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शुक्रवार18 अप्रैल 2025: बदल जाएगी इन राशियों की किस्मत, मिलेगी बड़ी सफलता

मेष राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मसंयत रहें। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान पर जा सकते हैं। परंतु सेहत का ध्यान रखें। खर्चों की अधिकता रहेगी। वृषभ राशि- आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे। मन परेशान भी हो सकता है। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। रहन सहन कष्टमय हो सकता है। खर्च बढ़ेंगे। मिथुन राशि- मन परेशान हो सकता है। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। खर्चों में वृद्धि होगी। रहन-सहन कष्टमय रहेगा। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। संतान सुख में वृद्धि होगी। कर्क राशि- मन अशांत रहेगा। आत्मसंयत रहें। अपनी भावनाओं के वश में रखें। बातचीत में संतुलित रहें। शैक्षिक कार्यों में कठिनाई आ सकती है। सचेत रहें। सिंह राशि- मन अशांत रहेगा। मानसिक शांति बनाए रखने के प्रयास करें। नौकरी में कार्यक्षेत्र में बदलाव के साथ स्थान परिवर्तन हो सकता है। परिवार से दूर रह सकते हैं। कन्या राशि- आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे। नौकरी में बदलाव हो सकता है। कार्यक्षेत्र में बदलाव के साथ स्थान परिवर्तन की संभावना बन रही है। भागदौड़ अधिक रहेगी। तुला राशि- मन अशांत रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। आय में वृद्धि होगी। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। वृश्चिक राशि- आत्मविश्वास में कमी रहेगी। संयत रहें। क्रोध से बचें। सेहत का ध्यान रखें। नौकरी में स्थान परिवर्तन हो सकता है। किसी रुके धन की प्राप्ति हो सकती है। धनु राशि- मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। शैक्षिक कार्यों में व्यवधान आ सकते हैं। सचेत रहें। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए प्रयास करें। मकर राशि- मन परेशान हो सकता है। अपनी भावनाओं को वश में रखें। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। माता का साथ मिलेगा। आय में कमी व खर्च अधिक की स्थिति हो सकती है। कुंभ राशि- आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परंतु मन परेशान भी हो सकता है। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। नौकरी में कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकता है। मीन राशि- आपके लिए स्थिति पहले से अच्छी होगी। लवलाइफ में समस्याएं कम होगी। नौकरी में आप ऑफिस पॉलिटिक्स का शिकार हो सकते हैं।

योगी सरकार प्रदेश के दो लाख से अधिक युवाओं को अग्नि सुरक्षा कर्मी के पद पर तैनाती के अवसर उपलब्ध कराएगी

लखनऊ योगी सरकार पिछले आठ वर्षों में प्रदेश के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए नए-नए अवसर प्रदान कर रही है। इसी क्रम में योगी सरकार प्रदेश के दो लाख से अधिक युवाओं को अब अग्निशमन विभाग द्वारा प्रशिक्षण के बाद निजी संस्थानों में अग्नि सुरक्षा अधिकारी और अग्नि सुरक्षा कर्मी के पद पर तैनाती के अवसर उपलब्ध कराएगी। इसके लिए सीएम योगी के निर्देश पर विभाग ने कार्ययोजना तैयार कर ली है। इन युवाओं को ट्रेनिंग के बाद प्रदेश के मॉल, हॉस्पिटल, स्कूल और बड़े व्यावसायिक भवनों में नौकरी के अवसर उपलब्ध होंगे। योगी सरकार की यह पहल एक ओर जहां प्रदेश के युवाओं को रोजगार से जोड़ेगी, वहीं दूसरी ओर प्रदेश को अधिक सुरक्षित, सजग और समय रहते आपदा से निपटने में सक्षम बनाएगी। इसी के साथ उत्तर प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन जाएगा, जहां युवाओं को अग्निशमन का प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। अग्निशमन विभाग की एडीजी पद्मजा चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश के निजी भवनों में सिक्याेरिटी गार्ड की तरह अनिवार्य रूप से अग्नि सुरक्षा अधिकारी और अग्नि सुरक्षा कर्मियों को तैनात करने की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके लिए योग्यता के मानक भी तय कर लिए गए हैं। विभाग द्वारा प्रदेश के इच्छुक युवाओं को एक हफ्ते से लेकर चार हफ्ते की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद उन्हें विभाग द्वारा सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा, फिर प्रदेश के निजी भवनों जैसे मॉल, मल्टीप्लेक्स, 100 या उससे अधिक बेड की क्षमता वाले हॉस्पिटल, 24 मीटर से अधिक ऊंचाई के गैर आवासीय भवन, 45 मीटर से अधिक ऊंचाई के आवासीय भवन, 10,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले औद्योगिक भवनों में नौकरी के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने केंद्र सरकार के ‘मॉडल फायर सर्विस बिल- 2019’ को स्वीकार करते हुए ‘उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा अधिनियम- 2022’ लागू किया है। इस अधिनियम के तहत निजी भवनों में प्रशिक्षित अग्नि सुरक्षा अधिकारियों के साथ अग्नि सुरक्षा कर्मियों की तैनाती अनिवार्य है। इन भवनों में अग्नि सुरक्षा अधिकारियों और अग्नि सुरक्षा कर्मियों को तैनात करने वाला देश का पहला राज्य उत्तर प्रदेश बन जाएगा। एडीजी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में लागू ‘उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा अधिनियम- 2022’ और ‘अग्निशमन नियमावली- 2024’ देश के अन्य राज्यों के लिए आदर्श बन चुकी है। अन्य राज्य इस मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं और अपने यहां इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की दिशा में प्रयासरत हैं। उन्होंने बताया कि इच्छुक युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए अग्निशमन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को उच्च तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ अत्याधुनिक उपकरणों का गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने के लिए उन्नाव स्थित ट्रेनिंग सेंटर की क्षमता 196 से बढ़ाकर 600 किए जाने का कार्य प्रगति पर है। रीजनल ट्रेनिंग सेंटरों की स्थापना का भी लक्ष्य है, जिससे आम नागरिकों और विभिन्न कंपनियों और संस्थाओं के कर्मियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त हो सके। विभिन्न श्रेणियों के भवनों के लिए निर्धारित न्यूनतम अर्हता और अनुभव प्राप्त महिला-पुरुष, जिसकी न्यूनतम आयु 18 वर्ष हो, अपने जनपद के किसी भी फायर स्टेशन पर एक सप्ताह के अनुकूलन/प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद फायर सेफ्टी ऑफिसर हो सकेगा। इसी प्रकार अग्नि सुरक्षा कर्मी के लिए कक्षा-10 उत्तीर्ण कोई भी महिला या पुरुष, किसी फायर स्टेशन से 4 सप्ताह का प्रशिक्षण प्राप्त करके या अग्नि सचेतक/फायर वॉलंटियर के रूप में लगातार 2 वर्ष तक पंजीकृत रहकर योगदान देने के बाद अग्नि सुरक्षा कर्मी बन सकेगा।

‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में वित्तीय अनियमितता को लेकर सरदार पटेल ने भी दी थी पंडित नेहरू को चेतावनी, जताई थी कई आशंकाएं

नई दिल्ली 1937 में एसोसिएट जर्नल के गठन के बाद 9 सितंबर 1938 को जवाहर लाल नेहरू ने नेशनल हेराल्ड अखबार शुरू किया, यह बात आजादी मिलने के ठीक 9 साल पहले की है। इस अखबार को शुरू करने में हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने अहम भूमिका निभाई थी। इसके तहत तीन अखबार थे, अंग्रेजी में ‘नेशनल हेराल्ड’, हिंदी में ‘नवजीवन’ और उर्दू में ‘कौमी आवाज’। यही नेशनल हेराल्ड आज सुर्खियों में बना हुआ है। दरअसल, नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कई लोगों पर ईडी ने 988 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले को लेकर चार्जशीट दायर की है। जिसके बाद से उठा राजनीतिक बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। इन तीनों अखबारों का संचालन एसोसिएट जर्नल यानी एजीएल करता था। लेकिन तब भी यह माना जाता था कि यह अखबार पंडित जवाहर लाल नेहरू के इशारों पर चलता है। 1942 से 1945 तक इस अखबार के प्रकाशन पर अंग्रेजों ने रोक भी लगा दी थी। यानी 3 सालों तक इस अखबार का प्रकाशन नहीं हो पाया। देश की आजादी के बाद जब पंडित नेहरू प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने इन अखबारों के बोर्ड के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी को इसके बोर्ड का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे इस एसोसिएट जर्नल यानी एजीएल की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी। पंडित नेहरू के निजी सचिव ओ. एम. मथाई ने अपनी किताब में इस बात का जिक्र किया था कि फिरोज गांधी इस कंपनी के संचालन में बहुत अच्छे नहीं थे। इसलिए यह नेशनल हेराल्ड आर्थिक संकट में फंस गया। जिसे आर्थिक संकट से उबारने के लिए जनहित निधि ट्रस्ट के रूप में बदल दिया गया। इस नए ट्रस्ट पर भी नेहरू परिवार का ही कब्जा रहा। इस ट्रस्ट के सभी ट्रस्टी नेहरू और उनके परिवार के बेहद करीबी लोग बनाए गए। ओ. एम. मथाई ने तो अपनी किताब में यहां तक दावा किया कि नेशनल हेराल्ड के लिए बड़ौदा के महाराजा से पूरे दो लाख रुपए की रिश्वत मांग ली गई थी। सरदार वल्लभभाई पटेल को जब इसकी सूचना मिली थी तो उन्होंने इसकी शिकायत नेहरू से की थी। उस समय विज्ञापन के नाम पर कई बड़े औद्योगिक घरानों से लाखों की रकम एक साल में इस अखबार ने हासिल की। पंडित नेहरू के प्रधानमंत्री रहते ही दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग पर नेशनल हेराल्ड को ऑफिस बनाने के लिए जमीन भी आवंटित की गई। यानी नेशनल हेराल्ड में हुआ घोटाला वित्तीय कदाचार की कोई हालिया कहानी नहीं है, इसकी जड़ें स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों से ही उभरी हुई हैं। 1950 में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने नेहरू को पत्र लिखकर नेशनल हेराल्ड का समर्थन करने के लिए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग करने के साथ ही संदिग्ध धन उगाही के बारे में भी चेतावनी दी थी। सरदार पटेल के पत्राचार में दर्ज इन चिंताओं को नेहरू ने खारिज कर दिया था, जबकि वह इसके दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में आशंकित थे। दशकों बाद, पटेल की ये चेतावनी अब लोगों के सामने आ रही है, जब ईडी इस मामले की जांच कर रही है। ईडी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में आरोपपत्र दायर किया है, जिसमें उन पर यंग इंडिया लिमिटेड के जरिए 5,000 करोड़ रुपए की संपत्ति का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है, जो उनके नियंत्रण में है और नेशनल हेराल्ड और उसकी मूल कंपनी एसोसिएट जर्नल लिमिटेड से जुड़ी है। सरदार वल्लभ भाई पटेल की जो चेतावनी पत्र के रूप में तब शुरू हुई थी, वह अब एक बड़े घोटाले में बदल गई है। 5 मई, 1950 को सरदार वल्लभभाई पटेल ने नेहरू को पत्र लिखकर चिंता जताई कि नेशनल हेराल्ड ने हिमालयन एयरवेज से जुड़े दो व्यक्तियों से 75,000 रुपए से अधिक की रकम स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि एयरलाइन ने भारतीय वायुसेना की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए अवैध रूप से रात्रि हवाई डाक सेवा के लिए सरकारी अनुबंध इसके जरिए हासिल किया है। उसी पत्र में सरदार वल्लभभाई पटेल ने नेहरू को आगाह किया कि नेशनल हेराल्ड ने अखानी नामक एक व्यवसायी से धन स्वीकार किया था, जो उनकी विमानन कंपनी के लिए रात्रि डाक अनुबंध हासिल करने में शामिल था। पटेल ने उल्लेख किया कि अखानी टाटा और एयर सर्विसेज ऑफ इंडिया जैसी फर्मों से भी धन जुटा रहा था। पत्र में आगे पटेल ने नेहरू को लिखा था कि अखानी पर बैंकों से धोखाधड़ी करने के लिए विभिन्न अदालतों में पहले से ही कई आरोप हैं। उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अहमद किदवई द्वारा नेशनल हेराल्ड के लिए धन जुटाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने के बारे में भी चेतावनी पत्र के जरिए दी थी, जिसमें जेपी श्रीवास्तव जैसे लखनऊ स्थित व्यापारियों से धन इकट्ठा करना भी शामिल है। उसी दिन, 5 मई 1950 को, नेहरू ने पटेल को ऐसे लहजे में जवाब दिया था, जिससे लगता था कि उन्हें शांत करने की कोशिश की जा रही थी। नेहरू ने अपने पत्र में उल्लेख किया था कि उन्होंने अपने दामाद फिरोज गांधी, जो उस समय नेशनल हेराल्ड के महाप्रबंधक थे, से इस अवैध धन संग्रह के आरोपों की जांच करने के लिए कहा है। इसके ठीक अगले ही दिन, 6 मई को पटेल ने नेहरू के दावों का दृढ़ता से खंडन करते हुए फिर से नेहरू को जवाब दिया। फिर पटेल को शांत करने का प्रयास किया गया। लेकिन सरदार पटेल के द्वारा अवैध फंडिंग के बारे में जो चिंता व्यक्त की गई थी, उसे दरकिनार कर दिया गया। हालांकि, तब नेहरू ने यह स्वीकार किया था कि इसमें कुछ गलतियां हुई होंगी।

दुल्हन ने रिश्ता तय होने के बाद दूल्हे से कहा- वह शेरवानी पहनकर आए, बताने के बाद भी दो-दो गलतियां कर बैठा दूल्हा

औरैया यूपी के औरैया के एक गेस्ट हाउस में उस समय अफरा-तफरी मच गई मच गई जब एक दूल्हा बताने के बाद भी दो-दो गलतियां कर बैठा। दुल्हन ने रिश्ता तय होने के बाद दूल्हे से कहा था कि वह शेरवानी पहनकर आए, लेकिन कोर्ट पैंट पहनकर चला गया। ये देखते ही दुल्हन का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। दुल्हन का मूड खराब था। जयमाल का कार्यक्रम शुरू हो तो दूल्हा वरमाला लाना ही भूल गया। हालांकि लड़के वालों ने वरमाला की आनन-फानन में व्यवस्था कर ली। इसके बाद भी दुल्हन का मूड ठीक नहीं हुआ और अचानक से शादी न करने की घोषणा कर दी। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। विवाद की स्थिति में किसी ने पुलिस को फोन कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस दोनों पक्षों को कोतवाली ले आई। भोर तक दोनों पक्षों के बीच समझौते के प्रयास होते रहे। मगर बात नहीं बनी। तय रकम देने के बाद दुल्हा व उसके घर वाले घर जा पाए। अजीतमल कोतवाली क्षेत्र से एक बारात बीती रात औरैया कोतवाली के एक गेस्ट हाउस में आई थी। दूल्हा और उसका परिवार दिल्ली में रहता है। शादी तय होने के बाद परिवार शादी के लिए यहां आया था। दूल्हा बाराती भी कम ले गया था। चर्चा है कि दुल्हन ने दूल्हे से शेरवानी पहनकर आने को कहा था। मगर दूल्हा कोट पैंट पहनकर पहुंच गया। इससे दुल्हन नाराज थी। जयमाल के पहले ही दूल्हे के पिता ने शराब पी ली। इसकी जानकारी होने पर दुल्हन व उसके घर वाले नाराज हो गए। मगर रिश्तेदारों के समझाने बुझाने के बाद शांत हो गए। जयमाल के समय जब दूल्हा दुल्हन स्टेज पर पहुंचे। तब फोटो सेशन के बाद जयमाल की बारी आई तब पता चला कि दूल्हा वरमाला लाना ही भूल गया है। हालांकि, आनन फानन में दूल्हा पक्ष के लोगों ने वरमाला की व्यवस्था थोड़ी ही देर में कर ली। मगर इस बार दुल्हन का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने शादी से इंकार कर दिया। इससे दोनों ही पक्षों में अफरातफरी मच गई। काफी समझाने बुझाने के बाद भी दुल्हन शादी के लिए तैयार नहीं हुई। तब कन्या पक्ष के लोग भी उसके समर्थन में आ गए। वर व कन्या पक्ष में शादी को लेकर विवाद होने लगा। सूचना पर कोतवाली पुलिस भी पहुंच गई। और दोनों पक्षों को बैठाकर समझौते का प्रयास किया। मगर बात नहीं बनी। भोर तक दूल्हा व उसके पिता कोतवाली में बैठे रहे। समझौते में तय रकम ढाई लाख रुपये देने के बाद दूल्हे व उसके पिता को जाने दिया गया।

वक्फ हिंसा पर HC में ममता सरकार का कबूलनामा, 10,000 की भीड़ हुई जमा, छीन ली पुलिस की पिस्तौल

कोलकाता वक्फ संशोधन ऐक्ट के खिलाफ पिछले हफ्ते पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद में भड़की हिंसा पर राज्य सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि हिंसा के दिन करीब 10,000 की भीड़ जमा हो गई थी। इतना ही नहीं उन्मादी भीड़ ने तब मौके पर तैनात पुलिस की पिस्तौल भी छीन ली थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बंगाल सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उन्मादी भीड़ में से करीब 10 लोगों के पास घातक हथियार थे, जिनसे पुलिस को अपने अधिकारियों को बचाना पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपद्रवियों की हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले करीब 8000-10000 लोगों की भीड़ पीडब्ल्यूडी ग्राउंड आउट पर इकट्ठा हुई। इसके बाद भीड़ का एक हिस्सा अलग हो गया और करीब 5000 लोग उमरपुर की ओर बढ़ गए और एनएच को जाम कर दिया। इसके बाद देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई और गंदी भाषा का इस्तेमाल करने लगी। इसके बाद उन्होंने पुलिस कर्मियों पर ईंट-पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। तीन सदस्यीय समिति को प्रभावित इलाकों का दौरा करना चाहिए इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के हिंसा प्रभावित मुर्शिदाबाद जिले में केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रखने पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस राजा बसु चौधरी की खंडपीठ ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, पश्चिम बंगाल राज्य मानवाधिकार आयोग और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के एक-एक सदस्य वाली तीन सदस्यीय समिति को हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास और शांति बहाली की निगरानी के लिए जिले के प्रभावित इलाकों का दौरा करना चाहिए। शुभेंदु अधिकारी की याचिका पर सुनवाई हाई कोर्ट राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मुस्लिम बहुल जिले में सांप्रदायिक दंगों के दौरान बम विस्फोट हुए थे। एक अन्य याचिकाकर्ता ने हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों की उनके घरों में वापसी के लिए राज्य सरकार द्वारा कदम उठाए जाने का अनुरोध किया। केंद्र की ओर से पेश वकील ने अदालत के समक्ष अनुरोध किया कि मुर्शिदाबाद में सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) की तैनाती को जिले की जमीनी स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए कुछ समय के लिए और बढ़ा दिया जाए। केंद्रीय बलों की लगभग 17 कंपनियां तैनात मुर्शिदाबाद के उपद्रवग्रस्त सुती, शमसेरगंज-धुलियान इलाकों में फिलहाल केंद्रीय बलों की लगभग 17 कंपनियां तैनात हैं। उच्च न्यायालय ने शनिवार को शांति बहाली के लिए जिले में सीएपीएफ की तैनाती का आदेश दिया था। अदालत के समक्ष अपनी दलील रखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने एक रिपोर्ट पेश की और दावा किया कि मुर्शिदाबाद में कानून-व्यवस्था की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि कुछ प्रभावित परिवार पहले ही अपने घर लौट चुके हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में मुर्शिदाबाद में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में हुई हिंसा से बचकर कई लोगों ने मालदा जिले के एक स्कूल में राहत शिविर में शरण ली है। राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग दूसरी तरफ, शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि राज्य के मुर्शिदाबाद, मालदा और चौबीस परगना जैसे जिलों में भड़की हिंसा और लोगों के पलायन के बाद अब राज्य के हालात ममता बनर्जी सरकार के नियंत्रण से बाहर जा रहा है, इसलिए राज्य में अविलंब राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए। भाजपा के वरिष्ठ नेता अधिकारी ने राष्ट्रपति शासन की मांग करते हुए कहा,“ममता सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल हो चुकी है।” उन्होंने 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव को राष्ट्रपति शासन के तहत कराने की भी मांग की है। अधिकारी का आरोप है कि जिहादी तत्व खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस सत्ताधारी पार्टी के कैडर की तरह काम कर रही है।

‘हम हिन्दू हैं, हिन्दी नहीं, तीन-भाषा नीति की आलोचना कर राज ठाकरे ने कहा-हर जगह हिन्दी थोपने नहीं देंगे

मुंबई त्रि-भाषा फॉर्मूले के तहत हिन्दी थोपने का विवाद अब महाराष्ट्र पहुंच चुका है। महाराष्ट्र की नव निर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने केंद्र सरकार की तीन-भाषा नीति की आलोचना की है और कहा है कि वह हर जगह हिन्दी थोपने नहीं देंगे। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “आपका जो भी त्रि-भाषा फॉर्मूला है, उसे सरकारी मामलों तक ही सीमित रखिए, उसे शिक्षा में न लाएं।” उन्होंने आगे कहा कि MNS केंद्र सरकार के हर चीज को ‘हिंदीकृत’ करने के मौजूदा प्रयासों को इस राज्य में सफल नहीं होने देगी। उन्होंने लिखा, “हम हिंदू हैं, लेकिन हिंदी नहीं! अगर आप महाराष्ट्र को हिंदी के रूप में चित्रित करने की कोशिश करेंगे, तो महाराष्ट्र में संघर्ष होना तय है। अगर आप यह सब देखेंगे, तो आपको एहसास होगा कि सरकार जानबूझकर यह संघर्ष पैदा कर रही है। क्या यह सब आगामी चुनावों में मराठी और गैर-मराठी के बीच संघर्ष पैदा करने और इसका फायदा उठाने की कोशिश है?” हाल ही में महाराष्ट्र में लागू हुआ त्रि-भाषा फॉर्मूला राज ठाकरे का यह बयान तब आया है, जब राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने पिछले दिनों कई राज्‍यों में हिन्‍दी भाषा को लेकर उपजे विरोध के बीच कक्षा 1 से 5 तक हिन्दी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य कर दिया है। त्रिभाषा फॉर्मूले का नया पाठ्यक्रम 2025-26 के शैक्षणिक सत्र से लागू किया गया है। महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत नया शैक्षणिक ढांचा लागू करने की घोषणा करते हुए हिन्दी को तीसरी भाषा के तौर पर अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत अब राज्य के मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएगी। CM फडणवीस ने किया बचाव इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में हिन्दी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने के सरकार के फैसले का बचाव किया है और केंद्र की इस नीति की प्रशंसा की है। फडणवीस ने कहा, “अगर कोई अंग्रेजी सीखना चाहता है, तो वह अंग्रेजी सीख सकता है। अगर कोई छात्र कोई अन्य भाषा सीखना चाहता है, तो किसी को भी अन्य भाषाएँ सीखने पर कोई रोक नहीं है। हालांकि, सभी को मराठी आनी चाहिए। साथ ही, हमारे देश की अन्य भाषाओं को भी जानना चाहिए। केंद्र सरकार ने इस बारे में सोचा है। केंद्र सरकार को लगता है कि हमारे देश में संचार की एक भाषा होनी चाहिए। यहr प्रयास किया गया है।”

करोड़ों रुपए स्वीकृत फिर भी अधर में लटकी नहर परियोजना, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे किसान

कवर्धा प्रदेश सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन कबीरधाम जिले की स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। गर्मी के इस मौसम में यहां के किसान बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। धरती के पुत्र कहे जाने वाले ये किसान आज खुद बेहाल हैं, क्योंकि सिंचाई के लिए पानी ही उपलब्ध नहीं है। रघुपारा, तिलाईभाट और बद्दो गांव के किसानों ने वर्षों पहले नहर विस्तारीकरण की मांग की थी। राज्य सरकार ने किसानों की समस्या को देखते हुए करिया आमा से राम्हेपुर तक तीन किलोमीटर लंबी नहर निर्माण के लिए करोड़ों रुपये की स्वीकृति दी थी, जिससे किसान धान, चना, गन्ना जैसी फसलें उगा सकें और आर्थिक रूप से सशक्त बने। नहर निर्माण कार्य शुरू भी हुआ और करीब दो किलोमीटर तक नहर तैयार भी हो गई, लेकिन पिछले पांच वर्षों से यह परियोजना अधर में लटकी हुई है। किसान जमीन देने तैयार नहीं इसलिए रुका है नहर का काम दरअसल, बद्दो गांव से आगे नहर निर्माण इसलिए रुका हुआ है क्योंकि कुछ किसानों ने अपनी जमीन देने से इनकार कर दिया है, जबकि आधा दर्जन से अधिक किसान इसके लिए तैयार हैं। इसी कारण नहर का विस्तार कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। आज गांव में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच बैठक हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। यदि नहर निर्माण कार्य पूरा होता है तो तिलाईभाट, बद्दो, रघुपारा समेत आसपास के दर्जनों गांवों के खेतों तक पानी पहुंचता और पानी की समस्या से राहत मिल जाती। विवाद सुलझने के बाद नहर निर्माण कार्य में आएगी तेजी : सब इंजीनियर जल संसाधन विभाग की सब-इंजीनियर रेखा ने बताया कि किसानों के बीच मध्यस्थता न बन पाने के कारण नहर निर्माण का कार्य रुका हुआ है। उन्होंने कहा कि जैसे ही विवाद सुलझेगा, नहर निर्माण का काम तेजी से पूरा किया जाएगा। इसके बाद क्षेत्र में पानी की किल्लत खत्म हो जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- मध्यप्रदेश में वन्य जीव पर्यटन में नए आयाम जुड़ रहे हैं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में वन्य जीव पर्यटन में नए आयाम जुड़ रहे हैं। पारिस्थितिकी तंत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गिद्धों का संरक्षण न केवल जैव विविधता की रक्षा के लिए आवश्यक है, अपितु पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की दृष्टि से भी अनिवार्य है। प्रदेश में गिद्ध संरक्षण को भी नई दिशा दी जा रही है। भोपाल स्थित केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्धों को बुधवार को पहली बार प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि राज्य सरकार ने गिद्धों सहित अन्य पशु पक्षियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए सतत प्रयास किए हैं। एशिया से लुप्त हो रहे चीतों के पुनर्वास के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दक्षिण अफ्रीका के देशों से चीते लाकर कूनो अभ्यारण में उनका संरक्षण एवं संवर्धन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्राकृतिक वातावरण में छोड़े गए गिद्धों पर जीपीएस ट्रैकर लगाए गए हैं,जिससे उनके आवागमन, व्यवहार एवं सुरक्षा की सतत निगरानी सुनिश्चित की जा सके।  

स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता के लिये विद्यार्थियों से जुड़े सभी कार्य निर्धारित कैलेण्डर के अनुसार पूरे हों : स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह

भोपाल स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि प्रदेश में स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता के लिये विद्यार्थियों से जुड़े सभी कार्य निर्धारित कैलेण्डर में पूरा किया जाना सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने शिक्षकों की उपस्थिति के लिये ऑनलाइन व्यवस्था की प्रशंसा की। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षकों की अटेंडेंस को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उज्जैन और नरसिंहपुर जिले में तत्काल लागू किया जाये। मंत्री श्री सिंह गुरूवार को लोक शिक्षण संचालनालय में विभागीय अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा श्री संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता, संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री हरजिंदर सिंह, पाठ्य पुस्तक निगम के एमडी श्री विनय निगम विशेष रूप से उपस्थित थे। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने विभाग में लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों के निराकरण में संवेदनशील रूख रखने के निर्देश दिये। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्कूल शिक्षा से जुड़ी केन्द्रीय योजनाओं में राज्य को मिलने वाली राशि को प्राप्त करने के लिये विशेष पहल की जाये। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि विभाग में ऐसी व्यवस्था की जाये कि सेवानिवृत्त होने के बाद शिक्षकों और कर्मचारियों के स्वत्वों का भुगतान समय पर हो जाये। जन-प्रतिनिधियों से प्राप्त होने वाले पत्र पर विभाग की ओर से शीघ्र कार्यवाही पत्र भेजने की व्यवस्था की जाये। योजना के क्रियान्वयन की स्थिति बैठक में बताया गया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 82 लाख विद्यार्थियों को पाठ्‌य पुस्तकों का वितरण होना है। विभाग द्वारा 60 प्रतिशत पाठ्य पुस्तकों के वितरण का कार्य पूरा किया जा चुका है। कक्षा 1 से 8 तक के करीब 60 लाख विद्यार्थियों को यूनिफार्म डीबीटी के माध्यम से दिये जाने की व्यवस्था की जा रही है। बैठक में निशुल्क साइकिल, छात्रवृत्ति, लैपटॉप, स्कूटी वितरण की प्रक्रिया समय-सीमा में किये जाने की जानकारी दी गई। बैठक में माध्यमिक शाला से हाई स्कूल, हाई स्कूल से हायर सेकण्डरी स्कूल के उन्न्यन की जानकारी दी गई। उन्नयन की कार्यवाही इस वर्ष 15 जून तक पूरी कर ली जायेगी। सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. गोयल ने बताया कि ग्रीष्म काल में उन स्कूलों की पहचान कर ली जायेगी, जो जर्जर हो गये हैं। उनके वैकल्पिक स्थान, अतिरिक्त कक्ष निर्माण मरम्मत संबंधी कार्य प्राथमिकता के साथ किये जायेंगे। मरम्मत कार्य के लिये 149 करोड़ और अतिरिक्त कक्षा निर्माण के लिये 100 करोड़ रूपये का प्रावधान रखा गया है। बैठक में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लेब की भी जानकारी दी गई। बैठक में बताया गया कि 45 हजार 500 हायर सैकेण्डरी, एक लाख 62 हजार प्राथमिक शिक्षकों को टेबलैट प्रदाय किये जा चुके हैं। 75 हजार माध्यमिक शिक्षकों को टेबलैट प्रदान किये जाने की कार्रवाई की जा रही है। स्टार्स प्रोजेक्ट के अंतर्गत 52 सीएम राइज स्कूलों में रोबोटिक्स लैब की स्थापना की जा रही है। 458 पीएमश्री विद्यालयों में अटल टिंकेरिंग लेब स्थापित की जा रही है। बैठक में फर्नीचर व्यवस्था के संबंध में भी चर्चा की गई।  

भारतीय रेलवे श्रीनगर तक चलने वाली वंदे भारत ट्रेन के लिए क्या किराया और शेड्यूल होगा, इसकी जानकारी जल्द देगा

जम्मू जम्मू के कटरा से श्रीनगर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को 19 अप्रैल को हरी झंडी दिखाई जानी थी, लेकिन पीएम मोदी का दौरा टलने से अब थोड़ा और समय लगेगा। हालांकि, इस ट्रेन के लिए टिकट बुकिंग इसी हफ्ते से शुरू हो जाएगी। चेन्नई स्थित इंटिग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में वंदे भारत के कोच बनाए गए हैं। इससे पूरे देश से कश्मीर की यात्रा आसान हो जाएगी। हालांकि, यात्रियों को सुरक्षा की दृष्टि से पहले जम्मू के कटरा तक किसी ट्रेन से आना होगा और फिर यहां से श्रीनगर के लिए वंदे भारत ट्रेन मिलेगी। रेलवे की ओर से एक खुशखबरी सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि अन्य ट्रेनों की ही तरह कश्मीर जाने वाली इस वंदे भारत में भी पांच साल से कम उम्र के बच्चों का टिकट नहीं लगेगा। भारतीय रेलवे श्रीनगर तक चलने वाली वंदे भारत ट्रेन के लिए क्या किराया और शेड्यूल होगा, इसकी जानकारी जल्द देगा। माना जा रहा है कि 19 अप्रैल तक इसे जारी किया जा सकता है। इसका रखरखाव उत्तरी रेलवे (एनआर) करेगा। हालांकि, माना जा रह है कि एसी चेयर कार का टिकट 1600 रुपये और एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया 2500 रुपये तक हो सकता है। किराए को लेकर आधिकारिक जानकारी जल्द दी जाएगी। इस ट्रेन में अन्य ट्रेनों की ही तरह पांच साल के बच्चों के लिए यात्रा फ्री होगी। ‘ईटी नाऊ’ से बात करते हुए भारतीय रेलवे के सीनियर अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों के लिए वंदे भारत ट्रेन से यात्रा करना फ्री होगा। हालांकि, अगर उसे सीट की जरूरत होगी तो वह उसे पूरा किराया देना होगा। सिर्फ तीन घंटे में पहुंच सकेंगे कश्मीर जम्मू से कश्मीर पहुंचने में सड़क के जरिए आमतौर पर सात से आठ घंटे का समय लगता है, लेकिन वंदे भारत के जरिए यह समय आधा हो जाएगा। कटरा से श्रीनगर महज तीन घंटे में ही वंदे भारत के जरिए लोग यात्रा कर सकेंगे। इससे न सिर्फ कश्मीर जाने वाले पर्यटकों को फायदा मिलेगा, बल्कि स्थानीय विकास के लिए भी यह ट्रेन फायदेमंद साबित हो सकती है। कश्मीर यात्रा के दौरान यह ट्रेन रियासी सेक्टर में चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज से भी गुजरेगी।

प्रदेश में चावल के परिवहन एवं भंडारण की गुणवत्ता की होगी कड़ी निगरानी: मंत्री राजपूत

भोपाल प्रदेश के विभिन्न जिलों के मध्य रेक/एलआरटी के माध्यम से चावल का परिवहन एक निरंतर प्रक्रिया है, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस प्रक्रिया की पारदर्शिता, गुणवत्ता और मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने अधिकारियों को निर्देशित किया है। मंत्री श्री राजपूत ने अपर मुख्य सचिव खाद्य श्रीमती रश्मि अरुण शमी को कहा है कि पूर्व में जारी मानक संचालन प्रक्रिया के अनुपालन की जमीनी स्थिति की व्यापक समीक्षा की जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि एसओपी के पालन में प्रेषण अथवा प्राप्तकर्ता जिलों द्वारा किसी भी प्रकार की लापरवाही होती है, तो इससे अमानक गुणवत्ता के चावल के जमा होने की संभावना बन सकती है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है, बल्कि शासन की साख भी प्रभावित हो सकती है। खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने इस संदर्भ में आयुक्त, खाद्य के स्तर से एक विशेष जांच दल गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह दल रेण्डम आधार पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में चावल के परिवहन और भंडारण की संपूर्ण प्रक्रिया का औचक निरीक्षण करेगा। यह जांच दल संबंधित जिलों द्वारा की गई कार्यवाही का अभिलेखीय परीक्षण करेगा। इसमें प्रेषण व प्राप्ति रजिस्टर, परिवहन अनुबंध, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, भंडारण स्थल का भौतिक सत्यापन आदि शामिल होंगे। खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने स्पष्ट किया है कि विभाग द्वारा पूर्व में जारी मानक निर्देश एवं एसओपी सभी जिलों के लिए बाध्यकारी हैं। इसमें किसी भी स्तर पर की गई लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि वे चावल के प्रेषण और प्राप्ति से जुड़ी कार्यवाहियों को एसओपी के अनुरूप ही निष्पादित करें तथा जांच दल को आवश्यक दस्तावेज एवं सूचनाएं उपलब्ध कराते हुए पूर्ण सहयोग सुनिश्चित करें। निर्धारित समय-सीमा में प्रस्तुत हो प्रतिवेदन मंत्री श्री राजपूत ने अपर मुख्य सचिव खाद्य को यह भी निर्देश दिया है कि जांच दल द्वारा की गई निरीक्षण की कार्रवाई का विस्तृत प्रतिवेदन निर्धारित समय-सीमा में प्रस्तुत किया जाये, ताकि उसके आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि कोई भी गड़बड़ी पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। खाद्य आपूर्ति व्यवस्था में सुधार हेतु निरंतर प्रयासरत है राज्य सरकार खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा है कि प्रदेश सरकार नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराने तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी एवं सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में किए जा रहे सुधारात्मक उपायों के अंतर्गत यह कदम एक महत्त्वपूर्ण पहल है, जिससे शासन की खाद्य नीति और वितरण व्यवस्था को और अधिक भरोसेमंद बनाया जा सकेगा।  

जनसहभागिता की अभिनव पहल, आइए मिलकर जल स्त्रोतों को सहेजें

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अभिकल्पना को साकार करते हुए “जल गंगा संवर्धन” अभियान अब जन अभियान बन गया है। अभियान की अवधारणा “जनसहभागिता से जल संरक्षण और संवर्धन” पर केन्द्रित है। इस अभियान के अंतर्गत नवीन जल संग्रहण संरचनाओं के साथ पूर्व से मौजूद जल संग्रहण संरचनाओं का जीर्णोद्धार, जल स्त्रोतों और जल वितरण प्रणालियों की साफ-सफाई जल स्त्रोतों के आस-पास पौध-रोपण के कार्य प्राथमिकता से किये जा रहे है। समाज की सहभागिता के लिये जल संरक्षण जागरूकता के विभिन्न कार्यक्रम पूरे प्रदेश में आयोजित किये जा रहे हैं। दतिया के उन्नाव बालाजी धाम पर स्वच्छता कार्यक्रम दतिया जिले के उन्नाव बालाजी धाम/तीर्थस्थान की नदी पर वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, आम नागरिकों ने स्वच्छता कार्य किया एवं जल संरक्षण की शपथ भी दिलायी गई। नदी की गंदगी को कार्यकर्ताओं ने हटाकर नदी को स्वच्छ किया और सभी को संदेश दिया कि हर व्यक्ति अपने गांवों और पंचायतों में प्राचीन जल स्रोतों की सफाई करें एवं लोगों को उनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिये जागरूक करें। मंदसौर के पिपलिया मंडी में निकाली गई कलश यात्रा मंदसौर जिले के पिपलिया मंडी अयोध्या बस्ती में जन अभियान परिषद ने कलश यात्रा निकालकर जल संरक्षण का संदेश दिया। पिपलिया मंडी के तालाब में कलश यात्रा के साथ ही श्रमदान किया गया। इस अवसर पर परिषद के संभाग समन्वयक, ब्लॉक समन्वयक, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। उमरिया में युवा टीम ने प्राचीन सगरा तालाब के घाटों में गीत गाकर नागरिकों को किया जागरूक उमरिया जिले की सक्रिय युवाओं की टोली द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत पाली नगर के ऐतिहासिक प्राचीन सगरा तालाब के हरिहर बाबा घाट में बैठकर जल संरक्षण गीत गाकर नागरिकों को जल को सहेजने के लिये जागरूक किया। विवाह के निमंत्रण के साथ भेजा जल संरक्षण का संदेश उमरिया जिले के विकासखंड मानपुर के ग्राम बचहा में नवाचार करते हुए विवाह के निमंत्रण के साथ जल संरक्षण का संदेश भेजा जा रहा है। ग्राम बचहा के भूतपर्व सरपंच कमला प्रसाद जायसवाल ने अपनी बेटी सुधा जायसवाल के विवाह के निमंत्रण में “जल है तो कल है, लोग प्रेम के बिना रह सकते है, मगर पानी के बिना नही” का संदेश दिया। उनकी इस पहल का आमजनों ने स्वागत किया तथा जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। शहडोल मेंपानी की एक-एक बूंद सहजने एवं महत्व बताने जन-प्रतिनिधि एवं अधिकारियों ने लगाई चौपाल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में शहडोल जिले के जनपद पंचायत पड़मनिया खुर्द में लोगों को पानी की एक-एक बूंद सहेजने एवं जल का महत्व बताने के लिए जन चौपाल लगाई गई। जन-चौपाल में कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि जल के बिना जीवन संभव नही है, जल अमूल्य है, इसे बचाने के लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास करना होगा, जल को बचाने के लिए केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नही बल्कि हम सभी कि जिम्मेदारी है कि आने वाले पीढ़ियों के लिए पानी का संचयन करें। देवास में बारिश के पानी को सहेजने के लिए किया जा रहा है तालाब गहरीकरण देवास जिले में “जल गंगा संवर्धन अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से जल संरचनाओं के निर्माण एवं गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। जिला प्रशासन एवं ग्रामीणों के जनसहयोग से जनपद पंचायत कन्‍नौद की ग्राम पंचायत कोठड़ी में बारिश के पानी को सहजने के लिए तालाब गहरीकरण कार्य किया जा रहा है। तालाब के गहरीकरण के बारिश के दिनों में पानी संग्रहित होगा तथा वॉटर लेवल भी बढ़ेगा, जिससे पेयजल के साथ खेती करने के लिए भी पानी मिल सकेगा।

सनराइजर्स हैदराबाद ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट खोकर 162 रन बनाए, मुंबई को मिला 163 का टारगेट

नई दिल्ली मुंबई इंडियंस और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच आईपीएल 2025 का 33वां मुकाबला खेला जा रहा है। सनराइजर्स हैदराबाद ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 162 रन बनाए। हैदराबाद की ओर से अभिषेक शर्मा ने सर्वाधिक 40 रन बनाए। मुंबई के लिए विल जैक्स ने दो विकेट लिए। पहले बल्लेबाजी करने उतरी सनराइजर्स हैदराबाद टीम के सलामी बल्लेबाज ट्रैविस हेड और अभिषेक शर्मा को पहले ओवर में जीवनदान मिला। अभिषेक शर्मा 28 गेंद में 40 रन बनाकर आउट हुए। ईशान किशन दो रन ही बना सके। सलामी बल्लेबाज ट्रैविस हेड 29 गेंद में 28 रन बनाकर पवेलियन लौटे। हेनरिक क्लासेन ने 28 गेंद में 37 रन का योगदान दिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा- कश्मीर का पाक के साथ एकमात्र संबंध अवैध रूप से कब्जाए गए क्षेत्र को खाली करना है

इस्लामाबाद भारत ने गुरुवार को पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पर दो-राष्ट्र सिद्धांत और कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए पलटवार किया है। मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कश्मीर का पाकिस्तान के साथ एकमात्र संबंध अवैध रूप से कब्जाए गए क्षेत्र को खाली करना है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने दो-राष्ट्र सिद्धांत के मुद्दे को उठाते हुए इस बात पर जोर दिया था कि भारत और पाकिस्तान दो अलग-अलग राष्ट्र हैं। इस्लामाबाद में बुधवार को ओवरसीज पाकिस्तानी कन्वेंशन में अपने संबोधन में असीम मुनीर ने पाकिस्तानी नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को बताएं कि राष्ट्र का जन्म कैसे हुआ। मुनीर ने कहा, ”…हमारे पूर्वजों ने सोचा था कि हम जीवन के हर संभव पहलू में हिंदुओं से अलग हैं। हमारा धर्म अलग है, हमारे रीति-रिवाज अलग हैं, हमारी परंपराएं अलग हैं, हमारे विचार अलग हैं, हमारी महत्वाकांक्षाएं अलग हैं। यहीं से दो-राष्ट्र सिद्धांत की नींव रखी गई। हम दो राष्ट्र हैं, हम एक राष्ट्र नहीं हैं।” अपने संबोधन में पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने कश्मीर मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत कश्मीर को पाकिस्तान से अलग नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वजों ने बहुत त्याग किया है और हमने इस देश के निर्माण के लिए बहुत त्याग किया है और हम जानते हैं कि इसकी रक्षा कैसे करनी है।” उन्होंने आगे कहा, “मेरे प्यारे भाइयों और बहनों और बेटे और बेटियों, कृपया पाकिस्तान की कहानी मत भूलना और अपनी अगली पीढ़ी को पाकिस्तान की कहानी सुनाना मत भूलना, ताकि पाकिस्तान के साथ उनका रिश्ता कभी कमजोर न पड़े। चाहे वह तीसरी पीढ़ी हो, या चौथी पीढ़ी हो या पांचवीं पीढ़ी हो, वे जानते हैं कि पाकिस्तान उनके लिए क्या है।” ‘भारत को पाकिस्तान से घनिष्ठ संबंध बनाने की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए’ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की हालिया टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि अब समय आ गया है कि भारत सच्चाई को स्वीकार करे और पाकिस्तान से घनिष्ठ संबंध बनाने की उम्मीद छोड़ दे। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”अपने हालिया संबोधन में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने साफ कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच गहरी वैचारिक खाई है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यह साफ हो चुका है कि हमारे रास्ते अलग हैं। ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि हम अपने राष्ट्र को मजबूत करें, अपने धर्म और सभ्यतागत मूल्यों को बनाए रखें। ऐसा करके ही हम अपने देश को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।

प्रदेश के सभी संभागों में होंगे किसान मेले : कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी संभागों में किसान मेला आयोजित करेगी। उज्जैन संभाग में 3 मई को मंदसौर में पहला किसान मेला आयोजित किया जाएगा। मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के सभी संभागों में किसान मेलों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। इन मेलों में किसानों को कृषि, खाद्य प्र-संस्करण, उद्यानिकी और पशुपालन से संबंधित नवीनतम जानकारी दी जायेगी। साथ ही सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी के साथ किसानों की समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा। मेले में प्रदर्शनी के माध्यम से भी किसानों को कृषि तकनीकों और कृषि उपकरणों की जानकारी दी जायेगी। मंत्री श्री कंषाना ने बताया कि अक्टूबर में एक राज्य स्तरीय किसान मेला भी आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा राज्य सरकार ने एक साल में 10 लाख सोलर पंप लगाने का लक्ष्य रखा है, जिससे किसानों को ऊर्जादाता बनने में मदद मिलेगी। सरकार ने इसके लिए अभियान शुरू कर किसानों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। कृषि मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत@2047 के विजन के अनुरूप राज्य सरकार ने गरीब, युवा, अन्नदाता किसान और नारी कल्याण के लिए मिशन शुरू कर दिया है। मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश कृषक कल्याण मिशन को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी गई है। ‘मध्यप्रदेश कृषक कल्याण मिशन’ के तहत अब कृषि से सम्बद्ध विभागों की योजनाएं एक मंच पर समन्वित रूप से क्रियान्वित होंगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि आधारित राज्य है और इस क्षेत्र में यहां अपार संभावनाएं हैं। किसानों की आय, कृषि उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन में वृद्धि के साथ खाद्य प्र-संस्करण और कृषि से उत्पादित कच्चे माल पर आधारित औद्योगिक इकाई स्थापित करने जैसे हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं। किसानों और गौ-पालकों की आय बढ़ाने के साथ कुपोषण दूर करने की दिशा में सरकार योजनाबद्ध तरीके से पूरी ऊर्जा के साथ कार्य कर रही है।  

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