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ओएफके में भी बफीर्ली पहाड़ियों में बर्फ का वबंडर बनाने वाले 84 एमएम अटेक्स तैयार किया गया

जबलपुर निगमीकरण के बाद आयुध निर्माणियों में नए डिफेंस प्रोडक्ट के निर्माण को लेकर तेजी आई है। शहर की चारों निर्माणियां भी इसमें आगे हैं। टी-72 टैंक प्रोजेक्ट इसमें सबसे नया है। अब धनुष से आगे के फीचर वाली तोप का निर्माण चल रहा है। दूसरी तरफ ब्रहोस मिसाइल के बारहेड की फिलिंग और टैंक भेदी बम के नए वर्जन बन रहे हैं। आयुध निर्माणियों में नए उत्पाद जुड़े आयुध निर्माणियों में 18 मार्च को स्थापना दिवस मनाया जाता था। इस अवसर पर ओएफके, जीसीएफ, वीएफजे और ओएफजे (पूर्व नाम जीआइएफ) में प्रदर्शनी लगती थी। इनके सभी हथियारों का प्रदर्शन किया जाता था। लोग इन्हें अपने हाथों से छूने के साथ ही विध्वंसक क्षमता की जानकारी जुटाते थे। लेकिन निगमीकरण के बाद आयुध निर्माणी दिवस नहीं मनाया जाता। एक पखवाड़े में आएंगे दो टी-72 टैंक सेना के लिए वाहन बनाने वाली वीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) अब टैंक की ओवरहालिंग करेगा। इसे एमआरओ प्रोजेक्ट नाम दिया गया है। वीएफजे के पीआरओ विपुल वाजपेयी बताते है कि एक पखवाड़े के भीतर चेन्नई की ऑर्डनेंस फैक्ट्री आवडी से दो टी-72 टैंक जबलपुर लाए जाएंगे। उसके लिए यूनिट तैयार कर ली गई है।  टोड से माउंटेड गन सिस्टम पर काम गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) ने 155 एमएम 45 कैलीबर धनुष तोप का निर्माण कर रक्षा क्षेत्र में नया रेकॉर्ड बनाया था। जीसीएफ के महाप्रबंधक राहुल चौधरी ने बताया कि अब इससे आगे 155 एमएम 52 कैलीबर टोड और माउंटेड धनुष तोप बनाई जाएगी। इसके प्रोटोटाइप बन चुके हैं। इसी प्रकार डबल बैरल एल-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन भी बनेगी। जमीन से आसमान तक मार ओएफके में भी बफीर्ली पहाड़ियों में बर्फ का वबंडर बनाने वाले 84 एमएम अटेक्स तैयार किया गया है। बहोस मिसाइल के वारहेड में बारूद की फिलिंग का ट्रायल चल रहा है। एल-70 एंटी एयरक्राट एमुनेशन को अपग्रेड किया गया है।

भारतीय थल सेना : अग्निवीर भर्ती के लिए सेना भर्ती कार्यालय रायपुर ने अधिसूचना की जारी

रायपुर भारतीय थल सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए सेना भर्ती कार्यालय रायपुर द्वारा अधिसूचना जारी की गई है, जो भारतीय सेना की वेबसाइट ज्वाइन इंडियन आर्मी डॉट एनआईसी डॉट इन पर उपलब्ध है। इस वेबसाइट में भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रकिया 12 मार्च से प्रारंभ की गई है जो 10 अप्रैल तक खुली रहेगी। इन युवाओं की सुनहरा मौका कक्षा आठवीं और दसवीं (हाईस्कूल) परीक्षा उत्तीर्ण योग्य युवाओं के लिए सुनहरा अवसर है। अग्निवीर की भर्ती जनरल ड्यूटी, तकनीकी स्टॉफ, क्लर्क, ट्रेडमेन, महिला सैन्य पुलिस और रेगुलर कैडर भर्ती, धर्मगुरू, नर्सिंग, सहयोगी, सिपाही, फार्मासिस्ट आदि श्रेणी में की जाएगी। अग्निवीर क्लर्क के उमीदवारों को ऑनलाइन परीक्षा (सीईई) के समय टाइपिंग टेस्ट भी देना होगा। ऑनलाइन परीक्षा (सीईई) जून 2025 के बाद होने की संभावना हैं। अन्य किसी भी प्रकार की जानकारी और समस्या के लिए सेना भर्ती कार्यालय रायपुर में संपर्क कर सकते हैं। इस बार भर्ती वर्ष 2025-26 से ऑनलाइन सामान्य प्रवेश परीक्षा और रैली के आयोजन में कुछ बदलाव किए गए हैं। ऑनलाइन सामान्य प्रवेश परीक्षा 13 भाषाओं अंग्रेजी, हिंदी, मलयालम, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, पंजाबी, उड़िया, बंगाली, उर्दू, गुजराती, मराठी और असमिया में आयोजित की जाएगी। Agniveer Recruitment 2025: यहां देख सकते हैं पूरी जानकारी सेना भर्ती कार्यालय रायपुर के मुताबिक अग्निवीरों की भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी है। इंडियन आर्मी की वेबसाइट www.joinindianarmy.nic.in पर उपलब्ध है। भर्ती के लिए 17 से 21 साल के अभ्यर्थी अग्निवीर के दो पदों के लिए अपनी योग्यता अनुसार आवेदन कर सकते है।

माँ ने सालों बाद कबूला काला सच, बेटी के एक्स से हो गई थी गर्भवती

लंदन 16साल से एक काला सच दबाकर बैठी थी। लेकिन जब दबाना हुआ मुश्किल तो सोशल मीडिया पर कबूल किया कि उसने अपनी बेटी के पति के साथ शारीरिक रिश्ता बनाया था। पूरी कहानी दंग कर देगी। आज जो हकीकत आप पढ़ने जा रहे हैं वो किसी कहानी सरीखी लगती है, लेकिन ये एक सच्ची कहानी है। ये एक मां का कुबूलनामा है जिसने अपनी बेटी से ऊपर हमेशा ड्रग्स और नशे को रखा। ये हकीकत है उस महिला की ज़िंदगी की जिसने नशे में डूबकर एक ऐसी शर्मनाक हरकत कर डाली, जिसके बाद वो अपनी ही बेटी से नज़र नहीं मिला सकी। लेकिन घटना के 16 साल बाद इस मां ने दुनिया के सामने आकर अपना सच बताया है। एक ऐसा सच जिसे जिस किसी ने सुना, जिस किसी ने पढ़ा, हैरान हो गया। इस महिला के मन पर उस घटना का ऐसा भार था, जिसे कम करने के लिए उसने Reddit पर स्वीकार किया कि वो अपनी बेटी के एक्स ब्वायफ्रेंड के साथ हमबिस्तर हुई। लेकिन उसे धक्का तब लगा जब इस घटना के कुछ समय बाद एक बार फिर उसकी बेटी और ब्वॉयफ्रेंड रिलेशनशिप में दोबारा आ गए। वो बताती हैं, ‘मैं 38 साल की थी और मेरी बेटी 18 साल की थी। मेरी बेटी हैरी से डेटिंग कर रही थी जो 24 साल का था। मैं शराबी थी और दूसरे नशीले पदार्थों का सेवन करती थी, खासकर कोकीन का। मैं एक अच्छी इंसान नहीं थी, मां तो दूर की बात है। ऐसा नहीं है कि मैं अपनी बेटी के साथ दुर्व्यवहार करती थी या कुछ और लेकिन मैं आमतौर पर लापरवाह थी। अपनी बेटी से ज़्यादा अपनी शराब और नशीले पदार्थों के बारे में सोचती थी, खासकर जब वह किशोरावस्था में थी। बेटी ने नशे की वजह से ब्वॉयफ्रेंड को छोड़ दिया था उसने आगे लिखा, ‘मैं अब 14 साल से शराब नहीं पी रही हूं। मैंने हमेशा अपनी बेटी को हैरी के साथ डेटिंग को गलत बताया लेकिन मैं उसे कभी भी इसकी वजह नहीं बता सकी। वह लगातार मेरे साथ फ्लर्ट करता था। वो भी मेरी तरह ड्रग्स और नशे का आदि था। हम दोनों के बीच उम्र का अंतर भी मुझे परेशान करता था। एक बात हम दोनों में कॉमन थी, वो ये कि वो भी मेरी तरह शराबी और ड्रग्स का नशा करने वाला था। उसकी इसी आदत की वजह से मेरी बेटी उससे अलग हो गई। इसके तुरंत बाद वह दूर चली गई, बहुत दूर नहीं, लेकिन फिर भी वह अब मेरे साथ नहीं रहती थी।’ बेटी के एक्स से हो गई थी गर्भवती बेटी के साथ रिश्ता हैरी का भले ही खत्म हो गया था। लेकिन मां को वो ड्रिंक और घूमने के नाम पर बुलाता रहा। कई बार महिला ने उसे मना किया, लेकिन आखिरकार हार मान ली और उससे मिलने चली गई। इसी के साथ दोनों के बीच टॉक्सिक रिलेशनशिप की शुरुआत हुई। एक दिन वो बहुत सारा कोक लेकर आया और मैं उसका विरोध नहीं कर पाई। हमने कोक का सेवन किया और फिर सेक्स। इसके बात करीब चार महीने तक हम कभी-कभी मिलते थे और सेक्स करते थे। कोई भी ड्रग एडिक्ट जानता है कि इस तरह से ड्रग एडिक्ट दोस्त होना कैसा होता है। फिर मैं गर्भवती हो गई। मुझे पता था कि यह उसी की वजह से है, मैंने बेवकूफी में कई बार बिना कंडोम के सेक्स किया। मैंने उसे कभी नहीं बताया कि मैं गर्भवती हूं, और मैंने जाकर गर्भपात करवा लिया और इसे गुप्त रखा।’ बेटी एक्स से दोबारा मिली और कर ली शादी इसके बाद मैंने उससे मिलना बंद कर दिया। दो साल बाद मेरी बेटी ने हैरी के बदलाव के बारे में बताया। उसने बताया कि वो शराब पीना छोड़ चुका है और वो पूरी तरह बदल गया है। वो दोनों फिर से साथ हैं। उनका रिश्ता ठीक चल रहा है। महिला आगे बताती है कि मैं सच में बेटी की बात सुनकर शर्मिदा थी। मैं उसे बताने वाली थी कि हम एक साथ सोए। मुझे इस बात का अहसास था कि वो मुझसे अब सारी ज़िंदगी नफरत करेगी। लेकिन एक दिन हैरी मेरी बेटी के साथ मुझसे मिलने आया। मेरी बेटी की गैर मौजूदगी में उसने मुझसे कहा कि जो कुछ भी हमारे बीच हुआ, उसके बारे में उसे बताने की कोई वजह नहीं है। मैंने उसकी बात मान ली। उनकी शादी को अब 16 साल हो चुके हैं और उनका एक बच्चा भी है। हैरी को कैंसर हुआ लेकिन वो कैंसर से जंग जीत गया। नाती को देखकर चीजें अजीब लगती है “मैं उनसे हमेशा नहीं मिल पाती। वे टेक्सास में रहते हैं और मैं ईस्ट कोस्ट पर रहती हूं। लेकिन हम जब भी मिलते हैं मेरे और हैरी के बीच एक तनाव सा रहता है। तमाम बातें दिमाग में आती हैं। सेक्स के बारे में नहीं लेकिन अक्सर लगता है हमने ऐसा क्यों किया या हमें ऐसा क्यों करना पड़ा? ख़ासकर जब मैं अपने नाती को देखती हूं तो लगता है कि चीज़ें अलग होतीं तो वो मेरा बेटा हो सकता था। लेकिन अगर मैंने उस बच्चे को रखने का फैसला कर लिया होता तो कितनी बड़ी दिक्कत खड़ी हो सकती थी।” ये एक मां की सच्चाई थी जिसे वो सालों से जी रही है, लेकिन अंदर की घुटन को शांत करने के लिए उन्होंने अपना सच दुनिया के सामने रखा, ये जानते हुए भी कि अगर उनकी बेटी ये जान जाती है तो उन सभी की ज़िंदगी में कितना बड़ा तूफान आ सकता है

नगरीय निकायों में स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाने के प्रयास

भोपाल मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों में हर साल की तरह स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 शुरू हो चुका है। इस साल इसमें देश के 4900 से अधिक शहर स्वच्छता में श्रेष्ठता की दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण मुख्य रूप से जमीनी स्वच्छता के साथ शहरों के स्वच्छता प्रमाणीकरण के लिए किया जा रहा है। प्रमाणीकरण में खुले में शौच से मुक्ति के लिए ओडीएफ, जल के पुन: उपयोग के लिए वॉटर प्लस और कचरा मुक्ति हेतु स्टार रेटिंग प्रमुख हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत नगरीय निकायों की टीम साल भर काम करती हैं। इसमें नियमित रूप से सफाई के अलावा, कचरा संग्रह, प्र-संस्करण, अधोसंरचना विस्तार, रख-रखाव और शहरों का सौंदर्यीकरण शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हस्तक्षेप से आज यह देश ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन बन गया है। हर शहर को इसमें शामिल होना और अपनी रैंकिंग में सुधार करना गौरव का अनुभव कराता है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने स्वच्छ सर्वेक्षण के संबंध में मैदानी अमले को निर्देश भी जारी किये हैं। वर्ष-2024 का स्वच्छ सर्वेक्षण अब तक का 9वां सर्वेक्षण है, जिसकी प्रमुख थीम 3-आर (रिसाइकल, रिड्यूस, रियूज) पर आधारित है। इसके प्रारंभ होने से मध्यप्रदेश ने देश के स्वच्छता परिदृश्य में अपनी बढ़त बना ली थी। अपने नियमित योगदान से मध्यप्रदेश शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। वर्ष 2022 में मध्यप्रदेश को देश के सर्वश्रेष्ठ स्वच्छ प्रदेश का सम्मान प्राप्त हुआ एवं वर्ष 2023 में यह नजदीकी मुकाबले में देश के दूसरे नंबर का बेहतर राज्य घोषित किया गया। मध्यप्रदेश का शहर इंदौर लगातार सात सालों से देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है। वर्ष 2024 में इसे सुपर लीग श्रेणी में शामिल किया गया है। इस वर्ष मध्यप्रदेश के सभी शहर इसमें अपनी दावेदारी कर रहे हैं। प्रदेश के सभी शहरों ने स्टार रेटिंग, ओडीएफ डबल प्लस के लिए अपना दावा किया है। इसके अलावा 44 शहरों ने वॉटर प्लस के लिए अपनी दावेदारी की है। हर शहर स्वच्छता के मापदंडों पर सफाई, संग्रहण, कचरा निपटान, प्रोसेसिंग आदि पर पूरा ध्यान दे रहा है। आज प्रदेश में लगभग 6700 टन कचरा प्रतिदिन संग्रह किया जाता है। इसके लिए 7500 से अधिक कचरा वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। इस संग्रहित कचरे की प्रोसेसिंग के लिए हर छोटे-बड़े शहर में कम्पोस्टिंग इकाइयां, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटीज, निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन इकाई और मल-जल निस्तारण के लिये एफएसटीपी उपलब्ध हैं। प्रदेश के बड़े शहरों में कचरा प्रोसेसिंग के लिए अत्याधुनिक इकाइयों की स्थापना की गई है। इसमें जबलपुर और रीवा में कचरे से बिजली, सागर व कटनी में कम्पोस्टिंग, के साथ इंदौर में कचरे से बॉयो सीएनजी निर्माण की इकाइयां लगाई जा चुकी हैं। इसके अलावा भोपाल में कपड़ा, थर्माकोल, प्लास्टिक, निर्माण के साथ मांसाहारी बाजारों से आने वाले कचरे के निपटान के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रदेश में आज 700 से अधिक रिसाइकल, रिड्युज और रियूज़ (आरआरआर) केंद्र संचालित हैं। प्रदेश में एक लाख से कम जनसंख्या के शहरों में मल-जल प्रबंधन व्यवस्थाओं को तैयार करने के लिए कार्यवाही की जा रही है। इसके अंतर्गत जिन शहरों में सीवेज लाइन नहीं हैं, वहाँ नालियों को आपस में जोड़कर उन्हें एसटीपी तक ले जाने का कार्य किया जा रहा है।  

छत्तीसगढ़ में अब अवैध धर्मांतरण रोकने सख्त कानून बनाया जाएगा

रायपुर छत्तीसगढ़ में अब गैरकानूनी रूप से धर्म परिवर्तन करना गुनाह है। प्रदेश के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने साफ कहा है कि इसे रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जाएगा। विजय शर्मा डिप्टी सीएम होने के साथ छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री भी हैं। आज विधानसभा में भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने धार्मिक धर्मांतरण का मुद्दा उठाया था। चंद्राकर ने कहा कि ‘चंगाई सभा’ (उपचार बैठक) के बहाने निर्दोष,असहाय,गरीब लोगों को प्रलोभन के माध्यम से धर्मांतरित किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ्य,शिक्षा और सामाजिक कार्य क्षेत्रों में काम करने के उद्देश्य से बने एनजीओ विदेशी देशों से धन प्राप्त कर रहे हैं,जिसका कथित रूप से धर्मांतरण गतिविधियों के लिए उपयोग किया जा रहा है। राज्य में ऐसे कई एनजीओ हैं,जो धार्मिक आधार पर पंजीकृत हैं और विदेशों से धन भी प्राप्त कर रहे हैं। अजय चंद्राकर ने आरोप लगाया कि बस्तर जिले में 19 पंजीकृत संगठनों में से 9 और जशपुर जिले में 18 संस्थानों में से 15 ईसाई मिशनरियों की ओर से चलाए जा रहे हैं। इन संगठनों पर नियंत्रण की कमी के कारण धर्मांतरण गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर संगठन जशपुर जिले (मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का गृह जिला) में काम कर रहे हैं,जहां धर्मांतरण के ज्यादातर मामले सामने आते हैं। भाजपा विधायक ने इस साल की शुरुआत में बिलासपुर और रायपुर जिलों में पुलिस में दर्ज धार्मिक धर्मांतरण के कुछ मामलों का भी हवाला दिया। धर्मांतरण में विदेशी फंडिंग के उपयोग से इनकार नहीं किया जा सकता। चंद्राकर ने दावा किया कि हालांकि सरकार ऐसे फंडों पर प्रतिबंध लगाने का दावा करती है,लेकिन ये संस्थान ऑडिट रिपोर्ट न देकर अपना रास्ता निकाल लेते हैं। अपने जवाब में उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि एनजीओ पर स्थानीय प्रशासन के नियंत्रण की कमी के कारण धर्मांतरण की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस उचित जांच करती है और जब ऐसी चंगाई सभाओं में लोगों को धर्मांतरित करने के लिए लुभाने की शिकायतें मिलती हैं तो तुरंत कानूनी कार्रवाई करती है।शर्मा ने कहा कि 2020 में एक मामला दर्ज किया गया,2021 में सात, 2022 में तीन,2023 में शून्य,2024 में कुल 12 और 2025 में अब तक चार मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद चंद्राकर ने कहा कि यह मुद्दा बहुत गंभीर है और मुख्यमंत्री साय ने हाल ही में इसके बारे में बात की है। राज्य में विदेशी धन प्राप्त करने वाले एनजीओ का निरीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसी सहायता का उपयोग धार्मिक धर्मांतरण सहित अवैध गतिविधियों में नहीं किया जा रहा है। चंद्राकर ने राज्य में विदेशी धन प्राप्त करने वाले एनजीओ का विवरण और क्या ऐसे संस्थानों के खिलाफ कोई शिकायत मिली है। शर्मा ने कहा कि विदेशी धन प्राप्त करने वाले एनजीओ विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत पंजीकृत हैं और केंद्रीय गृह मंत्रालय ऐसे विदेशी धन की प्राप्ति की निगरानी करता है। शर्मा ने कहा कि पहले राज्य में 364 एनजीओ थे जो विदेशी धन प्राप्त कर रहे थे। इसके बाद,चंद्राकर ने पूछा कि क्या सरकार अवैध धार्मिक धर्मांतरण को रोकने के लिए नए प्रावधान या कानून लाएगी। जवाब में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बहुत गंभीर है। हालांकि छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम लागू है,सरकार सोच रही है कि नए कानूनी प्रावधान लागू होने चाहिए। उचित समय पर नए प्रावधान पेश किए जाएंगे। विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए विजय शर्मा ने कहा कि पुलिस प्रशासन अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रहा है। वर्तमान में, पुराने प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। सरकार नए प्रावधानों की आवश्यकता पर विचार कर रही है। हम जल्द ही नया कानून लाएंगे। अवैध धार्मिक धर्मांतरण को रोकने के लिए जल्द ही एक सख्त कानून बनाया जाएगा।

मध्यप्रदेश में फैल रही रहस्यमई बीमारी, मांसपेशियों में कमजोरी, सुन्न होना या लकवा भी हो सकता

इंदौर  छह माह पहले पुणे में सामने आई गुइलैन-बैरे सिंड्रोम बीमारी(Guillain-Barré Syndrome) के लक्षण वाले मरीज इंदौर में भी मिल रहे हैं। एमवायएच की मेडिसिन विभाग ओपीडी की न्यूरोलॉजी यूनिट में हर सप्ताह दो से तीन केस इसके लक्षण वाले आ रहे हैं, जिसमें से कुछ को तीन सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती भी करना पड़ रहा है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में इसकी जांच के साथ ही उपचार के लिए प्लाज्मा एक्सचेंज या इयूनोग्लोबुलिन थेरेपी भी की जा रही है, जिससे मरीज गंभीर स्थिति में पहुंचने से बच रहे हैं। यह बीमारी किसी वायरस के कारण नहीं, बल्कि बैक्टीरियल इंफेक्शन से होती है। इसलिए इसके एक-दूसरे को प्रभावित करने की स्थिति नहीं रहती। डॉक्टर्स के अनुसार, यह एक दुर्लभ नर्वस सिस्टम से संबंधित बीमारी होती है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम अपने ही तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। इसके कारण तंत्रिका कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी, सुन्न होना या कभी-कभी लकवा भी हो सकता है। इस सिंड्रोम की शुरुआत आमतौर पर एक इन्फेक्शन जैसे वायरल फीवर, लू या गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन से होती है। मुख्य लक्षण(Guillain-Barré Syndrome)     मांसपेशियों में कमजोरी     सुन्न या झंकार महसूस होना     चलने में समस्या     सांस लेने में कठिनाई पांच-छह सप्ताह से पहुंच रहे मरीज एमवायएच की मेडिसिन विभाग की ओपीडी में पिछले पांच से छह माह से ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। मेडिसिन विभाग के डॉ. अशोक ठाकुर ने बताया, विशेषकर ऋतु परिवर्तन के दौरान यह संया अधिक देखते में आ रही है। इसमें बारिश से ठंडी के बीच का समय व ठंड से गर्मी के बीच या वायरल फीवर के केस बढ़ने की स्थिति शामिल है। एक साथ कई मरीज आए हों, ऐसी स्थिति नहीं है। एक सप्ताह में दो से तीन मरीज पहुंच रहे हैं। वेंटिलेटर पर भी रखने की बनी स्थिति एमवायएच में जांच के बाद स्थिति का पता चल रहा है, जिसके बाद कई मरीजों को कुछ समय के लिए आइसीयू या वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ा। हालांकि कुछ दिन बाद यह ठीक भी हुए हैं। शुरुआती पहले सप्ताह में मरीज की स्थिति गंभीर रहती है। दूसरे व तीसरे सप्ताह में यह ठीक होने लगते हैं। इसके कुछ वेरिएंट भी जांच के दौरान मिले हैं। पैरों के माध्यम से होता है प्रभाव डॉक्टर्स के अनुसार, इस बीमारी(Guillain-Barré Syndrome) में पैर के माध्यम से प्रभाव मालूम होता है। यह पैर की कमजोरी से प्रारंभ होती है। फिर हाथों की कमजोरी, श्वास लेने की क्षमता को प्रभावित करता है। इसके बाद खाना निगलने व बोलने में भी परेशानी होती है। लापरवाही करने पर यह गंभीर स्थिति तक पहुंच जाता है। गुइलैन-बैरे सिंड्रोम(Guillain-Barré Syndrome) दुर्लभ नर्वस सिस्टम से संबंधित बीमारी है। इसके मरीज एमवायएच पहुंचे हैं। यह बीमारी एपायलो वैक्टर जेजेनी बैक्टीरिया के कारण होती है। इसके लिए नस संबंधित जांच कराई जाती है। इसमें कौन सा भाग प्रभावित है, यह देखा जाता है। इसके अलावा धड़कन, ब्लड प्रेशर की स्थिति में भी बदलाव होता है। जीबीएस के जितने मरीज आ रहे हैं उन्हें उपचार मिल रहा है, जिससे यह ठीक हुए हैं। समय पर उपचार मिलने पर यह बीमारी घातक नहीं होती है। – डॉ. मोनिका पोरवाल बागुल, न्यूरोलॉजिस्ट, एमजीएम

मेट्रो रेल प्रबंधन द्वारा इस संबंध में एचसीसी-टीपीएल कंपनी को वर्कआर्डर जारी किया, इंदौर में एयरपोर्ट से रीगल तक चलेगी अंडरग्राउंड मेट्रो

इंदौर इंदौर शहर में एयरपोर्ट से रीगल तिराहे तक मेट्रो का 8.9 किमी का भूमिगत हिस्सा हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी-टाटा प्रोजेक्ट लि.(एचसीसी-टीपीएल) का संयुक्त उपक्रम तैयार करेगा। इस हिस्से में कंपनी अप और डाउन लाइन की दो भूमिगत टनल तैयार करेगी और सात भूमिगत स्टेशन तैयार करेगी। मप्र मेट्रो रेल प्रबंधन द्वारा इस संबंध में एचसीसी-टीपीएल कंपनी को वर्कआर्डर जारी कर दिया गया है। तीन-चार माह में कंपनी मैदानी स्तर पर काम शुरू करेगी। कंपनी को चार साल में प्रोजेक्ट पूर्ण करना होगा। कंपनी इस प्रोजेक्ट पर 2190.91 करोड़ रुपये खर्च करेगी। एशियन डेवलपमेंट बैंक दे रहा है लोन इंदौर के भूमिगत मेट्रो प्रोजेक्ट में एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) 1600 करोड़ रुपये का लोन दे रहा है। ऐसे में एडीबी एचसीसी-टीपीएल का वित्तीय मूल्यांकन कर एनओसी जारी करने के बाद ही मेट्रो प्रबंधन ने कंपनी को वर्कआर्डर जारी किया। मेट्रो के भूमिगत प्रोजेक्ट के लिए 60 फीसद राशि एडीबी के लोन से मिलेगी। वहीं 20-20 फीसद राशि केंद्र व राज्य सरकार दे रही है। मेट्रो के भूमिगत रूट पर इन स्थानों पर तैयार होंगे स्टेशन     एयरपोर्ट     बीएसएफ     रामचंद्र नगर     बड़ा गणपति     छोटा गणपति     राजवाड़ा     रीगल कंपनी करेगी जियो टेक्नीकल और यूटिलिटी सर्वे एचसीसी-टीपीएल कंपनी को भूमिगत मेट्रो निर्माण के लिए वर्कआर्डर जारी होने के बाद कंपनी अगले तीन से चार माह में कंपनी काम शुरू करेगी। सबसे पहले कंपनी जियो टेक्नीकल सर्वे के साथ मिट्टी के परीक्षण का कार्य करेगी। कंपनी भूमिगत मेट्रो निर्माण के पहले उस रूट पर जमीन के नीचे मौजूद सीवरेज, नर्मदा पाइप लाइन, गैस लाइन सहित अन्य सेवाओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए ‘यूटिलिटी ट्रायल ट्रेंचिंग’ का सर्वे करेगी। 20 मीटर गहराई में उतारेंगे मशीन कंपनी मेट्रो के भूमिगत प्रोजेक्ट के लिए एयरपोर्ट व बड़ा गणपति के पास वेयर हाउस की जमीन पर करीब 800 वर्गमीटर हिस्से में खोदाई कर भूमिगत मेट्रो की टनल बनाने वाली टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) को जमीन की 20 मीटर गहराई में उतारा जाएगा। इसके बाद भूमिगत मेट्रो के निर्माण का कार्य शुरू होगा। इंदौर मेट्रो     31.32 किमी कुल लंबाई     22.62 किमी एलिवेटेड हिस्सा     8.6 किमी भूमिगत हिस्सा     28 मेट्रो स्टेशन कुल     21 एलिवेटेड स्टेशन     7 भूमिगत स्टेशन  

सीधी का दशरथ मांझी, जिसने प्यार के चलते पहाड़ का सीना चीर के निकाला पानी

सीधी  आपने अब तक प्यार की कई ऐसी कहानियां सुनी होगी, जिसमें लोग प्यार के चक्कर में किसी भी हद तक गुजरने को तैयार हो जाते हैं. प्यार के चक्कर में कुछ लोग तो इस कदर दीवाने हो जाते हैं कि वो असंभव कार्य को भी संभव कर दिखाते हैं. अपनी पत्नी की प्यार में शाहजहां ने मुमताज की याद में संगमरमर का ताजमहल बनवा दिया तो बिहार के दशरथ मांझी ने पत्नी की याद में पहाड़ खोदकर रास्ता निकाल दिया. ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के सीधी जिले से आया है, जहां हरि सिंह की पत्नी 2 किलोमीटर दूर पानी लाने जाती थी. पत्नी की परेशानी को देख हरि सिंह ने पहाड़ों का सीना चीर कर पानी निकाल दिया. लोग हरि सिंह की तुलना बिहार के दशरथ मांझी से कर रहे हैं. मध्य प्रदेश के सीधी जिले में रहने वाले 40 वर्षीय हरि सिंह ने इस बात को सच कर दिखाया है. उनकी पत्नी सियावती को हर दिन 2 किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता था. यह दर्द हरि सिंह से देखा नहीं गया. उन्होंने ठान लिया कि इस समस्या का समाधान खुद ही निकालेंगे. 4 साल तक कड़ी मेहनत कर, चट्टानों से भरे पहाड़ में 60 फीट गहरा और 20 फीट चौड़ा कुआं हरि सिंह ने खोद डाला. अब यह कुआं न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे गांव के लिए जीवनदायिनी बन चुका है. पत्नी के संघर्ष ने जगाई चेतना बरबंधा गांव की सियावती हर रोज दो किलोमीटर दूर जाकर पानी भरकर लाती थी. गर्मी में यह सफर और भी मुश्किल हो जाता था. कई बार वे बीमार भी पड़ जातीं, लेकिन पानी के बिना कोई गुजारा नहीं था. यह पीड़ा देखकर हरि सिंह के मन में सवाल उठता, “क्या हम जिंदगी भर ऐसे ही पानी के लिए भटकते रहेंगे?” फिर एक दिन यही सवाल उनके संकल्प में बदल गया और 2019 के दिसंबर में उन्होंने पहाड़ को काटने का फैसला किया. संघर्ष, जब पत्थर भी रोड़ा बने यह आसान नहीं था. जिस पहाड़ को खोदना था, वह पूरी तरह से चट्टानों से भरा था. वहां मिट्टी की परत तक नहीं थी. जिससे खुदाई बेहद मुश्किल हो गई. न कोई मशीन, न सरकार की मदद, न कोई और सहारा बस खुद की इच्छाशक्ति और परिवार का साथ. हरि सिंह दिन-रात हथौड़े और छेनी से चट्टानें तोड़ते रहे. कई बार ऐसा लगता कि यह काम असंभव है, लेकिन उनकी पत्नी और बच्चों ने उनका हौसला बनाए रखा. वहीं हरि सिंह के इस जज्बे पर पत्नी सियावती कहती हैं, “जब मैं देखती कि मेरे पति पत्थरों को तोड़ते हुए थक जाते हैं, तो मैं खुद भी उनके साथ लग जाती थी. हम सबने इसे अपनी लड़ाई मान लिया था.” चार साल की इस कठिन तपस्या के बाद दिसंबर 2023 में आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और कुएं से पानी निकल आया. गांव की उम्मीद बना ‘संकल्प कुआं’ हरि सिंह के इस प्रयास ने पूरे गांव की तकदीर बदल दी. अब यह कुआं पूरे गांव की प्यास बुझा रहा है. जहां पहले लोग पानी के लिए तरसते थे. अब वहां भरपूर पानी उपलब्ध है. गांव के बुजुर्ग रामसिंह कहते हैं, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे गांव में खुद का कुआं होगा. यह हरि सिंह की मेहनत का ही नतीजा है कि अब हमें पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता.” सरकारी उपेक्षा के बावजूद रचा इतिहास हरि सिंह ने इस दौरान प्रशासन और पंचायत से कई बार मदद मांगी, लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी. “मैंने सोचा था कि शायद सरकार कोई योजना देकर मदद करेगी, लेकिन कुछ नहीं मिला. फिर मैंने खुद ही इस समस्या का हल निकालने की ठानी,” हरि सिंह बताते हैं “अब पूरा गांव इस कुएं का लाभ उठा रहा है, और हर कोई हरि सिंह को ‘सीधी का दशरथ मांझी’ कहकर बुलाने लगा है. प्रेरणा, संकल्प और संघर्ष से हर सपना संभव हरि सिंह की कहानी यह साबित करती है कि अगर इंसान कुछ ठान ले, तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती. यह सिर्फ एक कुआं नहीं, बल्कि इंसानी हौसले और मेहनत की मिसाल है. “अगर हिम्मत हो, तो पहाड़ भी झुक सकते हैं और प्यासे को पानी भी मिल सकता है.” हरि सिंह का यह संघर्ष हर किसी के लिए एक प्रेरणा है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो असंभव भी संभव हो सकता है.” सीधी के माउन्टेन मैन ने कही यह बात.. हरि सिंह का कहना है की इस कुएं को खोदने के बाद थोड़ा बहुत पानी मिल गया है। लेकिन जब तक समुचित उपयोग के लिए पानी नहीं मिल जाता तब तक यह कुआं खोदने का कार्य उनके द्वारा लगातार जारी रहेगा। इसके लिए चाहे कुछ भी करना पड़े। कुआं खोदने का काम विगत 3 वर्ष से उनके द्वारा जारी है। तब जाकर थोड़ा बहुत पानी मिल पाया है। इस कुएं की खुदाई के कार्य में 3 वर्ष से उनकी पत्नी सियावती व दो बच्चे तथा एक बच्ची उनकी मदद में लगे हुए हैं। उन्होंने अपनी पत्नी की पानी की परेशानी को दूर कर दिया है। शुरू में यह कार्य उन्हे बहुत कठिन लग रहा था क्योंकि पूरा का पूरा पत्थर खोदना था, मिट्टी की परत एक भी नहीं थी। ऐसे में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन हार मान कर बैठने की बजाए उन्होंने इस कठिन कार्य को करने की ठानी। जिसके बाद उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने पहाड़ खोदकर पानी निकाल दिया। जाहिर है 40 वर्षीय हरि सिंह की कहानी भी दशरथ मांझी से कम नहीं है। इसीलिए लोग उन्हें सीधी के दशरथ मांझी के नाम से भी पुकारने करने लगे हैं।

इंदौर में 3 किलोमीटर लंबी गेर में मुख्यमंत्री मोहन यादव, एनआरआई सहित लाखों लोग शामिल होंगे

इंदौर  रंगों के त्योहार को पूरे जोर-शोर से मनाने बनाने के लिए इंदौर नगर निगम ने पूरी तैयारी कर ली हैं. इस बार इंदौर की गेर में आकर्षक झांकियां भी देखने मिलेंगे जो टोरी कॉर्नर से शामिल होंगी. वहीं सबसे खास नजर रहेगी नगर निगम के हाथी पर जो 150 फीट की दूरी तक लोगों पर रंग फेंकेगा. आइए जानते इंदौर की गेर और नगर निगम के इस हाथी के बारे में. 20 फीट का हाथी बरसाएगा गेर में रंग दरअसल, इंदौर नगर निगम की वर्कशॉप में वेस्ट मटेरियल और मशीनी पार्ट्स से 20 फीट का एक हाथी बनाया गया है. यह हाथी अपने सिर को चारों तरफ घूमाएगा और सूंड से लगभग डेढ़ सौ फीट ऊंचाई तक रंगों की बौछार करेगा. सोमवार को इस हाथी को अंतिम रूप दिया गया है और इसकी टेस्टिंग भी पूरी कर ली गई है. वहीं दूसरी गेर में एक मंच पर खड़ी चार स्वच्छता दीदी लोगों को रंगों से सराबोर करेंगी. इसके साथ ही महापौर पुष्यमित्र भार्गव अपनी एमआईसी टीम के साथ लोगों पर रंग वर्षा करते नजर आएंगे. मुख्यमंत्री और एनआरआई भी होंगे शामिल महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने बताया कि गेर में सीएम डॉ. मोहन यादव भी शामिल होने आ रहे हैं। सभी व्यवस्था की जा चुकी है। महापौर ने बताया कि पिछले दो साल से नगर निगम भी आधिकारिक रूप से शामिल हो रहा है। इस बार नगर निगम की गेर रहेगी, एनआरआई का रथ भी रहेगा। 500 से ज्यादा सफाई मित्र रहेंगे तैनात गेर के बाद सफाई व्यवस्था की भी पूरी तैयारी की जा चुकी है। 500 से ज्यादा कर्मचारी और संसाधन एक साथ लगकर रिकॉर्ड टाइम में पूरे गेर मार्ग को साफ करेंगे। इस बार के भी फोटो-वीडियो यूनेस्को को भेजे जाएंगे। भारत सरकार से भी निवेदन किया है कि यूनेस्को में पत्र भेजे और उनकी विजिट कराए। गेर के लिए अब तक की तैयारियां राजवाड़ा को ढंका गया इंदौर की विशेष पहचान राजवाड़ा को ढंकने का काम किया जा चुका है। बड़ा पीला प्लास्टिक राजवाड़ा पर लगा गया है ताकि रंगों के कारण इसे नुकसान न पहुंचे। इसके साथ ही गोराकुंड और सराफा क्षेत्र में बिल्डिंगों को बड़े प्लास्टिक से ढंका गया है। कई लोग भी अपने घरों को रंग-गुलाल से बचाने के लिए प्लास्टिक से कवर कर रहे हैं। इमरजेंसी एग्जिट रूट बनाया पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि गेर के पूरे रूट में 100 से 200 मीटर के सेक्टर बनाए जा रहे हैं, ताकि उसमें प्रभावी तरीके से सुरक्षा व्यवस्था की जा सके। साथ ही अन्य आकस्मिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इमरजेंसी एग्जिट रूट बनाए जा रहे हैं। हाइराइज की व्यवस्था भी की जा रही है। गेर वाली रूट पर सीसीटीवी, एंबुलेंस तमाम व्यवस्थाएं आज 19 मार्च बुधवार को परम्परागत रूप से निकल जाने वाली रंगपंचमी की गेर को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं. पूरे मार्ग पर ‍निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, साथ ही कंट्रोल रूम भी बनाया गया है. बेरिकेटिंग से लेकर आकस्मिक चिकित्सा के लिए भी प्रबंध किए गए हैं. निर्धारित स्थानों पर एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहनों की व्यवस्था भी रहेगी. इंदौर शहर की पहचान बन चुके इस त्योहार को देखन के लिए गेर वाले रूट पर नागरिकों के बैठने का भी प्रबंध किया गया है. इंदौर नगर निगम द्वारा बनाया गया रंग फेंकने वाला हाथी वहीं बिजली विभाग, जिला प्रशासन, नगर निगम व पुलिस विभाग की टीमों ने एकसाथ टोरी कार्नर, मल्हारगंज से लेकर राजबाड़ा, कृष्णपुरा तक के गेर मार्ग का निरीक्षण किया और तमाम व्यवस्थाओं का जायजा लिया है. सुरक्षा दृष्टि से बीच-बीच में बंद की जाएगी बिजली गेर मार्ग पर केबल व तार पर्याप्त व सुरक्षात्मक हाइट पर किए गए हैं, वहीं कुछ स्थानों पर ट्रांसफार्मर के पुराने, क्षतिग्रस्त बॉक्स बदले गए हैं. कई इलाकों में रंग व पानी से बचाव के लिए कवर लगाए गए हैं. वहीं सुभाष चौक जोन पर बिजली कंपनी का अस्थाई कंट्रोल रूम भी बनाया गया है. ऐतिहासिक गेर के दौरान फायर फायटर से 100 से 150 फीट की ऊंचाई तक रंग उड़ाया जाएगा. इस दौरान सुरक्षात्मक कारणों से 11 केवी लाइन के कुल 14 फीडरों से अलग-अलग समय पर बिजली बंद की जाएगी. आपात स्थिति के लिए तैयार है प्रशासन कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि गेर को लेकर सभी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। गेर मार्ग पर आइडेंटिफिकेशन किया गया है। कहां-कहां मंच लगाने हैं, कहां वॉच टावर बनेंगे, सीसीटीवी कैमरे लगाने की जगह भी निर्धारित की गई है। गलियों में बीच-बीच में एग्जिट रूट बनाए हैं। वहां एम्बुलेंस भी रहेगी, अगर कोई घटना हो जाती है तो उसके जरिए बाहर निकाला जा सकता है। कैबिनेट के आने की सूचना नहीं है, लेकिन हमारी पूरी तैयारी है। बैलगाड़ी से हुई थी गेर की शुरुआत गेर आयोजक कमलेश खंडेलवाल ने बताया कि आज से 75 साल पहले उनके पिता प्रेमस्वरूप खंडेलवाल, बाबूलाल गिरी और सत्यनारायण सत्तन साहब ने मिलकर इंदौर में गेर की शुरुआत की थी। बैलगाड़ी से शुरू हुआ गेमिसाइल, टैंकर, डीजे सहित मॉडर्न साधनों तक पहुंच चुका है। इस गेर की पहचान पूरे देशभर में है। गेर आयोजक शेखर गिरी ने बताया कि गेर 48 और 50 के दशक में बाबूलाल गिरी और छोटे लाल गिरी ने निकाली थी। हमारी एक पीढ़ी गेर निकाल चुकी है। दूसरी पीढ़ी गेर का संचालन कर रही है। मेरे बाद भी मेरे भाई और भतीजे भविष्य में गेर को निकालेंगे। गेर खेलने छतों की कराई जाती है बुकिंग गेर में अब ट्रैक्टर-ट्रॉली, डीजे, पानी के टैंकर और अन्य गाड़ियां शामिल होने लगी हैं। रंगपंचमी की गेर देखने के लिए लोग छतों पर बुकिंग कराने लगे हैं। पहले की अपेक्षा अब लाखों की संख्या में लोग इस गेर में शामिल होने लगे हैं। नगर निगम गेर में पिछले दो साल से आधिकारिक रूप से शामिल होने लगा है। इसमें अब एनआरआई भी शामिल होने के लिए आने लगे हैं।

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