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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह जिले की सड़क दुर्घटना पर किया शोक व्यक्त

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दमोह जिले में हुई भीषण सड़क दुर्घटना में एक ही परिवार के 8 नागरिकों के असामयिक निधन पर गहन दु:ख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा कि दुर्घटना दुखदायी है। इस मुश्किल घड़ी में राज्य सरकार शोकाकुल परिवार के साथ खड़ी है। राज्य सरकार की ओर से इस दुर्घटना में मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रूपए एवं घायलों को 50-50 हजार रूपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्माओं की शांति एवं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की है। दमोह के बनवार क्षेत्र में महादेव घाट के पास मंगलवार को एक बोलेरो के अनियंत्रित होकर खाई में गिर जाने से यह दर्दनाक हादसा हुआ है। सभी पीड़ित जागेश्वर धाम की धार्मिक यात्रा से जबलपुर लौट रहे थे।  

मैं पीएम मोदी से कहता हूं कि प्रिंस सलमान से पूछिए, क्या मदीना वक्फ की जमीन पर बना है: असदुद्दीन ओवैसी

नई दिल्ली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा, “जब आपका जहाज सऊदी अरब की फिजाओं में दाखिल हुआ था, तब सऊदी के फाइटर जेट्स ने उसे एस्कॉर्ट किया, ये एक दोस्ताना इशारा था। लेकिन मैं पीएम मोदी से कहता हूं कि जब आप सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मिलें, तो उनसे पूछिए क्या मदीना वक्फ की जमीन पर बना है या नहीं?” गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय सऊदी अरब की यात्रा पर हैं और जेद्दा पहुंचे हैं। ये उनकी तीसरी सऊदी यात्रा है, लेकिन पहली बार जेद्दा आए हैं। उनके स्वागत में सऊदी एयरफोर्स के एफ-15 विमान ने उनकी फ्लाइट को एयरस्पेस में एस्कॉर्ट किया। हर मुस्लिम देश में वक्फ मौजूद: ओवौसी मंगलवार को दिल्ली के टॉकाटोरा स्टेडियम में आयोजित ‘सेव वक्फ कॉन्फ्रेंस’ में ओवौसी ने हालिया संसद में बीजेपी सांसद के उस बयान का जवाब दिया जिसमें कहा गया था कि कुछ मुस्लिम देशों में वक्फ की कोई व्यवस्था नहीं है। ओवैसी ने कहा कि वक्फ हर मुस्लिम देश में होता है, चाहे वो लोकतंत्र हो या सल्तनत हो। ओवैसी ने आगे कहा कि वक्फ का अस्तित्व हर मुस्लिम देश में है और भारत में भी इसे संविधान और संसद का समर्थन मिला है। उन्होंने याद दिलाया कि वक्फ एक्ट 2013 को दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से पास किया था। उन्होंने यह भी कहा, “संविधान के अनुसार कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका स्वतंत्र हैं। अगर सरकार संविधान का दुरुपयोग करती है, तो न्यायपालिका ही हमारी आखिरी उम्मीद होती है।” सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर क्या बोले ओवैसी ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा वक्फ एक्ट में किए गए 40 से ज्यादा संशोधनों पर अंतरिम आदेश को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “ये कानून काले कानून जैसा है जो वक्फ की जायदाद को बचाने के लिए नहीं, बल्कि खत्म करने के लिए लाया गया है। अगर केंद्र सरकार ऐसे नियम बनाती है जो वक्फ को कमजोर करते हैं, तो ये संघीय ढांचे के भी खिलाफ होगा।” उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस कानून का विरोध जारी रखेंगे और कानूनी लडाई भी लडते रहेंगे।

अयोध्या: रामलला के गर्भगृह के सामने लगा पर्दा बदल, पूरे दिन समय समय पर भोग के समय रामभक्तों को दिखाई देगा

अयोध्या राम मंदिर में विराजमान रामलला के गर्भगृह के सामने लगा पर्दा बदल दिया गया है। अब मैरून रंग की जगह बादामी रंग का कढ़ाईदार पर्दा लगाया गया है। पूरे दिन समय समय पर भोग के समय रामभक्तों को दिखाई देगा। इसके पहले तक मैरून रंग के मखमली पर्दे पर रामानुजीय उपासना परम्परा के प्रमुख चिह्न शंख व चक्र को सुनहरे तारों से अंकित किया गया था। नए पर्दे पर अब कोई चिह्न नहीं है। अयोध्या में ब्रह्मचारियों के मस्तक पर धारण करने वाले त्रिपुंड व उर्ध्व पुंड तिलक पर इन दिनों एक बहस छिड़ी है। अयोध्या में संचालित वेद विद्यालय के बटुक ब्रह्मचारियों के मस्तक पर त्रिपुंड व उर्ध्व पुंड तिलक धारण कराया गया। लक्ष्मण किला में बटुक ब्रह्मचारियों के यज्ञोपवीत संस्कार के कार्यक्रम से इसे लेकर चर्चा तेज हो गई। अलग-अलग मंचों पर यह विषय सार्वजनिक बहस का मुद्दा बन गया। बड़ा भक्तमाल के पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास का कहना है कि उपासना परम्परा में वेशभूषा और तिलक-चंदन का भेद है। यही भेद सभी उपासकों को अलग-अलग पहचान भी देता है। भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या वैष्णव नगरी है। यहां के वेद विद्यालयों में वैदिक शिक्षा के साथ रामोपासना में दीक्षित विद्यार्थी है। वेदाध्ययन के लिए यज्ञोपवीत कराना बाध्यता और अनिवार्यता दोनों है लेकिन त्रिपुंड धारण करने के कारण उनकी पहचान शैव की हो गई। इस बीच राम मंदिर के पर्दे से चिह्नों का गायब होना इस चर्चा को नया रूप दे गया।  

भविष्य के लिए जल को संरक्षित करना आवश्यक है, क्योंकि जल के बिना कुछ भी संभव नहीं है: मंत्री सिलावट

भोपाल जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत ईंटखेड़ी में बाणगंगा नदी के विसर्जन घाट पर सफाई, सौंदर्यीकरण एवं जल संरक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने बलिदान स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके त्याग और बलिदान को याद किया। कार्यक्रम में विधायक श्री विष्णु खत्री,जिला पंचायत अध्यक्ष श्री मोहन सिंह जाट, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री प्रमोद राजपूत,सरपंच श्री हरि सिंह सैनी, श्री तीरथ सिंह मीणा, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती इला तिवारी एवं अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री श्री सिलावट ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जल संरक्षण के संकल्प को पूरा करने के लिए अभियान में सहयोग करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में 13 मिनट तक जल गंगा संवर्धन और संरक्षण की आवश्यकता बताई थी। भविष्य के लिए जल को संरक्षित करना आवश्यक है, क्योंकि जल के बिना कुछ भी संभव नहीं है। मंत्री श्री सिलावट ने जन-आंदोलन के साथ इस कार्य को करने का आहवान किया। उन्होंने कहा कि गांव, जिले, राज्य और देश में श्रमदान को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। बैरसिया विधानसभा में 70 अमृत सरोवर हैं, जिनका संवर्धन करना है। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाने का भी आग्रह किया। श्री सिलावट ने 30 मार्च से 30 जून तक चलने वाले जल गंगा संवर्धन अभियान में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। उन्होंने सभी वर्गों से जल संरक्षण कार्यों में सहभागिता करने को कहा। उन्होंने ऐतिहासिक, धार्मिक स्थलों पर जल स्रोतों के संरक्षण के लिए श्रमदान का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि धरातल पर काम की प्रगति दिखनी चाहिए और काम में कोताही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जल स्रोतों में अतिक्रमण को पूरी तरह से हटाने के भी निर्देश दिये।

विमुक्त, घुमंतु एवं अर्द्ध घुमंतु जातियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है सरकार: राज्य मंत्री श्रीमती गौर

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण,विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतु राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि विमुक्त, घुमंतु और अर्द्ध घुमंतु जातियों के विकास के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। जन अभियान परिषद के माध्यम से इन विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतु 51 जातियों के परिवारों के समेकित विकास के लिए सर्वेक्षण कार्य शुरू किया जाएगा। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने मंत्रालय में विभागीय अधिकारियों के साथ विभागीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि जन अभियान परिषद पहले चरण में 12 जिलों के 71 ब्लॉक में सर्वेक्षण करेगा। जो 30 अप्रैल 2025 से प्रारंभ होकर 30 सितंबर 2025 तक चलेगा। सर्वेक्षण का उद्देश्य इन समुदाय के लोगों की जीवनशैली, पारंपरिक व्यवसाय और सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी का दस्तावेजीकरण करना है। कई बार निरंतर स्थान बदलने के कारण यह किसी भी भौगोलिक सीमा के सर्वेक्षण में नहीं आ पाते हैं। एक स्थान पर निवास ना होने के कारण इन जातियों के लोगों के आधार कार्ड, समग्र कार्ड इत्यादि भी नहीं बन पाते हैं। इस सर्वेक्षण से शासन की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लाभ इन जातियों को मिल सकेगा, रिहाइशों की पहचान हो सकेगी और स्थान परिवर्तन का समय, कारण व अन्य तथ्यों की जानकारी एकत्रित की जा सकेगी। बैठक में जन अभियान परिषद् के उपाध्यक्ष राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त श्री मोहन नागर, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंखयक कल्याण, विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतु विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार, संचालक विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध घुमंतु श्री नीरज वशिष्ठ, जन अभियान परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड़ उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश की धरती पर जन्में चीतों की शिफ्टिंग पर व्यक्त की प्रसन्नता

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंदसौर स्थित गांधीसागर अभयारण्य में मध्यप्रदेश की धरती पर जन्में चीतों की शिफ्टिंग को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह अभयारण्य प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। मध्यप्रदेश में चीतों के आवास एवं विचरण के लिए सर्वाधिक अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। कूनो नेशनल पार्क से राज्य में दूसरे स्थान पर चीतों को ले जाकर पुनर्वास करना वन्य-प्राणी संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। गांधी सागर अभयारण्य में छोड़े गए चीते पावक और प्रभाष को यहाँ की आबो-हवा और नया परिवेश पसंद आया है और दोनों आनंद के साथ जंगल में स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को वन्य जीवों के संरक्षण में अग्रणी बनाने के लिए विशेष ईको सिस्टम विकसित करने के लिए संकल्पित है। मध्यप्रदेश बाघों की संख्या में शीर्ष पर है और इसे टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त है। इसी के साथ राज्य में लेपर्ड (तेंदुए) भी सर्वाधिक हैं। राज्य सरकार सभी विलुप्तप्राय जीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में चीतों के पुनर्वास को एशिया महाद्वीप की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से वन्य-प्राणियों के संरक्षण में साझेदार बनने के साथ ‘जियो और जीने दो’ की भावना से कार्य करने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत 20 अप्रैल 2025 को मध्यप्रदेश में कूनो नेशनल पार्क में जन्में दो चीते पावक और प्रभास को उनके नए घर गांधीसागर अभयारण्य में मुक्त विचरण के लिए छोड़ा है। मई महीने में मध्यप्रदेश को बोत्सवाना से चार चीते मिल सकते हैं।  

मैत्री बाग चिड़ियाघर के प्रबंधन ने दुर्लभ वन्यजीवों को इस तपिश से राहत देने के लिए किए व्यापक इंतजाम

 दुर्ग प्रचंड गर्मी ने न केवल आम लोगों के जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि वन्यजीव भी इससे अछूते नहीं हैं। भिलाई के प्रसिद्ध मैत्री बाग चिड़ियाघर के प्रबंधन ने दुर्लभ वन्यजीवों को इस तपिश से राहत देने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। मैत्री बाग में रोजाना एक खास नजारा देखने को मिलता है। सफेद शेरों के इनक्लोजर में पानी का छिड़काव किया जाता है, ताकि वहां ठंडक बनी रहे और शेरों का शरीर तापमान नियंत्रित रहे। गर्मी को ध्यान में रखते हुए वन्यजीवों की डाइट में भी बदलाव किया गया है। शेर और भालू जैसे जानवरों को ठंडा मांस दिया जा रहा है, जबकि बंदरों और अन्य छोटे जानवरों को तरबूज-खरबूज जैसे फल दिए जा रहे हैं। यह व्यवस्था गर्मी से होने वाली बीमारियों, जैसे डिहाइड्रेशन, से बचाव के लिए की गई है। छोटे वन्यजीवों के केज को विशेष टाइफा घास से ढका गया है, जिसमें दिन में तेज धूप के समय पानी की बौछार की जाती है। इससे इनक्लोजर में देर शाम तक ठंडक बनी रहती है। मैत्री बाग के प्रभारी डॉ. नवीन जैन ने बताया कि जानवरों के बैरकों में पानी का छिड़काव और खुले क्षेत्र में रहने वाले जानवरों पर बौछार की जा रही है। शेरों के पिंजरों में हवा को ठंडा रखने के लिए घास की चटाइयां लगाई गई हैं, जिनमें समय-समय पर पानी डाला जाता है। वहीं, भालू के पिंजरों में छत पर पानी का झरना बनाया गया है, जो पिंजरे को ठंडा रखता है। बाहर निकलते समय भालू पानी से गुजरता है, जिससे उसे गर्मी से राहत मिलती है। इन उपायों से मैत्री बाग प्रबंधन यह सुनिश्चित कर रहा है कि भीषण गर्मी में भी वन्यजीवों को सुरक्षित और स्वस्थ रखा जाए।  

पाकिस्तान के ‘आसिम मुनीर’ का बयान, जो उन्होंने 16 अप्रैल को दिया था, उस पर गौर करने की जरूरत है: अनिल गौर

पहलगाम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को बड़ा आतंकी हमला हुआ है। इस हमले में मारे गए लोगों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना हो गए हैं। वहीं जम्मू कश्मीर के सुरक्षा से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) कहते हैं, इस कायराना हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ तो है ही। मुनीर के बयान को गंभीरता से लेना चाहिए था- अनिल गौर पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल ‘आसिम मुनीर’ का वह बयान, जो उन्होंने 16 अप्रैल को दिया था, उस पर गौर करने की जरूरत है। क्या हमने उस बयान को हल्के में लिया है। ऐसे कई सवाल उठना लाजिमी है। जनरल मुनीर ने 144 घंटे पहले इस्लामाबाद में आयोजित ओवरसीज पाकिस्तानी कन्वेंशन 2025 में कहा था, ‘कश्मीर पर हमारा (पाकिस्तानी सेना) और सरकार का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। हम इसे नहीं भूलेंगे। हम भारत के कब्जे के खिलाफ संघर्ष करने वाले अपने कश्मीरी भाइयों को नहीं छोड़ेंगे। बतौर सुरक्षा विशेष गौर, यह सामान्य बयान नहीं था। इसकी गंभीरता को समझना चाहिए था। जम्मू कश्मीर में बढ़ानी चाहिए थी सुरक्षा- अनिल गौर कैप्टन (रिटायर्ड) अनिल गौर ने कहा, मुनीर के बयान के बाद जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बढ़ा देनी चाहिए थी। हालांकि खुफिया एजेंसियों ने अपने स्तर पर कुछ न कुछ किया ही होगा। पाकिस्तानी सेना के चीफ मुनीर ने जो कुछ कहा था, उसका असर पहलगाम के आतंकी हमले के तौर पर दिख रहा है। मुनीर ने बयान से स्पष्ट था कि कश्मीर में हमारे बंदे हैं। पहलगाम में आतंकियों ने टारगेट भी हिंदुओं को किया है। गोली मारने से पहले लोगों का धर्म पूछा गया था। अनिल गौर बताते हैं, जम्मू और कश्मीर में पर्यटन के लिए आने वाले अधिकांश लोगों में तो हिंदू ही होते हैं। आतंकी संगठन चाहते हैं जम्मू-कश्मीर में न आएं पर्यटक यह हमला, कुछ अन्य बातों की तरफ भी इशारा करता है। जैसे आतंकियों को अब पहले के मुकाबले लोकल सपोर्ट नहीं मिल पा रही है। दूसरा, आतंकियों की नई भर्ती अब तकरीबन बंद हो चुकी है। उन्हें अब लोकल सपोर्ट भी नहीं मिल रही है। वे पहाड़ों पर छिपे हैं। इस हमले का मकसद वहां आने वाले हिंदुओं में दहशत फैलाना है। आतंकी संगठन चाहते हैं कि जम्मू और कश्मीर में पर्यटक न आएं। अगर पर्यटक नहीं आएंगे तो बिजनेस प्रभावित होगा। जब बिजनेस प्रभावित होगा तो सरकार की विकास नीति भी पटरी से उतर सकती है। आतंकी यह संदेश भी देना चाह है कि उन्हें लोकल सपोर्ट नहीं मिलेगी तो ऐसे हमले आगे भी देखने को मिल सकते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूपीएससी की परीक्षा में चयनित युवाओं को दी बधाई

 भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संघ लोक आयोग के घोषित परिणामों में प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं का चयन गर्व का विषय है। यह परिणाम बताते हैं कि युवाओं ने शासकीय सेवा के माध्यम से राष्ट्र की सेवा करने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चयनित युवाओं को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कल सिविल सेवा दिवस मनाया गया। सिविल सेवकों की जन कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वर्तमान में अधिकारी वर्ग ने श्रेष्ठ सेवाएं प्रदान करते हुए सार्थक भूमिका का निर्वहन किया है, जिसके कारण भारत की एक विशेष पहचान बनी है। प्रदेश के युवाओं ने अच्छा अवसर पाया है। यूपीएससी के रिजल्ट में प्रदेश के युवाओं ने शासकीय सेवा के माध्यम से देश की सेवा करने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की है कि सभी चयनित युवा राष्ट्र सेवा के लिए बेहतर से बेहतर कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिविल सेवा परीक्षा:2024 में चयनित होने वाले देशभर के सभी प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को भी बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों के अथक परिश्रम, धैर्य एवं समर्पण का प्रतिफल है।  

मैं पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं, जिन्होंने प्रियजनों को खोया, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। मंगलवार को उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘मैं पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं। मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाएं। प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता दी जा जा रही है।’ उन्होंने कहा कि इस जघन्य कृत्य के पीछे जो लोग हैं, उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। उन्हें बख्शा नहीं जाएगा! उनका नापाक एजेंडा कभी सफल नहीं होगा। आतंकवाद से लड़ने का हमारा संकल्प अटल है और यह और भी मजबूत होगा। दक्षिण कश्मीर के प्रमुख पर्यटक स्थल पहलगाम में आतंकवादी हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हुए हैं। हमले वाली जगह का एक कथित वीडियो सामने आया है, जिसमें कई लोग खून से लथपथ और जमीन पर बेसुध पड़े हुए दिखाई देते हैं। इसमें महिला पर्यटक रोती और अपने प्रियजनों की तलाश करती दिखती हैं। हालांकि, वीडियो की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब सालों तक आतंकवाद से जूझने के बाद कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि देखी जा रही है। साथ ही, 38 दिवसीय अमरनाथ तीर्थयात्रा 3 जुलाई से शुरू होनी है। आतंकवादी बैसरन घाटी से उतरे और शुरू की गोलीबारी रिपोर्ट के मुताबिक, हमला दोपहर करीब 3 बजे हुआ। आतंकवादी बैसरन घाटी में पहाड़ से नीचे उतरे और वहां पर्यटकों पर गोलीबारी शुरू कर दी। इस स्थान को लंबे हरे-भरे घास के मैदानों के कारण ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहा जाता है। बैसरन पहलगाम में एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। पहलगाम से खच्चरों के माध्यम से इस क्षेत्र तक पहुंचा जा सकता है और रास्ते में पहलगाम शहर व लिद्दर घाटी का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। देश भर से लाखों तीर्थयात्री दो मार्गों से पवित्र गुफा मंदिर की यात्रा करते हैं। एक मार्ग दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा पहलगाम मार्ग है, जबकि दूसरा मार्ग गंदेरबल जिले में 14 किलोमीटर का छोटा बालटाल मार्ग है जहां खड़ी चढ़ाई है। गृहमंत्री अमित शाह श्रीनगर के लिए रवाना इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह तुरंत श्रीनगर के लिए रवाना हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अमित शाह ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को घटना के बारे में जानकारी दी है। आतंकवादी हमले के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की है। पीएम मोदी फिलहाल सऊदी अरब में हैं। शाह ने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले से दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं मृतकों के परिजनों के साथ हैं। इस जघन्य आतंकी हमले में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और हम अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देंगे।’ हालात सामान्य होने के दावे पर राहुल गांधी का सवाल लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले की निंदा की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ पूरा देश एकजुट है और सरकार को इस केंद्रशासित प्रदेश में हालात सामान्य होने के खोखले दावे करने के बजाय ठोस कदम उठाने चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि इस कायराना आतंकी हमले में पर्यटकों के मारे जाने और कई लोगों के घायल होने की खबर बेहद निंदनीय और दिल दहलाने वाली है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, ‘मैं शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की आशा करता हूं।’ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘आतंक के खिलाफ पूरा देश एकजुट है। सरकार जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने के खोखले दावों के बजाय अब जवाबदेही ले। साथ ही, सरकार ठोस कदम उठाए -ताकि आगे ऐसी बर्बर घटनाएं न होने पाएं और निर्दोष भारतीय यूं अपनी जान न गंवाएं।’

पहलगाम आतंकी हमले में 26 टूरिस्ट की मौत, नाम पूछकर मारी गोली, NIA करेगी जांच

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले 26 टूरिस्ट की मौत हुई है। मृतकों में सभी पुरुष हैं। आतंकियों के हमले का निशाना बने पर्यटकों में दो विदेशी नागरिक हैं। बड़े आतंकी हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह श्रीनगर के लिए रवाना हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निर्देश मिलने के बाद गृह मंत्री नई दिल्ली से पहलगाम के लिए रवाना हुए हैं। आतंकी हमले में काफी टूरिस्ट घायल हुए हैं हालांकि अभी तक दो टूरिस्ट की मौत की पुष्टि हुई है। नई दिल्ली में हाईलेवल बैठक के बाद गृह मंत्री अमित शाह श्रीनगर में भी उच्चस्तरीय बैठक कर सकते हैं। पीएम मोदी और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने आतंकी हमले में मारे गए लोगों के लिए शोक व्यक्त किया है। किसी को नहीं छोड़ेंगे: शाह जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले से दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं मृतकों के परिजनों के साथ हैं। इस जघन्य आतंकी हमले में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और हम अपराधियों पर कठोरतम कार्रवाई करेंगे। अमित शाह ने आगे लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को घटना के बारे में जानकारी दी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की। सभी एजेंसियों के साथ तत्काल सुरक्षा समीक्षा बैठक करने के लिए जल्द ही श्रीनगर के लिए रवाना होऊँगा।   बैसरन वैली में हुआ आतंकी हमला पहलगाम यह आतंकी हमला मशहूर बेताब वैली से 10 किमी दूर स्थित बैसरन वैली में उस वक्त हुआ जब टूरिस्ट का एक ग्रुप घास पर घुड़सवारी का आनंद ले रहा है। आतंकी हमले के बाद सामने आए वीडियो में इस बात की पुष्टि हुई है कि हथियारबंद हमलावरों ने नाम पूछकर गोली मारी। हमले के बाद सामने आए वीडियो में आतंकवादियों की क्रूरता बयां हुई है। महिला ने वीडियो में बताया है कि महिला ने बताया कि आतंकियों ने नाम पूछा और गोली मार दी। इसी वीडियो में एक और महिला महिला बुरी तरह रो रही हैं और ये कह रही हैं कि भगवान के लिए मेरे पति को बचा लो। वीडियो में एक शख्स कहता है कि आप टेंशन मत लो, आप यहां पर रहो। ठीक है ठीक है हम बचा देंगे। मैं आ रहा हूं।   कुछ साल पहले बना था टूरिस्ट प्वाइंट पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी लश्कर के समर्थित टीआरएफ  संगठन ने ली है। यह संगठन लश्कर ए तैयबा का हिजबुल मुजाहिद्दीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसा ही संगठन है। जम्मू कश्मीर इसके सबूत मिले हैं कि इस आतंकी संगठन के पीछे लश्कर ए तैयबा ही है। आतंकियों ने दूसरे राज्यों के जिन टूरिस्ट पर हमला किया वह बैसरन घाटी का टूरिस्ट प्वाइंट चार-पांच साल पहले ही बना था। घाटी में माहौल बदलने के बाद बड़ी संख्या में टूरिस्ट इस प्वाइंट पर पहुंच रहे थे। पहलगाम के इस आतंकी हमले में सामने आया है कि कुछ आतंकी पुलिस की वर्दी में थे। इसलिए वे पर्यटकों के पास तक आसानी से पहुंच गए। पहलगाम हमले की चौतरफा निंदा पहलगाम के बैसरन टूरिस्ट प्वाइंट पर पर्यटकों के हमले को लेकर जहां केंद्र सरकार एक्शन में आ गई है ताे वहीं दूसरी तरफ जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला ने हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आर्मी चीफ से बात की है। जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने इस कायरतापूर्ण कृत्य करार दिया है। घायलों को एयरलिफ्ट किए जाने की संभावना पर भी विचार हो रहा है।

भविष्य में ड्राइवर का काम एआई से होगा, इसके खतरनाक परिणाम होंगे, लोग बेरोजगार हो सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से हो रहे आविष्कार से तमाम सुविधाएं मिल रही हैं तो रोजगार से जुड़ी चिंताएं भी लोगों को सता रही हैं। इस चिंता में अब सुप्रीम कोर्ट भी शामिल हो गया है। अदालत ने मंगलवार को एक केस की सुनवाई के दौरान कहा कि भविष्य में ड्राइवर का काम एआई से होगा। इसके खतरनाक परिणाम होंगे और बड़े पैमाने पर लोग बेरोजगार हो सकते हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही, जिसमें मांग की गई थी कि सरकार को इलेक्ट्रिकल वीकल्स की खरीद और उनके इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करने वाली नीति बनाने को को कहा जाए। इसी दौरान अदालत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण ड्राइवरों के रोजगार पर भी असर पड़ेगा। अदालत ने कहा, ‘हमारी चिंता यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से इन ड्राइवरों का रोजगार नहीं जाना चाहिए। भारत में ड्राइवर की नौकरी भी रोजगार का एक बड़ा माध्यम है।’ मजाकिया अंदाज में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि एआई से तो वकीलों को भी टक्कर मिल रही है। ऐसे टूल आ गए हैं, जिनसे आप कोई भी कानूनी राय ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से बढ़ती हुई तकनीक है। कुछ महीनों में ही कोई एक अच्छा मॉड्यूल आ जाता है। फिलहाल हम देख रहे हैं कि AI आधारित एडवोकेट टूल हैं। अमेरिका में तो इनका खूब इस्तेमाल हो रहा है। हमें भी वकीलों को लेकर चिंता होती है। बता दें कि भारत में भी बड़े-बड़े उद्योगपति इसे लेकर चिंता जताते रहे हैं। कॉन्टेंट राइटिंग, कंसल्टेंसी समेत कई ऐसे बिजनेस हैं, जिन पर AI के चलते विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इलेक्ट्रिक कारों की खरीद की नीति को लेकर दायर पीआईएल के लिए प्रशांत भूषण पक्ष रख रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिकल वीकल्स को तेजी से बढ़ावा देना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों में 14 तो भारत के ही हैं। उन्होंने कहा कि मेरी मांग है कि सरकार खुद ऐसी नीति लागू करे। उन्होंने कहा कि सरकार यदि आगे नहीं बढ़ेगी तो फिर दूसरे विभाग कैसे आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को बेसिक इन्फ्रा मुहैया कराना चाहिए। प्रशांत भूषण ने कहा कि 400 किलोमीटर की दूरी पर इलेक्ट्रिक वीकल्स की चार्जिंग सेंटर मिलते हैं। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि हमें कुछ समय दिया जाए। फिर हम बताएंगे कि आखिर सरकार की इसे लेकर क्या नीति है। अदालत ने अब इस मामले की सुनवाई के लिए 14 मई की तारीख तय की है।

मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठक से पहले मुख्य सचिव को निर्देश दिए, तबादला नीति 2025 का प्रारूप प्रस्तुत किया जाए

भोपाल प्रदेश में अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले से प्रतिबंध एक मई से हट जाएगा। तबादले एक से 30 मई में के बीच किए जा सकेंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में कैबिनेट बैठक से पहले मुख्य सचिव अनुराग जैन को निर्देश दिए कि अगली कैबिनेट बैठक में तबादला नीति 2025 का प्रारूप प्रस्तुत किया जाए। प्रदेश में वर्ष 2021 में तबादला नीति घोषित की गई थी, उसके बाद से सामान्य तबादलों पर प्रतिबंध है। केवल मुख्यमंत्री समन्वय के माध्यम से ही तबादले किए जा रहे हैं। मंत्रियों की मांग और प्रशासनिक व्यवस्था को देखते हुए सरकार ने 29 जनवरी 2025 को तबादला नीति में संशोधन कर यह प्रविधान किया था कि विशेष परिस्थिति में प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले विभागीय मंत्री के अनुमोदन से किए जा सकते हैं। इसमें गंभीर बीमारी, न्यायालय के दिशा-निर्देश, गंभीर शिकायत, लोकायुक्त या आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो द्वारा किसी शासकीय सेवक के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने या जांच प्रभावित किए जाने की संभावना, निलंबन, त्यागपत्र, प्रतिनियुक्ति से वापसी और कर्मचारी के निधन से रिक्त पद की पूर्ति को शामिल किया गया था। यह व्यवस्था भी अधिक कारगर नहीं हुई। जनप्रतिनिधि भी तबादले से प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे थे। इसे देखते हुए अब सरकार ने तय किया है कि तबादले पर से प्रतिबंध एक से 30 मई तक के लिए हटा दिया जाएगा। इस अवधि में प्रशासनिक और स्वैच्छिक आधार पर तबादले किए जा सकेंगे। जिले के भीतर तबादले करने का अधिकार प्रभारी मंत्री के पास रहेगा। मुख्यमंत्री समन्वय के माध्यम से हुए तबादले उसी सूरत में निरस्त किए जा सकेंगे, जब मुख्यमंत्री समन्वय से ही अनुमति प्राप्त कर ली गई हो। आदिवासी क्षेत्रों में तबादला करने से पहले यह जरूर देखना होगा कि वहां पद रिक्त तो नहीं हो जाएगा। यदि ऐसी स्थिति बनती है तो पहले उस स्थान की पूर्ति सुनिश्चित करनी होगी। 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होंगे तबादले विभागीय सूत्रों का कहना है कि किसी भी संवर्ग में 20 प्रतिशत से अधिक तबादले करने का अधिकार नहीं दिया जाएगा। यदि कोई संवर्ग 200 का है तो 20 प्रतिशत तबादले किए जा सकेंगे। 201 से लेकर 2000 तक के संवर्ग में 10 प्रतिशत और 2000 से अधिक के संवर्ग में पांच प्रतिशत तक ही तबादले करने का अधिकार दिया जाएगा।  

छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी का प्रकोप, कई जिलों में लू की आशंका

रायपुर छत्तीसगढ़ में मौसम ने करवट बदल ली है। प्रदेश के कई हिस्सों में तेज धूप और भीषण गर्मी का प्रकोप बढ़ने की संभावना है। प्रदेश में  अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री वृद्धि होने की संभावना है। इसके बाद तापमान में कोई विशेष परिवर्तन की संभावना नहीं है। वहीं मध्य भागों में 48 घंटे के बाद अधिकतम तापमान 41 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। उत्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ के जिलों में लू की स्थिति गंभीर होती जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार, पूर्व पश्चिम गत मध्य पाकिस्तान और उसे सेट उत्तर पश्चिमी राजस्थान पर चक्रवती परिसंचरण से लेकर दक्षिण उत्तर प्रदेश झारखंड और उत्तर गंगीय पश्चिम बंगाल होते हुए मध्य बांग्लादेश तक औसत समुद्र से 0.9 कमी ऊपर बना हुआ है। इसके प्रभाव से प्रदेश में मौसम मिजाज बदला हुआ है। आने वाले दिनों में तेज धूप के साथ भीषण गर्मी पड़ने की संभावना है। मौसम एक्सपर्ट ने बताया कि प्रदेश के एक दो जगह पर हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना है। आज मंगलवार को राजधानी रायपुर में मौसम साफ रहने की संभावना है। हालांकि शाम को मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। आंशिक मेघमय रहने की संभावना है। यहां अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। पिछले 24 घंटे में प्रदेश के एक-दो जगह पर अति हल्की से हल्की बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में सबसे गर्म बिलासपुर रहा। यहां सर्वाधिक अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 24.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।  

कोई भी विवेकशील वकील संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ऐसी तुच्छ याचिका दायर नहीं करेगा, सुप्रीम कोर्ट भड़का

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका के जरिए मांगी गई राहत को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने मंगलवार को वकील पर याचिकाकर्ता के रूप में याचिका दायर करने के लिए 5 लाख रुपये का जुर्माना लगा दया और कहा कि उसने कोर्ट का माहौल खराब किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने वकील संदीप टोडी को चार सप्ताह का समय दिया है। इस समयसीमा के भीतर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के खातों में राशि जमा करने को कहा है। साथ ही, यह पता लगाने के लिए 6 सप्ताह बाद याचिका को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया कि क्या पैसा जमा किया गया था। जस्टिस नाथ ने कहा, ‘आपने इस अदालत का माहौल खराब कर दिया है। कोई भी विवेकशील वकील संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ऐसी तुच्छ याचिका दायर नहीं करेगा।’ संविधान का अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारात्मक तरीकों के अधिकार की गारंटी देता है। साथ ही, यह सुनिश्चित करता है कि व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। पीठ ने कहा, ‘अगर हम याचिका को साधारण तरीके से वापस लेने की अनुमति देते हैं तो इससे गलत संदेश जाएगा।’ याचिका में क्या रखी गई थी मांग पीठ ने वकील पर जुर्माना लगाते हुए उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दी। वकील की याचिका में पारिवारिक विवाद में एक व्यक्ति को दी गई राहत पर रोक लगाने की मांग की गई थी। बीते 25 मार्च को दायर याचिका में कुटुंब न्यायालय, मुंबई के 25 सितंबर 2019 के आदेश को चुनौती दी गई। इसके मद्देनजर वर्तमान प्रतिवादी संख्या 4 (नेहा टोडी जिन्हें नेहा सीताराम अग्रवाल के नाम से भी जाना जाता है) के पक्ष में दी गई सभी राहतों पर एकपक्षीय रोक लगाने का आदेश देने की मांग रखी गई। याचिका में केंद्र, मुंबई की एक कुटुंब अदालत और बंबई उच्च न्यायालय को प्रतिवादी बनाया गया है।

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