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KVS क्लास 2 से 10वीं एवं बाल वाटिका 2 के लिए आवेदन आज से, 11 अप्रैल है फॉर्म भरने की लास्ट डेट

देशभर के केंद्रीय विद्यालय में बाल वाटिका 2 के साथ ही कक्षा 2 से 10वीं तक एडमिशन के लिए आवेदन प्रक्रिया आज यानी 2 अप्रैल से शुरू हो रही है। जो भी माता-पिता अपने बच्चों को केवीएस में एडमिशन दिलवाना चाहते हैं वे आज से ही ऑनलाइन माध्यम से केवीएस की ऑफिशियल वेबसाइट kvsangathan.nic.in पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म भर सकेंगे। एप्लीकेशन फॉर्म भरने की लास्ट डेट 11 अप्रैल 2025 निर्धारित है। ध्यान रखें कि फॉर्म केवल ऑनलाइन ही भरा जा सकेगा, अन्य किसी भी प्रकार से फॉर्म स्वीकार नहीं होंगे। आवेदन करने का तरीका केवीएस एडमिशन के लिए आवेदन अभिभावक स्वयं से ही मोबाइल के माध्यम से कर सकते हैं। इसके अलावा आप फॉर्म भरने के लिए कैफे की मदद भी ले सकते हैं। आपकी सहूलियत के लिए आवेदन की स्टेप्स यहां दी जा रही हैं जिनको फॉलो कर आसानी से फॉर्म भरा जा सकता है।     केवीएस एडमिशन के लिए अभिभावकों को पहले ऑफिशियल वेबसाइट kvsonlineadmission.kvs.gov.in पर जाना होगा।     इसके बाद आपको जिस कक्षा के लिए आवेदन करना है उसे चुनना होगा।     इसके बाद पहले Registration (sign-up) of first-time user पर क्लिक करके मांगी गई डिटेल भरकर पंजीकरण करना होगा।     रजिस्ट्रेशन होने के बाद Login (sign-in) to the Admission application portal पर क्लिक करके अन्य डिटेल भरनी होगी।     अब डॉक्युमेंट डिटेल, पेरेंट्स डिटेल, स्कूल च्वाइस, डॉक्युमेंट जमा करने के बाद फॉर्म को सबमिट कर देना है और उसका प्रिंटआउट निकालकर अपने पास सुरक्षित रख लेना है। निशुल्क किया जा सकता है आवेदन सभी माता-पिता एवं छात्रों को बता दें कि केवीएस की ओर से एडमिशन के लिए फॉर्म भरने के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में सभी पेरेंट्स निशुल्क रूप से आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर सकते हैं। आवेदन के लिए कक्षा के अनुसार आयु सीमा बाल बाटिका 2: 4 से 5 वर्ष के बीच कक्षा 2: 7 से 9 वर्ष के बीच कक्षा 3: 8 से 10 वर्ष के बीच कक्षा 4: 9 से 10 वर्ष के बीच कक्षा 5: 9 से 11 वर्ष के बीच कक्षा 6: 10 से 12 वर्ष के बीच कक्षा 7: 11 से 13 वर्ष के बीच कक्षा 8: 12 से 14 वर्ष के बीच कक्षा 9: 13 से 15 वर्ष के बीच कक्षा 10: 14 से 16 वर्ष के बीच

MP हाईकोर्ट का फैसला: अपात्र नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को परीक्षा में बैठने की पात्रता नहीं होगी: हाईकोर्ट

जबलपुर नर्सिंग फर्जीवाड़े के मामले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सीबीआइ जांच में जिन कॉलेजों में छात्रों का प्रवेश नहीं पाया गया था, उन कॉलेजों के छात्रों को परीक्षा में बैठने की पात्रता नहीं होगी। हाईकोर्ट के जस्टिस संजय द्विवेदी और जस्टिस अचल कुमार पालीवाल की स्पेशल बेंच ने अपात्र कॉलेजों के छात्रों को पात्र कॉलेजों में 30 दिन के भीतर ट्रांसफर करने के आदेश दिए। सीबीआई जांच में जिन कॉलेजों में नहीं पाए गए प्रवेशित छात्र लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की जनहित याचिका में हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के पालन में आज अपात्र संस्थाओं की मान्यता और संबद्धता की ओरिजनल फाइलें सरकार की ओर से पेश की गई। जिस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को आदेश दिए हैं कि सभी फाइलों का अवलोकन कर अपनी रिपोर्ट सौंपे। जिसमें तुलनात्मक रूप से यह बताना होगा कि जो कॉलेज सीबीआई जांच में अपात्र पाए गए उन्हें आखिर किन परिस्थितियों में और किन- किन कमियों के होते हुए भी निरीक्षणकर्ता अधिकारियों द्वारा अनुमतियां दी गई।  बैक डेट पर प्रवेश का आरोप याचिकाकर्ता ने आवेदन पेश कर हाईकोर्ट को बताया कि कई कॉलेजों में सीबीआइ जांच के दौरान प्रवेश नहीं पाया गया। लेकिन भविष्य को देखते हुए जैसे ही छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई, बिना प्रवेश वाले कॉलेजों में बैक डेट से प्रवेश दिखाकर परीक्षा में बैठाने की कोशिश की जा रही है। इसे गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआइ जांच के दौरान जिन कॉलेजों में छात्रों के नामांकन मिले थे, उन्हें ही परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलेगी। छात्रों के नामांकन उसी रिपोर्ट पर किए जाएंगे और आवश्यकता पडऩे पर सरकार परीक्षा की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेगा।

राजस्थान: हाईकोर्ट ने सरकार से 6,759 ग्राम पंचायतों के चुनावों के स्थगन पर लगाई फटकार

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने भजनलाल सरकार से 6,759 ग्राम पंचायतों के चुनावों के स्थगन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा है कि राज्य में पंचायत चुनाव आखिर कब कराए जाएंगे? जस्टिस इंद्रजीत सिंह की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं।  दरअसल, जस्टिस इंद्रजीत सिंह की खंडपीठ ने इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए सरकार को निर्देश दिया कि 4 फरवरी 2025 के आदेश की पालना करते हुए पंचायत चुनाव का स्पष्ट शेड्यूल प्रस्तुत किया जाए। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 7 अप्रैल 2025 तय की है। याचिकाकर्ता ने सरकार के जवाब को बताया अपूर्ण याचिकाकर्ता गिरिराज सिंह देवंदा की ओर से पेश अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने अदालत में आपत्ति जताई कि सरकार ने पिछले आदेशों के बावजूद पंचायत चुनावों की कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं की है। उन्होंने कहा कि सरकार को कोर्ट के आदेश का अनुपालन करना चाहिए था, लेकिन इसके हलफनामे में किसी निश्चित चुनाव कार्यक्रम का उल्लेख नहीं किया गया। सरकार ने चुनाव स्थगित करने के लिए दिए तीन तर्क राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में प्रस्तुत अपने जवाब में चुनाव स्थगन को उचित ठहराने के लिए तीन प्रमुख कारण बताए हैं। पहला तो ये कि प्रदेश में नगरीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव एक साथ कराने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा, जो यह अध्ययन करेगी कि एक साथ चुनाव कराने से धन, श्रम और समय की कितनी बचत होगी और इससे स्थानीय निकायों को कैसे सशक्त किया जा सकता है। वहीं, दूसरा तर्क बताया कि पिछली सरकार ने कई नए जिले बनाए थे, जिनमें से 9 जिलों को वर्तमान सरकार ने समाप्त कर दिया। अब पूरे प्रदेश में पंचायतों का पुनर्गठन और नगरीय निकायों का परिसीमन किया जा रहा है, इसलिए चुनावों को अभी स्थगित किया गया है। इसके अलावा सरकार का कहना है कि उसने राजस्थान पंचायत राज अधिनियम, 1994 की धारा 95 के तहत प्रशासकों की नियुक्ति की है। यह प्रावधान वैकल्पिक है, जिससे सरकार यह तय कर सकती है कि प्रशासकों की नियुक्ति कैसे की जाए। बताते चलें कि हाईकोर्ट का रुख अब और सख्त हो सकता है, क्योंकि सरकार ने पूर्व आदेशों का स्पष्ट अनुपालन नहीं किया है। यदि अगली सुनवाई 7 अप्रैल को सरकार चुनावों की कोई निश्चित तिथि प्रस्तुत नहीं करती, तो कोर्ट द्वारा कड़ा रुख अपनाया जा सकता है। याचिकाकर्ताओं का आरोप- संविधान का उल्लंघन याचिकाकर्ताओं के वकील प्रेमचंद देवंदा का कहना है कि राज्य सरकार ने 16 जनवरी 2025 को एक अधिसूचना जारी कर 6,759 पंचायतों के चुनाव स्थगित कर दिए, जो संविधान के अनुच्छेद 243ई, 243के और राजस्थान पंचायत राज अधिनियम 1994 की धारा 17 का उल्लंघन है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार ने लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई और ग्रामीण संस्थाओं को अस्थिर कर दिया है और राज्य में ग्राम पंचायतों के चुनाव रोककर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया है। सरपंचों को प्रशासक बनाने का फैसला विवादों में सरकार ने जनवरी में चुनाव कराने की जगह मौजूदा सरपंचों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया। पंचायतों में प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरपंचों की सहायता हेतु एक प्रशासकीय समिति गठित की गई, जिसमें उप सरपंच और वार्ड पंच सदस्य शामिल होंगे। यह मॉडल भाजपा शासित मध्य प्रदेश की तर्ज पर लागू किया गया है, जहां पहले भी इसी तरह से सरपंचों को प्रशासक नियुक्त किया गया था। हालांकि, इस फैसले के बाद विपक्ष और पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों ने कड़ी आपत्ति जताई है।

मंडला में नक्सली मुठभेड़ में दो महिला नक्सली ढेर, :एक एसएलआर और एक भरमार बंदूक मिली

 मंडला मंडला जिले के बिछिया रेंज में सीआरपीएफ और पुलिस की हॉक फोर्स के संयुक्त ऑपरेशन में दो महिला नक्सलियों को मार गिराया गया है। मुठभेड़ के बाद सीआरपीएफ और पुलिस हॉक फोर्स ने सर्चिंग में सीआरएल समेत ऑटोमेटिक हथियार और वायरलेस सेट बरामद किए गए हैं। घने जंगल में सीआरपीएफ और हॉक फोर्स के जवानों द्वारा सघन सर्चिंग की जा रही है।   मुठभेड़ बुधवार सुबह करीब 10 बजे बिछिया थाना क्षेत्र के मुंडिदादर और गन्हेरिदादर के जंगल में हुई। सर्चिंग के दौरान मुठभेड़ स्थल से एक एसएलआर, एक भरमार बंदूक, वायरलेस सेट और दैनिक जरूरत का सामान मिला है। सीनियर अफसर मौके पर पहुंच रहे हैं। सीआरपीएफ से मिली जानकारी  के अनुसार भिलवानी कैंप के पास स्थित एआरो क्षेत्र में नक्सलियों से मुठभेड़ हो रही है। जिसमें अभी तक दो महिला नक्सलियों की मौत हो चुकी है। जंगल में सर्चिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है, यहां अन्य नक्सलियों के छिपे होने की भी आशंका जताई जा रही है। जंगल में मुठभेड़ हुई सूत्रों ने बताया कि सुरक्षाबलों के जवानों की टीम बिछिया थाना अंतर्गत मुंडिदादर गन्हेरिदादर के जंगल में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी. तभी जंगल में पुलिस और नक्सलियों की मुठभेड़ शुरू हो गई. इस मुठभेड़ में 2 महिला नक्सली मारी गईं. वहीं मौके से एक एसएलआर और भरमार बंदूक बरामद की. इससे पहले 25 लाख की महिला नक्सली का हुआ खात्मा इससे पहले, महिला नक्सली रेणुका को 31 मार्च को सुरक्षा बलों द्वारा मार गिराया गया. इसके अलावा, सुरक्षा बलों ने 9 अन्य नक्सलियों को भी ढेर किया था. जानकारी के मुताबिक, मुठभेड़ में मारी गई नक्सली रेणुका को बानु और सरस्वती के नाम से भी जाना जाता था. यह वारंगल के कडवेन्डी की रहने वाली थी. छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इसके सिर पर 25 लाख का इनाम रखा गया था. सुरक्षा बलों के मुताबिक, इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान में अब तक 119 नक्सलियों को मार गिराया जा चुका है. बालाघाट में मार गिराई थीं चार महिला नक्सली इससे पहले 19 फरवरी को बालाघाट के गढ़ी थाना इलाके में हुई मुठभेड़ में चार महिला नक्सली मारी गई थी। ये सभी कान्हा भोरमदेव एबी डिवीजन खटिया मोर्चा दलम की सदस्य थी। इनमें से एक आशा पर 14 लाख का इनाम था। सुकमा- दंतेवाड़ा सीमा में भी हुई थी मुठभेड़ इससे पहले, छत्तीसगढ़ के सुकमा-दंतेवाड़ा सीमा में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच शुक्रवार को मुठभेड़ हुई थी, जिसमें 16 नक्सली मारे गए थे. वहीं, 4 सुरक्षा बल घायल हो गए थे.

वक्फ बिल को लेकर जश्न, मस्जिद के सामने आतिशबाजी, घरों से बाहर निकले लोग

भोपाल मध्य प्रदेश के भोपाल में मुस्लिम समाज के कई लोग वक्फ संशोधन बिल का समर्थन कर रहे हैं। भोपाल में कई छोटे-छोटे मुस्लिम संगठनों ने इस बिल के सपोर्ट में रैलियां निकाली। इस दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं हाथ में ‘शुक्रिया मोदीजी’ के पोस्टर थामे सड़क पर उतरीं। खास बात यह है कि मुस्लिम समाज की महिलाओं ने भी इस बिल का समर्थन किया और हाथों में पोस्टर और फूल लेकर पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। बता दें कि लोकसभा में आज वक्फ संशोधन बिल पेश किया जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू बिल को सदन के पटल पर रखेंगे। इसके बाद बिल पर चर्चा शुरू होगी। सरकार की कोशिश आज ही बिल को लोकसभा से पास कराने की है जिसके बाद इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। ढोल बाजे के साथ की आतिशबाजी इससे पहले आज भोपाल के हताई खेड़ा डैम के पास आनंदपुरा कोकता के मुस्लिम समाज के लोग इकट्ठा हुए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बैनर-पोस्टर लेकर आभार जताया। मुस्लिम समाज की खुशी का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि यहां लोग जमकर ढोल बजाकर आतिशबाजी भी कर रहे हैं। वक्फ बिल को लेकर भोपाल में जश्न राजधानी भोपाल में वक्फ बोर्ड अमेंडमेंट बिल और पीएम मोदी के समर्थन में जश्न. ईद जैसा माहौल मुस्लिम समुदाय ने जाहिर की खुशी. बड़ी संख्या में पुरूष, बुजुर्ग महिलाएं निकले घर से बाहर. रहमत मस्जिद के सामने आतिशबाजी के साथ ढोल नगाड़ों पर झूमते नजर आए लोग. महिलाएं बोली यह हमारे हित में, दिल से मोदी जी के साथ हैं. हाथों में गुलाब, थैंक्यू मोदी जी , वी स्पोर्ट मोदी जी के पोस्टर लेकर जमकर जश्न. नए वक्फ बिल में क्या है? मौजूदा सरकार ने अपने सहयोगी दलों की मांग को स्वीकार करते हुए नए बिल में कई परिवर्तन किए हैं, जैसे 5 वर्षों तक इस्लाम धर्म का पालन करने वाला ही वक्फ को अपनी संपत्ति दान कर सकेगा। दान की जाने वाली संपत्ति से जुड़ा कोई विवाद होने पर उसकी जांच के बाद ही अंतिम फैसला होगा। इसके साथ ही पुराने कानून की धारा 11 में संशोधन को भी स्वीकार कर लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि वक्फ बोर्ड के पदेन सदस्य चाहे वह मुस्लिम हों या गैर मुस्लिम, उसे गैर मुस्लिम सदस्यों की गिनती में शामिल नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ यह कि वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या बढ़ सकती है।

इंदौर में पेट में 8 किलो गठान से परेशान थी 15 साल की बच्ची, डॉक्टरों ने ऑपेरशन कर दिया नया जीवन

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के एमटीएच अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने कमाल कर दिखाया। एक 15 वर्षीय किशोरी के पेट से 8 किलो की गठान निकालकर उसकी जान बचा ली। यह ऑपरेशन मेडिकल क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इतनी बड़ी गठान को निकालना अत्यधिक जोखिम भरा था। लंबे समय से झेल रही थी तकलीफ सरदारपुर निवासी रेणुका (15) को पिछले कुछ महीनों से पेट दर्द की शिकायत थी। धीरे-धीरे दर्द बढ़ने लगा और उसके पेट में सूजन भी दिखाई देने लगी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे महंगे अस्पतालों में इलाज कराने में असमर्थ थे। जब समस्या गंभीर हो गई और सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी, तो वे इंदौर के एमटीएच अस्पताल पहुंचे। जांच में सामने आई 36 सेमी की गठान एमटीएच अस्पताल में डॉक्टर सुमित्रा यादव की यूनिट ने रेणुका की प्रारंभिक जांच की और पेट में गठान का संदेह हुआ। बाद में एमआरआई स्कैन में पुष्टि हुई कि उसके अंडाशय में 36 सेंटीमीटर की विशाल गठान थी। इसकी वजह से न केवल पेट में दर्द हो रहा था, बल्कि वह ठीक से चल-फिर भी नहीं पा रही थी। जटिल था ऑपरेशन मरीज की उम्र कम थी और शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी भी थी, इसलिए यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था। लेकिन गठान का बढ़ता आकार उसकी जान के लिए खतरा बन सकता था। इसलिए डॉक्टरों ने ऑपरेशन का निर्णय लिया। डॉ. सुमित्रा यादव के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक अनुभवी टीम ने ऑपरेशन किया। परिवार ने जताया आभार करीब तीन घंटे तक चले इस ऑपरेशन में डॉक्टरों ने सफलता पूर्वक 8 किलो की गठान निकालकर मरीज की जान बचा ली। ऑपरेशन के बाद रेणुका की हालत स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रही है। परिवार ने डॉक्टरों को भगवान का रूप बताते हुए कहा कि जब बाकी अस्पतालों ने हाथ खड़े कर दिए थे, तब एमटीएच अस्पताल के डॉक्टरों ने उनकी बेटी को नई जिंदगी दी। उन्होंने पूरे मेडिकल स्टाफ का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने नीमच में होने वाले सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा कर दिए निर्देश

दुग्ध उत्पादन में सहकारिता बढ़ाएं, दुग्ध उत्पादक समितियों और संघों को भी दें प्रोत्साहन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में राज्य स्तरीय सहकारी दुग्ध उत्पादक सम्मेलन 13 अप्रैल को नीमच में मुख्यमंत्री ने नीमच में होने वाले सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा कर दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए दुग्ध उत्पादन में सहकारिता बढ़ाएं। इस काम के लिए गांव-गांव में उपलब्ध दुग्ध उत्पादक समितियों और दुग्ध उत्पादकों संघों को भी जोड़कर उन्हें प्रोत्साहन दें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में आगामी 13 अप्रैल को नीमच में राज्य स्तरीय सहकारी दुग्ध उत्पादक (गोपाल) सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में राज्य शासन एमपीसीडीएफ, दुग्ध संघों एवं राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य सहकार्यता अनुबंधों का निष्पादन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में 13 अप्रैल को नीमच में होने वाले सम्मेलन की प्रारंभिक तैयारियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए स्व-सहायता समूहों के फेडरेशन, दुग्ध महासंघ, राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड व दूध उत्पादन से जुड़ी अन्य संस्थाओं को एक मंच में लाकर इनसे मार्गदर्शन लेकर आगे बढ़ें। जैविक उत्पादों सहित गौवंश जनित उत्पादों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें, जिससे इन उत्पादों को समुचित बाजार मिले और इसका सबसे अधिक दुग्ध उत्पादकों को हो। बैठक में पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, प्रमुख सचिव पशुपालन उमाकांत उमराव, सचिव पशुपालन सतेन्द्र सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादन पर पांच रूपए प्रति लीटर बोनस राशि का वितरण दुग्ध उत्पादक समितियों/दुग्ध उत्पादक संघों को देने पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दूध उत्पादन में सहकारिता से अच्छे परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि नीमच में होने वाले सम्मेलन में नीमच सहित उज्जैन संभाग के सभी जिलों की दुग्ध उत्पादक समितियों/संघों को आमंत्रित किया जाए। बैठक में पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री लखन पटेल ने बताया कि सम्मेलन में आचार्य विद्यासागर जीवदया (गौसेवा) सम्मान योजना के अंतर्गत राज्य स्तरीय चयनित तीन गौशालाओं को संस्थागत श्रेणी के तीन पुरस्कार एवं चार संस्थाओं को सांत्वना पुरस्कार सहित गौसेवा के लिए व्यक्तिगत श्रेणी के तीन पुरस्कार भी मुख्य अतिथि द्वारा प्रदान किए जाएंगे। साथ ही राज्य स्तरीय देसी नस्ल की गायों की दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता के आधार पर चयनित तीन पुरस्कार एवं भारतीय नस्ल की गायों की दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता के आधार पर चयनित दुग्ध उत्पादकों को भी तीन पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रमुख सचिव पशुपालन उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश स्तरीय दुग्ध उत्पादक सम्मेलन में प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी में ब्रीडिंग की नवीन तकनीकों का प्रदर्शन होगा। इसमें सार्टेड सीमन, एम्ब्रियों ट्रांसफर टेक्नोलॉजी (इटीटी) एवं गौ-चिप जैसी नई तकनीकों का विशेष रूप से प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र) आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी में बायोगैस, जैविक खाद, गौ-शिल्प, दैनिक उत्पाद की सामग्री, फिनाइल एवं पेंट आदि भी प्रदर्शित किए जाएंगे। साईलेज और हाइड्रोपोनिक्स के उत्पादन और चलित पशु चिकित्सा इकाई का प्रदर्शन भी सम्मेलन स्थल पर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 13 अप्रैल को नीमच सम्मेलन में सांची के विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी, कुक्कुट विकास निगम की ओर से अच्छी नस्ल की गाय, भैंस, बकरी एवं अन्य उन्नत पशु नस्लों की लाईव स्टॉक प्रदर्शनी के साथ पशु चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे विभिन्न नवाचारों को प्रतिबिंबित करती हुई पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। दुग्ध उत्पादन क्षेत्र के प्रोत्साहन के लिए भावी योजना प्रमुख सचिव उमराव ने बताया कि राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में सहकारिता के प्रसार के लिए दुग्ध सहकारी समितियों की वर्तमान संख्या 6 हजार को बढ़ाकर 9 हजार की जाएगी। दुग्ध सहकारी समितियों से संबद्ध दुग्ध उत्पादक कृषकों को पांच रूपए प्रति लीटर बोनस दिया जाएगा। समिति स्तर से लेकर दुग्ध महासंघ तक शत-प्रतिशत कम्प्यूटरीकरण किया जाएगा।  

पाकिस्तान के नापाक इरादों को भारत ने एक बार फिर किया नाकाम

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर से बड़ी खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि यहां के पुंछ इलाके में पाकिस्तान सेना ने घुसपैठ करने की कोशिश की है। भारत की ओर से पड़ोसियों के इस दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब दिया गया है। एक अप्रैल को कृष्णा घाटी इलाके में पाकिस्तानी सेना की घुसपैठ की वजह से एक लैंड माइन में विस्फोट हुआ। इसके बाद पाकिस्तानी सेना की ओर से जबरदस्त गोलीबारी की गई। उनकी ओर से लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया गया। इसके बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई की ओर हालात पर काबू पाया। फिलहाल स्थिति पर करीब से नजर रखी जा रही है। रक्षा प्रवक्ता के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम का उल्लंघन मंगलवार दोपहर 1.10 बजे किया गया। तत्काल ही भारतीय सैनिकों ने नियंत्रित और संतुलित जवाबी कार्रवाई की। हालांकि, भारतीय सेना ने पाकिस्तान की ओर से किसी के हताहत होने का कोई जिक्र नहीं किया। इस बीच कुछ आधिकारिक सूत्रों की मानें तो विस्फोट और दोनों पक्षों के बीच हुई गोलीबारी में दुश्मन के पांच सैनिक घायल हुए हैं। पाकिस्तान सेना ने बिना उकसावे के संघर्ष विराम का उल्लंघन किया जम्मू स्थित रक्षा जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील बर्तवाल ने एक बयान में बताया कि 1 अप्रैल 2025 को एलओसी पर पाकिस्तानी सेना की घुसपैठ की वजह से कृष्णा घाटी सेक्टर में एक माइन विस्फोट हुआ। इसके बाद पाकिस्तानी सेना की ओर से बिना उकसावे के गोलीबारी और संघर्ष विराम का उल्लंघन किया गया। डीजीएसएमओ समझौते के सिद्धांतों को याद दिलाया उन्होंने बताया कि हमारे सैनिकों ने नियंत्रित और संतुलित तरीके से प्रभावी ढंग से जवाब दिया। स्थिति नियंत्रण में है और इस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। भारतीय सेना नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखने के लिए 2021 के महानिदेशक सैन्य अभियान (DGsMO) की समझ के सिद्धांतों को बनाए रखने की अहमियत को दोहराती है। 25 फरवरी, 2021 को दोनों देशों के बीच समझौते को नया रूप देने के बाद से जम्मू और कश्मीर की सीमाओं पर संघर्ष विराम उल्लंघन दुर्लभ हो गया है।

अवैध गर्भपात के मामले में भाजपा नेत्री डॉ. मनु शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

मुरैना मध्य प्रदेश के मुरैना में  नर्सिंग छात्रा से रेप और अवैध गर्भपात के मामले में भाजपा जिला उपाध्यक्ष डॉ. मनु शर्मा और उनके पति बीएमओ डॉ. राजेश शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। दोनों आरोपियों की ओर से विशेष न्यायाधीश विवेक अग्रवाल की कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन लगाया गया था, लेकिन कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया। जानकारी के अुनसार, 23 को ग्वालियर के हजीरा थाने में उत्तर प्रदेश निवासी युवती ने उसके दोस्त पुष्पेंद्र और उसके जीजा के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई थी। वहीं, भाजपा नेत्री डॉ. मनु शर्मा और उनके पति बीएमओ डॉ. राजेश शर्मा पर गर्भपात कराने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में पुष्पेंद्र की बहन रीना और भाई अरविंद रावत पर भी केस दर्ज है। फिलहाल सभी आरोपी फरार हैं। गर्भवती हुई तो शादी से किया इनकार पीड़िता उत्तर प्रदेश के रायबरेली की रहने वाली है और मुरैना के सबलगढ़ में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। पीड़िता ने शिकायत में बताया कि उसकी दोस्ती पुष्पेंद्र रावत से हुई थी, जो बाद में प्रेम प्रसंग में बदल गई। 28 मार्च 2024 को पुष्पेंद्र उसे चार शहर का नाका स्थित अपने भतीजे के कमरे पर लेकर गया, जहां उसने कई बार शारीरिक शोषण किया और वीडियो भी बनाए। इसके बाद ब्लैकमेल कर वह लगातार उसका शोषण करता रहा। गर्भवती होने के बाद जब उसने शादी के लिए कहा तो आरोपी ने बात करना बंद कर दिया। इसके बाद उसने मदद के लिए पुष्पेंद्र के जीजा पान सिंह से संपर्क किया। पान सिंह ने उसे भरोसे में लेकर जौरा बुलाया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया।   छात्रा को दी फेल करने की धमकी   इसके बादा पीड़ित युवती की गर्भावस्था के बारे में पुष्पेंद्र की बहन रीना और भाई अरविंद रावत को पता चला तो वे उसे जबरन केडी हॉस्पिटल ले गए और उसका गर्भपात करा दिया था। पीड़िता के मुताबिक, भाजपा नेत्री डॉक्टर मनु शर्मा और उनके पति डॉ. राजेश शर्मा ने उसका गर्भपात किया। इस दौरान विरोध करने पर उसे धमकी भी दी गई थी। उससे कहा गया कि अगर, तुमने इस बारे में किसी को बताया तो नर्सिंग परीक्षा में फेल करवा देंगे।

जयपुर सीरियल ब्लास्ट की साजिश रचने वाले फिरोज खान को आज NIA ने सुबह रतलाम से गिरफ्तार कर लिया

 रतलाम जयपुर में सीरियल ब्लास्ट की साजिश रचने के मामले में करीब तीन साल से फरार चल रहे फिरोज खान पुत्र फकीर मोहम्मद सब्जीवाला को पुलिस ने बुधवार सुबह रतलाम से गिरफ्तार कर लिया। फिरोज पर एनआईए ने 5 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। वह ईद मनाने के लिए रतलाम आया था और पुलिस ने उसे पकड़ लिया। उल्लेखनीय है कि 30 मार्च 2022 को राजस्थान के निंबाहेड़ा में राजस्थान पुलिस ने 12 किलो विस्फोटक सामग्री के साथ आरोपित जुबेर निवासी आनंद कॉलोनी, अल्तमस पुत्र बशीर खान और सरफुद्दीन उर्फ सेफुल्ला पुत्र रमजानी दोनों निवासी शेरानीपुरा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद सात अन्य आरोपियों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया था। आरोपित कट्टरपंथी संगठन अल सुफा ग्रुप से जुड़े थे। पूर्व में गिरफ्तार किए गए 10 आरोपित जयपुर की जेल में बंद हैं और उनके खिलाफ न्यायालय में चालान भी पेश किया जा चुका है। जगह-जगह लगाए थे पोस्टर फिरोज के हाथ नहीं आने पर एनआईएन ने 2 साल पहले उसकी गिरफ्तारी पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था तथा इस संबंध में शहर में जगह-जगह पोस्टर भी लगाए थे। फिरोज खान की तलाश में एनआईए और रतलाम पुलिस ने कई बार उसके घर तथा अन्य जगह पर दबिश दी थी, लेकिन वह हाथ नहीं आ रहा था। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी। सूचना मिली की फिरोज रतलाम में है इसी बीच बुधवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि फिरोज रतलाम आया हुआ है। एसपी अमित कुमार के निर्देशन में टीम ने उसकी तलाश की तथा घेराबंदी कर उसे उसकी कजिन सिस्टर के घर से गिरफ्तार कर लिया। एसपी अमित कुमार ने बताया कि फिरोज के रतलाम आने की सूचना मिलने पर उसकी तलाश शुरू की गई। सूचना मिली कि वह अपनी कजिन सिस्टर के घर छिपा हुआ है, इस पर टीम ने वहां पहुंच कर घेराबंदी की तथा उसे पकड़ लिया।

सुमोना चक्रवर्ती बोली – ‘द कपिल शर्मा शो’ के कारण ही मुंबई में खरीद सकीं घर

मुंबई एक्ट्रेस सुमोना चक्रवर्ती ने कपिल शर्मा के शो में उनकी पत्नी का किरदार निभाकर पॉप्युलैरिटी हासिल की थी। करीब 10 साल उनके साथ काम भी किया। लेकिन ओटीटी पर जैसे ही कॉमेडियन का शो शिफ्ट हुआ, एक्ट्रेस वहां से गायब हो गईं। हालांकि उनका कहना है कि उनके और कपिल के रिश्ते में कोई खटास नहीं है। उस शो की वह आभारी हैं क्योंकि उसस हुई कमाई की वजह से ही वह मुंबई जैसे शहर में घर खरीद पाई हैं। सुमोना चक्रवर्ती ने एक इंटरव्यू में ‘द कपिल शर्मा शो’ के बारे में कहा, ‘इसने मुझे बहुत कुछ दिया है। इस शो से मेरे 10 साल अच्छे रहे। हालांकि ये बहुत लंबा समय है। मैं आर्थिक रूप से स्टेबल थी। मैं एक बहुत ही साधारण मिलिड क्लास बंगाली फैमिली से आती हूं। मैं उस शो की वजह से मुंबई में घर खरीद पाई। मैं उस शो की बहुत आभारी हूं। आज महिलाओं के लिए फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस बहुत जरूरी है।’ कपिल शर्मा का शो थाईलैंड में फेमस है कपिल शर्मा के शो की पॉप्युलैरिटी के बारे में बात करते हुए सुमोना ने कहा, ‘इस शो ने मुझे दुनियाभर में खूब सारा प्यार दिया है। लोकप्रियता दी है।’ एक्ट्रेस ने बताया कि ये शो थाईलैंड में भी फेमस है, ‘इस शो तो थाई भाषा में भी डब किया गया है। मैं एक थाई रेस्टोरेंट में थी और एक इंडियन-थाई दोस्त मेरे पास आया और कहा कि सभी सर्वर और होस्ट मेरे साथ फोटो क्लिक कराना चाहता है। सब थाई थे। मुझे हैरानी हुई कि भाई ऐसा क्या हो गया। बाद में उन्होंने जब शो की क्लिप दिखाई, तब पता चला। शो में मैं थाई भाषा में बोल रही थी, जो कि मजेदार था।’ सुमोना ने नहीं छोड़ा ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ सुमोना चक्रवर्ती ने इसके पहले कहा था कि लोगों की शादी असलियत में 10 साल तक नहीं चलती लेकिन उनकी और कपिल की शो में चली। उन्होंने ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ और ‘द कपिल शर्मा शो’ में कॉमेडियन के साथ काम किया है। उन्हें ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ में न देखने पर फैंस ने मिस किया। और कर भी रहे हैं क्योंकि दो सीजन आ चुके हैं और एक्ट्रेस का कोई जिक्र नहीं है। एक्ट्रेस का कहना है कि उन्हें इस शो के बारे में पूछा नहीं गया। उन्होंने अपनी मर्जी से इसे नहीं छोड़ा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास की हालत नाजुक, पूजा के दौरान लगी थी आग, 90 प्रतिशत झुलसीं

अहमदाबाद कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास उदयपुर में सोमवार को गणगौर पूजा के दौरान हादसे का शिकार हो गईं। गिरिजा व्यास हर रोज की तरह अपने आवास पर पूजा कर रही थीं। इस दौरान आरती करते समय उनकी चुन्नी में आग लग गई, जिससे वे गंभीर रूप से झुलस गईं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें अहमदाबाद के जायड्स अस्पताल में रेफर किया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। जानकारी के अनुसार गिरिजा व्यास 90 प्रतिशत तक झुलस चुकी हैं और उन्हें ब्रेन हेमरेज होने की भी सूचना मिल रही है। हालांकि ब्रेन हेमरेज की खबर की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उनके परिजनों और समर्थकों में चिंता का माहौल है और सभी उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। डॉ. गिरिजा व्यास का राजनीतिक करियर काफी प्रभावशाली रहा है। वे चार बार सांसद रह चुकी हैं और कई अहम पदों पर कार्य कर चुकी हैं, जिनमें केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षता भी शामिल है। राजस्थान की राजनीति में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कैसे हुआ हादसा मिली जानकारी के अनुसार, गिरिजा व्यास अपने घर में गणगौर पूजा कर रही थीं। इस दौरान वहां आग लग गई। गिरिजा व्यास की साड़ी में आग लगने के कारण उनका शरीर बुरी तरह से झुलस गया। झुलसने के कारण उनकी हालत गंभीर है। इसके अलावा आग लगने के बाद वो घर में गिर गई थीं, जिस वजह से उनके सिर में भी चोट आई है। अस्पताल के आईसीयू में उनका इलाज चल रहा है। इस घटना की जानकारी देते हुए गिरिजा व्यास के भाई गोपाल शर्मा ने बताया कि सोमवार को पूजा करने के दौरान उनकी साड़ी में आग लगी थी। आग लगने के कारण वो बुरी तरह झुलस गई थीं। इस घटना के बाद उनको उदयपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज के बाद अहमदाबाद रेफर कर दिया गया था। यहां उनका इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि आग लगने की घटना के बाद कांग्रेस के कई नेताओं ने उनके परिवार से संपर्क किया और उनके जल्दी ठीक होने की कामना भी की है। गिरिजा व्यास के स्वास्थ्य पर अपडेट देते हुए अहमदाबाद के जाइडस अस्पताल में ऑपरेशन प्रमुख जैस्मीन शाह ने बताया कि उनकी हालत गंभीर है। उन्होंने कहा कि गिरिजा व्यास का शरीर 89 प्रतिशत तक झुलस गया है। इसके अलावा गिरने के कारण उनके ब्रेन में भी चोट आई है। डॉक्टर ने कहा कि उनका ब्रेन इंफार्क्ट हुआ है। डॉ. गिरिजा व्यास की हालत को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चिंता जताई जा रही है। पूरे देश से उनके स्वस्थ होने की कामनाएं की जा रही हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी जायड्स में डॉक्टर्स से बात करते हुए डॉक्टर व्यास के स्वास्थ्य और इलाज के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने इस संदर्भ में गुजरात के सीएम से भी बात की है।

47 द‍िनों में वर्ल्‍डवाइड 800 करोड़ तक पहुंचने जा रही फिल्‍म ‘छावा’, ‘एम्‍पुरान’ 6 द‍िन में 225 करोड़ पार

मुंबई   विक्‍की कौशल की पीरियड-ड्रामा ‘छावा’ कमाई के युद्ध में अब आख‍िरी पड़ाव पर है। 47वें दिन यह फिल्‍म वर्ल्‍डवाइड 800 करोड़ क्‍लब में शामिल होने से रत्तीभर के लिए चूक गई है। देश में भी यह 600 करोड़ की दहलीज पर है। पर सिनेमाघरों में ‘सिकंदर’ की रिलीज और सिंगल स्‍क्रीन थ‍िएटर्स में सलमान के फैंस की बंपर भीड़ का ‘छावा’ पर सीधा असर पड़ा है। यह फिल्‍म सोमवार को ईद की छुट्टी के बावजूद करोड़ में कारोबार नहीं कर सकी। रिलीज के बाद अब यह बीते दो दिनों से लाखों में सिमट रही है। मंगलवार को कमाई और अध‍िक गिर गई है। दूसरी ओर, मोहनलाल की विवादों में घ‍िरी ‘एल: एम्‍पुरान’ की कमाई भी जहां देश में गिरती जा रही है, वहीं दिलचस्‍प है कि विदेशों में यह भारत से अध‍िक कारोबार कर रही है। लक्ष्‍मण उतेकर के डायरेक्‍शन में बनी ‘छावा’ ने 47 दिनों में देश में 594.90 करोड़ रुपये का नेट कलेक्‍शन और 708.74 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्‍शन कर लिया है। इसमें से हिंदी वर्जन में फिल्‍म ने 579.03 करोड़ रुपये का टोटल बिजनस किया है। जबकि 15.87 करोड़ रुपये की कमाई तेलुगू वर्जन से हुई है। ‘छावा’ अब तक महाराष्‍ट्र के सिंगल स्‍क्रीन थ‍िएटर्स से सबसे ज्‍यादा कमाई कर रही थी। लेकिन तीन दिनों से अब इस पर ‘सिकंदर’ का कब्‍जा है। बल्‍क‍ि सलमान की फिल्‍म मल्‍टीप्‍लेक्‍स में जहां फीकी पड़ गई है, वहीं देशभर के सिंगल स्‍क्रीन थ‍िएटर्स में हाउसफुल जा रही है। ‘छावा’ बॉक्‍स ऑफिस कलेक्‍शन डे 47 Sacnilk के मुताबिक, वैलेंटाइन डे के मौके पर 14 फरवरी को रिलीज हुई ‘छावा’ ने 47वें दिन मंगलवार को देश में महज 54 लाख रुपये का नेट कलेक्‍शन किया है। इसमें से 1 लाख रुपये की कमाई तेलुगू वर्जन में हुई है और 53 लाख की हिंदी से। एक दिन पहले सोमवार को ईद की छुट्टी और जश्‍न के बावजूद इसने सिर्फ 89 लाख रुपये कमाए थे। ‘छावा’ का वर्ल्‍डवाइड कलेक्‍शन डे 47 ‘छावा’ बॉक्‍स ऑफिस पर ऑल टाइम ब्‍लॉकस्‍टर बन चुकी है। 130 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्‍म ने एक लंबी राह तय की है। लेकिन अफसोस कि देश में धमाल मचाने वाली इस फिल्‍म का विदेशों में हाल बहुत बुरा रहा है। यह विदेशों में 47 दिनों में 91 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्‍शन ही कर पाई है। हालांकि, देश में 708.74 करोड़ की ग्रॉस कमाई की बदौलत इसने वर्ल्‍डवाइड 799.74 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्‍शन कर लिया है। बुधवार को 48वें दिन यह आसानी से 800 करोड़ क्‍लब में एंट्री ले लेगी। ब्‍लॉकबस्‍टर तो बन गई, पर ‘छावा’ ही अधूरी रह गई ख्‍वाहिश विक्‍की कौशल, रश्‍म‍िका मंदाना और अक्षय खन्‍ना स्‍टारर ‘छावा’ के दिल में विदेशों में 100 करोड़ की कमाई नहीं कर पाने के अलावा एक और टीस है। यह देश में हिंदी वर्जन से अब तक 579.03 करोड़ की कमाई ही कर पाई है। जबकि यह हिंदी में सबसे ज्‍यादा कमाई करने वाली ‘स्‍त्री 2’ से अभी भी 18.96 करोड़ पीछे है। श्रद्धा कपूर की फिल्‍म ने 597.99 करोड़ रुपये का नेट कलेक्‍शन किया था। अब जिस तरह ‘छावा’ का कलेक्‍शन गिरा है, इसका यह सपना अधूरा ही रहने वाला है। ‘एल2: एम्‍पुरान’ बॉक्‍स ऑफिस कलेक्‍शन डे 6 दूसरी ओर, बीते गुरुवार को रिलीज हुई मोहनलाल की ‘एल2: एम्‍पुरान’ ने तमाम विवाद के बीच 6 दिनों में 79.15 करोड़ रुपये का नेट कलेक्‍शन कर लिया है। यह कोराना महामारी के बाद मलयालम सिनेमा की सबसे अध‍िक कमाई करने वाली फिल्‍म बन गई है। हालांकि, पृथ्‍वीराज सुकुमारन के डायरेक्‍शन में बनी इस फिल्‍म का बजट 180 करोड़ रुपये है। ऐसे में इसे हिट होने के लिए अभी लंबी राह तय करनी होगी। ‘एल2: एम्‍पुरान’ वर्ल्‍डवाइड कलेक्‍शन डे 6 ‘एल2: एम्‍पुरान’ की खास बात यह है कि ये फिल्‍म देश से ज्‍यादा विदेशों में कमा रही है। इसने देश में जहां 6 दिनों में 92 करोड़ का ग्रॉस कलेक्‍शन किया है, वहीं विदेशों में करीब 133 करोड़ रुपये की ग्रॉस कमाई की है। इस तरह 6 दिनों में फिल्‍म ने वर्ल्‍डवाइड 225 करोड़ रुपये का ग्रॉस बिजनस कर लिया है।

वक्फ बोर्ड बिल आज लोकसभा में पेश होगा, बिल के लिए एनडीए और इंडिया गठबंधन पूरी तरह से तैयार

नई दिल्ली: लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल आज पेश होगा। सदन में 8 घंटे की चर्चा के बाद अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू चर्चा का जवाब देंगे। इसके बाद बिल को पास कराने के लिए वोटिंग होगी। सरकार बिल को बुधवार को ही लोकसभा में पास कराने की तैयारी है। सरकार इसे राज्यसभा में पेश कर वहां से भी पास कराने की तैयारी में जुटी है। वहीं विपक्ष इस बिल का विरोध कर रहा है। इस बिल के खिलाफ कई जगह मुस्लिमों ने काली पट्टियां बांधकर ईद की नमाज अदा की। आइए जानते हैं वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 में क्या है-     वक्फ बिल लाने का सरकार का उद्देश्य क्या है?     8 अगस्त, 2024 को लोकसभा में दो बिल, वक़्फ़ (संशोधन) बिल, 2024 और मुसलमान वक़्फ़ (निरसन) बिल, 2024 पेश किए गए। इनका मकसद वक्फ बोर्ड के काम को सुव्यवस्थित और वक्फ की प्रॉपर्टीज का बेहतर मैनेजमेंट करना है। वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 का मकसद वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करना है, ताकि वक्फ संपत्तियों के रेगुलेशन और मैनेजमेंट में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का समाधान किया जा सके। संशोधन विधेयक का उद्देश्य देश में वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट में सुधार करना है। इसका मकसद पिछले कानून की खामियों को दूर करना और अधिनियम का नाम बदलने जैसे बदलाव करके वक्फ बोर्डों की कार्यकुशलता को बेहतर करना भी है। साथ ही वक्फ की परिभाषाओं को अपडेट करना, रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में सुधार करना, वक्फ रिकॉर्ड के मैनेजटमेंट में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाना भी है।     भारत में वक्फ मैनेजमेंट के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक निकाय कौन से हैं और उनकी भूमिकाएं क्या हैं?     भारत में वक्फ संपत्तियों का प्रशासन फिलहाल वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत किया जाता है। वक्फ मैनेजमेंट में शामिल प्रमुख प्रशासनिक निकायों में शामिल हैं: केंद्रीय वक्फ परिषद (सीडब्ल्यूसी)- सरकार और राज्य वक्फ बोर्डों को नीति पर सलाह देती है, लेकिन वक्फ संपत्तियों को सीधे नियंत्रित नहीं करती है। राज्य वक्फ बोर्ड (एसडब्ल्यूबी) – प्रत्येक राज्य में वक्फ संपत्तियों का मैनेजमेंट और सुरक्षा करते हैं। वक्फ ट्रिब्यूनल- विशेष न्यायिक निकाय, जो वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों को संभालते हैं। यह प्रणाली बेहतर प्रबंधन और मुद्दों के तेज़ समाधान को सुनिश्चित करती है। पिछले कुछ वर्षों में, कानूनी बदलावों ने वक्फ प्रशासन को अधिक पारदर्शी, कुशल और जवाबदेह बना दिया है।     वक्फ बोर्ड से संबंधित मुद्दे क्या हैं?     1. वक्फ संपत्तियों की अपरिवर्तनीयताः ‘एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ’ के सिद्धांत ने विवादों को जन्म दिया है। 2. कानूनी विवाद और मिसमैनेजमेंटः वक्फ अधिनियम, 1995 और इसका 2013 का संशोधन प्रभावकारी नहीं रहा है जिसकी वजह से वक्फ भूमि पर अवैध कब्ज़ा, कुप्रबंधन और मालिकाना हक का विवाद, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और सर्वेक्षण में देरी, बड़े पैमाने पर मुकदमे और मंत्रालय को शिकायतें जैसे समस्याएं सामने आ रही हैं। 3. कोई न्यायिक निगरानी नहीं-वक्फ ट्रिब्यूनल्स के फैसलों को हाई कोर्ट्स में चुनौती नहीं दी जा सकती। इससे वक्फ मैनेजमेंट में पारदर्शिता और जवाबदेही कम हो जाती है। 4. वक्फ संपत्तियों का अधूरा सर्वेक्षण-सर्वेक्षण आयुक्त का काम खराब रहा है, जिससे देरी हुई है। गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों में अभी तक सर्वेक्षण शुरू नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश में 2014 में आदेशित सर्वेक्षण अभी भी लंबित है। विशेषज्ञता की कमी और राजस्व विभाग के साथ खराब कोर्डिनेशन ने रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को धीमा कर दिया है। 5. वक्फ कानूनों का दुरुपयोग- कुछ राज्य वक्फ बोर्डों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है, जिसकी वजह से सामुदायिक तनाव पैदा हुआ है। निजी संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित करने के लिए वक्फ अधिनियम की धारा 40 का दुरुपयोग किया गया है, जिससे कानूनी लड़ाई और अशांति पैदा हुई है।30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से मिली जानकारी के अनुसार, केवल 8 राज्यों की तरफ से डेटा दिया गया, जहां धारा 40 के तहत 515 संपत्तियों को वक्फ घोषित किया गया है। 6. वक्फ अधिनियम की संवैधानिक वैधता-वक्फ अधिनियम केवल एक धर्म पर लागू होता है, जबकि अन्य के लिए इसके समान कोई कानून मौजूद नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) में सवाल उठाया गया है कि क्या वक्फ अधिनियम संवैधानिक है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।     बिल पेश करने से पहले मंत्रालय ने क्या कदम उठाए और स्टेकहोल्डर्स से क्या विचार-विमर्श किए?     अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से विचार विमर्श किए, जिसमें सच्चर कमेट की रिपोर्ट, जन प्रतिनिधियों, मीडिया और आम जनता द्वारा कुप्रबंधन, वक्फ अधिनियम की शक्तियों के दुरुपयोग और वक्फ संस्थाओं द्वारा वक्फ संपत्तियों के कम उपयोग के बारे में जाहिर की चिंताएं शामिल हैं। मंत्रालय ने राज्य वक्फ बोर्डों से भी परामर्श किया। मंत्रालय ने वक्फ अधिनियम, 1995 के प्रावधानों की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की और स्टेकहोल्डर्स के साथ परामर्श किया। दो बैठकों में प्रभावित स्टेकहोल्डर्स की समस्याओं को सुलझाने के लिए इस अधिनियम में उपयुक्त संशोधन करने के लिए आम सहमति बनी। इनमें शामिल हैं- सीडब्ल्यूसी (केंद्रीय वक्फ परिषद) और एसडब्ल्यूबी (राज्य वक्फ बोर्ड) की संरचना का आधार बढ़ाना, मुतवल्लियों की भूमिका और जिम्मेदारियां, ट्रिब्यूनल का पुनर्गठन, रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में सुधार, टाइटल्स की घोषणा, वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण, वक्फ संपत्तियों का म्यूटेशन, मुतवल्लियों द्वारा खातों फाइलिंग, वार्षिक खाता फाइलिंग में सुधार, निष्क्रांत संपत्तियों/परिसीमा अधिनियम से संबंधित प्रावधानों की समीक्षा, वक्फ संपत्तियों का वैज्ञानिक प्रबंधन।     वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को पेश करने की प्रक्रिया क्या थी?     • वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और शासन में कमियों को दूर करने के उद्देश्य से 8 अगस्त, 2024 को पेश किया गया था।• 9 अगस्त, 2024 को संसद के दोनों सदनों ने विधेयक को 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्यों की एक संयुक्त समिति को जांचने और उस पर रिपोर्ट देने के लिए भेजा।• विधेयक के महत्व और इसके व्यापक निहितार्थों को ध्यान में रखते हुए, समिति ने उक्त विधेयक के प्रावधानों पर आम जनता और विशेष रूप से विशेषज्ञों/हितधारकों और अन्य संबंधित संगठनों से विचार प्राप्त करने के लिए ज्ञापन आमंत्रित करने का निर्णय लिया था।• संयुक्त संसदीय समिति ने छत्तीस बैठकें कीं, जिसमें उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधियों के विचार/सुझाव सुने जैसे: अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, विधि एवं न्याय, रेलवे (रेलवे बोर्ड), आवास … Read more

भगवान श्रीराम के आदर्श गुणों को आत्मसात करना ही मन की अयोध्या को सजाना है – सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर

रायपुर : स्वदेश पत्र समूह ने समाज में भारतीयता की भावना को पुष्ट किया – मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय ‘स्वदेश’ द्वारा आयोजित ‘विमर्श’ कार्यक्रम में हुए शामिल भगवान श्रीराम के आदर्श गुणों को आत्मसात करना ही मन की अयोध्या को सजाना है – सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर “समय है अब मन की अयोध्या को सजाने का” विषय पर हुआ विशेष व्याख्यान “राम काजु कीन्हें बिनु” एवं छत्तीसगढ़ की लोक कला संस्कृति पुस्तक का विमोचन रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय विचार पत्रिका “स्वदेश” द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम “विमर्श” में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। “समय है अब मन की अयोध्या को सजाने का” विषय पर आयोजित इस विमर्श व्याख्यान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। सह सरकार्यवाह चक्रधर ने अपने व्याख्यान में कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों एवं गुणों को मन में आत्मसात करना ही “मन की अयोध्या” को सजाना है। उन्होंने कहा कि केवल मन ही नहीं, बल्कि अपने परिवार, समाज, गांव और राष्ट्र को भी राममय बनाना है। उन्होंने श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन वचन-पालन, धैर्य, करुणा भाव, परामर्श, श्रेय, न्याय, अहंकार का त्याग, मित्रता और दूसरों के प्रति सम्मान एवं समभाव जैसे गुणों से परिपूर्ण था। इन गुणों को अपनाकर हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं। चक्रधर ने आगे श्रीराम के जीवन से जुड़ी घटनाओं के छोटे-छोटे उदाहरणों के माध्यम से उनके आदर्श गुणों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि श्रीराम वचन के प्रति दृढ़ प्रतिज्ञ थे—राजतिलक की घोषणा के अगले ही दिन उन्होंने पिता दशरथ द्वारा दिए गए वचन के सम्मान में सहर्ष वनवास स्वीकार किया। इसी प्रकार उन्होंने हर सुख-दुख की परिस्थिति में धैर्य बनाए रखा, कभी भी अहंकार को अपने पास नहीं आने दिया और सभी के साथ समभाव रखते हुए सम्मान का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इन गुणों को आत्मसात कर हम अपने मन, परिवार, समाज और राष्ट्र को सशक्त बना सकते हैं और 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं। इस अवसर पर अयोध्या आंदोलन पर केंद्रित ग्रंथ “राम काजु कीन्हें बिनु” एवं छत्तीसगढ़ की लोक कला-संस्कृति पर आधारित पुस्तक का विमोचन मंच से किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य क्षेत्र के संघचालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना ने की। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, स्वदेश पत्रिका समूह के संपादक अतुल तारे एवं प्रबंध संपादक यशवर्धन जैन मंच पर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि स्वदेश पत्र समूह ने अपनी सात दशकों की अविरल यात्रा में समाज में भारतीयता की भावना को पुष्ट करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि स्वदेश समाचार पत्र आज भले ही नए कलेवर में है, लेकिन इसका इतिहास अत्यंत समृद्ध है। देश की आजादी के तुरंत बाद 1948 में अंत्योदय और एकात्म मानवतावाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की परिकल्पना से इस पत्र का प्रकाशन आरंभ हुआ। हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी भी इसके संपादक रहे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 1975 में जब देश में आपातकाल लागू हुआ, तब स्वदेश समाचार पत्र समूह के अधिकांश लोगों को जेल में डाल दिया गया। इसके बावजूद यह पत्र भारतीयता की भावना को लोगों तक पहुँचाता रहा और अडिग रहा। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की हत्या की गई और लाखों लोगों को जेल में डाल दिया गया। अनेक परिवार उजड़ गए। ऐसे मीसाबंदियों को पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सरकार ने सम्मान निधि देना प्रारंभ किया था, जो पिछले 5 वर्षों से बंद थी, जिसे हमारी सरकार ने पुनः प्रारंभ किया है। साथ ही विधानसभा में विधेयक लाकर यह सुनिश्चित किया गया है कि मीसाबंदियों को यह सम्मान राशि निरंतर मिलती रहे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का व्याख्यान विषय – “समय है अब मन की अयोध्या को सजाने का” – अत्यंत प्रासंगिक है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की भूमि है और भगवान श्रीराम को यहां भांजा कहा जाता है। उन्होंने कहा कि रामराज्य का अर्थ है—जनता की सेवा। हमारी सरकार सभी वर्गों को साथ लेकर जनसेवा का कार्य कर रही है। भ्रष्टाचार के प्रति हमारी नीति जीरो टॉलरेंस की है। हम श्रीराम के आदर्शों के अनुरूप रामराज्य की कल्पना को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कार्यक्रम को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह एवं मध्य क्षेत्र के संघचालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की प्रस्तावना समूह संपादक अतुल तारे ने रखी। आभार प्रदर्शन योगेश मिश्रा (स्थानीय संपादक) ने किया तथा संचालन शशांक शर्मा ने किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छत्तीसगढ़ प्रांत प्रचारक अभयराम, प्रांत संघचालक डॉ. टॉपलाल वर्मा, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, विधायक किरण देव, पुरंदर मिश्रा, सुनील सोनी, खुशवंत साहेब, पवन साय सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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