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पति के दीर्घ जीवन की कामना के लिए सती अनुसूया का व्रत करती है महिलाएं

बैसाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (17 अप्रैल) को अनुसूया जयंती है। अनुसूया प्रजापति कर्दम और देवहूति की नौ कन्याओं में से एक थीं। यह ऋषि अत्रि की पत्नी थीं। ऐसा कहा जाता है कि उनकी पति-भक्ति का तेज इतना अधिक था कि आकाश मार्ग से जाते देवताओं को भी उनके तेज का अनुभव होता था। अपने इसी तेज के कारण उन्हें सती अनुसूया कहा जाता है। द्रौपदी, सुलोचना, सावित्री, मंदोदरी सहित उनकी गणना पांच सतियों में सबसे पहले हाेती है। उन्होंने घोर तपस्या करके मंदाकिनी नदी को पृथ्वी पर उतारा था। एक पौराणिक कथा के अनुसार देवर्षि नारद पृथ्वी लोक से घूमते हुए देवी लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती के पास पहुंचे। वहां उन्होंने तीनों से ऋषि अत्रि की पत्नी अनुसूया के पतिव्रत धर्म की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके सतीत्व के तेज की बराबरी तीनों लोकों में काेई नहीं कर सकता। यह सुनकर तीनों देवियों ने अनुसूया के पातिव्रत्य धर्म की परीक्षा लेने के लिए अपने-अपने पतियों ब्रह्मा, विष्णु, महेश से आग्रह किया। अपनी पत्नियों का आग्रह मानकर वे तीनों ऋषि पत्नी अनुसूया के सतीत्व की परीक्षा लेने के लिए पृथ्वी लोक में उनके आश्रम में पहुंच गए। उन्होंने उनकी कुटिया के बाहर खड़े होकर भिक्षा के लिए पुकार लगाई। उनकी पुकार सुनकर अनुसूया बाहर आईं। उन्होंने अतिथियों का स्वागत-सत्कार किया और उनकी इच्छा पूछी। उन्होंने कहा कि वे भूखे हैं और भोजन करना चाहते हैं। लेकिन हमारा यह नियम है कि हमें भिक्षा देने वाला निर्वस्त्र होकर हमें भोजन करवाता है, तभी हम भोजन करते हैं। यह सुनकर अनुसूया ने तीनों से कहा कि जैसी आपकी इच्छा। अनुसूया ने अपने हाथ में जल लिया और अपने पति को स्मरण करते हुए मन-ही-मन कहा कि अगर मेरा पतिव्रत धर्म अखंड है तो ये तीनों अतिथि इसी क्षण शिशु बन जाएं। यह कहकर उन्होंने तीनों अतिथियों पर जल छिड़क दिया। वे तीनों ही तत्काल नवजात शिशु बन गए। तब अनुसूया ने मातृ भाव से तीनों को भोजन कराया। भोजन के उपरांत पास ही पालने में तीनों शिशुओं को सुला दिया। इधर काफी समय बीत जाने पर भी तीनों देव नहीं लौटे तो तीनों देवियों को चिंता हुई। वे नारदजी को साथ लेकर अनुसूया के आश्रम पहुंची। वहां देखा कि तीनों देव तो शिशु रूप में पालने में हैं। उन्होंने अनुसूया से क्षमा मांगते हुए अपने पतियों को उनके मूल स्वरूप में लौटा देने की प्रार्थना की। अनुसूया ने उन शिशुओं पर जल छिड़क कर पहले जैसा कर दिया। त्रिदेव ने उन्हें वरदान देते हुए कहा कि वे तीनों ‘दत्तात्रेय’ के रूप में उनके पुत्र होंगे। इस दिन महिलाएं अपने पति के दीर्घ जीवन की कामना से सती अनुसूया का व्रत और पूजन करती हैं।

आरपीएफ ढूंढगा सफर के दौरान चोरी या गुम हुआ फोन

नई दिल्ली यदि आप ट्रेन में यात्रा कर रहे हैं और आपका मोबाइल फोन खो गया है या चोरी हो गया है, तो अब चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर आपके खोए हुए मोबाइल फोन को खोजने के लिए उपाय किए हैं. RPF ने दूरसंचार विभाग के सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (CEIR) पोर्टल के साथ एक सफल सहयोग स्थापित किया है. इस संबंध में डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा की है. एक्स पर बताया गया है कि यदि रेलवे स्टेशन या ट्रेन में फोन चोरी या गुम हो जाता है, तो इसे आरपीएफ और संचार एप की सहायता से ट्रेस किया जा सकता है. इसके अलावा, यदि फोन नहीं मिलता है, तो इस एप के माध्यम से फोन को ब्लॉक भी किया जा सकता है. इस एप का नाम संचार साथी है, और यह पहल नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) में एक पायलट प्रोग्राम की सफलता के बाद शुरू की गई है. अब भारतीय रेल द्वारा इस पहल को पूरे देश में लागू करने से करोड़ों रेल यात्रियों को लाभ होगा. आम आदमी इस तरह से फोन कर सकेंगे ब्लॉक संचार साथी एक सरकारी एप्लिकेशन है, जिसे केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग ने जनवरी 2023 में पेश किया. इस एप के माध्यम से उपयोगकर्ता मोबाइल से साइबर धोखाधड़ी या फर्जी कॉल्स की शिकायत कर सकते हैं. इसके अलावा, यह एप चोरी या खोए हुए फोन का पता लगाने और उसे ब्लॉक करने की सुविधा भी प्रदान करता है. इससे पहले, सरकार ने 2023 में संचार साथी पोर्टल की शुरुआत की थी, जिसके जरिए लोग धोखाधड़ी कॉल्स और संदेशों की शिकायत कर सकते हैं. उपयोगकर्ता खोए हुए मोबाइल में लगे सिम को भी ब्लॉक कर सकते हैं और अपने आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबर की स्थिति की जांच कर सकते हैं. आप संचार साथी एप को वेबसाइट पर उपलब्ध क्यूआर कोड को स्कैन करके डाउनलोड कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त, आप सीधे प्ले स्टोर या एप्पल स्टोर पर जाकर भी इसे प्राप्त कर सकते हैं. एप डाउनलोड करने के बाद, आपको अपना मोबाइल नंबर दर्ज करके लॉगिन करना होगा, जिसके बाद आप इसके विभिन्न फीचर्स का उपयोग कर सकेंगे. यदि ट्रेन में यात्रा के दौरान आपका फोन चोरी हो जाता है या खो जाता है, तो आप किसी अन्य फोन पर संचार साथी एप डाउनलोड करके अपने फोन को खोज सकते हैं और उसे ब्लॉक भी कर सकते हैं. रेलवे स्टेशन या ट्रेन में फोन चोरी होने की स्थिति में, आपको आरपीएफ को सूचित करना होगा, जिसके बाद आरपीएफ संचार साथी एप की सहायता से फोन की जानकारी प्राप्त करेगी. शिकायत के लिए यात्रियों के पास रहेंगे ये भी विकल्प यात्री खोए हुए मोबाइल फोन की रिपोर्ट रेल मदद एप या 139 नंबर पर कर सकते हैं. यदि वे एफआईआर दर्ज नहीं कराना चाहते, तो सीईआईआर पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करने का विकल्प भी उपलब्ध है. सीईआईआर पोर्टल पर पंजीकरण करने पर आरपीएफ की जोनल साइबर सेल शिकायत को दर्ज करेगी और आवश्यक जानकारी भरने के बाद डिवाइस को ब्लॉक कर देगी. यदि खोए हुए फोन के साथ सिम कार्ड भी मिल जाता है, तो उपयोगकर्ता को निकटतम आरपीएफ पोस्ट पर लौटाने की सलाह दी जाएगी. इसके बाद, असली उपयोगकर्ता आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करके अपना फोन वापस प्राप्त कर सकता है. फोन मिलने के बाद, शिकायतकर्ता सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से फोन को अनब्लॉक करने का अनुरोध कर सकता है, जिसमें RPF से सहायता भी प्राप्त होगी.

एनसीटीई ने दे मंजूरी, एमएड ही नहीं बल्कि एमएई की पढ़ाई करने वाले भी बन सकेंगे शिक्षक

मुजफ्फरपुर मास्टर ऑफ आर्ट्स इन एजुकेशन (एमएई) की पढ़ाई करनेवाले भी अब बीएड कॉलेजों में शिक्षक बन सकेंगे। एनसीटीई (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) ने इसकी मंजूरी दे दी है। एमएई करनेवाले अभ्यर्थी बीएड कॉलेजों में फाउंडेशन कोर्स में आवेदन कर सकेंगे। एमडीडीएम कॉलेज में बीएड की पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में जेएसपीएम विवि पुणे में प्राध्यापक डॉ. मौसमी चौधरी ने बताया कि एनसीटीई के इस नये बदलाव से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन एजुकेशन करनेवाले छात्रों को काफी फायदा होगा। अबतक बीएड कॉलेजों में सिर्फ एमएड करने वाले छात्र ही शिक्षक पद के लिए आवेदन कर सकते थे, लेकिन अब एमएई वाले भी ओवदन कर सकेंगे। एनसीटीई ने पिछले दिनों बीएड कॉलेजों में बदलाव पर देशभर से फीडबैक मांगे थे। फीडबैक में विश्वविद्यालयों और बीएड कॉलेजों ने सुझाव दिया कि फाउंडेशन कोर्स में एमएड के साथ एमएई वाले भी आवेदन कर सकें, ऐसा प्रावधान बनाया जाए। एनसीटीई ने अपनी सालाना बैठक में इसपर मंजूरी दे दी। 55 प्रतिशत नंबर की है अनिवार्यता: मास्टर ऑफ आर्ट्स इन एजुकेशन के छात्रों को बीएड कॉलेज में शिक्षक बनने के लिए 55 प्रतिशत नंबर की अनिवार्यता रहेगी। इसके अलावा नेट या पीएचडी अभ्यर्थियों को रहनी चाहिए। डॉ. मौसमी चौधरी ने बताया कि बीएड कॉलेजों में एमएई वाले अभ्यर्थियों की बहाली से शिक्षकों की संख्या में वृद्धि होगी। एनसीटीई ने नई शिक्षा नीति के तहत यह परिवर्तन किया है। एमएड कॉलेजों में 50 छात्र तक ही ले सकेंगे दाखिला, नैक मूल्यांकन भी अनिवार्य एनसीटीई के अनुसार एमएड कॉलेजों में 50 छात्र तक ही दाखिला ले सकेंगे। एमएड कॉलेज को नैक भी कराना होगा। एमएड में विवि और कॉलेज स्थानीय स्तर के अनुसार 30 प्रतिशत तक सिलेबस में बदलाव कर सकेंगे। बीआरएबीयू में एमएड के तीन कॉलेज हैं। इन तीनों कॉलेजों में 150 सीटों पर छात्रों का दाखिला होता है। एमएड कॉलेज में एक प्रोफेसर, दो एसो़ प्रोफेसर और चार सहायक प्राध्यापक को रखना अनिवार्य है। बीएड की तर्ज पर एमएड में भी सामान्य परास्नातक के कोर्स का प्रस्ताव एनसीटीई ने बीएड के साथ एमएड कॉलेजों को भी मल्टी डिसिस्प्लनरी कोर्स के तहत चलाने का निर्देश दिया है। नई शिक्षा नीति के तहत अब बीएड कॉलेजों में बीएड के साथ साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स के भी कोर्स चलाने होंगे। बीएड की तर्ज पर एमएड में भी सामान्य परास्नातक के कोर्स चलाने के लिए एनसीटीई ने प्रस्ताव तैयार किया है। जल्द ही इसे गजट के तौर पर जारी किया जायेगा।

आज करोड़ों लाड़ली बहनों को मिलेगा तोहफा, CM जारी करेंगे 23वीं किस्त, फिर खाते में आएंगे 1250 रुपए, जानें अपडेट

भोपाल मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की करोड़ों बहनों के लिए अच्छी खबर है। आज बुधवार 16 अप्रैल को सीएम मोहन यादव मण्डला जिले के ग्राम टिकरवारा से 23वीं किस्त के 1250 रुपए बहनों के खाते में जारी करेंगे। इसके अलावा गैसे रिफिलिंग की भी राशि जारी की जाएगी। सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि खुशहाल बहनें, समृद्ध मध्य प्रदेश। नारी सशक्तीकरण का पर्याय बनी लाड़ली बहना योजना की 23वीं किस्त ग्राम टिकरवारा, जिला मण्डला से बहनों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। प्रदेश की सभी लाड़ली बहनों को अग्रिम शुभकामनाएं। इन योजनाओं के पैसे भी मिलेंगे     खुशहाल बहनें, समृद्ध मध्य प्रदेश…     नारी सशक्तीकरण का पर्याय बनी लाड़ली बहना योजना की 23वीं किस्त ग्राम टिकरवारा, जिला मण्डला से बहनों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। प्रदेश की सभी लाड़ली बहनों को अग्रिम शुभकामनाएं। लाड़ली बहना (Ladli Behna Yojana Big Update) को प्रतिमाह मिलने वाली 1250 रुपए की किस्त 16 अप्रैल को खातों में आएगी। सीएम डॉ. मोहन यादव मंडला के टिकरवारा से राशि सिंगल क्लिक से जारी करेंगे। हर माह राशि 10 तारीख को आती है। इस बार विलंब को कांग्रेस ने मुद्दा बनाया। अब तक योजना में 33 हजार करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। सीएम सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 56 लाख लोगों को 337 करोड़ व 25 लाख बहनों को गैस सिलेंडर के 57 करोड़ भी देंगे। कई लाड़ली बहना योजना से हुई बाहर एमपी विधानसभा में महिला बाल विकास मंत्री के मुताबिक, प्रदेश की लाड़ली बहना योजना से अब तक 15,748 महिलाओं के नाम उनकी मृत्यु के बाद हटाए हैं। 60 वर्ष की उम्र पूरी करने वाली 3 लाख 19 हजार 991 महिलाओं के नाम स्वत: पोर्टल से हट गए हैं। फिलहाल राशि बढ़ाने का भी कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। 3 लाख 19 हजार 991 महिलाओं(Ladli Behna Yojana Big Update) को स्कीम से बाहर कर दिया गया, क्योंकि उनकी उम्र 60 साल से ऊपर हो गई थी। इस कारण जनवरी में 60 साल की उम्र से ऊपर होने पर कई महिलाओं के नाम योजना से काट दिए गए थे। इस वजह से इन लाड़ली बहनों के खाते में योजना के पैसे ट्रांसफर नहीं हुए। अगर आपके दस्तावेज में भी आपकी उम्र 60 साल से अधिक हो गई है तो, आप भी अपात्र महिलाओं की लिस्ट में शामिल हो गई हैं और आपको भी अप्रैल में योजना की 23वीं किस्त का लाभ नहीं मिलेगा। इस बार किस्त में 6 दिन की देरी आमतौर पर हर माह की 10 तारीख को योजना की किस्त जारी होती है।कभी कभी त्यौहारों और विशेष अवसर को देखते हुए तय तारीख से पहले भी राशि भेज दी जाती है, लेकिन इस बार तय तारीख निकलने के बाद भी पैसे नहीं मिले।हालांकि पहले खबर आई थी कि 11 अप्रैल पीएम मोदी के अशोकनगर दौरे या 12 अप्रैल को हनुमान जयंती या फिर 13 अप्रैल को गृहमंत्री अमित शाह के एमपी आने पर राज्य की मोहन यादव सरकार 23वीं किस्त जारी करेगी, लेकिन जारी नहीं हुई और अब 16 अप्रैल को किस्त जारी होगी। हर महीने मिलते है 1250 रुपए     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से मार्च 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 22 किश्तों का अंतरण किया गया है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। लाड़ली बहना योजना : आयु/पात्रता/नियम     इस योजना में 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी समस्त विवाहित महिलाएं (विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता समेत) वर्ष 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है।     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     यदि कोई महिला 60 वर्ष से कम उम्र की है और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पहले से ही प्रति माह 1250 रुपये से कम प्राप्त कर रही है, तो उस महिला को भी 1250 रुपये तक की राशि दी जाएगी।     विवाहित महिलाओं में विधवा, और तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं।जिस साल आवेदन किया जाए, उस साल 1 जनवरी को आवेदक की उम्र 21 वर्ष पूरी हो चुकी होनी चाहिए और अधिकतम उम्र 60 वर्ष से कम होनी चाहिए।     जिनके परिवार का कोई सदस्य वर्तमान अथवा भूतपूर्व सांसद, विधायक हो या फिर किसी सरकारी पद का लाभ ले रहा है, उस परिवार की महिलाएं भी लाड़ली बहना योजना के लिए पात्र नहीं होंगी।     यदि महिला के पति के पास सरकारी योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता नहीं है, तो वह भी इस योजना का लाभ नहीं उठा पाएगी। पैसे मिलेंगे या नहीं?, चेक करें लिस्ट में अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी। ये … 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वेस्टर्न बायपास बनने से साडा को मिलेगा लाभ, व्यापारिक गतिविधियां और बसाहट बढ़ेगी

ग्वालियर आगरा-इंदौर रूट पर रायरू निरावली से काउंटर मैग्नेट सिटी होते हुए शिवपुरी हाइवे के पनिहार तक 28.8 किलोमीटर में वेस्टर्न बायपास(Western Bypass) बनाने की तैयारी कर ली गई है। वेस्टर्न बायपास बनने से वाहन चालकों का 32 किलोमीटर का चक्कर और 40 मिनट का समय बचेगा। अभी यह 1.25 घंटे में तय होता है। साथ ही बायपास पर एक साथ 25 से 30 हजार वाहन गुजर सकेंगे। जमीन अधिग्रहित करने की अधिसूचना एनएचएआई(NHAI) ने बायपास के लिए जमीन का अधिग्रहण कर लिया है। 1347.6 करोड़ की लागत से तैयार होने जा रहे 28.8 किलोमीटर लंबे इस बायपास का कार्य हिजवेज कंपनी को दिया गया है। बायपास(Western Bypass) के लिए 15 गांव की 110 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है। अक्टूबर से इसका कार्य शुरू हो जाएगा। कंपनी को यह कार्य दो साल में पूरा करना होगा। दो जिलों के 15 गांवों से होकर गुजरेगा बायपास ग्वालियर : बरौआ नूराबाद, निरावली, गजीपुरा, जिनावली, बिलपुरा, जिगसौली, कुलैथ, सोजना, परपटे का पुरा व तिघरा, पनिहार व रामपुर। मुरैना : बानमोर कलां, बानमोर खुर्द, जयपुर उर्फ नयागांव। दो फ्लाई ओवर व एक आरओबी भी बनेगा बानमोर से पनिहार तक बन रहे वेस्टर्न बायपास पर सात छोटे पुल, 18 अंडर पास, दो फ्लाई ओवर और एक आरओबी बनाया जाएगा। दोनों फ्लाई ओवर 60-60 मीटर के होंगे। यह लाई ओवर बानमोर और नूराबाद में बनाए जाएंगे। बायपास पर एकसाथ 25 से 30 हजार वाहन गुजर सकेंगे। यह होगा वाहन चालकों को फायदा वेस्टर्न बायपास बनने से आगरा-इंदौर रूट पर हर दिन गुजरने वाले 12 से 15 हजार छोटे-बड़े वाहन चालकों को फायदा मिलेगा। अभी तक वाहन चालकों को बेला की बाबड़ी से शिवपुरी लिंक रोड होकर सिकरौदा तिराहा होते हुए झांसी बायपास से रायरू अथवा बानमोर पहुंचने में लगभग 60 किलोमीटर का सफर करना होता है। वहीं वेस्टर्न बायपास के बनने से यह सफर 28.8 किमी में ही पूरा हो जाएगा। इससे वाहन चालकों को 32 किलोमीटर का चक्कर और 40 मिनट का समय बचेगा। साडा को मिलेगा लाभ: व्यापारिक गतिविधियां और बसाहट बढ़ेगी वेस्टर्न बायपास बनने से काउंटर मैग्नेट सिटी में बसाहट और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। क्योंकि बायपास का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा इसी एरिया से गुजर रहा है। इससे साडा और आसपास के क्षेत्रों में आवासीय व व्यवसायिक प्रोजेक्ट आएंगे और बसाहट के साथ ही व्यापारिक गतिविधियां बढेंगी। क्योंकि यहां पर लॉजिस्टिक पार्क, इंडस्ट्रीज, स्कूल, कॉलेज सहित अन्य संस्थानों के लिए भी जगह आरक्षित की जाएगी। ये संभावनाएं कुलैथ, जिगसौली, सोजना, पनिहार, जिनावली, गजीपुरा क्षेत्र में भी देखी जा रही हैं। साडा के दोनों ओर सर्विस रोड भी बनाई जा रही है। प्रोजेक्ट में यह तैयार     रायरू के निरावली से शुरू होगा बायपास, जो पनिहार तक बनाया जाएगा।     बायपास का लंबा हिस्सा सोन चिरैया अभयारण क्षेत्र से भी गुजरेगा। वाइल्ड लाइफ विभाग ने इस क्षेत्र में एनिमल अंडरपास व लाई ओवर बनाने पर ही एनओसी दी है।     वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट में एनिमल अंडरपास लाई ओवर (पशुओं की आवाजाही) के लिए अलग से रास्ते होंगे।     वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट में कुल 154 हेक्टेयर जमीन का उपयोग होगा, इसमें वाइल्ड लाइफ की 41 और वन विभाग की करीब तीन हेक्टेयर जमीन है। जबकि 15 गांव की 110 हेक्टेयर जमीन शामिल है।  

ग्वालियर को भविष्य में जलसंकट का सामना नहीं करना पड़ेगा, प्रतिदिन 150 एमएलडी पानी मिलेगा

ग्वालियर  एमपी के ग्वालियर में चंबल नदी और कोतवाल बांध से ग्वालियर तक पानी लाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो गया है। इससे ग्वालियर शहर की जनता को 30 वर्ष तक भरपूर मात्रा में पानी मिलेगा। भविष्य में जलसंकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।  नगर निगम ने 24 मार्च-2024 को चंबल से पानी लाने के लिए 458.68 करोड़ रुपए का ठेका इनविराड प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया है और कंपनी ने कार्य शुरू कर दिया है। यह कार्य कंपनी को 24 महीने में पूरा करना है। चंबल से ग्वालियर को प्रतिदिन 150 एमएलडी पानी मिलेगा, जो शहर की बढ़ती आबादी की पानी की जरूरत को पूरा करेगा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से 90 एमएलडी पानी रोज ● चंबल नदी का पानी मुरैना नगर निगम के इंटेकवेल के माध्यम से देवरी गांव में बन रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर आएगा। यहां से गुजर रही पाइप लाइन से निगम पानी संपवेल पर लेगा। ● देवरी गांव से चंबल का 90 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी प्रतिदिन भेजा जाएगा। कोतवाल बांध से 60 एमएलडी पानी के लिए लाइन डाली जाएगी, जो देवरी से आ रही लाइन से जुड़ेगी। यहां डाली जाएगी पाइप लाइन मुरैना : मुरैना शहर के अंदर 7.50 किमी के दायरे में डक्ट बनाकर पाइप लाइन डाली जा रही। यहां पूर्व में ही ड्राइंग व डिजाइन तैयार किए जा चुके हैं। नूराबाद : सर्विस रोड पर दो किमी खुदाई कर डक्ट बनाई जाएगी। बानमोर : बानमोर से गुजर रहे हाईवे के पास ही 3.50 किलोमीटर की खुदाई कर पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। नोट : प्रोजेक्ट में 43 किमी लाइन। चंबल वाटर प्रोजेक्ट- कब क्या हुआ 06 अक्टूबर-2023 को महाराज बाड़ा पर तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान और 16 दिसंबर 2024 को सीएम डॉ. मोहन यादव ने जीवाजी विवि के कैंपस में भूमिपूजन किया। 24 दिसंबर-2024 के वर्क ऑर्डर जारी हुए। 06 फरवरी-2025 से कार्य शुरू हुआ। 24 महीने में प्रोजेक्ट का काम पूरा करना होगा।

देश की एक-तिहाई आबादी के सामने तोंद बड़ी समस्या, बढ़ता पेट डायबिटीज, हार्ट डिज़ीज और कई गंभीर बीमारियों की घंटी

नई दिल्ली भारत में ‘पॉट बेली’ यानी  कटोरेनुमा तोंद को लोग बहुत सीरियस नहीं लेते. पुराने जमाने में बढ़ी तोंद को रईसी और खाते-पीते घर की निशानी मान लिया जाता था. लेकिन आज मेट्रो स‍िटीज में रह रहे परिवारों के सामने तोंद एक बड़ी समस्या बन चुका है. लैंसेट की नई स्टडी के मुताब‍िक आज भारत उस मुकाम पर खड़ा है, जहां पेट का मोटापा सिर्फ अच्छा द‍िखने की चिंता तक सीमित नहीं रह गया है. अब ये तोंद डायबिटीज, हार्ट डिज़ीज और कई गंभीर बीमारियों की घंटी है. The Lancet की ताजा स्टडी बताती है कि 2021 में भारत में 180 मिलियन लोग मोटापे से जूझ रहे थे और 2050 तक यह संख्या 450 मिलियन तक पहुंच सकती है. इसको आसान भाषा में कहें तो देश की एक-तिहाई आबादी के सामने तोंद बड़ी समस्या बनने वाली है. कैसे बढ़ रही तोंद की समस्या, देखें आंकड़े नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के अनुसार भारत में 40% महिलाएं और 12% पुरुष abdominal obesity यानी पेट की चर्बी से प्रभावित हैं. वहीं 30 से 49 साल की महिलाओं में तो हर दो में से एक महिला इस स्थिति में है. भारतीय मानकों के अनुसार पुरुषों में 90cm (35 इंच) से ज्यादा और महिलाओं में 80cm (31 इंच) से ज्यादा कमर होना abdominal obesity की पहचान है. खास बात ये है कि ये समस्या शहरी आबादी में ज़्यादा पाई जा रही है. तोंद क्यों खतरनाक है? बेली फैट दिखने में चाहे जितना हल्का लगे लेकिन इसका असर शरीर के सबसे संवेदनशील सिस्टम्स पर होता है. जानिए- बढ़ी हुई तोंद का असर कैसे शरीर को बीमार कर रहा है. 1. इंसुलिन रेजिस्टेंस: पेट की चर्बी शरीर की इंसुलिन को पहचानने और इस्तेमाल करने की क्षमता को बिगाड़ती है. इससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. 2. हार्ट डिजीज: चर्बी जब लीवर और पैंक्रियाज जैसे अंगों में जमती है तो मेटाबॉलिज्म गड़बड़ाता है और कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर बढ़ता है. 3. कमज़ोर जोड़ और थकान: हमारा भारी शरीर खासतौर पर पेट, घुटनों और पीठ पर दबाव बढ़ाता है. इससे शरीर में तमाम तरह के दर्द रहते हैं. South Asians के लिए ज्यादा अलार्मिंंग South Asians यानी हम भारतीय और हमारे दूसरे पड़ोसी देशों के लोग वेस्टर्न लोगों के मुकाबले कम BMI पर भी ज़्यादा फैट रखते हैं. यानी वो दिखने में पतले हो सकते हैं लेकिन अंदर से मोटे. इसे TOFI (Thin Outside, Fat Inside) भी कहा जाता है. नई गाइडलाइन में हैं मोटापे की दो स्टेज Indian Obesity Commission ने मोटापे की नई क्लासिफिकेशन दी है. इसमें स्टेज वन में ऐसे लोग आते हैं जिनका हाई BMI लेकिन बेली फैट नहीं है. न कोई बड़ी मेडिकल कंडीशन है. वहीं दूसरी स्टेज में पेट की चर्बी के साथ ही डायबिटीज या दिल की बीमारी जैसे लक्षण नजर आते हैं. ये हाई रिस्क ग्रुप है. वो 4 आदतें जो पेट बढ़ा रहीं – प्रोसेस्ड और इंस्टेंट फूड – दिनभर बैठकर काम करना – नींद की कमी और तनाव – फिजिकल एक्टिविटी में गिरावट क्या है समाधान डाइट कंट्रोल: तला-भुना, चीनी, मैदा कम करें और फाइबर, फल और सब्ज़ी ज़्यादा लें. एक्सरसाइज़: भारतीयों को 250–300 मिनट प्रति हफ्ते की एक्सरसाइज़ की ज़रूरत है (वेस्ट में ये 150 मिनट होती है). नए मेडिकेशन: सेमाग्लूटाइड, टिर्जेपाटाइड जैसे वजन घटाने वाली दवाएं अब मौजूद हैं. डॉक्टर की सलाह से ही इसे ले सकते हैं. Early detection: समय समय पर कमर की माप ज़रूर लें. अपने वजन को मॉनीटर करने से ज्यादा जरूरी ये है. ‘बड़े पेट’ से फैलती बीमारी, क्या कहते हैं एक्सपर्ट छत्रपति शाहू महाराज मेड‍िकल यून‍िवर्स‍िटी लखनऊ के मेड‍िस‍िन डिपार्टमेंट के वर‍िष्ठ प्रोफेसर और डायबिटीज रोग व‍िशेषज्ञ डॉ कौसर उस्मान कहते हैं कि तोंद सिर्फ एक फैट डिपॉजिट नहीं है, ये मेटाबॉलिक डिजीज का पहला लक्षण है. कई लोग नॉर्मल वज़न के बावजूद बीमार हो सकते हैं अगर उनकी कमर का घेरा ज़्यादा है. इसलिए बचपन से ही बच्चों को सही खानपान की आदत डालनी चाहिए. ये स‍िर्फ लुक्स की बात नहीं है, ये जिंदगी और मौत के बीच की डील है. समय रहते तोंद पर काबू नहीं पाया तो देश को डायबिटीज और हार्ट डिजीज की सुनामी झेलनी पड़ेगी.  

चौरागढ़ महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी सौगात, नहीं चढ़नी पड़ेंगी 1360 सीढ़ियां, घंटों की यात्रा मिनटों में होगी पूरी

पचमढ़ी हिल स्टेशन पचमढ़ी के चौरागढ़ मंदिर जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं का सफर जल्द आसान होने वाला है. चौरागढ़ के लिए घंटों की यात्रा मिनटों में पूरी करने के लिए 400 करोड़ की लागत से रोपवे बनाया जाएगा. रोपवे बनने से श्रद्धालुओं को 1360 सीढ़ियां पैदल चढ़नी नहीं पड़ेंगी. शिवरात्रि सहित आम दिनों में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए चौरागढ़ आते हैं. खासतौर पर महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं. लेकिन ऊंची पहाड़ी चढ़ने के कारण कई भक्तों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. नितिन गडकरी ने दी मंजूरी नर्मदापुरम-नरसिंहपुर क्षेत्र के सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने बताया “केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नर्मदापुरम जिले में पचमढ़ी के चौरागढ़ महादेव मंदिर जाने के लिए 400 करोड़ की लागत से रोपवे एवं वाहन पार्किंग को मंजूरी दे दी है. पर्यटन का विकास हमारी प्राथमिकता है.” सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने रोपवे निर्माण के लिए स्वीकृति देने पर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का आभार जताया है. सांसद ने बताया कि इसके अलावा पिपरिया से सटे अनहोनी वन क्षेत्र को पिकनिक स्पॉट में बदलने की योजना पर भी काम किया जाएगा. इन विकास कार्यों से पचमढ़ी में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी इससे मजबूती मिलेगी. शिवरात्रि पर आते हैं एक लाख से अधिक श्रद्धालु पचमढ़ी नगर से करीब 12 किमी दूर सतपुड़ा के घने जंगल के बीच चौरागढ़ पर्वत है. यहां शिवरात्रि पर 6 दिनों तक का विशाल मेला लगता है, जिसमें प्रतिदिन 50 से 80 हजार तक श्रद्धालु आते हैं. शिवरात्रि के दिन श्रद्धालुओं की संख्या 1 लाख पार कर जाती है. आम दिनों में भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं. त्रिशूल चढ़ाने का खास महत्व चौरागढ़ मंदिर में त्रिशूल चढ़ाने का खास महत्व है. मान्यता है कि चोरा बाबा की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन दिए थे. उस समय भगवान शिव अपना त्रिशूल इसी स्थान पर छोड़ कर चले गए थे. इसी मान्यता के तहत भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर त्रिशूल चढ़ाते हैं. एक किवदंती ये भी प्रचलित है कि भगवान महादेव ने भस्मासुर से बचने के लिए इसी पहाड़ी में शरण ली थी. लंबे समय से की जा रही थी मांग स्थानीय लोगों द्वारा लंबे समय से पचमढ़ी-चौरागढ़ रोपवे निर्माण की मांग की जा रही थी. करीब 10 वर्ष पूर्व रोपवे लगाने का सर्वे भी हुआ था लेकिन सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में रोपवे निर्माण की अनुमति नहीं मिलने से मामला ठंडा पड़ गया था.

वंदे भारत ट्रेन के कोच भी ग्वालियर में बनी स्प्रिंग के सहारे पटरियों पर दौड़ने लगेंगे

 ग्वालियर  हाई स्पीड ट्रेन शताब्दी, राजधानी और गतिमान के बाद अब वंदे भारत एक्सप्रेस(Vande Bharat Express) की स्प्रिंग का निर्माण भी रेल स्प्रिंग कारखाना सिथौली(Sithauli) में किया जाएगा। इसके लिए इलाहाबाद मुख्यालय से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। उम्मीद है कि इस साल वंदे भारत ट्रेन के कोच भी ग्वालियर में बनी स्प्रिंग के सहारे पटरियों पर दौड़ने लगेंगे। देशभर में चलने वाली ट्रेनों के लिए स्प्रिंग का निर्माण करने वाले केवल दो कारखाने हैं, इनमें एक ग्वालियर के सिथौली में है और दूसरा आईसीएफ चैन्नई में है। सिथौली(Sithauli) के रेल स्प्रिंग कारखाने में वर्षों से आईसीएफ (इंटीग्रल) और एलएचबी (लिंके- हॉफमैन ब्रुश) कोच की स्प्रिंग का निर्माण किया जा रहा है। इंडियन रेलवे लगातार स्प्रिंग की मांग बढ़ाता जा रहा है, इससे इस साल कारखाने का टारगेट भी पहली बार एक लाख स्प्रिंग से ऊपर चला गया है। हर साल बढ़ रही स्प्रिंग की डिमांड रेल स्प्रिंग कारखाना सिथौली(Sithauli) की शुरूआत 1989 में हुई थी। इसके बाद 1990 में स्प्रिंग बनना शुरू हो गई थी।यहां मांग के हिसाब से स्प्रिंगों का निर्माण किया जाता है और हर साल इसकी संया में इजाफा होता जा रहा है। इस साल पहली बार टारगेट एक लाख को पार कर गया है। फैक्ट्री में सबसे ज्यादा एलएचबी कोच की स्प्रिंग बनाई जाती हैं। स्प्रिंग की संख्या बढ़ते ही तीन शिट में काम 45 लोगों को और मिला रोजगार 35 साल में पहली बार स्प्रिंग की संख्या बढ़ते ही दो की जगह तीन शिट में काम शुरू किया गया है। फैक्ट्री में 275 लोगों का स्टाफ है। तीसरी शिट शुरू होने से लगभग 45 लोगों को और रोजगार मिला है। यहां एक दिन में 450 से 500 स्प्रिंग बनाई जा रही हैं। जल्द ही हर दिन 600 स्प्रिंग बनाने की प्लानिंग की जा रही है। तीन हजार स्प्रिंग से शुरू हुआ था कारखाना सिथौली स्प्रिंग कारखाने में 1990 में स्प्रिंग का निर्माण शुरू हुआ था। पहले साल तीन हजार स्प्रिंग बनाई गईं। उसके बाद पांच हजार स्प्रिंग तैयार हुईं। मांग बढ़ते ही हर साल लक्ष्य बढ़ता गया और अब यह आंकड़ा एक लाख पार हो गया है। 50 मशीनों पर बनतीं स्प्रिंग स्प्रिंग कारखाने में करीब 50 मशीनें लगी हुई हैं। इन मशीनों पर एक बार में दो से तीन कर्मचारी डिमांड के हिसाब से काम करते हैं। काम बढऩे पर कर्मचारी इसे आपस में बांट लेते हैं। भविष्य में और भी मशीनें आने की संभावना हैं, जिससे काम और बढ़ेगा। सिथौली स्प्रिंग कारखाना में इस साल टारगेट एक लाख पार हो गया है। संभवत: इस साल से वंदे भारत की स्प्रिंग भी यहां बनाई जाएगी।– मनोज कुमार सिंह, पीआरओ झांसी मंडल

रूस में जन्म दर हर साल गिर रही, 1800 के बाद सबसे कम बच्चे पैदा हुए, चीन और जापान भी इस समस्या से जूझ रहे

मॉस्को  रूस में जन्म दर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रूस की जनसंख्या में गिरावट इतनी ज्यादा है कि पिछले करीब 200 वर्षों के रेकॉर्ड टूट गए हैं। कम बच्चे पैदा होने की वजह से रूस में जनसंख्या घट रही है और सरकार के सामने ये गंभीर चुनौती बनती जा रही है। यूक्रेन के साथ युद्ध में उलझी रूस की व्लादिमीर पुतिन सरकार की हालिया वर्षों में जन्म दर को बढ़ाने की कई कोशिशों के बावजूद इस दिशा में कोई खास फायदा नहीं हुआ है। रूस की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है, इससे देश में काम करने वाले घटते जा रहे हैं। मॉस्को टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रोस्टेट नाम की सरकारी एजेंसी ने जनसंख्या के नए आंकड़े जारी किए हैं। आंकड़े बताते हैं कि इस साल जनवरी और फरवरी रूस में सिर्फ 1,95,400 बच्चे पैदा हुए। यह आंकड़ा पिछले साल के इन महीनों के मुकाबले तीन फीसदी कम है। फरवरी महीने में तो और ज्यादा गिरावट आई। फरवरी में जन्म दर 7.6% तक गिर गई और सिर्फ 90,500 बच्चे पैदा हुए। जनसांख्यिकी विशेषज्ञ अलेक्सी का कहना है कि 2025 की पहली तिमाही में रूस की जन्म दर 1800 के दशक के बाद सबसे कम है। लगातार कम हो रही रूसी आबादी अलेक्सी का इस साल मार्च में 95,000 से 96,000 बच्चे पैदा होने का अनुमान है। इस तरह पहली तिमाही में कुल 293,000 से 294,000 बच्चे पैदा हुए। अलेक्सी का कहना है कि 2025 की पहली तिमाही में पिछले 200 सालों में सबसे कम बच्चे पैदा हुए। हालांकि रोस्टेट ने अभी तक मार्च महीने के आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं। रूस में बीते साल, 2024 में 12.22 लाख बच्चे पैदा हुए थे। यह 1999 के बाद सबसे कम आंकड़ा है। इस साल ये आंकड़ा और भी कम हो सकता है। रूस में बीते एक दशक में 2014 के मुकाबले जन्म दर में एक तिहाई की कमी आ गई है। साल 2016 से 2024 के बीच ही रूस की जनसंख्या में 30 लाख से ज्यादा की कमी आ चुकी है। अभी और बढ़ेगा रूस में संकट! रोस्टेट के अनुसार, रूस में जन्म दर में गिरावट आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी। अगले दो साल यानी 2027 तक यह आंकड़ा 11.4 लाख तक गिर सकता है। 2030 के बाद थोड़ी रिकवरी हो सकती है लेकिन 2045 तक भी जन्म दर 2014 से पहले के मुकाबले 25% कम रहेगी। साफ है कि हालिया समय में रूस इससे बाहर नहीं आ पाएगा। एक्सपर्ट का कहना है कि अगर मौतों की संख्या हर साल 18 लाख के आसपास स्थिर होती है तो भी रूस की जनसंख्या में हर साल 5 लाख की कमी आएगी। रोस्टेट के अनुसार, 2046 तक रूस की जनसंख्या 13.88 करोड़ तक गिर सकती है। यहं तक कि जनसंख्या 13 करोड़ तक भी गिर सकती है। यह आंकड़ा 1897 के रूसी साम्राज्य की आबादी के बराबर होगा।

रूस ने भारत की वर्षों से चली आ रही संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की स्‍थायी सदस्‍यता मांग का खुलकर समर्थन किया

नई दिल्ली/ मास्‍को  भारत और रूस की राजनयिक दोस्‍ती के 78 साल पूरे हो गए हैं। शीत युद्ध से लेकर पाकिस्‍तान युद्ध तक रूस ने भारत के साथ दोस्‍ती निभाई है। अब एक बार फिर से रूस ने भारत की वर्षों से चली आ रही मांग का खुलकर समर्थन किया है। रूस ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्‍थायी सदस्‍यता देने की मांग को फिर से दोहराया है। साथ ही रूस ने भारत के साथ आने वाले वर्षों में भी अच्‍छे रिश्‍ते बरकरार रखने की उम्‍मीद जताई है। रूस के विदेश मंत्रालय ने अपने संदेश में दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्‍ते स्‍थापित होने के 78 साल पूरे होने की बधाई दी। इस बीच स्‍लोवाकिया ने भी भारत की संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सदस्‍यता का समर्थन किया है। टेलिग्राम पर दिए अपने संदेश में रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम भारत के साथ रणनीतिक भागीदारी को और मजबूत करना चाहते हैं। रूसी मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद मजबूत बना रहेगा और दोनों देशों के नेताओं के बीच मुलाकातों का दौर जारी रहेगा। साल 2024 में पीएम मोदी और रूसी राष्‍ट्रपति पुतिन के बीच दो शिखर सम्‍मेलन हुए थे। इस साल भी पुतिन भारत आने वाले हैं। रूस ने विक्‍ट्री डे परेड में पीएम मोदी को न्‍योता दिया था। इसमें हिस्‍सा लेने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर जा रहे हैं। भारत और रूस बढ़ाएं दोस्‍ती रूसी विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच व्‍यापार लगातार तेजी से बढ़ रहा है और यह 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसके अलावा दोनों देश परमाणु ऊर्जा पर भी सहयोग कर रहे हैं और तमिलनाडु के कुंडनकुलम में परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाया जा रहा है। रूस ने कहा कि दोनों देशों को रक्षा, स्‍पेस, तकनीक और सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान को जारी रखना चाहिए ताकि एक बहुध्रुवीय दुनिया को बनाया जा सके। यह वैश्विक प्रशासन में ग्‍लोबल साऊथ की भागीदारी को बढ़ाएगा। सुरक्षा परिषद की दावेदारी में कहां फंसा पेंच? संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सदस्‍यता के लिए कई साल से भारत मांग कर रहा है। यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली निकाय है लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत इसका स्‍थायी सदस्‍य नहीं है। साल 1945 में बनाए गए संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा पर‍िषद 15 सदस्‍य हैं और इसमें केवल 5 ही स्‍थायी सदस्‍य हैं। ये देश हैं- अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन और ब्रिटेन। 10 गैर अस्‍थायी सदस्‍य होते हैं जिन्‍हें दो साल के लिए चुना जाता है। स्‍थायी सदस्‍यों के पास वीटो पावर होता है लेकिन अस्‍थायी सदस्‍यों के पास यह ताकत नहीं होती है। भारत को रूस, अमेरिका, फ्रांस समेत दुनिया के कई ताकतवर देशों का समर्थन हासिल है लेकिन नई दिल्‍ली की राह में सबसे बड़ी बाधा चीन बना हुआ है। चीन नहीं चाहता है कि एशिया में उसके एकाधिकार को भारत चुनौती दे। इसी वजह से चीन सुरक्षा परिषद में एशिया से अकेले प्रतिनिधित्‍व करना चाहता है।  

30 अप्रैल से शुरू होगी चारधाम यात्रा, घर से करना चाहते हैं पूजा तो ऐसे करें बुकिंग

देहरादून इस वर्ष चारधाम की यात्रा 30 अप्रैल 2025, अक्षय तृतीया के दिन से शुरू होने जा रही है. अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट सुबह 10 बकर 30 मिनट पर खोले जाएंगे.  वहीं, केदारनाथ धाम के कपाट भक्तों के लिए 2 मई 2025, शुक्रवार को सुबह 7 बजे तक खुलेंगे. इसके अलावा, बद्रीनाथ धाम के कपाट 4 मई 2025, रविवार के दिन खुलेंगे. चारधाम यात्रा की तारीखों का निर्धारण महाशिवरात्रि के अवसर पर धार्मिक विद्वानों के द्वारा किया गया था. चारधाम यात्रा में हर साल लाखों श्रद्धालुओं जाते हैं. भक्त इन पवित्र धामों में जाकर मां गंगा, मां यमुना, भगवान केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन करते हैं. चारधाम यात्रा के लिए गाइडलाइंस जारी, यात्रा से पहले ऐसे करें तैयारी केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री चारधाम यात्रा 30 अप्रैल से शुरू हो रही है. वहीं लोगों ने इस साल दर्शन के लिए रिकॉर्ड तोड़ रजिस्ट्रेशन कराए हैं. चारधाम यात्रा के सभी तीर्थस्थल हिमालयी क्षेत्र में है जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से 2700 मीटर से भी अधिक है. इन स्थानों पर यात्रीगण अत्यधिक ठण्ड, कम आर्द्रता, अत्यधिक अल्ट्रा वॉइलेट रेडिएशन, कम हवा का दबाव और कम ऑक्सीजन की मात्रा से प्रभावित हो सकते हैं. इसलिए समय-समय पर तीर्थ यात्रियों के सुगम एवं सुरक्षित यात्रा हेतु दिशा निर्देश (Health Advisory) जारी किए जाते हैं. उत्तराखंड टूरिज्म (उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड) की तरफ से चारधाम यात्रा का रजिस्ट्रेशन कराने वाले लोगों के लिए कुछ दिशा निर्देश भेजे गए हैं जिन्हें सभी को फॉलो करना चाहिए. यात्रा शुरू करने से पहले सभी को योजना बनाना, तैयारी करना, पैकिंग करना काफी जरूरी होता है. इसकी आप एक लिस्ट बना सकते हैं. योजना बनाना – अपनी यात्रा की योजना कम से कम 7 दिनों के लिए बनाएं, वातावरण के अनुरूप अपना कंफर्टेबल समय चुनें. – ब्रेक ले लेकर ट्रेक करें. ट्रेक के हर एक घंटे बाद या ऑटोमोबाइल चढ़ाई के हर 2 घंटे बाद, 5-10 मिनट का ब्रेक लें. तैयारी करना – रोजाना 5-10 मिनट के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें. – रोजाना 20-30 मिनट टहलें – यदि यात्री की आयु 55 साल से अधिक है या वह हृदय रोग, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज से ग्रस्त है तो यात्रा से पहले फिटनेस चैक करने के लिए स्वास्थ्य परीक्षण कराएं.  पैकिंग करना – गर्म कपड़े ऊनी स्वेटर, थर्मल, पफर जैकेट, दस्ताने, मोजे रखना न भूलें. – बारिश से बचाव के रेनकोट, छाता भी रखें. – स्वास्थ्य जांच उपकरण पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर. – पहले से मोजूद स्थितियों (हृदय रोग, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज) वाले यात्री सभी जरूरी दवा, टेस्टिंग इक्युपमेंट और डॉक्टर के नंबर साथ में रखें. कृपया अपनी यात्रा से पहले मौसम रिपोर्ट की जांच करें और ध्यान दें कि ठंडे तापमान के लिए आपके पास पर्याप्त गर्म कपड़े हों. अगर आपके डॉक्टर यात्रा न करने की सलाह देते हैं, तो कृपया यात्रा न करें. चार धाम तक कैसे पहुंचे? चारधाम यात्रा या तो हरिद्वार या देहरादून से शुरू होती है. यात्रा शुरू करने के दो तरीके हैं- सड़क और हेलीकाप्टर द्वारा. 1. सड़क मार्ग से सड़क मार्ग से चार धाम यात्रा हरिद्वार, दिल्ली, ऋषिकेश,और देहरादून से शुरू कर सकते हैं. हरिद्वार रेलवे स्टेशन इन पवित्र स्थानों से सबसे निकट रेलवे स्टेशन है. हरिद्वार सड़क और रेल नेटवर्क के माध्यम से दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है. राज्य परिवहन और निजी बसें इन पवित्र तीर्थ स्थलों के लिए उपलब्ध हैं. 2. हेलीकॉप्टर हेलीपैड, देहरादून से चार धाम के लिए हेलीकाप्टर सेवा उपलब्ध है. हेलीकॉप्टर सेवा देहरादून से खरसाली तक है, जो यमुनोत्री मंदिर से लगभग 6 किमी. दूर है. हरसिल हेलीपैड गंगोत्री मंदिर के लिए निकटतम हेलिपैड है, जो मंदिर से 25 किमी. दूर स्थित है. बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के हेलिपैड भी मंदिर के पास स्थित हैं. चार धाम यात्रा की पूजा का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करें बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के लिए ऑनलाइन पूजा का रजिस्ट्रेशन 10 अप्रैल से शुरू हो चुका है. जो श्रद्धालु घर बैठे केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम में पूजा करवाना चाहते हैं, वह बदरी केदार मंदिर समिति की वेबसाइट https://badrinathkedarath.gov.in पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग करवा सकते है. ऑनलाइन पूजा करवाने वाले लोगों के नाम से न सिर्फ पूजा की जाएगी बल्कि उन श्रद्धालुओं को उनके एड्रेस पर केदारनाथ और बदरीनाथ धाम का प्रसाद भी भेजा जाएगा. जानिए कौन-कौन सी पूजा हो सकती है ऑनलाइन बदरीनाथ धाम में ब्रह्म मुहूर्त में होने वाला महाभिषेक और अभिषेक पूजा के साथ ही वेद पाठ, गीता पाठ, विष्णु सहस्रनामावली, सायंकालीन स्वर्ण आरती, चांदी आरती, गीत गोविंद पाठ के साथ ही शयन आरती भी शामिल है. इसी तरह केदारनाथ धाम में षोडशोपचार पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और सायंकालीन आरती के लिए आनलाइन बुकिंग की जाती है. चार धाम यात्रा का महत्व चार धाम यात्रा श्रद्धालुओं को चार महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों पर ले जाती है: यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ. ये हिमालय स्थल धार्मिक महत्व रखते हैं और हर साल लाखों तीर्थयात्री यहां आते हैं. यमुनोत्री– तीर्थयात्रा यमुनोत्री मंदिर से शुरू होती है, जो देवी यमुना को समर्पित है. मंदिर तक पहुंचने के लिए तीर्थयात्रियों को जानकी चट्टी से 6 किमी. की पैदल यात्रा करनी पड़ती है. उसके बाद टिहरी गढ़वाल के महाराजा प्रताप शाह द्वारा निर्मित यह मंदिर एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्थल है. गंगोत्री– दूसरी यात्रा है गंगोत्री, जो गंगा नदी को समर्पित है. 3,048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर उन लोगों के लिए भक्ति का स्थान है जो पवित्र नदी का सम्मान करना चाहते हैं. केदारनाथ– तीसरी यात्रा केदारनाथ की है. भारत के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है केदारनाथ. 3,584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर हिमालय से घिरा हुआ है. मान्यताओं के अनुसार, मंदिर मूल रूप से पांडवों द्वारा बनाया गया था और बाद में आदि शंकराचार्य द्वारा इसको दोबारा बनवाया गया था. बद्रीनाथ- अंतिम यात्रा बद्रीनाथ धाम की है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है. इसमें बद्रीनारायण की 3.3 मीटर ऊंची काले पत्थर की मूर्ति है और यह वैदिक युग की है.  

फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी Meta के खिलाफ चल रहे केस में हुई सुनवाई, मुसीबत में जुकरबर्ग

वाशिंगटन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स- फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा को अपने दो प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम को बेचना पड़ सकता है। वजह है कंपनी के खिलाफ अमेरिका के वाशिंगटन में एंटीट्रस्ट मामले की सुनवाई। कंपनी पर US कॉम्पिटिशन एंड कंज्यूमर वॉच डॉग ने आरोप लगाया है कि उसने मार्केट के कॉम्पिटिशन खत्म करने और अपना एकाधिकार बनाने के लिए 2012 में इंस्टाग्राम (1 बिलियन डॉलर) और 2014 में व्हाट्सएप (22 बिलियन डॉलर) को खरीद लिया था। फेडरल ट्रेड कमिशन का आरोप है कि मेटा ने सालों पहले इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप को खरीदकर अपने राइवल्स को खत्म कर दिया है. FTC के वकील का कहना है कि Meta ने अपने कंपटीटर से मुकाबला करने से बजाय, उन्हें खरीद लिया. ये कदम उन्होंने फेसबुक के दबदबे को बनाए रखने के लिए किया है. FTC केस जीतता है तो बेचने पड़ सकते हैं प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम को खरीदने के लिए फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) ने ही परमिशन दी थी। लेकिन नियमों के तहत FTC को डील के परिणाम को भी मॉनिटर करना होता है। इसलिए उसे मेटा के खिलाफ मामला दर्ज करना पड़ा। अगर (FTC) केस जीत जाता है तो वह मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप दोनों को बेचने के लिए मजबूर कर सकता है। जुकरबर्ग और पूर्व COO को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है रिपोर्ट के मुताबिक, जुकरबर्ग और कंपनी की पूर्व चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) शेरिल सैंडबर्ग दोनों को इस मुकदमे में सुनवाई के दौरान पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। एंटी ट्रस्ट केस की सुनवाई 6 हफ्तों से ज्यादा चल सकती है। जुकरबर्ग के खिलाफ तर्क…     वेंडरबिल्ट लॉ स्कूल में एंटीट्रस्ट की प्रोफेसर रेबेका हॉ एलेंसवर्थ ने कहा कि जुकरबर्ग ने फेसबुक को इंस्टाग्राम से मिल रहे कॉम्पिटिशन को बेअसर करने के लिए उसे खरीद लिया था।     जुकरबर्ग के बातचीत और उनके ईमेल मुकदमे में सबसे ठोस सबूत पेश कर सकते हैं। जकरबर्ग ने कहा था मार्केट में कॉम्पिटिशन करने की जगह उस कंपनी को ही खरीद लेना ही बेहतर है। मार्क जुकरबर्ग का तर्क…     मेटा ने तर्क दिया कि वह केस जीत जाएगा, क्योंकि इंस्टाग्राम को खरीदने के बाद उसके यूजर्स का एक्सपीरियंस बढ़ा।     रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा यह तर्क दे सकता है कि किसी एंटीट्रस्ट मामले में इरादा ज्यादा प्रासंगिक नहीं है। मेटा के खिलाफ बड़ा सबूत FTC के ओर से डेनियल मैथेसन ने 2012 के एक इंटरनल मेमो का हवाला दिया, जो मेटा CEO मार्क जकरबर्ग की ओर से था. इस मेमो में इंस्टाग्राम को ‘न्यूट्रलाइज’ करने की बात कही गई है. वहीं मेटा ने इसके जवाब में कहा है कि ये केस गुमराह करने वाला है. मेटा ने बताया है कि दोनों ही अधिग्रहण के वक्त FTC ने खुद इन्हें रिव्यू किया था और अधिग्रहण को मंजूरी दी थी. कंपनी के अटॉर्नी ने कहा कि ये डील्स प्लेटफॉर्म को मजबूत करने और कंज्यूमर एक्सपीरियंस को बेहतर करने के लिए की गईं थी. अगर इस मामले में फैसला FTC के पक्ष में जाता है, तो Meta को वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम को बेचना पड़ेगा. FTC ने कहा है कि मेटा ने इन प्लेटफॉर्म्स को खरीदने के लिए ज्यादा पैसे दिए थे. कितने में खरीदा था? मेटा ने साल 2012 में इंस्टाग्राम को 1 अरब डॉलर में खरीदा था, जबकि वॉट्सऐप को कंपनी ने साल 2014 में 19 अरब डॉलर में खरीदा था. हालांकि, मेटा का कहना है कि उन्हें TikTok, X (पहले ट्विटर), YouTube और Apple iMessage से अभी भी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. इस सुनवाई के दौरान मार्क जकरबर्ग और पूर्व चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर Sheryl Sandberg को भी बुलाया जा सकता है. कयास है कि इस मामले में सुनवाई कई हफ्तों तक चलेगी. बता दें कि इस मामले की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान हुई थी.

ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे उत्तरप्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश के चार जिलों से होकर गुजरेगा, इन जिलों और गांवों के लोगों को भी लाभ होगा

ग्वालियर म्यूजिक सिटी ग्वालियर से ताज नगरी आगरा जाने वालों का सफर जल्द ही आसान होगा। यह होगा ग्वालियर- आगरा सिक्स लेन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे(Gwalior agra Green Field Expressway) बनने से। इसके लिए तैयारी आरंभ हो गई है। इसके बनने से सड़क मार्ग से ग्वालियर से आगरा 90 मिनट में पहुंच सकेंगे, जबकि अभी तीन घंटे का समय लगता है। इससे डेढ़ घंटे का समय बचेगा। यह एक्सप्रेस-वे उत्तरप्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश के चार जिलों से होकर गुजरेगा। इसमें आगरा, धौलपुर, मुरैना और ग्वालियर के 63 गांव की 550 हेक्टेयर भूमि आ रही है। इससे इन जिलों और गांवों के लोगों को भी लाभ होगा। 4612 करोड़ से बनेगा ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे इस एक्सप्रेस-वे(Gwalior agra Green Field Expressway) पर एकसाथ 31435 वाहन गुजर सकेंगे। एनएचएआई द्वारा 88.400 किलोमीटर में बनाए जा रहे ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण में 4612.65 करोड़ रुपए लागत आएगी। इसके लिए उदयपुर की जीआर इंफ्रा कंपनी को कार्य दिया गया है। कंपनी अक्टूबर- 2025 में इसका निर्माण आरंभ करेगी और उसे 30 महीने में इसे पूरा करना होगा। 2028 में यह बनकर तैयार हो जाएगा। आर्थिक लाभ आगरा से ग्वालियर एक्सप्रेस(Gwalior agra Green Field Expressway) बनने से यूपी, राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच संपर्क बढ़ने से आगरा, धौलपुर, मुरैना और ग्वालियर में आईटी इंडस्ट्री, लॉजिस्टिक हब, ई-कॉमर्स, रियल एस्टेट और टूरिज्म जैसे सेक्टर को लाभ मिलेगा। चारों जिलों के बीच बस यातायात भी सुगम होगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों को भी रियल एस्टेट का लाभ मिलेगा। यह गांव आएंगे ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे में ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे में आने वाले मुख्य शहर…….. मध्यप्रदेश के ग्वालियर और मुरैना। : ग्वालियर के सिर्फ एक गांव सुसैरा की 5 हेक्टेयर भूमि इसमें आएगी। मुरैना के दिमनी, चंबल क्रॉस व मुरैना रोड सहित 25 गांव की 250 हेक्टेयर भूमि आएगी। उत्तरप्रदेश के आगरा : आगरा के देवरी आगरा बायपास, इरादत नगर, श्मशाबाद व सोसा सहित 18 गांव की 132 हेक्टेयर भूमि इसमें आएगी। राजस्थान- धौलपुर: धौलपुर के राधा खेड़ा, मछरिया सहित 23 गांव की 162 हेक्टेयर भूमि इसमें आएगी। 31 पुल, छह फ्लाई ओवर व एक रेलवे ओवर ब्रिज बनेगा ग्वालियर– आगरा सिक्स लेन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे की लंबाई 88.400 किलोमीटर है। इस प्रोजेक्ट में आठ बड़े पुल, 23 छोटे पुल, छह फ्लाई ओवर, पांच एलिवेटेड वायडक्ट, एक रेल ओवर ब्रिज और 42 अंडर पास बनाए जाएंगे। यहां एक साथ 31435 वाहन गुजर सकेंगे। एक्सप्रेस-वे की विशेषताएं     100 किलोमीटर से अधिक की रफ्तार से चल सकेंगे वाहन।     जीपीएस आधारित सिस्टम से उतना ही टोल देना होगा जितना सफर किया होगा।     आईटीएमएस लागू होगा। बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के लिए पूरा एक्सप्रेस-वे सीसीटीवी की निगरानी में होगा।     वाहन रुकने पर या हादसा होने पर कंट्रोल रूम से तुरंत एम्बुलेंस पहुंचेगी। फायर फाइटर और क्रेन तक सूचना पहुंचेगी।     पर्यावरण और वन संचरण के लिए सुरंग और वाया डक्ट बनेंगे।     सड़क पर कहीं भी घाट नहीं पड़ेंगे और सभी पहाड़ी इलाकों को री-अलाइन कर दिया जाएगा।

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