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डीएफओ अशोक कुमार पटेल को तेंदूपत्ता बोनस घोटाला मामले में किया गिरफ्तार

रायपुर छत्तीसगढ़ के सुकमा वनमंडल में हुए करोड़ों के तेंदूपत्ता बोनस घोटाला मामले में गुरुवार को एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने निलंबित आइएफएस अधिकारी(डीएफओ) अशोक कुमार पटेल को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पटेल को रायपुर की विशेष कोर्ट में पेश किया गया, जहां ईओडब्ल्यू की ओर से आवेदन पेशकर उन्हें 30 अप्रैल तक पूछताछ करने पुलिस रिमांड में रखने की मांग की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई को बाद 23 अप्रैल तक कस्टोडियल रिमांड मंजूर कर एसीबी-ईओडब्ल्यू को सौंपने का आदेश सुनाया।   जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2021 के तेंदूपत्ता बोनस वितरण में 6.50 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई है। इसके तार कई अधिकारियों और प्रबंधकों से जुड़े हुए निकले है। भारी अनियमितताओं की परतें डीएफओ की गिरफ्तारी के बाद खुलने की उम्मीद है। जांच के दौरान एसीबी और ईओडब्ल्यू की संयुक्त टीम ने 10 अप्रैल को सुकमा जिले में नौ ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें नामी प्रबंधकों और नेताओं की संलिप्तता सामने आई। इन अधिकारियों के नाम जांच में शामिल उनमें सीपीआई नेता मनीष कुंजाम, कोंटा प्रबंधक मोहम्मद शरीफ़ खान, पालाचलमा प्रबंधक सीएच वेंकट, फूलबगड़ी प्रबंधक राजशेखर पुराणिक, जगरगुंडा प्रबंधक रवि गुप्ता, मिशिगुडा प्रबंधक राजेश आयतु, एर्राबोर प्रबंधक मितेंद्र सिंह राजू, पेदाबोडकेल प्रबंधक सुनील और जग्गावरम प्रबंधक मनोज कवासी के नाम जांच में शामिल हैं। इसके अलावा 11 अप्रैल को सुकमा के दोरनापाल में एक वनकर्मी के घर पर भी एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने छापेमारी की थी। 6.50 करोड़ की हेराफेरी के मिले सुबूत एसीबी-ईओडब्ल्यू के अधिवक्ता मिथलेश वर्मा ने एसीबी,ईओडब्ल्यू के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुपलेश कुमार की ओर से विशेष कोर्ट में पेश रिमांड पत्रक में बताया कि सुकमा वनमंडल में जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित सुकमा के अंतगर्त तेंदूपत्ता सीजन 2021-22 में अप्रैल का प्राप्त प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि का आहरण कर विभिन्न वन अधिकारियों व अन्य ने आपस में बटवारा कर लिया। इस संबंध में अब्दुल शेख करीम द्वारा प्रेषित शिकायत पर अपराध पंजीबद्व किया गया था। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वनांचल के गरीब आदिवासियों के मेहनत की तेंदूपत्ता बोनस राशि करीब 6.50 करोड़ रुपये की हेराफेरी वन अधिकारियों और अन्य ने मिलकर की थी। हेराफेरी के ठोस सुबूत मिलने पर तेलीबांधा क्षेत्र के 81,ऐश्वर्या रेसीडेंसी निवासी डीएफओ 46 वर्षीय अशोक पटेल की विधिवत गिरफ्तारी सुबह 11 बजे की गई। पटेल मूलत: रायगढ़ जिले के कृष्णा वाटिका कालोनी बोईरदादर निवासी है।  

एमपी पॉवर कंपनी ने कार्मिकों के गृह भाड़ा भत्ते को किया पुनरीक्ष‍ित

भोपाल एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने कंपनी कार्मिकों के पुनरीक्ष‍ित गृह भाड़ा भत्ता का आदेश आज जारी कर दिया। पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने मध्यप्रदेश शासन वित्त विभाग के ज्ञाप क्रमांक एफ 4-1/2025/नियम/चार दिनांक 3 अप्रैल 2025 को जारी राज्य शासन के शासकीय सेवकों को देय गृह भाड़ा भत्ता के पुनरीक्षण संबंधी आदेश को यथावश्यक संशोधनों सहित ‘शासकीय सेवक’के स्थान पर ‘कंपनी कार्मिक’प्रतिस्थापित करते हुए ग्राह्य किया है। एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा पुनरीक्ष‍ित गृह भाड़ा भत्ता इस प्रकार हैं (1) 7 लाख अथवा इससे अधिक जनसंख्या के नगरों में निवासरत कंपनी कार्मिक को वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के अनुसार देय मूल वेतन का 10 प्रतिशत देय होगा। (2) 3 लाख से अधिक पर 7 लाख से कम जनसंख्या के नगरों में निवासरत कंपनी कार्मिक को वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के अनुसार देय मूल वेतन का 7 प्रतिशत देय होगा। (3) 3 लाख से कम जनसंख्या के नगरों में निवासरत कंपनी कार्मिक को वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के अनुसार देया मूल वेतन का 5 प्रतिशत देय होगा। इन कार्मिकों को देय नहीं होगा गृह भाड़ा भत्ता जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन कार्मिकों को कंपनी आवास गृह आवंटित किया गया है अथवा जो किराया रहित कंपनी आवासगृहों में निवासरत हों अथवा जिन्हें किराया रहित आवास गृह के बदले और कोई भत्ता दिया जा रहा हो, उन्हें देय गृह भाड़ा भत्ता की पात्रता नहीं होगी। संविदा, तदर्थ, स्थायीकर्मी व दैनिक वेतन के आधार पर नियुक्त कार्मिकों को देय गृह भाड़ा भत्ता की पात्रता नहीं होगी। आदेश के अनुसार गृह भाड़ा भत्ता की स्वीकृति के संबंध में अन्य शर्तें पूर्वानुसार रहेंगी। आदेश के अनुसार गृह भाड़ा संबंधी दिशा निर्देश 1 अप्रैल 2025 से प्रभावशील होंगे।

भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में राज्यपाल पटेल ने सिकल सेल एनीमिया मशीन का लोकार्पण किया

भोपाल भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में 17 अप्रैल को मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने अस्पताल के सिकल सेल एनीमिया सक्षमता केंद्र में स्थापित आनुवंशिक विश्लेषण प्रयोगशाला एवं डीएनए सीक्वेंसर मशीन का लोकार्पण किया। साथ ही “सिकल सेल एनीमिया के प्रबंधन में आनुवंशिक विश्लेषण और एकीकृत दृष्टिकोण” विषय पर संगोष्ठी का शुभारंभ भी किया। माननीय राज्यपाल ने इस दौरान सिकल सेल से पीड़ित कुछ बच्चों से मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जााना।       कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री श्री कुँवर विजय शाह, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. सलोनी सिडाना, आईसीएमआर- राष्ट्रीय प्रतिरक्षा रुधिर विज्ञान संस्थान, मुंबई की निदेशक डॉ. मनीषा मडकईकर, और बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव उपस्थित रहीं।     भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़े। साथ ही सिकल सेल से पीड़ित कई मरीज व उनके अभिभावक भी कार्यक्रम में शामिल थे।     इस दौरान ‘सिकल सेल रोग: जानकारी, बचाव और देखभाल’ शीर्षक दिग्दर्शिका का लोकार्पण विमोचन किया गया तथा सिकल सेल पीड़ितों को स्वास्थ्य किट एवं पोषण आहार वितरित किए गए।     ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल को भारत से खत्म करने का लक्ष्य रखा है।     इस लक्ष्य को हासिल करने की जिम्मेदारी हम सभी की है। जहां भी लोगों के सिकल सेल से प्रभावित होने की आशंका है, वहां लोगों की जांच कराओ। जो बीमारी से ग्रसित पाए जाते हैं, उनको दवा दिलाओ।     सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बीएमएचआरसी द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि चूंकि सिकल सेल एक अनुवांशिक बीमारी है।     इसलिए इसका उन्मूलन जटिल और चुनौतीपूर्ण कार्य है। हमारे वैज्ञानिकों ने जीन स्तर के विश्लेषण द्वारा रोग की जड़ तक पहुंचकर रोग उन्मूलन के लिए कार्य करने का अभूतपूर्व अवसर उपलब्ध कराया है।     उन्होंने कहा कि सिकल सेल के उन्मूलन के लिए किए जा रहे प्रयासों में डीएनए सीक्वेंस मशीन की स्थापना एक सकारात्मक पहल है।     यह मशीन सिकल सेल रोग से संबंधित चुनौतियों और जटिलताओं को समझने और समाधान खोजने में सहायक सिद्ध होगी।     सिकल सेल बीमारी के बारे में जनजागरूकता लाने के लिए राज्यपाल मंगुभाई पटेल के प्रयासों को अभूतपूर्व बताते हुए जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने कहा कि सिकल सेल एक अद्भुत और अनोखी बीमारी है, लेकिन पहले बीमारी से ग्रस्त बच्चों और उनके माता—पिता को इसके बारे में पता ही नहीं था।     महामहिम राज्यपाल के प्रयासों से लोगों में काफी जागरूकता आई है। सिकल सेल से चल रही लड़ाई को जीतने के लिए हम काफी कुछ कर सकते हैं। राज्यपाल महोदय से प्रेरणा लेकर हम इस दिशा में काम करते रहेंगे।  

किरेन रिजिजू ने राजनीतिक दलों को चेताया भी, 10,000 तीर्थयात्रियों के लिए सऊदी अरब ने फिर खोला पोर्टल

नई दिल्ली केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को सभी राजनीतिक दलों से हज तीर्थयात्रा पर राजनीति नहीं करने का आग्रह किया है और ऐलान किया है कि 10,000 तीर्थयात्रियों के लिए सऊदी अरब ने फिर से पोर्टल खोल दिया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद 10,000 भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए सऊदी अरब ने अपने नुसुक पोर्टल को फिर से खोलने का फैसला किया है। उन्होंने इस मुद्दे पर राजनीति करने के लिए सियासी दलों को चेतावनी भी दी। रिजिजू ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया, “कृपया धार्मिक हज मुद्दे के साथ राजनीति न करें।” उन्होंने कहा कि भारतीय हज समिति और भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने 1,22,000 हज तीर्थयात्रियों के लिए समय पर सभी जरूरी काम पूरे कर लिए थे लेकिन निजी ऑपरेटर इस साल सऊदी अरब की अग्रिम समयसीमा के तहत अनुबंधों और भुगतानों को अंतिम रूप देने में विफल रहे, जिसके कारण उन्हें कोई टाइम एक्सटेंशन नहीं मिल सका। बेहतर संबंधों की बदौलत मिला कोटा मंत्री ने कहा कि भारत ने सऊदी अरब के साथ बेहतर संबंधों की बदौलत अतिरिक्त कोटा प्राप्त किया है। उन्होंने कहा, “सऊदी हज मंत्रालय ने मीना में मौजूदा जगह की उपलब्धता के आधार पर निजी ऑपरेटरों को अपना काम पूरा करने के लिए फिर से नुसुक पोर्टल खोल दिया है।” अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने कहा कि 26 संयुक्त हज समूह संचालक (CHGO) बार-बार याद दिलाने के बावजूद मीना शिविरों, आवास और परिवहन से संबंधित अनुबंधों को अंतिम रूप देने की समय सीमा से चूक गए। समय पर अपलोड करें सभी दस्तावेज: रिजिजू हालांकि, भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयास के बाद, सऊदी अधिकारियों ने CHGO के लिए “विस्तारित समय अवधि” में दस्तावेज़ अपलोड करने के लिए पोर्टल को फिर से खोल दिया है। इस मामले में सभी निजी ऑपरेटरों से जल्द से जल्द कार्रवाई का आग्रह करते हुए रिजिजू ने कहा, “हम सभी निजी संचालकों (CGHO) से अपने अनुबंधों को अंतिम रूप देने और अनुमत विस्तारित समय अवधि में सऊदी नुसुक पोर्टल पर सभी दस्तावेज़ अपलोड करने का आग्रह करते हैं।” कई नेताओं ने की दी दखल देने की अपील यह घटनाक्रम एक मीडिया रिपोर्ट के बाद हुआ है, जिसमें सऊदी अरब द्वारा निजी संचालकों के लिए मीना ज़ोन रद्द करने के बाद 52,000 तीर्थयात्रियों के हज यात्रा पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे थे। इस खबर के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती समेत कई अल्पसंख्यक नेताओं ने केंद्र सरकार के दखल देने की मांग की थी। 2025 के लिए भारत का कुल हज कोटा 1,75,025 तीर्थयात्रियों का है, जिसमें से 70% HCOI द्वारा और 30% निजी संचालकों द्वारा रेग्यूलेट किया जाएगा। पिछले हफ़्ते अल्पसंख्यक मामलों के सचिव चंद्र शेखर कुमार ने 2025 हज द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करने सहित तैयारियों की समीक्षा के लिए सऊदी अरब का दौरा किया था। रिजिजू ने इससे पहले जनवरी में तीर्थयात्रा व्यवस्थाओं पर बातचीत के लिए सऊदी अरब की यात्रा की थी। 2025 का हज संभवतः 4-9 जून के बीच निर्धारित है।

पीएसएल में जेम्स विंस को हेयर ड्रायर प्लेयर ऑफ द मैच के खिताब के तौर पर दिए जाने के बाद, 70 सीसी की एक बाइक चर्चा में आई थी

नई दिल्ली पाकिस्तान सुपर लीग 2025 का सीजन बहुत मजेदार होता जा रहा है। हर दिन हैरान कर देनी वाली घटना सामने आ रही है। पीएसएल में जेम्स विंस को हेयर ड्रायर प्लेयर ऑफ द मैच के खिताब के तौर पर दिए जाने के बाद, 70 सीसी की एक बाइक चर्चा में आई थी। अब एक और नया मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा जिसमें खिलाड़ी को ट्रिमर पुरस्कार के तौर पर दिया गया है। दरअसल, पाकिस्तान क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज हसन अली को PSL 2025 में लाहौर कलंदर्स के खिलाफ कराची किंग्स के लिए शानदार प्रदर्शन के लिए इनाम के तौर पर ट्रिमर दिया गया। फ्रेंचाइजी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट किए गए। इस वीडियो में टीम के सहयोगी स्टाफ के एक सदस्य को हसन को पुरस्कार देते हुए देखा गया।   खिलाड़ी को दिया गया हेयर ड्रायर हालांकि, मैच में कराची किंग्स 65 रनों से हार गई, लेकिन हसन ने 4 ओवर में 4/28 के गेंदबाजी आंकड़े से सभी को प्रभावित किया। हसन को प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार दिया गया और यह इनाम एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हसन को इनाम के रूप में ट्रिमर दिया गया। इससे पहले जेम्स विंस को उनके शानदार प्रदर्शन करने के लिए हेयर ड्रायर दिया गया था। 70 सीसी की बाइक आई चर्चा में बता दें कि बीते शनिवार को कराची किंग्स के जेम्स विंस को मुल्तान सुल्तांस के खिलाफ उनकी शानदार मैच जिताऊ पारी के लिए हेयर ड्रायर बतौर इनाम के रूप में दिया था, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। हेयर ड्रायर के बाद 70 सीसी की बाइक चर्चा में आई, जिसे स्टेडियम में देखा गया। इसे लेकर भी सोशल मीडिया यूजर्स ने पाकिस्तान की जमकर खिंचाई की थी।

ग्वालियर हाई कोर्ट ने हत्या के एक मामले में झूठी जानकारी देने पर DIG पीएचक्यू पर लगाया 5 लाख का जुर्माना

ग्वालियर ग्वालियर हाई कोर्ट ने हत्या के एक मामले में झूठी जानकारी देने और महत्वपूर्ण साक्ष्य छिपाने के आरोप में डीआईजी (पीएचक्यू) मयंक अवस्थी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने अवस्थी के खिलाफ विभागीय जांच और अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के आदेश भी दिए हैं। यह मामला उस समय का है, जब अवस्थी दतिया के पुलिस अधीक्षक थे। कोर्ट ने उनकी कार्यप्रणाली को गलत ठहराते हुए कहा कि उन्होंने एक पक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए साक्ष्य छिपाए, जो निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों का उल्लंघन है। मामले का विवरण यह प्रकरण 2017 का है, जब दतिया जिले के दीपार थाने में 24 सितंबर को हत्या का मामला दर्ज हुआ था। आरोपी मानवेंद्र गुर्जर ने दावा किया था कि घटना तीन-चार दिन पहले की थी। घटना के दिन मृतक, घायल और गवाह भिंड जिले के अमायन में थे, न कि दतिया में। उन्होंने मोबाइल टावर लोकेशन के आधार पर अपनी बात साबित करने की मांग की। सेंवढ़ा न्यायालय ने पुलिस को टावर लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) सुरक्षित करने के निर्देश दिए थे। उस समय मयंक अवस्थी दतिया के एसपी थे। साक्ष्य छिपाने का आरोप पुलिस ने शुरू में कोर्ट को पत्र देकर दावा किया था कि टावर लोकेशन और कॉल डिटेल सुरक्षित हैं। जब मामला अंतिम तर्क के चरण में पहुंचा, तो पुलिस ने कहा कि डेटा सुरक्षित नहीं किया गया। साइबर सेल ने बताया कि दो साल से पुराना डेटा रिट्रीव नहीं हो सकता। इस पर कोर्ट ने दीपार थाने के तत्कालीन प्रभारी को तलब किया, लेकिन वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद हाई कोर्ट ने अवस्थी और तत्कालीन थाना प्रभारी यतेन्द्र सिंह भदौरिया से जवाब मांगा। हाई कोर्ट का सख्त रुख 4 अप्रैल 2025 को बहस के बाद हाई कोर्ट ने 16 अप्रैल को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने अवस्थी की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर साक्ष्य दबाए, जिससे एक पक्ष को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। कोर्ट ने इसे चौंकाने वाला और निष्पक्ष जांच के अधिकारों का उल्लंघन बताया। कोर्ट ने अवस्थी को एक महीने के भीतर 5 लाख रुपये प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के पास जमा करने का आदेश दिया, जो जीतने वाले पक्ष को दिया जाएगा। गैर-अनुपालन पर अवमानना और वसूली की कार्रवाई होगी। विभागीय जांच के आदेश हाई कोर्ट ने डीजीपी को अवस्थी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने और उनके इरादों की पड़ताल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि डीजीपी को तय करना होगा कि ऐसे अधिकारी पुलिस विभाग में रहने योग्य हैं या नहीं। वर्तमान दतिया एसपी को 10 दिनों के भीतर कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन रिकॉर्ड जमा करने को कहा गया है। डीजीपी को 20 मई 2025 तक जांच की प्रगति पर कोर्ट को सूचित करना होगा। मामले का महत्व यह फैसला पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही और निष्पक्ष जांच के महत्व को रेखांकित करता है। कोर्ट ने माना कि अवस्थी के कृत्य से एक परिवार ने अपना सदस्य खोया, जबकि दूसरा पक्ष गंभीर सजा का सामना कर रहा है। यह कार्रवाई पुलिस विभाग में अनुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

किसान 1 लाख रुपये बैंक में जमा कराने आया था, लेकिन इसमें से 500 के 11 नोट नकली मिले, मचा हड़कंप, मामला दर्ज

शहडोल शहर के इंडियन बैंक में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक किसान ने बैंक में नकली नोट जमा करा दिए। किसान 1 लाख रुपये बैंक में जमा कराने आया था, लेकिन इसमें से 500 के 11 नोट नकली मिले। पुलिस ने किसान पर मामला दर्ज कर लिया है। किसान को ये रुपये फसल बेचने के एवज में मिले थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है। सोहागपुर थाना क्षेत्र के जमुई गांव के किसान सूर्यांश सिंह बघेल को फसल बेचने के बाद व्यापारी से 1 लाख रुपये मिले थे। उसने इंडियन बैंक में रुपये जमा कराए, तो 500 सौ के 11 नोट नकली पाए गए। सभी नकली नोटों का सीरियल नंबर एक ही था। बैंक कर्मियों ने मामले की शिकायत कोतवाली में की है। सहायक शाखा प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि खाताधारक ने एक लाख रुपये अपने खाते में जमा करवाए थे। जब कर्मचारियों ने नोटों को मशीन में डाला, तो उसमें से 11 नोट नकली मिले। पिछले माह भी मिला था नकली नोट पिछले माह भी कोतवाली थाना क्षेत्र के बुढ़ार रोड स्थित एक बैंक की कैश डिपाजिट मशीन में एक युवक ने 500 रुपये का एक नकली नोट जमा करने का प्रयास किया था, लेकिन मशीन ने बैंक को अलार्म बजाकर अलर्ट कर दिया। पुलिस ने युवक पर मामला दर्ज किया था।

बंगाल हिंसा, मैडम को सुधारने के लिए भी एक शिव महापुराण कथा करना पड़ेगी: पं प्रदीप मिश्रा

सीहोर  देश के पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा और हिंदुओं के साथ अत्याचार की खबर से कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा भी दुखी है। उन्होंने कहा कि- बंगाल की मैडम को सुधारने के लिए भी एक शिव महापुराण करना पड़ेगा। सबको जानते हुए भी कुछ नहीं कर रही सीहोर के अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि बंगाल में जिस तरह से घटनाएं हो रही है। हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है इन घटनाओं को देखकर मन बड़ा दुखी हो रहा है। एक वह मैडम बंगाल की जो यह सब देख रही है उसकी बुद्धि सही करने के लिए एक शिव महापुराण की कथा बंगाल में भी करना पड़ेगी, जब उसकी बुद्धि सही होगी। राजस्थान के लोगों से बंगाल के लोगों को सीख लेना चाहिए। रतनगढ़ कि धरती में छोटे से छोटा बच्चा सेवा का भाव लेकर काम कर रहा है और एक वो बंगाल की मैडम जो सबको जानते हुए भी कुछ नहीं कर रही है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात पिछले दिनों वक़्फ (संशोधन) कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान यहां हिंसा भड़क गई थी। हिंसा में तीन लोग मारे गए थे। अब जिले के चप्पे-चप्पे पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की बड़ी संख्या में तैनाती है। 11 अप्रैल को वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान मुर्शिदाबाद में अशांति फैल गई थी। यह कानून इस क्षेत्र में एक विवादास्पद मुद्दा रहा है। अब तक 150 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है, और समसेरगंज, धुलियान और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं।

विवेकानंद महाविद्यालय में भूतपूर्व छात्र-छात्राओं का मिलनोत्सव

एमसीबी/मनेंद्रगढ़ आज दिनांक 16.04.25 को शासकीय विवेकानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय मनेन्द्रगढ़ में प्राचार्य डॉ. श्राबनी चक्रवर्ती के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में तथा एलुमनी समिति प्रभारी डॉ. रश्मि तिवारी के संयोजन में भूतपूर्व छात्र-छात्राओं (एलुमनी) का मिलनोत्सव आयोजित हुआ। इस आयोजन में उपस्थित भूतपूर्व छात्र-छात्राओं का सर्वप्रथम महाविद्यालय समिति द्वारा कुंकुम-रोली से टीका एवं बैज लगाकर स्वागत किया गया। तत्पश्चात् प्राचार्य डॉ. चक्रवर्ती ने अपने उद्बोधन में सभी उपस्थित भूतपूर्व छात्र-छात्राओं का हार्दिक अभिनंदन किया एवं उन्हें महाविद्यालय का गौरव बताया। उन्होंने बताया कि इस मिलनोत्सव का उद्देश्य महाविद्यालय के भूतपूर्व छात्र-छात्राओं से दोबारा संपर्क स्थापित कर संस्थान से उनका भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करना एवं उनके कैरियर अनुभव और जीवन से जुड़ी सीखें वर्तमान छात्रों व शिक्षकों से साझा करना प्रमुख है। साथ ही महाविद्यालय की प्रगति, उपलब्धियों व भावी योजनाओं से आप सभी को अवगत कराना ताकि हमारा एक सक्रिय एलुमनी एसोसिएशन हो। आपकी मदद से न केवल संस्था की गरिमा और गुणवत्ता में वृद्धि होती है, बल्कि यह नैक मूल्यांकन में भी महाविद्यालय को उच्च स्तर पर पहुँचाने में सहायक सि़द्ध होता है।        कार्यक्रम का संचालन कर रहीं एलुमनी प्रभारी डॉ. रश्मि तिवारी ने बताया कि इस मिलन समारोह का उद्देश्य केवल पुनर्मिलन नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है- यह एक ऐसा सेतु जो भूतपूर्व छात्रों को महाविद्यालय के वर्तमान और भविष्य से जोड़ता है। आप सभी एलुमनी, अपने अनुभव, संसाधन और सहयोग के माध्यम से इस संस्थान को और अधिक सशक्त बना सकते हैं। इसके पश्चात् उपस्थित एलुमनी सतीश उपाध्याय, ज्योति मजूमदार, ममता राणा, रामचरित द्विवेदी, डॉ. अमूल्यचंद्र झा, मंजूलता कश्यप, सुमन पाठक, राकेश बेहरा एवं गोपाल गुप्ता जी ने अपने महाविद्यालय से जुड़ी बहुत सारी स्मृतियां साझा की एवं महाविद्यालय के उत्तरोत्तर विकास हेतु कृत संकल्पित होकर हर संभव प्रयास करने की बात कही। सभी ने महाविद्यालय के इस अभिनव प्रयास की सराहना करते हुए एक साझा मंच प्रदान करने के लिए आभार जताया। तत्पश्चात् एलुमनी समिति के सदस्य डॉ. सुशील तिवारी एवं आईक्यूएसी प्रभारी डॉ. अरूणिमा दत्ता ने महाविद्यालय के विकास में एलुमनी के योगदान को विस्तार से बताया।      कार्यक्रम के अंत में समिति सदस्य एवं एलुमनी भीमसेन भगत सहायक प्राध्यापक भूविज्ञान के द्वारा उपस्थित एलुमनी से आगे भी इसी तरह की सहयोग की अपेक्षा के साथ सभी के प्रति आभार जताया। आज के आयोजन को सफल बनाने में कार्यालयीन स्टॉफ रजिस्ट्रार यशवंत शाक्य, मनीष श्रीवास्तव, बी.एल.शुक्ला, सुनीत जॉनसन बाड़ा, मीना त्रिपाठी, साधना बुनकर, हेमंत सिंह, प्रदीप मलिक, पारस, सतीश सोनी एवं ममता का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

यूक्रेन को दी गई सैन्य मदद ऋण नहीं होगा, टैरिफ और ईरान के बाद एक और मोर्चे पर नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक के बाद एक मोर्चे पर अपने रुख में बहलाव लाते हुए नरमी का परिचय दे रहे हैं। पहले उन्होंने रेसिप्रोकल टैरिफ पर 90 दिनों तक रोक लगा दी। इसके बाद उन्होंने ईरान पर भी नरमी बरतते हुए उसके परमाणु ठिकानों पर इजरायल के हमलों पर ब्रेक लगा दिया और अब उन्होंने युद्धग्रस्त यूक्रेन के मुद्दे पर नरमी दिखाई है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ट्रंप ने यूक्रेन के साथ होने वाले मिनरल्स डील में नरमी बरतते हुए इस बात पर अपनी सहमति दे दी है कि यूक्रेन को दी गई सैन्य मदद ऋण नहीं होगा। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यूक्रेन-यूएस मिनरल्स डील के नवीनतम ड्राफ्ट पर बातचीत जारी है। इसमें ट्रम्प प्रशासन यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता को ऋण के रूप में नहीं मानने पर सहमत हो गया है। हालांकि, उस राशि को बिना ब्याज के चुकाना जरूरी होगा। बहरहाल, न तो अमेरिका और न ही यूक्रेनी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। इस बीच, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि मिनरल्स डील की सराहना की है और कहा है कि मामले में अच्छी प्रगति हुई है। 4 फीसदी ब्याज की मांग नहीं बता दें कि इससे पहले अमेरिका और यूक्रेन के बीच जो मिनरल्स डील हो रही थी, उसमें ट्रंप ने यूक्रेन की ऊर्जा और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर पूर्ण नियंत्रण की बात कही थी और इसके अलावा अब तक की अमेरिकी सहायता के पुनर्भुगतान पर 4 फीसदी ब्याज की मांग की गई थी। हालांकि, यूक्रेन ने इन शर्तों का विरोध किया था और कहा था कि ये शर्तें हिंसक हैं, जो यूक्रेन को अमेरिकी उपनिवेश में तब्दील कर देगा। अमेरिका ने शर्तों में दी ढील, लेकिन बाधाएं बरकरार बातचीत से परिचित एक वरिष्ठ अधिकारी ने AFP को बताया कि अमेरिका-यूक्रेन खनिज सौदे के नए मसौदे में यूक्रेन को दी जाने वाली अमेरिकी सहायता को कर्ज के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। हालांकि,इसे चुकाना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस सौदे को अंतिम रूप देने में अभी भी कुछ बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं क्योंकि पिछले ड्राफ्ट की ही तरह नए मसौदे में भी अमेरिका यूक्रेन को कोई सुरक्षा गांरटी नहीं देना चाह रहा है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन चाहता है कि यूक्रेन को अब तक दी गई सहायता, जो लगभग 90 अरब डॉलर है, को संयुक्त कोष में योगदान के रूप में माना जाए, जिसे यूक्रेन के प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए बनाया जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि यूक्रेन को अधिकांश धनराशि इसी कोष में डालनी होगी। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंन्ट ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि इसी सप्ताह यूक्रेन संग खनिज डील पर दस्तखत हो जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं हो इस वजह से उन्हें अपने पद पर बने रहने की इजाजत दी

कोलकाता सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में अपनी नौकरी गंवाने वाले बेदाग सहायक शिक्षकों को अपने पद पर बने रहने की अनुमति दी है। देश की सर्वोच्च अदालत ने छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं हो इस वजह से उन्हें अपने पद पर बने रहने की इजाजत दी है। हालांकि, राज्य सरकार को कड़ी शर्तों के तहत 31 मई 2025 तक नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू करनी होगी और 31 दिसंबर 2025 तक यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यह आदेश भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने बेदाग अध्यापकों द्वारा शैक्षणिक वर्ष के अंत तक या नई भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक सेवा में बने रहने के लिए दायर आवेदन पर पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल कक्षा 9-10 और 11-12 के सहायक शिक्षकों पर लागू होगा। साथ ही यह भी कहा गया कि यह आदेश भविष्य में उन्हें कोई विशेष अधिकार नहीं देगा और नई नियुक्ति में उन्हें कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा। ममता सरकार को सख्त निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) और प्राथमिक शिक्षा बोर्ड को निर्देश दिया है कि वे 31 मई तक नई भर्ती का विज्ञापन जारी करें और इसकी पुष्टि करते हुए हलफनामा कोर्ट में दाखिल करें। आपको बता दें कि 3 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने 2016 की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह प्रक्रिया घोटाले और हेराफेरी से पूरी तरह दूषित थी, जिसे सुधारना संभव नहीं है। कोर्ट ने सभी चयनित शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मियों को सेवा से हटाने का आदेश दिया था। इस मामले में सीबीआई ने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी सहित कई तृणमूल नेताओं को गिरफ्तार किया था। जांच में यह भी पाया गया कि कई उम्मीदवारों ने खाली OMR शीट जमा की थी फिर भी उन्हें चयनित किया गया। कुछ उम्मीदवारों को योग्यता के आधार पर स्थान न मिलने के बावजूद ऊंची रैंकिंग दी गई।

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में गर्मी के तेवर और तीखे होने की संभावना, रेवाड़ी में 42 डिग्री तक पहुंचा तापमान

रेवाड़ी मौसम में फिर तल्खी बढ़ने लगी है। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रहा। अप्रैल माह में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तीसरी बार पहुंचा है। इससे पहले आठ व नौ अप्रैल को भी अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रहा है। अप्रैल माह का पहला पखवाड़ा उतार चढ़ाव भरा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में गर्मी के तेवर और तीखे होने की संभावना है। बृहस्पतिवार को जिले में सुबह तेज धूप के बीच हल्की हवा चलने के बाद भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही थी। अधिकतम तापमान 42 डिग्री पहुंचा वहीं, बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 42 तो न्यूनतम 24.5 डिग्री सेल्सियस रहा। बुधवार को अधिकतम 39.5 और न्यूनतम 22.5 डिग्री सेल्सियस था। गर्मी के चलते बाजार में ठंडे पेय और खाद्य पदार्थों की दुकानों पर लोग पहुंच रहे हैं। कहीं आइसक्रीम खाने में तो कोई नींबू पानी, गन्ने का रस और अन्य पेय पदार्थों का सेवन कर गर्मी से बचाव का प्रयास करते नजर आए। दोपहर के समय तेज धूप होने से लोग सिर पर तौलिया, टोपी पहने नजर आए। बताया गया कि पिछले दो दिनों से रेवाड़ी में गर्मी के तेवर तीखे बने हुए हैं। पंखा कूलर की हवा में ठंडक गायब है। घरों और प्रतिष्ठानों में एसी और पंखे कूलर लगातार चलने लगे हैं। इस माह का तुलनात्मक तापमान दिनांक इस साल पिछले साल अधिकतम/ न्यूनतम अधिकतम/ न्यूनतम 17 अप्रैल 42.0/24.5 36.0/21.5 16 अप्रैल 39.5/22.5 36.0/23.6 15 अप्रैल 37.5/22.0 37.0/23.0 14 अप्रैल 38.0/20.0 31.2/22.5 13 अप्रैल 36.5/20.5 38.5/20.5 12 अप्रैल 34.0/17.0 40.0/17.5 11 अप्रैल 37.0/22.5 39.5/17.6 10 अप्रैल 40.5/26.5 40.2/17.5 नौ अप्रैल 42.0/22.5 39.0/17.0 आठ अप्रैल 42.0/22.5 38.0/16.0 जिला प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी इन दिनों स्वास्थ्य विशेषज्ञों के पास ज्यादातर मरीज सिरदर्द, चक्कर आना, वायरल, खांसी आदि के साथ एलर्जी से संबंधित पहुंच रहे हैं। ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से एडवाइजरी जारी की हुई है। नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डा. गौरव यादव का कहना है कि गर्मी के मौसम में हवा के गर्म थपेड़ों और बढ़े हुए तापमान से लू (हीट वेव) लगने का खतरा बढ़ जाता है। धूप में घूमने वालों, खिलाड़ियों, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को लू लगने का डर ज्यादा रहता है। लू लगने पर उसके इलाज से बेहतर है, हम लू से बचे रहें यानी बचाव इलाज से बेहतर है। गर्मी में हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें, अपना सिर ढककर रखें, कपड़े, हैट अथवा छतरी का उपयोग करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं भले ही प्यास न लगी हो। ओआरएस (ओरल रीहाइड्रेशन सोल्यूशन), घर में बने पेय जैसे लस्सी, तोरानी (चावल का मांड), नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन कर तरोताजा रहें। पार्किंग के समय बच्चों को वाहनों में छोड़कर न जाएं उन्हें लू लगने का खतरा हो सकता है। नंगे पांव बाहर न जाएं, गर्मी से राहत के लिए हाथ का पंखा अपने पास रखना चाहिए। गर्मी के मौसम में जंक फूड का सेवन नहीं करना चाहिए। ताजे फल, सलाद तथा घर में बना खाना खाना चाहिए।

मुख्यमंत्री साय की कैबिनेट ने नवा रायपुर में एन.आई.एफ.टी. कैम्पस की स्थापना की दी मंजूरी

रायपुर,  छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में फैशन शिक्षा और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने का एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में नवा रायपुर में राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एन.आई.एफ.टी.) के नए कैम्पस की स्थापना को मंजूरी प्रदान की गई। इस परियोजना की अनुमानित लागत 271.18 करोड़ रुपये है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम न केवल छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए फैशन शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर खोलेगा, बल्कि राज्य में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा। राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एन.आई.एफ.टी.) भारत में फैशन डिजाइन, प्रबंधन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी संस्थानों में से एक है। 1986 में कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के तहत स्थापित इस संस्थान के वर्तमान में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु सहित देश भर में 17 परिसर हैं। नवा रायपुर में स्थापित होने वाला यह 18वां नया कैम्पस छत्तीसगढ़ के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि होगी। यह संस्थान फैशन डिजाइन, टेक्सटाइल डिजाइन, फैशन प्रबंधन और फैशन प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रम प्रदान करेगा। साथ ही, यह फैशन उद्योग के साथ सहयोग के माध्यम से छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और प्लेसमेंट के अवसर भी उपलब्ध कराएगा। नवा रायपुर में एन.आई.एफ.टी. की स्थापना से छत्तीसगढ़ के युवाओं को विश्वस्तरीय फैशन शिक्षा प्राप्त करने का अवसर अपने राज्य में ही मिलेगा। यह संस्थान तकनीकी रूप से प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करके फैशन और टेक्सटाइल उद्योग को मजबूती प्रदान करेगा। इसके अलावा, यह परियोजना स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य राज्य के युवाओं को विश्वस्तरीय शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करना है। नवा रायपुर में एन.आई.एफ.टी. कैम्पस की स्थापना न केवल फैशन शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांति लाएगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को औद्योगिक और आर्थिक विकास के नए शिखर पर ले जाएगी। नवा रायपुर एक उभरता हुआ वैश्विक केंद्र नवा रायपुर, जो पहले से ही एक स्मार्ट सिटी के रूप में अपनी पहचान बना चुका है, अब शिक्षा और उद्योग के क्षेत्र में भी एक नया मुकाम हासिल कर रहा है। एन.आई.एफ.टी. कैम्पस की स्थापना से नवा रायपुर को फैशन और टेक्सटाइल उद्योग का एक प्रमुख केंद्र बनने का अवसर मिलेगा। यह परियोजना न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की छवि को भी निखारेगी।

न्यायाधीश के घर में पैसे मिले और FIR नहीं हुई लेकिन न्यायपालिका राष्ट्रपति पर सवाल उठा सकती हैःउपराष्ट्रपति धनखड़

नई दिल्ली 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार एक टिप्पणी के जरिए सलाह दी थी कि राष्ट्रपति को तीन महीने के भीतर राज्यपालों द्वारा भेजे गए लंबित विधेयकों पर फैसला ले लेना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय की इस टिप्पणी पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने प्रतिक्रिया दी है और इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि भारत ने ऐसे लोकतंत्र की कल्पना नहीं की थी। उपराष्ट्रपति ने किसे कहा ‘सुपर संसद’? उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, भारत ने ऐसे लोकतंत्र की कल्पना नहीं की थी, जहां न्यायाधीश कानून बनाएंगे, कार्यकारी कार्य करेंगे और ‘सुपर संसद’ के रूप में कार्य करेंगे। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गुरुवार को न्यायपालिका की भूमिका, पारदर्शिता की कमी और हाल की घटनाओं को लेकर चिंता जताई. उन्होंने न्यायपालिका द्वारा कार्यपालिका और विधायिका के क्षेत्र में हस्तक्षेप को लेकर तीखे सवाल उठाए. हाल ही में एक जज के आवास पर हुई घटना, उन पर एफआईआर दर्ज न होने और राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मद्देनजर ये सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश ने ऐसे लोकतंत्र की कल्पना नहीं की थी, जहां जज कानून बनाएंगे, कार्यपालिका का काम भी काम खुद ही करेंगे और सुपर संसद की तरह काम करेंगे. हाल ही में एक फैसले में राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है. आखिर हम कहां जा रहे हैं? देश में क्या हो रहा है? ये बातें उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा के प्रशिक्षुओं के छठे बैच को उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में संबोधित करते हुए कहीं. उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें बेहद संवेदनशील होना होगा. ये कोई समीक्षा दायर करने या न करने का सवाल नहीं है. राष्ट्रपति को समयबद्ध तरीके से फैसला करने के लिए कहा जा रहा है. अगर ऐसा नहीं होता है तो संबंधित विधेयक कानून बन जाता है. अनुच्छेद-142 न्यायपालिका के लिए न्यूक्लियर मिसाइल बन गया है. इसका उपयोग लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करने के लिए किया जा रहा है. ये संविधान की आत्मा के खिलाफ है उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति को निर्देश देना संविधान की आत्मा के खिलाफ है. बता दें कि उपराष्ट्रपति ने ये बात सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर कही है जिसमें अदालत ने राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए बिलों को मंजूरी देने में 3 महीने का समय निर्धारित किया था. उन्होंने केशवानंद भारती केस में आए मूल ढांचे के सिद्धांत की सीमाओं का जिक्र करते हुए आपातकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की याद दिलाई और कहा कि तब मौलिक अधिकारों का हनन हुआ था, जबकि मूल ढांचा अस्तित्व में था. देश का कानून उन पर लागू नहीं होता राज्यसभा के प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे पास ऐसे जज हैं जो कानून बनाएंगे, जो कार्यपालिका का कार्य खुद संभालेंगे, जो सुपर संसद की तरह काम करेंगे और उनकी कोई जवाबदेही नहीं होगी, क्योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ये सब देखना पड़ेगा. भारत में राष्ट्रपति का पद बहुत ऊंचा है और राष्ट्रपति संविधान की रक्षा, संरक्षण एवं बचाव की शपथ लेते हैं. जबकि मंत्री, उपराष्ट्रपति, सांसदों और जज सहित अन्य लोग संविधान का पालन करने की शपथ लेते हैं. क्या देरी को समझाया जा सकता है? उपराष्ट्रपति ने कहा, हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते जहां आप भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दें और वह भी किस आधार पर? संविधान के तहत आपके पास एकमात्र अधिकार अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान की व्याख्या करना है. इसके लिए पांच या उससे अधिक न्यायाधीशों की आवश्यकता होती है. धनखड़ ने कहा, मैं हाल की घटनाओं का उदाहरण देना चाहूंगा. 14 और 15 मार्च की रात दिल्ली में एक जज के निवास पर एक घटना घटी. सात दिनों तक किसी को इसके बारे में पता नहीं चला. क्या देरी को समझाया जा सकता है? क्या इससे बुनियादी सवाल नहीं उठते? उन्होंने कहा, क्या ये मामला क्षमा योग्य है? क्या इससे कुछ बुनियादी सवाल नहीं उठते? एक लोकतांत्रिक देश में इसकी जांच की जरूरत है. इस समय कानून के तहत कोई जांच नहीं चल रही है क्योंकि आपराधिक जांच के लिए एफआईआर से शुरुआत होनी चाहिए. यह देश का कानून है कि अपराध की सूचना पुलिस को देना आवश्यक है. ऐसा न करना एक अपराध है. इसलिए आप सभी सोच रहे होंगे कि कोई एफआईआर क्यों नहीं हुई. इसका उत्तर सरल है. कानून से परे एक वर्ग को छूट कैसे मिली? उपराष्ट्रपति ने कहा, इस देश में किसी के भी खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है, किसी भी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ, चाहे वह आपके सामने मौजूद कोई भी हो. मगर, ये न्यायाधीश हैं, उनकी श्रेणी है, तो एफआईआर सीधे दर्ज नहीं की जा सकती. इसे न्यायपालिका में संबंधित लोगों द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए, लेकिन संविधान में ऐसा नहीं दिया गया है. संविधान ने केवल राष्ट्रपति और राज्यपालों को ही अभियोजन से छूट दी है. फिर कानून से परे एक वर्ग को यह छूट कैसे मिली? इसके दुष्परिणाम सभी के मन में महसूस किए जा रहे हैं. धनखड़ ने कहा कि उनकी चिंताएं ‘‘बहुत उच्च स्तर” पर हैं और उन्होंने ‘‘अपने जीवन में” कभी नहीं सोचा था कि उन्हें यह सब देखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि भारत में राष्ट्रपति का पद बहुत ऊंचा है और राष्ट्रपति संविधान की रक्षा, संरक्षण एवं बचाव की शपथ लेते हैं, जबकि मंत्री, उपराष्ट्रपति, सांसदों और न्यायाधीशों सहित अन्य लोग संविधान का पालन करने की शपथ लेते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते जहां आप भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दें और वह भी किस आधार पर? संविधान के तहत आपके पास एकमात्र अधिकार अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान की व्याख्या करना है> इसके लिए पांच या उससे अधिक न्यायाधीशों की आवश्यकता होती है।’ उपराष्ट्रपति निवास में राज्यसभा के 6वें बैच के प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए धनखड़ दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज के घर से जले हुए नोटों के बंडल मिलने के मामले पर भी बात की। उन्होंने कहा कि 14 और 15 मार्च की रात को नई दिल्ली में एक न्यायाधीश के निवास पर एक घटना हुई। सात दिनों तक, किसी को इसके बारे में पता नहीं था। हमें अपने आप से सवाल पूछने होंगे। क्या देरी समझने योग्य … Read more

थलापति विजय पर इफ्तार पार्टी में शराबी-जुआरियों को बुलाने पर फतवा जारी

तमिल तमिल सुपरस्टार और तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के प्रमुख थलापति विजय एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली में एक सुन्नी मुस्लिम संगठन ने उनके खिलाफ फतवा जारी किया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष और चश्मे दारुल इफ्ता के मुख्य मुफ्ती मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने विजय पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाया है। मौलाना ने लगाए गंभीर आरोप मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने फतवे में कहा कि विजय ने अपनी फिल्मों और हाल के इफ्तार आयोजन के जरिए मुस्लिम समुदाय का अपमान किया है। उन्होंने विजय की 2022 की फिल्म ‘बीस्ट’ का जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय को आतंकवाद और उग्रवाद से जोड़ा गया था। मौलाना ने कहा, “विजय ने अपनी फिल्मों में मुस्लिमों को ‘राक्षस’ और ‘शैतान’ की तरह दिखाया। अब राजनीति में उतरने के लिए वह मुस्लिम समुदाय के प्रति प्रेम दिखा रहे हैं, जो सिर्फ वोट हासिल करने की रणनीति है।” इफ्तार पार्टी पर उठाए सवाल इसके अलावा मौलाना ने 8 मार्च को चेन्नई के वाईएमसीए ग्राउंड में विजय की ओर से आयोजित इफ्तार पार्टी की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आयोजन में ‘शराबी और जुआरी’ शामिल थे, जो न तो रोजा रख रहे थे और न ही इस्लामी नियमों का पालन कर रहे थे। मौलाना ने इसे रमजान की पवित्रता का उल्लंघन करार दिया और तमिलनाडु के मुस्लिम समुदाय से विजय से दूरी बनाने की अपील की। इफ्तार पार्टी पर पहले भी हो चुकी है शिकायत विजय की इफ्तार पार्टी की शिकायत पहले भी हो चुकी है। 11 मार्च को तमिलनाडु सुन्नत जमात ने चेन्नई पुलिस आयुक्त के कार्यालय में विजय के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। संगठन के कोषाध्यक्ष सैयद कौस ने कहा था, “विजय के इफ्तार आयोजन में ऐसे लोग शामिल थे, जिनका रोजा या इफ्तार से कोई लेना-देना नहीं था। यह मुस्लिम समुदाय का अपमान है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि आयोजन में अव्यवस्था थी और विदेशी सुरक्षाकर्मियों ने मेहमानों के साथ पशुओं जैसा व्यवहार किया। सैयद ने स्पष्ट किया था कि यह शिकायत प्रचार के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए की गई है। 8 मार्च को किया गया था आयोजन 8 मार्च को विजय ने अपने राजनीतिक दल टीवीके के बैनर तले चेन्नई में एक भव्य इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था। इस दौरान वह सफेद पारंपरिक पोशाक और टोपी में नजर आए थे। इस आयोजन में करीब 3,000 लोग शामिल हुए और 15 स्थानीय मस्जिदों के इमामों को भी आमंत्रित किया गया था। विजय के प्रशंसकों ने इस कदम को समावेशी और भाईचारे का प्रतीक करार दिया था, लेकिन कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक रणनीति के तहत उठाया गया कदम बताया था।

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