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जनजातीय महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही

भोपाल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि यह अवसर है उन उपलब्धियों को सराहने का, जो महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में हासिल हुई हैं। साथ ही, यह दिन हमें यह सोचने का अवसर भी प्रदान करता है कि आगे का रास्ता क्या होना चाहिए। भारत जैसे देश में, जहाँ नारी को शक्ति और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है, वहाँ जनजातीय महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। जनजातीय महिलाएँ अपनी संस्कृति, परंपरा और स्वाभिमान की प्रतीक रही हैं। सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के कारण जनजातीय वर्ग की महिलायें लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहीं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार इस दूरी को समाप्त कर रही है। उद्देश्य यह नहीं कि वे केवल लाभार्थी बनें, बल्कि वे समाज की निर्णायक शक्ति बनकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करें। सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम सरकार की सोच यह नहीं कि महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ मिले, बल्कि वे अपने निर्णय स्वयं ले सकें, अपने व्यवसाय और कार्यक्षेत्र में मजबूती से खड़ी हो सकें। प्रधानमंत्री वन धन योजना के तहत जनजातीय महिलाओं को उनके द्वारा संग्रहीत वन उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए सशक्त तंत्र विकसित किया गया है। इससे न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि वे अब स्वयं का व्यवसाय भी कर रही हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना ने बालिका शिक्षा को प्राथमिकता दी है, जिससे जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उनके पोषण और स्वास्थ्य की सुरक्षा कर रही है। स्टैंड-अप इंडिया योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को स्व-रोजगार हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे खुद के व्यवसाय की स्थापना कर सकें। मध्यप्रदेश सरकार भी इस दिशा में भी आगे बढ़कर कार्य कर रही है। पीछे नहीं है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में राज्य सरकार महिलाओं को प्रत्यक्ष आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में बड़ा सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री आदिवासी महिला उद्यमिता योजना ने जनजातीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हर घर जल योजना ने जल संकट से जूझ रही ग्रामीण और जनजातीय महिलाओं के लिए राहत प्रदान की है, जिससे उनका दैनिक जीवन सरल हुआ है। पेसा अधिनियम ने ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी को मजबूती प्रदान की है, जिससे वे अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग और जागरूक हो रही हैं। अब वे अपनी ग्राम सभाओं में न केवल सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं, बल्कि अपने समुदाय की नीतियाँ तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं। संघर्ष से सशक्त नेतृत्व तक का सफर मैं स्वयं एक जनजातीय महिला हूँ। जीवन में संघर्ष मेरे लिए नया नहीं है। बचपन में परिवार की मदद के लिए ईंट-भट्टों पर मजदूरी से लेकर सरपंच, जिला पंचायत अध्यक्ष, राज्यसभा सदस्य और अब मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने तक का सफर आसान नहीं था। लेकिन मेरी पार्टी का संगठनात्मक सशक्तिकरण और मजबूत नेतृत्व ही है, जिसने मुझे और हमारे समाज की लाखों महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर दिए। मेरी पार्टी ने सदैव जनजातीय समाज को प्राथमिकता दी है। जब देश को पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मिलीं, तो यह केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे जनजातीय समाज की उपलब्धि थी। यह इस बात का प्रमाण है कि अगर महिलाओं को सही अवसर और संसाधन मिलें, तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। महिला सशक्तिकरण कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं है, यह एक निरंतर चलने वाली यात्रा है। यह केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की उन्नति का आधार है। महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति-निर्माण और निर्णय लेने में भागीदार बनाना ही सही मायनों में सशक्तिकरण है। शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता के साथ समाज में उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। आज, जब दुनिया नारी शक्ति का सम्मान कर रही है, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समाज के सबसे वंचित वर्ग- जनजातीय और अनुसूचित जाति की महिलाएँ-विकास की मुख्यधारा से जुड़ें। मेरा सभी माताओं, बहनों और बेटियों से आग्रह है कि वे सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ उठाएँ, आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाएँ और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ें। जब महिलाएँ आगे बढ़ेंगी, तो समाज और देश भी नई ऊँचाइयों को छुएगा।  

अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस पर ग्रामीण आजीविका मिशन में कई नवाचारों एवं अभियानों का होगा शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस 08 मार्च को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में म. प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्‍व-सहायता समूहों को बैंक ऋण राशि वितरण, डीडीयूजीकेवाय अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्‍त बेटियों को नियुक्ति पत्रों का वितरण करेंगे। कार्यक्रम में भोपाल शहर में चलित जैविक हाट बाजार के तीन वाहनों को हरी झण्‍डी दिखाकर रवाना करने के साथ ही मिशन के अन्‍य कार्यों का शुभारंभ किया जायेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव महिला स्व सहायता समूहों द्वारा उनके उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी करेंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं राज्‍य मंत्री श्रीमती राधा सिंह भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगीं। म.प्र. ग्रामीण आजीविका मिशन के डिजीटल ई-न्‍यूज लैटर ‘’आजीविका अनुभूति’’ का विमोचन किया जायेगा। सीहोर जिले के समूह सदस्‍यों को आवागमन हेतु 200 ई-सायकिल का वितरण, प्रदेश के छह प्रमुख शहरों भोपाल, इन्‍दौर, ग्‍वालियर, जबलपुर, उज्‍जैन एवं धार में जैविका हाट बाजारों का शुभारंभ, वित्‍तीय साक्षरता अभियान का शुभारंभ, दीनदयाल उपाध्‍याय ग्रामीण कौशल योजना (डीडीयूजीकेवाय) अंतर्गत विशेष रूप से युवितयों के लिये 05 प्रशिक्षण बैच, आरसेटी के माध्‍यम से बालाघाट, डिण्‍डोरी एवं अलीराजपुर जिलों में पारंपरिक कला एवं शिल्‍प के प्रोत्‍साहन हेतु कौशल प्रशिक्षण का शुभारंभ, डीडीयूजीकेवाय अंतर्गत 1000 युवतियों को नियुक्ति पत्र प्रदाय किए जाएंगे। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘’पढेंगे हम–बढेंगे हम’’ साक्षरता अभियान का शुभारंभ और भोपाल शहर में चलित जैविक हाट बाजार हेतु तीन वाहनों को हरी झण्‍डी दिखाकर रवाना किया जायेगा। इस अवसर भोपाल जिले के 02 स्‍व-सहायता समूहों को 10-10 लाख रूपये का बैंक ऋण राशि भी प्रतीक स्‍वरूप दी जायेगी।  

मध्यप्रदेश चिकित्सा उपकरण निर्माण का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की अनुकूल नीतियां, विकसित अधोसंरचना और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी सुविधाएं राज्य को दवा कंपनियों और चिकित्सा उपकरण निर्माताओं के लिए फेवरेट इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बना रही हैं। जीआईएस-भोपाल में हेल्थकेयर, फार्मा और मेडिटेक क्षेत्र की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि मध्यप्रदेश चिकित्सा उपकरण निर्माण का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। उज्जैन में विकसित हो रहे 75 एकड़ के मेडिकल एवं फार्मास्यूटिकल पार्क को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैश्विक निवेशकों के लिए ‘बेस्ट डेस्टिनेशन’ करार दिया। ‘मॉलिक्यूल टू मशीन’ अवधारणा से आगे बढ़ता मध्यप्रदेश जीआईएस-भोपाल में आयोजित ‘मॉलिक्यूल्स-टू-मशीन (हेल्थकेयर, फार्मा, मेडिटेक)’ सत्र के दौरान, विशेषज्ञों ने इस अवधारणा पर चर्चा करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश दवा निर्माण से लेकर चिकित्सा उपकरण उत्पादन तक पूरे हेल्थकेयर इको सिस्टम को मजबूत कर रहा है। राज्य में फार्मास्युटिकल कंपनियों, एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट्स (एपीआई) निर्माण इकाइयों और मेडिकल डिवाइस विनिर्माण में तेजी से वृद्धि हो रही है। मेडिकल डिवाइस पार्क में बढ़ता निवेश एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री के समन्वयक श्री राजीव छिब्बर ने बताया कि उज्जैन स्थित विक्रम उद्योग नगरी में विकसित हो रहे मेडिकल डिवाइस पार्क में 23 विनिर्माताओं ने निवेश करने की पुष्टि की है। सरकार की नई औद्योगिक नीति के तहत दी जा रही रियायतों और सुविधाओं के कारण निवेशकों की इकाइयां स्थापित करने की लागत काफी कम हो रही है, जिससे निवेश को बढ़ावा मिल रहा है। मेडिकल टेक्सटाइल में अपार संभावनाएं जीआईएस-भोपाल के शुभारंभ संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश को ‘मेडिकल टेक्सटाइल्स’ का प्रमुख केंद्र बताया। सर्जिकल गाउन, मास्क, पीपीई किट, सैनिटरी नैपकिन और अन्य उत्पादों के निर्माण में राज्य की अहम भूमिका को रेखांकित किया गया। कोविड महामारी में भारत ने मास्क और पीपीई किट के उत्पादन में वैश्विक पहचान बनाई थी, जिसे मध्यप्रदेश आगे बढ़ा रहा है। ध्यप्रदेश, प्रमुख फार्मास्युटिकल राज्यों में शामिल मध्यप्रदेश देश के प्रमुख फार्मास्युटिकल राज्यों में से एक है। वर्तमान में प्रदेश में 270 से अधिक फार्मा कंपनियां कार्यरत हैं, जिनमें से 80 से अधिक पीथमपुर में स्थित हैं। राज्य में निर्मित दवाइयां 160 से अधिक देशों में निर्यात की जा रही हैं। प्रमुख निवेशकों में सनफार्मा, सिप्ला, लुपिन, एल्मेंबिक, टॉरेंट फार्मा और एल्केमिस्ट जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। हरसंभव सहायता और तय समय में मंजूरियाँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार फार्मा और मेडिकल उपकरण कंपनियों को निवेश के लिए हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है। सरकार की ओर से लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। लोक सेवा गारंटी अधिनियम में सभी आवश्यक मंजूरियां तय समय में सुनिश्चित की जा रही हैं। 17 हजार करोड़ का निवेश और 49 हजार रोजगार सृजन मध्यप्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के प्रयासों के कारण इस जीआईएस-भोपाल में निवेशकों ने इस सेक्टर में 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए। इससे लगभग 49 हजार नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा संस्थानों की संख्या में वृद्धि से प्रदेश में चिकित्सा सुविधाएं और रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। प्रदेश के फार्मा उद्योग को मिली ग्लोबल पहचान जीआईएस-भोपाल में मध्यप्रदेश के फार्मा, हेल्थकेयर और चिकित्सा शिक्षा इन्फ्रास्ट्रक्चर की क्षमताओं का परिचय देश-विदेश के निवेशकों को मिला है। इससे यहाँ निवेश संभावनाओं को ग्लोबल पहुंच मिली है। भविष्य में प्रदेश को भारत में ही नहीं विदेश में भी इस सेक्टर में आदर्श निवेश स्थल की पहचान मिलेगी। मध्यप्रदेश के फार्मास्युटिकल सेक्टर में एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है, 270 से अधिक दवा निर्माता कंपनियां और 250 से अधिक फार्मेसी संस्थान सक्रिय हैं, 160 से अधिक देशों में दवाइयों का निर्यात किया जाता है, 39 एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट्स (एपीआई) निर्माण की इकाइयां स्थापित हैं, राज्य के कुल निर्यात में 25% फार्मा उद्योग की हिस्सेदारी है और 5 वाणिज्यिक हवाई अड्डे और 6 अन्तर्देशीय कंटेनर डिपो उद्योग समूहों की सुविधा के लिये उपलब्ध हैं। मध्यप्रदेश में ग्लोबल-इन्वेस्टर्स की दिलचस्पी जीआईएस-भोपाल में 300 से अधिक उद्योग जगत के दिग्गज, नीति निर्माता और स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक मंच पर आए, जहां भारत के हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में नवाचार और निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों से राज्य न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर फार्मा और मेडिकल डिवाइस निर्माण का नया केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है।  

3 लाख से कम होगी आय , तो दिल्ली की महिलाओं को मिलेंगे 2500 रुपये, आज से रजिस्ट्रेशन शुरू

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर 8 मार्च यानीआज  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता महिला समृद्धि योजना का शुभारंभ करने वाली हैं। सीएम के ऐलान के बाद इस योजना के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो जाएगा और वैरिफिकेशन के बाद पात्र महिलाओं के खाते में 2500 रुपये आना शुरू हो जाएंगे। बीजेपी शासित दिल्ली की नई सरकार 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली की महिलाओं को एक बड़ा तोहफा मिलने जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, महिला दिवस पर सरकार गरीब महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की आर्थिक सहायता देने की स्कीम लॉन्च करके इसके लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। इसके पहले कैबिनेट की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें इस योजना को औपचारिक मंजूरी दी जाएगी। । विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी द्वारा जारी किए गए संकल्प पत्र का यह सबसे प्रमुख वादा था, जिसमें बीजेपी ने दिल्ली में सरकार बनने पर महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। महिला दिवस पर बड़े आयोजन की तैयारी सूत्रों से यह भी पता चला है कि दिल्ली बीजेपी ने आज 8 मार्च को दोपहर 12 बजे जवाहरलाल नेहरू इनडोर स्टेडियम में एक बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया है, जिसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उनकी कैबिनेट के सभी मंत्री और दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा भी शामिल होंगे। पार्टी के महिला मोर्चे के बैनर तले आयोजित किए जा रहे इस कार्यक्रम में दिल्ली के अलग-अलग कोनों से महिलाओं को भी बुलाया जाएगा और नड्डा व सीएम के हाथों महिला समृद्धि योजना के तहत कुछ महिलाओं का रजिस्ट्रेशन भी कराया जाएगा। आज  होगा ऐलान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता आज  8 मार्च को International Women’s Day के मौके पर जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम से इस योजना को लॉन्च करने वाली हैं। उनके साथ बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा भी होंगे। जानकारी के मुताबिक ऐलान होने के बाद ड्राफ्ट को मंजूरी मिलेगी और इसी के साथ ही योजना के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो जाएंगे। रजिस्ट्रेशन कैसे होगा..ऑनलाइन या ऑफलाइन? महिला समृद्धि योजना के लिए रजिस्ट्रेशन के लिए किसी दफ्तर के चक्कर काटने होंगे या फिर घर बैठे ही आवेदन हो जाएगा? अगर आपके मन में भी यह सवाल है तो बता दें कि टाइम्स ऑफ इंडिया के सूत्रों के मुताबिक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। माना जा रहा है कि महिला समृद्धि योजना के लिए एक अलग वेबसाइट और मोबाइल एप लॉन्च किया जा सकता है। महिला समृद्धि योजना के लिए पात्रता क्या होगी?     इस योजना में आवेदन के लिए पहली शर्त तो यह होगी कि आवेदक महिला दिल्ली की नागरिक हो     वह किसी भी तरह की सरकारी नौकरी या रिटायर्ड कर्मचारी न हो     बीजेपी पहले ही साफ कर चुकी है कि महिला समृद्धि योजना गरीब महिलाओं के लिए है     महिला गरीबी रेखा से नीचे (BPL) या EWS कैटेगरी में आती हो     माना जा रहा है कि परिवार की सालाना आय 2.5 लाख से 3 लाख होनी चाहिए     महिला की उम्र 18 से 60 साल के बीच होनी चाहिए     महिला पहले से किसी अन्य योजना का लाभ न उठा रही हो महिला सम्मान योजना के लिए होगा इनकम क्राइटेरिया इस योजना को लागू करने के लिए सरकार कुछ इनकम क्राइटेरिया भी निर्धारित करेगी और इस क्राइटेरिया में फिट बैठने वाली महिलाओं को ही इस योजना का लाभ मिल सकेगा। सूत्रों के अनुसार, 18 से 60 साल की महिलाएं ही योजना का लाभ लेने के लिए पात्र होंगी। लाभार्थियों का वेरिफिकेशन वोटर कार्ड, बीपीएल कार्ड, आधार कार्ड और इनकम सर्टिफिकेट के आधार पर किया जाएगा। जिन महिलाओं की सालाना घरेलू इनकम 3 लाख रुपये या उससे कम है, वही इस योजना का लाभ लेने के लिए रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगी। अनुमान है कि दिल्ली में ऐसी महिलाओं की संख्या दिल्ली में करीब 15 लाख हो सकती है। दिल्ली में महिलाएं 2500 रुपये मिलने से पहले उठा सकती हैं इन योजनाओं का लाभ सरकारी जॉब करने वाली, खुद का इनकम टैक्स भरने वाली, आर्थिक सहायता से जुड़ी दिल्ली सरकार की किसी भी अन्य योजना का लाभ लेने वाली महिलाएं इस योजना के तहत लाभ नहीं ले सकेंगी। योजना का लाभ देने के लिए एक वेब-पोर्टल भी बनाया जाएगा, जिस पर पात्र महिलाएं योजना का लाभ लेने के लिए खुद से आवेदन कर सकती हैं। एक मोबाइल ऐप भी तैयार किया जा रहा है, जिसके माध्यम से रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा। आवेदन करने वाली सभी महिलाओं के दस्तावेज गोपनीय रखे जाएंगे। वेरिफिकेशन के बाद पात्र महिलाओं के आधार कार्ड से लिंक बैंक खाते में हर महीने 2500 रुपये सीधे ट्रांसफर किए जाएंगे।

प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की सरगर्मी तेज, आगामी दिनों में निर्वाचन अधिकारी धर्मेंद्र प्रधान का भोपाल दौरा

भोपाल भारतीय जनता पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई के नए प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव कभी भी हो सकता है. ऐसे में हर किसी की नजर नए अध्यक्ष पर है क्योंकि चर्चाओं में एक नहीं, कई नाम हैं. राज्य में बीजेपी के संगठन पर्व के तहत बूथ समिति, मंडल अध्यक्ष और जिला अध्यक्षों की निर्वाचन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. वहीं अब संभावना जताई जा रही थी कि जनवरी या फरवरी में प्रदेश अध्यक्ष का भी निर्वाचन हो जाएगा. हालांकि, दिल्ली के विधानसभा चुनाव के चलते निर्वाचन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और निर्वाचन अधिकारी केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का दौरा तय नहीं हो पाया. राज्य में बीते एक पखवाड़े से प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की सरगर्मी तेज है और संभावना इस बात की जताई जा रही है कि आगामी दिनों में निर्वाचन अधिकारी धर्मेंद्र प्रधान का भोपाल दौरा हो सकता है. इस प्रवास के दौरान ही निर्वाचन प्रक्रिया भी पूरी कराई जा सकती है. राज्य के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा को अध्यक्ष पद पर रहते हुए पांच साल से ज्यादा का समय हो गया है. शर्मा के नेतृत्व में विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़े गए जिनमें बीजेपी को बड़ी सफलताएं मिलीं. इन नामों की चर्चा वहीं बूथ विस्तारक अभियान सहित कई अभियान देश के अन्य राज्यों के लिए नजीर बने हैं. राज्य की बीजेपी इकाई का नया अध्यक्ष कौन होगा? इसके लिए कई दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं. वर्तमान में मुख्यमंत्री मोहन यादव पिछड़े वर्ग से आते हैं, इसलिए संभावना इस बात की जताई जा रही है कि पार्टी सामान्य वर्ग के व्यक्ति को यह जिम्मेदारी सौंप सकती है. राज्य में सामान्य वर्ग से पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, अरविंद भदौरिया, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और विधायक हेमंत खंडेलवाल के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं. क्या कहते हैं जानकार? वहीं पार्टी का जोर अनुसूचित जनजाति वर्ग के वोट बैंक पर भी है और इसके लिए प्रमुख तौर पर सांसद सुमेर सिंह सोलंकी, फग्गन सिंह कुलस्ते और गजेंद्र पटेल के नाम चर्चा में हैं. इसके अलावा अनुसूचित जाति वर्ग से लाल सिंह आर्य का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में वर्तमान में सत्ता और संगठन में बेहतर तालमेल चल रहा है. आगामी चार साल तक कोई चुनाव नहीं है, लिहाजा पार्टी की कोशिश सत्ता और संगठन में समन्वय रहे, यह प्रयास किए जा रहे हैं. इसलिए ऐसे नाम पर मुहर लगने की ज्यादा संभावना है जो संगठन को बेहतर तरीके से चला सके, सभी में समन्वय रखे और उसका सत्ता से भी टकराव न हो.

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