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राज्य में मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड बना महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल

भोपाल महिलाओं के जीवन यापन के लिए पर्यटन क्षेत्र रोजगार का मुख्य साधन बनकर उभर रहा है। ग्रामीण पर्यटन से लेकर होटल प्रबंधन और हस्तशिल्प कला तक, मध्य प्रदेश की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का उपयोग कर रोजगार भी पा रही है एवं पर्यटन बढ़ाने के महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा रही है। ग्रामीण होमस्टे की सफलता की कहानी : मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा संचालित ग्रामीण होम स्टे योजना महिलाओ के लिए स्वरोजगार के नये-नये अवसर प्रदान कर रहा है। होमस्टे में ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित मिट्टी के होमस्टे और उनकी खूबसूरत हस्तकला पेंटिंग को पर्यटकों के द्वारा लगातार सरहा जा रहा है एवं होमस्टे ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के मुख्य कारण भी बन कर उभर रहा है। छिंदवाडा के ‘ ‘सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम’  पर्यटन ग्राम सावरवानी में ग्रामीण महिलाएं, पर्यटकों को 1,350 किलो घी बेचकर करीब 11 लाख रुपये कमाकर आर्थिक रूप से सशक्त हुई।      प्रशिक्षित और कुशल महिलाएं: मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड महिलाओ को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में महिलाओं हेतु सुरक्षित पर्यटन परियोजना के तहत, 8,300 से अधिक महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण और 50 विभिन्न पर्यटक स्थल पर 36,000 से अधिक महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया गया है। इसी कड़ी में 5000 से अधिक महिलाओं को रोजगार के अवसर मुहैया कराये । जिसमे जिप्सी चालक और नाव चालक का प्रशिक्षण शामिल है। चंदेरी में हैंडलूम कैफे, अमरकंटक में महिला संचालित होटल ‘अमरलतास’ मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने राज्य का पहला महिला संचालित हैंडलूम कैफे शुरू किया है। अशोकनगर जिले के प्राणपुर गांव में स्थित यह कैफे स्थानीय महिला कारीगरों को सशक्त बनाने और क्षेत्र की समृद्ध कपड़ा विरासत को प्रदर्शित करने का एक अनूठा प्रयास है। कैफे में महिलाएं फ्रंट ऑफिस प्रबंधन, पाक कला, नकदी प्रबंधन और सुरक्षा प्रबंधन जैसे सभी परिचालन कार्य संभालती हैं। पचमढ़ी में राज्य का पहला महिला संचालित होटल ‘अमरलतास’ भी मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा शुरू किया है। यह पहल पर्यटन क्षेत्र में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करती है। GIS में भी निवेशकों के बीच दिखा महिला सशक्तिकरण का उदाहरण: मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा 24 से अधिक आर्ट व क्राफ्ट के स्थानिय सोवेनियर तैयार किये जा रहे है। उन्ही में से ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान, मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक विरासत और कला को प्रदर्शित करने वाले स्मृति चिन्ह, बैग के स्वरुप में वितरित किए गए। ये बैग मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा शुरू की गई सेफ टूरिज्म डेस्टिनेशन के तहत प्रशिक्षित महिलाओं द्वारा बनाए गए थे।

अडानी के खिलाफ UAE की कंपनी को झटका- धारावी परियोजना पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार

मुंबई सुप्रीम कोर्ट ने धारावी पुनर्विकास परियोजना (डीआरपी) के निर्माण कार्य पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अडानी ग्रुप के पक्ष में निर्णय दिया। यूएई स्थित सेकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉर्पोरेशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परियोजना का काम पहले ही शुरू हो चुका है और कुछ रेलवे क्वॉर्टर्स का ध्वस्तीकरण भी किया जा चुका है। अपनी याचिका में सेकलिंक ने महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी पहले की बोली रद्द कर दी गई थी और परियोजना अडानी प्रॉपर्टीज लिमिटेड को सौंप दी गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि परियोजना से संबंधित सभी भुगतान सिंगल एस्क्रो खाते से किए जाएं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार की पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला उचित था, क्योंकि रेलवे लाइन का भी विकास कर परियोजना में शामिल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और अडानी प्रॉपर्टीज को नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 मई की तारीख तय की है। सेक्लिंक टेक्नोलॉजीज ने दावा किया था कि उसने 2019 में धारावी पुनर्विकास के लिए 7,200 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी, जिसे महाराष्ट्र सरकार ने रद्द कर दिया और 2022 में नई निविदा जारी की, जो अडानी समूह को दी गई। सेक्लिंक ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह अपनी बोली को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए तैयार है। कोर्ट ने सेक्लिंक को अपनी संशोधित बोली का विवरण एक हलफनामे में जमा करने का निर्देश दिया। यह परियोजना मुंबई के धारावी क्षेत्र, जो एशिया का सबसे बड़ा स्लम माना जाता है, को आधुनिक शहरी केंद्र में बदलने की योजना है। अडानी समूह की रियल एस्टेट कंपनी, अडानी प्रॉपर्टीज, ने नवंबर 2022 में सबसे ऊंची बोली लगाकर इस परियोजना में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की थी, जबकि महाराष्ट्र सरकार के पास शेष 20 प्रतिशत हिस्सा है।

रवीना टंडन ने पेरिस फैशन वीक में बिखेरा जलवा

मुंबई,  बॉलीवुड की सदाबहार फैशनिस्टा रवीना टंडन ने पेरिस फैशन वीक में जलवा बिखेर दिया। रवीना ने अपनी शानदार स्टाइल और शान से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। अपने पहनावे के लिए मशहूर और एक सच्ची स्टाइल दिवा के रूप में मशहूर रवीना ने सोशल मीडिया पर कई शानदार तस्वीरें शेयर कीं, जिसमें उन्होंने इस प्रतिष्ठित इवेंट में अपनी शानदार मौजूदगी दर्ज कराई। लग्जरी ब्रांड डेलवॉक्स के साथ अपने सहयोग के तहत इस भव्य समारोह में शामिल हुईं रवीना ने ग्लैमर और परिष्कार का सहजता से मिश्रण किया। उनके पहनावे और आत्मविश्वास से भरे आभामंडल ने उन्हें एक सदाबहार फैशन आइकन के रूप में स्थापित किया। अपनी निरंतर विकसित होती शैली और सहज अनुग्रह के साथ, रवीना दुनिया भर के फैशन प्रेमियों को प्रेरित करती रहती हैं। चाहे ऑन-स्क्रीन हो या ऑफ-स्क्रीन, वह एक ट्रेंडसेटर बनी हुई हैं, यह साबित करते हुए कि फैशन की दुनिया में उनका आकर्षण और प्रभाव पहले की तरह ही मजबूत है। पेरिस फैशन वीक में उनकी उपस्थिति शानदार रही, जिसने बॉलीवुड की सबसे स्टाइलिश डीवाज़ में से एक के रूप में उनकी प्रतिष्ठा को और मजबूत किया।  

ईडब्ल्यूएस और बीपीएल वर्ग के बच्चों के सही तरीके से एडमिशन न होने को लेकर हाई कोर्ट ने शासन और शिक्षा विभाग से मांगा जवाब

 बिलासपुर  प्रदेश में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत ईडब्ल्यूएस और बीपीएल वर्ग के बच्चों के सही तरीके से एडमिशन न होने को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने हाल ही में लागू नए नियमों से आरटीई सीटों में कटौती, एडमिशन में अनियमितता और फर्जी प्रवेश को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बड़े निजी स्कूल आरटीई के तहत आने वाले आवेदनों को जानबूझकर खारिज कर रहे हैं। इसके बाद इन सीटों को डोनेशन और फीस लेकर भरा जा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रदेश के प्रमुख निजी स्कूलों में कुल सीटों का केवल तीन प्रतिशत ही आरटीई के तहत भरा जा रहा है। चिंता की बात यह है कि पिछले एक साल में आरटीई के तहत एडमिशन की संख्या में लगभग सवा लाख की गिरावट आई है। कोर्ट ने सरकार और शिक्षा विभाग से पिछले वर्षों में आरटीई की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर हुए एडमिशन और रिक्त सीटों की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही पूछा है कि यदि खाली सीटों को ओपन कैटेगरी में भरा गया, तो उसके लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई। इसके अलावा, अदालत ने सरकार को आरटीई एडमिशन की संपूर्ण संरचना की जानकारी देने का निर्देश दिया है। समाज सेवी ने दायर की जनहित याचिका भिलाई के वरिष्ठ समाज सेवी सीवी भगवंत राव ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है। अधिवक्ता देवर्षि सिंह के माध्यम से दायर इस याचिका में पूर्व में चार दर्जन निजी स्कूलों को पक्षकार बनाया गया था। पहले हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने इन स्कूलों को नोटिस जारी किया था। आरटीई के तहत शिक्षा के अधिकार की यह कानूनी लड़ाई 2012 से जारी है। 2016 में हाई कोर्ट ने विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए थे। मगर, निजी स्कूलों ने इन्हें सही ढंग से लागू नहीं किया। इस लापरवाही और अनियमितता को देखते हुए फिर से याचिका दायर की गई है। हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार और शिक्षा विभाग से विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। बार काउंसिल चुनाव, हाई कोर्ट ने शेड्यूल पेश करने को कहा छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल के चुनाव को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) और स्टेट बार काउंसिल (एसबीसी) को निर्देश दिया है कि वे प्रस्तावित चुनाव कार्यक्रम तैयार कर अदालत में पेश करें। इस मामले में अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी। इससे पहले हाई कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने पिछले छह वर्षों से स्टेट बार काउंसिल के चुनाव न होने पर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने 18 फरवरी 2025 को पारित अपने आदेश के पालन की स्थिति के बारे में पूछा। साथ ही, बीसीआई की ओर से शपथपत्र दाखिल न किए जाने पर भी असंतोष व्यक्त किया। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने पूर्व में दिए गए आदेश के अनुपालन पर चर्चा की। बीसीआई के अधिवक्ता ने जानकारी दी कि सचिव द्वारा शपथपत्र भेज दिया गया है, लेकिन वह हाई कोर्ट को प्राप्त नहीं हुआ। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। गौरतलब है कि 18 फरवरी की सुनवाई में हाई कोर्ट ने बीसीआई और एसबीसी को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे कि चुनाव कार्यक्रम बीसीआई नियमों और अधिसूचनाओं के अनुसार तैयार किया जाए, ताकि चुनाव में किसी प्रकार की देरी न हो।

IRGMA द्वारा बड़े पैमाने पर आयात घोटाले के पर्दाफाश के बाद, भारत ने प्रतिबंधित मेडिकल ग्लव्स के अवैध आयात पर कार्रवाई की तैयारी की

नई दिल्ली, देश के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन, फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने भारत के हेल्थ-केयर इकोसिस्टम और घरेलू विनिर्माण उद्योग के हितों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए विश्व व्यापार संगठन (WTO) को मेडिकल एवं सर्जिकल ग्लव्स (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 2024 (QCO) प्रस्तुत किया है। QCO के लागू होने के बाद सभी प्रकार के मेडिकल एवं सर्जिकल ग्लव्स के लिए BIS प्रमाणन अनिवार्य हो जाएगा। इस तरह मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम एवं चीन से गैर-कानूनी तरीके से आयात किए जाने वाले घटिया ग्लव्स से भरे बाजार में गुणवत्ता आश्वासन और विनियामक निरीक्षण आसान हो जाएगा, जिसकी बहुत जरूरत है। यह घोषणा ऐसे महत्वपूर्ण समय पर की गई है, जब इंडियन रबर ग्लव्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IRGMA) ने ग्लव्स के आयात में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। गौरतलब है कि अनैतिक तरीके से काम करने वाले आयातक QCO के लागू होने से पहले ही घटिया गुणवत्ता वाले नॉन-मेडिकल ग्लव्स की जमाखोरी कर रहे हैं, उन्हें मेडिकल ग्लव्स के रूप में दोबारा पैक कर रहे हैं, तथा अस्पतालों और क्लीनिकों तक पहुँचा रहे हैं। मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाली ऐसी गतिविधियाँ बेहद खतरनाक हैं, जो भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को कमजोर करने के साथ-साथ घरेलू उद्योग को अस्थिर बना रही है। QCO से पहले जमाखोरी और ट्रेड डंपिंग के लिए चीन की चालबाज़ी •    आयात से भरपूर लाभ उठाने की होड़: आयातक QCO के लागू होने की संभावना को देखते हुए बड़ी मात्रा में नॉन-मेडिकल ग्लव्स की जमाखोरी कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि, उन्होंने BIS प्रमाणन के सख्त नियम के अनिवार्य होने के बाद ऐसे घटिया ग्लव्स पर गलत लेबल लगाकर उन्हें मेडिकल ग्लव्स के रूप में दोबारा पैक करने की योजना बनाई है। •    मलेशिया और थाईलैंड के रास्ते डंपिंग: अमेरिकी टैरिफ के कारण चीन से ग्लव्स के निर्यात पर प्रतिबंध लग गया है, इसलिए चीनी निर्माता अपने अतिरिक्त स्टॉक को मलेशिया एवं थाईलैंड के रास्ते भेज रहे हैं। इन ग्लव्स को यहाँ फिर से पैक किया जाता है और कृत्रिम रूप से कम कीमतों पर भारत भेजा जाता है। इस रास्ते से आने वाले शिपमेंट विनियामक जाँच से बच निकलते हैं, जिससे घटिया गुणवत्ता वाले ग्लव्स भारत के हेल्थ-केयर सप्लाई चेन में प्रवेश कर जाते हैं। •    मरीजों और स्वास्थ्य-कर्मियों के लिए गंभीर खतरा: इस तरह के घटिया ग्लव्स आवश्यक AQL (स्वीकार्य गुणवत्ता स्तर) सुरक्षा परीक्षणों में विफल हो जाते हैं, जिससे संक्रमण तथा संपर्क से दूषित होने का जोखिम बढ़ जाता है और अस्पतालों में स्वच्छता के साथ खिलवाड़ होता है। •    बाज़ार में अनुचित तरीके से हेर-फेर: भारतीय निर्माता BIS और QCO के सख्त मानकों का पालन करते हैं, जबकि दूसरी ओर अवैध तरीके से आयात किए गए ऐसे ग्लव्स को कृत्रिम रूप से कम कीमतों पर बेचा जा रहा है। इस वजह से घरेलू निर्माता बाज़ार में मुकाबले से बाहर हो रहे हैं और मेडिकल मैन्युफैक्चरिंग में भारत की आत्मनिर्भरता खतरे में पड़ गई है। QCO: भारत के हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाला आदेश अनुमानों के अनुसार, ग्लव्स के लिए QCO से सालाना ₹600-700 करोड़ मूल्य के ग्लव्स के आयात को विनियमित किया जाएगा। साथ ही इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि, भारत में चिकित्सा उपयोग के लिए केवल BIS-प्रमाणित ग्लव्स — चाहे वे आयातित हों या घरेलू रूप से निर्मित हों— ही बेचे जा सकें। यह आदेश डिस्पोजेबल सर्जिकल ग्लव्स, चिकित्सा जाँच में एक बार उपयोग में आने वाले ग्लव्स और पोस्ट-मॉर्टम रबर ग्लव्स पर लागू होगा, जिससे घटिया ग्लव्स के थोक आयात पर रोक लगेगी और अस्पताल में केवल ISI मार्क वाले ग्लव्स का उपयोग सुनिश्चित होगा। नियंत्रण के लिए इस प्रकार का कदम उठाना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि वर्तमान में आयात किए जाने वाले ग्लव्स में से 70% से ज़्यादा BIS के मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। CDSCO की ओर से जारी की गई कई अधिसूचनाओं और विनियामक चेतावनियों के बावजूद, अमेरिका और दूसरे विकसित देशों द्वारा अस्वीकार किए गए ग्लव्स अभी भी गुणवत्ता जाँच को दरकिनार करके भारत में आ रहे हैं। QCO को लागू किए जाने के बारे में अपनी राय जाहिर करते हुए, कोंडा अनिंदिथ रेड्डी, मैनेजिंग डायरेक्टर, एनलिवा-वाडी सर्जिकल्स, ने कहा: “गुणवत्ता नियंत्रण का यह आदेश भारत के स्वास्थ्य-सेवा कर्मियों और मरीजों की सुरक्षा के लिए काफी मायने रखता है। घटिया ग्लव्स के उपयोग से परस्पर संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है, जिससे जान को खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को आगे बढ़कर BIS-प्रमाणित ग्लव्स की मांग करनी चाहिए, साथ ही नियामक एजेंसियों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि करना चाहिए कि अवैध आयात पर तुरंत रोक लगाई जाए।” IRGMA द्वारा सरकार की ओर से तुरंत कार्रवाई की मांग हालाँकि QCO इस दिशा में उठाया गया एक मजबूत कदम है, इसके बावजूद IRGMA ने अलग-अलग मंत्रालयों से यह अनुरोध किया है कि इन नए नियमों के प्रभावी होने से पहले ग्लव्स की जमाखोरी और अवैध आयात से जुड़ी गतिविधियों की रोकथाम के लिए तुरंत कदम उठाए जाएँ। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) और CDSCO •    “मेडिकल ग्लव्स” की परिभाषा के दायरे को बढ़ाया जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उपयोग किए जाने वाले हर तरह के ग्लव्स को सख्त प्रमाणन संबंधी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत लाया जा सके। •    घटिया ग्लव्स को दोबारा पैक करके स्वास्थ्य सेवा केंद्रों को आपूर्ति किए जाने की रोकथाम के लिए अस्पतालों में अनिवार्य ऑडिट का नियम लागू किया जाए। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (DGFT एवं सीमा शुल्क) •    BIS प्रमाणीकरण से बचने के लिए ग्लव्स को गलत तरीके से “नॉन-मेडिकल” के रूप में वर्गीकृत करने पर पाबंदी लगाई जाए। •    इनके आवागमन पर शुरू से अंत तक नज़र रखने की जाँच व्यवस्था को लागू किया जाए, ताकि नॉन-मेडिकल श्रेणियों के तहत आयात किए गए ग्लव्स को दोबारा पैक करके अस्पतालों को बेचना संभव न हो सके। •    चीनी ग्लव्स को मलेशिया और थाईलैंड के रास्ते दोबारा भेजे जाने से रोकने के लिए मूल देश का सत्यापन लागू किया जाए। उपभोक्ता मामले मंत्रालय एवं BIS •    सभी डिस्पोजेबल ग्लव्स पर BIS प्रमाणन की आवश्यकताओं को लागू किया जाए, ताकि चिकित्सा उपयोग के लिए बिना प्रमाणन वाले ग्लव्स का आयात, बिक्री या उनकी दोबारा … Read more

पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनी सब इंस्पेक्टर की ट्रेनिंग के दौरान मौत

 रायपुर  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। चंद्रखुरी पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में ट्रेनी सब इंस्पेक्टर राजेश कोसरिया की ट्रेनिंग के दौरान मौत हो गई। जानकारी के अनुसार राजेश कोसरिया दौड़ रहे थे, इसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल ले जाते वक्त उन्होंने दम तोड़ दिया। जानकारी के मुताबिक ट्रेनी सब इंस्पेक्टर राजेश कोसरिया की ट्रेनिंग सिर्फ एक सप्ताह पहले ही शुरू हुई थी। वह सात साल के लंबे इंतजार के बाद सब इंस्पेक्टर भर्ती के लिए चयनित हुए थे। आज सुबह जैसे ही अभ्यर्थियों को दौड़ने के लिए कहा गया, कुछ दूर दौड़ने के बाद राजेश की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। राजेश कोसरिया का नाम 10 मार्च को सीएम साय द्वारा सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की सूची में शामिल था। इस घटना के बाद मृतक के परिवार वालों ने जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि इस दुखद घटना की सही वजह का पता लगाया जाए।  

मैंने 46 हजार औरतों की मदद की और… बेटे ने पत्नी पर आरोप लगाकर दी जान, मां का पोस्ट रुला देगा

मुंबई बेंगलुरु के अतुल सुभाष की तरह पत्नी पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर जान देने वाले निशांत त्रिपाठी की मां ने इमोशनल पोस्ट लिखा है। मुंबई के विले पारले स्थित सहारा होटल में जाकर निशांत त्रिपाठी ने जान दे दी थी। ऐसा करने से पहले निशांत ने होटल के कमरे के गेट पर ‘Do Not Disturb’ लिख दिया था ताकि कोई आ न सके। कमरे की बुकिंग का समय समाप्त होने पर होटल स्टाफ ने खटखटाया तो कोई जवाब नहीं मिला। मास्टर की से भी जब लॉक नहीं खुल सका तो फिर दरवाजा तोड़ा गया और अंदर निशांत का शव बरामद हुआ। निशांत ने मौत से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा था, जिसमें पत्नी और उसकी मां को अपनी मौत की वजह बताया था। निशांत त्रिपाठी पेशे से एक अभिनेता थे। अब निशांत की मां नीलम चतुर्वेदी ने एक लंबा और इमोशनल पोस्ट लिखा है, जो सोशल मीडिया पर वायरल है। उन्होंने फेसबुक पर लिखे लंबे नोट में कहा कि मैंने सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर 46 हजार महिलाओं की मदद की। उनमें से 37 हजार महिलाओं को न्याय दिलाने में सफलता पाई। मैंने हजारों महिलाओं को ट्रेनिंग दी ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। लेकिन आज मैं खुद टूट चुकी हैं और एक जिंदा लाश जैसी मेरी स्थिति है। नीलम ने लिखा कि मैंने सोचा था कि बेटा मेरा अंतिम संस्कार करेगा, लेकिन क्या हुआ। मेरी बेटी प्राची को अपने बड़े भाई का अंतिम संस्कार करना पड़ा। उन्होंने लिखा कि मैंने जिंदगी में बहुत संघर्ष किए, लेकिन आज टूट गई हूं। ‘आप मुझे जिंदा देख रहे हैं, पर मैं तो मर चुकी हूं’ नीलम चतुर्वेदी लिखती हैं, ‘आप मुझे एक ज़िंदा इंसान के रूप में देख रहे हैं, लेकिन सच यह है कि मैं मर चुकी हूं। आज मैं खुद को एक जिंदा लाश की तरह महसूस कर रही हूं। मैंने 16 साल की उम्र से लेकर 45 सालों तक पूरी शिद्दत और ईमानदारी के साथ महिलाओं के अधिकारों, समाज में लैंगिक समानता लाने और भेदभाव मिटाने के लिए अपना हर एक लम्हा समर्पित किया। 18 साल की उम्र में पहली बार आंदोलन के दौरान गिरफ्तार हुई और फिर यह सिलसिला जारी रहा—अनगिनत संघर्ष, आंदोलन, न्याय के लिए लड़ाई। मैंने सखी केंद्र और अन्य माध्यमों से 46,000 से अधिक पीड़ित महिलाओं की समस्याओं को दूर करने में उनकी मदद की, 37,000 से अधिक महिलाओं को न्याय दिलाया, और हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें रोजगार और प्रशिक्षण दिलवाया। मैंने कभी कोई लालच नहीं किया। ना बैंक बैलेंस बनाया, ना संपत्ति जुटाई।’ भावुक मां ने लिखा- उसे मेरा अंतिम संस्कार करना था और… इसके आगे वह लिखती हैं, ‘मेरी संपत्ति बस लोगों का प्यार और सम्मान था, जो मुझे देश-विदेश तक मिला। अपने दो बच्चों को अकेले पाला, और इस पर हमेशा गर्व किया। लेकिन मैंने कभी शिकायत नहीं की, बल्कि ईश्वर का भी शुक्रिया अदा करती रही। मैंने कभी भी प्रभु से शिकायत नहीं की मेरा बेटा, निशांत – मेरा सब कुछ मेरे दोनों बच्चे मुझे बहुत प्यार करते थे, लेकिन मेरा बेटा निशांत मेरा दोस्त, हमसफ़र और हमदर्द था। वह मेरी ताकत था, जिसने मुझे जीने और काम करने की ऊर्जा दी। मेरी जिंदगी अब खत्म हो गई है। मेरा बेटा, निशांत मुझे छोड़ कर चला गया। मैं अब एक जिंदा लाश बन गई हूं। उसे मेरा मृत्यु का संस्कार करना था, लेकिन मैंने आज अपने बेटे का दाह संस्कार “ECO-MOKSHA” मुंबई में कर दिया है। मेरी बेटी प्राची ने अपने बड़े भाई का अंतिम संस्कार किया। मुझे व मेरी बेटी प्राची को हिम्मत दो ताकि मैं इतना बड़ा वज्रपात सहन कर सकूं।’

उद्योग मंत्री के प्रयासों से चार अंडरब्रिज, बरसाती नालों, पुल पुलियों, गौरव पथ का होगा निर्माण

रायपुर, कोरबा शहर समेत जिले को विकसित बनाने के क्रम में वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री  लखन लाल देवांगन के सशक्त प्रयासों से 150 से अधिक सड़क परियोजना, सिंचाई परियोजना, गौरव पथ, अंडरब्रिज, बायपास सड़क, नालों के साथ–साथ कई महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए बजट में स्वीकृति मिली है। प्रदेश की विष्णुदेव की सरकार में बीते सवा साल में कोरबा शहर के साथ–साथ जिले के सभी उपनगरीय व अन्य ग्रामीण इलाकों में विकास कार्य को रफ़्तार मिली है। 3 मार्च को वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा जारी किए गए राज्य के बजट में कोरबा जिले  में मुख्य तौर पर गोपालपुर से कटघोरा फोरलेन सड़क, कटघोरा से दीपका फोरलेन सड़क, गोपालपुर से कटघोरा तक मार्ग मजबूती करण कार्य, चोटिया से चिरमिरी तक फोरलेन सड़क, ध्यानचंद चौक कोरबा से बजरंग चौक तक 2 लेन. सड़क निर्माण, बजरंग चौक से परसाभाठा चौक बालको रिंग रोड, कोरबा 4 लेन निर्माण कार्य, रेल्वे स्टेशन कोरबा से गौमाता चौक तक बायपास मार्ग का निर्माण, एसपी ऑफिस से रजगामार बीटी रोड निर्माण कार्य, नॉनबिर्रा रामपुर बेहरचवा 27 किलोमीटर का उन्नयन के कार्य की स्वीकृति मिली है। इन स्थानों पर अंडरब्रिज की स्वीकृति     बजट में जिले के कई मार्गो पर रेल्वे क्रासिंग में अंडर ब्रिज के निर्माण की स्वीकृति मिली है। गौरतलब है की शहर के संजय नगर रेल्वे क्रासिंग पर अंडरब्रिज का निर्माण अब प्रारम्भ हो चुका है। कोरबा–गेवरा रेल लाइन के बालपुर रेल्वे क्रासिंग पर आरयूबी का निर्माण, कोरबा–गेवरा रेल लाइन के मड़वारानी रेल्वे क्रासिंग पर आरयूबी का निर्माण, कोरबा–गेवरा रेल लाइन के पताडी पर आरयूबी के निर्माण की स्वीकृति मिली है। शहर के इन बड़े नालों की मिली स्वीकृति    शहर के चार प्रमुख नालों के निर्माण के लिए नगरीय निकाय अधोसंरचना विकास के तहत स्वीकृति मिली है। इसमें पोड़ीबहार चर्च से हनुमान मंदिर तक आरसीसी नाला 2 करोड़, वार्ड क्रमांक 30 दादर रोड कलवर्ट से मानिकपुर मुक्तिधाम तक कलवर्ट व नाला निर्माण 2 करोड़, मेनन शॉप से जिला अस्पताल के सामने आरसीसी नाला 2 करोड़, दर्री जोन पीएमवाय साइट से लाटा तालाब आरसीसी नाला निर्माण 2 करोड़ की स्वीकृति मिली है। इन पुल–पुलियों के निर्माण की मिली स्वीकृति कोरबा–रानीरोड–सर्वमंगला मंदिर के मध्य हसदेव नदी पर रपटा कम लो लेवल पुल व पहुंच मार्ग का निर्माण, बालको उरगा रिंगरोड पर ढेगूरनाला पर उच्च स्तरीय पुल व पहुंच मार्ग का निर्माण, बेलाकछर से रोगबहरी मार्ग पर सारबहरा नाला पर उच्चस्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग, बड़गाँव नवापारा मार्ग पर चोरनई नदी में उच्च स्तरीय पुल समेत कुल 17 पुल निर्माण कार्य की स्वीकृति मिली है। कोरबा शहर में बनेगा 2.8 किलोमीटर लम्बा गौरव पथ का निर्माण     कोरबा शहर में 2.8 किलोमीटर लम्बा गौरव पथ के निर्माण की स्वीकृति मिली है। सीएसईबी चौक से जैन चौक–तानसेन चौक से कोसाबाड़ी चौक तक गौरव पथ का निर्माण होगा। वीआईपी मार्ग पर वाहनों के दबाव को देखते हुए इस मार्ग का कायाकल्प किया जायगा। बांकीमोंगरा के जल आवर्धन के लिए 8.20 करोड़ की मिली स्वीकृति    कोरबा जिला के दूसरे सबसे बड़े नगरीय निकाय बांकीमोंगरा नगर पालिका में पेयजल की समस्या लंबे समय से है। बांकीमोंगरा के जल आवर्धन के लिए 8.20 करोड़ की स्वीकृति मिली है। इन शासकीय दफ़्तरो का होगा कायाकल्प   रजगामार चौकी, दर्री सीएसपी कार्यलय का उन्नयन, राजपत्रित ट्रांजिट ओर अराजपत्रित ट्रांजिट हॉस्टल का निर्माण, कोरबा तहसील को मॉडल तहसील भवन का निर्माण होगा। उद्योग मंत्री का प्रयास रंग लाया, शहर से लेकर गांव की रफ़्तार होगी तेज     उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन द्वारा बजट में स्वीकृति के लिए सभी विभाग नगर निगम, पीडब्लूडी, सेतु निगम, जल संसाधन विभाग के अलग अलग विकास कार्यों का प्रस्ताव राज्य शासन को दिया गया था। मंत्री श्री देवांगन के प्रयासों से कार्यों को बजट में स्वीकृति मिली है। मंत्री श्री देवांगन के प्रयासों से कोरबा शहर में बीते एक साल में 400 करोड़ के कार्यों की स्वीकृति मिली थी, जिसके बहुत से कार्य पूर्ण हो चुके है, कुछ निर्माणाधीन है, कुछ कार्य टेंडर प्रक्रिया में है।

अमिताभ बच्चन ने फिल्म बी हैप्पी के लिये अभिषेक बच्चन की तारीफ की

मुंबई, बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने बेटे अभिषेक बच्चन की आने वाली फिल्म बी हैप्पी के लिये तारीफ की। प्राइम वीडियो की ओरिजिनल फिल्म बी हैप्पी का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है, जिसने दर्शकों के दिल को छू लिया है। इस फिल्म की कहानी शिव (अभिषेक बच्चन) की है, जो एक सिंगल फादर है और अपनी बेटी धारा (इनायत वर्मा) के साथ ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव से जूझ रहा है। अब इस फिल्म की तारीफ करने वालो में अमिताभ बच्चन का नाम भी जुड़ गया है। उन्होंने अभिषेक की परफॉर्मेंस पर गर्व जताते हुए अपनी खुशी जाहिर की है। अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया लिखा, अभिषेक, एक पिता का गर्व, कितनी आसानी से एक किरदार से दूसरे किरदार में बदल जाते हो। बधाई हो बधाई, स्नेह। एक दूसरी पोस्ट में, अमिताभ बच्चन ने फिल्म की कहानी और अभिषेक की परफॉर्मेंस की तारीफ करते हुए लिखा, बेहद खूबसूरत कहानी… और अभिषेक, तुमने जिस तरह एक फिल्म से दूसरी फिल्म तक अपने किरदार को परिभाषित किया है, वो कमाल है। ढेर सारा आशीर्वाद और प्यार। बी हैप्पी को रेमो डिसूजा एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले लिजेल रेमो डिसूजा ने प्रोड्यूस किया है और इसे रेमो डिसूजा ने निर्देशित किया है। यह दिल छू लेने वाली डांस ड्रामा फिल्म है, जिसमें अभिषेक बच्चन के साथ नोरा फतेही, नासर, जॉनी लीवर और हरलीन सेठी जैसे दमदार कलाकार नज़र आएंगे। बी हैप्पी भारत समेत 240 से ज्यादा देशों और टेरिटरीज में 14 मार्च को प्राइम वीडियो पर एक्सक्लूसिव रिलीज़ होने जा रही है। फिल्म तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ में भी डब होकर रिलीज होगी।  

SBI ने किया बड़ा कारनामा, बैंककर्मियों ने कैंटीन व्वॉय के साथ मिलकर 13 ‘मुर्दों’ के नाम से लोन पास कराकर निकाला पैसा

गोरखपुर गोरखपुर में जंगल कौड़िया स्थित एसबीआई की शाखा से 70.20 लाख रुपये का फर्जी तरीके से लोन कर गबन किया गया है। बैंककर्मियों ने कैंटीन व्वॉय के साथ मिलकर 13 ‘मुर्दों’ के नाम से लोन पास कराकर पैसा निकाल लिया। यह मुर्दे रिटायर्ड कर्मचारी थे जिनका बैंक में पेंशन खाता था और उनकी मौत हो चुकी थी। गबन के मामले में गुरुवार को लखनऊ से आए एसबीआई के सहायक महाप्रबंधक ने जंगल कौड़िया चौकी पर पहुंच कर अपनी जांच रिपोर्ट विवेचक को सौंप दी। अब इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस इस मामले में आगे की कार्रवाई करेगी। दरअसल, जंगल कौड़ियां स्थित भारतीय स्टेट बैंक से कूटरचित दस्तावेज का प्रयोग कर पेंशनर्स व मुर्दों के खातों के साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड के खातों से लोन स्वीकृत कर जालसाजी की गई है। पीपीगंज पुलिस ने इस मामले में बैंक प्रबंधक, कैशियर और कैंटीन व्वॉय के खिलाफ केस दर्ज किया था। जिसमें कैशियर अमरेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजवाया तो वहीं कैंटीन व्वॉय पंकज ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। जंगल कौड़िया शाखा के खाताधारक राजू ने तारामंडल स्तिथ भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय पर 4 जनवरी 2024 को शिकायत कर बताया था कि उनके खाते से फर्जी तरीके से 3 लाख रुपए बैंककर्मी ने कैंटीन व्वॉय पंकज मणि त्रिपाठी के खाते में ट्रांसफर कर रुपए को हड़प लिए हैं। जिसके बाद इस तरीके की शिकायतों की तादात अचानक बढ़ गई। क्षेत्रीय कार्यालय ने एक अधिकारी के नेतृत्व में टीम नियुक्त कर मामले की जांच कराई। जिसमे पाया गया कि बैंक के शाखा प्रबंधक कुमार भास्कर भूषण, अकाउंटेंट अमरेंद्र कुमार सिंह व कैंटीन व्वॉय पंकज मणि त्रिपाठी ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर पेंशन खाताधारकों, किसान क्रेडिट कार्ड खाताधारकों तथा अन्य प्रकार के खाताधारकों के खातों से रुपए की जालसाजी की है। पीपीगंज पुलिस ने तीनों आरोपियों पर केस दर्ज कर जांच में जुटी रही। उधर, बैंक की जांच के बाद प्रबंधक कुमार भास्कर भूषण व अकाउंटेंट अमरेंद्र को निलम्बित कर कर विभागीय जांच बैठाई गई। जांच के दौरान कैंटीन व्वॉय पंकज मणि त्रिपाठी मुख्य आरोपी पाया गया। करोड़पति बन गया कैंटीन ब्वाय: जंगल कौड़िया क्षेत्र के बलुवा गांव निवासी 20 वर्षीय पंकज मणि त्रिपाठी बैंक में कैंटीन ब्वॉय बन गया। पंकज की बैंक के अंदर काफी अच्छी पकड़ बन गई थी। इलाके के सेवानिवृत्ति लोगों को निशाना बना कर पंकज ने मिली भगत करते हुए मरे हुए व्यक्तियों का लोन करवाना शुरू किया। जालसाजी से वह करोड़पति बन गया। केसीसी के भी तीन फर्जी लोन स्वीकृत जांच अधिकारी सहायक महा प्रबंधक सुरेश कुमार ने गुरुवार को जंगल कौड़िया चौकी पर पहुंच कर 78 पेज की अपनी जांच रिपोर्ट चौकी इंचार्ज को सौंप दी। रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि 71 लाख 20 हजार गबन जांच में पाया गया। इसमें पेंशन लोन से संबंधित,/ पशु लोन के संबंधित लोगों का नाम सामने आया है। बैंक कर्मियों ने जिन लोगों को लोन स्वीकृत कर जालसाजी की है उनकी संख्या 18 है जबकि इसमें मृत पेंशन धारक की संख्य 13 है। जांच में सामने आया है कि केकेसी के तीन फर्जी लोन स्वीकृत किए गए हैं।

केंद्रीय मंत्री और सांसद ने बदल दिया सड़क का नाम, यह तुगलक लेन नहीं, स्वामी विवेकानंद मार्ग है

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर को सरकारी आवास दिल्ली के तुगलक लेन में मिला है, लेकिन उन्होंने घर पर लगी नेमप्लेट में स्वामी विवेकानंद मार्ग लिखवा लिया है। शुक्रवार को यह बदलाव किया गया, जिसमें उनके घर का पता तुगलक लेन नहीं बल्कि स्वामी विवेकानंद मार्ग बताया गया है। उनके अलावा भाजपा के एक अन्य सांसद दिनेश शर्मा ने भी ऐसा ही किया है। उन्होंने इसकी जानकारी गुरुवार को एक्स पर दी थी। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘आज नई दिल्ली स्थित नए आवास स्वामी विवेकानंद मार्ग (तुगलक लेन) में सपरिवार विधि विधानपूर्वक, पूजन-अर्चन कर गृह प्रवेश किया।’ इसके साथ ही उन्होंने तस्वीरें भी शेयर की हैं, जिसमें से एक में पते के तौर पर स्वामी विवेकानंद मार्ग लिखा दिखता है। यह फैसला भाजपा की दिल्ली में बनी नई सरकार की लाइन पर ही दिखता है। नई सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि नजफगढ़ का नाम बदलकर नाहरगढ़ कर दिया जाए। इसके अलावा मोहम्मदपुर गांव का नाम माधवपुरम किया जाए और मुस्तफाबाद का नाम बदलकर शिवपुरी कर दिया जाए। इस बीच लुटियन दिल्ली में भी केंद्रीय मंत्री और सांसद ने खुद ही अपने नेम प्लेट में नया नाम लिख दिया है। हालांकि तुगलक लेन नाम भी हटाया नहीं गया है। बताया कैसे बोर्ड पर लिखा गया स्वामी विवेकानंद मार्ग इस पर दिनेश शर्मा की सफाई भी आ गई है और उन्होंने नेम प्लेट पर विवेकानंद मार्ग लिखे जाने की अलग ही वजह बताई है। उन्होंने कहा, यह सामान्य प्रक्रिया है कि जब कोई किसी घर में जाता है तो नाम पट्टिका लगा दी जाती है। मैं वहां नहीं गया था, मैंने नहीं देखा था, जब मुझसे उससे संबंधित लोगों ने पूछा कि किस तरह की नाम पट्टिका होनी चाहिए तो मैंने कहा कि आसपास के हिसाब से होनी चाहिए। आस-पास के घरों पर विवेकानंद मार्ग लिखा था और नीचे तुगलक लेन लिखा था, दोनों एक साथ लिखे थे।’ सांसद बोले- आज भी नेमप्लेट पर तुगलक लेन लिखा है उन्होंने कहा कि नेमप्लेट पर आज भी तुगलक लेन लिखा है और सुविधा के लिए विवेकानंद मार्ग लिख दिया है। मैंने कर्मचारियों से पूछा तो उन्होंने कहा कि गूगल पर वह स्थान विवेकानंद रोड आता है, ऐसा इसलिए लिखा है ताकि लोगों को विवेकानंद रोड और तुगलक लेन में भ्रम न हो… मैं जानता हूं कि सांसद को सड़क का नाम बदलने का अधिकार नहीं है। ये राज्य सरकार और नगर निकाय का काम है, इसके लिए एक प्रक्रिया होती है… मुझे इसे बदलने का न अधिकार था, न है, न मैंने किया है। सामान्य प्रक्रिया में पेंटर ने वही नाम लिखा होगा जो आस-पास के घरों पर लिखा था, इसका मतलब यह नहीं है कि मैंने कोई स्थान(का नाम) बदला है…।

बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन ने श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में खरीदी 2 बीघा जमीन, बनाएंगे ट्रस्ट

मुंबई बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन न केवल फिल्मों में अपने शानदार अभिनय के लिए फेमस हैं, बल्कि वह अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के लिए भी जाने जाते हैं। कई बड़े सितारे अपनी संपत्ति और निवेश के कारण चर्चित रहते हैं, और अमिताभ बच्चन भी इस सूची में शामिल हैं। वह न केवल भारत के विभिन्न राज्यों में निवेश कर चुके हैं, बल्कि उन्होंने अब एक नया कदम उठाया है, जिससे उनका अयोध्या से गहरा संबंध जुड़ने जा रहा है। अयोध्या, जो प्रभु राम की जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध है, अब और भी खास बन गई है। अमिताभ बच्चन ने अयोध्या के तिहुरा माझा में स्थित 2 बीघा ज़मीन को अभिनंदन लोढ़ा ग्रुप से खरीदी है। यह ज़मीन लगभग 86 लाख रुपये की बताई जा रही है। यह खरीददारी उनकी सामाजिक गतिविधियों का हिस्सा है, क्योंकि वे इस ज़मीन का उपयोग अपने पिता, महान कवि हरिवंश राय बच्चन की स्मृति में बनाए जा रहे ट्रस्ट के लिए करेंगे। ट्रस्ट के निर्माण की योजना अमिताभ बच्चन ने इस ज़मीन को अपने पिता की स्मृति में समर्पित करने का निर्णय लिया है। वे इस ज़मीन का इस्तेमाल एक ट्रस्ट के निर्माण के लिए करेंगे, जो उनके पिता के योगदान और उनके साहित्यिक कार्यों को सहेजेगा। हालांकि, ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट अब तक लॉन्च नहीं की गई है, जिससे इसके बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है। अमिताभ के पिता हरिवंश राय बच्चन साहित्य और कविता के क्षेत्र में एक महान व्यक्तित्व थे। उनकी कविताएं और लेखन आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं और उनके योगदान को श्रद्धांजलि देने के लिए यह ट्रस्ट स्थापित किया जा रहा है।

महिला दिवस पर नारी शक्ति का वंदन: वृहद महतारी वंदन सम्मेलन में जुटेगी विराट नारी शक्ति

रायपुर, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च को रायपुर स्थित साइंस कॉलेज मैदान में वृहद महतारी वंदन सम्मेलन और राज्य स्तरीय महिला मड़ई का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि होंगे तथा विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े सहित सभी कैबिनेट मंत्री, सांसद, विधायक, रायपुर महापौर एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। महतारी वंदन योजना की 13वीं किश्त का होगा वितरण छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना के सफलतापूर्वक एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को योजना की 13वीं किश्त का भुगतान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 10 मार्च 2024 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की वर्चुअल उपस्थिति में महतारी वंदन योजना की प्रथम किश्त विवाहित महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की गई थी। अब तक 12 किश्तों में 7,838 करोड़ रुपये की राशि प्रदेश की माताओं-बहनों को वितरित की जा चुकी है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए ‘सम्मान सुविधा प्रणाली’ का शुभारंभ मुख्यमंत्री श्री साय इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय भुगतान के लिए “सम्मान सुविधा प्रणाली” का शुभारंभ करेंगे। यह पहली बार होगा जब मुख्यमंत्री स्वयं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को डिजिटल और केंद्रीकृत प्रणाली के माध्यम से सीधे मानदेय का भुगतान करेंगे। इस प्रणाली में फेशियल रिकग्निशन सिस्टम के माध्यम से कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की नियमित उपस्थिति दर्ज होगी, जिसके आधार पर उन्हें सीधे राज्य सरकार से मानदेय का भुगतान किया जाएगा। यह प्रणाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय भुगतान में सटीकता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करेगी। छत्तीसगढ़ बनेगा ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ की मानक संचालन प्रक्रिया निर्धारित करने वाला पहला राज्य मुख्यमंत्री श्री साय इस अवसर पर उत्पीड़ित एवं संकटग्रस्त महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल सुविधा की शुरुआत करेंगे, जिसके तहत वे ऑनलाइन एवं मोबाइल एप के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकेंगी। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री श्री साय बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के पोर्टल, इंफ्रा पोर्टल तथा स्थापना पोर्टल का भी शुभारंभ करेंगे। साथ ही, बिलासपुर स्थित क्षेत्रीय महिला प्रशिक्षण संस्थान के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण भी किया जाएगा। महिला सुरक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए “सखी वन स्टॉप सेंटर” की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का विमोचन भी किया जाएगा। इसके साथ ही, छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन जाएगा जो सखी वन स्टॉप सेंटर के सुचारू संचालन हेतु एक निर्धारित SOP लागू करेगा। महिला सशक्तिकरण में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को मिलेगा सम्मान कार्यक्रम में राज्य की 32 उत्कृष्ट आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, 3 सर्वश्रेष्ठ सखी वन स्टॉप सेंटर, 2 नवा बिहान योजना के महिला संरक्षण अधिकारी सहित अन्य महिला सशक्तिकरण में विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा। राज्य स्तरीय महिला मड़ई: महिला उद्यमिता और स्वावलंबन का मंच महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 4 से 8 मार्च 2025 तक राज्य स्तरीय महिला मड़ई का आयोजन किया जा रहा है। इस मड़ई में महिला स्व-सहायता समूहों और महिला उद्यमियों द्वारा निर्मित उत्पादों के प्रदर्शन और विक्रय के लिए 100 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। राज्य के विभिन्न जिलों से आईं महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं अपनी उत्पादित सामग्रियों का प्रदर्शन और विक्रय कर रही हैं। इसके साथ ही, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के प्रचार-प्रसार हेतु विशेष स्टॉल भी लगाए गए हैं। इस आयोजन के अंतर्गत प्रदेशभर से नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों और महिला समूहों के प्रतिनिधियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है, ताकि वे महिला उद्यमिता और स्वावलंबन से जुड़े विभिन्न प्रयासों को नजदीक से देख और समझ सकें। महिला सशक्तिकरण का महाकुंभ: 50,000 से अधिक महिलाओं की सहभागिता वृहद महतारी वंदन सम्मेलन और राज्य स्तरीय महिला मड़ई में पूरे प्रदेश से 50,000 से अधिक माताएं, बहनें और बेटियां शामिल होंगी। इस भव्य आयोजन के माध्यम से महिला सशक्तिकरण, सामाजिक उत्थान और आर्थिक स्वावलंबन को एक नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। नारी शक्ति के सम्मान का महोत्सव यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ की माताओं, बहनों और बेटियों के सम्मान और सशक्तिकरण का महोत्सव होगा। सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचे, इसके लिए इस अवसर पर महिला समृद्धि संबंधित शासकीय योजनाओं के व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा।

चीनी विदेश मंत्री ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर अपनी राय रखी, एक-दूसरे को निगलने की जगह साथ काम करना जरूरी

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की वजह से वैश्विक राजनीति में उथल-पुथल मची हुई है। इसी बीच चीनी विदेश मंत्री ने वांग यी ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर अपनी राय रखी है। यी का कहना है कि भारत और चीन को हर क्षेत्र में सफलता पाने के लिए साथ में काम करने की जरूरत है। यी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत और चीन के संबंधों में आपसी सम्मान और संवेदनशीलता की जरूरत है। शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को विकास और उन्नति के लिए साथ काम करने की जरूरत है। दोनों देशों को एक-दूसरे का समर्थन करना होगा। एक-दूसरे को निगलने की कोशिश करने या एक दूसरे के खिलाफ खड़े होने की जगह हमें करीब से साथ काम करने की जरूरत है। वांग ने इस बात पर भी जोर दिया कि चीन और भारत को साथ मिलकर ग्लोबल साउथ को बढ़ावा देने के लिए एक साथ आना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों को निर्धारित करने के लिए सीमा विवाद भी एक मात्र कारण नहीं होना चाहिए। सीमा पर आपसी सम्मान और संवेदनशीलता जरूरी- जयशंकर विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा भारत-चीन संबंधों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत चीन के साथ में स्थिर संबंध चाहता है और ऐसे संबंध जिसमें नई दिल्ली के हितों का सम्मान और संवेदनशीलता को भी मान्यता दी जाए। उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्दा यह है कि कैसे एक स्थिर संतुलन बनाया जाए। हम एक स्थिर संबंध चाहते हैं जहां हमारे हितों का सम्मान किया जाए, हमारी संवेदनशीलताओं को पहचाना जाए और जहां यह हम दोनों के लिए काम करे। हमारे रिश्ते में यही मुख्य चुनौती है।

बस्तर जिले को शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नीति आयोग द्वारा 3 करोड़ रुपये का पुरस्कार

  मुख्यमंत्री विष्णदेव साय ने दी बधाई रायपुर, बस्तर जिले ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शिक्षण को अधिक रोचक और प्रभावी बनाने, नवीन शैक्षणिक तकनीकों के सफल क्रियान्वयन और शिक्षक-छात्र संबंधों को मजबूत करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इसी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नीति आयोग ने बस्तर जिले को 3 करोड़ रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बधाई देते हुए कहा कि बस्तर जिले के विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और हमारी सरकार की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता ने जिले को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। यह सम्मान पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह पुरस्कार आकांक्षी जिलों में बुनियादी शिक्षा के सुदृढ़ीकरण और शिक्षा की समावेशी एवं नवाचारयुक्त नीति को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश में संपूर्ण शिक्षा तंत्र को और अधिक सशक्त बनाने तथा बस्तर में बौद्धिक और शैक्षणिक विकास को नया आयाम देने के लिए राज्य सरकार को और अधिक प्रेरित करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में यह उपलब्धि न केवल बस्तर जिले, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

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