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चीन ने भी जवाबी ऐक्शन लेते हुए चीनी आयात पर टैरिफ 125 फीसदी तक कर दिया तो अमेरिका ने भी इसमें इजाफा किया

वॉशिंगटन अमेरिका ने चीनी सामान के आयात पर 245 पर्सेंट के टैरिफ का ऐलान किया है। अब तक यह 145 फीसदी लग रहा था, लेकिन जब चीन ने भी जवाबी ऐक्शन लेते हुए चीनी आयात पर टैरिफ 125 फीसदी तक कर दिया तो अमेरिका ने भी इसमें इजाफा किया है। वाइट हाउस की ओर से मंगलवार देर रात यह जानकारी दी गई है कि चीनी सामान के आयात पर अब 245 फीसदी का टैरिफ लगेगा। अब तक चीन पर 145 पर्सेंट का टैरिफ लगाया जा रहा था, लेकिन मंगलवार को इसमें एक साथ 100 पर्सेंट का इजाफा कर दिया गया। अमेरिका की ओऱ से यह फैसला बेहद सख्त है, जबकि उसने भारत समेत तमाम देशों पर लगाए टैरिफ को 90 दिनों के लिए रोक लिया है। माना जा रहा है कि इस अवधि में अमेरिका के साथ अन्य देश ट्रेड डील कर सकते हैं। भारत और अमेरिका के बीच तो बैकचैनल से ट्रेड डील पर मंथन भी शुरू हो गया है। चर्चा है कि इसके लिए मई से मीटिंग्स का दौर भी शुरू हो सकता है। चीन को लेकर अमेरिका का रुख है कि वह टैरिफ का जवाब टैरिफ से दे रहा है, जबकि उसे अपनी गलती माननी चाहिए। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिका दूसरे देशों के सामान पर कम टैक्स लगता है, जबकि उसके एक्सपोर्ट पर चीन, भारत समेत कई देश मोटा टैक्स वसूलते हैं। ट्रंप प्रशासन बोला- 75 देशों ने हमसे डील के लिए संपर्क किया इसी के जवाब में उन्होंने टैरिफ वॉर शुरू किया है। बता दें कि वाइट हाउस का कहना है कि चीन का रुख अड़ियल है, जबकि दुनिया के करीब 75 देशों ने ट्रेड डील के लिए उससे संपर्क किया है। इसी कारण से उसने कई देशों पर टैरिफ को 90 दिनों के लिए टाल दिया है और तब तक किसी सहमति तक पहुंचने की कोशिश हो रही है। इस अवधि में 10 पर्सेंट का बेसिक टैरिफ ही लगेगा। बता दें कि भारत पर भी अमेरिका 26 फीसदी टैरिफ लगाया था, जिसे फिलहाल होल्ड पर रखा दिया है। इसी का असर है कि भारतीय शेयर मार्केट में अब उत्साह है और कई दिनों की गिरावट के बाद तेजी का दौर देखा जा रहा है।

वर्ल्ड लिवर डे: कहीं आपका लिवर खराब तो नहीं, ऐसे करें पता

हर साल 19 अप्रैल को वर्ल्ड लिवर डे  2025 मनाया जाता है ताकि लोगों को इस जरूरी अंग की देखभाल और इसके प्रति जागरूक किया जा सके। हमारे शरीर में लिवर का काम बेहद अहम होता है। यह न केवल खाना पचाने में मदद करता है बल्कि शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने एनर्जी स्टोर करने और इन्फेक्शन से लड़ने जैसे कई जरूरी काम भी करता है। डॉक्टर कहते है कि “लिवर हमारे शरीर का एक ऐसा अंग है जो चुपचाप काम करता है और जब तक यह बहुत ज्यादा खराब न हो जाए, तब तक कोई खास संकेत नहीं देता, लेकिन कुछ शुरुआती लक्षण ऐसे होते हैं जिन पर ध्यान देकर हम समय रहते इसकी बीमारी को पकड़ सकते हैं।” सबसे सामान्य संकेतों में बार-बार थकान महसूस होना और एनर्जी की कमी है। अगर आप बिना ज्यादा मेहनत के भी दिनभर थकान महसूस करते हैं, तो यह लिवर की गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। चलिए जानें ऐसे ही 5 संकेत, जिनसे आप पहचान सकते हैं कि आपका लिवर ठीक से काम कर रहा है या नहीं। थकान और कमजोरी बनी रहना अगर आपको बिना किसी भारी काम के भी अक्सर थकान महसूस होती है या शरीर में कमजोरी रहती है, तो ये लिवर की गड़बड़ी का शुरुआती संकेत हो सकता है। लिवर जब सही से काम नहीं करता, तो शरीर को पर्याप्त एनर्जी नहीं मिल पाती। त्वचा या आंखों का पीला पड़ना डॉक्टरों के अनुसार, अगर आपकी आंखें या त्वचा पीली दिखने लगे, तो यह जॉन्डिस यानी पीलिया हो सकता है। यह तब होता है जब लिवर बिलीरुबिन को प्रोसेस नहीं कर पाता। यह लिवर के संक्रमण या हेपेटाइटिस का संकेत हो सकता है। पेट में सूजन या भारीपन महसूस होना अगर पेट के ऊपरी हिस्से में सूजन, गैस, या भारीपन लगातार बना रहता है, तो इसे मामूली गैस समझकर न छोड़ें। यह फैटी लिवर या लिवर इंफ्लेमेशन की निशानी हो सकती है। बार-बार उल्टी जैसा महसूस होना लिवर खराब होने पर पाचन क्रिया पर असर पड़ता है, जिससे बार-बार मिचली, उल्टी, या जी घबराने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर अगर ये लक्षण लंबे समय से चल रहे हों, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। त्वचा पर खुजली और दाने लिवर अगर विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर नहीं निकाल पा रहा, तो ये असर त्वचा पर दिख सकता है। लगातार खुजली रहना या छोटे-छोटे दाने होना भी लिवर की गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों का ब्याज सरकार भरेगी, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं

भोपाल एमपी में किसानों के लिए सीएम डॉ. मोहन यादव ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि किसानों की सहकारी बैंकों की कर्ज राशि का ब्याज राज्य सरकार वहन करेगी। भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने CM डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। संघ पदाधिकारियों ने भू अधिग्रहण संशोधन ड्राफ्ट मामले में कुछ सुझाव दिए और 31 मार्च तक सहकारी बैंकों के कर्ज जमा न कर पाने के कारण डिफाल्टर हुए किसानों का मामला उठाया। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों का ब्याज सरकार भरेगी, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार के भू अधिग्रहण संशोधन ड्राफ्ट के मामले में सीएम को किसानों की चिंता से अवगत कराते हुए उनका पक्ष रखा। किसान संघ ने सीएम डॉ. मोहन यादव से कहा कि किसानों की सलाह और उन्हें विश्वास में लिए बिना जमीन अधिग्रहण नहीं होना चाहिए। भारतीय किसान संघ के तीन प्रांतों, प्रदेश पदाधिकारियों और अखिल भारतीय पदाधिकारियों के सामने राज्य के अधिकारियों ने मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2025 का प्रजेंटेशन दिया। इसके बाद किसान संघ ने सीएम के समक्ष ही इसपर सुझाव दिए। 2025 के डिफाल्टर किसानों का ब्याज भरेगी सरकार किसान संघ ने 31 मार्च तक सहकारी बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने के कारण डिफाल्टर हुए किसानों का मुद्दा भी उठाया। इस मामले पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने किसान संघ से कहा कि किसानों को इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है। ऐसे किसानों का सहकारी बैंकों का ब्याज राज्य सरकार भरेगी। मध्यप्रदेश में कुल 4523 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां हैं। इन समितियों से किसानों को खाद, बीज व अन्य कृषि कार्यों के लिए कृषि ऋण (Cooperative Bank Loan) दिया जाता है। खास बात यह है कि यह कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर वाला होता है अर्थात किसानों को बिना ब्याज के ही लोन मिलता है लेकिन किसान डिफाल्टर हो जाते हैं तो ब्याज लगने लगता है। ब्याज राशि ज्यादा होने से किसान और परेशान हो जाता है। जो किसान तय अवधि में ऋण नहीं चुकाते हैं, उनसे समितियां आधार दर के साथ दंड ब्याज वसूलती है।

देश को मिलेगा नया मुख्य न्यायाधीश, 14 मई को CJI के रूप में लेंगे शपथ

नई दिल्ली  जस्टिस बीआर गवई देश के अगले मुख्य न्यायाधीश होंगे। वर्तमान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) संजीव खन्ना ने बुधवार (16 अप्रैल) को आधिकारिक तौर पर जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई को अपना उत्तराधिकारी बनाने की सिफारिश कर दी। CJI ने उनके नाम को मंजूरी के लिए केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेज दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस बीआर गवई 14 मई को मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ लेंगे। मौजूदा चीफ जस्टिस संजीव खन्ना 13 मई को रिटायर होंगे। जस्टिस गवई भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ लेंगे। 64 वर्षीय जस्टिस खन्ना ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में छह महीने का कार्यकाल पूरा किया है। जस्टिस गवई के 14 मई को शपथ लेने की उम्मीद है। जस्टिस गवई का शीर्ष अदालत के जज के रूप में छह महीने का कार्यकाल होगा। परंपरा के अनुसार, वर्मतान मुख्य न्यायाधीश अपना उत्तराधिकारी नामित करते हुए केंद्रीय कानून मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजता है। मंत्रालय ने पहले मुख्य न्यायाधीश से उनके उत्तराधिकारी के नाम का प्रस्ताव मांगा था। जस्टिस गवई लगभग छह महीने तक भारत के मुख्य न्यायाधीश रहेंगे क्योंकि वे नवंबर में रिटायर होने वाले हैं। जस्टिस केजी बालकृष्णन के बाद वे मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने वाले दूसरे दलित होंगे। उन्हें 2007 में देश के शीर्ष न्यायिक पद पर प्रमोट किया गया था। जस्टिस गवई का 6 महीने का कार्यकाल होगा और वह 23 नवंबर, 2025 को सेवानिवृत्त होंगे। वह मई 2019 में ही सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे और संयोग है कि इसी महीने में शीर्ष अदालत के चीफ जस्टिस हो जाएंगे। बीते साल 11 नवंबर को सीजेआई खन्ना ने पदभार संभाला था। उन्होंने केंद्रीय कानून मंत्रालय के समक्ष जस्टिस बीआर गवई के नाम की सिफारिश भेजी है। सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए रिटायरमेंट की उम्र 70 साल है। महाराष्ट्र के अमरावती जिले में जस्टिस बीआर गवई का जन्म 24 नवंबर, 1960 को हुआ था। वह बॉम्बे हाई कोर्ट का हिस्सा 14 नवंबर 2003 को बने थे, जब उन्हें अतिरिक्त जज की जिम्मेदारी मिली थी। इसके बाद नवंबर 2005 में ही वह हाई कोर्ट के स्थायी जज बन गए थे। जस्टिस गवई सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसलों का हिस्सा रहे हैं। इसके अलावा कई संवैधानिक बेचों में उन्हें शामिल किया गया है। आर्टिकल 370 हटाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं की जिस 5 मेंबर वाली संवैधानिक बेंच ने सुनवाई की थी, उसका एक हिस्सा जस्टिस गवई भी थे। इसके अलावा राजनीतिक फंडिंग के लिए लाई गई इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को खारिज करने वाली बेंच का भी वह हिस्सा थे। यही नहीं नोटबंदी के खिलाफ दायर अर्जियों पर सुनवाई करने वाली बेंच में भी वह शामिल थे। 24 नवंबर, 1960 को अमरावती में जन्मे गवई ने 16 मार्च, 1985 को एक वकील के रूप में नामांकन कराया। शुरुआत में उन्होंने 1987 तक दिवंगत बार राजा एस भोंसले, पूर्व महाधिवक्ता और हाई कोर्ट के जज के अधीन काम किया। फिर उन्होंने 1987 से 1990 तक बॉम्बे हाई कोर्ट में स्वतंत्र रूप से प्रेक्टिस किया। 1990 के बाद उन्होंने मुख्य रूप से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ में संवैधानिक और प्रशासनिक कानून पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रेक्टिस किया। उन्होंने नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती यूनिवर्सिटी के लिए स्थायी वकील के रूप में कार्य किया। उन्हें 14 नवंबर, 2003 को हाई कोर्ट के अतिरिक्त जज के रूप में नियुक्त किया गया था। फिर 12 नवंबर, 2005 को बॉम्बे हाई कोर्ट के स्थायी जज के रूप में नियुक्ति की गई थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मुंबई में मुख्य सीट और नागपुर, औरंगाबाद और पणजी में बेंचों में विभिन्न मामलों की अध्यक्षता की। उन्हें 24 मई, 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के जज के पद पर प्रमोट किया गया। उनकी रिटायरमेंट की तारीख 23 नवंबर, 2025 निर्धारित है।

आयुष लोक स्वास्थ चिकित्सा शिक्षा समीक्षा बैठक हुई

जेनेटिक काउंसलिंग में समुदाय का सहयोग लिया जाए : राज्यपाल पटेल समस्त रोगी और वाहकों को स्वास्थ सुविधा उपलब्ध कराना ही लक्ष्य: राज्यपाल पटेल आयुष लोक स्वास्थ चिकित्सा शिक्षा समीक्षा बैठक हुई भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों में जेनेटिक काउंसलिंग की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। जेनेटिक काउंसलिंग कार्य में मध्यस्थों की भूमिका की संभावनाओं पर कार्य करते हुए समुदाय का सहयोग प्राप्त किया जाए। उन्होंने कहा है कि सिकल सेल एनीमिया आनुवंशिक रोग है। रोग को खत्म करने के लिए वैवाहिक और गर्भधारण संबंधी सावधानियां के बारे में सामुदायिक जन जागृति की दिशा में प्रभावी पहल जरूरी है। जेनेटिक काउंसलिंग कार्य में समुदाय के नेतृत्व और पंचायत पदाधिकारियों का सहयोग भी लिया जाना चाहिए। राज्यपाल पटेल राजभवन में जनजातीय प्रकोष्ठ के तत्वावधान में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि रोगी को स्वस्थ बनाने के सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रमाणित औषधियों और चिकित्सा पद्धतियों को स्वीकार किया जाना चाहिए। मध्यप्रदेश के वनों में प्रचुर मात्रा में वन औषधियों की उपलब्धता है। इन औषधियों के सिकल सेल रोगी को स्वस्थ बनाने के अनुभवों और उपयोग के परीक्षणों के प्रमाणीकरण का कार्य व्यापक स्तर पर तेज गति से किया जाए। लक्ष्य समस्त रोगी और वाहकों को स्वास्थ सुविधा उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिकल सेल एक जटिल रोग है, जो लगभग 21 प्रकार के रोगों का कारण बन सकता है। जरूरी है कि रोग प्रबंधन के कार्य बहुआयामी और एकीकृत स्वरूप में किए जाएं। समस्त रोगियों की उपचार व्यवस्थाओं के साथ ही वाहकों को भी आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी सहयोग प्रदान किया जाए। स्वस्थ जीवन शैली के लिए मार्गदर्शन दिया जाए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि रोग नियंत्रण प्रयासों को व्यक्ति केंद्रित किया जाए। हर स्तर पर औषधियों की पर्याप्त उपलब्धता हो। समस्त रोगियों और वाहकों को उपचार,औषधि और जेनेटिक काउंसलिंग की सेवाएं उपलब्ध हो। उन्होंने छात्रावासों के भोजन में लौह तत्व की उपलब्धता वाले खाद्य पदार्थों को जोड़ने की जरूरत बताई है। गर्भवती महिलाओं की सिकल सेल जांच, जेनेटिक परामर्श और नवजात शिशुओं के वैक्सीनेशन के प्लेटफार्म के रूप में आंगनवाड़ियों को शामिल करने के लिए कहा है। बैठक में जनजाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता, प्रमुख सचिव आयुष डी.पी. आहूजा, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव एवं अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

बीआरटीएस कॉरिडोर को तोड़कर शुद्ध लाभ के रूप में निगम को 3.37 करोड़ रुपए की कमाई होगी

 इंदौर इंदौर नगर निगम ने बीआरटीएस कॉरिडोर के संपूर्ण सर्वे का कार्य पूर्ण कर लिया है। इस सर्वे में यह स्पष्ट हो गया है कि इस कॉरिडोर को तोड़ने में कितनी लागत आएगी और मलबा एवं अन्य सामग्री की बिक्री से कितनी आय होगी। सर्वे के अनुसार, कॉरिडोर को तोड़ने में लगभग 34.70 लाख रुपए का खर्च आएगा, जबकि मलबा और अन्य सामग्री की बिक्री से निगम को लगभग 3.71 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे। इस प्रक्रिया से शुद्ध लाभ के रूप में निगम को 3.37 करोड़ रुपए की कमाई होगी। राज्य सरकार द्वारा कॉरिडोर को हटाने का निर्णय लिया गया था, जिसे हाईकोर्ट की स्वीकृति भी मिल चुकी है। अब नगर निगम द्वारा तोड़ाई की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। कॉरिडोर तोड़ने में आएगा इतना खर्च सर्वे के मुताबिक, कॉरिडोर में आरसीसी बीम की कुल लंबाई 10475 मीटर, चौड़ाई 0.35 मीटर तथा गहराई 0.30 मीटर है, जिसका कुल घनफल 2199 घनमीटर है। इसे हटाने की लागत प्रति घनमीटर 786 रुपए के अनुसार 17.29 लाख रुपए होगी। वहीं, 18 बस शेल्टर होम की कुल लंबाई 344 घनमीटर है, जिस पर 8.20 लाख रुपए का खर्च आएगा। इसके अतिरिक्त अन्य छोटे आरसीसी निर्माण 32207 घनमीटर क्षेत्र में फैले हैं और स्क्रब्स 40105 घनमीटर में निर्मित हैं। इन निर्माणों को हटाने पर 3.25 लाख रुपए का खर्च आएगा। कॉरिडोर के दोनों ओर लगी स्टील की रैलिंग, जिनका कुल क्षेत्रफल 3.67 लाख वर्गमीटर है, इन्हें निकालने पर भी कुछ खर्च आएगा। कुल मिलाकर यह पूरा कार्य 34.70 लाख रुपए में संपन्न होगा। मलबा और सामग्री से होगी करोड़ों की कमाई नगर निगम द्वारा कराए गए आकलन के अनुसार, कॉरिडोर से लगभग 1.53 लाख किलो स्टील निकलेगा, जिसकी बिक्री से 46 लाख रुपए मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, 10000 मीटर लंबाई की रैलिंग और 90 प्रतिशत ए-श्रेणी का स्क्रैप मटेरियल निकलेगा, जिसकी बिक्री 45 रुपए प्रति किलो की दर से की जा सकेगी और इससे 2.31 करोड़ रुपए की कमाई होगी। वहीं, बस शेल्टर होम में प्रयुक्त अतिरिक्त आइटम की बिक्री से 90 लाख रुपए की आय होगी। इस प्रकार कुल मिलाकर निगम को 3.71 करोड़ रुपए की प्राप्ति होगी। दो महीने में होगा काम पूरा, टेंडर प्रक्रिया जल्द नगर निगम जनकार्य विभाग के प्रभारी और महापौर परिषद सदस्य राजेंद्र राठौर ने जानकारी दी कि कॉरिडोर को तोड़ने में लगभग दो महीने का समय लगेगा। निगम अब जल्द ही इस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा। ठेकेदारों को यह प्रस्ताव देना होगा कि वे तोड़ाई के काम के बदले निगम को कितनी राशि देंगे। जो ठेकेदार अधिकतम राशि का ऑफर देगा, उसे यह ठेका दिया जाएगा। ठेकेदार को ही मलबा और मटेरियल भी मिलेगा। निगम को कम से कम 3.37 करोड़ रुपए प्राप्त होने की संभावना है। इस प्रक्रिया से निगम को आर्थिक लाभ के साथ शहर के विकास कार्यों के लिए भी नई राह मिलेगी।

कोतवाली अनूपपुर पुलिस ने रात्रि काम्बिंग गश्त में 05 फरार वारंटी गिरफ्तार

अनूपपुर   पुलिस अधीक्षक अनूपपुर श्री मोती उर रहमान जी के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनूपपुर श्री इसरार मन्सूरी एवं एस.डी.ओ.पी. अनूरपुर श्री सुमित केरकेट्टा के मार्गदर्शन में थाना कोतवाली अनूपपुर द्वारा 05 फरार वारंटी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की गई। दिनांक 15.04.25 को पुलिस अधीक्षक अनूरपुर श्री मोती उर रहमान जी के द्वारा जिले में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण रखने हेतु समस्त थानों को काम्बिग गश्त के दौरान फरार आरोपी एवं बारण्टियों की पतासाजी हेतु आदेशित किया गया था, जिस पर कोतवाली अनूपपुर पुलिस द्वारा टी.आई. कोतवाली अरविन्द जैन के नेतृत्व में सहायक उपनिरीक्षक गोविन्द प्रसाद पनिका, प्रधान आरक्षक बृजभान सिहं, राजकुमार साहू, आरक्षक संजय सिहं, गिरीश चौहान के द्वारा माननीय न्यायालय पारूल जैन न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनूरपुर के प्रकरण क्र. 1131/19 धारा 294,323,506,324 भादवि के स्थाई वारण्टी नरबहू बैगा पिता शिकारी बैगा उम्र 44 वर्ष निवासी धनपुरी, माननीय न्यायालय श्रीमती चैनवती तराम मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनूपपुर के प्रकरण क्र. 13/18 धारा 294,323,341,34 भादवि के स्थाई वारण्टी जगनारायण उर्फ जम्मू पिता स्व. रजलू यादव उम्र 30 वर्ष निवासी छुलकारी, प्रकरण क्र. 1199/22 धारा 294,323,506 भादवि के स्थाई वारण्टी लालजी कोल पिता छक्केलाल कोल उम्र 27 वर्ष निवासी बहेराटोला चटुआ को गिरफ्तार किया गया है। इसी प्रकार माननीय न्यायालय श्रीमती चैनवती तराम मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनूपपुर के प्रकरण क्र. 66/24 धारा 341,294,323,325 भादवि के गिरफ्तारी वारण्टी तेजलाल कोल पिता रामसहाय कोल उम्र 30 वर्ष निवासी तिपानखोली बरी को गिरफ्तार किया गया तथा माननीय न्यायालय श्री पी सी गुप्ता विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम न्यायालय अनूपपुर के प्रकरण क्रमांक 57/24 धारा 296132,221,351(3) बी.एन.एस., 3(1)द, 3(1)घ, 3(2)(va) एससी एसटी एक्ट के गिरफ्तार वारण्टी अजय कुमार श्रीवास्तव पिता स्व. बद्रीप्रसाद श्रीवास्तव उम्र 47 वर्ष निवासी वार्ड न. 13 पुरानी बस्ती अनूपपुर को गिरफ्तार किया गया है एवं गिरफ्तार वारण्टियों को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है।

हरियाणा के झज्जर की बेटियों सुरुचि और मनु भाकर ने लास पालमास शूटिंग रेंज में कमाल कर दिया

नईदिल्ली हरियाणा के झज्जर की बेटियों सुरुचि और मनु भाकर ने लास पालमास शूटिंग रेंज में कमाल कर दिया। सुरुचि ने वर्ल्ड कप में लगातार दो स्वर्ण पदक जीतकर सबको चौंका दिया। वहीं दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर को रजत पदक से संतोष करना पड़ा है। जबकि चीन की याओ कियानक्सुन ने कांस्य पदक जीता। इस साल के दूसरे अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी खेल महासंघ (ISSF) विश्व कप राइफल/पिस्टल/शॉटगन चरण के पहले ही दिन 10 मीटर एयर पिस्टल महिला फाइनल में सुरुचि ने 24 शॉट्स में 243.6 अंक हासिल किए। वहीं, मनु उनसे 1.3 अंक पीछे रहीं। भारत पदक तालिका में शीर्ष पर महिला एयर पिस्टल में सुरुचि और मनु की पहले और दूसरे स्थान पर रही जोड़ी ने भारत को एक-एक स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक दिलाया। पुरुषों की स्पर्धा में सौरभ चौधरी ने कांस्य पदक जीता। इस प्रदर्शन से भारत पदक तालिका में शीर्ष पर रहा, जबकि चीन दूसरे स्थान पर रहा। 60 शॉट्स की क्वालिफिकेशन राउंड से ही यह साफ हो गया था कि भारतीय निशानेबाज अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। सुरुचि ने 582 अंकों के साथ दूसरा स्थान पाया, जबकि मनु 578 के साथ चौथे स्थान पर रहीं। तीसरी भारतीय सैण्यम 571 अंकों के साथ ग्यारहवें स्थान पर रहीं। दूसरी पांच शॉट सीरीज के बाद तीसरे नंबर रहीं सुरुचि फाइनल में भी सुरुचि लगातार शानदार निशाने लगा रही थीं। पहले पांच शॉट के बाद वह दूसरे स्थान पर पहुंच गईं। याओ ने शुरुआती बढ़त हासिल कर ली थी और मनु चौथे स्थान पर थीं। उरुग्वे की जूलियट जिमेनेज तीसरे स्थान पर थीं। दूसरी पांच शॉट सीरीज के बाद याओ ने हमवतन मेंग युफेई को पीछे छोड़ दिया, जो सिर्फ 0.1 से पीछे थी, जबकि सुरुचि तीसरे स्थान पर खिसक गई और मनु ने अपना चौथा स्थान बरकरार रखा। मनु के हाथ से गया स्‍वर्ण इसके बाद सुरुचि और मनु ने शानदार वापसी की, जबकि मेंग की परफॉर्मेंस गिर गई। लगातार कुछ बेहतरीन शॉट्स के बाद भारत की दोनों बेटियां पहले और दूसरे स्थान पर आ गईं। मनु की 16वीं और 17वीं शॉट थोड़ी कमजोर रहीं, जिससे शायद उन्हें स्वर्ण पदक से हाथ धोना पड़ा। सुरुचि पूरे मुकाबले में लगातार अच्छा प्रदर्शन करती रहीं। सुरुचि की शानदार फॉर्म बरकरार अंत में याओ ने अच्छी वापसी की और जूलियट को पीछे छोड़कर कांस्य पदक जीता। लेकिन आखिरी दो शॉट्स से पहले सुरुचि मनु से 0.7 अंक आगे थीं। इन दोनों आखिरी शॉट्स में भी सुरुचि ने मनु से बेहतर प्रदर्शन किया और दिसंबर में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता से शुरू हुई अपनी शानदार फॉर्म को बनाए रखा।

दमोह में मिशनरी मिशन अस्पताल गंभीर विवादों में, CMHO का बड़ा एक्शन, अस्पताल का लाइसेंस निलंबित

दमोह  दमोह के मिशन अस्पताल पर अब एक और एक्शन हुआ है, प्रशासन ने अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है और भर्ती मरीजों को तीन दिन में शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें अस्पताल का कार्डियोलोजिस्ट डॉ एन जान केम फर्जी निकला,  कैथ लैब फर्जी पाई गई जिसे सील किया गया है, प्रबंधन से जुड़े कई लोगों पर एफआईआर भी हो चुकी है। बीते कई दिनों से देश की सुर्ख़ियों में रहने वाली इस ईसाई मिशनरी द्वारा संचालित मिशन अस्प्ताल में फर्जी डाक्टर डॉ एन जान केम उर्फ नरेंद्र विक्रमादित्य यादव द्वारा की गई हार्ट सर्जरी और उनमें सात  मौतों के आरोपों के बीच लगातार अस्पताल पर एक्शन हो रहे हैं। 31 मार्च 2025 तक थी अस्पताल की लाइसेंस अवधि इस बीच आज बड़ी कार्यवाही को अंजाम देते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मिशन अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मुकेश जैन ने बताया कि मिशन अस्प्ताल के लाइसेंस की अवधि 31 मार्च 2025 तक थी नियमानुसार अस्पताल को लाइसेंस रिन्यूवल के लिए पोर्टल पर एप्लाय करना था, मिशन अस्पताल ने एप्लाय भी किया था लेकिन उसमे कमियां पाई गई है जिस वजह से अस्प्ताल का लाइसेंस निलंबित किया गया है। तीन दिन में मरीजों को डिस्चार्ज करने का आदेश जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश जैन ने बताया कि मिशन अस्पताल के लाइसेंस की अवधि 31 मार्च 2025 तक थी। नियमानुसार अस्पताल को लाइसेंस रिन्यूवल के लिए पोर्टल पर अप्लाई करना था, मिशन अस्प्ताल ने अप्लाई भी किया था लेकिन उसमे कमियां पाई गई है, जिस वजह से अस्पताल का लाइसेंस निलंबित किया गया है। डॉ. जैन के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए गए है कि तीन दिनों के भीतर वो यहां एडमिट मरीजों को डिस्चार्ज कर दे और यदि गंभीर मरीज हैं तो उन्हें जिला अस्पताल में दाखिल कराएं। डॉ जैन के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए गए है कि तीन दिनों के भीतर वो यहां एडमिट मरीजों को या तो डिस्चार्ज कर दे और यदि गम्भीर मरीज हैं तो उन्हें जिला अस्पताल में दाखिल कराएं। गौरतलब है कि फर्जी डाक्टर डॉ एन जान केम द्वारा हार्ट सर्जरी किए जाने के बाद सात मरीजों की मौत के बाद से इस अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग की पैनी निगाह है।  

बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के सामने तेज रफ्तार बस ओवरटेक करने के प्रयास में डिवाइडर से टकराकर पलटी

भोपाल बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के सामने बुधवार को दोपहर में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक बस डिवाइडर से टकराकर पलट गई। बस में 14 लोग सवार थे। राहगीरों ने जैसे-तैसे बस में से लोगों को बाहर निकाला। इस घटना में बस के ड्राइवर के पैर की हड्डी टूट गई। बस पलटने से नर्मदापुरम रोड पर लंबा जाम लग गया। खबर लिखे जाने तक पुलिस जाम खुलवाने का प्रयास कर रही थी। बुधवार को दोपहर में नर्मदापुरम रोड पर एक तेज रफ्तार बस पलट गई। बस के पलटने से नर्मदापुरम रोड जाम लग गया। बताया जा रहा है कि यह तेज रफ्तार बस एक अन्य बस को ओवरटेक कर रही थी, तभी वो अनियंत्रित हो गई और डिवाइडर से टकराकर पलट गई। घटना के वक्त बस में 14 लोग सवार थे। जिन्हें चोटें आई हैं। ड्राइवर भी गंभीर रूप से घायल हो गया है। उसके पैर की हड्डी टूट गई है। इत्तेफाक से जिस स्थान पर बस पलटी उसी के सामने निजी अस्पताल था, राहगीरों ने लोगों को उठा-उठाकर सीधे अस्पताल पहुंचाया, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार मिल गया। बस आनंद नगर से मंडीदीप फैक्ट्री जा रही थी। बस सोम डिस्टलरी की बताई जा रही है। लंबा जाम लग गया था काफी देर तक बस सड़क पर पड़ी रही, जिससे लंबा जाम लग गया। जाम लगने से कई वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वाहन रेंगते-रेंगते चल रहे थे। जाम का आलम यह था कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से लेकर आशीमा मॉल तक वाहनों की कतारें लग गई थी। तीन क्रेन से उठी बस घटना के बाद तीन क्रेन मंगाई गई, जिससे बस को सीधा किया गया और सड़क किनारे कर दिया गया। इसके बाद जाम खुल गया। लेकिन, काफी देर से वाहन रेंगते-रेंगते चल रहे हैं। 14 लोग सवार थे बस में बताया जा रहा है जिस समय बस पलटी तब उसमें 14 लोग सफर कर रहे थे। बस चालक और कंडक्टर बस पलटने में घायल हुए हैं। 14 लोगों को राहगीरों ने बाहर निकाला। वहीं ड्राइवर के पैरों की हड्डी टूट गई है। जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बस में सवार सभी लोग सोम डिस्टलरी के कर्मचारी बताए जा रहे हैं।

अली फजल और सोनाली बेंद्रे लीड रोल में रंगा-बिल्‍ला’ पर वेब सीरीज में आएंगे नजर

मुंबई ओटीटी की दुनिया में इन दिनों असल जिंदगी में घटी दिल दहला देने वाली अपराध की कहानियों पर खूब कॉन्‍टेंट परोसा जा रहा है। इसी कड़ी में अब 1978 के कुख्‍यात रंगा-बिल्‍ला केस पर भी वेब सीरीज बनाने की तैयारी है। दो बच्‍चों की किडनैपिंग और हत्‍या का यह ऐसा मामला था, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। खास बात यह है कि इस सीरीज में ‘मिर्जापुर’ के गुड्डू भैया यानी अली फजल और सोनाली बेंद्रे लीड रोल में होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, रंगा-बिल्‍ला पर बन रही इस वेब सीरीज की शूटिंग दिल्ली में शुरू हो चुकी है। प्रोडक्शन से जुड़े सूत्र के हवाले से कहा गया है कि मेकर्स की टीम कई महीनों से इस विषय पर रिसर्च कर रही है। सोनाली और अली फजल दोनों ही इस सीरीज में जांच अधिकारियों की भूमिका निभाएंगे। दिल्‍ली में सीरीज की शूटिंग अप्रैल के अंत तक जारी रहेगी। बीते दिनों ‘ब्‍लैक वारंट’ में दिखी थी हल्‍की झलक यह पहली बार है जब रंगा-बिल्ला केस पर एक पूरी वेब सीरीज बनाई जा रही है। हालांकि, इससे पहले ‘ब्‍लैक वारंट’ के कुछ एपिसोड में इसकी छोटी सी झलक जरूर देखने को मिली है। बताया जाता है कि यह एक स्‍टैंड अलोन वेब सीरीज होगी, जो इसी एक केस की घटनाओं को गहराई से दिखाएगी। इसी साल 2025 के अंत में रिलीज हो सकती है सीरीज रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में शूटिंग के बाद, सीरीज की शूटिंग उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर होगी और फिर अंत में मुंबई में आख‍िरी शेड्यूल शूट होगा। इसी साल जून और जुलाई शूटिंग पूरी कर सीरीज के पोस्ट-प्रोडक्शन का काम शुरू हो जाएगा। सब ठीक रहा तो इसी साल 2025 के अंत तक यह वेब सीरीज रिलीज हो जाएगी। क्‍या है रंगा-बिल्‍ला केस   यह केस असल में गीता और संजय चोपड़ा के अपहरण का है, जिसे रंगा-बिल्ला मामले के रूप में भी जाना जाता है। साल 1978 में दो कुख्‍यात अपराध‍ियों कुलजीत सिंह उर्फ रंगा कुश और जसबीर सिंह उर्फ बिल्ला ने भाई-बहन गीता और संजय का दिल्‍ली में अपहरण किया था। बाद में दोनों ने मिलकर उन बच्‍चों की क्रूरता से हत्या कर दी। हालांकि, बच्चों का अपहरण फिरौती के लिए किया गया था, लेकिन जब किडनैपर्स को पता चला कि बच्‍चों के पिता एक नौसेना अधिकारी हैं, तो उन्हें मार दिया गया। हत्‍या से पहले गीता के साथ किया था रेप! पुलिस की जांच में दोनों आरोपियों रंगा और बिल्‍ला ने शुरू में माना था कि हत्‍या से पहले उन्‍होंने गीता के साथ बलात्कार किया था। लेकिन बाद में वह अपने बयान से पलट गए। फोरेंसिक र‍िपोर्ट में भी रेप की पुष्टि नहीं हो सकी। दोनों अपहरणकर्ताओं को कोर्ट ने दोषी माना था और मौत की सजा सुनाई थी। 26 अगस्‍त 1978 को ऐसे हुई थी किडनैपिंग गीता चोपड़ा की उम्र महज साढ़े 16 साल थी। जबकि उनका भाई संजय 14 साल का। गीता चोपड़ा नई दिल्ली के जीसस एंड मैरी कॉलेज में सेकेंड ईयर की स्‍टूडेंट थीं और संजय मॉडर्न स्कूल में 10वीं में पढ़ता था। उनके पिता मदन मोहन चोपड़ा भारतीय नौसेना में कैप्टन थे। उनका परिवार धौला कुआं में ऑफिसर्स एन्क्लेव में रहता था। शनिवार 26 अगस्त 1978 को गीता और संजय को ऑल इंडिया रेडियो पर ‘युवा वाणी’ कार्यक्रम में भाग लेना था। उन्हें शाम 7 बजे तक संसद मार्ग स्थित ऑल इंडिया रेडियो के कार्यालय पहुंचना था। उनके पिता को कार्यक्रम के बाद रात 9 बजे ऑल इंडिया रेडियो के बाहर से बच्‍चों को वापस घर लेने के लिए आना था। लिफ्ट देने के बहाने भाई-बहनों को कार में बिठाया   गीता और उसका भाई संजय, दोनों घर से निकले। कॉलोनी के ही एक व्यक्ति ने उन्हें लिफ्ट दी और गोल डाकखाना तक छोड़ दिया। यहां से आकाशवाणी केंद्र थोड़ी ही दूरी पर था। दोनों टैक्सी के इंतजार में सड़क किनारे खड़े थे। तभी रंगा-बिल्ला पीले रंग की फिएट कार लेकर पहुंचे और लिफ्ट देने के बहाने दोनों को बिठा लिया। दोनों बच्‍चों को किडनैप करने के बाद रंगा और बिल्‍ला शंकर मार्केट और लोहिया अस्‍पताल होते हुए रिज इलाके में पहुंचे। यहां गाड़ी रोकर उन्होंने संजय की हत्या की। इसके बाद दोनों ने गीता के साथ रेप किया। इसके बाद बिल्ला ने तलवार से गीता की गर्दन पर वार किया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। रंगा-बिल्‍ला ने लाशों को उठाया और सड़क किनारे फेंककर वहां से भाग निकले। 8 सितंबर 1978 को ट्रेन से गिरफ्तार हुए थे रंगा और बिल्‍ला रंगा और बिल्‍ला को वारदात के कुछ हफ्ते बाद 8 सितंबर 1978 को ट्रेन में गिरफ्तार किया गया। उस दिन, दोनों कालका मेल में तब चढ़े थे, जब ट्रेन आगरा के पास यमुना नदी के पुल के पास धीमी हो गई थी। जिस डिब्बे में वे चढ़े, वह सैन्य कर्मियों के लिए रिजर्व था। इसलिए जब उनसे पहचान पत्र दिखाने के लिए कहा गया, तो उन्‍होंने सेना के जवानों के साथ हाथापाई शुरू कर दी और इस तरह दबोचे गए। दोनों ने कबूला गुनाह, लेकिन फिर पलट गए गिरफ्तारी के 14 दिन बाद 22 सितंबर को रंगा ने अपनी मर्जी से अपने अपराध कबूल कर लिए। उसने महानगर मजिस्ट्रेट के सामने सारे गुनाह मानते हुए बयान दर्ज किया। लेकिन फिर 20 नवंबर को बयान वापस ले लिया गया। इसी तरह, 19 अक्टूबर को बिल्ला ने भी अपना कबूलनामा दर्ज करवाया और फिर 27 अक्टूबर इससे पलट गया। कोर्ट ने रंगा-बिल्‍ला को सुनाई मौत की सजा कुलजीत सिंह उर्फ रंगा और जसबीर सिंह उर्फ बिल्ला को दिल्ली के एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी माना और मौत की सजा सुनाई गई। उन्हें धारा 363 (अपहरण), 365 (अवैध कारावास के साथ अपहरण), 366 (यौन संभोग के इरादे से एक महिला का अपहरण) और 367 (चोट पहुंचाने के इरादे से अपहरण) के तहत अपराधों के लिए भी दोषी ठहराया गया। सुप्रीम कोर्ट और राष्‍ट्रपति से लगाई थी गुहार दोनों दोषियों ने दिल्ली हाई कोर्ट में मौत की सजा के फैसले को चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने 16 नवंबर 1979 को फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा … Read more

भारतीय रेलवे की स्थापना के 16 अप्रेल को 172 साल पूरे हो गए, बुरहानपुर में दौड़ी थी रेलगाड़ी

बुरहानपुर आज भले ही वंदे भारत, नमो भारत, बुलेट ट्रेन इत्यादि की चर्चा हो रही हो, लेकिन भारतीय रेलवे के इतिहास में 16 अप्रैल का दिन बेहद खास है और हमेशा इस दिन की अहमियत बनी रहेगी। दरअसल, 1853 में 16 अप्रैल को ही देश में पहली ट्रेन चली थी। इस दिन को भारतीय रेल परिवहन दिवस के तौर पर मनाया जाता है। साल का यह 106वां दिन एक और कारण से भी सदा याद किया जाएगा। दूसरे विश्व युद्ध की त्रासदी के बीच दुनिया को हंसाने वाले चार्ली चैपलिन का जन्म आज ही के दिन हुआ था।  भारतीय रेलवे की स्थापना के 16 अप्रेल को 172 साल पूरे हो रहे हैं। आज ही के दिन 1853 में देश में पहली यात्री रेलगाड़ी मुंबई में बोरी बंदर से ठाणे तक चली थी। लेकिन रेलवे के मामले में बुरहानपुर का इतिहास भी प्राचीन है। 157 साल पहले बुरहानपुर स्टेशन पर ट्रेनों का स्टॉपेज शुरू हो गया था।  शहर के हिस्टोरियन होशंग हवलदार बताते हैं कि 1866 में बुरहानपुर स्टेशन पर पटरी डल गई थी और 1868 में गाडियों का स्टॉपेज मिल गया था। उसी समय 8 गाडिय़ों का स्टॉपेज मिल गया था, जिसमें पैसेंजर, पंजाब मेल, कलकत्ता, लाहोर एक्सप्रेस, कटनी भुसावल पेसेंजर, इटारसी भुसावल पैसेंजर और दो डाक (माल) गाड़ी थी, जिसके आधे डिब्बे यात्रियों के लिए भी हुआ करते थे। कुछ समय बाद ही दूसरी रेलवे लाइन भी डल गई थी। कपास थी मुख्य उपज बुरहानपुर में पहले कपास की बड़ी मंडी हुआ करती थी। कपास की गठानों की सप्लाय के लिए प्रमुख रूप से गाडियों का स्टॉपेज शुरू किया, ताकि उद्योग को बढ़ावा मिल सके। इसके बाद केले का भी सप्लाय हुआ। अब ये है स्टेशन की हालत बुरहानपुर रेलवे स्टेशन की हालत पहले कुछ खास नहीं थी। 2014 के बाद देश के 7568 रेलवे स्टेशनों में से 104 को मॉडल स्टेशन बनाने के लिए चयनित किए गए, जिसमें बुरहानपुर स्टेशन का नाम भी शामिल हुआ। इसके बाद स्टेशन की तस्वीर बदल गई। आगे अब टू लेन से चार लेन की योजना है। महाराष्ट्र सीमा समाप्त होने के बाद भुसावल रेलवे मंडल का मप्र में यह पहला रेलवे स्टेशन है। यहां अब 6 हजार यात्री प्रतिदिन आवागमन करते हैं। 45 गाडियों का आवागमन हैं, जिसमें लगभग 30 गाडियों का स्टॉपेज है, जिसमें साप्ताहिक ट्रेन शामिल है। देश के कई हिस्सों से बुरहानपुर से रेलवे की कनेक्टीवीटी है। देश दुनिया के इतिहास में 16 अप्रैल की तारीख पर दर्ज महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है: 1853 : भारत में पहली रेल बम्बई (अब मुंबई) से ठाणे के बीच चली। 1889 : अपने बेहतरीन अभिनय से दुनिया को हंसाने वाले चार्ली चैपलिन का जन्म। 1919 : अमृतसर में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड में मरने वालों को श्रद्धांजलि देने के लिए महात्मा गांधी ने प्रार्थना सभा और उपवास की घोषणा की। 1945: एक सोवियत पनडुब्बी के हमले के कारण जर्मन शरणार्थियों से भरा मालवाहक पोत डूब गया, जिससे करीब 7000 लोग मारे गए। 1964: ब्रिटेन के चर्चित अपराधों में शामिल ‘द ग्रेट ट्रेन रॉबरी’ के लिए 12 लोगों को 307 साल की सजा सुनाई गई। 1976 : आठ वर्ष तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और 13 वर्षों तक लेबर पार्टी के नेता रहे, हैरल्ड विल्सन ने त्यागपत्र दिया। उनके इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में तूफान ला दिया। 1988 : उत्तरी इराक के कुर्द आबादी वाले शहर हलबजा पर हुए गैस हमले में हजारों लोगों की मौत हो गई जबकि बहुत से लोग इसके प्रभाव से बीमार हो गए। 1988 : फलस्तीनी मुक्ति संगठन के शक्तिशाली नेता खलील अल वजीर उर्फ अबु जिहाद की ट्यूनीशिया के ट्यूनिस में उनके घर में हत्या कर दी गई। 1990 : बिहार की राजधानी पटना के निकट एक यात्री गाड़ी के दो डिब्बों में विस्फोट के बाद कम से कम 80 लोगों की जान गई और 65 अन्य घायल हुए। 2002 : दक्षिण कोरिया में एक विमान दुर्घटना में 120 लोग मारे गए। 2004 : पाकिस्तान के दौरे पर गई भारतीय क्रिकेट टीम ने रावलपिंडी टेस्ट जीतकर मेजबान देश को श्रृंखला में 2-1 से मात दी। 2020 : दुनियाभर में कोरोना वायरस महामारी से संक्रमण के 20,83,820 से अधिक मामलों की पुष्टि हुई, जिनमें से 1,37,500 लोगों की मौत हो गई। 2023 : सूडान में सेना और अर्द्धसैनिक बल के बीच झड़प में एक भारतीय समेत 56 लोगों की मौत। 2024 : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में मुठभेड़ में 29 नक्सली मारे गए, तीन जवान घायल।

ग्वालियर : हाईकोर्ट ने नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त विवेक कुमार सिंह का गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया

ग्वालियर ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त विवेक कुमार सिंह का गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। यदि 5 मई को उपस्थित नहीं होते हैं तो उनको गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करना होगा। लोकायुक्त पुलिस ने नगर निगम के जल प्रदाय घोटाले में दोषमुक्त हुए आरोपियों के खिलाफ अपील दायर की है, जिसमें 8 आरोपी उपस्थित हो गए, लेकिन तत्कालीन नगर निगम आयुक्त उपस्थित नहीं हुए हैं। कोर्ट ने तीन आरोपियों को सजा सुनाई विशेष सत्र न्यायालय ने 29 नवंबर 2021 को नगर निगम के जल प्रदाय विभाग में हुए घोटाले के मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने तीन आरोपियों को सजा सुनाई। तत्कालीन निगमायुक्त विवेक सिंह, केके श्रीवास्तव, आरके बत्रा, कुशलता शर्मा, हरि सिंह खेनवार, सत्येंद्र सिंह भदौरिया, मोहित जैन, सुनील गुप्ता, रजत जैन को दोषमुक्त कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की है। हाईकोर्ट ने अपील सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है, नोटिस जारी कर आरोपियों को तलब किया है। लोकायुक्त पुलिस के अधिवक्ता सुशील चतुर्वेदी ने बताया कि विचारण न्यायालय ने साक्ष्य व गवाही को नहीं देखा है। निगमायुक्त ने अपने अधिकारों का हस्तांतरण कर दिया था, लेकिन उनके संज्ञान में पूरा मामला था। इस पूरे घोटाले में वह भी जिम्मेदार है। विचारण न्यायालय ने फैसला देने में गलती की है। इसे निरस्त किया जाए। क्या है मामला दरअसल नगर निगम के जल प्रदाय विभाग में 2004-05 में 2 करोड़ रुपए से अधिक व्यय किया गया। 1805 नस्तियां बनाई गई। इन नस्तियों में 1.69 करोड़ रुपए भुगतान शेष पाया गया। इसकी शिकायत सुधीर कुशवाह ने लोकायुक्त में की। पुलिस ने इस मामले की जांच की तो जल प्रदाय विभाग में घोटाला सामने आया। अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज कर तत्कालीन निगमायुक्त विवेक सिंह सहित 12 आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया।

एमपी ट्रांसको ने मानव जीवन के लिए घातक अनाधिकृत निर्माण तोड़े

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांस्को) की एक्स्ट्रा हाईटेंशन लाइन के समीप के उस निर्माण को आज एमपी ट्रांसको के अधिकारियों की उपस्थिति में तोड़ा गया जिसके कारण कुछ दिन पूर्व शारदा नगर ,नारियल खेड़ा, भोपाल से गुजर रही 132 के व्ही भोपाल-लालघाटी एक्स्ट्रा हाई टेंशन लाइन के संपर्क में आने के कारण दो रहवासी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मकान में शेड लगाने के दौरान हुआ था हादसा एम.पी. ट्रांसको के भोपाल में अतिरिक्त मुख्य अभियंता एस. के. दुबे ने बताया कि विगत 12 अप्रैल को शारदा नगर, नारियल खेड़ा, भोपाल क्षेत्र में 132 केवी भोपाल-लालघाटी एक्स्ट्रा हाई टेंशन लाइन में ट्रिपिंग आई थी। इससे संबंधित लाइन में 9 मिनिट का व्यवधान रहा। लाइन पेट्रोलिंग करने पर यह संज्ञान में आया कि उक्त क्षेत्र से जा रही एक्स्ट्रा हाईटेंशन लाइन के बिल्कुल समीप एक मकान में सीमेंट की चादर का शेड लगाने के दरम्यांन यह हादसा हुआ, जिसमें दो व्यक्ति फरहान खान एवं गुडडू खान इस एक्सट्रा हाईटेंशन लाइन के इंडक्शंन जोन में आने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद क्षेत्र में मानव जीवन को सुरक्षित रखने के लिए एम.पी. ट्रांसको द्वारा यह कार्रवाई की गई। इन निर्माणों को तोड़ा गया एम.पी. ट्रांसको द्वारा की गई कार्रवाई में गुडडू खान मकान नंबर 470, खलील खान मकान नंबर 448 एवं नसीम खान मकान नंबर 361 के शारदा नगर, नारियल खेड़ा स्थित आवासों के अनाधिकृत एवं मानव जीवन के लिए घातक निर्माणों को तोड़ा गया। भोपाल में दिये गये 900 नोटिस एसीई दुबे ने बताया कि भोपाल में ऐसे लगभग 275 स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां किए गए निर्माण मानव जीवन के लिए घातक और असुरक्षित है। यहाँ अनाधिकृत निर्माण पाया गया है, उनके भवन मालिकों को करीब 900 नोटिस विगत वर्षों में जारी किये गए हैं। हादसों के लिए अति संवेदनशील इन क्षेत्रों के मकान मालिकों को पूर्व में भी नोटिस जारी किये गए हैं। अब उन्हें पुनः नोटिस देने के साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी समझाइश दी जा रही है। संवेदनशील क्षेत्र भोपाल में मानव जीवन के लिए घातक और संवेदनशील एकस्ट्रा हाईटेंशन लाइन के समीप जहां निर्माण हुए हैं उनमें गोविंदपुरा इंड्रस्टियल एरिया, करौंद, रतनपुरा कॉलोनी, देवकीनगर, लालघाटी, नारियल खेड़ा, जैन कॉलोनी, आनंद नगर, मारूति सुजुकी पेंटिग फैक्ट्री, साईनाथ इंटरप्राईजेस, विश्वकर्मा नगर शिव नगर, बैरागढ़, रतन कालोनी शारदा नगर के क्षेत्र शामिल हैं। कार्रवाई में ये रहे शामिल अनाधिकृत निर्माण को तोड़ने की कार्रवाई में एमपी ट्रांसको के कार्यपालन अभियंता रवि चौरसिया, सहायक अभियंता अंकित महरोलिया, वरिष्ठ लाइन मैन स्टाफ पूनाजी गलफाट, राम प्रीत, आउटसोर्स कर्मी सतीश और राजेन्द्र भारती सहित अन्य शामिल रहे, जिन्होने पूरी सजगता और सतर्कता से मानव जीवन के लिए घातक इन निर्माणों को तुड़वाकर उनका जीवन सुरक्षित किया।  

भारत समेत G4 देशों ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में मुस्लिम देश के आरक्षण के प्रस्‍ताव को खारिज कर दिया

वॉशिंगटन  भारत समेत जी 4 देशों ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में मुस्लिम देश के आरक्षण के प्रस्‍ताव को खारिज कर दिया है। जी 4 देशों ने धार्मिक आधार पर स्‍थायी सदस्‍यता देने के किसी भी प्रस्‍ताव को संयुक्‍त राष्‍ट्र के नियमों के खिलाफ बताया। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर लंबे समय से मांग चल रही है। भारत समेत जी 4 के देशों ब्राजील, जर्मनी और जापान ने तुर्की के राष्‍ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान, पाकिस्‍तानी पीएम शहबाज शरीफ और सऊदी प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान के इस्‍लामिक सपने को तोड़ दिया है। संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के स्‍थायी प्रतिनिधि पी हारिश ने मंगलवार को जी4 देशों की ओर से कहा कि धर्म के आधार पर सुरक्षा परिषद में प्रतिन‍िध‍ित्‍व मंजूर नहीं है। भारतीय प्रतिनिधि ने तुर्की या उसके इस्‍लामिक दुनिया का खलीफा बनने का सपना देख रहे राष्‍ट्रपति एर्दोगान का नाम नहीं लिया। इससे पहले पिछले महीने तुर्की के राष्‍ट्रपति एर्दोगान ने मांग की थी कि सुरक्षा परिषद में एक इस्‍लामिक देश को भी स्‍थायी सदस्‍यता दी जाए। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्‍तान या सऊदी के नेतृत्‍व वाले इस्‍लामिक संगठन ओआईसी का भी नाम नहीं लिया। इन दोनों ने मांग की थी कि ‘इस्‍लामिक उम्‍मा’ को भी सुरक्षा परिषद के सभी वर्गो में सदस्‍यता दी जाए। हारिश ने कहा कि धार्मिक फैक्‍टर को लाने से सुरक्षा परिषद के अंदर सुधारों को लेकर चल रही प्रक्रिया में और ज्‍यादा जटिलता आ जाएगी। तुर्की के राष्‍ट्रपति ने खेला इस्‍लामिक कार्ड हारिश ने जी4 देशों की ओर से संयुक्‍त राष्‍ट्र के अंदर सुधारों को लेकर एक अंतरसरकारी वार्ता के दौरान यह बयान दिया। उन्‍होंने भारत के प्रतिनिधि होने के नाते जोर देकर कहा कि मुस्लिम आरक्षण क्षेत्रीय प्रतिनिध‍ित्‍व के सिद्धांत को कमजोर करेगा जिसे संयुक्‍त राष्‍ट्र ने स्‍वीकार किया है। तुर्की के ऑटोमन साम्राज्‍य को फिर से लाने की कोशिश में लगे एर्दोगान ने एक इफ्तार पार्टी में पिछले महीने कहा था, ‘संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के अंदर वीटो पावर के साथ एक इस्‍लामिक देश का होना न केवल आवश्‍यकता है, बल्कि एक दायित्‍व भी है।’ जी4 देशों का यह समूह सकारात्‍मक और आशावादी सोच वाले तथा सुधार समर्थक देशों का समूह है जो कई साल सुरक्षा परिषद के स्‍थायी सदस्‍यों की संख्‍या को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। हारिश ने कहा कि जी4 एक सिफारिशी ग्रुप है जो सार्थक सुधार के लिए काम कर रहा है और किसी खास सुझाव को नहीं देता है कि किसे स्‍थायी सदस्‍य बनाया जाए। जी4 इसे संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा पर छोड़ता है। उन्‍होंने कहा कि महासभा को लोकतांत्रिक आधार पर सुरक्षा परिषद में सुधार करके नए स्‍थायी सदस्‍य को शामिल करना चाहिए। सुरक्षा पर‍िषद में सुधार का जी4 प्रस्‍ताव हारिश ने यह भी कहा कि जी4 देशों का मानना है कि सुरक्षा परिषद के सदस्‍यों की संख्‍या को बढ़ाना चाहिए और क्षेत्रीय प्रतिनिध‍ित्‍व को देना चाहिए। भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद के सदस्‍यों की संख्‍या को 15 से 25 या 26 करना चाहिए। जी4 के प्रस्‍ताव के मुताबिक सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सदस्‍यों की संख्‍या को बढ़ाकर 5 से 11 करना चाहिए, वहीं अस्‍थायी सदस्‍यों की संख्‍या को 10 से बढ़ाकर 14 या 15 करनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि 6 नए स्‍थायी सदस्‍यों में प्रत्‍येक को एशिया-प्रशांत, लैट‍िन अमेरिका, कैरेबियाई देश और पूर्वी यूरोप को एक-एक सीट दी जाए। वहीं अफ्रीका को कम से कम एक या दो सीट दी जाए। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्‍तान को भी जमकर फटकार लगाई जो सुरक्षा परिषद में सुधार का विरोध कर रहा है। पाकिस्‍तान स्‍थायी सदस्‍यता दिए जाने का विरोध कर रहा है ताकि भारत को रोका जा सके। पाकिस्‍तान इस्‍लामिक उम्‍मा को भी भड़काने का काम कर रहा है। अगर धर्म के आधार पर देखें तो चीन जहां आंशिक रूप से वामपंथी देश है, वहीं बाकी 4 स्‍थायी सदस्‍य ईसाई बहुल देश अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस हैं।

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