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प्रदेश में मोहन यादव सरकार जल्द कर सकते है मंत्रिमंडल विस्तार, कुछ मंत्रियों की पद से हो सकती है छुट्टी

भोपाल प्रदेश में मोहन यादव सरकार को डेढ़ वर्ष होने जा रहा है, लेकिन राजनीतिक नियुक्तियां नहीं हुई हैं। उधर, मंत्रिमंडल विस्तार का भी नेताओं को इंतजार है। पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, जयंत मलैया, हरिशंकर खटीक, ब्रजेंद्र प्रताप सिंह और संजय पाठक को अपना नंबर आने की संभावना दिख रही है। दरअसल, पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट है, तो मध्य प्रदेश में भी इस बात की चर्चा शुरू हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव मंत्रियों के प्रदर्शन के आधार पर मंत्रिमंडल विस्तार कर सकते हैं।   क्षेत्रीय संतुलन साधने की होगी कोशिश इसमें क्षेत्रीय संतुलन साधने के हिसाब कुछ पूर्व मंत्रियों को फिर मौका दिया जा सकता है। उनके अलावा कांग्रेस से भाजपा में आए छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा सीट से विधायक कमलेश शाह भी प्रतीक्षारत हैं। रामनिवास रावत के मंत्रिमंडल से त्याग पत्र देने के बाद मोहन कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित 31 मंत्री हैं। नियम के अनुसार 35 मंत्री हो सकते हैं। कुछ मंत्रियों की पद से हो सकती है छुट्टी मंत्री बनने के लिए पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह, संजय पाठक, ब्रजेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य पूर्व मंत्री सत्ता और संगठन में अपने संपर्कों के माध्यम से प्रयासरत भी हैं। संभावना जताई जा रही है कि रिक्त स्थानों की पूर्ति हो सकती है। कुछ मंत्रियों को खराब प्रदर्शन के आधार पर विश्राम भी दिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि अभी प्राथमिकता प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की नियुक्ति है, इसलिए यह काम इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले हो सकता है। उधर, राजनीतिक नियुक्तियां भी अब की जाएंगी। इसको लेकर संगठन स्तर पर कई बार चर्चा भी हो चुकी है। इसमें कुछ पूर्व विधायकों को समायोजित भी किया जाएगा। अभी इनके पास कोई काम नहीं है। जयंत मलैया को बनाया जा सकता है वित्त आयोग का अध्यक्ष सूत्रों के अनुसार पूर्व वित्त और वाणिज्यिक कर मंत्री जयंत मलैया को छठवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। पांचवें वित्त आयोग की अनुशंसाएं अप्रैल 2026 तक के लिए हैं। आयोग विभिन्न स्तरों पर चर्चा के बाद स्थानीय निकायों को दी जाने वाली राशि के संबंध में अनुशंसा करेगा। ये विधायक कर रहे इंतजार गोपाल भार्गवः नौ बार के विधायक। उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सरकार में लगातार मंत्री रहे। बुंदेलखंड के कद्दावर नेता। भूपेंद्र सिंहः एक बार के सांसद और पांच बार के विधायक। शिवराज सरकार में लगातार आठ वर्ष मंत्री रहे। बुंदेलखंड क्षेत्र में पकड़। जयंत मलैयाः बुंदेलखंड क्षेत्र से आते हैं। आठ बार के विधायक। सुंदरलाल पटवा से लेकर शिवराज सरकार तक में मंत्री रहे। वित्त, वाणिज्यिक कर और जल संसाधन विभाग में काम करने का लंबा अनुभव। ब्रजेंद्र प्रताप सिंहः पांच बार के विधायक। दो बार मंत्री रह चुके हैं। हरिशंकर खटीकः भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष रहने के साथ संगठन में काम कर चुके हैं। चार बार के विधायक। शिवराज सरकार में मंत्री भी रहे।  

दो मई से होंगी 10वीं-12वीं विशेष-कंपार्टमेंटल परीक्षा, जारी हुआ शेड्यूल

पटना BSEB 10th 12th Compartment Exam Date 2025: बिहार बोर्ड से 10वीं और 12वीं की परीक्षा में कंपार्टमेंट आने वाले छात्रों के लिए जरूरी खबर है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने हाई स्कूल (मैट्रिक) और इंटरमीडिएट (12वीं) की विशेष व कंपार्टमेंटल परीक्षाओं का शेड्यूल जारी कर दिया है। छात्र अपना पूरा टाइम टेबल BSEB की आधिकारिक वेबसाइट secondary.biharboardonline.com पर जाकर चेक कर सकते हैं। 2 से 13 मई तक चलेंगी कंपार्टमेंट और विशेष परीक्षाएं बिहार बोर्ड की 10वीं (मैट्रिक) विशेष एवं कंपार्टमेंट परीक्षा 2 मई से शुरू होकर 7 मई 2025 तक चलेगी, जबकि 12वीं (इंटरमीडिएट) की विशेष एवं कंपार्टमेंट परीक्षा 2 मई से शुरू होकर 13 मई 2025 को समाप्त होगी। बोर्ड ने सभी छात्रों को सलाह दी है कि वे समय रहते अपना एडमिट कार्ड आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड करें और परीक्षा से संबंधित सभी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी तरह की समस्या से बचा जा सके। जारी डेटशीट के मुताबिक कंपार्टमेंट परीक्षाएं 2 मई से शुरू होकर 13 मई 2025 को समाप्त हो रही हैं। जबकि 10वीं की कंपार्टमेंट परीक्षा 2 मई से शुरू होकर 7 मई को समाप्त होगी। दो पालियों में होगी कंपार्टमेंट परीक्षाएं बीएसईबी की ओर से जारी डेटशीट के मुताबिक हाईस्कूल और इंटर की कंपार्टमेंट परीक्षाएं दो पालियों में आयोजित की जाएंगी। पहला पाली की परीक्षा सुबह 9 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 12:45 तक होगी। जबकि दूसरी पाली की परीक्षाएं दोपहर 2 बजे से शुरू होकर 5:15 तक होगी।  

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दिया संकेत, 15 दिनों के भीतर सरकार नई टोल नीति पेश करेगी

नई दिल्ली जल्द ही देश में हाईवे सफर का अनुभव पूरी तरह बदलने वाला है। टोल प्लाजा पर लंबी कतारों, फास्टैग की खामियों और समय की बर्बादी से राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार अब एक सैटेलाइट-बेस्ड टोल सिस्टम लाने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को संकेत दिया कि आने वाले 15 दिनों के भीतर सरकार नई टोल नीति पेश करेगी, जो भारत के टोल कलेक्शन सिस्टम में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। GPS आधारित टोल सिस्टम की शुरुआत गडकरी ने बताया कि इस नई नीति के लागू होने के बाद टोल को लेकर लोगों की सभी शिकायतें दूर हो जाएंगी। उन्होंने फिलहाल नीति की ज्यादा जानकारी साझा नहीं की, लेकिन संकेत साफ हैं—सरकार अब GPS आधारित टोल वसूली की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। फास्टैग से आगे की टेक्नोलॉजी भारत में 2016 में फास्टैग सिस्टम की शुरुआत हुई थी, जो RFID टेक्नोलॉजी पर आधारित है। हालांकि, बीते वर्षों में इसके संचालन में कई समस्याएं सामने आईं—जैसे अत्यधिक ट्रैफिक, टैग स्कैनिंग में तकनीकी गड़बड़ियां, और टैग के दुरुपयोग के मामले। इन्हीं दिक्कतों के चलते अब सरकार स्मार्ट और सटीक टोल कलेक्शन सिस्टम की तरफ बढ़ रही है। कैसे काम करेगा GPS Toll System? इस नए सिस्टम में हर वाहन में एक ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) डिवाइस लगाया जाएगा, जो GNSS (Global Navigation Satellite System) तकनीक के जरिए वाहन की रीयल टाइम लोकेशन और हाईवे पर तय की गई दूरी को ट्रैक करेगा।    जैसे ही वाहन हाईवे पर चलेगा, सिस्टम उस वाहन की यात्रा की दूरी मापेगा, उसी के आधार पर टोल की राशि तय की जाएगी, और वह रकम सीधे ड्राइवर के बैंक खाते या वॉलेट से स्वतः कट जाएगी। बड़ी राहत: रुकना नहीं, सिर्फ चलना है! GPS Toll लागू होने से ड्राइवरों को किसी टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन खर्च भी कम होगा और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से भी राहत मिलेगी। आम लोगों पर क्या असर होगा? इस नई नीति के लागू होने से आम नागरिकों को टोल की पारदर्शिता मिलेगी, मनमानी वसूली पर लगाम लगेगी, और टोल टैक्स सिर्फ उतनी दूरी का देना होगा जितना हाईवे पर वाहन चला है। यानी, “Pay as you drive” मॉडल पर टोल वसूली होगी।

हादसे का इंतजार: जर्जर भवन में चल रही है राशन दुकान

महासमुंद  छत्तीसगढ़ में लोग जान जोखिम में डालकर सरकारी राशन लेने के लिए मजबूर है. मामला महासमुंद जिले के पिथोरा नगर के क्रमांक-2 की उचित मूल्य दुकान का है. यह दुकान एक ऐसे भवन में चल रही है, जो जर्जर और क्षतिग्रस्त हो चुका है. लंबी कतारों में घंटों इंतजार करने वाले लोग न केवल बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं, बल्कि हर पल हादसे की आशंका के साये में राशन लेने पहुंच रहे हैं. छत्तीसगढ़ सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली सस्ते अनाज का वादा तो करती है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की अनदेखी ने पिथौरा के लोगों को मुसीबत में डाल दिया है. राशन दुकान में न बैठने की जगह, न पीने का पानी, और न ही शौचालय. अगर किसी को वॉशरूम की जरूरत पड़े, तो घर लौटना पड़ता है, जिससे उनका नंबर छूट जाता है और दिन बर्बाद हो जाता है. महिलाओं को सबसे ज्यादा मुसीबत छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए महतारी वंदन योजना संचालित कर रही है, लेकिन इस राशन दुकान में सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को ही हो रही है. महिलाएं अपने बच्चों के साथ कतार में घंटों खड़ी रहती हैं. स्थानीय लोग कहते हैं, “प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है.” 90 लाख की कमाई, फिर भी नहीं हुई मरम्मत यह दुकान कौड़िया सहकारी विपणन संस्था की जमीन पर है. संस्था ने दुकान के सामने 9 दुकानें बनाकर नीलामी से 90 लाख रुपये कमाए और हर महीने 700 रुपये प्रति दुकान किराया भी वसूल रही है. इसके बावजूद, वर्षों से जर्जर पड़े राशन वितरण भवन की मरम्मत तक नहीं कराई गई. जब नगर पंचायत पिथौरा के अध्यक्ष देवसिंह निषाद से इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि सहकारी समिति को व्यवस्था करनी चाहिए क्योंकि यह उनकी संस्था है. वर्षों से भवन जर्जर है. पीने के पानी और बैठने की व्यवस्था जल्द कराई जाएगी. वहीं सहकारी उप पंजीयक के संजय कुमार गुप्ता ने मामले पर कहा कि अभी दो-तीन दिन ही हुए हैं पदभार ग्रहण किए. पिथौरा के कर्मचारियों को पुराने भवन का एस्टीमेट तैयार करने कहा गया है. जल्द ही सुधार कार्य शुरू होगा.

छत्तीसगढ़ में फिर बदला मौसम का मिजाज, कही बारिश तो कही गर्मी

रायपुर छत्तीसगढ़ में आज मौसम का मिजाज फिर बदल गया है. प्रदेश के कई जिलों में आज मेघ गर्जन, तेज हवा के साथ हल्की वर्षा होने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग ने आगामी दिनों में तेज हवाएं, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश के साथ चार डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई है. बुधवार को प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 38.6°C दुर्ग में दर्ज किया गया. पिछले 24 घंटों में छत्तीसगढ़ में एक-दो स्थानों पर मेघ गर्जन, वज्रपात, तेज हवा के साथ ओलावृष्टि और हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई. मौसम विभाग ने कल प्रदेश में एक-दो स्थानों पर मेघ गर्जन और तेज हवा के साथ हल्की वर्षा होने की संभावना जताई है. वहीं 2 दिनों के बाद कुछ इलाकों में मेघ गर्जन और तेज हवा के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने के आसार है. मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अलग-अलग द्रोणिका और ऊपरी हवा का साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है. सिक्किम से उत्तर उड़ीसा तक द्रोणिका 3.1 किलोमीटर से 5.8 किलोमीटर ऊंचाई तक फैला हुआ है. एक द्रोणिका पूर्वी मध्य प्रदेश से गंगेटिक पश्चिम बंगाल तक छत्तीसगढ़ होते हुए 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. इसके अलावा दूसरा द्रोणिका पूर्वी मध्य प्रदेश से दक्षिण अंदरूनी कर्नाटक तक 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश और उसके आसपास ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण 1.5 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित है. रायपुर में मौसम का हाल रायपुर शहर में आज आकाश मुख्यतः साफ रहने और दोपहर/शाम को आंशिक मेघमय रहने की संभावना है. अधिकतम 39°C और न्यूनतम तापमान 23°C के आसपास रहने की संभावना है.

मध्य प्रदेश के लाखो कर्मचारियों को मिलेगा डबल प्रमोशन, 60 हजार पर डिमोशन का भी खतरा

भोपाल  मध्य प्रदेश में 9 साल बाद राज्य सरकार ने एक बार फिर पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की है. अभी इसके लिए नियम बनाए जा रहे हैं. इससे मध्य प्रदेश शासन के 4 लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी लाभान्वित होंगे. हालांकि सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन मिले 8 साल से अधिक समय बीत चुका है. ऐसे में वो डबल प्रमोशन के हकदार हैं. इस पर भी सरकार ने विचार किया है. वहीं सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से प्रमोशन के साथ आरक्षित वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों पर डिमोशन का खतरा भी मंडरा रहा है. अब देखना ये है कि सरकार इस मामले का किस प्रकार पटाक्षेप करती है. एक साथ नहीं मिलेगा डबल प्रमोशन जिन कर्मचारियों और अधिकारियों को पदोन्नति मिले 8 साल से अधिक का समय बीत चुका है, या फिर जिन्होंने साल 2014-15 के बाद ज्वाइन किया और उनकी समयावधि 8 साल पूरी हो चुकी है. ऐसे कर्मचारियों-अधिकारियों को डबल प्रमोशन का लाभ सरकार देगी. हालांकि मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा है, कि कर्मचारियों को डबल प्रमोशन का लाभ तो मिलेगा, लेकिन एक साथ नहीं. बल्कि सरकार की मंशा है कि इस वर्ष एक प्रमोशन देने के बाद दूसरा प्रमोशन उनको अगले वर्ष दिया जाए. जिससे कर्मचारियों की कमी न हो. इन कर्मचारियों पर लटकी डिमोशन की तलवार सपाक्स संगठन के प्रदेश अध्यक्ष केएस तोमर ने बताया कि “साल 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सरकार ने एससी-एसटी वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण देने का नियम बनाया था. इस नियम के तहत साल 2016 तक प्रदेश में आरक्षित वर्ग के कई अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रमोशन हुए. इससे आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को काफी फायदा हुआ, लेकिन ओबीसी समेत वो कर्मचारी-अधिकारी जो अनारक्षित वर्ग में थे, वो प्रमोशन में पीछे छूटते गए और उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जिसमें कोर्ट ने तथ्यों पर विचार करने के बाद इस पदोन्नति प्रक्रिया को रद्द कर दिया. लेकिन इस बीच आरक्षित वर्ग के जिन अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति मिली है, ऐसे लोगों को डिमोशन का खतरा भी बना हुआ है.” हाई कोर्ट भी सुना चुका है फैसला केएस तोमर ने बताया कि “पदोन्नति में आरक्षण नियम 2002 लागू होने के बाद से अब तक प्रदेश के 60 हजार से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ मिल चुका है, लेकिन जब इसे हाईकोर्ट 2016 में रद्द कर चुका है, तो ऐसे में इसकी वैधता कितनी है. तोमर ने बताया कि अभी मध्य प्रदेश में प्रमोशन का कोई नियम नहीं है, इसलिए ठीक है, लेकिन जैसे ही सरकार नए नियम बनाएगी, जो कर्मचारी गलत तरीके से प्रमोशन का लाभ ले रहे हैं. उनको डिमोशन करना होगा. हाईकोर्ट ने भी 31 मार्च 2024 के आदेश में कहा है कि 2002 के नियम के आधार पर जिन एससी-एसटी कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण का लाभ मिला है. उन सभी का डिमोशन किया जाएग. हालांकि सरकार ऐसा करने से बचना चाहती है, इसलिए नए नियमों को ऐसा बना रही है. जिससे सबको समान रुप से पदोन्नति का लाभ मिल सके. यूपी-उत्तराखंड में डिमोट, पंजाब-हरियाणा में क्रीमीलेयर बाहर उच्च न्यायालय ने पदोन्नति को लेकर अपने आदेश में कहा है कि जब तक स्टेटस की यथा स्थिति है, तब तक ना डिमोट होंगे और ना ही प्रमोट किया जाएगा, लेकिन जिस दिन स्टेटस बैकेंड हो जाएगा, यथा स्थिति खत्म हो जाएगी. उसी दिन डिमोट करना पड़ेगा. यूपी और उत्तराखंड में भी बाद में गलत पदोन्नति नियम के कारण आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को डिमोट किया गया. केएस तोमर ने बताया कि सपाक्स ने अपनी याचिका में कहा है कि पदोन्नति में आरक्षण के नियम में क्रीमीलेयर को शामिल नहीं करना चाहिए. ऐसे ही मामले में पंजाब और हरियाणा में पदोन्नति के दौरान क्रीमीलेयर को आरक्षण का लाभ देने से वंचित किया गया है.

सरकार ने लिया बड़ा फैसला- हरियाणा में हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार का औद्योगिक विकास को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 10 जिलों में इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनाने से न केवल उद्योगों को बेहतरीन कनेक्टिविटी मिलेगी, बल्कि इससे राज्य के विभिन्न हिस्सों में विकास भी होगा। खासतौर पर तीन प्रमुख राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के किनारे इन टाउनशिप को स्थापित करना उद्योगों के लिए सहूलियत का काम करेगा, क्योंकि इससे माल की ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन में काफी आसानी होगी। इस परियोजना से, इन जिलों में औद्योगिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी, जिससे नए कारखाने, फैक्ट्रियाँ और बिजनेस सेंटर खुलेंगे, और इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को एक महीने का समय दिया है, ताकि इस परियोजना का ब्लूप्रिंट तैयार किया जा सके।   इन 10 जिलों में ये टाउनशिप बनेंगी गुरुग्राम, हिसार (हिसार एयरपोर्ट के पास), सिरसा, भिवानी, नारनौल, फरीदाबाद, जींद,     अंबाला, कैथल  

भोपाल इंटरसिटी एक्सप्रेस में यात्रियों को बड़ी राहत, 2 स्लीपर कोच बढ़ाए, बढ़ती भीड़ के चलते रेलवे ने किया फैसला

भोपाल भोपाल और ग्वालियर के मध्य चलने वाली इंटरसिटी गाड़ी क्रमांक 12197 और 12198 में दो स्लीपर कोच जोड़े जाने से रेल यात्रियों को लाभ हो रहा है। यह व्यवस्था दिनांक 10 अप्रैल से प्रभावी हो चुकी है। इस परिवर्तन के बाद अब ट्रेन में 14 सामान्य श्रेणी, 2 स्लीपर श्रेणी, 2 कुर्सीयान, 1 वातानुकूलित कुर्सीयान समेत कुल 21 कोच हो गए हैं। भाजपा नेता और  पूर्व प्रदेश प्रवक्ता धैर्यवर्धन शर्मा ने बताया कि इंटरसिटी ट्रेन दो कोच बढ़ाए जाने से में शिवपुरी, गुना, अशोकनगर के नागरिकों को ग्वालियर और भोपाल आना-जाना अब अधिक सुविधाजनक हो गया है। पश्चिम मध्य जोन की सलाहकार समिति के सदस्य रहे धैर्यवर्धन ने इस निर्णय पर यात्रियों को बधाई देते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेल विभाग के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। भाजपा नेता धैर्यवर्धन ने बुधवार और रविवार के दिनों को जोड़कर सातों दिन इंटरसिटी चलाए जाने के लिए क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री सिंधिया का भी आभार माना है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मंडल रेल प्रबंधक देवाशीष त्रिपाठी ने अवगत कराया है कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन संख्या 12197/12198 ग्वालियर-भोपाल-ग्वालियर एक्सप्रेस में दो स्लीपर श्रेणी के कोच स्थायी रूप से जोड़े जा रहे हैं। इस संबंध में भोपाल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि ग्रीष्मकालीन भीड़ और बढ़ती हुई यात्रियों की संख्या को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। यह व्यवस्था दिनांक 10 अप्रैल से प्रभावी हो चुकी है। इस परिवर्तन के बाद अब इस ट्रेन में 14 सामान्य श्रेणी, 2 स्लीपर श्रेणी, 2 कुर्सीयान, 1 वातानुकूलित कुर्सीयान सहित कुल 21 कोच होंगे।

इंदौर-खंडवा रोड पर बना ब्रिज, निकलने लगे वाहन, मार्ग पर बनेंगे एनिमल कॉरिडोर, वन्यजीवों की सुरक्षा

इंदौर  इंदौर-खंडवा राजमार्ग का निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा नहीं हो पाया है। निर्माण कार्य के चलते वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इसी कारण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पहला ब्रिज वाहनों के लिए खोल दिया है। बीते कुछ दिनों से वाहन ब्रिज के माध्यम से निकाले जा रहे हैं, ताकि चमेली देवी कालेज के सामने बने ब्रिज के आसपास की सड़क को दुरुस्त किया जा सके। वर्तमान में यहां अंडरपास का कार्य भी प्रगति पर है। अधिकारियों के मुताबिक मई माह में दतोदा वाले ब्रिज से भी वाहन निकल सकेंगे। 216 किलोमीटर लंबे इस राजमार्ग पर तीन सुरंगों के साथ सात ब्रिज और अंडरपास बनाए जा रहे हैं। ये ब्रिज और अंडरपास चमेली देवी कालेज, उमेरीखेड़ा, चोखी ढाणी, सिमरोल, भेरूघाट, बाईग्राम और बड़वाह में बन रहें हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचने के लिए इन स्थानों पर अंडरपास की सुविधा रहेगी। इन सभी ब्रिजों को जनवरी तक तैयार किया जाना था, लेकिन कार्य की धीमी गति के कारण निर्धारित समयसीमा से छह महीने की और मोहलत दी गई है। अब तैयार होगी सर्विस लेन चमेली देवी ब्रिज का कार्य अप्रैल के पहले सप्ताह में पूर्ण कर लिया गया है। अब वाहनों को इस ब्रिज से निकाला जा रहा है, ताकि सर्विस लेन का निर्माण शुरू किया जा सके। निर्माण एजेंसी आने वाले दिनों में सर्विस लेन को बंद कर कार्य शुरू करेगी। इसके साथ ही ब्रिज के नीचे बन रहे दो अंडरपास का कार्य अंतिम चरण में है। मेघा इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट मैनेजर नागेश्वर राव का कहना है कि मई के अंतिम सप्ताह तक अंडरपास और सर्विस लेन का निर्माण पूर्ण किया जाएगा। जानवरों के लिए बनेंगे एनिमल कॉरिडोर वाहनों के साथ इस राजमार्ग के निर्माण में वन्यजीवों का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जंगलों से गुजरने वाले मार्गों पर पांच से छह स्थानों पर ‘एनिमल कॉरिडोर’ यानी अंडरपास बनाए जाएंगे, जो केवल जानवरों के लिए होंगे। इनकी मदद से वन्यप्राणी एक ओर से दूसरी ओर आसानी से जा सकेंगे। वन विभाग ने इन स्थानों की पहचान कर ली है और इनका निर्माण कार्य आगामी कुछ सप्ताहों में शुरू होने की संभावना है। सिमरोल ब्रिज शुरू करने की योजना     चमेली देवी कॉलेज के बाद दतोदा ब्रिज से वाहन गुजर सकेंगे। मई तक लोगों को थोड़ा इंतजार करना होगा। वैसे एनएचएआई ने जून तक सिमरोल ब्रिज शुरू करने की योजना बनाई है। इसके लिए निर्माण एजेंसी को निर्देश दिए हैं। – सुमेश बांझल प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई  

भोपाल में 60 हजार बकायादारों से बिजली कंपनी को 300 करोड़ वसूलना, अब कटेगा कनेक्शन!

भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में 60 हजार बकायादारों से बिजली कंपनी को 300 करोड़ वसूलना है। बीते वित्तीय वर्ष के आखिरी दिनों में एमडी मध्यक्षेत्र क्षितिज सिंघई ने बताया कि अब बिल जमा न करने वालों के बिजली कनेक्शन काटे जाएंगे। उन्होंने बताया कि शहर में 1900 से ज्यादा बकायादार 1 लाख से अधिक राशि वाले हैं, जबकि दस हजार रुपए से अधिक व एक लाख से कम बकाया राशि वाले 56 हजार के करीब बिजली उपभोक्ता हैं। सूची से हटाए बड़े नाम कंपनी की सूची में शामिल करीब 60 हजार नाम वो हैं जो कहीं कोई बड़ा रसूख नहीं रखते। हालांकि कंपनी जो सूची अपडेट कर रही है उसमें राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यालयों का ध्यान में रखा जा रहा। इन्हें भी शामिल कर लें तो बकाया राशि 450 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। कंपनी की सूची में 2.90 लाख उपभोक्ताओं पर दस हजार से कम का बकाया है। वसूली के लिए ये प्रयोग -बंदूक लाइसेंस रद्द करने को पत्र। -बैंक खातों को ब्लॉक करने बैंकों को पत्र। -वरिष्ठ इंजीनियर्स, अफसरों को फील्ड में उतारा। -हर बकायादार के घर कंपनी की टीमें भेंजी। बिजली के बकायादारों की सूची अपडेट की जा रही है। काफी बकायादार हैं। वसूली के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है।- क्षितिज सिंघई, एमडी मध्यक्षेत्र

जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश में 50 हजार खेत तालाब बनाए जाएंगे: मंत्री पटेल

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश के सभी 52 जिलों में 50 हजार खेत तालाब बनाने का लक्ष्य रखा है। ये खेत तालाब प्रदेश के किसानों की सिंचाई में मदद करने के साथ जल संरक्षण को मजबूती देने का काम करेंगे। यह पहल वर्तमान जल संचयन संरचनाओं की मरम्मत के साथ नई संरचनाओं के निर्माण पर आधारित है। खेत तालाब निजी खेत पर बनी जल भंडारण की संरचना होती है। ये तालाब कृषि से जुड़े कई कार्यों में काम आते हैं, जैसे रबी और खरीफ फसलों की सिंचाई, मछली पालन, सिंघाड़े की खेती, पशुओं के लिए पीने का पानी आदि। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा सभी जिला पंचायतों के सीईओ को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इन 50 हजार खेत तालाबों के निर्माण के लिए विशिष्ट जिलाों के हिसाब से लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इस बड़े पैमाने की परियोजना के लिए वित्तीय संसाधन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) – वाटरशेड विकास घटक से रणनीतिक रूप से तैयार किए जाएंगे।   इस अभियान के तहत कई कारकों को ध्यान में रखकर इंदौर में कम से कम 55 तालाब और नीमच में कम से कम 57 तालाब खोदने का लक्ष्य दिया गया है। वहीं, बालाघाट को अधिकतम 3,900 तालाब खोदने का लक्ष्य दिया गया है। इसी तरह शहडोल जिले में 3,746 तालाब खोदने का लक्ष्य दिया गया है। खेत तालाबों के निर्माण के लिए सही जगह का चयन अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू होगा। इस अभियान के तहत तालाबों के निर्माण के लिए खेतों के निचले हिस्सों को प्राथमिकता दी जाएगी। खेत के निचले हिस्से में प्राकृतिक प्रवाह के कारण सबसे अधिक पानी जमा होता है। इसी तरह तालाब वहीं बनाए जाएंगे जहां उनके ऊपर की तरफ (अपस्ट्रीम) से इतना पानी आ सके जो तालाब की जरूरत को पूरा कर सके। राज्य में जितनी औसतन बारिश होती है और जो खेती के तरीके हैं उन्हें देखते हुए सरकार ने तय किया है कि कुल खेती योग्य जमीन में से करीब 10% जमीन पर ही फार्म पोंड बनाए जाएंगे। कुशल जल प्रबंधन सुनिश्चित करने और केंद्रित जल प्रवाह को रोकने के लिए तालाब खोदने की जगह चयन प्रक्रिया एक चरणबद्ध तरीके का पालन करेगी। इस तरीके में विभिन्न खेतों में प्रस्तावित जगहों को एक सीधी रेखा के बजाए जिग-जैग पैटर्न में चुना जाएगा। सबसे उपयुक्त स्थानों के चयन में सहायता के लिए एक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल भी किया जाएगा। मनरेगा के तहत किसानों की जरूरतों के आधार पर 400 क्यूबिक मीटर, 800 क्यूबिक मीटर, 1000 क्यूबिक मीटर और 3600 क्यूबिक मीटर की भंडारण क्षमता वाले खेत तालाबों का निर्माण किया जा सकता है। इन तालाबों के आकार के लिए डिजाइन और परियोजना अनुमान प्रदान किए गए हैं। पीएमकेएसवाई-वाटरशेड विकास योजना के तहत निर्मित खेत तालाबों की न्यूनतम भंडारण क्षमता 3600 क्यूबिक मीटर होगी। खेत तालाबों से अत्यधिक रिसाव को नियंत्रित करने के उपाय लागू किए जाएंगे। इन तालाबों से निकली मिट्टी का उपयोग तटबंध बनाने में किया जाएगा। ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा के इंजीनियर (कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता, उप अभियंता) इन खेत तालाबों के निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी के लिए जिम्मेदार होंगे। 50 हजार खेत तालाब बनाने की घोषणा आयोजित पंच-सरपंच सम्मेलन में मंत्री पटेल ने ग्राम पंचायतों के विकास को लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों को ई-ग्राम पंचायत के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत पंचायतों के लिए सुविधायुक्त भवनों का निर्माण प्राथमिकता पर किया जा रहा है। जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश में 50 हजार खेत तालाब बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में कई पंचायत भवन आज भी अधूरे हैं या उपर नहीं हैं, जबकि अन्य राज्यों में दो से तीन मंजिला पंचायत भवन बन रहे हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए अब नए मॉडल के अनुसार पंचायत भवनों का निर्माण किया जाएगा। आयोजन में मौजूद लोग बलिदान गाथाओं का हुआ स्मरण- कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों द्वारा रानी अवंती बाई लोधी के बलिदान को याद करते हुए उनके साहस और समर्पण की कहानियों का उल्लेख किया गया। सभी ने बुजुर्ग दानदाता बेटी बाई लोधी के योगदान की सराहना की और पुष्पमालाएं अर्पित कर सम्मानित किया। इस दौौन बड़वारा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह, जिला पंचायत सदस्य कविता राय, अजय गोटिया, राकेश सिंह लोधी, जनपद अध्यक्ष सुनीता दुबे, जनपद उपाध्यक्ष दुर्गा पटेल, मंडल अध्यक्ष मनीष बागरी, आशीष चौरसिया, जिला पंचायत सीईओ शिशिर गेमावत, एसडीएम विंकी सिंहमारे, जनपद सीईओ यजुर्वेद्र कोरी, पूर्व जनपद अध्यक्ष प्रकाश सिंह बागरी, शंकर महतो, पूर्व मंडल अध्यक्ष डॉ. प्रशांत राय, पंकज राय, सरपंच कैलाश चंद्र जैन आदि मौजूद रहे।

जनजातीय जीवन और प्रकृति पर आधारित डॉक्युमेंट्री फिल्मों का होगा प्रदर्शन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय वन-पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव मध्यप्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में वन पुनर्स्थापन, जलवायु परिवर्तन और समुदाय-आधारित आजीविका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे। नरोन्हा प्रशासन अकादमी, भोपाल में आयोजित होने वाली कार्यशाला में विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों में वनों की भूमिका पर मंथन होगा। कार्यशाला में प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह स्वागत उद्बोधन देंगे। दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला की रूपरेखा डॉ. राहुल मूँगीकर प्रस्तुत करेंगे। इस अवसर पर जनजातीय समुदाय और प्राकृतिक संरक्षण पर केंद्रित ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति भी दी जाएगी। प्रमुख विषय : वन संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक प्रबंधन राष्ट्रीय कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में वन संरक्षण की वर्तमान कानूनी व्यवस्थाएं, उनकी सीमाएं और समाधान, जैव विविधता संशोधन अधिनियम-2023, सामुदायिक वन अधिकार, पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण और वन पुनर्स्थापन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। बैंगलुरू से आ रहे प्रो. रमेश विशेषज्ञ वक्तव्य भी देंगे। कार्यशाला में डॉ. योगेश गोखले, डॉ. राजेन्द्र दहातोंडे आदि वक्ता विभिन्न सत्रों को संबोधित करेंगे। राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन राज्यपाल पटेल समापन सत्र को करेंगे संबोधित राज्यपाल मंगुभाई पटेल राष्ट्रीय कार्य शाला के समापन-सत्र में मुख्य अतिथि होंगे। पूर्व राष्ट्रीय जनजातीय आयोग अध्यक्ष हर्ष चौहान समापन वक्तव्य देंगे। कार्यशाला में वनीकरण, जलवायु संवेदनशीलता और वनवासी समुदायों की समावेशी भागीदारी पर केन्द्रित डॉक्युमेंट्री फिल्मों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण में वनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह कार्यशाला वनों, जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और जनजातीय आजीविका को केंद्र में रखते हुए एक सतत और न्यायसंगत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  

MMLP में उद्योगों के लिए सभी सुविधाएं होगी, पहले चरण में एक 5 सितारा होटल भी बनने जा रहा

पीथमपुर प्रदेश के पीथमपुर में बन रहे मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क (एमएमएलपी) आधुनिक सुविधाओं वाला बनाया जाएगा। न केवल इसका जुड़ाव रेलवे से होगा बल्कि एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम होगा ताकि कस्टम की औपचारिकताएं भी यहीं से पूरी हो जाए और कंटेनर सीधे जहाज में लोड हो सके। एमएमएलपी में उद्योगों के लिए सभी सुविधाएं होगी। पहले चरण में एक 5 सितारा होटल भी बनने जा रहा है। जल्द पूरा करने के निर्देश करीब 2 महीने से काम में तेजी आई है। प्रोजेक्ट को केंद्रीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी प्राथमिकता में लिया है। दो बार वे इंदौर दौरे पर इस प्रोजेक्ट के बारे चर्चा कर चुके हैं। उन्होंने एनएचएआइ के अधिकारियों को इसे जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। गडकरी ने सागोर से पार्क तक ट्रेन पहुंचाने के लिए नई रेलवे लाइन का उद्घाटन कर दिया है। इंदौर और आसपास से होने वाले माल का एक्सपोर्ट विदेश तक आसानी से हो जाएगा। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत कस्टम का भी ऑफिस बनेगा। तीन चरणों में होगा काम एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुमेश बांझल ने बताया, 250 एकड़ में बन रहे पार्क का निर्माण 1100 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। तीन चरणों में काम होना है। जरूरत के हिसाब से वेयर हाउस, ऑफिस, कोल्ड स्टोरेज समेत पहले चरण में एक 5 स्टार होटल भी होगी। पहले चरण के निर्माण में 1100 करोड़ खर्च होंगे पहला चरण 1100 करोड़ रुपए का है। इसमें पीथमपुर के जामोदी में रेलवे यार्ड बनेगा। इसमें दो तरह की रेलवे की पटरियां बिछाई जाएंगी, जिससे बड़े-छोटे कंटेनर आसानी से ट्रेन में लोड हो सकें। रेलवे तक माल लाने और यहां से अंदर तक ले जाने के लिए बड़ा ट्रक पार्किंग एरिया बनेगा, जिसमें एक समय पर एक हजार ट्रक खड़े हो सकें। यहां पेट्रोल-डीजल पंप भी बनेगा और होटल आदि भी होगा। इंदौर से अब इंटरनेशनल एयर कार्गो सेवा की शुरुआत भी हो चुकी है। यह लॉजिस्टिक्स हब हवाई, सड़क और रेल तीनों माध्यमों को जोड़ते हुए इंदौर को एक इंटरनेशनल सप्लाई चेन नेटवर्क से जोड़ेगा। यह हब टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे उद्यमियों को न केवल तेज़ सप्लाई सिस्टम देगा, बल्कि निर्यात के नए रास्ते भी खोलेगा। लालवानी ने कहा यह लॉजिस्टिक्स पार्क सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं, रोजगार और विकास की नींव है। यह पार्क वेस्टर्न रिंग रोड और इंदौर-अहमदाबाद मार्ग से जुड़ेगा। दिल्ली-मुंबई नेशनल हाईवे से इसकी दूरी मात्र 150 किलोमीटर है। इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के सागौर रेलवे स्टेशन के पास इस पार्क का निर्माण तेजी से चल रहा है। गडकरी ने बताया कि इस परियोजना से क्षेत्र को कई फायदे होंगे। लॉजिस्टिक पार्क बनने के बाद परिवहन समय और लागत दोनों में कमी आएगी। साथ ही युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर, मध्य प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, इंदौर सांसद शंकर लालवानी और धार विधायक नीना विक्रम वर्मा मौजूद थे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 5 पुलिस थानों का बल तैनात किया गया था। धार कलेक्टर प्रियंक मिश्र, भाजपा जिला अध्यक्ष नीलेश भारती और नेशनल हाईवे अथॉरिटी के कई अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। भारत में अब तक कुल 35 मल्टी लॉजिस्टिक पार्क का निर्माण किया जा चुका है। 255 एकड़ भूमि पर इस पार्क का निर्माण चल रहा है।

भाजपा में जल्द ही बड़े बदलाव, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव प्रक्रिया 20 अप्रैल के बाद शुरू, प्रह्लाद जोशी इस दौड़ में सबसे आगे

नई दिल्ली  बीजेपी जल्द ही बड़े बदलाव के लिए तैयार है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 20 अप्रैल के बाद शुरू हो सकती है। इसको लेकर पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में भाजपा के शीर्ष स्तर पर काफी गहमागहमी देखी गई है। बुधवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर एक बड़ी बैठक हुई, जिसमें अमित शाह, राजनाथ सिंह और बी एल संतोष जैसे पार्टी और आरएसएस के बड़े नेता शामिल हुए। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में पार्टी के संगठन में बदलाव और नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर भी मंथन हुआ। पार्टी के भरोसेमंद सूत्र ने बताया है कि अभी मुख्य रूप से पांच नामों पर चर्चा चल रही है और हो सकता है कि इस बार कर्नाटक के किसी नेता को पार्टी की कमान सौंप दी जाए। लेकिन, इस सूत्र ने एक छठा नाम भी बताया है। बीजेपी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन? बीजेपी के एक विश्वस्त सूत्र ने  बताया है कि अभी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की रेस में सबसे आगे केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का नाम चल रहा है। इनके अलावा भी उन्होंने 4 और नाम बताए हैं। लेकिन, सबसे चौंकाने वाला नाम छठे नेता का है, जो अबतक इस चर्चा में पूरी तरह से गायब रहे हैं। यहां पर बीजेपी के सभी संभावित राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम और उन्हें यह जिम्मेदारी दिए जाने की संभावित वजह भी बताई जा रही है। 1) प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय मंत्री बीजेपी सूत्र का कहना है कि प्रह्लाद जोशी को पार्टी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है। कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद जोशी अभी मोदी सरकार में कंज्यूमर अफेयर्स, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन और रिन्यूएबल एनर्जी मंत्री हैं। प्रह्लाद जोशी आरएसएस से होते हुए भाजपा सरकार में इतने बड़े पद तक पहुंचे हैं। 2) बीएल संतोष, बीजेपी महासचिव (संगठन) बीएल संतोष भी कर्नाटक से आते हैं और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रचारक हैं। भारतीय जनता पार्टी में यह पद पार्टी संगठन और संघ के बीच कड़ी का काम करता है। बीएल संतोष 1993 से आरएसएस के प्रचारक हैं और पूरी तरह से संघ के कार्यों से जुड़े रहे हैं। जब हमने बीजेपी सूत्र से सवाल किया कि क्या पार्टी इस तरह से एक प्रचारक को सीधे अपने संगठन का जिम्मा सौंप सकती है? तो उन्होंने बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे के नाम का जिक्र किया, जिन्होंने आरएसएस से सीधे पार्टी संगठन का उत्तरदायित्व संभाला था। बीजेपी सूत्र ने यह भी दावा किया है कि अगर संतोष के नाम पर मुहर लगती है तो सुनील बंसल उनकी जगह महासचिव (संगठन) का जिम्मा संभाल सकते हैं। 3) सीटी रवि, बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी के एक बड़े नेता हैं। वे चिकमगलूर विधानसभा क्षेत्र से चार बार MLA रह चुके हैं। रवि अपनी आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाते हैं। वे कर्नाटक में भाजपा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। वह शुरुआत से ही आरएसएस से जुड़े रहे हैं और अभी कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य हैं। उनकी आक्रामक राजनीति की वजह से उनका भी नाम जेपी नड्डा की जगह भाजपा के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में लिया जा रहा है। 4) धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर काफी पहले से लिया जा रहा है। इसकी वजह है उनका आरएसएस वाला बैकग्राउंड और उनकी जबरदस्त संगठन क्षमता। वह पार्टी के बैकग्राउंड रणनीतिकारों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं और चुनावी समीकरण बिठाने में भी इनके कौशल की पार्टी में खूब सराहना होती है। अभी प्रधान ओडिशा के संबलपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 5) भूपेंद्र यादव, केंद्रीय मंत्री राजस्थान की अलवर लोकसभा सीट से संसद भूपेंद्र यादव अभी केंद्र में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय संभाल रहे हैं। भूपेंद्र यादव की तरह ही ये भी बीजेपी के धुरंधर रणनीतिकारों में शामिल रहे हैं और पार्टी के लिए चुनाव जितवाने वाली मशीन की तरह काम आते रहे हैं। संघ का बैकग्राउंड और बेहतरीन संगठन क्षमता की वजह से बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर इनका नाम भी काफी चर्चा में रहा है। मनोज सिन्हा का भी आ रहा है नाम भाजपा सूत्र ने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर जो सबसे चौंकाने वाला संभावित नाम बताया है, वह है जम्मू और कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा का। सूत्र ने दलील दी है कि प्रधानमंत्री मोदी की वजह से पार्टी चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जानी जाती है, ऐसे में मनोज सिन्हा भी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर सामने आ जाएं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। पार्टी सूत्र का यह भी कहना है कि जो भी अध्यक्ष होंगे, वे अपेक्षाकृत युवा चेहरा होंगे। 2020 से ही राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं नड्डा जेपी नड्डा जनवरी 2020 से ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनका कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ाया गया था, ताकि वे लोकसभा चुनाव तक काम कर सकें। बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव फरवरी 2025 तक ही हो जाना था, लेकिन हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली के चुनावों के कारण यह टल गया। फिर देशभर में संगठन चुनाव शुरू हो गए। बीजेपी में दो कार्यकाल से ज्यादा अध्यक्ष बनने की परंपरा नहीं है। लेकिन, नड्डा का एक ही कार्यकाल पूरा हुआ है, बाकि वह अतिरिक्त या कार्यकारी प्रभार संभालते रहे हैं।

ट्रेड वॉर: US की कंपनियां चीन से अपना बोरिया-बिस्तर समेटने के तैयारी में, भारत के लिए एक बड़ा अवसर

नई दिल्ली  दुनिया की दो सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देशों अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका ने चीनी माल पर 245% टैक्स लगा दिया है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी कंपनियों के लिए चीन में सामान बनाना फायदे का सौदा नहीं रह गया है और वे चीन में अपना बोरिया बिस्तार समेटने की तैयारी में हैं। भारत सरकार इसे एक बड़े मौके के रूप में देख रही है। सरकार चाहती है कि ये कंपनियां भारत में आकर अपना कारोबार करें। इससे भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स, खिलौने और दवाइयों जैसे सेक्टरों में फायदा होगा। इकनॉमिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक सरकार भारतीय कंपनियों को भी अमरीका में कारोबार बढ़ाने में मदद करना चाहती है। हाल ही में सरकार ने इंडस्ट्री के लोगों के साथ मीटिंग की थी। इस मीटिंग में अमरीका में कारोबार बढ़ाने के तरीकों पर बात हुई। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि भारत और अमरीका के बीच व्यापार समझौता होने की उम्मीद है। इस बारे में बातचीत जल्द ही शुरू होने वाली है। पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात होगी और फिर मई के मध्य से आमने-सामने मीटिंग होने की संभावना है। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री को इसमें एक बड़ा मौका दिख रहा है। अमरीका ने चीन से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स सामान पर ज्यादा टैक्स लगाया है। लेकिन भारत और 75 से ज्यादा देशों से आने वाले सामान पर टैक्स नहीं लगाया है। हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह जल्द ही इलेक्ट्रॉनिक्स सामान पर नया टैक्स लगाएंगे। चीन में बने आईफोन जैसे स्मार्टफोन पर अमरीका में 20% टैक्स लगता है। वहीं, भारत में बने सामान पर कोई टैक्स नहीं है। किससे है सबसे बड़ी चुनौती इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि सरकार को सावधानीपूर्वक योजना बनानी होगी ताकि अमरीका-चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सके। उनका कहना है कि अगर सही से योजना नहीं बनाई गई, तो वियतनाम इस मौके का सबसे ज्यादा फायदा उठा सकता है। वियतनाम अमरीका को सैमसंग के स्मार्टफोन और गैजेट्स का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है। उसके पास भारत से ज्यादा मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन है। वियतनाम का अमरीका के साथ व्यापार ज्यादा है। साथ ही वहां ज्यादातर चीनी कंपनियों ने निवेश किया है। इसलिए भारत के लिए भी मौके हो सकते हैं। प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के कारण देश में इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय के पास तीन पीएलआई स्कीम हैं। ये स्कीम स्मार्टफोन, लैपटॉप और सर्वर जैसे IT हार्डवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स के लिए हैं। अभी, डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) इस बारे में बातचीत कर रहा है। जल्द ही दूसरे मंत्रालय भी इसमें शामिल होंगे। इंडस्ट्री के एक जानकार ने बताया कि सरकार ने 10-12 सेक्टरों की पहचान की है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिसिन, केमिकल, ऑटोमोबाइल, खिलौने, एयर कंडीशनर और अप्लायंसेज शामिल हैं। इन सेक्टरों में भारत को फायदा हो सकता है। इंडस्ट्री की दिक्कत एक और सूत्र ने बताया कि सरकार ने साफ कर दिया है कि जॉइंट वेंचर और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एग्रीमेंट को ज्यादा महत्व दिया जाएगा क्योंकि भारत में इस तरह का सिस्टम बनाने की जरूरत है। इंडस्ट्री को बताया गया है कि सरकार भारत को मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाना चाहती है। साथ ही, दुनिया के व्यापार में ज्यादा हिस्सा हासिल करना चाहती है। इंडस्ट्री ने टैक्स, कस्टम और दूसरी दिक्कतों के बारे में बताया है। उसका कहना है कि इन दिक्कतों की वजह से लक्ष्य हासिल करने में परेशानी हो सकती है।  

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