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अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने पहलगाम हमले की निंदा करते हुए भारत की मदद करने की बात कही

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले पर अमेरिकी सहित ज्यादातर देशों ने चिंता जाहिर की है। दुनिया के ज्यादातर देशों ने इस हमले के बाद भारत के प्रति सहानुभूति जाहिर की।  इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने पहलगाम हमले की निंदा करते हुए भारत की मदद करने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,”हम पहलगाम में 26 हिंदुओं को निशाना बनाकर किए गए भीषण इस्लामी आतंकवादी हमले के खिलाफ भारत के साथ एकजुटता से खड़े हैं। उन्होंने आगे कहा कि मेरी प्रार्थनाएं और गहरी संवेदनाएं उन लोगों के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के सभी लोगों के साथ हैं। हम आपके साथ हैं और इस जघन्य हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को पकड़ने में आपका समर्थन करते हैं। बता दें कि दुनिया के ज्यादातर देशों ने इस घटना पर चिंता जाहिर की है। कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने पीएम मोदी के साथ फोन पर बातचीत की और हमले पर चिंता जाहिर की। ब्रिटेन ने की हमले की निंदा ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी शुक्रवार को पहलगाम आतंकी हमले पर को ‘वीभत्स’  घटना करार दिया है। स्टारमर ने ब्रिटिश लोगों की ओर से अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और दोनों नेताओं ने संपर्क में रहने पर सहमति जताई। ब्रिटेन के सांसदों ने भी जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की है। ब्रिटेन के सांसद तनमनजीत सिंह धेसी ने उम्मीद जताई कि हमले के पीछे के अपराधियों को जल्द ही न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।

पितृ पर्वत पहुँचे उप मुख्यमंत्री शुक्ल, हनुमानजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने शुक्रवार को दोपहर पितृ पर्वत पहुँचकर श्री हनुमानजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इस मौके पर पूर्व विधायक श्री आकाश विजयवर्गीय भी साथ थे। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने श्री विजयवर्गीय के साथ सम्पूर्ण मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए कहा कि मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय एवं जागरूक नागरिकों ने एक निर्जन पहाड़ी पर लाखों पौधों का रोपण कर उसे हरियाली में तब्दील कर दिया है। इसे आज हम पितृ पर्वत के नाम से जानते हैं। पितृ पर्वत पर इतना सघन पौध-रोपण बगैर इच्छा शक्ति के संभव नहीं है, लेकिन श्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी इच्छा शक्ति से करके दिखा दिया। पितृ पर्वत आज इंदौर का प्रमुख दर्शनीय स्थल बन चुका है।

विक्रम उद्योगपुरी को मेगा इन्वेस्टमेंट जोन के रूप में विकसित करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विक्रम उद्योगपुरी को मेगा इन्वेस्टमेंट जोन के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया जाए। उज्जैन में आईटी पार्क के द्वितीय चरण का कार्य समय सीमा निर्धारित कर पीपीपी मोड पर तत्काल आरंभ किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएसआईडीसी) के संचालक मंडल की बैठक में निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने औद्योगिक कम्पनियों को दीर्घकालीन, अल्पकालीन ऋण, पूंजीगत सब्सिडी आदि के रूप में दी जाने वाली वित्तीय सहायता के संबंध में जानकारी प्राप्त करते हुए ऋणों की वसूली की स्थिति की जानकारी प्राप्त की। समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में हुई बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेन्द्र सिंह तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में कार्पोरेशन के प्रबंधकीय तथा लेखा संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- वर्तमान और भविष्य की तकनीक का आधार आईटी है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्तमान और भविष्य की तकनीक का आधार आईटी है। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करते हुए समय के साथ चलने के लिए आईटी सेक्टर में निवेश और गतिविधियों का विस्तार आवश्यक है। इसी उद्देश्य से ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद पहली सेक्टर आधारित कॉन्क्लेव आईटी पर केन्द्रित की जा रही है। प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों में आईटी इंडस्ट्री का पर्याप्त आधार विद्यमान है। राज्य सरकार आवश्यक सहयोग और समर्थन उपलब्ध कराकर प्रदेश की आईटी इंडस्ट्री को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर तक व्यापक स्वरूप देने की इच्छुक है। इंदौर में 27 अप्रैल को होने वाली “टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव” इस दिशा में निश्चित ही परिणाममूलक रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में होने वाली आईटी कॉन्क्लेव के संबंध में विभिन्न जिलों के उद्योगपतियों से समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वर्चुअली संवाद कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद में उद्योगपतियों ने आईटी पार्क के विस्तार की आवश्यकता बताई। साथ ही आईटी के क्षेत्र में कार्य कर रहे उद्योगपतियों ने दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा और औद्योगिक गतिविधियों में समन्वय, स्टार्ट-अप में उद्यमिता की संस्कृति को विकसित करने, प्राकृतिक गैस पर टैक्स कम करने और प्रदेश में स्टार्ट-अप कम्युनिटी के मध्य बेहतर समन्वय संबंधी चर्चा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद में वॉक-टू-वर्क सुविधा के साथ आईटी पार्क विकसित करने, प्रदेश में डिजिटल इकोनॉमी मिशन लागू करने और एआई आधारित गतिविधियों की अन्य उद्योगों में स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में कार्य करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों की पहल और नवाचार की सराहना करते हुए उन्हें गतिविधियों के विस्तार के लिए प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह संवाद राज्य शासन और आईटी के क्षेत्र में कार्य कर रहे उद्योगपतियों के बीच मजबूत रिश्तों का आधार बनेगा और सबके सहयोग से मध्यप्रदेश आईटी सेक्टर में अपनी विशेष पहचान स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर, ग्वालियर, भोपाल और इंदौर में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विभिन्न उद्योगपतियों से संवाद किया। जबलपुर के श्री चंद्रेश वीरा प्रेम संस इंटरप्राईजेस और श्री अनुराग श्रीखंडे इंटेनिक्स प्रायवेट लिमिटेड से चर्चा की। ग्वालियर के श्री धर्मेन्द्र कुमार यादव स्मार्ट कंट्रोल इंडिया लिमिटेड, श्री अनुराग श्रीवास्तव आईआईआईटीएम, श्री राजेश खन्ना एसआरएफ लिमिटेड, श्री मुकुल चतुर्वेदी सूर्या रोशनी लिमिटेड और श्री कृष्णकांत चतुर्वेदी कोमोनिफाय वेंचर प्रायवेट लिमिटेड से चर्चा की। भोपाल के श्री मितेश लोकवानी एचएलबीएस, श्री सारंग वर्मा एपोंइटी और श्री अभिषेक गुप्ता वी विन से चर्चा की। इंदौर के श्री संजीव अग्रवाल इम्पेटस, श्री नरेंद्र सेन रेकबैंक, श्री धर्मेंद्र जैन यश टेक्नोलॉजी, सुश्री शानू मेहता एमएमसी कोन्वेर्टर और श्री आदित्य शास्त्री डेटा प्योर से चर्चा की। उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को उनकी कम्पनियों के कार्यों, निवेश, रोजगार की जानकारी से अवगत कराया। आईटी और संबंधित क्षेत्रों में मध्यप्रदेश को अग्रणी बनाने के संबंध में सुझाव भी दिए। अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने 27 अप्रैल को आयोजित “टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव” के कार्यक्रम के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जीसीसी, ड्रोन, एवीजीसी और सेमीकॉन नीति के संबंध में चार राउंड टेबल मीटिंग का आयोजन किया जाएगा। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत गठित सलाहकार बोर्ड के सदस्यों से वीसी के माध्यम से चर्चा की जाएगी। मुख्य कार्यक्रम में टेक डेस्टिनेशन मध्यप्रदेश की फिल्म प्रस्तुति, विभिन्न इकाइयों का भूमि-पूजन किया जाएगा। कार्यक्रम में नवीन स्थापित सेन्ट्रल ऑफ एक्सीलेंस और इन्क्यूबेशन सेन्टर का उद्घाटन भी किया जाएगा। चिहिन्त इकाइयों के साथ समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर किए जाएंगे एवं आवंटन-पत्र भी सौंपे जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य की चार नीतियों जीसीसी नीति, ड्रोन नीति, सेमीकंडक्टर एवं एवीजीसी नीतियों की गाईड लाइंस भी जारी की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में आईटी एवं संबंधित क्षेत्रों के प्रमुख उद्योगपतियों, निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकों का आयोजन भी किया जाएगा। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह, एमडी एमपीएसईडीसी श्री आशीष वशिष्ठ, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एमपीएसईडीसी श्री गुरू प्रसाद सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

जिलाध्यक्षों के नाम घोषित होने के बाद प्रदेश को नया अध्यक्ष मिलने की संभावना थी, लेकिन यह इंतजार बढ़ता जा रहा है

भोपाल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव अबूझ पहेली बनता जा रहा है। जिलाध्यक्षों के नाम घोषित होने के बाद प्रदेश को नया अध्यक्ष मिलने की संभावना थी, लेकिन यह इंतजार बढ़ता जा रहा है। जातिगत, राजनीतिक, क्षेत्रीय सहित विभिन्न समीकरणों को टटोलना के बाद जो नाम सतह पर आए भी थे, उन्हें लेकर भी चर्चाएं थम चुकी हैं। तय माना जा रहा है कि अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष का नाम सामने आएगा। जनवरी में चुनाव अधिकारी बनाए गए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का प्रदेश दौरा भी नहीं बन पाया। उन्होंने किसी नाम पर सहमति बनाने के प्रयास किए हों या रायशुमारी का दौर चला हो, ऐसे प्रयास भी सामने नहीं आए हैं। पार्टी नेताओं का अनुमान है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर सहमति के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों के अध्यक्षों के नाम घोषित होंगे, लेकिन अब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम भी तय नहीं हो सका है। यह पहला अवसर है, जब भाजपा के संगठन चुनाव में बूथ अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष और जिलाध्यक्षों के चुनाव के चार महीने बाद भी प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर संगठन खाली हाथ है। पार्टी सूत्रों के अनुसार छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बड़े कद के नेता कम हैं इसलिए वहां हाईकमान ने निर्णय कर दिया, लेकिन मध्य प्रदेश में मामला उल्टा है। यहां केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, जयभान सिंह पवैया, कैलाश विजयवर्गीय और राकेश सिंह जैसे नेताओं की राय को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है। देरी की एक वजह इन दिग्गजों से रायशुमारी नहीं होना भी है। सत्ता और संगठन में बदलाव के बाद पुराने चेहरों की चिंता अपना किला बचाने की है, तो जिन्हें पीढ़ी परिवर्तन के चलते मौका मिला है, वे अपनी जमीन मजबूत करने के लिए प्रयासरत हैं।  

बर्फ से ढकी चोटियों की 200 मील लंबी शृंखला का नजारा, उत्‍तराखंड का यह हिल स्‍टेशन कुदरत का अनूठा उपहार

देहरादून देवभूमि उत्तराखंड के पौड़ी से आप हिमाच्छादित शिखरों की लगभग 200 मील लंबी शृंखला को सहजता से निहार सकते हैं। समुद्रतल से 5,500 से 8,000 फीट तक की ऊंचाई पर स्थित पौड़ी नगर एक खूबसूरत हिल स्टेशन होने के साथ गढ़वाल जिला व गढ़वाल मंडल का मुख्यालय भी है। देवदार, रोडोडेंड्रोन व ओक के घने जंगल के बीच रिज (कंडोलिया पहाड़ी) की उत्तरी ढलान पर स्थित इस नगर से नंदा देवी, नीलकंठ, कैलास, बंदरपूंछ, भागीरथी, गंगोत्री ग्रुप, जौली, यमुनोत्री, केदारनाथ, भृगुपंथ, खरचा, सुमेरु, कुमलिंग, हाथी पर्वत, नंदा घुंटी, चौखंभा, त्रिशूल आदि हिमशिखरों का मनमोहक नजारा देखते ही बनता है। ट्रेकर, पैराग्लाइडिंग के शौकीन और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी पौड़ी कुदरत का अनुपम उपहार है। औपनिवेशिक काल से पर्यटन से जुड़ाव पौड़ी का पर्यटन से जुड़ाव औपनिवेशिक काल से रहा है। तब गर्मियों में अंग्रेज यहां आराम करने आया करते थे। आजादी के बाद न केवल घरेलू आगंतुकों, बल्कि हिमालय की गोद में रहस्यमय अनुभव तलाशने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के बीच भी यह नगर लोकप्रिय होता चला लगा। यह नगर इतिहास, संस्कृति और प्रकृति को जोड़ता है। इतिहास के पन्ने पलटें तो वर्ष 1804 में पूरे गढ़वाल पर गोरखाओं का नियंत्रण हो गया था। उन्होंने यहां 12 वर्ष राज किया। गोरखों के शासन का अंत वर्ष 1815 में तब हुआ, जब अंग्रेजों ने उन्हें पश्चिम में काली नदी तक खदेड़ दिया। गोरखाओं की हार के बाद 21 अप्रैल 1815 को अंग्रेजों ने गढ़वाल राज्य का आधा हिस्सा, जो अलकनंदा और मंदाकिनी नदी के पूर्व में स्थित है, अपने नियंत्रण में ले लिया। इसे ब्रिटिश गढ़वाल कहा गया। पश्चिम में गढ़वाल का शेष भाग, जो राजा सुदर्शन शाह के पास रहा, वह टिहरी रियासत कहलाया। प्रमुख पर्यटन व तीर्थ स्थल     रांसी स्टेडियम: देवदार और बांज के जंगल के बीच समुद्रतल से 7,000 फीट की ऊंचाई पर नगर के केंद्र से 2.5 किमी की दूरी पर स्थित है रांसी स्टेडियम। इसे एशिया के दूसरे सबसे ऊंचे स्टेडियम का दर्जा हासिल है।     कंडोलिया देवता मंदिर: ओक और पाइन के घने जंगल के बीच शांत वातावरण में 5,500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित कंडोलिया देवता का मंदिर नगर के केंद्र से महज दो किमी के फासले पर है।     नागदेव मंदिर: यह मंदिर पौड़ी-बुबाखाल रोड पर नगर के केंद्र से पांच किमी दूर देवदार और रोडोडेंड्रोन के घने जंगल के बीच स्थित है। मंदिर के रास्ते में एक वेधशाला स्थापित की गई है।     चौखंभा व्यू प्वाइंट: नगर के केंद्र से चार किमी की दूरी पर स्थित इस स्थल से मंत्रमुग्ध कर देने वाले ग्लेशियर देखे जा सकते हैं। रोडोडेंड्रोन और ओक के जंगल का घना आवरण इस जगह का मुख्य आकर्षण है।     कंकालेश्वर (क्यूंकालेश्वर) महादेव मंदिर: नगर के केंद्र से दो किमी दूर 6,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर आठवीं सदी का बताया जाता है।     गगवाड़स्यूं घाटी: कंडोलिया की पहाड़ी से सटी गगवाड़ास्यूं घाटी करीब तीन वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली हुई है। 12 वर्ष के अंतराल में लगने वाला मौरी मेला इस घाटी को विशिष्टता प्रदान करता है।     झंडीधार: यह इस नगर का सर्वोच्च शिखर है जोकि समुद्रतल से लगभग 8,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। कब आएं?     आप पौड़ी में बर्फ से लदी पहाड़ियां देखना चाहते हैं तो सर्दियों में आएं और हरियाली देखने के इच्छुक हैं तो गर्मियों का समय अच्छा रहेगा।     वैसे मार्च से नवंबर तक पौड़ी में खुशनुमा मौसम रहता है, जबकि शीतकाल में जोरदार ठंड पड़ती है।     खाने-ठहरने की यहां कोई दिक्कत नहीं है।     छोटे-बड़े होटल, लाज व होम स्टे बजट के हिसाब से उपलब्ध हैं। ऐसे पहुंचें     जौलीग्रांट स्थित देहरादून एयरपोर्ट पौड़ी से 155 किमी की दूरी पर है।     कोटद्वार निकटतम रेलवे स्टेशन है, जहां से पौड़ी की दूरी 105 किमी है।     ऋषिकेश से भी सीधे पौड़ी पहुंचा जा सकता है।  

मुख्यमंत्री ने की पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा योजना की समीक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हर जीवन अमूल्य है, आपातकालीन चिकित्सकीय परिस्थितियों में व्यक्ति को उन्नत स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सुविधा प्रदेश में आरंभ की गई है। इस सुविधा का व्यापक प्रचार-प्रसार और जिला स्तर पर बेहतर विभागीय समन्वय से क्रियान्वयन आवश्यक है। ऐसे क्षेत्रों में जहां उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां पीपीपी मोड पर चिकित्सालय बनाने के प्रस्ताव तैयार किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा योजना की वृहद समीक्षा की। उन्होंने योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए गृह विभाग, स्वास्थ्य विभाग और विमानन विभाग की समन्वय पूर्वक कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि सेवाओं का बेहतर उपयोग सुनिश्चित कर अमूल्य जीवन का संरक्षण किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आपातकालीन स्थितियों में जैसे सड़क दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा में, ट्रॉमा यूनिट और प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम को घटना स्थल तक एयर एम्बुलेंस द्वारा पहुंचाया जाना चाहिए। इसके साथ ही एयर एम्बुलेंस सेवा के बेहतर उपयोग के लिए सेंसिटिव क्षेत्रों में प्राथमिकता से आवश्यक लैंडिंग अधोसंरचना का विकास करने पर उन्होंने जोर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऐसे क्षेत्र जहाँ सड़क दुर्घटनाएं अधिक होती हैं उन्हें चिन्हित करने और इन क्षेत्रों से ट्रॉमा सेंटर तक जल्दी पहुंचाने के लिए सुनियोजित योजना पर कार्य करने के निर्देश दिये, ताकि शीघ्रता से पीड़ित को चिकित्सकीय सेवाएं मुहैया कराई जा सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिविल सर्जन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कलेक्टर, और पुलिस प्रशासन को सतत संपर्क में रहने और आवश्यकता पड़ने पर एयर एम्बुलेंस सेवा का उपयोग करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही जिला स्तर पर योजना के प्रावधानों और सेवाओं के प्रति विभागीय अधिकारियों को जागरूक करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने बैठक में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं और आपदाओं में गोल्डन ऑवर ट्रीटमेंट अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इसके लिए भारत सरकार सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से आवश्यक सेवाओं के प्रावधान किए जा रहे हैं। मंत्रालय से संपर्क कर सेवाओं के बेहतर उपयोग और प्रबंधन को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना, अपर मुख्य सचिव गृह श्री जे. एन. कंसोटिया, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री शिव शेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य श्री संदीप यादव, आयुक्त विमानन श्री चंद्रमौली शुक्ला सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अब तक 61 रोगियों को मिली पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा का लाभ बैठक में बताया गया कि अब तक 61 मरीजों को पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा का लाभ प्राप्त हुआ है। इनमें से 52 मामलों में निःशुल्क सेवा प्रदान की गई है, जबकि 9 मामलों में सशुल्क सेवा दी गई। इन 61 मामलों में, रीवा जिले से 19 रोगियों का एयर एम्बुलेंस से परिवहन किया गया, जिनमें से 17 को निःशुल्क सेवा मिली। इसके अलावा जबलपुर से 11, भोपाल से 8, छतरपुर से 6, ग्वालियर और दिल्ली से 3-3 मरीजों को एयर एम्बुलेंस सेवा प्राप्त हुई। बालाघाट, इंदौर, और पन्ना से 2-2 रोगियों को और बैतूल, कटनी, नरसिंहपुर, सतना और उज्जैन से 1-1 मरीजों को यह सेवा प्राप्त हुई। इन 61 मामलों में सबसे अधिक 14 प्रकरण हृदय रोग से संबंधित थे। इसके अतिरिक्त श्वसन रोग के 10, सड़क दुर्घटनाओं के 7, और हेड इंजरी एवं स्पाइनल इंजरी के 6 मामले रहे। इसके अलावा, लिवर रोग और अंग दान से जुड़े 3-3, किडनी रोग और बर्न के 2-2 मरीजों को एयर एम्बुलेंस सेवा से उच्च स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुँचाया गया। अन्य 14 गंभीर प्रकरणों में त्वरित रेफरल की आवश्यकता थी। पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से प्रदेश में कहीं भी चिकित्सा आपात स्थिति उत्पन्न होने पर, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में प्रदेश के दूरस्थ अंचलों तक पहुंचकर, उन्नत आपातकालीन चिकित्सा सेवा द्वारा मरीजों को स्थिर कर उच्च चिकित्सा केंद्रों तक एयर लिफ्ट किया जाता है। सेवा के तहत 1 हेली एम्बुलेंस और 1 फिक्स्ड विंग कन्वर्टेड फ्लाइंग एम्बुलेंस का संचालन किया जा रहा है। इसमें उच्च स्तरीय प्रशिक्षित चिकित्सकीय एवं पैरामेडिकल स्टाफ की टीम हमेशा तैनात रहती है। एयर एम्बुलेंस सेवा पात्रता सड़क एवं औद्योगिक दुर्घटना अथवा प्राकृतिक आपदा में पीड़ित व्यक्तियों को राज्य में एवं बाहर शासकीय या निजी चिकित्सालय में निःशुल्क एयर एम्बुलेंस सेवा प्रदाय कर पहुँचाया जाता है। आयुष्मान कार्डधारी को राज्य में और बाहर शासकीय एवं आयुष्मान संबद्ध अस्पतालों में निःशुल्क सेवा उपलब्ध कराई जाती है। अन्य हितग्राही जिनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, उनके लिए राज्य में शासकीय अस्पताल में निःशुल्क और राज्य के बाहर अनुबंधित दर पर सशुल्क परिवहन की व्यवस्था है।  

नाबालिग लड़की से दो आरोपियों ने किया सामूहिक दुष्कर्म, पीड़िता का गर्भपात हुआ, तो उसने घटना की जानकारी अपनी मां को दी

शिवपुरी मायापुर थाना क्षेत्र में तीन माह पूर्व एक नाबालिग लड़की के साथ गांव के दो युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। पीड़िता का गर्भपात हुआ, तो उसने घटना की जानकारी अपनी मां को दी। उसके बाद पूरे घटनाक्रम का राजफाश हुआ। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज कर एक को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरा फरार हो गया है। जानकारी के अनुसार पीड़िता की दोस्ती ग्राम गिटौरा निवासी जितेंद्र चंदेल व विवेक यादव के साथ हो गई थी। दोनों ही युवक उससे फोन पर बात किया करते थे। करीब तीन महीने पहले आरोपियों ने उसे बात करने के बहाने नर्सरी में बुलाया। उसको नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। युवती ने दोनों की इस हरकत के बारे में गांव के लोगों को बताने के लिए कहा, तो दोनों ने उसे धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर उसने इस बारे में किसी को बताया, तो वह उसे जान से मारकर फेंक देंगे। डर के कारण उसने इस बारे में किसी को नहीं बताया था। गर्भपात होने पर खुला राज 24 अप्रैल को अचानक उसकी तबीयत खराब हुई। परिजन उसे खनियाधाना स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे शिवपुरी रेफर कर दिया। डॉक्टरों ने पीड़िता के गर्भपात हो जाने की पुष्टि की।

पहले बल्‍लेबाजी करने उतरी चेन्‍नई 154 रन पर सिमटी, हैदराबाद को मिला 155 रन का टारगेट

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग 2025 के 43वें मुकाबले में आज दो वर्ल्‍ड कप विनर कप्‍तान आमने-सामने हैं। चेन्‍नई के एमए चिदम्बरम स्टेडियम में चेन्‍नई सुपर किंग्‍स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच टक्‍कर हों रही है। सनराइजर्स हैदराबाद के कप्‍तान पैट कमिंस ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया है। पहले बल्‍लेबाजी करने उतरी चेन्‍नई 154 रन पर सिमट गई। दोनों ही टीमों ने मौजूदा सीजन में 8-8 मैच खेले हैं और 2-2 में जीत दर्ज की है। प्‍वाइंट्स टेबल में चेन्‍नई 10वें और हैदराबाद 9वें पायदान पर है। एक और हार चेन्‍नई और हैदराबाद की प्‍लेऑफ की उम्‍मीदों को धराशाई कर सकती है। चेन्‍नई अपने घर पर कोलकाता, दिल्‍ली और आरसीबी से हार चुकी है। ऐसे में पैट कमिंस भी चेन्‍नई को चेपॉक में धूल चटाना चाहेंगे। 54 रन पर सिमटी चेन्‍नई आखिरी ओवर में दीपक हुड्ड कैच आउट हुए। उन्‍होंने 22 रन बनाए। 6 साल बाद चेपॉक में चेन्‍नई ऑल आउट हुए। टीम ने 20 ओवर में 154 रन बनाए। ऐसे में हैदराबाद को जीत के लए 155 रन चाहिए हैं।

पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में भाजपा ने निकाला मशाल जुलूस, कल भोपाल बंद का किया आव्हान

भोपाल पहलगाम आतंकी हमले को लेकर देश गुस्से में है। लोग जगह-जगह सड़क पर उतरकर अपना विरोध जता रहे है। इस बीच भोपाल चेंबर ऑफ कॉर्मर्स ने शनिवार को भोपाल बंद का आव्हान किया है। भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली ने कहा कि पहलगाम, कश्मीर में निहत्थे व बेकसूर हिंदुओं की जिनके धर्म की जानकारी लेने के पश्चात उनके परिवारजनों के सामने बर्बरता से हत्या कर दी गई। इस निर्मम हत्याकाण्ड के मद्देनज़र मृतकों के परिवारजनों के साथ खड़े होने एवं इस निर्मम आतंकी हमले के विरोध प्रदर्शन स्वरूप भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज भोपाल बंद का ऐलान करता हैं। वह आगे कहते है कि भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, भोपाल के समस्त व्यापारियों एवं भोपाल के समस्त व्यापारिक संगठनो से आग्रह करता है कि पहलगाम आतंकी हमले के कड़े विरोध हेतु दिनांक 26 अप्रैल दिन शनिवार को पूरे भोपाल को बंद करने की अपील करता हैं। एव समस्त व्यापारिक समाज से आग्रह करता है कि अपना पूर्ण सहयोग दें। मशाल जुलूस निकाल कर जताया विरोध- वहीं पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में गुरुवार शाम भाजपा ने न्यू मार्केट इलाके में मशाल जुलूस निकाला। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की अगुवाई में निकले मशाल जुलूस में भाजपा नेताओं के साथ बड़ी संख्या में लोगों ने न्यू मार्केट के नानके पेट्रोल पंप से रोशनपुरा चौराहे तक पैदल मार्च किया औऱ रोशनपुरा चौराहे पर पहुंचकर आतंकवादी घटना का विरोध जताया और दो मिनट का मौन रखकर मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर वीडी शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद पर अंतिम कील ठोकने का कार्य होगा। पहलगाम में हिंदू पर्यटकों पर आतंकवादियों द्वारा किया गया कायराना हमला भारत की आत्मा पर हमला है, जिसे भारत बर्दाश्त नहीं करेगा। पूरा भारत हमले के विरोध में एक साथ खड़ा है। पूरा देश इस हमले को लेकर आक्रोशित है। प्रधानमंत्री मोदी ने तय कर लिया है कि अब भारत में आतंकवाद का अंतिम समय आ गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि पहलगाम में हुआ कायराना आतंकी हमला भारत की आत्मा पर हमला है। यह भारत की संप्रभुता पर आक्रमण है। उन्होंने साफ कह दिया है कि अब इस देश के अंदर आतंकवाद के सफाए का समय आ गया है। ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी जो आतंकवाद को समर्थन देते हैं और उनका हिसाब किया जाएगा।  

लीलाबेन के पति के भी हाथ में गोली लगी, बताया आतंकी ने 20 साल के स्मित की छाती में मार दी गोली, दर्दनाक दास्तां

भावनगर कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में जान बचाकर भागे लोगों की दास्तां सुनकर रोंगटे खड़े हो जा रहे हैं। हमले से बच निकलीं गुजरात के भावनगर की लीलाबेन ने बताया कि जब वह भाग रही थीं तब देखा कि एक आतंकवादी ने स्मित की छाती में गोली मार दी। वह दृश्य असहनीय था। इस आतंकी हमले में लीलाबेन के पति के भी हाथ में गोली लगी है। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में घायल हुए गुजरात के भावनगर निवासी विनुभाई डाभी और उनकी पत्नी लीलाबेन ने इस वीभत्स हमले के उस दर्दनाक क्षण को शुक्रवार को याद किया। उन्होंने 20 साल के एक युवक को आतंकवादियों की गोलियों का शिकार होते हुए काफी नजदीक से देखा था। विनुभाई डाभी और उनकी पत्नी उन 20 लोगों में शामिल थे, जो 16 अप्रैल को श्रीनगर में प्रवचनकर्ता मोरारी बापू का प्रवचन सुनने के लिए जम्मू-कश्मीर गए थे। डाभी ने बृहस्पतिवार रात को भावनगर पहुंचने के बाद अपने आवास पर मौजूद पत्रकारों से कहा, ‘‘जब हमें गोलीबारी के बारे में पता चला तो सभी अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। मैं अपनी पत्नी से अलग हो गया था। जो लोग पीछे रह गए, आतंकवादियों ने उन्हें मार डाला। जब मैं भाग रहा था तो एक गोली मेरे दाहिने हाथ में लगी, जबकि दूसरी मेरे बाएं कंधे को छूती हुई निकल गई।’’ उन्होंने बताया, ‘‘जब मैं आखिरकार अपनी पत्नी से मिला तो वह मेरी खून से सनी शर्ट और गोली के घाव को देखकर तीन बार बेहोश होकर गिर पड़ी थी। हम किसी तरह बचकर पहाड़ी की तलहटी पर पहुंचे, जहां सेना के जवान मुझे अस्पताल ले गए। मैं तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रहा था।’’ विनुभाई डाभी की पत्नी लीलाबेन ने नम आंखों से बताया कि इस हमले के दौरान वह अपने पति से अलग हो गई थीं। उन्होंने देखा कि एक आतंकवादी ने किस तरह से 20 साल के स्मित परमार की गोली मारकर हत्या कर दी। लीलाबेन ने कहा, ‘‘जब मैं भाग रही थी तब मैंने देखा कि एक आतंकवादी ने स्मित की छाती में गोली मार दी। वह बेचारा तुरंत जमीन पर गिर पड़ा। वह दृश्य असहनीय था। मुझे बाद में पता चला कि उसके पिता की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पहलगाम की ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कही जाने वाली बैसरन घाटी पर मंगलवार को हुए आतंकवादी हमले में 20 साल के स्मित और उनके पिता यश परमार सहित 26 लोगों की जान चली गई। दोनों बाप-बेटे उन 20 लोगों के समूह में शामिल थे, जो भावनगर से श्रीनगर गए थे। लीलाबेन ने बताया कि जब उन्होंने अपने पति के हाथ पर खून देखा तो वह भगवान शिव की प्रार्थना करने लगीं। उन्होंने बताया कि जवानों ने इस हमले में किसी तरह बचे लोगों को अस्पताल में भर्ती कराने में मदद की और उनके रहने की व्यवस्था भी की।

भारत ने INS सूरत के बाद किया हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण

नई दिल्ली भारत ने लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। स्क्रैमजेट इंजन के एक्टिव कूल्ड कम्बस्‍टर का जमीन पर 1000 सेकंड तक सफल परीक्षण किया है। हाइपरसोनिक मिसाइलें ध्वनि की गति से पांच गुना ज्यादा तेजी से उड़ती हैं। यानी ये मिसाइलें Mach 5 से भी तेज होती हैं। राक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL) ने हाइपरसोनिक हथियार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। दुनिया की बड़ी ताकतें इन मिसाइलों को बनाने में जुटी हैं क्योंकि ये मौजूदा मिसाइल और हवाई सुरक्षा प्रणालियों को चकमा दे सकती हैं। मिसाइल की खासियत है कि इसकी तेज रफ्तार, बेहतरीन कंट्रोल और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता। इससे पहले गुरुवार को भारतीय नौसेना ने अपने बनाए स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस सूरत ने समुद्र में तेजी से उड़ाने वाले टारगेट पर सटीक हमला किया है। स्वदेशी निर्देशित मिसाइल Destroyer ने समुद्र में टारगेट को हिट किया। इस उपलब्धि से नौसेना और भी ज्यादा ताकतवर हो चुकी है। यह उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के विजन को दिखाता है। भारत ने किया INS सूरत से सफल परीक्षण बता दें कि पाकिस्तान भी इसी इलाके में मिसाइल टेस्टिंग करने जा रहा है। हाल ही में पाकिस्तान ने नोटिफिकेशन जारी किया था। पाकिस्तान ने अरब सागर क्षेत्र में मिसाइल परीक्षण करने का एलान किया है।

इटारसी स्टेशन पर ‘किलाबंदी’ टिकट चेकिंग: 190 यात्री पकड़े गए, ₹1.11 लाख जुर्माना वसूला

भोपाल मंडल रेल प्रबंधक श्री देवाशीष त्रिपाठी के कुशल मार्गदर्शन एवं वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया के निर्देशन में भोपाल मंडल द्वारा अधिकृत यात्रियों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने एवं अनियमित यात्राओं पर अंकुश लगाने हेतु लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में दिनांक 25 अप्रैल 2025 को इटारसी स्टेशन पर सुबह 06:00 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक वाणिज्य विभाग द्वारा किलाबंदी टिकट चेकिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान का संचालन श्री के.के. उइके, मुख्य टिकट निरीक्षक के नेतृत्व में 20 टिकट चेकिंग स्टाफ के सहयोग से किया गया। इस दौरान स्टेशन के सभी बाहर जाने वाले मार्गों की घेराबंदी की गई ताकि कोई भी यात्री बिना टिकट जांच के बाहर न निकल सके। इस अभियान के अंतर्गत कुल 39 ट्रेनों के यात्रियों के टिकटों की जांच की गई। जांच के दौरान 104 यात्री बिना टिकट यात्रा करते हुए पाए गए, जिनसे ₹68,505/- की राशि वसूली गई। वहीं, 86 यात्री अनुचित टिकट के साथ यात्रा करते हुए पकड़े गए, जिनसे ₹43,175/- वसूले गए। इस प्रकार कुल 190 मामलों से ₹1,11,680/- का रेल राजस्व प्राप्त हुआ। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि यह अभियान यात्रियों को जागरूक करने और टिकट नियमों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस प्रकार के सघन चेकिंग अभियानों से न केवल रेलवे के राजस्व में वृद्धि होती है, बल्कि यह यात्रियों के लिए एक सुरक्षित, अनुशासित एवं स्वच्छ यात्रा अनुभव भी सुनिश्चित करता है। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि यात्रा से पहले वैध टिकट अवश्य लें। प्रतीक्षा सूची ई-टिकट एवं प्लेटफॉर्म टिकट पर यात्रा की अनुमति नहीं है। यात्री IRCTC वेबसाइट, मोबाइल ऐप अथवा UTS ऐप का उपयोग कर स्वयं टिकट बुक कर सकते हैं।

साबिर हुसैन नाम के इस शख्स ने इस्लाम धर्म को त्यागने का फैसला किया, बंगाल के एक स्कूल टीचर ने बड़ा कदम उठाया है

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले को देश कभी नहीं भुला पाएगा। आतंकियों ने बैसरन की खूबसूरत पहाड़ियों का लुत्फ उठा रहे बेकसूर लोगों पर बेरहमी से गोलियां चला दीं। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई जिनमें से अधिकतर सैलानी थे। वहीं कई लोग घायल भी हुए हैं। जानकारी के मुताबिक आतंकियों ने लोगों को मारने से पहले यह भी सुनिश्चित किया कि वे किस धर्म के हैं। लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा फूट पड़ा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पश्चिम बंगाल के एक स्कूल टीचर ने बड़ा कदम उठाया है। साबिर हुसैन नाम के इस शख्स ने इस्लाम धर्म को त्यागने का फैसला किया है। पहलगाम आतंकी हमले से आहत बदुरिया के साबिर हुसैन ने इस्लाम छोड़ने के लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। न्यूज 18 से बात करते हुए साबिर हुसैन ने कहा है कि हिंसा फैलाने के लिए बार-बार धर्म का इस्तेमाल किया जाता है जो सही नहीं है। उन्होंने अपने फैसले के बारे में बताते हुए कहा, “मैं किसी धर्म का अनादर नहीं कर रहा हूं। यह मेरा निजी फैसला है। मैंने देखा है कि किस तरह हिंसा फैलाने के लिए एक हथियार के रूप में धर्म का इस्तेमाल किया जाता है। कश्मीर में ऐसा कई बार हुआ है। मैं अब इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता।” उन्होंने आगे कहा, “मैं सिर्फ एक इंसान के रूप में जाना जाना चाहता हूं, किसी धार्मिक पहचान की वजह से नहीं। इसलिए मैं कोर्ट में आवेदन करने आया हूं।” साबिर ने आगे कहा, “पहलगाम जैसी हिंसक घटनाओं में महजब का गलत इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा, “किसी को उसके धर्म की वजह से मारना कैसे ठीक है? ये मुझे बहुत आहत करता है।” मौजूदा माहौल पर टिप्पणी करते हुए हुसैन ने कहा कि वह ऐसी दुनिया में नहीं रहना चाहते हैं जहां सब कुछ मजहब के इर्द-गिर्द घूमता रहता है। उन्होंने कहा, “आजकल सब कुछ धर्म के इर्द-गिर्द घूमता हुआ लगता है। मैं ऐसी दुनिया में नहीं रहना चाहता।” साबिर हुसैन के मुताबिक उन्होंने यह फैसला स्वतंत्र रूप से लिया है और कहा है कि उनकी पत्नी और उनके बच्चे जो भी रास्ता चुने वह उन्हें पूरी आजादी देंगे।

वक्फ कानून पर नहीं लगा सकते पूरी तरह रोक, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का हलफनामा

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने की मांग की और कहा कि इस कानून पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती क्योंकि संसद द्वारा बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की परिकल्पना लागू होती है। 1,332 पन्नों के प्रारंभिक जवाबी हलफनामे में सरकार ने विवादास्पद कानून का बचाव करते हुए कहा कि चौंकाने वाली बात यह है कि 2013 के बाद वक्फ भूमि में 20 लाख हेक्टेयर (ठीक 20,92,072.536) से अधिक की वृद्धि हुई है। हलफनामे में कहा गया है, “मुगल काल से ठीक पहले, आजादी से पहले और आजादी के बाद के दौर में भारत में कुल 18,29,163.896 एकड़ जमीन वक्फ की थी।” इसमें निजी और सरकारी संपत्तियों पर अतिक्रमण करने के लिए पहले के प्रावधानों के “दुरुपयोग” का दावा किया गया है। हलफनामा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में संयुक्त सचिव शेरशा सी शेख मोहिद्दीन द्वारा दायर किया गया था। इसमें आगे कहा गया, “कानून में यह तय स्थिति है कि संवैधानिक अदालतें किसी वैधानिक प्रावधान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोक नहीं लगाएंगी और मामले पर अंतिम रूप से निर्णय लेंगी। संसद द्वारा बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की धारणा लागू होती है।” केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संसद ने अपने अधिकार क्षेत्र में काम करते हुए यह सुनिश्चित किया कि वक्फ जैसी धार्मिक व्यवस्था का प्रबंधन किया जाए और उसमें जताया गया भरोसा कायम रहे। वक्फ कानून की वैधता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के प्रयास न्यायिक समीक्षा के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से कहा, ”जब वैधता की परिकल्पना की जाती है तो प्रतिकूल परिणामों के बारे में जाने बिना ही पूरी तरह रोक लगाना अनुचित है। वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 वैध, विधायी शक्ति का उचित प्रयोग है। केंद्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट विधायी क्षमता और अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर कानून की समीक्षा कर सकता है।

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