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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. माधवराव सिंधिया की प्रतिमा पर अर्पित की पुष्पांजलि

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. माधवराव सिंधिया की प्रतिमा पर अर्पित की पुष्पांजलि स्व. माधवराव सिंधिया की 80वीं जयंती पर भजन संध्या में हुए शामिल भोपाल पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. माधवरावसिंधिया की 80वीं जयंती पर सोमवार को सिंधियापरिवार के छत्री परिसर में स्व. माधराव सिंधिया की प्रतिमा पर पुष्पांजलिअर्पित कर नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादवभजन संध्या में भी शामिल हुए। उन्होंनेभजन संख्या में उपस्थित धर्मगुरुओं एवं संतजन का सम्मान भी किया। मुख्यमंत्रीडॉ. यादव के साथ केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्यसिंधिया एवं विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर व सांसदवी.डी. शर्मा ने भी स्व. माधवराव सिंधिया की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। भजन संध्यामें जल संसाधन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्रीनारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, खाद्य एवं नागरिक आपूर्तिमंत्री गोविंद सिंह राजपूत, विधायकमोहन सिंह राठौर, पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया, डॉ. नरोत्तम मिश्रा, श्रीअनूप मिश्रा, रामनिवास रावत, श्रीमती माया सिंह, ध्यानेन्द्र सिंह, श्रीप्रभुराम चौधरी, श्रीमती इमरती देवी एवं हितानंद शर्मा, जय प्रकाश राजौरिया, प्रेम सिंह राजपूत, सहित अन्य जनप्रतिनिधिएवं बड़ी संख्या में ग्वालियर-चंबल संभाग के नागरिक शामिल हुए। पूर्व केन्द्रीयमंत्री स्व. सिंधिया की 80वीं जयंती पर आयोजित भजन संध्या मेंसुप्रसिद्ध भजन गायिका सुचित्रा राय एवं राजेन्द्र पारिक एवं उनके साथियोंने सुमधुर एवं भावपूर्ण भजनों का गायन किया।  

संगमेश्वर में संभाजी का, वहीं बाबासाहेब ठाकरे का मुंबई में बनेगा भव्य स्मारक, स्मारकों के लिए 220 करोड़ रुपये की राशि आवंटित

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा में फाइनेंस मिनिस्टर अजित पवार ने राज्य का बजट पेश किया। इस बजट में उन्होंने कई जनकल्याणकारी योजनाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर का ऐलान किया तो वहीं कई स्मारकों की भी घोषणा की। अजित पवार ने बजट में संभाजी महाराज के नाम पर स्मारक बनाने का ऐलान किया है। इसके अलावा इंदु मिल्स में बने आंबेडकर मेमोरियल का काम जल्दी ही पूरा करने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि संगमेश्वर में छत्रपति संभाजी महाराज का स्मारक बनेगा। वहीं बाबासाहेब ठाकरे का भव्य स्मारक भी मुंबई में बड़ी लागत से बन रहा है। इस बजट में इस स्मारक के दूसरे चरण के लिए ही 220 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। इससे समझा जा सकता है कि कितना बजट स्मारकों के लिए आवंटित हुआ है। देवेंद्र फडणवीस सरकार के इस बजट में मराठी अस्मिता पर खासा जोर दिया गया है। वित्त मंत्री अजित पवार ने ऐलान किया कि यूपी के आगरा में महाराज छत्रपति शिवाजी का एक स्मारक बनेगा। यह स्मारक उस स्थान पर बनेगा, जहां से मुगलों की कैद से छूटकर शिवाजी निकले थे। इसके अलावा तमिलनाडु और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में हिंदी बनाम क्षेत्रीय भाषाओं वाले विवाद के बीच एक और अहम फैसला हुआ है। महाराष्ट्र सरकार ने 3 अक्टूबर को मराठी भाषा सम्मान दिन मनाने का ऐलान किया है। यह हिंदी दिवस की तर्ज पर ही मनाया जाएगा। बता दें कि हाल ही में तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने यह सवाल भी उठाया था कि आखिर हिंदी भाषा की तरह अन्य भाषाओं के लिए कोई दिवस क्यों नहीं है। महाराष्ट्र सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती के मौके पर उनका स्मारक बनाने का ऐलान किया है। माना जा रहा है कि स्मारकों के बहाने महाराष्ट्र सरकार ने कई समुदायों को साधने का प्रयास किया है। आंबेडकर स्मारक के नाम पर उसने एक तरफ दलित अस्मिता को सम्मान दिया है तो वहीं अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर स्मारक बनाने से उत्तर भारतीयों और राष्ट्रवादी विचारधारा के लोगों को लुभाया जा सकेगा। मराठी अस्मिता की बात हो तो बालासाहेब ठाकरे का जिक्र जरूरी हो जाता है। यही कारण है कि हर दल उनकी विरासत पर दावा करता है। इसी वजह से उनके स्मारक के लिए भी मोटा फंड आवंटित करने का ऐलान किया है। संभाजी महाराष्ट्र और छत्रपति शिवाजी तो महाराष्ट्र के लिए भावनात्मक विषय हैं, जिसका बजट में बखूबी ध्यान रखा गया है।

Share Market: धड़ाम हुआ शेयर बाजार, Sensex 400 अंक गिरा, Nifty 22300 के नीचे

मुंबई अमेरिका के शेयर बाजार (US Stock Market) में गिरावट का असर मंगलवार को भारतीय स्टॉक मार्केट (Stock Market India) पर भी देखने को मिला है. कारोबार की शुरुआत के साथ ही सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम हो गए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (Sensex) खुलने के साथ ही 400 अंक का गोता लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) 130 अंक से ज्यादा फिसल गया. बाजार में गिरावट के बीच प्राइवेट सेक्टर के इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) के शेयर में सबसे बड़ी गिरावट आई और ये खुलने के साथ ही 20 फीसदी टूट गया. सेंसेक्स ने लगाया 400 अंकों का गोता मंगलवार को शेयर मार्केट की शुरुआत बेहद खराब रही. बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स (BSE Sensex) अपने पिछले बंद 74,115.17 की तुलना में गिरकर 73,743.88 पर ओपन हुआ और कुछ ही मिनटों में 400 अंकों से ज्यादा फिसलकर 73,672 के लेवल तक टूट गया. दूसरी ओर एनएसई का निफ्टी इंडेक्स (NSE NIfty) भी सेंसेक्स की चाल से चाल मिलाकर चलता नजर आया. ये सोमवार के अपने बंद 22,460.30 की तुलना में टूटकर 22,345.95 पर ओपन हुआ और मिनटों में 130 अंक से ज्यादा की गिरावट लेकर 22,314 के लेवल पर कारोबार करता नजर आया. 1715 शेयरों की रेड जोन में शुरुआत शेयर मार्केट ओपन होने के साथ जहां 617 कंपनियों के शेयर उछाल के साथ ग्रीन जोन में खुले, तो वहीं 1715 कंपनियों के शेयरों ने गिरावट के साथ लाल निशान पर कारोबार की शुरुआत की. इस बीच 105 कंपनियों के शेयरों की स्थिति में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों की बात करें, तो IndusInd Bank, Infosys, Tech Mahindra, TCS, Tata Motors में बाजार की ओपनिंग के साथ ही तगड़ी गिरावट देखने को मिली. वहीं दूसरी ओर ICICI Bank, Maruti Suzuki और ONGC के शेयर हरे निशान पर कारोबार करते नजर आए. भारतीय शेयर बाजार में आज (11 मार्च 2025)को शुरुआत कमजोर रही। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में फिसल गए। सेंसेक्स 0.50% की गिरावट के साथ 73,743.88 पर खुला, जबकि निफ्टी 0.48% की गिरावट के साथ 22,352.55 पर शुरू हुआ। इंडसइंड बैंक को जोरदार झटका लगा, 15% की गिरावट के साथ यह सत्र का सबसे बड़ा नुकसान वाला बैंक बन गया। इसके अलावा अन्य नुकसान वाले शेयरो में इन्फोसिस शामिल है, जिसमें 2.98% की गिरावट आई, एमएंडएम में 2.25% की गिरावट आई, और ज़ोमैटो में 1.96% की गिरावट आई। बजाज फिनसर्व ने भी 1.32% की गिरावट के साथ कारोबार किया, जिससे बाजार की कमजोर धारणा और बढ़ गई। सबसे ज्यादा फिसले ये 10 शेयर बाजार में गिरावट के बीच शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा फिसलने वाले शेयरों पर नजर डालें, तो लार्जकैप कंपनियों में शामिल IndusInd Bank Share (20%), Infosys Share (3.24%), M&M Share (2.99%), Zomato Share (2.49%), Tech Mahindra Share (1.28%) फिसलकर कारोबार कर रहे थे. मिडकैप में Bandhan Bank Share (4.43%), Godrej India Share (4.25%), RVNL Share (3.53%) और AU Bank Share (3.46%) टूटा. इसके अलावा स्मॉलकैप कंपनियों में Gensol Share में खुलते ही 5% का लोअर सर्किट लग गया. अमेरिकी बाजार में कल आई थी बड़ी गिरावट गौरतलब है कि बीते कारोबारी दिन अमेरिका के शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. Dow Jones का तो हाल-बेहाल नजर आया और ये कारोबार के दौरान 1100 अंक तक फिसल गया, हालांकि अंत में ये इंडेक्स 2.08% या 890 अंक की गिरावट लेकर 41,911.71 पर क्लोज हुआ था. डाउ जोन्स जैसा ही हाल S&P-500 का दिखा और ये 155.64 अंक या 2.70% की गिरावट लेकर क्लोज हुआ था. वहीं Nasdaq ने तो इससे भी बड़ी गिरावट देखी और 4% टूटकर17,468.32 पर बंद हुआ था.

बीट नैमेड़ के नयापारा में वनों की अवैध कटाई पर विभाग नहीं लग पा रहा अंकुश

बीजापुर छत्तीसगढ़ के आदिवासीय क्षेत्र बीजापुर, जहां पेड़ों को भगवान स्वरूप पूजा जाता है. जहां आदिवासी अपनी प्रकृति को बचाने के लिए आंदोलन करते हुए मर मिटते हैं, ऐसी जगह पर जिन अधिकारियों पर जंगलों के संरक्षण की जिम्मेदारी है, उनके नाक के नीचे लगातार कुटरू वन परिक्षेत्र (बफर) के वनों में अवैध कटाई जारी है और वे कुंभकरण की नींद सो रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण पेड़ काटे जा रहे हैं. जबकि वन विभाग अवैध कटाई करने वालों पर को सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है. बीट नैमेड़ के नयापारा में वनों की अवैध कटाई पर विभाग अंकुश नहीं लग पा रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि बीट नैमेड़ के नयापारा क्षेत्र में जंगलों को खेती किसानी के लिए साफ किया जा रहा है. इसमें ऐसे पेड़ों को भी ग्रामीण काट रहे हैं, जिन्हें कुछ साल पहले ही रोपा गया था. कई स्थानीय लोगों द्वारा विभागीय अधिकारियों से भी इसकी शिकायत करने पर भी विभाग के रेंजर से लेकर बीट गार्ड के कानों में जूं तक नही रेंग रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग समेत कई जिम्मेदारों को इस अवैध कारोबार के बारे में जानकारी है, लेकिन इस संबंध में पूछे जाने पर ऐसी गतिविधियों के होने से नकार दिया जाता है. यदा कदा विभाग के द्वारा ग्रामीणों की सजगता एवं सूचना पर लकड़ी तस्करों पर कार्रवाई की जाती है. उनमें से भी पुख्ता कार्रवाई के अभाव में दोषी बच निकलते हैं. ग्रामीणों ने बताया कि अवैध कटाई से क्षेत्र के जंगल उजड़ रहे हैं. जंगलों से इमारती लकड़ी के साथ-साथ अवैध जलाऊ लकड़ी का कारोबार भी दिनोंदिन फल फूल रहा है. इन लकड़ियों का प्रयोग होटलों, ढाबों, ईंट भट्‌टों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में किया जा रहा है. अवैध कटाई के बाद जमीन को लेकर बढ़ रहा आपसी विवाद हाल ही में कुटरू वन परिक्षेत्र के बीच जंगल कटाई देखने को मिली. वहीं नैमेड़ बीट के नयापारा के बीच जंगल कटाई के निशान दिखाई दे रहे हैं. यहां कुछ ग्रामीण जहां जंगलों की कटाई कर रहे हैं. वहीं जंगल साफ कर खेती करने और जमीन अतिक्रमण पर भी लोगों में आपसी विवाद हो रहे हैं. कब्जा का कारण खेती करने और पट़्टों का लालच कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि नैमेड़ आदिवासी समुदाय की आड़ में वन माफिया काम करता है. वह उनसे जमीन साफ करवाकर उस पर कब्जा करके खेती करता है. आदिवासी समुदाय गरीब का गरीब बना रहता है. उनका कहना है कि गांव वाले यह समझने लगे हैं कि वनों पर उनकी जिंदगी निर्भर है. अगर वे न रहे तो न तो मवेशियों को चराने के लिए जगह बचेगी न ही बारिश होगी. इसके लिए ग्रामीण भी पहल कर चुके हैं. लेकिन विभागीय लापरवाही की वजह से जंगल कटाई नहीं रुक पा रही है. वहीं पट्‌टों के लालच में भी कई ग्रामीण कब्जे करने जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं. जानिए क्या कहते हैं जिम्मेदार इस पूरे मामले में जब परिक्षेत्र रेंजर रामायण मिश्रा से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि पहले भी जंगल कट चुका है, ग्रामीणों को समझाने पर भी नही समझते हैं, उसमें विभाग क्या करेगा. हालांकि इसके बाद इंद्रावती डीएफओ संदीप बल्गा ने जांच और कार्रवाई की बात कही है. उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र की आप बात कर रहे हैं, मैं वहां स्टाफ भेजकर जांच करवाता हूं और जो भी लोग इस प्रकार का काम कर रहे हैं, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

छोटेडोंगर में सोलर परियोजना घोटाला: विकास कार्यों के नाम पर लाखों की हेराफेरी, फर्जी दस्तावेजों से लाखो का भुगतान, प्रशासन मौन!

नारायणपुर विकास के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने का दावा करने वाली प्रशासन की पोल खोलने वाला मामला ग्राम पंचायत छोटेडोंगर में सामने आया है। नक्सल प्रभावित इस क्षेत्र में आदिवासियों के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार वित्तीय सहायता भेजती हैं, ताकि इस पिछड़े इलाके के लोग मुख्यधारा में आ सकें। लेकिन भ्रष्टाचार का भेड़िया धसान ऐसा है कि विकास कार्यों की राशि जरूरतमंदों तक पहुंचने के बजाय कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों की जेबों में समा जाती है। दरअसल, ग्राम पंचायत छोटेडोंगर में सोलर लाइट और सोलर पंप लगाने के नाम पर 15वें वित्त आयोग की राशि का जमकर दुरुपयोग किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत ने इस कार्य के लिए लाखों रुपये जारी किए, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हुआ। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस घोटाले में फर्जी दस्तावेज बनाकर संदिग्ध तरीके से भुगतान किया गया। छोटेडोंगर के ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में शासकीय राशि का सोलर लाइट और सोलर पंप लगाने के नाम पर जमकर बंदरबांट हुआ है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पंचायत सचिव और ठेकेदारों की मिलीभगत से यह सारा घोटाला हुआ। जब इस बारे में प्रशासन से शिकायत की गई, तो कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन भी इस भ्रष्टाचार में शामिल है? RTI से खुलासा: क्रेडा विभाग की फर्जी टीएस बनी आधार इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब एक आरटीआई कार्यकर्ता ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत इस परियोजना से जुड़े दस्तावेजों की मांग की। वहीं पंचायत ने जो कागजात दिए, उनमें कई गंभीर खामियां पाई गईं। सबसे पहले तो क्रेडा विभाग नारायणपुर का टेक्निकल सेक्शन (TS) फर्जी निकला। दस्तावेज में कोई दिनांक नहीं है और उप अभियंता, क्रेडा जिला नारायणपुर की सील लगी हुई है, लेकिन दस्तावेज की सत्यता संदिग्ध है। उक्त दस्तावेज में सचिव और सरपंच के हस्ताक्षर और मुहर लगी हुई है, और इसी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया। संदेहास्पद भुगतान: माजीसा इंटरप्राइजेज के नाम लाखों के बिल टीएस के अनुसार, 1000 लीटर का वाटर टैंक और 900 वॉट क्षमता का सोलर पंप लगाया जाना था। इस पर 5,80,484 रुपये की लागत दिखाई गई, लेकिन हकीकत में कार्य मानकों के विपरीत किया गया। जब इस टीएस की पुष्टि के लिए क्रेडा विभाग के अधिकारी रामकुमार ध्रुव से नवंबर 2024 में सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि टीएस उनके कार्यालय से जारी नहीं किया गया है। उन्होंने उक्त टीएस को अमान्य बताया और कहा कि जिला कार्यालय टीएस जारी करने के लिए अधिकृत नहीं है, बल्कि टीएस रीजनल अथवा हेड ऑफिस से मंगवाया जाता है। इस टीएस के आधार पर मई 2024 में लाखों रुपये के बिल पास किए गए, जिनमें तीन बिलों में से प्रत्येक 3 लाख रुपये का है और एक बिल 2 लाख 60 हजार रुपये का है। यह सभी बिल एक ही फर्म माजीसा इंटरप्राइजेज के हैं। इन सभी बिलों का बिना जांच के भुगतान कर दिया गया। पंचायत सचिव ने पल्ला झाड़ा, प्रशासन का मौन जब इस पर पंचायत सचिव विनोद गावड़े से सवाल किया गया, तो उन्होंने सारा दोष ठेकेदार पर डालते हुए पल्ला झाड़ लिया और कहा कि उक्त टीएस माजीसा इंटरप्राइजेज द्वारा दिया गया था, जिस पर क्रेडा विभाग नारायणपुर की सील लगी हुई थी, जिसे आधार मानकर उन्होंने भुगतान कर दिया। अब सवाल यह उठता है कि क्या पंचायत सचिव की यह ज़िम्मेदारी नहीं थी कि वह भुगतान से पहले दस्तावेजों की जांच करे? वहीं जब इस मामले पर वर्तमान पंचायत सचिव पवन कुलदीप से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे पिछले कार्यकाल का मामला बताते हुए खुद को इससे अलग कर लिया। वहीं जनपद पंचायत नारायणपुर के सीईओ एल.एन. पटेल ने कहा कि अब तक उन्हें इस मामले पर लिखित शिकायत नहीं मिली है, लेकिन शिकायत मिलने पर जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सिर्फ छोटेडोंगर ही नहीं, जिलेभर में भ्रष्टाचार! जानकारी के मुताबिक, यह घोटाला सिर्फ छोटेडोंगर में ही नहीं हुआ, बल्कि जिले की कई अन्य पंचायतों में भी इसी तरह से 15वें वित्त आयोग की राशि का दुरुपयोग किया गया है। वहीं कुछ माह पूर्व 15वें वित्त की राशि के दुरुपयोग के मामले में नवंबर 2024 को भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं छोटेडोंगर के ग्रामीणों ने भी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, लेकिन इस मामले में किसी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने की उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग स्थानीय ग्रामीण उमेश जायसवाल ने कहा कि शासकीय राशि का जमकर बंदरबांट हुआ है, इस पर जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए। गांव के विकास के लिए आई राशि से गांव में विकास होना चाहिए, न कि यह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़नी चाहिए। ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच हो और भ्रष्ट अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। क्या मिलेगा छोटेडोंगर को न्याय? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर घोटाले की पूरी जानकारी उपलब्ध है, तो दोषियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन के बड़े अधिकारी भी इसमें शामिल हैं? क्या इस मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है? क्या छोटेडोंगर के लोगों को न्याय मिलेगा? छोटेडोंगर और अन्य प्रभावित पंचायतों के लोग अब भी वास्तविक विकास और न्याय का इंतजार कर रहे हैं। क्या प्रशासन इस घोटाले पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाएगा। क्या गांव के विकास के लिए आई राशि का सही उपयोग होगा, या फिर यह भी कागजों तक ही सीमित रह जाएगा? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी? छोटेडोंगर और अन्य प्रभावित पंचायतों के लोग अब भी असली विकास का इंतजार कर रहे हैं।

पाकिस्तान में चैंपियंस ट्रॉफी की टिकट भी पूरी नहीं बिक पाईं और पाकिस्तान को नुकसान हुआ

लाहौर आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 भारत अपने नाम कर चुका है। संडे को दुबई में हुए फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराकर यह ट्रॉफी अपने नाम की। इस बार इस टूर्नामेंट का आयोजक पाकिस्तान था। पाकिस्तान ने इस टूर्नामेंट के सफल आयोजन के लिए पानी की तरह पैसा बहाया था। पाकिस्तान में 29 साल बाद कोई आईसीसी टूर्नामेंट का आयोजन हुआ था। लेकिन भारत ने पाकिस्तान में खेलने से मना कर दिया था। इसके बाद भारत के सभी मैच दुबई में खेले गए। इससे पाकिस्तान को आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान हुआ। जले पर हार का नमक इस टूर्नामेंट के शुरू में ही भारत ने पाकिस्तान में खेलने से मना कर दिया था। चूंकि भारतीय क्रिकेट टीम के प्रशंसक दुनियाभर में फैले हुए हैं। ऐसे में जिस देश में भारतीय क्रिकेट टीम के मैच होते हैं, ज्यादातर प्रशंसक वहां मैच देखने पहुंच जाते हैं। इससे उस देश की अर्थव्यवस्था में भी तेजी आती है। भारत के न आने से पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पहले से भी खराब होने लगी थी। बाकी कसर पाकिस्तान की क्रिकेट टीम ने खुद कर दी। पाकिस्तान की क्रिकेट टीम लीग मैचों में ही हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई। ऐसे में दूसरे देशों की टीम के जो भी मैच पाकिस्तान में हुए, उन्हें देखने काफी कम दर्शक मैदान में पहुंचे। इससे टिकट भी पूरी नहीं बिक पाईं और पाकिस्तान को नुकसान हुआ। हजारों करोड़ रुपये किए खर्च पाकिस्तान में आतंक के साए के चलते मैदानों पर क्रिकेट काफी कम होता है। पिछली बार साल 1996 में आईआईसी टूर्नामेंट का आयोजन हुआ था। तब से लेकर अब तक पाकिस्तान का पहला वैश्विक आयोजन था। इसके लिए कराची, लाहौर और रावलपिंडी के स्टेडियमों को अपग्रेड किया गया। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस पर पाकिस्तान ने 64 मिलियन डॉलर (करीब 558 करोड़ रुपये) खर्च किए। इसके अलावा हॉस्पिटैलिटी और ट्रांसपोर्ट पर करीब 9 मिलियन डॉलर की रकम खर्च की। कितना हुआ नुकसान? पाकिस्तान अपने देश में ही कुल दो मैच खेल पाया। पहले मैच में उसे न्यूजीलैंड से और दूसरे मैच में भारत से हार मिली। इसके बाद ही पाकिस्तान के सेमीफाइनल में पहुचंने के रास्ते बंद हो गए। अंतिम लीग मैच बांग्लादेश से होना था जो बारिश के कारण रद्द हो गया था। इसमें पहला मैच कराची में हुआ, जिसमें काफी संख्या में पाकिस्तानी दर्शक कराची पहुंचे। इसके बाद पाकिस्तान के स्टेडियम खाली ही नजर आए। पाकिस्तान को ICC से होस्टिंग फीस के रूप में 6 मिलियन डॉलर (करीब 52 करोड़ रुपये) मिलेंगे। टिकटों की बिक्री से पाकिस्तान को बहुत ज्यादा कमाई नहीं हुई है। साथ ही पाकिस्तान पहुंचने वाले विदेशी दर्शक भी काफी कम रहे। ऐसे में पाकिस्तान को इस टूर्नामेंट से उतनी कमाई नहीं हुई, जितनी रकम उसकी खर्च हो गई।

मध्य प्रदेश में पेट्रोल पर 29 प्रतिशत वैट और डीजल पर 19 प्रतिशत वैट लगाया जा रहा है

भोपाल  महंगाई के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमत को भी जिम्मेदार बताया जाता है। देश में मध्य प्रदेश पेट्रोल-डीजल पर सर्वाधिक टैक्स वसूलने वाला पांचवां राज्य है। यहां पेट्रोल-डीजल पर टैक्स के ऊपर भी टैक्स लग रहा है। पेट्रोल पर 29 प्रतिशत वैट (वेल्यू एडेड टैक्स), 2.5 रुपये प्रति लीटर के साथ एक प्रतिशत सेस लिया जा रहा है। इसी तरह डीजल पर 19 प्रतिशत वैट, 1.5 रुपये प्रति लीटर वैट के साथ एक प्रतिशत सेस लिया जा रहा है। इसे घटाने के लिए कांग्रेस महंगाई का हवाला देकर सरकार पर दबाव भी बनाती है लेकिन सरकार इसके पक्ष में नहीं हैं। दरअसल, राज्य की आय का बड़ा स्रोत पेट्रोल-डीजल से होने वाली राजस्व प्राप्ति है। जीएसटी के बाद बिक्री कर का नंबर मध्य प्रदेश की सभी करों से स्वयं की आय वित्त वर्ष 2024-25 में एक लाख दो हजार करोड़ रुपये से आसपास अनुमानित है। इसमें जीएसटी, बिक्री कर, प्रवेश कर और विलासिता कर का योगदान सर्वाधिक 61,026 करोड़ रुपये है। जीएसटी के बाद बिक्री कर का नंबर आता है। इसमें पेट्रोल-डीजल पर लगाया जाना वाला वैट महत्वपूर्ण है। इससे लगभग 20 हजार करोड़ रुपये सरकार को मिलते हैं। एक प्रकार से देखा जाए तो सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना पर वर्षभर में व्यय होने वाली राशि की पूर्ति इस एक अकेले माध्यम से हो जाती है। आम आदमी पर पड़ता है सीधा असर यही कारण है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होने और लोकसभा चुनाव के पहले केंद्र सरकार द्वारा दो रुपये प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल के दाम करने के बावजूद वैट कम करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखा पाई। जबकि, इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ता है। महंगाई बढ़ती है और घर का बजट गड़बड़ा जाता है। गृहिणियों की भी अपेक्षा है कि बजट में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला टैक्स कम किया जाए। छत्तीसगढ़ की तरह दी जा सकती है राहत सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश सरकार भी छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार की तरह पेट्रोलियम पदार्थ की कीमत पर कुछ राहत दे सकती है। बजट में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रति लीटर एक रुपये कम की घोषणा की है। मध्य प्रदेश में पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर जो अतिरिक्त वैट लिया जा रहा है, उसकी राशि में कटौती संभव है। दरअसल, सरकार खनिज सहित अन्य क्षेत्रों में आय बढ़ाने का लगातार प्रयास कर रही है। पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स कुछ कम करके उसकी पूर्ति दूसरे माध्यम से आय बढ़ाकर की जा सकती है। हालांकि, सरकार का मानना है कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के पास स्वयं की आय बढ़ाने के रास्ते बहुत सीमित हो गए हैं। जबकि, खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। किसी प्रदेश में कितना वैट मध्य प्रदेश देश का पांचवां ऐसा राज्य है, जहां पेट्रोल और डीजल पर अधिक टैक्स लिया जाता है। तेलंगाना में पेट्रोल पर 35.20 और डीजल पर 27 प्रतिशत वैट लग रहा है। जबकि, आंध्र प्रदेश में पेट्रोल पर 31 प्रतिशत वैट, चार रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त वैट और एक रुपये प्रति लीटर सड़क विकास उपकर वसूला जाता है। डीजल पर 22.25 प्रतिशत वैट, चार रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त वैट और एक रुपये प्रति लीटर सड़क विकास उपकर लिया जा रहा है। केरल में पेट्रोल पर 30.08 प्रतिशत बिक्री कर, एक रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त कर, एक प्रतिशत उपकर और दो रुपये सामाजिक सुरक्षा उपकर लगता है। कर्नाटक में पेट्रोल पर 29.84 और डीजल पर 18.44 प्रतिशत टैक्स लगता है। पड़ोसी राज्य यूपी में पेट्रोल-डीजल सस्ता इसके बाद अधिक टैक्स वसूलने वाले राज्य में मध्य प्रदेश का नंबर आता है। स्थिति यह है कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में पेट्रोल-डीजल सस्ता है। आसपास रहने वाले न केवल पडोसी राज्य के पेट्रोल पंपों से पेट्रोल-डीजल भरवाते हैं बल्कि लंबी दूरी के वाहन भी लाभ होने के कारण उत्तर प्रदेश को ही प्राथमिकता देते हैं। सरकारी ऋण योजनाओं में दी जा सकती है स्टांपव एग्रीमेंट शुल्क में छूट सूत्रों का कहना है कि उद्यमिता और स्वरोजगार बढ़ाने के लिए सरकार बजट में केंद्र व प्रदेश सरकार की ऋण योजनाओं में 10 लाख रुपये तक के कर्ज पर स्टांप एग्रीमेंट शुल्क में छूट दे सकती है। अभी संपत्ति को बंधक बनाने पर 0.25 प्रतिशत शुल्क ऋण लेने वाले को देना होता है। इस तरह कुल चार प्रकार के शुल्क ऋण लेने वाले पर लगते हैं। सभी को मिला लें तो यह एक प्रतिशत के लगभग होता है। 10 लाख रुपये के ऋण पर लगभग 10 हजार रुपये शुल्क लग जाता है। इसमें छूट दी जाती है तो इसकी बचत होगी।

इंदौर में मालवा मिल-पाटनीपुरा रोड पर नया पुल बनेगा, दूर होगी जाम की समस्या

इंदौर  मालवा मिल-पाटनीपुरा सड़क होली के बाद तीन माह बंद रहेगी। वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करना पड़ेगा। मालवा मिल से पाटनीपुरा के बीच बनने वाले पुल के लिए शनिवार को भूमिपूजन किया गया। वर्तमान पुल जर्जर अवस्था में होकर संकीर्ण है। इस वजह से यहां अक्सर जाम की स्थिति बनती है। शनिवार को हुए भूमिपूजन कार्यक्रम में विधायक रमेश मेंदोला, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर सभापति मुन्नालाल यादव एमआइसी सदस्य नंदकिशोर पहाड़िया आदि उपस्थित थे। राठौर ने बताया कि यह पुल 30 मीटर चौड़ा और 21 मीटर लंबा होगा। इसके निर्माण पर करीब छह करोड़ रुपये लागत आ रही है। इस पुल के तैयार होने के बाद क्षेत्रवासियों को राहत मिलेगी। बार-बार लगने वाले जाम से भी निजात मिलेगी। वर्तमान पुल ऐरन से बना है और करीब 100 वर्ष पुराना और 40 फीट चौड़ा है। नया पुल करीब 100 फीट चौड़ा होगा। प्रतिमा हुई शिफ्ट, पाटनीपुरा चौराहे से गुजरना होगा आसान यातायात समस्या हल करने के लिए नगर निगम ने पाटनीपुरा चौराहे की रोटरी हटाने का काम शुरू कर दिया है। इस रोटरी पर लगी श्रमिक नेता रामसिंह भाई की प्रतिमा रविवार शिफ्ट कर दी गई। इसे पास ही डिवाइडर पर स्टैंड बनाकर शिफ्ट किया गया है। निगम यातायात विभाग जल्द ही चौराहे पर नए सिग्नल लगाएगा। इसके लिए सर्वे सोमवार से शुरू हो जाएगा। करीब 22 वर्ष पहले कांग्रेस शासनकाल में पाटनीपुरा चौराहे पर रोटरी बनाकर श्रमिक नेता रामसिंह भाई की प्रतिमा लगाई गई थी। पहले यह रोटरी काफी बड़ी थी। चौराहे पर अक्सर जाम की स्थिति बनती थी इसकी वजह से चौराहे पर अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती थी। इसे देखते हुए इंजीनियरों के सुझाव पर रोटरी को दो बार छोटा भी किया गया, लेकिन समस्या हल नहीं हुई। अंतत: रोटरी को हटाने का निर्णय लिया गया। रविवार को करीब दो घंटे की मशक्कत कर प्रतिमा शिफ्ट कर दी गई। इसके बाद रोटरी तोड़ने का काम शुरू हुआ। पाटनीपुरा चौराहे की रोटरी तोड़कर निगम यातायात व्यवस्था सुधारने की बात कर रहा है। सिग्नल कहां लगे, इसका होगा सर्वे निगम पाटनीपुरा चौराहे पर सिग्नल व्यवस्था के बदलाव के लिए सर्वे करेगा। निगम अधिकारी वैभव देवलासे ने बताया कि सर्वे में यह देखा जाएगा कि सिग्नल चौराहे के बीचोबीच लगाया जाए या साइड में। सर्वे कर एक सप्ताह में सिग्नल लगा दिए जाएंगे।

धार्मिक संघर्षों से देश को नुकसान होता है, जैसे कि सीरिया और अफगानिस्तान में हुआ ; के.के. मोहम्मद

 भोपाल केके मोहमद, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएआइ) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक रह चुके हैं, अयोध्या में बाबरी मस्जिद स्थल पर की गई खुदाई की जांच प्रोजेक्ट में शामिल थे। उन्होंने अपने शोध और अनुभव के आधार पर पहले भी कहा था कि बाबरी मस्जिद के नीचे एक मंदिर के अवशेष मौजूद थे।  विशेष चर्चा (Exclusive Interview) में उन्होंने कहा कि देशवासियों को मंदिर-मस्जिद जैसे विवादों में कतई नहीं पड़ना चाहिए, वरना देश सीरिया या अफगानिस्तान बन जाएगा, इसका आशय यह है कि वे धार्मिक विवादों को समाप्त कर देश में शांति, सौहार्द्र और विकास को प्राथमिकता देने की वकालत कर रहे हैं।  धार्मिक संघर्षों से देश को नुकसान होता है, जैसे कि सीरिया और अफगानिस्तान में हुआ, जहां धार्मिक और सांप्रदायिक हिंसा ने सामाजिक ताने-बाने को नष्ट कर दिया। भारत को अपने बहुलतावाद और सहिष्णुता की परंपरा को बनाए रखना चाहिए, जिससे सामाजिक स्थिरता बनी रहे। मंदिर और मस्जिद के मुद्दे को ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हिंदू और मुस्लिम समुदायों को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए और आपसी सौहार्द बनाए रखना चाहिए, ताकि देश का विकास बाधित न हो। केके मोहमद पहले भी इस विवाद पर तथ्यात्मक और संतुलित दृष्टिकोण रखते रहे हैं। अयोध्या में बाबरी मस्जिद के नीचे जो पिलर थे, उनमें कलश रूपी आकृतियां थीं उन्होंने अपनी किताब नरसिंहराव और बाबरी मस्जिद: एक पुरातत्वविद का दृष्टिकोण’’ में इस मुद्दे पर विस्तार से लिखा भी है। उन्होंने कहा – अयोध्या में बाबरी मस्जिद के नीचे जो पिलर थे, उनमें कलश रूपी आकृतियां बनी हुई थीं। यही एक प्रमाण हमें हिंदू मंदिर होने के लिए संकेत कर रहा था। 1976-77 में प्रो. बीबी लाल, जो पद्मश्री, पद्मभूषण हैं, के अंडर में हमारी टीम ने राम मंदिर प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था। उस समय मस्जिद के ऊपरी और भीतरी तह तक का परीक्षण किया। हमने देखा कि मस्जिद के जितने पिलर यानी बेस थे, उनकी बनावट देखकर ही समझ में आ गया कि ये मंदिर के हैं, मस्जिद के नहीं। क्योंकि उनमें पूर्ण कलश स्थापित किए हुए थे। ये देखने के बाद खुदाई कार्य शुरू किए। प्रो. लाल जो नेतृत्व कर रहे थे, इस नतीजे पर पहुंचे कि ये मस्जिद नहीं, बल्कि मंदिर का हिस्सा है। लेकिन उस समय इसे सार्वजनिक रूप से उजागर नहीं किया, क्योंकि विवाद हो सकता था। विक्रमोत्सव में आज होंगे मुय अतिथि विक्रमोत्सव के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय इतिहास सामगम का शुभारंभ सोमवार सुबह 10.30 बजे पं. सूर्यनारायण व्यास संकुल, कालिदास अकादमी में होगा। इस समागम में अमेरिका से शोध अध्येता डॉ. श्रैयाहरि तथा नेपाल के राष्ट्रपति के संस्कृति सलाहकार डॉ. लक्ष्मण पंथी शामिल होंगे। उद्घाटन कार्यक्रम के मुय वक्ता अभा इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. बालमुकुंद पांडे होंगे। मुख्य अतिथि भारतीय पुरातत्वविद पद्मश्री केके मोहमद तथा सारस्वत अतिथि के रूप में महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के पूर्व निदेशक पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित उपस्थित रहेंगे। तीन दिवसीय इस समागम में भारतीय इतिहास को लेकर गंभीर विचार विमर्श होगा। कार्यक्रम पांच सत्रों में बांटा गया है। मथुरा और ज्ञानवापी मस्जिद हिंदुओं को सौंपे दें– खुदाई से एक मंदिर की नींव का पता चला, जिसमें अष्टमंगला प्रतीकवाद में व्यवस्थित 12 स्तंभ थे। मनुष्यों और जानवरों की टेराकोटा आकृतियों ने पहले से मौजूद मंदिर के अस्तित्व की परिकल्पना करने के लिए हमें प्रेरित किया। आलोचनाओं का सामना करने के बावजूद हम इस प्रोजेक्ट के लिए डटे रहे। मुसलमानों को मथुरा और ज्ञानवापी मस्जिद के स्थान को खुद ही हिंदुओं को उपहार की तरह सौंप देना चाहिए। उनकी जो पवित्र इमारत है, उसे कहीं अन्य उपयुक्त स्थल पर स्थानांतरित करने के लिए मुसलमानों को आगे आना चाहिए। इससे सरकार एवं सर्व समाज से भी सहयोग मिल सकेगा। इस स्थानांतरण की प्रक्रिया में पवित्रता एवं समान का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

राजगढ़ में विद्युत वितरण कंपनी ने बकायादार पर सख्ती बरतना की शुरू, काटी जाएगी बिजली

भोपाल  एमपी के ब्यावरा में बिजली कंपनी के वसूली अभियान के तहत आगामी गर्मी के दिनों में 100 फीसदी बकाया वाले गांवों के कनेक्शन को फिर से काटा जाएगा। साथ ही जिन गांवों में कम बकाया है या जो लोग जमा कर रहे हैं उन्हें छोड़ बाकियों के कनेक्शन भी काटे जाएंगे। दोबारा जोड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  दरअसल, करोड़ों रुपए की बकाया राशि वसूलने के लिए बिजली कंपनी ने सख्ती की है। गांव, शहरी क्षेत्र के घरेलू, पम्प और व्यवसायिक सभी प्रकार के कनेक्शनों की जांच की जा रही है। कंपनी ने अपने एसई, डीई, जेई को वसूली का जिम्मा दिया है, जिसकी मॉनीटरिंग हर दिन की जा रही है। कई गांवों को दिया गया नोटिस हालांकि बिजली कंपनी की इस सख्ती से कई गांवों निवासरत पढ़ाई करने वाले बच्चों की फजीहत हो गई। कई किसानों की सिंचाई प्रभावित हो गई है। बता दें कि हाल ही में बिजली कंपनी सुठालिया के 130, मलावर के 19 गांवों के अलावा पूरे जिले के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे गांव जहां बिल्कुल ही बिल जमा नहीं किए गए उन्हें काट दिया था। साथ ही कई गांवों को नोटिस दे रखे हैं, उन्हें परीक्षा के सीजन के बाद काटने की तैयारी है। हालांकि वर्तमान में अधिकतर गांवों में बिजली सप्लाई चालू करवाई गई है लेकिन यह अस्थाई व्यवस्था है। फिर से कंपनी सख्ती कर सकती है। हर घर मीटर लगेंगे बिजली कंपनी ने एक और अभियान शुरू किया है, जिसके तहत प्रत्येक घर (कनेक्शन) में मीटर लगना अनिवार्य किया है। यह व्यवस्था शहरों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में भी लागू रहेगी। इसके अलावा अत्यधिक लोड वाले ट्रांसफॉर्मर भी चिह्नित किए जा रहे हैं। इसके तहत घरों में लगने वाले अधिक लोड के हीटर, रॉड और अन्य बिजली उपकरणों की भी जांच की जाएगी। या तो उन्हें बंद करना होगा या मीटर पर आने वाली रीडिंग के हिसाब से बिल देना होगा। कोरोना काल में बढ़े हुए बिजली बिलों पर लगने वाला एरियर भी बिजली कंपनी ने माफ नहीं किया है। वहीं, चुनावी सीजन के दौरान भी जो सरचार्ज जुड़कर आ रहा था, उसे माफ करने की बात कंपनी के अफसरों ने कही थी, लेकिन इस संबंध में कोई बात नहीं कर रहा है। जिससे आम उपभोक्ता पर दोहरी मार यहां पड़ी है। जिन पर अत्यधिक भार एरियर और सरचार्ज का है, वे अब मौजूदा बिल के साथ जमा नहीं कर पा रहे हैं। जिससे उन्हें दिक्कतें हो रही हैं। कंपनी का तर्क है कि कोरोना काल में एरियर को उसी समय के अगले दो- तीन माह में जमा करने को कहा था, चुनावी सीजन का सरचार्ज माफ करने के निर्देश फिलहाल नहीं मिले हैं। 100 % बकाया वाले ही काट रहे 100 फीसदी बकाया वाले गांव ही हमने काटे हैं, जहां की कुछ राशि जमा हैं वहां उन्हीं के कनेक्शन काट रहे हैं जिनके बिल बकाया हैं। जो नियमित बिल जमा कर रहे हैं उन्हें हम परेशान नहीं कर रहे। बकाया बिल तो देना ही होगा। शासन स्तर पर ही वसूली के लिए निर्देश हैं। परीक्षा के दौर है, इसके बाद फिर से बकायादारों पर कार्रवाई यथावत तरीके से शुरू की जाएगी। -एसके खरे, एसई, बिजली, राजगढ़ किसानों के लिए ऑफर, पांच रु. में मिलेगा कनेक्शन ! वसूली की सख्ती के बीच बिजली कंपनी ने किसानों के लिए एक योजना शुरू की है। जिसके तहत महज पांच रुपए में उन्हें परमानेंट कनेक्शन मिल जाएगा। यानी अभी उन्हें राशि जमा करने की जरूरत नहीं होगी, संबंधित लाइनमैन को पांच रुपए देकर दस्तावेज जमा कर कनेक्शन चालू कराया जा सकेगा। इससे पहले ऑनलाइन पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करना होता था, कनेक्शन चार्ज, सुरक्षा निधि, पंजीयन शुल्क भी देना होता था। अब पंजीयन शुल्क करीब 1500 रुपए माफ कर दिए गए हैं। वहीं, सुरक्षा निधि 1200 रुपए प्रति एचपी के हिसाब से अगले माह के बिजली बिल में जुड़कर दी जाएगी। पहले सभी प्रकार के शुल्क जमा करना होते थे, तभी कनेक्शन होता था।  बिल जमा करने की अपील बता दें कि राजगढ़ के 64 गांव पर 5 करोड़ 91 लाख रुपए का बकाया है, इसको लेकर कई बार कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं को समझाया गया और बिल जमा करने की अपील भी की गई। लेकिन किसी भी उपभोक्ता द्वारा बिजली का बिल जमा नहीं किया जा रहा है। ऐसे में अब कंपनी ने अंतिम चेतावनी जारी करते हुए गांव के लोगों को बिजली का बिल जमा करने के लिए कहा है। ऐसा न करने पर पूरे गांव के गांव की बिजली काटी जाएगी। कंपनी की अपील ● यदि उपभोक्ता तत्काल अपने बकाया का भुगतान नहीं करते हैं, तो नियमानुसार ग्राम के समस्त बकायादार उपभोक्ताओं के विद्युत कनेक्शन विच्छेद करने की कार्यवाही की जाएगी। ● इस कार्यवाही को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए कंपनी द्वारा प्रशासन एवं पुलिस बल की सहायता ली जाएगी। ● प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से अनुरोध है कि वे उपभोक्ताओं को बकाया भुगतान हेतु प्रेरित करें एवं प्रक्रिया को शांतिपूर्ण एवं सुचारू रूप से संपन्न कराने में सहयोग दें। ● बकाया उपभोक्ताओं से पुन: अनुरोध किया जाता है कि वे अपने स्वयं के संसाधनों से शीघ्र अति शीघ्र राशि जमा करें. अन्यथा नियमानुसार विद्युत विच्छेद की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ● इस संबंध में यदि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा होती है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी उन्हीं की होगी। 64 गांव शामिल डूंगरपुरा, बांकना, मागनियाखेड़ी, टीटोड़ी, जुगलपुरा, लालतलाई, विजयगढ़, फेटापुरा, भैनपुरा, फत्तूखेड़ी, रघुनाथपुरा, दाताग्राम, मालीपुरा, दिलावरी, बगा, ऊंचाखेड़ा, जैतपुरा, चौकी चंदरपुरा, दिलावरा, गंगापाट, नानौरी, जोड़क्या, हिनौती सहित करीब 64 गांव शामिल है। कनेक्शन काटा जाएगा कंपनी के स्पष्ट निर्देश हैं जिन गांव से बिल नहीं आ रहा है, वहां के कनेक्शन काटे जाएं हम ग्रामीणों को अंतिम चेतावनी दे रहे हैं। फिर भी बिल जमा नहीं होता तो पूरे गांव का कनेक्शन काटा जाएगा। -रवि बड़ोले, जेई राजगढ़ ग्रामीण

उच्च शिक्षा विभाग की विभागीय परामर्शदात्री समिति की बैठक हुई

भोपाल उच्च शिक्षा विभाग की विभागीय परामर्शदात्री समिति की बैठक उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परामार की अध्यक्षता में हुई। बैठक में विधायक श्रीमती प्रियंका पैची, श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकी एवं राजेन्द्र भारती, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन एवं आयुक्त उच्च शिक्षा निशांत वरवड़े उपस्थित थे। बैठक में महाविद्यालयों में छात्रों एवं प्राध्यापकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, महाविद्यालयों में नये संकाय शुरू करने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, जन-भागीदारी समितियों में जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने के सुझाव विधायकों ने दिये। बैठक में शिक्षकों के प्रशिक्षण, पदोन्नति, वेतन वृद्धि, स्थायीकरण, प्रौद्योगिकी उपयोग, स्थानांतरण प्रकिया, शिकायत निवारण समितियां और संसाधन बैंक बनाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।  

मध्य प्रदेश सरकार के बजट में पहली बार सबसे अधिक महत्व युवा, महिला, गरीब और किसानों को दिया गया

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार का बजट सत्र कल सोमवार से शुरु हो गया है. लेकिन पहली बार इस बजट में सबसे अधिक महत्व युवा, महिला, गरीब और किसानों को दिया गया है. मौजूदा बजट सत्र में राज्य सरकार विभिन्न विभागों में खाली एक लाख से अधिक पदों को भरने का ऐलान कर सकती है. स्कूल शिक्षा विभाग में करीब 24,500 और ग्रह विभाग में 20 हजार से अधिक पद भरे जाने हैं. इसके साथ ही निजी क्षेत्रों में भी सरकार आगामी 5 सालों में ढाई लाख रोजगार देने का वादा कर रही है. लाडली बहनों के खातों में आती रहेगी सम्मान निधि इस बजट में मध्यप्रदेश सरकार महिलाओं को कई तोहफे देने जा रही है. सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए लखपति दीदी का दायरा 5 लाख से अधिक बढ़ाने का प्रयास कर रही है. इस बजट में सरकार ने प्रदेश की 15 लाख महिलाओं को आर्थिक रुप से सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा है. वहीं लाडली बहना योजना के लिए भी सरकार 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट रख सकती है. यानि मध्यप्रदेश में लाडली बहना बंद नहीं होगी. यह चलती रहेगी. इसके साथ ही उज्जवला योजना के तहत महिलाओं को गैस सिलेंडर की सब्सिडी के रुप में 450 रुपये की राशि मिलती रहेगी. वहीं इस बार बजट सत्र के दौरान सरकारी नौकरियों में महिलाओं का कोटा 35 प्रतिशत से अधिक रह सकता है.         गरीबों को मिलेंगे 6 लाख नए मकान, किसानों का बढ़ेगा बोनस मध्यप्रदेश सरकार इस बजट सत्र में गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 6 लाख नए किफायती मकानों को बनाने की घोषणा कर सकती है. अधिकारियों का कहना है कि, ”इसमें 4 लाख मकान ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए जाएंगे. वहीं किसानों को धान का बोनस 4 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर किया जाएगा. गेंहू में सरकार 175 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस देगी.” किसानों को अल्पकालीन कर्ज के लिए भी 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जा रहा है. किसानों को खेती के लिए सस्ती बिजली की सौगात भी इस बजट में सरकार दे सकती है. वहीं यह बजट कर्मचारियों के लिए भी खास रहने वाला है. सरकार उनका मंहगाई भत्ता 14 प्रतिशत तक बढ़ाने का ऐलान कर सकती है.

भारत के सबसे साफ शहर में नहीं होगा कोई ट्रैफिक सिग्नल, AI की मदद से होगा कमाल, जानें मोहन सरकार का प्लान

इंदौर मध्य प्रदेश सरकार राज्य की व्यावसायिक राजधानी और देश के सबसे साफ शहर इंदौर को ट्रैफिक सिग्नल रहित शहर बनाने की योजना पर काम कर रही है। एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि यातायात प्रबंधन को स्मार्ट और अधिक कुशल बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी। शहरी विकास और आवास विभाग इंदौर को सिग्नल रहित शहर बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य शहर में यातायात को निर्बाध रूप से संचालित करना है। इस योजना के तहत फ्लाईओवर, बाईलेन, अंडरपास और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम जैसी पहलों को लागू किया जा रहा है। आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस योजना के पूरा होने पर नागरिकों का यात्रा समय कम हो जाएगा और यातायात सुचारू रहेगा। सुविधाजनक होगा शहरी यातायात सिग्नल रहित योजना तेजी से बढ़ते शहरी यातायात को सुविधाजनक बनाने और यात्रा समय को कम करने में मदद करेगी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि विभाग द्वारा प्रदेश के शहरी मार्गों पर 1330 बसों का संचालन किया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए पीएम ई-बस सेवा में 552 ई-बसों की खरीद का प्रस्ताव केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को भेजा गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन और सागर के लिए बस डिपो अधोसंरचना के अनुमानों को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही भोपाल, जबलपुर, उज्जैन और सागर के लिए चार्जिंग अधोसंरचना के अनुमानों को मंजूरी दी गई है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि भोपाल, इंदौर और जबलपुर में इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा 217 ई-चार्जिंग अधोसंरचना विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। योजना के तहत फ्लाईओवर, बाईलेन, अंडरपास और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम जैसी पहलों को लागू किया जा रहा है। योजना के पूरा होने पर नागरिकों की यात्रा का समय कम होगा और ट्रैफिक सुचारू रहेगा। इसमें कहा गया है कि सिग्नल फ्री योजना तेजी से बढ़ते शहरी यातायात को सुगम बनाने और यात्रा समय को कम करने में मदद करेगी। आधिकारिक विज्ञप्ति में यह भी जानकारी दी गई है कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर मध्य प्रदेश के शहरी मार्गों पर 1330 बसें चल रही हैं। शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए पीएम ई-बस सेवा में 552 ई-बसों की खरीद का प्रस्ताव केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को भेजा गया है। यही नहीं भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन और सागर के लिए बस डिपो इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुमानों को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही भोपाल, जबलपुर, उज्जैन और सागर के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुमानों को मंजूरी दी गई है। आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि भोपाल, इंदौर और जबलपुर में इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन को बढ़ावा देने के लिए विभाग की ओर से 217 ई-चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का काम किया जा रहा है।

कमर चीमा ने कहा कि भारत युद्ध लड़कर ही कश्मीर ले सकता है, जयशंकर का पाकिस्तान को POK से दावा छोड़ने का सुझाव

इस्लामाबाद  भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि पाकिस्तान अगर अपने कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर दावा छोड़ देता है तो दोनों देशों के बीच विवाद का सबब बना ये मुद्दा सुलझ जाएगा। जयशंकर ने बीते हफ्ते लंदन में एक कार्यक्रम के दौरान ये बात कही है। उनके बयान की भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी चर्चा हो रही है। पाकिस्तान में उनके इस बयान को भारत की पीओके पर हमला करने की धमकी की तरह भी देखा जा रहा है। वहीं कई एक्सपर्ट इसे सिर्फ सियासी जुमला मान रहे हैं। पाकिस्तान की पत्रकार आरजू काजमी ने कमर चीमा से इस मुद्दे पर बात की है। आरजू काजमी ने अपने यूट्यूब चैनल पर कमर चीमा से बात करते हुए कहा कि जयशंकर सीधेतौर पर कह रहे हैं कि पाकिस्तान कश्मीर से हट जाए। आरजू ने चीमा से सवाल किया कि ऐसा नहीं लगता कि अपनी सरकार से इजाजत के बिना कोई विदेश मंत्री ऐसा बयान दे सकता है। इस बयान के बाद क्या ये माना लिया जाए कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने पीओके पर हमले जैसा कोई इशारा दे दिया है। ‘जयशंकर के बयान में गंभीरता नहीं’ आरजू के सवाल का जवाब देते हुए चीमा ने कहा, ‘भारत की आधिकारिक नीति शायद ऐसी नहीं है। मुझे नहीं लगता कि कल पाकिस्तान से भारत की कश्मीर पर कोई बातचीत होगी तो भारत ये कहेगा कि पीओके दे दो और सारा झगड़ा खत्म है। ये सीरियस बात नहीं लगती है लेकिन भारत की सत्ताधारी भाजपा ने इसे राजनीति का मुद्दा जरूर बनाकर रखा है। जयशंकर से पहले राजनाथ सिंह और अमित शाह जैसे मोदी सरकार के सारे बड़े चेहरे भी पीओके पर इसी तरह की बात कर चुके हैं।’ चीना ने आगे कहा, ‘भाजपा ने चुनाव में पीओके का बार-बार इस्तेमाल किया है लेकिन उन्होंने इसे चुनावी घोषणा पत्र में शामिल नहीं किया है। मुझे लगता है कि जयशंकर ने भी कुछ ऐसा ही किया है। उनसे सवाल भी इसी तरह हुआ था कि मैं आपको असहज करके पूछता हूं तो उन्होंने भी सवाल करने वाले बुजुर्ग को ऐसा ही जवाब दे दिया। दरअसल भाजपा चाहती है कि लोगों के बीच ऐसा संदेश जाए कि हम मजबूत सरकार हैं, जो पीओके लेने की बात करते हैं। ये भी इसी कड़ी का हिस्सा है। चीमा का सवाल- क्या भारत युद्ध लड़ेगा? चीमा ने कहा कि भारत युद्ध लड़कर ही कश्मीर ले सकता है। कश्मीर में जिस तरह से पहाड़ और नदिया हैं, वहां जंग भी आसान नहीं है। भारत की फौज बड़ी है लेकिन पाकिस्तान भी बड़ी सैन्य ताकत है। ऐसे में एक बड़े जंग से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि भारत युद्ध में जाना चाहेगा, मुझे ऐसा कतई नहीं लगता है। पाकिस्तानी राजनीतिक टिप्पणीकार चीमा ने आगे कहा कि पाकिस्तान ने भी हजार बार भारत से कश्मीर लेने की कस्में खाई हैं। मैं पूछता हूं कि क्या पाकिस्तान ऐसा कर सकता है। दोनों ओर से ही कश्मीर पर दावें हैं लेकिन ये जुबानी जमाखर्च ही है। मुझे लगता है कि जयशंकर शायद इस तरह की बात ना करते लेकिन उनसे सवाल इसी अंदाज में हुआ तो उन्होंने भी चुटीले अंदाज में जवाब दे दिया।

रिजर्व बैंक ने जनवरी 2025 में 2.83 टन सोना खरीदा, सोना खरीदने में भारत ने अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान को पीछे छोड़ा

नई दिल्ली  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पिछले कुछ वर्षों से सोना खरीदने में लगा हुआ है। पिछले 5 वर्षों में रिजर्व बैंक ने सोने का अकूत खजाना इकट्ठा कर लिया है। 5 साल में सोना खरीदने में भारत ने अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है। इतने समय में सिर्फ चीन ही भारत से ज्यादा सोना खरीद पाया है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने यह जानकारी वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हवाले से दी है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक रिजर्व बैंक ने साल 2020 से साल 2024 तक पांच वर्षों में 244 टन सोना खरीदा है। इस दौरान चीन ने 336 टन सोना खरीदा। भारत ने सोना खरीदना अभी भी बंद नहीं किया है। वहीं दूसरी ओर कई देश सोना खरीदने की रफ्तार कम कर चुके हैं। यहां चीन को भी छोड़ा पीछे साल 2024 की आखिरी तिमाही में भारत ने सोना खरीदने में चीन को भी पीछे दिया है। भारत ने इस तिमाही में 22.54 टन सोना खरीदा। वहीं चीन ने 15.24 टन सोना खरीदा। सिंगापुर ने अपने सोने के भंडार में 7.65 टन की कमी की। इस तिमाही में सबसे ज्यादा सोना (28.53 टन) पोलैंड ने खरीदा। इस साल भी रिजर्व बैंक की बड़ी खरीदारी साल 2025 में भी रिजर्व बैंक धड़ाधड़ सोना खरीद रहा है। इस साल जनवरी में रिजर्व बैंक ने 2.83 टन सोना खरीदा। इस खरीद के साथ रिजर्व बैंक को गोल्ड रिजर्व बढ़कर करीब 879 टन हो गया है। इसमें फरवरी के आंकड़े शामिल नहीं हैं। सोने में आखिर रुचि क्यों? सोने को हमेशा से संकट मोचक माना जाता है। दूसरे देशों के साथ कारोबार के लिए अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं काफी देश सोने में भी लेन-देन करते हैं। विदेशी मुद्रा का भंडार कम न रहे, इसलिए भारत समेत ज्यादातर देश सोने का इस्तेमाल करते हैं। जानकारों के सोना खरीदने के कई कारण बताए हैं। इस समय सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियां हैं। इससे ग्लोबल ट्रेड वॉर की आशंका के कारण सोने की मांग बढ़ गई है। आर्थिक और भूराजनीतिक उथल-पुथल के दौरान सोने को एक सेफ इंवेस्टमेंट के रूप में देखा जाता है। रिजर्व बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में रीवैल्यूएशन रिस्क और करेंसी की अस्थिरता को कम करने के लिए भी सोना खरीद रहा है।

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