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मई के पहले सप्ताह में सर्वदलीय बैठकफिर तय होगा विधानसभा में कार्यवाही का लाइव प्रसारण का फैसला

 भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा में कार्यवाही का लाइव प्रसारण का फैसला सर्वदलीय बैठक के बाद होगा। मई के पहले सप्ताह में सर्वदलीय बैठक हो सकती है। इधर विधानसभा के मानसून सत्र से सदन की कार्यवाही लाइव हो सकती है। इसी कड़ी में जहां सदन में केवल बिछाने का काम शुरू हो गया है वहीं राष्ट्रीय सूचना केंद्र विधायकों के लिए लैपटॉप खरीद रहे है। देश के 13 प्रदेशों के 14 सदनों में केंद्र सरकार की विधान परियोजना लागू हो चुकी है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सर्वदलीय बैठक में फैसला लेंगे। मध्य प्रदेश के लिए 19 करोड़ 36 लाख रुपए की परियोजना के कामों का अनुमोदन मिल चुका है। बता दें कि विधानसभा के लाइव प्रसारण को लेकर कांग्रेस हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी है। कांग्रेस विधायक सचिन यादव और प्रताप सिंह ग्रेवाल की याचिका पर हाईकोर्ट सरकार को नोटिस भेज चुकी है। इंदौर हाईकोर्ट बेंच ने नोटिस भेजकर सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। ई विधानसभा में कार्यवाही को लेकर तैयारियां जारी है। ई विधानसभा को लेकर विधानसभा की टीम (हिमाचल समिति) तीन राज्यों का कर दौरा चुकी है। विधायकों के लिए लैपटॉप खरीदने का टेंडर जल्द जारी होगा।

अब 87 स्कूलों का भविष्य कलेक्टर के हाथ में, डीपीसी स्तर पर स्कूलों की मान्यता को रद्द

भोपाल आवश्यक दस्तावेजों की कमी, भवन, मैदान का अभाव, शिक्षकों की कमी और योग्यता की कमी, छात्रों की जानकारी ऑनलाइन अपडेट नहीं, फायर सेफ्टी जैसे मान्यता के मुख्य मापदंड पर जिले के कई निजी स्कूल खरे नहीं उतरे हैं। इसके चलते बीआरसी के बाद डीपीसी स्तर पर भी 87 स्कूलों की मान्यता को रद्द कर दिया गया है। अब ये स्कूल कलेक्टर को मान्यता के लिए आवेदन देंगे। 671 स्कूलों का आया था आवेदन धार जिले में 671 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन दिए थे जिसका बीआरसी ने 31 मार्च तक निरीक्षण किया था। जिन स्कूलों में कमियां मिली थी उनकी मान्यता रद्द करने को लेकर बीआरसी ने अनुशंसा की थी। इसके बाद डीपीसी स्तर पर मान्यता के मापदंडों को परखा गया, लेकिन उसमें स्कूलों में कमियां मिली। जिस पर डीपीसी स्तर पर भी स्कूलों की मान्यता रद्द हो गई है। आधार सेंटरों की कमी के चलते भी प्रगति नहीं जिले में एक क्लिक पर विद्यार्थियों की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने के मकसद से 12 अंकों का अपार आइडी (Apaar ID) बनाया जा रहा है। इसमें विद्यार्थियों की संपूर्ण जानकारी होगी, लेकिन अपार में आधार अपडेशन को लेकर दिक्कतें आ रही है। कई बच्चों के आधार अपडेट नहीं हो रहे हैं, ऐसे में उनकी अपार आइडी नहीं बन रही हैं, क्योंकि शहर में सेंटरों में आधार सेंटरों की संख्या भी कम हैं। विभाग भी उदासीनता बरत रहा है, इससे लक्ष्य पूर्ति नहीं हो पा रही है। टाइम लाइन बेअसर कई बार टाइम लाइन दी गई, लेकिन लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। पहले दिसंबर 2025 तक सभी के अपार आइडी बनाए जाने थे, लेकिन कार्य पूरा नहीं हुआ तो 31 मार्च की टाइम लाइन तय की गई। अब अप्रैल तक कार्य पूरा करने की प्लानिंग की गई है। हालांकि अब कम प्रगति को देखकर शिक्षक भी मदद कर आधार अपडेट आइडी में बनाने में मार्गदर्शन करेंगे। जिले में अब तक सिर्फ प्रतिशत विद्यार्थियों की ही आइडी बनी है। जिले में 3 लाख 27 हजार 421 आइडी बनना है, लेकिन अब तक 2 लाख 6 हजार 734 बनाई जा सकी है। आइडी बनाने का कार्य स्कूलों को दिया गया है, जो यू डाइस प्लस पोर्टल के जरिए बनाई जा रही है। हालांकि दो दिन से तकनीकी दिक्कतों से चलते पोर्टल में खुल नहीं रहा हैं। मुख्य रूप से ये दिक्कतें…     स्कूल और आधार में दर्ज नार्मो में अंतर आ रहा है     स्कूल में दर्ज जन्म तारीख और आधार में लिखी जन्म तिथि में अंतर     कई स्टूडेंट के आधार अपडेट नहीं हैं     शहर में आधार अपडेट करवाने के लिए सेंटरों की कमी इसलिए आ रही दिक्कतें अपार आइडी यू-डाइस प्लस पोर्टल के डाटा के आधार पर बन रहा है। पोर्टल और आधार कार्ड की जानकारी के डालने के बाद आईडी बनता है, लेकिन पोर्टल और आधार कार्ड की जानकारी में अड़चन आने से आइडी जनरेट नहीं हो रही है, जैसे स्टूडेंट का नाम, माता-पिता का नाम, सरनेम में बिंदी का अंतर आ रहा है, या फिर स्पेलिंग आधार और पोर्टल के डाटा में अलग अलग है। ऐसी स्थिति में अपार आइडी जनरेट नहीं होगी। ऐसी समस्याओं की वजह से अब तक 2 हजार आइडी रिजेक्ट हो चुकी है। हालांकि लोग आधार अपडेट करवाना चाहते हैं, लेकिन आधार सेंटरों पर वेटिंग चल रही है। ऐसे होती है स्कूलों की मान्यता की प्रक्रिया स्कूल द्वारा आवेदन पोर्टल पर लॉक करने के बाद जिले के बीआरसी स्कूलों का निरीक्षण कर मान्यता के मापदंडों को परखते हैं। स्कूलों की कमियां और मापदंडों को पूरा कर रिपोर्ट तैयार डीपीसी स्तर पर भेज देते हैं। डीपीसी स्तर पर वैरिफिकेशन कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। जिसमें कमियां मिलने पर मान्यता रद्द कर दी जाती है, जबकि मापदंड पूरा करने वाले स्कूलों को मान्यता मिल जाती है। मान्यता रद्द वाले स्कूलों के पास कलेक्टर के पास अपील करने की अंतिम अवसर होता है। आवेदनों में यह कमियां आई सामने     स्कूल भवन के कागजात अधूरे     अलग-अलग शौचालय नहीं होना     पीने के पानी की सुविधा का अभाव     प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होना     आरटीई एक्ट के नियमों का पालन नहीं करना ये है मान्यता के मुख्य मापदंड     रजिस्टर्ड किरायानामा     प्राथमिक शाला के लिए 7 कक्षाएं और 7 शिक्षक अनिवार्य     खेल सामग्री और खेल मैदान होना चाहिए,     न्यूनतम 2400 से 4 हजार स्क्वेयर फीट साइज का खेल मैदान हो     छात्रों की संख्या पर खेल मैदान का साइज निर्धारित हो     सुरक्षा के लिहाज से स्कूल में अग्निशमन यंत्र होना चाहिए।     बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय हो।     लाइब्रेरी की सुविधा होना चाहिए।

मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में जल्द ही इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी, किराया 2 रुपये प्रति किमी होगा

भोपाल मध्य प्रदेश के 6 शहरों में जल्द ईलेक्ट्रिक बस चलने वाली है. बस सर्विस की शुरुआत सितंबर-अक्टूबर में हो सकती है. दरअसल, ये केंद्र सरकार की योजना है. इस प्रोजेक्ट में देश के 88 शहरों में ई बसें चलाई जानी है. इसमें से 582 बसें मध्य प्रदेश के खाते में आई है. अब जल्द इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी. ये बस पॉल्यूशन को काफी कंट्रोल करेगी. इसकी साथ ही ग्रीन परिवहन को भी बढ़ावा देगी. मिली जानकारी के मुताबिक इस योजना में 10 नए डिपो, चार्जिंग स्टेशन और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड जैसी मॉर्डन सुविधाएं मिलेंगी. इसमें 472 मिडी बसें होंगी. इनमें से 26 यात्री सफर कर सकेंगे, तो वहीं 110 मिनी बसें 21 सीटर होंगी. यात्रियों को 2 रुपये प्रति किलोमीटर का किराया देना होगा. केंद्र सरकार से मिलेगी सब्सिडी ई बसों के संचालन के लिए केंद्र सरकार से भी सब्सिडी मिलेगी. इसके लिए सरकार 58.14 रुपये प्रति किलोमीटर का खर्च करेगी, जिसमें से 22 रुपये केंद्र सरकार देगी. ई बसों का संचालन ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर मॉडल पर होगा. ऐसे में यात्रियों को 2 रुपये प्रति किमी का किराया देना होगा, जो सिटी बस सर्विस की तुलना में काफी सस्ती है. भोपाल, उज्जैन, सागर और इंदौर में बसों के संचालन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा. 10 इलेक्ट्रिक बस डिपो बनाए जाएंगे. भोपाल के बैरागढ़ और कस्तूरबा नगर में डिपो बनाया जाएगा. ऐसे ही इंदौर में नायता मुंडला और चंदन नगर में डिपो और पावर स्टेशन बनेगा. इसी तरह उज्जैन और सागर में भी डिपो होगा. बस डिपो के पास ही इलेक्ट्रिक बस चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे. अब जानिए, बसों का संचालन कैसे होगा ई- बसों का संचालन जीसीसी (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर) मॉडल पर होगा। इसमें संबंधित फर्म बस खरीदेगी और उसके ड्राइवर, कंडक्टर, मेंटेनेंस की व्यवस्था भी खुद करेगी। इसके संचालन के लिए ऑपरेटर कंपनी को प्रत्येक बस 58 रुपए 14 पैसे प्रति किमी की दर से भुगतान किया जाएगा। इसमें भारत सरकार की तरफ से प्रति बस संचालन के लिए प्रति किमी 22 रुपए का भुगतान किया जाएगा, जबकि बाकी का भुगतान राज्य सरकार करेगी। लेकिन यह शर्त भी है कि हर बस प्रति दिन न्यूनतम 180 किमी की दूरी तय करेगी। 6 शहरों में 58 करोड़ रुपए से बनेंगे 10 डिपो नई ई-बसों के लिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर में दो- दो स्थानों पर डिपो बनाए जाएंगे। भोपाल में बैरागढ़ और कस्तूरबा नगर में 14 करोड़ की लागत से ये डिपो बनेंगे। वहीं, इंदौर के नायता मुंडला और चंदन नगर में 6 करोड़ की लागत से डिपो बनाए जाएंगे। उज्जैन और सागर में एक-एक स्थान पर डिपो बनेगा। डिपो के निर्माण के लिए 60 फीसदी पैसा केंद्र सरकार का होगा और 40 फीसदी पैसा राज्य सरकार देगी। कुल 10 डिपो के लिए राज्य सरकार करीब 24 करोड़ रुपए खर्च करेगी। चार्जिंग स्टेशन के लिए बिजली की व्यवस्था केंद्र सरकार के जिम्मे डिपो के पास ई- बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर में दो-दो चार्जिंग स्टेशन बनेंगे। वहीं, जबलपुर, सागर और उज्जैन में एक-एक चार्जिंग स्टेशन बनाया जाएगा। करीब 60 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले 9 चार्जिंग स्टेशन के लिए 41 किमी लंबी हाई टेंशन लाइन बिछाई जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार की आर्थिक सहायता से विद्युत सब स्टेशन बनाए जाएंगे। 5 पॉइंट्स में जानिए, क्या होगा रूट और कैसे तय होगा किराया 1. हर सिटी की जरूरत के हिसाब से प्लान हर शहर के लिए कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान तैयार किया जा रहा है। यह अगले 20 साल की आबादी को देखते हुए किया जाएगा। इसके लिए हर शहर में सड़क, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और अलग-अलग एरिया में सर्वे किया जा रहा है। ई-बसों का रूट इसी सिस्टम से तय किया जाएगा। कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान में मेट्रो, बस, ऑटो और साइकिल के मार्ग अलग-अलग होंगे। जैसे कोई यात्री रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट पर उतरता है तो वहां पर उसे मेट्रो या सिटी बस मिल जाएगी लेकिन यह सुविधा मुख्य मार्गाें तक ही सीमित रहेगी। इसके आगे बस स्टॉप या मेट्रो स्टेशन से कॉलोनियों तक पहुंचने के लिए ऑटो या अन्य छोटे वाहनों का रूट तैयार किया जाएगा। जिससे यात्री आसानी से अपने घर तक पहुंच सके। 2. ट्रैफिक के हिसाब से तय होगा रूट और टाइम शहरों में ऑफिस टाइम (आने और जाने) पर हैवी ट्रैफिक होता है। इसके अलावा ट्रेन और बसों के आने पर भी ट्रैफिक बढ़ता है। इसी हिसाब से ई-बसों का रूट और टाइम तय किया जाएगा। उदाहरण के लिए रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर दिल्ली से आने वाली शताब्दी ट्रेन पहुंचेगी तो यहां ई-बसों की फ्रिक्वेंसी ज्यादा रहेगी। ऐसा ही प्लान इंदौर और बाकी शहरों के लिए रहेगा। 3. नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड सिस्टम लागू होगा सूत्रों ने बताया कि बसों में टिकटिंग के लिए एक एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। लेकिन इस कंपनी को किराया तय करने का अधिकार नहीं होगा। बस का किराया जिले की एसपीवी (स्पेशल पर्पज व्हीकल कमेटी) तय करेगी। इसके लिए आरटीओ से सलाह ली जाएगी। परिवहन सुविधा को बेहतर बनाने के लिए मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड वन नेशन वन कार्ड लागू करने की तैयारी है। नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) के लागू होने के बाद इन 6 शहरों में सार्वजनिक परिवहन टिकटिंग सेवाओं सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए इस कार्ड का उपयोग किया जा सकेगा। यानी टिकट के लिए मल्टीपल कार्ड बनेंगे, जिसका उपयोग मेट्रो, साइकिल और बस में हो सकेगा। 4. 70% लोग बस स्टॉप तक पैदल पहुंचते हैं सिटी मोबिलिटी प्लान के अध्ययन में सामने आया है कि भोपाल में रोजाना 1.52 लाख लोग बस सेवा का उपयोग करते हैं। इनमें से 70% लोग बस स्टॉप के लिए पैदल पहुंचते हैं। ये 1.20 किमी की औसत दूरी है। इसमें बताया गया है कि 16% लोग बस के लिए ऑटो का उपयोग करते हैं, जबकि महज 6% लोग दो पहिया वाहन से स्टॉप तक पहुंचते हैं। 5. भोपाल में 1200 किमी सड़कों को आपस में जोड़ा जाएगा भोपाल में मौजूदा और प्रस्तावित मेट्रो नेटवर्क से शहरवासियों को जोड़कर लास्ट माइल कनेक्टिविटी देने के लिए 1200 किमी लंबाई के रोड नेटवर्क को आपस में जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही ई-रिक्शा … Read more

मप्र से राजस्थान पहुंचने वाले मरीजों को न ओपीडी शुल्क देना होगा न ही किसी प्रकार की जांचों के लिए अतिरिक्त रुपए लगेंगे

भोपाल राजस्थान सीमा से लगे मप्र के जिलों के मरीजों के लिए राहतभरी खबर है। अब झालावाड़ सहित पूरे राजस्थान में आयुष्मान कार्ड से फ्री इलाज कराया जा सकेगा। मप्र से पहुंचने वाले मरीजों को न ओपीडी शुल्क देना होगा न ही किसी प्रकार की जांचों के लिए अतिरिक्त रुपए लगेंगे। 3 साल पहले बंद हुई थी सुविधा दरअसल, करीब तीन साल पहले राज्य शासन ने बाहर के राज्यों से आने वाले मरीजों को मुत उपचार की सुविधा बंद कर दी थी और उसके लिए शुल्क निर्धारित किया था। जिसमें ओपीडी शुल्क, भर्ती शुल्क के साथ ही जरूरी दवाइयों पर भी शुल्क लागू किया गया था। अब इसमें राहत दी गई है। तीन साल बाद राज्य शासन ने इस पर संज्ञान लेते हुए रोक हटा दी और आयुष्मान कार्ड यहां भी चालू कर दिया है। इन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज के साथ ही जिले से लगे झालावाड़ और झालरा पाटन में मरीजों को मुत उपचार मिलेगा। झालावाड़ के आर्थोपेडिक ट्रॉमा सेंटर खांड्या चौराहा, बालाजी आर्थोपेडिक अस्पताल, संजीवनी मल्टीस्पेशलिटी सेंटर और एलएन मल्टीस्पेशलिटी सेंटर सहित झालवरा पाटन के सरदार पटेल अस्पताल में यह मुत उपचार मिल सकेगा। सभी जगह आयुष्मान कार्ड लागू होगा। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में कार्ड दिखाकर ओपीडी शुल्क के साथ ही भर्ती शुल्क, जांर्चा का शुल्क भी नहीं लगेगा। जानकारी अनुसार झालावाड़ में उपचार करवाने के लिए राजगढ़ जिले के खिलचीपुर, जीरापुर, माचलपुर, छापीहेड़ा, संडायता और राजगढ़ जिला मुयालय, कालीपीठ तक के लोग पहुंचते हैं। राजगढ़ के साथ ही श्योपुर, शिवपुरी, गुना, आगर मालवा, शाजापुर सहित अन्य समीपवर्ती जिलों के नागरिकों को भी इस नहीं योजना का लाभ मिलने लगेगा। राज्य सरकार के दिशा निर्देश झालावाड़ सीएमएचओ डॉ. साजिद खान ने बताया कि ‘आयुष्मान कार्ड की पोर्टेबिलिटी राज्य सरकार के दिशा निर्देश के बाद शुरू कर दी है। इसमें चयनित अस्पतालों में पांच लाख रुपए तक का उपचार मुत होगा। साथ ही कार्ड दिखाने पर ओपीडी शुल्क और अन्य प्रकार की जांचों के लगने वाले शुल्क भी नहीं लगेंगे। यह व्यवस्था सोमवार से ही लागू कर दी गई है।’ हर दिन मप्र से आने वाले मरीज जानकारी झालावाड़ शासकीय अस्पताल के अनुसार     50 से 60 मरीज मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पताल में     50 मरीज निजी अस्पतालों में     10 से 12 प्रसूताएं प्रतिदिन रेफर होकर आती हैं     ओपीडी चार्ज भी शुरू कर दिया गया था अभी तक ये चार्ज तय थे, अब नहीं लगेंगे ओपीडी शुल्क- 10 रुपए भर्ती शुल्क- 30 रुपए जांचों का शुल्क- 10-1000 रुपए सिटी स्कैन शल्क- 900-10000 रुपए

भोज मुक्त विश्वविद्यालय में रामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से विज्ञान के सिद्धांतों को समझाया जाएगा

भोपाल  मध्य प्रदेश का भोज मुक्त विश्वविद्यालय रामचरितमानस को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पढ़ाने जा रहा है। इसके लिए स्नातक स्तर का पाठ्यक्रम डिजाइन हुआ है, जो मानस में आए विज्ञान के सिद्धांतों को समाहित करता है। विश्वविद्यालय इस पाठ्यक्रम(Bhoj University curriculum) के जरिए भारतीय संस्कृति और साहित्य की वैज्ञानिकता को आधुनिक ज्ञान के साथ जोड़ना चाहता है। भोज मुक्त विश्वविद्यालय प्रबंधन(Bhoj Open University news) के अनुसार नए पाठ्यक्रम में रामचरितमानस और भौतिक विज्ञान, रामचरितमानस और रसायन विज्ञान, रामचरितमानस और जीव विज्ञान, रामचरितमानस और पर्यावरण विज्ञान जैसे विषय शामिल किए गए हैं। भोज विश्वविद्यालय ने तीन साल पहले ‘विज्ञान से सामाजिक उत्थान’ नाम से एक डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किया था। विद्यार्थियों को पढ़ाने का पाठ्यक्रम फिर डिजाइन किया इसमें रामचरितमानस की चौपाइयों से पर्यावरण, जीव विज्ञान, रसायन शास्त्र और भौतिक विज्ञान को समझाने का प्रयास किया गया है। इस डिप्लोमा पाठ्यक्रम में हर साल 50 से अधिक विद्यार्थी प्रवेश लेते हैं। अब स्नातक स्तर के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम को फिर से डिजाइन किया गया है। विज्ञान के सूत्रों को समझाया जाएगा विषय विशेषज्ञों का कहना है कि इस पाठ्यक्रम में मानस के अलग-अलग कांड में आए प्रसंगों के दोहों-चौपाइयों को लिया जाएगा। इसके जरिए वर्णन में छिपे विज्ञान के सूत्रों को समझाया जाएगा। उदाहरण के लिए मानस के उत्तरकांड में आई चौपाई ‘हिमगिरि कोटि अचल रघुवीरा…का भावार्थ है कि श्री रघुवीर यानी भगवान राम करोड़ों हिमालयों के समान अचल या स्थिर हैं और अरबों समुद्रों से भी गहरे हैं..।’ इस चौपाई में बताई गई भगवान की विशेषताओं के साथ इस पाठ्यक्रम में विद्युत चुंबकीय क्षेत्र, गुरुत्वाकर्षण के परिणामी बल के बारे में बताया जाएगा, जो इस चौपाई का छिपा विज्ञान है। इसी तरह अन्य चौपाइयों के आधार पर ही रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, पर्यावरण और भौतिकी को जानने और समझने का मौका विद्यार्थियों को मिलेगा। गणित-रसायन के सूत्रों को आसान करने की कोशिश बताया जा रहा है कि इस पाठ्यक्रम में गणित और रसायन विज्ञान के कठिन सूत्र भी सरलता से समझाया जा सकेगा। रामकथा के विविध प्रसंगों पर आधारित छंदों से प्रभाविता का नियम, मेंडेलिज्म का आर्थिक महत्व जैसे हजारों नियमों और सूत्रों को आसान और लयबद्ध भाषा में समझाया जाएगा। विज्ञानी दृष्टिकोण से समझने का अवसर     अभी तक रामचरितमानस का डिप्लोमा पाठ्यक्रम चल रहा था। अब इसे स्नातक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को संस्कृति के महत्व को विज्ञानी दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिलेगा। – सुशील मंडेरिया, कुलसचिव, भोज विश्वविद्यालय, भोपाल  

प्रदेश में लाड़ली बहना योजना सहित कई योजनाओं का होगा सोशल ऑडिट, घर-घर संपर्क कर इन योजनाओं को लेकर जानकारी जुटाई जाएगी

भोपाल मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना जैसी कई फ्लैगशिप योजनाओं का सोशल ऑडिट(सामाजिक अंकेक्षण) करवाया जाएगा। इन योजनाओं से लोगों के जीवन में क्या बदलाव आया, इनकी कमियों से लेकर खूबियों तक की रिपोर्ट बनाई जाएगी। यह रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत की जाएगी। इसके आधार पर योजनाओं में सुधार या परिवर्तन जैसे निर्णय लिए जा सकेंगे। इसके लिए शासन स्तर पर तैयारी की जा रही है। इसका प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। स्वीकृति मिलने पर विभागों से समन्वय कर सोशल आडिट की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बता दें, मध्य प्रदेश में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के पहले शुरू हुई लाड़ली बहना योजना के तहत वर्तमान में एक करोड़ 17 लाख पात्र महिलाओं प्रतिमाह 1250 रुपये दिए जा रहे हैं। इस योजना पर हर महीने करीब 1550 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस पर 18,669 करोड़ रुपये बजट का प्रविधान भी किया गया है। यह योजना इतनी लुभावनी साबित हुई कि महाराष्ट्र में भी इसे लागू किया गया। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने दिल्ली की महिलाओं के लिए भी इसी तरह का वादा किया। ये हैं एमपी सरकार की योजनाएं सोशल आडिट के लिए केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं का विभागवार खाका तैयार किया जाएगा। इनमें प्रधानमंत्री मातृवंदना, पीएम आवास, निश्शुल्क खाद्यान्न वितरण, पथ विक्रेता योजना, लाड़ली बहना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना सहित तमाम ऐसी योजनाओं के लाभार्थियों से संपर्क किया जाएगा। कैग (सीएजी) की तरह ही रिपोर्ट तैयार की जाएगी, अंतर केवल यह होगा कि वित्तीय आडिट की जगह यह एक सोशल आडिट होगा। बता दें, सोशल आडिट का उद्देश्य सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी होता है। मुख्यमंत्री के जनसेवा मित्रों की सेवाएं लेने पर किया जा रहा विचार फ्लैगशिप योजनाओं के लाभार्थियों के डाटा के आधार पर घर-घर संपर्क किया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री के जनसेवा मित्रों की सेवाएं लिए जाने पर विचार किया जा रहा है। प्रदेश में 9390 जनसेवा मित्र हैं। इनकी सेवाएं पिछले वर्ष पूर्ण हो चुकी हैं। योजनाएं एक नजर में – वर्ष 2024-25 में लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 के अंतर्गत दो लाख 43 हजार 396 बालिकाओं का पंजीयन किया गया है। वहीं लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत अब तक 12,932 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। – प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 52 लाख माताएं पंजीकृत हैं वित्तीय वर्ष 2024-25 में पांच लाख 75 हजार हितग्राहियों को 264 करोड़ रुपये भुगतान किया गया। – प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत एक करोड़ 33 लाख परिवारों को निश्शुल्क खाद्यान्न वितरण। अब तक 32,47,304 टन खाद्यान्न वितरण किया गया है।

इंदौर की पहचान अब आईटी सेक्टर में भी नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा, जल्द 2 नए IT Parks की सौगात

इंदौर इंदौर की पहचान अब सिर्फ साफ-सफाई और व्यापार तक सीमित नहीं रही। अब शहर आईटी सेक्टर में भी नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। सरकार दो नए आईटी पार्कों की सौगात देने जा रही है, जिनकी आधारशिला 27 अप्रैल को आईटी कॉन्क्लेव में रखी जाएगी। इससे न केवल स्टार्टअप्स को सहूलियत मिलेगी, बल्कि हजारों युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। छोटे स्टार्टअप्स को बड़ी ताकत देगा नया आईटी इकोसिस्टम इंदौर में आईटी सेक्टर का ईकोसिस्टम तेजी से तैयार हो चुका है। फिलहाल शहर में 100 से ज्यादा छोटी-बड़ी आईटी कंपनियां सक्रिय हैं और हर दिन इस संख्या में इज़ाफा हो रहा है। अब सरकार दो नए आईटी पार्क बना रही है, जहां खासकर छोटी कंपनियों और स्टार्टअप्स को ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल के तहत सस्ती दरों पर स्पेस मिलेगा। कहां बनेंगे ये आईटी पार्क? पहला आईटी पार्क परदेशीपुरा इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स (Pardesipura Electronics Complex) में और दूसरा भंवरकुआ क्षेत्र में बनेगा। अच्छी बात ये है कि दोनों जगह पहले से उपलब्ध हैं, जिससे काम जल्दी शुरू किया जा सकेगा। सरकार इन्हें स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) का दर्जा देगी, जिससे कंपनियों को टैक्स जैसी कई अहम रियायतें भी मिलेंगी। 250 करोड़ का निवेश, दो हजार नौकरियों की उम्मीद परदेशीपुरा में बनने वाला आईटी पार्क पीपीपी मॉडल (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) पर तैयार किया जाएगा। इसमें करीब 250 करोड़ रुपये खर्च होंगे और अनुमान है कि करीब दो हजार लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा। यह न सिर्फ शहर के युवाओं के लिए बल्कि राज्य के टेक टैलेंट को रोकने के लिए भी बड़ा कदम साबित होगा। पहले से मौजूद हैं आईटी पार्क, और भी होंगे शामिल इंदौर में पहले ही तीन सरकारी और दो निजी आईटी पार्क काम कर रहे हैं। आईटी चौराहा, परदेशीपुरा (पहले वाला), और सिंहासा में बने पार्क में पहले से कई कंपनियां कार्यरत हैं। सिंहासा में तो 40 से ज्यादा कंपनियों को प्लॉट भी मिल चुके हैं। टीसीएस और इंफोसिस ने दिखाया रास्ता प्रदेश सरकार ने एक दशक पहले टीसीएस और इंफोसिस को 100 और 130 एकड़ जमीन रियायती दरों पर दी थी, साथ ही शर्त रखी थी कि 50 फीसदी नौकरियां प्रदेश के युवाओं को दी जाएं। इन कंपनियों ने न केवल SEZ स्टेटस हासिल किया, बल्कि इंदौर के युवाओं को करियर की नई दिशा भी दी।

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