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आगर मालवा में पराली जलाने वाले 770 किसानों पर 16.71 लाख रुपये का अर्थदंड

आगर मालवा खेतों में नरवाई जलाने वाले किसानों पर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की सख्त नजर है। उन्होंने ऐसे किसानों पर अर्थ दंड लगाए जाने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर का रुख देखते हुए कृषि और राजस्व अमला भी सक्रिय हो गया है। ऐसे में कृषि और राजस्व अमले की ओर से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में खेतों में जली नरवाई का सर्वे करते हुए किसानों को चिन्हित किया है। अब इन पर अर्थ दंड की कार्रवाई होगी। गेहूं अवशेष (नरवाई) जलाने से पशु-पक्षी, मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को होने वाली हानि को रोकने हेतु आगर-मालवा जिले में कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है। प्रतिबंध के बाद भी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में नरवाई जलाने वाले कृषकों पर नियमानुसार अर्थदंड लगाने हेतु बुधवार को राजस्व एवं कृषि विभाग के अमले द्वारा गांवों में पहुंचकर मौका मुआयना कर पंचनामा तैयार किया गया है। जिन पर नियमानुसार अर्थदंड लगाकर वसूलने तथा शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित करने की कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार तहसील आगर के ग्राम तनोडिया में कृषक भगवती पिता गंगाराम, बलवंत सिंह पिता निर्भय सिंह, कृष्णपाल सिंह पिता उमराव सिंह, गंगाराम पिता भागीरथ सहित 26 कृषकों द्वारा नरवाई जलाने पर पंचानामा बनाया गया। इसी तरह तहसील सुसनेर के ग्राम भवानीपुरा में कृषक इरफान खां पिता रहमान खां, मेहरबानसिंह पिता रामलाल सहित 05 कृषक, ग्राम मोडी, बाजना, कड़िया में कृषक श्री रामनारायण पिता देवीलाल, ललताबाई पति रामप्रसाद, अंजली पति गौर कुल 4 कृषक, तहसील नलखेडा के ग्राम हिरनखेडी में कृषक बद्रीलाल पिता बालुजी, प्रभुलाल पिता बालुजी, प्रभुलाल पिता रोडमल मालवीय द्वारा नरवाई जलाना पाया गया है। नरवाई नहीं जलाने की अपील कृषकों से अपील नरवाई नहीं जलाएं जिला प्रशासन की कृषकों से अपील है कि गेहूं अवशेष (नरवाई) नहीं जलाएं, नरवाई का प्रबंधन करें, जिससे की मिट्टी और अधिक उपजाऊ बनें। नरवाई जलाने की सैटेलाइट से निगरानी रखी जा रही है, नरवाई जलाने पर 2500 से 15 हजार रुपए तक जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाएगी। 770 किसानों पर 16.71 लाख रुपये का अर्थदंड इंदौर जिले में फसल अवशेष (नरवाई) जलाने वालों के विरुद्ध कलेक्टर आशीष सिंह के निर्देशन में सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बुधवार को तीन किसानों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई है। अभियान चलाकर की जा रही इस कार्रवाई में नरवाई जलाने पर अभी तक 770 किसानों के विरुद्ध 16 लाख 71 हजार 500 रुपये का अर्थदंड किया गया है। जनसम्पर्क अधिकारी महिपाल अजय ने बताया कि जिले में बुधवार को एक दिन में ही 102 किसानों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करते हुए तीन लाख 9 हजार 500 रुपये का अर्थदंड किया गया है। यह कार्यवाही आगामी दिनों में भी निरन्तर जारी रहेगी। जिले में आज कलेक्टर आशीष सिंह के निर्देश पर हातोद क्षेत्र में एक, जूनी इंदौर क्षेत्र में एक तथा भिचोलीहप्सी क्षेत्र में एक एफआईआर दर्ज कराई गई है। जिले में ग्राम पंचायत मुख्यालय पर कृषि से संबंधित मैदानी अधिकारियों एवं राजस्व विभाग के पटवारियों द्वारा पंचायत सचिवों के साथ समन्वय कर कृषक संवाद कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं तथा किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसानों से किसानों को अवगत कराया जा रहा है। किसानों से अपील की जा रही है कि नरवाई न जलाएँ, नरवाई जलाने से पर्यावरण को नुकसान होता है। किसान यदि नरवाई जलाता है तो राज्य शासन के नोटिफिकेशन प्रावधान अनुसार पर्यावरण विभाग द्वारा उक्त अधिसूचना अंतर्गत नरवाई में आग लगाने के विरुद्ध पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि दण्ड का प्रावधान निर्धारित किया गया है। ऐसा कोई व्यक्ति/निकाय/कृषक जिसके पास 2 एकड़ तक की भूमि है तो उनको नरवाई जलाने पर पर्यावरण क्षति के रूप में 2500 रुपये प्रति घटना के मान से आर्थिक दण्ड भरना होगा। जिसके पास 2 से 5 एकड़ तक की भूमि है तो उनको नरवाई जलाने पर पर्यावरण क्षति के रूप में 5 हजार रुपये प्रति घटना के मान से आर्थिक दण्ड भरना होगा तथा जिसके पास 5 एकड़ से अधिक भूमि है तो उनको नरवाई जलाने पर पर्यावरण क्षति के रूप में 15 हजार प्रति घटना के मान से आर्थिक दण्ड भरना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने नए वक्फ कानून पर फिलहाल रोक से इनकार किया, वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति नहीं

नई दिल्ली  नए वक्फ कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान सर्वोच्च अदालत ने वक्फ कानून पर फिलहाल स्टे नहीं लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के इस बयान को रिकॉर्ड में लिया कि केंद्र सात दिनों के भीतर जवाब देगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि काउंसिल और बोर्ड को कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई की तारीख तक, वक्फ, जिसमें पहले से पंजीकृत या अधिसूचना के माध्यम से घोषित वक्फ शामिल हैं। उनको न तो डीनोटिफाई किया जाएगा और न ही कलेक्टर को बदला जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र को सात दिनों के भीतर जवाब दाखिल करना चाहिए। वक्फ कानून पर SC ने नहीं लगाई रोक वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर एडवोकेट बरुण कुमार सिन्हा ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून पर रोक नहीं लगाई है। भारत के सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि नए संशोधन अधिनियम के तहत परिषद या बोर्ड में कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि सरकार अगली तारीख तक उन संपत्तियों (वक्फ-बाय-यूजर) को डी-नोटिफाई नहीं करेगी जो रजिस्टर्ड और गजटेड हैं। हालांकि, सरकार अन्य संपत्तियों पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। ओवैसी बोले- हम इस एक्ट को असंवैधानिक मानते हैं अधिवक्ता बरुण सिन्हा ने आगे कहा कि केंद्र ने कोर्ट से कहा कि आप संसद की ओर से पारित कानून पर रोक नहीं लगा सकते और केंद्र रोजाना सुनवाई के लिए तैयार है। इस मुद्दे को अब 5 मई के लिए लिस्ट किया गया है और उसी दिन सुनवाई शुरू होगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने रिएक्ट किया। उन्होंने कहा कि हम इस एक्ट को असंवैधानिक मानते हैं। ‘इस एक्ट के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रहेगी’ ओवैसी ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि सेंट्रल वक्फ काउंसिल और स्टेट वक्फ काउंसिल का गठन नहीं किया जाएगा। ‘वक्फ बाय यूजर’ को हटाया नहीं जा सकता। जेपीसी की चर्चा के दौरान मैंने सरकार की ओर से प्रस्तावित सभी संशोधनों का विरोध करते हुए एक रिपोर्ट दी थी और बिल पर बहस के दौरान मैंने बिल को असंवैधानिक बताया था। इस एक्ट के खिलाफ हमारी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बड़ी बातें     सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून की संवैधानिक वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को सात दिन का समय दिया।     सर्वोंच्च अदालत ने कहा कि इस बीच केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्डों में कोई नियुक्ति नहीं होनी चाहिए।     केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से एक सप्ताह का समय मांगा था, जिसके बाद अदालत ने उन्हें वक्त दिया।     शीर्ष कोर्ट ने कहा कि मामले में इतनी सारी याचिकाओं पर विचार करना असंभव, केवल पांच पर ही सुनवाई होगी।     याचिकाओं पर सुनवाई के दूसरे दिन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कहा कि अगर किसी वक्फ संपत्ति का रजिस्ट्रेशन 1995 के अधिनियम के तहत हुआ है तो उन संपत्तियों को नहीं छेड़ा जा सकता।     केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह अगली सुनवाई तक ‘वक्फ बाय डीड’ और ‘वक्फ बाय यूजर’ को गैर-अधिसूचित नहीं करेगा।     सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पांच मई की तारीख तय की। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में और क्या-क्या कहा?     सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि वक्फ बाय यूजर में बदलाव नहीं किया जाएगा। सात दिनों में सरकार जवाब दाखिल करें।     जवाब तक वक्फ संपत्ति की स्थिति नहीं बदलेगी। अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनी रहेगी।     सरकार फिलहाल कोई नियुक्ति नहीं होगी। ना कोई नया बोर्ड बनेगा, ना काउंसिल बनेगी।     एसजी तुषार मेहता ने आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक संशोधित कानून के तहत कोई नियुक्ति या बोर्ड नहीं गठित किया जाएगा।     केंद्र सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अंतरिम आदेश जारी करने से पहले विचार करे कि इसका परिणाम क्या होगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को ठुकरा दिया।     एसजी तुषार मेहता ने आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक संशोधित कानून के तहत कोई नियुक्ति या बोर्ड नहीं गठित किया जाएगा।     सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा कि सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने कहा कि प्रतिवादी सरकार 7 दिनों के भीतर एक संक्षिप्त जवाब दाखिल करना चाहते हैं और आश्वासन दिया कि अगली तारीख तक 2025 अधिनियम के तहत बोर्ड और परिषदों में कोई नियुक्ति नहीं होगी।     उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अधिसूचना या राजपत्रित द्वारा पहले से घोषित उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ सहित वक्फ की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।     जवाब 7 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए। उस पर प्रतिउत्तर अगले 5 दिनों के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए।     सीजेआई ने कहा कि अगली सुनवाई से केवल 5 रिट याचिकाकर्ता ही न्यायालय में उपस्थित होंगे। हम यहां केवल 5 ही चाहते हैं। आप 5 का चयन करें। अन्य को या तो आवेदन के रूप में माना जाएगा या निपटाया जाएगा। हम नाम का उल्लेख नहीं करेंगे। अब इसे कहा जाएगा- इन री: वक्फ संशोधन अधिनियम मामला  

यूपी के मजदूरों के भरोसे तमिलनाडु की इंडस्ट्री, आज पूरी दुनिया की इकॉनमी सस्ते श्रम के भरोसे ही : अन्नामलाई

 चेन्नई तमिलनाडु की डीएमके सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तीन भाषा नीति, जनसंख्या के आधार पर परिसीमन आदि का विरोध कर रही है. तमिलनाडु सीएम स्टालिन ने बीते दिनों अपने एक बयान में कहा था कि दक्षिणी राज्यों को जनसंख्या नियंत्रित करने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए. उनका आरोप रहा है कि अगर परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ तो इससे दक्षिणी राज्यों में लोकसभा की सीटें घट जाएंगी और संसद में उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व घटेगा. अब तो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने स्वायत्तता का राग अलापना भी शुरू किया है. दरअसल स्टालिन ही नहीं दक्षिण के राज्यों को यूपी से बहुत दिक्कत रही है. पिछले महीने तो स्टालिन ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ तक को निशाने पर ले लिया. दरअसल तमिलनाडु में हिंदी विरोध के पीछे एक अहसास यह है कि यह पिछड़े और गरीब लोगों की भाषा है. अगर ऐसा नहीं होता तो विदेशी भाषा होते हुए भी अंग्रेजी को क्यों सम्मान मिलता? पर उल्लेखनीय यह भी है कि तमिलनाडु के बीजेपी नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई को हिंदी और हिंदी भाषी प्रदेशों से कोई दिक्कत नहीं है. वो अपने राज्य में ही तर्क देकर यह बताते हैं कि जब से केंद्र में बीजेपी की सरकार बन गई है तब से दक्षिण के राज्यों को केंद्र से मिलने वाले अनुदान में आनुपातिक बढ़ोतरी हुई है. इतना ही नहीं वो दक्षिण के राज्यों विशेषकर तमिलनाडु को आगाह करते हैं कि यूपी को जगाओ मत ,अगर यह राज्य जग गया तो दक्षिण की छुट्टी हो जाएगी.  योगी को क्यों निशाने पर लिया स्टालिन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा कि ‘तमिलनाडु की भाषा नीति और निष्पक्ष परिसीमन की मांग आज पूरे देश में गूंज रही है. भाजपा इससे परेशान है, जो उनके नेताओं के इंटरव्यू से पता चलता है. अब माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमें नफरत पर भाषण देना चाहते हैं? हमें बख्श दीजिए. ये तो राजनीतिक कॉमेडी हो गई.’ इसके बाद स्टालिन ने योगी आदित्यनाथ के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि ‘हम किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि हम थोपने और अंधराष्ट्रीयता का विरोध कर रहे हैं. यह वोट बैंक की राजनीति नहीं है बल्कि ये न्याय और स्वाभिमान की लड़ाई है. दरअसल योगी ने तमिलनाडु में भाषा नीति और परिसीमन के विरोध को लेकर बयान दिया था. योगी आदित्यनाथ ने भाषा विवाद को छोटी राजनीतिक सोच करार दिया. उन्होंने कहा कि स्टालिन धर्म और भाषा के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उनका वोटबैंक खिसक रहा है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाषा को लोगों को एकजुट करना चाहिए न कि बांटना चाहिए. उन्होंने लोगों को भी बांटने वाली राजनीति से सावधान रहने की सलाह दी थी. अन्नामलाई के तर्क अन्नामलाई पिछले साल एक उत्तर भारत बनाम दक्षिण भारत को लेकर हुए एक डिबेट में तर्कों की झड़ी लगा दी थी. वो बताते हैं कि केंद्र से मिलने वाली राज्यों की मदद के बंटवारे का जो फार्मूला इंदिरा गांधी के समय लाया गया उसमें जनसंख्या का आधार 50 प्रतिशत रखा गया. अन्नामलाई समझाते हैं कि अगर 100 रुपये केंद्र को राज्यों को बांटने थे उसमें स 50 रुपये का आधार जनसंख्या होने के चलते उत्तर के राज्यों को फायदा मिलता था. बाद में जनसंख्या का बेस और बढ़ा. पर आज बीजेपी के राज में यह कम होकर केवल 15 परसेंट हो गया है. यानि केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि के बंटवारे का फायदा अब अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को नहीं मिलता है. इसके साथ ही 45 परसेंट आधार अमीर और गरीब राज्यों के लिए बराबर हो गया है. इसी तरह 15 प्रतिशत वेटेज वित्तीय सेक्टर में अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिया रखा गया है.15 प्रतिशत का वेटेज विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए रखा गया है. इसके साथ ही 10 प्रतिशत का वेटेज इकोलॉजी को दिया गया है. 15 प्रतिशत भौगोलिक एरिया को वेटेज मिल रहा है.  अन्नामलाई के कहने का मतलब साफ है कि उपरोक्त आधारों का अगर विश्वेषण करें तो साफ पता चलता है कि दक्षिण के राज्यों के हितों का ध्यान उत्तर से ज्यादा रखा गया है. जनसंख्या के आधार को कहां 60 प्रतिशत से नीचे लाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया. गुड गवर्ननेंस के नाम पर कोई फायदा नहीं होता था पर आज इसके नाम पर 15 प्रतिशत का लाभ होता है. अन्ना मलाई इस बात के लिए स्टालिन और अन्य नेताओं की आलोचना करते हैं कि वे देश और राज्य को चलाने के लिए जिस फार्मूले की बात कर रहे हैं वो न्यायपूर्ण नहीं है. वो उदाहरण देते हैं कि तमिलनाडु में 34 परसेंट रेवेन्यू 4 जिलों से आता है. क्या राज्य के कुल रेवेन्यू का 34 प्रतिशत इन चार जिलों को ही मिलना चाहिए? अन्नामलाई कहते हैं कि इस तरह से देश नहीं चल सकता है. यूपी के मजदूरों के भरोसे तमिलनाडु की इंडस्ट्री अन्ना मलाई बताते हैं कि तमिलनाडु में यूपी के 25 लाख रजिस्टर्ड मजदूर हैं. अगर अनऑफिशियल को भी जोड़ लिया जाए तो करीब 40 लाख लेबर यूपी के तमिलनाडु में हैं. अन्ना कहते हैं कि कल्पना करिए अगर योगी आदित्यनाथ और नीतीश कुमार कहें कि इतने सस्ता श्रम क्यों आपको उपलब्ध कराएं तो तमिलनाडु क्या कर लेगा? आज पूरी दुनिया की इकॉनमी सस्ते श्रम के भरोसे ही है. वास्तव में अगर यूपी और बिहार की ओर से यह मांग रख दी जाए कि उनके राज्य के लोगों को एक निश्चित रकम जरूर मिलना चाहिए अन्यथा उनके जाने पर रोक लगा दी जाएगी . कल को योगी और नीतीश कुमार अगर यह मांग करें कि हर मजदूर के नाम 10 हजार रुपये उनके राज्य को चाहिए तो हम क्या इनकार कर पाएंगे?  पर देश ऐसे नहीं चलता है. अन्ना मलाई कहते हैं कि याद करिए जब कोविड के समय मजदूरों को वापस बुलाने के लिए तमिलनाडु के इतिहास में पहली बार हिंदी में प्रेस रिलीज जारी किया गया था. 4- वास्तव में यूपी की तरक्की हैरान करने वाली है अन्नामलाई कहते हैं कि जिस तरह कहा जाता है कि चीन सो रहा है उसे मत छेड़ो, उसी तरह यूपी सो रहा उसे जगाओगे तो … Read more

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए अभी से तैयारी शुरू, भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में स्नान कराना प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती

उज्जैन  भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी किनारे वर्ष 2028 में लगने वाले महाकुंभ सिंहस्थ की तारीख शासन ने घोषित कर दी है। सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि इस बार सिंहस्थ दो माह का होगा। 27 मार्च से 27 मई तक लगेगा। नौ अप्रैल से आठ मई तक तीन अमृत स्नान और सात स्नान पर्व होंगे। गत सिंहस्थ एक माह का था। उज्जैन में हर 12 वर्ष के अंतराल पर महाकुंभ सिंहस्थ लगता है, जिसमें दुनियाभर से साधु-संत और श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान करने आते हैं और धर्म, संस्कृति का प्रचार-प्रसार करते हैं। इस बार के महाकुंभ में 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान सरकार ने लगाया है। सिंहस्थ में अब 35 महीने का समय शेष रह गया है और स्थिति यह है कि सड़क, पुल, बिजली सहित अधिकांश प्रोजेक्ट कागजों में ही सिमटे पड़े हैं। आगे चलकर हो सकती है बड़ी मुसीबत प्रमुख बात यह है कि सालभर में सिंहस्थ मद के केवल दो काम ही धरातल पर प्रारंभ हो पाए हैं। विभागीय मद के अधिकांश प्रोजेक्ट सक्षम स्वीकृति और ठेकेदार चयन प्रक्रिया में ही उलझा रखे हैं। यह विशुद्ध रूप से अफसरों की उदासीनता एवं लापरवाही का प्रमाण है, जो समय रहते काम प्रारंभ और समाप्त न होने से आगे चलकर बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है। श्रद्धालुओं के लिए होगी व्यवस्थाएं एक रिपोर्ट के अनुसार सिंहस्थ की महत्ता और विशालता को ध्यान में रख श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं करने को 11 विभाग 15751 करोड़ रुपये के 102 कार्य की योजना प्रस्तावित हैं, जिनमें 5133 करोड़ रुपये से 75 कार्य इस वर्ष सिंहस्थ मद से कराने की अनुशंसा संभागीय समिति ने की है। ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रदेश बजट में सिंहस्थ मद दो हजार करोड़ का ही रखा गया है। प्रश्न उठता है कि भविष्य में मद बढ़ाया जाएगा या कुछ कार्यों की छंटनी होगी। सबसे बड़ी चुनौती भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में स्नान सिंहस्थ कराने में सबसे बड़ी चुनौती भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में श्रद्धालुओं को स्नान कराने की है। भीड़ प्रबंधन तभी संभव है जब शहर की आंतरिक सड़कें चौड़ी, पुलों का दोहरीकरण और शिप्रा नदी पर घाट की लंबाई बढ़े। ये तीनों ही काम करने में यहां का प्रशासन पिछड़ा है। ट्रैफिक नियंत्रण के लिए बनी रोप-वे, फ्रीगंज समानांतर रेलवे ओवर ब्रिज सरिकी अनेक विभागीय योजना सक्षम स्वीकृति के बाद भी धरातल पर शुरू न हो सकी है। सरकार को प्रारंभिक तौर पर अनुमान है कि सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन आ सकते हैं। ऐसे में इनके लिए व्यवस्था करना भी आसान काम नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने अनुमान के आधार पर कुम्भ मेले के दौरान कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। जिनको कुंभ के दौरान लागू किया जाएगा। कुंभ में होंगी ये व्यवस्थाएं कुंभ मेले के दौरान मेला क्षेत्र में प्रतिदिन 16 हजार से ज्यादा सफाईकर्मी स्वच्छता की व्यवस्था संभालेंगे। साथ ही श्रृद्धालुओं की सुविधा के लिए 50 हजार शौचालय का निर्माण भी किया जाएगा। आने वाले श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाने का भी निर्णय लिया गया है। सिंहस्थ में लगेंगे इतने सफाईकर्मी बताया जा रहा है कि उज्जैन में सड़क और अन्य क्षेत्रों को मिलाकर 11 हजार 220 सफाईकर्मियों की आवश्यकता होगी। कचरा संग्रहण के लिए लगभग 5 हजार सफाईकर्मियों की जरूरत पड़ेगी। कुल मिलाकर 16 हजार 220 सफाई कर्मियों की आवश्यकता सिंहस्थ में होगी। सिंहस्थ में आ सकते हैं 14 करोड़ श्रद्धालु सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आ सकते हैं। ऐसे में हर दिन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 740 टन कचरा उत्पन्न होने का अनुमान है। इसे नियंत्रित करने के लिए 50 हजार बायो-टॉयलेट बनाए जाएंगे। सिंहस्थ कुम्भ मेले में 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं को सिंहस्थ मेला क्षेत्र के अनुसार 6 जोन में बांटा जाएगा। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं का डिजीटल रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा। डॉक्टर और पेरामेडिकल स्टॉफ की ट्रेनिंग होगी। इसके साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर पर्याप्त सुरक्षाबलों को तैनात किया जाएगा।

महासमुंद : सखी वन स्टॉप सेंटर हेतु विभिन्न पदां पर महिला अभ्यर्थियों से 30 अप्रैल तक आवेदन आमंत्रित

महासमुंद, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर महासमुंद में नवीन वित्तीय मापदण्ड एवं मानव संसाधन की स्वीकृति के अनुसार सेवा प्रदाताओं की भर्ती की जा रही है। केंद्र का संचालन नवीन मार्गदर्शिका 2022 के तहत किया जाएगा। सखी वन स्टॉप सेंटर, जो कि महिलाओं से संबंधित सहायता संस्था है, जिसमें दैनिक कार्यों के संचालन हेतु निम्न पदों के लिए केवल महिला अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इनमें साइको-सोशल काउंसलर, केस वर्कर एवं कार्यालय सहायक सह कम्प्यूटर ऑपरेटर के एक-एक पद शामिल है। इच्छुक महिला अभ्यर्थी अपना आवेदन पत्र 30 अप्रैल 2025 तक प्रातः 10ः00 बजे से सायं 5ः30 बजे के बीच पंजीकृत डाक/स्पीड पोस्ट/कोरियर के माध्यम से जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, महासमुंद, पिन कोड 493445 के पते पर प्रेषित कर सकते हैं। विस्तृत जानकारी के लिए अभ्यर्थी जिले की आधिकारिक वेबसाइट अथवा महिला एवं बाल विकास विभाग महासमुंद के सूचना पटल का अवलोकन कर सकते हैं। सखी वन स्टॉप सेंटर में महिलाओं से संबंधित सेवाएं प्रदान की जाती हैं, इसलिए सभी पदों पर केवल महिला अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

चिकित्सालय में आवश्यक सभी चिकित्सा उपकरण, तकनीकी संसाधन, और मरीजों की सुविधाओं की उपलब्धता को प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाए: मंत्री जायसवाल

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनकल्याण के संकल्प के साथ काम कर रही है, और हमारा उद्देश्य है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुलभ, सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज मंत्रालय नवा रायपुर में डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर में चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और विस्तार के सम्बन्ध में आयोजित बैठक में अधिकारियों को दिशानिर्देश देते हुए यह बात कही। बैठक में स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में अस्पताल की संरचना और सेवाओं को आधुनिक और जनसुलभ बनाने के लिए विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। बैठक में मंत्री जायसवाल ने निर्देश दिए कि चिकित्सालय में आवश्यक सभी चिकित्सा उपकरण, तकनीकी संसाधन, और मरीजों की सुविधाओं की उपलब्धता को प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने  कहा कि अस्पताल में  विस्तारीकरण और विद्युतीकरण के कार्यों में विभागीय समन्वय मजबूत किया जाए, ताकि निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण परिणाम प्राप्त हो सकें। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा सुकिरण कौशल, चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के डीन, अस्पताल प्रबंधन प्रतिनिधि एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

आंगनबाड़ी केन्द्रों में सुपोषण चौपाल आयोजित, नन्ही बालिकाओं को कराया अन्नप्राशन

महासमुंद पोषण पखवाड़ा अंतर्गत महासमुंद शहरी परियोजना अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में सुपोषण चौपाल का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण की रोकथाम और पोषण के प्रति जागरूकता फैलाना है। पोषण पखवाड़ा 8 अप्रैल से 22 अप्रैल तक आयोजित होगा। इसी क्रम में महासमुंद शहरी परियोजना अंतर्गत गुरु नानक वार्ड स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित सुपोषण चौपाल में नन्ही बालिका अमायरा का अन्नप्राशन संस्कार विधिवत रूप से संपन्न कराया गया। वहीं, डॉ. राजेंद्र प्रसाद वार्ड के आंगनबाड़ी केंद्र में बालिका सिमरन भोई और नर्गिस देवांगन का भी अन्नप्राशन संस्कार किया गया। इस दौरान पोषक आहार से संबंधित खाद्य पदार्थों को टेबल पर सजाया गया था तथा इन पौष्टिक पदार्थां के महत्व को भी बताया गया। इस अवसर पर वार्ड पार्षद धनेंद्र चंद्राकर, समाजसेवी श्रीमती निरंजना चंद्राकर, महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक श्रीमती शीला प्रधान एवं कुंती यादव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, और क्षेत्र की महिलाएं उपस्थित रहीं। आयोजन के दौरान गर्भवती महिलाओ और शिशुवती महिलाओं को पोषण, स्वच्छता और शिशु देखभाल के विषय में जानकारी भी दी गई, जिससे वे अपने बच्चों के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें। पर्यवेक्षक श्रीमती शीला प्रधान ने बताया कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिलाओं को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है, क्योंकि इस समय शरीर को उचित मात्रा में पोषक तत्व की आवश्यकता होती है। पोषक आहार ना खाने से माता और शिशु कुपोषण का शिकार हो सकते हैं। कुपोषण को जड़ से मिटाने के लिए सुपोषण चौपाल अभियान एक सार्थक पहल है।

चांदी की कीमत 96,000 रुपये प्रति किलो पहुंची, सोना 1100 रुपये बढ़कर 98,983 रुपये प्रति 10 ग्राम

 इंदौर और दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखी गई। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोना 1100  रुपये की बड़ी बढ़त के साथ 98,983 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की मांग के चलते सोने की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। दिल्ली में गोल्ड में ऐतिहासिक बढ़त चांदी 1,900 रुपये उछलकर 99,400 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का पिछला बंद भाव 96,450 रुपये था। इस साल की शुरुआत में यानी 1 जनवरी 2025 को सोने का भाव 79,390 रुपये था, जो अब तक 18,710 रुपये या करीब 23.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज कर चुका है। क्यों आ रही है सोने में तेजी यह तेजी अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध बढ़ने, अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने और ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीद के चलते आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 3,318 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। वहीं, हाजिर चांदी भी करीब दो प्रतिशत की बढ़त के साथ 32.86 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। इंदौर में भी सोना मजबूत इंदौर के स्थानीय सर्राफा बाजार में भी बुधवार को सोने और चांदी की मांग में इजाफा देखने को मिला। व्यापारियों के अनुसार मंगलवार की तुलना में बुधवार को ग्राहकों की संख्या और खरीदारी दोनों में बढ़ोतरी हुई। इंदौर में सोने का औसत भाव 93,150 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। वहीं चांदी 97,800 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। चांदी के सिक्के का भाव 1,100 रुपये प्रति नग दर्ज किया गया। निवेशकों की नजर एक्सपर्ट का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति और आर्थिक आंकड़ों के कारण आने वाले समय में सोने-चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर आने वाले बयानों और आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, डिजिटल माध्यमों जैसे ऑनलाइन गोल्ड ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड और गोल्ड म्युचुअल फंड्स में भी निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा दौर में सोने-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग और बढ़ सकती है। कुल मिलाकर वैश्विक हालात और निवेशकों की सोच में बदलाव के चलते सर्राफा बाजार में सोना और चांदी नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं।

एमसीबी : मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख की सहायता राशि स्वीकृत

एमसीबी छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नया रायपुर द्वारा राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 में संशोधित प्रावधान के अनुसार, राजस्व पुस्तक परिपत्र 6(4) के परिशिष्ट-1 की कंडिका-6(क)(1) के तहत प्राकृतिक आपदा राहत के अंतर्गत आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत वार्ड नं0 33 बी0आईप गोदरीपारा तहसील चिरमिरी में माला सिंह की मृत्यु मधुमक्खियों के काटने के कारण हो गया था। जिससे उनके पति कमलेश सिंह को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार, आकाश सिंह आ0 राय सिंह निवासी ग्राम दुग्गी तहसील खड़गवां की मृत्यु डबरी के पानी में डूबने के कारण हो गया था जिससे मृतक के पिता राय सिंह को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार खड़गवां तहसील के ग्राम मंगोरा निवासी भूषणराम की जहरीले सर्प के काटने से हुई मृत्यु हो जाने पर उनकी पत्नी राजन बाई को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। उपरोक्त स्वीकृत राशि का व्यय मांग संख्या-58 मुख्य शीर्ष-2245 प्राकृतिक आपदा राहत के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में विकलनीय होगा। 

मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख की सहायता राशि स्वीकृत

एमसीबी छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नया रायपुर द्वारा राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 में संशोधित प्रावधान के अनुसार, राजस्व पुस्तक परिपत्र 6(4) के परिशिष्ट-1 की कंडिका-6(क)(1) के तहत प्राकृतिक आपदा राहत के अंतर्गत आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत ग्राम एकता नगर गोदरीपारा तहसील चिरमिरी में मनीष कुमार पाण्डेय की मृत्यु तालाब में डूबने के कारण हो गया था। जिससे उनके पिता दिरेन्द्र पाण्डेय को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार, गणेश मौर्य आ0 शुद्दू मौर्य निवासी ग्राम भरतपुर तहसील भरतपुर की मृत्यु आकाशीय बिजली गिरने के कारण हो गया था जिससे मृतक की पत्नी कलावती मौर्य को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार केल्हारी तहसील के ग्राम पेण्ड्री निवासी मायावती की जहरीले सर्प के काटने से हुई मृत्यु हो जाने पर उनकी माता गोलैन्दी एवं उनके पिता फग्गू बैगा को 2-2 लाख कुल 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। उपरोक्त स्वीकृत राशि का व्यय मांग संख्या-58 मुख्य शीर्ष-2245 प्राकृतिक आपदा राहत के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में विकलनीय होगा।

मुनीर ने कहा दो कौमी नजरिये को ध्यान में रखकर हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया, पाक मुल्क को बनाया

लाहौर पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने ओवरसीज पाकिस्तानियों के एक जलसे में मौलानाओं की तरह तकरीरें की है. उनके भाषण में हिन्दू धर्म के प्रति नफरत खूब झलका. उन्होंने इकबाल का जिक्र किया, ओवरसीज पाकिस्तानियों के डॉलर पर लालची निगाह दौड़ायी और कश्मीर-ब्लूचिस्तान की चर्चा छेड़कर विदेशों में कमा रहे पाकिस्तानियों की वफादारी खरीदने की कोशिश की. ओवरसीज पाकिस्तानियों का पहला सालाना जलसा 13-16 अप्रैल 2025 तक पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुआ. इस सम्मेलन में असीम मुनीर का संबोधन 16 अप्रैल को हुआ. इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत पाकिस्तान के सभी बड़े नेता मौजूद थे. भारत के दुखद बंटवारे का जिक्र करते हुए जनरल मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान की कहानी अपने बच्चों को जरूर बताएं. ताकि वे पाकिस्तान की कहानी न भूलें. एक बिलियन डॉलर का कर्ज मांगने के लिए वर्ल्ड बैंक के सामने दर्जनों बार हाथ फैला चुके पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने अपनी तकरीर में उसी मुद्दे को उठाया जिसे पाकिस्तानी हमेशा से करते आए हैं. वो मुद्दा था हिन्दुओं से नफरत. पाकिस्तान में ‘मुल्ला जनरल’ के नाम से सुर्खियां बटोरने वाले असीम मुनीर ने कहा, “हमारे पूर्वजों ने सोचा कि हम जीवन के हर मुमकिन पहलू में हिंदुओं से अलग हैं. हमारे धर्म अलग हैं, हमारे रीति-रिवाज अलग हैं, हमारी परंपराएं अलग हैं, हमारे विचार अलग हैं, हमारी महत्वाकांक्षाएं अलग हैं. यहीं से दो-राष्ट्र सिद्धांत की नींव रखी गई. हम दो राष्ट्र हैं, हम एक राष्ट्र नहीं हैं.” मुनीर ने कहा कि, ‘इसी दो कौमी नजरिये को ध्यान में रखकर हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया, लगातार संघर्ष किया और इस मुल्क को बनाया. इस मुल्क के लिए कुर्बानियां दीं.” दो कौमी नजरिये की पैरवी करने वाले मुनीर ये बताना भूल गए कि पाकिस्तान बनने के कुछ सालों बाद ही इससे टूटकर बांग्लादेश कैसे बन गया. जनरल असीम मुनीर विदेशों में कमा रहे पाकिस्तानियों की कमाई को देखकर खूब गदगद दिखे. उन्होंने कहा, “जिस तरह आप अपने मुल्क के लिए योगदान दे रहे हैं, पैसे भेजकर, निवेश कर, अलग-अलग माध्यमों से इससे ये पता चलता है कि आप अपने मुल्क से कितना मोहब्बत करते हैं. प्रवासी पाकिस्तानियों को आइडियोलॉजी का चूरन देते हुए असीम मुनीर ने कहा कि, ‘जो ओवरसीज हैं वो एक अलग तहजीब में रहते हैं, लेकिन आप ये कभी मत भूलिए कि आप एक सुपीरियर आइडियोलॉजी से ताल्लुक रखते हैं.” असीम मुनीर ने बड़े ही भावुक अंदाज में कहा, “मेरे भाई-बहन, बेटे-बेटियों कृपया पाकिस्तान की इस कहानी को कभी भूलना मत. इसे अपनी आने वाली जेनेरेशन को जरूर बताइएगा. जिससे वह पाकिस्तान के साथ अपने जुड़ाव को महसूस कर सकें. यह कभी कमजोर न हो, चाहें यह तीसरी पीढ़ी हो, चौथी पीढ़ी हो या फिर पांचवीं पीढ़ी. वे जानें कि पाकिस्तान उनके लिए क्या है.” पाकिस्तान बनने की कहानी में हिंसा और दंगों की कहानी को दबाते हुए और पूरे इतिहास को शुद्ध मजहबी रंग देते हुए असीम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान कलमे की बुनियाद पर बना है. उन्होंने कहा, “आजतक इंसानियत की तारीख में सिर्फ दो रियासतें हैं जो कलमें की बुनियाद पर बनी हैं. पहली जो थी उसका नाम है रियासत-ए-तैयबा… आज उसको मदीना कहा जाता है. और जो दूसरी रियासत है, वो उसके 1300 साल के बाद अल्लाह ने आपकी (पाकिस्तान) बनाई है, कलमे की बुनियाद के ऊपर.” मुनीर ने गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित फिलिस्तीनियों के प्रति भी समर्थन व्यक्त किया और कहा, “पाकिस्तानियों के दिल गाजा के मुसलमानों के साथ मिलकर धड़कते हैं.” बता दें कि तंगहाली और कंगाली के कगार पर पहुंच चुके पाकिस्तान में इस समय ओवरसीज पाकिस्तानी डॉलर भेजकर वहां की इकोनॉमी में ऑक्सीजन देने की कोशिश कर रहे हैं. असीम मुनीर ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान का वही पुराना रोना रोया और इसे पाकिस्तान के गले की नस बताया.  

दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अक्षर पटेल ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ सुपर ओपर में मिली जीत का श्रेय मिचेल स्टार्क को दिया

नई दिल्ली दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अक्षर पटेल ने इंडियन प्रीमियर लीग में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ सुपर ओपर में मिली जीत का श्रेय मिचेल स्टार्क को दिया। साथ ही उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के इस अनुभवी तेज गेंदबाज ने यॉर्कर फेंकने की योजना बनाई थी और इसे काफी अच्छी तरह अंजाम दिया। दिल्ली के 189 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए रॉयल्स की टीम नितीश राणा (51 रन, 28 गेंद, छह चौके, दो छक्के) और यशस्वी जायसवाल (51 रन, 37 गेंद, चार छक्के, तीन चौके) के अर्धशतक के बावजूद चार विकेट पर 188 रन ही बना सकी जिससे मैच सुपर ओवर तक खिंचा। रॉयल्स की टीम एक समय 14वें ओवर में एक विकेट पर 112 रन बनाकर काफी मजबूत स्थिति में थी। लेकिन दिल्ली की टीम स्टार्क (36 रन पर एक विकेट) की अगुआई में गेंदबाजों के उम्दा प्रदर्शन से वापसी करने में सफल रही। स्टार्क ने अपने अंतिम दो ओवर में सिर्फ 16 रन दिए। स्टार्क ने इसके बाद सुपर ओवर में भी रॉयल्स को सिर्फ 11 रन पर रोक दिया। काम आया यह प्लान अक्षर ने डेथ ओवरों में लगातार यॉर्कर फेंकने की योजना को बेहद प्रभावी तरीके से लागू करने और बाउंसर आदि का इस्तेमाल करके विविधता लाने का प्रयास नहीं करने के लिए स्टार्क की जमकर तारीफ की। अक्षर ने मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहाकि अंत में जब स्टार्क के दो ओवर बचे हुए थे तो मुझे भरोसा था कि अगर दाएं-बाएं हाथ के बल्लेबाजों का संयोजन है तो भी स्टार्क अपनी गति से उन्हें छका सकता है। उन्होंने कहाकि वह यॉर्कर अच्छे डाल रहा था लेकिन उसके पास तेज और धीमा बाउंसर भी है। यही बात चल रही थी कि उसे यॉर्कर ही करने चाहिए। उसने भी यही बोला कि हम क्षेत्ररक्षण के साथ खेलेंगे और मैं उसी के हिसाब से गेंदबाजी करूंगा और यॉर्कर तथा वाइड यॉर्कर डालने की ही कोशिश करूंगा। उसने इस योजना को बखूबी अंजाम दिया। इस फैसले से हो रहा फायदा अक्षर ने कहा कि मौजूदा सत्र में गेंद पर लार के इस्तेमाल की स्वीकृति मिलने से गेंदबाजों को फायदा हो रहा है। उन्होंने कहाकि आईपीएल में अब हम गेंद पर लार का इस्तेमाल कर सकते हैं। जिस तरह की विकेट हैं, अधिक घास नहीं रहती और लार के इस्तेमाल से आप रिवर्स स्विंग की कोशिश कर सकते हैं, मुझे लगता है कि यह गेंदबाजों के लिए उचित है। अक्षर ने कहाकि विकेट बल्लेबाजी के अनुकूल हैं। मुझे लगता है कि 180-190 रन बन रहे हैं और मजा भी आ रहा है। अब क्रिकेट प्रतिस्पर्धी हो गया है, ऐसा नहीं है कि गेंदबाजों के लिए कुछ नहीं है। मुझे लगता है कि लार के इस्तेमाल से रिवर्स स्विंग में मदद मिल रही है लेकिन दबाव के समय ऐसा कर पाना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। मोहित को गेंदबाजी देने के फैसले का बचाव मोहित शर्मा को 19वें ओवर में गेंदबाजी देने के फैसले का भी अक्षर ने बचाव किया। अक्षर ने कहाकि जब हम गेंदबाजी करने आये तो मैंने देखा कि हमारे गेंदबाज उतने प्रभावी नहीं लग रहे। धीमी गेंदबाजी भी काफी प्रभावी नहीं हो रही थी। फिर मैंने योजना में बदलाव किया और मोहित को 19वां ओवर देने का फैसला किया क्योंकि वह पिछले दो साल से गुजरात के साथ काम रहे हैं और मुझे पता है कि वह क्या कर सकते हैं। मुकेश (कुमार) की गेंदबाजी काफी अच्छी नहीं रही थी और ऐसे में स्टार्क के दो ओवर बचते (आखिरी तीन में से)। कुलदीप की चोट पर क्या अपडेट फाफ डु प्लेसी चोट के कारण पिछले दो मैच में नहीं खेल पाए हैं जबकि रॉयल्स के खिलाफ कुलदीप यादव को भी हल्की चोट लगी। अक्षर ने कहा कि कुलदीप की चोट को लेकर चिंता नहीं है और उन्होंने उम्मीद जताई कि डुप्लेसी गुजरात टाइटंस के खिलाफ अहमदाबाद में 19 अप्रैल को होने वाले टीम के अगले मैच में उपलब्ध हो सकते हैं। अक्षर ने कहाकि मैं पुरस्कार वितरण समारोह से सीधा यहां आया हूं इसलिए कुलदीप को लेकर अधिक जानकारी नहीं है। मुझे लग रहा है कि अगर कुछ गंभीर होता तो अब तक मुझे इस बारे में जानकारी दे दी जाती। फाफ पिछले दो मैच नहीं खेल पाए हैं। पहले कहा गया था कि वह तीन मैच में नहीं खेल पाएंगे लेकिन शायद वह गुजरात के खिलाफ खेल सकते हैं। उनका रिहैबिलिटेशन हालांकि जारी है और फिजियो ही फैसला करेंगे कि वह गुजरात के खिलाफ खेल पाएंगे या नहीं। कप्तानी का उठा रहा हूं लुत्फ अक्षर ने कहा कि अगर कप्तान के रूप में उनका कोई फैसला टीम के पक्ष में नहीं रहता तो उन्हें इसे स्वीकार करने में कोई समस्या नहीं है। दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान ने कहाकि मैं अपनी कप्तानी का लुत्फ उठा रहा हूं। मैं जो भी फैसला करता हूं उसका लुत्फ उठाता हूं। अगर कोई फैसला टीम के पक्ष में नहीं रहता तो मुझे ऐसा स्वीकार करने में क्या हर्ज है। इसे आप गलती नहीं कह सकते, यह रणनीतिक फैसला होता है। कभी आपका फैसला काम करता है और कभी-कभी ऐसा नहीं होता। आपको अगर श्रेय मिलता है तो आलोचना के लिए भी तैयार रहना चाहिए।  

देश में बंद हुआ एक और बैंक, जमाकर्ताओं के पैसों का क्या होगा, जानिए RBI ने क्यों रद्द किया लाइसेंस

अहमदाबाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 16 अप्रैल, 2025 को अहमदाबाद स्थित कलर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक (Colour Merchants Co Operative Bank) का लाइसेंस रद्द कर दिया। यह निर्णय बैंक की कमजोर वित्तीय स्थिति और कमाई की संभावनाओं की कमी के कारण लिया गया है। आरबीआई ने कहा कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं है और यह बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहा है। जमाकर्ताओं को मिलेगी बीमा सुरक्षा लाइसेंस रद्द होने के बाद, बैंक बुधवार को अपने सभी बैंकिंग कार्य बंद कर देगा। बैंकिंग कारोबार में जमा स्वीकार करना और उसका पुनर्भुगतान शामिल होता है। परिसमापन की प्रक्रिया शुरू होने पर, डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत जमाकर्ताओं को उनकी जमा राशि पर अधिकतम ₹5 लाख तक की बीमा राशि प्राप्त होगी। 98.51% जमाकर्ताओं को पूरी राशि मिलने की उम्मीद आरबीआई द्वारा जारी बयान के अनुसार, बैंक के द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, लगभग 98.51% जमाकर्ता DICGC बीमा के अंतर्गत अपनी पूरी जमा राशि पाने के हकदार हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि अधिकांश जमाकर्ताओं की रकम बीमा के दायरे में आ जाती है। अब तक 13.94 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका DICGC पहले ही 31 मार्च 2024 तक बैंक के जमाकर्ताओं को ₹13.94 करोड़ का भुगतान कर चुका है। इससे यह स्पष्ट है कि बीमा प्रणाली सक्रिय रूप से कार्य कर रही है और जमाकर्ताओं की सुरक्षा प्राथमिकता है। जनहित में लिया गया फैसला आरबीआई ने स्पष्ट किया कि बैंक की वर्तमान स्थिति उसके जमाकर्ताओं के हितों के लिए हानिकारक है। अगर बैंक को आगे कारोबार जारी रखने की अनुमति दी जाती, तो इससे जनहित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था। इसलिए, बैंकिंग कार्यों को समाप्त करना आवश्यक हो गया था। यह निर्णय भारत के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में नियामक निगरानी की गंभीरता और जमाकर्ताओं की सुरक्षा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

गौरेला पेंड्रा मरवाही : बांधामुड़ा गौरेला में भवन खरीदने का सुनहरा अवसर किफायती दर पर भवन उपलब्ध

गौरेला पेंड्रा मरवाही छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल ने आम नागरिकों के लिए एक सुनहरा अवसर प्रदान किया है। मंडल द्वारा गौरेला के बांधामुड़ा क्षेत्र में विकसित की जा रही सामान्य आवासीय कॉलोनी में एचआईजी (हाई इनकम ग्रुप) एवं एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) वर्ग के लिए भवन खरीदने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यह योजना विभिन्न आय वर्गों के लोगों को रियायती दर पर पक्के मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाई गई है।          छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल प्रक्षेत्र कोरबा के संपदा अधिकारी ने बताया कि बांधामुड़ा गौरेला में नगर पंचायत कार्यालय गौरेला, रेलवे स्टेशन एवं अनूपपुर रोड के समीप स्व वित्तीय आधार पर नगर पंचायत को हस्तांतरित कालोनी में एचआईजी (हाई इनकम ग्रुप) एवं एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) भवन निर्माण कार्य किया गया है। इच्छुक आवेदक https://cghb.gov.in/ वेबसाइट पर या मंडल कार्यालय में संपर्क कर भवन खरीद सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर +91-96694-52316, +91-99814-35332, +91-77250-67027 या +91-99072-85405 पर संपर्क किया जा सकता है।

सरला मिश्रा केस की फाइल 28 साल बाद फिर खुलेगी, पुलिस की खात्मा रिपोर्ट खारिज, दिग्विजय सिंह की बढ़ सकती हैं मुश्किलें? जानें मामला

भोपाल मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास के सबसे चर्चित मामलों में से एक कांग्रेस नेत्री सरला मिश्रा की मौत का मामला 28 साल बाद फिर से खुलने जा रहा है. 1997 में भोपाल स्थित सरकारी आवास में जलने से उनकी मौत हो गई थी. इस मामले में सरला मिश्रा के भाई ने एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं. ऐसे में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. भोपाल कोर्ट के आदेश के बाद सरला मिश्रा की मौत का मामला फिर से खुलने जा रहा है.  अनुराग ने कहा, सियासी अदावत में बहन की हत्या हुई। सरला की मौत की जांच पर शुरू से अंगुलियां उठती रही हैं। आरोप लगे कि भोपाल की टीटी नगर पुलिस की हत्या को आत्महत्या बताया। पीएम करने वाले डॉक्टर पर आरोप लगे। अब अनुराग ने कहा, उम्मीद है, अब न्याय मिलेगा। जांच के नाम पर कागजी घोड़े : पुलिस ने 7 मार्च 1997 को बयान लिया। एक अन्य बयान 15 फरवरी 2010 को लिया। जांच के आदेश के कोर्ट ने लिखा- पुलिस ने जांच न कर कागजी घोड़े दौड़ाए। सरला जल रही थी, दरवाजे खुले थे: जांच में कहा गया था, जब साक्षी राजीव दुबे घटनास्थल पर पहुंचे तो सरला जल रही है। मकान के दरवाजे खुले थे। कोर्ट ने लिखा है, यह असंभव है। सरला के भाई ने दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए इस मामले में सरला के भाई ने दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भोपाल का बहुचर्चित कांड सरला मिश्रा सुर्खियों में रहा है। सरला के भाई अनुराग मिश्रा का कहना है कि उनकी बहन सरला मिश्रा 14 फरवरी 1997 को संदिग्ध अवस्था में जली हुई पाई गई थीं। इस मामले में आत्महत्या का मामला दर्ज किया गया था पुलिस ने उस समय इस मामले में आत्महत्या का मामला दर्ज किया था, जबकि वो मामला हत्या का था। इसी मामले में दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह का नाम भी सामने आया था। ऐसे आरोप थे कि सरला की हत्या राजनीतिक साजिश के तहत की गई थी। जब सरला मिश्रा का 1997 को निधन हुआ था, तब मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी और दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। सरला मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी सरला मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में भोपाल के टीटी नगर थाने की ओर से पेश खात्मा रिपोर्ट को न्यायालय ने नामंजूर कर दिया है। सरला के भाई अनुराग मिश्रा की आपत्तियों के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पलक राय ने टीटी नगर पुलिस को मामले की पुन: जांच कर आरोप-पत्र संबंधित न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया है। मामला करीब 28 वर्ष पुराना है। 14 फरवरी 1997 को सरला मिश्रा भोपाल के साउथ टीटी नगर स्थित सरकारी आवास में संदिग्ध परिस्थितियों में जल गई थीं। उन्हें इलाज के लिए पहले हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली ले जाया गया था, जहां 19 फरवरी 1997 को उनकी मौत हो गई। कोर्ट ने कहा- पुलिस जांच में कई गंभीर खामियां भोपाल कोर्ट की न्यायाधीश पलक राय ने अपने आदेश में कहा कि मृतका के मृत्यु पूर्व बयान की मेडिकल पुष्टि नहीं की गई। बयान के समर्थन में जो कागज के टुकड़े मिले, उनकी भी स्वतंत्र जांच नहीं कराई गई। घटनास्थल से कोई फिंगरप्रिंट भी नहीं लिया गया। परिवार ने इसे हत्या बताया था और कुछ नेताओं पर आरोप भी लगाए थे। साल 2000 में पुलिस ने केस की फाइल बंद कर दी थी। खात्मा रिपोर्ट अगले 19 वर्ष तक कोर्ट में पेश नहीं की गई। फरवरी 2025 में हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि पहले खात्मा रिपोर्ट में बयान दर्ज हों और फिर कार्रवाई की जाए। इसके बाद भोपाल कोर्ट में सुनवाई चली और अनुराग के बयान दर्ज हुए। भाई ने कहा- हत्या हुई, पुलिस ने माना सुसाइड अनुराग मिश्रा ने बताया- सरला दीदी मेरी सगी बड़ी बहन थी। हम शुरू से कहते आ रहे हैं कि उनकी हत्या हुई है। पुलिस ने संदिग्ध स्थिति में जला मानकर 309 में केस दर्ज कर लिया और कहा था कि इन्होंने आत्महत्या की है। हम उसी समय के जांच अधिकारी से कहते रहे कि इसमें हत्या हुई है। हमनें लिखकर दिया फिर भी उसकी जांच नहीं हुई। घटना स्थल पर सबसे पहले मेरे माता-पिता पहुंचे थे। उन्हें घटना वाले मकान से बाहर करके ताला लगा दिया था। पुलिस ने माता-पिता और मेरी एक और सगी बड़ी बहन के बयान नहीं लिए। जलते हुए कोई कैसे फोन कर सकता है? अनुराग कहते हैं दीदी के पड़ोसी राजीव दुबे का बयान था कि सरला का मेरे घर फोन आया था कि मैं जल रही हूं। आप आकर मुझे बचाओ। उसी समय तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के निवास से राजीव दुबे और योगीराज शर्मा को फोन पहुंचता है कि सरला मिश्रा का इलाज कराओ। ये दोनों दो घंटे तक उनको लेकर बैठे रहे। अस्पताल लेकर क्यों नहीं गए? डॉ. योगीराज शर्मा का पुलिस रिकॉर्ड में बयान है कि जब मैं घटना वाले घर पहुंचा तो मकान धुला और पोछा हुआ था। उसकी पुलिस ने जांच क्यों नहीं की। लैंडलाइन फोन की जांच और जब्ती क्यों नहीं की अनुराग मिश्रा ने कहा- बहन के लैंडलाइन की कॉल डिटेल, वह फोन जब्त क्यों नहीं किया? डॉ. सत्पथी ने सारी बातें लिख दीं लेकिन, टेलीफोन का जिक्र ही नहीं किया। पुलिस डायरी में जैसा लिखा कि तत्कालीन एसपी के मौखिक आदेश पर डॉ. सत्पथी घटना की फोरेंसिक जांच के लिए पहुंच गए थे। ये क्यों नहीं बताया कि मौखिक आदेश में क्या कहा गया था। क्या रिपोर्ट बनाना है? बेड पर मिले कागज की जांच क्यों नहीं की भाई का आरोप है कि घटना के बाद हर्ष शर्मा पहुंचे थे उन्होंने अभिमत दिया था कि सरला मिश्रा के बेड पर एक कागज मिला था। उसकी राइटिंग की जांच इसलिए नहीं की क्योंकि मृत्यु पूर्व बयानों में हस्ताक्षर अलग हो जाते। इसलिए पुलिस ने उनके अभिमत को भी नहीं माना। उस समय विधानसभा सत्र में भाजपा के विधायकों ने इस मामले को उठाया था और सीबीआई जांच की मांग की। उसके बाद हम हाईकोर्ट भी गए। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर में एक रिट याचिका … Read more

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