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भारत के स्मार्टफोन मार्केट का 8% हिस्सा ऐपल का, 10 लाख नौकरियां सेमीकंडक्टर से

नई दिल्ली  आईफोन निर्माता कंपनी ऐपल आपदा में अवसर का फायदा उठाने की तैयारी में है। अमेरिका से चीन के ट्रेड वॉर को देखते हुए ऐपल भारत में आईफोन का प्रोडॅक्शन तेजी से बढ़ा रही है। अनुमान है कि मार्च 2025 में बीते 12 महीनों में भारत में करीब 22 बिलियन डॉलर यानी तकरीबन 1.90 लाख रुपए के आईफोन बनाए जा चुके हैं। यह पिछले साल की तुलना में 60% ज्यादा है। यह तब है जब ऐपल चीन से अपनी सप्लाई चेन को दूर ले जा रहा है और प्रोडॅक्शन में यह बढ़ोतरी उसी का नतीजा बताया जा रहा है। इसे लेकर चीन भी टेंशन में है, क्योंकि ऐसे में उसकी इस मामले में बादशाहत खत्म हो सकती है। जानते हैं पूरी कहानी। दुनिया में हर पांचवां आईफोन भारत में बना ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब दुनिया में बनने वाले हर पांच आईफोन में से एक भारत में बन रहा है। यह $22 बिलियन का आंकड़ा आईफोन की फैक्ट्री से निकलने वाली कीमत है। यह उसकी रिटेल बिक्री कीमत। इस उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा फॉक्सकॉन की दक्षिण भारत स्थित विशाल फैक्ट्री से आता है। टाटा ग्रुप जिसने विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन के ऑपरेशन्स को अपने नियंत्रण में ले लिया है वह ऐपल की भारत बेस्ड सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इन सबमें बड़ी भूमिका सेमीकंडक्टरों की है, जिसे लेकर अमेरिका और चीन के बीच बड़ी जंग छिड़ी हुई है। सेमीकंडक्टर क्या हैं, इसे समझते चलिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरूरी कंपानेंट्स में से एक अर्धचालक यानी सेमीकंडक्टर है, जिसे एकीकृत सर्किट (IC) भी कहा जाता है। सेमीकंडक्टर माइक्रोचिप्स आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, यातायात, स्वास्थ्य सेवा, सैन्य प्रणाली, संचार को सक्षम बनाते हैं। माइक्रोचिप्स इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए आवश्यक हैं: रेडियो, टीवी, कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन, वाहन और मेडिकल डायग्नोस्टिक उपकरण। माइक्रोचिप्स इतने महत्वपूर्ण हैं कि कुछ लोग उन्हें 21वीं सदी का ‘नया तेल’ भी कहते हैं। ऐपल आईफोन के लिए ये जरूरी चीज है। बीते साल Apple ने भारत में भी सेमीकंडक्टर चिप्स के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए चर्चा की है, जिससे भारत में भी चिप्स का निर्माण शुरू हो सके। ऐपल आईफोन के लिए 2026 मील का पत्थर ऐपल आईफोन के लिए सेमीकंडक्टर बनाने वाली प्रमुख कंपनी ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट के अनुसार, ऐपल को 2026 तक सेमीकंडक्टर चिप्स की बड़ी मात्रा में जरूरत होगी। तब तक आईफोन निर्माता अपनी वैश्विक विनिर्माण क्षमता का 26 प्रतिशत भारत में ट्रांसफर कर चुके होंगे। ऐपल की वर्तमान सेमीकंडक्टर खपत लगभग 72 बिलियन डॉलर है, क्योंकि इसके सभी हाई क्वालिटी प्रोडॅक्ट जैसे आईफोन, आईपैड, मैक, ऐपल वॉचेज और एयरपॉड्स सेमीकंडक्टर चिप्स का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में भारत की संभावना इस मामले में काफी बड़ी है। ट्रंप के टैरिफ को देखते हुए ऐपल ने बढ़ाया एक्सपोर्ट ऐपल ने पिछले वित्तीय वर्ष में भारत से 1.5 ट्रिलियन रुपए (लगभग $17.4 बिलियन) के आईफोन निर्यात किए। अमेरिका को होने वाले शिपमेंट में तब तेजी आई, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में ‘रेसिप्रोकल’ टैरिफ की घोषणा की। इसके बाद ऐपल ने भारत से निर्यात को तेजी से बढ़ाया। हालांकि, हाल ही में हुई घोषणा में स्मार्टफोन सहित इलेक्ट्रॉनिक्स को उन टैरिफ से छूट दी गई थी, लेकिन चीन पर लगने वाले बाकी टैक्स (कुल 245%) अभी भी लागू हैं। ट्रंप का चीन से आने वाले सामान पर 20% का अलग शुल्क, जिसका उद्देश्य फेंटानिल को लेकर बीजिंग पर दबाव डालना है, वह भी अभी जारी है। भारत में बने डिवाइस पर अमेरिका नहीं लगाता टैक्स ऐपल के लिए भारत एक अपेक्षाकृत सुरक्षित जगह है। भारत में बने डिवाइस पर अभी अमेरिका में कोई टैक्स नहीं लगता है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी अमेरिकी ग्राहकों के लिए अपनी भारतीय उत्पादन लाइनों पर ज़्यादा निर्भर करेगी। चीन को लेकर यह पेंच अभी तक बरकरार हालांकि एप्पल ने भारत में उत्पादन बढ़ाया है, लेकिन वह अभी भी चीन से काफ़ी जुड़ा हुआ है। कंपनी लगभग 200 सप्लायरों और दशकों से बने एक मजबूत सिस्टम पर निर्भर है। यहां तक कि ऐपल के CEO टिम कुक ने भी चीन की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को माना है। चीन से भारत मार्केट शिफ्ट में लगेगा बहुत वक्त ट्रंप अरसे से अमेरिका में आईफोन के प्रोडॅक्शन पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, ऐपल के लिए निकट भविष्य में ऐसा करना मुश्किल है। क्योंकि अमेरिका में उपयुक्त सुविधाएं और कुशल श्रमिक उपलब्ध नहीं हैं। ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के 2022 के एक आकलन में अनुमान लगाया गया था कि ऐपल के मैन्युफैक्चरिंग का सिर्फ 10% हिस्सा चीन से बाहर निकालने में आठ साल लगेंगे। इससे पता चलता है कि चीन का सप्लाई बेस कितना मजबूत है। क्या भारत बन पाएगा चीनी मार्केट का विकल्प भारत में लगातार ऐसा माहौल बनाने की कोशिश हो रही है कि वह आईफोन जैसे प्रोडक्ट का शानदार उत्पादन कर सकता है। ऐपल अब भारत में अपने सभी आईफोन मॉडल बनाता है, जिसमें प्रीमियम टाइटेनियम प्रो मॉडल भी शामिल हैं। दरअसल, नरेंद्र मोदी सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के लिए दिए जाने वाले $2.7 बिलियन के नए सब्सिडी का भी योगदान है। PLI स्कीम का मतलब है कि सरकार उत्पादन बढ़ाने पर कंपनियों को प्रोत्साहन देती है। भारत के स्मार्टफोन मार्केट का 8% हिस्सा ऐपल का पिछले वित्तीय वर्ष में भारत में ऐपल की बिक्री लगभग $8 बिलियन थी, जिसमें ज्यादातर आईफोन शामिल थे। हालांकि कंपनी के पास अभी भी भारत के स्मार्टफोन बाजार का सिर्फ 8% हिस्सा है। मगर, कंपनी अभी भारत को रिटेल डेस्टिनेशन के बजाय अपने ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग का बनाना चाहती है। माना जा सकता है कि कंपनी भारत में अपने बेहतर भविष्य की संभावनाओं की उम्मीद लगाए हुए है। ये उम्मीद है…10 लाख नौकरियां सेमीकंडक्टर से बीते साल नवंबर में आई एक रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 2026 तक भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र 10 लाख नौकरियां पैदा करेगा। टैलेंट सॉल्यूशंस कंपनी एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकि भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब बनने वाला है, लिहाजा यह उद्योग 2026 तक अनेक क्षेत्रों में 10 लाख नौकरियां देने के लिए तैयार है।चिप सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन में अनुमानित 3,00,000 नौकरियां, एटीएमपी में करीब 2,00,000 पद और चिप डिजाइन, … Read more

लॉकडाउन के चलते विवाह स्थगित, होटल संचालक ने एडवांस नहीं लौटाने पर आयोग ने नाराजगी जताई

रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने एक शिकायतकर्ता के होटल बुकिंग के पूरे पैसे वापस करने का आदेश दिया है। आयोग ने कहा कि Covid-19 लॉकडाउन एक आपदा थी। यह ऐसी परिस्थिति थी, जिस पर उपभोक्ता का कोई नियंत्रण नहीं था। इस फैसले के साथ, राज्य आयोग ने बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के आदेश के खिलाफ एक उपभोक्ता की अपील को स्वीकार कर लिया। पहले, जिला आयोग ने केवल 50,000 रुपये वापस करने का आदेश दिया था। यह एडवांस राशि का आधा हिस्सा था। भाई की शादी के लिए बुक किया था होटल दरअसल, पूरा मामला होटल इंटरसिटी इंटरनेशनल, बिलासपुर से जुड़ा है। विकास कुमार गुप्ता नाम के एक व्यक्ति ने अपने भाई की शादी के लिए 21-22 अप्रैल 2021 को होटल बुक किया था। कुल बुकिंग राशि 4,91,000 रुपये थी। इसके लिए 1,00,000 रुपये का एडवांस दिया गया था, लेकिन Covid-19 महामारी के कारण सरकार ने लॉकडाउन लगा दिया। इस वजह से शादी तय तारीखों पर नहीं हो सकी। शादी की तारीख बदलने की कोशिश की गई, लेकिन होटल ने बुकिंग को मानने या एडवांस वापस करने से इनकार कर दिया। जिला आयोग ने सुनाया था फैसला जिला आयोग ने जून 2024 के अपने आदेश में माना कि लॉकडाउन एक अप्रत्याशित घटना थी। लेकिन, उन्होंने केवल 50% रिफंड की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि होटल प्रशासनिक शुल्क के रूप में कुछ राशि रखने का हकदार है। हालांकि, राज्य आयोग ने कहा कि जिला आयोग का 50% कटौती करने का तर्क सही नहीं है। आयोग ने कहा कि कलेक्टर ने 14 अप्रैल से 6 मई, 2021 तक पूरे बिलासपुर जिले को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया था। इसका मतलब है कि शादी की तारीखों के दौरान भी जिले में पाबंदी थी। आयोग ने जोर देकर कहा कि सरकारी पाबंदियों को देखते हुए, होटल उस दौरान कोई भी कार्यक्रम नहीं कर सकता था। इसलिए, होटल को नुकसान होने की संभावना नहीं है, जैसा कि उन्होंने दावा किया था। राज्य आयोग के अध्यक्ष जस्टिस गौतम चौरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की बेंच ने कहा, “लॉकडाउन की अवधि के दौरान, प्रतिवादी न तो व्यवस्था कर सकता था और न ही अन्य बुकिंग ले सकता था। प्रशासनिक शुल्क के नाम पर 50% की कटौती सही नहीं है। पूरा रिफंड देना ही न्यायसंगत है।” जिला आयोग के आदेश को बदला इसलिए, राज्य आयोग ने जिला आयोग के आदेश को बदल दिया। उन्होंने होटल को शिकायतकर्ता को 1,00,000 रुपये की पूरी एडवांस राशि वापस करने का आदेश दिया। मानसिक पीड़ा (5,000 रुपये) और मुकदमेबाजी के खर्च (2,000 रुपये) के लिए मुआवजे के पहले के आदेश को बरकरार रखा गया। यह पैसा 45 दिनों के भीतर देना होगा।  

जल संकट से जूझ रहे उफरी गांव में पीएम जनमन योजना के साथ जल जीवन मिशन का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया

भोपाल डिंडोरी जिले के करंजिया ब्लॉक का उफरी गांव, जहां कभी जल संकट विकराल रूप ले लेता था, अब स्वच्छ पेयजल की सुविधा से आत्मनिर्भर हो चुका है। यह वही गांव है, जहां पानी की एक-एक बूंद के लिए ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जहां महिलाओं और बच्चों का बड़ा हिस्सा अपने दिन का अधिकांश समय पानी की व्यवस्था करने में ही गंवा देता था। अब यह सब बीते समय की बात हो गई है। गांव के बुजुर्ग गंगाराम बैगा बताते हैं, “गर्मियों में पानी की इतनी दिक्कत थी कि कई बार हमें रात में भी पानी भरने जाना पड़ता था। कई बार तो ऐसा हुआ कि झिरियों से गंदा पानी पीने के कारण गांव के कई लोग बीमार पड़ गए। हमें कभी उम्मीद नहीं थी कि हमारे गांव में भी नल से पानी मिलेगा। अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। यह हमारे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।” पीएम जनमन योजना बनी संजीवनी जल संकट से जूझ रहे इस गांव में पीएम जनमन योजना के साथ जल जीवन मिशन का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा यहां एक बड़ी पेयजल टंकी का निर्माण कराया गया, जिससे पाइपलाइन के माध्यम से हर घर तक पानी पहुंचाया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जनजातीय परिवारों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, ताकि उन्हें जल संकट से मुक्ति मिल सके। गांव की महिला श्रीमती सुकली बाई कहती हैं, “पहले हमें रोज सुबह जल्दी उठकर पानी के लिए निकलना पड़ता था। कई बार रात में भी पानी भरना पड़ता था, क्योंकि सुबह भीड़ अधिक होती थी। हमारी पूरी दिनचर्या पानी पर निर्भर थी, खेती-किसानी और बच्चों की देखभाल भी पीछे छूट जाती थी। अब हमें यह चिंता नहीं रहती, अब समय बचता है और हम अन्य कामों पर ध्यान दे सकते हैं।” नल से जल, 110 परिवारों के जीवन में बदलाव लगभग 530 जनसंख्या वाले उफरी गांव में जल जीवन मिशन के तहत 110 परिवारों को घर-घर नल कनेक्शन दिए गए। अब ग्रामीणों को पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध है, जिससे कई समस्याएं हल हो गई हैं। सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अब बीमारियों का खतरा कम हो गया है। पहले दूषित पानी पीने के कारण गांव में डायरिया, पीलिया जैसी बीमारियां आम थीं, लेकिन अब स्वास्थ्य केंद्र में ऐसे मामलों में काफी कमी आई है। गांव के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि उनके जीवन को सरल और सुखद बनाने वाली क्रांतिकारी पहल है। ग्रामीणों ने इस बदलाव को हृदय से स्वीकार किया है और प्रधानमंत्री जनमन योजना को विकास का वह स्रोत माना है, जिसने उफरी को नई पहचान दी है। पानी की हर बूंद के साथ अब यहां विकास की नई लहर बह रही है। विकास की ओर बढ़ता उफरी अब गांव में महिलाएं पानी भरने की चिंता से मुक्त होकर अपने घर-परिवार और आजीविका पर ध्यान दे सकती हैं। बच्चे बिना किसी रुकावट के स्कूल जा रहे हैं, और सबसे बड़ी राहत यह है कि गंदे पानी से होने वाली बीमारियों का डर अब नहीं सताता। गांव के कई परिवार अब आजीविका के नए साधनों की ओर बढ़ रहे हैं। पीएम जनमन योजना जल जीवन मिशन से हुए इस सकारात्मक बदलाव से पूरा गांव उत्साहित है। ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री मोदी और सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है और कहा है कि यह योजना उनके लिए केवल जल उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं है, बल्कि उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। अब उफरी गांव विकास की एक नई राह पर आगे बढ़ रहा है, जहां हर घर जल है और हर घर खुशहाली की ओर अग्रसर है।  

सरकार के इस कदम से प्रदेश के 16,000 स्कूलों को लाभ मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने 25 हजार रुपए से कम वार्षिक फीस वाले निजी स्कूलों को बड़ी राहत दी है। अब इन स्कूलों को फीस संबंधी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी। इस निर्णय से लगभग 16,000 स्कूलों को लाभ मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और फीस बढ़ोतरी पारदर्शिता के साथ हो। सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में निजी स्कूलों को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि जिन निजी विद्यालयों की किसी भी कक्षा में वार्षिक फीस 25 हजार रुपए या उससे कम है, उन्हें विभाग के पोर्टल पर फीस संबंधी जानकारी अपलोड करना अनिवार्य नहीं होगा। इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 16,000 स्कूलों को राहत मिलेगी।राज्य में कुल 34,652 निजी स्कूल हैं, जिनमें से लगभग 18,000 स्कूलों की वार्षिक फीस 25 हजार रुपए से अधिक है। इन विद्यालयों को अब 15 मई तक पोर्टल पर कक्षा और संवर्गवार फीस संरचना की जानकारी अपलोड करनी होगी। शुरुआत में यह अंतिम तिथि 31 मार्च तय की गई थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इसे बढ़ाया गया है। यह नियम मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम-2020 के तहत लागू किया गया है, जो 31 जनवरी 2025 से प्रभावी हुआ है। 10% तक फीस बढ़ाने की छूट, लेकिन शर्तों के साथ शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कोई भी विद्यालय सालाना 10% तक फीस वृद्धि बिना अनुमति कर सकता है। लेकिन इससे अधिक फीस वृद्धि के लिए संबंधित जिला समिति से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और फीस बढ़ोतरी पारदर्शिता के साथ हो। राज्य और जिला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन फीस संबंधी मामलों की निगरानी और शिकायतों के निवारण के लिए राज्य और जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां यह सुनिश्चित करेंगी कि सभी विद्यालय निर्धारित नियमों के अनुसार ही फीस निर्धारित करें और किसी भी प्रकार की मनमानी न हो। सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।  

इंदौर शहर के मुख्य मार्ग पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लग्जरी एसी इलेक्ट्रिक बस चलाई जाएंगी, नौ बस डिपो होंगे अपडेट

इंदौर  एबी रोड पर 12 वर्ष पहले बनाए गए 11.5 किमी लंबे बीआरटीएस कॉरिडोर को तोड़कर रोड साइड 40 बस स्टाप बनाए जाएंगे। इसके साथ ही एआईसीटीएसएल (अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड) अब धीरे-धीरे कॉरिडोर से बनी सेवाएं भी बंद करने जा रही है, जिसकी शुरुआत सीएनजी आई-बसों को बंद करने के साथ हो चुकी है। गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में निर्णय लिया गया कि जल्द ही टेंडर अवार्ड होते ही कॉरिडोर को तोड़ने का काम भी शुरू हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी को हाई कोर्ट ने बीआरटीएस को तोड़ने की अनुमति दे दी थी। आदेश के बाद शिवाजी वाटिका से जीपीओ चौराहे के बीच रेलिंग भी हटा दी गई थी। बीआरटीएस पर बने बस स्टाप बंद हो जाएंगे एआईसीटीएसएल अब बीआरटीएस पर सीसीटीवी कैमरों, आटोमैटिक डोर के संचालन व रखरखाव संबंधी कार्य, ट्रैफिक सिग्नल मेंटेनेंस, आई-बस स्टाप, रेलिंग, लॉलीपाप, यूनिपोल, स्ट्रीट लाइट पोल पर कियोस्क के माध्यम से विज्ञापन का काम कर रही एजेंसी को नोटिस जारी कर बंद किया जा रहा है। आगामी माह से बस स्टाप पर तमाम सुविधाएं बंद हो जाएंगी। वर्तमान में बीआरटीएस पर बने 20 मीडियन बस स्टाप को हटाकर एबी रोड पर दोनों 20-20 बस स्टाप बनाए जाने हैं, जिसके लिए टेंडर जारी किया जाएगा। इसके साथ ही एआईसीटीएसएल अपनी आय बढ़ाने के लिए एबी रोड के इस हिस्से में विज्ञापन योजना बनाएगा। मुख्य रूट पर दौड़ेगी लग्जरी एसी ई-बस बैठक तय किया गया कि शहर के मुख्य मार्ग पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लग्जरी एसी इलेक्ट्रिक बस चलाई जाएंगी। इसके लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही शहर में बने नौ बस डिपो को अपडेट करने के लिए नगर निगम और आईडीए से फंड लेकर काम किया जाएगा। सिटी बस के रूट रेशनलाइजेशन कर बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। बैठक में एआईसीटीएसएल सीईओ दिव्यांक सिंह सहित अन्य अफसर मौजूद थे।

प्रदेश में अब सरकारी स्कूलों के टीचर्स की अटेंडेंस चेहरा दिखाकर लगेगी

भोपाल  अब सरकारी स्कूलों से शिक्षक गायब नहीं रह पाएंगे। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने नई पहल की है। प्रदेश के करीब चार लाख शिक्षकों की उपस्थिति सार्थक एप के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज होगी। यह एप शिक्षकों की लोकेशन दर्ज करेगा साथ ही आनलाइन चेहरा दिखाई देने पर ही उपस्थिति लगेगी। गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलेंगे तो जुलाई से शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य कर दी जाएगी।     प्रदेश के 99,145 स्कूलों में से केवल 8,051 स्कूलों में ही शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति एम शिक्षा मित्र एप से दर्ज की जा रही है यानी 91,094 स्कूलों में इसका उपयोग ही नहीं हो रहा है।     जबकि यह व्यवस्था अनिवार्य की गई थी। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सवाल खड़े होते रहते हैं।     स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी इस बात को कई बार स्वीकार कर चुके हैं कि प्रदेश में कुछ जिलों में शिक्षक स्कूल नहीं जाते हैं।     उनके स्थान पर दूसरे लोग पढ़ाने जाते हैं। वहीं कुछ शिक्षक स्कूलों के निर्धारित समय पर नहीं पहुंचते हैं।     तीन बार व्यवस्था बनाई गई लेकिन फेल हो गई।     स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से वर्ष 2017, वर्ष 2020 और वर्ष 2022 में प्रयास किया।     ऑनलाइन उपस्थिति एम शिक्षा मित्र एप के जरिए शुरू की गई थी।     लेकिन शिक्षकों ने इस प्रक्रिया का विरोध किया।     कभी स्मार्ट फोन न होने तो कभी नेटवर्क न मिलने का बहाना बनाया गया।     ऑनलाइन उपस्थिति से कन्नी काटी जाती रही।     कई कारणों से यह प्रक्रिया ठीक से लागू नहीं हो पाई। नए एप में गड़बड़ियों को किया गया दूर     एम शिक्षा मित्र एप से उपस्थिति लगानी अनिवार्य की गई थी लेकिन इसके माध्यम से नेटवर्क मिलने पर ही उपस्थिति लगती थी।     इसमें लोकेशन व चेहरा पहचान कर उपस्थिति लगाने का विकल्प नहीं होने से बहुत गड़बड़ियां होती थीं। सार्थक एप में इन्हें दूर कर लिया गया है। अवकाश के लिए भी कर सकेंगे आवेदन     सार्थक एप की नई व्यवस्था में कर्मचारी व शिक्षक छुट्टी के लिए भी आवेदन कर सकेंगे और शासन से किसी भी प्रकार का कार्यालयीन पत्राचार इस एप से हो जाएगा।     दरअसल, सार्थक एप मध्य प्रदेश सरकार के पोर्टल से जुड़ा नवीनतम मोबाइल एप्लीकेशन है।     सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों की सार्थक एप के माध्यम से आनलाइन उपस्थिति दर्ज की जाएगी। इस बार इसे बेहतर तरीके से लागू किया जाएगा। जुलाई से यह अनिवार्य कर दिया जाएगा।     – उदय प्रताप सिंह, मंत्री, स्कूल शिक्षा विभाग  

चीतों के लिए नया घर तैयार:गांधीसागर अभयारण्य में चीतों के लिए बड़े बाड़े तैयार, जन्मे दो नर चीतों को 20 अप्रैल को किया जाएगा रिलीज

भोपाल  मध्य प्रदेश में चीतों का दूसरा घर यानी गांधी सागर अभयारण्य जल्द ही चीतों से आबाद होने जा रहा है। यहां चीतों को बसाने की तारीख तय हो गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि 20 अप्रैल को गांधी सागर अभ्यारण्य में 2 चीतों को कूनो से यहां शिफ्ट किया जाएगा।  कूनो नेशनल पार्क के बाद अब गांधी सागर अभयारण्य चीतों का दूसरा रहवास स्थल हो जाएगा। बताया जा रहा है कि चीतों की शिफ्टिंग के लिए चीता स्टीयरिंग कमेटी ने अपनी हरी झंडी दे दी है। इस संबंध में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और केन्द्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव के बीच आज गुरुवार को होने वाली बैठक के बाद शिफ्टिंग की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। मध्यप्रदेश के कूनो में इस समय कुल 26 चीते हैं। इनमें 12 वयस्क और 14 शावक शामिल हैं। इनमें से 6 वयस्क और 11 शावक, यानी कुल 17 चीते, कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। वन विभाग ने शुरू कर दी तैयारी अफ्रीका, केन्या के प्रतिनिधिमंडलों और केंद्र सरकार की सात सदस्यीय हाइपावर कमेटी के निरीक्षण के बाद आखिरकार तय हो गया कि भारत की धरती पर जन्म लेने वाले चीतों से ही गांधीसागर आबाद होना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की हां होते ही वन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। दो नर चीतों को लाया जा रहा है फिलहाल यहां कूनो नेशनल पार्क में जन्मे लेने वाले दो नर चीतों को लाया जा रहा है। उन्हें 20 अप्रैल को यहां छोड़ा जाएगा। इसकी तैयारी गांधीसागर अभयारण्य में काफी समय पहले से चल रही थी। मंदसौर के डीएफओ संजय रायखेरे ने बताया कि 6400 हेक्टेयर में चीतों के लिए बड़े बाड़े बनकर तैयार हैं। इनमें आठ क्वारंटाइन बाड़े भी हैं। शुरुआत में चीतों को क्वारंटीन बाड़ों में रखा जाएगा। गांधीसागर अभयारण्य को अनुकूल बताया था बता दें कि केंद्र सरकार की सात सदस्यीय हाइपावर कमेटी ने निरीक्षण के बाद दिल्ली में वन मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में गांधीसागर अभयारण्य को चीतों के लिए पूरी तरह से अनुकूल बताया था, तो केंद्र सरकार ने यहां कूनो से ही चीते भेजने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों ने बाड़े, क्वारंटाइन बाड़ों, हाइमास्ट कैमरा, जलस्रोत मानीटरिंग के लिए बनाए गए स्थल और उपचार केंद्र सहित सभी तैयारी देखी हैं। बड़े जानवरों का शिकार नहीं कर सकता चीता चीता बड़े जंगली जानवरों का शिकार नहीं कर सकता है। ऐसे में गांधी सागर अभयारण्य क्षेत्र में 1250 चीतल और हिरणों को चीतों के भोजन के लिए छोड़ने का लक्ष्य है। अभी तक करीब 472 हिरण-चीतल छोड़े गए हैं। भोपाल के वन विहार, नरसिंहगढ़ सेंचुरी और कान्हा टाइगर सफारी आदि स्थानों से हिरण व चीतल को पकड़कर यहां छोड़े जा रहे हैं।  

महू तहसील के 18 गांव से होकर गुजरेगी इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन, 30 लाख आबादी का रेल सेवाओं से सीधा संपर्क होगा

 इंदौर इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना के लिए इस बार बजट में 267.50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस राशि से प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। मप्र के तीन जिलों के 77 गांव से होकर रेल लाइन गुजरेगी। नवंबर-2024 में रेल मंत्रालय ने इन 77 गांव की जमीन अधिग्रहण करने के लिए गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया था। इसके बाद इसी वर्ष मंत्रालय ने इंदौर जिले की महू तहसील के 18 गांवों की सूची जारी की थी। यह नई रेल लाइन से धार(Dhar), खरगोन(Khargone) और बड़वानी(Barwani) जिलों के आदिवासी अंचल के लिहाज से महत्वपूर्ण है। परियोजना से लगभग एक हजार गांव और 30 लाख आबादी का रेल सेवाओं से सीधा संपर्क होगा। अनुमान के मुताबिक प्रोजेक्ट पूरा होने पर 16 जोड़ी से ज्यादा पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होगा, जिनमें 50 लाख यात्री शुरुआती वर्षों में सफर करेंगे। हर साल इस प्रोजेक्ट से रेलवे को 900 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलेगा। इंदौर से मुंबई की दूरी भी 830 किमी से घटकर 568 किमी रह जाएगी। इन गांवों में जमीन का अधिग्रहण होना है अफसरों के अनुसार रेल मंत्रालय द्वारा 14 जनवरी को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार महू तहसील के खेड़ी, चैनपुरा, कमदपुर, खुदालपुरा, कुराड़ाखेड़ी, अहिल्यापुर, नांदेड़, जामली, कैलोद, बेरछा, गवली पलासिया, आशापुरा, मलेंडी, कोदरिया, बोरखेड़ी, चौरड़िया, न्यू गुराडिया, और महू केंटोमेंट एरिया की चिह्नित जमीन का रेल प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहण होना है। प्रोजेक्ट के लिए राशि आवंटित होने के बाद अब जमीनी स्तर पर काम शुरू होगा। 568 किमी. रह जाएगी इंदौर-मनमाड़ की दूरी इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन प्रोजेक्ट महू से धार होते हुए धरमपुरी, ठीकरी, राजपुर, सेंधवा, सिरपुर, शिखंडी, धुले, मालेगांव होकर मनमाड़ पहुंचेगी। पूरी परियोजना में 30 नए रेलवे स्टेशन भी बनाए जाएंगे। इसके पूरा होने के बाद इंदौर और मुंबई की दूरी 568 किमी रह जाएगी। इस परियोजना में मप्र के तीन जिलों के 77 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। जिनमे बड़वानी जिले के 39, धार जिले के 28 और खरगोन जिले के 10 गांव शामिल हैं। आगामी पांच साल में इस प्रोजेक्ट को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इन गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित धार जिला– राती तलाई, सेवरी माल, सराय तालाब, आंवलिया, चुंडीपुरा बीके, बियाघाटी, आंवलीपुरा, जामदा, झाड़ीबड़ोदा, जलवाय, नागझीरी, लुन्हेराखुर्द, सुंद्रेल, पटलावद, भीखरोन, पंधानिया, ग्यासपुर खेड़ी, एकलारा खुर्द, एकलारा, दुधी, भोंदल, चिकटयावड़, सिरसोदिया, दुंगी, कोठिदा, चौकी, भारूडपुरा बीके और भारूड़पुरा। बड़वानी जिला– सोलवान, मालवान, मालवान बीके, भामन्या, बावदड़, अजनगांव, अजनगांव बीके, नवलपुरा, बनिहार, गोई, कलालदा, जामली, सालीकलां, नांदेड़, मातमुर, बालसमुद, ओजर, सांगवी नीम, देवला, जुलवानिया रोड, निहाली, छोटी खरगोन, वासवी, कुसमारी, मुंडला, रेलवा बुजुर्ग, बंजारी, खजूरी, बघाड़ी, घाटी, अजंदी, हसनखेड़ी, सिकंदर खेड़ी, सेगवाल, उमरदा, शेरपुरा, जरवाह और जरवाह बीके। खरगोन जिला– जारोली, औरंगपुरा, नागंवा, कोठड़ा, ज्ञानपुरा, मोहिदा, मक्सी, भेडल्याबाड़ा, नीमगढ़ और कुसुम्भ्या।

मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ‘एक्सेसिबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट’ प्रोजेक्ट पर काम कर रहा, मिलेंगी ये खास सुविधाएं

भोपाल 18 अप्रैल 2025 को पूरी दुनिया में विश्व धरोहर दिवस मनाया . भारत हमेशा से ही पूरी दुनिया में धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का गढ़ रहा है. लेकिन, Madhya Pradesh में प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहरें, संस्कृति और गौरवशाली परंपराएं हमेशा से ही दुनिया भर के Tourists को आकर्षित करती रही हैं. प्रदेश के ये स्थल न केवल मन को सुकून देते हैं, बल्कि मानव सभ्यता, कला, कौशल से आज की पीढ़ी को अवगत कराते हैं. प्रदेश की इन धरोहरों तक प्रत्येक व्यक्ति की पहुंच को सुलभ बनाने के उद्देश्य से MP Tourism Board एक्सेसिबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट परियोजना पर काम कर रहा है, जिसके तहत महेश्वर, मांडू, धार व ओरछा में रैंप, ब्रेल साइन बोर्ड, व्हीलचेयर, आदि सुविधाओं से दिव्यांगों की पहुंच आसान व सुलभ बनाई जाएगी. दिव्यांगों के लिए खास सुविधा प्रमुख सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग और प्रबंध संचालक एमपी टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्‍ला ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश के अधिक से अधिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की स्थायी सूची में शामिल कराने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. ऐतिहासिक धरोहरों के सुलभता से दर्शन के अभिलाषी दिव्यांगों के लिए टूरिज्म बोर्ड पर्यटन स्थलों का कायाकल्प करेगा. बोर्ड प्रारंभिक तौर पर महेश्वर, मांडू, धार और ओरछा में एक्सेसिबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट परियोजना पर कार्य कर रहा है. इन स्थानों पर मिलेंगी विशेष सुविधाएं       महेश्वर : महेश्वर में मध्य प्रदेश टूरिज्म नर्मदा रिसॉर्ट, राम कुंड, देवी संग्रहालय, कालेश्वर मंदिर, जलेश्वर मंदिर और कमानी गेट पर  विभिन्न विकास कार्य किए जाएंगे.     मांडू : मांडू में मध्य प्रदेश टूरिज्म रिसॉर्ट, सात कोठरी मंदिर, दिल्ली दरवाजा, मालवा रिसॉर्ट, मलिक दीनार मस्जिद, धर्मशाला, होशंगशाह का मकबरा, जामी मस्जिद, अशरफी महल, नीलकंठ मंदिर, दरिया खान का मकबरा, दाई का महल, लाल महल, संग्रहालय, ईको–पॉइंट, बाज बहादुर और रूपमति पेवेलियन में दिव्यांगों की सुविधा के दृष्टिगत कायाकल्प किया जाएगा.       धार : धार में “बाघ की गुफाओं” के अंतर्गत अलग–अलग गुफाओं और बाघ संग्रहालय में  निर्माण कार्य किए जाएंगे.         ओरछा : ओरछा में राजा महल, तमिरत की कोठी, जहांगीर महल, तीन दासियों की छतरी, पंचमुखी महादेव मंदिर और राय प्रवीण महल में  दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी. प्रदेश के 18 स्थल यूनेस्को सूची में एमपी में यूनेस्को द्वारा घोषित 18 धरोहरों है, जिसमें तीन स्थाई और 15 टेंटेटिव सूची में है. यूनेस्को की स्थायी विश्व धरोहर स्थल की सूची में प्रदेश के खजुराहो के मंदिर समूह, भीमबेटका की गुफाएं एवं सांची स्तूप शामिल हैं. गौरतलब है कि यूनेस्को ने इस वर्ष प्रदेश की चार ऐतिहासिक धरोहरों को सीरियल नॉमिनेशन के तहत टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया है. सम्राट अशोक के शिलालेख, चौंसठ योगिनी मंदिर, गुप्तकालीन मंदिर और बुंदेला शासकों के महल और किले को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में घोषित होना प्रमाणित करता है कि एमपी अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश में विशेष स्थान रखता है. ग्वालियर किला, बुरहानपुर का खूनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, मंडला स्थित रामनगर के गोंड स्मारक और धमनार का ऐतिहासिक समूह, मांडू में स्मारकों का समूह, ओरछा का ऐतिहासिक समूह, नर्मदा घाटी में भेड़ाघाट-लमेटाघाट, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और चंदेरी भी टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हैं. मौर्य कालीन अशोक के शिलालेख मौर्य कालीन शासक सम्राट अशोक को भला कौन नहीं जानता, जिन्होंने न केवल बौद्ध धर्म का प्रचार किया बल्कि कुशल शासन और नैतिकता का संदेश भी दिया. यही संदेश प्रदेश के शिलालेखों में नजर आते हैं. इन शिला और स्तंभ लेखों में सम्राट अशोक से संबंधित संदेश 2200 से अधिक वर्षों से संरक्षित हैं. सांची स्तंभ अभिलेख, जबलपुर में रूपनाथ लघु शिलालेख, दतिया में गुज्जरा लघु शिलालेख और सीहोर में पानगुरारिया लघु शिलालेख को इसमें शामिल किया गया है. चौंसठ योगिनी मंदिर हिन्दू धर्म में मां जगतजननी को सुख और समृद्धि दायिनी माना जाता है. हजारों वर्षों से धर्म स्थलों में मां की प्रतिमा को स्थापित कर श्रद्धालु उनके प्रति आस्था भाव से पूजन–अर्चन करते आए हैं. माता की आराधना का ऐसे ही स्थल हैं चौंसठ योगिनी मंदिर. 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच निर्मित यह मंदिर तांत्रिक परंपराओं का प्रतीक है. इन मंदिरों की गोलाकार, खुले आकाश के नीचे बनी संरचनाएं, जटिल शिल्पकला और आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय हैं. इसमें खजुराहो, मितावली (मुरैना), जबलपुर, बदोह (जबलपुर), हिंगलाजगढ़ (मंदसौर), शहडोल और नरेसर (मुरैना) के चौसठ योगिनी मंदिर को शामिल किया गया है. गुप्तकालीन मंदिर प्रदेश में सांची, उदयगिरि (विदिशा), नचना (पन्ना), तिगवा (कटनी), भूमरा (सतना), सकोर (दमोह), देवरी (सागर) और पवाया (ग्वालियर) में स्थित गुप्तकालीन मंदिर को यूनेस्को द्वारा शामिल किया गया है. गुप्तकालीन मंदिर भारतीय मंदिर वास्तुकला में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाते हैं. मंदिर उत्कृष्ट नक्काशी, शिखर शैली और कलात्मक सौंदर्य को प्रदर्शित करते हैं. बुंदेला काल के किला-महल बुंदेला काल के गढ़कुंडार किला, राजा महल, जहांगीर महल, दतिया महल और धुबेला महल, राजपूत और मुगल स्थापत्य कला के बेहतरीन संगम को दर्शाते हैं. ये महल बुंदेला शिल्पकला, सैन्य कुशलता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की अद्भुत मिसाल हैं

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