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सैमसंग के S24 Ultra को सस्ते में खरीदने का मौका

नई दिल्ली अगर आप एक अल्ट्रा प्रीमियम फ्लैगशिप फोन खरीदना चाहते हैं, तो यह एक दम सही समय होगा सैमसंग के S24 Ultra को अपना बनाने का। एक लाख रुपए से ज्यादा की कीमत पर लॉन्च हुए इस डिवाइस पर भारी डिस्काउंट मिल रहा है। इस साल Samsung ने अपना लेटेस्ट फ्लैगशिप S25 Ultra है। इसके बाद अब S24 Ultra की कीमतों में भारी गिरावट आई है। S24 Ultra भले ही पिछले साल का फ्लैगशिप डिवाइस है लेकिन एक्सपर्ट्स ने इसे S25 Ultra के टक्कर का ही पाया है। S24 Ultra के नोटबुक जैसे फॉर्म के चलते कई लोग इसे लुक्स के मामले में S25 Ultra से बेहतर भी मानते हैं। कहां और कैसे मिलेगा डिस्काउंट Samsung S24 Ultra पर यह डिस्काउंट Amazon पर मिल रहा है। इसका 12GB+256GB वाला वेरिएंट1,19,999 की जगह 91,749 रुपए में मिल रहा है। कस्टमर्स Amazon Pay Credit Card का इस्तेमाल करके इसकी कीमत 2,752 रुपए और घटा सकते हैं। Amazon से आप इसे 4,448 की मासिक किश्तों पर भी खरीद सकते हैं। अगर आप अपना पुराना डिवाइस इसके साथ एक्सचेंज करते हैं, तो आपको 22,800 रुपए का अतिरिक्त डिस्काउंट मिल सकता है। ध्यान रहे कि एक्सचेंज किए जा रहे डिवाइस की कीमत Amazon उसकी कंडीशन और मॉडल के अनुसार तय करता है। फीचर्स और तुलना Samsung Galaxy S25 Ultra में 6.9 इंच की डिस्प्ले मिलती है। जबकि S24 Ultra में 6.8 इंच की डिस्प्ले दी गई है। एक इंच के फर्क से फोन को इस्तेमाल करने के आपके अनुभव में कोई खासा फर्क नहीं पड़ेगा। डिजाइन की बात करें तो जैसा कि हमने पहले बताया S24 Ultra का नोटबुक जैसा लुक Samsung Galaxy S25 Ultra में मिसिंग है। S25 Ultra के कॉर्नर्स को राउंड कर दिया गया है जिसकी वजह से लोग S24 Ultra के लुक को और पसंद करने लगे हैं। कैमरा की बात करें तो दोनों ही फोन में आपको लगभव सेम कैमरा दिए गए हैं। दोनो में ही प्राइमरी रियर कैमरा 200 मेगापिक्सल का है। ऐसे में कैमरे की परफॉर्मेस को लेकर भी आप निश्चिंत रह सकते हैं। दोनो ही फोन की बैटरी कैपेसिटी भी बराबर है। दोनों में ही 5000mah की बैट्री दी गई है। नए चिपसेट की वजह से S25 Ultra में आपको लगभग एक घंटे का अतिरिक्त वीडियो प्लेबैक टाइम मिल जाएगा। यानी कि यह फर्क भी बहुत ज्यादा नहीं है। इसके अलावा S24 Ultra को कंपनी ने 7 साल के अपडेट्स उपलब्ध कराने का वादा किया था। ऐसे में इसे भी वही अपडेट्स मिलेंगे जो कि S25 Ultra को मिल रहे हैं।

अंबिकापुर में पति ने टांगी से पत्नी और एक व्यक्ति की कर दी हत्या

अंबिकापुर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले में दोहरे हत्यकांड का मामला सामने आया है. यहां सनकी पति ने चरित्र शंका में अपनी पत्नी और एक व्यक्ति की निर्मम हत्या कर दी. पुलिस ने आरोपी पति मनोज मांझी को गिरफ्तार किया है. मामला कमलेश्वरपुर थाना क्षेत्र का है. दरअसल, 4 अप्रैल की शाम जब आरोपी मनोज घर लौटा तो वहां मौजूद उसकी पत्नी फुलकुंवर और लक्ष्मण मांझी को देखकर वह आग बबूला हो गया. आरोपी को दोनों के बीच अवैध संबंध होने का शक गहराया तो वह अपना आपा खो बैठा और टांगी से दोनों पर प्राणघातक हमला कर दिया. हमले में दोनों की मौत हो गई. गौरतलब है कि दरअसल मनोज मांझी ने पहली पत्नी की मौत के बाद फुलकुंवर मांझी के साथ दूसरी शादी की थी. लक्ष्मण मांझी पहली पत्नी का चाचा था. मनोज को शक था कि लक्ष्मण मांझी और उसकी दूसरी पत्नी फुलकुवंर मांझी के बीच अवैध संबंध है. इसी शक में आरोपी मनोज ने दोनों की हत्या कर दी. पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार पुलिस ने इस मामले में मनोज मांझी के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की. इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि हत्याकांड का आरोपी गांव में घूम रहा है. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी मनोज मांझी को गिरफ्तार किया. साथ ही घटना में प्रयुक्त टांगी भी जब्त किया. आरोपी को न्यायालय में पेश कर उसे जेल भेज दिया.

अधिकतर लोगों ने बिल को पढ़ा ही नहीं और बिना जानकारी के कर रहे राजनीति : मदन राठौड़

जयपुर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बताया की अगर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुसलमान समाज की स्थिति को सुधारने का प्रयास कर रहे हैं, तो इसमें किसी को परेशानी क्यों होनी चाहिए? उन्होंने कहा कि पहले जिस समाज को ईदी के लिए लाइन में खड़ा रहना पड़ता था, आज अगर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम हो रहा है, तो यह स्वागतयोग्य कदम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि यह समाज हाथ फैलाने वाला नहीं, बल्कि दूसरों को देने की स्थिति में आए। अगर ऐसा हो रहा है, तो इसमें विरोध क्यों? वक्फ संशोधन बिल को लेकर हो रहे विरोध पर मदन राठौड़ ने कहा कि अधिकतर लोगों ने बिल को पढ़ा ही नहीं है और बिना जानकारी के राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर मुसलमान बहनों को वक्फ बोर्ड में प्रतिनिधित्व मिल रहा है तो इसमें गलत क्या है? अगर भू-माफिया द्वारा कब्जा की गई वक्फ संपत्तियों को मुक्त कराया जा रहा है तो इसमें परेशानी क्या है? उन्होंने यह भी जोड़ा कि वक्फ बोर्ड की आमदनी बढ़ने से उस धन का इस्तेमाल समाज के विकास में किया जाएगा। बिल में कोई नई व्यवस्था लागू नहीं की गई है, सिर्फ पूर्व में हो चुकी बातों को मान्यता दी जा रही है। इसके संरक्षक भी मुसलमान ही रहेंगे तो फिर विरोध क्यों? विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि झूठा भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार किसी समाज के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और अन्य योजनाओं का लाभ हर वर्ग को मिल रहा है चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुसलमान बहनों को तीन तलाक से मुक्ति दिलाई, तो इसमें गलती क्या है? कोई भी सरकारी योजना जाति या धर्म देखकर नहीं दी जा रही है। विपक्ष को राजनीति करने से पहले सोचना चाहिए कि उनके बयानों से कोई समाज पीछे न छूट जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उद्देश्य देश के हर नागरिक को विकास की मुख्यधारा में लाना है और इसमें कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है।

दिवंगत मनोज कुमार की प्रार्थना सभा में पहुंचे कई सितारे

मुंबई दिग्गज अभिनेता और फिल्म निर्माता मनोज कुमार की प्रार्थना सभा आज रविवार, 6 अप्रैल 2025 को मुंबई के जेडब्ल्यू मैरियट होटल में आयोजित की गई है। प्रार्थना सभा में एक-एक कर इंडस्ट्री के कई सितारे शामिल हो रहे हैं। अभिनेता का निधन शुक्रवार की सुबह हुआ था, जिनका अंतिम संस्कार बीते दिन यानी 5 अप्रैल को मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में किया गया। मनोज की प्रार्थना सभा में पहुंचे ये सितारे मनोज कुमार की प्रार्थना सभा में अभिनेता की पत्नी शशि भी नजर आईं। इस दौरान वह काफी भावुक दिख रही थीं। वहीं बॉलीवुड अभिनेता विंदु दारा सिंह भी प्रार्थना सभा में पहुंचे। साथ ही अभिनेता नील नितिन मुकेश भी मनोज की प्रार्थना सभा में शामिल होने पहुंचे। एशा देओल-फरहान अख्तर भी आए नजर मनोज कुमार की प्रार्थना सभा में अभिनेत्री एशा देओल भी पहुंचीं। इस दौरान वह मनोज के परिवार के सदस्यों से बातें करती भी नजर आईं। वहीं, अभिनेता और निर्माता फरहान अख्तर भी प्रार्थना सभा में पहुंचे। दिवंगत अभिनेता अमरीश पुरी का परिवार भी मनोज की प्रार्थना सभा का हिस्सा बना।   प्रेम चोपड़ा और राकेश रोशन मनोज कुमार की प्रार्थना सभा में प्रेम चोपड़ा भी पहुंचे। वहीं, राकेश रोशन भी अपनी पत्नी रिंकी के साथ पहुंचे।

पंजाब-महाराष्ट्र नहीं यह राज्य है ड्रग्स मामलों में पहले पायदान पर! सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में केरल में ड्रग्स की समस्या पर बात की. रेडियो जॉकी जोसेफ अन्नमकुट्टी जोस, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट आदित्य रविद्रन और होम्योपैथिक चिकित्सक फातिमा असला के साथ राहुल गांधी की चर्चा के दौरान, मादक पदार्थों की आसान उपलब्धता को एक कारक के रूप में पहचाना गया. राहुल गांधी ने यह भी पूछा कि क्या बेरोजगारी की भी इसमें भूमिका है? उन्होंने इंस्टाग्राम और फ़ेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की तुलना नशे की लत से की और नशीली दवाओं के दुरुपयोग को अपराध से जोड़ा. चर्चा में शामिल सदस्यों ने बताया कि चाकू से की जाने वाली हत्याएं नशीली दवाओं के इस्तेमाल से जुड़े सबसे आम अपराधों में से एक हैं. केरल के तिरुवनंतपुरम में हाल ही में एक मामले में यह देखा गया, जब 25 फरवरी को एक 23 वर्षीय व्यक्ति पुलिस स्टेशन में गया और दावा किया कि उसने अपनी मां, भाई और प्रेमिका सहित छह लोगों की हत्या कर दी है. पुलिस ने बताया कि वह नशे का आदी था और नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त से बढ़ते कर्ज ने उसे अपराध की ओर धकेल दिया. ड्रग्स के मामलों में केरल नंबर वन 12 मार्च को लोकसभा ने ड्रग तस्करी के मामलों पर तीन साल के आंकड़े जारी किए, जिसमें केरल 85,000 से ज्यादा दर्ज मामलों के साथ सूची में सबसे ऊपर है. महाराष्ट्र 35,000 से ज्यादा मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है, उसके बाद पंजाब है, जो ड्रग से जुड़े मामलों के लिए जाना जाता है. लेकिन क्या केरल में नशीली दवाओं से जुड़े मामलों में यह वृद्धि कोई हालिया ट्रेंड है? आंकड़े बताते हैं कि राज्य में नशीली दवाओं की तस्करी हमेशा से एक बड़ा मुद्दा नहीं था. 2016 में केवल छह हजार मामले दर्ज किए गए थे, जो 2017 में बढ़कर 9,244 हो गए. अगले दो वर्षों तक यह संख्या 9,000 के आसपास रही और 2020 में घटकर लगभग 5,000 हो गई. ऐसा लगता है कि पिछले तीन सालों में यह समस्या और भी बढ़ गई है. 2022 में केरल में ड्रग तस्करी के मामले बढ़कर 26,918 हो गए, जो कि 373 प्रतिशत की भारी वृद्धि है. 2023 में यह संख्या बढ़ती रही और 30,715 तक पहुंच गई, जो 2024 में थोड़ी कम होकर 27,701 हो गई. केरल में कौन से ड्रग्स प्रचलन में हैं? लोकसभा ने केरल में एटीएस और एमडीएमए सहित सिंथेटिक ड्रग्स की जब्ती के आंकड़े भी जारी किए. 2021 में केवल 5.42 किलोग्राम ड्रग्स जब्त किया गया, जो 2022 में बढ़कर 9.6 किलोग्राम हो गया. हालांकि, 2023 में जब्ती बढ़कर 2,543.22 किलोग्राम हो गई, जिसमें एटीएस की हिस्सेदारी सबसे बड़ी थी. 2024 में यह मात्रा काफी कम होकर 25.85 किलोग्राम हो गई. लेकिन भारत के बारे में क्या? लोकसभा के आंकड़ों के अनुसार, भारत में ड्रग लॉ एंफोर्समेंट एजेंसियों ने सबसे अधिक मात्रा में मारिजुआना जब्त किया, जो कुल 18.8 लाख किलोग्राम था. एलएसडी 45,814 ब्लॉट्स के साथ दूसरे नंबर पर सबसे अधिक जब्त किया गया ड्रग्स रहा, उसके बाद सीबीसीएस 41,450 लीटर के साथ दूसरे नंबर पर रहा. अफीम 20,970 किलोग्राम जब्त की गई, जो चौथे नंबर पर रही.

दिल्ली सरकार की शिक्षा योजना पर सवाल: 50% बजट खर्च करने में ‘फेल’ रहा शिक्षा विभाग

नई दिल्ली दिल्ली की पिछली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने शिक्षा पर अपने कुल वार्षिक बजट का 25 फीसदी खर्च करने का दावा किया था लेकिन शिक्षा निदेशालय पिछले वर्ष सामान्य शिक्षा के लिए आवंटित बजट का 50 फीसदी पैसा भी खर्च कर पाने में नाकाम रहा। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दायर एक आवेदन में यह जानकारी सामने आई है। शिक्षा निदेशालय मुख्यत: तीन मदों -सामान्य शिक्षा, दिल्ली नगर निगम के तहत आने वाले विद्यालयों और खेलों पर खर्च करता है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने 2024-25 में शिक्षा निदेशालय के लिए अनुमानित बजट के रूप में कुल 4335.08 करोड़ रुपये आवंटित किये थे, जिसे बढ़ाकर 4836.41 करोड़ रुपये कर दिया गया लेकिन विभाग इसमें से सिर्फ 2818.23 करोड़ रूपये ही खर्च कर पाया। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिक्षा निदेशालय को 2024-25 में सामान्य शिक्षा के लिए 2703.12 करोड़ रुपये का बजट प्राप्त हुआ लेकिन इसमें से वह सिर्फ 1267.87 करोड़ रुपये ही खर्च कर सका जो 50 फीसदी से भी कम है। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के विद्यालयों के लिए प्राप्त 2085.01 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन में से शिक्षा विभाग ने जरूर 1523.33 करोड़ रुपये खर्च किये। स्कूली विद्यार्थियों को खेल के लिए संसाधन मुहैया कराने वाले बजट का भी विभाग पूरा इस्तेमाल करने में विफल साबित हुआ। शिक्षा निदेशालय को खेल के लिए 48.28 करोड़ रुपये आवंटित किये गए थे लेकिन खर्च सिर्फ 18.02 करोड़ रुपये किये गये। शिक्षा निदेशक से जब इस संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने इस मुद्दे पर मिलने से इनकार कर दिया। ‘ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष एवं दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि सामान्य शिक्षा पर बजट का 50 फीसदी पैसा खर्च न कर पाना शिक्षा विभाग के ‘निक्कमेपन’ को दर्शाता है। उन्होंने बताया, “दिल्ली के सरकारी विद्यालयों में करीबन 17 लाख बच्चे पढ़ते हैं और ज्यादातर बच्चे गरीब तबके से आते हैं। सामान्य शिक्षा पर बजट का आधा पैसा भी खर्च न कर पाना कहीं न कहीं इन स्कूली बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है।” गैर सरकारी संगठन ‘लोकतान्त्रिक अध्यापक मंच’ की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष कृष्ण कुमार फौगाट ने कहा, “ज्यादातर चीजें हवा हवाई ही रहीं और धरातल पर कुछ काम नहीं हुआ। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 2014 से 2019 तक दिल्ली सरकार ने शिक्षा निदेशालय को 13,425.64 करोड़ रुपये आवंटित किये, जिसमें से विभाग ने 11892.23 करोड़ रुपये खर्च किये थे। इसी प्रकार दिल्ली सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में 2019 से 2024 तक शिक्षा निदेशालय को 24,349.18 करोड़ रुपये आवंटित किये और विभाग 20,762.39 करोड़ रुपये खर्च करने में सफल रहा। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, शिक्षा निदेशालय शहर के सरकारी विद्यालयों में मुफ्त पुस्तकों से लेकर स्कूल की वर्दी, कंप्यूटर लैब, शिक्षकों को पुरस्कार, विद्यालयों में पुस्तकालय के लिए पुस्तकें खरीदने जैसी 79 मदों पर पैसा खर्च करता है।

सैमसन ने कप्तान के तौर पर 32वीं जीत दर्ज की करते हुए दिग्गज शेन वॉर्न की 31 जीत को पीछे छोड़ा

नई दिल्ली पंजाब किंग्स पर 50 रन की शानदार जीत के बाद राजस्थान रॉयल्स के कप्तान संजू सैमसन फ्रेंचाइजी के सबसे सफल कप्तान बन गए हैं। मुल्लानपुर के महाराजा यादवेंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मैच में सैमसन ने कप्तान के तौर पर 32वीं जीत दर्ज की करते हुए दिग्गज शेन वॉर्न की 31 जीत को पीछे छोड़ दिया। आईपीएल के पहले सीजन 2008 में राजस्थान को खिताब दिलाने वाले वॉर्न ने 55 मैचों में 31 जीत दर्ज की थीं। सैमसन ने अब 62 मैचों में 32 जीत दर्ज की हैं जिससे रॉयल्स के सबसे सफल कप्तान के तौर पर उनकी विरासत मजबूत हुई है।   राजस्थान रॉयल्स के कप्तान के तौर पर IPL में सबसे ज़्यादा जीत 32 – संजू सैमसन (62 मैच) 31 – शेन वॉर्न (55 मैच) 18 – राहुल द्रविड़ (34 मैच) 15 – स्टीवन स्मिथ (27 मैच) 9 – अजिंक्य रहाणे (24 मैच) IPL कप्तान के तौर पर सबसे ज़्यादा लगातार जीत 10 – गौतम गंभीर (2014-15) 8 – शेन वॉर्न (2008) 8 – श्रेयस अय्यर (2024-25) 7 – एमएस धोनी (2013) मैच की बात करें तो घरेलू मैदान पर पहला मुकाबला खेलने उतरी पंजाब किंग्स को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ शर्मनाक हार (50 रन) झेलनी पड़ी है। मुल्लांपुर के स्टेडियम में पंजाब किंग्स ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया है। राजस्थान ने जायसवाल के अर्धशतक और रियान पराग के महत्वपूर्ण रनों की बदौलत पहले खेलते हुए 4 विकट खोकर 205 रन बना लिए। जवाब में खेलने उतरी पंजाब टीम ने 43 रन पर ही 4 विकेट गंवा दिए। नेहल वडेहरा और मैक्सवेल ने कुछ रन बनाए लेकिन यह जीत (155-9 रन) के लिए काफी नहीं थे। पंजाब की यह सीजन में पहली हार भी है। इससे पहले खेले गए दो मुकाबलों में उन्होंने गुजरात टाइटंस को 11 रन से तो लखनऊ सुपर जायंट्स को 8 विकेट से हरा दिया था। वहीं, राजस्थान की चार मैचों में दूसरी जीत है। उन्होंने हैदराबाद और कोलकाता के खिलाफ पहले दो मुकाबले गंवा दिए थे।

भाजपा स्थापना दिवस: एमसीबी जिला कार्यालय जिलाध्यक्षा चम्पा देवी ने किया ध्वजारोहन

एमसीबी आज भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस एमसीबी जिला कार्यालय अटल कुंज मे एमसीबी भाजपा की जिलाध्यक्षा चम्पा देवी पावले जी के द्वारा सर्वप्रथम ध्वजारोहन किया गया तथा श्यामा प्रसाद मुखर्जी, भारत माता एवं  पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के छाया चित्र मे पुष्पाजलि अर्पित कर धुप, दीप प्रज्वलन किया गया  इस अवसर पर पूर्व जिलाध्यक्ष लखन लाल श्रीवास्तव, संजय गुप्ता, उजीत नारायण सिंह, रोहित वर्मा, आलोक जैसवाल, प्रदीप वर्मा, रामचरित दुवेदी,रमेश यादव, दिलीप नायर, आदित्य राज डेवित, जे पी बुनकर, जनार्दन केवट, जयनाथ शर्मा, प्रमोद बंसल, अखिलेश मिश्रा, उमेश कुमार, शोभन दास, भूपत सिंग,सागर आदि लोग उपस्थित थे।     आज के स्थापना दिवस पर भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्षा ने पार्टी के कार्यकर्ताओ को बताया कि भारत की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी यानी BJP दुनिया भर के पॉलिटिक्स के स्टूडेंट्स के लिए स्टडी का विषय है। आज पार्टी का 46 वां स्थापना दिवस है और चार दशकों में पार्टी ने लोकसभा में 2 सीटों से 303 सीटों का लंबा सफर तय किया है।           वहीं अटल-आडवाणी जी की जोड़ी से मोदी-शाह की जोड़ी तक पार्टी ने हर दशक में नई उपलब्धि हासिल की। इसमें राम जन्मभूमि आंदोलन ने भी उसकी मदद की, जिसका परिणाम पिछले साल अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर के भूमिपूजन के तौर पर सामने आया।      भले ही BJP की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई, लेकिन इसका इतिहास भारतीय जनसंघ से जुड़ा है। डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर कथित अत्याचार पर भारत के चुप रहने पर जवाहरलाल नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया और 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की। डॉ. मुखर्जी के नेतृत्व में जनसंघ ने कश्मीर को विशेषाधिकार देने का विरोध किया। उन्हें जेल में डाल दिया गया, जहां उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।      वर्ष 1967 में भारतीय जनसंघ एवं दीनदयाल उपाध्याय के नेतृत्व में कई राज्यों में कांग्रेस का एकाधिकार टूटा और कांग्रेस को राज्यों में हार मिलनी शुरू हुई। 1977 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल खत्म कर चुनाव कराने का फैसला किया तो जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर सभी कांग्रेस-विरोधी दल एकजुट हुए और ‘जनता पार्टी’ बनाई। भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय 1 मई 1977 को हुआ।    जनता पार्टी का प्रयोग ज्यादा दिन नहीं चला। आपसी प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई। कहा गया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंध रखने वाले जनता पार्टी में नहीं रहेंगे। तब 6 अप्रैल 1980 को नए संगठन के तौर पर BJP बनी। अटल बिहारी वाजपेयी पहले अध्यक्ष बने। तथा 1984 के लोकसभा चुनावों में इंदिरा गांधी की हत्या की वजह से कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति लहर थी और भाजपा सिर्फ दो सीटों पर जीत हासिल कर सकी।    1989 में बोफोर्स और अन्य मुद्दों के चलते भाजपा आगे बढ़ी और तब उसके पास 85 सीटें थीं। और पार्टी ने राम जन्मभूमि आंदोलन को समर्थन दिया। लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से राम रथयात्रा शुरू की। इसके बाद तो पार्टी को मिलने वाला समर्थन बढ़ता ही गया। उस समय के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के आदेश पर आडवाणी को बिहार में गिरफ्तार कर लिया गया। आंदोलन ने जोर पकड़ा तो 1991 में पार्टी की सीटें बढ़कर 120 हो गईं। 1993 में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल और मध्य प्रदेश में भी भाजपा के वोट बढ़े। 1995 में आंध्र, कर्नाटक, बिहार, ओडिशा, गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी कमल खिला।    1996 में BJP ने 161 सीटें जीतीं और लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, पर बहुमत नहीं होने से 13 दिन में ही सरकार गिर गई। 1998 के मध्यावधि चुनावों में BJP ने सहयोगी दलों के साथ NDA बनाया और सत्ता में आई। 1999 में अन्नाद्रमुक ने समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई। अक्टूबर-1999 में NDA ने 303 सीटें जीतीं और स्पष्ट बहुमत हासिल किया। BJP 183 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी।    2004 में वाजपेयी के नेतृत्व में इंडिया शाइनिंग का नारा दिया गया, पर चला नहीं और कांग्रेस के 222 की तुलना में उसे 186 सीटें ही मिलीं। 2009 में भाजपा की सीटें घटकर 116 रह गईं। 2014 में भाजपा ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 282 सीटें जीतीं और 543 में से NDA ने 336 सीटों पर जीत हासिल की। मोदी 26 मई 2014 को देश के 15वें प्रधानमंत्री बने। 1984 के बाद पहली बार किसी पार्टी को लोकसभा में बहुमत मिला था। इसके बाद BJP ने 2019 में 303 सीटों पर जीत हासिल की और इतिहास रच दिया। तथा वर्तमान मे भारतीय जनता पार्टी कि वर्तमान केंद्र व प्रदेश कि सरकार के द्वारा कई जनकल्याणकारी कार्य कर रही कि।

दिल्ली के वाहन चालक को लगा झटका, CNG की कीमतों में बढ़ोतरी, अब गाड़ी चलाना होगा महंगा

नई दिल्ली दिल्ली में सीएनजी की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हो गई है, जिससे राजधानी में वाहन चालकों के लिए सफर करना महंगा हो सकता है। अब सीएनजी की कीमत 76.09 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जो पिछले मुकाबले में 1 रुपये की बढ़ोतरी का संकेत देती है। इस बढ़ोतरी के पीछे सरकार के द्वारा एमपीएम गैस की कीमतों में चार प्रतिशत का इजाफा किया जाना मुख्य कारण है। सीएनजी कीमतों में वृद्धि का कारण सीएनजी की कीमत में यह वृद्धि, प्रशासनिक मूल्य प्रणाली (APM) के तहत उत्पादित प्राकृतिक गैस की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण हुई है। दो साल बाद एपीएम गैस की कीमतों में यह वृद्धि की गई है, जो सीएनजी के दामों पर सीधा असर डाल रही है। इससे पहले, अप्रैल 2023 में भी एमपीएम गैस के दाम बढ़ाए गए थे। कैसे चेक करें नए रेट्स? दिल्ली के वाहन चालक अब घर बैठे सीएनजी के ताजे रेट्स जान सकते हैं। हर दिन सुबह 6 बजे, तेल कंपनियां सीएनजी की कीमतों में संशोधन करती हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि इस दिन सीएनजी की कीमत क्या है, तो आप तेल कंपनी के आधिकारिक नंबर पर एसएमएस भेजकर इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। क्या इसका असर आम आदमी पर होगा? सीएनजी की बढ़ी हुई कीमतें दिल्लीवासियों के लिए निश्चित तौर पर महंगाई का कारण बन सकती हैं, खासकर उन परिवारों के लिए जो गाड़ियों का उपयोग करते हैं। इस बढ़ोतरी से लोगों की जेब पर असर पड़ेगा, जबकि राजधानी में महंगाई पर राहत की उम्मीदें भी अब कम हो सकती हैं।

मनेंद्रगढ़ में फिटनेस जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

एमसीबी/मनेन्द्रगढ़ एमसीबी मुख्यालय मनेंद्रगढ़ में आज फिट इंडिया मूवमेंट के तहत एक विशेष फिटनेस जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। फिट इंडिया मूवमेंट कार्यक्रम की शुरूआत पीडब्लूडी तिराहा से एमसीबी जिले के पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में एमसीबी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने भी शिरकत की जिसमें अतरिक्त पुलिस अधीक्षक अशोक बड़ेगांवकर, एस.डी.ओपी मनेंद्रगढ़ एलेक्स टोप्पो एवं मनेंद्रगढ़ सिटी कोतवाली प्रभारी सुनील तिवारी सहित पुलिस विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे। फिट इंडिया मूवमेंट कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों में फिटनेस के प्रति जागरूकता फैलाना और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना रहा। इस आयोजन में जिले के पुलिसकर्मियों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़-चढ़ कर भाग लिया। प्रतिभागियों ने शारीरिक व्यायाम, दौड़ और योग जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेकर स्वास्थ्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

सुंदरजा आम की विशेषता है कि इसे मधुमेह के मरीज भी खा सकते, मौसम के फेर में लेकिन इस बार नहीं मिल रहे खरीदार

रीवा देश-विदेश में अपनी महक और स्वाद से लोगों को दीवाना बनाने वाला सुंदरजा आम इस बार खुद मौसम के फेर में उलझ गया है। कम उत्पादन और थोड़े-थोड़े अंतराल में वर्षा के क्रम ने आम के बगीचे वालों को चिंता में डाल दिया है। बीते वर्ष तक जनवरी या फरवरी के बीच आम के बगीचे व्यापारी बोली लगाकर खरीद लेते थे। इस बार अप्रैल के पांच दिन निकल जाने के बावजूद बगीचों के संचालक व्यापारियों की राह तक रहे हैं। यही कारण है कुठलिया आम बगीचे की नीलामी महज 12 लाख 12 हजार रुपये तक होने की उम्मीद है। गोविंदगढ़ बगीचे की नीलामी तकरीबन 32 लाख रुपये में की जा चुकी है। किसान रामबहोर तिवारी ने बताया कि इस बार उनके बगीचे के आम के खरीदार नहीं आए हैं। पिछले वर्षों तक फरवरी माह में ही व्यापारी आकर उन्हें रुपये दे देते थे और पूरा बगीचा ले लेते थे। इस बार वर्षा अंतराल होने के कारण वैसे ही बौर आमों पर कम आए हैं। उस पर भी मौसम खराब होने से स्थिति बिगड़ गई है। बिना रेशे वाला आम मधुमेह रोगी को भी प्रिय सुंदरजा आम की विशेषता है कि यह बिना रेशों वाला होता है और इसे मधुमेह के मरीज भी खा सकते हैं। यह आम पकने के बाद भी 15 दिन तक रखा जा सकता है। दुनिया में रीवा सफेद बाघ के साथ ही फलों के राजा आम ‘सुंदरजा’ के लिए भी विख्यात है। इस आम की देश-विदेश में खासी मांग है। बीते वर्ष सुंदरजा आम की करीब 19 टन पैदावार हुई थी, लेकिन इस साल 12 टन तक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। गोविंदगढ़ में होता है उत्पादन पहले सुंदरजा आम केवल गोविंदगढ़ किले के बगीचों में होता था, लेकिन अब कुठुलिया फल अनुसंधान केंद्र में भी इसकी खेती की जा रही है। इस आम को जीआइ टैग भी प्राप्त है। गोविंदगढ़ का सुंदरजा आम हल्का सफेद रंग का होता है, जबकि कुठुलिया फल अनुसंधान केंद्र में हल्का हरा होता है। सुंदरजा आम ऐसे बना खास गोविंदगढ़ की मिट्टी में उगने वाले पेड़ों के आम का स्वाद लाजवाब है। महक इतनी जबरदस्त है कि आंख बंद करके भी पहचान सकते हैं। 1968 में सुंदरजा आम के नाम पर डाक टिकट जारी किया गया था। दिल्ली, मुंबई, छत्तीसगढ़, गुजरात सहित कई शहर व राज्यों के लोग एडवांस ऑर्डर देकर मंगवाते हैं। फ्रांस, इंग्लैंड, अमेरिका, जर्मनी, कनाडा व अरब देशों में इसकी काफी मांग है। सुंदरजा आम को एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया है। महाराजा गुलाब सिंह ने लगवाया था बगीचा फल एवं अनुसंधान केंद्र कुठुलिया का आम का बगीचा रीवा राज्य के तत्कालीन महाराजा गुलाब सिंह जूदेव के समय में लगवाया गया था। रियासत काल में यह राजे-राजवाड़ों की पसंद हुआ करता था। इसे बाद में कृषि विभाग को सौंप दिया गया। बगीचे में देवी-देवताओं के नाम से विष्णु भोग, हनुमान भोग, कृष्ण भोग, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के नाम से आम के पेड़ लगे हैं। कृषि वैज्ञानिक आरपी जोशी ने बताया कि 132 एकड़ में फैले फल अनुसंधान केंद्र कुठुलिया में लगभग ढाई हजार आम के पेड़ों का बगीचा है। यहां सुंदरजा, मलिका, आम्रपाली, महमूद बहार, चौसा, स्वर्ण रेखा, प्रभा शंकर विष्णु भोग, कृष्ण भोग, गोपाल भोग, फजली, दशहरी व लंगड़ा आम के पेड़ हैं। आम की कीमत प्रति किलो रुपये में मध्य प्रदेश – 160 से 190, महाराष्ट्र – 200 से 250,  दिल्ली – 160 से 220  

सेल्समैन निकला 30 लाख की चोरी का मास्टरमाइंड

रायपुर  पुलिस ने 31 मार्च को पंडरी मेन रोड स्थित कपड़ों के शो रूम श्री शिवम में सनसनीखेज तरीके से 30 लाख रुपए की चोरी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. इनके कब्जे से 17 लाख रुपए कैश, एक कार, एक्टिवा व पल्सर बाइक आदि जब्त की गई है. मास्टरमाइंड शो रूम वाले कॉम्प्लेक्स में टाइटन वॉच की फ्रेंचाइजी काउंटर में काम करने वाला सेल्समैन हथबंध निवासी राजेश टंडन निकला. उसे ही श्री शिवम शो रूम की भीतरी सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों के बारे में जानकारी थी. यही आरोपी अपनी पहचान छिपाने शो रूम बंद होने से 15 मिनट पहले बुरका पहनकर घुसा. रात 12 बजे के बाद वह दुकान के अंदर छिपने की जगह से बाहर निकला और काउंटर का ड्रावर तोड़कर 30 लाख रुपए निकालकर बैग में भरकर फरार हो गया. आरोपी छत से रस्सी के सहारे नीचे उतरते समय फिसलकर गिरा और उसका पैर टूट गया. पुलिस ने उसे तिल्दा के ओम अस्पताल में छापा मारकर गिरफ्तार किया. इसके बाद राजनांदगांव और चिखली धरसींवा निवासी उसके तीन साथी क्रमशः मोहनीश श्रीवास्तव, सुरेश दीवान और प्रेम बघेल दबोचे गए. सभी आरोपी कर्ज में डूबे, पुराना कोई रिकॉर्ड नहीं पुलिस को चारों आरोपियों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है. अलबत्ता सभी कर्ज में जरूर डूबे हुए हैं. जैसे मोहनीश ने तीन मोबाइल फोन लोन पर खरीदें हैं. उसने सेकेंड हैंड आई 20 कार भी ली हुई है, लेकिन किस्त की रकम नहीं भर पा रहा था. चोरी की रकम से उसने 90 हजार रुपए की किस्त चुकाई. एक आरोपी राजेश टंडन ने बीसी की किस्त जमा की है. एक अस्पताल, तो तीन साथी पकड़े गए शिरडी महाराष्ट्र में एसीसीयू क्राइम ब्रांच की टीम ने सबसे पहले राजेश टंडन की गिरफ्तारी की. इसके बाद राजनांदगांव निवासी मोहनीश श्रीवास्तव नामक एमआर और सुरेश दीवान तथा प्रेम बघेल के नाम सामने आये. इनके घरों में छापे मारे गए तो पता चला कि सभी शिरडी व शनि शिंगनापुर गए हुए हैं. तब सिविललाइंस थाने व एसीसीयू की एक टीम को महाराष्ट्र के लिए रवाना किया गया. शुक्रवार रात में ये सभी आरोपी वहीं गिरफ्त में आए. शनिवार को तीनों को रायपुर लाकर रकम व चोरी के दौरान इस्तेमाल वाहनों की बरामदगी की कार्रवाई शुरू की गई. रात तक 17 लाख रुपए आरोपियों की निशानदेही पर बरामद हुए हैं. आरोपी मोहनीश की कार, प्रेम व सुरेश की बाइक व एक्टिवा जब्त कर ली गई है.

भारतीय जनता पार्टी की स्थापना पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यकर्ताओं को दी शुभकामनाएं

रायपुर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना आज ही के दिन 1980 में हुई थी. इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तमाम कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दी है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर किए अपने पोस्ट में लिखा है कि लक्ष्य अंत्योदय, प्रण अंत्योदय और पथ अंत्योदय के संकल्पों को सिद्धि तक पहुंचाने वाले, विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस पर आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं. उन्होंने आगे लिखा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज विकास के सूरज से पूरा देश आलोकित हो रहा है. विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत माता का वैभव सर्वोच्च शिखर पर आरूढ़ हो रहा है.

पेंड्रा-बिलासपुर मुख्य मार्ग पर केंदा घाटी में धान से लदा ट्रक पलटा, लगा लंबा जाम

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही पेंड्रा-बिलासपुर मुख्य मार्ग पर स्थित कारीआम गांव के पास केंदा घाटी में ओवरलोड ट्रक के पलटने से रविवार को लंबा जाम लग गया. धान से लदा ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे दोनों ओर से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बाधित हो गई. घटना के चलते हाईवे पर कई छोटे-बड़े वाहन जाम में फंस गए. मार्ग से गुजरने वाले लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. केंदा घाटी में आए दिन हो रहे हादसे अब चिंता का विषय बनते जा रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटी में ओवरलोड और तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही से दुर्घटनाएं आम हो चुकी हैं. वहीं, बिलासपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे पर चल रहे निर्माण कार्य के कारण सड़कें जर्जर हो चुकी हैं. कई जगहों पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं, जिससे हादसों की आशंका और भी बढ़ जाती है. मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासनिक टीम ने यातायात को सुचारु करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं. पलटे ट्रक को हटाने और ट्रैफिक सामान्य करने का कार्य जारी है. बताया जा रहा है कि कस्टम मिलिंग के कार्य में लगी ट्रक पलटी है. बताया जा रहा है कि केंदा घाट में धान ट्रक के अलावा दो और जगहों पर वाहन किसी कारण से फंस गए हैं, जिसकी वजह लंबा जाम लगा हुआ है. हालांकि छोटी गाड़ी तो किसी तरह से निकल जा रही है लेकिन बड़ी गाड़ियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. यातायात बहाल का प्रयास जारी बता दें कि इस मार्ग का उपयोग यात्री दुर्ग-रायपुर-बिलासपुर से होते हुए उत्तर भारत की तरफ जाने के लिए करते हैं. यही नहीं अमरकंटक से जबलपुर की तरफ जाने के लिए भी बड़ी संख्या में यात्री इस मार्ग का उपयोग करते हैं. ऐसे में स्थानीय लोगों ने जल्द से जल्द घाटी क्षेत्र में सड़क सुधार और ओवरलोडिंग पर सख्ती से कार्रवाई की मांग की है.

एआईसीसी सत्र से पहले सचिन पायलट बोले – पार्टी में चल रही है पीढ़ीगत बदलाव की प्रक्रिया

जयपुर अहमदाबाद में आगामी एआईसीसी सत्र से पहले कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने रविवार को कहा कि पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव की प्रक्रिया चल रही है और युवा नेता अपने ऊपर सौंपी गई जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगे इस दिशा में जवाबदेही और विचारधारा की मजबूती पार्टी की प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी। पीटीआई से बातचीत में पायलट ने कहा कि गुजरात में हो रहा एआईसीसी सत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी इस समय राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने और अपने पुराने गौरव को पुनर्स्थापित करने के प्रयासों में जुटी है।पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भले ही लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस को कुछ राज्यों में हार का सामना करना पड़ा हो लेकिन पार्टी का विश्वास और संघर्ष का जज्बा अब भी कायम है। जब उनसे पूछा गया कि क्या पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव का समय आ गया है तो उन्होंने कहा- कोई भी बदलाव रातोंरात नहीं होता, यह एक निरंतर प्रक्रिया है। पार्टी पिछड़े वर्गों, युवाओं, महिलाओं, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अल्पसंख्यकों को सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। ये वर्ग हमारी आबादी का बड़ा हिस्सा है और उनका समुचित प्रतिनिधित्व अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पार्टी फोरम में हमने उदयपुर घोषणा पत्र को अपनाया है और उसका पालन कर रहे हैं। पार्टी की सभी नियुक्तियों में हम उसे ही ध्यान में रख रहे हैं। पीढ़ीगत बदलाव अपने आप हो रहा है, अब कई लोग नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं, चाहे वह संसद के भीतर हो या संसद के बाहर, चाहे राज्यों में हो या एआईसीसी में नए लोगों की नियुक्ति हो, युवा अब नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं और अपने काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि दिसंबर में बेलगावी अधिवेशन में 2025 को “संगठनात्मक सशक्तिकरण का वर्ष” घोषित किया गया था। संगठनात्मक सुधार, खाली पदों की नियुक्ति और युवाओं को अधिक राजनीतिक जिम्मेदारियां देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पायलट ने कहा, “राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी वाड्रा पार्टी के कामकाज, विभागों और फ्रंटल संगठनों जैसे आईवाईसी, एनएसयूआई, सेवा दल और महिला कांग्रेस में सक्रिय रूप से रुचि ले रहे हैं। हमने 2025 को पार्टी कैडर को उत्साहित करने और संगठन को वैचारिक रूप से मजबूत बनाने का संकल्प लिया है।” उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पार्टी में अब “जवाबदेही” अनिवार्य होगी। “जब किसी व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जाती है, तो उसे जवाबदेह भी होना होगा। जो प्रदर्शन नहीं करेंगे, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना होगा और मेहनती लोगों को मौका मिलेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि राजस्थान में निर्णय लिया गया है कि यदि कोई पदाधिकारी लगातार तीन बैठकों में बिना उचित कारण के अनुपस्थित रहता है, तो उसे पद छोड़ना होगा। हाल ही में इंदिरा गांधी भवन में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों को और अधिक अधिकार दिए जाएंगे, जिनमें चुनावी प्रक्रिया, वित्तीय प्रबंधन और उम्मीदवार चयन में भागीदारी शामिल है। लोकसभा चुनाव से पहले या बाद में कुछ कांग्रेसी नेताओं द्वारा पार्टी छोड़ने पर पायलट ने कहा, “संगठन व्यक्ति से बड़ा होता है। लोग अपनी पसंद, नापसंद या राजनीतिक मजबूरियों के अनुसार आते-जाते हैं, लेकिन कांग्रेस दुनिया के सबसे पुराने राजनीतिक दलों में से एक है और सत्ता में हो या विपक्ष में, उसकी जनसेवा की प्रतिबद्धता अडिग है।” उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार द्वारा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को दबाने, डराने, लुभाने और बदनाम करने का काम किया जा रहा है। जो कांग्रेसजन प्रतिबद्ध हैं, वे संघर्ष करते रहेंगे। हमारे शीर्ष नेतृत्व पर राजनीतिक हमले हुए हैं, लेकिन हम अदालतों और सड़कों दोनों पर लड़ाई लड़ेंगे। पायलट ने कहा कि राजनीति में मजबूत विचारधारा और दृढ़ विश्वास जरूरी हैं। राहुल गांधी ने विपक्ष का नेतृत्व करते हुए संसद में सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं और कांग्रेस एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभा रही है, जबकि भाजपा भावनात्मक मुद्दों को उठाकर ध्यान भटका रही है। एआईसीसी सत्र को लेकर पायलट ने कहा कि यह लंबे अंतराल के बाद हो रहा है और बेहद महत्वपूर्ण है। राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि हम गुजरात पर विशेष ध्यान देंगे। अतीत में यह कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है। भले ही हम चुनाव नहीं जीत पाए लेकिन वोट शेयर आज भी मजबूत है। गुजरात में द्विध्रुवीय राजनीति है और हमारा उद्देश्य वहां अपनी स्थिति को मजबूत करना है। गौरतलब है कि अहमदाबाद में होने वाला एआईसीसी सत्र 9 अप्रैल को आयोजित होगा और इसकी थीम न्यायपथ- संकल्प, समर्पण और संघर्ष होगी। इस मुख्य अधिवेशन में 1,700 से अधिक एआईसीसी सदस्य भाग लेंगे।

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