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एमएसटी रेल टिकट बुक करना हुआ और भी आसान

यूटीएस मोबाइल ऐप से एमएसटी रेल टिकट बुकिंग: यात्रियों के लिए लाभदायक विकल्प भोपाल भोपाल मंडल में यात्री मासिक सीजन रेल टिकट (MST) भी यूटीएस ऑन मोबाइल ऐप के माध्यम से आसानी से बुक कर सकते हैं। यह सुविधा न केवल यात्रा को सरल बनाती है बल्कि समय और धन की बचत भी करती है। भोपाल मंडल में पिछले 6 महीनों में अक्टूबर 2024 से मार्च 2025 तक कुल 60,672 मासिक सीजन रेल टिकट बुक किए गए, जिनमें से 17,722 टिकट यानी करीब 30% टिकट UTS मोबाइल ऐप के माध्यम से बुक किए गए। MST क्या है? MST यानी Monthly Season Ticket एक प्रकार का मासिक रेल टिकट है जो यात्रियों को रोज़ाना आने-जाने के लिए बार-बार टिकट लेने की झंझट से मुक्ति देता है। यह टिकट एक अधिकतम 150 किलोमीटर  के लिए मान्य होता है और महीने भर रेल यात्राओं की सुविधा देता है। MST (Monthly Season Ticket) रेलवे द्वारा नियमित यात्रियों के लिए दी जाने वाली एक सुविधा है जो रोज़ रेल टिकट लेने की ज़रूरत को खत्म कर देती है। यह टिकट कई प्रकारों में उपलब्ध है जैसे – QST (Quarterly Season Ticket) जो 3 महीनों के लिए, HST (Half-Yearly Season Ticket) जो 6 महीनों के लिए और YST (Yearly Season Ticket) जो पूरे 12 महीनों के लिए मान्य होता है। ये सभी विकल्प यात्रियों को अधिक रियायत और सुविधा प्रदान करते हैं। अब ये सभी सीजन रेल टिकट UTS मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल रूप से बुक किए जा सकते हैं, जिससे रेल टिकट काउंटर की कतारों से मुक्ति, समय की बचत और पेपरलेस यात्रा का लाभ मिलता है। MST रेल टिकट लेने के लाभ: 1.    डिजिटल सुविधा: अब MST भी मोबाइल ऐप से बुक की जा सकती है, पेपरलेस और कैशलेस जिससे पेपर MST खोने का डर भी नहीं रहता क्यूंकि अब आपका मोबाइल ही आपकी MST है । 2.    रोज़ टिकट लेने की ज़रूरत नहीं: हर दिन टिकट खरीदने की झंझट से छुटकारा। 3.    पैसों की बचत: डेली रेल टिकट की तुलना में एमएसटी कहीं ज़्यादा किफायती होता है। 4.    समय की बचत: स्टेशन पर कतार में खड़े रहने की ज़रूरत नहीं।      वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि “मासिक सीजन रेल टिकट (MST) भी UTS ऑन मोबाइल ऐप से बुक किया जा सकता है, जो कि दैनिक यात्रियों के लिए बहुत ही उपयोगी सुविधा है। मैं सभी यात्रियों से आग्रह करता हूँ कि वे इस डिजिटल रेल सुविधा का अधिकतम लाभ उठाएं और डिजिटल इंडिया की दिशा में अपना योगदान दें।” यूटीएस ऑन मोबाइल ऐप: MST रेल टिकट बुकिंग की आसान प्रक्रिया 1.    ऐप डाउनलोड करें: गूगल प्ले स्टोर या एप्पल स्टोर से ‘UTS’ ऐप डाउनलोड करें। 2.    रजिस्ट्रेशन करें: मोबाइल नंबर से साइन अप करें। 3.    टिकट बुकिंग करें: o    MST विकल्प चुनें और रूट भरें। o    R-Wallet से भुगतान करें (3% बोनस भी मिलता है)। o    टिकट आपके मोबाइल पर पेपरलेस रूप में उपलब्ध रहेगा।

हिंसा के बाद तैयार हुआ था खाका, 99 दिन में बनकर तैयार हुई सत्यव्रत पुलिस चौकी

संभल संभल में 99 दिन में बनी सत्यव्रत पुलिस चौकी जिले की पहली दो मंजिला और हाईटेक चौकी है। हिंसा के बाद 28 दिसंबर को रखी गई नींव के बाद इसका निर्माण तेजी से पूरा कर डीएम और एसपी ने लोकार्पण किया। यह चौकी संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत करने और पीड़ितों को तुरंत मदद देने के उद्देश्य से बनाई गई है। जामा मस्जिद के सामने तैयार सत्यव्रत पुलिस चौकी के निर्माण में 99 दिन का समय लगा है। जिले की पहली दो मंजिला पुलिस चौकी है, जो हाईटेक व्यवस्थाओं से लैस है। 28 दिसंबर 2024 को इस पुलिस चौकी नींव एएसपी श्रीश्चंद्र ने रखी थी। रविवार को लोकार्पण डीएम और एसपी ने किया। सत्यव्रत पुलिस चौकी की पहली मंजिल तैयार करने के दौरान दिनरात श्रमिकों ने काम किया था। दूसरी मंजिल पर भी तेजी से काम पूरा कराया गया। भूतल पर पुलिस चौकी का कार्यालय, चौकी प्रभारी का कार्यालय, हवालात व कक्ष बनाए गए हैं। दूसरी मंजिल पर जिला कंट्रोल रूम और पुलिस व पीएसी के लिए कक्ष बने हैं। एसपी ने बताया कि कोतवाली संभल क्षेत्र की पुलिस चौकी सत्यव्रत के अंतर्गत मोहल्ला कोटपूर्वी और कोटगर्बी के साथ डाकखाने के आसपास का बाजार शामिल है। आठ साल की बच्ची ने किया सत्यव्रत चौकी का लोकार्पण जामा मस्जिद के निकट नवनिर्मित सत्यव्रत पुलिस चौकी का रविवार को विधिवत लोकार्पण हो गया। डीएम-एसपी की मौजूदगी में आठ साल की बच्ची गुनगुन कश्यप ने फीता काटकर चौकी का लोकार्पण किया। डीएम ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चौकी का निर्माण कराया गया है।  इससे पहले आचार्य शोभित शास्त्री और विशाल शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई।

स्किन केयर प्रॉडक्ट लगाने का भी होता है अपना एक तरीका

रात में जब बात स्किन केयर की होती है तो शुरूआत हमेशा क्लीजिंग से होनी चाहिए। इस दौरान स्किन को डबल क्लीजिंग की जरूरत होती है ताकि स्किन में मौजूद सभी तरह की धूल मिट्टी, गंदगी व मेकअप को दूर किया जा सके। हर व्यक्ति अपनी त्वचा की देखभाल के लिए कुछ स्किन केयर प्रॉडक्ट का इस्तेमाल करता ही है लेकिन क्या आप जानती है कि इन्हें प्रयोग करने का भी अपना एक तरीका होता है। यह ठीक वैसे ही है, जैसे आप खाने की शुरूआत मीठे से नहीं करते, बल्कि उसका भोजन के अंत में खाया जाता है। खासतौर से, अगर आप रात में स्किन केयर प्रॉडक्ट का इस्तेमाल कर रही हैं तो पहले उसे लगाने का सही तरीका जानना बेहद आवश्यक है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में… डबल क्लीजिंग रात में जब बात स्किन केयर की होती है तो शुरूआत हमेशा क्लीजिंग से होनी चाहिए। इस दौरान स्किन को डबल क्लीजिंग की जरूरत होती है ताकि स्किन में मौजूद सभी तरह की धूल मिट्टी, गंदगी व मेकअप को दूर किया जा सके। सबसे पहले आप ऑयल बेस्ड क्लींजर की मदद से स्किन की सारी गदंगी को साफ करें और फिर अंत में वॉटर बेस्ड क्लींजर से स्किन को साफ करना अच्छा रहता है।   टोनर क्लीनिंग के बाद बारी है टोनर की। इसके जरिए आप अपने पोर्स को बंद करने के साथ−साथ स्किन को एक्सफोलिएट करती हैं व डेड स्किन सेल्स से भी निजात पाती हैं। आप स्किन पर टोनर लगाएं और फिर कुछ देर उसे अब्जार्ब होने दें। उसके बाद अगले स्टेप पर जाएं।   आई क्रीम आपकी स्किन के साथ आंखों के आसपास की त्वचा को भी देखभाल की आवश्यकता होती है। इसके लिए आप अपनी दो उंगलियों में आई क्रीम लेकर आंखों के आसपास की त्वचा पर धीरे से मालिश करें। इसके बाद कुछ देर तक उसे स्किन में गहराई तक समा जाने का इंतजार करें। स्पॉट टीटमेंट क्रीम चूंकि रात में आपकी स्किन खुद ही रिपेयरिंग मोड पर होती है और अगर इस समय स्पॉट टीटमेंट क्रीम का इस्तेमाल किया जाए तो कई तरह के दाग−धब्बों आदि से छुटकारा मिलता है। वैसे जिन महिलाओं के चेहरे पर धब्बे या निशान हैं, उन्हें स्पॉट टीटमेंट क्रीम का इस्तेमाल दिन में दो बार अवश्य करना चाहिए। नाइट क्रीम अंत में बारी आती है नाइट क्रीम की। इसके लिए आप जेल आधारित, हल्का व हाइडेटिंग क्रीम का चयन करें। यह न केवल स्किन में जल्दी अवशोषित होता है, बल्कि रात में आपकी त्वचा की नमी को भी बनाए रखता है। अगर इस तरह की नाइट क्रीम का प्रयोग नियमित रूप से किया जाता है तो कुछ ही दिनों में स्किन में काफी अंतर नजर आता है।  

गुलशन बामरा ने कहा कि अधिकारियों को अपने अधिकारों के साथ अपने से वरिष्ठ अधिकारी के अधिकारों की भी जानकारियॉ होना चाहिए

भोपाल प्रमुख सचिव जनजाति गुलशन बामरा ने कहा कि अधिकारियों को अपने अधिकारों के साथ अपने से वरिष्ठ अधिकारी के अधिकारों की भी जानकारियॉ होना चाहिए। प्रमुख सचिव बामरा सोमवार को प्रशासन अकादमी में आयोजित जिला स्तरीय अधिकारियों की दो दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जनजातीय वर्ग के 22 प्रतिशत एवं अनुसूचित जाति वर्ग के 16 प्रतिशत लोग निवास करते हैं। हमारी जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है, जब प्रदेश की कुल जनसंख्या के एक तिहाई से अधिक लोगों के विकास और उन्नति का दायित्व हमें सौंपा गया हो। इस अवसर पर आयुक्त श्रीमन शुक्ल एवं आयुक्त सुवंदना वैद्य भी उपस्थित थे। संभागीय आयुक्त, सहायक आयुक्त एवं जिला संयोजक जनजातीय कार्य एवं अधिसूचना जाति कल्याण विभाग की दो दिवसीय प्रशिक्षण सह-उन्मुखीकरण कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों के विभागीय प्रशिक्षण सत्र के प्रथम दिन प्रमुख सचिव बामरा ने अधिकारियों से उनके स्थापना संबंधी दैनंदिनी कार्य, जिसमें शासकीय सेवा में अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रशासन संबंधी कार्य जिसमें नियुक्ति, पदस्थापना, अनुकंपा नियुक्ति,गोपनीय चरित्रावली पेंशन प्रकरणों में आने वाली समस्याओं के निराकरण पर अधिकारियों से सवाल जबाव भी किए। प्रमुख सचिव बामरा ने कहा कि हमें अपने दृष्टिकोण को प्राथमिकता देते हुए कार्य करना चाहिए। जनजातीय विभाग अन्य विभाग की तुलना में बड़ा विभाग होने के साथ शिकायतों की संख्या भी ज्यादा होती है। आपको इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार करना चाहिए।  

मुश्किल है लेकिन ये 7 हुनर सीख लिये तो सफलता आपके कदम चूमेगी

इंसान को सीखना कभी भी बंद नहीं करना चाहिए. सीखते रहने से आप नई चीजें तो जानते ही हैं, साथ ही खुद को बेहतर भी बनाते हैं, जो आपको भविष्य में फायदा दे सकता है. इसी कड़ी में कुछ स्किल्स भी शामिल हैं, जिन्हें सीखना हर किसी के लिए आसान नहीं होता लेकिन अगर कोई उन्हें सीख ले तो वे उसे हमेशा फायदा देते हैं. फिर चाहे बात करियर की हो या फिर जिंदगी के पड़ावों की. बिजनेस मैगजीन फोर्ब्स की एक रिपोर्ट में ऐसे ही 7 स्किल्स का जिक्र है. आइए बताते हैं इन स्किल्स के बारे में… कब रहना है चुप हर इंसान कभी न कभी किसी न किसी बात पर गुस्सा होता है या किसी बहस में पड़ता है. ऐसे में अक्सर ऐसी स्थिति आती है, जब हमारा खुद पर कंट्रोल नहीं रहता है और हम अपना गुस्सा या गुबार निकाल देते हैं. लेकिन हर जगह और हर बार ऐसा करना सही नहीं है. इससे आपके संबंध खराब हो सकते हैं. इसलिए कब चुप रहना है और कब आवाज बुलंद करनी है, इसका पता होना जरूरी है. साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जब हम खुद के लिए स्टैंड ले रहे हों तो शब्दों और आवाज पर कैसे कंट्रोल रखा जाए. इमोशनल इंटेलीजेंस इमोशनल इंटेलीजेंस (ईक्यू) व्यवहार को मैनेज करने के तरीके, सामाजिक जटिलताओं को संभालने और पॉजिटिव रिजल्ट देने वाले फैसलों को प्रभावित करती है. ईक्यू अपने अंदर के और दूसरों के इमोशंस को पहचानने और समझने की योग्यता है. इससे आपको इमोशंस को लेकर आई अवेयरनेस का इस्तेमाल कर अपने व्यवहार और संबंधों को मैनेज करने में मदद मिलती है. दशकों की रिसर्च के बाद सामने आया है कि इमोशनल इंटेलीजेंस स्टार परफॉरमर्स बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. टाइम मैनेजमेंट टाइम मैनेजमेंट एक महत्वपूर्ण स्किल है, जो न केवल करियर में बल्कि पूरी जिंदगी फायदा देता है. टाइम मैनेजमेंट से अर्थ है कि हर काम अपने सही वक्त से हो जाए. टाइम मैनेजमेंट सीखना आपको हाईएस्ट लेवल की परफॉरमेंस तक ले जाता है. दूसरों को सुनना कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो अपनी बात तो रख देते हैं लेकिन जब दूसरों के कहने का नंबर आता है तो या तो उन्हें सुनना पसंद ही नहीं करते या फिर उनकी बातों पर ध्यान नहीं देते. वास्तव में सुनने से मतलब है कि हम सामने वाले की कही गई बात पर ध्यान दें और केवल अपनी कहने पर न लगे रहें. ‘न’ कहना न कहना कई लोगों के लिए सबसे मुश्किल स्किल है. सैन फ्रांसिस्को की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में हुई रिसर्च के मुताबिक आपको न कहने में जितनी ज्यादा कठिनाई होती है, आप उतना ही स्ट्रेस, गुबार फील करते हैं. यहां तक कि कुछ लोग डिप्रेशन में भी चले जाते हैं. इसलिए इन्सान को न कहना भी आना चाहिए, साथ में यह भी इसे सही वक्त और सही जगह पर कहा जाए. इससे आप गैर—जरूरी बोझ से फ्री रहते हैं और अपने वक्त व एनर्जी को जिंदगी की जरूरी चीजों के लिए रख सकते हैं. उम्दा नींद सभी जानते हैं कि अच्छी नींद दिमाग के लिए अच्छी है. हाल ही में University of Rochester की एक स्टडी में पाया गया कि जब आप सोते हैं तो दिमाग हानिकारक प्रोटीन्स को रिमूव करता है. ये प्रोटीन आपके जागते रहने के दौरान की गई न्यूरल एक्टिविटीज से बनते हैं. लेकिन ये प्रोटीन उचित रूप से तभी खत्म होते हैं, जब आप उम्दा नींद यानी सही मात्रा में नींद लेते हैं. अगर ऐसा नहीं होता तो ये हानिकारक प्रोटीन ब्रेन सेल्स में रह जाते हैं और आपके सोचने की क्षमता को प्रभावित करते हैं. इससे परेशानियां हल करने की आपकी योग्यता कम हो जाती है, क्रिएटिविटी खत्म होने लगती है और इमोशनल रिएक्टिविटी बढ़ जाती है. पॉजिटिव रहना पॉजिटिविटी आपको हर तरह की चुनौती से निपटने में मदद करती है. हालांकि कभी—कभी कुछ स्थितियों में पॉजिटिव सोच रखना मुश्किल हो जाता है लेकिन फिर भी कोशिश करनी चाहिए. इससे संघर्ष करने की क्षमता में इजाफा होता है. पॉजिटिव रहने के लिए फोकस और अटेंशन की जरूरत होती है.  

सेहत के लिए वरदान से कम नहीं है जौ

जौ ऐसा अनाज है, जिसके सेवन से हमारे शरीर को कई पोषक तत्व तो मिलते ही हैं। साथ ही ये हमें कई बीमारियों से भी बचाता है। जौ, गेहूं की ही जाति का एक अनाज है, लेकिन ये गेहूं की अपेक्षा हल्का और मोटा अनाज है। जौ में मुख्य रूप से लैक्टिक ऐसिड, सैलिसिलिक ऐसिड, फास्फोरिक ऐसिड, पोटेशियम और कैल्शियम उपलब्ध होता है। आइए जानते हैं जौ के फायदे। मोटापा खत्म करे 95 प्रतिशत लोग मोटापे की समस्या से परेशान रहते हैं। जौ के सत्तू और त्रिफला के काढ़े में शहद मिलाकर पीने से मोटापा समाप्त हो जाता है। इसके अलावा जो व्यक्ति कमजोर हैं, वे जौ को दूध के साथ खीर बना कर खाने से मोटे हो जाते हैं। रंग निखारता है जौ सिर्फ आंतरिक ही नहीं, बल्कि बाहरी रूप से भी लाभकारी है। ये रंग को निखारने के लिए वरदान है। जौ का आटा, पिसी हुई हल्दी और सरसों के तेल को पानी में मिलाकर लेप बना लें। रोजाना शरीर में इसका लेप करके गर्म पानी से नहाने से रंग निखरता है। शुगर करे नियंत्रित शुगर को अगर धीमी मौत कहें तो कुछ गलत नहीं होगा। ये बीमारी लोगों की लाइफस्टाइल पर निर्भर करती है। इसलिए इस बीमारी से छुटकारे के लिए आपको हेल्दी डाइट लेने की जरूरत है। शुगर के रोगी जौ के आटे की रोटी और सत्तू बनाकर खा सकते हैं। जौ के आटे में चने का आटा मिलाकर भी खाया जा सकता है। पथरी में आराम खराब और दूषित खानपान के चलते अधिकतर लोग पथरी की समस्या से परेशान रहते हैं। इस बीमारी से पीड़ित लोग जौ को पानी में उबालें। इसे ठंडा करने के बाद रोज 1 ग्लास पिएं। ऐसा नियमित करने से पेट की पथरी गलती है। इसके अलावा ऐसे लोग जौ की रोटी या सत्तू भी ले सकते हैं।  

EOW ने भारतमाला परियोजना में 220 करोड़ का मुआवजा घोटाला में शुरू की जांच , जल्द होगी कार्रवाई

रायपुर EOW ने भारतमाला परियोजना में मुआवजा घोटाला मामले की जांच शुरू कर दी है. EOW ने प्रशासन से लगभग 500 पन्नों की जांच रिपोर्ट मांगी है. अब जल्द ही मामले में दोषियों पर FIR हो सकती है. यह पहली बार है जब राज्य में किसी भूमि मुआवजा विवाद की जांच EOW कर रही है. विभाग ने इस घोटाले से जुड़े कई अहम दस्तावेज पहले ही जुटा लिए हैं और कई बिंदुओं पर गोपनीय जांच भी पूरी हो चुकी है. घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी जोरों पर है और जल्द ही गिरफ्तारियां भी संभव हैं. बता दें, शुरुआती जांच में यह सामने आया था कि कुछ सरकारी अधिकारियों, भू-माफियाओं और प्रभावशाली लोगों ने मिलीभगत कर फर्जी तरीके से लगभग 43 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि हासिल की थी. वहीं मामले की विस्तृत जांच में यह आंकड़ा बढ़कर 220 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच गया है. अब तक लगभग 164 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का रिकॉर्ड जांच एजेंसी को मिल चुका है. वहीं घोटाले के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने बीते दिन (6 मार्च) को PMO और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र भी भेजा है. उन्होंने पत्र के माध्यम से मामले में CBI जांच की मांग की है. बता दें, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने विधानसभा बजट सत्र 2025 में भी इस मुद्दे को उठाया था, जिसके बाद साय कैबिनेट की बैठक में जांच को ईओडब्ल्यू को सौंपने का निर्णय लिया गया था. अब EOW ने इस घोटाले की जांच तेज कर दी है. क्या है भारतमाला परियोजना का मुआवजा घोटाला? छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत राजधानी रायपुर से विशाखपट्टनम तक 950 कि.मी. सड़क निर्माण किया जा रहा है. इस परियोजना में रायपुर से विशाखापटनम तक फोरलेन सड़क और दुर्ग से आरंग तक सिक्स लेन सड़क बनना प्रस्तावित है. इस सड़क के निर्माण के लिए सरकार ने कई किसानों की जमींने अधिग्रहित की हैं. इसके एवज में उन्हें मुआवजा दिया जाना है, लेकिन कई किसानों को अब भी मुआवजा नहीं मिल सका है. विधानसभा बजट सत्र 2025 के दूसरे दिन नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने इस मुद्दे को उठाया था, जिसके बाद इस मामले में जांच का फैसला लिया गया. दिल्ली से दबाव के बाद खुला मामला बताया जाता है कि कमोबेश 300 करोड़ रुपए के इस घोटाले का खुलासा दिल्ली से दबाव पड़ने के बाद हुआ. मुआवजे के तौर पर 248 करोड़ रुपए देने के बाद 78 करोड़ के और क्लेम सामने आने पर नेशनल हाईवे अथारिटी के चीफ विजिलेंस आफिसर ने रायपुर कलेक्टर से इसकी जांच कराने कहा था. लेकिन जांच सालों तक अटकी रही. दिल्ली से पड़े दबाव के बाद कलेक्टर ने जांच रिपोर्ट तैयार की, जिसमें यह बात स्पष्ट हुई कि मूल मुआवजा 35 करोड़ के आसपास बनता था, जिसे 213 करोड़ रुपए ज्यादा कर बांट दिया गया. भूमि अधिग्रहण नियम भूमि अधिग्रहण नियम 2013 के तहत हितग्राही से यदि 5 लाख कीमत की जमीन ली जाती है, तो उस कीमत के अलावा उतनी ही राशि यानी 5 लाख रुपए सोलेशियम के रूप में भी दी जाएगी. इस तरह उसे उस जमीन का मुआवजा 10 लाख दिया जाएगा. इसके तहत 5 लाख की यदि जमीन अधिग्रहित की जाती है तो उसके 10 लाख रुपए मिलेंगे और 10 लाख रुपए सोलेशियम होगा. इस तरह हितग्राही को उसी जमीन के 20 लाख रुपए मिलेंगे.

मुख्यमंत्री साय ने सिकलसेल और थैलेसीमिया जागरूकता एवं एचएलए मैचिंग शिविर का किया शुभारंभ

पीड़ित बच्चों की हुई निःशुल्क जांच, उपचार भी रहेगा पूर्णतः निःशुल्क रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जिला अस्पताल, जशपुर में सिकलसेल, थैलेसीमिया परामर्श जागरूकता एवं एचएलए मैचिंग शिविर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने सिकलसेल और थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात कर उनके उपचार संबंधी जानकारी प्राप्त की। इस विशेष शिविर में न केवल जशपुर जिले, बल्कि पड़ोसी जिले बलरामपुर, सरगुजा, सूरजपुर एवं झारखंड के गुमला जिले से भी सिकलसेल और थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे एवं उनके परिजन शामिल हुए। बेंगलुरु से पहुंचे विशेषज्ञ चिकित्सक, निःशुल्क हुआ एचएलए डीएनए टेस्ट शिविर में बेंगलुरु के नारायणा हॉस्पिटल से आए बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. सुनील भट्ट द्वारा 12 वर्ष तक के बच्चों  का एचएलए डीएनए टेस्ट और परामर्श निःशुल्क किया गया। यह परीक्षण बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त डोनर की पहचान हेतु आवश्यक होता है। संपूर्ण इलाज सहित विदेश में होने वाला महंगा टेस्ट भी अब निःशुल्क शिविर में कास फाउंडेशन की श्रीमती काजल सुरेश सचदेव ने बच्चों एवं परिजनों को सिकलसेल और थैलेसीमिया के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इन बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिए न केवल आवश्यक दवाइयों एवं जांच की सुविधाएं निःशुल्क दी जा रही हैं, बल्कि जर्मनी में होने वाला अत्यंत महंगा एचएलए डीएनए टेस्ट और देश के प्रमुख अस्पतालों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी जटिल प्रक्रिया भी पूर्णतः निःशुल्क कराई जा रही है। राष्ट्रीय सिकलसेल एवं एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत जशपुर जिले में 0-15 आयु वर्ग के 209 सिकलसेल एवं थैलेसीमिया मरीजों की पहचान की गई है। इनमें से 110 बच्चों का एचएलए डीएनए टेस्ट कर ट्रांसप्लांट के लिए चयनित किया गया, जिनमें से अब तक 8 बच्चों का सफलतापूर्वक निःशुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट हो चुका है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय सिकलसेल एवं एनीमिया उन्मूलन मिशन के अंतर्गत जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ, संगवारी संस्था एवं कास फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों से जिले में सिकलसेल के उन्मूलन की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह,  नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यशप्रताप सिंह जूदेव, श्री भरत सिंह, संभागीय कमिश्नर श्री नरेंद्र दुग्गा, आईजी श्री अंकित गर्ग, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुशासन तिहार-2025 के आयोजन हेतु तैयारी शुरू करने दिए निर्देश

जगदलपुर मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुशासन तिहार-2025 के आयोजन हेतु तैयारी करने सहित कल 08 अप्रैल से आवेदन पत्र प्राप्त किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इस अभियान को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए माइक्रो प्लानिंग कर जन शिकायतों और समस्याओं के समाधान हेतु गम्भीरता के साथ पहल किए जाने कहा। साथ ही अभियान के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार कर आम जनता को अवगत कराए जाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव वन एवं खाद्य विभाग ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह सहित राज्य शासन के सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। ज्ञात हो कि सुशासन तिहार प्रदेश में सुशासन की सशक्त स्थापना, जनसमस्याओं के त्वरित समाधान, जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा और जन संवाद को सशक्त बनाने के उद्देश्य से तीन चरणों में आयोजित किया जा रहा है। इस तिहार के माध्यम से शासन-प्रशासन सीधे आम जनता से जुड़कर, उनकी समस्याओं को समयबद्ध ढंग से सुलझाने का कार्य करेगा।     सुशासन तिहार-2025 आयोजन का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना, शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना तथा विकास कार्यों में गति लाने के साथ ही आम जनता, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से सीधा संवाद स्थापित करना है। तीन चरणों में होगा सुशासन तिहार-2025 का आयोजन            सुशासन तिहार-2025 का आयोजन तीन चरणों में होगा। पहले चरण में 08 अप्रैल से 11 अप्रैल 2025 तक आम जनता से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। दूसरे चरण में लगभग एक माह के भीतर प्राप्त आवेदनों का निराकरण किया जाएगा। तीसरे एवं अंतिम चरण में 05 मई से 31 मई 2025 के बीच समाधान शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इस तिहार को सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने सहित एक पोर्टल तैयार किया गया है।           सुशासन तिहार के अंतर्गत 08 अप्रैल से 11 अप्रैल 2025 तक ग्राम पंचायत मुख्यालयों और नगरीय निकाय कार्यालयों में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। इन स्थलों पर समाधान पेटी रखी जाएगी, ताकि लोग अपनी समस्याएं और शिकायतें निःसंकोच लिखकर उसमें डाल सकें। आवेदन प्राप्त करने के लिए समाधान पेटी की व्यवस्था जिला और विकासखण्ड मुख्यालय स्तर पर भी की जाएगी। आवश्यकतानुसार हाट-बाजारों में भी आवेदन संग्रह किये जा सकेंगे। ऑनलाइन आवेदन प्राप्त करने की भी व्यवस्था पोर्टल में रहेगी। जनसाधारण कॉमन सर्विस सेंटर में भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्रत्येक आवेदन को पोर्टल में पंजीकृत कर ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा, साथ ही आवेदनकर्ता को पावती दी जाएगी। आवेदनों का निराकरण           आम जनता से प्राप्त सभी आवेदनों को स्कैन कर सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा और जिला, जनपद एवं नगरीय निकाय के अधिकारियों को ऑनलाइन व भौतिक रूप से भेजा जाएगा। संबंधित विभाग और अधिकारी लगभग एक माह के भीतर इन आवेदनों का निराकरण सुनिश्चित करेंगे। समाधान शिविर का आयोजन           सुशासन तिहार के तहत 05 मई से 31 मई 2025 के दौरान प्रत्येक 08 से 15 पंचायतों के मध्य समाधान शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें आवेदकों को उनके आवेदनों की स्थिति की जानकारी दी जाएगी। नगरीय निकायों में भी आवश्यकतानुसार समाधान शिविर आयोजित होंगे। शिविरों के आयोजन की तिथि की जानकारी आवेदकों को एसएमएस के माध्यम से तथा आवेदन की पावती के माध्यम से दी जाएगी, साथ ही इन तिथियों का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। इन शिविरों में प्राप्त आवेदनों की प्रविष्टि भी पोर्टल में की जाएगी। वहीं यथासम्भव आवेदनों का निराकरण मौके पर भी किया जाएगा और शेष आवेदनों का समाधान एक माह में करने सहित आवेदकों को सूचित किया जाएगा।            सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित समाधान शिविरों में मुख्यमंत्री, मंत्रीगण सहित मुख्य सचिव, प्रभारी सचिव एवं राज्य शासन के अधिकारी भी शामिल होंगे तथा वहां आवेदकों से भेंटकर उनकी समस्याओं और निराकरण के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। इस तिहार को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। आवेदन प्राप्त करने, उनकी प्रविष्टि, मॉनिटरिंग एवं समाधान प्रक्रियाओं के लिए सम्बन्धित अधिकारी-कर्मचारियों को समुचित प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है। जनप्रतिनिधियों की होगी भागीदारी    सुशासन तिहार में स्थानीय सांसदों, विधायकों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की व्यापक भागीदारी होगी। उन्हें समाधान शिविर आयोजन तथा अन्य आवश्यक जानकारियां समय पर उपलब्ध कराई जाएगी। इस दौरान मुख्यमंत्री और मंत्रीगणों द्वारा  विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन का औचक निरीक्षण द्वारा किया जाएगा। विभिन्न योजनाओं से लोगों को मिल रहे लाभ के बारे में फीडबैक लिया जाएगा। प्रभारी सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी अपने भ्रमण के दौरान उक्त निरीक्षण करने सहित आम जनता से भेंट करेंगे। सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री और मंत्रीगणों द्वारा जिला मुख्यालय पर अधिकारियों की बैठक ली जाएगी, जिसमें समाधान शिविरों में प्राप्त आवेदनों के निराकरण की स्थिति और विभिन्न योजनाओं व परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी, साथ ही आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। साथ ही समीक्षा बैठक के उपरांत अथवा उपयुक्त समय पर प्रेसवार्ता लेने सहित विभिन्न संगठनों एवं नागरिकों से भेंट की जाएगी।

सराफा व्यवसायी की हत्या कर लाश को बोरे में डालकर लगाई आग, जांच में जुटी पुलिस

 सिद्धार्थनगर सिद्धार्थनगर के सदर थाना इलाके के बरगदवा गांव के पास शनिवार देर रात एक सराफा व्यवसायी की हत्या करके शव बोरी में बांधकर पेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया गया। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने अधजला शव बरामद किया। बताया जा रहा है कि व्यवसायी पड़ोसी बर्तन व्यापारी के घर हार देने गया था। व्यवसायी के भाई की तहरीर पर पुलिस ने पड़ोसी व्यापारी और एक अन्य पर हत्या का केस दर्ज किया है। सदर थाना क्षेत्र के बरगदवा गांव के पास शनिवार देर रात चकरोड से गुजर रहे लोगों ने खेत में कुछ जलता देखा। करीब पहुंचे तो बोरी में लाश जलती देख पुलिस को जानकारी दी। सूचना पर पुलिस पहुंची तब तक शव का कुछ हिस्सा जल चुका था। पुलिस की जांच में पता चला कि मोहाना थाने में एक युवक की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई है। पुलिस शव मोर्चरी में रखवा दिया। रविवार की सुबह मोहाना थाना क्षेत्र के भगवानुर गांव के टोला चैनपुर निवासी बलिराम वर्मा मोर्चरी पहुंचे तो उन्होंने शव की पहचान अपने भाई सुनील वर्मा (22) के रूप में की। बलिराम ने बताया कि उसके भाई ने रमवापुर चौराहे पर ज्वेलरी की दुकान खोली थी। शनिवार को भी वह दुकान पर गया था और शाम को करीब छह बजे बात हुई तो उसने बताया कि वह पड़ोस के बर्तन व्यापारी गौहनिया निवासी हबीबुल्लाह के घर हार देने जा रहा है। शाम साढ़े छह बजे के बाद उसका मोबाइल स्विच ऑफ मिलने लगा।   आभूषण का बैग और नकदी गायब काफी प्रयास के बाद भी कुछ पता नहीं चलने पर रात में मोहाना थाने पर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। सुबह लाश मिलने की जानकारी हुई। बलिराम ने आरोप लगाया कि गौहनिया निवासी हबीबुल्लाह और कृष्णा वर्मा ने उसके भाई की हत्या की है। आभूषण का बैग और नकदी गायब है। एसओ मोहाना अनूप कुमार मिश्र ने बताया कि हत्या का केस दर्ज करके मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हत्या का तरीका कर रहा बड़ी वजह की तरफ इशारा सराफा व्यवसायी सुनील वर्मा की हत्या के बाद पेट्रोल डालकर शव जलाकर उसका नामोनिशान मिटाने की कोशिश की गई। रविवार को मोर्चरी पहुंचे लोगों का कहना था कि हत्या का यह तरीका वारदात के पीछे किसी बड़ी वजह की तरफ इशारा कर रहा है। लोगों ने सवाल उठाया कि मामला अगर सिर्फ जेवर लूटने का होता तो मारपीट कर जेवर लूट लिया जाता। हत्या के बाद शव जलाने की कोशिश बड़े सवाल खड़े कर रही है।  सुनील छह भाई-बहनों में सबसे छोटा था। बड़े भाई बलिराम ने बताया कि सुनील की 25 अप्रैल को शादी होनी थी। परिवार के लोग शादी की तैयारियों में जुटे थे। अचानक सारी खुशियां मातम में तब्दील हो गईं। रविवार को सुनील के परिजनों और रिश्तेदारों के साथ मोर्चरी पर पहुंचे लोग इस मामले पर चर्चा करते रहे।   पहले मारा, फिर आग लगाई लोगों का कहना था कि हत्यारे ने पहले मारा है उसके बाद बोरी में भरा और जलाकर नामोनिशान मिटाने की कोशिश। अगर सिर्फ जेवर लूटने की मंशा होती तो लूटने के बाद हत्या कर शव दूर लाकर नहीं फेंकता, इसमें पकड़े जाने का डर था।  साजिश के तहत हत्या की सूत्रों के मुताबिक जांच में जुटी पुलिस भी मान रही है कि हत्या का तरीका बता रहा है कि मारने वाला किसी बात को लेकर आक्रोशित था। साजिश के तहत इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया। फिलहाल पुलिस मोबाइल कॉल डिटेल, सुनील के लोगों से संबंध और पूर्व में विवादों की भी जांच कर रही है। अधजली लाश मिलने की जानकारी पर पुलिस टीम मौके पर गई थी। शव की पहचान हाे गई है। मृतक के भाई की तहरीर पर हत्या का केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई है। लूट के साथ अन्य एंगिल पर भी जांच कराई जा रही है। मामले का जल्द ही पर्दाफाश कर दिया जाएगा।-सिद्धार्थ, एएसपी

भवन निर्माण की दी गई अनुमतियों का नए सिरे से परीक्षण, रायपुर मास्टर प्लान में गड़बड़ियों की जांच तेज

रायपुर राजधानी रायपुर की निवेश क्षेत्र विकास योजना यानी मास्टर प्लान-2031 में सामने आई अनियमितताओं और विसंगतियों की जांच अब तेज़ी से आगे बढ़ रही है. विधानसभा में मामला उठने के बाद नगर निवेश विभाग और नगर निगम के अधिकारियों ने उन सभी बिंदुओं की पड़ताल शुरू कर दी है, जो भवन निर्माण की अनुमतियों से संबंधित हैं. मास्टर प्लान में की गई गड़बड़ियों की जांच रिपोर्ट पहले ही नगर एवं ग्राम निवेश के संचालक को सौंपी जा चुकी है. रिपोर्ट में कई गंभीर खामियों का उल्लेख किया गया है. रायपुर पश्चिम के विधायक और पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने विधानसभा में इस मसले को प्रमुखता से उठाते हुए विभागीय मंत्री को पत्र लिखकर आपत्तियों का निराकरण होने तक निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की मांग की है. समीक्षा बैठक में तय हो रही आगे की रणनीति नगर निगम आयुक्त, संबंधित जोन कमिश्नर और नगर निवेश विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक भी आयोजित की जा चुकी है. अधिकारियों के मुताबिक, विधानसभा में उठाए गए मुद्दों की गहन जांच के बाद शासन को अंतिम रिपोर्ट सौंपी जाएगी. इस विषय को शासन स्तर पर भी गंभीरता से लिया जा रहा है. 2023 में लागू हुआ था मास्टर प्लान-2031 गौरतलब है कि रायपुर मास्टर प्लान-2031 को 13 जुलाई 2023 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लागू किया गया था. योजना लागू होने के बाद से ही इसमें तमाम गड़बड़ियों को लेकर शिकायतें मिलने लगी थीं, जिनकी जांच के लिए एक विशेष समिति बनाई गई थी. इस समिति को कुल 146 शिकायतें और सुझाव प्राप्त हुए थे. जांच में यह तथ्य सामने आए हैं कि रायपुर के कई पुराने तालाबों की भूमि को गलत तरीके से आवासीय या कृषि क्षेत्र में बदल दिया गया है. इसके अलावा कुछ प्रमुख सड़कों को नक्शे से हटा दिया गया है या उनकी चौड़ाई कम दर्शाई गई है, जिससे शहरी यातायात और आधारभूत संरचना पर असर पड़ सकता है. संशोधन से पहले मांगे जाएंगे नागरिकों से सुझाव अधिकारियों ने बताया कि मास्टर प्लान में संभावित संशोधनों से पहले जनता से दावे और आपत्तियां मांगी जाएंगी. फिलहाल मौजूदा मास्टर प्लान ही प्रभावी है, लेकिन जांच पूरी होने और रिपोर्ट आने के बाद उसमें आवश्यक सुधार कर उसे दोबारा लागू करने की तैयारी की जा रही है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की नवीन आपराधिक कानूनों की समीक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्तमान चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाए गए नए आपराधिक कानून, भारतीय न्याय प्रणाली को अधिक लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। सभी के लिए अधिक सुलभ, सहायक और कुशल न्याय प्रणाली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बने इन कानूनों और नवीन प्रक्रियाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है। न्याय प्रणाली से जुड़ी सभी संस्थाओं में अद्यतन व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए जन-सामान्य को नई धाराओं और प्रक्रियाओं से शीघ्र अतिशीघ्र अवगत कराने के लिए नए आपराधिक कानूनों के बारे में जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवीन आपराधिक कानूनों की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। मंत्रालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव गृह जे.एन. कंसोटिया, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुलिस, जेल, अभियोजन, न्यायिक एवं फॉरेंसिक कर्मियों के बीच अद्यतन तकनीक के उपयोग का प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए। सभी हितधारकों में हर स्तर पर बेहतर समन्वय जरूरी है। प्रत्येक स्तर पर आवश्यक व्यवस्था, उपकरण और भौतिक संसाधनों की उपलब्धता प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अचल सम्पत्ति संबंधी अपराधों पर नियंत्रण के लिए पुलिस के साथ राजस्व का अमला भी सजग और सतर्क रहे, साथ ही दोनों विभागों में परस्पर समन्वय भी हो। प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों सहित जिन क्षेत्रों में भूमि की दरें तेजी से बढ़ रही है, वहां विशेष सजगता बरती जाए। बैठक में बताया गया कि समयावधि में चालान के लिए नवीन डैशबोर्ड उपलब्ध है। ई-साक्ष्य की प्रक्रिया भी आरंभ की जा चुकी है। पुलिस थानों तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए न्यायश्रुति सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया गया है और थानों व कंट्रोल रूम में साउंड प्रूफ कक्ष चिन्हित किए जा रहे हैं। ऑनलाइन समन/वारंट मॉड्यूल के अंतर्गत गतिविधियां प्रगति पर हैं। पिछले तीन महीने में 50 प्रतिशत से अधिक वारंट तिथि से पहले इलेक्ट्रानिक रूप से तामील किए गए। इनकी मॉनीटरिंग के लिए सभी जिलों में सेल गठित किए जा चुके हैं। डिजिटल इन्वेस्टिगेशन केलिए टेबलेट्स और लाइव स्कैनर थानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बैठक में डिजिटल धोखाधड़ी, डेटा चोरी जैसे सायबर अपराधों के बारे में जागरूकता के लिए की गई पहल की भी जानकारी दी गई।  

जनसामान्य के साथ शालीन व्यवहार और संवाद आवश्यक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

चयनित अधिकारी सेवा भाव और सकारात्मक मानसिकता के साथ करें अपने अधिकारों का उपयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनसामान्य के साथ शालीन व्यवहार और संवाद आवश्यक मुख्यमंत्री ने राज्य सिविल सेवा अधिकारियों के 118वें संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया शुभारंभ उप जिलाधीश, उप पुलिस अधीक्षक और नायब तहसीलदार के कुल 83 प्रशिक्षु लेंगे सात सप्ताह का संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय समाज स्व-नियंत्रित और सुसंस्कृत समाज है। राज्य सेवा के लिए चयनित अधिकारी पवित्र सेवा भाव और परिष्कृत मन मस्तिष्क के साथ, उन्हें मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए अपने दायित्व निर्वहन की ओर अग्रसर हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षु अधिकारियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अधिकारी अपनी कुशलता और दक्षता से सभी की आशाओं-आकांक्षाओं पर खरे उतरें यही कामना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य सिविल सेवा के अधिकारियों के 118वें संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ सत्र को प्रशासन अकादमी में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का महानिदेशक प्रशासन अकादमी सचिन सिन्हा द्वारा पुष्प-गुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। प्रशिक्षण शुभारंभ पर अकादमी संकल्प गान की प्रस्तुति हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ प्रशिक्षु अधिकारियों का ग्रुप फोटो भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षुओं से कहा कि नर्सरी कक्षा से लेकर अब तक के शिक्षण-प्रशिक्षण से मिले ज्ञान के आत्म अवलोकन से अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों और कार्यों को दक्षतापूर्वक संपन्न करें। उन्होंने कहा कि शिक्षण से व्यक्ति और प्रशिक्षण से व्यक्तित्व का निर्माण होता है। हमारी पाठ्य पुस्तकें अपार ज्ञान का भंडार हैं, लेकिन दायित्वों को पूरा करने के लिए इसी ज्ञान की मदद से अपना मार्ग स्वयं खोजना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने दायित्वों के निर्वहन में पारिवारिक मूल्यों का ध्यान रखने, जनसामान्य के साथ शालीन व्यवहार और संवाद क्षमता विकसित करने तथा आउट ऑफ बॉक्स सोचते हुए समाज हित में नवाचार करने के लिए प्रेरित किया। बड़े पद की जिम्मेदारी के साथ-साथ परिवारजन और मित्रों की अपेक्षाओं पर बने रहना भी एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि आपका व्यवहार ऐसा हो कि आप अधिक से अधिक लोगों की आशाओं व आकांक्षाओं पर खरे उतर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मिशन कर्मयोगी से विकास और जनकल्याण की दिशा में राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्यरत है। चयनित अधिकारियों को स्वयं के परिश्रम और ईश्वर की कृपा से जनसेवा का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने सबसे अपेक्षा की कि प्रशिक्षण उपरांत अधिकारी, मैदानी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए आत्मविश्वास और सकारात्मक मानसिकता के साथ सुशासन और गुणवत्तापूर्ण लोक सेवाओं के लिए उत्तरदायी-जवाबदेह-पारदर्शी-स्वच्छ और संवेदनशील भूमिका का निर्वहन करें। शुभारंभ सत्र को अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन संजय दुबे, महानिदेशक प्रशासन अकादमी सचिन सिन्हा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह ने भी संबोधित किया। संचालक प्रशासन अकादमी मुजीबुर्रहमान खान ने आभार माना। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा में चयनित वर्ष 2020 और 2021 बैच के उप जिलाधीश, उप पुलिस अधीक्षक और नायब तहसीलदार पद के लिए चयनित कुल 83 प्रशिक्षुओं के सात सप्ताह का संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम 7 अप्रैल से 23 मई 2025 तक प्रशासन अकादमी में संचालित होगा।  

भोपाल में ट्यूबवेल खनन पर रोक, तेज गर्मी-गिरते भूजल स्तर को देखते हुए फैसला; 30 जून तक नहीं करवा पाएंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गर्मी और भू-जल के गिरते स्तर को देखते हुए ट्यूबवेल खनन पर रोक लगा दी गई है। कोई भी व्यक्ति 30 जून तक भोपाल जिले में ट्यूबवेल की खुदवाई नहीं करा सकेगा। इस संबंध में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक, एसडीएम की अनुमति के बिना जिले में बोरिंग मशीनों का प्रवेश और खनन दोनों प्रतिबंधित रहेगा। केवल सार्वजनिक सड़कों से गुजरने वाली मशीनों को छूट दी गई है। अवैध बोरिंग पर FIR और 2 साल तक की सजा भी होगी। भोपाल में गर्मी और गिरते भूजल स्तर को देखते हुए ट्यूबवेल खनन पर रोक लगा दी गई है। अब कोई भी व्यक्ति 30 जून तक भोपाल जिले में ट्यूबवेल नहीं खुदवा सकेगा। इस संबंध में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने सोमवार को आदेश जारी किया। सोमवार को प्रदेश के सभी शहरों में सुबह से ही तेज धूप खिलने की वजह से गर्मी का असर बढ़ा है। भोपाल में सुबह 11 बजे ही सड़कें सूनी नजर आईं। मौसम विभाग के मुताबिक, आज सोमवार को पूरे प्रदेश में गर्मी का असर रहेगा जबकि मंगलवार से लू का अलर्ट है। 15 अप्रैल तक राजस्थान से सटे जिलों में लू चलेगी। वहीं, 9 और 10 अप्रैल को कुछ जिलों में हल्की बारिश और बादल छाए रहेंगे। अगर कोई मशीन अवैध रूप से जिले में प्रवेश करती है या नलकूप खनन करती है, तो संबंधित एसडीएम और पुलिस अधिकारी मशीन को जब्त कर एफआईआर दर्ज करवा सकेंगे। आदेश का उल्लंघन करने पर दो हजार रुपए जुर्माना, दो साल की सजा या दोनों हो सकते हैं। मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम की धारा 6 (1) के तहत पूरे जिले में निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह आदेश केवल निजी नलकूपों पर लागू होगा। शासकीय योजनाओं के तहत किए जा रहे नलकूप खनन कार्यों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। पीएचई द्वारा संचालित कार्यों को परमिशन की जरूरत नहीं होगी आगे ऐसा ही रहेगा मौसम मौसम विभाग, भोपाल की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया- पिछले दिनों एक्टिव रहा ओले-बारिश का सिस्टम आगे बढ़ गया है। अब राजस्थान से जुड़े जिलों में हीट वेव का असर देखने को मिलेगा। 8 अप्रैल को वेस्टर्न डिस्टरबेंस के एक्टिव होने का अनुमान है। इसकी वजह से पूर्वी हिस्से में मौसम बदला रहेगा। अप्रैल में 7 से 10 दिन चल सकती है लू मध्यप्रदेश में अप्रैल महीने में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। पहले और दूसरे सप्ताह में हल्की बारिश हो सकती है। वहीं, दूसरे सप्ताह से लू भी चलेगी। सबसे गर्म आखिरी सप्ताह रहेगा। दिन का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पार हो सकता है। मौसम केंद्र भोपाल के वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वेदप्रकाश सिंह ने बताया- इस बार तापमान के सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। वहीं, प्रदेश में अप्रैल महीने में 7 से 10 दिन तक हीट वेव यानी लू का असर देखने को मिल सकता है।

जीआरएमसी की जूनियर डॉक्टर की मौत, डीन ने जूनियर डॉ को दिया नोटिस, घटना वाली रात रेखा के कमरे में मौजूद था

ग्वालियर.  ग्वालियर की गजराराजा मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजी की डॉक्टर रेखा रघुवंशी की मौत के मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. इस मामले में GRMC के डीन ने एक जूनियर डॉक्टर को नोटिस दिया है. बताया जा रहा है कि जिस जूनियर डॉक्टर को नोटिस मिला है, वो कार्डियोलॉजी से DM कर रहे है. घटना वाली रात डॉक्टर रेखा के कमरे में यहीं जूनियर डॉक्टर मौजूद था. अब डीन ने नोटिस देकर पूछा है कि महिला हॉस्टल में किसकी परमिशन से पहुंचे थे. जूनियर डॉक्टर के मौजूदगी की जानकारी हॉस्टल वार्डन ने डीन को दी थी. इसके बाद अब बड़ी कार्रवाई की गई है. मालूम हो कि 29 मार्च को डॉ रेखा रघुवंशी की संदिग्ध हालत में हॉस्टल में मौत हो गई थी. हॉस्टल के कमरे में उनकी बॉडी मिली थी. रेखा के परिजनों ने इसे हत्या का मामला बताया था. फिलहाल कंपू पुलिस मामले की जांच कर रही है. हॉस्टल में मिली थी डॉक्टर की बॉडी ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजी की पढ़ाई कर रही डॉक्टर रेखा रघुवंशी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. हॉस्टल में उनकी बॉडी मिली थी. डॉ. रेखा अशोकनगर जिले की रहने वाली थी. वे गजराराजा मेडकिल कॉलेज से MBBS और MD करने के बाद DM ( Doctorate of Medicine) कर रही थी. शनिवार देर रात हॉस्टल के वार्डन ने रेखा की मौत की खबर कॉलेज प्रशासन को दी. रेखा अपने कमरे में मृत मिली थी. हॉस्टल में डॉक्टर रेखा की बॉडी मिला था. माना जा रहा है कि उन्होंने फांसी लगाकर खुदकुशी की है. घटना की सूचना मिलने पर कंपू थाना पुलिस मौके पर पहुंची. फिर डॉक्टर रेखा के शव को पोस्टमार्टम के लिए जयरोग्य अस्पताल के पीएम हाउस लाया गया था. रिश्तेदार का कहना था कि रेखा की शादी तय हो चुकी थी. अगले साल फरवरी में उसकी शादी होने वाली थी. लेकिन हॉस्टल के अंदर रेखा ने खुदकुशी कर ली, इस पर संदेह जताया है. कंपू पुलिस ने जांच के लिए डॉक्टर रेखा रघुवंशी का फोन भी बरामद किया है. फोन की चैटिंग और पीएम रिपोर्ट के आधार पर कंपू पुलिस इस मामले की जांच कर रही है.  

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