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सचिन मीणा के घर गूंजी किलकारी, सीमा हैदर ने बेटी को दिया जन्म, घर आई लक्ष्मी

 ग्रेटर नोएडा पाकिस्तानी भाभी के नाम से मशहूर सीमा हैदर पांचवी बार मां बन गई है। यह बच्चा सीमा और सचिम मीणा का है। हैदर ने ग्रेटर नोएडा के अस्पताल में मंगलवार सुबह करीब साढ़े चार बजे बच्ची को दिया जन्म। करीब दो साल पहले चार बच्चों के साथ पाकिस्तान से दुबई और नेपाल के रास्ते सीमा भारत आई थी। हालांकि उसे अभी तक भारत की नागरिकता नहीं मिली है। दोनों की मुलाकात ऑनलाइन पबजी गेम खेलते हुई थी। इसके बाद दोनों में नजदीकियां बढ़ीं और सीमा बच्चों सहित अपने प्रेमी सचिन के पास रहन के लिए आ गई। दिसंबर में दी थी गुड न्यूज सीमा और सचिन ने पिछले साल दिसंबर के महीने में सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया था। वीडियो में सीमा के गर्भवती होनी की जानकारी दी गई थी। दोनों काफी खुश दिखाई दे रहे थे। वीडियो में हैदर प्रेग्नेंसी किट दिखाते हुए सचिन को पिता बनने की खुशखबरी दे रही थीं। जिसके बाद सचिन सीमा को गले लगा लेता है। तब सीमा ने बताया था कि वह सात महीने की गर्भवती है। जल्द ही उनके घर किलकारी गूंजने वाली है। 2023 में आई थी भारत सीमा हैदर अपने चार बच्चों के साथ 13 मई 2023 अवैध रूप से भारत आई थी। उसे अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने की वजह से 4 जुलाई 2023 को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने सचिन मीणा को उसे शरण देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। 7 जुलाई को उसे स्थानीय अदालत से जमानत मिल गई थी। सीमा ने पुलिस को बताया था कि उसने और सचिन ने नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज के साथ शादी की थी। गौतमबुद्ध नगर में की थी शादी जमानत मिलने के बाद सीमा और सचिन ने गौतमबुद्ध नगर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी की थी। तब से दोनों रबूपुरा में पति-पत्नी के तौर पर रह रहे हैं। सीमा और सचिन की कहानी भारत-पाकिस्तान सहित सोशल मीडिया पर काफी मशहूर है। सीमा वीडियो के जरिए फैंस को अपडेट देती रहती हैं। सीमा के वकील विक्रम सिंह ने पाकिस्तानी भाभी की नागरिकता को लेकर कहा कि उनके खिलाफ अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने को लेकर दर्ज केस का निस्तारण हो जाए। इसके बाद कुछ हो सकता है।

अपने विभागों से संबंधित विकास कार्यों के लिए 100 दिनों की योजना बनाई: मंत्री प्रवेश वर्मा

नई दिल्ली दिल्ली के पीडब्ल्यूडी और जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधायकों के साथ बैठक कर अपने विभागों से संबंधित विकास कार्यों के लिए 100 दिनों की योजना बनाई। दिल्ली की नई भाजपा सरकार के एजेंडे में सड़कों और नालों की मरम्मत, सीवर की सफाई और जल निकासी प्रबंधन, बाढ़ और जलभराव की समस्या, अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई और लंबित विकास परियोजनाओं में तेजी लाना शामिल है। वर्मा ने कहा, “सालों से दिल्ली में कोई काम नहीं हुआ क्योंकि कोई इरादा नहीं था। स्थिति अब इतनी खराब हो गई है कि हमें लोगों को राहत देने के लिए युद्धस्तर पर काम करने की जरूरत है। सड़कों की मरम्मत, सीवरों की सफाई और नालियों को साफ करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। हमारी प्राथमिकता विकास है और अगले 100 दिनों में दिल्ली के लोगों को बदलाव दिखेगा। हम अधिक से अधिक इलाकों की समस्याओं को दूर करने का हर संभव प्रयास करेंगे। भाजपा सरकार सिर्फ वादे नहीं करती, हम लोगों की सेवा के लिए काम करते हैं।” दिल्ली सचिवालय में आयोजित बैठक में शकूर बस्ती, त्रिलोकपुरी, पटपड़गंज, लक्ष्मी नगर, मुंडका, नांगलोई जाट, मोती नगर, मादीपुर (पश्चिम क्षेत्र), मंगलापुरी और किराड़ी के विधायक शामिल हुए। बैठक में पीडब्ल्यूडी, दिल्ली जल बोर्ड और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी मौजूद थे। प्रवेश वर्मा ने एचटी को बताया कि विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए विधायकों और संबंधित अधिकारियों के साथ आमने-सामने बैठक करने का फैसला लिया गया है। वर्मा ने कहा कि अब हर विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को सीधे अधिकारियों के सामने रख रहा है और संबंधित विभागों को समाधान के लिए तत्काल निर्देश दिए जा रहे हैं। भाजपा सरकार दिल्लीवासियों को राहत पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर काम करेगी। इस पहल का असर अगले 100 दिनों में जमीनी स्तर पर दिखाई देगा।

होली के बाद UP पुलिस में हुए तबादले, 32 IPS और 17 DSP को मिली नई जिम्मेदारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक बार फिर आईपीएस अफसरों के तबादलों का बड़ा कदम उठाया है। इस बार कुल 32 आईपीएस अफसरों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर तैनात किया गया है। इस फेरबदल में कई महत्वपूर्ण अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। महत्वपूर्ण तैनाती: – डॉ. प्रीतिंदर सिंह को डीआईजी पीएसी मध्य जोन बनाया गया है, वे पहले डीजीपी मुख्यालय से अटैच थे। – आलोक कुमार को संभल का सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) बनाया गया है। – अपर्णा कुमार को डीआईजी मानवाधिकार लखनऊ में तैनात किया गया है। – अशोक कुमार को एसपी क्षेत्रीय अभिसूचना गोरखपुर की जिम्मेदारी दी गई है। – एलवी एंटोनी देव कुमार को एडीजी रूल्स एंड मैनुअल लखनऊ का कार्यभार सौंपा गया है। – अतुल शर्मा को डीआईजी पीएसी कानपुर अनुभाग सौंपा गया है। – शैलेंद्र कुमार राय को एसपी लोक शिकायत डीजीपी मुख्यालय लखनऊ बनाया गया है। – देवेंद्र कुमार को अपर पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर की जिम्मेदारी दी गई है। – आयुष श्रीवास्तव को अपर पुलिस अधीक्षक जौनपुर बनाया गया है। – इसके अलावा आलोक कुमार को संभल का सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) बनाया गया है। अन्य महत्वपूर्ण तैनाती: – बजरंगबली को सेनानायक 37वीं वाहिनी पीएसी कानपुर, – कमलेश बहादुर को सेनानायक 25वीं वाहिनी पीएसी रायबरेली, – लाल भरत कुमार पाल को सेनानायक 49वीं वाहिनी पीएसी नोएडा, – दिनेश यादव को सेनानायक 41वीं वाहिनी PAC गाजियाबाद, – अजय प्रताप को सेनानायक 48वीं वाहिनी PAC सोनभद्र, – अनिल कुमार यादव को डीसीपी वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट, – रोहित मिश्रा को एसपी डीजीपी मुख्यालय लखनऊ PAC बाराबंकी, – नेपाल सिंह को सेनानायक 39वीं वाहिनी PAC मिर्जापुर, -शिवराम यादव को एसपी पीटीएस मेरठ, – दीपेंद्र नाथ चौधरी को डीसीपी कानपुर पुलिस कमिश्नरेट बनाया गया है। प्रमोशन के बाद DIG बने 12 अफसरों को मिली तैनाती: प्रमोशन के बाद 12 आईपीएस अफसरों को डीआईजी की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें से कुछ प्रमुख तैनाती इस प्रकार हैं: – हेमंत कुटियाल को डीआईजी एसएसएफ लखनऊ, – स्वप्निल ममगाई को डीआईजी पीएसी मेरठ – शालिनी को डीआईजी पीएसी मुरादाबाद, – अरुण कुमार श्रीवास्तव को डीआईजी पीएसी अयोध्या अनुभाग, – डी प्रदीप कुमार को पुलिस महानिरीक्षक/अतिरिक्त सचिव पुलिस भर्ती बोर्ड लखनऊ, – कमला प्रसाद यादव को डीआईजी एंटी करप्शन लखनऊ, – सूर्यकांत त्रिपाठी को डीआईजी फायर सर्विस मुख्यालय लखनऊ, – विकास कुमार वैद्य को डीआईजी स्थापना डीजीपी मुख्यालय लखनऊ, – तेज़ स्वरूप सिंह को डीआईजी कार्मिक डीजीपी मुख्यालय लखनऊ, – सुनीता सिंह को डीआईजी पीएसी मुख्यालय लखनऊ, – राजेश कुमार सक्सेना को डीआईजी पीटीएस सुल्तानपुर, – हृदयेश कुमार को डीआईजी ईओडब्ल्यू मुख्यालय लखनऊ बनाया गया है।  

BJP ने बताया मुस्लिमों को फायदा पहुंचाने वाला- बंगाल में OBC आरक्षण पर बवाल, SC पहुंची ममता सरकार

कोलकाता पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण को लेकर एक बार फिर से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग नए सिरे से जातिगत पिछड़ेपन की समीक्षा कर रहा है और यह प्रक्रिया तीन महीने में पूरी हो जाएगी। मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राज्य सरकार की दलील सुनते हुए मामले को जुलाई तक के लिए टाल दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए कोर्ट से अनुरोध किया कि इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई तीन महीने बाद की जाए, जिसके बाद पीठ ने उनकी बात मान ली। वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तरफ से ममता सरकार की इस पहल को मुस्लिमों को फायदा पहुंचाने वाला करार दिया है। हाई कोर्ट ने रद्द की थी कई जातियों की ओबीसी सूची यह मामला उस समय गरमाया जब 22 मई 2024 को कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 2010 से अब तक कई जातियों को दी गई ओबीसी आरक्षण की सूची को अवैध करार दे दिया। कोर्ट ने पाया कि इन जातियों को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने का आधार केवल धर्म था, जो संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि 77 मुस्लिम जातियों को ओबीसी सूची में शामिल करना पूरे मुस्लिम समाज का अपमान है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया था कि जिन लोगों को पहले ही आरक्षण का लाभ मिल चुका है या जो सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं, उनकी नौकरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बीजेपी ने लगाया ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ का आरोप वहीं पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा सियासी तूल पकड़ चुका है। बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर आरोप लगाया है कि राज्य सरकार एक जातिगत सर्वे करा रही है, जिसका मकसद मुस्लिम ओबीसी को फायदा पहुंचाना और हिंदू ओबीसी को पीछे करना है। बीते दिनों बीजेपी महासचिव जगन्नाथ चटर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “टीएमसी सरकार का यह सर्वे केवल राजनीतिक तुष्टिकरण के लिए है। वे मुस्लिम समुदाय की आर्थिक जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं ताकि सरकारी लाभ उन्हीं को दिया जा सके, जबकि हिंदू ओबीसी को इससे बाहर रखा जा रहा है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस सर्वे के सवालों को इस तरह से तैयार किया गया है जिससे समुदायों के बीच फूट डाली जा सके। चटर्जी के मुताबिक, “सवालों में यह पूछा गया है कि उनके इलाकों में पानी की सुविधा कैसी है और क्या वे अपने पड़ोसियों के साथ खाना साझा करते हैं। यह एक सोची-समझी साजिश है ताकि सांप्रदायिक तनाव पैदा किया जा सके।” नई जातियों से जुड़ी ठोस जानकारी दीजिए: सुप्रीम कोर्ट वहीं सुप्रीम कोर्ट पहले ही पश्चिम बंगाल सरकार से यह मांग कर चुका है कि वह ओबीसी सूची में शामिल नई जातियों की सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन से जुड़ी ठोस जानकारी पेश करे। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि इन जातियों को ओबीसी में शामिल करने से पहले किसी तरह की कानूनी सलाह ली गई थी या नहीं। अब जब राज्य सरकार ने तीन महीने में पूरी समीक्षा करने की बात कही है, तो जुलाई में सुप्रीम कोर्ट इस पर अंतिम फैसला ले सकता है। इस बीच, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक घमासान और तेज होने के आसार हैं।

बीजापुर पुलिस ने पत्रकार मुकेश चंद्रकार हत्याकांड की चार्जशीट मंगलवार को कोर्ट में पेश की

बीजापुर  छत्तीसगढ़ की बीजापुर पुलिस ने पत्रकार मुकेश चंद्रकार की हत्या के मामले में मंगलवार को कोर्ट में 1200 पेजों की चार्जशीट दाखिल की। पुलिस ने इस हत्याकंड में चार लोगों को आरोपी बनाया है। फिलहाल चारों आरोपी जगदलपुर जेल में हैं। आरोपियों के खिलाफ इस चार्जशीट में 70 से ज्यादा गवाह के बयान दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, मुकेश की हत्या मुख्य आरोपी ठेकेदार सुरेश चंद्राकर ने करवाई थी। मुकेश ने ठेकेदार के खिलाफ घटिया सड़क निर्माण के काम को उजागर किया था। हत्या मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व करने वाले अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर ने बताया- “जांच के दौरान, डिजिटल और फिजिकल सबूतों को बारीकी से निगरानी की गई। इस चार्जशीट में उन सभी बातों का उल्लेख किया गया है।” उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं कि सभी चार आरोपियों को अदालत से कड़ी सजा मिले। 20 लाख रुपये का लगा था जुर्माना उन्होंने हत्या के पीछे की वजह का खुलासा करते हुए कहा- “आरोपी सुरेश इस बात से नाराज था कि मुकेश ने खराब सड़क निर्माण कार्य को उजागर क्यों किया। मामला उजागर होने के बाद उसके खिलाफ जांच हुई थी और ठिकानों पर जीएसटी छापे भी पड़े थे। उस पर लगभग 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। हत्या से पहले सुरेश ने मुकेश को कई बार फोन किया था। वह चिंतित था कि उसका साम्राज्य टूट जाएगा। अधिकारी ने बताया कि हत्या से कुछ दिन पहले, सुरेश ने मुकेश से मुलाकात की थी और उसे धमकी दी थी। 1 जनवरी को हुई थी हत्या मुकेश की हत्या 1 जनवरी की रात को हुई थी। 1 जनवरी से वह लापता था जिसके बाद उसके भाई ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसके बाद पुलिस ने खोज शुरू की थी। 3 जनवरी को मुकेश का शव छतनपारा में सुरेश की एक प्रॉपर्टी में बने सेप्टिक टैंक के पास बरामद हुआ था। पुलिस के अनुसार, सुरेश के भाई रितेश और एक कर्मचारी महेंद्र रामटेके ने हत्या को अंजाम दिया था। पुलिस का कहना है कि मुकेश को लोहे की रॉड से कई बार मारा गया और फिर उसके शव को टैंक में फेंक दिया गया, जिसे बाद में कंक्रीट से ढक दिया गया था। सुरेश चंद्राकर के भाई रितेश, दिनेश और सुपरवाइजर महेंद्र रामटेके को गिरफ्त में लेने के बाद तीन दिन बाद हैदराबाद से सुरेश को गिरफ्तार किया गया था। 100 करोड़ की लागत से बनी थी सड़क पूरा मामला बीजापुर जिले के गंगालूर से मिरतुर में 100 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क का है। मुकेश ने इस सड़क के निर्माण में हुए घोटाले का खुलासा किया था। मुकेश चंद्राकर के खुलासे के बाद सुरेश ने हत्या की साजिश रची थी।

रंगपंचमी पर करीला मेला में आएंगे सीएम मोहन यादव: कलेक्टर-एसपी ने की तैयारियों की समीक्षा

अशोकनगर देश के एकमात्र सीता माता मंदिर में 18 मार्च से 20 मार्च तक रंगपंचमी मेला लगा है। इस मेले में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ये मंदिर एमपी के अशोकनगर जिले के करीला में स्थित है और देशभर में ‘मां जानकी मंदिर’ के नाम से प्रसिद्ध है। यहां सीता माता भगवान राम के बिना विराजमान हैं। मेले से एक दिन पहले ही करीब एक लाख श्रद्धालु करीला(Karila Dham) पहुंच गए और इसके लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का दौर शुरू हो गया था। जहां पर 20 से 25 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान 250 सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जाएगी तो वहीं सुरक्षा में करीब 1500 पुलिस जवान तैनात होंगे। रंगपंचमी पर मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव(CM Mohan Yadav) भी मां जानकी के दर्शन करने पहुंचेंगे। पार्किंग और चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली कलेक्टर ने श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर निर्देश दिए। उन्होंने पेयजल, शौचालय, बिजली व्यवस्था, पार्किंग और चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए हेलीपैड की व्यवस्था का निरीक्षण किया। साथ ही सुरक्षा प्रबंधों और मां जानकी माता के दर्शन की व्यवस्था को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। 1500 पुलिस जवान तैनात मां जानकी मंदिर करीला(Maa Janki Temple Karila) में 18 मार्च से 20 मार्च तक रंगपंचमी(Rang Panchami) मेला लगेगा। सोमवार को सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं व दुकानदार सामान लेकर पहुंचना शुरू हो गए, तो वहीं बड़ी संख्या में महिला-पुरुष पैदल ही करीला के लिए जाते दिखे। पुलिस आरआई शिवमंगलसिंह के मुताबिक, 1500 पुलिस जवान तैनात रहेंगे, जिनमें करीब 800 से अधिक पुलिस जवान बाहर से बुलाए गए हैं जिनमें ग्वालियर, शिवपुरी व गुना का पुलिस बल और एसएएफ की चार कंपनी शामिल रहेंगी। वहीं 19 मार्च को मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव करीला आएंगे, इससे अतिरिक्त पुलिस बल लगेगा और इसके लिए हेलीपेड़ भी बनाया गया है। यह भी खास -श्रद्धालुओं को पेयजल के लिए परेशान न होना पड़े, इससे रास्तों में ग्रामीणों ने अभी से ट्यूबवेल चालू कर दिए हैं, ताकि रास्तों पर श्रद्धालुओं को आसानी से पानी मिल सके। -कलेक्टर सुभाषकुमार द्विवेदी ने कंपोजिट मदिरा दुकान बंगलाचौराहा व कंपोजिट मदिरा दुकान बहादुरपुर पर 19 मार्च को शराब क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध लगा दिया है। -पेयजल के लिए अंडरग्राउंड लाइन बिछाकर मेला क्षेत्र में टोंटियां लगाई गई हैं तो वहीं 250 टैंकर व 13 ट्यूबवेल सहित पानी टंकियों से भी पेयजल की व्यवस्था की गई है। -श्रद्धालुओं को बैठने के लिए कलेक्टर के निर्देश पर पहली बार जिले की सभी जनपद पंचायतें मेला क्षेत्र में बड़े-बड़े टेंट लगा रही हैं, ताकि मेले में श्रद्धालु यहां बैठ सकें। -कंट्रोल रूम बनाया गया है, जरूरत पर श्रद्धालु फोन नंबर 9243982678, 9243980255, 924381883, 9243985103, 9243982659 व 9243993269 पर कॉल करें। दुकानों से 21 लाख रु.से अधिक की राशि की वसूली जनपद पंचायत के मुताबिक मेले में 915 दुकानों के लिए जगह चिन्हित की है और प्रत्येक दुकान की आवंटन राशि ढ़ाई हजार रुपए है। सोमवार शाम तक 726 दुकानों का आवंटन हो गया और इससे 18.15 लाख रुपए की राशि दुकानदारों ने जमा की, हालांकि अभी 189 दुकानें आवंटन के लिए शेष हैं। वहीं फुटपाथ व सडक़ किनारे भी छोटी दुकानें लग गईं, जिनसे करीब तीन लाख रुपए की राशि की वसूली की गई है। इससे मेले में दुकानें लगवाने के एवज में जनपद पंचायत अब तक करीब 21 लाख रुपए की राशि वसूल कर चुकी है। वहीं 189 शेष दुकानों की वजह व अन्य छोटी दुकानें लगने से राशि वसूली की संख्या बढ़ जाएगी।

पीएम मोदी पिछले जन्म में महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज थे, लोकसभा में छिड़ा विवाद: भाजपा सांसद

नई दिल्ली संसद में चल रहे बजट सत्र के दौरान ओडिशा के बारगढ़ से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद प्रदीप पुरोहित ने पीएम मोदी को लेकर एक विवादित दावा किया। सोमवार को अपने संबोधन के दौरान प्रदीप पुरोहित ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पिछले जन्म में मराठा साम्राज्य के संस्थापक और महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज थे। इस बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया, जहां इसे छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान और उनकी विरासत से जोड़कर देखा जा रहा है। आखिर क्या बोल गए भाजपा सांसद? प्रदीप पुरोहित ने अपने भाषण में एक संत से मुलाकात का जिक्र किया, जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें बताया कि नरेंद्र मोदी का पूर्व जन्म छत्रपति शिवाजी महाराज के रूप में हुआ था। उन्होंने कहा, “मैं जिस क्षेत्र से आता हूं वहां एक गंधमर्दन पहाड़ी क्षेत्र है। एक गिरिजा बाबा संत वहां रहते हैं। एक दिन बातचीत चल रही थी तो उन्होंने हमें बताया कि देश के आज जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं वे अपने पूर्व जन्म में महाराज छत्रपति शिवाजी थे। इसलिए आज वे भारत को दुनिया में सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने की भावना से काम कर रहे हैं।” पुरोहित ने इसे एक आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंध के रूप में पेश करने की कोशिश की, लेकिन उनके इस दावे ने तुरंत विवाद को जन्म दे दिया। इस बयान के बाद सोशल मीडिया, खासकर एक्स प्लेटफॉर्म पर, लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। कई यूजर्स ने इसे छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करार दिया। विपक्षी दलों ने इस बयान को हाथोंहाथ लिया और बीजेपी पर निशाना साधा। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का राजनीतिकरण करने का प्रयास बताया। मुंबई की कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड ने वीडियो शेयर करते हुए मराठी में लिखा, “अखंड भारत के आराध्य देव छत्रपति शिवाजी महाराज का बार-बार अपमान करने तथा महाराष्ट्र और दुनिया भर के शिव प्रेमियों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए भाजपा नेतृत्व द्वारा एक सुनियोजित साजिश रची जा रही है। इन लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज की मानद टोपी नरेंद्र मोदी के सिर पर रखकर शिवाजी महाराज का घोर अपमान किया है। और अब इस भाजपा सांसद का यह घिनौना बयान सुनिए… हम शिवाजी का बार-बार अपमान करने के लिए भाजपा की सार्वजनिक रूप से निंदा करते हैं। भाजपा शिव-द्रोही है। हम शिवाजी का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। नरेंद्र मोदी को तुरंत देश से माफी मांगनी चाहिए और इस सांसद को निलंबित करना चाहिए।” शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “भाजपा के इन बेशर्म चाटुकारों को नियंत्रित करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री मोदी की छत्रपति शिवाजी महाराज से तुलना बिल्कुल अस्वीकार्य है।” ऐतिहासिक संदर्भ और विवाद छत्रपति शिवाजी महाराज 17वीं सदी के मराठा शासक थे, जिन्होंने मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ स्वराज की स्थापना की थी। उनकी वीरता, रणनीति और प्रशासनिक कुशलता उन्हें भारतीय इतिहास में एक महान नायक बनाती है, खासकर महाराष्ट्र में, जहां वे एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रतीक हैं। ऐसे में, उनके नाम को किसी भी समकालीन नेता से जोड़ना स्वाभाविक रूप से संवेदनशील और विवादास्पद हो जाता है। वैसे अब तक बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

CM देवेंद्र फडणवीस- छावा मूवी के आने के बाद से ही लोगों में मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ गुस्सा बढ़ गया

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में हिंसा के बीच बॉलीवुड फिल्म ‘छावा’ का जिक्र किया है। उन्होंने दावा किया है कि इस फिल्म के आने के बाद से ही लोगों में मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ गुस्सा बढ़ गया है। सोमवार को भी औरंगजेब के मकबरे के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के बाद अफवाह के चलते हिंसा भड़क गई थी। उन्होंने कहा, ‘छावा मूवी ने औरंगजेब के खिलाफ लोगों में गुस्सा भड़का दिया है। सभी को महाराष्ट्र को शांत रखने की जरूरत है।’ साथ ही उन्होंने नागपुर की हिंसा को साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि नागपुर हिंसा के दौरान भीड़ ने कुछ चुनिंदा घरों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया; यह एक साजिश प्रतीत होती है। हिंसा में कई घरों और वाहनों को निशाना बनाया गया था। सीएम फडणवीस ने सदन में कहा, ‘नागपुर में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने विरोध प्रदर्शन किया। अफ़वाह फैलाई गई कि धार्मिक सामग्री वाली चीज़ें जला दी गईं….यह एक सुनियोजित हमला लगता है। किसी को भी कानून- व्यवस्था अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है।’ उन्होंने साफ किया है, ‘पुलिस पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे, सख्त कार्रवाई की जाएगी।’ उन्होंने जानकारी दी है कि हिंसा में 3 डीसीपी समेत 33 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। वहीं, 5 आम नागरिक घायल हुए हैं और उनमें से एक ICU में है। नागपुर में हिंसा पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सोमवार शाम करीब साढ़े सात बजे मध्य नागपुर के चिटनिस पार्क इलाके में तब हिंसा भड़क उठी जब अफवाह फैली कि औरंगजेब की कब्र को हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए आंदोलन के दौरान धर्मग्रंथ जलाया गया है। इस दौरान पुलिस पर पथराव किया गया जिससे छह आम नागरिक और तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। क्या हुई कार्रवाई नागपुर के संरक्षक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंगलवार को कहा कि शहर में हुई हिंसा के सिलसिले में कम से कम 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और हिंसा के दौरान 34 पुलिसकर्मी तथा पांच अन्य लोग घायल हुए हैं। मंत्री ने कहा कि हिंसा के दौरान 45 वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई और उन्होंने सभी समुदायों के सदस्यों से शहर में शांति बनाए रखने तथा किसी भी असामाजिक तत्व का समर्थन नहीं करने की अपील की। एकनाथ शिंदे क्या बोले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा है कि जो लोग अब भी औरंगजेब की प्रशंसा कर रहे हैं, वे ‘‘देशद्रोही’’ हैं। उन्होंने कहा कि मुगल बादशाह ने राज्य पर कब्जा करने की कोशिश की थी और लोगों पर अनेक अत्याचार किए थे। शिंदे ने कहा कि दूसरी ओर, मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज एक ‘‘दैवीय शक्ति’’ थे, जो वीरता, बलिदान और हिंदुत्व की भावना के लिए डटे रहे।

जॉर्ज सोरोस के संगठनों पर ईडी ने मारे छापे, अडानी-हिंडनबर्ग मामले में खूब उछला था इनका नाम

बेंगलुरु  अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस समर्थित ओपन सोसाइटी फाउंडेशन (OSF) और उससे जुड़ी कुछ संस्थाओं के खिलाफ बेंगलुरु में प्रवर्तन निदेशालय ने उनके ठिकानों पर छापेमारी की है. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. दरअसल ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (FEMA) के ‘‘उल्लंघन’’ से संबंधित जांच के सिलसिले में मंगलवार को छापेमारी की कार्रवाई की. सूत्रों ने बताया कि फेमा के तहत ओएसएफ और कुछ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के परिसरों की तलाशी ली जा रही है. उन्होंने कहा कि यह मामला ओएसएफ द्वारा कथित रूप से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त करने और कुछ लाभार्थियों द्वारा फेमा दिशा-निर्देशों का कथित उल्लंघन कर इन निधियों का उपयोग किए जाने से संबंधित है. ईडी की कार्रवाई पर ओएसएफ की तरफ से फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं मिली है. कौन हैं जॉर्ज सोरोस ज्योजी श्वार्ट्ज उर्फ जॉर्ज सोरोस, हंगरी मूल के मशहूर अमेरिकी कारोबारी हैं. अमेरिका और ब्रिटेन के शेयर बाजारों में जॉर्ज सोरोस एक बड़ा नाम है. सोरोस ने हेज फंड से तगड़ी कमाई की है. साल 1970 में सोरोस फंड मैनेजमेंट की शुरुआत की थी. खास बात है कि जॉर्ज सोरोस को बैंक ऑफ इंग्लैंड को बर्बाद करने वाला व्यक्ति भी कहा जाता है. क्योंकि, 1992 में उन्होंने ब्रिटिश पाउंड के खिलाफ दांव लगाकर एक ही दिन में 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा की कमाई की थी. विवाद से घिरे रहते जॉर्ज सोरोस जनवरी 2023 में भी जॉर्ज सोरोस का नाम उस वक्त भारत में चर्चा में आया था जब अडानी ग्रुप के शेयरों में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद भारी बिकवाली हुई थी.  हंगरी-अमेरिकी राजनीतिक कार्यकर्ता सोरोस और उसके संगठन ओएसएफ पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भारत के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया है. अडानी-हिंडनबर्ग विवाद के दौरान उनके बयानों की भी पार्टी ने आलोचना की थी. बता दें कि जॉर्ज सोरोस फाइनेंशियल समझ के लिए काफी मशहूर हैं. लेकिन, उन्हें अर्थव्यवस्थाओं को अस्थिर करने के लिए भी जाना जाता है. इसके लिए उनकी भारत समेत कई देशों में आलोचना होती रहती है. जॉर्ज सोरोस समर्थित ओएसएफ ने 1999 में भारत में संचालन शुरू किया था.

इजरायल ने उत्तरी गाजा पट्टी खाली करने के आदेश दिया, हमास के ‘The End’ का प्लान!

 गाजा इजरायल की सेना ने सीजफायर को ठेंगा दिखाकर हमास पर आक्रामक रुख अख्तियार किया है. इजरायल के गाजा पर अब तक के भयावह हमले में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. लेकिन इजरायल का गुस्सा शांत नहीं हो रहा. उसने हमास के खात्मे का प्लान बना लिया है. इजरायल ने उत्तरी गाजा पट्टी खाली करने के आदेश दे दिए हैं. इजरायल की मंशा हमास को जड़ से उखाड़ फेंकने की है. 19 जनवरी को इजराइल-हमास में शुरू हुए सीजफायर के बाद इजराइल का गाजा में यह सबसे बड़ा हमला है. इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने यह हमले इसलिए कराए क्योंकि सीजफायर पर हो रही बातचीत आगे नहीं बढ़ रही थी. वहीं, हमास ने इजरायल के इन हमलों को सीजफायर का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इजरायल ने बिना किसी उकसावे के हमले किए हैं. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने हमास पर दबाव बनाने के लिए गाजा से मिस्र जाने वाले राफा क्रॉसिंग को बंद रखने के निर्देश दिए हैं. इसका मकसद मरीजों तक इलाज की पहुंच रोकना है. इससे पहले इजराइल ने गाजा में राहत सामग्री, तेल और दूसरी चीजें लेकर जाने वाली गाड़ियों का रास्ता रोक दिया था. मालूम हो कि इजरायल और हमास युद्धविराम समझौते का पहला चरण एक मार्च को खत्म हो गया था. इसके बाद से इजरायल की ओर से गाजा पर हमले जारी है. इजरायली सेना आईडीएफ का कहना है कि यह हमला हमास के आतंकियों को निशाना बनाने के लिए किया गया था. सीजफायर का पहला चरण एक मार्च को खत्म हो गया है. पहले चरण में हमास ने 33 बंधक छोड़े हैं. वहीं इजराइल ने दो हजार से फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया है. इजराइल और हमास में बीच सीजफायर के दूसरे फेज पर अभी तक बातचीत शुरू नहीं हो पाई है. इस फेज में लगभग 60 बंधकों को रिहा किया जाना था.  

पृथ्वी शॉ को 10 बजे सोने और डाइट बदलने की दी सलाह, हालत देख दोस्त का छलका दर्द

नई दिल्ली पृथ्वी शॉ को एक समय पर भारतीय क्रिकेट का उभरता हुआ सितारा माना जा रहा था। उन्होंने घरेलू क्रिकेट के साथ इंटरनेशनल स्तर पर भी अपनी एक अलग पहचान बना ली थी। कई लोग उन्हें विराट कोहली के बाद भारतीय क्रिकेट में बड़े खिलाड़ी के रूप में देख रहे थे। हालांकि भारत के अंडर-19 विश्व कप के कप्तान का करियर बहुत ही जल्दी ढलान पर चला गया। वह आईपीएल 2025 के मेगा नीलामी में अनसोल्ड रहे और फिर मुंबई की रणजी ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी में भी जगह नहीं बना सके। इस मुश्किल समय में पृथ्वी शॉ को उनके करीबी दोस्त और पंजाब किंग्स के स्टार क्रिकेटर शशांक सिंह ने उन्हें करियर को पटरी पर लाने वाली सलाह दी है। शुभांकर मिश्रा के साथ पॉडकास्ट पर शशांक सिंह ने कहा कि पृथ्वी शॉ को कम आंका गया है और अगर वह अपने बेसिक्स पर वापस जाएं तो वह कुछ भी हासिल कर सकते हैं। शशांक सिंह ने कहा, ”पृथ्वी शॉ को कम आंका गया है। अगर वह अपनी पुरानी चीजों पर काम करे, वह सब कुछ हासिल कर सकता है। मैं उसको तब से जानता हूं जब वह 13 साल का था। क्योंकि मैंने मुंबई में उनके साथ क्लब क्रिकेट खेला है। अगर आप मुझसे पूछें कि उनके साथ क्या गलत है, तो उनका कुछ चीजों पर अलग नजरिया है।” उन्होंने आगे कहा, ”शायद वह अपने डेली रूटीन में कुछ बदलाव कर सकता है, जैसे रात 11 बजे के बजाय 10 बजे सो सकता है, या शायद अपने डाइट में सुधार कर सकता है। ये भारतीय क्रिकेट के लिए सबसे बेहतर चीज होगी। शायद वह कर (चीजें बदल) रहा है। उसे मेरी सलाह की जरूरत नहीं है। शायद उसे पहले से ही 10 बेहतर लोग सलाह दे रहे हैं।”

केंद्रीय स्कूलों में अभिभावक बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए 21 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे

 सागर  केंद्रीय स्कूलों में दाखिला की प्रक्रिया 7 मार्च हो गई है। बाल वाटिका और कक्षा-एक में प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन पहले शुरू हो जाएंगे। अभिभावक इन कक्षाओं में बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए 21 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। शहर में 5 केंद्रीय विद्यालय हैं, लेकिन बाल वाटिका केवल केंद्रीय स्कूल 3 में संचालित हैं। बाल वाटिका में प्रवेश के लिए केवी स्कूल क्रं 3 में विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाना होगा। वहीं अन्य कक्षाओं के लिए सभी केंद्रीय विद्यालय में प्रवेश दिया जाएगा। अन्य कक्षाओं के लिए दाखिले की प्रक्रिया अप्रेल में शुरू होगी। केंद्रीय विद्यालय संगठन ने सभी श्रेणियों के छात्रों के लिए रजिस्ट्रेशन फॉर्म नि:शुल्क रखा है। पहली कक्षा की प्रोविजनल लिस्ट 25 मार्च को जारी होगी। बाल वाटिका की पहली प्रोविजनल लिस्ट 26 मार्च को जारी की जाएगी। बाल वाटिका-2, कक्षा दूसरी और अन्य कक्षाओं के लिए रजिस्ट्रेशन 2 से 11 अप्रेल तक चलेगा। प्रवेश के लिए आयु सीमा भी तय की गई है। बाल वाटिका -1 में तीन से चार वर्ष, बाल वाटिका-2 में चार से पांच वर्ष और बाल वाटिका-3 में पांच से छह वर्ष के बच्चों को प्रवेश मिलेगा। कक्षा पहली में प्रवेश के लिए बच्चों की उम्र छह से आठ साल के बीच होनी चाहिए। वहीं कक्षा 2 और उससे ऊपर (क्लास 11 को छोडक़र) की कक्षाओं में सीट खाली होने पर ही एडमिशन लिए जाएंगे। ऑफलाइन होंगे एडमिशन कक्षा 2 से कक्षा 12 (कक्षा 11 को छोडक़र) में एडमिशन की प्रक्रिया 2 अप्रेल से शुरू होगी। यह 11 अप्रेल तक चलेगी। इन कक्षाओं में जगह खाली होने पर ही एडमिशन होगा। इनमें एडमिशन के लिए ऑफलाइन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इनमें प्रवेश के लिए जानकारी विद्यालय को वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। आवेदन के लिए यह है जरूरी     सिम कार्ड वाला एक मान्य मोबाइल नंबर होना चाहिए।     एक वैध ईमेल पता होना चाहिए।     प्रवेश के इच्छुक बच्चे का एक डिजिटल फोटोग्राफ या फोटो का स्कैन होना चाहिए।     बच्चे केजन्म प्रमाण पत्र का स्कैन होना चाहिए।     आप आर्थिक रूप से कमजोर/गरीबी रेखा के नीचे (ईडब्ल्यूएस/बीपीएल) वर्ग के अंतर्गत आवेदन कर रहे हैं, तो सरकार द्वारा जारी ईडबल्यूएस/बीपीएल प्रमाण पत्र का विवरण दें।     माता/पिता के स्थानांतरण का विवरण देना होगा और सेवा श्रेणी (यदि लागू है) का आवेदन पत्र में उपयोग किया जाना है।  

राहुल गांधी ने नाराजगी जताई कि प्रधानमंत्री ने महाकुंभ में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि नहीं दी

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महाकुंभ पर दिए गए संबोधन पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। राहुल गांधी ने कहा कि वह महाकुंभ को पीएम मोदी के बयान का समर्थन करना चाहते थे। हालांकि, उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि प्रधानमंत्री ने महाकुंभ में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि नहीं दी। राहुल गांधी ने कहा, “जो प्रधानमंत्री ने बोला, मैं उसको सपोर्ट करना चाहता था। कुंभ हमारी परंपरा, इतिहास और संस्कृति है। लेकिन हमारी एकमात्र शिकायत यह है कि पीएम ने कुंभ में अपनी जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि नहीं दी।” उन्होंने आगे कहा कि महाकुंभ में शामिल होने वाले युवाओं की प्रधानमंत्री से एक और अपेक्षा है, और वह है रोजगार। उन्होंने कहा, “जो युवा महाकुंभ गए, वे चाहते हैं कि पीएम उन्हें रोजगार दें।” कांग्रेस नेता ने लोकतांत्रिक संरचना का हवाला देते हुए यह भी आरोप लगाया कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “लोकतांत्रिक ढांचे के अनुसार, विपक्ष के नेता को बोलने का अवसर मिलना चाहिए, लेकिन वे हमें बोलने नहीं देते। यह नया भारत है।” राहुल गांधी का यह बयान उस समय आया है, जब लोकसभा में महाकुंभ और अन्य मुद्दों पर चर्चा जारी है। विपक्ष ने पहले भी महाकुंभ के दौरान हुई दुर्घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे, और अब रोजगार जैसे अहम मुद्दे को जोड़कर सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए ‘महाकुंभ’ को भारत के इतिहास में अहम मोड़ करार देते हुए मंगलवार को लोकसभा में कहा कि दुनिया ने देश के विराट स्वरूप को देखा और यह ‘सबका प्रयास’ का साक्षात स्वरूप भी था, जिसमें ‘एकता का अमृत’ समेत कई अमृत निकले। उन्होंने निचले सदन में प्रयागराज महाकुंभ को लेकर दिए एक वक्तव्य में यह भी कहा कि महाकुंभ में अनेकता में एकता का विराट रूप, देश की सामूहिक चेतना और सामर्थ्य भी दिखा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए ‘महाकुंभ’ को भारत के इतिहास में अहम मोड़ करार देते हुए मंगलवार को लोकसभा में कहा कि दुनिया ने देश के विराट स्वरूप को देखा और यह ‘सबका प्रयास’ का साक्षात स्वरूप भी था, जिसमें ‘एकता का अमृत’ समेत कई अमृत निकले। उन्होंने निचले सदन में प्रयागराज महाकुंभ को लेकर दिए एक वक्तव्य में यह भी कहा कि महाकुंभ में अनेकता में एकता का विराट रूप, देश की सामूहिक चेतना और सामर्थ्य भी दिखा।

महंगाई में कमी का मिलेगी राहत, ज्यादा रेट कट कर सकता है RBI: मॉर्गन स्टैनली

नई दिल्ली अमेरिकी निवेश बैंक एवं फाइनेंशियल सर्विस कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की खुदरा महंगाई औसतन चार प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई है. कंपनी ने मंगलवार, 18 मार्च को जारी रिपोर्ट में कहा है कि कन्ज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित मुद्रास्फीति की दर चार प्रतिशत पर रहने का मतलब है कि आने वाले महीनों में आरबीआई द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में 0.75 प्रतिशत की कटौती की जा सकती है, जबकि पहले 0.50 प्रतिशत की कटौती का अनुमान जारी किया गया था. नीतिगत दरों में 0.25 प्रतिशत की एक और कटौती संभव मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी के कारण मुद्रास्फीति में नरमी से अतिरिक्त कटौती की गुंजाइश बनती है. रिपोर्ट में कहा गया है, “लगातार दो महीने (जनवरी और फरवरी में) ओवरऑल मुद्रास्फीति की दर अनुमानों से कम रही है. इसे देखते हुए हम अपने मौद्रिक नीति परिदृश्य को अपडेट करते हैं, और (नीतिगत दरों में) 0.25 प्रतिशत की एक और कटौती को जोड़ते हैं.” वित्त वर्ष 2025-26 में खुदरा महंगाई औसतन 4 प्रतिशत रहेगी: रिपोर्ट इसमें उम्मीद जताई गई है कि वित्त वर्ष 2025-26 में खुदरा महंगाई औसतन चार प्रतिशत रहेगी, जबकि इसके पहले 4.3 प्रतिशत का अनुमान लगाया गया था. अमेरिका कंपनी ने कहा, “इस प्रकार, हम 0.50 प्रतिशत के अपने पिछले अनुमान से 0.75 प्रतिशत की संचयी दर कटौती की ओर अग्रसर हैं.” जनवरी और फरवरी के खुदरा महंगाई के आंकड़ों में अपेक्षा से तेज गिरावट देखी गई, जो खाद्य मुद्रास्फीति में कमी के कारण संभव हुई. वहीं, कोर मुद्रास्फीति निचले स्तर पर सीमित दायरे में बनी रही. मॉर्गन स्टेनली ने कहा, “31 मार्च को समाप्त होने वाली तिमाही के लिए अब हम हमारे पूर्व अनुमान 4.3 प्रतिशत की तुलना में खुदरा महंगाई के औसतन चार प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाते हैं. आरबीआई का ओवरऑल मुद्रास्फीति का एक लक्ष्य (2-6 प्रतिशत) है, इसलिए हमारा मानना ​​है कि इससे अतिरिक्त नरमी की गुंजाइश बनती है.” फरवरी में सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति 3.61 प्रतिशत रही. छह महीने में पहली बार यह आरबीआई के चार प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे आई है.खाद्य मुद्रास्फीति पिछले 12 महीने में ओवरऑल मुद्रास्फीति से ज्यादा रही है. इसमें मौसम संबंधी व्यवधानों का भी योगदान रहा है. रबी और खरीफ फसल उत्पादन में सालाना वृद्धि का अनुमान रिपोर्ट में कहा गया है, “हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए खाद्य मुद्रास्फीति के परिदृश्य में सुधार हुआ है क्योंकि रबी और खरीफ फसल उत्पादन में सालाना आधार पर वृद्धि का अनुमान है, जो अस्थिरता को कम करने में भी मदद करेगा.” भले ही विकास में तेजी आ रही है, लेकिन ऋण वृद्धि की प्रवृत्ति अब भी 11 प्रतिशत पर नरम है, जो वित्तीय स्थिरता की चिंताओं को दूर रखता है और विनियमन तथा तरलता के मोर्चे पर और अधिक कटौती की संभावना को दर्शाता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कोर मुद्रास्फीति में गिरावट आश्चर्यजनक रही है, जो कोर वस्तुओं और सेवाओं की मुद्रास्फीति के निचले स्तर से प्रेरित है.वास्तव में, भले ही बेस इफेक्ट सामान्य होने पर कोर मुद्रास्फीति बढ़ सकती है, लेकिन कमोडिटी की कीमतों में सीमा-बद्ध प्रवृत्ति से प्रेरित होकर इसके चार प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है. खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति में कमी का असर रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति में कमी का असर ओवरऑल सीपीआई में गिरावट की प्रवृत्ति की निरंतरता पर दिखने की संभावना है, जिस पर आरबीआई का फोकस होता है.इस संदर्भ में, ओवरऑल मुद्रास्फीति में नरमी आरबीआई द्वारा नीतिगत दरों में और अधिक कटौती के लिए अधिक गुंजाइश पैदा करती है.    

4 नए AI लैपटॉप्स HP ने लॉन्च किए, मिलेंगे दमदार फीचर्स, इतनी है कीमत

नईदिल्ली HP ने अपने नए AI PCs की रेंज को भारत में लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने EliteBook Ultra, EliteBook Flip, EliteBook X और दूसरे AI PCs को लॉन्च किया है. ये लैपटॉप्स AMD Ryzen और Intel Core Ultra प्रोसेसर के साथ आते हैं. इनमें HP की एक्सक्लूसिव न्यूरल प्रॉसेसिंग यूनिट (NPU) मिलता है. पर्सनलाइज्ड यूजर एक्सपीरियंस के लिए इन लैपटॉप्स में HP AI Companion और Poly Camera Pro जैसे फीचर्स मिलते हैं. इन सभी में Microsoft Copilot के लिए अलग से बटन मिलती है. आइए जानते हैं इनकी कीमत और दूसरी डिटेल्स. कितनी है कीमत? HP EliteBook X G1a 14-inch की कीमत 2,21,723 रुपये है. ये लैपटॉप ग्लेशियर सिल्वर कलर में आता है. वहीं EliteBook X G1i 14-inch की कीमत 2,23,456 रुपये है, जो एटमॉस्फियर ब्लू और ग्लेशियर सिल्वर कलर में आता है. वहीं EliteBook X Flip G1i 14-inch की कीमत 2,58,989 रुपये है. क्या हैं स्पेसिफिकेशन्स? HP EliteBook Ultra G1i कंपनी का टॉप ऑफ दि लाइन AI बिजनेस नोटबुक है. इसमें आपको 120Hz रिफ्रेश रेट वाली 3K OLED स्क्रीन मिलती है. लैपटॉप में हैप्टिक ट्रैकपैड दिया गया है, जो यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर करेगा. इसमें Intel Core Ultra 5 और 7 (सीरीज 2) प्रोसेसर का विकल्प मिलता है. बेहतरी वीडियो कॉल्स के लिए इसमें 9MP का कैमरा दिया गया है, जो डुअल मैक्रोफोन और AI पावर्ड Poly Camera Pro फीचर के साथ आता है. EliteBook X G1i 14-inch और EliteBook X Flip G1i 14-inch में भी आपको Intel Core Ultra 5 और 7 प्रोसेसर दिया गया है. लैपटॉप में पावर बटन के साथ फिंगरप्रिंट सेंसर को जोड़ा गया है. इसके अलावा कंपनी ने HP Endpoint सिक्योरिटी कंट्रोलर दिया गया है, जो साइबरथ्रेट्स से सुरक्षित रखेगा. इस सीरीज में सबसे सस्ता डिवाइस EliteBook X G1a 14-inch है. इसमें कंपनी ने AMD Ryzen 7 Pro और 9 Pro प्रोसेसर दिया गया है.  

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