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जब पुरुषों में हस्तमैथुन को सार्वभौमिक माना जाता है तो महिलाओं के हस्तमैथुन को कलंकित नहीं किया जा सकता : मद्रास हाईकोर्ट

चेन्नई मद्रास हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया जिसमें कहा गया था कि एक महिला द्वारा अकेले में पोर्न देखना और हस्तमैथुन करना उसके पति के प्रति क्रूरता नहीं हो सकती है। फैमिली कोर्ट ने इस आधार पर एक व्यक्ति को तलाक देने से इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति आर पूर्णिमा की खंडपीठ ने बुधवार को कहा, “जब पुरुषों में हस्तमैथुन को सार्वभौमिक माना जाता है तो महिलाओं द्वारा हस्तमैथुन को कलंकित नहीं किया जा सकता है। पुरुष हस्तमैथुन करने के तुरंत बाद संभोग में शामिल नहीं हो सकते हैं, लेकिन महिलाओं के मामले में ऐसा नहीं होगा। यह भी सिद्ध नहीं किया गया है कि अगर पत्नी को हस्तमैथुन की आदत है तो पति-पत्नी के बीच वैवाहिक संबंध प्रभावित होंगे।” इस मामले पर सुनवाई करते हुए जज ने कहा, “अगर शादी के बाद कोई महिला विवाहेतर संबंध बनाती है तो यह तलाक का आधार बन सकता है। लेकिन आत्म-सुख में लिप्त होना विवाह विच्छेद का कारण नहीं बन सकता है। किसी भी तरह से यह नहीं कहा जा सकता कि यह पति पर क्रूरता है। केवल निजी तौर पर पोर्न देखने में प्रतिवादी (पत्नी) का कृत्य अपीलकर्ता (पति) के प्रति क्रूरता नहीं माना जा सकता है। यह देखने वाले पति या पत्नी के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।” कोर्ट ने आगे कहा, ”अगर कोई पोर्न देखने वाला दूसरे पति या पत्नी को अपने साथ शामिल होने के लिए मजबूर करता है तो यह निश्चित रूप से क्रूरता माना जाएगा। अगर यह दिखाया जाता है कि इस लत के कारण किसी के वैवाहिक दायित्वों के निर्वहन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो यह कार्रवाई योग्य आधार प्रदान कर सकता है।” आपको बता दें कि अदालत करूर जिला के फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाले व्यक्ति (अपीलकर्ता) द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने तलाक की मांग करने वाले उसके आवेदन को खारिज कर दिया था। दोनों की शादी जुलाई 2018 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार एक मंदिर में हुई थी। यह दोनों की दूसरी शादी थी और इस विवाह से कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ। वे दिसंबर 2020 में अलग हो गए। पत्नी ने जहां वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए आवेदन दायर किया, वहीं पुरुष ने तलाक मांगा। फरवरी 2024 में फैमिली कोर्ट ने पुरुष की याचिका खारिज कर दी। आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने 2024 में वर्तमान अपील को प्राथमिकता दी थी। पत्नी के खिलाफ क्या-क्या लगाए आरोप पति के मुताबिक, वह एक खर्चीली है। पोर्न देखने की आदी है। अक्सर हस्तमैथुन करती है। घर के काम करने से इनकार करती है। अपने ससुराल वालों के साथ बुरा व्यवहार करती है। फोन पर लंबे समय तक बात करती है। पत्नी ने हालांकि सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि अगर वे सच होते तो वे करीब दो साल से एक साथ नहीं रह रहे होते। जजों ने माना कि पति क्रूरता से संबंधित अन्य आरोपों को साबित करने में सक्षम नहीं है। पत्नी द्वारा उठाया गया दूसरा आधार यह है कि उसकी पत्नी यौन रोग से पीड़ित है। हालांकि उसने कहा था कि वह शारीरिक रूप से पीड़ित है।

कनाडा के पूर्व PM ट्रूडो के जाने के बाद अब दोनों पक्ष एक बार फिर से संबंधों को सुधारते दिख रहे

नई दिल्ली/ ओट्टावा  कनाडा में जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद अब नई भारत-कनाडा संबंध में सुधार के संकेत दिखाई देने लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच फिर से संपर्क शुरू हो गया है और नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति की संभावना पर नजर गड़ाए हुए हैं। इसके पहले खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की जून 2023 में हत्या के बाद राजनयिक तनाव पैदा हो गया था, जिसने दोनों देशों के संबंधों को निचले स्तर पर पहुंचा दिया था। कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर हत्या में शामिल होने का बेबुनियाद आरोप लगाया था। दोनों देशों के बीच शुरू हुई चर्चा रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच राजनयिक और सुरक्षा चैनलों के माध्यम से दिसम्बर के आसपास चर्चा फिर से शुरू हुई। इसके पहले अक्टूबर में दोनों पक्षों के बीच रिश्तों में तनाव आ गया। भारत ने अपने उच्चायुक्त और 5 अन्य राजनियकों को वापस बुला दिया था, जिन्हें निज्जर की हत्या में पर्सन ऑफ इंटरेस्ट घोषित किया गया था। बदले में भारत ने 6 कनाडाई राजनियकों को निष्कासित कर दिया था। राजनयिक तैनाती पर हो रहा विचार अब एक बार फिर दोनों देश राजनयिकों की तैनाती पर विचार कर रहे हैं। ओट्टावा में राजदूत पद के लिए नई दिल्ली ने कुछ नामों पर विचार किया है। HT की रिपोर्ट के अनुसार, नियुक्ति के लिए स्पेन में भारत के राजदूत दिनेश के पटनायक का नाम इस पद के लिए सबसे आगे हैं। पटनायक 1990 बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी हैं और भारत के वरिष्ठ राजनयिकों में से एक हैं। वे 2016-18 के दौरान ब्रिटेन में उप-राजदूत के रूप में काम कर चुके हैं। ब्रिटेन में काम करने के चलते उनके पास खालिस्तान मामले को लेकर भी समझ का अनुभव है, जो कनाडा में नियुक्ति के लिए अहम है। मामले से परिचित लोगों ने बताया है कि नई दिल्ली में उच्चायुक्त पद के लिए कनाडा की तरफ से क्रिस्टोफर कूटर का नाम है, जो हाल तक दक्षिण अफ्रीका में राजदूत थे। कूटर का नाम कनाडा ने पहले ही प्रस्तावित किया था। इसे साल 2024 के मध्य में भारत की तरफ से भी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। यह नियुक्तियां कब तक होंगी, इस बारे में अभी साफ नहीं है। कुछ हलकों का यह मानना है कि दूतों की नियुक्ति से पहले दोनों पक्षों के शीर्ष नेतृत्व की बैठक होनी चाहिए ताकि संबंधों को फिर से स्थापित करने का संकेत दिया जा सके।

इंदौर मेट्रो कोच को 80 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलाया जाएगा, 24 और 25 मार्च को 5 स्टेशनों का होगा इंस्पेक्शन

 इंदौर मार्च अंत तक मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू होने पर शहरवासियों को सफर करने का मौका मिल सकता है। इसके पहले कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) जनक कुमार गर्ग मेट्रो के निरीक्षण के लिए 24 मार्च को इंदौर पहुंचेंगे। वे 24 व 25 मार्च को सुपर प्रायोरिटी कारिडोर के 5.9 किलोमीटर में बने पांचों मेट्रो स्टेशन का बारीकी से निरीक्षण करेंगे। वे इस हिस्से में मेट्रो के वायडक्ट पर ट्राली में बैठकर भी निरीक्षण करेंगे। 22 जनवरी को सीएमआरएस ने इंदौर में मेट्रो डिपो व कोच का निरीक्षण किया था। 80 किमी की रफ्तार से चलेगी मेट्रो गांधीनगर मेट्रो स्टेशन से सुपर कॉरिडोर स्टेशन नंबर-3 तक सफर उन्होंने डेढ़ घंटे में पूरा किया था। इस दौरान उन्होंने मेट्रो कोच के ब्रेकिंग सिस्टम का निरीक्षण किया था। इस बार सीएमआरएस मेट्रो कोच में बैठकर गति निरीक्षण भी करेंगे। इस दौरान मेट्रो कोच को तय स्पीड 80 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलाया जाएगा। सीएमआरएस व उनकी टीम के सदस्य कोच में यात्री सुरक्षा और तय स्पीड पर होने वाले कंपन की जांच भी करेंगे। प्लेटफार्म पर कोच के रुकने के दौरान उसके ब्रेकिंग सिस्टम को जांचा जाएगा। सीएमआरएस के इस निरीक्षण के बाद इंदौर मेट्रो में यात्रियों के सफर का राह का आगामी चरण शुरू होगा। यात्री सुविधाएं भी देखेंगे सीएमआरएस सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर के पांचों स्टेशन का अलग-अलग निरीक्षण करेंगे। वे स्टेशन पर बने आपरेशन रूम, इलेक्ट्रिकल सेक्शन, प्लेटफार्म, लिफ्ट, एस्केलेटर सहित अन्य यात्री सुविधाओं का निरीक्षण करेंगे। रेलवे बोर्ड से मेट्रो कोच व ट्रैक को लेकर अनुमोदन (अप्रूवल) मिल चुका है। सीएमआरआएस अपने आगामी इंदौर दौरे पर मेट्रो का दो दिन निरीक्षण करने के बाद ‘फाइनल क्लीयरेंस’ देंगे। इसके बाद मेट्रो कोच में यात्रियों को सफर करने का मौका मिलेगा। कमर्शियल रन शुरू करने का इंतजार     पहला लक्ष्य – जुलाई 2024 तय किया गया।     दूसरा लक्ष्य – दिसंबर 2024 तय किया गया।     तीसरा लक्ष्य – फरवरी 2025 तय किया गया।     चौथा लक्ष्य – मार्च 2025 में अंतिम सप्ताह तय किया गया।  

इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में देरी, तीन जिलों के 77 गांव से होकर यह नई रेल लाइन गुजरेगी

 इंदौर  इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन परियोजना में अब तक जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हुआ है। परियोजना के तहत मप्र के तीन जिलों के 77 गांव से होकर रेल लाइन गुजरेगी। नवंबर 2024 में रेल मंत्रालय ने इन गांवों की जमीन अधिग्रहण के लिए गजट नोटिफकेशन भी जारी कर दिया था। इसके बाद अब मंत्रालय ने महू तहसील के 18 गांव की सूची जारी की। बावजूद दो माह बाद भी जमीन अधिग्रहण का काम शुरू नहीं हो पाया है।अफसरों के अनुसार रेल मंत्रालय द्वारा 14 जनवरी को जारी नोटिफकेशन के अनुसार महू तहसील के खेड़ी, चैनपुरा, कमदपुर, खुदालपुरा, कुराड़ाखेड़ी, अहिल्यापुर, नांदेड़, जामली, केलोद, बेरछा, गवली पलासिया, आशापुरा, मलेंडी, कोदरिया, बोरखेड़ी, चौरड़िया, न्यू गुराडिया, और महू केंटोमेंट एरिया की चिह्नित जमीन का रेल प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहण होना है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। शीघ्र ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सांसद शंकर लालवानी ने जानकारी दी कि इस परियोजना के तहत 13 जिलों की भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। महू के गांवों के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए अधिकारी की नियुक्ति का नोटिफिकेशन जारी किया गया है, जिससे यह प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सकेगी। यह परियोजना 309 किमी लंबी होगी, जो इंदौर से मुंबई को जोड़ने के लिए बनाई जा रही है। इसे लेकर 18036 करोड़ रुपए की मंजूरी सितंबर में मिल चुकी थी। इस नई रेल लाइन से न केवल यात्री सुविधाओं में सुधार होगा, बल्कि औद्योगिक कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। इस परियोजना का 170.56 किमी हिस्सा मध्य प्रदेश में आएगा। इसमें 905 हेक्टेयर भूमि निजी है। मध्य प्रदेश में इस रेल लाइन के तहत बनने वाले 18 स्टेशन में महू, केलोद, कमदपुर, झाड़ी बरोदा, और अन्य स्टेशन शामिल हैं। इंदौर के 22 और धुलिया जिले के 37 गांव के अधिग्रहण के आदेश इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन प्रोजेक्ट के लिए इंदौर और धुलिया जिले के कुल 59 गांवों का भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। इस परियोजना के अंतर्गत इंदौर जिले के 22 गांव और धुलिया जिले के 37 गांव शामिल हैं। इंदौर-मनमाड़ रेल्वे संघर्ष समिति के मनोज मराठे ने बताया कि रेल मंत्रालय मध्य रेलवे द्वारा इंदौर जिले के लगभग 22 गांवों की भूमि अधिग्रहण का आदेश जारी किया गया है। इसके अलावा, धुलिया तहसील के 10 गांवों और शिरपुर तहसील के 18 गांवों की जमीन का अधिग्रहण करने के आदेश भी जारी हुए हैं। मराठे ने कहा कि इस विशेष परियोजना के तहत काम तेजी से चल रहा है, जिससे इसका कार्य शीघ्रता से पूरा हो सके। प्रोजेक्ट के लिए 18 हजार 36 करोड़ रुपए की स्वीकृति इंदौर-मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट की योजनाओं पर वर्षों से काम चल रहा है। 2022 में इस प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी नहीं मिल सकी, लेकिन 2023 में 2 करोड़ रुपए की टोकन राशि जारी की गई। मध्य प्रदेश के हिस्से में डीपीआर-सर्वे का काम किया गया। इस काम को जारी रखने के लिए 2024 के बजट में 1 हजार रुपए की टोकन राशि भी दी गई थी। अब 18,036 करोड़ रुपए की राशि इंदौर-मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृत की गई है, जो आगामी बजट में उपलब्ध होगी।i महू तहसील के इन गांवों की जमीन अधिग्रहण होना है खेड़ी (इस्तमुरार), चेनपुरा, कामदपुर, खुदालपुरा, कुराड़ाखेड़ी, अहिल्यापुर, नांदेड़, जामली, केलोद, बेरछा, खेड़ी, गवली पलास्या, आशापुर, मलेंडी, कोदरिया, बोरखेड़ी, चोरड़िया, न्यू गुराड़िया और महू कैंट (डॉ. आंबेडकर नगर)। 309 किलोमीटर लंबी लाइन से 30 लाख की आबादी को होगा फायदा इंदौर-मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट के तहत कुल 309 किलोमीटर लंबी रेल लाइन इंदौर से महाराष्ट्र के मनमाड तक बिछाई जाएगी। इस परियोजना से लगभग एक हजार गांवों और 30 लाख की आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। रेलवे ने भू-स्वामियों को उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। प्रोजेक्ट के पूरा होने पर 16 जोड़ी यात्री ट्रेनों का संचालन होगा, और शुरुआती वर्षों में 50 लाख यात्रियों के सफर करने का अनुमान है। इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश में 170 किलोमीटर लंबी लाइन बिछाई जाएगी, जिसमें 18 स्टेशन शामिल होंगे। इंदौर से मुंबई की दूरी भी 830 किमी से घटकर 568 किमी रह जाएगी इंदौर-मनमाड रेल प्रोजेक्ट के तहत धार, खरगोन और बड़वानी जिले के आदिवासी अंचल से पहली बार रेल लाइन गुजरेगी, जिससे इन क्षेत्रों को रेल सेवाओं से सीधा संपर्क मिलेगा। इस परियोजना से लगभग एक हजार गांव और 30 लाख आबादी को फायदा होगा। इंदौर से मुंबई की दूरी भी 830 किलोमीटर से घटकर 568 किलोमीटर रह जाएगी। सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि यह रेलवे लाइन प्रोजेक्ट बहुत प्रतीक्षित है और इसके लिए अब जमीन अधिग्रहण का काम तेजी से शुरू किया जाएगा। रेल मंत्रालय ने इसके लिए एक अधिकारी की नियुक्ति की है, और आगामी बजट में इस प्रोजेक्ट के लिए बड़ी राशि का प्रावधान किया जाएगा। प्रोजेक्ट पूरा होने पर 16 जोड़ी पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होगा, और शुरुआती वर्षों में 50 लाख यात्री सफर करेंगे। इस प्रोजेक्ट से रेलवे को हर साल 900 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलेगा। इंदौर-मनमाड रेल लाइन योजना की शुरुआत 1918 में होलकर काल में हुई थी। इस परियोजना को गति शक्ति योजना में शामिल किया गया है, जिसके तहत इसकी निगरानी सीधे पीएमओ से की जाएगी। रेल मामलों के विशेषज्ञ नागेश नामजोशी के मुताबिक, होलकर राज्य के आर्किटेक्ट पैट्रिक गिडीस ने सबसे पहले इस रेल लाइन का खाका तैयार किया था, लेकिन तब तक काम शुरू नहीं हो सका। 2002 में तत्कालीन रेल मंत्री नीतिश कुमार ने इस परियोजना के सर्वे के लिए राशि मंजूर की और 2004 में सर्वे पूरा किया गया। हालांकि, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सरकार के बीच समन्वय न होने के कारण परियोजना पर काम शुरू नहीं हो पाया। इसके बाद, इस परियोजना के लिए महाराष्ट्र में आंदोलन शुरू हुआ, जो इंदौर तक पहुंचा। 2016 में सेंट्रल रेलवे ने सर्वे किया, और 2019 में जहाजरानी मंत्रालय और रेलवे के बीच इस परियोजना के लिए समझौता हुआ, लेकिन यह बाद में निरस्त हो गया। अब रेलवे खुद इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार कर रही है। मप्र में पहाड़ चीरकर तैयार होगी 17.66 किमी लंबी सुरंगें इंदौर-मनमाड रेल लाइन परियोजना के तहत रेलवे को मध्यप्रदेश में पहाड़ों को चीरकर 17.66 किलोमीटर लंबी सात सुरंगें बनानी होंगी, जिनमें सबसे लंबी सुरंग 6.02 किमी लंबी होगी। महाराष्ट्र में दो सुरंगें बनेंगी, जिनकी … Read more

इंदौर-पीथमपुर इकॉनोमिक कॉरिडोर में किसानों को कुल विकसित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करने के निर्णय से किसान गदगद

इंदौर मध्य प्रदेश में इंदौर-पीथमपुर इकॉनोमिक कॉरिडोर में किसानों को कुल विकसित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करने के निर्णय से किसान गदगद हैं। इसको लेकर किसानों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव का आभार जताया है। इससे फायदा यह होगा कि किसानों की जमीन बच जाएगी। किसानों को होगा फायदा राज्य सरकार इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर विकसित करने जा रही है, इसके लिए कुल विकसित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा किसानों को आवंटित करने के निर्णय से आस-पास के गांवों के ग्रामीण लाभान्वित होंगे। इन गांव के किसानों को होगा लाभ प्रस्तावित योजना में कोडियाबर्डी, नैनोद, रिंजलाय, बिसनावदा, नावदा पंथ, श्रीराम तलावली, सिन्दोड़ा, सिन्दोड़ी, शिवखेड़ा, नरलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, टीही और धन्नड़ जैसे गांवों के किसानों को लाभ मिलेगा। इसमें कुल 1290.74 हेक्टेयर भूमि का विकास किया जाएगा, जिसमें से किसानों को मुआवजे के बदले विकसित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। किसान हैं खुश सरकार के इस फैसले से किसान गदगद हैं। उन्होंने बुधवार को इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर क्षेत्र के किसानों ने विकसित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करने के राज्य सरकार के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव का आभार व्‍यक्‍त क‍िया। किसानों ने मुख्यमंत्री यादव से  इंदौर एयरपोर्ट पर मिलकर उनका आभार जताया। सम्मान को अस्वीकार कर दिया किसानों ने सरकार के महत्वपूर्ण निर्णय के लिए मुख्यमंत्री यादव का सम्मान करना चाहा, जिसे मुख्यमंत्री ने इंदौर गेर में हुए हादसे के कारण विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया। राज्य सरकार का यह निर्णय क्षेत्रीय विकास, अधोसंरचना निर्माण और किसानों के हितों को दृष्टिगत रखते हुए लिया गया है। इससे क्षेत्र के समग्र विकास को गति मिलेगी और स्थानीय नागरिकों के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

चीन में दुर्लभ खनिज तत्वों रेयर अर्थ एलिमेंट का एक बड़ा भंडार मिला, दुनिया के 60% दुर्लभ पृथ्वी उत्पादन पर नियंत्रण

बीजिंग  चीन में दुर्लभ खनिज तत्वों (रेयर अर्थ एलिमेंट) का एक बड़ा भंडार मिला है। इसे चीन में मिला मध्यम और भारी खनिज का सबसे बड़ा भंडार माना जा रहा है। इससे चीन को इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी खनिजों के उत्पादन में मदद मिलेगी। जनवरी में इस खोज के बारे में पहली बार जानकारी सामने आई थी। इसके बाद चीन के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (CGS) ने इसकी जांच करते हुए अब इस भंडार की पुष्टि कर दी है। चीन के युन्नान प्रांत में ये खोज हुई है। यह प्रांत खनिजों से भरपूर है। यहां एल्यूमीनियम, जस्ता और टिन के बड़े भंडार हैं। CGS के अनुसार इस भंडार में 1.15 मिलियन टन तक संसाधन हो सकते हैं। इनसे 470,000 टन खनिज निकाले जा सकते हैं। इसमें प्रमुख दुर्लभ तत्व प्रेजोडियम, नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम और टेरबियम भी शामिल हैं। ये खनिज काफी महंगे हैं और इनकी वैश्विक स्तर पर बहुत मांग है। जाहिर कि इससे चीन का कई क्षेत्रों में दबदबा बढ़ जाएगा। चीन को होगा बड़ा फायदा चीनी मीडिया का कहना है कि यह खोज खनिज अन्वेषण (मिनरल एक्सपलोरेशन) में एक बड़ी सफलता है। ऐसे भंडार में दुर्लभ पृथ्वी खनिज प्राकृतिक रूप से जमा होते हैं और मिट्टी की सतह पर अवशोषित होते हैं। इससे ‘आयन एक्सचेंज’ जैसे पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से उन्हें जमीन से निकालना आसान होता है। इससे पहले इस तरह की आखिरी खोज 1969 में पूर्वी चीन के जियांग्शी प्रांत में हुई थी। CGS के विशेषज्ञों के अनुसार, इस नए भंडार में मुख्य रूप से मध्य और भारी दुर्लभ पृथ्वी खनिज हैं। ये सब इलेक्ट्रिक वाहनों, रिन्यूबल एनर्जी और रक्षा सुरक्षा उपकरणों के लिए जरूरी कच्चा माल हैं। चीन को यह विशाल दुर्लभ भंडार हाल ही में स्थापित राष्ट्रीय भूरासायनिक बेसलाइन नेटवर्क के बाद मिला है। यह नेटवर्क व्यापक डेटा तैयार करने और खनिज अन्वेषण तकनीकों को बेहतर करने के लिए है। एक्सपर्ट का कहना है कि चीन की खोज से दुर्लभ पृथ्वी खनन के क्षेत्र में दुनिया में स्थिति और मजबूत होगी, जहां वह पहले ही अपना दबदबा रखता है। एशिया की बड़ी ताकत चीन के पास करीब 60 फीसदी दुर्लभ पृथ्वी उत्पादन और 85 प्रतिशत प्रसंस्करण क्षमता पर नियंत्रण है। साल 2023 तक चीन का कुल खनन उत्पादन 240,000 टन था, जो दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका से छह गुना ज्यादा है।

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