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सीएम मोहन यादव ने दिए संकेत, प्रदेश में 9 साल बाद होंगे कर्मचारियों के प्रमोशन

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 14 मार्च को विधानसभा में ये बयान दिया था। इसके साथ ही सीएम ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता साफ होने वाला है। दरअसल, मध्यप्रदेश में पिछले 9 साल से कर्मचारी-अधिकारियों के प्रमोशन नहीं हुए हैं। इस दौरान 1 लाख से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही रिटायर हो चुके हैं। मंत्रालय सूत्र बताते हैं कि सरकार ने प्रमोशन के लिए तीन क्राइटेरिया तय किए हैं। ये भी तय किया है कि जो भी प्रमोशन होंगे, वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन रहेंगे। विधानसभा में मुख्यमंत्री का बड़ा बयान विधानसभा में मुख्यमंत्री ने कहा, “हम किसी भी विभाग में पद खाली नहीं रहने देंगे। विपक्ष थोड़ी मदद करेगा तो हम प्रमोशन पर भी ठीक रास्ते पर जा रहे हैं। हम सभी वर्गों के जो प्रमोशन अटके हैं, उनका समाधान खोज रहे हैं, ताकि नीचे के रिक्त पद भी भरे जा सकें। यह काम हमारी सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ करेगी।” 9 साल से अटके हैं प्रमोशन मप्र में प्रमोशन प्रक्रिया पिछले 9 साल से रुकी हुई है। इस दौरान करीब 1 लाख से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही रिटायर हो चुके हैं। निचले स्तर से लेकर वरिष्ठ पदों तक पदोन्नति की राह में कानूनी और प्रशासनिक बाधाएं बनी हुई हैं। इससे न सिर्फ कर्मचारियों में असंतोष है बल्कि कई विभागों में रिक्तियों के कारण कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। आखिर क्यों अटके थे प्रमोशन? दरअसल, पदोन्नति में आरक्षण से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लम्बित था। कोर्ट के निर्देशों और विभिन्न याचिकाओं के चलते सरकार प्रमोशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा पाई। इस कानूनी पेच के चलते पिछले 9 वर्षों से कोई भी विभाग प्रमोशन नहीं कर सका। सरकार ने निकाला समाधान सूत्रों के अनुसार, सरकार ने प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर तीन क्राइटेरिया तय कर लिए हैं। पहला, प्रमोशन प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन होगी। दूसरा, प्रक्रिया में सभी संवर्गों का संतुलन रखा जाएगा। तीसरा, विभागवार रिक्तियों और पात्रता के अनुसार चरणबद्ध ढंग से प्रमोशन किए जाएंगे। मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि सरकार जल्द ही विस्तृत गाइडलाइन जारी कर सकती है, ताकि सुप्रीम कोर्ट की शर्तों का पालन करते हुए प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू की जा सके। कर्मचारियों में उम्मीद मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों में एक बार फिर आशा जगी है। कर्मचारी संगठन भी सरकार के रुख का स्वागत कर रहे हैं और जल्द ही कोई ठोस निर्णय लिए जाने की अपेक्षा कर रहे हैं। कैसे शुरू हुआ विवाद? साल 2002 में तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण का प्रावधान करते हुए प्रमोशन नियम बनाए। इसके बाद आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिलने लगा, लेकिन अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों में असंतोष पनपने लगा। मामला तब गंभीर हो गया जब बड़ी संख्या में अनारक्षित वर्ग के कर्मचारी प्रमोशन से वंचित रह गए और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि प्रमोशन में आरक्षण का लाभ सिर्फ एक बार मिलना चाहिए। हाईकोर्ट का फैसला और सुप्रीम कोर्ट की रोक इन तर्कों के आधार पर मप्र हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2016 को मप्र लोक सेवा (पदोन्नति) नियम 2002 को खारिज कर दिया। सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए प्रमोशन पर रोक लगा दी। इसके बाद से मप्र में सभी विभागों में प्रमोशन ठप हो गए। राजनीतिक गलियारों में उठा बवाल हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजनीति में भी गर्माहट आ गई। 12 जून 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अनुसूचित जाति, जनजाति कर्मचारी-अधिकारियों (अजाक्स) के सम्मेलन में पहुंचे। उस समय विधानसभा चुनाव में करीब ढाई साल का समय बाकी था। सम्मेलन में शिवराज ने कहा था, “मेरे होते हुए कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता। मध्यप्रदेश सरकार प्रमोशन में भी आरक्षण देगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा, “संविदा भर्तियों में भी आरक्षण दिया जाएगा। डॉ. भीमराव अंबेडकर के आरक्षण की बदौलत ही मैं मुख्यमंत्री और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन सके हैं।” जातिगत राजनीति और नाराजगी शिवराज सिंह का यह बयान सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक चर्चा में आ गया। सवर्ण वर्ग, जो पहले से आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत कर रहा था, खुलकर नाराज हो गया। ग्वालियर-चंबल अंचल में इस बयान के खिलाफ सबसे ज्यादा आंदोलन हुए। आंदोलन इतने व्यापक हो गए कि कई जगहों पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए और सवर्ण संगठनों ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। 2018 के चुनाव में दिखा असर 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। राजनीतिक पंडितों का मानना था कि शिवराज के ‘माई का लाल’ वाले बयान ने पार्टी को ग्वालियर-चंबल जैसे मजबूत गढ़ों में नुकसान पहुंचाया। परिणामस्वरूप बीजेपी कई अहम सीटें हार गई और कांग्रेस सत्ता में लौट आई। अब क्या तैयारी कर रही सरकार? अब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और सभी वर्गों के संतुलन के साथ प्रमोशन की प्रक्रिया फिर से शुरू करने की दिशा में बढ़ रही है। सरकार तीन अहम क्राइटेरिया के आधार पर योजना बना रही है, ताकि एक संतुलित और कानूनी रूप से मजबूत समाधान सामने लाया जा सके। क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू होती है तो इससे जहां वर्षों से अटके अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत मिलेगी, वहीं सरकार को प्रशासनिक स्तर पर रिक्त पदों को भरने में भी मदद मिलेगी। राजनीतिक नजरिए से भी अहम यह मुद्दा आगामी चुनावों से पहले सरकार के लिए भी बेहद संवेदनशील है। सरकार प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर सतर्कता बरत रही है ताकि किसी भी वर्ग में असंतोष न फैले। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार कोर्ट के फैसले की दिशा में आगे बढ़कर इस जटिल मुद्दे को किस तरह सुलझाती है।

मध्य प्रदेश में 61,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो रही, शिक्षा क्षेत्र में भी 19,362 नियुक्तियां करेंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश में 61,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो रही है। इसमें 8,500 पुलिसकर्मियों की भर्ती भी है। 5 साल में ढाई लाख नौकरी का लक्ष्य है, जिससे युवाओं को रोजगार के अधिक मौके मिलें। शिक्षा क्षेत्र में भी 19,362 नियुक्तियां करेंगे। हर विधानसभा क्षेत्र में खेल मैदान की व्यवस्था करेंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव ने राजगढ़ में जिला अस्पताल के नए भवन के लोकार्पण दौरान सभा में ये बातें कहीं। विपक्ष पर निशाना सीएम ने कहा, कांग्रेस सरकार ने कई सुविधाएं बंद कर दी थी, इनमें परिवहन निगम भी है। कांग्रेस ने कई तरह की नौकरियां और योजनाओं पर ताला लगाया, हम उन तालों को खोलने का काम कर रहे हैं। सीएम ने कहा, राजगढ़ में ₹500 करोड़ के निवेश से विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी विभागों में निरंतर भर्तियां निकालकर पदपूर्ति करने जा रहे हैं. सरकार ने प्रत्येक जिले में पुलिस बैंड की पुनः स्थापना की. इसके लिए नवीन पदों का सृजन भी किया है. पुलिस बैंड, पुलिस का गौरव है, जो अपनी प्रस्तुति से 26 जनवरी और 15 अगस्त के कार्यक्रमों को गरिमा प्रदान करता है. ’61 हजार लोगों को मिला नियुक्ति पत्र’ उन्होंने कहा, “मौजूदा समय में कुल मिलाकर 267 शासकीय आईटीआई संचालित कर रहे हैं और 22 नए आईटीआई  शुरू करेंगे. साथ ही 5,280 अतिरिक्त सीट की बढ़ोतरी की जाएगी. जबकि एक साल के अंदर हमने 61 हजार लोगों को नियुक्ति पत्र दिए हैं.” जल्द आएगी वैकेंसी उन्होंने कहा कि सरकार ने 6,600 से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की है. प्रदेश में जल्द ही 8,500 से अधिक पुलिस कॉन्स्टेबल और सब-इंस्पेक्टर की नवीन भर्तियां भी शीघ्र निकाली जाएंगी. सीएम यादव ने कहा है कि पुलिस सब प्रकार की चुनौतियों का सामना कर समाज को बेफिक्र होकर जीने का अनुकूल माहौल प्रदान करती है. सीएम ने पुलिस के काम को भी सराहा पुलिस होली, दीपावली और अन्य त्योहारों पर अपने घर से दूर रहकर अपनी पूरी निष्ठा से समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करती है. सुरक्षाकर्मियों का समाज में विशेष सम्मान और महत्व है. बाबा महाकाल की नगरी में पुलिसकर्मियों के साथ होली खेलना हर्ष की बात है. पुलिस के लिए होली पर्व पर व्यवस्था करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है. पुलिस की सेवा के कारण ही सभी नागरिक हर्षोल्लास और आनंद के साथ होली का पर्व मनाते हैं. पुलिस, समाज की सुरक्षा के लिए एक अहम कड़ी है.

भोपाल मेट्रो में सफर करने की तैयारी कर रहे लोगों को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा, कमर्शियल रन अगस्त में

भोपाल भोपाल मेट्रो में सफर करने की तैयारी कर रहे लोगों को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। जून में शुरू होने वाला कमर्शियल रन अब अगस्त 2025 में शुरू होगा। इससे पहले मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉपोरेशन एम्स, अलकापुरी और डीआरएम मेट्रो स्टेशन का काम पूरा करेगा। सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के बीच करीब करीब काम पूरा हो गया है। अब इन स्टेशनों पर फिनिशिंग का काम चल रहा है। भोपाल मेट्रो का कमर्शियल रन सुभाष नगर से एम्स भोपाल मेट्रो स्टेशन के बीच शुरू होगा। कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने अब इसकी नई तारीख अगस्त 2025 दी है। इससे पहले रेलवे ब्रिज पर मेट्रो का लोड भी चेक किया जाएगा। इसके बाद सब कुछ ठीक रहने पर मेट्रो रेल सेफ्टी कमिश्नर मई या जून में ट्रेक का निरीक्षण कर सकते है, जिनकी रिपोर्ट ठीक आने पर कमर्शियल रन शुरू हो जाएगा। 6.22 किमी की दूरी 11 मिनट में तय करेगी मेट्रो मेट्रो के ट्रायल रन के दौरान इसे रानी कमलापति स्टेशन से एम्स तक 10-20 किमी प्रति घंटा की गति से चलाया गया। कमर्शियल रन में मेट्रो की स्पीड 70-90 किमी प्रति घंटा होगी, जिससे 6.22 किमी की दूरी मात्र 11 मिनट में पूरी की जा सकेगी। प्राक्कलन समिति भी जता चुकी है नाराजगी पिछले दिनों विधानसभा की प्राक्कलन समिति ने भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया था। समिति ने मेट्रो के काम में देरी को लेकर नाराजगी जताई थी। उस समय मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने 15 अगस्त तक कमर्शियल रन शुरू करने की समयसीमा दी थी। छह मेट्रो भोपाल पहुंची, 21 और आएंगी भोपाल मेट्रो स्टेशन पर तीन-तीन कोच की मेट्रो को शुरुआत में चलाया जाएगा। स्टेशन छह कोच के हिसाब से तैयार किए गए हैं। अभी भोपाल में 6 मेट्रो कोच के सेट आ गए हैं। इस तरह के कुल 27 मेट्रो कोच के सेट भोपाल आएंगे। अभी 21 मेट्रो कोच के सेट आना बाकी हैं।  

रील बनाओ…पाओ लाखो का इनाम, रील बनाने पर सरकार देगी पैसा, बस करना होगा ये काम

ग्वालियर मध्यप्रदेश मे अब राज्य सरकार रील बनाने पर युवाओं को पैसा देगा. रील प्रतियोगिता के तहत सरकार युवाओं को दो लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि देगी. दरअसल, राज्य सरकार की तरफ से स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता की घोषणा की गई है. इसके लिए प्रतिभागियों को 15 अप्रैल तक गांवों में कचरे से जुड़ी जागरूकता पर रील बनाकर सरकार द्वारा निर्धारित लिंक पर अपलोड करनी होगी. पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रतियोगिता की घोषणा करते हुए कहा कि, प्रदेशभर से प्राप्त रीलों में से सर्वश्रेष्ठ पांच प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा.  इस अभियान की शुरूआत की है। इसे स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता नाम दिया गया है। इस कंपटीशन के विषयों और थीम पर रील बनाकर प्रदेशवासी सहभागिता कर सकते हैं। कचरा नहीं यह कंचन है, इसे अलग-अलग करें और पैसा कमाएं की थीम पर रखी गई कंपटीशन की आखिरी तारीख 15 अप्रेल रखी गई है। 30 से 45 सेकंड की एचडी फॉर्मेट रील इस कंपटीशन के लिए 30 से 45 सेकंड तक का एचडी फॉर्मेट में रील बनानी (पोटे्रट फॉर्मेट) होगी। इसकी भाषा सरल हिंदी, स्थानीय भाषा रखनी होगी। वीडियो रील शेयर करने के लिए अपने वीडियो को फेसबुक / यूट्यूब इंस्टाग्राम पर शेयर करें और उसकी लिंक को एमपी.मायजीओवी.इन पर सबमिट करें। रील में म्यूजिक, टेक्स्ट और विजुअल इफेक्ट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन वह सकारात्मक और सभ्य हो। स्वच्छता पर बनाएं रील मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि, गांवों में कचरा न फैले, इसके लिए कचरा प्रबंधन पर सभी को साथ मिलकर काम करना होगा. इस उद्देश्य से स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता शुरू की जा रही है. इस प्रतियोगिता के तहत नौजवान बेटे-बेटियां और अभिभावक स्वच्छता और अच्छी आदतों पर रील बनाकर भेज सकते हैं. रील बनाने पर मिलेगा इनाम प्रहलाद पटेल ने कहा इस पहल से न केवल प्रतिभागी आर्थिक पुरस्कार प्राप्त करेंगे, बल्कि समाज को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. इसलिए सभी से अनुरोध है कि, एक बार कैमरा उठाएं और स्वच्छता के संदेश के साथ रील बनाने के लिए आगे आएं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन की कल्पना की थी. इसी को साकार करने के लिए सरकार ने ‘कचरा नहीं, यह कंचन है’ का संदेश दिया है. यदि कचरे को सही तरीके से अलग किया जाए, तो यह आय का भी स्रोत बन सकता है. इस लिंक पर करें अपलोड स्वच्छता के प्रति जागृति संबंधी रील बनाकर https://mp.mygov.in/task/swachh-madhya-pradesh-reel-making-contest… पर रजिस्ट्रेशन कर रील अपलोड करना होगा. इसमें प्रथम पुरस्कार की राशि 2 लाख रुपए है. मंत्री प्रहलाद पटेल से आग्रह किया है कि ‘स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ‘स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता’ में भाग लेकर http://mp.mygov.in पर 15 अप्रैल तक अपलोड करें. बता दें कि पहला पुरस्कार दो लाख रुपए, दूसरा पुरस्कार एक लाख रुपए और तीसरा पुरस्कार 50 हजार रुपए दिलाएगा. इसके अलावा 25-25 हजार रुपए के दो सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे. ये रखे गए हैं विषय प्रदेश के विभिन्न गांव के लिए वेस्ट मैनेजमेंट पर रील्स बनाना है, जिसके मुख्य विषय ये रखे गए हैं।     गीला सूखा कचरा को अलग-अलग रखना एवं उसका उचित निपटान।     कचरे के दोबारा उपयोग पर रील्स।     खुले में कचरा नहीं फेंकना।     ये मिलेंगे पुरस्कार     प्रथम पुरस्कार : 2,00,000 रुपए     द्वितीय पुरस्कार : 1,00,000 रुपए     तृतीय पुरस्कार : 50,000 रुपए     सांत्वना पुरस्कार (2) : 25,000 रुपए (प्रत्येक)

बलूचिस्तान में चरम पर आजादी की लड़ाई, चीन के CPEC प्रोजेक्ट में 60 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश

बीजिंग/इस्लामाबाद  बलूचों की आजादी की जंग ने पाकिस्तान में हड़कंप मचा दिया है। पाकिस्तान को समझ नहीं आ रहा है कि बलूचिस्तान को कैसे कंट्रोल में रखा जाए। अगर हालात बिगड़ते हैं तो ना सिर्फ पाकिस्तान टूट जाएगा, बल्कि चीन ने अरबों डॉलर का जो निवेश कर रखे हैं, वो भी डूब जाएंगे। दूसरी तरफ पिछले हफ्ते जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक करने के बाद बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने बलूचिस्तान में एक बार फिर से पाकिस्तान की सेना पर भीषण हमला किया है। BLA ने पाकिस्तान जवानों को ले जा रही एक बस को उड़ा दिया और दावा किया कि उसके हमले में कम से कम 90 जवान मारे गये हैं। यानि बलूचों ने पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ आजादी की जंग को काफी तेज कर दिया है, जिससे घबराए चीन ने पाकिस्तान को फौरन सैन्य सहायता देने की पेशकश की है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी अभियान में मदद करने के लिए सैन्य सहायता देने की पेशकश की है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने जाफर एक्सप्रेस हाईजैक को लेकर पूछे गये सवाल पर कह है कि “हमने रिपोर्टों पर गौर किया है और इस आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की है।” चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि “चीन पाकिस्तान के साथ आतंकवाद विरोधी और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और संयुक्त रूप से क्षेत्र को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और स्थिर रखने के लिए तैयार है।” बलूचों के आंदोलन से क्यों घबराया चीन? आपको बता दें कि पिछले हफ्ते BLA के फ्रीडम फाइटर्स ने जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया था, जिसमें 440 यात्री सवार थे। BLA ने 200 से ज्यादा पाकिस्तानी सेना के जवानों को मारने का दावा किया है। जबकि पाकिस्तान की सेना ने करीब 50 मौतों की बात कबूली है। जाफर एक्सप्रेस हाईजैक ने बीजिंग में तहलका मचा दिया है। वो अपने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की सुरक्षा को लेकर डर गया है। चीन को लग रहा है कि अरबों डॉलर के इस प्रोजेक्ट को बलूच फूंक देंगे। चीन ने 3,000 किलोमीटर लंबे CPEC में करोड़ों डॉलर का निवेश किया है। अनुमान है कि चीन ने बलूचिस्तान में अलग अलग प्रोजेक्ट्स के जरिए करीब 65 अरब डॉलर का निवेश किया है, जो बीजिंग के लिए मध्य पूर्व के बाजारों तक सस्ते और तेज मार्ग और दक्षिण एशिया में प्रभाव बनाने का रास्ता बनाता है। लेकिन अब चीन का ये प्रोजेक्ट फंस गया है और भारत को घेरने का प्लान फेल होता नजर आ रहा है। बलूच विद्रोहियों की मांग ना सिर्फ पाकिस्तान से आजादी है, बल्कि वो चीनी प्रोजेक्ट का भी विरोध कर रहा हैं। बलूचों का कहना है की चीन उनकी संसाधनों को लूट रहा है। लिहाजा बलूच विद्रोही, बलूचिस्तान को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ने वाली सीपीईसी परियोजनाओं पर काम कर रहे चीनी कर्मियों पर भी कई हमले किए हैं। बलूचिस्तान संसाधन संपन्न इलाका है, जहां प्राकृतिक गैस, कोयला, तांबा और अन्य मूल्यवान खनिजों का भंडार है। पाकिस्तान और चीन मिलकर इन खनिजों को लूट रहे हैं और बलूचों को कुछ भी नहीं मिल रहा है। लिहाजा बलूचों ने अब बंदूक उठा लिए हैं। बलूच नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष नसीम बलूच ने कहा है कि इस प्रोजेक्ट की वजह से बलूचों को काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि ग्वादर पोर्ट बनाने के लिए हजारों बलूचों को उनके घरों से विस्थापित कर दिया गया और उन्हें कहीं और बसाने के भी कोई इंतजाम नहीं किए गये। लिहाजा चीनी कर्मचारियों पर हमले हो रहे हैं। जिससे घबराए चीन ने पाकिस्तान पर अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवानों को तैनात करने के लिए पाकिस्तान पर भारी दबाव बना रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान, चीन के प्रस्ताव को स्वीकार करने में हिचकिचा रहा है, क्योंकि उसे अपनी धरती पर चीनी सुरक्षाकर्मियों को अनुमति देने पर घरेलू राजनीतिक प्रतिक्रिया का डर है। लेकिन अब जबकि बलूचों के हमले खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके हैं तो ऐसी आशंका है कि चीन अपने जवानों को बलूचिस्तान में तैनात कर सकता है।

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