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फिरोजाबाद के दिहुली हत्याकांड के 44 साल बाद कोर्ट ने तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई

दिहुली फिरोजाबाद के दिहुली हत्याकांड के 44 साल बाद फैसला आया। साल 1982 में डकैतों के गिरोह ने दलितों के गांव पर हमला बोल दिया था और अंधाधुंध गोलियां बरसाकर 24 लोगों की हत्या कर दी थी। जिसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं। दलित हत्याकांड मामले में अब कोर्ट ने 3 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। साथ ही 50-50 हजार का जुर्माना भी लगाया है। इससे पहले 11 मार्च को मैनपुरी कोर्ट में स्पेशल जज ने तीनों हत्यारोपियों को दोषी ठहराया था। अपर सत्र न्यायाधीश इंदिरा सिंह ने दोपहर साढ़े तीन बजे फांसी की सजा सुनाई। तीनों ही आरोपियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस हत्याकांड में 18 नवंबर 1981 को जसराना के ग्राम दिहुली में 24 लोगों की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। फैसला आने के बाद तीनों ही आरोपियों को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। त कोर्ट ने नरसंहार को बेहद जघन्य माना न्यायाधीश ने अपने आदेश में लिखा है कि हत्यारों को गर्दन में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जब तक कि इनकी मृत्यु न हो जाए। तीनों दोषियों की उम्र 75 से 80 साल है। इस हत्याकांड में कुल 20 हत्यारोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। जिसमें से 13 आरोपियों की मौत हो चुकी है और फरार चल रहे चार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कोर्ट ने स्थाई वारंट जारी कर रखे हैं। मामले की पैरवी एडीजीसी रोहित शुक्ला द्वारा की गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को आना पड़ा था दिहुली दिहुली में जब 44 साल पहले नरसंहार हुआ तब प्रदेश की सरकार हिल गई थी उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, ‌गृहमंत्री बीपी सिंह, मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी और विपक्षी नेता अटल बिहारी वाजपेई भी पीडितों का दर्द बांटने‌ देहुली पहुंचे थे। फिरोजाबाद जनपद क्षेत्र के थाना जसराना क्षेत्र का गांव दिहुली मे जव 18 नवंबर 1981 को संतोष सिंह उर्फ संतोषा और राधेश्याम उर्फ राधे के गिरोह के द्वारा दलित समाज के लोगों के ऊपर हमला कर सामूहिक नरसंहार के जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। उसे समय वह क्षेत्र मैनपुरी का हिस्सा हुआ करता था। चश्मदीदों ने बताया हत्याकांड मामले में मुख्य चश्मदीद गवाह बनवारी लाल ने बताया किउनके पिता ज्वाला प्रसाद की सबसे पहले खेत मे‌‌ आलू की खुदाई करते समय गोलियों से भून कर हत्या की गई थी। उसके साथ उनके बड़े भाई मनीष कुमार और भूरे सिंह और चचेरे भाई मुकेश की हत्या हुई थी। वह काफी दबाव के बाद भी अंतिम समय तक अपनी गवाही पर कायम रहे। ‌उन्हें इस बात का संतोष है कि देर से सही लेकिन उन्हें इंसाफ मिला है। आरोपियों को फांसी मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अधिकांश पीड़ित परिवार गांव से पलायन कर गए हैं केवल तीन परिवार ही गांव में रह रहे हैं। 90 वर्ष की जय देवी का कहना है कि अपने परिवार के लोगों के खोने का दर्द अभी भी नहीं भूल पाए हैं, न्याय मिलने में बहुत देरी हुई है। उन्होंने हमलावरो से छिपकर अपनी जान बचाई थी। दिहुली निवासी लायक सिंह ने सामूहिक नरसंहार की रिपोर्ट राधेश्याम उर्फ राधे संतोष सिंह उर्फ संतोषा समेत 17 लोगों के खिलाफ‌ दर्ज कराई गई थी। ‌दलित समाज के महिला पुरुष तथा बच्चो‌ं का शाम के समय पुलिस की वर्दी में पहुंचे डकैत के गिरोह के लोग जो हथियारों से लैस थे उनके द्वारा सामूहिक सत्याकांड को अंजाम दिया गया था। सामूहिक दलित समाज के हत्याकांड के पीछे बदमाशों के गिरोह की मुखबिरी और गवाही का मामला मुख्य रूप से सामने आया था। जिसको लेकर नाराज बदमाशों ने बदले की भावना से गांव में पहुंचकर हमला किया था। मामले की सुनवाई मैनपुरी जिला न्यायालय में चल रही थी जो बाद में हाई कोर्ट के निर्देश पर इलाहाबाद के सेशन कोर्ट में अक्टूबर 2024 तक ट्रायल चला था। जिला जज के आदेश पर अक्टूबर 2024 में संबंधित मामले को मैनपुरी की विशेष डकैती कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था।

सीएम योगी की फ्लीट के सामने आया सांड़, दो कर्मचारी निलंबित, 14 की सेवा समाप्त

वाराणसी वाराणसी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के दौरान फ्लीट के सामने सांड़ आने की घटना को गंभीरता से लिया है। पशु चिकित्सा एवं कल्याण विभाग के दो बेलदारों को निलंबित कर दिया गया है। आउटसोर्स पर तैनात 14 कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई। प्रशासन के सख्त रुख से खलबली मच गई है। सीएम योगी होली के ठीक पहले 12 मार्च को वाराणसी आए थे। इस दौरान विकास कार्यों का निरीक्षण करने के साथ ही समीक्षा बैठक की थी। काल भैरव और काशी विश्वनाथ मंदिर जाते समय कबीरचौरा में उनकी फ्लीट के सामने सांड़ आ गया था। तमाम सतर्कता और तैयारियों के बाद भी मुख्यमंत्री की फ्लीट के सामने सांड आने को बेहद गंभीर माना गया है। नगर आयुक्त अक्षत वर्मा ने बेलदार अमृतलाल और संजय प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। विभाग के प्रभारी अधिकारी डॉ. संतोष पाल को जांच अधिकारी नामित किया गया है। ये दोनों पशु चिकित्सा विभाग से सम्बद्ध किये गये हैं। इसी तरह आउटसोर्स के कर्मचारियों रजत, राकेश, रामबाबू, आशीष, अंकित, लालधारी, श्याम सुंदर, दीपक शर्मा, निशांत मौर्या, शुभम, राजेश कुमार, गंगाराम, अरविंद यादव, राघवेंद्र चौरसिया की सेवा समाप्त कर दी गई है। नगर आयुक्त ने आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती करने वाली कंपनी वॉरियर्स सिक्योरिटी ऐंड सर्विसेज के प्रबंधन को भी अंतिम चेतावनी दी है। इसमें कहा गया है कि अगली बार यदि उनके कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठे तो कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। साथ ही सभी 14 कर्मचारियों को नगर निगम के किसी अन्य विभाग में भी भविष्य में भर्ती के लिए न भेजने का निर्देश दिया गया है। छुट्टा पशुओं को लेकर लगातार राज्य के विपक्षी दल खासकर समाजवादी पार्टी योगी सरकार पर निशाना साधती रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव छुट्टा पशुओं से आम लोगों और किसानों को हो रहे नुकसान का मामला उठाते रहे हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने छुट्टा पशुओं के लिए गौशालाओं का निर्माण कराया है। अधिकारियों को भी छुट्टा पशुओं को लेकर खास हिदायते दी गई हैं। इसके बाद भी सीएम योगी की मौजूदगी में सांड़ का सड़क पर दिखना अधिकारियों पर सवाल खड़े कर गया।

मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा- नींव मजबूत होगी तो आने वाला भविष्य मजबूत होगा

भोपाल महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया मंगलवार को ‘पोषण भी-पढ़ाई भी’ पर एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि हमारी नींव मजबूत होगी तो आने वाला भविष्य मजबूत होगा। सक्षम आंगनवाड़ी मिशन 2.0 के तहत पोषण भी पढ़ाई भी कार्यक्रम केन्द्र सरकार का एक महत्वाकांक्षी प्रशिक्षण कार्यक्रम है। ये प्रशिक्षण राष्ट्रीय प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा तथा पोषण सेवा प्रदान करने की क्षमता विकसित करने के लिये एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि वर्ष 2023 में प्रारंभ की इस पहल का उद्देश्य बच्चों की देखभाल और शिक्षा पर आंगनवाड़ी प्रणाली पर ध्यान केन्द्रित किया जा सके और आंगनवाड़ी केन्द्र को उच्च गुणवत्ता वाली बुनियादी सुविधाओं, खेल के उपकरण और विधिवत प्रशिक्षित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ एक शिक्षण केन्द्र परिवर्तित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे 6 वर्ष के कम उम्र के बच्चों (विशेषकर दिव्यांग बच्चों) के रचनात्मक, सामाजिक, भावनात्मक और संज्ञानात्मक विकास को प्रोत्साहित किया जा सके। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नींव का पत्थर प्रमुख सचिव महिला बाल विकास श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने कहा कि आंगनवाड़ी एक आधारशिला है और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नींव का पत्थर है। उन्होंने कहा कि नींव के पत्थर किसी को नहीं दिखता लेकिन अगर वो मजबूत हो तो इमारत बुलंद होती है। बच्चों को खाना खिलाना, उनकी देखभाल करना अति आवश्यक है। आँगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और भौतिक संबल को बढ़ावा दे रही है। श्रीमती रश्मि शमी ने कहा कि यह 2 चरणों में होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम से आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका सशक्त बनेगी। उन्होंने कहा कि इसकी मॉनिटरिंग बेहतर तरीके से हो, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है। आँगनवाड़ी में होने वाली पढ़ाई के एसेसमेंट किये जाने पर भी ध्यान देना होगा। आयुक्त महिला बाल विकास श्रीमती सूफिया फारूकी वली ने बताया कि ‘पोषण भी-पढ़ाई भी’ के तहत आधारशिला और नवचेतना को आंगनवाड़ी केन्द्रों में क्रियान्वित करने के संबंध में कार्यकताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के द्वारा क्षमता संवर्द्धन के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं में पाठ्यक्रम और शैक्षणिक दृष्टिकोण की बुनियादी समझ विकसित एवं सक्षम बनाना है। भोपाल के होटल रेडिसन में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला में सभी संभागों के अधिकारी, सीडीपीओ, डीपीओ सहित अजीज प्रेमजी फाउन्डेशन और रॉकेट लर्निंग संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

ममता बनर्जी और लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहते हुए औसतन हर दिन एक या दो रेल दुर्घटनाएं होती थीं: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली रेल दुर्घटनाओं की हालिया घटनाओं के बाद विपक्ष की तरफ से किए गए हमलों के बीच राज्यसभा में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी और लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहते हुए औसतन हर दिन एक या दो रेल दुर्घटनाएं होती थीं जबकि अब सरकार की नीतियों के कारण यह संख्या कम होकर प्रति वर्ष केवल 30 दुर्घटनाओं तक रह गई है। पिछले कार्यकालों में कितनी दुर्घटनाएं हुईं? वैष्णव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे (2005-06) तो उस समय कुल 698 दुर्घटनाएं और पटरी से उतरने की घटनाएं हुई थीं। वहीं ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते हुए 395 दुर्घटनाएं और पटरी से उतरने की घटनाएं हुईं। कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे के रेल मंत्री बनने पर यह संख्या 38 तक सीमित हो गई थी। उन्होंने कहा, “पहले औसतन प्रतिदिन एक दुर्घटना होती थी लेकिन अब यह संख्या घटकर प्रति वर्ष सिर्फ 30 हो गई है। यदि हम 43 रेल दुर्घटनाओं को भी शामिल करें तो कुल दुर्घटनाएं 73 होती हैं यानी पहले जो आंकड़ा करीब 700 था वह अब 80 से भी कम हो गया है जोकि 90% की कमी को दर्शाता है।”   रेलवे क्षेत्र में सुधार की ओर कदम रेल मंत्री ने कहा कि बिहार के सारण जिले में स्थित मढ़ौरा फैक्ट्री से जल्द ही करीब 100 इंजन निर्यात किए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि यह फैक्ट्री पहले निष्क्रिय थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद इसे चालू किया गया। अब ‘मेड इन बिहार’ इंजन दुनिया भर के गंतव्यों तक पहुंचेंगे। रेलवे का वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य की योजना वैष्णव ने बताया कि भारतीय रेलवे ने कोविड महामारी के दौरान अपनी कार्यकुशलता को साबित किया है और अब यात्री और माल ढुलाई दोनों में वृद्धि देखी जा रही है। रेलवे की वित्तीय स्थिति अच्छी है और इसे लगातार सुधारने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि “अच्छे प्रदर्शन के कारण रेलवे अपने खर्चों को अपनी आय से पूरा कर रहा है।” उन्होंने यह भी बताया कि एक किलोमीटर यात्रा की लागत लगभग 1.4 रुपये है लेकिन यात्रियों से सिर्फ 73 पैसे लिए जाते हैं। इस साल भारतीय रेलवे ने 1,400 इंजनों का उत्पादन किया है जो अमेरिका और यूरोप के संयुक्त उत्पादन से अधिक है। नॉन-एसी कोच की संख्या बढ़ाने की योजना रेल मंत्री ने जनरल और नॉन-एसी कोच की संख्या घटाने के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जनरल कोचों की संख्या एसी कोचों की तुलना में 2.5 गुना बढ़ाई जा रही है। साथ ही मौजूदा उत्पादन योजना के तहत 17,000 नॉन-एसी कोचों का निर्माण किया जाएगा। वहीं अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में अपने बयान में रेलवे की सुधरी हुई स्थिति, दुर्घटनाओं में कमी और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे की वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है और इसे आगे और बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।  

कृषि में तकनीकी क्रांति के लिए उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग आवश्यक

भोपाल पुणे स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान में ‘रिसर्च इनोवेशन फॉर कमर्शियलाइजेशन’ विषय पर एक दिवसीय इंडस्ट्री-अकादमिक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर के एग्रीहब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा किया गया। कार्यशाला की शुभारंभ में आईआईटी इंदौर के एग्रीहब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की प्रमुख अन्वेषक प्रो. अरुणा तिवारी कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सहयोग बढ़ाकर ही अनुसंधान को व्यावसायिक स्तर पर ले जाया जा सकेगा। इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक (आईसीटी) डॉ. अनिल राय ने अनुसंधान एवं अकादमिक संस्थान और औद्योगिक अनुप्रयोगों के बीच की खाई को पाटने की आवश्यकता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं नवाचारों को मूर्त रूप देने और कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सहायक हो सकती हैं। कार्यशाला में सी-डैक पुणे की वैज्ञानिक सुश्री लक्ष्मी पनट ने कृषि क्षेत्र को आधुनिक और उन्नत बनाने के लिए मल्टी-बेनिफिशरी सहयोग को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि कृषि में तकनीक के समावेश से ही उत्पादकता में वृद्धि को स्टेबल और सस्टेनेबल बनाया जा सकता है। कार्याशाला में शामिल हुए असम साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी गुवाहाटी के कुलपति प्रो. नरेंद्र एस. चौधरी ने एरिया-स्पेसिफिक एआई और मशीन लर्निंग (एमएस) मॉडल विकसित करने की आवश्यकता जताई। अघारकर रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. प्रशांत ढकेफालकर ने कहा कि हरित क्रांति के बाद अब कृषि में एआई और एमएल आधारित अनुसंधान से नई तकनीकी कृषि क्रांति की आवश्यकता है। इससे भारत वैश्विक खाद्य उत्पादन और कृषि प्रौद्योगिकी में अग्रणी बन सकता है। कार्यशाला के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। इस दौरान उद्योग औऱ अकादमियों से आए विशेषज्ञों के ओपन पैनल डिस्कसन हुआ इसमें उद्योगों के सामने आर ही वर्तमान चुनौतियों और उनके समाधान पर विचार-विमर्श हुआ। अकादमिक विद्वानों ने अनुसंधान, उत्पाद व्यावसायीकरण और बौद्धिक संपदा (आईपी) प्रबंधन से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों पर भी चर्चा की। कार्यशाला में एग्रीहब के सहयोगी अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र, भारतीय फसलों के लिए एक समर्पित डेटा रिपॉजिटरी और उच्च-प्रदर्शन संगणना (एचपीसी) अधोसंरचना के बारे में जानकारी दी गई। कार्यशाला में बायोटेक कंसोर्टियम इंडिया लिमिटेड (बीसीआईएल) के साथ एमओयू किया गया। इसके अंतर्गत केन्द्रीय जैव प्रौद्योगिकी विभाग की विभिन्न कृषि तकनीकों पर सहयोग बढ़ाया जाएगा। कार्यशाला में प्रिसीजन एग्रीकल्चर, जीनोम विश्लेषण और बीज परीक्षण क्षेत्र में कार्यरत प्रमुख उद्योगों ने एग्रीहब परियोजना के तहत संयुक्त कार्यक्रम विकसित करने की सहमति व्यक्त की। साथ ही, विभिन्न स्टार्ट-अप्स और गैर-सरकारी संगठनों (एनचीओ) ने किसानों के लाभ के लिए संयुक्त कार्यक्रम विकसित करने की इच्छा व्यक्त की।  

माता टीला डेम में श्रद्धालुओं से भरी पलटी नाव, सात की मौत

शिवपुरी शिवपुरी में सिद्ध बाबा मंदिर पर फाग चढ़ाने जा रहे श्रद्धालुओं से भरी नाव पलट गई। इसमें सात लोगों की मौत की खबर है। सात को बचा लिया गया है। मरने वालों में दो लड़के, दो लड़कियां व तीन महिलाएं शामिल हैं। यह देर शाम की घटना है। प्रशासन मौके पर पहुंच रहा है। शिवपुरी के खनियाधाना थाना क्षेत्र स्थित माता टीला डेम में श्रद्धालुओं से भरी नाव पलटी है। रजावन गांव के लोग नाव से डेम के बीच बने टापू पर स्थित सिद्ध बाबा मंदिर के दर्शन करने जा रहे थे। बीच रास्ते में नाव अचानक असंतुलित होकर पलट गई। नाव में सवार कई लोग डूबने लगे। तीन घंटे हो चुके हैं। लापता का कोई पता नहीं चला है, शव मिलना बाकी हैं।

ओंकारेश्वर धाम भी महाकाल की तरह जगमगाएगा: मुख्यमंत्री डॉ.यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश के सभी धर्म स्थलों के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सौभाग्य का विषय है कि हमारे प्रदेश में महाकालेश्वर और ममलेश्वर दो ज्योतिर्लिंग विद्यमान हैं। सिंहस्थ से पहले ओंकारेश्वर धाम को महाकाल की तरह जगमगाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्थाओं के प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार की योजनाओं से आस्था के इन केंद्रों की दिव्यता- भव्यता और अधिक बढ़ेगी तथा प्रदेश के प्रति लोगों के आकर्षण और प्रेम में भी वृद्धि होगी । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओंकारेश्वर स्थित गौमुख घाट पर अवधूत सिद्ध महायोगी दादा गुरुजी की तृतीय चरण माँ नर्मदा सेवा परिक्रमा यात्रा के समापन कार्यक्रम के लिए भोपाल से प्रस्थान के पहले मीडिया के लिए जारी संदेश में यह विचार व्यक्त किए।  

राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ें : अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को लोकसभा में रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांगों और चर्चा पर जवाब दिया। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय रेल की प्रगति को रेखांकित करते हुए पंक्चुअलिटी, रोजगार, सुरक्षा, निर्यात और इंफ्रा डेवलपमेंट को प्राथमिकता दी। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रोजगार देने में भी रेलवे सबसे आगे है। उन्होंने देश की प्रगति के लिए सभी से राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।   रेल मंत्री ने सदन में कहा कि रेलवे की पंक्चुअलिटी में बड़ा सुधार हुआ है। इस वर्ष में 68 में से 49 डिवीजन में गाड़ियों की पंक्चुअलिटी 80% से अधिक दर्ज की गई है। उससे भी गौरव की बात ये है कि 12 डिवीजन ऐसे रहे जहां पंक्चुअलिटी 95% तक पहुंच गई है। विश्व के बड़े देशों के बराबर पहुंचने की कोशिश हम कर रहे हैं। ये रेलवे की गुणवत्ता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।   रोजगार सृजन का जिक्र करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि भारतीय रेल ने पिछले 10 वर्षों में 5 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। वर्तमान में भी 1 लाख लोगों के लिए भर्ती प्रक्रिया चल रही है।   रेल मंत्री ने कहा कि अब भारतीय रेल में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई तकनीकी बदलाव किए गए हैं। लंबे रेल, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, फॉग सेफ्टी डिवाइस जैसे कदमों ने रेल यात्रा को और सुरक्षित बनाया है। 50,000 किलोमीटर पुराने ट्रैक को हटाकर नए ट्रैक बिछाए गए हैं, जिससे सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 34,000 किलोमीटर नए रेलवे ट्रैक बनाए गए हैं, जो जर्मनी के पूरे रेल नेटवर्क से भी अधिक है। लोकोमोटिव उत्पादन में भी भारत ने बाजी मारी है। रेल मंत्री ने कहा कि देश में 1,400 लोकोमोटिव का उत्पादन हुआ जो अमेरिका और यूरोप के कुल उत्पादन से अधिक है।   भारतीय रेल ने वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। रेल मंत्री ने सदन को जानकारी देते हुए कहा कि आज भारत एक बड़ा रेलवे निर्यातक बन चुका है। ऑस्ट्रेलिया को मेट्रो कोच, यूके, सऊदी अरब और फ्रांस को रेल कोच तथा मैक्सिको,स्पेन,जर्मनी और इटली को ऑपरेशन इक्विपमेंट निर्यात किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही बिहार में बने लोकोमोटिव का दुनिया में डंका बजेगा और तमिलनाडु में निर्मित पहिए दुनिया के दूसरे देशों की ट्रेनों में भी दौड़ते नजर आएंगे। यह भारत के लिए गर्व का क्षण है।      रेल मंत्री ने कहा कि कोलकाता मेट्रो रेल प्रोजेक्ट में ऐतिहासिक प्रगति हुई है। 1972 से 2014 तक 42 वर्षों में 28 किमी का काम हुआ, जबकि मोदी सरकार के 10 वर्षों में 38 किमी का काम पूरा हुआ। बुलेट ट्रेन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमें देश को आगे ले जाना है। बुलेट ट्रेन जैसे प्रोजेक्ट्स आने वाली पीढ़ियों के लिए बनाए जा रहे हैं। रेल मंत्री ने नॉर्थ ईस्ट में रेलवे प्रोजेक्ट्स में अभूतपूर्व प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि सिक्किम में सेवक से रंगपो तक रेल प्रोजेक्ट पहुंच रहा है, असम में नए काम शुरू हुए हैं और त्रिपुरा में आजादी के बाद पहली बार ब्रॉड गेज लाइन शुरू हुई है। केंद्र सरकार ने हर राज्य के लिए रेलवे विकास हेतु ऐतिहासिक बजट आवंटित किया है। उन्होंने कहा कि रेलवे का लक्ष्य हर कोने को रेल नेटवर्क से जोड़ना और यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देना है। भारत में आज विश्व का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन रिडेवलपमेंट प्रोग्राम (अमृत भारत स्टेशन) चलाया जा रहा है।   अश्विनी वैष्णव ने सदन को बताया कि 2020 के बाद से भारतीय रेल ने यात्री किराया नहीं बढ़ाया है। भारत में रेल किराया दुनिया में सबसे कम है। 350 किमी की यात्रा के लिए भारत में जहां मात्र 121 रुपए का किराया देना होता है, वहीं पाकिस्तान में 436 रुपए, बांग्लादेश में 323 रुपए और श्रीलंका में 413 रुपए देना होता है। यूरोपीय देशों में भारत से करीब 20 गुना अधिक रेल किराया है। रेल मंत्री ने कार्गो परिवहन में हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि 31 मार्च को समाप्त हो रहे वित्त वर्ष में भारतीय रेल 1.6 बिलियन टन कार्गो ढोकर दुनिया के टॉप 3 देशों में शामिल होगा, जिसमें चीन, अमेरिका और भारत होंगे। यह रेलवे की बढ़ती क्षमता और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।   लोकसभा में रेल मंत्री ने सभी दलों से सांसदों ने अनुरोध करते हुए कहा कि कृपया अपने क्षेत्र में स्टेशनों पर काम की गुणवत्ता पर ध्यान दें। हम गुणवत्ता से समझौता बिल्कुल नहीं करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय रेल देश की प्रगति का प्रतीक है और यह निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।

प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को गर्भवती महिलाओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाए: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मध्यप्रदेश को स्वास्थ्य क्षेत्र में देश के शीर्ष राज्यों में लाने के लिए समर्पित प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश द्वारा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिये होटल पलाश भोपाल में दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान कर फॉलोअप करें सुनिश्चित उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिये कि गर्भवती महिलाओं में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान कर उन्हें समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा दी जाए और उनका फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए। इससे माताओं एवं नवजात शिशुओं को सुरक्षित रखा जा सकेगा। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि गर्भस्थ भ्रूण का लिंग परीक्षण एक दंडनीय अपराध है और इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। टीम-वर्क, समर्पित प्रयास से स्वास्थ्य मानकों में मध्यप्रदेश बनेगा अग्रणी उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि टीम वर्क, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी और एकजुट प्रयासों से मध्यप्रदेश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में शीर्ष स्थान पर पहुंचाने का लक्ष्य शीघ्र पूरा होगा। मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि दो दिवसीय कार्यशाला में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पीसीपीएनडीटी अधिनियम, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी प्रबंधन एवं स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार को लेकर गहन मंथन किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर और विधिवत प्रदाय, समयबद्ध चिन्हाकन, नियमित जाँच और फॉलोअप सेवा से मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में सुधार के सशक्त प्रयास किये जायेंगे।कार्यशाला में प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, पीसीपीएनडीटी नोडल अधिकारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, डीपीएम, विभागीय अधिकारी और सलाहकारों ने भाग लिया।  

CM यादव ने कहा PM मोदी ने प्रदेश के छोटे से गांव के उभरते खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए उनकी तुलना ब्राजील से कर खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रदेश के शहडोल जिले के छोटे से गांव के उभरते फुटबाल खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए उनकी तुलना ब्राजील से कर खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया है। यह प्रधानमंत्री मोदी के मध्यप्रदेश के प्रति विशेष स्नेह का प्रकटीकरण है। यह भाव “एमपी के मन में मोदी” को भी चरितार्थ करता है। प्रदेश के चीता प्रोजेक्ट से लेकर कई परियोजनाओं में प्रधानमंत्री मोदी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदेश में नदी जोड़ो अभियान का शुभारंभ कर विश्व को प्राकृतिक संसाधनों का श्रेष्ठतम प्रबंधन करने का संदेश दिया। उनके आशीर्वाद से प्रदेश विकास और जनकल्याण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रदेश और प्रदेशवासियों को निरंतर प्रोत्साहन के लिए हम सब उनके आभारी हैं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने मीडिया को जारी संदेश में यह बात कही। प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकन पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमेन के साथ बातचीत में शहडोल जिले के दौरे की स्मृतियों को साझा करते हुए जनजातीय बाहुल्य गांव विचारपुर के निवासियों में फुटबाल के प्रति जबर्दस्त जुनून की चर्चा की थी। उल्लेखनीय है कि दक्षिण अमेरिका महाद्वीप का प्रमुख देश ब्राजील फुटबाल के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता और अनेक बार फुटबाल का फीफा विश्व कप जीतने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगामी-2028 में सिंहस्थ को भव्य बनाने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार को ओंकारेश्वर में अवधूत सिद्ध महायोगी श्री दादा गुरुजी की तृतीय चरण माँ नर्मदा सेवा परिक्रमा यात्रा के समापन कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। उन्होंने ओंकारेश्वर स्थित गौमुख घाट पर माँ नर्मदा का मंत्रोच्चार के बीच पूजन किया। यह यात्रा माँ नर्मदा, धर्म, धरा, धेनु, प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण-संवर्धन के लिए पूर्ण समर्पित थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबोधित करते हुए कहा कि “यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे” जो-जो इस ब्रह्माण्ड में है वही सब हमारे शरीर में भी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह परमात्मा हमारे अंदर विद्यमान है, उसी तरह जल माँ नर्मदा में विद्यमान है। उन्होंने कहा कि श्री दादा गुरुजी की तृतीय चरण माँ नर्मदा सेवा यात्रा का समापन हुआ है। यह एक अद्भुत यात्रा थी। उन्होंने श्री दादा गुरुजी को प्रणाम कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम इस मृत्यु लोक में अकेले आते हैं और अकेले ही जाते हैं। इस लोक में हमारे कर्म ही होते हैं जो हमें विभिन्न लक्ष्यों तक पहुँचाते हैं। सब अपने कर्मों के अनुसार पुण्य अर्जित करते हैं। इसलिए हम सबको सत्कर्म करने का प्रण लेना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगामी-2028 में सिंहस्थ को भव्य बनाने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि उज्जैन में महाकाल लोक के निर्माण से मध्यप्रदेश के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है। इसी तरह “ओंकारेश्वर लोक” का विकास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर धाम भी आने वाले समय में जगमगाएगा। इसके लिए सभी व्यवस्थाएं जुटाई जायेंगी। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जहां लीलाएं की और जहां उनके चरण पड़े, उन सभी देवस्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने सभी धार्मिक नगरों को शराब मुक्त करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में निरंतर कार्य चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार गौ-पालन को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति 10 से ज्यादा गाय खरीदेगा, उसे सरकार द्वारा अनुदान दिया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अवधूत सिद्ध महायोगी श्री दादा गुरुजी के साथ ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव के दर्शन कर जलाभिषेक किया। उन्होंने बाबा ओंकारेश्वर से प्रदेश की सुख-समृद्धि, विकास और कल्याण की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पुल से ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने पैदल पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री राव देवेंद्र सिंह चौहान, सहायक सीईओ श्री अशोक महाजन सहित अन्य ट्रस्टी गण ने प्रतीक स्वरूप बाबा ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का चित्र भेंट किया। नर्मदा समापन यात्रा में पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम विभाग मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, मान्धाता विधायक श्री नारायण पटेल, ज़िला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पिंकी वानखेड़े, महापौर श्रीमती अमृता यादव सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण मौजूद थे।

एस्केड योजना के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

जयपुर पशुपालन विभाग द्वारा पशु चिकित्सा अधिकारियों को जहर से पशुओं की मौत और जहर के फॉरेंसिक पहलुओं के साथ—साथ डीएनए फिंगर प्रिटिंग और पशुपालन मामलों के बारे में जानकारी देने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम मंगलवार को संपन्न हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 100 पशु चिकित्सकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के आयोजन में राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान तथा वन विभाग की भी सहभागिता रही। भारत सरकार की असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कंट्रोल ऑफ एनिमल डिजीज (एस्केड) योजना के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के चार बैचों में कुल 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पशु चिकित्सकों को संबोधित करते हुए विभाग के निदेशक डॉ. आनंद सेजरा ने कहा कि विभाग के अधिकारियों के क्षमतावर्द्धन के लिए इस तरह के पुनश्चर्या प्रशिक्षण के कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस तरह के आयोजनों से हमें नई जानकारियां तो मिलती ही हैं साथ ही कई्र ऐसी बातें जो हम जानते हैं पर उपयोग में न आने के कारण हम उन्हें भूल जाते हैं वे बातें भी हमें रिकॉल हो जाती हैं। कई बार किसी दुर्घटना में पशु की मौत हो जाने पर कानूनी मामला बन जाता है ऐसे में पशु चिकित्सा के साथ साथ हमें इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी होना भी आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि एस्केड योजना का मुख्य उद्देश्य प्रमुख रोगों की रोकथाम व नियंत्रण हेतु टीकाकरण, टीका उत्पादन तथा रोग निदान की सुविधाएं पशुपालकों को उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक हानि से बचाना है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पशुओं के दुर्घटना के दौरान सैंपल लेने, पोस्टमार्टम में ली जाने वाली सावधानियां, कोर्ट में प्रमाण पेश करते समय ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बिंदुओं जैसे विषयों पर राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान तथा वन विभाग के साथ पशुपालन विभाग के विशेषज्ञ विभिन्न सत्रों में अपने अपने विचार रखेंगे और प्रशिक्षणार्थियों के सवालों के जवाब देंगे।

अपना पूरा समय किसानों की सेवा में लगाऊंगा क्योंकि उनकी सेवा ही मेरे लिए भगवान की पूजा है: शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में कहा कि अपने बेटों की शादी के बाद अब वह वानप्रस्थ आश्रम में जा रहे हैं और अपना पूरा समय किसानों की सेवा में लगाएंगे। चौहान ने प्रश्नकाल में सदस्यों के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा, ‘‘आज से मैं गृहस्थ से वानप्रस्थ आश्रम में जा रहा हूं। आज मेरे बेटों की शादी के बाद ‘रिसेप्शन’ है। मैंने सभी को निमंत्रित किया है। कल से मैं वानप्रस्थी हो जाऊंगा और अपना पूरा समय किसानों की सेवा में लगाऊंगा क्योंकि उनकी सेवा ही मेरे लिए भगवान की पूजा है।” उन्होंने फसल बीमा योजना संबंधी पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि मोदी सरकार से पहले फसल के नुकसान के लिए मुआवजे की सबसे छोटी इकाई तहसील होती थी और जब तक पूरी तहसील में फसल बर्बाद नहीं हो, किसानों को मुआवजा नहीं मिलता था। चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में गांव को सबसे छोटी इकाई बनाया गया और एक गांव में फसल को नुकसान होने पर भी किसानों को राहत मिलती है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि देश का नेता दूरदृष्टा हो तो व्यवस्थाएं अपने आप बदलने लगती हैं। चौहान ने कहा कि किसानों की हालत एक दशक पहले बहुत खराब थी, लेकिन इस सरकार के आने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एक नहीं, अनेक उपाय किए गए हैं जिसके कारण किसानों की हालत लगातार सुधर रही है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार किसानों की हालत सुधारने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के उनके संसदीय क्षेत्र वायनाड (केरल) के संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्न के उत्तर में कृषि मंत्री ने कहा, ‘‘किसान चाहे केरल का हो या कर्नाटक का, किसान होता है। हम सब भारत मां के लाल हैं और भेदभाव का कोई सवाल नहीं है।” उन्होंने कहा कि जब भी प्राकृतिक आपदाएं आती हैं तो नीति आयोग की सिफारिश के अनुसार केंद्र सरकार राज्यों को धन देती है और कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा हो तो केंद्र सरकार विशेष दल भेजकर अतिरिक्त राशि भी देती है। चौहान ने कहा, ‘‘केरल को भी एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा राहत कोष) के तहत 138 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए। आपके माध्यम से मैं सदस्य (प्रियंका गांधी) को आश्वस्त करना चाहता हूं कि कहीं भी संकट आएगा तो केंद्र बिना भेदभाव के राज्य के साथ खड़ा रहेगा।” उन्होंने कहा कि जहां भी किसानों पर प्राकृतिक संकट आएगा, वे चाहे किसी भी राज्य के, गांव के हों.. भारत सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी। 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: राज्य स्तरीय शिकायत निराकरण समिति की बैठक

जयपुर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत फसल कटाई प्रयोगों पर एग्रीकल्चर इन्श्योरेन्स कम्पनी द्वारा लगाये गये आपत्तियों के निस्तारण हेतु बीमा कम्पनी के प्रतिनिधियों एवं राज्य स्तरीय शिकायत निराकरण समिति के सदस्यों के साथ मंगलवार को पंत कृषि भवन के सभा कक्ष में शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी श्री राजन विशाल की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय शिकायत निराकरण समिति की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में शासन सचिव ने नागौर और डीडवाना-कुचामन जिलों के खरीफ 2023 की फसल कटाई प्रयोगों की आपत्तियों के निस्तारण हेतु इन जिलों के अधिकारियों एवं बीमा कम्पनी प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर योजना प्रावधान के अनुरूप कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये। श्री राजन विशाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे फसल कटाई प्रयोगों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की गाईडलाइन के अनुसार पूर्ण ईमानदारी से समय पर संपादित करें।   उल्लेखनीय है कि खरीफ 2023 का 1 हजार 603 करोड़ रूपये एवं रबी 2023-24 के 1 हजार 52 करोड़ रूपये के क्लेम पात्र फसल बीमा पॉलिसी धारक कृषकों को वितरित किये जा चुके हैं। शेष फसल बीमा क्लेम की राशि अतिशीघ्र किसानों को वितरित कर दी जायेगी। वर्तमान सरकार द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत कृषकों को अब तक लगभग 3 हजार 349 करोड़ रूपये की राशि वितरित की जा चुकी है। बैठक में आयुक्त कृषि सुश्री चिन्मयी गोपाल, आयुक्त उद्यानिकी श्री सुरेश कुमार ओला, अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार) सीकर श्री रामनिवास पालीवाल, संयुक्त निदेशक कृषि (फसल बीमा) डॉ. जगदेव सिंह, संयुक्त निदेशक कृषि (नागौर) श्री हरीश मेहरा, संयुक्त निदेशक कृषि (डीडवाना-कुचामन) श्री शंकर लाल बेड़ा, सब डिविजनल अधिकारी श्री ओमप्रकाश, आर्थिक एवं सांख्यिकी उप निदेशक श्री रामकुमार राव सहित विभागीय अधिकारी और इन्श्योरेन्स कम्पनी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

अब दुबई या जॉर्जिया की यात्रा गोवा, मनाली या मुंबई जाने से सस्ती पड़ रही है, टूरिज्म इंडस्ट्री चौंकाने वाला दावा

गोवा सोचिए, आप किसी वीकेंड पर रिलैक्स करने का प्लान बना रहे है और आपके सामने दो ऑप्शन हैं – गोवा या दुबई। अब ज़रा चौंकने के लिए तैयार हो जाइए, क्योंकि दुबई की ट्रिप अब गोवा से सस्ती पड़ रही है! यह कोई मज़ाक नहीं, बल्कि एंजेल इन्वेस्टर उज्जवल सुतारिया का कहना है कि भारत में ट्रैवल अब इतना महंगा हो गया है कि लोग विदेश घूमने को बेहतर विकल्प मान रहे हैं। क्या भारत अपने ही टूरिज्म बूम को खत्म कर रहा है? आइए जानते हैं कि रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट्स के महंगे टैरिफ तक, कैसे भारत का ट्रैवल सेक्टर आम लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है।   एंजेल इन्वेस्टर उज्जवल सुतारिया ने एक अहम सवाल उठाया है – “क्या भारत अपने ही पर्यटन उद्योग को महंगा बनाकर खुद को बाहर कर रहा है?” उनका कहना है कि अब दुबई या जॉर्जिया की यात्रा गोवा, मनाली या मुंबई जाने से सस्ती पड़ रही है। जो कभी एक आम आदमी के लिए किफायती यात्रा विकल्प (affordable travel options) था, वह अब सिर्फ उन लोगों के लिए रह गया है जो ऊंची कीमत चुकाने को तैयार हैं। लेकिन इसकी वजह सिर्फ ₹400 वाली एयरपोर्ट चाय या महंगे होटल किराए नहीं हैं।   रियल एस्टेट की मार से महंगा हुआ टूरिज्म सुतारिया के अनुसार, बढ़ती रियल एस्टेट कीमतें भारत के पर्यटन सेक्टर को प्रभावित कर रही हैं। पिछले एक दशक में संपत्ति की कीमतें आसमान छू गई हैं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट्स को अपना निवेश निकालने के लिए दरें बढ़ानी पड़ रही हैं। सुतारिया ने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी दिए हैं जैसे कि: – पर्यटन केंद्रों में प्रॉपर्टी की कीमतें गैर-पर्यटक इलाकों से 150% ज्यादा हो गई हैं। -अयोध्या में जमीन के दाम कुछ ही सालों में 10 गुना बढ़ चुके हैं। – बेंगलुरु और हैदराबाद में 2019 से अब तक 90% वृद्धि हुई है। -भारत का रियल एस्टेट मार्केट 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, सुतारिया इसे सिर्फ संकट नहीं मानते, बल्कि स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए नए अवसर भी देखते हैं। उनका मानना है कि सस्ते ठहरने के विकल्प, ऑफबीट डेस्टिनेशन और बेहतर ट्रांसपोर्ट सुविधाएं इस स्थिति को बदल सकती हैं। उन्होंने आखिर में एक सवाल करते हुए लिखा- “क्या यह बदलाव भारतीय पर्यटन को बेहतर बनाएगा या इसे और महंगा कर देगा?”  

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