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NPCI ने यूपीआई ट्रांजैक्शंस को सुरक्षित बनाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की, 1 अप्रैल से लागू होंगी नई गाइडलाइन

लखनऊ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए 1 अप्रैल 2025 से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई ट्रांजैक्शंस को सुरक्षित बनाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इन नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, बैंकों और यूपीआई ऐप्स को हर हफ्ते अपने मोबाइल नंबरों को अपडेट करना होगा, ताकि गलत ट्रांजेक्शन से जुड़ी समस्याओं को रोका जा सके। NPCI की नई गाइडलाइन का उद्देश्य: NPCI ने यह कदम यूपीआई सिस्टम को और भी अधिक सुरक्षित बनाने के लिए उठाया है। अक्सर मोबाइल नंबर बदलने या पुराने मोबाइल नंबरों के री-असाइन होने की वजह से गलत यूपीआई ट्रांजेक्शंस की आशंका बढ़ जाती थी। इसे ध्यान में रखते हुए NPCI ने बैंकों और यूपीआई ऐप्स को निर्देशित किया है कि वे नियमित रूप से मोबाइल नंबरों को अपडेट करें। इस बदलाव से पुराने नंबरों की वजह से होने वाली गड़बड़ियों को रोका जा सकेगा, और यूपीआई सिस्टम पहले से ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद होगा। बैंकों और यूपीआई ऐप्स के लिए गाइडलाइन: NPCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी बैंक और यूपीआई ऐप्स को 31 मार्च 2025 तक नए नियमों का पालन करना होगा। 1 अप्रैल 2025 से हर महीने सर्विस प्रोवाइडर्स को NPCI को रिपोर्ट भेजनी होगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे यूपीआई आईडी को सही ढंग से मैनेज कर रहे हैं। मोबाइल नंबर रीसाइक्लिंग और उसकी समस्या: भारत में दूरसंचार विभाग के नियमों के अनुसार, यदि कोई मोबाइल नंबर 90 दिनों तक उपयोग में नहीं आता है, तो उसे नए ग्राहक को अलॉट किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को मोबाइल रीसाइक्लिंग कहा जाता है। जब एक पुराना मोबाइल नंबर नए ग्राहक को दिया जाता है, तो इससे जुड़े यूपीआई अकाउंट्स और ट्रांजेक्शंस में गड़बड़ी हो सकती है, जो भविष्य में गलत ट्रांजेक्शन का कारण बन सकती है।

डिजिटल फ्रॉड पर सरकार एक्‍शन, 7.81 लाख सिम कार्ड, 2 लाख मोबाइल ब्‍लॉक

नई दिल्ली ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। सरकार की ओर से बताया गया है कि इस साल फरवरी तक डिजिटल फ्रॉड से जुड़े 7.81 लाख से ज़्यादा सिम कार्ड ब्लॉक कर दिए हैं। साथ ही 2 लाख 8 हजार 469 IMEI को भी ब्‍लॉक कर दिया गया है। IMEI आमतौर पर मोबाइल फोन में मौजूद यूनीक नंबर होता है। इसे ब्‍लॉक करने पर वह डिवाइस किसी भी नेटवर्क पर काम नहीं करती है यानी उससे कॉल्‍स वगैरह करना पॉसिबल नहीं होता। इस बारे में लोकसभा में जानकारी दी गई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने एक लिखित जवाब में बताया कि भारत सरकार ने पुलिस रिपोर्ट्स के बाद एक्‍शन लिया है। हजारों स्‍काइप आईडी और वॉट्सऐप अकाउंट ब्‍लॉक बताया गया है कि गृह मंत्रालय के तहत आने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने डिजिटल अरेस्‍ट के लिए यूज हो रहीं 3,962 से ज्‍यादा स्काइप आईडी और 83 हजार 668 वॉट्सऐप अकाउंट को भी ब्‍लॉक किया है। I4C का मुख्‍य काम फाइनेंशल धोखाधड़ी को रिपोर्ट करना और अपराधियों को पैसे निकालने से रोकना है। जनता के 4386 करोड़ रुपये बचाए लोकसभा में सरकार की ओर से बताया गया है कि 13.36 लाख से ज्‍यादा शिकायतों के बाद पब्लिक के लगभग 4,386 करोड़ रुपये अपराधियों के पास जाने से बचाए गए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराधों का दायरा कितना बड़ा है और कितनी ज्‍यादा संख्‍या में लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। साइबर फ्रॉड की कंप्‍लेंट ऐसे कराएं दर्ज साइबर फ्रॉड से जुड़ी कंप्‍लेट दर्ज कराने के लिए सरकार ने टोल-फ्री हेल्‍पलाइन नंबर शुरू किया है। 1930 नंबर पर कॉल करके कंप्‍लेट की जा सकती है। इसके अलावा, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की मदद से भी डिजिटल धोखाधड़ी की कंप्‍लेंट दी जा सकती है। डिजिटल फ्रॉड रोकने पर लगातार हो रहा काम सरकार की ओर से बताया गया कि डिजिटल अपराधों को रोकने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी के मद्देनजर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल को शुरू किया गया है। मंत्री ने बताया कि पोर्टल पर दी गई शिकायतों पर राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों की टीमें काम करती हैं। सरकार का यह भी कहना है कि वह आने वाले दिनों में और सख्‍त कदम उठाएगी। लगातार सामने आ रहे मामले ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल ही में मुंबई की एक बुजुर्ग महिला को डिजिटल अरेस्‍ट करके 20 करोड़ रुपये की चपत लगाई गई। महिला कई महीनों तक डिजिटल अरेस्‍ट में रहीं। आरोपी धीरे-धीरे करके उनसे पैसे वसूलते गए।

कर्मयोगी बनें विषय पर कार्यशाला का राज्यपाल पटेल करेंगे शुभारंभ

भोपाल राजभवन में “कर्मयोगी बनें” विषय पर कल एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल सुबह 10:30 बजे कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी कार्यशाला में शामिल होंगे। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव श्री के. सी. गुप्ता ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य प्राचीन ज्ञान और आधुनिक नेतृत्व-विधाओं के साथ संयोजित कर उपयोग करने का प्रशिक्षण देना है। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में कर्मयोग के सिद्धांतों के समावेश, विकास और सेवा का वातावरण बना कर सकारात्मक बदलाव लाना है। कार्यशाला में मध्यप्रदेश के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू एवं कुलसचिव, पी.एम. एक्सीलेंस और स्वशासी कॉलेज के प्राचार्य सहित विभिन्न संकायों के प्राध्यापक शामिल होंगे। तकनीकी सत्र “शैक्षणिक नेतृत्व और शिक्षा में कर्मयोग” विषय पर दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक होगा। इस सत्र के मुख्य वक्ता मानव संसाधन क्षमता निर्माण आयोग और केन्द्र सरकार के ‘मिशन कर्मयोगी’ के सदस्य प्रो. बालासुब्रमण्यम, ग्लोबल कन्वर्टर यूनाइटेड कॉन्शसनेस के संयोजक डॉ. विक्रांत सिंह तोमर, आई.आई.टी. कानपुर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रो. के. राधाकृष्णन और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली की कुलपति प्रो. शांतिश्री धुलीपुडी पंडित होंगे। “एक कर्मयोगी शिक्षाविद्-चुनौतियां और उसके समाधान” विषय पर चर्चा एवं संवाद सत्र का आयोजन दोपहर 2:30 बजे से शाम 4 बजे तक होगा।  

MBBS चिकित्सक ही बन सकता है निगम में हेल्थ ऑफिसर: हाईकोर्ट

 ग्वालियर हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी पद को लेकर एक अंतरिम आदेश जारी किया है। इस अंतरिम आदेश का असर ग्वालियर नगर निगम के साथ ही इंदौर नगर निगम पर भी पड़ना तय है। दरअसल, हाईकोर्ट(MP High Court) की ग्वालियर खंडपीठ ने माना है कि नगर निगम में स्वास्थ्य अधिकारी का पद केवल एमबीबीएस(MBBS) की डिग्री प्राप्त व्यक्ति को ही दिया जा सकता है। इसके उलट इंदौर में स्वास्थ्य अधिकारी का पद वेटनरी डॉक्टर के पास है। 42 साल: MBBS डॉक्टर की नहीं हुई निगम में भर्ती इंदौर निगम में मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर फिलहाल पशु चिकित्सक डॉ. अखिलेश उपाध्याय संभाल रहे हैं। वे एमबीबीएस नहीं हैं। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक वे इस पद के लिए योग्य नहीं हैं। इंदौर निगम में इस पद की योग्यता रखने वाला कोई अधिकारी ही नहीं है। इंदौर में डॉ. अखिलेश उपाध्याय के अलावा सात और अधिकारियों को स्वास्थ्य अधिकारी का पद संभाल रहे हैं, लेकिन इनमें से किसी के पास भी एमबीबीएस की डिग्री नहीं है। 1983 के बाद नहीं हुई भर्ती इंदौर निगम में एमबीबीएस डॉक्टर्स की भर्ती 1983 में हुई थी। उस समय दो डॉक्टर्स को भर्ती किया था, जिनमें से डॉ. केएस वर्मा पांच साल पहले रिटायर हो गए थे। हालांकि, डॉ. नटवर शारडा प्रतिनियुक्ति पर निगम में थे, लेकिन कोरोना के समय उनका भी ट्रांसफर मूल विभाग में हो गया था, जिसके बाद स्वास्थ्य अधिकारी का पद वेटनरी डॉक्टर्स ही संभाल रहे हैं। इसलिए दिया ग्वालियर हाईकोर्ट ने आदेश राज्य सरकार की ओर से ग्वालियर नगर निगम में स्वास्थ्य अधिकारी के तौर पर डॉ. अनुज शर्मा को नियुक्त किया गया था। डॉ. अनुज शर्मा वेटनरी डॉक्टर हैं, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई थी। इस याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट में स्वास्थ्य अधिकारी पद की योग्यता के नियम भी आए थे, जिसमें स्वास्थ्य अधिकारी के तौर पर कम से कम एमबीबीएस की डिग्री जरूरी बताई गई थी। इसको ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने ग्वालियर निगम में वेनरी डॉक्टर की नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उच्च न्यायालय के आदेश के बारे में जानकारी मिली है। हम न्यायालय के आदेशों का पालन करेंगे। इसके लिए जो भी उचित होगा वो किया जाएगा। – शिवम वर्मा, आयुक्त नगर निगम  

इंदौर में ‘आधार कार्ड’ में नाम, एड्रेस, फोटो बदलवाना आसान, खुले 150 से अधिक आधार सेंटर

 इंदौर अगर आपको आधार कार्ड से जुड़ा कोई भी काम कराना है तो ये खबर आपके काम की है। एमपी के इंदौर शहर में बीते कई दिनों से आधार कार्ड में नाम, फोटो और पता चेंज कराने वाले लोगों की लंबी लाइनें लग रही थी। जानकारी के मुताबिक रोज करीब 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंच रहे थे। शहर के कई सेंटरों में भीड़ एकत्रित हो रही थी। जिसके कारण कई लोग अपना काम नहीं करा पा रहे थे, उन्हें घर वापस लौटना पड़ रहा था। बनाए गए 155 सेंटर इस अव्यवस्था के देखते हुए कलेक्टर आशीष सिंह ने इसकी मॉनीटरिंग बढ़ा दी है। अब शहर के करीब 155 सेंटर पर आधार कार्ड से जुड़े काम किए जा रहे है। अगर आप भी अपने आधार कार्ड में कोई चेंज कराना चाहते है तो अपने नजदीकी सेंटर पर जा सकते हैं। ये सेंटर्स बैंक व अस्पतालों में भी बनाए गए हैं। बढ़ाई गई मशीनों की संख्या आधार सेंटर्स की मॉनिटरिंग करने के लिए पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन और जिला ई-गर्वनेंस अधिकारी अतुल दुबे भी लगे हुए हैं। सर्विस प्रोवाइडर को भी कहा गया है कि वे उपभोक्ताओं के परेशानियों का हल तुरंत करें। साथ सेंटर्स पर मशीनों की संख्या को भी बढ़ा दिया गया है। जानिए कहां-कहां पर करा सकतें हैं करेक्शन -खेल प्रशाल, रेसकोर्स रोड (यहां चार सेंटर हैं) -सिटी यूनियन बैंक द मेग्नेट न्यू पलासिया -धन ट्राइडेंट पीयू-4, विजय नगर -फड़नीस कॉम्प्लेक्स एमजी रोड -एमपीजीबी निपानिया -आरबीएल बैंक लि. ग्राउंड फ्लोर बिजनेस सेंटर आरएनटी मार्ग -यूबीआई स्कीम-78 -यूको बैंक एचआईजी मेन रोड -यूको बैंक विजय नगर -यूनियन बैंक ऑफ इंडिया नर्सिंग बाजार -यूटीआई इंफ्रास्ट्रक्चर सेकंड फ्लोर सिटी सेंटर -बीएसएनएल एक्सचेंज तिलक पथ -सीएससी आधार डेमोग्राफिक अपडेट सेंटर विजय नगर -बैंक बीसीयूसीएल गुलजार कॉलोनी -श्रीसांई साइबर कैफे मेन रोड गणेश नगर -7 विराट नगर मूसाखेड़ी -2-अयोध्यापुरी कॉलोनी, प्रेस कॉम्प्लेक्स वैभव इंटरप्राइजेस-57 चाणक्य कॉम्प्लेक्स , सुंदरम कॉम्प्लेक्स भंवरकुआं, श्रीराम नगर पालदा, श्री सांई ऑनलाइन परदेशीपुरा -क्लॉथ मार्केट पोस्ट ऑफिस जीपीओ -जीएनसी आड़ा बाजार गुरु नानक चौक, वल्लभ नगर, मनोरमागंज -आधार पंजीयन केंद्र सेंट्रल म्यूजियम, शा. पीसी सेठी हॉस्पिटल, नगर निगम जोन 12 , जोन 18, जोन 11 , जोन, 9 कनाड़िया रोड पर संचार नगर आदि।

इंदौर में मास्टर प्लान की सड़कों के जल्द निर्माण के निर्देश

इंदौर  एमपी के इंदौर शहर में स्मार्ट सिटी मास्टर प्लान की 8 ऐसी सड़कों का काम करेगा जो अधूरी है या उनका काम शुरू ही नहीं हुआ है। सड़कों के निर्माण के साथ अन्य विकास कार्य भी होंगे। यह सभी काम समय सीमा में पूरे किए जाएंगे। कलेक्टर आशीष सिंह के मुताबिक  स्मार्ट सिटी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक हुई।  बैठक में निगम आयुक्त शिवम वर्मा, स्मार्ट सिटी सीईओ दिव्यांक सिंह सहित अन्य सदस्य व विभागों के अधिकारी मौजूद थे। प्रोजेक्ट चिन्हित किए गए हैं। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि बाधाओं को चिन्हित कर निराकरण कर लिया जाए। इनका निर्माण शीघ्र ही स्मार्ट सिटी के माध्यम से कराया जाएगा। बैठक में निर्देश दिए गए कि इन सड़कों का निर्माण जल्द ही प्रारंभ किया जाएगा। सड़कों में आने वाली बाधाओं को भी चिह्नित कर इनके निराकरण की समुचित व्यवस्था भी कर ली जाए। यहां होगा काम -एमआर-5 रोड, इंदौर वायर फैक्ट्री से बड़ा बांगड़दा तक। -वायर फैक्ट्री से सुपर कॉरिडोर तक स्टॉर्म वाटरलाइन डालने का कार्य। -नेमावर रोड-पालदा तिराहा से आरई-2 आइएसबीटी होते हुए बायपास तक मास्टर प्लान सड़क का विकास कार्य। -एमआर-9 रोबोट चौराहा से बायपास एवं अनूप टॉकीज के पास सड़क। धार रोड चंदन नगर चौराहा से एयरपोर्ट रोड तक सड़क। -एमआर-3 पीपल्यापाला रीजनल पार्क से बायपास तक सड़क। -नायता मुण्डला से एमआर-10 तक आरई-2 का शेष भाग। एमआर-6 रिंग रोड से महू नाका रोड।

राजस्थान :प्रदेश भाजपा के संगठन में इस बार महिला नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी जाएगी

जयपुर  राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ अब अपनी नई टीम बनाने वाले हैं। नई टीम की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है। बताया जा रहा है कि प्रदेश स्तर पर नाम फाइनल कर लिए गए हैं। एक औपचारिक अनुमति के लिए केंद्रीय नेताओं के सामने नई टीम के पैनल को रखा जाएगा। केंद्रीय नेताओं से हरी झंडी मिलते ही नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी जाएगी। जुलाई 2024 में मदन राठौड़ को पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में फरवरी 2025 में राठौड़ को निर्विरोध प्रदेशाध्यक्ष चुना गया। प्रदेश अध्यक्ष के पद पर कार्य करते हुए आठ महीने हो गए लेकिन अभी तक पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी की ओर से बनाई गई ही यथावत है। अब राठौड़ अपने स्तर पर संगठन में फेरबदल करने जा रहे हैं। महिला नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी प्रदेश भाजपा के संगठन में इस बार महिला नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। संगठन 33 फीसदी आरक्षण के लिहाज से अहम पदों पर महिलाओं को नियुक्ति देना तय है। प्रदेश उपाध्यक्ष और महामंत्री जैसे अहम पदों पर महिलाओं को जिम्मेदारी दी जाने वाली है। प्रदेश भाजपा की महिला नेत्रियों में इस बात को लेकर बड़ी खुशी भी है कि उन्हें संगठन में अहम पदों पर काम करने का मौका मिलेगा। पूरी कार्यकारिणी में करीब 90 पद हैं। 33 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से करीब 30 पदों पर महिलाओं को मौका मिलने वाला है। दीप्ति किरण माहेश्वरी, अनिता भदेल, डॉ. ज्योति मिर्धा और रंजीता कोली को मिलेगा बड़ा अवसर प्रदेश संगठन की मुख्य कार्यकारिणी में भी अब महिलाओं नेत्रियों को अवसर मिलने वाला है। मौजूदा विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी, अनिता भदेल, पूर्व सांसद रंजीता कोली सहित अन्य वरिष्ठ नेत्रियों के लिए अब बड़ा मौका है जब पार्टी में उनकी अहम भूमिका होने वाली है। पूर्व सांसद संतोष अहलावत और ज्योति मिर्धा को भी अहम जिम्मेदारी मिलने वाली है। प्रदेश कार्यकारिणी के साथ जिला कार्यकारिणियों का भी गठन होगा तो वहां भी स्थानीय महिला नेत्रियों को ज्यादा अवसर मिलने वाले हैं। महिला नेत्रियों को दी जाने वाली नियुक्तियों में जातिगत समीकरण भी साधे जाएंगे। ऐसे में हर वर्ग की महिला नेत्रियों को मौका मिलना तय है।

आज मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा, शिवलिंग पर चढ़ी ये चीज़ रखें अपने पास, खूब आएगा पैसा आपके पास

नई दिल्ली आज मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। शास्त्रनुसार चतुर्दशी के स्वामी स्वयं परमेश्वर शिव हैं। शास्त्र गर्ग संहिता के अनुसार चतुर्दशी तिथि चन्द्रमा ग्रह की जन्म तिथि है। चतुर्दशी के स्वामी परमेश्वर शिव हैं। इस तिथि को शिव पूजन व व्रत करना उत्तम रहता है। चतुर्दशी की अमृतकला को स्वयं परमेश्वर शिव ही पीते हैं। चतुर्दशी तिथि को क्रूरा कहा गया है। इस तिथि की दिशा पश्चिम है। मान्यतानुसार शिवरात्रि शिव-शक्ति के मिलन का पर्व है। शिवरात्रि के प्रदोषकाल में शंकर-पार्वती का विवाह हुआ था। प्रदोष काल में महाशिवरात्रि तिथि में सर्व ज्योतिर्लिंगों का प्रादुर्भाव हुआ था व सर्वप्रथम ब्रह्मा और विष्णु ने महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पूजन किया था। पौराणिक मान्यतानुसार दिव्य ज्योर्तिलिंग का उदभव चतुर्दशी तिथि को माना जाता है व महाशिवरात्रि को शिव उत्पत्ति के रूप में मानते हैं। मध्य रात्रि के दौरान किए जाने वाले शिवरात्रि पूजन को निशिता कहते हैं। संध्या के समय किए जाने वाले शिवरात्रि पूजन को प्रदोष कहते हैं। आज के दिन अवश्य करें, ये पूजन और उपाय- विशेष पूजन: संध्या काल में शिवलिंग का पंचोपचार पूजन करें। शुद्ध घी का दीप करें, सुगंधित धूप करें, पीले कनेर के फूल चढ़ाएं, पीले चंदन से त्रिपुंड बनाएं, केसर युक्त चावल की खीर का भोग लगाएं। इस विशेष मंत्र को 108 बार जपें। इसके बाद भोग किसी गरीब को बांट दें। विशेष मंत्र: ॐ त्र्यम्बकाय नमः॥

अमरनाथ की यात्रा 3 जुलाई से प्रारंभ होकर अगस्त तक चलेगी, पंजीयन प्रक्रिया 14 अप्रैल से प्रारंभ होगी

भोपाल अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने इस वर्ष अमरनाथ यात्रा की तिथियों की घोषणा कर दी है। इस बार बाबा अमरनाथ की यात्रा 3 जुलाई से प्रारंभ होकर अगस्त तक चलेगी। अमरनाथ यात्रा पर जाने के इच्छुक दर्शनार्थियों के लिए पंजीयन कराना अनिवार्य होगा, जिसकी प्रक्रिया 14 अप्रैल से प्रारंभ होगी। साथ ही, जिला अस्पताल में हेल्थ सर्टिफिकेट की प्रक्रिया भी आगामी दिनों में शुरू कर दी जाएगी। देवास के शिवशक्ति सेवा मंडल के विनोद जैन एवं महेश कारपेंटर ने बताया कि हर वर्ष जम्मू-कश्मीर स्थित बाबा बर्फानी के दर्शन करने के लिए जिले से हजारों श्रद्धालु जाते हैं। अमरनाथ यात्रा के लिए हेल्थ सर्टिफिकेट अनिवार्य है और केवल वर्तमान तिथि का प्रमाणपत्र ही मान्य होगा। श्राइन बोर्ड द्वारा अधिकृत डॉक्टरों की सूची जारी होने के बाद जिला चिकित्सालय में हेल्थ चेकअप प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। स्वास्थ्य परीक्षण के लिए जरूरी दिशा-निर्देश इच्छुक यात्री पंजीयन फॉर्म एवं हेल्थ सर्टिफिकेट लेकर स्वास्थ्य परीक्षण करवा सकते हैं। चेकअप के दौरान हीमोग्लोबिन, ईसीजी, ब्लड ग्रुप, हार्ट चेकअप, ब्लड प्रेशर सहित अन्य महत्वपूर्ण जांचें की जाएंगी। पहले से कराया गया मेडिकल परीक्षण मान्य नहीं होगा। केवल श्राइन बोर्ड द्वारा नामित सरकारी डॉक्टरों द्वारा किया गया चेकअप ही स्वीकार किया जाएगा। यात्रा पंजीयन श्राइन बोर्ड द्वारा निर्धारित बैंकों में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यात्री ऑनलाइन भी पंजीयन करा सकेंगे। दो मार्गों से होती है अमरनाथ यात्रा अमरनाथ यात्रा के लिए दो मार्ग निर्धारित हैं—पहलगाम और बालटाल।     पहलगाम मार्ग: इस मार्ग से यात्रा करने वाले यात्रियों को 32 किमी से अधिक पैदल चलना पड़ता है।     बालटाल मार्ग: इस मार्ग से यात्रा करने पर श्रद्धालुओं को 16 किमी पैदल चलकर बाबा अमरनाथ के दर्शन करने होते हैं। फ्री फॉर्म वितरण केंद्र श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु शिवशक्ति सेवा मंडल नि:शुल्क पंजीयन फॉर्म उपलब्ध करा रहा है। यात्री निम्नलिखित स्थानों से फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं: 1.मां चामुंडा स्पोर्ट्स पाइंट, शुक्रवारिया हाट (संपर्क: संजय पारखे, प्रजोत पारखे – 9826040033)     सयाजी द्वार के सामने गोवर्धन पहलवान की पान दुकान     देवास बस स्टैंड – श्रीराम भोजनालय     कोतवाली के सामने – बागलीकर एडवर्टाइजिंग, अमित बागलीकर (संपर्क: 9039900559)     भौंरासा में महेश कारपेंटर     हाटपीपल्या में मनोज जोशी इन लोगों को यात्रा में शामिल होने की अनुमति नहीं श्राइन बोर्ड द्वारा जारी आदेशानुसार, 13 वर्ष से कम और 75 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को यात्रा की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं को भी यात्रा पर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। स्वास्थ्य परीक्षण की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए सभी इच्छुक यात्रियों को समय रहते हेल्थ सर्टिफिकेट बनवाने की सलाह दी जाती है।  

राज्यपाल मंगुभाई पटेल सुबह 10:30 बजे कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे

भोपाल राजभवन में “कर्मयोगी बनें” विषय पर 28 मार्च 2025 को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल सुबह 10:30 बजे कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी कार्यशाला में शामिल होंगे। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के. सी. गुप्ता ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य प्राचीन ज्ञान और आधुनिक नेतृत्व-विधाओं के साथ संयोजित कर उपयोग करने का प्रशिक्षण देना है। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में कर्मयोग के सिद्धांतों के समावेश, विकास और सेवा का वातावरण बना कर सकारात्मक बदलाव लाना है। कार्यशाला में मध्यप्रदेश के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू एवं कुलसचिव, पी.एम. एक्सीलेंस और स्वशासी कॉलेज के प्राचार्य सहित विभिन्न संकायों के प्राध्यापक शामिल होंगे। तकनीकी सत्र “शैक्षणिक नेतृत्व और शिक्षा में कर्मयोग” विषय पर दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक होगा। इस सत्र के मुख्य वक्ता मानव संसाधन क्षमता निर्माण आयोग और केन्द्र सरकार के ‘मिशन कर्मयोगी’ के सदस्य प्रो. बालासुब्रमण्यम, ग्लोबल कन्वर्टर यूनाइटेड कॉन्शसनेस के संयोजक डॉ. विक्रांत सिंह तोमर, आई.आई.टी. कानपुर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रो. के. राधाकृष्णन और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली की कुलपति प्रो. शांतिधुलीपुडी पंडित होंगे। “एक कर्मयोगी शिक्षाविद्-चुनौतियां और उसके समाधान” विषय पर चर्चा एवं संवाद सत्र का आयोजन दोपहर 2:30 बजे से शाम 4 बजे तक होगा।  

साइबर हमले से निपटने, साइबर जालसाजों के नेटवर्क का राजफाश करने के लिए प्रदेश में साइबर कमांडो पदस्थ होंगे

भोपाल  देश में आतंकी घटनाओं से लेकर वीवीआईपी की सुरक्षा में जिस तरह कमांडो तैनात रहते हैं, उसी तरह साइबर हमले से निपटने, साइबर जालसाजों के नेटवर्क का राजफाश करने के लिए प्रदेश में कमांडो पदस्थ होंगे। अप्रैल से छह कमांडो काम करने लगेंगे। मप्र के लिए साइबर कमांडो के पहले बैच का छह माह का प्रशिक्षण 31 मार्च को पूरा हो रहा है। बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देशभर में अलग-अलग बैच में मिलाकर पांच हजार कमांडो तैनात करने का निर्णय लिया है। दूसरे बैच में 39 पुलिसकर्मियों को भेजा जाएगा पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि दूसरे बैच में प्रदेश के 39 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। परीक्षा के बाद इनका चयन भी हो चुका है। जल्द ही यह तय हो जाएगा कितने पुलिसकर्मियों को कहां प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। प्रशिक्षण लिए जाने वालों में आरक्षक से लेकर उप पुलिस अधीक्षक स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं। यह काम करेंगे साइबर कमांडो     साइबर सुरक्षा : साइबर खतरों से नेटवर्क और डाटा को सुरक्षित रखना।     साइबर हमले से सुरक्षा : कमांडो साइबर नेटवर्क या सिस्टम में हैकिंग और वायरस के हमलों से निपटने के लिए काम करेंगे। हमले की स्थिति में त्वरित निराकरण के लिए काम करेंगे। खतरों से आगाह भी करेंगे।     नेटवर्क की निगरानी : साइबर कमांडो की जिम्मेदारी नेटवर्क की निगरानी करने की रहेगी।     डेटा सुरक्षित रखने का काम : महत्वपूर्ण संस्थानों का डेटा लीक नहीं होने पाए, इसके लिए भी सुझाव देंगे।     अपराधों की जांच : बड़े साइबर अपराधों की जांच और डाटा के विश्लेषण में सहयोग करेंगे। साथ ही साइबर सुरक्षा की नीतियां बनाने में सहयोग करेंगे। दूसरे बैच के लिए भी चयन किया गया     हमारे छह पुलिसकर्मी साइबर कमांडो का प्रशिक्षण ले रहे हैं, जो शीघ्र आ जाएंगे। इसके अतिरिक्त दूसरे बैच के लिए भी चयन कर लिया गया है। – ए साई मनोहर, एडीजी साइबर  

सागर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में जल्द ही कैंसर अस्प‍ताल की सुविधा शुरू होगी, 6 जिलों के कैंसर मरीजों को मिलेगा लाभ

सागर  बुंदेलखंड का पहला सरकारी कैंसर अस्पताल सागर में खुलेगा. 80 बिस्तरों वाले इस अस्पताल के लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है. इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 70 करोड़ का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था. इस पर सहमति भी बन चुकी है. अब सिर्फ नोटिफिकेशन जारी होना बाकी है. कैंसर अस्पताल को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की यूनिट के रूप में संचालित किया जाएगा. बीएमसी प्रबंधन ने पीडब्ल्यूडी से बिल्डिंग का प्रस्ताव तैयार कराया है. वहीं, डॉक्टर, स्टाफ और मशीनरी के लिए अलग से प्रस्ताव भेजा गया है. जिला अस्पताल के पीछे वाले हिस्से में भवन बनेगा. यह सागर का पहला सरकारी कैंसर अस्पताल होगा. यहां कैंसर के मरीजों को उचित इलाज मिलेगा. बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीते 23 दिसंबर को कैंसर अस्पताल की घोषणा की थी. अभी जाते थे मुंबई, नागपुर सागर संभागीय मुख्यालय पर कैंसर अस्पताल शुरू होने से आसपास के 5-6 जिलों के कैंसर मरीजों को इलाज मिल पाएगा. अभी कैंसर के मरीजों को मुंबई, नागपुर, भोपाल और इंदौर जाना पड़ता है. कैंसर मरीजों को लंबे समय तक अस्पताल में रखने की जरूरत होती है, जिससे परिजन आर्थिक तौर पर टूट जाते हैं. 6 जिलों के मरीजों को लाभ बुंदेलखंड अंचल में महिलाओं में ब्रेस्ट और पुरुषों में मुंह का कैंसर सबसे ज्यादा हो रहा है. युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. बीएमसी और जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि सागर, टीकमगढ़, दमोह, छतरपुर, निवाड़ी और पन्ना जिलों से औसतन 5-6 मरीज कैंसर के पाए जा रहे हैं. प्रथम स्टेज में ही कैंसर की पहचान होने से बड़े जोखिम से बचा जा सकता है. कैंसर अस्पताल बनने से सर्जरी और कीमोथेरेपी की सुविधा मिल सकेगी. शासन को भेजा प्रस्ताव बीएमसी के डीन डॉ. प्रमेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि कैंसर अस्पताल भवन के लिए 70 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था. इसकी तकनीकी स्वीकृति जल्द आएगी. विशेषज्ञ, स्टाफ और मशीनरी के लिए अलग से प्रस्ताव भेजा गया है. उम्मीद है कि सागर में जल्द कैंसर अस्पताल शुरू होगा.  बुंदेलखंड क्षेत्र में कैंसर के मरीजों की निरंतर बढती संख्या, मरीज हित में स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि को देखते हुए कैंसर अस्पताल खोला जाना आवश्यक है। बीएमसी में स्वीकृत होगा न्यूरोसर्जन का पद खाद्य मंत्री राजपूत ने मुख्यमंत्री को बताया कि बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में पिछले 15 सालों से न्यू‍रोसर्जन का पद स्वीकृत नहीं है। जिससे हेड इंजरी के मरीजों को इलाज के लिए सागर से बाहर जाना पड़ता है। कई बार रास्ते में इलाज के अभाव में मरीज दम तोड़ देते हैं। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भरोसा दिया है कि जल्द ही मेडिकल कॉलेज सागर में न्यूरोसर्जन का पद स्वीकृत किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बुंदेलखंड क्षेत्र के सागर संभाग में 6 जिले सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना और निवाड़ी को मिलाकर सागर संभाग की संख्या करीब 79 लाख है। बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय में सागर जिले और आसपास के जिलों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि कैंसर एक गंभीर बीमारी है। जिससे मरीज को उपचार के लिए अन्य महानगरों में जाना पड़ता है और उन्हें कई बार आर्थिक समस्याओं से गुजरना पड़ता है। सागर जिले में कैंसर अस्पताल की सुविधा होने से इन सभी समस्याओं का निदान हो सकेगा। बीएमसी में जल्द कैंसर अस्पताल शुरू कराने का आश्वासन मुख्यमंत्री ने दिया है।

सरकार टैक्स चोरों या ब्लैक मनी रखने वालों को पकड़ने के लिए सोशल मीडिया मैसेज को भी खंगाल रही : सीतारमण

नई दिल्ली  व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम आदि पर आप भी मैसेज भेजते होंगे। उस पर आप अपनी निजी जानकारी भी किसी से शेयर करते होंगे। अभी तक ऐसा करते रहे हैं तो संभल जाइए। सरकार टैक्स चोरों या ब्लैक मनी रखने वालों को पकड़ने के लिए सोशल मीडिया मैसेज को भी खंगाल रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कल ही इसका खुलासा किया है। उन्होंने लोकसभा में इनकम टैक्स बिल, 2025 के बारे में बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार टैक्स चोरी रोकने के लिए नए तरीके अपना रही है। गूगल मैप और व्हाट्सऐप मैसेज से सुराग सीतारमण ने बताया कि Google Maps की मदद से उन जगहों का पता चला जहां लोग कैश छुपाते थे। Instagram अकाउंट्स से ‘बेनामी’ संपत्ति के मालिकों का पता लगाया गया। WhatsApp मैसेज से क्रिप्टो एसेट्स से जुड़े 200 करोड़ रुपये का काला धन पकड़ा गया। टेक्नोलॉजी से पकड़े जा रहे हैं चोर उन्होंने बताया, “Encrypted मैसेज से 250 करोड़ रुपये का काला धन मिला। क्रिप्टो एसेट्स के WhatsApp मैसेज से सबूत मिले हैं। WhatsApp से 200 करोड़ रुपये का काला धन पकड़ा गया।” इसका मतलब है कि टैक्स अधिकारी अब टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके टैक्स चोरों को पकड़ रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि टैक्स अधिकारियों को डिजिटल रिकॉर्ड देखने का अधिकार देना ज़रूरी है। इससे टैक्स चोरी और धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी वर्चुअल एसेट्स, जैसे कि क्रिप्टोकरेंसी, का इस्तेमाल करके टैक्स न बचा पाए। नए बिल में ज्यादा अधिकार नए बिल के अनुसार, अधिकारियों को ईमेल, WhatsApp और Telegram जैसे कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस करने का अधिकार होगा। वे बिजनेस सॉफ्टवेयर और सर्वर भी देख सकेंगे, जिनका इस्तेमाल वित्तीय लेनदेन को छुपाने के लिए किया जाता है। सीतारमण जी ने कहा कि सरकार टेक्नोलॉजी के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि टैक्स कानून आधुनिक हों और टैक्स चोरी करने वालों को पकड़ा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का यह कदम टैक्स भरने वाले ईमानदार लोगों के लिए है, ताकि कोई भी टैक्स चोरी करके बच न सके। सरकार हर तरह से टैक्स चोरी रोकने के लिए तैयार है।

इंदौर में ​होगा भोपाल से पहले 6 किमी के सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर में मेट्रो का कमर्शियल रन, अंतिम मंजूरी का इंतजार

इंदौर मेट्रो रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CMRS) जनक कुमार गर्ग और अन्य अधिकारियों ने दो दिनों में इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण के एक हिस्से का जायजा लिया और तमाम व्यवस्थाओं की भी जांच की. मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के एक अधिकारी ने बताया कि एमपीएमआरसीएल इंदौर में मेट्रो रेल का कमर्शियल संचालन शुरू करने के लिए सीएमआरएस की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है. उन्होंने कहा कि गर्ग के नेतृत्व में एक टीम ने सोमवार और मंगलवार को गांधी नगर स्टेशन से सुपर कॉरिडोर के स्टेशन नंबर तीन के बीच सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कॉरिडोर पर मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण, सिग्नल तंत्र, दूरसंचार प्रणाली और अन्य व्यवस्थाओं का निर्धारित मानकों पर परीक्षण किया. मेट्रो रेल अधिकारी ने कहा कि पहले चरण में शहर में 5.90 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर मेट्रो रेल चलाई जाएगी. उन्होंने बताया कि मेट्रो रेल का ट्रायल रन सितंबर 2023 में किया जा चुका है. अधिकारी के अनुसार, कुल 7500.80 करोड़ रुपये की लागत वाली इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण का शिलान्यास 14 सितंबर 2019 को किया गया था. करीब 31.50 किलोमीटर का गोलाकार मेट्रो रेल कॉरिडोर बनाया जाएगा. जल्द ही 80 की रफ्तार से दौड़ लगाएगी मेट्रो ट्रेन, जानिए किराया लंबे इंताजार के बीच मार्च के अंत तक इंदौर मेट्रो के कमर्शियल रन की संभावना है. कार्मशियल रन शुरू हो जाने से इंदौरवासियों को सफर करने में आसानी होगी. कार्मशियल रन शुरू होने से पहले कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) जनक कुमार गर्ग इंदौर पहुंचेंगे और मेट्रों का निरीक्षण करेंगे. निरीक्षण के दौरान 80 की स्पीड से दौड़ेगी मेट्रो जानकारी के मुताबिक, कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी जनक कुमार गर्ग 24 मार्च को इंदौर पहुंचेंगे. वे मेट्रो के निरीक्षण के लिए दो दिनों तक रहेंगे. वे सुपर प्रायोरिटी कारिडोर के 5.9 किलोमीटर में बने पांचों मेट्रो स्टेशन का बारीकी से निरीक्षण करेंगे. इस दौरान सी-एमआरएस की टीम मेट्रो कोच में बैठकर गति निरीक्षण भी करेंगे. इस दौरान मेट्रो कोच को तय स्पीड 80 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलाया जाएगा. इससे पहले सीएमआरएस जनक कुमार गर्ग  22 जनवरी को इंदौर में मेट्रो डिपो व कोच का निरीक्षण किया था. रेलवे से मिला अप्रूवल गौरतलब है कि भारत में मेट्रों रेलवे एक्ट के तहत संचालित होती है. ऐसे में मेट्रो को वाय-डक्ट पर चलाने से पहले रेलवे बोर्ड से अप्रूवल लेना होता है. रेलवे बोर्ड की तरफ से इंदौर मेट्रो के संचालन के लिए मेट्रो कोच और ट्रैक से संबंधित अप्रूवल मिल गया है. रेलवे बोर्ड ने मेट्रो के कोच और ट्रैक को पूरी तरह से फिट बताया है. वहीं, अब रेलवे बोर्ड की मजूंरी के बाद  सी-एमआरएस से फाइनल चेक होना है. इस फाइनल चेकिंग के बाद मेट्रों का संचालन शुरू हो जाएगा. 15-30 मिनट पर होगा संचालन जानकारी के मुताबिक, इंदौर में मेट्रो के एक सेट का संचालन 15-30 मिनट के अंतराल पर होगा. हालांकि यात्रियों के संख्या के आधार पर समय को बढ़ाया घटाया जा सकता है. अगर बात करें किराया कि तो अभी तक इंदौर मेट्रो की तरफ से इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि बताया जा रहा है कि इंदौर मेट्रो का न्यूनतम किराया 20 रुपए हो सकता है. इसके साथ ही बताया जा रहा है कि यात्रियों को शुरुआत में 10 रुपए का प्रमोशनल डिस्काउंट देने की भी योजना बन रही है. मेट्रो प्रबंधन ने  मार्च के अंतिम हफ्ते में इंदौर में कॉमर्शियल रन का टारगेट रखा था. लेकिन ऐसा लग रहा है कि यह रन अप्रैल माह में ही हो पाएगा. इंदौर मेट्रो का संचालन गांधीनगर मेट्रो स्टेशन से सुपर कॉरिडोर मेट्रो स्टेशन नंबर 3 के बीच 5.9 किलोमीटर के हिस्सों किया जाएगा.   

बलूचिस्तान विद्रोहियों के हमलों ने पाकिस्तान सरकार की नींद उड़ाई, भारत के पास बड़ा मौका!

इस्लामाबाद पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान नासूर बनकर उभरा है। यह पाकिस्तान के उन दो प्रांतों में शामिल है, जिसके बड़े भूभाग पर पाकिस्तान का नियंत्रण नहीं है। इस सूबे में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और दूसरे विद्रोही समूह अपनी समानांतर सरकार चला रहे हैं। हाल में ही बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने रेलवे ट्रैक पर बम विस्फोट कर एक यात्री ट्रेन को हाईजैक कर लिया था। इस घटना ने पूरी दुनिया में बलूच विद्रोहियों की आवाज को पहुंचाया है। ऐसे में सवाल उठता है कि बलूच अवाम हथियार उठाने को क्यों मजबूर है और संसाधन संपन्न होने के बावजूद इस सूबे में इतनी गरीबी क्यों है। पाकिस्तान ने दावा किया कि कुल 31 लोग मारे गए, और उसके सैन्य अभियान ने 33 बलूच विद्रोहियों को मार डाला। हालांकि, BLA ने इन दावों को “झूठ” बताया और कहा कि उन्होंने ट्रेन में सवार 214 बंधकों को मार डाला था, जिनमें से ज़्यादातर सैन्य और पुलिस कर्मी थे। 16 मार्च को नोशकी में एक और घातक BLA हमला हुआ जिसमें आत्मघाती हमलावरों ने अर्धसैनिक बलों के काफिले पर हमला किया। कुल मिलाकर, BLA ने अकेले 2024 में 302 हमलों की जिम्मेदारी ली, जिसमें क्वेटा के मुख्य रेलवे स्टेशन पर बम विस्फोट भी शामिल है जिसमें 14 सैनिकों सहित 26 लोग मारे गए थे। बलूच कौन हैं? बलूच एक सुन्नी मुस्लिम जातीय समूह है जो ईरान-पाकिस्तान सीमा के दोनों ओर और दक्षिणी अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों में रहते हैं। बलूचिस्तान इस क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा है, इसके बाद ईरान की तरफ सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत हैं। यह क्षेत्र लगभग फ्रांस के आकार का है। इस इलाके में लगभग 9 मिलियन बलूच आबादी रहती है, जो भौगोलिक परिदृश्य के कारण काफी विरल है। इस कारण वे खुद को किसी एक राज्य या देश के बांधे हुए नहीं रख पाते हैं। बलूचिस्तान पाकिस्तान के प्रांतों में सबसे बड़ा और सबसे कम आबादी वाला प्रांत है। यह प्रांत पाकिस्तान में सबसे गरीब है, जिसकी लगभग 70% आबादी को ‘गरीब’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसके बावजूद बलूचिस्तान सोने, हीरे, चांदी और तांबे जैसे प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। इसका सीधा का मतलब यह है कि प्रांत के लोगों को उनका हिस्सा नहीं मिला या जानबूझकर नहीं दिया गया। यह उन कई कारणों में से एक है जिससे इस राज्य के लोग असंतुष्ट हैं और अपनी मांग को लेकर हथियार उठाने तक को तैयार हैं। विभाजन के बाद, बलूचिस्तान मार्च 1948 तक पाकिस्तान के नए राज्य के साथ मैत्री संधि के तहत स्वतंत्र रहा। कलात के खान, मुख्य आदिवासी नेता थे, जिनका शासन इस क्षेत्र के अधिकांश भाग पर चलता था। वह स्वतंत्र रहने के इच्छुक थे, लेकिन पाकिस्तान में शामिल होने के लिए उन पर बहुत दबाव था, जिसमें उनके सामंत, मकरान, लास बेला और खारन के शासक शामिल थे। दशकों से, बलूच अपनी स्वायत्तता या स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे हैं, जिसका सीमा के दोनों ओर हिंसक दमन किया गया है। पाकिस्तान में, ऐसे प्रयासों को राष्ट्र को खंडित करने के प्रयासों के रूप में देखा जाता है – जबकि ईरान में, बलूच मुख्य रूप से शिया देश में सुन्नी मुस्लिम अल्पसंख्यक होने के कारण स्थिति और भी जटिल हो जाती है। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, पाकिस्तान में, 2011 से 10,000 से अधिक बलूच गायब हो गए हैं। बलूचिस्तान विद्रोह के बारे में हम क्या जानते हैं? पाकिस्तान का अशांत दक्षिण-पश्चिमी प्रांत, जो ईरान और अफ़गानिस्तान की सीमा पर है, 1948 में बलूचिस्तान के जन्म के बाद से ही उग्रवाद के अधीन है। हिंसक अलगाववादी विद्रोह, जो मुख्य रूप से आदिवासी नेतृत्व वाले थे, 1958, 1962 और 1973 में फिर से हुए। लेकिन 2000 के दशक की शुरुआत में, हिंसा ने एक नया मोड़ ले लिया। बलूच राष्ट्रवादी, जिन्होंने लंबे समय से पाकिस्तानी सरकार और सेना पर बलूचिस्तान के खनिज संसाधनों का दोहन करने, इसके लोगों पर अत्याचार करने और इसके चुनावों में धांधली करने का आरोप लगाया था, संगठित विद्रोही सेनाओं में जुटने लगे, जिन्होंने एक स्वतंत्र बलूच राज्य की मांग की। हालांकि इस अभियान में कई वर्षों तक छिटपुट हमले और घात लगाकर हमला किया गया। लेकिन हाल के वर्षों में उग्रवाद ने गति पकड़ी। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी कैसे बनाई गई? 2000 के दशक की शुरुआत में बना BLA सबसे बड़ा बलूच उग्रवादी समूह है और दशकों से पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विद्रोह कर रहा है, बलूचिस्तान की आजादी और चीन को बाहर निकालने की मांग कर रहा है। BLA के उग्रवादियों ने हमले किए हैं, खास तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और बीजिंग की CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) परियोजना को निशाना बनाया है। बलूचिस्तान में बहुसंख्यक जातीय बलूच, पाकिस्तानी सरकार से नाराज़ हैं क्योंकि वे अपने क्षेत्र के संसाधनों का अनुचित दोहन कर रहे हैं। पाकिस्तान ने 2006 में BLA पर प्रतिबंध लगा दिया था और संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2019 में इसे वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किया था। बलूचिस्तान आंदोलन को बढ़ावा किसने दिया 1999 में सैन्य तख्तापलट के बाद परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान की सत्ता में आए, जिससे बलूचों में अलगाव बढ़ गया। ऐसा इसलिए है क्योंकि बलूच सेना में बलूच प्रतिनिधित्व की कमी को देखते हैं क्योंकि पंजाबी लोगों के हितों का वर्चस्व है – पाकिस्तान में मुख्य जातीय समूह जो देश की आबादी का लगभग 45% हिस्सा है।” बलूचों की एक प्राथमिक शिकायत ग्वादर के मेगा बंदरगाह का निर्माण है, जो 2002 में शुरू हुआ और अभी भी जारी है। इसके महत्व के बावजूद, पाकिस्तानी सरकार ने ग्वादर विकास प्रक्रिया से बलूचों को बाहर रखा है। यह परियोजना पूरी तरह से संघीय सरकार द्वारा संचालित है और विशाल बंदरगाह के निर्माण में कुछ बलूचों को रोजगार दिया गया है, इसके बजाय चीनी इंजीनियरों और मजदूरों पर निर्भर है। इंटरनेशनल अफेयर्स रिव्यू की एक रिपोर्ट के अनुसार, बलूच और पाकिस्तानी सरकार के बीच तनाव को बढ़ाने वाला एक अन्य कारक 2006 में सेना द्वारा उनके नेता नवाब अकबर बुगती की हत्या है। 2008 में मुशर्रफ की सैन्य सरकार से राष्ट्रपति आसिफ अली ज़दारी की नागरिक सरकार में परिवर्तन ने बलूच असंतोष को कम करने में बहुत कम मदद की। 2009 में, 792 हमले हुए जिनमें 386 मौतें हुईं; लगभग 92% हमले बलूच राष्ट्रवादी उग्रवादियों से जुड़े थे। … Read more

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