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छात्र धोखाधड़ी का हुआ शिकार, जिसके चलते हॉस्टल की चौथी मंजिल से कूदा छात्र, मौत, लिखा सुसाइड नोट

गुना/राघौगढ़ जिले के राघौगढ़ थाना क्षेत्र स्थित जेपी यूनिवर्सिटी के छात्र ने शुक्रवार तड़के हास्टल की चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि छात्र ऑनलाइन लेनदेन में धोखाधड़ी का शिकार हुआ था, जिसके चलते कदम उठाया। छात्र के लैपटॉप से मिले सुसाइड नोट में भी दोस्त से उधार लिए पैसे न लौटा पाने का जिक्र है। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार ओरैया उत्तरप्रदेश का रहने वाला वैभव पुत्र मनोज वर्मा मध्यप्रदेश के गुना जिला स्थित जेपी यूनिवर्सिटी आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नाेलाजी राघौगढ़ से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। वह बी-टेक (कंप्यूटर साइंस) द्वितीय वर्ष का छात्र था। परिजनों को सौंप दिया शव गुरुवार सुबह करीब पांच बजे उसने छात्रावास की चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। इसकी सूचना मिलते ही कैंपस में हड़कंप मच गया। प्रबंधन ने तत्काल छात्र को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का मौका मुआयना किया। साथ ही मृतक छात्र के शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। मृतक छात्र के खाते में मिला 25 हजार का लेनदेन इधर, पुलिस को छात्र का मोबाइल और लैपटॉप में सुसाइड नोट मिला है। जांच के दौरान मृतक वैभव के अकाउंट में 25 हजार रुपये का लेनदेन भी मिला है, तो सुसाइड नोट में धोखाधड़ी का जिक्र भी किया है। अब पुलिस पता लगा रही है कि आखिर रुपये किसे भेजे गए हैं। इस तरह पुलिस ने हर एंगल से जांच शुरू कर दी है। मृतक छात्र ने सुसाइड नोट में लिखा ‘पहले ये ऊपर ही पढ़ना। नीचे तब पढ़ना, जब मुझे दो कॉल कर लो और मैं काल न उठाऊं। तब तक शायद में जा चुका होउंगा। अनुज मेरे दोस्त तेरे साथ बहुत अच्छा समय निकला। जितना भी समय था, बहुत अच्छे से गुजारा है। हालांकि, ये समय कुछ और ज्यादा होना था। मैं बहुत गिल्ट में हूं। मेरे साथ 20 हजार रुपये का फ्राड हुआ है। मैंने दोस्त से 15 हजार रुपये उधार लिए और वापस नहीं कर पा रहा हूं। इसका मुझे बहुत दुख है। भाई, बहन, मम्मी, पापा, दोस्तों सारी। भैया आपने भी मेरा बहुत अच्छा सपोर्ट किया। मम्मी-पापा आपने मुझे बहुत अच्छी लाइफ दी पर इस बात का दुख रहेगा कि आपका इच्छाएं पूरी नहीं कर पाया। मुझे माफ कर देना।’ सुसाइड नोट वैभव ने उप्र में अपने नजदीकी दोस्त को भेजा था।   मां का रो-रोकर बुरा हाल मृतक छात्र वैभव के पिता मनोज वर्मा ओरैया में सरकारी शिक्षक और मां गृहणी हैं। जैसे ही उन्हें बेटे की मौत की सूचना मिली, तो वे यूनिवर्सिटी पहुंचे। यहां उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, जिन्हें पिता व अन्य बमुश्किल संभाल पा रहे थे। रोते हुए मां बोल रही थीं कि बीती रात को बेटे से वीडियो कॉल पर बात हुई थी, जो मंगलवार को होली की छुट्टी मनाकर वापस यूनिवर्सिटी लौटा था। उन्होंने आरोप लगाया कि बेटा सीधा था, जिसकी कभी किसी से लड़ाई भी नहीं हुई। उसे किसी ने मार दिया है। रात दो बजे तक साथ पढ़े थे छात्रावास में कमरे में साथ रहने वाले छात्र ने बताया कि रात दो बजे तक हमने मिलकर पढ़ाई की थी। इसके बाद सोने चले गए थे, तब तो वैभव हंसते हुए बात कर रहा था। उसके चेहरे पर भी कोई सिकन नहीं थी। पढ़ने में भी अच्छा था, लेकिन यह कदम कैसे उठाया, समझ से परे है।

धर्म विशेष के खिलाफ इंटरनेट मीडिया में आपत्ति जनक टिप्पणी कर शहर की कानून व्यवस्था बिगाड़ने के मामले में नया आय मोड़

बुरहानपुर धर्म विशेष के खिलाफ इंटरनेट मीडिया में आपत्ति जनक टिप्पणी कर शहर की कानून व्यवस्था बिगाड़ने के मामले में नया मोड़ आ गया है। यह काम पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए नाबालिग ने नहीं, बल्कि शहर का ही यश शाह था। उसने इंस्टाग्राम पर नाबालिग की फर्जी आईडी बनाई थी। वह इसके बाद हैदराबाद स्थित अपनी बहन के घर चला गया था। वहां से उसने 18 मार्च की रात अब्दुल ओवैश की आईडी पर फर्जी आईडी से चैटिंग कर आपत्ति जनक पोस्ट डाली थी। नाबालिग से बदलना लेने के लिए की वारदात एसपी देवेंद्र पाटीदार ने बताया कि आरोपित को हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पूर्व यश का नाबालिग से झगड़ा हुआ था, जिसके चलते वह रंजिश रखे हुए था। बदला लेने की नीयत से उसने यह काम किया था। उल्लेखनीय है कि घटना की रात सवा दस बजे के आसपास सैकड़ों की संख्या में धर्म विशेष के लोग कोतवाली थाने पहुंच गए थे। जिससे शहर की कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया था। पुलिस ने भीड़ को खदेड़ कर किसी तरह मामले को शांत कराया था। मारपीट करने वाले चार लोगों पर केस दर्ज इस घटना के बाद नाबलिग के घर बाई साहब की हवेली क्षेत्र पहुंचे लोगों ने उसके साथ मारपीट की थी, जिसके चलते पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया है। 200 अन्य लोगों को भी मामले में सह आरोपी बनाया है। एसपी देवेंद्र पाटीदार ने कहा है कि कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। इंटरनेट मीडिया पर आपत्ति जनक पोस्ट करने पर भी सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।  

हजारों लोग हाथों में बैनर और झंडे लिए नेतन्याहू सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब

इजरायल इजरायल की सड़कों पर जबरदस्त उबाल देखने को मिल रहा है। हजारों लोग हाथों में बैनर और झंडे लिए नेतन्याहू सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इनका साफ कहना है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार लोकतंत्र पर हमला कर रही है और गाजा में युद्ध को राजनीतिक फायदे के लिए खींच रही है। बुधवार को जेरूसलम में नेतन्याहू के आधिकारिक आवास के बाहर और तेल अवीव की मुख्य सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ उमड़ी। हाथों में इजरायली झंडे और गाजा में बंधकों की रिहाई के लिए तख्तियां लिए लोग सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। इस प्रदर्शन के चलते इजरायल की कई अहम सड़कों को बंद करना पड़ा। पुलिस ने कम से कम 12 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया। नेतन्याहू पर क्यों भड़के लोग? इस प्रदर्शन की शुरुआत इजरायल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेत के प्रमुख रोनन बार को हटाने की नेतन्याहू की कोशिशों के खिलाफ हुई थी, लेकिन इसके बाद गाजा में जारी बमबारी और युद्धविराम को तोड़ने की वजह से प्रदर्शन और तेज हो गया। गाजा पर हाल ही में हुए इजरायली हमलों में करीब 600 लोगों की मौत हुई है, जिससे देश के भीतर नेतन्याहू के खिलाफ गुस्सा और बढ़ गया। विदेशी ताकतों द्वारा युद्धविराम बनाए रखने की अपील को अनसुना करते हुए इजरायल ने गाजा में हवाई और जमीनी हमले तेज कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार युद्ध को राजनीतिक हथियार बना रही है और गाजा में अब भी बंधक बने 59 लोगों की रिहाई को लेकर गंभीर नहीं है। माना जा रहा है कि इन बंधकों में 24 अब भी जिंदा हैं। नेतन्याहू का असली मकसद सत्ता बचाना? ‘ब्रदर्स इन आर्म्स’ आंदोलन के प्रमुख इतान हर्जेल ने कहा, “सरकार अपनी नाकामी से लोगों का ध्यान हटाने के लिए जानबूझकर युद्ध को बढ़ा रही है। नेतन्याहू और उनकी सरकार पूरी तरह फेल हो चुकी है और अब वे सत्ता में बने रहने के लिए देश को संकट में धकेल रहे हैं।” प्रदर्शनकारियों ने नेतन्याहू सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया। सड़कों पर गूंज रहे नारों में कहा जा रहा था, “इजरायल तुर्की नहीं, इजरायल ईरान नहीं।” प्रदर्शनकारी यह संकेत दे रहे थे कि नेतन्याहू देश को अधिनायकवादी शासन की ओर धकेल रहे हैं। सुरक्षा एजेंसी शिन बेत इस वक्त नेतन्याहू के करीबी सहयोगियों की जांच कर रही है। इस मामले को ‘कतरगेट’ कहा जा रहा है। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू खुद भ्रष्टाचार के कई मामलों में फंसे हुए हैं और उन पर लगे आरोप साबित होने पर उन्हें जेल भी हो सकती है।

विधानसभा के बजट सत्र में गूंजा नए विधायकों के जमीन आवंटन का मुद्दा, राजस्व मंत्री बोले- नवा रायपुर में नकटी गांव में जमीन देने का चल रहा विचार

रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के सत्रहवें और अंतिम दिन प्रश्नकाल में नए विधायकों को राजधानी में जमीन आवंटन का मामला विधायक धर्मजीत सिंह और राजेश मूणत ने उठाया. राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि अभी जमीन चिन्हांकन की कार्रवाई हो रही है. नवा रायपुर में नकटी गांव में जमीन देने का विचार चल रहा है. आवंटन के लिए अभी अंतिम निर्णय बाकी है. विधायक धर्मजीत सिंह ने विषय उठाते हुए कहा कि नए विधायकों को राजधानी में रहने की व्यवस्था नहीं है. मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मामला संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप और अध्यक्ष डॉ रमन सिंह की जानकारी में है. हम जल्द ही इस मामले में कार्रवाई करेंगे. विधायक उमेश पटेल ने रायगढ़ जिले के एनएच 200 में भू-अर्जन और मुआवजे की स्थिति का मामला उठाया? उन्होंने कहा कि पिछले बार जवाब में 820.783 हेक्टेयर आया था. एक जैसा प्रश्न, मंत्री भी एक. लेकिन उत्तर 3 बार गलत तो आखिरकार कौन से उत्तर को सही माने? राजस्व मंत्री टकराम वर्मा ने बताया कि रायगढ़ जिले के निजी भूमि कुल रकबा कुल मिलाकर 141.23 हेक्टेयर निजी भूमि अर्जित की गई है. विधायक ने कहा कि इसके पहले 141.5, उसके ठीक बार फिर अलग जवाब, उत्तर सही कौन सा है? 820 और 143 जमीन=असमान का अंतर है? इस पर मंत्री ने कहा कि दोनों ही जानकारियों में अन्तर क्यों आया, इसको मैं चेक करता हूं. इस पर विधायक ने कहा कि यह लगातार हो रहा है. विधानसभा को लगातार अलग-अलग उत्तर देने पर अधिकारियों पर कार्यवाही करिए? इस पर अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि अगर आप जवाब से असंतुष्ट है तो आप उसकी प्रक्रिया कर लें. हम आगे बढ़ जाएंगे. इस पर नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने कहा कि जो अन्तर आ रहा है वह बड़ा अंतर है. सीधे 820 का अंतर है. अध्यक्ष ने कहा कि आप लिख कर दे दें, हम निराकरण करेंगे. विधायक ने कहा कि NH 200 का सर्वे किसी और डायरेक्शन में था. नए सर्वे में डायरेक्शन बदल दिया गया, लेकिन पुराने सर्वे का अप्रतिबंध कब तक हटाएंगे? मंत्री ने बताया कि निर्माण शुरू होने से पहले प्रतिबंधित किया गया था. अभी नए निर्माण के भूमि अर्जित न करना पड़े, इसलिए उसे प्रतिबंधित किया गया है? विधायक ने इस पर सवाल किया कि इसे कब तक रिलीज कर दिया जाएगा? मंत्री ने कहा कि मेरी जानकारी में कई बात नहीं हैं. उसे मैं दिखवा लेता हूं. विधायक उमेश पटेल ने कहा कि कई ऐसी जमीन हैं, जिन्हें मुआवजा नहीं मिला है. जमीन प्रभावित ही नहीं हुआ है, लेकिन 2 करोड़ का मुआवजा बना हुआ है. ये अगर गलती हुई है तो क्या रिकवरी के लिए अधिकारी पर कार्यवाही करेंगे? इस पर मंत्री ने कहा कि इस सड़क के निर्माण के संबंध में यह 2005 का है, जिसकी जानकारी दी गई है, इसकी मैं जांच करवाऊंगा. विधायक ने कहा कि अधिकारियों से साठ-गांठ करके 2 करोड़ का मुआवजा दिया गया है. अधिकारी पर कार्यवाही की गई क्या? मंत्री ने बताया कि इसकी शिकायत दर्ज करेंगे.

रामलला के सामने सिंहासन भी छोटा, राम मंदिर के लिए अगर सत्ता भी गंवानी पड़े तो कोई दिक्कत नहीं- सीएम योगी

अयोध्‍या रामनगरी अयोध्‍या पहुंचे मुख्‍यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ ने कहा कि उनकी तीन पीढ़ियां श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए पूरी तरह से समर्पित थीं। सीएम ने कहा कि अगर राम मंदिर के लिए उन्हें सत्ता भी खोनी पड़ी तो कोई समस्या नहीं होगी। सरकारी तंत्र नौकरशाही की गिरफ्त में है और उस नौकरशाही में एक बड़ा वर्ग था जो कहता था कि सीएम के तौर पर अयोध्या जाने से विवाद पैदा होगा। मैंने कहा कि अगर विवाद होना है तो होने दो। लेकिन हमें अयोध्या के बारे में सोचने की जरूरत है। फिर, एक और वर्ग था जिसने कहा कि अगर मैं वहां गया, तो राम मंदिर के बारे में बात होगी। मैंने पूछा कि क्या मैं यहां सत्ता के लिए आया हूं। उत्तर प्रदेश के सीएम ने आगे दीपोत्सव का जिक्र करते हुए कहा कि आज अयोध्या में यह एक महोत्सव बन गया है। सीएम ने कहा, ‘मैंने अवनीश अवस्थी से कहा कि चुपचाप वहां जाएं और देखें कि वहां दीपोत्सव कैसे आयोजित किया जा सकता है। वह अयोध्या आए, एक सर्वे किया और कहा कि दीपोत्सव वास्तव में आयोजित किया जाना चाहिए। अब, दिवाली से पहले दीपोत्सव एक महोत्सव की तरह हो गया है। अयोध्या का दीपोत्सव अयोध्या का एक महोत्सव , एक समाज, एक उत्सव बन गया है। बड़ी संख्या में लोग दीपोत्सव में भाग लेने के लिए यहां आते हैं। इतना ही नहीं राज सदन में कल्चरल प्रोग्राम के उद्घाटन के बाद मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर को लेकर एक बड़ा बयान भी दे दिया. उन्होंने कहा कि हमारी तीन पीढ़ियों ने श्रीराम जन्मभूमि के लिए संघर्ष किया. हम सत्ता के लिए नहीं आए हैं. अगर राम मंदिर के लिए सत्ता गंवानी भी पड़ी तो कोई समस्या नहीं है. सीएम योगी ने कहा कि दीपोत्सव शुरू किया तो अनेक थी चुनौती. ऐसी धारणा थी कि मुख्यमंत्री के रूप में अयोध्या जाने से विवाद खड़ा होता है. एक वर्ग ऐसा था जिसने कहा कि आप जाएंगे तो राम मंदिर की बात होगी. हमने कहा सत्ता के लिए कौन आया था. अगर राम मंदिर के लिए सत्ता भी गंवानी पड़ी तो नहीं होनी चाहिए . योगी ने पीएम मोदी को दिया धन्यवाद सीएम योगी ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि विरासत और विकास के प्रधानमंत्री के पीएम के दृष्टिकोण ने श्रद्धालुओं के लिए श्री राम मंदिर के दर्शन करना संभव बनाया है। यूपी सीएम ने कहा, ‘आज लाखों श्रद्धालु अयोध्या आते हैं , पहले लोग यहां आना चाहते थे लेकिन नेतृत्व की कमी के कारण लोग नहीं आते थे। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं जिन्होंने विरासत और विकास को एक साथ जोड़ दिया।’ यूपी सनातन भूमि का आधार- सीएम योगी उत्तर प्रदेश के सीएम ने कहा कि अयोध्या भारत की सनातन भूमि का आधार है। सीएम ने कहा, ‘लंबे समय से यह सनातन धर्म की प्रेरणा रही है। अयोध्या संस्कृति की सबसे पहली भूमि है। इसी अयोध्या में भगवान विष्णु के अवतार भगवान राम का जन्म हुआ था। भगवान राम की भूमि पर आयोजित होने वाला कार्यक्रम अद्भुत है। सीएम योगी ने कहा कि यह ‘नए भारत’ का ‘नया उत्तर प्रदेश’ है, यहां नीति बनाकर बिना भेदभाव के समाज के हर एक तबके के लिए आर्थिक स्वावलंबन के काम किए जा रहे हैं। एक नारे ने बदल दिया देश का सियासी मिजाज।

महिला कर्मचारी के बालों को देख सख्श ने गाया ‘ये रेश्मी जुल्फें’ गाना, हुआ विवाद, अब कोर्ट ने सुना दिया बड़ा फैसला

मुंबई ऑफिस के एक ट्रेनिंग सेशन में महिला कर्मचारी के लंबे बालों को देखकर ‘ये रेश्मी जुल्फें’ गाने को गाना एक पुरुष कर्मचारी पर भारी पड़ गया। उसके खिलाफ ऐक्शन लिया गया, जिसके बाद अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने राहत देते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कहा कि महिला कर्मचारी से यह कहना कि तुम अपने बालों को संभालने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल कर रही होगी और उसके बालों से संबंधित गाना गाना ‘ये रेश्मी जुल्फें’ वर्कप्लेस पर उसका (महिला कर्मचारी) यौन उत्पीड़न नहीं है। दरअसल, यह पूरा मामला एक प्राइवेट बैंक के एक पुरुष और महिला कर्मचारी से जुड़ा हुआ है। इसमें कर्मचारी विंदो कचावे ने एक मीटिंग में अपनी सहकर्मी पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद पॉश कानून के तहत उस पर कार्रवाई हुई। कचावे ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। फैसला सुनाते हुए जस्टिस संदीप मार्ने की सिंगल बेंच ने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि याचिकाकर्ता विंदो कचावे का यह आचरण यौन उत्पीड़न के तहत आता है। अदालती मामलों को कवर करने वाली वेबसाइट ‘लाइव लॉ’ के अनुसार, जज ने अपने ऑर्डर में कहा है कि जहां तक ​​पहली घटना का सवाल है, यह याचिकाकर्ता द्वारा शिकायतकर्ता के बालों की लंबाई के संबंध में टिप्पणी करने और उसके बालों से संबंधित एक गीत गाने से संबंधित है। याचिकाकर्ता द्वारा शिकायतकर्ता के प्रति कथित तौर पर की गई टिप्पणी को देखते हुए यह विश्वास करना मुश्किल है कि यह टिप्पणी शिकायतकर्ता को किसी भी तरह का यौन उत्पीड़न करने के इरादे से की गई थी। टिप्पणी किए जाने के समय उसने खुद कभी भी टिप्पणी को यौन उत्पीड़न नहीं माना।” याचिकाकर्ता की ओर से वकील सना रईस खान ने कोर्ट में उसका पक्ष रखा। यह पूरा मामला 11 जून 2022 का है, जब दफ्तर के एक ट्रेनिंग सेशन के दौरान पुरुष कर्मचारी ने यह नोटिस किया कि महिला अपने बालों को बार-बार एडजस्ट कर रही है और लंबे बालों की वजह से असहज दिख रही थी। इस पर उसने हल्के अंदाज में महिला से कहा कि अपने बालों को मैनेज करने के लिए तुम जेसीबी का इस्तेमाल करती होगी। इसके बाद उसे कंफर्टेबल करने के लिए वह ये रेश्मी जुल्फें गाना गाने लगा। सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि याचिकाकर्ता का ऑब्जेक्टिव इस कमेंट के पीछे सिर्फ इतना ही था कि अगर महिला अपने बालों से असहज है तो वह उसे बांध ले, क्योंकि इससे न सिर्फ याचिकाकर्ता, बल्कि वहां मौजूद अन्य लोगों का भी ध्यान भटका रही थी। यहां तक कि याचिकाकर्ता ने ट्रेनिंग सेशन से पहले ही सबको कह दिया था कि वह माहौल को हल्का रखने के लिए बीच-बीच में चुटकुले भी सुनाता रहेगा। जज ने अपने फैसले में कहा है कि यदि आरोपों को सही भी मान लिया जाए तो भी यह मानना मुश्किल है कि याचिकाकर्ता ने यह कमेंट करके सेक्सुअल हैरेसमेंट किया है।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर अवैध झुग्गियों को हटाने पहुंचने तो अचानक BJP विधायक पहुंचे और रुक गया ऐक्शन

नई दिल्ली दिल्ली के यमुना खादर क्षेत्र में शुक्रवार को अवैध झुग्गियों को हटाने के लिए डीडीए अधिकारी बुलडोजर लेकर पहुंच गए। जिसके बाद वहां हंगामा हुआ। इसी बीच पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रविन्द्र सिंह नेगी कार्रवाई को रोकने के लिए वहां पहुंचे। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर अवैध झुग्गियों को हटाने के लिए अधिकारी बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचे थे। हालांकि विधायक के हस्तक्षेप से ऐक्शन को फिलहाल के लिए रोक दिया गया है। पटपड़गंज विधानसभा से भाजपा विधायक रविंद्र सिंह नेगी ने कहा, ‘यह हाईकोर्ट का आदेश था और पिछले कई सालों से यह योजना चल रही थी। हम उच्च न्यायालय का सम्मान करते हैं लेकिन हमने कोर्ट से कहा है कि यमुना नदी के किनारे कई लोग कई सालों से रह रहे हैं और उनकी रोजी-रोटी और कमाई यहां की खेती पर ही निर्भर है। हमने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से अनुरोध किया है कि हमें कुछ समय दिया जाए ताकि यहां के लोग अपनी फसल काट सकें। ये लोग बहुत परेशान हैं।’ भाजपा विधायक ने कहा, ‘हाईकोर्ट का आदेश है कि यमुना किनारे जो ग्रीन बेल्ट है उससे अतिक्रमण हटाया जाए। पिछले कई सालों से यह प्लानिंग चल रही है। हम हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं। अभी यहां खेती उगी हुई है, अगर इसे हटा दिया जाएगा तो ये खाएंगे क्या। हमने एलजी सक्सेना और सीएम रेखा गुप्ता से अनुरोध किया है कि इन्हें कुछ दिनों की मोहलत दी जाए ताकि ये फसल काट सकें। ये लोग बहुत परेशान हैं। हम न्यायालय का सम्मान करते हैं। ये लोग भी यहां फंसे हुए हैं, मैं विनती करूंगा की इन्हें कुछ दिनों की मोहलत दी जाए।’

क्लीनिकल मामले की निगरानी की जरूरत है और यह गंभीर मामला है: सुप्रीम कोर्ट

इंदौर स्वास्थ्य अधिकार मंच द्वारा वर्ष 2012 में मध्य प्रदेश और देश भर में अनैतिक क्लीनिकल परीक्षणों के विभिन्न मुद्दों पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका स्वास्थ्य अधिकार मंच, बनाम भारत संघ व अन्य पर आज दिनांक 21-03-25 को न्यायमूर्ति पामीदीघंटम श्री नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जयमालया बागची द्वारा सुनवाई की गई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता संजय पारीख ने उल्लेख किया कि अधिनियमों और नियमों के बावजूद, भोपाल गैस पीड़ितों पर अनैतिक क्लीनिकल परीक्षण, एचपीवी वैक्सीन परीक्षण और इंदौर, जयपुर और देश के अन्य हिस्सों में हुए अनैतिक परीक्षणों से संबंधित कई मुद्दे अभी भी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। श्री पारीख ने यह भी उल्लेख किया कि हजारों क्लीनिकल परीक्षण विषयों की मृत्यु और शारीरिक दुष्परिणाम हो गई है और उनको मुआवजा नहीं मिला है । श्री पारीख ने बताया कि क्लिनिकल ट्रायल्स रूल २०१९  के लागू होने के बावजूद अभी तक क्लीनिकल ट्रायल के विषयों की भर्ती की कोई प्रक्रिया नहीं है, प्रायोजकों और जांचकर्ताओं की कोई जवाबदेही नहीं है, उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का कोई प्रावधान नहीं है और मृत्यु और शारीरिक दुष्परिणाम होने पर अधिकांश लोगों को कोई  कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। स्वास्थ्य अधिकार मंच के अमूल्य निधि ने कहा कि इंदौर, जयपुर में अनैतिक क्लीनिकल ट्रायल में शामिल जांचकर्ताओं और एचपीवी वैक्सीन मामले शामिल स्पॉन्सर और इन्वेस्टिगेटर पर  अभी तक कार्रवाई पूरी  नहीं की गई है। ज्ञात हो कि वर्ष 2005 से 2020 तक 6500 लोगों की मौतें क्लिनिकल ट्रायल के दौरान हुई है और सरकार ने मात्र 217 मृतकों को ही मुआवजा दिया गया है, इसी प्रकार गंभीर शारीरिक दुष्परिणाम के 27890 मामले सामने आए है और इनमे से किसी को भी मुआवजे का कोई रेकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और निगरानी  का मुद्दा है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता स्वास्थ्य अधिकार मंच द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर विस्तृत जवाब चार सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाए। इसी तरह, भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के अनुसार, 2004-2008 में भोपाल गैस पीड़ितों पर क्लीनिकल परीक्षण किए गए थे। उनके अनुसार, 23 मौतें और 22 SAE हुए। आर्थिक अपराध शाखा ने इंदौर के अस्पताल में 6 डॉक्टरों द्वारा 3307 लोगों पर किए गए 76 क्लीनिकल ट्रायल के संबंध में जांच की थी, जिनमें से 1833 बच्चे थे। इनमें से 81 को गंभीर दुष्प्रभाव हुए और उनकी मौत हो गई। आर्थिक अपराध शाखा की रिपोर्ट से पता चलता है कि दोषी डॉक्टरों को करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया और विदेश यात्राएं प्रायोजित की गईं। हालांकि, प्रभावित परिवारों को मुआवजा नहीं दिया गया और न ही दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कोई कार्रवाई पूरी  की गई। क्लीनिकल ट्रायल के लिए प्राप्त राशि में से महात्मा गांधी स्मृति महाविद्यालय के पत्र दिनांक 3.10.08 के अनुसार 10% राशि चिकित्सा शिक्षा विभाग में जमा की जानी थी, जो अभी विचाराधीन है और जमा नहीं की गई है। रिपोर्ट में स्वयं के लिए धन स्वीकार करने और प्रायोजित विदेश यात्राएं करने वाले प्रमुख अन्वेषक के खिलाफ चिकित्सा आचार संहिता विनियमन, 2002 और संशोधित अधिसूचना के तहत कार्रवाई करने की भी सिफारिश की गई है। आंध्र प्रदेश और गुजरात में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस का ट्रायल बिना सहमति के किया गया और उसपर सरकारी समिति ने जांच की थी और यह पाया था कि  आंध्र प्रदेश में 1,948 बच्चों के मामले में सहमति फॉर्म पर माता-पिता के अंगूठे के निशान थे, और 2,763 बच्चों के मामले में सहमति फॉर्म पर छात्रावास वार्डन के हस्ताक्षर थे। गुजरात के मामले में 6,217 फॉर्म पर हस्ताक्षर किए गए थे, 3,944 पर अंगूठे के निशान थे, और 545 पर अभिभावकों के हस्ताक्षर थे या उनके अंगूठे के निशान थे। इन फॉर्म पर गवाहों के हस्ताक्षरों के संबंध में और भी विसंगतियां पाई गईं। इसके बावजूद अब तक पूरी करवाई नहीं हुई और न ही जिनकी मृत्यु हुई और शारीरिक दुष्परिणाम हुए उन्हें मुआवजा मिला।

सौरभ भारद्वाज बनाए गए दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष, सिसोदिया को पंजाब का प्रभार, आप पार्टी में हुए बड़े बदलाव

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने बड़े स्तर पर फेरबदल किया है। शुक्रवार को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के घर हुई ‘आप’ की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (पीएसी) में इस पर फैसला लिया गया है। नए फेरबदल के तहत ‘आप’ ने सौरभ भारद्वाज को दिल्ली का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं पार्टी के दूसरे बड़े नेता मनीष सिसोदिया को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है। गोपाल राय और पंकज गुप्ता को गुजरात और गोवा का प्रभारी बनाया गया है। दिल्ली ‘आप’ अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद सौरभ भारद्वाज ने कहा मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम पार्टी को और मजबूत करेंगे। मेरा मानना ये है कि हारने के बाद संगठन निर्माण करना सबसे आसान भी होता है, क्योंकि जीतने के समय तो कई लोग आपके साथ आ जाते हैं। मगर जो पार्टी की हार के समय भी आपके साथ रहता है वो खरा सोना होता है। 24 कैरेट गोल्ड होता है, इससे आपको पीतल और सोने में फर्क करने में दिक्कत नहीं होती।सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता पार्टी संगठन का विस्तार करना होगी। चुनाव आते-जाते रहेंगे। ‘आप’ सांसद संदीप पाठक ने कहा, “आज पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में कई फैसले लिए गए। गोपाल राय को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है। पंकज गुप्ता को गोवा का प्रभारी बनाया गया है। मनीष सिसोदिया को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है और मुझे छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है। सौरभ भारद्वाज को पार्टी की दिल्ली इकाई का प्रमुख और मेहराज मलिक को पार्टी की जम्मू-कश्मीर इकाई का प्रमुख नियुक्त किया गया है। ‘आप’ के वर्तमान दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष गोपाल राय ने गुजरात के प्रभारी के रूप में अपनी नियुक्ति पर कहा कि पार्टी संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम करेगी और पार्टी उन राज्यों में काम करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहां चुनाव होने वाले हैं और मजबूती से चुनाव लड़ेगी। वहीं, पंजाब के प्रभारी बनाए गए मनीष सिसोदिया ने कहा कि राज्य में हमारी सरकार बनने के बाद पंजाब में काफी विकास हुआ है। ‘आप’ सरकार पंजाब के लोगों के कल्याण के लिए काम करना जारी रखेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि ‘आप’ का हर समर्पित कार्यकर्ता पार्टी का हिस्सा होने पर गर्व महसूस करे। पंजाब के लोग अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान का बहुत सम्मान करते हैं।

सुरक्षा बलों के सफल नक्सल ऑपरेशन से तेलंगाना की बजाए अब सीधे बीजापुर से जा सकते हैं पामेड़: : उप मुख्यमंत्री शर्मा

रायपुर  प्रदेश में सुरक्षा बलों के सफल नक्सल ऑपरेशन का असर नजर आने लगा है. उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि तेलंगाना से पामेड़ जाने वाले अब सीधे बीजापुर से पामेड़ जा सकते हैं. यही नहीं 25 वर्षों से बंद गारपा का साप्ताहिक बाजार शुरू हुआ है. कोंडापल्ली में भी सेवाएं शुरू हुई हैं. 570 मोबाइल टावर लगाए गए हैं. उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मीडिया से चर्चा में बताया कि गंगालूर में 26 और कांकेर-नारायणपुर एरिया में 4 नक्सली मारे गए हैं. इस तरह से कुल 30 नक्सली मारे गए हैं. सुरक्षा बल के जवानों को बहुत बड़ी सफलता मिली है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि नई सरेंडर नीति का अनुमोदन मंत्रिमंडल से हुआ है. सामूहिक तौर पर सरेंडर करते हैं तो इनाम की राशि डबल होगी. उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि शहीद परिवार की समस्याओं पर आईजी रेंज पर सुनवाई होगी. शहीदों की मूर्ति लगाने के लिए वीर बलिदानी योजना शुरू की गई है. इसके लिए 10 करोड़ राशि स्वीकृत की गई है. पंचायत विभाग एलवद पंचायत अभियान के तहत ग्राम पंचायत में लोगों से सरेंडर कराएंगे. गांव नक्सलमुक्त घोषित करने पर विकास के लिए तुरंत एक करोड़ देंगे.

कनाडा में खालिस्तानियों के खिलाफ बोलने की मिली सजा, सांसद चंद्र आर्य की उम्मीदवारी की रद्द, अब नहीं लड़ पाएंगे चुनाव

ओटावा कनाडा की सत्ताधारी लिबरल पार्टी ने आगामी संसदीय चुनावों से पहले एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने सांसद चंद्र आर्य की उम्मीदवारी रद्द कर दी है। भारतीय मूल के हिंदू सांसद चंद्र आर्य नेपियन निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। वे खालिस्तान समर्थक तत्वों के खिलाफ अपनी मुखर आवाज के लिए जाने जाते हैं। इस कदम ने कनाडा की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। चंद्र आर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए बताया कि पार्टी ने उनका टिकट काट दिया है। लिबरल पार्टी द्वारा जारी पत्र के अनुसार, चुनाव प्रचार अभियान के अध्यक्ष ने चंद्र आर्य की पात्रता की विस्तृत समीक्षा की। इस समीक्षा के बाद उनका टिकट काटने की सिफारिश की गई जिसे पार्टी ने स्वीकार कर लिया है। आर्य ने इस निर्णय को “बेहद निराशाजनक” करार दिया, लेकिन कहा कि इससे नेपियन के लोगों की सेवा करने का उनका सम्मान और गर्व कम नहीं होगा। उन्होंने लिखा, “मुझे लिबरल पार्टी द्वारा सूचित किया गया है कि नेपियन में आगामी आम चुनाव के लिए उम्मीदवार के रूप में मेरा नामांकन रद्द कर दिया गया है। हालांकि यह खबर बेहद निराशाजनक है, लेकिन इससे नेपियन के लोगों – और सभी कनाडाई लोगों – की 2015 से संसद सदस्य के रूप में सेवा करने का गौरव और विशेषाधिकार कम नहीं होता। पिछले कई वर्षों से, मैंने इस भूमिका में अपना दिल और आत्मा झोंक दी है। मुझे एक सांसद के रूप में किए गए अपने काम पर बहुत गर्व है। नेपियन के निवासियों को मैंने जो अटूट सेवा प्रदान की है, कनाडाई लोगों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर मैंने जो सैद्धांतिक रुख अपनाया है और मुश्किल घड़ी में भी जिन कारणों के लिए मैंने खड़ा हुआ है – उस सब पर मुझे गर्व है। अपने समुदाय और देश की सेवा करना मेरे जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी रही है, और मैं इसके हर पल के लिए आभारी हूं।” लिबरल पार्टी ने आर्य की उम्मीदवारी रद्द करने के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि उनकी खालिस्तान विरोधी रुख और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ने पार्टी के भीतर असहजता पैदा की होगी। पिछले साल अगस्त में आर्य ने नई दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात की थी, जिसे कनाडा सरकार ने “निजी पहल” करार दिया था। खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ मुखर रहे हैं आर्य चंद्र आर्य कनाडा और अन्य स्थानों पर सक्रिय खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ खुलकर बोलते रहे हैं। कनाडा को खालिस्तानियों का मुख्य गढ़ माना जाता है लेकिन फिर भी चंद्र आर्या सार्वजनिक रूप से इसके खिलाफ बोलते रहे। जिसके कारण वह पहले भी खालिस्तानी समूहों के निशाने पर रहे हैं। अक्टूबर 2023 में अमेरिका स्थित खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से भारतीय राजनयिकों के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद चंद्र आर्य को अगला निशाना बनाने की अपील की थी। पन्नू ने आर्य पर लगाए गंभीर आरोप गुरपतवंत सिंह पन्नू ने X पर पोस्ट कर कनाडाई सरकार से चंद्र आर्य के खिलाफ जांच करने की मांग की थी। उसने आरोप लगाया कि आर्य खालिस्तान आंदोलन के खिलाफ ‘जहर उगल’ रहे हैं और भारत सरकार के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। पन्नू ने आर्य पर आरोप लगाते हुए कहा, “इंडो-कैनेडियन सांसद चंद्र आर्य द्वारा शांतिपूर्ण खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के खिलाफ नफरत फैलाना भारतीय सरकार के एजेंट की भूमिका निभाने का स्पष्ट उदाहरण है। जुलाई 2023 में जब खालिस्तानी कार्यकर्ताओं ने भारतीय राजनयिकों की भूमिका की जांच की मांग की, तब आर्य ने खालिस्तान जनमत संग्रह को ‘हमारे आंगन में सांप’ करार दिया था। आर्य ने खालिस्तान समर्थकों द्वारा हिंदू मंदिरों पर हमलों की निंदा की थी और कनाडा में हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए आवाज उठाई थी। लिबरल पार्टी द्वारा आर्य की उम्मीदवारी रद्द किए जाने के इस फैसले के राजनीतिक प्रभावों पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय कनाडा में खालिस्तानी समूहों और उनकी बढ़ती राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि यह फैसला पार्टी की आंतरिक राजनीति का परिणाम हो सकता है।

छत्तीसगढ़ व्यापमं ने PET और PPHT परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की शुरू

रायपुर छत्तीसगढ़ के इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेजों में प्रवेश के लिए प्री-इंजीनियरिंग टेस्ट (PET) और प्री-फार्मेसी टेस्ट (PPHT) का आयोजन 8 मई को किया जाएगा. छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) ने इन परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. अभ्यर्थी 17 अप्रैल शाम 5 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. व्यापमं द्वारा जारी परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार, PET परीक्षा सुबह 9 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक, जबकि PPHT परीक्षा शाम 5:15 बजे तक आयोजित होगी. परीक्षाएं राज्य के 33 जिला मुख्यालयों में आयोजित की जाएंगी. परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र 29 अप्रैल को व्यापमं की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे. PPT and Pre MCA परीक्षा 1 मई को इसके अलावा प्री-पॉलीटेक्निक टेस्ट (PPT) और प्री-MCA परीक्षा का आयोजन 1 मई को किया जाएगा. इन परीक्षाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है और 11 अप्रैल शाम 5 बजे तक आवेदन किए जा सकते हैं. PPT परीक्षा सुबह 9 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक होगी और इसके लिए 33 जिलों में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे. वहीं प्री-MCA परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक होगी और इसके लिए परीक्षा केंद्र सिर्फ रायपुर और बिलासपुर में रहेंगे. स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए कोई शुल्क नहीं राज्य शासन के निर्देशानुसार, स्थानीय अभ्यर्थियों से किसी भी प्रकार का परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा. व्यापमं ने परीक्षा से जुड़ी विस्तृत जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी है. एंट्रेंस एग्जाम की महत्वपूर्ण तिथियां: PET और PPHT परीक्षा: 8 मई PPT और प्री-MCA परीक्षा: 1 मई PET और PPHT आवेदन की अंतिम तिथि: 17 अप्रैल PPT और प्री-MCA आवेदन की अंतिम तिथि: 11 अप्रैल प्रवेश पत्र जारी होने की तिथि: 29 अप्रैल (PET & PPHT)

विश्व जल दिवस: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से किया जल संरक्षण का आह्वान

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विश्व जल दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों से जल संरक्षण अभियान को जनआंदोलन का रूप देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन है — जीवन का आरंभ जल से हुआ है और इसका सतत प्रवाह ही जीवन की निरंतरता का आधार है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज जब दुनिया जल संकट की ओर बढ़ रही है, तब हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह जल की हर बूँद को संजोए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को ‘विश्व जल दिवस’ मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य समाज में जल के महत्व और उसके संरक्षण की आवश्यकता के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने जल संरक्षण को अपनी प्राथमिकताओं में रखते हुए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। राज्य में जन-भागीदारी के माध्यम से जल संचय को बढ़ावा दिया जा रहा है, साथ ही जल प्रदूषण नियंत्रण और जल संसाधनों के पुनर्जीवन के लिए भी योजनाबद्ध और सतत प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धमतरी जिले में आयोजित ‘जल-जगार महोत्सव’ जल संरक्षण को लेकर एक अभिनव पहल थी, जिसमें स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से जल चेतना को नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या, अनियंत्रित दोहन और प्रदूषण के कारण स्वच्छ जल की उपलब्धता भविष्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुकी है, जिसे केवल सामूहिक प्रयासों से ही टाला जा सकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि जल की प्रत्येक बूँद को सहेजेंगे, इसके महत्व को जन-जन तक पहुँचाएँगे और आने वाली पीढ़ियों को जल-समृद्ध भविष्य का उपहार देंगे।

पुल के शिलान्यास पर भड़के विधायक, कार्यक्रम में एक आदमी को पीटा

गुवाहाटी असम के ऑल इंडिया यूनाइटेड फ्रंट (एआईयूडीएफ) के विधायक शम्सुल हुदा सोशल मीडिया में सुर्खियां बटोर रहे हैं। उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक आदमी को पहले थप्पड़ मारते, फिर केले के पेड़ से पीटते नजर आ रहे हैं। रिपोर्टस के मुताबिक विधायक शम्सुल हुदा इस बात पर भड़क गए थे कि उनके कार्यक्रम के लिए लाल रिबन और केले के बड़े पेड़ नहीं लगाए गए। हालांकि जब विवाद बढ़ा तो विधायक ने माफी मांग ली। छोटे पेड़ देखकर और चढ़ा पारा जानकारी के अनुसार बिलासपारा के विधायक शम्सुल हुदा के मारपीट का वीडियो धुबरी के दैखोवा बाजार में हुई। वह एक आरसीसी पुल के शिलान्यास समारोह में पहुंचे थे। असम के रीति रिवाज के मुताबिक समारोह स्थल पर केले के पौधे लगाए गए थे। जब उद्घाटन करने की बारी आई तो उन्हें लाल रिबन भी नजर नहीं आया। फिर क्या था, विधायक गुस्से से लाल-पीले हो गए और ठेकेदार के कर्मचारी साहिदुर रहमान को ताबड़तोड़ थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद उनकी नजर केले के छोटे पौधों पर पड़ी तो उनका पारा हाई हो गया। वह उन पौधों से ही साहिदुर रहमान को पीटने लगे। विधायक की मारपीट से कर्मचारी दुखी साहिदुर रहमान ठेकेदार अविनाश अग्रवाल के लिए मोहरी का काम करता है। नेताजी की इस हरकत पर सभी भौंचक्के रह गए। साहिदुर रहमान ने बताया कि एआईयूडीएफ विधायक शम्सुल हुदा ने बिना किसी कारण के उन पर हमला कर दिया। उसे एक जनप्रतिनिधि से ऐसे व्यवहार की उम्मीद नहीं थी। यह अपमानजनक और दर्दनाक था। इस घटना से धुबरी के लोग नाराज हैं और विधायक की हरकत की निंदा कर रहे हैं। लोगों का सवाल है कि क्या एक चुने हुए नेता को ऐसा व्यवहार करना चाहिए? वायरल वीडियो और जनता का गुस्सा यह घटना किसी सस्ते फिल्मी ड्रामे से कम नहीं थी। और जैसे ही इसका वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कोई इसे कुर्सी का अहंकार बता रहा है, तो कोई विधायक की मानसिक स्थिति पर सवाल उठा रहा है। एक यूजर ने लिखा, “जनता के सेवक ऐसे व्यवहार करेंगे, तो भरोसा किस पर करें?” पीड़ित सहिदुर रहमान की आवाज में दर्द साफ झलक रहा था। उसने कहा, “मैं तो अपना काम कर रहा था। विधायक साहब को इतना गुस्सा क्यों आया, समझ नहीं आता।” यह सवाल सिर्फ सहिदुर का नहीं, बल्कि पूरे बिलासिपारा के लोगों का है। माफी का ढोंग या सच? घटना के बाद पीड़ित रहमान ने उसी रात गौरीपुर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई, जिसे बाद में बिलासिपारा पुलिस स्टेशन ट्रांसफर किया गया। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 115(2), 8296, 352 और 351(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। जब मामला तूल पकड़ने लगा और FIR दर्ज हो गई, तो विधायक साहब का रुख बदल गया। उन्होंने माफी मांगते हुए कहा, “मैं मानता हूं कि मुझसे गलती हुई। परिस्थितियों ने मुझे ऐसा करने को मजबूर किया। मैं असम की जनता से माफी मांगता हूं।” लेकिन यह माफी कितनी सच्ची है, इस पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह जनता का गुस्सा शांत करने की कोशिश थी, या सचमुच पछतावा? लोगों का कहना है कि अगर माफी मांगनी ही थी, तो पहले अपनी गलती क्यों नहीं मानी? और फिर, एक जनप्रतिनिधि को ऐसी “परिस्थितियां” क्यों बेकाबू कर रही हैं? कुर्सी और जिम्मेदारी यह पहली बार नहीं है जब कोई जनप्रतिनिधि अपने व्यवहार की वजह से चर्चा में आया हो। लेकिन समसुल हुदा की यह हरकत कई सवाल खड़े करती है। क्या पावर की कुर्सी इतनी भारी हो जाती है कि छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा फूट पड़ता है? या फिर यहि व्यक्तिगत अहंकार है, जो जनता की सेवा के वादों पर भारी पड़ रहा है? पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। AIUDF पहले से ही विवादों में घिरी है, और यह घटना पार्टी के लिए एक और झटका साबित हो सकती है। जनता की नजर अब इस बात पर है कि क्या विधायक साहब को अपनी हरकत की कीमत चुकानी पड़ेगी, या यह मामला भी समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।

नक्सलियों का गड़ा धन को पुलिस ने खोज, 8 लाख नगद और हथियारों का जखीरा जब्त

गरियाबंद छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद मुक्त बनाने की राह में पुलिस ने आज एक और बड़ी सफलता हासिल की है. प्रदेश की गरियाबंद पुलिस ने नक्सलियों का छुपाया हुआ धन और हथियारों का जखीरा खोज निकाला है. एसपी निखिल रखचे के नेतृत्व में अब जंगलों में छुपे माओवादी और उनके धन, हथियार समेत सभी सोर्स का एक के बाद एक खात्मा हो रहा है. पुलिस ने आज मैनपुर थाना क्षेत्र से लगे पंडरी पानी से नक्सलियों का जमीन में छुपाया गया 8 लाख कैश और हथियारों समेत नक्सल साहित्य बरामद किया है. अब पुलिस नक्सलियों को कैश देने वाले सोर्स का भी पता लगाने में जुट गई है. गरियाबंद एसपी निखिल राखेचा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि मैनपुर थाना क्षेत्र से लगे पंडरी पानी के पहाड़ी इलाके में धमतरी गरियाबंद नुआपड़ा डिविजन कमेटी के द्वारा उगाही का रकम छिपा कर रखा गया था. इसकी जानकारी मिलने पर SP के निर्देश पर जिला पुलिस, कोबरा बटालिया ,सीआरपीएफ की संयुक्त टीम बीडीएस की टीम के साथ सर्चिंग ऑपरेशन पर निकली. 20 मार्च की सुबह वे बताए गए जगह पर पहुंची और पेड़ के नीचे खुदाई कराई गई, जिसमें एक सफेद बोरी मिली. टीम ने सावधानी के साथ जांच किया, तो उसके अंदर से टिफिन डिब्बे में 8 लाख रुपए नगद और 13 नग जिलेटिन और नक्सली साहित्य समेत अन्य समाग्री बरामद हुआ. बता दें, जनवरी 2025 के शुरुआत से ही गरियाबंद पुलिस को नक्सली मोर्चे में सफलता मिल रही है. जनवरी माह में 2 अलग अलग मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने सेंटर कमेटी सदस्य चलपती समेत 17 नक्सली मार गिराए. फरवरी में हथियारों को नष्ट किया गया. मार्च माह में तीन नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया. अब पुलिस गाड़े हुए धन तक पहुंच गई है. गरियाबंद जिले में पुलिस और सुरक्षा बलों ने नक्सली गतिविधियों पर नकेल कसने में सफल हुई है.

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