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पोषण पखवाड़ा प्रति वर्ष के दौरान इस वर्ष सातवां पोषण पखवाड़ा 8 से 22 अप्रैल तक मनाया जाएगा

भोपाल प्रदेश में व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से कुपोषण को कम करने के लिए पोषण अभियान चलाया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष पोषण अभियान के तहत पोषण को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से पोषण पखवाड़ा मनाया जाता है। इस पर सातवां पोषण पखवाड़ा 8 से 22 अप्रैल तक मनाया जाएगा। केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्रालय द्वारा ‘जीवन के प्रथम 1000 दिवस’ पोषण ट्रैकर में लाभार्थी मॉड्यूल को लोकप्रिय बनाने व्यापक प्रचार-प्रसार, समुदाय आधारित पोषण प्रबंधन मॉड्यूल के माध्यम से कुपोषण का प्रबंध तथा बच्चों में मोटापे को दूर करने के लिए स्वस्थ जीवन शैली को अपने पर बाल जैसे थीम पर केंद्रित विभिन्न गतिविधियों को आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। पोषण पखवाड़ा के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र सेक्टर, परियोजना एवं जिला स्तर की गतिविधियों में स्थानीय पोषण संसाधनों की को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण, सामुदायिक जागरूकता और पोषण संवेदनशील कार्यक्रम जैसे आयोजन किए जाएंगे। आंगनबाड़ी केंद्रों में दैनिक गतिविधियों की तिथिवार थीम आधारित कैलेंडर तैयार किया गया है। सभी जिलों में पखवाड़ा के दौरान साइकिल रैली, पोषण रैली, प्रभात फेरी, गर्भवती महिलाओं और धात्री माता एवं किशोरी बालिकाओं के साथ पोषण ट्रैकर में हितग्राही मॉडल पर समूह चर्चा, कुपोषित बच्चों की स्वास्थ्य जांच, एनीमिया जागरूकता शिविर का आयोजन किया जाएगा। पोषण पखवाड़ा के दौरान लोक स्वस्थ एवं परिवार कल्याण, आयुष, शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण, शहरी विकास सहयोग से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयुक्त महिला बाल विकास श्रीमती सूफिया फारूकी वली ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि पोषण पखवाड़ा के दौरान जिले में प्रत्येक स्तर पर इसका प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने कहा कि 8 अप्रैल को पोषण पखवाड़ा का शुभारंभ स्थानीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया जाये। और कार्यक्रम में उपस्थित सभी जन सामान्य को पोषण शपथ भी दिलाई जाए। श्रीमती फारूकी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र सहित प्रत्येक स्तर से प्रतिदिन दिवस आयोजित गतिविधियों के आधार पर अधिकतम पांच गतिविधियों का संक्षिप्त विवरण, फोटोग्राफ एवं हितग्राहियों की श्रेणीवार संख्या भारत सरकार के पोर्टल https://poshanabhiyaan.gov.in के डैशबोर्ड पर अपलोड करना होगा।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दान धर्म और परोपकार दाऊ अग्रवाल समाज के स्वभाव में है

रायपुर  दाऊ अमृष कुमार लक्ष्मेश्वर दयाल, छत्तीसगढ़ी अग्रवाल भवन पुरानी बस्ती के लोकार्पण समारोह, छत्तीसगढ़ में दान की अनोखी परंपरा स्थापित करने वाले दानदाताओं के वंशजों और छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज के केंद्रीय पदाधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह मैं पहुंचे प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दान धर्म और परोपकार दाऊ अग्रवाल समाज के स्वभाव में है। कोरोना काल में जब सब अपने घरों से निकल नहीं पा रहे थे तब छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज ने सबके भोजन की, विश्वास की और मुस्कान की चिंता की इस समाज ने धर्म शिक्षा स्वास्थ्य शुद्ध पेयजल जैसे विभिन्न आयाम में दान किया। यह अनुकरणीय है।  कोई सोच भी नहीं सकता था ऐसा दान दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल ने किया है। 1728 एकड़ जमीन कृषि विश्वविद्यालय को दान अद्भुत है। अस्पताल का निर्माण आज भी लोगों को लाभ पहुंचा रहा है और एम्स की जमीन दाऊजी की दूर दृष्टि को साबित करती है। ऐसे दाऊजी को नमन है।  लोगों को संबोधित करते हुए रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी ने कहा कि आज का कार्यक्रम एक समाज के दायरे में बंद कार्यक्रम नहीं है आज के कार्यक्रम में शहर को शिक्षा स्वास्थ्य संस्कृति धर्म शादी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने वाले व दान करने वालों का सम्मान किया जा रहा है कहीं ना कहीं उसकी इस दान के पीछे दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल जी की प्रेरणा है। और यह परंपरा लगातार आगे बढ़े ऐसा इस आयोजन का उद्देश्य है।   इस पूरे आयोजन में रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा महापौर मीनल चौबे व नान  अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव भाजपा प्रवक्ता नालिनेश ठोकने भी उपस्थित थे। ।  कार्यक्रम के आयोजक छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज की केंद्रीय अध्यक्ष दाऊ अनुराग अग्रवाल ने बताया कि दानशीलता दिवस का उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी जो आभासी दुनिया में जी रही है उन्हें उनके पूर्वजों के योगदान से अवगत कराना है। पूर्वजों ने दान की जो परंपरा रखी थी वर्तमान पीढ़ी उसे बहुत आगे अच्छे से आगे बढ़ा रही है भविष्य की पीढ़ी भी उससे प्रेरणा ले इसलिए ऐसे आयोजन निरंतर किए जाएंगे। अनुराग अग्रवाल ने बताया कि रायपुर अब महानगर हो गया है महानगर के लोगों को यह पता लगे की रायपुर के निर्माण में अग्रवाल समाज, मराठी समाज, ब्राह्मण समाज, बंगाली समाज, सिंधी समाज, सिख समाज सब समाजों ने मिलकर बिना भेदभाव के योगदान दिया है इसलिए यह आयोजन किया गया है।   छत्तीसगढ़ी दाऊ अग्रवाल समाज की तरफ से केंद्रीय अध्यक्ष अनुराग अग्रवाल ने मुख्यमंत्री जी से दानवीर दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल के नाम से राज्य अलंकरण प्रारंभ करने की मांग रखी है। क्योंकि प्रथम मंत्रालय दो कल्याण सिंह मंत्रालय था अतः नया रायपुर में किसी चौराहे या सड़क का नाम दाऊ कल्याण सिंह के नाम से रखने की मांग भी की गई है।   छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज की अध्यक्ष पद पर  दाऊ अनुराग अग्रवाल सचिव पद पर दाऊ  डॉ जेपी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष पद पर  दाऊ अजय अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष पद पर दाऊ अजय दानी, उपाध्यक्ष पद पर दाऊ श्याम अग्रवाल, दाऊ गजेंद्र अग्रवाल, दाऊ डॉ राजेश अग्रवाल, श्रीमती सीता अग्रवाल, सह सचिव पद पर दाऊ यशवंत अग्रवाल, दाऊ संतोष अग्रवाल, दाऊ केशव मुरारी अग्रवाल,श्रीमती निहारिका अग्रवाल, महिला प्रतिनिधि के पद पर श्रीमती विंध्य अग्रवाल और युवा प्रतिनिधि के तौर पर दाऊ आशीष अग्रवाल ने मुख्यमंत्री के द्वारा महाराज अग्रसेन के नाम से शपथ ली।   कार्यक्रम आभार प्रदर्शन केंद्रीय सचिव डॉक्टर दाऊ जेपी अग्रवाल ने किया।

14 अप्रैल को जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ़ में बनी दुकानों की होगी नीलामी

एमसीबी कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देशानुसार एवं जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के आदेशानुसार पंचायत द्वारा निर्मित 20 दुकानों की नीलामी को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। वर्ष 2015 में अनुबंध के तहत आवंटित इन दुकानों के किरायेदारों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर न तो किराया जमा किया और न ही अनुबंध का नवीनीकरण कराया। इस कारण जनपद पंचायत को नीलामी की प्रक्रिया पुनः शुरू करनी पड़ी। तीन बार नोटिस के बावजूद किरायेदारों ने नहीं किया नवीनीकरण- सूत्रों के अनुसार जनपद पंचायत ने दुकानदारों को किराया जमा करने और अनुबंध नवीनीकरण के लिए तीन बार कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बावजूद इसके, किसी भी किरायेदार ने निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया। परिणामस्वरूप, प्रशासन ने 3 अप्रैल 2025 को अंतिम नोटिस जारी कर एक सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है। यदि इस अवधि में नवीनीकरण और बकाया किराया जमा नहीं किया जाता, तो दुकानों का आवंटन स्वतः निरस्त मान लिया जाएगा। उच्च न्यायालय में विचाराधीन दुकानों को छोड़कर 14 की होगी नीलामी- जनपद पंचायत की सामान्य सभा के निर्णयानुसार, दुकान क्रमांक 03, 10, 11, 12, 14 एवं 18 से संबंधित मामले उच्च न्यायालय में लंबित होने के कारण फिलहाल इन्हें नीलामी प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। शेष 14 दुकानों की नीलामी नियमानुसार की जाएगी।

भारत से टेस्ट सीरीज में भिड़ंत से पहले इंग्लैंड के तेज गेंदबाज ओली स्टोन चोट के कारण नहीं खेलेंगे, लगा झटका

लंदन IPL 2025 की समाप्ति के बाद टीम इंडिया पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए जून में इंग्लैंड का दौरा करेगी। हालांकि भारत से टेस्ट सीरीज में भिड़ंत से पहले इंग्लैंड क्रिकेट टीम को तगड़ा झटका लगा है। दरअसल, 31 वर्षीय इंग्लैंड के तेज गेंदबाज ओली स्टोन घुटने की चोट के कारण जुलाई तक क्रिकेट मैदान से बाहर रहेंगे। इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की। इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने अपने एक बयान में कहा, स्टोन को पिछले महीने नॉटिंघमशायर के प्री-सीजन अबू धाबी दौरे के दौरान तकलीफ बढ़ गई थी। इस हफ्ते किए गए स्कैन से पता चला कि सर्जरी की जरूरत है। अब वह पुनर्वास की अवधि शुरू करेंगे। ईसीबी और नॉटिंघमशायर दोनों की चिकित्सा टीमें मिलकर उनकी निगरानी करेंगी। परिणामस्वरूप, स्टोन इंग्लिश समर सीजन की शुरुआत से चूक जाएंगे, लेकिन उनका लक्ष्य अगस्त 2025 तक पूरी तरह से फिट होना है। स्टोन, मार्क वुड के साथ घरेलू टेस्ट मैच से बाहर हो गए हैं, क्योंकि वुड को चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान घुटने में लगी चोट की सर्जरी करानी पड़ी है। इसका मतलब यह है कि ऑस्ट्रेलिया के एशेज दौरे से पहले दोनों में से कोई भी टेस्ट क्रिकेट नहीं खेलेगा। टीम इंडिया के खिलाफ खेला है एक टेस्ट ओली स्टोन ने 2021 में भारत के खिलाफ चेन्नई में एक टेस्ट मैच खेला था, जिसमें उन्होंने कुल 4 विकेट चटकाए थे। भारत ने उस मैच की पहली बार में 329 रन बनाने के बाद इंग्लैंड को 134 रन पर ढेर कर दिया था। वहीं दूसरी पारी भारत ने 286 रन बनाकर जीत के लिए 481 रन का लक्ष्य दिया, लेकिन इंग्लैंड की टीम दूसरी इनिंग में 164 रन ही बना सकी। इस तरह भारत ने यह मुकाबला 317 रन से जीत लिया था।

8 साल बाद 50 लाख किसानों से जुड़ी समितियों के होंगे चुनाव, चुनाव 1 मई से 7 सितंबर 2025 तक पांच चरणों में होंगे

भोपाल मध्य प्रदेश में 50 लाख से अधिक किसानों की सदस्यता वाली प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पीएसीएस) के चुनाव आठ वर्ष के लंबे अंतराल के बाद अब होने जा रहे हैं। हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने इन चुनावों को प्राथमिकता दी है। महाधिवक्ता कार्यालय ने इसे अति आवश्यक बताते हुए पांच चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया है, जो एक मई से सात सितंबर 2025 के बीच संपन्न होंगे। यह चुनाव गैर दलीय आधार पर होंगे, लेकिन कांग्रेस और भाजपा ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।   हाई कोर्ट के निर्देशों ने बढ़ाया दबाव प्रदेश में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव आखिरी बार 2013 में हुए थे, जिनका कार्यकाल 2018 में समाप्त हुआ। नियमानुसार छह माह पहले चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन विधानसभा चुनाव, किसान कर्ज माफी और अन्य कारणों से यह लगातार टलता रहा। कांग्रेस और शिवराज सरकारों के कार्यकाल में भी यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। इस बीच, वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर प्रशासकों की नियुक्ति की गई, लेकिन सहकारी अधिनियम के अनुसार यह व्यवस्था अधिकतम एक साल तक ही वैध थी। चुनाव न होने से असंतोष बढ़ा और हाई कोर्ट की जबलपुर व ग्वालियर खंडपीठ में कई याचिकाएं दायर हुईं। मार्च में महाधिवक्ता कार्यालय ने सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव और सहकारिता विभाग को सुझाव दिया कि चुनाव जल्द कराना जरूरी है। इसके बाद राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी ने कार्यक्रम घोषित किया। पुनर्गठन के बाद पहले चरण में चुनाव चुनाव कार्यक्रम के तहत पहले चरण में उन समितियों को शामिल किया जाएगा, जो पुनर्गठित हो चुकी हैं। भारत सरकार के सहकारिता क्षेत्र के विस्तार के निर्देशों के कारण पहले पुनर्गठन पर जोर दिया गया, लेकिन अब हाई कोर्ट के दबाव में प्रक्रिया तेज की गई है। निर्वाचन प्राधिकारी ने स्पष्ट किया कि सभी चरणों में व्यवस्थित ढंग से मतदान होगा। सबसे पहले रजिस्ट्रीकरण व निर्वाचन अधिकारी को सदस्यता सूची सौंपी जाएगी, जिसके बाद दावा-आपत्ति का निराकरण कर अंतिम सूची जारी होगी। महिलाओं के लिए संचालक मंडल में पद आरक्षित होंगे। आमसभा की सूचना के साथ नामांकन और चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कांग्रेस-भाजपा का दखल भले ही सहकारिता चुनाव गैर दलीय आधार पर होते हों, लेकिन राजनीतिक दलों की इसमें गहरी दिलचस्पी रहती है। कांग्रेस ने पूर्व मंत्रियों भगवान सिंह यादव और अरुण यादव के नेतृत्व में एक समिति बनाई है, जो चुनावी रणनीति तैयार कर रही है। वहीं, भाजपा का सहकारिता प्रकोष्ठ भी अपने समर्थकों को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य संस्थाओं में प्रतिनिधि बनाने के लिए सक्रिय है। दोनों दल गांव स्तर से लेकर राज्य स्तर तक सहकारी संस्थाओं में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं। चुनाव की प्रक्रिया चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए कई कदम उठाए जाएंगे। सदस्यता सूची प्रकाशन के बाद विशेष साधारण सम्मेलन बुलाकर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रतिनिधियों का चयन होगा। पांच चरणों का कार्यक्रम इस प्रकार है: पहला चरण (1 मई-23 जून), दूसरा चरण (13 मई-4 जुलाई), तीसरा चरण (23 जून-22 अगस्त), चौथा चरण (5 जुलाई-31 अगस्त), और पांचवां चरण (14 जुलाई-7 सितंबर)। यह प्रक्रिया समितियों के पुनर्गठन और किसानों की सहभागिता को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा विश्वविद्यालयों व शासकीय विभागों की खाली जमीनों पर उद्यान विकसित किए जाएं

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब उद्यानिकी तथा प्र-संस्करण विभाग की नर्सरियों को पीपीपी मॉडल(PPP model) पर विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव(CM Mohan Yadav) ने  समत्व भवन में बुलाई समीक्षा बैठक् में इसके निर्देश दिए। यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों व शासकीय विभागों की खाली जमीनों पर उद्यान विकसित किए जाएं, रोजगारपरक गतिविधियों के लिए खाद्य प्रसंस्करण पर विशेषज्ञता आधारित सेल गठित हो, चंबल, मालवा और महाकौशल में क्षेत्र विशेष की आवश्यकतानुसार उद्यानिकी विकास की कार्य योजना बनाएं। बागवानी और नर्सरी लगाने को जन आंदोलन बनाना होगा, विधायक और पंचायत प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में आदर्श बागवानी विकसित करें। अधिकारियों को निर्देश दिए कि इंदौर के मालवी आलू व गराडू तथा जबलपुर के मटर व सिंघाड़ा सहित जिले के उत्पादों को जीआई टैग दिलाने की प्रकिया में तेजी लाए। मुख्यमंत्री(CM Mohan Yadav) ने कहा है कि किसानों को उनकी मेहनत और उपज का वाजिब मूल्य मिले, उन्हें यह भरोसा दिलाना आवश्यक है। किसानों की उपज के लिए उपयुक्त सुविधाजनक स्थलों पर स्टोरेज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही मंडियों में उपज के मूल्य की जानकारी किसानों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करें। श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए किसानों को पुरस्कृत करने की व्यवस्था भी हो। दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र जैसी संस्थाओं से किसानों के संवाद निरंतर जारी रहे। उद्यानिकी इंडस्ट्री कॉन्क्लेव होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि नीमच, मंदसौर में औषधीय कृषि के लिए उद्यानिकी इंडस्ट्री कॉन्क्लेव होगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 22 लाख 72 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलें ली जा रही हैं। आगामी 5 वर्ष में 33 लाख 91 हजार हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य है। रीवा के सुंदरजा आम और रतलाम के रियावन लहुसन को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है। वहीं खरगोन की लाल मिर्च, जबलपुर के मटर, बुरहानपुर के केले, सिवनी के सीताफल, बरमान नरसिंहपुर के बैंगन, बैतूल के गजरिया आम, इंदौर के मालवी आलू, रतलाम की बालम ककड़ी, जबलपुर के सिंघाड़ा, धार की खुरासानी इमली और इंदौर के मालवी गराडू को जीआइ टैग दिलाने की प्रकिया जारी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लिया प्रधानमंत्री मोदी के प्रस्तावित भ्रमण की तैयारियों का जायजा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के अशोकनगर के ईसागढ़ स्थित आनंदपुर धाम में 11 अप्रैल 2025 को प्रस्तावित भ्रमण की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने हेलीपैड स्थल, सुरक्षा व्यवस्था, रूट चार्ट, मंदिरों के दर्शन स्थल, पूजा स्थान तथा सत्संग स्थल का निरीक्षण कर जानकारी ली। साथ ही अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आनंदपुर धाम स्थित श्री परमहंस अद्वैत मत, श्री आनंद शांति कुंज, श्री आनंद शांति भवन, श्री आनंद सरोवर एवं श्री आनंद शांति धाम पहुंचकर दर्शन किये गये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री आनंदपुर धाम स्थित मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना की। उन्होंने श्री आनंद सरोवर के पवित्र जल में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद लिया और प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने श्री आनंदपुर धाम की महिमा को गरिमामय बताते हुए कहा कि यहां पहुंचने पर सुखद अनुभूति होती है। बैसाखी पर लगेगा वार्षिक मेला मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैसाखी पर लगने वाले वार्षिक मेले में आने वाले अनुयायियों एवं दर्शनार्थियों के लिये सभी आवश्यक व्यवस्थाएं बेहतर करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि श्री आनंदपुर सत्संग आश्रम श्री परमहंस अद्वैत मत का भक्ति परमार्थ का प्रमुख केन्द्र तथा एक महान तीर्थ स्थल एवं अथाह ज्ञान व आत्मिक विद्या का अतुलनीय भंडार है। यहां पर श्री आनंद सरोवर की तरल छटा निराली है तथा परिधि में पूजा स्थलों का अनोखा संगम है। इस पवित्र स्थल पर आकर मन को शांति तथा आत्म ज्ञान को बल मिलता है। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा एवं प्रभारी मंत्री श्री राकेश शुक्ला, विधायक चंदेरी श्री जगन्नाथ सिंह रघुवंशी, विधायक मुंगावली श्री बृजेंद्र सिंह यादव, पूर्व विधायक अशोकनगर श्री जजपाल सिंह जज्जी, श्री आलोक तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, ट्रस्ट के महात्मा, अनुयायी एवं पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।  

पतंजलि ग्रुप को मऊगंज में 400 एकड़ भूमि आवंटित, ग्रुप करेगा इतने करोड का निवेश

रीवा  एमपी के रीवा शहर में लंबे समय बाद एक और बड़ा व्यावसायिक ग्रुप निवेश करने जा रहा है। पतंजलि ग्रुप को मऊगंज के घुरेहटा में करीब 400 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। यहां पर पतंजलि ग्रुप ने एकीकृत प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है। उसमें खाद्य प्रसंस्करण के साथ ही आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा उत्पाद, स्किल डेवलपमेंट सेंटर सहित अन्य जरूरी संसाधन विकसित किए जाएंगे।  बीते साल अक्टूबर महीने में रीवा में आयोजित रीजनल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव में पतंजलि ग्रुप के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण ने एक हजार करोड़ के निवेश की घोषणा की थी। उस दौरान फूड इंडस्ट्री पर उन्होंने निवेश के संकेत दिए थे, लेकिन हाल ही में भोपाल में एमपी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में उन्होंने कहा है कि मऊगंज के घुरेहटा में मिलने जा रही भूमि पर वह केवल एक प्लांट नहीं बल्कि एकीकृत प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करेंगे। वहां पर कई तरह की गतिविधियां संचालित की जाएंगी। टीम लेगी जायजा बनारस-नागपुर रूट पर स्थित घुरेहटा में पतंजलि इंटीग्रेटेड प्रोसेसिंग यूनिट लगाएगी। अप्रेल के आखिरी या मई के पहले सप्ताह में टीम के मऊगंज आने की संभावना है। इधर कार्पोरेशन ने भूमि आवंटन के साथ ही ₹26 करोड़ की डिमांड भी भेजी है।

इंदौर में बढ़ रही जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं, अभियान में 35 हजार ओरल कैंसर और 10,768 सवाईकल कैंसर से पीड़ित पाए गए

इंदौर स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए गए निरोगी काया अभियान के तहत कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस अभियान में 5 लाख 90 हजार से अधिक इंदौरियों की जांच की गई, जिसमें 62 हजार से अधिक लोग ब्लड प्रेशर और 45 हजार से अधिक लोग मधुमेह से पीड़ित पाए गए। इसके अलावा, 17,156 लोगों को दोनों ही बीमारियां यानी उच्च रक्तचाप और शुगर एक साथ पाई गईं। इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि इंदौर में लोग अव्यवस्थित खान-पान और फास्टफूड के कारण स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इंदौर में बढ़ रही जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं इंदौर जैसे खाने-पीने के शौक़ीन शहर में अब स्वास्थ्य समस्याएं भी तेजी से बढ़ने लगी हैं। तला-भुना और फास्टफूड खाने के कारण युवाओं में ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। निरोगी काया अभियान के आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि 10 प्रतिशत से अधिक लोग उच्च रक्तचाप, मधुमेह और जीवनशैली से जुड़ी अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं। यह चौंकाने वाली बात है कि इन बीमारियों से प्रभावित कई लोग अब भी इससे अनजान हैं और समय रहते उपचार नहीं करा रहे हैं। निरोगी काया शिविर और जांच अभियान स्वास्थ्य विभाग द्वारा केंद्र सरकार की पहल पर चलाए गए इस निरोगी काया अभियान के तहत जिला अस्पताल और संजीवनी क्लिनिकों पर जांच शिविर लगाए गए। इन शिविरों में यह पाया गया कि अनियमित खानपान और इंदौरियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी के कारण युवाओं में नॉन-एल्कोहोलिक फेटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 21 प्रतिशत लोगों में इस बीमारी के लक्षण पाए गए। 26,727 व्यक्तियों की जांच में लगभग 10 प्रतिशत लोग इस समस्या से पीड़ित थे, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। अन्य गंभीर बीमारियों की पहचान निरोगी काया अभियान में मुंह के कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के भी मामले सामने आए हैं। अभियान के दौरान 35 हजार लोग ओरल कैंसर और 10,768 लोग सवाईकल कैंसर से पीड़ित पाए गए। इनमें से 1500 से अधिक मरीजों को अन्य गंभीर जांचों के लिए भेजा गया। यह आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इंदौर में स्वास्थ्य जागरूकता की कमी के कारण गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं और समय रहते उनका इलाज न करने से ये बीमारियां खतरनाक रूप ले सकती हैं।  

स्कूल चलें हम अभियान में सीडब्ल्यूएसएन बच्चों का हो रहा है चिन्हांकन

भोपाल प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ‘चिल्ड्रन विद स्पेशल नीड्स’ (सीडब्ल्यूएसएन) की समावेशित शिक्षा का क्रियान्वयन राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा जिला शिक्षा केन्द्रों के माध्यम से किया जा रहा है। चिन्हांकित बच्चों की प्रविष्टि केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय के प्रबंध पोर्टल पर की जा रही है। प्रविष्टि के बाद इन बच्चों को उनकी आवश्यकता अनुसार सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। विशेष अभियान के अंतर्गत वर्ष 2022-23 में एक लाख 43 हजार 439, वर्ष 2023-24 में एक लाख 31 हजार 85 सीडब्ल्यूएसएन बच्चों का चिन्हांकन किया गया। वर्ष 2024-25 में चिन्हित बच्चों की प्रविष्टि का कार्य अंतिम चरण में है। ब्रेल लिपि की पाठ्य-पुस्तकों का वितरण प्रदेश में चिन्हित किये गये सीडब्ल्यूएसएन बच्चों को भोपाल की शासकीय ब्रेल प्रेस के माध्यम से ब्रेल लिपि में मुद्रित पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध कराई गई। राज्‍य के 322 विकासखंडों में आईईडी संस्थान तैयार कराये गये हैं। वर्ष 2024-25 में प्रत्येक जिले की एक शाला, जहां सीडब्ल्यूएसएन छात्रावास के दिव्यांग बच्चे अध्ययनरत हैं, वहां संसाधन केन्द्र तैयार कराने की कार्यवाही तेजी से की जा रही है। दिव्यांग बच्चों को आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण प्रदेश में दिव्यांग बच्चों को परिवहन भत्ता और स्टायफंड समेत अन्य आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इन बच्चों की शिक्षण व्यवस्था से लगे स्त्रोत सलाहकारों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की गई है। इसके साथ ही दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों, जिला परियोजना समन्वयकों एवं डाइट के प्राचार्यों का उन्मुखीकरण किये जाने के लिये विशेष प्रशिक्षण भी आयोजित किये गये। दिव्यांग बच्चों के चिकित्सीय मूल्यांकन के बाद उनकी आवश्यकता के उपकरण वितरण की कार्यवाही भी की गई। दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास के लिये खेल-कूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी वर्ष 2024-25 में नवम्बर-दिसम्बर माह में संपन्न कराये गये। सीडब्ल्यूएसएन श्रेणी के बच्चों में ऐसे बच्चे जिन्हें गृह आधारित शिक्षा की आवश्यकता है, उन्हें 3 हजार 500 रूपये प्रति बच्चे के मान से टीएलएम किट प्रदान की गई। वर्ष 2025-26 में सीडब्ल्यूएसएन बच्चों की मदद के लिये निर्देश प्रदेश में नया शैक्षणिक-सत्र एक अप्रैल 2025 से शुरू हो गया है। विशेष आवश्यकता वाले (सीडब्ल्यूएसएन) बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘स्कूल चलें हम’ अभियान में इन बच्चों को चिन्हित करने के निर्देश मैदानी अमले को दिये गये हैं। सर्वेक्षण के बाद इन बच्चों की शिक्षा एवं उनसे जुड़े संसाधनों को पूरा करने के लिये कार्य-योजना तैयार की जायेगी।  

राज्य आनंद संस्थान द्वारा आनंद की ओर प्रशिक्षण का आयोजन 7 से 9 अप्रैल तक

भोपाल राज्य आनंद संस्थान द्वारा 7 से 9 अप्रैल 2025 तक आरसीपीवी नरोन्हा प्रशासन अकादमी भोपाल में आनंद की ओर सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों के साथ प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा। प्रशिक्षण में जन अभियान परिषद, शासकीय विभागों के अधिकारी और अशासकीय सदस्य भी शामिल होंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी राज्य आनंद संस्थान आशीष कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण में प्रदेश के कुल 50 प्रतिभागी शामिल होंगे, जिन्होंने संस्थान की वेबसाइट पर पंजीयन कराया है। उन्होंने कहा कि धन, पद, ऐश्वर्य आदि के पीछे भागकर इसके माध्यम से आनंदित रहने की संभावना कम ही है। मानव में निरंतर आनंद में रहने के लिए भौतिक सुविधा के साथ संबंध एवं समझ का होना आवश्यक है। इन तीनों के होने पर व्यक्ति स्वयं, परिवार, समाज तथा शेष प्रकृति की व्यवस्था के संगत में आनंदित होकर जी सकता है। ‘आनंद की ओर’ कार्यक्रम में प्रदेश के नागरिकों को इस विषय वस्तु के बारे में जागरूक करने का प्रयास है। संस्थान द्वारा आनंदकों को इससे जोड़ा जा रहा है, जिससे उनका जीवन आनंदमयी हो और दूसरों को आनंदित रहने की दिशा में भी प्रेरित कर सकें।  

UPI के बढ़ते चलन ने घटाई ATM की मांग, ग्रामीण इलाकों पर सबसे ज्यादा असर

मुंबई डिजिटल युग के इस दौर में, एक तरफ जहां कैशलेस ट्रांजेक्शन अपना तेजी से स्थान बना रही है और लोगों की रोमर्रा की जिंदगी को आसान बना रही है। वहीं दूसरी तरफ लोग अब कैश के साथ ही साथ एटीएम का प्रयोग कम कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे सबसे प्रमुख कारण UPI पेमेंट्स का उभार है। UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के माध्यम से लेन-देन आसान और तेज हो गया है, जिससे कैश निकासी की आवश्यकता में कमी आई है। देश में डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ रहा है। जिसके चलते एटीएम के इस्तेमाल में गिरावट आई है। इससे जुड़ी हुई आरबीआई ने रिपोर्ट भी पब्लिश की है। भारत में ATM की संख्या में लगातार हो रही गिरावट RBI के ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार,देश में एटीएम की संख्या में भारी कमी आई है। भारत में ATM की संख्या सितंबर 2023 में 219,000 से घटकर सितंबर 2024 में 215,000 हो गई है। यह गिरावट मुख्य रूप से ऑफ-साइट ATM में कमी के कारण हुई है। ये ATM सितंबर 2022 में 97,072 से गिरकर सितंबर 2024 में 87,638 तक पहुंच गए। ATM की संख्या में कमी के कारण वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि सरकारी बैंकों ने एटीएम बंद करने के लिए कई कारण बताए हैं। इनमें बैंकों का एकीकरण, एटीएम का कम इस्तेमाल, व्यावसायिक लाभ की कमी और एटीएम का स्थानांतरण शामिल हैं। बैंकर्स का कहना है कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन और यूपीआई के उभरने से नकदी का उपयोग कम हुआ है, जिससे एटीएम का संचालन अव्यावहारिक हो गया है। UPI का बढ़ता दबदबा पिछले नौ वर्षों में डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जन धन योजना, मोबाइल इंटरनेट और यूपीआई के प्रसार ने इस बदलाव को बढ़ावा दिया है। पिछले पांच वर्षों में यूपीआई लेनदेन में 25 गुना वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में जहां 535 करोड़ यूपीआई लेनदेन हुए, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 13,113 करोड़ हो गए। इस वित्त वर्ष (सितंबर तक) यूपीआई के जरिए 122 लाख करोड़ रुपए के 8,566 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज हुए हैं। डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ता कदम उपभोक्ता अब सब्जियों से लेकर ऑटो सवारी और महंगी खरीदारी तक के लिए यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं। इस डिजिटल क्रांति ने भारत को नकदी से डिजिटल भुगतान की ओर तेजी से बढ़ाया है। क्यों कम हो रहे ATM मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में पिछले काफी समय से डिजिटल पेमेंट पर जोर दिया जा रहा है। डिजिटल पेमेंट करना लोगों को काफी आसान भी लगता है, इसलिए कम समय में ही यह पूरे देश में काफी लोकप्रिय हो गया है। बैंकों के घटती एटीएम की संख्या में काफी बड़ा रोल यूपीआई का भी है। पिछले कुछ समय से एटीएम के पॉपुलैरिटी में काफी कमी आई है। लोगों तक एटीएम की पहुंच अभी भी कम है, रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में प्रति 100,000 लोगों पर केवल 15 एटीएम हैं। RBI के नियमों का असर देश में नकदी अभी भी भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वित्त वर्ष 22 में 89% लेन-देन और सकल घरेलू उत्पाद का 12% हिस्सा नगद लेन देन का ही था। लेकिन एटीएम लेन-देन और इंटरचेंज शुल्क पर RBI के नियमों ने ATM पर अपना गहरा असर डाला है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव डिजिटल भुगतान विशेष रूप से यूपीआई की बढ़ती लोकप्रियता और डिजिटल परिवर्तन पर रणनीतिक ध्यान केंद्रित करने से प्रेरित है। आइए सबसे पहले (Automated Teller Machine- ATM) के इतिहास पर एक नजर डालते हैं: भारत में पहला एटीएम साल 1987 में HSBC ने मुंबई में लगाया था. उसके अगले 10 वर्षों में यानी 1997 तक देश में करीब 1500 एटीएम खुले. अगर दुनिया में पहला ATM की बात करें तो 27 जून 1967 को लंदन के एनफील्ड में एक कैश मशीन का उपयोग किया गया था, जिसे दुनिया की पहली एटीएम के रूप में मान्यता प्राप्त है. इस ATM को बार्कलेज बैंक ने शुरू किया था. 80 के दशक के दौरान दुनिया के कई बड़े देशों में ATM मुख्यधारा में शामिल हो गए थे. इसके बाद साल 1997 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने ‘स्वधन’ नामक से पहला ज्वाइंट ATM नेटवर्क शुरू किया, जिसे इंडिया स्विच कंपनी (ISC) ने संचालित किया. हालांकि, यह 2003 में बंद हो गया. उसके बाद 2004 में नेशनल फाइनेंशियल स्विच (NFS) की स्थापना हुई, जो आज भारत का सबसे बड़ा ATM नेटवर्क है, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) संचालित करता है. आज भारत में कुल इतने ATM जनवरी 2022 तक, NFS नेटवर्क के तहत भारत में 2,55,000 से अधिक ATM थे, जिसमें नकदी जमा मशीनें और रिसाइक्लर शामिल थे. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और NPCI के आंकड़ों के आधार पर 2023 तक भारत में लगभग 2,60,000 से 2,70,000 ATM होने का अनुमान था. फिलहाल भारत में लगभग 2.8 से 3 लाख ATM होने की संभावना है. फिलहाल देश में एक लाख लोगों पर 15 ATM हैं.  ATM की संख्या और प्रभाव के आधार पर SBI सबसे बड़ा ऑपरेटर है, लेकिन कैश मैनेजमेंट में CMS का दबदबा है. भारत में अब तक कितने ATM बंद हो चुके हैं… RBI के आंकड़ों के अनुसार, भारत में ATM की संख्या सितंबर 2023 में 2,19,000 थी, जो सितंबर 2024 में घटकर 2,15,000 हो गई.  इसका मतलब ये है कि इस अवधि में करीब 4 हजार ATM बंद हुए. यही नहीं, साल 2017 के बाद से ही ATM की संख्या में बढ़ोतरी धीमी हो गई, और साल-दर-साल इसका दायरा बढ़ता गया है. खासकर 2022 के बाद से ऑफ-साइट ATM (बैंक परिसर से बाहर स्थित) की संख्या में लगातार गिरावट आई है. यह डिजिटल भुगतान (जैसे UPI) के बढ़ते उपयोग, ATM संचालन की उच्च लागत, और बैंक शाखाओं के विलय के कारण हो रहा है. क्यों बंद हो रहे हैं ATM? यानी सबकुछ ग्राहकों पर निर्भर करता है, अगर ATM का खूब उपयोग होगा तो फिर कारोबार घाटे में नहीं चलेगा, वहीं अगर एक ATM महीने में 300-500 लेनदेन करता है, तो यह घाटे में भी जा सकता है. ये कड़वा सच है, देश में ATM का उपयोग तेजी … Read more

बागेश्वर धाम में भारत का पहला हिन्दूग्राम, हिंदू गांव में मकानों की नहीं हो सकेगी खरीद-फरोख्त, गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा

छतरपुर मध्य प्रदेश के छतरपुर में बागेश्वर धाम पीठ के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 2 अप्रैल को हिंदू गांव की आधारशिला रखी. इसके साथ ही बागेश्वर धाम के निकट देश के पहले हिंदू गांव के निर्माण की तैयारियां आधिकारिक रूप से शुरू हो गई हैं, जो दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा. इस गांव में रहने वालों की जीवनशैली वैदिक संस्कृति पर आधारित होगी. ​देश के पहले हिंदू गांव के स्थापना समारोह में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उर्फ बाबा बागेश्वर ने कहा कि हिंदू राष्ट्र की संकल्पना हिंदू घरों, हिंदू गांवों, हिंदू जिलों और हिंदू राज्यों की स्थापना के बाद ही पूरी होगी. योजना के अनुसार इस गांव में 1,000 परिवार रहेंगे और इसे बागेश्वर धाम परिसर में विकसित किया जाएगा. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि बागेश्वर धाम जनसेवा समिति हिंदू और सनातन धर्म के अनुयायियों वाले इस गांव के लिए भूमि उपलब्ध कराएगी और इसे दोबारा बेचा या खरीदा नहीं जा सकेगा. बाबा बागेश्वर ने कहा, ‘इस भूमि पर भवन बनाए जाएंगे तथा वहां रहने वाले लोगों के लिए कुछ बुनियादी शर्तें तय की जाएंगी. महत्वपूर्ण बात यह है कि इस गांव में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा. हालांकि, सनातन धर्म में आस्था रखने वालों का स्वागत है. हिंदू गांव में घर एग्रीमेंट के आधार पर उपलब्ध कराए जाएंगे.’ हिंदू गांव में मकानों की नहीं हो सकेगी खरीद-फरोख्त उन्होंने बताया कि हिंदू गांव की आधारशिला रखे जाने के पहले ही दिन दो व्यक्तियों ने अपनी सहमति दे दी है तथा भवन अधिग्रहण के लिए कागजी कार्रवाई पूरी कर ली है. बाबा बागेश्वर ने कहा कि हिंदू गांव में लोग जिस मकान में रहेंगे उसकी खरीद-फरोख्त का हक उन्हें नहीं मिलेगा. इसके पीछे की वजह यह है कि विधर्मी लोभ-लालच देकर किसी भी स्तर पर जाकर किसी भी कीमत पर मकान खरीदने के प्रयास करते हैं. अक्सर ऐसा देखने में भी आता है कि लालच में आकर लोग धर्मविरोधी ताकतों के सामने खुद को सरेंडर कर देते हैं. इसलिए बागेश्वर धाम का हिंदू ग्राम क्रय-विक्रय से प्रतिबंधित रहेगा. जहां सनातन मूल्य नहीं, वहां पीढ़ियां खराब हो जाती हैं इससे पहले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंदू राष्ट्र बनाने से पहले हर घर और हर गांव में हिंदू धर्मावलंबी बनाने का काम शुरू होगा. यह अभियान इसी महीने शुरू होगा. इस अभियान के लिए बागेश्वर धाम से टीमें रवाना हो चुकी हैं. उन्होंने कहा, ‘जहां बारिश नहीं होती, वहां फसलें खराब हो जाती हैं. इसी तरह, जहां सनातन मूल्य मौजूद नहीं हैं, वहां पीढ़ियां खराब हो जाती हैं. हम धर्मनिष्ठ हिंदू बनाने के लिए काम करेंगे. प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक प्रधान नियुक्त किया जाएगा.’ धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस वीडियो के माध्यम से देश में नई क्रांति खड़ी होने वाली है. हम उसकी घोषणा सार्वजनिक रूप से कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘हम कट्टर हिंदू बनाने का काम करेंगे. सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक प्रभारी होगा, जो एक मंडल प्रभारी से जुड़ा होगा. 10 गांवों का एक मंडल बनाया जाएगा, यह जिला अध्यक्ष से जुड़ा होगा. सभी प्रभारियों को तीन-चार महीने में बागेश्वर धाम आकर बात करनी होगी. मंडल जहां काम कर रहे हैं, वहां कथाएं भी होंगी.’  

बस्तर में सुरक्षाबल के जवानों की लगातार कार्रवाई से नक्सली संगठन खौफ, शाह की रणनीति का दिखा असर

रायपुर  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लगातार एक्शन हो रहे हैं। सुरक्षाबल के जवान नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले अबूझमाड़ में घुसकर कार्रवाई कर रहे हैं। जिसके बाद नक्सली खौफ में आ गए हैं। ऐसे में नक्सली संगठन की तरफ से शांति की पहल का एक लेटर जारी किया गया है। शांति की पहल को लेकर दावा किया जा रहा है कि नक्सली संगठन अब कमजोर हो गए हैं। केंद्र सरकार भी नक्सलवाद के खात्मे के लिए लगातार सपोर्ट कर रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लगातार नक्सलवाद के खिलाफ रणनीति बना रहे हैं और उसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अमित शाह के डेडलाइन क्या है? छत्तीसगढ़ में नक्सवाद के खात्मे की कमान खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने हाथों में ले रखी है। अमित शाह लगातार नक्सल विरोधी अभियानों की समीक्षा कर रहे हैं और रणनीति भी बना रहे हैं। अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए एक डेडलाइन तक की है। शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने की डेट तय की है। यह डेडलाइन तय होने के बाद सुरक्षाबल के जवान ताबड़तोड़ एक्शन कर रहे हैं। सेना की पहुंच उन इलाकों में हो गई है जहां कभी नक्सलियों की बिना इजाजत के कोई बाहरी व्यक्ति कदम नहीं रख सकता था। गृहमंत्री ने दिया है दो टूक जवाब नक्सली संगठन का एक लेटर सामने आया है। इस लेटर में उन्होंने कहा कि सरकार को युद्ध विराम की घोषणा करनी चाहिए। वह शांति से वार्तालाप करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने उसके लिए शर्त रखी है कि सरकार सेना की कार्रवाई रोके। नए इलाकों में बनाए गए कैंप को हटा दिया जाए। नक्सलियों की शर्त पर राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा दो दो टूक जवाब दे चुके हैं कि नक्सली संगठन हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें उन्होंने कहा कि किसी भी शर्त पर बातचीत नहीं होगी। क्यों शांति चाहते हैं नक्सली नक्सलियों की शांति पहल को लेकर बस्तर के रहने वाले वरिष्ठ साहित्यकार रजीव रंजन ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि- ऐसा पहली बार हुआ है जब नक्सली इतने कमजोर हैं। जिस तरह से 2024 में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन हुए उसके बाद इस साल की शुरुआत में जवानों ने माओवादियों के बड़े कैडर को मार गिराया हो उससे वह खौफ में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि यह शांति पहल नक्सलियों का एक ट्रैप है। इस ट्रैप का फायदा उठाकर वह अपने लिए समय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह खुद को और अपने संगठन के टॉप लीडरों की बचाने की नक्सलियों की एक साजिश है। इस साजिश के जरिए नक्सली सरकार को शांतिवार्ता में उलझाकर जवानों की कार्रवाई रोकना चाहते हैं। वह जिस युद्ध विराम की बात कर रहे हैं वह खुद उन्हें करना चाहिए। सरेंडर करके सरकार की जो पुनर्वास नीति है उसका लाभ उठाना चाहिए। हथियारों और लीडरों की कमी उन्होंने कहा कि सुरक्षाबल के जवानों ने अबूझमाड के उन इलाकों में कैंप स्थापित कर लिए हैं जिन्हें नक्सली अपना सबसे सुरक्षित ठिकाना मानते थे। नक्सलियों के खिलाफ जवान लगातार कार्रवाई ही नहीं कर रहे हैं उनके हथियार और विस्फोटकों को भी जब्त कर रहे हैं जिससे संगठन के पास आधुनिक हथियारों की भी कमी हो गई है। ऐसे में वह शांति का ट्रैप बिछाने की कोशिश में हैं। वह अपने टॉप लीडरों को सुरक्षित स्थानों में पहुंचाना चाहते हैं। पहली बार ऐसा एक्शन उन्होंने कहा कि इससे पहले हम बस्तर में देखते थे कि सरकार और जवान शांति के लिए पहल करते थे। लेकिन इस बार उल्टा है। जवान और सरकार ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रहे हैं और नक्सली शांति की बात कर रहे हैं। वह भारी दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को शांति पहल करनी चाहिए लेकिन बस्तर में जवानों की कार्रवाई तब तक नहीं ठहरनी चहिए जब तक की नक्सलवाद पूरी तरह से घुटने नहीं टेक देता है।

खुशखबरी! दिल्लीवालों का इंतजार खत्म होने जा रहा, आज से दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना लागू

नई दिल्ली खुशखबरी! दिल्लीवालों का इंतजार खत्म होने जा रहा है। आज यानी शनिवार से दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना लागू हो सकती है। दिल्ली सरकार ने इसकी तैयारी कर ली है। जानकारी के मुताबिक पहले चरण में एक लाख लोगों का दिल्ली में आयुष्मान कार्ड बनेगा। इसके बाद तेजी से इस योजना को आगे बढ़ाते हुए सभी पात्र दिल्ली वालों को इसमें शामिल कर लिया जाएगा। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच समझौते पत्र (MOU) साइन होने वाले हैं। इसके बाद 10 अप्रैल तक कम से कम 1 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य है। बीजेपी ने दिल्ली में विधानसभा चुनावों से पहले ही ऐलान किया था कि सत्ता में आने के बाद इस योजना को लागू किया जाएगा। आयुष्मान योजना के तहत दिल्ली में 5 लाख + 5 लाख यानी 10 लाख रुपये का मेडिकल कवर मिलेगा। सबसे पहले किसके बनेंगे आयुष्मान कार्ड केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना गरीब व जरूरतमंद लोगों को बेहतर इलाज देने के लिए है। दिल्ली में भी इस योजना का लाभ इन्हीं लोगों को मिलेगा। जानकारी के मुताबिक जिन लोगों के पास अंत्योदय अन्न योजना (AAY) कार्ड है, उन्हीं के कार्ड पहले बनाए जाएंगे। इसके बाद बीपीएल कार्डधारकों के नंबर आएंगे। माना जा रहा है कि शुरुआत में एक लाख अंत्योदय कार्डधारकों को इस योजना का लाभ होने वाला है। आयुष्मान योजना के लिए बजट दिल्ली में आयुष्मान योजना लागू करने के लिए दिल्ली सरकार ने 2144 करोड़ रुपये का बजट पास किया हुआ है। आयुष्मान कार्ड बनवाने पर अन्य राज्यों में 5 लाख रुपये तक का मेडिकल कवर मिलता है। दिल्ली में यह मेडिकल कवर 10 लाख रुपये है। इसमें से 7 लाख का खर्च दिल्ली सरकार वहन करेगी। दिल्ली में कितनी तरह के राशन कार्ड दिल्ली में वर्तमान में दो तरह के राशन कार्ड बनते हैं। पहला: Priority Category या बीपीएल कार्ड, जो गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के बनते हैं। इन्हें PR कार्ड भी कहा जाता है। दूसरा अंत्योदय अन्न कार्ड यानी AAY कार्ड। ये कैटेगरी गरीबी रेखा के मामले में सबसे निचले पायदान पर मानी जाती है। इन्हें प्रति परिवार 35 किलो राशन हर महीने दिया जाता है। द‍िल्‍ली में क‍ितने AAY राशन कार्ड द‍िल्‍ली में 72,77,995 राशन कार्ड को मंजूरी म‍िली हुई है। केंद्र सरकार द्वारा तय संख्या के अनुसार दिल्ली में 1,56,800 AAY राशन कार्ड को मंजूरी मिली हुई है। ये कार्ड Poorest of Poor वर्ग में आने वाले सबसे गरीब वर्ग का ही बनता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक जनवरी, 2025 में दिल्ली में AAY राशन कार्ड की संख्या महज 66,532 ही थी। अंत्योदय अन्न योजना राशन कार्ड के अंतर्गत प्रति परिवार 2 रुपये किलो के हिसाब से 25 किलो गेहूं और 3 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 10 किलो चावल मिलता है। इसके अलावा 13.50 रुपये किलो के हिसाब से 6 किलो चीनी मिलती है।

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