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कार चलाते योगाचार्य को आया साइलैंट अटैक, हुई दर्दनाक मौत

अशोकनगर  वेटरनरी डॉक्टर और योग गुरु पवन सिंघल का हार्ट अटैक से निधन हो गया. हार्ट अटैक से पहले डॉ. पवन योगा क्लास लेने के लिए जा रहे थे और इससे पहले उन्होंने 2 घंटे की दौड़ लगाई थी. इससे पहले कि वे योगा क्लास लेने पहुंच पाते, रास्ते में पार्क के पास ही उनका निधन हो गया. कार में आया साइलेंट अटैक 54 वर्षीय डॉ. पवन सिंघल रोजाना की तरह रविवार सुबह योग क्लास के लिए जा रहे थे. क्लास के पहले 2 किलोमीटर दौड़ लगाने के बाद वे कार से तुलसी सरोवर पार्क के लिए निकले. रास्ते में पार्क के पास उन्हें साइलेंट हार्ट अटैक आ गया. जब लोग उनकी कार के पास पहुंचे तो देखा कि कार बंद थी और लाइट जल रही थी. काफी देर तक उनके बाहर नहीं निकलने पर योग स्टूडेंट्स ने कार का दरवाजा खोला. उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. दौड़ और सूर्य नमस्कार का रेकॉर्ड योगाचार्य डॉ. सिंघल के नाम 11 घंटे में 100 किमी दौड़, 8 घंटे में 3600 सूर्य नमस्कार और 17 बार रक्तदान का रेकॉर्ड है। वे रोज घंटों योग करते थे। उनकी ऑनलाइन कक्षा में मप्र, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और दिल्ली से सैकड़ों लोग जुड़ते थे। बेहद संतुलित खान-पान योगाचार्य डॉ. सिंघल का खान-पान बेहद संतुलित था। एक माह से नमक व शक्कर खाना पूरी तरह बंद कर दिया था। योगार्थियों ने बताया, नवरात्र में वे 10 दिन सिर्फ नींबू पानी पीते थे, एक बार तो फल व ड्राई फ्रूट का सेवन भी बंद कर दिया। वे सिर्फ पांच घंटे ही नींद लेते थे। सर्दियों में भी उन्होंने गर्म कपड़े नहीं पहने। डॉ. पवन सिंघल के नाम कई रिकॉर्ड दर्ज वेटरनरी डॉ. पवन सिंघल के नाम दौड़ और योगा में भी कई रिकॉर्ड दर्ज हैं. दरअसल, वे अपने प्रोफेशन के अलावा योग और दौड़ के लिए भी मशहूर थे. उन्होंने 11 घंटे में 100 किलोमीटर की दौड़ पूरी की थी. वहीं, 5100 बार सूर्य नमस्कार करने का भी रिकॉर्ड बनाया था. पतंजलि कायाकल्प योग क्लास के जरिए जिले के अलावा अन्य राज्यों के लोग भी ऑनलाइन उनसे जुड़ते थे. हाल ही में उन्होंने 116 यूनिट ब्लड डोनेट करने का रिकॉर्ड बनाया था. 24 मार्च 2015 से वे लगातार योग कर रहे थे. एक महीने पहले छोड़ा था नमक और शक्कर डॉक्टर और योगाचार्य डॉ. पवन सिंघल के स्टूडेंट्स ने बताया कि एक महीने पहले से उन्होंने नमक और शक्कर का सेवन बंद कर दिया था. यह बात उन्होंने योग क्लास में अपने सहयोगियों को भी बताई थी. सहयोगियों के मुताबिक, ” नवरात्रि में वे 10 दिन सिर्फ नींबू पानी पीते थे और रोजाना सिर्फ 5 घंटे सोते थे. पूरी सर्दियों में उन्होंने गर्म कपड़े नहीं पहने.”

इन आदतों को अपनाएंगे तो सफल होने से कोई नहीं रोक पाएगा

हर इंसान अपने करियर में सफल होना चाहता है। खुश रहना चाहता है और अपने सारे लक्ष्यों को पूरा करना चाहता है। लेकिन अपने लक्ष्यों को पाने का रास्ता कहां से शुरू होगा। इसके बारे में नहीं जानता। अगर आपको लाइफ में सक्सेज, हैप्पीनेस चाहिए। तो सबसे पहले इन 6 आदतों को अपनी डेली लाइफ का हिस्सा बनाएं। ये आपको आगे बढ़ने के लिए सही मार्गदर्शन करेंगे। खुद का आंकलन करें सबसे पहले अपना आंकलन करें। खुद के विचारों, भावनाओं और अनुभवों की मदद से सीखें और पर्सनल ग्रोथ करें। जब आप अपने एक्सपीरिएंस से सीखते हैं तो दिमाग में अपने लक्ष्यों के प्रति ज्यादा क्लियर हो जाते हैं। आपको अपनी कमियों और खूबियों के बारे में पता चलता है। इसके साथ ही आप उन कमियों को दूर करने की कोशिश में लग जाएं। किताबें पढ़ें किताबें पढ़ना अच्छी हैबिट के साथ ही पर्सनल ग्रोथ के लिए भी जरूरी है। सेल्फ हेल्प, मोटिवेशन, गाइडेंस से जुड़ी बुक्स पढ़ें या फिर कोई नॉवेल। डेली रूटीन में बुक्स पढ़ने से स्ट्रेस कम होता है बल्कि आपकी नॉलेज भी दिन पर दिन ज्यादा होती जाती है। बुक रीडिंग की आदत आपके पर्सनल ग्रोथ में मदद करती है। भगवान को धन्यवाद देना ना भूलें प्रैक्टिस ग्रैटीट्यूड मतलब जो कुछ भी आपके पास अभी है। उसके लिए भगवान को थैंक्स कहना ना भूलें। जब आप अपने आसपास की अच्छी चीजों पर फोकस करते हैं तो माइंड में पॉजिटिव वाइब्स बनती है और आप खुश रहते हैं। ऐसा करने से स्ट्रेस, डिप्रेशन जैसी समस्या भी खत्म होने लगती है। मेडिटेशन करें मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से ना केवल फिजिकल हेल्थ अच्छी होती है। बल्कि ये मेंटल हेल्थ पर भी असर डालती है। साथ ही आपकी मेमोरी और ब्रेन पावर बूस्ट होती है। जिससे आपकी समझने की क्षमता भी बढ़ती है। लक्ष्य तय करें और टाइम मैनेजमेंट इन सारी आदतों को अपनाने के बाद आप अपने लक्ष्यों को जब सेट करते हैं तो उन्हें पूरा करना आसान होता है। साथ ही अपने गोल्स को पूरा करने के लिए टाइम मैनेजमेंट करें। हॉबी जरूर पूरी करें अपने गोल्स को पूरा करने के बीच खुद के लिए टाइम निकालें और अपनी हॉबी को पूरा करें। इससे आपको खुशी मिलती है और आप रिलैक्स महसूस करते हैं।

सिवनी में मवेशी तस्करी से जुड़े मामले में कान्हीवाड़ा टीआई को किया लाइन अटैच

सिवनी  लापरवाही को लेकर मिली शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस अधीक्षक सुनील मेहता ने कान्हीवाड़ा थाना प्रभारी ओमेश्वर ठाकरे को लाइन अटैच किया है। बताया जा रहा है कि कथित कॉल रिकॉर्डिंग को लेकर शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। मामला मवेशी तस्करी से जुड़ा बताया जा रहा है। ठाकरे की जगह भोपाल क्राइम ब्रांच में रहे प्रीतम सिंह तिलगाम को पदस्थ किया गया है। ज्ञात हो कि इससे पहले जिले के बंडोल व कुरई थाना प्रभारी को भी लाइन अटैच किया गया था। कुरई से पुलिस लाइन बुलाए गए नगर निरीक्षक लक्ष्मण सिंह झारिया को घंसौर की कमान दी गई है। वहीं छपारा थाना का प्रभार खेमेंद्र जैतवार को दिया गया है। क्या है वायरल ऑडियो में? सबसे पहले तो हम आपको बता दें कि किसी तरह से इस वायरल ऑडियो क्लिप की पुष्टि नहीं करता है, लेकिन वायरल ऑडियो में भाजयुमो नेता मयूर दुबे और थाना प्रभारी ओमेश्वर ठाकरे के बीच जो कथित बातचीत हुई है, उसमें दुबे कथित रूप से कह रहे हैं कि “जितने अपने दुश्मन हैं ना जो हिंदुत्व की आड़ में गलत काम करते हैं उनको लपेटने के लिये सबको मिलकर एक कहानी बनाएं अपन उसमें अंडरग्राउंड रूप से आपकी सहायता लगेगी… बताओ ना… कुछ नहीं है… जो गौ तस्कर रहते हैं बाहर प्रदेशों के वो चाहिये अपने को… ठीक है ना… पैसे देंगे, अपन सब खर्चा करेंगे उनको 4-5 नंबरों पर पैसे डालना है और व्हाट्सऐप मैसेज करना है… तुम्हारे पर्सनल नंबर पर डाल रहा हूं… अब कहीं गाड़ी रूकना नहीं चाहिये… हां… हां… ये एडवांस है बाकी पैसा कैश देंगे… बाद में इन लोगों को घसीटकर पीटेंगे, जिन्होंने आपके खिलाफ शिकायत की या मेरे खिलाफ सिंडिकेट बनाया.” दूसरी क्लिप भी वायरल एक और ऑडियो में थाना प्रभारी कथित तौर पर कथित भाजयुमो नेता से यह कहते सुने गए हैं कि उन्होंने विश्व हिंदू परिषद (VHP) और सहयोगी संगठनों के शीर्ष नेताओं को सिवनी के कुछ लोगों, खासकर माधव दुबे और दीपक यादव, की कथित गलत गतिविधियों की जानकारी दी है. हम एक बार फिर यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि इस ऑडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता, लेकिन यदि क्लिप सही साबित होती है तो यह मामला कई अहम सवाल खड़े करता है. भाजयुमो और हिंदू संगठनों (विशेषकर गौ रक्षक ब्रिगेड) के बीच आंतरिक टकराव, अंतरराज्यीय गौ तस्करों और कुछ पुलिसकर्मियों के बीच कथित गठजोड़, इसके अलावा कुछ पुलिस अधिकारियों की RSS और VHP के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच. ये ऐसे सवाल हैं जो इस मामले की वजह से उठ सकते हैं. सिवनी क्यों है अहम? महाराष्ट्र सीमा से लगे सिवनी जिले को मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों से महाराष्ट्र और हैदराबाद के लिए हो रही गौ तस्करी का प्रमुख मार्ग माना जाता है.     MP पुलिस मुख्यालय द्वारा जून 2024 में जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून 2024 के बीच राज्यभर में गौ तस्करी और अवैध वध के 500 से ज्यादा मामले दर्ज हुए, जिनमें सबसे ज्यादा 55 केस सिवनी में दर्ज हुए.     यहां 99 लोगों की गिरफ्तारी, 1301 पशुओं की बरामदगी और 38 वाहनों की जब्ती हुई.     राज्य पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक, लगभग 70% मामलों में पशुओं को यूपी और राजस्थान से नागपुर और हैदराबाद ले जाया जाता है, जिसमें सिवनी जैसे जिले ट्रांजिट पॉइंट होते हैं. केवल 30% मामलों में स्थानीय तस्कर शामिल होते हैं. पहले भी हो चुकी है सिवनी में हिंसा और प्रशासनिक कार्रवाई मई 2022 में सिवनी के कुरई क्षेत्र में गौ मांस मिलने पर दो गोंड आदिवासियों की कथित तौर पर गौ रक्षकों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. जून 2024 में, सिवनी के धनोरा और काकरतला के जंगलों में 54 गौवंशों के शव मिले थे, जिनके सिर और अंग काटे गए थे. इस घटना ने जिले में भारी तनाव फैला दिया था और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों के बाद कलेक्टर और एसपी को हटाया गया था. जानिए SP ने क्या कहा? अब वायरल ऑडियो से एक बार फिर सिवनी सुर्खियों में है. पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि क्लिप की जांच के आदेश दिए गए हैं और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए थाना प्रभारी को लाइन अटैच किया गया है। सवाल यह है कि क्या सिवनी में पुलिस और तस्करों का गठजोड़ हिंदुत्व की राजनीति करने वालों को निशाना बना रहा है या यह सिर्फ सत्ता संघर्ष की एक और कड़ी है? जवाब जांच के बाद सामने आएगा.  

शासकीय आवासीय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा 30 मार्च को

भोपाल प्रदेश में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, कन्या शिक्षा परिसर और आदर्श आवासीय विद्यालय की कक्षा 6वीं की प्रवेश परीक्षा 30 मार्च 2025 को होगी। प्रवेश परीक्षा में सम्मिलित होने वाले विद्यार्थियों के प्रवेश पत्र स्कूल शिक्षा विभाग के राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड की वेबसाइट www.mpsos.nic.in पर अपलोड कर दिये गये हैं। परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थी प्रवेश पत्र डाउनलोड कर परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।  

केंद्र सरकार ने सांसदों के वेतन और पेंशन में की बढ़ोतरी, अधिसूचना जारी

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सांसदों के वेतन में 24 प्रतिशत की वृद्धि को अधिसूचित कर दिया है। यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी होगी और इसे मूल्य वृद्धि सूचकांक के आधार पर तय किया गया है। संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, न केवल सांसदों के वेतन में वृद्धि की गई है, बल्कि बैठकों में भाग लेने पर मिलने वाले दैनिक भत्ते, पूर्व सांसदों की पेंशन, और अतिरिक्त सेवा वर्षों के लिए दी जाने वाली पेंशन में भी बढ़ोतरी की गई है। नए वेतन और भत्ते इस प्रकार हैं: सांसदों का मासिक वेतन पहले: 1,00,000 रुपए प्रति माह अब: 1,24,000 रुपए प्रति माह दैनिक भत्ता (संसद सत्र के दौरान बैठकों में भाग लेने पर) पहले: 2,000 रुपए प्रति दिन अब: 2,500 रुपए प्रति दिन पूर्व सांसदों की मासिक पेंशन पहले: 25,000 रुपए प्रति माह अब:  31,000 रुपए प्रति माह अतिरिक्त पेंशन (पांच वर्ष की सेवा से अधिक के प्रत्येक वर्ष के लिए) पहले:  2,000 रुपए प्रति माह अब:  2,500 रुपए प्रति माह सरकार ने यह बढ़ोतरी सांसद वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम के तहत आयकर अधिनियम, 1961 में निर्दिष्ट मूल्य वृद्धि सूचकांक के आधार पर अधिसूचित की है।

राणा सांगा विवादित बयान के विरोध में कलेक्ट्रेट में सपा सांसद के खिलाफ किया प्रदर्शन

जोधपुर राणा सांगा को लेकर सपा सांसद द्वारा दिए गए बयान के विरोध में जोधपुर में आज सर्व समाज ने जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “महाराणा प्रताप का अपमान नहीं सहेगा राजस्थान” जैसे नारों से कलेक्ट्रेट परिसर को गूंजायमान कर दिया। सपा सांसद के बयान को लेकर जोधपुर में व्यापक विरोध देखने को मिला। राजपूत समाज सहित सर्व समाज के लोगों ने इस बयान की कड़ी निंदा की और जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर अपना आक्रोश जाहिर किया। प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सपा सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हनुमान सिंह खांगटा ने जताया आक्रोश मारवाड़ राजपूत सभा भवन के अध्यक्ष हनुमान सिंह खांगटा ने कहा, “हमने उपराष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा है। सपा सांसद द्वारा अमर्यादित भाषा का उपयोग किया गया है, जिससे जनता में भारी आक्रोश है। ऐसे महान योद्धा राणा सांगा, जिनके शरीर पर 80 घाव होने के बावजूद वे देश की रक्षा के लिए खड़े रहे, उनके खिलाफ इस तरह की भाषा का प्रयोग करना निंदनीय है।” उन्होंने आगे कहा, “यदि ऐसे वीर योद्धा नहीं होते, तो बयान देने वाले लाल टोपीधारी आज हरी टोपी पहनने को मजबूर होते। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनीतिक लाभ और तुष्टिकरण की राजनीति के लिए ऐसे बयान दिए जा रहे हैं। इस बयान ने राजस्थान ही नहीं, पूरे भारत की भावनाओं को आहत किया है।” सख्त कार्रवाई की मांग हनुमान सिंह खांगटा ने सरकार से मांग की कि सपा सांसद के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा, “जब तक सांसद माफी नहीं मांगते, तब तक यह आंदोलन राजस्थान ही नहीं, पूरे हिंदुस्तान में जारी रहेगा। 36 कौम और साधु-संतों के साथ मिलकर इस विरोध को आगे बढ़ाया जाएगा।”

एमएस धोनी स्टंपिंग देख मंत्रमुग्ध हुए मैथ्यू हेडन

चेपॉक महेंद्र सिंह धोनी ने 43 साल की उम्र होने के बावजूद रविवार को चेपॉक में खेले गए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मैच में जिस तरह की फुर्ती दिखाकर मुंबई इंडियंस के कप्तान सूर्यकुमार यादव को स्टंप आउट किया उसे देखकर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज मैथ्यू हेडन मंत्रमुग्ध हो गए। स्टार स्पोर्ट्स के अनुसार धोनी ने स्टंपिंग को महज 0.12 सेकेंड में अंजाम दिया। धोनी अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं। उन्होंने पांच साल पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था, लेकिन चेन्नई सुपर किंग्स को पांच आईपीएल खिताब दिलाने के बाद वह अपनी इस टीम की तरफ से केवल एक खिलाड़ी के रूप में खेल रहे हैं।   धोनी ने रविवार को एक बार फिर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया जब उन्होंने नूर अहमद की गेंद पर तुरंत गिल्लियांं उड़ा दी और सूर्यकुमार को वापस पवेलियन भेज दिया। हेडन ने ईएसपीएनक्रिकइन्फो के टी20 टाइम आउट पर कहा, ‘धोनी बहुत आक्रामक विकेटकीपिंग कर रहे थे। उन्होंने गजब की फुर्ती दिखाई। मेरे कहने का मतलब है कि नूर अहमद लेग साइड में गेंदबाजी कर रहे थे और ऐसे में स्टंपिंग करना बहुत मुश्किल होता है।’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि, सूर्यकुमार के खिलाफ तब उनकी स्टंपिंग बहुत शानदार थी। इतनी तेज टाइमिंग, हाथों से दिखाया गया शानदार कला। उन्होंने गेंद पर नजर बनाए रखा। वह अब भी पहले की तरह ही खेल रहे हैं।’ वहीं, नूर अहमद ने भी धोनी की तारीफ की। सीएसके के इस चाइनामैन स्पिनर ने कहा, ‘उनकी स्टंपिंग सबसे अच्छी थी। स्टंप के पीछे माही भाई जैसे किसी व्यक्ति का होना बहुत अच्छा लगता है। यह मेरे लिए बहुत बड़ा फायदा है। सूर्यकुमार का विकेट मेरा पसंदीदा विकेट था।’ 300 से ज्यादा दिनों के बाद माही ने मैदान पर वापसी की। आईपीएल 2024 के बाद वह पहली बार कोई प्रतिस्पर्धी मैच खेलते दिखे। हालांकि, धोनी मैच में दो गेंदों पर कोई रन नहीं बना सके, लेकिन वह नाबाद पवेलियन लौटे। धोनी को सीएसके ने अनकैप्ड प्लेयर के तौर पर टीम में शामिल किया है। माही के लिए आईपीएल कमिटी ने नियमों में बदलाव किया था।  

भारतीय चिप लाने पर चल रहा काम, चीन की होगी छूटी

नई दिल्ली स्मार्टफोन मार्केट की बात होती है भारत का जिक्र जरूर होता है। क्योंकि भारत एक बड़ी स्मार्टफोन मार्केट है और हर कंपनी इसमें एंट्री करना चाहती है। बढ़ती डिमांड और यूजर्स को ध्यान में रखते हुए सरकार की तरफ से एक नई शुरुआत की गई है। इसमें मोबाइल चिप पर काम किया जा रहा है। अभी तक इस मार्केट चीन और अमेरिका का दबदबा है। इसके अलावा साउथ कोरियन कंपनी सैमसंग के स्मार्टफोन भी डिमांड में रहते हैं। इन सबके बावजूद भारतीय कंपनियों के स्मार्टफोन की डिमांड नहीं रहती है। अब सरकार एक ऐसा प्लान बना रही है, जिसके तहत भारतीय मोबाइल चिप लाई जा सकती है। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स (MeitY) और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (DoT) की तरफ से काम किया जा रहा है। खास बात है कि अब दोनों ही डिपार्टमेंट इस पर साथ आ गए हैं। दोनों की तरफ से मोबाइल चिप पर काम किया जा रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत इस काम को पूरा किया जा रहा है। एक वरिष्ठ मिनिस्ट्री ऑफिशियल ने ET को इसकी जानकारी दी है। भारतीय चिप की मदद से स्मार्टफोन मार्केट को बूस्ट मिल सकता है। साथ ही इससे स्मार्टफोन की डिमांड में भारतीय चिप का इस्तेमाल किया जा सकता है। भारतीय चिप पर क्या बोले सेक्रेटरी कृष्णन मिनिस्ट्री ऑफ इलेट्रॉनिक्स और IT के सचिव एस कृष्णन ने कांग्रेस में कहा, ‘जब हम भारत में विकसित किए जा रहे मोबाइल फोन ऑपरेटिंग सिस्टम की बात कर रहे हैं, तो मोबाइल फोन के चिपसेट की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। इस दिशा में हम डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, (इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय) इसे “इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन” और “डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम” के तहत समर्थन दे रहा है।’ बजट में भी था सेमीकंडक्टर पर फोकस भारत ने इस बार के बजट में सेमीकंडक्टर पर फोकस किया है। यही वजह है कि बजट में 83 फीसद का इजाफा किया गया है। इस तरह सेमीकंडक्टर का बजट करीब 7,000 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि मोबाइल फोन के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इनीशिएटिव यानी पीएलआई स्कीम का बजट 55 फीसद बढ़कर 9,000 करोड़ रुपये हो गया है। इसके साथ ही ये साफ हो गया है कि सरकार की तरफ से भी इस पर फोकस किया जा रहा है। वहीं, चीन का सेमीकंडक्टर बजट करीब 47 बिलियन डॉलर यानी करीब 4 लाख करोड़ रुपये है, जो कि भारत के मुकाबले में काफी ज्यादा है। AI सपोर्ट वाली सेमीकंडक्टर चिप AI के लिए भी सेमीकंडक्टर चिप महत्वपूर्ण साबित होने वाली है। इसकी मदद से AI एप्लीकेशन को भी बढ़ावा मिल सकता है। कृष्णन की तरफ से इस पर भी फोकस किया जाता है। वह कहते हैं, ‘इनमें से कई AI एप्लिकेशन टेलीकॉम से जुड़ी बुनियादी संरचना का उपयोग करेंगे, डेटा को एक साथ लाएंगे, और यह एक सहज प्रक्रिया होगी जो सभी चीजों को जोड़कर रखेगी।’ यानी भारत सरकार की स्कीम को भी इससे लाभ मिलने वाला है। भारत में नौकरियों पर पड़ेगा असर ? भारत में AI की वजह से नौकरियों पर भी असर पड़ेगा ? ये सवाल हर किसी के मन में है। कृष्णन ने इसके जवाब सीधा नहीं कहा है। उन्होंने कहा कि भारत में AI की वजह से नौकरियों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। क्योंकि यहां व्हाइट कॉलर जॉब बहुत कम हैं। हमारे यहां ऑफिस जॉब्स कम देखने को मिलती है। अभी AI ऐसे काम पर असर डाल सकता है जो रोजाना एक जैसा होता है। लेकिन भारतीय बाजार पर फिलहाल इसका असर कम देखने को मिल सकता है।’

प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता से 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका

टीबी मुक्त भारत के लिए मध्यप्रदेश प्रतिबद्ध : उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निक्षय भारत अभियान में मध्यप्रदेश के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों की सराहना की  प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता से 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें क्षयरोग मुक्त घोषित भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निक्षय भारत अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं की सराहना की है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल शासकीय प्रयासों से ही संभव नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी से ही इसे साकार किया जा सकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि इस अभियान में सहयोग दें और टीबी मुक्त मध्यप्रदेश बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विश्व टीबी दिवस पर स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की प्रतिबद्धता और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि सबकी मेहनत और सेवा भाव से ही मध्यप्रदेश क्षयरोग उन्मूलन की दिशा में इतनी तेज गति से आगे बढ़ा है। निक्षय मित्रों ने अपने स्तर पर आर्थिक और पोषण सहायता प्रदान कर मरीजों को नया जीवन दिया है, जो एक अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से हम टीबी मुक्त भारत का सपना साकार करेंगे। मध्यप्रदेश में 100 दिवसीय विशेष निक्षय शिविर अभियान के तहत 7 दिसंबर 2024 से 23 जिलों में गहन टीबी खोज और उपचार अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य उच्च टीबी बोझ वाले जिलों में टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान, मृत्यु दर में कमी और नए मामलों को रोकना है। इस अभियान के तहत 78 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 21 हजार 430 नए टीबी मरीज चिन्हित (नोटिफाई) किए गए और उनका तुरंत उपचार शुरू कराया गया। डीबीटी के माध्यम से आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। इस दौरान 19 हजार से अधिक निक्षय मित्रों ने 25 हजार से अधिक टीबी मरीजों को पोषण सहायता प्रदान की और 4 लाख से अधिक नागरिकों ने टीबी मुक्त भारत के संकल्प की शपथ ली। प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता के अंतर्गत 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका है। मध्यप्रदेश ने क्षयरोग (टीबी) उन्मूलन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त किया है। वर्ष 2020 में संभावित क्षयरोगी दर 532 प्रति लाख थी, जो 2024 में बढ़कर 3031 प्रति लाख हो गई, जो रोगियों की शीघ्र पहचान और बेहतर निगरानी का प्रमाण है। वर्ष 2024 में 1 लाख 90 हजार क्षय रोगियों को खोजने के लक्ष्य के विरुद्ध 1 लाख 81 हजार 85 (95%) रोगियों की पहचान की गई। प्रदेश में टीबी उपचार की सफलता दर 87% है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है। गत 1 नवंबर 2024 से सभी अधिसूचित टीबी मरीजों को उपचार के दौरान एक हजार रूपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जो पहले 500 रूपये प्रतिमाह थी। इसके अलावा, अधिसूचित जनजातीय क्षेत्रों में सभी खोजे गए टीबी रोगियों को 750 रूपये की एकमुश्त राशि भी प्रदान की जा रही है। प्रदेश की सभी जेलों में भी समय-समय पर आईसीएमआर की हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों के माध्यम से टीबी स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। बलगम के नमूने लेकर उन्हें सीबीनेट और टूनेट मशीनों द्वारा जांच की जाती है, जिससे जेलों में क्षयरोग के मामलों की शीघ्र पहचान हो रही है।  

उदयपुर की ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण और पर्यावरण बचाने गुलाबबाग में बावड़ी की बदली तस्वीर

उदयपुर शहर में सिविक सेंस, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान का आयोजन किया गया। गुलाबबाग में बर्ड पार्क के सामने स्थित बावड़ी, जो लंबे समय से उपेक्षा का शिकार थी, को स्वच्छ बनाने के लिए युवाओं ने श्रमदान किया। यह अभियान लगभग 4 घंटे तक चला, जिसमें दर्जनों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सार संवाद द्वारा शुरू की गई इस मुहिम में स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्रमदान के दौरान एक ट्रैक्टर कचरे का ढेर बाहर निकाला गया और बावड़ी को पूरी तरह साफ किया गया। इस नेक पहल में यूआईटी के पूर्व चेयरमैन रविंद्र श्रीमाली सहित कई शहरप्रेमी भी शामिल हुए और युवाओं का उत्साहवर्धन किया। सार संवाद का प्रयास सार संवाद ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस अभियान की शुरुआत की थी। संयोजक अविचल दूबे ने बताया कि इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य उदयपुर की ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण और पर्यावरण बचाने के लिए लोगों की सहभागिता को प्रोत्साहित करना है। भविष्य में शहर के अन्य इलाकों की बावड़ियों को भी इसी तरह साफ-सुथरा करने का संकल्प लिया गया है। बावड़ियों का महत्व पर्यावरणीय दृष्टि से बावड़ियाँ जल संरक्षण का एक उत्कृष्ट माध्यम हैं। खासकर गर्मियों में पानी की कमी को पूरा करने में ये एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकती हैं। इसके अलावा, भारतीय वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण होने के कारण ये ऐतिहासिक बावड़ियाँ हमारी सांस्कृतिक धरोहर भी हैं। उनकी कलात्मक संरचनाएँ और सुंदर आकृतियाँ अद्वितीय हैं। ऐसे में इनका संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है। सार संवाद: एक संवाद मंच सार संवाद एक ऐसा मंच है, जो स्थानीय नागरिकों को एकजुट कर शहर की समस्याओं पर चर्चा और समाधान निकालने के लिए प्रेरित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य सामूहिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना और जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाना है। सार संवाद की सोच है कि जब लोग खुलकर संवाद करेंगे, तो समस्याओं का समाधान भी निकल सकेगा। शहीद दिवस पर इस अभूतपूर्व अभियान ने शहरवासियों को न केवल जागरूक किया, बल्कि पर्यावरण और धरोहर संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संदेश भी दिया।  

कूनो नेशनल पार्क में बाड़े से खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता और उसके 4 शावक बीती शाम को पार्क की सीमा से बाहर निकल गए

श्योपुर  कूनो नेशनल पार्क में एक माह पहले बाड़े से निकालकर खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता और उसके 4 शावक बीती शनिवार की शाम को पार्क की सीमा से बाहर निकल गए. हालांकि रविवार शाम को फिर से पांचों ने कूनो के जंगल की ओर रुख कर लिया. लेकिन ज्वाला और चारों शावक बीती रात श्यामपुर के पास देखे गए. वहीं, सुबह वीरपुर के नजदीक कूनो नदी में नजर आए. इस दौरान रात और सुबह के वक्त चहलकदमी करते नजर आई चीता फैमली के वीडियो बनाकर लोगों ने सोशल मीडिया पर वायरल भी किए. बीती आधी रात को मादा चीता ज्वाला और उसके ये शावक वीरपुर तहसील के ग्राम श्यामपुर से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर निर्माणधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज ट्रैक से गुजरते नजर आए. इस दौरान यहां से निकल रहे ट्रक चालकों ने इनके वीडियो भी बनाए. वहीं, सुबह ये पांचों चीते निकलकर कूनो सायफन के निकट से निकलते हुए कूनो नदी में दिखे. कूनो नदी में ज्वाला और चारों शावक निर्माणधीन रेलवे पुल के नीचे काफी देर तक बैठे रहे. यही वजह है कि कूनो सायफन से गुजरने वाले राहगीरों की चीतों को देखने के लिए भीड़ भी लग गई. बताया गया है कि इसके बाद ये पांचों कूनो पार्क के जंगल की ओर बढ़ गए. कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ आर थिरुकुराल ने आजतक को फोन कॉल पर बताया कि हम चीतों की लोकेशन शेयर नहीं कर सकते हैं. चीते जहां भी हैं, हमारी ट्रैकिंग टीमें उन पर निगरानी बनाए हुए हैं. सभी चीता पूरी तरह फिट हैं और स्वछंद विचरण कर रहे हैं. बता दें कि मादा चीता ज्वाला और उसके 4 शावकों को गत 21 फरवरी को खुले जंगल में खजूरी क्षेत्र में छोड़ा गया था. हालांकि, बीते एक माह से ये कूनो पार्क की सीमा में ही थे, लेकिन अब ये पहली बार पार्क की सीमा से बाहर निकले हैं. वहीं, चीतों के बाहर निकलने पर क्षेत्र के चीता मित्र रवि रावत श्यामपुर और उनकी टीम ने आसपास के लोगों केा जागरूक किया और कहा कि चीतों की सुरक्षा हम सबकी जिमेदारी है. चीता लोगों पर हमला नहीं करता है, लिहाजा इसे भगाएं नहीं और सुरक्षा करें. पता हो कि कूनो नेशनल पार्क में कुल 17 चीते खुले जंगल में आजाद घूम रहे हैं. इनमें 11 शावक शामिल हैं. जबकि पार्क के बाड़े में अभी 9 चीते बंद हैं.

फिल्म फेस्टिवल में उज्जैन का फिर लहराया परचम, कालभैरव डॉक्यूमेंट्री को श्रेष्ठ आध्यात्मिक राष्ट्रीय पुरस्कार

उज्जैन उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में लगातार तीसरी बार उज्जैन ने अपना परचम लहराया। मंथन इंडिया फिल्म्स की ओर से बनाई गई काल भैरव फिल्म को 45 अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में से चुनकर श्रेष्ठ आध्यात्मिक राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। फिल्म के निर्देशक दीपक कोडापे ने बताया कि उत्तर प्रदेश टूरिज्म द्वारा गोरखपुर में धर्म एवं अध्यात्म पर आधारित अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह का आयोजन किया गया। इस फिल्म महोत्सव में 110 देशों से 300 से ज्यादा फिल्में आई थीं। जिनमें से 45 फिल्मों को स्क्रीनिंग के लिए चयनित किया गया था। इन फिल्मों में से काल भैरव डॉक्यूमेंट्री फिल्म को श्रेष्ठ आध्यात्मिक फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार 2025 प्राप्त हुआ। काल भैरव डॉक्यूमेंट्री फिल्म का निर्देशन दीपक कोडापे ने किया है। सिनेमैटोग्राफर के रूप में देवांश भट्ट, शुभम मरमट, मयंक सोलंकी, अजय पटवा और संपादन का कार्य मंथन स्टूडियो में किया गया है। लेखन आनंद निगम, पार्श्व संगीत कुमार शिवम, ग्राफिक डिजाइन ऋतिक तिवारी द्वारा किया गया। फिल्म का शोध कार्य उज्जैन लाइव फेसबुक पेज प्रमुख एवं लेखक नितिन शर्मा द्वारा किया गया। ये रहे मौजूद कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर प्रसिद्ध फिल्म लेखक और डायरेक्टर अनुराग कश्यप, बहुचर्चित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री, प्रसिद्ध अभिनेता और वॉइसओवर आर्टिस्ट राजेश खट्टर, डाइरेक्टर पुंडलिक धूमल, कास्टिंग डायरेक्टर और प्रोड्यूसर पराग मेहता, अभिनेत्री स्मृति मिश्रा, निदेशक अरुण शंकर, प्रसिद्ध सिनेमैटोग्राफर और डायरेक्टर धरम गुलाटी, फिल्म निर्देशक केतकी कपाड़िया एवं उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अधिकारी गण मौजूद थे। यह है फ़िल्म में उज्जैन की काल भैरव डॉक्यूमेंट्री में काल भैरव मंदिर से जुड़े आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, पौराणिक और पुरातात्विक विषय पर फिल्मांकन किया गया है। ये तीसरी बार लगातार मंथन इंडिया फिल्म एवं दीपक कोडापे ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर उज्जैन को गौरवांवित किया है। फिल्म अमृत मंथन को भी अंतरराष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार प्राप्त हो चुका है।  

मां मंदाकिनी से ज्यादा खूबसूरती उनकी बेटी राबजे, बॉलीवुड में जल्द कर सकती है डेब्यू?

मुंबई राम तेरी गंगा मैली’ में मंदाकिनी के अभिनय को कोई नहीं भुला सकता है। मंदाकिनी बॉलीवुड की बेहद खूबसूरत एक्ट्रेस रही हैं। मंदाकिनी ने राज कपूर की फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ से खूब लोकप्रियता बटोरी थीं। फिल्म में पहाड़ी लड़की का किरदार निभाकर उन्होंने अपनी खूबसूरती के लिए खूब चर्चाएं बटोरी थीं। अब एक्ट्रेस की बेटी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जो खूबसूरती के मामले में मां से बिल्कुल दोगुना आगे हैं। बेटी को मिली मां की खूबसूरती और मासूमियत मंदाकिनी का नाम उन एक्ट्रेस की लिस्ट में शामिल हैं जिन्होंने अपने करियर की पीक पर शादी रचाई थी। अभिनेत्री ने साल 1990 में बिजनेसमैन कायगूर टी रिनपोचे ठाकुर से शादी की थी। इस शादी से एक्ट्रेस को दो बच्चे हैं, एक बेटा रब्बील ठाकुर और बेटी राबजे इनाया ठाकुर है। बेटे रब्बील जहां देखने में हैंडसम है तो वहीं बेटी राबजे को अपनी मां की खूबसूरती और मासूमियत मिली है। एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर भी खासी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपने परिवार के साथ तस्वीरें शेयर करती हैं, जिनमें मंदाकिनी पति कायगूर और बच्चों के अलावा बहू बुशरा के साथ दिखती हैं। बेटी की सादगी देख हो जाएंगे दीवाने मंदाकिनी की बेटी अब बड़ी हो गई हैं और लुक में वह अपनी मम्मी पर गई हैं। राबजे की फोटो देख कर आप भी एक पल के लिए ठहर जाएंगे। वो बिलकुल अपनी मां की जैसी दिखती हैं। राबजे फिलहाल पढ़ाई कर रही हैं और अक्सर अपनी मम्मी, भाभी बुशरा और भाई राबिल के साथ फोटो में नजर आती हैं। मंदाकिनी की बहु की बात करें तो वो भी फिल्मी दुनिया से जुड़ी हुई हैं। वह बतौर प्रोड्यूसर इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। एनडीटीवी की एक खबर के मुताबिक, वो नेटफ्लिक्स के लिए कंटेंट प्रोड्यूस करती हैं। मंदाकिनी के बारे में… एक्ट्रेस की बात करें तो वो मेरठ में बड़ी हुईं। साल 1985 में उन्होंने फिल्म ‘मेरा साथी’ से बॉलीवुड में एक्टिंग डेब्यू किया, लेकिन उन्हें स्टारडम राज कपूर की फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ से मिला। इस फिल्म से लॉन्च करने के साथ-साथ राज कपूर ने उन्हें मंदाकिनी नाम भी दे दिया था। क्या आपको पता है कि फिल्मों में आने से पहले तक उनका असली नाम यास्मिन जोसेफ था। कहा जाता है कि उन पर डॉन दाऊद इब्राहिम का भी दिल आ गया था।

बरेली में सिलिंडर फटने से उड़ा गैस एजेंसी गोदाम

बरेली बरेली से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र में रजऊ परसपुर स्थित महालक्ष्मी गैस एजेंसी में सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे सिलिंडर फटने से आग लग गई। आग ने पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया। सिलिंडर फटने से लगातार कई धमाके हुए, जिससे पूरा इलाका दहल गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड के साथ पुलिस मौके पर पहुंच गई। आग बुझाने के प्रयास शुरू किए। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक सारे सिलिंडर फट गए। गनीमत रही कि कोई हताहात नहीं हुआ है। घटना इतनी विकराल थी कि धमाकों के साथ फटे सिलिंडरों के टुकड़े 500 मीटर तक जाकर खेतों में गिरे, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। ट्रक के केबिन में लगी थी आग प्राप्त जानकारी के मुताबिक सोमवार को सिलिंडरों से भरा ट्रक गोदाम पर खड़ा था। ट्रक के केबिन में किसी तरह आग लग गई, जिससे पहले उसमें रखा एक सिलिंडर फटा। फिर ट्रक और गैस एजेंसी गोदाम में आग लग गई। सिलिंडर फटने से काफी देर तक धमाके होते रहे। घटना से गांव रजऊ परसपुर में दहशत फैल गई। ग्रामीण अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। गांव से बाहर आकर देखा तो पता चला कि गैस गोदाम में धमाके हो रहे हैं। ग्रामीणों ने मोबाइल से घटना के वीडियो बना लिए। जिस गैस एजेंसी गोदाम में आग लगी है, वह सोमवार को बंद रहती है। गोदाम पर चौकीदार और ट्रक चालक ही थे। दोनों ने भागकर अपनी जान बचाई। वहीं गोदाम आबादी से काफी दूर बना है, जिससे जनहानि होने से बच गई। सूचना मिलते ही शहर से अधिकारी मौके पर रवाना हो गए। पुलिस जांच कर रही है।  

पहली बार बिना विग के इवेंट में पहुंची हिना खान

मुंबई हिना खान एक इवेंट में पहुंचीं। वो कैंसर से जूझ रही हैं। उन्होंने इस बीमारी के ट्रीटमेंट की शुरुआत में खुद ही अपने बालों को मुंडवा लिया था और अपने ही बालों से विग बनवाए थे। अभी तक वो हर जगह विग पहने ही नजर आ रही थीं। लेकिन अब पहली बार वो बिना विग के एक इवेंट में पहुंची हैं। उनका वीडियो वायरल हो रहा है। हेल्थ में ये सुधार देखकर फैंस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हर कोई उनपर प्यार बरसा रहा है। हिना खान ने साल 2024 में सोशल मीडिया पर ऐलान किया था कि वो ब्रेस्ट कैंसर के तीसरे स्टेज पर हैं। इसके बाद उनका इलाज शुरू हुआ। कीमोथेरेपी के दौरान जब उनकी हालत खराब हो जाती थी, तब वो इंस्टाग्राम के जरिए अपने फैंस से अपना दर्द बयां करती थीं। इस पूरी जर्नी के दौरान फैंस हमेशा उनकी हिम्मत की दाद देते दिखे हैं। हिना ने कहा- अभी इतने ही बाल आए हैं हाल ही में उमराह करने के बाद लौटीं हिना खान को एक इवेंट में स्पॉट किया गया। जब वो रेड कारपेट पर आईं तो उन्होंने पपाराजी से पूछा, ‘आज मैं सबसे अलग लग रही हूं, कैसी लग रही हूं?’ सभी ने हिना का उत्साह बढ़ाया। इसके बाद ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ की ‘अक्षरा’ ने कहा, ‘अभी तक इतने ही बाल आए हैं।’ हिना ने ये भी बताया कि वो नर्वस फील कर रही थीं। उन्होंने कहा, ‘मैं नर्वस थी… किसी दिन मैं अपने असली बालों के साथ वापस आऊंगी। अच्छी लग रही हूं या नहीं?’ उमराह करने गई थीं हिना हिना सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वो हाल ही में उमराह पर गई थीं, जहां से अपना वीडियो और ढेर सारी फोटोज शेयर की थीं। उन्होंने इसके लिए अल्लाह का शुक्रिया भी अदा किया।

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