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शरारती तत्वों ने प्राचीन चामुंडा मंदिर में की तोड़फोड़, हंगामे के बाद पहुंची पुलिस, कर रही जांच

अमरोहा प्राचीन चामुंडा मंदिर की मूर्तियां तोड़ने पर गांव में हिंदू समाज के लोगों में रोष फैल गया। लोगों ने मंदिर पर एकत्र होकर हंगामा किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराया है। अज्ञात लोगों के खिलाफ तहतीर दी गई है। पुलिस जांच पड़ताल में जुटी है। यह घटना रहरा थाना क्षेत्र के गांव बरतौरा की है। गांव में आबादी से सटा हुआ प्राचीन चामुंडा मंदिर है। बताते हैं कि शुक्रवार की रात को कुछ शरारती तत्वों ने मंदिर में पहुंचकर मंदिर की मूर्तियां तोड़ दी और कुछ मूर्तियां उखाड़ कर ले गए। शनिवार सुबह पूजा अर्चना करने मंदिर पहुंचे लोगों को इसकी जानकारी हुई तो रोष फैल गया। कुछ ही देर में मंदिर पर तमाम ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने घटना के प्रति नाराजगी  जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की घटना की गई है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उधर, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हंगामा कर रहे लोगों को शांत कराया। सीओ दीप  कुमार पंत का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने दी विश्व जल दिवस की शुभकामनाएं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व जल दिवस पर सभी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर सभी से जल संरक्षण के लिए संकल्प लेने का आव्हान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल से ही हमारा कल सुरक्षित है। यह प्रकृति का अमूल्य उपहार है, जिसका संरक्षण और संवर्धन करना हम सभी की जिम्मेदारी है। आइए, हम सब मिलकर जल संसाधनों की सुरक्षा का संकल्प लें और एक समृद्ध भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से जल बचाने के लिए जागरूक रहने और जल संरक्षण के सभी उपाय अपनाने की अपील की है। जल संकट की गंभीरता को उजागर करने और इसके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिये प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार भी इस वर्ष आगामी 30 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान प्रारंभ करने जा रही है। जल संरक्षण में जन सहभागिता बढ़ाने और अधिकाधिक जल संरचनाओं के निर्माण की मूल मंशा से जुड़ा यह अभियान (लगातार 90 दिनों तक संचालित होकर) 30 जून 2025 तक चलेगा। इस अवधि में जल बचाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  

EOW की विशेष अदालत ने CGMSC घोटाला मामले में पांचों आरोपियों को सात दिन की रिमांड पर भेजा

रायपुर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन (CGMSC) में करोड़ों के रीएजेंट खरीदी घोटाले में ईओडब्लू की विशेष अदालत ने पांच आरोपियों को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है. ईओडब्ल्यू ने आरोपियों की 15 दिन की रिमांड मांगी थी. ईओडब्ल्यू ने दो आईएएस समेत CGMSC और हेल्थ विभाग के दर्जन भर अधिकारियों को तलब कर लंबी पूछताछ करने के बाद की पांचों लोगों को देर रात गिरफ्तार किया था. इसके बाद आज सुबह ईओडब्ल्यू की विशेष अदालत में पेश किया गया. ईओडब्ल्यू की ओर से मामले की तह तक जाने के लिए आरोपियों की 15 दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी. विशेष अदालत के न्यायधीश ने सुनवाई के बाद सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया. मामले में CGMSC के तत्कालीन प्रभारी महाप्रबंधक उपकरण एवं उप प्रबंधक क्रय एवं संचालन बसंत कुमार कौशिक, तत्कालीन बायोमेडिकल इंजीनियर छिरोध रौतिया, तत्कालीन उप प्रबंधक उपकरण कमलकांत, तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर स्टोर डॉ. अनिल परसाई, तत्कालीन बायोमेडिकल इंजीनियर दीपक कुमार बाँधे विशेष अदालत के फैसले के बाद अब 28 मार्च तक रिमांड पर रहेंगे. बता दें कि कांग्रेस शासनकाल में स्वास्थ्य विभाग के CGMSC ने मोक्षित कॉरपोरेशन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की राजकोष को किस तरह से खाली किया है इस पूरे मामले को लेकर 660 करोड़ रुपए के गोल-माल को लेकर भारतीय लेखा एंव लेखापरीक्षा विभाग के प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट) आईएएस यशवंत कुमार ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनोज कुमार पिंगआ को पत्र लिखा था. दो साल के ऑडिट में खुली थी पोल लेखा परीक्षा की टीम की ओर से CGMSC की सप्लाई दवा और उपकरण को लेकर वित्त वर्ष 2022-24 और 2023-24 के दस्तावेज को खंगाला गया तो कंपनी ने बिना बजट आवंटन के 660 करोड़ रुपये की खरीदी की थी, जिसे ऑडिट टीम ने पकड़ लिया था. ऑडिट में पाया गया है कि पिछले दो सालों में आवश्यकता से ज्यादा खरीदे केमिकल और उपकरण को खपाने के चक्कर में नियम कानून को भी दरकिनार किया गया. बिना जरूरत की हॉस्पिटलों को सप्लाई प्रदेश के 776 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों सप्लाई की गई, जिनमें से 350 से अधिक ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ऐसे हैं, जिसमें कोई तकनीकी, जनशक्ति और भंडारण सुविधा उपलब्ध ही नहीं थी. ऑडिट टीम के अनुसार DHS ने स्वास्थ्य देखभाल की सुविधाओं में बेसलाइन सर्वेक्षण और अंतर विश्लेषण किए बिना ही उपकरणों और रीएजेंट मांग पत्र जारी किया था.

डॉलर के मुकाबले रुपया 17 पैसे मजबूत, आयात पर निर्भर इंडस्ट्री को फायदा होगा

मुंबई भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 86 रुपये से ऊपर पहुंच गया है. यह उसका पिछले दो साल में किसी भी एक सप्ताह का सबसे अच्छा प्रदर्शन है. तेल की कीमतों में स्थिरता, डॉलर इंडेक्स में गिरावट, और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा बाजार में किए गए हस्तक्षेप जैसे कारकों ने रुपये को मजबूती दी है. इस सप्ताह रुपये ने 1.2 फीसदी की बढ़त दर्ज की, जो जनवरी 2023 के बाद से सबसे अधिक है. विशेषज्ञों का कहना है कि RBI द्वारा डॉलर की तरलता (लिक्विडिटटी) बढ़ाने और नियमित हस्तक्षेप के कारण रुपया लगातार मजबूत हो रहा है. इसके अलावा, विदेशी निवेश, तेल की कीमतों में स्थिरता, घरेलू महंगाई में कमी, और व्यापार घाटे (ट्रेड डेफिसिट) में सुधार ने भी रुपये को सबल दिया है. फरवरी में भारत का व्यापार घाटा घटकर 14.05 अरब डॉलर (लगभग 1.17 लाख करोड़ रुपये) रह गया, जो जनवरी में 23 अरब डॉलर (लगभग 1.91 लाख करोड़ रुपये) था. यह सुधार निर्यात और आयात में गिरावट के कारण हुआ है. रुपये की मजबूती के मुख्य कारण     RBI का हस्तक्षेप: RBI ने डॉलर/रुपया स्वैप ऑक्शन के जरिए डॉलर की लिक्विडिटी बढ़ाई. स्वैप नीलामी का मतलब है कि RBI ने बैंकों से डॉलर खरीदे और उन्हें भविष्य में वापस बेचने का वादा किया.     तेल की कीमतों में स्थिरता: तेल की कीमतें स्थिर रहने से भारत का आयात बिल कम हुआ, जिससे रुपये को सपोर्ट मिला.     विदेशी निवेश: विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों में पैसा लगाया, जिससे डॉलर की आपूर्ति बढ़ी.     व्यापार घाटे में सुधार: फरवरी में व्यापार घाटा कम होकर 14.05 अरब डॉलर रह गया, जो अगस्त 2021 के बाद से सबसे कम है. विशेषज्ञों का मानना है कि RBI की सही और समय पर नीतियों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है. इससे रुपये की मजबूती जारी रह सकती है. हालांकि, वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और तेल की कीमतों में बदलाव जैसे कारक रुपये को प्रभावित कर सकते हैं. रुपये की मजबूती से किन सेक्टरों को लाभ रुपये की मजबूती से कई सेक्टरों को फायदा होगा, खासकर आयात पर निर्भर रहने वाली इंडस्ट्री को. जब रुपया मजबूत होता है, तो आयात होने वाला सामान जैसे कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, और मशीनरी सस्ते हो जाते हैं. इससे पेट्रोलियम, ऑटोमोबाइल, और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री को लागत में कमी आती है. साथ ही, विदेशी यात्रा करने वालों को भी फायदा होगा, क्योंकि डॉलर के मुकाबले उनकी खरीदारी क्षमता बढ़ जाती है. हालांकि, निर्यातकों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि मजबूत रुपये से उनके उत्पाद विदेशों में महंगे हो जाते हैं. खासकर आईटी कंपनियों को डॉलर के कमजोर होने और रुपये के मजबूत होने से दिक्कत होती है. बाजार पर विदेशी निवेश का असर   गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 3,239.14 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की. इसके अलावा, भारतीय बॉन्ड मार्केट में भी 5,500 करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला. विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत की रियल यील्ड (Real Yield) 3.028% होने के कारण विदेशी निवेशक यहां निवेश को आकर्षक मान रहे हैं.    डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल में बढ़त डॉलर इंडेक्स (Dollar Index), जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाता है, 0.13% की बढ़त के साथ 103.98 पर रहा. ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) वायदा कारोबार में 0.44% बढ़कर 72.32 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था.   शेयर बाजार में भी दिखी मजबूती   घरेलू शेयर बाजार भी सकारात्मक कारोबार कर रहे हैं. दोपहर के कारोबार में 12 बजकर 7 मिनट के करीब BSE सेंसेक्स (Sensex) 581.34 अंक या 0.76% की बढ़त के साथ 76,929.40 पर कारोबार कर रहा था. Nifty 50 भी 165.10 अंक या 0.71% की बढ़त के साथ 23,355.75 पर पहुंच गया.   भारतीय बाजार के प्रति विदेशी निवेशकों की भरोसा कायम रुपये की मजबूती भारतीय बाजार के प्रति विदेशी निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है. आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव, तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स की चाल रुपये की दिशा तय करेगी. वहीं,  फेडरल रिजर्व के फैसले और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर रुपये की चाल पर पड़ सकता है.

मुख्यमंत्री की पर्यावरण संतुलन और आर्थिक संवर्धन से जिले में जल संरक्षण की बहुआयामी पहल:-महेन्द्र सिंह मरपच्ची

विश्व जल दिवस पर विशेष लेख एमसीबी/मनेंद्रगढ़  जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन और सभ्यता की धुरी है। मनुष्य के अस्तित्व से लेकर कृषि, उद्योग और पर्यावरण तक जल की अनिवार्यता स्पष्ट है। लेकिन आज जल संकट एक वैश्विक चुनौती बन चुका है, जिससे भारत भी अछूता नहीं है। प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सतत जल प्रबंधन की दिशा में प्रयासों को तेज करना है। भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण और स्वच्छ जल आपूर्ति के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका प्रभाव पूरे देश और छत्तीसगढ़ राज्य में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने की हुई प्रतिबद्धता         प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें छत्तीसगढ़ की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में इस मिशन को और अधिक प्रभावी बनाया गया है । मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में जल जीवन मिशन की प्रगति को देखें तो अबतक कुल 60,379 नल कनेक्शन पूर्ण किया किया गया है । जबकि जिले की 19 गांवों को शत-प्रतिशत नल कनेक्शन से जोड़ा गया है, जिससे वहां के लोगों को अब स्वच्छ पेयजल की सुविधा सुनिश्चित हो चुकी है। कई गांवों में सौर ऊर्जा आधारित जल आपूर्ति प्रणाली लागू की गई है, जिससे जल आपूर्ति निरंतर बनी रहे। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की चुनौतियां और उसके संभावनाएं छत्तीसगढ़ जल संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध राज्य है। यहां महानदी, हसदेव, शिवनाथ, इंद्रावती, अरपा और खारून जैसी प्रमुख नदियां हैं, जो कृषि, उद्योग और पेयजल कबआपूर्ति के लिए जीवनरेखा का काम करती हैं। लेकिन अनियंत्रित जल दोहन, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण राज्य के कई क्षेत्रों में जल संकट गहराता जा रहा है। भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिससे कई जिलों में पानी की कमी देखी जा जाती है। मानसून में अनिश्चितता के कारण कुछ इलाके बाढ़ग्रस्त हो जाते हैं, जबकि अन्य हिस्से सूखे की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाना भी जरूरी हो गया है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जल संरक्षण के लिए किया जा रहा सशक्त प्रयास           केन्द्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। इनमें  “कैच द रेन” अभियान के तहत गांवों और शहरों में जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और जल उपयोग की दक्षता बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है। इस अभियान के तहत ग्रामीण इलाकों में पुराने कुओं, तालाबों और झीलों को पुनर्जीवित किया जा रहा है, जिससे जल पुनर्भरण की प्रक्रिया को गति मिले। “अटल भूजल योजना”  विशेष रूप से भूजल स्तर को सुधारने के लिए बनाई गई है, जिसमें समुदाय-आधारित जल प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इस योजना के तहत बोरवेल रिचार्जिंग, जल पुनर्भरण संरचनाओं और जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। वहीं “अमृत सरोवर मिशन”  के तहत मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में अबतक 96 अमृत सरोवरों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। ये सरोवर जल संरक्षण को बढ़ावा देने, भूजल स्तर में सुधार लाने, और कृषि एवं आजीविका के साधनों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा ये सरोवर सामुदायिक गतिविधियों और पर्यावरणीय संतुलन को भी प्रोत्साहित करते हैं। छत्तीसगढ़ के विभिन्न अमृत सरोवर स्थलों पर संविधान दिवस जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों का आयोजन किया जाता है, जिससे सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता में वृद्धि होती है। इन सरोवरों के निर्माण से स्थानीय निवासियों को सिंचाई, मछली पालन और अन्य आर्थिक गतिविधियों के अवसर मिलते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। इसके अलावा “प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना” के अंतर्गत किसानों को माइक्रो इरिगेशन (ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे कम पानी में अधिक सिंचाई संभव हो सके। इससे जल की बर्बादी कम होती है और खेती को और अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। “अमृत योजना” के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति और सीवरेज प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं, जिससे शहरी जल संकट को दूर करने में मदद मिल रही है। जल संरक्षण के लिए हर व्यक्ति की जनभागीदारी जरूरी       छत्तीसगढ़ और पूरे देश में जल संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देकर भूजल स्तर को पुनः भरना आवश्यक है। स्मार्ट जल प्रबंधन तकनीकों जैसे कि डिजिटल वॉटर मीटरिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को लागू किया जाना चाहिए। औद्योगिक इकाइयों को जल पुनर्चक्रण अनिवार्य करना चाहिए, ताकि जल अपव्यय को कम किया जा सके। गांवों में पारंपरिक जल संरचनाओं जैसे तालाबों, बावड़ियों और कुओं का पुनर्निर्माण कर उन्हें जल पुनर्भरण के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। कृषि में पानी की बचत के लिए सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) को बढ़ावा देना होगा। स्कूलों और कॉलेजों में जल संरक्षण की शिक्षा देकर युवाओं के साथ साथ हर व्यक्ति को भी जल बचाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। विश्व जल दिवस के दिन जल संरक्षण का संकल्प लेने का सही समय        विश्व जल दिवस केवल एक प्रतीकात्मक अवसर नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता जताने और ठोस कार्रवाई करने का अवसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण के लिए कई प्रभावी योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका लाभ पूरे देश और छत्तीसगढ़ को मिल रहा है। लेकिन केवल सरकार के प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं। हर नागरिक को जल बचाने की दिशा में योगदान देना होगा। यदि हम आज जल संरक्षण के प्रति गंभीर नहीं हुए, तो भविष्य में यह संकट और विकराल रूप ले सकता है। हमें आज ही जल संरक्षण के ठोस उपाय अपनाने होंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध जल भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। जल संरक्षण केवल एक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य है। इस विश्व जल दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए … Read more

जिले में कानून व्यवस्था होगी सख्ती, अवैध गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए दिए गए निर्देश

कानून व्यवस्था को लेकर जिला स्तरीय बैठक हुई संपन्न एमसीबी मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में कानून एवं शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जिला कार्यालय के सभाकक्ष में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डी. राहुल वेंकट की अध्यक्षता में और पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह की उपस्थिति में महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में आगामी ईद-उल-फितर और चैत्र नवरात्र के शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए। पुलिस अधीक्षक ने जिले में बाहरी घुसपैठियों की पहचान और फर्जी सिम कार्डों की ट्रैकिंग को लेकर विशेष अभियान चलाने की जानकारी दी। घर-घर सर्वे कर बाहरी व्यक्तियों की पहचान, उनका आधार और मोबाइल नंबर सत्यापित करने के निर्देश दिए गए। अपराधियों की मोबाइल ट्रैकिंग और कॉल रिकॉर्ड की निगरानी कर कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने जिले में अवैध अतिक्रमण को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। मनेंद्रगढ़ और चिरमिरी में अवैध कब्जाधारियों पर कार्रवाई होगी और शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर वहां पौधारोपण किया जाएगा। शहर के बीच एनएच पर खड़े ट्रकों और अन्य वाहनों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि यातायात बाधित न हो। साथ ही, पार्किंग व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासन विशेष अभियान चलाएगा। चेंबर पदाधिकारियों के साथ बैठक कर फल-सब्जी, मटन और मछली बाजारों के लिए उचित स्थान निर्धारित किए जाएंगे। शहर में अवैध रूप से लगाए गए ठेलों को हटाने के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं, खासकर स्कूलों और शासकीय कार्यालयों के आसपास के क्षेत्र में सख्ती बरती जाएगी। यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित दुकानदारों पर एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी दी गई है। चिरमिरी बस स्टैंड, बाजार और नगर निगम कार्यालय के आसपास अवैध कब्जों को हटाने के आदेश दिए गए हैं, जिसके लिए पहले स्थानीय लोगों से चर्चा कर उचित समाधान निकाला जाएगा। इस बैठक के जरिए जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। अवैध गतिविधियों, अतिक्रमण और बाहरी घुसपैठियों पर सख्ती बरती जाएगी। आने वाले दिनों में इन सभी निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा ताकि मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में शांति और सुचारु प्रशासन व्यवस्था बनी रहे। इस बैठक में एसडीएम लिंगराज सिदार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अशोक वडेगावकर, एलेक्स टोप्पो अनुविभागीय अधिकारी मनेंद्रगढ़ के साथ समस्त पुलिस अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर प्रीतेश राजपूत सहित समस्त तहसीदार और अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे ।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिहार के स्थापना दिवस पर दीं शुभकामनाएं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिहार के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्रगति की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर शांति, संघर्ष और संस्कार की पुण्यधरा बिहार के स्थापना दिवस की सभी प्रदेशवासियों को आत्मीय बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने बाबा महाकाल से प्रार्थना की है कि बिहार राज्य निरंतर प्रगति एवं विकास के नए कीर्तिमान रचता रहे, जन-जन के जीवन में खुशहाली आए। बिहार का स्थापना दिवस हर वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन 1912 में बिहार को बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग कर एक स्वतंत्र प्रांत बनने पर मनाया जाता है।  

सिंगरौली : 8वीं की छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म: बोली- 9 महीने पहले छात्रावास से घर जा रही थी

 सिंगरौली मध्यप्रदेश के सिंगरौली में 8वीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा ने सरकारी स्कूल में एक बच्चे को जन्म दिया है. छात्रा को पेट में दर्द की शिकायत के बाद परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे थे जहां उसे इलाज के लिए भर्ती कराया था. इलाज के लिए जब डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला की छात्रा 9 महीने की गर्भवती है. इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल पुलिस को मामले की सूचना दी. अस्पताल पहुंची पुलिस ने पूछताछ कर अज्ञात ऑटो चालक के खिलाफ रेप का मामला दर्ज किया है. 9 महीने पहले हुआ था दुष्कर्म पीड़िता ने पुलिस को बताया कि 9 महीने पहले वह छात्रावास से ऑटो में सवार होकर अपने घर जा रही थी. इसी दौरान ऑटो चालक ने सुनसान जगह पर पीड़ित छात्रा के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था. इस घटना के बारे में छात्रा ने अपने परिजनों को नहीं बताया था. 21 मार्च को अचानक उसके पेट में दर्ज होना शुरू हुआ. इसके बाद परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे थे. गर्भवती निकली छात्रा अस्पताल में डॉक्टरों ने छात्रा की जांच करवाई, तो रिपोर्ट में छात्रा के पेट में 9 महीने का गर्भ होने का पता चला. डॉक्टरों ने जब परिजनों से पति के बारे में जानकारी मांगी, तो उन्होंने छात्रा नाबालिग और बिना शादीशुदा होना बताया. मामला संदिग्ध लगने पर अस्पताल प्रबंधन ने इसकी सूचना सरई पुलिस को दी. ऑटो चालक पर केस दर्ज इस पर पुलिस ने छात्रा के बयान के आधार पर अज्ञात ऑटो चालक के खिलाफ मामला दर्ज पर जांच शुरू कर दी है. सरई थात्रा प्रभारी जितेंद्र सिंह भदोरिया ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन से सूचना मिलते ही अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्द किया गया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. आरोपी ऑटो चालक की तलाश की जा रही है.

अक्षय कुमार ने ‘केसरी 2’की रिलीज डेट आउट, फिल्म का टीजर इस दिन लॉन्च करेंगे

मुंबई बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार ने अपनी 2019 की हिस्टोरिकल पीडियड ड्रामा फिल्म ‘केसरी’ के सीक्वल की आधिकारिक पुष्टि कर दी है. साथ फिल्म के टीजर और रिलीज डेट से पर्दा भी हटा दिया है. इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया है. 22 मार्च को अक्षय कुमार ने अपने ऑफिशियल एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर ‘केसरी 2′ के बारे में अपडेट साझा किया है. खिलाड़ी कुमार ने केसरी 2 का एक क्लिप पोस्ट किया है. क्लिप में स्लेट्स पर लिखा था, साहस से भरी क्रांति. केसरी चैप्टर 2.’ क्लिप में फिल्म के टीजर की तारीख की झलक दिखाया है, जिसमें बताया गया कि केसरी चैप्टर 2 का टीजर 24 मार्च को रिलीज किया जाएगा. क्लिप शेयर करते हुए अक्षय ने एक्स पर लिखा है, ‘कुछ लड़ाइयां हथियारो से नहीं लड़ी जाती. केसरी चैप्टर 2 का टीजर 24 मार्च को रिलीज होगा.’ उन्होंने यह भी पुष्टि की कि फिल्म 18 अप्रैल 2025 को दुनिया भर में रिलीज होगी. क्लिप से लगता है कि ‘केसरी चैप्टर 2’ जलियांवाला बाग हत्याकांड की अनकही कहानी पर आधारित होगा. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो, सीक्वल में 1919 के नरसंहार के पीछे की सच्चाई को उजागर करने के लिए बैरिस्टर सी. शंकरन नायर की लड़ाई को दिखाया जा सकता है. ‘केसरी चैप्टर 2’ में अक्षय कुमार के अलावा बॉलीवुड एक्टर आर. माधवन और अनन्या पांडे प्रमुख भूमिकाओं में होंगे. ‘केसरी’ ने शुक्रवार यानी 21 मार्च 2025 को अपनी रिलीज के 6 साल पूरे किए. फिल्म ने ब्रिटिश भारतीय सेना के 21 सिख सैनिकों की वीरता की कहानी बताई है, जिन्होंने 1897 में 10,000 अफगान आदिवासियों के खिलाफ सारागढ़ी की रक्षा की थी. ईशर सिंह के किरदार में अक्षय कुमार की भूमिका को काफी पसंद किया गया था. फिल्म को सिख बहादुरी के लिए एक श्रद्धांजलि थी.

महाकाल मंदिर में अवैध दर्शन का मामला, अदालत में पेश हुई 2360 पन्नों की चार्जशीट

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध मंदिर महाकालेश्वर में अवैध दर्शन के मामले में चार्जशीट फाइल हुई है.  पुलिस ने कोर्ट में 2360 पन्नों की चार्जशीट फाइल की है. दअरसल, मंदिर में अवैध दर्शन की बड़ी कार्रवाई तब हुई थी तब उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह खुद मंदिर में दर्शन करने पहुंचे और उन्होंने नंदी हॉल में बैठे दो श्रद्धालुओं से बातचीत की थी. कलेक्टर से बातचीत में श्रद्धालुओं ने बताया था कि दो मंदिर कर्मचारियों को पैसे देकर वे वीआईपी दर्शन करने पहुंच गए थे. इस घटना के बाद कलेक्टर के आदेश पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कुल 14 लोगों को आरोपी बनाया था, जिसमें से 10 गिरफ्तार किए गए और 4 फरार हैं. 14 आरोपियों में से 8 मंदिर समिति के स्थाई कर्मचारी उज्जैन महाकाल थाना पुलिस ने महाकाल मंदिर समिति की शिकायत पर इस मामले में 14 आरोपी बनाए थे. इसमें से 8 महाकाल मंदिर के स्थाई कर्मचारी, 2 मीडिया से जुड़े व्यक्ति, 3 आउटसोर्सिंग से नियुक्त कर्मचारी और एक कांग्रेस से संबंधित मंदिर समिति के पूर्व सदस्य थे. इन धाराओं के तहत मामला दर्ज महाकाल थाना के टीआई नरेंद्र परिहार ने कहा, ” इस मामले में अपराध क्रमांक 655/2024 के तहत बीएनएस की धारा 318(4), 316(2), 316(5) और धारा 193(9) बीएनएसएस में चार्जशीट दाखिल की है. गिरफ्तार आरोपियों में विनोद चौकसे, राकेश श्रीवास्तव, अभिषेक भार्गव, राजकुमार सिंह, राजेंद्र सिंह सिसोदिया, जितेंद्र सिंह पवार, ओमप्रकाश माली, रितेश शर्मा, उमेश पांडे और करण सिंह पवार के नाम शामिल हैं. वहीं, आशीष शर्मा, दीपक मित्तल, पंकज शर्मा और एक अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं. फरार आरोपी जल्द होंगे गिरफ्तार इस मामले में 2360 पेज की चार्जशीट दाखिल करने के बाद महाकाल पुलिस ने जांच जारी रखने की बात कही है. पुलिस का दावा है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा. वहीं, अब तक गिरफ्तार किए गए किसी भी आरोपी को अदालत से जमानत नहीं मिल सकी है.

मध्यप्रदेश के वरिष्ठ कानूनविद, अधिवक्ता व समाजसेवी आनंद मोहन माथुर का निधन

इंदौर इंदौर के वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी आनंद मोहन माथुर का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 95 वर्ष की आयु तक वे सामाजिक आयोजनों और आंदोलनों में सक्रिय थे और वकालत भी करते थे। इसके बाद से वे बीमार हो गए थे। लंबी बीमारी के चलते ही उनका निधन हो गया। आनंद मोहन माथुर ने इंदौर के लिए कई उल्लेखनीय काम किए हैं। खुद के खर्च पर उन्होंने शहर में एक सभागृह, झूला ब्रिज और ओपीडी सहित अन्य काम कराए थे। वे कई संगठनों से भी जुड़े थे। उनके निधन पर कई संगठनों और नागरिकों ने शोक व्यक्त किया है। मिल में मजदूरी भी की वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी माथुर ने आजादी आंदोलनों में भी भाग लिया था। किशोरावस्था में वे अंग्रेजों के खिलाफ हो रहे आंदोलनों में हिस्सेदारी करने लगे थे। इसका खामियाजा उनके परिवार को भुगतना पड़ा। साथ ही उन्हें अपने परिवार का साथ भी छोड़ना पड़ा था। इसके बाद वे गांव से इंदौर आ गए। उन्होंने मालवा मिल में बदली मजदूर के रूप में काम किया। इसके अलावा उन्होंने काॅलेज में अध्यापन कार्य भी किया। उनका सपना डाॅक्टर बनने का था, लेकिन फिर बाद में उन्होंने वकील बनने का निर्णय लिया। वकील बनकर उन्होंने अपने पेशे को बड़ी निष्ठा से निभाया। वकालत कर उन्हें जो भी फीस मिलती थी, उसका बड़ा हिस्सा वे समाजसेवा से जुड़े कामों में खर्च करते थे। देश का प्रतिनिधित्व भी किया माथुर ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कानून विशेषज्ञों के रूप में देश का प्रतिनिधित्व भी किया है। उन्होंने इंदौर की कान्ह नदी पर एक झूला ब्रिज बनवाया। इसके अलावा आनंद मोहन माथुर सभागृह का निर्माण भी कराया। बाइपास पर उन्होंने बेशकीमती जमीन समाज से जुड़े कामों के लिए दे दी। समाजसेवा से जुड़े कई ट्रस्टों में वे ट्रस्टी की भूमिका में लंबे समय तक रहे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जताया दुख सीएम ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी श्री आनंद मोहन माथुर जी के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। आपका सम्पूर्ण जीवन सामाजिक आंदोलनों एवं जनसेवा के लिए समर्पित रहा। इंदौर शहर के लिए किए गए आपके उल्लेखनीय कार्य हम सभी के लिए प्रेरणादायक हैं। बाबा महाकाल से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में विश्रांति दें एवं शोकाकुल परिजनों को इस कठिन घड़ी में संबल प्रदान करें।’ उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भी हिस्सा लिया था और आपातकाल (Emergency) के दौरान जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, वे मालवा-निमाड़ सहित पूरे मध्य प्रदेश में आंदोलनकारियों के लिए कानूनी सलाहकार और मेंटर रहे। उनकी सामाजिक चेतना और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर वे हमेशा मुखर रहे, जैसे कि भोपाल एनकाउंटर (2016) और विकास दुबे एनकाउंटर (2020) जैसे मामलों में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से जांच की मांग की थी। गरीब के कारण डॉक्टर नहीं बन पाए : आनंद मोहन माथुर शुरुआत से कानून नहीं बल्कि मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते थे। उनका परिवार गरीब था। स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने के चलते पिता की नौकरी भी चली गई थी। इसके बाद पैसों की तंगी हुई और आनंद मोहन माथुर का डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया। पढ़ाई पूरी करने के लिए मजदूरी की : आनंद मोहन माथुर सामान्य व्यक्तित्व के व्यक्ति नहीं थे। उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी लेकिन उनके हौसले बुलंद थे। उन्होंने अपने संघर्ष के शुरुआती दिनों में इंदौर की मालवा मिल में बदली मजदूर के रूप में काम किया। इसके बाद मेहनत करके उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान उन्होंने कॉलेज में शिक्षक के रूप में भी सेवाएं दीं। बेटी को बनाया डॉक्टर : खुद डॉक्टर नहीं बन सके इसलिए अपनी बेटी को उन्होंने डॉक्टर बनाने का निर्णय लिया। मेहनत और लगन से उन्होंने अपनी बेटी को मेडिकल की पढाई करवाई। इस समय आनंद मोहन माथुर की बेटी डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहीं हैं। भोपाल गैस कांड का केस भी लड़ा : आनंद मोहन माथुर की कहानी का एक अहम हिस्सा भोपाल गैस कांड से जुड़ा है। जिस दिन उनकी बेटी की शादी थी उसी दिन भोपाल में गैस कांड हुआ। बेटी को विदा कर वे तुरंत भोपाल के लिए रवाना हो गए। उन्होंने भोपाल गैस कांड मामले से जुड़ी याचिका कोर्ट में दायर की। उनके द्वारा डाउ केमिकल फैक्ट्री से पीड़ितों के लिए मुआवजे की मांग को भी प्रमुखता से उठाया गया। समाजसेवा से जुड़े काम : आनंद मोहन माथुर जितने बड़े कानूनविद थे उतने ही बड़े समाजसेवी थे। अधिवक्ता के नाते मिली फीस का बड़ा हिस्सा वे दान कर देते थे। उन्होंने अपनी जमीन भी समाजसेवा से जुड़े कामों में दी। अपने खर्च पर कान्हा नदी पर ब्रिज बनवाया और आनंद मोहन माथुर सभागृह का निर्माण भी किया। संगीत प्रेम भी थे आनंद मोहन माथुर : कानून के जानकर होने के साथ – साथ आनंद मोहन माथुर संगीत प्रेमी भी थे। उन्होंने अपने इसी प्रेम के चलते 94 साल की उम्र में हारमोनियम बजाना सीखा।

10 फीट खाई में गिरा में शराब से भरा ट्रक

आजमगढ़ आजमगढ़ जिले के पवई थाना क्षेत्र के मधवापुर गांव के पास पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के 188 पॉइंट पर शनिवार की भोर में एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हरियाणा से बिहार जा रहा ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया और 10 फीट गहरी खाई में जा गिरा। ट्रक में भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब की बोतलें भरी हुई थीं, जो संदेह के आधार पर अवैध मानी जा रही हैं। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू कर दी। ये है पूरा मामला जानकारी के मुताबिक ट्रक में शराब की बोतलों को छिपाने के लिए चालाकी से मिट्टी से भरी बोरियां रखी गई थीं। ट्रक के आगे और पीछे मिट्टी की बोरियां थीं, जबकि बीच में शराब की बोतलें भरी हुई थीं। ऐसा प्रतीत होता है कि तस्करों ने जांच से बचने के लिए यह तरकीब अपनाई थी। हादसे में ट्रक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और शराब की बोतलें खाई में बिखर गईं। सूत्रों के मुताबिक, ट्रक हरियाणा से बिहार शराब की तस्करी के लिए जा रहा था। बिहार में शराब बंदी होने के कारण वहां अवैध शराब की मांग और तस्करी के मामले अक्सर सामने आते हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हादसे में चालक की स्थिति क्या है और ट्रक में कितनी मात्रा में शराब थी। स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर मामले की तफ्तीश में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि ट्रक के कागजात और शराब के स्रोत की जांच की जा रही है। पूरी जानकारी कुछ देर बाद उपलब्ध होने की उम्मीद है। यह घटना एक बार फिर अवैध शराब तस्करी के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रही है।  

स्‍मार्टफोन्‍स की दुनिया में मेड इन इंडिया धमक

नई दिल्ली कुछ साल पहले तक सब यही कहते थे कि भैया फोन तो चाइनीज है, चाइना से आता है और भारत में बिकता है। मोदी सरकार के दौर में चीजें बदल गईं। आज आप और हम चाहे जिस कंपनी का स्‍मार्टफोन खरीदें, वो कंपनी जिस देश से भी ताल्‍लुक रखती हो, बेच तो मेड इन इंडिया स्‍मार्टफोन ही रही है। ना सिर्फ बेच रही है बल्कि मेड इन इंडिया स्‍मार्टफोन का शिपमेंट दुनियाभर में बढ़ रहा है। काउंटरपॉइंट की ‘मेक इन इंडिया’ सर्विस रिपोर्ट के अनुसार भारत में बने स्मार्टफोन के शिपमेंट में 2024 में 6% की बढ़ोतरी हुई है। इसमें बड़ा योगदान दिया है सैमसंग और ऐपल ने। दोनों कंपनियों के भारत से बढ़ रहे निर्यात की वजह से खुश होने का यह मौका आया है। काम कर रही सरकार की पीएलआई स्‍कीम मेड इन इंडिया स्‍मार्टफोन्‍स को हकीकत बनाने में भारत सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना ने अहम भूमिका निभाई है। इस स्‍कीम की वजह से दुनियाभर की स्‍मार्टफोन्‍स कंपनियों और मैन्‍युफैक्‍चरिंग कंपनियों के लिए भारत में काम करना आसान हुआ है। काउंटरपॉइंट की रिपोर्ट बताती है कि 2023 के मुकाबले 2024 में सैमसंग का भारत से स्‍मार्टफोन शिपमेंट 7 फीसदी बढ़ा है। ऐपल स्‍मार्टफोन्‍स बनाने वाले फॉक्‍सकॉन के शिपमेंट में 17 फीसदी का उछाल आया है। चाइनीज प्‍लेयर वीवो का शिपमेंट 14 फीसदी बढ़ा है, लेकिन ओपो के शिपमेंट में गिरावट देखी गई है, वह भी पूरे 34 फीसदी की। DBG ने किया सबसे ज्‍यादा शिपमेंट मेड इन इंडिया स्‍मार्टफोन्‍स के शिपमेंट में DBG सबसे आगे है। डीबीजी देश के दो प्रमुख स्‍मार्टफोन्‍स प्‍लेयर शाओमी और रियलमी के लिए काम करती है। शाओमी और रियलमी भारत की प्रमुख स्‍मार्टफोन कंपनियों में शामिल हैं। इनके साथ काम करने का फायदा डीबीजी को हुआ है। टाटा इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स की ग्रोथ सबसे तेज साल 2024 में टाटा इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंपनी बनी है। इसकी शिपमेंट 107% बढ़ी है। याद रहे कि iPhone 15 और iPhone 16 मॉडल को टाटा इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स भी बना रही है। कंपनी अब सेमीकंडक्‍टर के काराेबार में उतर गई है। इसके लिए उसने गुजरात में प्‍लांट लगाया है और अब असम में भी एक प्‍लांट लगाने की तैयारी है। 2025 में और ज्‍यादा ग्रोथ की उम्‍मीद रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि साल 2025 में भारत में स्‍मार्टफोन्‍स का प्रोडक्‍शन डबल डिजिट में बढ़ सकता है। ऐपल और सैमसंग जैसी कंपनियों का भारत से निर्यात बढ़ने की वजह से मेड इंडिया स्‍मार्टफोन्‍स की शिपमेंट में भारत को और फायदा होने की उम्‍मीद है।

गड्ढे में पलटी तेज रफ़्तार बस , 15 यात्री घायल

राजसमंद राजसमंद जिले में जयपुर से अहमदाबाद जा रही एक ट्रेवल्स बस शनिवार रात करीब ढाई बजे बेकाबू होकर सड़क किनारे गड्ढे में पलट गई। बस में 40 लोग सवार थे, जिनमें से 15 यात्री घायल हो गए। हादसे के बाद पीछे आ रही दूसरी ट्रैवल्स बस के चालक और यात्रियों ने कांच तोड़कर घायलों को बाहर निकाला। चारभुजा और केलवा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को आरके जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। हादसे का विवरण चारभुजा थाना प्रभारी प्रीति रत्नू ने बताया कि बस गोमती चौराहे के पास फोरलेन सड़क किनारे पलट गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। पीछे से आ रही बस के चालक ने अपनी बस रोककर राहत कार्य शुरू किया। सूचना मिलते ही पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। घायलों की स्थिति 15 घायलों को आरके जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां एक युवक की हालत गंभीर बताई जा रही है। अन्य घायलों की स्थिति सामान्य है। चिकित्सक डॉ. राशिद मोहम्मद और नर्सिंग स्टाफ ने तत्काल उपचार शुरू किया। यात्रियों ने लगाया आरोप गुजरात निवासी मनीष भावसार ने बताया कि वह अपनी पत्नी ध्वनि के साथ खाटू श्यामजी के दर्शन कर लौट रहे थे। मनीष ने आरोप लगाया कि बस चालक ने शराब पी रखी थी और बस को लापरवाही से चला रहा था। यात्रियों ने कई बार उसे टोकने का प्रयास किया, लेकिन उसने किसी की बात नहीं मानी। हरियाणा के पवन यादव ने भी यही आरोप लगाया और कहा कि चालक की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। घायलों की सूची:     राजेंद्र यादव (32), रेनवाल, जयपुर     पवन यादव (40), कोथरकला, हरियाणा     मनीष भावसार (25), अहमदाबाद, गुजरात     ध्वनि भावसार (29), अहमदाबाद, गुजरात     शांति राठौड़ (35), कोथरकला, हरियाणा     तेजाराम गमेती (49), कुराबड़, उदयपुर     बनवारी गुर्जर (52), चिराणा, झुंझुनूं     हनुमान (50), कोटपुतली, राजस्थान     पवन राजपूत (34), महेंद्रगढ़, हरियाणा     कृष्ण सिंह (45), नीम का थाना, सीकर     केसर सिंह, कोटपुतली, राजस्थान     कमलेश कंवर (43), नीम का थाना, सीकर     सम्पत (25), पीलवा, नागौर     शिवराज (36), पीलवा, नागौर     शिवदास, किशनगढ़, अजमेर चालक और खलासी फरार हादसे के बाद चालक और खलासी मौके से फरार हो गए। यात्रियों के अनुसार, जयपुर से राजसमंद तक बस को लापरवाही से चलाया जा रहा था। पुलिस ने ट्रैवल्स बस संचालक को सूचित कर मामले की जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी प्रीति रत्नू ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और राहत कार्य में सहयोग किया गया। घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया है और हादसे की जांच जारी है।  

बढ़ई-प्लंबर को परमानेंट रेजिडेंसी क्यों दे रहा कनाडा

कनाडा कनाडा में परमानेंट रेजिडेंसी (PR) को लेकर नए-नए प्रतिबंधों का ऐलान किया गया। इस वजह से भारतीयों समेत विदेशी वर्कर्स के लिए उत्तर अमेरिका के इस देश में बसना मुश्किल हो चुका है। भारतीयों की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है, क्योंकि वे बड़ी संख्या में कनाडा में काम करने जाते हैं। हालांकि, हर समस्या का कोई न कोई समाधान होता है और PR की परेशानी का हल भी खुद कनाडा ही लेकर आया है। कनाडा के नए परमानेंट रेजिडेंसी प्रोग्राम का ऐलान किया है। कनाडाई सरकार की तरफ से जिस PR प्रोग्राम का ऐलान हुआ है, वह आसानी से भारतीय वर्कर्स को देश में बसने की इजाजत देगा। सबसे अच्छी बात ये है कि इस प्रोग्राम इसलिए लाया गया है, क्योंकि एक सेक्टर में वर्कर्स की कमी हो गई है। आमतौर पर कनाडा में सेक्टर वाइज PR प्रोग्राम तभी लाए जाते हैं, जब वर्कर्स की कमी हो। आइए इस परमानेंट रेजिडेंसी प्रोग्राम के बारे में जानते हैं और समझते हैं किस तरह से इससे भारतीय आवेदकों को फायदा होने वाला है। क्या है PR देने वाला कनाडा का नया प्रोग्राम? दरअसल, कनाडा की सरकार कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को परमानेंट रेजिडेंसी प्रोग्राम लेकर आई है। इस प्रोग्राम के जरिए स्किल कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को देश में बुलाकर घरों के संकट को दूर करने का प्लान है। सरकार इस प्रोग्राम के जरिए कनाडा में मौजूद लगभग 6000 अवैध रूप से रहने वाले कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को PR देगी, जबकि 14000 विदेशी वर्कर्स को परमानेंट रेजिडेंसी दी जाएगी। टेंपरेरी फॉरेन वर्कर्स (TFW) को बिना स्टडी परमिट अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम में दाखिला लेने की भी इजाजत दी जाएगी। अभी तक बहुत से विदेशी वर्कर कंस्ट्रक्शन, हेल्थकेयर जैसे सेक्टर्स में बिना स्टडी परमिट अप्रेंटिसशिप नहीं कर पाते थे। आसान भाषा में कहें तो इस प्रोग्राम से कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को सीधे कनाडा में PR मिलेगा, फिर वो देश में हों या फिर विदेश से काम करने आएं। बहुत से विदेशी छात्र कंस्ट्रक्शन सेक्टर में जॉब भी कर रहे हैं, जबकि उनका वर्क परमिट एक्सपायर हो चुका है या फिर होने वाला है। इन छात्रों के पास भी इस नए प्रोग्राम के जरिए कनाडा में PR पाने का ऑप्शन होगा। कनाडा को नया प्रोग्राम क्यों लाना पड़ा? कनाडा इस वक्त घरों की किल्लत से जूझ रहा है। लोगों के रहने के लिए पर्याप्त घर नहीं हैं। ऐसे में सरकार ने 2030 तक 10 लाख नए घर बनाने का टारगेट सेट किया है। हालांकि, कनाडा को स्किल लेबर की कमी से भी जूझना पड़ रहा है, खासतौर पर कंस्ट्रक्श सेक्टर में। ऐसे में सरकार के लिए घरों के टारगेट को पूरा करना मुमकिन नहीं है। यही वजह है कि अभी सरकार को डॉक्टर्स-इंजीनियर्स की नहीं, बल्कि बढ़ई-प्लंबर की जरूरत है। वर्तमान में कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में काम कर रहे 23% वर्कर्स विदेशी हैं। इनमें से बहुत से छात्र हैं, जबकि ऐसे लोगों की संख्या भी अधिक है, जो अवैध रूप से देश में हैं। इस नए PR देने वाले प्रोग्राम को लाने का मकसद ही लेबर शॉर्टेज को कम करना है और स्किल वर्कर्स को देश में लाना है। PR प्रोग्राम से विदेशी वर्कर्स वैलिड तरीके से देश में दाखिल हो पाएंगे। TFW को कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम करने की इजाजत देकर सरकार ने विदेशी वर्कर्स के लिए ट्रेनिंग और एक्सपीरियंस हासिल करने का रास्ता खोल दिया है। इस तरह वे ना सिर्फ कंस्ट्रक्शन सेक्टर में बेहतर ढंग से योगदान दे पाएंगे, बल्कि आसानी से परमानेंट रेजिडेंसी भी पा सकेंगे। भारतीयों को कैसे होगा फायदा? भारतीय छात्र जो पहले से ही कनाडा के कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम कर रहे हैं, उन्हें कुछ निश्चित मानदंडों को पूरा करना होगा। ऐसे करने पर वे नए प्रोग्राम के तहत परमानेंट रेजिडेंसी के लिए आवेदन के योग्य होंगे। भारतीय छात्र सिविल इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी, कंस्ट्रक्शन एस्टिमेशन, बढ़ईगीरी, ईंट बिछाने, प्लंबिंग, छत निर्माण, शीट मेटल जैसे काम कर रहे हैं। इन छात्रों के पास ऑप्शन होगा कि वे अब PR हासिल कर पाएं। कनाडा का फोकस मुख्यतौर पर स्किल वर्कर्स पर है, जिसका मतलब है कि अप्रेंटिसशिप के जरिए फॉर्मल ट्रेनिंग हासिल करने वाले छात्रों को एक्सप्रेस एंट्री सिस्टम, प्रोविंशियल नॉमिनी प्रोग्राम (PNP) या कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के लिए नए PR प्रोग्राम जैसे कार्यक्रमों के जरिए परमानेंट रेजिडेंसी के लिए आवेदन करते समय बढ़त मिलेगी। कनाडा में स्किल वर्कर्स की वैसे भी सबसे ज्यादा डिमांड है, खासतौर पर कंस्ट्रक्शन सेक्टर में।

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