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वित्तीय वर्ष 2025-26 के लक्ष्यपूर्ति के लिए करें क्रियान्वयन : मुख्य सचिव जैन

भोपाल मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बुधवार को मंत्रालय में, वित्तीय वर्ष 2024-25 में विभागीय योजनाओं की लक्ष्य पूर्ति की समीक्षा एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 के लक्ष्य निर्धारण को लेकर सभी विभागों की समीक्षा की। मुख्य सचिव जैन ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में सभी विभागों की विभागीय योजनाओं की लक्ष्य पूर्ति की अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक क्रियान्वयन समयपूर्वक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव जैन ने बैठक में विजन @2047 के अंतर्गत विभागीय कार्य योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की। शासन के महत्वाकांक्षी “गरीब, अन्नदाता, युवा एवं नारी” मिशन के क्रियान्वयन से संबंधित कार्य योजना पर भी व्यापक चर्चा हुई। मुख्य सचिव जैन ने संकल्प पत्र में सभी विभागों से जुड़े समस्त संबंधित बिंदुओं पर चर्चा कर, उनके पालन की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मुख्यंमत्री डॉ. यादव के प्राथमिकता वालें विषयों के क्रियान्वयन समय-सीमा में सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा प्रायोजित फ्लैगशिप योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए, केन्द्र सरकार को भेजे जाने वाले उपयोगिता प्रमाण पत्र एवं मांग स्थिति की भी जानकारी ली। जनशिकायत निवारण, अंतर्विभागीय एवं विधानसभा से जुड़े विभिन्न विषयों पर बिंदुवार चर्चा हुई। मुख्य सचिव जैन ने लंबित सीएस मॉनिट, भारत सरकार से प्राप्त अर्द्धशासकीय पत्रों की समीक्षा, पेपर कटिंग, सीएम हेल्पलाईन, ई-ऑफिस, सीपी ग्राम, विधानसभा प्रश्न एवं आश्वासन सहित कैग रिपोर्ट से संबंधित विभागीय बिंदुओं पर व्यापक चर्चा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित अंतर्विभागीय समितियों की बैठक की स्थिति की जानकारी लेकर आवश्यक क्रियान्वयन के लिए भी निर्देशित किया। बैठक में मानव संसाधनों से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई, इसके अंतर्गत भर्ती, प्रशिक्षण (मिशन कर्मयोगी) एवं न्यायालयीन प्रकरणों के निराकरण को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के निर्धारित लक्ष्यों की समयपूर्वक प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी विभाग सतत् क्रियान्वयन करें एवं समय-समय पर क्रियान्वयन की समीक्षा भी सुनिश्चित करें। बैठक में समस्त अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव एवं समस्त विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।  

पेयजल समस्या से निदान के लिये वृहद स्तर पर जल गंगा संवर्धन अभियान को संचालित करना : मंत्री श्रीमती उइके

भोपाल जल गंगा संवर्धन अभियान प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का महत्वाकांक्षी अभियान है इससे पानी का भण्डारण कर आमजन मानस को पर्याप्त पेयजल की सुविधा प्रदान की जा जायेगी। अभियान को जन प्रतिनिधियों सहित जन भागीदारी के सहयोग से वृहद रूप से संचालित करे करने के निर्देश सिंगरौली कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारियों के साथ बैठक के दौरान मंत्री लोक स्वास्थ्य यात्रिकी विभाग एवं प्रभारी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने कहा। बैठक के दौरान श्रीमती राधा सिंह राज्य मंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, विधायक सिंगरौली राम निवास शाह, विधायक देवसर राजेन्द्र मेश्राम, विधायक धौहनी कुवर सिंह टेकाम, विधायक सिहावल विश्वामित्र पाठक, महापौर श्रीमती रानी अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष सोनम सिंह, कलेक्टर चन्द्र शेखर शुक्ला, पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री, प्राधिकरण अध्यक्ष दिलीप शाह, नगर निगम अध्यक्ष देवेश पाण्डेंय, सुन्दर लाल शाह बैठक में उपस्थित थे। प्रभारी मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि माह मार्च से ही पेयजल की समस्या उत्पन्न होने लगी हैं। इस समस्या को निदान के लिये वृहद स्तर पर जल गंगा संवर्धन अभियान को संचालित करना हैं। मंत्री श्रीमती उइके ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को निर्देश दिए कि जल संरक्षण के लिए अधिक से अधिक अमृत सरोवर, खेत तालाब, नदी तालाबो का गहरीकरण बोरी बंधन के साथ साथ जीर्णोद्धार कराया जायें। साथ ही जन प्रतिनिधिगण भी अपने अपने क्षेत्रो के ऐसे स्थानो के चयनित कर कार्य प्रारंभ कराए। उन्होंने कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यात्रिकी विभाग को निर्देश दिए कि सभी हैन्डपम्पो के समीप सोकपिट का निर्माण कराएं। बिगड़े हुये हैन्डपम्पो को तत्काल चालू करे नल जल योजना को चालू करे साथ ही जल निगम के अधिकारी को निर्देश दिए कि जहा पर जल परियोजनायें चालू हो गई है टंकी या स्टोरेज की व्यवस्था नही है ऐसे क्षेत्रो में मोटर पाईप लाईन के माध्यम से पेयजल उपलंब्ध कराया जा सके। साथ ही ऐसे स्थल जहा पर हैन्डपंम्प या पेयजल पाईप लाईन की सुविधा नही है उन स्थलो पर टैंकर के माध्यम से पेयजल उपलंब्ध कराया जायें। जो भी नए हैन्डपम्प स्वीकृत हुये है उन्हे शीघ्र पूर्ण करे। मंत्री श्रीमती उइके ने लोक स्वास्थ्य यात्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री को निर्देश दिए कि प्रत्येक जनपद क्षेत्र में एक हैन्डपम्प मकैनिक रखे जिसका नाम एवं मोबाईल नम्बर पंचायत भवन के दिवाल पर उल्लेख करे। साथ ही ऐसे पंचायत व्यक्ति जिन्हें हैन्डपम्प मरम्मत के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया है उन जल मित्रो को भी इस कार्य में जोड़े जिससे हैन्डपम्पो के मरम्मत के संबंध में सूचना मिलते ही उनका सुधार कराया जा सके। उन्होंने कहा कि नवीन हैन्डपम्पो सहित अन्य कार्यो का भूमिपूजन लोकापर्ण कार्य में अनिवार्य रूप से संबंधित विधानसभा के विधायक, जिला पंचायत के जन प्रतिनिधि, जनपद पंचायत एवं संबंधित पंचायत के सरपंच को भी अनिवार्य रूप से आमंत्रित करें। इस तरह से नगरीय क्षेत्र में भी पेयजल की समुचित व्यवस्था बनाए रखने के लिये नगर निगम के अधिकारी को निर्देश दिए गए।  

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि (03 अप्रैल) पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज केवल इतिहास के पन्नों में दर्ज एक नाम नहीं, बल्कि भारतमाता की आत्मा में रचा-बसा वह स्वाभिमान हैं, जिन्होंने स्वराज्य का स्वप्न देखा और उसे यथार्थ में परिणत किया। वे साहस, संकल्प और राष्ट्रभक्ति की सजीव प्रतिमूर्ति थे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिवाजी महाराज भारतीय संस्कृति, नीति और नेतृत्व के अमिट प्रतीक हैं। उन्होंने न केवल धार्मिक सहिष्णुता, जनकल्याण और न्यायप्रिय शासन की अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत की, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि एक सच्चा शासक केवल तलवार से नहीं, नीति, मूल्य और जनसेवा से पहचाना जाता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज जब देश नए भारत के निर्माण की दिशा में बढ़ रहा है, तब शिवाजी महाराज की सोच, उनका साहस और स्वराज्य का दर्शन हमारे लिए प्रेरणापुंज बन सकता है। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज के जीवन से हमे यह प्रेरणा मिलती है कि जब संकल्प अडिग हो और ध्येय राष्ट्रहित, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं को प्रेरित किया कि शिवाजी महाराज के राष्ट्रप्रेम के आदर्श का अनुसरण करते हुए राष्ट्र की उन्नति में अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और समय को समर्पित कर सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहभागी बनें।

‘पूना पर्रियान’ के तहत क्षेत्र के युवाओं को कराया जा रहा शारीरिक रूप से दक्ष

उत्तर बस्तर कांकेर कलेक्टर श्री निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन की पहल “पूना पर्रियान“ (नई उड़ान) के तहत क्षेत्र के ऐसे युवा छात्र जो सेना अग्निवीर, जल, थल, वायु सेना भर्ती, पुलिस एसआई भर्ती, पुलिस आरक्षक भर्ती, वनरक्षक भर्ती या अन्य परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए विकासखंड भानुप्रतापपुर मुख्यालय से 2 किमी की दूरी पर ग्राम चौगेल (मुल्ला) में पूर्व से संचालित कैम्प में शारीरिक दक्षता हेतु फिजिकल गतिविधियां कराई जा रही हैं।            जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी ने बताया कि चौगेल (मुल्ला) के पुराना कैम्प में क्षेत्र के युवाओं के लिए शारीरिक दक्षता के साथ-साथ प्रतिभागियों की मेंटल एबिलिटी की तैयारी भी कराई जा रही है। सभी छात्रों के लिए प्रातः 06 बजे से 09 बजे तक विभिन्न प्रकार की प्रैक्टिस कराने के बाद 10 बजे से मेंटल एबिलिटी की कक्षाएं संचालित की जाती हैं। छात्र भविष्य में सेना, अग्निवीर, एसआई भर्ती, पुलिस, आबकारी, वनरक्षक या अन्य ऐसे रोजगार जहां फिजिकल टेस्ट आवश्यकता हो, उन क्षेत्रों की तैयारी कराई जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा भी इस पूना पर्रियान (नई उड़ान) की सतत मानिटरिंग एवं सुपरविजन किया जा रहा है। उन्होंने सभी इच्छुक युवाओं से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इसका लाभ अवश्य उठाएं।

मंत्री श्रीमती उइके ने 8 करोड़ के संयुक्त तहसील भवन का किया लोकार्पण

सिंगरौली प्रदेश सरकार किसानों की सरकार है। किसानों के हितार्थ कई योजनाएं संचालित कर उन्हें लाभ प्रदान किया जा रहा है। वहीं, उनकी खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए सरकार दृढ़ संकल्पित है। यह बात लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं सिंगरौली जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने संयुक्त तहसील दुधमनिया में 8 करोड़ की लागत से निर्मित भवन के लोकार्पण अवसर पर कही। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह भी उपस्थित थीं। मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि इस संयुक्त भवन के निर्माण से अब 65 गांवों के लोगों को लाभ प्राप्त होगा। प्रदेश सरकार द्वारा किसानों एवं आम नागरिकों की समस्याओं के निराकरण के लिये साइबर तहसील, लोक सेवा गारंटी लागू कर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि जहां गरीबों के लिए आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं ,वहीं किसानों के लिए सम्मान निधि प्रदान की जा रही है। मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि महिलाओं के सम्मान को बढ़ाने के लिए ‘लाड़ली बहना योजना’ चलाई जा रही है, जिसके माध्यम से आर्थिक सहायता देकर महिलाओं का सशक्तिकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में क्षेत्र के विकास के लिए कॉलेज एवं अस्पताल खोले जाएंगे। सरकार प्रवेश उत्सव के माध्यम से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रही है। 1 अप्रैल से 4 अप्रैल तक ‘स्कूल चले हम’ अभियान चलाया जा रहा है। हमें बेटा-बेटी के बीच का अंतर समाप्त करना है और बेटियों को भी बेटों की तरह शिक्षा का अधिकार देना है। कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए सभी अपने बच्चों का विद्यालय में प्रवेश दिलाएं। राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार आदिवासी बहुल्य क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए सतत प्रयासरत है। विकास के कई कार्य संचालित होंगे। साथ ही, किसानों एवं नागरिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए कई योजनाएं और सुविधाएं दी जा रही हैं। आने वाले समय में दुधमनिया में भी महाविद्यालय प्रारंभ कराने का प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर विधायक सिंगरौली राम निवास शाह, विधायक देवसर राजेंद्र मेश्राम, विधायक धौहनी कुवर सिंह टेकाम, विधायक सिहावल विश्वामित्र पाठक, महापौर श्रीमती रानी अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष सोनम सिंह, प्राधिकरण अध्यक्ष दिलीप शाह, नगर निगम अध्यक्ष देवेश पांडेय, सुंदरलाल शाह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष अर्चना सिंह, पूर्व विधायक अमर सिंह, जनपद पंचायत अध्यक्ष सिया दुलारी सहित वरिष्ठ समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।  

गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि गेहूँ उपार्जन के लिये किसान अब 9 अप्रैल तक करा सकते हैं पंजीयन

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि किसानों के हित में रबी विपणन वर्ष 2025-26 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये पंजीयन की अवधि 9 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। पूर्व में पंजीयन की अवधि 31 मार्च 2025 तक निर्धारित की गई थी। मंत्री श्री राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि जिन किसानों ने अभी तक पंजीयन नहीं करवाया है, वे 9 अप्रैल तक गेहूँ उपार्जन के लिये पंजीयन जरूर करायें। गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये है और राज्य सरकार द्वारा 175 रूपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। इस तरह से गेहूँ की खरीदी 2600 रूपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। उल्लेखनीय है कि गेहूँ उपार्जन के लिये 31 मार्च तक 15 लाख 9 हजार 324 किसान पंजीयन करा चुके हैं। गेहूँ का उपार्जन भी जारी है।  

उद्योगपतियों को दिए गए इंडस्ट्री एक्सीलेंस अवार्ड, मुख्यमंत्री का उद्योग जगत ने किया अभिनंदन

प्रधानमंत्री मोदी के विकास के मॉडल पर हो रहा मध्यप्रदेश में क्रियान्वयन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगपति समाज और सरकार दोनों के सहयोगी, सरकार उन्हें देगी पूरा प्रोत्साहन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए प्रदेश सरकार ने दी 5 हजार 260 करोड़ की सब्सिडी राशि गत वर्ष का कोई भुगतान लंबित नहीं, वृहद और छोटे उद्योग सभी हुए लाभान्वित उद्योगपतियों को दिए गए इंडस्ट्री एक्सीलेंस अवार्ड, मुख्यमंत्री का उद्योग जगत ने किया अभिनंदन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उद्योगों और अन्य क्षेत्रों में तीव्र विकास हो रहा है। उद्योगपति सरकारों और समाज के लिए सहयोगी हैं। वे लाखों परिवारों को रोटी, कपड़ा और मकान उपलब्ध करवाते हैं। उद्योगपतियों के योगदान को सम्मान देने के लिए समाचार संस्थान ने इंडस्ट्री एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान कर सराहनीय कार्य किया है। अवार्ड सेरेमनी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्योग जगत द्वारा सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में विकास के विक्रेंद्रीकृत मॉडल को अपनाते हुए विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे परिणाम लाने के लिये बेहतर वातावरण निर्मित हुआ है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में उद्योगों की स्थापना और इनके माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगपति आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने में आज पूर्ण सहयोग प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को विभिन्न राष्ट्रों से जो सम्मान मिल रहा है, वह अद्वितीय हैं। रूस और यूक्रेन भले ही परस्पर लड़ते रहे, लेकिन दोनों देशों ने प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह को मानते हुए भारत और अन्य देशों के विद्यार्थियों को संकट से निकालने में सहयोग दिया। जीवन मूल्यों के साथ विकास और परमार्थ के कार्यों को पूर्ण प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगों से राष्ट्र की प्रगति का कार्य हो रहा है। सरकारों का कार्य सिर्फ कानून व्यवस्था संभालना और बिजली, पानी की व्यवस्था करना नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों के साथ विकास और परमार्थ के कार्यों को प्रोत्साहित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जीआईएस का आयोजन अत्यंत सफल रहा। जीआईएस से सकारात्मक वातावरण बना। प्रदेश की लगभग 9 करोड़ आबादी की बेहतरी के लिए राज्य सरकार प्रोत्साहनकारी भूमिका का निर्वहन कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते साल हमने 5 हजार 260 करोड़ की उद्योग निवेश सब्सिडी राशि पूरी पारदर्शिता के साथ डीबीटी के जरिए निवेशकों के खातों में हस्तांतरित की। अब गत वर्ष का कोई भुगतान लंबित नहीं है। वृहद और छोटे उद्योग सभी लाभान्वित हुए हैं। राज्य सरकार ने वचनबद्धतापूर्वक यह कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस सिर्फ एक इवेंट नहीं था, बल्कि राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक आयोजन भी था। उद्योगपतियों ने किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्योग हितैषी नीतियों को लागू करने, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के सफलतम आयोजन के माध्यम से 30.77 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर क्रियान्वयन और नवाचारों से सुशासन आधारित व्यवस्था को मजबूत बनाने पर उद्योग जगत की ओर से अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग राघवेन्द्र कुमार सिंह और आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में सीओओ सुमित मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का नेतृत्व ऐसा है जो असंभव कार्यों को संभव बनाता है। प्रदेश में ईज ऑफ डूईंग बिजनेस और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लागू कर उद्योगपतियों को आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश में सहयोगी बनाया गया है। इन्हें मिले इंडस्ट्री एक्सीलेंस अवार्ड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय स्टेट बैंक के चीफ जनरल मैनेजर चंद्रशेखर शर्मा को सम्मानित करने के अलावा जिन उद्योगपतियों को इंडस्ट्री एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान किए उनमें एचईजी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनीष गुलाटी, आयनेक्स के अनिल खेमसारा, दावत राइस के राजेंद्र, प्रिज्म सीमेंट के राजेंद्र संचेती, बालाजी पैकेजिंग ग्रुप के विकास मूंदड़ा, महाकौशल शुगर एंड पॉवर इंडस्ट्री के नवाब राजा, उदीप सोशल वेलफेयर ग्रुप की सुपूनम श्रोती, गोयल पैंट के श्याम वैभव गोयल, आईसीसी इंफ्रा के आरिफ जाफरा मंसूरी, आनंदन इंडस्ट्री के अशोक आनंद, एमके इंडस्ट्रीज के मनोज जैन, समरकूल इलेक्ट्रिकल्स एंड होम अप्लायंस के आशुतोष तनुज गुप्ता, आरआरजी इलेक्ट्रिकल के रंगाराव, भंवरदीप कॉपर के आदित्य आकाश बाफना, जेके स्टोन के जितेन्द्र जैन, सुआभा जैन, बालाजी कार्पोरेशन के त्रिलोकी अग्रवाल, स्कायलार्क प्रोटीन्स के जितेंद्र, नरेंद्र ट्रेडिंग कंपनी के प्रमोद वर्मा, अलीशा फूड्स लिमिटेड के एहसान, तिरूपति इंफ्रा के दिलीप परयानी, ओटा इलेक्ट्रिकल सर्जिकल इक्विपमेंट के भूपेंद्र, संजय प्रसाद अग्रवाल, पुनीत खुराना, संदीप पाटीदार, सुनील लड्ढा, विशाल अनिल जोशी, मनीष शाह शामिल हैं।  

मंडला कांग्रेस ने सीएम का फूंका पुतला

मंडला कांग्रेस ने सीएम का फूंका पुतला सौरभ शर्मा को जमानत लोकायुक्त की नाकामी का प्रमाण, लोकायुक्त अब पहरेदार नहीं, हिस्सेदार है: अशोक मर्सकोले  मंडला मध्यप्रदेश में सौरभ शर्मा मामला लोकायुक्त और सरकार की मिलीभगत का ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है। पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा, जिसके पास से करोड़ों रुपये की अघोषित संपत्ति, 52 किलोग्राम सोना और 11 करोड़ से अधिक की नकदी बरामद हुई थी, को लोकायुक्त पुलिस की घोर लापरवाही के चलते विशेष लोकायुक्त अदालत से जमानत मिल गई। निर्धारित 60 दिनों में चालान पेश न कर पाने की यह नाकामी कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा प्रतीत होती है। इस पूरे प्रकरण में लोकायुक्त की संदिग्ध भूमिका और सरकार की चुप्पी जनता के सामने सच्चाई को उजागर कर रही है। इस हाईप्रोफ़ाइल मामले की जांच के दौरान लोकायुक्त निदेशक जयदीप प्रसाद का अचानक ट्रांसफर इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि सरकार इस मामले को दबाने में जुटी है। जयदीप प्रसाद, जिन्होंने सौरभ शर्मा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर छापेमारी की थी, को हटाना स्पष्ट करता है कि बड़े रसूखदारों को बचाने के लिए सरकार किसी भी हद तक जा सकती है। लेकिन यह कोई पहला मामला नहीं है। मध्यप्रदेश में लोकायुक्त और सरकार की मिलीभगत से भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने का सिलसिला लंबे समय से जारी है। जहां लोकायुक्त अधिकांश मामलों में भ्रष्टाचारियों को बचाने का काम करती है, वहीं कार्रवाई की इच्छा होने पर भी सरकार अभियोजन की अनुमति रोककर अपराधियों की ढाल बन जाती है। लोकायुक्त की कार्यप्रणाली अब एक निकम्मी और नकारा संस्था की हो चुकी है। यह पहरेदार की जगह हिस्सेदार की भूमिका में काम कर रही है। सौरभ शर्मा जैसे हाई-प्रोफाइल मामले में इसकी नाकामी ने साबित कर दिया कि लोकायुक्त पुलिस अपनी प्रासंगिकता खो चुकी है। लोकायुक्त, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर विभाग और अन्य एजेंसियों द्वारा सौरभ शर्मा के ठिकानों से बरामद बेशुमार संपत्ति के बावजूद जांच में ढिलाई, जयदीप प्रसाद का ट्रांसफर और निर्धारित समयावधि में चालान पेश न करना इस बात का संकेत है कि सरकार और लोकायुक्त मिलकर अपराधियों को खुली छूट दे रहे हैं। ऐसे में अब जरूरी हो गया है कि लोकायुक्त जैसी भ्रष्ट और औचित्यहीन संस्था को बंद कर दिया जाए। हम सरकार से निम्नलिखित सवाल पूछते हैं:- 1.    सौरभ शर्मा मामले में चालान पेश न करने की नाकामी के पीछे कौन जिम्मेदार है? 2.    जयदीप प्रसाद का ट्रांसफर क्या इस मामले को दबाने की साजिश का हिस्सा है? 3.    भ्रष्टाचार के अनेक मामलों में अभियोजन की अनुमति रोककर सरकार भ्रष्टाचारियों को संरक्षण क्यों दे रही है? 4.    लोकायुक्त की बार-बार नाकामी के बावजूद इस भ्रष्ट संस्था को क्यों ढोया जा रहा है? हम मांग करते हैं कि:- 1.    सौरभ शर्मा मामले की निष्पक्ष जांच हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में हो। 2.       जयदीप प्रसाद के ट्रांसफर और समयावधि में चालान पेश नहीं करने के कारणों की विस्तृत जांच हो। 3.       लोकायुक्त संस्था को तत्काल भंग कर इसकी जगह एक स्वतंत्र और प्रभावी संस्था का गठन किया जाए। मध्यप्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि सौरभ शर्मा को जमानत और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने के पीछे का सच क्या है? यदि सरकार ने इस मामले में पारदर्शिता नहीं दिखाई और लोकायुक्त संस्था को बंद करने की मांग पर अमल नहीं किया, तो यह साबित हो जाएगा कि उसका भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का दावा महज एक छलावा है। हम चेतावनी देते हैं कि जनता इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगी और इसका जवाब सड़कों पर और लोकतंत्र के हर मंच पर देगी। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शहर कांग्रेस अध्यक्ष रजनीश रंजन उसराठे,प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ अशोक मर्सकोले,राजेंद्र राजपूत,अदीब गौरी, सुभाष नामदेव,चंद्र मोहन सराफ,राजेश मिश्रा,महेंद्र चंद्रोल,लखन ठाकुर,ऋषि राय,विनोद चौधरी,अनिल दुबे,श्रीकांत कछवाहा, कोविद सिंह ठाकुर,अंकित रजक,आदि कांग्रेस जन उपस्थित रहे।

कलेक्टर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई समय सीमा बैठक

बड़वानी /कलेक्टर सुश्री गंुचा सनोबर की अध्यक्षता में बुधवार को शाम 4 बजे कलेक्टर कार्यालय बड़वानी के सभागृह में समय सीमा बैठक का आयोजन हुआ। बैठक के दौरान कलेक्टर ने शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, कार्यक्रम एवं सेवाओं की समीक्षा कर समय सीमा एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु संबंधित विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये। कलेक्टर द्वारा दिये गये निर्देश ऽ    सीएम हेल्प लाईन मंे लंबित शिकायतों के निराकरण के संबंध में समस्त विभाग अधिकारियों को निर्देशित किया कि पूरी जिम्मेदारी से गंभीरतापूर्वक ध्यान देकर शिकायतों को संतुष्टिपूर्वक बंद करवाये। अन्यथा पुरानी शिकायतों को बंद न करवाने वाले अधिकारियों के वेतन कटौती की कार्यवाही की जायेगी। ऽ    जल संरक्षण एवं जल संवर्धन का उद्देश्य लेकर 30 मार्च से 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान सम्पूर्ण राज्य सहित जिले में संचालित किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान से संबंधित विभाग सप्ताहवार कार्ययोजना बनाये। प्रति सप्ताह होने वाली समय सीमा बैठक में इसकी प्रगति की समीक्षा की जायेगी। ऽ    जनसुनवाई में जिले के दूर-दराज क्षेत्रों से आवेदक अपनी समस्याओं एवं शिकायतों को लेकर आते है। इसे औपचारिकता न बनाते हुए विभागीय अधिकारी आवेदनों का शीघ्र निराकरण करे। ऽ    जिले में बढ़ रही गर्मी के मद्देनजर धीरे-धीरे लू का प्रकोप भी बढ़ेगा। अतः लू से बचाव हेतु समय-समय पर एडवाईजरी जारी की जाये। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देशित किया कि वे लू से पीड़ित व्यक्तियांे के उपचार हेतु जिले के स्वास्थ्य केन्द्रों पर सभी व्यवस्थाएं पूर्ण रखे। ऽ    क्षेत्र की आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सीएचओ, एएनएम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लू के प्राथमिक उपचार के संबंध में जानकारी दी जाये। ऽ    जिले में पेयजल की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने पीएचई विभाग के अधिकारी को निर्देशित किया कि जिले में पेयजल की उपलब्धता कोई कमी नही होनी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाये कि जिले में दूषित पानी पीने से कोई बीमार न हो। बैठक में जिला पंचायत सीईओ सुश्री काजल जावला, अपर कलेक्टर श्री केके मालवीय, संयुक्त कलेक्टर श्री सोहन कनाश सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी एवं वीसी के माध्यम से खण्ड स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

मध्य प्रदेश में अब तक कर्मचारियों को छठे वेतनमान के अनुसार ही भत्तों का भुगतान किया जा रहा था

भोपाल वर्ष 2016 में सातवां वेतनमान लागू करने के नौ वर्ष बाद मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को अब परिवहन, गृह भाड़ा (हाउस रेंट अलाउंस/ एचआरए) बढ़ी हुई दर से मिलेगा। राज्य सरकार ने सातवें वेतनमान के अनुरूप भत्तों में वृद्धि की है। बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए भले ही आठवें वेतनमान का गठन करने की घोषणा हो चुकी है लेकिन मध्य प्रदेश में अब तक कर्मचारियों को छठे वेतनमान के अनुसार ही भत्तों का भुगतान किया जा रहा था।

GT ने 18वें ओवर में ही आरसीबी के 170 रनों के लक्ष्य को हासिल कर लिया, सुदर्शन का जलवा

बेंगलुरु आईपीएल 2025 के 14वें मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 8 विकेट से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी. गुजरात टाइटन्स (GT) की टीम ने 18वें ओवर में ही आरसीबी के 170 रनों के लक्ष्य को हासिल कर लिया. आरसीबी अपने घरेलू मैदान पर इस सीजन का पहला मैच खेल रही थी. जिसमें उसे हार का सामना करना पड़ा.  गुजरात की टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी थी. आरसीबी की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट खोकर 169 रन बनाए थे. 170 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुजरात की टीम ने 17.5 ओवर में ही इसे चेज कर लिया. आरसीबी बिना बदलाव के मैदान पर उतरी थी. जबकि गुजरात में एक बदलाव हुआ है. कगिसो रबाडा बाहर हुए और उनकी जगह अरशद खान को जगह दी गई थी.   ऐसे रही आरसीबी की बल्लेबाजी पहले बल्लेबाजी करने उतरी आरसीबी की शुरुआत बेहद खराब रही. दूसरे ही ओवर में आरसीबी को विराट कोहली के रूप में पहला झटका लगा.कोहली केवल 7 रन बनाकर अरशद खान का शिकार हुए. इसके बाद तीसरे ही ओवर में देवदत्त पडिक्कल को सिराज ने बोल्ड किया. फिर 5वें ओवर में खतरनाक दिख रहे फिल सॉल्ट को सिराज ने आउट किया. 7वें ओवर में कप्तान रजत पाटीदार को ईशांत ने अपना शिकार बनाया. इसके बाद जितेश शर्मा ने मोर्चा संभाला और 33 रनों की पारी खेली. लेकिन वो भी 13वें ओवर में आउट हो गए. लेकिन इसके बाद लिविंगस्टन ने तूफानी पारी खेली और अर्धशतक जड़ा. वहीं, टिम डेविड ने भी शानदार बल्लेबाजी की. इसके दम पर आरसीबी ने 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 170 रन बनाए. ऐसी रही गुजरात की बल्लेबाजी 170 रनों के जवाब में उतरी गुजरात की शुरुआत काफी शानदार रही. गिल और साई सुदर्शन ने ठोस शुरुआत दिलाई. हालांकि, गिल 14 रन बनाकर आउट हो गए. लेकिन इसके बाद साई सुदर्शन और जोश बटलर ने मोर्चा संभाला. साई सुदर्शन 49 रन बनाकर आउट हुए लेकिन उन्होंने मोमेंटम गुजरात की ओर शिफ्ट कर दिया. इसके बाद बटलर ने शानदार फिफ्टी जड़ी. बटलर ने नाबाद 73 रनों की पारी खेली और 18वें ओवर में ही गुजरात ने ये मैच जीत लिया. आईपीएल 2025 के 14वें मैच में गुजरात टाइटन्स की टीम ने  रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 8 विकेट से हराया. इस मैच के हीरो साई सुदर्शन और जोश बटलर रहे. जोश बटलर नाबाद रहे और उन्होंने 73 रनों की पारी खेली. लेकिन साई सुदर्शन ने गुजरात का मोमेंट सेट किया और 49 रनों की पारी खेली. लेकिन साई सुदर्शन आईपीएल में लगातार अपना जलवा बिखेर रहे हैं. पिछली 7 पारियों पर डालें नजर साई सुदर्शन की पिछली सात आईपीएल पारियों पर अगर नजर डालेंगे तो उन्होंने इसमें एक शतक जड़ा और 4 फिफ्टी लगाई है. जबकि एक बार वो फिफ्टी से चूके हैं. यानी सिर्फ एक बार ऐसा हुआ है जब साई 10 से कम स्कोर पर आउट हुए हैं. 7 पारियों में साई सुदर्शन ने 444 रन बनाए हैं. यानी साई ने 8.5 करोड़ की कीमत में आईपीएल में वो कमाल किया है, जो मोटी-मोटी रकम में भी बड़े क्रिकेट के सितारे नहीं कर सके हैं. यहां देखें पिछली 7 पारियां 65(39) 84*(49) 6(14) 103(51) 74(41) 63(41) 49(36) इस सीजन  दूसरे नंबर पर साई सुदर्शन इस सीजन आईपीएल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की बात करें तो साई सुदर्शन दूसरे नंबर पर हैं. पहले नंबर पर लखनऊ के निकोलस पूरन हैं. जिन्होंने 3 मैच में अबतक 189 रन बनाए हैं. जिसमें दो फिफ्टी जड़ी है. वहीं साई सुदर्शन ने 3 मैच में 186 रन बनाए हैं. तीसरे नंबर पर जोश बटलर हैं जिन्होंने 166 रन बनाए हैं.

भोपाल नगर निगम का 2025-26 का बजट आज पेश होगा

भोपाल भोपाल नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट गुरुवार को पेश होगा। नगर निगम की परिषद का साधारण सम्मेलन सुबह 11 बजे से कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आइएसबीटी) स्थित परिषद सभागृह में आहूत किया गया है। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी की अध्यक्षता में आहूत सम्मेलन में कार्यसूची में सम्मिलित विषयों पर चर्चा की जाएगी। महापौर मालती राय द्वारा वर्ष 2025-26 के प्रस्तावित बजट और वर्ष 2024-25 का पुनरीक्षित बजट सदन के विचारार्थ और अनुमोदनार्थ प्रस्तुत किया जाएगा। इस बजट बैठक से पहले बुधवार शाम को भाजपा और कांग्रेस पार्षद दल बैठक हुई। दोनों ही राजनीतिक पार्टी के नेताओं ने बजट बैठक को लेकर रणनीति फाइनल की। बैठक में जहां निगमायुक्त हरेंद्र नारायन के खिलाफ निंदा प्रस्ताव आ सकता है। कांग्रेस टैक्स वृद्धि का करेगी विरोध कांग्रेस पार्षद टैक्स वृद्धि को लेकर महापौर को घेरने की तैयारी कर चुके हैं। जानकारी के अनुसार संपत्तिकर में 10 प्रतिशत और जलकर व सीवेज में 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी बजट बैठक में हंगामा का कारण बनेगी। अब देखना यह है कि क्या विपक्ष टैक्स में वृद्धि को रोक पाती है या नहीं। भाजपा और कांग्रेस पार्षद मिलकर निगमायुक्त के अड़ियल रवैया को लेकर खासे नाराज है। लिहाजा उनके खिलाफ भाजपा और कांग्रेस पार्षद निंदा प्रस्ताव लाने की मांग करेंगे।  

बाग प्रिंट केवल एक हस्तशिल्प नहीं, यह संस्कृति, परंपरा और आत्म-अभिव्यक्ति का संगम है- ताहिर अली

बाग प्रिंट: एक विरासत, एक पहचान मध्यप्रदेश के धार जिले का छोटा सा कस्बा “बाग” केवल भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि एक समृद्ध हस्तकला का केंद्र है। यहां विकसित हुई “बाग प्रिंट” की कला सदियों पुरानी विरासत को जीवित रखते हुए वैश्विक मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है।  यह हस्तशिल्प कला प्राकृतिक रंगों और हाथ से तराशे गए लकड़ी के ब्लॉकों के माध्यम से कपड़ों पर एक अनोखी छाप छोड़ती है। इस कला को पुनर्जीवित करने और इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मोहम्मद यूसुफ खत्री और उनका परिवार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके अथक प्रयासों ने बाग प्रिंट को भारत और वैश्विक मंच में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। बाग प्रिंट: ऐतिहासिक धरोहर का पुनर्जागरण बाग प्रिंट की परंपरा सदियों पुरानी है और यह मूल रूप से खत्री समुदाय द्वारा संरक्षित और संवर्धित की गई। पहले यह कला केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित थी, लेकिन समय के साथ आधुनिक तकनीकों और मिलावट भरे रंगों के चलते इसकी पारंपरिक पहचान खतरे में पड़ने लगी। बाग प्रिंट को विलुप्त होने से बचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्वर्गीय इस्माईल खत्री की रही। उन्होंने इस कला को पुनर्जीवित करने के लिए परंपरागत तकनीकों में नवाचार किए और प्राकृतिक रंगों के उपयोग को बढ़ावा दिया। बाग प्रिंट के जनक स्वर्गीय इस्माईल खत्री द्वारा स्थापित इस कला की विरासत को आज भी उनके परिवार के सदस्य पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। बाग प्रिंट की इस समृद्ध परंपरा को जीवित रखने में मो. यूसुफ़ खत्री, स्व. मो. अब्दुल क़ादर खत्री, श्रीमती रशीदा बी खत्री, बिलाल खत्री, मो. रफ़ीक खत्री, उमर मो. फारूख खत्री, मो. काज़ीम खत्री, मो. आरिफ खत्री, अब्दुल करीम खत्री, गुलाम मो. खत्री, कासिम खत्री, अहमद खत्री और मोहम्मद अली खत्री जैसे शिल्पकारों का उल्लेखनीय योगदान है।यह परिवार कला, नवाचार और परंपरा के संतुलन को बनाए रखते हुए, बाग प्रिंट को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बाग प्रिंट को जीवंत रखने और वैश्विक पहचान दिलाने में खत्री परिवार दशकों से दे रहा है योगदान बाग प्रिंट को आज के दौर में जीवित रखने और आगे बढ़ाने में खत्री परिवार की कई पीढ़ियों का योगदान रहा है। उनके परिश्रम और समर्पण ने इस कला को एक नए मुकाम तक पहुंचाया है। एक समय था जब बाग प्रिंट की चमक धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगी थी। आधुनिकता के प्रभाव में हस्तशिल्प उद्योग सिकुड़ने लगा था, लेकिन स्वर्गीय इस्माईल खत्री ने इसे पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया। उन्होंने पारंपरिक तकनीकों को संरक्षित रखते हुए, नए प्रयोग किए, जिससे बाग प्रिंट को नया जीवन मिला। स्वर्गीय अब्दुल कादर खत्री और मोहम्मद यूसुफ खत्री ने इस यात्रा को आगे बढ़ाया और इस कला को वैश्विक मंचों तक पहुंचाया। उनके प्रयासों से यह प्रिंटिंग तकनीक सिर्फ धार जिले तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत और विदेशों में भी प्रसिद्ध हो गई। कलाकारों का दृष्टिकोण – बाग प्रिंट को संजोने और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में खत्री परिवार की कई पीढ़ियों का योगदान रहा है। जब इस कला के संरक्षण और भविष्य को लेकर खत्री परिवार के सदस्यों और अन्य कलाकारों से चर्चा की गई, तो उनके विचारों से पता चला कि यह केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन है। मो. यूसुफ़ खत्री का कहना है कि – “हमारे पिता ने हमें सिखाया कि कला केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है। स्वर्गीय अब्दुल कादर भाई ने इस सीख को आत्मसात किया और बाग प्रिंट को नई ऊंचाइयों तक ले गए। हमें गर्व है कि हमारी कला आज एक पहचान बन चुकी है। हमारी आने वाली पीढ़ियाँ भी इस कला को जीवित रखने में लगी हुई हैं।” श्री बिलाल खत्री (मो. यूसुफ़ खत्री के बेटे) कहते हैं: “पिता जी का सपना था कि बाग प्रिंट को एक ब्रांड के रूप में पहचाना जाए। आज, जब हम इसे वैश्विक स्तर पर देख रहे हैं, तो हमें गर्व महसूस होता है। लेकिन हमारी जिम्मेदारी यहीं खत्म नहीं होती, हमें इसे और आगे ले जाना है।” श्रीमती रशीदा बी खत्री (स्वर्गीय श्री अब्दुल कादर खत्री की पत्नी) कहती हैं कि: “हम सब इस कला के लिए एकजुट हैं। यह सिर्फ हमारा व्यवसाय नहीं, बल्कि हमारी परंपरा और पहचान है। जब हम किसी कपड़े पर हाथ से छपाई करते हैं, तो उसमें हमारी आत्मा झलकती है।” एक अमूल्य धरोहर की यात्रा बाग प्रिंट केवल एक हस्तशिल्प नहीं, बल्कि यह संस्कृति, परंपरा और आत्म-अभिव्यक्ति का संगम है। यह एक ऐसी कला है, जो समय की कसौटी पर खरी उतरी है और आधुनिकता की चुनौतियों के बावजूद अपनी मौलिकता बनाए रखने में सफल रही है। इस यात्रा को करीब से देखने के बाद, यह स्पष्ट होता है कि बाग प्रिंट को जिंदा रखना केवल एक परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यह एक ऐसी धरोहर है, जिसे अगर समय रहते संरक्षित नहीं किया गया, तो यह केवल संग्रहालयों की वस्तु बनकर रह जाएगी। खत्री परिवार इस कला को जीवित रखने के लिए जिस जुनून और समर्पण के साथ काम कर रहे हैं, वह काबिले-तारीफ है। लेकिन यह भी जरूरी है कि सरकार और समाज मिलकर इस कला को और अधिक समर्थन दें। आर्ट फंडिंग, डिज़ाइन इनोवेशन और डिजिटल मार्केटिंग जैसी नई रणनीतियों को अपनाकर इसे और अधिक व्यापक रूप से प्रचारित किया जा सकता है। बाग प्रिंट को लेकर उनका क्या अनुभव रहा? श्री उमर फ़ारूख़ खत्री इस सवाल के जवाब में कहते हैं, “शुरुआत में लोगों को समझाना बहुत मुश्किल था कि यह केवल एक परंपरागत कला नहीं, बल्कि एक जीवंत धरोहर है। धीरे-धीरे जब हमारे डिज़ाइनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली, तो हमें लगा कि हम सही दिशा में जा रहे हैं। आज, जब विदेशों में लोग हमारे प्रिंट पहने हुए दिखते हैं, तो खुशी का अहसास होता है।” भविष्य की संभावनाएं बाग प्रिंट आज दुनिया के कई देशों में अपनी पहचान बना चुका है। स्पेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, अमेरिका, कोलंबिया, थाईलैंड, रूस, चीन, अर्जेंटीना और बहरीन में इस कला का प्रदर्शन किया जा चुका है। श्री आरिफ़ खत्री कहते हैं: “हमारी अगली पीढ़ी को बाग प्रिंट को केवल संरक्षित नहीं, बल्कि इसे और अधिक वैश्विक बनाना होगा। नई तकनीकों … Read more

सौगात ए मोदी–सौजन्य सौहार्द सद्भाव का संदेश

 नीरज मनजीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बार ईद के मुबारक मौके पर 32 हजार मस्जिदों में 32 लाख ग़रीब पसमांदा मुस्लिम परिवारों को “सौगात-ए-मोदी” की किट भेजी है। इस किट में खाने-पीने की चीज़ों के अलावा कपड़े, ख़जूर, ड्राई फ्रूट्स, दूध और चीनी रखी गई थी। महिलाओं के लिए सूट का कपड़ा और पुरुषों के लिए कुर्ता-पायजामा रखा गया था। भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीक़ी के मुताबिक़ “रमज़ान का पाक महीना चल रहा था और हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईद के पवित्र त्यौहार पर “सौगात-ए-मोदी” का मीठा उपहार देकर देश के तमाम मुसलमानों को प्यार का संदेश दिया है कि वे भारत के समूचे 140 करोड़ वासियों के प्रधानमंत्री हैं। जमाल सिद्दीक़ी ने आगे और बताया कि ईद के बाद इस योजना के तहत सिख और ईसाई समुदाय के त्यौहारों के मौके पर भी जरूरतमंद लोगों तक सौगात की ऐसी किट भिजवाई जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम पर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। विपक्ष के बहुत से नेताओं ने इसे नेगेटिव नज़रिए से देखते हुए छलावा बताकर अपने-अपने तरीक़े से मोदी की काफी आलोचना की है। विपक्ष के हिमायती और मोदी के अंध विरोधी इकोसिस्टम के कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया था कि मुसलमानों को यह किट लेनी ही नहीं चाहिए। ये वही लोग हैं, जो कुछ भड़काऊ मजहबी नेताओं के साथ मिलकर मुसलमानों का ब्रेनवॉश करते रहते हैं और उन्हें भारत की मुख्यधारा से दूर रखने की तमाम कोशिशें करते रहते हैं। इन्हें मुसलमानों की दशा सुधारने, उन्हें आगे ले जाने, उन्हें तरक़्क़ी के रास्ते पर डालने में कोई रूचि नहीं है। वे केवल यही चाहते हैं कि मुसलमान हर क़ीमत पर भारतीय जनता पार्टी की ख़िलाफ़त करते रहें और मोदी के विरुद्ध विपक्षी पार्टियों को वोट देते रहें। ये वही इकोसिस्टम है, जिसने सीएए के ख़िलाफ़ मुस्लिम समुदाय को भड़काकर यह असत्य नैरेटिव खड़ा कर दिया था कि इस कानून के लागू हो जाने के बाद मुसलमानों की नागरिकता छीन ली जाएगी। नतीजा यह निकला था कि शाहीन बाग में कई महीनों तक प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली वासियों को सांसत में डालकर रखा था। आज हम अच्छी तरह देख रहे हैं कि सीएए के बाद किसी भी मुसलमान की नागरिकता नहीं छीनी गई है। यही लोग ख़ुद को  मुसलमानों का हितैषी बताकर औरंगज़ेब जैसे क्रूर शख़्स को अकबर से भी बड़ा और महान बादशाह बता देते हैं। तुष्टीकरण की घातक नीति पर चलकर मुस्लिम वोटबैंक का चैंपियन बनने की होड़ इस क़दर जारी है कि विपक्ष के कुछ नेता तो सारी हदें पार करके अपने ही पुरखों और अपने ही सनातन धर्म को गालियाँ देने लगते हैं। ऐसे नेताओं के प्रति मुसलमानों के दिल में कितनी इज़्ज़त होगी, इसका अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है। ऐसे नेताओं और दलों को समझना होगा कि आज़ादी के बाद, जब न्याय और समानता की जरूरत थी, तुष्टीकरण की भयावह नीति ने देश और देश के बहुसंख्यक समुदाय का कितना नुक़सान किया है। इस नीति ने मुस्लिम समुदाय का भी भला नहीं किया है। ये वही इकोसिस्टम है जो आज वक़्फ़ संशोधन बिल को लेकर मुस्लिम समुदाय को भड़काकर सड़क पर उतारना चाहता है। असदुद्दीन ओवैसी जैसे कुछ नेता इनके साथ मिलकर यह नैरेटिव सेट कर रहे हैं कि वक़्फ़ बिल के पास होने के बाद मुस्लिम समुदाय से उनकी मस्जिदें, मजारें और कब्रिस्तान छिन जाएँगे। यह नैरेटिव भी पूरी तरह असत्य की बुनियाद पर खड़ा किया गया है। कितनी बड़ी विडंबना है कि ओवैसी और विपक्ष के नेता इस संशोधन बिल को असंवैधानिक बता रहे हैं। जबकि सच तो यह है कि वक़्फ़ बोर्ड को जिस तरह से असीमित अधिकार दे दिए गए हैं, वे ही अपने-आप में संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ है। कोई भी संस्था जिसे सुप्रीम कोर्ट से भी ज़्यादा अधिकार दे दिए गए हों, जो सेक्युलरिज्म की मूल अवधारणा के विरुद्ध असमानता की बुनियाद पर खड़ी हो, उसे संवैधानिक कैसे माना जा सकता है? ओवैसी और विपक्ष के कुछ नेता इस बिल की पेशकदमी को भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए में विभाजन का एक अवसर भी मान रहे थे। वे लगातार नीतीश कुमार और चन्द्रबाबू नायडू पर दबाव डाल रहे थे कि वक़्फ़ बिल के ख़िलाफ़ उनकी पार्टियों–जनता दल यूनाइटेड और तेलुगू देशम पार्टी–को भाजपा से समर्थन वापस ले लेना चाहिए। मगर नीतीश और चन्द्रबाबू ने भाजपा और मोदी के साथ पूरी दृढ़ता से खड़े होकर ओवैसी और विपक्ष की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है। सच कहा जाए तो नीतीश और चन्द्रबाबू ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए विपक्ष के छद्म धर्म निरपेक्षता के तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। इसके अलावा यह भी साफ़ हो गया है कि  प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार अपना पाँच साल का कार्यकाल अवश्यमेव पूरा करेगी। दरअसल वक़्फ़ बिल की ख़िलाफ़त करते हुए कुछ मुस्लिम नेताओं और मौलानाओं ने बड़ा ही आक्रामक रवैया अपनाकर पूरे देश में मुस्लिम समुदाय को सड़कों पर उतारने की पूरी कोशिश की थी। शुक्र है कि मुसलमानों का एक बहुत बड़ा तबका और बहुत से मौलाना इस बिल के पक्ष में खड़े हैं। लगता है कि मुस्लिम समुदाय को धीरे-धीरे समझ में आने लगा है कि कौन उनका वास्तविक हितैषी है और कौन उन्हें सिर्फ़ एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने समन्वय और सौजन्य की नीति पर चलते हुए “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मूलमंत्र को धरातल पर उतारा है। मोदी सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का फ़ायदा समान रूप से हर समुदाय के हितग्राही तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी सामाजिक समरसता बढ़ाने के उद्देश्य से पसमांदा मुसलमानों के सम्मेलन में शामिल हो चुके हैं। “सौगात-ए-मोदी” इसी दिशा में सद्भाव सौजन्य समन्वय सौहार्द कायम रखने का एक छोटा सा प्रयास है।

स्कूलों ने अभिभावकों से किताबों व यूनिफार्म के नाम पर मोटी रकम वसूलना शुरू किया, प्राइवेट स्कूलों की मनमानी

नई दिल्ली राजधानी के निजी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होते ही अभिभावकों की जेब पर तगड़ी मार पड़ने लगी है। स्कूलों ने अभिभावकों से किताबों व यूनिफार्म के नाम पर मोटी रकम वसूलना शुरू कर दिया है। शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को किसी खास विक्रेता से किताबें व यूनिफार्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं करने और स्कूल की वेबसाइट पर किताबें खरीदने के लिए स्कूल के नजदीक की कम से कम पांच दुकानों का पता और टेलीफोन नंबर भी प्रदर्शित करने को कहा था। ताकि अभिभावक अपनी सुविधानुसार उन दुकानों से किताबें व यूनिफार्म खरीद सकें। इसके बावजूद निजी स्कूल कैंपस के अंदर ही निजी प्रकाशकों की किताबें, स्टेशनरी और यूनिफार्म मंहगें दामों पर बेच रहे हैं। इतना ही नहीं स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों से मोटी रकम वसूलने के लिए अलग-अलग कक्षा के अनुसार यूनिफार्म भी अलग कर दी है। यूनिफार्म की डिजाइन के बारे में भी बाहर के किसी वेंडर को जानकारी नहीं दी ताकि अभिभावकों को मजबूरन कैंपस के अंदर से ही यूनिफार्म लेनी पड़े। कोई पांच तो कोई आठ हजार में स्कूल के अंदर से बेच रहा किताबें निजी स्कूलों हर बार की तरह इस बार भी शिक्षा निदेशालय के आदेश की अवहेलना करते हुए स्कूल कैंपस के अंदर से बढ़े हुए दामों पर निजी प्रकाशकों की किताबें, कापी और स्टेशनरी का समान दे रहे हैं। प्री-प्राइमरी, केजी में महज तीन किताबें, आर्ट क्राफ्ट का सामान, स्टेशनरी और नोट बुक पांच से छह हजार की पड़ रही है। अशोक विहार स्थित महाराजा अग्रसेन स्कूल में कैंपस के अंदर से प्री-स्कूल की कापी-किताब व स्टेशनरी का सेट 4940 रुपये, पहली कक्षा की किताब, कापी व स्टेशनरी का सेट 6345 रुपये, पांचवीं कक्षा का 8239 रुपये, सातवीं का 8311 रुपये, आठवीं का 8935 रुपये में बेचा जा रहा है। इसमें किताबों पर कवर चढ़ाने के रुपये अलग से लिए जा रहे हैं। वसंत कुंज स्थित मैसोनिक पब्लिक स्कूल में आठवीं की कापी-किताब और स्टेशनरी का सेट 5598 रुपये का पड़ रहा है। करीब हर निजी स्कूल का यही हाल जनकपुरी स्थित सुमेरमल जैन पब्लिक स्कूल में पांचवीं की कॉपी-किताब और स्टेशनरी का सेट 4931 रुपये का बेचा जा रहा है। श्रीजन स्कूल में आठवीं की कापी-किताब व स्टेशनरी का सेट आठ हजार में बेचा जा रहा है। लगभग हर निजी स्कूल का यही हाल है। राजधानी के ये निजी स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को धता बता एनसीईआरटी की किताबों से ज्यादा निजी प्रकाशकों की किताबों को स्कूल में पढ़वा रहे हैं। स्कूलों में बेचे जा रहे सेट में अधिकतर किताबें निजी प्रकाशकों की ही हैं। इक्का-दुक्का किताब ही एनसीईआरटी की ली गई हैं। उसमें भी कहा गय है कि सेट में लिखी एनसीईआरटी की किताबें अभिभावकों को स्वयं ही बाहर से खरदनी पड़ेगी। कुछ स्कूलों में पूरा सेट लेने पर छूट जैसे आफर देकर अभिभावकों को लुभाने की भी कोशिश हो रही है। एनसीईआरटी की जो किताबें 30 रुपये से लेकर 100 रुपये तक मिलती है, उसी विषय की निजी प्रकाश की किताब की कीमत 300 से 700 रुपये तक में बेची जा रही है। यूनिफॉर्म को बार-बार बदला जाता स्कूलों में सिर्फ लूट का ये काम कापी-किताब और स्टेशनरी तक ही सीमित नहीं रखा है। बहुत से स्कूलों ने अब यूनिफार्म के नाम पर लूटने के अलग-अलग तरीके ढूंढे़ हैं। कुछ स्कूलों ने अलग-अलग कक्षाओं के लिए यूनिफार्म ही अलग कर रखी है ताकि बच्चे को कक्षा बदलते ही यूनिफार्म भी बदलनी पड़े। यूनिफॉर्म के लिए भी निदेशालय ने स्कूलों को आदेश दिया है कि वो पांच वेंडरों की सूची चस्पा करें जहां से अभिभावक यूनिफॉर्म खरीद सकें। लेकिन स्कूलों ने कैंपस के अंदर ही विक्रेता बैठाए हुए हैं और यूनिफॉर्म का डिजाइन भी बदल दिया और बाहर के विक्रेताओं को डिजाइन के बारे में जानकारी ही नहीं दी। मजबूरन अभिभावकों को स्कूल के अंदर बैठे विक्रेता से महंगे दाम पर यूनिफार्म खरीदनी पड़ रही है।

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