों के एक्सपीरियंस, एडवांस्ड टीचिंगमेथड्स और पर्सनलाइज्ड, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन एजुकेशन को टॉप-लेवल फैकल्टी के साथ जोड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में, हमारे शिक्षकों ने लाखों छात्रों को शीर्ष आईआईटी में प्रवेश दिलाने में सफलता प्राप्त की है। अध्ययन सामग्री को पूरी तरह से नए तरीके से तैयार किया गया है, जिसमें संपूर्ण पाठ्यक्रम शामिल है और इसे उद्योग के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों ने विकसित किया है। हमें पूरा विश्वास है कि यह सर्वोत्तम है – यदि आप बेहतर सामग्री तैयार कर सकते हैं, तो हम आपको पुरस्कृत करेंगे और हमारी टीम में आपका स्वागत करेंगे।”“आकाश इन्विक्टस” लगभग 500 सबसे अच्छे जेईई शिक्षक एक साथ लाता है, जो एक लाख से ज्यादा छात्रों को आईआईटी में सफलता दिलाने में मदद कर चुके हैं। ये शिक्षक छात्रों को उत्कृष्ट मार्गदर्शन देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इसका पाठ्यक्रम अत्याधुनिक है और इसे उन छात्रों के लिए खास तौर पर डिज़ाइन किया गया है, जो टॉप आईआईटी रैंक हासिल करने केलिए मेहनत कर रहे हैं। इस प्रोग्राम में फिजिटल लर्निंग और विशेष अध्ययन सामग्री शामिल हैं, जो जेईई एडवांस की सटीक, एआई-सक्षम और अनुकूली तैयारी को सुनिश्चित करते हैं।इस प्रोग्राम में एक कम्प्रीहेंसिव रिविजन और टेस्टिंग मॉड्यूल शामिल है, जो जेईई (Advanced) परीक्षा के फाइनल स्टेज़ से पहले टार्गेटेड प्रेपरेशन पर फोकस करता है। स्टूडेंट्स को स्पेशल कोर्स, डाउट-सॉल्विंग सेशन्स और उनके परफॉर्मेंस को मैक्सिमाइज करने के लिए ध्यान से डिज़ाइन की गई टेस्ट सीरीज़ का बेनिफिट मिलेगा। “आकाश इन्विक्टस” में छोटे बैच होंगे, जिससे छात्रों को अधिक व्यक्तिगत ध्यान मिल सके और उनकी हर जरूरत को सही तरीके से पूरा किया जा सके। “कुछ महीने पहले शुरू हुए इस कार्यक्रम ने पहले ही 2500 से ज्यादा टॉप छात्रों को अपनी ओर आकर्षित किया है। तीन प्रमुख स्तंभों – नवाचारपूर्ण शिक्षण विधि और पाठ्यक्रम, एक्सपर्ट फैकल्टी और एडवांस्ड टूल्स – पर आधारित “आकाश इन्विक्टस”जेईई की तैयारी में नए मानक स्थापित करेगा। ये सभी नए फीचर्स आकाश की विश्वसनीयता, विश्वास और तकनीकी विशेषज्ञता द्वारा पूरी तरह से समर्थित हैं।” कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण अध्ययन संसाधनों में नवाचार पर इसका विशेष ध्यान है। छात्रों को क्यूआर कोड के साथ सम्मिलित अध्याय-वार अभ्यास वर्कशीट प्रदान की जाएंगी, जो डिटेल्ड सॉल्यूशंस और स्टेप-बाय-स्टेप मार्किंग स्कीम हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि छात्र न केवल जेईई की तैयारी में बल्कि स्कूल और बोर्ड परीक्षाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें। करें। एडिशनल फीचर्स में कम्पटीटिव ओलंपियाड के लिए वर्कशॉप्स, चैप्टर-वाइज एनालिसिस और सॉल्यूशन्स के साथ पिछले जेईई क्वेश्चन पेपर्स का एक बड़ा कलेक्शन और JEE चैलेंजर रिसोर्सेज शामिल हैं, जो स्टूडेंट्स को उनकी स्ट्रैटेजी सुधारने के लिए डीप इंफॉर्मेशन, प्रैक्टिस क्वेश्चन्स और एनालिसिस प्रोवाइड करता है। इसके अलावा, यह प्रोग्राम फिजिकल और डिजिटल रिसोर्सेज की ताकत को मिलाकर कंफ्लिकेटेड प्रॉब्लम्सको सिंपल बनाने के लिए फिजिकल स्टडी मटेरियल को इंटीग्रेट करता है, और फ्लेक्सिबल, डिमांड-आधारित लर्निंग के लिए एक्सपर्ट फैकल्टी द्वारा रिकॉर्डेड वीडियो लेक्चर्स प्रोवाइड करता है। “आकाश इन्विक्टस” में एंट्री बहुत ही सलेक्टिव है, स्टूडेंट्स को एक स्पेशल एंट्रेंस एग्जाम के जरिये चुना जाता है ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि केवल सबसे टैलेंटेड और कमिटेड माइंड्स ही प्रोग्राम में शामिल हों। 11वीं में ज्वाइन करने वाले स्टूडेंट्स के लिए दो साल का प्रोग्राम और 10वीं में ज्वाइन करने वाले स्टूडेंट्स के लिए तीन साल का प्रोग्राम डिज़ाइन किया गया है। “आकाश इन्विक्टस”  भारत के 25 शहरों में अवेलेबल होगा – दिल्ली NCR, चंडीगढ़, लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी, जयपुर, कोटा, पटनारांची, बोकारो, कोलकाता, दुर्गापुर, भुवनेश्वर, मुंबई, पुणे, नागपुर, अहमदाबाद, वडोदरा, इंदौर, भोपाल, हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरु। एक डेडिकेटेड रिसर्च टीम ने पार्टिसिपेंट्स के लिए एक ट्रांसफॉर्मेटिव एजुकेशनल एक्सपीरियंस सुनिश्चित करने के लिए सबसे हाई-स्टैंडर्ड और विकसित एग्जाम पैटर्न के साथ कोर्स तैयार किया है। अधिक जानकारी के लिए अभिभावक और छात्र 7303759494 पर संपर्क कर सकते हैं या support.invictus@aesl.in पर ईमेल कर सकते हैं।

ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला में लगी भीषण आग, फायर ब्रिगेड मौके पर, मची अफरा तरफी

ग्वालियर  मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला के नाम से विख्यात ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला में एक बड़ा हादसा हो गया। हादसा इतना गंभीर था कि यहां रहने वाली 10000 गोवंशों की जान पर बन आई। लाल टिपारा गौशाला में आग की तेज लपटें उठते देखा सभी का जी घबरा गया। वहीं, इस घटना ने यहां मौजूद प्रबंधन के भी कान खड़े कर दिए। प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला में आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होना नगर निगम की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। गौशाला संरक्षक संत ऋषभदेव आनंद महाराज ने बताया कि घटना के पहले यहां होली को लेकर एक बैठक चल रही ही थी कि यह हादसा हुआ। शॉर्ट सर्किट की वजह से पराली के तैयार किए गए सोफों में आग लग गई। गौशाला में सुरक्षा के इंतजाम इतने बेहतर नहीं थे। जिसकी वजह से आग बढ़ती गई और तकरीबन आधे घंटे तक यह क्षेत्र आग की चपेट में रहा। लगभग 25 मिनट के बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। गनीमत रही कोई हताहत नहीं हुआ गौशाला संरक्षक ने बताया कि अच्छी बात है की घटना दिन के समय हुआ। सभी लोग उस जगह पर मीटिंग कर रहे थे। इसलिए वहां कोई गौवंश नहीं थे। अच्छी बात की कोई हताहत नहीं हुआ। ना ही कोई गाय हताहत हुई है। ना किसी व्यक्ति विशेष घायल हुआ है। यह घटना अपने आप में सीख भी है कि शॉर्ट सर्किट के चलते ऐसी घटनाएं हो सकती है। इनका हम अवलोकन करें। हो सकता था बड़ा हादसा आपको बता दें कि गौशाला परिसर में ही बायो सीएनजी प्लांट भी लगा हुआ है। इसमें गोबर के माध्यम से सीएनजी बनाने का काम भी चालू हो चुका है। यदि यह आग फैलने हुए प्लांट तक पहुंच जाती तो यह हादसा बहुत बड़ा हो सकता था। इस मामले को लेकर समिति के प्रबंधक ऋषभदेव आनंद महाराज का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में गोवंश और बड़े परिसर को देखते हुए यहां पर सुसज्जित रूप से तैयार फायर ब्रिगेड उपलब्ध रहनी चाहिए। जिससे यदि इस प्रकार का कोई हादसा होता है तो उसे पर नियंत्रण पाया जा सके। नगर निगम की सुरक्षा पर उठे सवाल आपको बता दें कि प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला में इस समय लगभग 10000 से अधिक गोवंश मौजूद है। साथ ही उनकी सेवा के लिए यहां सैकड़ों लोग काम करते हैं। ऐसे में गौशाला के अंदर अग्निशमन यंत्रों और तकनीकी रूप से आग को काबू नहीं कर पाने के इंतजाम ना होना एक बड़ा विषय है। इस गौशाला का संचालन नगर निगम की किया जाता है। ऐसे में यह हादसा नगर निगम की लापरवाही को भी दर्शाता है।

दक्षिण कोरिया की वायुसेना के फाइटर जेट ने गलती से एक बस्ती पर ही बम गिरा दिए

 सियोल दक्षिण कोरिया की वायुसेना के फाइटर जेट ने गलती से एक बस्ती पर ही बम गिरा दिए। इसमें 8 नागरिक बुरी तरह जख्मी हो गए। गुरुवार को एक सैन्य अभ्यास के तहत वायुसेना के केएफ-16 फाइटर जेट से 8 बम गिराए गए। इसमें आम लोग जख्मी हो गए हैं। यह हादसा उत्तर कोरिया के निकट बसे शहर पोशिओन में हुआ। यह क्षेत्र दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल से 40 किलोमीटर उत्तर पूर्व में है। एक बयान में दक्षिण कोरिया की वायुसेना ने बताया कि केएफ-16 फाइटर जेट से गलती से फायरिंग रेंज के बाहर बम गिर गए। इसमें नागरिकों को नुकसान पहुंचा है। न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के अनुसार वायुसेना ने इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी के गठन का फैसला लिया है कि आखिर यह नुकसान क्यों हुआ। सेना के साथ मिलकर वायुसेना भी अभ्यास कर रही थी। इसमें हवा से ही दुश्मन के ठिकाने को निशाना बनाने का अभ्यास चल रहा था। एयर फोर्स ने इस गलती के लिए माफी मांगी है। एयरफोर्स ने कहा कि हम इस चूक पर खेद व्यक्त करते हैं। उम्मीद है कि इस घटना में घायल लोग जल्द ही स्वस्थ हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम जल्दी ही पीड़ितों के लिए कदम उठाएंगे। योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार इस हादसे में 6 आम नागरिकों के अलावा दो सैनिक भी जख्मी हुए हैं। राहत की बात यह रही कि सभी घायल खतरे से बाहर हैं। इस हादसे में 7 इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। पोशिओन इलाके के लोगों ने इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन किया है। इन लोगों का कहना है कि हम सालों से यहां पड़ोस में ट्रेनिंग ग्राउंड बनाने का विरोध करते रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इससे लोगों की दिनचर्या बाधित होती है। इसके अलावा नुकसान का खतरा भी हमेशा बना रहता है। देश के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि गुरुवार को अमेरिकी सेना के साथ मिलकर लाइव-फायर एक्सरसाइज चल रही है। इसके बाद अगले साल से सालाना अभ्यास भी होना है। सोमवार से ही अमेरिका और साउथ कोरिया के बीच एनुअल फ्रीडम एक्सरसाइज होनी है। यह संयुक्त अभ्यास 20 मार्च तक चलना है। ऐसे में उससे पहले यह घटना होना दुर्भाग्यपूर्ण है।

‘Mohammed Shami ने रोजा ना रखकर गुनाह किया, माफी मांगें’

 बरेली यूपी के बरेली के मौलाना इंडियन क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी से खफा हैं. उनका कहना है कि मोहम्मद शमी ने रमजान में रोजा नहीं रखा, वह ऑस्ट्रेलिया से मैच के दौरान ग्राउंड पर जूस/एनर्जी ड्रिंक पीते नजर आए थे. उन्होंने जानबूझकर रोजा नहीं रखा, जो की गुनाह है, शरीयत की नजर में वो मुजरिम हैं. दरअसल, दुबई में खेले गए मैच के दौरान मोहम्मद शमी का जूस पीते हुए वीडियो सामने आया था. जिसपर बरेली के मौलानाओं ने नाराजगी जताई. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बयान जारी करके कहा कि इस्लाम ने रोजे को फर्ज करार दिया है. अगर कोई शख्स जानबूझकर रोजा नही रखता है तो वह निहायती गुनेहगार है. मोहम्मद शमी ने रोजा नहीं रखा जबकि रोजा रखना उनका वाजिब फर्ज है. रोजा ना रखकर शमी ने बहुत बड़ा गुनाह किया है, शरीयत की नजर में वो मुजरिम हैं. तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने रमजान के माह में ऐसा करने पर उनके बचपन के कोच बदरुद्दीन स‍िद्दीकी का बयान भी सामने आया है. बदरुद्दीन ने कहा- इस मामले में मोहम्मद शम्मी की कोई गलती नहीं है, पूरा देश उनके साथ है. देश के आगे कुछ नहीं है, वह यही संदेश सभी मौलवियों को देना चाहते हैं. बदरुद्दीन स‍िद्दीकी ने कहा- पहले देश है, उसके आगे कुछ भी नहीं है. वह बाद में भी रोजा रख सकता है. हमारा इस्लाम इतना छोटा नहीं है कि कहीं सिकुड़ जाए एक जगह… इस्लाम में ये भी है कि यदि आप बीमार हैं तो बाद में रोजा रख सकते हैं. जो लोग यह सवाल उठा रहे हैं वे देश को सपोर्ट नहीं कर रहे हैं. वह (शमी) तो देश के लिए कुछ भी करने को तैयार है, रोजा भी छोड़ता है… वह सबुकछ देश के लिए कर रहा है. टीम को चैम्प‍ियंस ट्रॉफी का फाइनल खेलना है और इस तरह के बयान से खिलाड़ी का मनोबल टूटता है… और आप बेवकूफी वाले बातें कर रहे हैं. किसने आपको हक दिया इस तरह की बातें करने का. मोहम्मद शमी के भाई ने क्या कहा? वहीं इस पूरे मामले में मोहम्मद शमी के भाई हशीब शमी ने कहा- ख‍िलाड़ी होने के नाते जब मैच खेलना होता है, तो  गेंदबाजी में काफी मेहनत करनी होती हैं.  ऐसे में रमजान के माह में रोजा नहीं रख पाते हैं. अगर खेल नहीं हो रहा होता है तो वह सभी रोजे रखते हैं. अगर मैच के दौरान शमी ने रोजा नहीं रखा है, तो इसे वो आगे रख लेते हैं. बकौल मौलाना शहाबुद्दीन रजवी- मोहम्मद शमी को हरगिज ऐसा नहीं करना चाहिए. मैं उनको हिदायत और नसीहत देता हूं कि इस्लाम के जो नियम हैं उनपर वो अमल करें. क्रिकेट, खेलकूद भी करें, सारे काम अंजाम दें, मगर अल्लाह ने जो जिम्मेदारी बंदे को दी है, उनको भी निभाएं. शमी को ये सब समझना चाहिए. शमी अपने गुनाहों के लिए अल्लाह से माफी मांगें. आपको बता दें कि दुबई में खेले गए इंडिया बनाम ऑस्ट्रेलिया सेमीफइनल मैच के दौरान मोहम्मद शमी की एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें वह गर्मी के बीच एनर्जी ड्रिंक पीते नजर आ रहे हैं. जिसके बाद मौलाना लोगों ने इसे गलत करार दिया. उनका कहना है कि रमजान में रोजा न रखना गुनाह है. मौलानाओं ने शमी को नसीहत देना शुरू कर दिया है. इस कड़ी में बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का बयान सामने आया है.    

हर घंटे भस्मक में डाला जा रहा Union Carbide का 180 किलोग्राम कचरा

पीथमपुर इंदौर के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के एक निपटान संयंत्र में भोपाल (Bhopal) के यूनियन कार्बाइड (Union Carbide) कारखाने के जहरीले कचरे को जलाने के दूसरे दौर के परीक्षण की प्रक्रिया बुधवार देर रात शुरू हो गई. इस चरण में 10 टन कचरे की एक और खेप को नष्ट किया जाएगा. इस प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों ने यह जानकारी दी. यूनियन कार्बाइड के 10 टन जहरीले कचरे को जला कर नष्ट करने की दूसरा ट्रायल रन गुरुवार सुबह 10.30 से 11 बजे शुरू होगा. दूसरे ट्रायल रन में  180 किलो कचरा प्रति घंटे की दर से जलाया जाएगा. इस दौरान इंसीनेटर का तापमान 900 डिग्री सेल्सियल से ज्यादा रहेगा. इस मौके पर केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी मौजूद रहेंगे. ट्रायल रन का दूसरा दौर 8 मार्च को ख़त्म होगा. ट्रायल के बाद 55 से 56 घंटे तक कचरा जलाया जाएगा. गौरतलब है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर ये जहरीला कचरा इंदौर के पीथमपुरा स्थित प्लांट में नष्ट किया जा रहा है. 337 टन कचरे के निपटान की है योजना मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक इस कचरे के निपटान का परीक्षण सुरक्षा मानदंडों का पालन करते हुए तीन दौर में किया जाना है और अदालत के सामने तीनों परीक्षणों की रिपोर्ट 27 मार्च को पेश की जानी है. कचरे को ऐसे किया जाएगा नष्ट राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र में यूनियन कार्बाइड कारखाने के जहरीले कचरे को परीक्षण के तौर पर भस्म करने के दूसरे दौर की प्रक्रिया शुरू हो गई है. भस्मक में कचरा डाले जाने से पहले इसे करीब 12 घंटे तक खाली चलाकर तय तापमान तक पहुंचाया जाएगा. उन्होंने बताया कि दूसरे दौर के परीक्षण के दौरान भस्मक में हर घंटे 180 किलोग्राम कचरा डाला जाएगा और इस तरह कुल 10 टन कचरे को जलाया जाएगा. पहले दौर में सफलता पूर्वक नष्ट किए गए कचरे द्विवेदी ने बताया कि इस संयंत्र में यूनियन कार्बाइड कारखाने के 10 टन कचरे को परीक्षण के तौर पर भस्म करने का पहला दौर 28 फरवरी से शुरू होकर तीन मार्च को खत्म हुआ था. उन्होंने बताया कि पहले दौर का परीक्षण करीब 75 घंटे चला और इस दौरान संयंत्र के भस्मक में हर घंटे 135 किलोग्राम कचरा डाला गया था. खतरनाक स्तर से नीचे था उत्सर्जन कचरे में ये पदार्थ हैं शामिल प्रदेश सरकार के मुताबिक यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे में इस बंद पड़ी इकाई के परिसर की मिट्टी, रिएक्टर अवशेष, सेविन (कीटनाशक) अवशेष, नेफ्थाल अवशेष और ‘अर्द्ध प्रसंस्कृत’ अवशेष शामिल हैं. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि वैज्ञानिक प्रमाणों के मुताबिक इस कचरे में सेविन और नेफ्थाल रसायनों का प्रभाव अब  खत्म हो चुका है. बोर्ड के मुताबिक फिलहाल इस कचरे में मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का कोई अस्तित्व नहीं है और इसमें किसी तरह के रेडियोधर्मी कण भी नहीं हैं. भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 की रात बरपा था कहर भोपाल में दो और तीन दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ था.इससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए थे और हजारों लोग अपंग हो गए थे. इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में से एक माना जाता है. पीथमपुर में कचरे को जलाने का हो रहा था विरोध भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कारखाने का कचरा पीथमपुर लाए जाने के बाद इस औद्योगिक क्षेत्र में कई विरोध प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों ने इस कचरे के निपटान से इंसानी आबादी और आबो-हवा को नुकसान की आशंका जताई जिसे प्रदेश सरकार ने सिरे से खारिज किया है.

उत्तराखंड के हर्षिल में बोले पीएम मोदी- मुझे मां गंगा ने गोद ले लिया है…

हर्षिल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक दिन के दौरे पर उत्तराखंड पहुंचे, जहां उन्होंने मुखबा गांव में मां गंगा की पूजा-अर्चना की और हर्षिल में लोगों को संबोधित किया. अपने संबोधन में पीएम मोदी ने मां गंगा के प्रति गहरी आस्था जताते हुए कहा कि उनके आशीर्वाद से ही उन्हें दशकों तक उत्तराखंड की सेवा का मौका मिला और काशी तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हुआ.  उन्होंने कहा, “मां गंगा की कृपा से मैं आज उनके मायके मुखबा गांव आया हूं. यह उनका दुलार और स्नेह है कि मैं उनके इस बच्चे के रूप में यहां खड़ा हूं.  पीएम ने यह भी दोहराया कि काशी में उन्होंने कहा था, “मुझे मां गंगा ने बुलाया है. फिर साबित हुए सबसे बडे़ ब्रांड एंबेसडर प्रधानमंत्री एक बार फिर उत्तराखंड केे लिए सबसे बडे़ ब्रांड एंबेसडर साबित हुए हैं। केदारनाथ धाम का उदाहरण सामने हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रियता से श्रद्धालुओं के पहुंचने के नए रिकार्ड बने हैं। शीतकालीन यात्रा का हिस्सा बनने की इच्छा प्रधानमंत्री ने 28 जनवरी को राष्ट्रीय खेलों के शुभारंभ के मौके पर ही जाहिर कर दी थी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से भावनात्मक लगाव ही है, वह कार्यक्रम में बदलाव के बावजूद मुखवा-हर्षिल पहुंच गए। शीतकालीन यात्रा का सबसे बड़ा प्रमोशन उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शीतकालीन यात्रा का सबसे बड़ा प्रमोशन कर दिया है। इस यात्रा के प्रमोशन के लिए इससे पहले कभी इतने गंभीर प्रयास नहीं हुए। उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा के साथ प्रधानमंत्री के जुड़ाव के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जो प्रयास किए थे, उसका सार्थक परिणाम सामने आया है। बहुत कम समय में उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा और पर्यटन देश-दुनिया की नजरों में आ गए हैं।     मां गंगा की कृपा से ही मुझे दशकों तक उत्तराखंड की सेवा का सौभाग्य मिला है.     मां गंगा के आशीर्वाद से मैं काशी तक पहुंचा, अब सांसद के रूप में काशी की सेवा कर रहा हूं     मैंने काशी में कहा भी था कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है.     कुछ महीने पहले मुझे यह अनुभूति हुई कि जैसे में मां गंगा ने मुझे गोद ले लिया है.        यह मां गंगा का ही दुलार है, अपने इस बच्चे के प्रति उनका स्नेह है कि आज मैं उनके मायके मुखबा गांव आया हूं.     मां गंगा की कृपा से ही मुझे दशकों तक उत्तराखंड की सेवा का सौभाग्य मिला है.     मां गंगा के आशीर्वाद से मैं काशी तक पहुंचा, अब सांसद के रूप में काशी की सेवा कर रहा हूं     मैंने काशी में कहा भी था कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है.      कुछ महीने पहले मुझे यह अनुभूति हुई कि जैसे में मां गंगा ने मुझे गोद ले लिया है.        यह मां गंगा का ही दुलार है, अपने इस बच्चे के प्रति उनका स्नेह है कि आज मैं उनके मायके मुखबा गांव आया हूं.     जब मैं बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए बाबा के चरणों में गया था, तो बाबा के दर्शन के बाद मेरे मुंह से कुछ भाव प्रकट हुए थे, और मैं बोल पड़ा था कि यह दशक उत्तराखंड का दशक होगा. वे शब्द मेरे थे, भाव मेरे थे, लेकिन उनके पीछे सामर्थ्य देने की शक्ति स्वयं बाबा केदारनाथ ने दी थी. आखिरी गांव नहीं प्रथम गांव: पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि 1962 में जब चीन ने भारत पर हमला किया तो जादूंग गांव को खाली करवा दिया गया था.  तब से यह गांव खाली थी. हमने इन गांवों को फिर से बसाने और टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने का अभियान चलाया है. पहले सीमावर्ती गांवों को आखिरी गांव कहा जाता था. हमने यह सोच बदल दी. हमने कहा यह हमारे आखिरी गांव नहीं है, अब यह हमारे प्रथम गांव हैं. हमने वाइब्रेंट विलेज योजना शुरू की है. हर साल 50 लाख यात्री पहुंच रहे हैं उत्तराखंड पीएम मोदी ने कहा कि 2014 से पहले हर साल औसतन 18 लाख यात्री आते थे अब हर साल 50 लाख यात्री आते थे. 50 नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन को विकसित किया जाएगा. उत्तराखंड के बॉर्डर वाले इलाकों को भी पर्यटन का विशेष लाभ देना है. उत्तराखंड में कोई भी सीजन… ऑफ सीजन ना हो: पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि अभी कल ही केंद्रीय कैबिनेट ने केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट और हेमकुंड रोपवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है.  केदारनाथ रोपवे बनने के बाद जो यात्रा 8 से 9 घंटे में पूरी होती है, अब उसे लगभग 30 मिनट में पूरा कर लिया जाएगा. इससे बुजुर्गों, बच्चों के लिए केदारनाथ यात्रा और सुगम हो जाएगी. उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने के लिए हमारी डबल इंजन सरकार मिलकर काम कर रही है. चारधाम All Weather Road, आधुनिक एक्सप्रेस वे, राज्य में रेलवे, विमान और हेलीकॉप्टर सेवाओं का विस्तार पिछले 10 वर्षों में तेजी से हुआ है.

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