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कौशल विकास को लेकर विकसित बस्तर की ओर अग्रसर है छत्तीसगढ:बस्तर संभाग में मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 85 कोर्स पंजीकृत

रायपुर : कौशल विकास ही स्थायी रोजगार का आधार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बस्तर अब शांति की ओर बढ़ चुका है, अब हमारा लक्ष्य है – लोगों को सम्मानजनक आजीविका देना : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कौशल विकास को लेकर विकसित बस्तर की ओर अग्रसर है छत्तीसगढ:बस्तर संभाग में मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 85 कोर्स पंजीकृत नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत बस्तर संभाग के 24 कैंप के 95 चिन्हित ग्रामों के 457 युवाओं को दिया जा चुका है कौशल प्रशिक्षण आत्मसमर्पित माआवादियों में से 222 को रोजगार के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है , 62 अन्य है प्रशिक्षणरत रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  जगदलपुर में आयोजित विकसित बस्तर की ओर कार्यक्रम में बस्तर में कौशल विकास और रोजगार को लेकर सरकार की दूरदृष्टि साझा की। उन्होंने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि जब हम सांसद थे, तब देश में कौशल विकास मंत्रालय का गठन हुआ – और आज यह विभाग देश के युवाओं के भविष्य निर्माण में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने बस्तर में चल रहे कौशल विकास प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्किलिंग केवल एक सेक्टर तक सीमित नहीं है — भाषा प्रशिक्षण, विदेशी रोजगार, हस्तशिल्प, कृषि, फूड प्रोसेसिंग, पर्यटन, कंस्ट्रक्शन, टेक्नोलॉजी जैसे अनेक क्षेत्रों में कौशल विकास संभव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब शांति की ओर अग्रसर है। शांति के बाद सबसे बड़ी चुनौती है – यहां के युवाओं को रोजगार देना। और यह कार्य हम पूर्ण निष्ठा से करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार न केवल कौशल विकास पर ध्यान देगी, बल्कि स्थानीय लोगों को स्थानीय संसाधनों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कार्य करेगी। इससे बस्तर का युवा न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि पूरे देश और दुनिया में अपने हुनर की पहचान बना सकेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकसित बस्तर की ओर बढ़ते हुए संभाग में युवाओं के कौशल उन्नयन और रोजगार प्रशिक्षण के लिए कौशल विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना, पीएम कौशल विकास योजना , पीएम विश्वकर्मा योजना और नियद नेल्लानार योजना का संचालन किया जा रहा है। इन रोजगार प्रशिक्षण में विशेषकर नक्सल प्रभावित युवाओं को प्राथमिकता दिए जाने का प्रस्ताव शामिल है। बस्तर संभाग में मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत 85 कोर्स पंजीकृत है। पोर्टल के माध्यम से इनका पूर्णता आनलाइन क्रियान्वयन किया जाता है। सभी जिलों में आवासीय प्रशिक्षण की सुविधा है। वर्तमान में 64 व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदाता (VTP) है । योजना के अंतर्गत अब तक 90, 273 युवा प्रशिक्षित हो चुके है। प्रशिक्षित युवाओं में से 39,137 युवा नियोजित है।  32 कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना की जा चुकी है जिसमे आगामी समय में 4,915 युवाओं को प्रशिक्षण एवं रोजगार हेतु कार्ययोजना शामिल है। वर्ष 2025-26 के प्रस्तावित लक्ष्य के अनुसार 456 नियोक्ताओं के माध्यम से 4 हजार 915 युवाओं को प्रशिक्षण,  5 हजार 875 रोजगार के अवसर प्रदान किया जाना है। इसके लिए महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, नंदी फाउंडेशन, MSDC इंटरनेशनल  और नीति आयोग जैसी संस्थाओं से अनुबंध किया गया है। बस्तर संभाग में पीएम कौशल विकास योजना के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में 64% लक्ष्य पूर्ण किया गया तथा पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत अब तक 6 हजार 123 लोगों को प्रशिक्षित किया गया है। विकसित बस्तर की ओर बढ़ते हुए नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत बस्तर संभाग के 24 कैंप  के 95 चिन्हित ग्रामों के 457 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके साथ ही इन ग्रामों में 5 हजार 598 युवाओं का रोजगार प्रशिक्षण के लिए सर्वे किया जा चुका है। योजना के अंतर्गत आत्मसमर्पित माआवादियों में से 222 को रोजगार के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है जबकि  62 प्रशिक्षणरत है। जगदलपुर में आयोजित विकसित बस्तर की ओर परिचर्चा में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, विधायक किरण सिंह देव, विनायक गोयल, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कौशल विकास विभाग के सचिव भारती दासन, कौशल विकास विभाग के संचालक विजय दयाराम के., बस्तर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, कौशल विकास से जुड़ी संस्थाओं के लोग उपस्थित थे।

आज आमने- सामने होगी दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स की टीम, दोनों टीमों को जीत की दरकार

नई दिल्ली आईपीएल 2025 की शानदार शुरूआत के बाद अपने मैदान पर पहली हार झेलने वाली दिल्ली कैपिटल्स इस झटके को भुलाकर राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ बुधवार को फिर जीत की राह पर लौटने के इरादे से उतरेगी। लगातार चार मैच जीतने के बाद अक्षर पटेल की कप्तानी वाली दिल्ली टीम को रविवार को अरुण जेटली स्टेडियम पर मुंबई इंडियंस ने हराया। इस हार के बाद दिल्ली शीर्ष स्थान से खिसककर दूसरे स्थान पर पहुंच गई। दूसरी ओर राजस्थान रॉयल्स छह में से सिर्फ दो मैच जीतकर आठवें स्थान पर है। संजू सैमसन की कप्तानी वाली टीम लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई है। मुंबई इंडियंस के खिलाफ दिल्ली के लिए घरेलू क्रिकेट के दिग्गज करुण नायर ने पदार्पण करते हुए 40 गेंद में 89 रन बनाए। एक समय दिल्ली का स्कोर 11वें ओवर में एक विकेट पर 119 रन था, लेकिन इसके बाद 74 रन के भीतर आखिरी नौ विकेट गंवा दिए। उसके तीन बल्लेबाज 19वें ओवर की आखिरी तीन गेंदों पर रन आउट हुए और 12 रन से पराजय का सामना करना पड़ा। दिल्ली के पास इस हार का दुख मनाने का समय नहीं था, क्योंकि दो दिन के भीतर ही उसे रॉयल्स के खिलाफ कल खेलना है। दिल्ली के लिए एक बार फिर सफलता की कुंजी स्पिनर साबित हो सकते हैं। पिछले मैच में हार के बावजूद कुलदीप यादव और 20 वर्ष के विपराज निगम ने शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि, अक्षर उतना प्रभावित नहीं कर सके हैं और छह मैचों में 14 ओवर डालकर भी उन्हें विकेट नहीं मिली है। इसके अलावा उन्होंने 10 से अधिक की दर से प्रति ओवर रन दिये हैं। बल्लेबाजी में भी वह छाप नहीं छोड़ पाये हैं। पिछले सत्र में आक्रामक प्रदर्शन करने वाले जैक फ्रेजर मैकगर्क लय में नहीं हैं और अभी तक सिर्फ 46 रन बना पाये हैं। फाफ डुप्लेसी चोट के कारण बाहर है और नायर की जगह टीम में पक्की लग रही है। मध्यक्रम में केएल राहुल ने दारोमदार संभाल रखा है। उनका साथ देने के लिए ट्रिस्टन स्टब्स, आशुतोष शर्मा और निगम हैं। दूसरी ओर रॉयल्स की समस्या प्रदर्शन में निरंतरता का अभाव है। यशस्वी जायसवाल सिर्फ पिछले मैच में आरसीबी के खिलाफ अर्धशतक बना सके हैं। कप्तान सैमसन अभी तक एक भी अच्छी पारी नहीं खेल पाए, जबकि रियान पराग और ध्रुव जुरेल का बल्ला भी खामोश है। गेंदबाजी में जोफ्रा आर्चर महंगे साबित हुए हैं। संदीप शर्मा को छोड़कर कोई भी गेंदबाज रनगति पर अंकुश नहीं लगा पाया है। टीमें इस प्रकार हैं दिल्ली कैपिटल्स: अक्षर पटेल (कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), जेक फ्रेजर-मैकगुर्क, करुण नायर, फाफ डु प्लेसी, डोनोवन फरेरा, अभिषेक पोरेल (विकेटकीपर), ट्रिस्टन स्टब्स (विकेटकीपर), समीर रिजवी, आशुतोष शर्मा, दर्शन नालकंडे, विप्रज निगम, अजय मंडल, मनवंत कुमार, त्रिपुराना विजय, माधव तिवारी, मिशेल स्टार्क, टी नटराजन, मोहित शर्मा, मुकेश कुमार, दुष्मंता चामीरा, कुलदीप यादव। राजस्थान रॉयल्स: संजू सैमसन (कप्तान), रियान पराग, शुभम दुबे, वैभव सूर्यवंशी, कुणाल राठौड़, शिमरोन हेटमायर, यशस्वी जायसवाल, ध्रुव जुरेल, नितीश राणा, युद्धवीर सिंह, जोफ्रा आर्चर, महेश थीक्षाना, वानिंदु हसरंगा, आकाश मधवाल, कुमार कार्तिकेय सिंह, तुषार देशपांडे, फजलहक फारूकी, क्वेना मफाका, अशोक शर्मा, संदीप शर्मा। मैच शाम 7:30 पर शुरू होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महा नाट्य के माध्यम से रंगमंच के महत्व से भी पूरे राष्ट्र को अवगत करवा दिया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर विक्रम संवत जिनके नाम पर प्रारंभ हुआ, ऐसे कल्याणकारी शासक रहे सम्राट विक्रमादित्य के सम्मान में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसमें विक्रम विश्वविद्यालय का नामकरण, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय करने का निर्णय भी शामिल है। इसके पूर्व वार्षिक विक्रम उत्सव की शुरुआत कर राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य को यथोचित सम्मान देने का कदम उठाया था। इस क्रम में हाल ही में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस महा नाट्य के माध्यम से रंगमंच के महत्व से भी पूरे राष्ट्र को अवगत करवा दिया है। वैसे तो इस डिजिटल युग में सूचना और मनोरंजन के कई फॉर्मेट लोकप्रिय हो चुके हैं, लेकिन भारतीय नाट्यशास्त्र की सुदृढ़ और समृद्ध परंपरा से जन-जन को विशेष रूप से युवा वर्ग परिचित करवाने के लिए नई दिल्ली में सम्राट विक्रमादित्य नाटक का निरंतर तीन दिन मंचन होना महत्व रखता है। बहुत दिन नहीं हुए जब हम डिजिटल तकनीक को आत्मसात कर बैठे थे। ऐसा लगता था कि पारंपरिक कलाओं को हम भूल रहे हैं। लेकिन मध्यप्रदेश से जो संदेश पूरे राष्ट्र में पहुंचा है वह यह है कि अभिनय, प्रकाश संयोजन, संगीत, वेशभूषा और विशाल मंच के माध्यम से हमारे पौराणिक चरित्रों का जीवन सामने आना चाहिए। हमारे वे आदर्श शासक और आराध्य जो युवा पीढ़ी द्वारा भुला दिए गए हैं या युवा पीढ़ी को हमने उनसे परिचित ही नहीं करवाया तो इसमें कसूर वर्तमान पीढ़ी का भी है। युवाओं के पास समय भी है। सृजन की शक्ति भी है, जिज्ञासा का तत्व भी विद्यमान है तो फिर उन्हें इन राष्ट्र के आदर्श प्रतीकों की जानकारी से वंचित क्यों रखा जाए और बच्चे भी कलाओं के प्रति रुचि रखते हैं, वे भी इस विधा के लिए जिज्ञासु हो सकते हैं। यदि उन्हें महान व्यक्तित्वों के बारे में ज्ञानवर्धक विवरण देने वाले नाटक मंचन से जोड़ा जाए। प्रतापी शासक राजा भोज और अन्य सेनानियों की गाथा भी आएगी मंच पर भोपाल में कुछ वर्ष पूर्व लाल परेड मैदान पर जाणता राजा का मंचन हुआ था, जिसमें शिवाजी महाराज के कृतित्व को दर्शाया गया था। इस नाटक के मंचन से यह जागृति प्रारंभ हो जाती लेकिन वह लहर न बन सकी। एकाध मंचन हुआ और मामला समाप्त हो गया। देश की राजधानी में लाल किले पर तीन दिन लगातार सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है। यह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का नवाचार है। हमारे ऐसी दानवीर शासक जिन्होंने वीरता और न्याय के क्षेत्र में भी दृष्टांत स्थापित किए, वे पाठ्य-पुस्तकों में तो आ गए हैं लेकिन पाठ्य-पुस्तकों से बाहर मंच तक क्यों न पहुंचें। आखिर युवा पीढ़ी को उनकी विस्तार पूर्वक जानकारी क्यों नहीं दी जाना चाहिए? यह नवाचार आगे जाएगा अन्य राज्यों में भी न केवल सम्राट विक्रमादित्य के कार्यों की जानकारी, नागरिकों को मिलेगी बल्कि भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण, राजा भोज, सम्राट अशोक और स्वतंत्रता सेनानियों सहितभारत के गौरव रहे अन्य महापुरुषों के कृतित्व की गाथा बताने वाली नाट्य प्रस्तुतियां होंगी। दिल्ली में हुए नाट्य मंचन सफल रहे हैं। हाथी, घोड़ों के उपयोग और बीसियों की संख्या में कलाकार दल के साथ इतिहास के उस दौर को जीवंत करना साधारण कार्य नहीं है। संस्कृति विभाग, विक्रमादित्य पीठ, सामाजिक संगठन और सांस्कृतिक संगठन इसके लिए एकजुट हुए। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने इन कार्यक्रमों के लिए जो समन्वय किया उसकी भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशंसा की है। युवाओं को मिलेगी प्रेरणा कलाओं के विकास के साथ भारतीय गौरव का स्मरण करते हुए देश की प्राचीन संस्कृति, भारतीय अस्मिता को सामने लाना आवश्यक है। प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ कहने के लिए विरासत से विकास की बात नहीं कही, वे चाहते हैं इसका दायरा विस्तृत हो। हमारे युवा हेरिटेज वॉक करें। वे किलों और स्मारकों को देखें। तत्कालीन शासकों के शौर्य से परिचित हों। भारतीय स्वाभिमान के प्रसंग चर्चा का विषय बनें। सिर्फ बंद कमरों में संगोष्ठी न हो बल्कि भारत के ऐसे गौरवशाली व्यक्तित्व बच्चों के बीच भी जाने जाएं। स्कूली पाठ्यक्रम से लेकर विद्यालयों, महाविद्यालय के पाठ्यक्रमों में सगर्व उनका उल्लेख हो और नाट्य मंचन उस थ्योरी को प्रैक्टिकल रूप में रंगमंच पर प्रस्तुत करे। महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का मंचन युवाओं को रंगमंच विधा की ओर आकर्षित करने के लिए प्रेरित करेगा। रंगमंच कलाकार भी हुए उत्साहित रंगमंच से जुड़े देश के हजारों कलाकारों का मन हर्षित है और वे मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार का भाव रखते हैं, जो उन्होंने इस कला को महत्व दिया और राज्याश्रय भी दिया। सैकड़ों कलाकारों को प्रोत्साहित किया। थिएटर की शक्ति सही दिशा में और सही विषय को लेकर दिखाई दी है।  

टीआईटी टेक्नोक्रेट्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की “ग्रेजुएशन सेरेमनी-2025” का हुआ आयोजन

स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक विश्व के भरण पोषण में सामर्थ्यवान बनेगा भारत : मंत्री परमार सभी की संकल्पशक्ति और सहभागिता से पुनः विश्वगुरु बनेगा भारत- मंत्री परमार टीआईटी टेक्नोक्रेट्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की “ग्रेजुएशन सेरेमनी-2025” का हुआ आयोजन भोपाल स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष@2047 तक भारत को विकसित भारत बनाने का संकल्प पूरे देश का संकल्प है। विश्वमंच पर पुनः सिरमौर बनाने के लिए, सभी को सहभागिता करने की आवश्यकता है! हम सभी को अपना योगदान देना होगा। भारत की गौरवशाली सभ्यता, विरासत, ज्ञान परम्परा एवं भाषाओं से प्रेरणा लेकर हम सभी को राष्ट्र के पुनर्निर्माण में सहभागिता करनी होगी। स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 में जब भारत विश्वगुरु भारत बनेगा, तब हमारा विकसित भारत ऊर्जा एवं खाद्यान्न में आत्मनिर्भर होकर विश्व के अन्य देशों के भरण पोषण में भी सामर्थ्यवान बनेगा। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने मंगलवार को भोपाल स्थित “टीआईटी टेक्नोक्रेट्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस” के सभागृह में आयोजित “ग्रेजुएशन सेरेमनी-2025” के अवसर पर कही। मंत्री परमार ने दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को उपाधि एवं मेडल प्रदान कर, उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं भी प्रेषित की। परमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भारत की समृद्ध विरासत, ज्ञान परम्परा और संकल्पना के संदर्भ में प्रकाश डालते हुए अभिप्रेरित किया। मंत्री परमार ने कहा कि भारत अपनी ज्ञान परम्परा के आधार पर विश्वमंच पर सिरमौर था। भारत के पुरातन ज्ञान को पुनः विश्वमंच पर युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में भारतीय दृष्टिकोण के साथ, प्रस्तुत करना होगा। इसके लिए हमें हमारे पूर्वजों की गौरवशाली ज्ञान परम्परा पर गर्व का भाव जागृत कर, उनके बनाए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। मंत्री परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा में इंजीनियरिंग सहित समस्त विषयों में भारत का पुरातन ज्ञान विद्यमान है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने हमें हीन भावना से मुक्त होकर स्वाभिमान को जागृत करने का अवसर दिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा में भारतीय दृष्टि के समावेश का अवसर दिया है। इसके परिप्रेक्ष्य में हर विद्या हर क्षेत्र में भारत केंद्रित शिक्षा का समावेश हो रहा है। हमारे पूर्वजों ने प्रकृति, जल स्त्रोतों एवं सूर्य सहित समस्त ऊर्जा स्रोतों के संरक्षण के भाव से, शोध एवं अनुसंधान के आधार पर कृतज्ञता व्यक्त करते हुए, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समाज में परम्परा के रूप में स्थापित की। कृतज्ञता ज्ञापित करना हमारी संस्कृति और सभ्यता है। हमारे पूर्वज सूर्य उपासक थे, प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों की उपयोगिता और महत्व को जानते थे। मंत्री परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष@2047 तक भारत, सौर ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जा के क्षेत्र में आत्म निर्भर होकर, अन्य देशों की पूर्ति करने में समर्थ देश बनेगा। साथ ही वर्ष@2047 तक खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्म निर्भर होकर, अन्य देशों का भरण पोषण करने में भी सामर्थ्यवान देश बनेगा। हम सभी की सहभागिता से, अपने पूर्वजों के ज्ञान के आधार पर पुनः विश्वमंच पर सिरमौर राष्ट्र का पुनर्निर्माण होगा। इसके लिए हमें स्वाभिमान के साथ हर क्षेत्र में अपने परिश्रम और तप से आगे बढ़कर, विश्व मंच पर अपनी मातृभूमि का परचम लहराना होगा। हम सभी की संकल्पशक्ति और सहभागिता से भारत पुनः “विश्वगुरु” बनेगा।  

मंदसौर में 3 मई को लगेगा कृषि मेला, कृषि उपकरणों की लगेगी प्रदर्शनी

प्रदेश में लगेंगे किसान मेले: मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों को कृषि और सम्बद्ध कार्यों के लिए मिलेगा मार्गदर्शन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंदसौर में 3 मई को लगेगा कृषि मेला, कृषि उपकरणों की लगेगी प्रदर्शनी मुख्यमंत्री से की भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधि मंडल ने भेंट मुख्यमंत्री को किसान हित में निर्णयों के लिए दिया धन्यवाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के सभी संभागों में इस वर्ष किसान मेले आयोजित होंगे जिसमें किसानों को कृषि, खाद्य प्र-संस्करण, उद्यानिकी और पशुपालन से संबंधित विभिन्न कार्य पद्धतियों और नए अनुसंधान की जानकारी दी जाएगी। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से संबंधित मार्गदर्शन दिया जाएगा। कृषि कार्यों से जुड़े आधुनिक उपकरणों को प्रदर्शित भी किया जाएगा। आगामी 3 मई को मंदसौर में किसान मेले का आयोजन जा रहा है। संभाग स्तरीय किसान मेलों के बाद अक्टूबर माह में एक वृहद राज्य स्तरीय किसान मेला भी आयोजित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर भारतीय किसान संघ ने प्रदेश में किसानों को 5 रुपए के शुल्क पर विद्युत कनेक्शन और फसलों पर बोनस राशि प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने का अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में एक वर्ष में दस लाख सौर ऊर्जा पम्प प्रदान करने का लक्ष्य है। यह कार्य अभियान के रूप में चलेगा। एक हॉर्स पॉवर से दस हॉर्स पॉवर तक सोलर पम्प स्थापना के लिए किसान को राशि जमा करवाकर निर्धारित अवधि में कनेक्शन दिए जाएंगे। प्रदेश में किसान खुद बिजली बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मजरों टोलों के निवासी जनजातीय वर्ग के लोगों को इस कार्य में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में गत तीन दिन में सोलर पम्प स्थापना के लिए लगभग 17 हजार आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। सुझावों पर करेंगे अमल मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि कृषक प्रतिनिधियों के सुझावों पर राज्य सरकार अमल करेगी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को प्रदेश में गठित एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) को सक्रिय करने,किसानों द्वारा नरवाई जलाने को निरूत्साहित करने और रासायनिक खाद के उपयोग को कम करने के संबंध में निर्देश दिए। बैठक में बड़ी परियोजनाओं के लिए किसानों की भूमि लेने पर बदले में भूमि देने के प्रावधान, किसान को हिस्सेदार और मालिक बनाकर उनका हित सुनिश्चित करने, दूध पर बोनस, कम पानी से सिंचाई से मक्का उत्पादन को प्रोत्साहित करने, गौशालाओं के अंतर्गत आधुनिक तकनीक से संचालन, उच्च शिक्षा में कृषि विषय के अध्ययन और जिलों में पर्याप्त पशु चिकित्सकों की व्यवस्था के संबंध में चर्चा हुई। बैठक में कमल सिंह आंजना, चंद्रकांत गौर, राम भरोसे बासोतिया, श्रीमती गिरजा ठाकुर, राजेन्द्र पालीवाल आदि शामिल थे। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय कुमार शुक्ला, कृषि सचिव एम सेलवेंद्रन एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंडला में विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे, सामूहिक विवाह-निकाह कार्यक्रम में शामिल होंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को मंडला जिले के ग्राम टिकरवारा से मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना और सिलेंडल रिफिलिंग योजना की राशि हितग्राहियों के खाते में अंतरित करेंगे। दोपहर 1.30 बजे आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह-निकाह कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश की एक करोड़ 27 लाख लाड़ली बहनों के खातों में अप्रैल माह की किस्त 1552 करोड़ 38 लाख रूपये अंतरित करेंगे। लाड़ली बहनों को मिलने वाली यह 23वीं किस्त है। योजना में प्रत्येक लाड़ली बहना को प्रत्येक माह 1250 रूपये की राशि उनके खातों में अंतरित की जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस अवसर पर 56 लाख 68 हजार सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों के खातों में 340 करोड़ रूपए की राशि अंतरित करेंगे। मुख्यमंत्री 25 लाख से अधिक बहनों को सिलेंडर रिफिलिंग की 57 करोड़ की राशि भी उनके खातों में सिंगल क्लिक से भेजेंगे।  

पात्र परिवारों को पक्का मकान दिलाना हमारी जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जगदलपुर के गांव से किया मोर दुआर-साय सरकार महाअभियान का शुभारंभ मोर दुआर-साय सरकार महाअभियान का शुभारंभ आवासहीन एवं कच्चे मकान वाले परिवारों के सर्वेक्षण का विशेष अभियान   पात्र परिवारों को पक्का मकान दिलाना हमारी जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री साय स्वयं हितग्राहियों के घर पहुंचकर किया सर्वे राज्य में 15 से 30 अप्रैल तक चलेगा मोर दुआर-साय सरकार महाभियान रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बस्तर जिले के ग्राम घाटपदमपुर से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण अंतर्गत आवास प्लस 2.0 सर्वेक्षण के लिए प्रदेशव्यापी मोर दुआर-साय सरकार महाभियान का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री इस दौरान उन्होंने घाटपदमपुर के कई हितग्राहियों के घर पहुंचकर स्वयं सर्वेक्षण किया। मुख्यमंत्री के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों में भारी उत्साह दिखाई दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को पक्का और सुरक्षित घर प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण कार्य समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पूरा किया जाएगा, ताकि हर जरूरतमंद को योजना का लाभ मिले। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण आवास प्लस 2.0 के तहत सर्वेक्षण के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विशेष पहल पर 15 दिवसीय मोर दुआर-साय सरकार महाभियान शुरू किया गया है। यह अभियान 30 अप्रैल तक चलेगा। मोर दुआर-साय सरकार महाभियान का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के ऐसे ग्रामीण परिवारों की पहचान करना है, जिन्हें अब तक किसी भी आवासीय योजना के तहत पक्का आवास नहीं मिल सका है। उन्हें पक्के आवास की सुविधा उपलब्ध कराना है। इस महाभियान में राज्य के प्रत्येक गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना प्लस 2.0 के हितग्राहियों के सर्वेक्षण का कार्य पूरा किया जाएगा, ताकि योजनांतर्गत आवास की स्वीकृति एवं निर्माण कार्य कराया जा सके। यह महाभियान तीन चरणों में संचालित होगा। पहले चरण में 15 से 19 अप्रैल के बीच जिला और ब्लॉक स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं। दूसरे चरण में 20 से 28 अप्रैल तक सभी ग्रामों में ग्राम सभाएं आयोजित कर घर-घर जाकर पात्र परिवारों का सर्वेक्षण किया जाएगा। तीसरे चरण में 29 और 30 अप्रैल को सभी सर्वेक्षणों की पुष्टि, ग्राम सभा की स्वीकृति और सत्यापन कर अंतिम रिपोर्ट तैयार कर राज्य कार्यालय को भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने ग्राम घाटपदमपुर आयोजित कार्यक्रम में स्वयं लाभार्थियों से चर्चा करते हुए उनके मकान की स्थिति जानी और नवनिर्मित घरों को देखकर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने ग्रामवासियों से सीधा संवाद करते हुए यह भी कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि कोई भी परिवार बिना पक्के मकान के न रहे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वेक्षण के माध्यम से जो भी पात्र परिवार सामने आएंगे, उन्हें शीघ्रातिशीघ्र योजना में सम्मिलित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने किया पात्र परिवारों का सर्वे मुख्यमंत्री साय जब हितग्राही श्रीमती शिलोमणि कश्यप एवं श्रीमती करुणा कश्यप के घर पहुंचे तब परिवारजनों ने उनका परंपरागत रूप से आत्मीय स्वागत किया। शिलोमणि कश्यप ने बताया कि उनके परिवार में कुल पाँच सदस्य हैं पति हरिसिंह, बेटा अभिनव जो 9वीं कक्षा में पढ़ता है, बेटी अनुप्रिया (8वीं कक्षा) और छोटा बेटा अभिषेक जो तीसरी कक्षा में है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार वर्षों से पक्के मकान का सपना देख रहा था, जो अब इस योजना के तहत पूरा होता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने गांव की एक अन्य हितग्राही श्रीमती लूदरी कश्यप के घर का भी सर्वेक्षण किया। उन्होंने स्वयं ‘आवास प्लस 2024 (2.0)’ मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से सर्वे किया। इस दौरान लूदरी कश्यप ने भावुक होकर कहा कि बरसों से पक्के मकान का सपना देखा था, आज वह साकार होता दिख रहा है। यह मेरे लिए बेहद भावुक क्षण है। लूदरी कश्यप ने यह भी साझा किया कि बरसात के दिनों में कच्चे घर में सांप का डर और घर की मरम्मत पर होने वाले खर्च से वे परेशान रहती थीं। उन्होंने कहा कि अब इस योजना से उन्हें इन सभी समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। श्रीमती लूदरी कश्यप ने बताया कि उनके साथ पति मनबोध कश्यप, बहू श्रीमती करुणा कश्यप, पुत्र ईश्वर कश्यप और पोता रहते हैं। लूदरी कश्यप ने कहा कि उनका पूरा परिवार मजदूरी पर निर्भर है और सीमित आय के चलते पक्के मकान का निर्माण संभव नहीं हो पा रहा था। उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि अब उनका एक सुरक्षित और स्थायी पक्का मकान का सपना जल्द ही पूरा होगा। ग्राम पंचायत घाटपदमपुर की कुल जनसंख्या 2,078 है, जिसमें वर्तमान में 583 परिवार निवासरत हैं। इस पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पूर्व में स्थायी प्रतीक्षा सूची के आधार पर 11 परिवारों को आवास की स्वीकृति दी गई थी, जिनके मकानों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। महतारी वंदन योजना बनी सहारा मुख्यमंत्री साय को ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि उन्हें राज्य सरकार की महतारी वंदन योजना का भी लाभ मिल रहा है। इस योजना से उन्हें आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है, जिससे वे अपने दैनिक खर्चों के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिए भी कुछ बचत कर पा रहे हैं। हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार : उपमुख्यमंत्री शर्मा उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट लक्ष्य है कि देश के हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिले, जिसमें पक्का मकान एक बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस संकल्प के साथ कार्य कर रही है कि कोई भी पात्र नागरिक सरकार की योजनाओं से वंचित न रहे। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में 2024-25 के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत कुल 11,50,315 मकानों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 9,41,595 मकानों की पहले ही स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनमें से 1,78,476 मकान पूर्ण रूप से निर्मित हो चुके हैं और शेष निर्माणाधीन हैं। अब तक कुल 3,59,037 लाभार्थियों को आवास मिल चुका है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हुए लाभार्थी स्वयं भी मोबाइल ऐप के जरिए अपनी जानकारी अपलोड कर सकेंगे। इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा GRIH पोर्टल भी विकसित किया गया है। इस अवसर पर वनमंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, विधायक जगदलपुर किरण देव, विधायक चित्रकोट विनायक गोयल, नगर निगम जगदलपुर के महापौर संजय पाण्डे … Read more

राष्ट्रीय कार्यशाला में विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में वनों की भूमिका को लेकर होगा मंथन

भोपाल मध्यप्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में वन पुनर्स्थापन, जलवायु परिवर्तन और समुदाय-आधारित आजीविका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला 18 अप्रैल से नरोन्हा प्रशासन अकादमी, भोपाल में आयोजित की जा रही है। कार्यशाला के शुभारंभ सत्र की अध्य्क्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। केन्द्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव सत्र में मुख्य वक्तव्य देंगे। प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह स्वागत उद्बोधन देंगे। दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला की रूपरेखा डॉ. राहुल मूँगीकर प्रस्तुत करेंगे। इस अवसर पर जनजातीय समुदाय और प्राकृतिक संरक्षण पर केंद्रित ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति भी दी जाएगी। प्रमुख विषय : वन संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक प्रबंधन राष्ट्रीय कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में वन संरक्षण की वर्तमान कानूनी व्यवस्थाएं, उनकी सीमाएं और समाधान, जैव विविधता संशोधन अधिनियम-2023, सामुदायिक वन अधिकार, पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण और वन पुनर्स्थापन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। बैंगलुरू से आ रहे प्रो. रमेश विशेषज्ञ वक्तव्य भी देंगे। कार्यशाला में डॉ. योगेश गोखले, डॉ. राजेन्द्र दहातोंडे आदि वक्ता विभिन्न सत्रों को संबोधित करेंगे। राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन राज्यपाल श्री पटेल समापन सत्र को करेंगे संबोधित राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल राष्ट्रीय कार्य शाला के समापन-सत्र में मुख्य अतिथि होंगे। पूर्व राष्ट्रीय जनजातीय आयोग अध्यक्ष श्री हर्ष चौहान समापन वक्तव्य देंगे। कार्यशाला में वनीकरण, जलवायु संवेदनशीलता और वनवासी समुदायों की समावेशी भागीदारी पर केन्द्रित डॉक्युमेंट्री फिल्मों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में वनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह कार्यशाला वनों, जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और जनजातीय आजीविका को केंद्र में रखते हुए एक सतत और न्यायसंगत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  

ईडी ने राहुल-सोनिया गांधी और सैम पित्रोदा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया, 25 अप्रैल को सुनवाई

नई दिल्ली नेशनल हेराल्ड मामले में गांधी परिवार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने इस मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी और ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दायर ईडी के आरोपपत्र में सुमन दुबे और अन्य के नाम भी शामिल हैं। अदालत ने मामले में संज्ञान पर बहस के लिए 25 अप्रैल की तारीख तय की है। इससे पहले ईडी ने इस मामले से जुड़ी संपत्तियों पर कब्जा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। राज्यसभा सांसद एवं दिग्गज कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे बदले की राजनीति बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “नेशनल हेराल्ड की संपत्ति जब्त करना कानून के शासन का मुखौटा पहनकर सरकार प्रायोजित अपराध है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करना प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा बदले की राजनीति और धमकी के अलावा कुछ नहीं है। कांग्रेस और उसका नेतृत्व चुप नहीं रहेगा।” राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं दिग्गज कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला बताया। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “मोदी सरकार की एजेंसी ईडी द्वारा कांग्रेस पार्टी और नेशनल हेराल्ड की 661 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कब्जे में लेने की कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है। भाजपा सरकार की मंशा है कि ऐसे प्रयासों से वह धीरे-धीरे कांग्रेस को आर्थिक रूप से अक्षम बना दे। लोकसभा चुनाव से पहले आयकर विभाग के जरिए कांग्रेस के बैंक खातों को सील कर ऐसा प्रयास किया गया था। पहले आईटी और अब ईडी की यह कार्रवाई निंदनीय है।” उन्होंने लिखा, “नेशनल हेराल्ड केस को अब पांच साल से भी अधिक का समय हो गया है। ईडी कांग्रेस के खिलाफ तो गैर-कानूनी रूप से कार्रवाई कर रही है, वहीं भाजपा को मिले इलेक्टोरल बॉन्ड्स में साफ तौर पर कंपनियों से अवैध वसूली के सबूत मिले, परंतु ईडी ने किसी भाजपा नेता को एक नोटिस तक नहीं दिया। इसी प्रकार रॉबर्ट वाड्रा को बार-बार पूछताछ के लिए बुलाकर मीडिया ट्रायल किया जा रहा है। कांग्रेस एक जन आंदोलन की पार्टी है। ऐसी कार्रवाइयों से भाजपा सरकार और ईडी हमारे मनोबल को नहीं तोड़ सकती।” उल्लेखनीय है कि नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र की स्थापना 1938 में जवाहरलाल नेहरू ने की थी। इस समाचार पत्र को एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा प्रकाशित किया जाता था। वर्ष 2008 में वित्तीय संकट के बाद इसे बंद करना पड़ा, जहां से इस विवाद की शुरुआत हुई। साल 2010 में यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएल) नाम की कंपनी बनी, जिसमें सोनिया और राहुल गांधी की 38-38 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने साल 2012 में आरोप लगाया कि यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने एजेएल की 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियों को मात्र 50 लाख रुपए में हासिल किया और उन्होंने धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया। मामला अदालत में भी गया और बाद में ईडी ने इसकी जांच शुरू की।

वरिष्ठता की अनदेखी बीईओ प्रभार वितरण पर उठे सवाल

वरिष्ठता की अनदेखी बीईओ प्रभार वितरण पर उठे सवाल शिक्षा विभाग में मनमानी पर उतारू हैं अधिकारी मण्डला  आदिवासी विकास विभाग द्वारा 26 जून 2020 को जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) के रिक्त पदों पर वरिष्ठता और समकक्षता को दरकिनार करते हुए मनमाने ढंग से प्रभार सौंपे जा रहे हैं। शासन के निर्देश थे कि बीईओ के रिक्त पदों का प्रभार वरिष्ठ अधिकारियों को ही सौंपा जाए और किसी कनिष्ठ अधिकारी को वरिष्ठ की उपस्थिति में यह जिम्मेदारी देना अनुचित और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए नुकसानदायक होगा।      इसके विपरीत जिले में इन निर्देशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद उन्हें दरकिनार कर कनिष्ठ अधिकारियों को पदभार सौंपा गया है। यह स्थिति न केवल वरिष्ठ अधिकारियों के आत्मसम्मान के खिलाफ है बल्कि विभागीय नैतिकता और संतुलन को भी प्रभावित कर रही है।         स्थिति यह है कि कुछ विकासखंडों में वरिष्ठ अधिकारियों को “लूप लाइन” में डाल दिया गया है, यानी उन्हें ऐसी जिम्मेदारियों से वंचित कर दिया गया है जहाँ उनके अनुभव और क्षमता का कोई उपयोग नहीं हो रहा। वहीं, कुछ चुनिंदा अधिकारियों को तीन-तीन, चार-चार प्रभार देकर अत्यधिक कार्यभार सौंपा गया है। यह कार्यप्रणाली शासन की मंशा के एकदम विपरीत है और विभागीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है।            सूत्रों के अनुसार अधिकारियों की उपलब्धता को जानबूझकर कम दिखाया गया है ताकि कुछ नजदीकी और पसंदीदा अधिकारियों को ही सभी प्रमुख पदों पर बनाए रखा जा सके। इससे योग्य और वरिष्ठ अधिकारी हतोत्साहित हो रहे हैं और विभाग में असंतोष का माहौल बनता जा रहा है।         शिक्षा व्यवस्था पर इसका प्रतिकूल असर पड़ना स्वाभाविक है। जब योग्य अधिकारी निर्णय प्रक्रिया से बाहर कर दिए जाते हैं और केवल “पहुंच” और “नजदीकी” आधार बन जाती है, तो इसका सीधा प्रभाव शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक सुचारुता पर पड़ता है।        यह मामला अब विभागीय चर्चाओं का केंद्र बन चुका है। जानकारों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए, तो सच्चाई सामने आ सकती है और अनुचित लाभ उठाने वालों की पहचान हो सकती है।         शासन के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करना गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। अतः जिला प्रशासन से अपेक्षा की जाती है कि वह इस विषय को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच कराए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। इससे न केवल योग्य अधिकारियों को उनका अधिकार मिलेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी एक नया विश्वास और संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।

चहल के ‘जाल ‘ में फंसी KKR, पंजाब ने ऐसे पलटा हारा मैच, रहाणे एंड कंपनी का डब्बा गोल

कोलकाता पंजाब किंग्स (PBKS) और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के बीच मंगलवार को खेले गए रोमांचक मुकाबले में श्रेयस अय्यर की टीम ने कमाल कर दिया. पंजाब किंग्स ने रसेल, रिंकू और रहाणे से सजी केकेआर को 112 रन नहीं बनाने दिए और 16 रनों से मुकाबला जीत लिया. इस मैच में युजवेंद्र चहल ने कमाल की गेंदबाजी की और 4 विकेट झटककर केकेआर को गेम से बाहर कर दिया. आईपीएल में कई बार 4 से ज़्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड आईपीएल में एक मैच में 4 विकेट लेने के मामले में अब चहल सुनील नरेन के साथ संयुक्त रूप से पहले स्थान पर आ गए हैं. चहल ने अबतक 8 बार एक मैच में 4 विकेट झटके हैं. देखें लिस्ट… 8 – युजवेंद्र चहल 8 – सुनील नरेन 7 – लसिथ मलिंगा 6 – कगिसो रबाडा 5 – अमित मिश्रा पंजाब ने बचाया सबसे छोटा स्कोर आईपीएल के इतिहास में पंजाब किंग्स पहली टीम बन गई है जिसने इतने छोटे टोटल को डिफेंड किया है. पंजाब ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 111 रन बनाए थे. लेकिन केकेआर को 95 रन पर ही रोक दिया. 111 – पीबीकेएस बनाम केकेआर, मुल्लांपुर, 2025 116/9 – सीएसके बनाम पीबीकेएस, डरबन, 2009 118 – SRH बनाम MI, 2018 119/8 – पीबीकेएस बनाम MI, डरबन, 2009 119/8 – SRH बनाम PWI, पुणे, 2013 *बारिश से प्रभावित खेल शामिल नहीं हैं ऐसी रही कोलकाता की पारी 112 रनों के जवाब में उतरी केकेआर की शुरुआत बेहद खराब रही. पहले ही ओवर में सुनील नरेन बोल्ड हो गए. उनके बल्ले से केवल 5 रन निकले. इसके बाद अगले ही ओवर में क्विंटन डिकॉक भी पवेलियन लौटे. उनके बल्ले से केवल 2 रन निकले. लेकिन इसके बाद रहाणे ने कुछ अच्छे शॉट लगाए. लेकिन 8वें ओवर में वो भी आउट हो गए. रहाणे ने 17 रन बनाए. इसके बाद 10वें ओवर में रघुवंशी भी चलते बने. इसके बाद अगले ही ओवर में मैक्सवेल ने वेंकटेश अय्यर को आउट कर दिया. इसके बाद चहल ने अपने खाते के तीसरे ओवर में रिंकू सिंह और रमनदीप को चलता किया. इसके बाद कोलकाता कुछ खास नहीं कर पाई. रसेल ने कुछ आक्रामक शॉट जरूर लगाए. लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके. 16वें ओवर की पहली गेंद पर केकेआर ऑलआउट हो गई. पंजाब की टीम ने 16 रन से मुकाबला जीत लिया. ऐसे रही पंजाब की बल्लेबाजी टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी पंजाब की शुरुआत तो अच्छी रही. प्रियांश आर्य ने अच्छे शॉट भी लगाए. लेकिन चौथे ओवर में प्रियांश आर्य को हर्षित राणा ने आउट किया. आर्य के बल्ले से 22 रन निकले. इसके बाद पंजाब को बैक-टू-बैक झटके लगे. चौथे ही ओवर में श्रेयस अय्यर भी बिना खाता खोले आउट हो गए. इसके बाद अगले ओवर में जोश इंगलिस भी आउट हो गए. पावरप्ले के आखिरी ओवर में प्रभसिमरन सिंह भी चलते बने. उनके बल्ले से केवल 30 रन निकले. 9वें ओवर में नेहाल वढ़ेरा भी 10 रन बनाकर आउट हो गए. इसके बाद पंजाब की बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई. पंजाब की टीम पूरे 20 ओवर भी नहीं खेल सकी और 16वें ओवर में ही 111 के स्कोर पर सिमट गई. पंजाब ने ऐसे पलटा हारा मैच, रहाणे एंड कंपनी का डब्बा गोल  युजवेंद्र चहल को IPL (इंड‍ियन प्रीम‍ियर लीग) इत‍िहास का चतुर गेंदबाज क्यों कहा जाता है, ये बात उन्होंने 15 अप्रैल को कोलकाता नाइटराइडर्स (IPL) के ख‍िलाफ मुकाबले में साबित कर दी. पंजाब किंग्स (PBKS) की ओर से चहल ने यादगार स्पेल किया और ऐसी जीत द‍िलाई, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी. चहल ने चार विकेट (चौसर समझें) ल‍िए और कोलकाता की टीम फंस गई. पंजाब किंग्स की टीम इस मुकाबले में 111 रन पर सिमट गई. पंजाब किंग्स ने कम स्कोर वाले रोमांचक मैच में वापसी करते हुए केकेआर को 16 रन से हराया. युजवेंद्र चहल ने 4-0-28-4 और मार्को जानसेन ने 17 रन देकर 3 विकेट चटकाए. इस तरह पंजाब किंग्स ने आईपीएल हिस्ट्री में सबसे कम स्कोर का बचाव किया. इससे पहले सबसे कम स्कोर को ड‍िफेंड चेन्नई सुपर किंग्स ने 2009 में किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ 116 रन बनाकर किया था. वापस आते हैं चहल के उस कमाल के स्पेल पर. एक समय कोलकाता की टीम 60 रन पर दो विकेट के स्कोर पर थी, फ‍िर वो 95 रन पर स‍िमट गई. मैंने गलत शॉट खेला जहां KKR की टीम जीता-ज‍िताया मैच हार गई. KKR  के कप्तान अजिंक्य रहाणे ने अपनी टीम की चौंकाने वाली हार का दोष अपने ऊपर लिया. एक समय कोलकाता की टीम 62 रन पर दो विकेट के स्कोर पर थी, लेकिन इसके बाद वो 95 रन पर ऑल-आउट हो गई. हाणे ने कहा- कुछ भी समझाने की जरूरत नहीं है, जो कुछ मैदान पर हुआ, हम सभी ने देखा. टीम के प्रयास से काफी निराश हूं, मैं दोष लेता हूं, मैंने गलत शॉट खेला, हालांकि यह (गेंद) मिस हो गई थी. कुल म‍िलाकर केकेआर के कप्तान का यह बयान बेहद चर्चा में हैं. क्योंकि ऐसा बेहद कम होता है कि कोई कप्तान हार के ल‍िए खुद ज‍िम्मेदारी ले. रहाणे ने कहा- हमने बैट‍िंग यून‍िट के रूप में वास्तव में खराब बैट‍िंग की, हम पूरी जिम्मेदारी लेते हैं, गेंदबाजों ने इस प‍िच पर वाकई में अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे पंजाब की मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप 111 रन पर सिमट गई. युजी चहल ने ऐसे पलटा मैच, एक ओवर में झटके 2 विकेट युजवेंद्र चहल ने सबसे पहले अपने स्पेल में कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान अंज‍िक्य रहाणे (17) को LBW आउट किया. हालांकि रहाणे ने अगर DRS (ड‍िसीजन र‍िव्यू स‍िस्टम) का सहारा लिया होता तो वो बाल-बाल बचे होते. इसके बाद चहल की फ‍िरकी का जादू एक बार और चहला और उन्होंने अपने अगले ही ओवर में जम चुके अंगकृष रघुवंशी को 37 रनों के स्कोर पर जैव‍ियर बैरेट के हाथों कैच आउट करवा दिया. अंगकृष रघुवंशी के आउट होते ही कोलकाता का स्कोर 72/4 हो गया. फ‍िर 12वें ओवर की तीसरी और चौथी गेंद पर रिंकू सिंह (2) को स्टम्प आउट करवाकर और रमनदीप (0) को कैच आउट करवाकर चहल ने पूरा मैच पंजाब की ओर मोड़ दिया. रमनदीप तो … Read more

केरवा से गिद्धों का पहला समूह 16 अप्रैल को छोड़ा जाएगा उनके प्राकृतिक रहवास में

भोपाल गिद्ध संवर्धन एवं प्रजनन केन्द्र केरवा भोपाल से 06 गिद्धों (02 सफेद पीठ वाले गिद्ध (White-backed Vulture) एवं 04 लंबी चोंच वाले गिद्ध (Long-billed Vulture) को उनके प्राकृतिक रहवास हलाली डेम के वनक्षेत्र में रामकली गौशाला के पास 16 अप्रैल 2025 को प्रातः 07.30 बजे छोड़ा जाएगा। इन गिद्धों का प्रजनन गिद्ध संवर्धन एवं प्रजनन केन्द्र केरवा में कराया गया है। यह गिद्धों का पहला समूह है, जिसे केंद्र से छोड़ा जा रहा है। गिद्धों के चयन से पूर्व 08 अप्रैल 2025 को इनकी स्वास्थ्य जांच और मॉर्फोमेट्री की गई। शारीरिक जांच एवं रक्त नमूनों की जांच में पाया गया कि सभी गिद्ध स्वस्थ एवं छोड़े जाने के लिए उपयुक्त है। इसके बाद 12 अप्रैल 2025 को गिद्धों पर ऑर्निट्रक 25 सौर ऊर्जा चलित जीपीएस जीएसएम ट्रैकर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया द्वारा प्रदान किए गए) लगाए गए हैं ताकि उनके आवागमन के पैटर्न और आवास उपयोग की निगरानी की जा सके। सभी 06 गिद्धों को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव), अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव), वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के प्रतिनिधि, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी मुम्बई (BNHS) के प्रतिनिधि, विश्व प्रकृति निधि भारत (WWF) के प्रतिनिधि, भोपाल वनमंडल, रायसेन वनमंडल एवं विदिशा वनमंडल के वन अधिकारी/कर्मचारी उपस्थिति में हलाली डेम के वनक्षेत्र में छोड़ा जाएगा। गिद्ध संवर्धन एवं प्रजनन केन्द्र केरवा भोपाल की स्थापना वर्ष 2014 में हुई थी एवं इसका संचालन बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी मुम्बई (BNHS) के सहयोग से किया जा रहा है। इन 06 गिद्धों को उनके रहवास में छोड़ने के बाद गिद्ध संवर्धन एवं प्रजनन केन्द्र केरवा भोपाल में वर्तमान में 34 सफेद पीठ वाले गिद्ध और 46 लंबी चोंच वाले गिद्ध उपलब्ध है।  

संपत्ति कर जमा करने दी 30 दिनों की विशेष छूट, 30 अप्रैल तक कर सकते हैं जमा

सभी कलेक्टरों, नगर निगमों के आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को विभाग ने जारी किया परिपत्र रायपुर राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नगरीय निकायों में वित्तीय वर्ष 2024-25 के संपत्ति कर और विवरणी जमा करने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट प्रदान की है। अब ये 30 अप्रैल 2025 तक जमा किए जा सकते हैं। राज्य शासन ने सभी कलेक्टरों, नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को इस संबंध में परिपत्र जारी किया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने परिपत्र में कहा है कि नगरीय निकायों में संपत्तिकर तथा विवरणी जमा करने के लिए निर्धारित अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 निर्धारित है। इस वर्ष भी संपत्ति कर तथा विवरणी जमा करने के लिए अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 निर्धारित है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में लोकसभा निर्वाचन कार्य, निकायों का परिसीमन कार्य, मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य तथा स्थानीय निकायों के निर्वाचन आदि में आचार संहिता भी प्रभावी रही। इन कार्यों में निकायों के अधिकारी-कर्मचारी भी संलग्न रहे। फलस्वरूप राजस्व आय संग्रहण की कार्यवाही प्रभावित हुई है। विभाग ने राजस्व संग्रहण के कार्यों के प्रभावित होने के मद्देनजर वर्ष 2024-25 के संपत्ति कर तथा विवरणी जमा करने के लिए अंतिम तिथि में 30 दिनों की विशेष छूट प्रदान करते हुए इसके लिए 30 अप्रैल 2025 की अंतिम तिथि निर्धारित की है। नगरीय प्रशासन विभाग ने परिपत्र के माध्यम से निकाय के कर्मचारियों द्वारा घर-घर जाकर संपत्ति कर संग्रहण करने एवं नागरिकों को ऑनलाइन (Online) भुगतान के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने सभी नगरीय निकायों में इनका अनुपालन सुनिश्चित करते हुए कर संग्रहण के लिए किए गए कार्यों से शासन को अवगत कराने के भी निर्देश दिए हैं।

पूर्व मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश श्री एंथोनी डिसा को कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज़ 2025 के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया

पूर्व मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश श्री एंथोनी डिसा को कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज़ 2025 के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया प्रसिद्ध लेखक और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी की कहानी ’Tamarind’ (‘इमली’) को 54 देशों की 8,000 से अधिक प्रविष्टियों में से शीर्ष 25 में स्थान मिला भोपाल मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और चर्चित लेखक श्री एंथोनी डिसा * ने एक बार फिर अपनी उपलब्धियों की फेहरिस्त में एक और प्रतिष्ठित सम्मान जोड़ लिया है। *‘टीनो डिसा’ के नाम से लेखन करने वाले श्री डिसा की कहानी Tamarind (‘इमली’) को कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज़ 2025 के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त मान्यता उनकी प्रशासनिक सेवा और साहित्यिक लेखन—दोनों में उनकी गहराई और सृजनात्मकता को दर्शाती है। 54 देशों से आई 8,000 से अधिक प्रविष्टियों में से चुनी गईं 25 श्रेष्ठ कहानियों में ‘इमली’ को स्थान मिला है, जिसे पांच अंतरराष्ट्रीय निर्णायकों की एक समिति ने चयनित किया। लंदन में 15 अप्रैल को शॉर्टलिस्ट की घोषणा की गई, जबकि विजेता का नाम जून में घोषित किया जाएगा। कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज़ को प्रायः ‘शॉर्ट स्टोरी का बुकर पुरस्कार’ कहा जाता है और यह अंग्रेज़ी साहित्य की सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में से एक है। केवल शॉर्टलिस्ट में शामिल होना भी स्वयं में एक वैश्विक सम्मान माना जाता है। ‘इमली’ कहानी मध्यप्रदेश के एक काल्पनिक ग्रामीण क्षेत्र में आधारित है और श्री डिसा की अधिकांश रचनाओं की तरह इसमें भी अंत में एक गहरा मोड़ है। यह कहानी उनकी कथा-कौशल के साथ-साथ भारतीय ग्रामीण और सांस्कृतिक जीवन की गहरी समझ को भी उजागर करती है। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (IAS) के रूप में श्री एंथनी डिसा ने राज्य और केंद्र स्तर पर कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, और अपने प्रशासनिक जीवन के अंत में मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपनी रचनात्मक ऊर्जा और सामाजिक संवेदना को साहित्यिक अभिव्यक्ति में रूपांतरित किया, जो उनके कहानी लेखन और कविता में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। अब तक उनके तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं—दो कहानी संग्रह: ‘The Disrobing of Draupadi’ और ‘One For Sorrow, Two For Joy’, और एक बच्चों के लिए रहस्य कथा ‘The Curious Case of the Nandikote Nawab’, जिसे कतिपय CBSE स्कूलों ने अपनी पठन सूची में शामिल किया है। उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, भावनात्मक गहराई और कथानक की रोचकता का सुंदर संयोजन देखने को मिलता है। श्री डिसा को 2017 और 2019 में टाइम्स ऑफ इंडिया राष्ट्रीय लघुकथा प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। वे दो कहानियाँ भी मध्य प्रदेश में आधारित हैं – एक पंचमढ़ी में और एक प्राचीन काल के उज्जैन में।उनके काव्य-संग्रहों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है और हाल ही में लंदन से प्रकाशित एक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका में उनकी दो कविताएं प्रकाशित हुई हैं। वर्तमान में वे अपनी अगली लघुकथा संग्रह पर कार्य कर रहे हैं, जिसमें वे भारतीय जीवन के विविध पक्षों को अपनी साहित्यिक दृष्टि से उजागर कर रहे हैं। एक समर्पित प्रशासनिक अधिकारी से लेकर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त लेखक बनने की उनकी यात्रा इस बात का प्रेरणादायक उदाहरण है कि किस प्रकार बौद्धिक चेतना और रचनात्मकता सेवा-निवृत्त जीवन में भी नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है।

अमेरिका में ग्रीन कार्ड और H-1B वीजा के नियम सख्त, , हमेशा अपनी जेब में रखना होगा पहचान पत्र

नई दिल्ली अमेरिका जाना और वहां रहना अब दोनों ही मुश्किल हो चुका है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इमिग्रेशन यानी अप्रवासन नीति में एक बड़ा बदलाव किया है। अब अमेरिका में रहने वाले सभी प्रवासियों को हमेशा अपनी जेब में पहचान पत्र साथ रखना होगा। ये नियम जिन लोगों के लिए अनिवार्य किया गया है, वो हैं कानूनी तौर पर रहने वाले, काम करने वाले और स्टूडेंट्स हैं। आइए-समझते हैं कि अमेरिका में अब प्रवासियों के लिए किस तरह की चुनौतियां बढ़ गई हैं। आइए-इसे समझते हैं। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने यह फैसला लिया है। यह फैसला एक कोर्ट के उस आदेश के बाद आया है, जिसमें ट्रंप के समय के एक नियम को फिर से लागू करने की बात कही गई थी। यह नियम कहता है कि जो लोग गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में रह रहे हैं, उन्हें सरकार के पास अपना नाम दर्ज कराना होगा। अब यह नियम नए सिरे से लागू होने जा रहा है। 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी गैर अमेरिकियों पर लागू इस नए नियम के अनुसार, 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के हर गैर नागरिक को हर समय अपना पहचान पत्र साथ रखना होगा। DHS ने साफ कहा है कि इस नियम को सख्ती से लागू किया जाएगा और इसका उल्लंघन करने पर कोई रियायत नहीं दी जाएगी। यह नियम 11 अप्रैल से लागू हो गया है। DHS ने यह भी कहा है कि वे इस नियम पर और ज्यादा ध्यान देंगे और इसे सख्ती से लागू करेंगे। एलियन कानून क्या इस नियम के पीछे है यह बदलाव 20 जनवरी को दस्तखत किए गए एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर ‘प्रोटेक्टिंग द अमेरिकन पीपल अगेंस्ट इन्वेजन’ के बाद हुआ है। इस ऑर्डर में DHS को एलियन रजिस्ट्रेशन एक्ट को लागू करने का निर्देश दिया गया है, जिसे लंबे समय से अनदेखा किया जा रहा था। जरूरी कागजात नहीं हैं तो क्या करना होगा नए नियम मुख्य रूप से उन लोगों पर लागू होते हैं जिनके पास अमेरिका में रहने के लिए जरूरी कागजात नहीं हैं। ऐसे सभी गैर-नागरिक जो 14 साल या उससे ज्यादा उम्र के हैं और 30 दिनों से ज्यादा समय से अमेरिका में रह रहे हैं, उन्हें फॉर्म जी-325आर भरकर सरकार के पास अपना नाम दर्ज कराना होगा। इमिग्रेंट्स के बच्चों को भी 14 साल के होने के 30 दिनों के अंदर दोबारा रजिस्ट्रेशन कराना होगा और अपने फिंगरप्रिंट देने होंगे। पता बदलने पर नए पते की जानकारी देनी होगी इसके अलावा, जो लोग 11 अप्रैल के बाद अमेरिका आ रहे हैं, उन्हें आने के 30 दिनों के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। अगर कोई अपना पता बदलता है, तो उसे 10 दिनों के अंदर DHS को नए पते की जानकारी देनी होगी। इस नियम का पालन न करने पर 5,000 डॉलर तक का जुर्माना लग सकता है। इन लोगों पर नहीं होगा ट्रंप का ये सख्त नियम हालांकि, यह नियम उन लोगों पर लागू नहीं होता है जिनके पास पहले से ही वैलिड वीजा है। जैसे कि स्टूडेंट वीजा या वर्क वीजा पर रहने वाले लोग, या जिनके पास ग्रीन कार्ड , एम्प्लॉयमेंट डॉक्यूमेंटेशन या आई-94 एडमिशन रिकॉर्ड है। माना जाता है कि इन लोगों ने रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली है। उदाहरण के लिए, जो भारतीय नागरिक वैलिड वीजा या ग्रीन कार्ड के साथ अमेरिका में रह रहे हैं, उन्हें नए नियम के तहत रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, उन्हें हर समय अपने पहचान पत्र साथ रखने होंगे और अधिकारियों द्वारा मांगे जाने पर उन्हें दिखाना होगा। 7 लाख भारतीय गैर कानूनी तौर पर अमेरिका में रह रहे DHS के आंकड़ों के अनुसार, 2022 तक लगभग 2.2 लाख भारतीय गैरकानूनी रूप से अमेरिका में रह रहे थे। हालांकि, प्यू रिसर्च सेंटर जैसे अन्य संगठनों का अनुमान है कि यह संख्या 7 लाख तक हो सकती है, जबकि माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट का अनुमान है कि यह आंकड़ा लगभग 3.75 लाख है। अमेरिका में एक पायदान और बढ़ा निगरानी का स्तर यह नया नियम अमेरिका में रहने वाले इमिग्रेंट समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है। खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास कानूनी तौर पर रहने की अनुमति नहीं है। इससे उनके लिए कागजात और निगरानी का एक और स्तर जुड़ जाएगा, जो पहले से ही एक जटिल प्रवासी व्यवस्था है। इस नीति से प्राइवेसी, नागरिक अधिकारों और देश भर में प्रवासी समुदायों पर व्यापक प्रभाव को लेकर बहस छिड़ सकती है।

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