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ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्‍ताओं को अब मात्र 5 रुपये में नवीन घरेलू कनेक्‍शन उपलब्‍ध कराना शुरू किया

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी कार्यक्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्‍ताओं को अब मात्र 5 रुपये में नवीन घरेलू कनेक्‍शन उपलब्‍ध कराना शुरू कर दिया है। कंपनी ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले उपभोक्‍ताओं को अब केवल 5 रूपये में नवीन विद्युत कनेक्‍शन उपलब्‍ध कराया जा रहा है। यह नया घरेलू कनेक्‍शन उन लोगों को मिलेगा जो कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के घरेलू फीडर से नियमानुसार कनेक्‍शन लेने की पात्रता रखते हैं। कंपनी ने बताया कि इसके लिए ग्रामीणजन नवीन कनेक्‍शन के लिए आवेदन सरल संयोजन पोर्टल के माध्‍यम से कर सकते हैं। कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in पर जाकर New connection चुनें। इसके बाद Lt new connection टैब में सरल संयोजन को चुनें और आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। इसके अलावा पोर्टल पर सीधे https://saralsanyojan.mpcz.in:8888/home पर जाकर भी 5 रुपये में नए कनेक्‍शन के लिए आवेदन किया जा सकता है। ग्रामीण उपभोक्‍ता इस कार्य के लिए वितरण केन्‍द्र पर जाकर आवेदन कर सकते हैं अथवा कंपनी के टोल फ्री नंबर 1912 पर कॉल भी कर सकते हैं। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्‍ता चाहें तो नवीन कनेक्‍शन के लिए अपना आवेदन एम.पी. ऑनलाइन एवं कॉमन सर्विस सेंटर के माध्‍यम से भी कर सकते हैं।

बिजली कार्मिक 24 अप्रैल से 30 अप्रैल 2025 तक अपने स्थानान्तरण के लिये आवेदन कर सकते हैं

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कर्मचारियों (नियमित/संविदा) के सेवा संबंधी मामलों में विस्तार करते हुए कार्मिकों के स्वयं के व्यय पर स्थानान्तरण की सुविधा को और अधिक सरल बनाते हुए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्‍ध कराई है। कंपनी ने अपने कार्य क्षेत्र के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं लाइन स्टॉफ को स्वयं अथवा परिवार में किसी सदस्य की गंभीर बीमारी, पति/पत्नी के शासकीय सेवा में अन्यत्र स्थान पर कार्यरत होने पर/शासकीय अनुदान प्राप्त संस्था में कार्यरत होने पर आपसी स्थानांतरण तथा अन्य कारणों से उनके स्वयं के व्यय पर स्थानान्तरण के लिये ऑनलाइन आवेदन की सुविधा प्रदान की है। कंपनी ने कहा है कि कार्मिक 24 अप्रैल से 30 अप्रैल 2025 तक अपने स्थानान्तरण के लिये आवेदन कर सकते हैं। कोई भी कार्मिक एक ही बार ऑनलाइन स्थानांतरण आवेदन प्रस्तुत (सबमिट) कर सकेगा। स्थानांतरण के लिये केवल ऑनलाईन आवेदन ही स्वीकार किये जायेंगे। किसी भी स्थिति में ऑफलाईन आवेदन स्वीकार नहीं किये जायेंगे। महाप्रबंधक तथा समकक्ष अधिकारी एवं उनसे उच्च पद के अधिकारी स्थानांतरण हेतु ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन प्रस्तुत नहीं कर सकेंगे। ऐसे अधिकारी कर्मचारी जिनकी एक ही स्थान पर पदस्थापना की अवधि 01 वर्ष से कम है, उनके आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। स्थानान्तरण के लिये ऑनलाइन आवेदन करने की लिंक कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in पर इंटरनल यूज एप्‍लीकेशन के अंतर्गत ‘’Employee Transfer Module’’ के नाम से उपलब्ध है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने कहा है कि इस नई व्यवस्था से कंपनी कार्मिकों को अन्‍य दफ्तरों में जाए बिना स्‍थानांतरण के आवेदन की सुविधा उपलब्‍ध कराई गई है। ऑनलाइन प्रक्रिया में आवेदन में दिये गये विकल्प स्थानों पर कार्मिक स्वयं के व्यय पर अपना स्थानान्तरण करा सकेंगे।  

योन्सू शहर में मौजूद लकड़ी से बनी 14 मंजिला इमारत, फिनलैंड में लकड़ी पर तकनीक की ‘कारीगरी’

योन्सू (फिनलैंड) जंगल से कैसे मंगल हो सकता है पूरी दुनिया के सामने सबसे खुशहाल देश फिनलैंड गजब का उदाहरण पेश कर रहा है। फिनलैंड में वनों से तकनीक का ऐसा संगम हुआ कि जरूरत की हर वस्तु वनों से ही मिलने लगी। वाटरप्रूफ लकड़ी से लेकर पहने के लिए कपड़े, पेट्रोल-डीजल से लेकर हाथ टूटने पर चढ़ाया जाने वाला प्लास्टर, यहां तक की प्लास्टिक का विकल्प तक तैयार कर लिया गया है। हालही में मुझे यूरोपीय यूनियंस के वनों पर आधारित एक अध्ययन दल में शामिल होने का मौका मिला।   योन्सू शहर में मौजूद लकड़ी से बनी 14 मंजिला इमारत कई दिनों तक मैंने फिनलैंड के नार्थ करेलिया,लैपलैंड और राजधानी हेल्सिंकी में वनों को लेकर हो रहे बेजोड़ कामों को करीब से जाना और समझा। ल्यूक और यूरोपीयन फोरेस्ट इंस्टीट्यूट बड़े-बड़े रिसर्च संस्थानों में वैज्ञानिक दिनरात इसी काम में जुटे हैं कि कैसे लकड़ी और वनों से निकलने वाली एक-एक कण का इस्तेमाल इस ढंग से किया जाए कि हर बदलते रूप में इसका सतत उपयोग हो सके। भारत में यदि इस दिशा में काम हो तो निश्चित तौर से बंजर जमीनों पर वन लगाकर हम भी बड़ी आबादी की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। देखें वनों ने कैसे दिखाई पर्यावरण संरक्षण की राह 1. कपड़े फिनलैंड की एक कंपनी मेट्सा ने पालिस्टर और काटन के विकल्प के रूप में कुर्रा टेक्सटाइल फाइबर बनाया है। इसके कपड़े बिल्कुल वैसे ही होते हैं जैसे हम अभी पहनते हैं। अगले साल तक कमर्शियल स्तर पर इसका उत्पादन होने लगेगा। यह साफ्टवुड पल्प से बनाया जाता है। कंपनी ने अपने द्वारा संरक्षित जंगलों में ही इस पेड़ को ऊंगा लिया है। 2. प्लास्टिक जैसा पैकिंग मटैरियल्स फिनलैंड में परंपरागत पैकेजिंग की जगह जैव-आधारित पैकेजिंग तैयार कर ली है। प्लास्टिंक जैसा ही मटेरियल है जिसे पेप्टिक कहा जाता है इसे ईकामर्स और अन्य चीजों की पैकेजिंग में उपयोग किया जाने लगा है। इसके अलावा सिंगल यूज के लिए प्लास्टिक जैसी प्लेट्स,कटोरी,चम्मच भी वनों से मिली संपदा से ही तैयार हो रहा है। बड़ी बात यह है कि बड़े पैमान पर यह उपयोग में भी लिया जा रहा है। 3. जल-अग्नि रोधी लकड़ी फिनलैंड ने लकड़ी को पानी न सोखने वाला (जलरोधक) बनाने में बड़ी सफलता हासिल की है। अग्निरोधी (फायरप्रूफ) लकड़ी पर शोध भी जारी है। इसके लिए लकड़ी के गत्ते पर एक विशेष दबाव और केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। बड़ी बात यह है कि इस विधि से लकड़ी की अधिकांश किस्मों को कंस्ट्रक्शन में उपयोग किया जा सकता है। 4.लकड़ी से निकलेगा ईंधन का विकल्प कागज बनाने की प्रक्रिया में निकलने वाला एक उप-उत्पाद ‘लिग्निन’ अब जीवाश्म ईंधनों का टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रहा है। यह वही प्राकृतिक तत्व है जो लकड़ी के रेशों को आपस में जोड़े रखता है। जब लकड़ी से पल्प (गूदा) तैयार किया जाता है, तो यह लिग्निन एक गाढ़े तरल रूप में अलग हो जाता है, जिसे ‘ब्लैक लिकर’ कहा जाता है। योन्सू सहित पूरे फिनलैंड में इस पर रिसर्च जारी है। अब वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों की नजर इसी ब्लैक लिकर पर है, क्योंकि इसमें जैव ऊर्जा उत्पादन की जबरदस्त क्षमता है। यानी वह ऊर्जा जो पारंपरिक कोयले या पेट्रोलियम की जगह इस्तेमाल हो सके।  

विधवा पेंशन योजना: 25,000 महिलाओं की कटेगी पेंशन, मिली गड़बड़ी

नई दिल्ली गलत तरीके से सरकारी योजना का लाभ लेने वालों पर अब सरकार सख्त है। दिल्ली में पेंशन लेने वालों के दस्तावेज की जांच की गई तो हजारों की संख्या में गड़बड़ी उजागर हुई है। गलत तरीके से सरकारी योजना का लाभ लेने वालों पर अब सरकार सख्त है। दिल्ली में पेंशन लेने वालों के दस्तावेज की जांच की गई तो हजारों की संख्या में गड़बड़ी उजागर हुई है। बता दें कि दिल्ली में पेंशन के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े और गलत तरीके से सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने वालों पर सिकंजा0 कसना शुरू कर दिया है। वहीं दिल्ली में 2.3 लाख महिलाओं के रिकॉर्ड की जांच की गई तो 25,000 महिलाओं के नाम ऐसे मिले जो गलत तरीके से पेंशन ले रही थीं। विधवा पेंशन में मिली गड़बड़ी  पेंशन योजना के अंतर्गत सरकार 3.8 लाख महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये के हिसाब से पेंशन मिल रही थी। हालांकि 2025-26 में बीजेपी सरकार ने इसे बढ़ाकर 3000 रुपये महीने करने का भी ऐलान कर दिया है। जांच  में पाया गया है कि विधवा पेंशन योजना में गड़बड़ियां चल रही हैं। बता दें कि प्रशासन को लंबे समय से काफी शिकायतें मिल रहीं थीं। इसके बाद सरकार ने पिछले साल नवंबर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर जांच शुरू कराई तो फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ। 2.28 लाख महिलाओं के दस्तावेजों की हुई जांच दिल्ली में ‘अब तक 2.28 लाख लाभार्थियों की जांच कराई जा चुकी है, जिनमें से 25,000 अपात्र महिलाएं पेंशन का लाभ ले रहीं थीं तो वहीं कुछ महिलाओं ने तलाक के बाद दोबारा शादी कर ली। इसके बावजूद पेंशन का पैसा खाते में लगातार आ रहा था। जबकि कुछ महिलाएं  नौकरी कर रहीं हैं और उन्हें अच्छा तनख्वाह मिल रही है। गलत तरीके से ले रहे पेंशन पर लगी रोक सबसे बड़ी बात अब जो समाने आई है कि अब उन महिलाओं के खाते में पैसा भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो जांच में एकदम सही पाई गई हैं। अफसरों की मानें तो बाकी लाभार्थियों का सत्यापन भी जल्द करायेंगे और पात्र महिलाओं के खाते में पैसा आना शुरू हो जाएगा। बता दें कि राज्य सरकार महिलाओं की पेंशन पर हर साल 1140 करोड़ रुपये खर्च करती है। दिल्ली में विधवा पेंशन 500 रुपए राजधानी दिल्ली में विधवा पेंशन पहले साल 6288 महिलाओं को 600 रुपये महीने के हिसाब से पेंशन दी गई। यह पेंशन 18 से 59 साल की महिलाओं को दी जाती है। विधवा पेंशन योजना को लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट में बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने पेंशन में 500 रुपये की गई है वहीं सरकार ने कहा था कि इसे बढ़ाकर 3000 रुपये महीने किया जाएगा। विधवा पेंशन के लिये करें सरकार के गाइड लाइन का पालन विधवा पेंशन योजना की पात्रता के लिए सरकार ने अपनी गाइड लाइन जारी की है। महिला को कम से कम 5 साल से दिल्ली का निवासी होना चाहिए। यही नहीं महिला के परिवार की वार्षिक आय 1 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। एक शर्त यह भी है कि यह पेंशन उन्हीं महिलाओं को मिलेगी, जिन्होंने दोबारा शादी नहीं की है।  

प्रदेश में 10 मई को नेशनल लोक अदालत आयोजित होगी, शर्तों के तहत दी जाएगी छूट

भोपाल प्रदेश में 10 मई 2025 (शनिवार) को नेशनल लोक अदालत आयोजित होगी। इसमें बिजली चोरी एवं अनियमितताओं के प्रकरण को समझौते के माध्यम से निराकृत किया जाएगा। विद्युत वितरण कंपनी द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि धारा 135 के अंतर्गत अदालत में लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिये निम्नदाब श्रेणी के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलोवॉट तक के गैर घरेलू एवं 10 अश्व शक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं को ही प्रकरणों में छूट दी जाएगी। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने विद्युत अधिनियम 2003 धारा 135 के अंतर्गत न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विद्युत उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अप्रिय कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए अदालत में समझौता करने के लिए संबंधित बिजली कार्यालय से संपर्क करें। प्री-लिटिगेशन स्तर पर – कंपनी द्वारा आकलित सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत एवं आकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात प्रत्‍येक छः माही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।   लिटिगेशन स्तर पर – कंपनी द्वारा आकलित सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं आकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात प्रत्येक छः माही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। लोक अदालत में छूट शर्तों के तहत दी जाएगी आवेदक को निर्धारित छूट के उपरांत शेष बिल आंकलित सिविल दायित्व एवं ब्याज की राशि का एकमुश्त भुगतान करना होगा। उपभोक्ता/उपयोगकर्ता को विचाराधीन प्रकरण वाले परिसर एवं अन्य परिसरों पर उसके नाम पर किसी अन्य संयोजन/संयोजनों के विरूद्ध विद्युत देयकों की बकाया राशि का पूर्ण भुगतान भी करना होगा। आवेदक के नाम पर कोई वैध कनेक्शन न होने की स्थिति में छूट का लाभ प्राप्त करने हेतु आवेदक द्वारा वैध कनेक्शन प्राप्त करना एवं पूर्व में विच्छेदित कनेक्शनों के विरूद्ध बकाया राशि (यदि कोई हो) का पूर्ण भुगतान किया जाना अनिवार्य होगा। नेशनल लोक अदालत में छूट आवेदक द्वारा विद्युत चोरी/अनधिकृत उपयोग पहली बार किये जाने की स्थिति में ही दी जाएगी। विद्युत चोरी/अनधिकृत उपयोग के प्रकरणों में पूर्व की लोक अदालत/अदालतों में छूट प्राप्त किये उपभोक्ता/उपयोगकर्ता छूट के पात्र नहीं होंगे। सामान्य बिजली बिलों में जुड़ी बकाया राशि पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। नेशनल लोक अदालत में उपरोक्‍तानुसार दी जा रही छूट आकलित सिविल दायित्‍व राशि दस लाख रुपये तक के प्रकरणों के लिए सीमित रहेगी। यह छूट मात्र नेशनल ‘‘लोक अदालत‘‘ 10 मई 2025 को समझौते करने के लिये ही लागू रहेगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- 27 अप्रैल को इंदौर में आईटी और 3 मई को मंदसौर में होगा एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के युवाओं की आत्मनिर्भरता और रोजगार के लिए राज्य सरकार सभी क्षेत्रों में कार्य कर रही है। उद्योगों में निवेश प्रोत्साहन के लिए आगामी 27 अप्रैल को इंदौर में आईटी इंडस्ट्री-कॉन्क्लेव और 3 मई को एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव मंदसौर में आयोजित की जा रही है। मालवांचल सहित प्रदेश में कृषि और किसानों की समृद्धि के लिए कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं। उन्नत फसलों और पशुपालन से किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। राज्य सरकार किसानों को सोलर पंप प्रदान कर बिजली के बिल से बोझ से उन्हें मुक्त करने के लिए भी कार्य कर रही है। किसान खेती की नई तकनीक की जानकारी प्राप्त करें और नवाचारों से प्रेरणा लें, इस उद्देश्य से कृषि पर केन्द्रित कॉन्क्लेव आयोजित किया जा रहा है। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में हरसंभव प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश का किसान सम्पन्न होगा तो प्रदेश और देश भी समृद्ध होगा। राज्य सरकार युवा, महिला और किसान के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मीडिया के लिए जारी संदेश में यह विचार व्यक्त किए।  

पदोन्नति और वेतन लाभ का मामला अटका, वित्त विभाग की आपत्ति, पुरानी तारीख से आर्थिक लाभ देने पर सहमति नहीं

भोपाल मध्य प्रदेश में नौ वर्ष के बाद पदोन्नति नियम तैयार किए जा रहे हैं लेकिन वेतन के लाभ का मामला अटका हुआ है। यह कब से दिया जाएगा, तय नहीं हो पा रहा है। सरकार ने पदोन्नति बंद होने के कारण कर्मचारियों की नाराजगी को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर उच्च पदों का प्रभार तो दिया लेकिन आर्थिक लाभ नहीं दिया। अब जब पदोन्नति की प्रक्रिया प्रारंभ होगी तो वेतन लाभ 2016 से दिया जाए या फिर आदेश के समय से, इस पर कोई राय नहीं बन पा रही है। प्रदेश में पदोन्नति नियम 2002 के निरस्त होने के बाद वर्ष 2016 से पदोन्नतियां बंद हैं। बड़े पद खाली होते जा रहे थे सेवानिवृत्ति होते रहने और पदोन्नति न होने के कारण उच्च पद रिक्त होते जा रहे थे। इसे देखते हुए उच्च पद का प्रभार देकर काम तो चलाया गया लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों को आर्थिक लाभ नहीं हुआ। वेतन लाभ का मामला अटका प्रभार संबंधी आदेश में इसका उल्लेख किया गया कि आर्थिक लाभ नहीं दिया जाएगा और न ही वे इसका दावा कर सकेंगे लेकिन कर्मचारी आश्वस्त हैं कि सरकार उन्हें निराश नहीं करेगी और हक मिलेगा। वेतन लाभ का मामला अटका हुआ है। यह कब से दिया जाए, इसको लेकर शासन स्तर पर कोई राय नहीं बनी है। वित्त विभाग के साथ अभी जो अनौपचारिक चर्चा हुई है, उसमें वह इस बात को लेकर सहमत नहीं है कि पुरानी तारीख से आर्थिक लाभ दिया जाए यानी जिस तिथि से पदोन्नति दी जाए, उस समय से ही आर्थिक लाभ भी दिया जाए। अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री लेंगे सूत्रों का कहना है कि इस मामले में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सभी पक्षों से चर्चा के बाद लेंगे ताकि नौ वर्ष बाद विवादित मामले का जो निराकरण हो रहा है, वह फिर न्यायिक प्रक्रिया में न उलझ जाए। यही कारण है कि पदोन्नति नियम बनाने में विभिन्न न्यायालयों द्वारा समय-समय पर दिए निर्देशों का ध्यान रखा जा रहा है और यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि सबके हित सुरक्षित रहें।

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