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दिल्ली में BJP सरकार ने मुफ्त वाली एक सुविधा बंद कर दी, पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने किया दावा

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) ने दावा किया है कि दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज वाली सुविधा बंद कर दी है। दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने गुरुवार को दावा किया कि बजट में इस योजना के लिए फंड आवंटित नहीं किया गया और चुपचाप इस बंद कर दिया गया है। हाल ही में दिल्ली में पार्टी के संयोजक बनाए गए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार की ओर से पेश किए गए बजट की डिटेल अब सामने आ रही है और कुछ इतनी खतरनाक है कि दिल्ली में हाहाकार मचने वाला है। दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ‘2017 में अरविंद केजरीवाल ने प्रावधान किया था कि यदि कोई मरीज दिल्ली सरकार के अस्पताल में सर्जरी के लिए आता है और उसे एक महीने के भीतर का समय नहीं मिलता है तो वह निजी अस्पताल में ऑपरेशन करवा सकता है और खर्च सरकार वहन करेगी।’ उन्होंने दावा किया कि अब रेखा गुप्ता सरकार ने इसे बंद कर दिया है। दिल्ली सरकार ने 2017 में यह भी तय किया था कि यदि सरकारी अस्पताल में एमआरआई और सिटी स्कैन नहीं हो सकता है तो निजी अस्पताल से मुफ्त में करवा सकते हैं। भारद्वाज ने कहा कि इस योजना के लागू होने के बाद एक ही साल में 47 हजार मरीजों ने निजी अस्पतालों सर्जरी या जांच करवाई।

टीम इंडिया का अगला असाइनमेंट जून में, रोहित और कोहली को करना होगा ये काम, तभी मिलेगी टेस्ट टीम में जगह!

नई दिल्ली भारतीय खिलाड़ी इस समय इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपील के 18वें सीजन में व्यस्त हैं। टीम इंडिया का अगला असाइनमेंट जून में शुरू होगा, जबकि आईपीएल मई के आखिरी सप्ताह तक चलेगा। ऐसे में 20 जून से इंग्लैंड के खिलाफ उन्हीं की सरजमीं पर खेली जाने वाली टेस्ट सीरीज से पहले भारतीय खिलाड़ी क्या करेंगे? ये सवाल सभी के दिमाग में होगा, लेकिन अब इसका जवाब मिल गया है। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली समेत कई खिलाड़ी इंडिया ए के लिए खेलने वाले हैं, जो टेस्ट क्रिकेट में फ्लॉप चल रहे हैं। इंग्लैंड के खिलाफ खेली जाने वाली पांच मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले इंडिया ए को इंग्लैंड का दौरा करना है। इसी टूर मैचों में रोहित शर्मा और विराट कोहली के खेलने की संभावना है। दोनों खिलाड़ी जनवरी में रणजी ट्रॉफी भी खेले थे। दोनों ही खिलाड़ी फेल रहे थे। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भी दोनों खिलाड़ियों का प्रदर्शन निराशाजनक था। ऐसे में इनके सिलेक्शन को लेकर उठ रहे सवालों की वजह से इन दिग्गज खिलाड़ियों को इंडिया ए के लिए मुकाबले खेलने होंगे। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में भारत के हालिया संघर्ष के बाद बीसीसीआई ने कई नए नियम बनाए हैं। उनमें से एक यह भी है कि महत्वपूर्ण विदेशी दौरों से पहले टेस्ट खिलाड़ियों को फॉर्म में आने के लिए इंडिया ए सेटअप में खेलना होगा। इंडिया ए को इंग्लैंड लॉयन्स के खिलाफ दो मैच खेलने हैं। एक मैच 30 मई से है, जबकि दूसरा मैच 6 जून से है। 25 मई को आईपीएल का फाइनल है। अगर मुंबई और आरसीबी जल्दी टूर्नामेंट से बाहर हो जाती हैं तो रोहित और विराट दोनों मैच भी खेल सकते हैं, लेकिन प्लेऑफ में टीमों के पहुंचने पर दोनों 6 जून से खेले जाने वाले दूसरे मैच में शिरकत कर सकते हैं।

32 गौवंश को ठूंस-ठूंस कर कत्लखाने ले जा रहे ट्रक पुलिस ने पकड़ा , आरोपी फरार

दुर्ग दुर्ग जिले के अहिवारा क्षेत्र में गौवंश से भरी एक ट्रक को पुलिस ने पकड़ा है. ट्रक में 32 गौवंश को ठूंस-ठूंस कर भरा गया था और उन्हें मुंगेली से नागपुर के कत्लखाने ले जाया जा रहा था. जानकारी के अनुसार, मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर नंदनी थाना पुलिस ने माटरा और खजरी गांव के बीच सड़क पर घेराबंदी कर गौवंश से भरे ट्रक को पकड़ा. लेकिन पुलिस को देख ड्राइवर और सह-चालक मौके से फरार हो गए. वहीं पुलिस ने गौवंश को थाने लाकर चारा-पानी दिया और पशु चिकित्सकों से उनका इलाज कराया जा रहा है. नंदनी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है तथा फरार आरोपियों की तलाश जारी है.

बिलासपुर नगर निगम के नए नियम से सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद धूमिल

बिलासपुर शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नगर निगम ने सफाई के टेंडर में एक नया नियम जोड़ा है। इसमें अनुभव को अनिवार्य कर दिया गया है। इस बदलाव के चलते अब केवल वे ठेकेदार ही टेंडर के पात्र होंगे, जिन्होंने पहले सफाई कार्य में अनुभव प्राप्त किया है। हालांकि, इस नियम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, इससे नए ठेकेदारों के लिए टेंडर हासिल करना लगभग असंभव हो गया है। कई लोगों का मानना है कि यह नियम पुराने ठेकेदारों के पक्ष में एक तरह का आरक्षण साबित हो सकता है, जिससे सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद धूमिल होती दिख रही है। नगर निगम द्वारा सफाई कार्यों के लिए समय-समय पर टेंडर जारी किए जाते हैं। इस बार के टेंडर में अनुभव को अनिवार्य शर्त बना दिया गया है। इससे नए ठेकेदारों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं, क्योंकि जिनके पास पूर्व में सफाई का ठेका नहीं रहा, वे टेंडर प्रक्रिया में शामिल ही नहीं हो पाएंगे। पुराने ठेकेदारों का बना रहेगा एकाधिकार इससे पुराने ठेकेदारों का एकाधिकार बना रहेगा और वे अपनी मनमानी जारी रखेंगे। शहर में सफाई व्यवस्था पहले से ही सवालों के घेरे में है। वर्तमान में सफाई व्यवस्था की स्थिति खराब है, लेकिन पुराने ठेकेदारों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती। अब जब टेंडर प्रक्रिया में अनुभव को अनिवार्य कर दिया गया है, तो वही ठेकेदार फिर से सफाई का काम संभालेंगे, जिनके कार्यों को लेकर पहले ही शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। नगर निगम द्वारा सफाई कार्यों की मानिटरिंग के बावजूद कचरा उठाने और नालों की सफाई में लापरवाही सामने आती रही है। नालियां जाम, गलियों में नहीं उठाया जाता कचरा शहर के कई इलाकों में गंदगी और कचरे के ढेर देखे जा सकते हैं। शहर की कई नालियां ठेकेदारों की मनमानी के कारण बजबजा रही हैं। तंग गलियों में कचरा उठाने कर्मचारी पहुंच नहीं पाते हैं। कई जगहों पर आधा कचरा उठाकर आधा छोड़ दिया जाता है। मुख्य मार्ग को छोड़कर अंदर की गलियों की हालत खराब है। पुराने ठेकेदार लंबे समय से काम कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों से सांठगाठ के कारण उन पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इधर, नए नियम से पुराने ठेकेदारों को एक तरह से इस काम के लिए आरक्षण मिल गया है। जिससे उनकी मनमानी और बढ़ेगी। मुख्य अभियंता ने जारी किया आदेश मुख्य अभियंता राजकुमार मिश्रा ने पांच मार्च को आदेश जारी किया है। इसमें उन्होंने उल्लेख है कि नालियों की सफाई में वही ठेकेदार भाग ले सकता है, जिनके पास तीन साल का अनुभव हो। इसका सीधा मतलब है कि पुराने ठेकेदारों को लाभ पहुंचाना है। एक सवाल यह भी है कि क्या निगम आयुक्त के बिना हस्ताक्षर से आदेश जारी हो सकता है।

मुख्यमंत्री ने की राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन में वर्चुअल भागीदारी

स्पेस पॉलिसी के निर्माण और प्रदेश में इसरो के केंद्र के लिए होंगे प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत विज्ञान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कर रहा नेतृत्व मुख्यमंत्री ने की राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन में वर्चुअल भागीदारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रकृति के अनेक रहस्य सुलझाने की क्षमता विज्ञान में हैं। आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग से अनेक क्षेत्रों में बड़े परिवर्तन हो रहे हैं। फार्मिंग से लेकर फायनेंस तक मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर मेडिसिन तक और एजुकेशन से लेकर कम्यूनिकेशन तक प्रत्येक क्षेत्र का स्वरूप परिवर्तित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गत एक दशक में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तीव्र प्रगति की है। राष्ट्र में एक नई ऊर्जा और शक्ति का संचार हुआ है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की विजनरी नीति का ही परिणाम है कि भारत डिफेंस और अन्तरिक्ष के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। भारत इस क्षेत्र में गलोबल लीडर बन रहा है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा शीघ्र ही स्पेस पॉलिसी बनाई जाएगी। प्रदेश में इसरो के केंद्र की शुरूआत के लिए भी मंथन प्रारंभ किया गया है। हाल ही में जीआईएस के दौरान विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उपयोग पर केंद्रित 4 नीतियों को लागू करने की पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को उज्जैन में हो रहे राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन/ विज्ञान उत्सव और चालीसवें मध्यप्रदेश युवा वैज्ञानिक सम्मेलन का समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वर्चुअल रूप से शुभारंभ करते हुए यह बात कही। यह सम्मेलन कालिदास अकादमी परिसर उज्जैन में हो रहा है। कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार गौतम टेटवाल भी वर्चुअल रूप से शामिल हुए। मध्यप्रदेश को बनाएंगे टेक्नालॉजी और इनोवेशन हब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञान का उपयोग बढ़ाया जाएगा। प्रदेश को टेक्नालॉजी और इनोवेशन हब बनाया जाएगा। हाल ही में इसरो ने स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट अर्थात स्पैडेक्स सैटेलाइट की सफल लॉन्चिंग करते हुए इतिहास रच दिया है। इसके लिए इसरो की टीम बधाई की पात्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैज्ञानिक समाज और विज्ञान प्रौद्योगिकी से जुड़े संस्थानों के सहयोग से मध्यप्रदेश में इसरो की तरह एक केंद्र के विकास पर भी विचार किया जाएगा। वर्तमान में दक्षिण भारत ही ऐसी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। उत्तर और मध्य भारत में इस तरह के केंद्र का अभाव है। प्रदेश में चिकित्सा और अन्य क्षेत्रों में भी विज्ञान का प्रयोग बढ़ रहा है। विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग हो रहा है। मध्यप्रदेश में ड्रोन के माध्यम से राजस्व के क्षेत्र में भी नक्शे बनाने की शुरूआत की गई है। रायसेन से राष्ट्रीय स्तर पर शहरी बस्तियों के भूमि सर्वेक्षण का पायलेट प्रोजेक्ट शुरू हुआ। प्रदेश के अन्य शहरों में भी जमीन,भूखण्ड और बस्तियों का डिजिटल नक्शा बनाने की पहल हुई है। इससे संपत्ति के स्वामित्व के रिकार्ड्स रखना आसान होगा। अनेक क्षेत्रों में विज्ञान का उपयोग कार्यों को आसान बना रहा है। उज्जैन है काल गणना का केंद्र, चार नई नीतियों के माध्यम से विज्ञान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति भी विज्ञान आधारित है। हम अनेक शुभ कार्य नवग्रह पूजन से प्रारंभ करते हैं। विक्रम संवत 2082 आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के काल से लेकर अब तक उज्जैन के इतिहास,कला, संस्कृति और अध्यात्म के साथ ही विज्ञान के केंद्र होने का उल्लेख करते हुए कहा कि हम सभी उज्जैन को काल गणना के केंद्र के रूप में जानते हैं। इस संबंध में भी निरंतर अनुसंधान हो रहा है। हम नूतन का स्वागत करते हुए पुरातन परम्पराओं को भी साथ रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवा वैज्ञानिक सम्मेलन और राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन की थीम “विकास की बात विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार एक साथ”प्रासंगिक है। प्राचीन भारतीय विज्ञान परम्परा पर आधारित विभिन्न सत्रों का आयोजन सराहनीय है, जिसमें लगभग 300 शोधार्थी और युवा वैज्ञानिक 17 विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं। प्रौद्योगिकी और नवाचार आज की आवश्यकता है। हाल ही में सम्पन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आईटी विभाग के माध्यम से 4 महत्वपूर्ण नीतियां मध्यप्रदेश ड्रोन सवंर्धन और उद्योग नीति-2025, मध्यप्रदेश एनीमेशन, विजुअल एफैक्टस, गैमिंग कामिक्स और विस्तारित रियलिटी (एवीजीसी- एक्सआर) नीति-2025, मध्यप्रदेश सेमी कंडक्टर नीति-2025 और मध्यप्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी)नीति-2025 घोषित की गई हैं। वैज्ञानिक सम्मेलन में स्पेस पॉलिसी बनाने का सुझाव आया है। इस नाते मध्यप्रदेश की स्पेस पॉलिसी तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन के सभी प्रतिभागियों को भागीदारी के लिए बधाई दी। राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र हैदराबाद के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव वैज्ञानिक सोच रखते हैं, जिस तरह देश डिफेंस प्रोडक्शन, स्पेस और बॉयो टेक्नालॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, मध्यप्रदेश भी इन क्षेत्रों में प्रयासरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पेस पॉलिसी-2023 लाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऐसे चंद मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं जो इस क्षेत्र में नवाचार के लिए उत्साहित हैं। युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के लिए शीघ्र ही मेपकास्ट के सहयोग से अनुबंध किया जाएगा। कृषि बीमा योजना जैसे कार्य स्पेस टेक्नोलॉजी के माध्यम से हो रहे हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि प्रदेश में इस तरह के वैज्ञानिक सम्मेलन अन्य स्थानों पर भी किए जाएंगे। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु राकेश सिंघई, विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक और मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी, विक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, विज्ञान भारती के राष्ट्रीय महासचिव विवेकानंद पई,भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के एमेरिट्स वैज्ञानिक सुधीर मिश्रा और महानिदेशक, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल प्रो. गोवर्धन दास, निदेशक नेशनल इनोवेशन फाउन्डेशन डॉ. अरविन्द रानाडे, प्रमुख सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग, प्रोफेसर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गांधीनगर प्रो. मनीष जैन भी सम्मेलन में शामिल हुए। समत्म भवन से मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल और अपर मुख्य सचिव सूचना प्रौद्योगिकी संजय दुबे भी सम्मेलन के इस सत्र में उपस्थित हुए।  

विशेषयोग्य जन बच्चों के लिए गुरुवार को “देखो अपना शहर” जागरूकता यात्रा का हुआ आयोजन

जयपुर, राजस्थान दिवस के अवसर पर पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित हो रहें सप्ताहभर के कार्यक्रमों की श्रृंखला में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी की उपस्थिति में जंतर मंतर पर प्रातः 9.15 बजे से विशेषयोग्य जन  बच्चों के लिए गुरुवार को “देखो अपना शहर” जागरूकता यात्रा का आयोजन किया गया। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने इस अवसर पर विशेषयोग्य जन बच्चों से स्नेहपूर्वक बातचीत भी की। उनके इस आत्मीय संवाद से विशेषयोग्य जन  बच्चे उत्साहित और प्रसन्न नजर आये।  उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने इस अवसर पर कहा कि विशेष योग्यजन बच्चों को प्रकृति की ओर से विशेष प्रतिभा और ऊर्जा प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यह बच्चे कई मायनो में सामान्य बच्चों से भी अधिक योग्य हैं। इनकी योग्यता, प्रतिभा और ऊर्जा का सदुपयोग राष्ट्र और प्रदेश के विकास के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। राजस्थान को अग्रणी प्रदेश बनाने में राज्य सरकार ऐसे विशेष योग्यजन बच्चों की प्रतिभा का सदुपयोग करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्हें प्रेरित और प्रोत्साहित करने के लिए संकल्पित है। विशेषयोग्य जन बच्चों ने फूल देकर किया स्वागत, उपमुख्यमंत्री ने दिए उन्हें उपहार उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने विशेषयोग्य जन बच्चों को उपहार दिए जबकि बच्चों ने उनको फूल देकर उनका स्वागत किया। उपमुख्यमंत्री ने विशेषयोग्य जन बच्चों को जंतर मंतर, सिटी पैलेस और अल्बर्ट हॉल सहित आमेर भ्रमण करवाने के भी अधिकारियों को निर्देश दिए। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ाने पर दिया जोर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के साथ जंतर मंतर देखने आये विदेशी पर्यटकों ने फोटो खिचवाए। उपमुख्यमंत्री ने विदेशी पर्यटकों को राजस्थान के गावों का भ्रमण करने के लिए भी प्रोत्साहित किया। वहीं उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए बाड़मेर यात्रा में उत्तरलाई के गांव में की गई अपनी यात्रा को अवस्मरणीय बताया। उन्होंने कहा सीमावर्ती क्षेत्र की महिलाएं अपने गांव में मजबूती के साथ दैनिक जीवन के सारे काम करती हैं। मैंने उन महिलाओं के साथ समय बिताया उनके दैनिक जीवन के काम जैसे चक्की पीसना और अन्य काम भी उनके साथ किये। महिलाएं सशक्त हो रही हैं। उन्होंने कहा कि बाड़मेर में आयोजित महिला सम्मलेन बहुत सफल रहा।  उन्होंने कहा कि उक्त सम्मलेन में 20 हजार महिलाओं के स्थान पर 30 हजार महिलाओं ने सहभागिता की। सरकार महिला सशक्तिकरण के नित नए नवाचार कर रही है। जिससे महिलाओं और बालिकाओं के विकास के नये अवसर मिल रहें हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में महिला सशक्ति करण की कई योजनाएं संचालित हो रही है।

‘पोषण भी, पढाई भी‘ थीम के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया गया प्रशिक्षण

 शहडोल  कलेक्टर डॉ. केदार सिंह के निर्देशन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास श्री मनोज लारोकर के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग अन्तर्गत संचालित आंगनवाड़ी केन्द्रों की आंगनवाडी कार्यकर्ताओ को बच्चो के विकास के आयामों के मूल्यांकन में क्षमता वृद्धि कर सक्षम बनाने के उद्देश्य से आंगनवाडी एवं मिशन पोषण 02 अन्तर्गत ‘पोषण भी, पढाई भी‘ थीम के तहत् तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जिले में संचालित समस्त आंगनवाडी कार्यकर्ताओ को प्रदान किया गया। पोषण भी, पढ़ाई भी प्रशिक्षण अन्तर्गत आंगनवाडी कार्यकर्ताओ को 03 से 06 वर्ष के बच्चो में शाला पूर्व शिक्षा की आधारशिला एवं 0 से 03 वर्ष के बच्चो में नवचेतना गतिविधियों के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण आयोजित किए गए। तीन दिवसीय प्रशिक्षण के प्रथम दिवस पढाई-विषय पर प्री-टेस्ट्, अपेक्षानुसार वातावरण, पोषण भी पढाई भी के लिए तर्क, प्रारंम्भिक बाल शिक्षा के महत्व, बच्चो की आकांक्षाओ की समझ, बच्चों में विकास के क्षेत्रो का परिचय, भाषा और साक्षरता विकास, अधिगम सहायको का महत्व (टी.एल.एम.) शैक्षणिक सामग्री व अधिगम सामग्री का निर्माण, कक्षा का संचालन एवं बच्चो के लिए एक दिनचर्या की योजना बनाना आदि विषय पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के द्वितीय दिवस पोषण- विषय पर स्वस्थ बच्चे और मानव जीवन चक्र में पोषण की भूमिका के बारे में चर्चा, पोषण संबंधी उपायो पर चर्चा और प्रस्तुति, माइक्रो सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी विकारों पर चर्चा एवं प्रस्मृति, पोषण परामर्ष पर नाटिका, सेम-मेम बच्चो की पहचान रोकथाम प्रबंधन, स्तनपान के लाभ, स्तनपान की प्रारंम्भिक शुरूआत और कोलोस्ट्रम के लाभो की समझ, उचित स्थिरता और खाद्य विविधता के साथ आयु-विशिष्ट पूरक पोषण आहार का महत्व, 03 से 06 वर्ष के बच्चो के लिए पोषण एवं संतुलित आहार और आहार विविधता का महत्व, व्यक्तिगत स्वच्छता व सफाई, विकास निगरानी व मूल्यांकन के तकनीकें, बाल विकास में माता-पिता और समुदाय को शामिल करने का महत्व व रणनीतियां एवं बच्चो की सुरक्षा एवं संरक्षण विषय पर प्रशिक्षण मात्र ट्रेनरों द्वारा दिया गया। प्रशिक्षण के तृतीय दिवस पोषण भी,पढाई भी- दिव्यांगता की पहचान समावेशन के अधिकार पर सामूहिक चर्चा, जांच अनुसूचियों पर केस स्टडी और चर्चा, बाल पालन प्रणालियों की देख-भाल करने वाले के प्रति जागरूकता पर सामूहिक चर्चा, 0 से 3 वर्ष के पोषण पर चर्चा, एक शिक्षण केन्द्र के रूप में मेरी आंगनवाडी एवं प्रशिक्षण के बाद प्रश्नोत्तरी और सहायक प्रतिबिंब प्रपत्र व प्रमाण पत्र वितरण किया गया।

हॉक फोर्स और एसएसयू में कई पदों पर भर्ती की तैयारी, 300 पद व विशेष सहयोगी दस्ते में 800 पदों पर होगी भर्ती

बालाघाट नक्सलियों के सफाए के लिए पुलिस अपनी रणनीति और संख्या बल को मजबूत करने में जुटी है। नक्सल प्रभावित लांजी और बैहर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से लेकर अनुविभागीय पुलिस अधिकारी की कमान भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी संभालेंगे। अभी यहां युवा अधिकारियों की तैनाती की गई है। पुलिस अधीक्षक नगेंद्र सिंह का कहना है कि युवा आईपीएस को नक्सल आपरेशन की कमान देकर उनके कौशल, सूझबूझ और ऊर्जा का उपयोग किया जा रहा है। बल संख्या को मजबूत करते हुए जल्द ही हॉक फोर्स के 300 पद और विशेष सहयोगी दस्ता(एसएसयू) के करीब 800 पदों पर भर्ती की तैयारी है। छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ के बाद गश्त तेज ये बड़े और अहम फैसले ‘मिशन 2026’ को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं। 20 मार्च को छत्तीसगढ़ में हुईं दो अलग-अलग मुठभेड़ में 30 नक्सलियों को मार गिराने के बाद यहां पुलिस ने अपनी गश्त और तेज कर दी है। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों से लगे करीब 12 कैंप के 700 से अधिक जवान दिन-रात गश्त कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में पुलिस को नक्सलियों की गतिविधि से जुड़े इनपुट भी मिले हैं, जिससे पुलिस पहले से ज्यादा सतर्क है। मिशन 2026 के लिए बढ़ा रहे पद दिसंबर 2022 में नक्सल उन्मूल अभियान के तहत पुलिस ने तीन जिलों के क्षेत्रीय युवक-युवतियों का विशेष सहयोगी दस्ता बनाया था। तब बालाघाट में विशेष सहयोगी दस्ता के 80, मंडला में 30 और डिंडौरी में 40 पदों पर युवाओं की अस्थाई भर्ती की गई थी। मिशन 2026 को देखते हुए बालाघाट पुलिस इन पदों को बढ़ाने जा रही है। युवा आईपीएस अधिकारियों को मौका     मिशन 2026 को देखते हुए मुख्यालय स्तर से हॉक फोर्स और पुलिस के कई पदों पर युवा आईपीएस अधिकारियों को मौका दिया गया है। हॉक फोर्स के 300 और एसएसयू के 800 पदों पर भर्ती की तैयारी है। हमारी कोशिश है कि युवा पुलिस अधिकारियों के कौशल, उनकी सूझबूझ और ऊर्जा का सही उपयोग हो। – नगेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक, बालाघाट   वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटकर हुई ’38 वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) के खतरे से समग्र रूप से निपटने के लिए, भारत सरकार (जीओआई) ने 2015 में ‘एलडब्ल्यूई से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना’ को मंजूरी दी थी। इस नीति में सुरक्षा संबंधी उपायों, विकास हस्तक्षेपों, स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हकों को सुनिश्चित करने आदि से जुड़ी एक बहुआयामी रणनीति की परिकल्पना की गई है। नीति के दृढ़ कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप हिंसा और भौगोलिक विस्तार में लगातार कमी आई है। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। अप्रैल 2018 तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर 90 रह गई है, जुलाई 2021 तक यह संख्या 70 और फिर अप्रैल 2024 तक 38 रह गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश में वामपंथी उग्रवाद को पूरी तरह से समाप्त करने की घोषणा की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बात कही है। उन्होंने बताया, वामपंथी उग्रवादियों (एलडब्ल्यूई) द्वारा हिंसा की घटनाएं जो 2010 में अपने उच्चतम स्तर 1936 पर पहुंच गई थीं, 2024 में घटकर 374 रह गई हैं। यानी 81 प्रतिशत की कमी आई है। इस अवधि के दौरान कुल मौतों (नागरिक + सुरक्षा बल) की संख्या भी 85 प्रतिशत घटकर 2010 में 1005 से 2024 में 150 हो गई है। पिछले 06 वर्षों के दौरान, वामपंथी उग्रवादियों द्वारा हिंसा की घटनाएं जो 2019 में 501 थीं, 2024 में घटकर 374 हो गई हैं, यानी 25 प्रतिशत की कमी। इस अवधि के दौरान कुल मौतों (नागरिक + सुरक्षा बल) की संख्या भी 26 प्रतिशत घटकर 2019 में 202 से 2024 में 150 हो गई है। वर्ष 2022 और 2023 में हिंसा में वृद्धि वामपंथी उग्रवादियों के खिलाफ बढ़े हुए अभियानों के कारण है, क्योंकि सुरक्षा बलों ने सीपीआई (माओवादी) के मुख्य क्षेत्रों में प्रवेश करना शुरू कर दिया है। सुरक्षा के मोर्चे पर, भारत सरकार (जीओआई) वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बटालियन, राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए प्रशिक्षण और धन, उपकरण और हथियार, खुफिया जानकारी साझा करना, किलेबंद पुलिस स्टेशनों का निर्माण आदि प्रदान करके क्षमता निर्माण के लिए सहायता करती है। सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत सुरक्षा बलों की परिचालन और प्रशिक्षण आवश्यकताओं से संबंधित आवर्ती व्यय, आत्मसमर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादियों के पुनर्वास के लिए राज्यों द्वारा किए गए व्यय, सामुदायिक पुलिसिंग, ग्राम रक्षा समितियों और प्रचार सामग्री आदि के लिए सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत 2014-15 से 2024-25 के दौरान 3260.37 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। विशेष अवसंरचना योजना के तहत विशेष खुफिया शाखाओं, विशेष बलों, जिला पुलिस को मजबूत करने और फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशनों (एफपीएस) के निर्माण के लिए धनराशि प्रदान की जाती है। एसआईएस के तहत 1741 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इस योजना के तहत पहले से निर्मित 400 एफपीएस के अलावा 226 एफपीएस का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, वामपंथी उग्रवाद प्रबंधन के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सहायता (एसीएएलडब्ल्यूईएम) योजना के तहत वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टरों और सुरक्षा शिविरों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए 2014-15 से 2024-25 की अवधि के दौरान केंद्रीय एजेंसियों को 1120.32 करोड़ रुपये दिए गए हैं। विकास के मोर्चे पर, प्रमुख योजनाओं के अलावा, भारत सरकार ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में कई विशिष्ट पहल की हैं, जिसमें सड़क नेटवर्क के विस्तार, दूरसंचार संपर्क में सुधार, कौशल और वित्तीय समावेशन पर विशेष जोर दिया गया है। सड़क संपर्क के विस्तार के लिए 14,618 किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में दूरसंचार संपर्क में सुधार के लिए 7,768 टावर लगाए गए हैं। कौशल विकास के संबंध में 46 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और 49 कौशल विकास केंद्र (एसडीसी) चालू किए गए हैं। आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए 178 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) चालू किए गए हैं। वित्तीय समावेशन के लिए, डाक विभाग ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में बैंकिंग सेवाओं के साथ 5731 … Read more

एमपी सरकार नया टैक्स नहीं लगाएगी। जनता की आय बढ़ाने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे: सीएम यादव

भोपाल  एमपी सरकार नया टैक्स नहीं लगाएगी। जनता की आय बढ़ाने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव ने यह बात एक निजी कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा, सरकार अपने संसाधनों का हर संभव अधिक से अधिक उपयोग करेगी और जनता को सरकारी योजनाओं के माध्यम से सशक्त बनाया जाएगा, ताकि वे सरकार के जरिए स्वयं की आय बढ़ा सके। सरकार इस काम में जो मदद कर सकती है, वे सभी मदद पहुंचाई जाएगी। जानकारी के लिए बता दें कि जीआइएस की सफलता को लेकर सीएम का सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि भोपाल की प्राकृतिक संपदा और इसके पुरा-इतिहास के संवर्धन में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। भोपाल को एक सुंदर मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाएंगे। भोजपुर मंदिर रोड पर ‘भोज द्वार’ और इंदौर-उज्जैन मार्ग पर विक्रमादित्य के सुशासन के प्रतीक स्वरूप ‘विक्रम द्वार’ बनाए जाएंगे। भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में मध्यप्रदेश पीछे नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि हम विरासत से विकास की ओर बढ़ रहे हैं। अगले 5 साल में हम प्रदेश का सालाना बजट दोगुना कर देंगे। कोई नया टैक्स नहीं लगाएंगे बल्कि नागरिकों की आय बढ़ाकर अपने बजट को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस में विश्व से उद्योगपति भोपाल आए। भोपाल आकर उन सभी को आनंद आ गया, क्योंकि यहां की झीलें, तालाब और यहां की संस्कृति जीवंत हैं, यही हमारी पूंजी है। उन्होंने कहा कि भोपाल देश का एकमात्र राजधानी क्षेत्र है जहाँ मानव और बाघों के सह-अस्तित्व का अनोखा और अद्वितीय उदाहरण विद्यमान है।

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह की अध्यक्षता में हुई पाठ्यपुस्तक निगम की बैठक

स्कूलों में नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए  शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही ‘स्कूल चलें हम अभियान’ की शुरूआत होगी स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह की अध्यक्षता में हुई पाठ्यपुस्तक निगम की बैठक भोपाल प्रदेश में इस वर्ष शालाओं में शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल 2025 से प्रारंभ किया जा रहा है। शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही ‘स्कूल चलें हम अभियान’ की शुरूआत होगी। पाठ्यपुस्तक निगम ने इस वर्ष सत्र शुरू होते ही शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्यपुस्तकों की वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यह जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में मंत्रालय में बुधवार को हुई पाठ्यपुस्तक निगम की बैठक में दी गई। बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता एवं विभागीय अधिकारी मौजूद थे। संभाग स्तर के 8 डिपो के माध्यम से किताबों की व्यवस्था बैठक में बताया गया कि निगम का प्रयास है कि सरकारी स्कूलों के बच्चों को शिक्षण सत्र शुरू होते ही अप्रैल माह में निशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हो जायें। कक्षा एक से कक्षा 12 के विद्यार्थियों के लिये करीब 5 करोड़ 60 लाख पुस्तकें, एक करोड़ 2 लाख फाउंडेशनल लिटरेसी एण्ड न्यूमरेसी (एफएलएन) अभ्यास पुस्तिकाएं और करीब 26 लाख ब्रिज कोर्स की पुस्तकें निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। बैठक में बताया गया कि स्कूल शिक्षा विभाग के मैदानी अमले को बच्चों के बीच में पाठ्य पुस्तकों के वितरण की व्यवस्था समय पर सुनिश्चित करने के लिये कहा गया है। बैठक में निगम के आय-व्यय पत्रक और आगामी वर्ष 2025-26 के प्रस्ताव पर चर्चा कर अनुमोदन दिया गया।  

मध्यप्रदेश की इकलौती तीरंदाज एकेडमी हुई बंद, राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी घर लौटे

जबलपुर मध्यप्रदेश ऑर्चरी एसोसिएशन के पदाधिकारियों, कोच और जिला खेल अधिकारी की मनमानी के सामने तरंदाजी के राष्ट्रीय स्तर के 35 खिलाड़ियों को हार माननी पड़ी। रानीताल की तीरंदाजी एकेडमी को बंद कर दिया गया है। इससे राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी करने वाले खिलाड़ियों के भविष्य पर अंधकार के बादल मंडराने लगे हैं। खिलाड़ियों ने प्रशासनिक अफसरों से मुलाकात की थी। लेकिन, समस्या का समाधान नहीं हुआ। शहर में कोई ठिकाना नहीं अफसरशाही की पराकाष्ठा भी इस मामले में नजर आई। जबरन हॉस्टल और एकेडमी को बंद कर दिया गया। खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। ऐसे में खिलाड़ियों के पास शहर में रुकने के लिए कोई ठिकान नहीं बचा, तो वे अपने-अपने शहर लौट गए। यह है मामला ऑर्चरी के सात और 28 राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों ने आरोप लगाया था कि ऑर्चरी एसोसिएशन ऑफ मध्य प्रदेश के पदाधिकारी उन्हें मानसिक प्रताड़ना दे रहे हैं। शिकायत ऑल इंडिया ऑर्चरी एसोसिएशन से की गई है। जांच कमेटी के सामने मप्र एसोसिएशन का चिट्ठा खोला गया, तो उन्हें और परेशान किया जाने लगा। 25 मार्च को एकाएक एकेडमी बंद कर दी गई। जिला खेल अधिकारी आशीष पांडे समेत अन्य ने खिलाड़ियों पर कई गम्भीर आरोप लगाते हुए एफआइआर तक की धमकी दी है।  पहले दिया था आश्वासन अंतरराष्ट्रीय ऑर्चरी खिलाड़ी सृष्टी सिंह और रागिनी मार्को समेत अन्य खिलाड़ियों ने बताया कि एडीएम मिशा सिंह से उन्होंने मुलाकात की थी। उन्होंने ने जिला खेल अधिकारी पांडे से बात की। उसके बाद पांडे ने आश्वासन दिया कि ग्राउंड मिलेगा।  न फोन उठा, न जवाव इस मामले में जिला खेल अधिकारी आशीष पांडे से बात करने का प्रयास किया गया। कॉल किया गया, लेकिन उनका फोन लगातार बंद आता रहा।  मप्र तीरंदाजी एकेडमी की शिफ्टिंग में खेल संचालनालय से कोई निर्देश प्राप्त हुए हैं या मौखिक रूप से कोई आदेश दिया गया है। इस सम्बंध में जिला खेल अधिकारी से लिखित में स्पष्टीकरण मांगा गया है। बच्चों को अभ्यास से नहीं रोका जा सकता। खेल संचालनालय को पत्र लिखा गया है। उत्तर की प्रतीक्षा की जा रही है। उसी आधार पर आगे कार्रवाई करेंगे।     मिशा सिंह अपर कलेक्टर

चैक बाउंसः न्यायालय ने ब्याज सहित राशि जमा करने एवं तीन माह की कैद से किया दंडित

 रायसेन मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक, शाखा पाटनदेव जिला रायसेन द्वारा राजेश कुमार पुत्र मजबूत सिंह यादव निवासी- ग्राम घाट पिपलिया, पोस्ट डाबरा इमलिया, थाना रायसेन, तहसील व जिला रायसेन को कृषि कार्य हेतु किसान क्रेडिट कार्ड के लिये रूपये 2,25,000/- का ऋण दिया गया था। अनुबंध अनुसार अभियुक्त को प्राप्त ऋण ब्याज सहित बैंक को वापिस लौटाना था अभियुक्त ने उक्त ऋण की अदायगी हेतु दिनांक 15.07.2023 को राशि रू. 2,35,000/- का एक चैक मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक, शाखा पाटनदेव में जमा किया था, परन्तु जिस खाते का चैक अभियुक्त द्वारा ऋण खाते में जमा किया था उस खाते में भुगतान योग्य बैलेंस नहीं होने के कारण चैक की राशि का भुगतान ऋण खाते में जमा नहीं हो सका तथा निधि के अभाव में चैक डिसआॅनर हो गया। चैक अनादरण के पश्चात् परिवादी बैंक ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से दिनांक 01.08.2023 को अभियुक्त को रजिस्टर्ड एडी से सूचना पत्र प्रेषित किया था इसके पश्चात् भी अभियुक्त ने चैक राशि का कोई भुगतान नहीं किया। इसलिये परिवादी बैंक द्वारा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विदिशा म.प्र. में यह परिवाद धारा 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम 1881 के तहत पेश किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रायसेन म.प्र. द्वारा धारा 138 एनआई एक्ट के अंतर्गत दिनांक 18/03/2025 को बैंक के पक्ष में निर्णय पारित कर अभियुक्त राजेश कुमार पुत्र श्री मजबूत सिंह यादव निवासी- ग्राम घाट पिपलिया, पोस्ट डाबरा इमलिया, थाना रायसेन, तहसील व जिला रायसेन को चैक की राशि रू.2,35,000/- पर 9 प्रतिशत ब्याज राशि 33,487 सहित कुल राशि रूपये 2,68,487/- (रू. दो लाख अड़सठ हजार चार सौ सत्यासी) का प्रतिकर अदा करने एवं तीन माह की कैद से दंडित किया गया है।

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने महर्षि पतंजलि संस्थान के कैलेण्डर का किया विमोचन

भोपाल स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बुधवार को मंत्रालय में महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान मध्यप्रदेश द्वारा प्रकाशित वार्षिक कैलेण्डर का विमोचन किया। कैलेण्डर में इस वर्ष की थीम भारतीय कालगणना को रखा गया है। इसके अंतर्गत माहवार काल की अवधारणा, कालमायन की इकाइयाँ. हिन्दी तिथियों का वैज्ञानिक आधार, सप्ताह, माह और वर्ष की अवधारणा, देवताओं व असुरों के दिन-रात, युग, ब्रह्मा की आयु, संवत्सर, पञ्चाङ्ग तथा संकल्प मन्त्र को स्थान दिया गया है। यह जानकारी भारतीय कालगणना की समझ के लिये अत्यंत उपयोगी रहेगी। महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के निदेशक प्रभात राज तिवारी ने बताया कि अभी हमारे जितने केलेण्डर हैं, विक्रम संवत, ईसवी संवत, हिजरी संवत, कोई भी 2500 साल से पुराना नहीं है परंतु हमारा प्राचीन केलेण्डर भारतीय सभ्यता के अनुसार लाखों वर्ष पुराना है। उदाहरण के रूप में कलयुग के 5 हजार 125 वर्ष गुजर चुके हैं। इसके पूर्व सतयुग, द्वापर एवं त्रेता युग भी संपन्न हो चुके हैं। यह तथ्य दर्शाता है कि भारतीय सभ्यता अत्यंत प्राचीन है। तथा दुनिया में इसका कोई भी समरूप नहीं है। इस कैलेण्डर में राज्य शासन के द्वारा घोषित समस्त शासकीय अवकाश एवं ऐच्छिक अवकाश को भी दर्शाया गया है, जिससे यह केलेण्डर बहुत उपयोगी बन गया है। इस केलेण्डर में तिथियों का परिवर्तन का समय भी दर्शाया गया है, जिससे कोई भी व्यक्ति यह निर्णय कर सकता है कि कौन सा त्यौहार कब से कब तक रहेगा। कैलेण्डर संबंधी विस्तृत जानकारी संस्थान की वेबसाइट www.mpssbhopal.org पर उपलब्ध है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व रंगमंच दिवस पर दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व रंगमंच दिवस पर प्रदेश के रंगमंच कलाकारों, कर्मियों और प्रेमियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के इंदौर,उज्जैन, जबलपुर, सागर और ग्वालियर में रंगमंच के सक्रिय कलाकार और नाट्य विधा से जुड़े सहयोगी व्यक्ति सिर्फ कला प्रदर्शन ही नहीं सामाजिक दायित्व भी पूरा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रंगमंच एक सामान्य कला नहीं अपितु समाज के जागरण का मंच भी है। प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नाटकों के प्रदर्शन की समृद्ध परम्परा है। पौराणिक विषयों पर नाटकों के प्रदर्शन के साथ ही आधुनिक शैली में प्रकाश संयोजन, अभिनय, रूप सज्जा और मंच सज्जा के प्रयोग करते हुए नाटक कलाकार अपना दायित्व निभाते हैं। इसके साथ ही अनेक सामाजिक समस्याओं का समाधान भी रंगकर्म से जुड़े कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। अद्वितीय अभिनय और प्रतिभा प्रदर्शन से वे मनोरंजन के साथ उपयोगी संदेश समाज तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि नाटकों के माध्यम से विभिन्न संस्कृतियों का सार्वजनिक प्रदर्शन प्रस्तुत करने वाले रंगमंच के समस्त कलाकारों को रंगमंच दिवस श्रेष्ठ भूमिका निभाने की प्रेरणा देता रहेगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहीद गौतम के पात्र उत्तराधिकारी को शासकीय सेवा में लेने के निर्देश पुलिस महानिदेशक को दिए

मऊगंज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास पर मऊगंज जिले के गौतम परिवार को व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा के अंतर्गत एक करोड़ रूपये की राशि का चेक प्रदान किया। भारतीय स्टेट बैंक की पुलिस सेलरी पैकेज योजना में पुलिसकर्मियों को दी जाने वाली पूरक व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा सुविधा के अनुसार परिवार को यह राशि प्रदान की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहीद गौतम के पात्र उत्तराधिकारी को शासकीय सेवा में लेने के निर्देश पुलिस महानिदेशक को दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि कर्तव्य निवर्हन के दौरान अपने प्राणों को उत्सर्ग करने वाले पुलिस उपनिरीक्षक रामचरण गौतम की पत्नी श्रीमती पुष्पा को चेक प्रदान करते हुए कहा कि राज्य शासन ने स्व. गौतम को शहीद का दर्जा देते हुए उनके आश्रितों को एक करोड़ रुपए की सहायता राशि स्वीकृत की है। ग्राम गडरा जिला मऊगंज में कर्तव्य निर्वहन करते हुए इस माह पुलिस उप निरीक्षक रामचरण गौतम शहीद हुए। स्व. गौतम के परिवार को बीमा की अनुदान राशि का चेक सौंपे जाने के अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, सीजीएम एसबीआई म.प्र./छ.ग चंद्रशेखर शर्मा, महाप्रबंधक अजिताभ पाराशर, महाप्रबंधक कुन्दन ज्योति, महाप्रबंधक मनोज कुमार सहित भारतीय स्टेट बैंक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. गौतम की धर्मपत्नी श्रीमती पुष्पा और इस अवसर पर उपस्थित स्व. गौतम के पुत्र धीरेन्द्र और भतीजे सतीश से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधि का जो विधान था वह हुआ लेकिन राज्य शासन द्वारा स्व. रामचरण गौतम के परिवार को पूरा सहयोग दिया जाएगा।  

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