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राठी दो बार जश्न मनाने के तरीके की वजह से जुर्माना झेल चुके हैं लेकिन वह फिर भी नहीं सुधर रहे

कोलकाता लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) के स्पिनर दिग्वेश राठी आईपीएल 2025 में अपनी शानदार गेंदबाजी के साथ-साथ नोटबुक सेलिब्रेशन के कारण भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। राठी दो बार जश्न मनाने के तरीके की वजह से जुर्माना झेल चुके हैं लेकिन वह फिर भी नहीं सुधर रहे। उन्होंने मंगलवार को अपने आइडल सुनील नरेन को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के खिलाफ भी नोटबुक सेलिब्रेशन किया। हालांकि, राठी ने इस बार नए अंदाज में जश्न मनाया, जो तेजी से वायरल हो रहा। उन्होंने कोलकाता के ईडन गार्डन्स में नरेन की पारी का 30 रनों पर अंत किया। राठी वेस्टइंडीज के धाकड़ स्पिन ऑलराउंडर नरेन के बहुत बड़े फैन हैं। 239 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए केकेआर ने तेज शुरुआत की। नरेन क्विंटन डिकॉक (9 गेंदों में 15) संग पहले विकेट के लिए 37 रन जोडे़। डिकॉक को आकाशदीप ने तीसरे ओवर में आउट किया। इसके बाद, नरेन ने कप्तान अजिंक्य रहाणे (35 गेंदों में 61) के साथ मोर्चा संभाला और और पावरप्ले में धूम-घड़ाका जारी रखा। ऐसे में एलएसजी कैप्टन ऋषभ पंत ने सातवें ओवर में 25 वर्षीय राठी को गेंद थमाई। उन्होंने ओवर की दूसरी गेंद ऑफ स्टंप के बाहर डाली, जिसपर नरेन ने लॉन्ग ऑफ की दिशा में हवाई फायर किया। डेविड मिलर ने नरेन का आसान कैच लपका। उन्होंने 13 गेंदों का सामना करने के बाद चार चौके और दो छक्के लगाए। राठी ने जैसे ही नरेन को आउट किया तो वह जमीन पर बैठ गए। उन्होंने बैठने के बाद कुछ लिखने का इशारा किया। राठी के नए सेलिब्रेशन स्टाइल पर क्रिकेट फैंस के खूब रिएक्शन आ रहे हैं। एक यूजर ने हंसने वाली इमोजी के साथ सवाल किया, ”क्या दिग्वेश पर इसके लिए मैच फीस का जुर्माना लगाया जा सकता है या नहीं?” दूसरे ने कमेंट किया, ”यह न्यू इनोवेशन है। वह इस तरह से जुर्माना और डिमेरिट अंक से बच सकते हैं।” तीसरे ने कहा, ”अब नया नोटबुक सेलिब्रेशन देखने को मिला है।” अन्य ने कहा, ”राठी ने अपने आइडल को विकेट लिया है, कितनी बड़ी बात है।” बता दें कि राठी को पंजाब किंग्स और मुंबई के खिलाफ जश्न मनाने के तरीके के कारण जुर्माना झेलना पड़ा था। उन्होंने पंजाब के बल्लेबाज प्रियांश आर्य के साथ शारीरिक संपर्क किया था। राठी के खाते में फिलहाल तीन डिमेरिट अंक हैं। अगर राठी को एक और डिमेरिट अंक मिलता है तो उन पर एक मैच का प्रतिबंध लग जाएगा।

26 लाख के इनामी 22 नक्सलियों ने आज डीआईजी के समक्ष किया आत्मसमर्पण

बीजापुर शासन की पुनर्वास एवं आत्मसर्पण नीति के साथ ही चलाये जा रहे नियद नेल्ला नार योजना से प्रभावित होकर पीएलजीए बटालियन नम्बर एक सदस्य, टीएससी (तेलंगाना स्टेट कमेटी) अंतर्गत सीआरसी कंपनी नम्बर 2 का सदस्य, एसीएम, मिलिशिया डिप्टी कमांडर, मिलिशिया सदस्य, केएमएस उपाध्यक्ष, मिलिशिया प्लाटून डिप्टी कमांडर, मिलिशिया प्लाटून सदस्य, पदेड़ा, गलगम, कोत्तागुड़ा, कमलापुर, डुमरीपालनार, कोरसागुड़ा आरपीसी के अन्य सदस्य कुल 22 नक्सलियों ने आठ अप्रैल को डीआईजी सीआरपीएफ बीजापुर देवेन्द्र सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक बीजापुर जितेन्द्र कुमार यादव के समक्ष आत्मसमर्पण किया। नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पण के पीछे जिले में हो रहे विकास कार्य सबसे अहम वजह है। तेजी से बनती सड़कें, गावों तक पहुंचती विभिन्न सुविधाओं ने इन्हें प्रभावित किया है। संगठन के विचारों से स्थानीय युवाओं में संगठन से मोहभंग हो रहा है। संगठन के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेद इनके आत्मसमर्पण का बहुत बड़ा कारण है। छत्तीसगढ़ शासन की नवीन पुनर्वास नीति ने कई नक्सलियों को नई उम्मीद दी है और उन्हें संगठन के भीतर शोषण और क्रूर व्यवहार से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया है। यह नीति उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन जीने की आशा देती है। इसके अलावा सुरक्षा बलों के लगातार अंदरूनी क्षेत्रों में कैम्प स्थापित करने और क्षेत्र में चलाए जा रहे आक्रामक अभियानों ने भी नक्सलियों को संगठन छोड़ने के लिए प्रेरित किया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के नाम कमली हेमला उर्फ सोमे पद पीएलजीए बटालियन नम्बर 1 में सदस्य, इनाम 08.00 लाख रूपये, मुया माड़वी उर्फ राजेश टीएससी (तेलंगाना स्टेट कमेटी) अन्तर्गत सीआरसी कंपनी न. 2 में (पार्टी सदस्य), इनाम 8.00 लाख रूपये, सोनू ताती पश्चिम बस्तर डिवीजन प्रेस टीम कमाण्डर (एसीएम) , घोषित ईनाम 5.00 लाख रूपये,महेश पुनेम प्लाटून नबंर 13 में (पीएलजीए सदस्य) घोषित इनाम 05.00 लाख, बुधराम ताती उर्फ सुद्दू उर्फ गट्टा मिलिशिया कंपनी डिप्टी कमाण्डर, सन्नू हेमला मिलिशिया कंपनी सदस्य, सोमलू मड़कम उर्फ पटेल सदस्य/कृषि शाखा अध्यक्ष, हुंगा कुहराम उर्फ वड्डे उर्फ ओयाम सदस्य/जन सम्पर्क शाखा अध्यक्ष, देवा माड़वी उर्फ बुड़ता कृषि शाखा अध्यक्ष, हुंगा कट्टम उर्फ बैदी आरपीसी मिलिशिया प्लाटून बी सेक्शन कमाण्डर, पोज्जा बाड़से उर्फ जोगा आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्य, नंंदा मड़कम आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्य, हुंगी कुंजाम आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्या, हड़मा पोड़ियम उर्फ उरपा आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्य, विज्जो कुंजाम आरपीसी केएएमएस सदस्या,नरसी कट्टम आरपीसी केएएमएस उपाध्यक्ष, मोती सोढ़ी आरपीसी केएएमएस सदस्या, विज्जा उईका आरपीसी सीएनएम सदस्य कोसा पोड़ियम उर्फ लमडी कोसा आरपीसी केएएमएस सदस्या,विजय मड़कम ऊर्फ विज्जा सेल सदस्य/संस्कृति शाखा सदस्य, बोदी कारम उर्फ करवे RPC केएएमएस सदस्या, कोसा मड़कम सेल सदस्य/संस्कृति शाखा सदस्य।

पुणे: कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मिली मंजूरी, अदालत में सबूत देंगे राहुल गांधी, मिली मंजूरी

पुणे पुणे की एक अदालत ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी को राहत दी है। अदालत ने उनके उस आवेदन को मंजूर कर लिया है जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर दर्ज आपराधिक मानहानि के मुकदमे को समन मुकदमे में बदलने की गुजारिश की थी। इस फैसले के बाद अब केस में ऐतिहासिक साक्ष्यों को लेकर गहन बहस होगी। यह मामला पुणे में सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की विशेष अदालत में चल रहा है, जहां न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अमोल शिंदे ने सोमवार को ये आदेश जारी किया। राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार ने कोर्ट से अपील की थी कि ये मामला सिर्फ व्यक्तिगत मानहानि का नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक विवाद है, जिसपर तथ्य और साक्ष्यों के साथ गंभीरता से चर्चा जरूरी है। मालमे पर कोर्ट ने क्या कहा? अदालत ने भी माना कि यह केस प्रथम दृष्टया समन मुकदमे की श्रेणी में आता है क्योंकि इसमें आरोपी ने कई जटिल मुद्दे उठाए हैं जिनका हल ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि यदि इसे संक्षिप्त मुकदमे के तौर पर चलाया गया, तो ना सिर्फ ऐतिहासिक सच्चाई पर पर्दा पड़ेगा बल्कि आरोपी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर भी नहीं मिलेगा। क्या था मामला? इस मामले की जड़ मार्च 2023 की उस टिप्पणी में है, जो राहुल गांधी ने लंदन में एक भाषण के दौरान दी थी। उन्होंने दावा किया था कि वीर सावरकर ने एक किताब में लिखा है कि उन्होंने और उनके कुछ साथियों ने एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई की थी और उन्हें इस पर खुशी महसूस हुई थी। इस बयान को सावरकर के रिश्ते के पोते सत्यकी सावरकर ने झूठा और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए पुणे कोर्ट में मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता के वकील संग्राम कोल्हटकर ने अदालत में आरोप लगाया कि राहुल गांधी जानबूझकर मामले को लंबा खींचना चाहते हैं, लेकिन अदालत ने साफ कहा कि न्याय की खातिर सच्चाई तक पहुंचना जरूरी है और इसके लिए समन मुकदमा ही उपयुक्त रास्ता होगा।

डीके शिवकुमार के करीबी MLA का बड़ा दावा, दिसंबर से पहले कर्नाटक में सिद्धारमैया की जगह नया CM

बेंगलुरु गुजरात में जहां एक तरफ कांग्रेस के तमाम बड़े नेता राष्ट्रीय अधिवेशन में व्यस्त हैं, वहीं कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के एक करीबी विधायक ने यह दावा कर सनसनी मचा दी है कि दिसंबर से पहले राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की जगह कोई नया चेहरा ले लेगा। एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए कर्नाटक कांग्रेस के विधायक बसवराजू शिवगंगा ने मंगलवार को दावा किया कि राज्य को दिसंबर से पहले एक नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा। बसवराजू डीके शिवकुमार खेमे के एक प्रमुख नेता हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, “जब कुर्सी खाली हो तो कोई भी मुख्यमंत्री बन सकता है। मैं पहले ही एक बार कह चुका हूं कि दिसंबर से पहले राज्य का सीएम बदल जाएगा।” कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष पद के लिए सतीश जारकीहोली के नाम को लेकर चल रही अटकलों पर शिवगंगा ने कहा कि इस पद पर किसी को भी नियुक्त किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल यह पद खाली नहीं है। बता दें कि डीके शिवकुमार ही फिलहाल कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष का पदभार संभाल रहे हैं और लंबे समय से उनके इस पद से हटने की चर्चा भी होती रही है। फिलहाल केपीसीसी अध्यक्ष पद खाली नहीं उन्होंने कहा, “फिलहाल केपीसीसी अध्यक्ष पद खाली नहीं है। जब होगा, तब हम इस पर बात करेंगे। उस पद पर कोई भी आ सकता है। कोई भी प्रदेश अध्यक्ष बन सकता है, वह सतीश जारकीहोली हो सकते हैं या मैं हो सकता हूं या कोई और भी हो सकता है लेकिन फिलहाल केपीसीसी अध्यक्ष पद खाली नहीं है।” शिवगंगा की यह टिप्पणी ऐसे वक्त पर आई है, जब मुख्यमंत्री पद को लेकर सीएम सिद्धारमैया और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच पिछले कुछ महीने से खींचतान की खबरें रही हैं। दूसरी तरफ पार्टी गुजरात में एक ऐतिहासिक अधिवेशन आयोजित कर रही है और सभी राज्य इकाइयों के नेताओं के साथ मिलकर भविष्य के रोडमैप पर चर्चा कर रही है। शिवगंगा का बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि कुछ दिनों पहले ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री शिवकुमार राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर नई दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात कर चुके हैं। दो-दो पदों पर काबिज हैं शिवकुमार बड़ी बात यह है कि डीके शिवकुमार फिलहाल दो प्रमुख पदों पर काबिज हैं। एक तो वह उपमुख्यमंत् हैं और दूसरा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक् भी हैं, जो पार्टी के “एक व्यक्ति, एक पद” सिद्धांत के खिलाफ है। सिद्धारमैया खेमे के कुछ नेता उनसे प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ने के लिए दबाव बना रहे हैं। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान ने शिवकुमार को कम से कम इस साल नवंबर-दिसंबर तक पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख के रूप में बने रहने की मंजूरी दे दी है। इसी से संभवत: कयासों का दौर शुरू हुआ है कि दिसंबर तक राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है।

साबरमती आश्रम में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम बेहोश, उनको आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया

गुजरात कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम साबरमती आश्रम में बेहोश हो गए हैं। उनको आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया है। बता दें कि अहमदाबाद में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हो रही है, जिसमें भाग लेने के लिए पार्टी के बड़े नेता पहुंचे हैं। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम साबरमती आश्रम में अचानक बेहोश हो गए। उनको आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी हालत भीषण गर्मी के कारण खराब हुई। वह खुद को संभाल नहीं सके और वह गिर गए। घटना के वक्त वह साबरमती आश्रम में पार्टी नेताओं के साथ मौजूद थे। बता दें कि अहमदाबाद में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हो रही है। इस बैठक में भाग लेने के लिए कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमदाबाद पहुंचे हैं। मंगलवार को भी बैठक में पार्टी के 158 वरिष्ठ नेता मौजूद थे। हालांकि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी सहित 33 सदस्य गैर मौजूद रहे। गौरतलब है कि कांग्रेस के 140 साल के इतिहास में छठी बार गुजरात में कांग्रेस अधिवेशन हो रहा है। कार्य समिति की बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सरदार पटेल स्मारक परिसर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इसमें उन्होंने कहा कि सरदार पटेल स्मारक में विस्तारित सीडब्ल्यूसी की बैठक कराना ही महत्वपूर्ण है। ऐसा कर पार्टी ने सरदार पटेल के प्रति अपने फर्ज का निर्वहन कर के राजनीतिक संदेश देने का काम किया है। केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश ने आगे कहा कि पार्टी ने भ्रम फैलाने वालों को बता दिया है कि पटेल कांग्रेस के हैं और कांग्रेस की विरासत हैं। पार्टी उसी बुनियाद पर आगे बढ़ेगी। मौजूदा वक्त में सरदार वल्लभभाई पटेल और पंडित जवाहरलाल नेहरू के बीच संबंधों को लेकर भ्रम फैलाकर उन्हीं सरदार पटेल को अपना बनाने की कोशिश हो रही है। यह वही सरदार पटेल हैं जिन्होंने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था।

पाकिस्तान स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता प्राप्त होने के बावजूद विदेशी प्रभाव में है, अपने ही देश पर क्यों भड़के पाक नेता

इस्लामाबाद मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक नेता अल्ताफ हुसैन का 237वां संबोधन टिकटॉक पर प्रसारित हुआ। इसमें वह पाकिस्तान सरकार की कड़ी आलोचना करते नजर आए। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता प्राप्त होने के बावजूद विदेशी प्रभाव में है। अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तान की स्थिति पर गहरी चिंता जताई और इसे गुलामी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान को एक आजाद मुल्क के तौर पर दुनिया में मान्यता मिली हुई है, लेकिन हकीकत में यह आज भी विदेशी ताकतों के प्रभाव में है। साथ ही, अंदरूनी तौर पर सत्तावादी हुकूमत के नीचे दबा हुआ है। यह 230 मिलियन गुलामों का देश है।’ अल्ताफ हुसैन ने कहा कि मैं इन गुलाम लोगों की गुलामी को खत्म करने और सच्ची आजादी के लिए जद्दोजहद कर रहा हूं। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान की हालत ऐसी है कि इसे एक मजाक कहना भी गलत नहीं होगा। यह मुल्क अपने लोगों को आजादी देने में नाकाम रहा है।’ एमक्यूएम नेता ने अपने संबोधन में विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप पर जोर देते हुए कहा, ‘यह मुल्क अपनी मर्जी से नहीं चलता। बाहर की ताकतें इसे कंट्रोल करती हैं। अंदरूनी तौर पर सैन्य और सत्ताधारी तबके ने इसे अपने कब्जे में रखा है।’ जिन्ना की मौत पर किया बड़ा दावा एमक्यूएम नेता ने दावा किया कि पाकिस्तान के संस्थापक कायदे-आजम मुहम्मद अली जिन्ना को धीरे-धीरे जहर देकर मारा गया। उन्होंने कहा कि पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान का भी यही अंजाम हुआ। उन्होंने फातिमा जिन्ना के साथ हुए व्यवहार की भी निंदा की और कहा कि चुनावी धांधली, चरित्र हनन और जनरल अयूब खान की सैन्य तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उनकी हत्या हुई। वर्तमान घटनाओं पर बोलते हुए हुसैन ने विपक्षी नेताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ हो रहे व्यवहार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने महिला प्रदर्शनकारी महरंग बलोच की गिरफ्तारी और बलूचिस्तान नेशनल पार्टी के अख्तर मेंगल के नेतृत्व में लंबे मार्च पर कार्रवाई को शर्मनाक बताया।

अदालत का काम यह नहीं है कि वह कैबिनेट की ओर से लिए गए फैसलों की जांच कराएं, ममता सरकार को SC से राहत

कोलकाता अदालत का काम यह नहीं है कि वह कैबिनेट की ओर से लिए गए फैसलों की जांच कराएं। शीर्ष अदालत ने कोलकाता हाई कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए यह अहम टिप्पणी की है। अदालत ने ममता सरकार को राहत देते हुए यह फैसला दिया और कहा कि शिक्षकों एवं अन्य स्टाफ की 25 हजार भर्तियां कराने के फैसले की सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है। उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि अतिरिक्त भर्तियों के लिए पद सृजित किया जाना गलत था और कैबिनेट के फैसले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। इसी पर शीर्ष अदालत ने कहा कि इस केस में सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही बेंच ने कहा कि अदालतों को कैबिनेट के फैसलों की जांच नहीं करानी चाहिए। यह उनका काम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने ही बीते सप्ताह पश्चिम बंगाल में 25 हजार शिक्षक एवं अन्य स्टाफ की भर्ती को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि इसकी प्रक्रिया दागी थी और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। हालांकि अब बेंच ने ममता बनर्जी सरकार को थोड़ी राहत भी दी है। अदालत ने उच्च न्यायालय के उस फैसले को पलट दिया है, जिसके चलते ममता सरकार निशाने पर थी। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने कहा कि अदालत की भी अपनी सीमाएं हैं। वह ऐसे मामलों में जांच का आदेश नहीं दे सकती, जिसमें फैसला कैबिनेट की मीटिंग में हुआ हो। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर ममता बनर्जी ने कहा था कि मैं अदालत का सम्मान करती हूं, लेकिन फैसला स्वीकार्य नहीं है। यही नहीं ममता बनर्जी का कहना था कि भाजपा शासित मध्य प्रदेश में व्यापम जैसा घोटाला हुआ था, लेकिन किसी को कोई सजा नहीं हुई। हमने तो पूर्व शिक्षा मंत्री को हटाया और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। आखिर व्यापम केस में कौन जेल गया था। यही नहीं ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा में भी धांधली हुई थी। इसके अलावा उनका आरोप था कि भाजपा और सीपीएम ने मिलकर साजिश रची है ताकि बंगाल की शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया जाए। दरअसल मामला यह है कि पश्चिम बंगाल में 23 लाख अभ्यर्थियों ने शिक्षक भर्ती के लिए परीक्षा दी थी। 2016 में यह भर्ती निकली थी और 24,640 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी हुआ था।

वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हालात बेकाबू, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प

कोलकाता पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर क्षेत्र में मंगलवार को वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हालात बेकाबू हो गए और पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हो गई। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर कानून के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे, जब उन्होंने सड़क जाम करने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिससे टकराव शुरू हो गया। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की, उन्हें आग के हवाले कर दिया और पथराव भी किया। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। इस झड़प में कई लोग घायल हो गए, जिनमें कुछ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने वक्फ संशोधन कानून को वापस लेने की मांग करते हुए जंगीपुर पीडब्ल्यूडी मैदान से विरोध मार्च निकाला था। जब यह भीड़ उमरपुर की ओर बढ़ी, तभी पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में भीड़ उग्र हो गई और देखते ही देखते माहौल हिंसक हो गया। हिंसा यहीं नहीं रुकी। प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ पुलिस पर हमला किया, बल्कि बनियापुर और उमरपुर इलाकों में कई घरों और दुकानों में भी तोड़फोड़ की। हिंसा इतनी ज्यादा बढ़ गई कि पुलिस को तकरीबन आधे घंटे तक इलाके से पीछे हटना पड़ा। हालात पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है और इलाके में तनाव बरकरार है।  

दूरसंचार सेवाओं को सुदृढ़, सुगम और विश्वसनीय बनाने में प्रतिबद्ध होकर अधिकारी कार्य करे: राज्यपाल

भारतीय दूरसंचार सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राज्यपाल से मुलाकात की   जयपुर  राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे से मंगलवार को राजभवन में भारतीय दूरसंचार सेवा के वर्ष 2023 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने मुलाकात की। ये प्रशिक्षु अधिकारी स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत तीन दिवसीय दौरे पर जयपुर आए हुए हैं। राज्यपाल श्री बागड़े ने दूरसंचार सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों से संवाद करते हुए उन्हें “राष्ट्र प्रथम” की सोच को ध्यान में रखते हुए भारतीय दूरसंचार सेवाओं को सुदृढ़ करने में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दूरसंचार सेवाओं में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। ‘विकसित भारत’ के संकल्प के अंतर्गत भारतीय दूरसंचार सेवाओं को और अधिक सुगम, सुलभ और प्रभावी बनाने के साथ विश्व भर में अग्रणी करने में अधिकारी संकल्पबद्ध होकर कार्य करें। राज्यपाल ने भारतीय दूरसंचार सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को राष्ट्र के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता रखते हुए संचार सेवाओं के अंतर्गत साइबर सुरक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और उपभोक्ताओं को संचार सेवाओं के बगैर बाधा समुचित रूप में उपलब्ध कराने के लिए भी सुनियोजित सोच के साथ काम करने पर जोर दिया। उन्होंने दूरसंचार सेवाओं के अंतर्गत यूनेस्को स्तर पर भारत को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलने पर प्रसन्नता भी जताई तथा कहा कि भारत की तकनीकी श्रेष्ठता के लिए सभी मिलकर कार्य करें। राज्यपाल के सचिव डॉ. पृथ्वी ने कहा कि दूरसंचार सेवाओं को श्रेष्ठ करने के साथ इसकी विश्वसनीयता के लिए भी अधिकारी प्रतिबद्ध होकर कार्य करें। उन्होंने राजभवन में सभी का अभिनंदन किया। इससे पहले भारतीय दूरसंचार सेवा के उप महानिदेशक श्री आनंद कटोच ने प्रशिक्षु अधिकारियों के प्रशिक्षण के बारे में जानकारी दी। निदेशक श्री द्वारका करोल और प्रशिक्षण अधिकारी श्री श्वेताभ कुमार तथा श्री भूपेन्द्र धीमान ने आभार जताया।

वक्फ संशोधित कानून आज से देश में प्रभावी, अगले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

नई दिल्ली देश में आज से वक्फ संशोधन अधिनियम लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने इसको लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। जिसमें बताया कि वक्फ संशोधित कानून 8 अप्रैल से देश में प्रभावी कर दिया गया है। वक्फ संधोशन विधेयक को पिछले हफ्ते संसद के दोनों सदनों और राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई थी। जिसके बाद आज से यह नया कानून प्रभावी होगा। सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन यह अधिसूचना भारत के राजपत्र (The Gazette of India) में प्रकाशित की गई है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार ने संविधान प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए अधिनियम की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत 8 अप्रैल 2025 को वह तारीख घोषित की है जिस दिन से वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के सभी प्रावधान प्रभावी हो जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में मिली कानून को चुनौती राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद वक्फ संशोधन विधेयक कानून बन चुका है। हालांकि, संसद के दोनों सदनों से पारित होते ही इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई है। अभी तक कई याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं जिनमें इसे संविधान के खिलाफ और धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताते चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में क्या दी है दलील? कानून के खिलाफ कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में सभी को धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक मामलों के प्रबंधन की आजादी मिली हुई है, जबकि इस नये कानून में मुसलमानों की इस आजादी में हस्तक्षेप होता है और सरकारी दखलंदाजी बढ़ती है। याचिकाओं में वक्फ बोर्ड के सदस्यों में गैर मुस्लिमों को शामिल करने का भी विरोध किया गया है। सरकार ने कोर्ट में दाखिल किया कैविएट वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 15 अप्रैल को सुनवाई संभावित है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को शीर्ष अदालत में कैविएट दाखिल की है, ताकि बिना उसकी दलीलें सुने कोई आदेश पारित न किया जा सके। 5 अप्रैल को राष्ट्रपति ने दी थी मंजूरी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, संसद से पारित वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 मंगलवार यानी 8 अप्रैल से प्रभाव में आ गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को विधेयक को अपनी मंजूरी दी थी। 10 से अधिक याचिकाएं दायर, कई बड़े नेता भी याचिकाकर्ता नए कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 10 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाकर्ताओं में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB), जमीयत उलमा-ए-हिंद, DMK, AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी व मोहम्मद जावेद, आप विधायक अमानतुल्लाह खान, RJD सांसद मनोज झा और फैज़ अहमद जैसे नाम शामिल हैं। अधिनियम को बताया गया अल्पसंख्यक अधिकारों पर हमला AIMPLB की याचिका में कहा गया है कि यह अधिनियम न सिर्फ मुस्लिम अल्पसंख्यकों को उनके धार्मिक ट्रस्ट व संपत्तियों के प्रशासन से वंचित करता है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों का भी उल्लंघन करता है। DMK और अन्य दलों ने जताई गहरी आपत्ति DMK ने अदालत में दी अपनी याचिका में कहा है कि तमिलनाडु के 50 लाख और देशभर के 20 करोड़ मुसलमानों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। ओवैसी की याचिका में कहा गया है कि अन्य धर्मों के धार्मिक ट्रस्टों को जो संरक्षण मिला हुआ है, वह वक्फ ट्रस्टों से छीना जा रहा है—जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के खिलाफ है। जमीयत उलमा-ए-हिंद: यह संविधान पर सीधा हमला है जमीयत ने इसे “मुसलमानों की धार्मिक आज़ादी पर सीधी चोट” बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से अधिनियम को रद्द करने की मांग की है। क्या कहते हैं कानून विशेषज्ञ? कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक समुदायों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है, इसलिए यह सुनवाई अहम साबित हो सकती है।

तीन बच्चों की मां शबनम पड़ोस के ही रहने वाले कक्षा 12 के छात्र शिवा से दिल लगा बैठी, मंदिर में रचाई शादी

अमरोहा उत्तर प्रदेश के अमरोहा में एक शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां पर तीन बच्चों की मां 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले एक किशोर को अपना दिल दे बैठी। वो किशोर के प्यार में इतना डूबी कि अपने बच्चों और पति को भी भूल गई। उसे अपने प्यार के आगे बच्चे और पति भी दिखाई नहीं दिया। उसने अपने पति और बच्चों को छोड़कर उसके साथ रहने का फैसला कर लिया। जानिए पूरा मामला यह मामला अमरोहा जनपद के सैद नगली थाना क्षेत्र से सामने आया है। यहां की रहने वाली तीन बच्चों की मां शबनम पड़ोस के ही रहने वाले कक्षा 12 के छात्र शिवा से दिल लगा बैठी। महिला और शिवा का प्यार हर दिन बढ़ता गया। इसकी जानकारी होने पर परिवार में भी विवाद हुआ। पंचायत बैठी। पंचों की सहमति से पंचायत ने फैसला सुनाया कि महिला मर्जी से कहीं भी रह सकती है। शबनम अपने पति से तलाक ले चुकी है। उसने किशोर के साथ रहने का फैसला लिया है और मंदिर में जाकर उसके साथ शादी रचा ली। इतना ही नहीं अब उसने अपना नाम शबनम से बदलकर शिवानी रख लिया है। एक साथ जीने मरने की खाई कसमें बताया जा रहा है कि महिला की पहले से दो शादियां हो चुकी हैं। उसके दो शौहर हैं। दो-दो मुस्लिम पति से भी उसका मन नहीं भरा और उसे अपने मोहल्ले में रहने वाले नाबालिग लड़के से प्यार हो गया। दोनों शादी कर एक साथ रह रहे हैं। दोनों का कहना है कि वो एक दूसरे के साथ ही रहेंगे और एक दूसरे के साथ खुश है। उसने बच्चे भी पति के पास छोड़ दिए है। उनका कहना है कि कोई भी उनकी जिंदगी में दखलंदाजी नहीं करे, क्योंकि, वो बालिग हैं। साथ जीने-मरने की कसम खाई है।

विश्व हिंदुत्व की ओर देख रहा है- स्वामी सूर्यदेव

बड़वानी स्वामी अमृतानंदपूरी सेवा न्यास द्वारा संचालित दो दिवसीय डॉ. हेडगेवार स्मृति व्याख्यानमाला के प्रथम दिवस पर ‘‘ वर्तमान संदर्भ में हिंदुत्व ‘‘  विषय पर ओजस्वी, प्रखर, मनस्वी वक्ता संत श्री स्वामी सूर्य देव द्वारा व्याख्यान दिया गया। स्वामी ने हिंदुत्व की स्वीकार्यता को संपूर्ण विश्व की दृष्टि से रेखांकित करते हुए कहा कि आज भौतिकता के युग में अगर अर्थ की प्रधानता है तो दुनिया जहां युद्ध, बिमारी एवं नशे जैसे व्यापार से धन अर्जित करती है, वहीं भारत की अर्थव्यवस्था मंदिर, उत्सव, त्यौहार आधारित है जिसमें फूल बेचने से लेकर निर्माण कार्यों तक, परिवहन साधनों से लेकर सेवा क्षेत्र तक सभी को अनगिनत रोजगार मिलता है। भारत में मनुष्य के आंतरिक गुणों को प्राथमिकता अर्थात हिंदुत्व में मनुष्य बनो पर जोड़र दिया है। आज डॉक्टर,इंजीनियर, प्रोफेशनल तमाम प्रकार की वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी के युग में भी यदि कोई मनुष्य न बन पाया तो ये सब व्यर्थ है। हिंदुत्व प्रत्येक मनुष्य में ईश्वर देखता है। हिंदुत्व की दृष्टि मानव के संपूर्ण कल्याण में निहित है। हमारे संतों, महात्माओं, महापुरुषों, ऋषि मुनियों ने तप साधना करके जो व्यवस्थाएं बनाई है।  इसकी आवश्यकता आज संपूर्ण विश्व को है। अमेरिका जैसे देश की बडी कंपनियों को भारतीय चला रहे है। महाकुंभ जैसे अदभूत अभूतपूर्व आयोजन संपूर्ण विश्व के लिए शोध का विषय है। भारत भूमि पराक्रम और पूण्य की भूमि है। यहां वीरों ने भी जन्म लिया है। हमारे पास अनेक धर्म ग्रंथ है, अनेक मार्ग है, जिसका केंद्र मानव कल्याण है। हमारे यहां अहिंसा परमो धर्म कहा गया है किंतु धर्म की रक्षा के लिए कायर नहीं बनाया। हमारे यहां 16 संस्कार की व्यवस्था है जो जन्म के पूर्व से लेकर मृत्यु तक विभिन्न विचारों से मनुष्य को पल्लवित करती है। आज संपूर्ण विश्व भारत की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है आप तैयार रहे अपनी जडों को मजबूती से धारण कर रखे। आज की व्याख्यान माला की अध्यक्षता उन्नत कृषक श्रीमती ललिता जी मुकाती बोरलाय निवासी ने की। उन्होंने अध्यक्षीय उद्घबोधन में जैविक खेती को अपने और मानवता को बचाने के लिए अपनाने का आह्वान किया। व्याख्यान माला समिति के अध्यक्ष डॉ चक्रेश पहाड़िया ने बताया कि पिछले 13 वर्षों से यह व्याख्यानमाला जारी है यह 14 वां वर्ष है। व्याख्यानमाला में मातृशक्ति की भी बड़ी भूमिका रही। साखी रिसोर्ट में आयोजित इस व्याख्यान माला में नगर के अनेक गणमान्य प्रतिष्ठित व्यवसायी डॉक्टर,इंजीनियर, वकील, शिक्षक, प्रोफेसर सहित अनेक प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ साक्षी दूबे ने किया। अतिथियों का परिचय श्रीमती अनीता चोयल ने किया।कार्यक्रम में आभार श्रीमती सुनीता जी मोरे ने व्यक्त किया। अंत में वंदे मातरम गीत के साथ व्याख्यान का समापन हुआ।

धड़कनें बढ़ाने वाले मैच में केकेआर को मिली हार, लखनऊ ने चार रनों से मैच किया अपने नाम

कोलकाता कोलकाता नाइट राइडर्स वर्सेस लखनऊ सुपर जायंट्स आईपीएल 2025 का 21वां मैच कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेला जा रहा। एलएसजी ने केकेआर के सामने 239 रनों का विशाल टारगेट रखा है। लखनऊ ने निर्धारित 20 ओवर में तीन विकेट पर 238 रन बनाए। यह एलएसजी का आईपीएल में दूसरा सबसे बड़ा स्कोर है। टॉस गंवाकर बैटिंग करने उतरी लखनऊ टीम ने दमदार शुरुआत की। मिचेल मार्श (48 गेंदों में 81) और एडेन मार्करम (28 गेंदों में 47) ने पहले विकेट के लिए 99 रन जोड़े। मार्करम को 11वें ओवर में हर्षित राणा ने बोल्ड किया। इसके बाद, मार्श ने निकोलस पूरन (36 गेंदों में नाबाद 87) के संग दूसरे विकेट के लिए 71 रनों की पार्टनरशिप की। मार्श को 15वें ओवर में आंद्रे रसेल ने पवेलियन भेजा। उन्होंने 6 चौके और पांच छक्के जड़े। पूरन ने अब्दुल समद (6) के साथ तीसरे विकेट के लिए 51 रनों की साझेदारी की। हर्षित ने 19वें ओवर में समद को बोल्ड किया। पूरन ने सात चौके और 8 छक्के मारे। डेविड मिलर 4 रन बनाकर नाबाद रहे। लखनऊ ने चार रनों से जीता मैच लखनऊ ने चार रनों से मैच अपने नाम किया है। केकेआर को आखिरी ओवर में 24 रनों की जरूरत थी लेकिन बिश्नोई ने 19 रन खर्च किए। रिंकू ने तीन चौके और एक छक्का लगाया। रिंकू 38 और हर्षित 10 रन बनाकर नाबाद रहे।

सरकार की पालना योजना महिलाओं के लिए बनी सहारा, अब बेफिक्र होकर नौकरी पर जा सकती हैं माताएं

नई दिल्ली पालना योजना का उद्देश्य न केवल बच्चों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना है बल्कि यह योजना माताओं को भी अपनी नौकरी पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर प्रदान करती है खासकर उन कामकाजी महिलाओं को जिनके लिए बच्चों की देखभाल एक बड़ी चुनौती होती है। यह योजना महिलाओं के लिए एक सहारा बनकर सामने आई है जो अपने बच्चों की सही देखभाल और पोषण के साथ-साथ उनके लिए एक सुरक्षित वातावरण भी सुनिश्चित करती है। पालना योजना क्या है? पालना योजना मुख्य रूप से 6 महीने से 6 साल तक के बच्चों के लिए है। इस योजना के तहत बच्चों को सुरक्षित और संरक्षित वातावरण प्रदान किया जाता है जिसमें उनकी देखभाल, पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जाती हैं। खासतौर पर एकल परिवारों के लिए यह योजना काफी सहायक साबित हो रही है क्योंकि ऐसे परिवारों में बच्चों की देखभाल के लिए कोई अतिरिक्त मदद नहीं होती है और इस कारण महिलाओं को अपनी नौकरी छोड़ने की नौबत आती है। पालना योजना का उद्देश्य पालना योजना का मुख्य उद्देश्य 6 महीने से 6 साल तक के बच्चों के लिए एक सुरक्षित, संरक्षित और पोषक वातावरण प्रदान करना है। इसके तहत बच्चों को क्रेच सेवाएं, पोषण सहायता, स्वास्थ्य जांच, संज्ञानात्मक विकास और टीकाकरण की सेवाएं मिलती हैं। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य उन माताओं की मदद करना है जिनके पास बच्चों के लिए उपयुक्त देखभाल की व्यवस्था नहीं होती। इससे वे बिना किसी चिंता के अपनी नौकरी पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं। क्या सुविधाएं मिलती हैं? पालना योजना के तहत बच्चों के लिए क्रेच सुविधा प्रदान की जाती है जहां उन्हें एक सुरक्षित और संरक्षित वातावरण मिलता है। साथ ही 3 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए विभिन्न शैक्षिक गतिविधियाँ और खेलों का आयोजन किया जाता है ताकि उनका मानसिक और शारीरिक विकास हो सके। वहीं 3 से 6 साल के बच्चों के लिए प्री-स्कूल शिक्षा, पोषण, विकास निगरानी, स्वास्थ्य जांच और नियमित टीकाकरण की सुविधाएं दी जाती हैं। पालना योजना का महत्व पालना योजना केवल बच्चों की देखभाल के लिए ही नहीं बल्कि महिलाओं के लिए भी एक बड़ा सहारा बन गई है। कामकाजी महिलाएं अपनी नौकरी के साथ-साथ अपने बच्चों की देखभाल को लेकर चिंतित रहती हैं और यह योजना उन्हें इस चिंता से मुक्ति देती है। इस योजना के जरिए सरकार कामकाजी महिलाओं को बच्चों की देखभाल में मदद देकर समाज में समावेशिता और समानता की नींव रखने की कोशिश कर रही है। इसके अंतर्गत महिलाओं को डे-केयर सेवाएं प्रदान की जाती हैं जो उन्हें अपने करियर और बच्चों की देखभाल के बीच संतुलन बनाने में मदद करती हैं। वहीं कहा जा सकता है कि पालना योजना न केवल बच्चों के लिए बल्कि महिलाओं और समग्र समाज के लिए एक बड़ा कदम साबित हो रही है।  

बांग्लादेश में गाजा समर्थकों ने ढाका में मचाया तांडव, पुलिस ने हिंसा के मामलों में 49 लोगों को गिरफ्तार किया

नई दिल्ली बांग्लादेश की राजधानी ढाका समेत विभिन्न शहरों में  गाजा के समर्थन में विरोध प्रदर्शन हुए थे। इस दौरान कई जगहों पर हिंसा हुई थी। पुलिस ने हिंसा के मामलों में 49 लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना के संबंध में अब तक 49 लोग गिरफ्तार अंतरिम सरकार के प्रेस विभाग ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ‘इन घटनाओं के संबंध में अब तक 49 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और दो मामले दर्ज किए गए हैं। आगे की जांच चल रही है और इन निंदनीय कृत्यों के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाया जाएगा।’ बांग्लादेश के विभिन्न शहरों में सोमवार को ये प्रदर्शन गाजा में फलस्तीनियों पर हो रहे क्रूर हमलों का विरोध करने के लिए एक वैश्विक अभियान के तहत किए गए थे। छात्रों ने कक्षाओं और परीक्षाओं का बहिष्कार कर प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। प्रदर्शनों के आयोजकों ने लोगों से इजरायली सामान का बहिष्कार करने का आह्वान किया था।

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