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भोपाल में शुरू हुआ पहला राष्ट्रीय मनोरोग सम्मेलन: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 में विकसित भारत के लिये जो विजन तैयार किया है, उसे प्रत्येक नागरिक को स्वस्थ रखकर ही पूरा किया जा सकता है। इसके लिये हमें विभिन्न रोगों के साथ-साथ मनोरोग से भी छुटकारा पाना होगा। इस कार्य में मनोचिकित्सकों की अहम भूमिका रहेगी। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल आज भोपाल में मध्य भारत के पहले राष्ट्रीय मनोरोग सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। भोपाल में हो रहे 2 दिवसीय सम्मेलन में देशभर से 45 प्रमुख वक्ता शामिल हो रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि जीवन का पहला सुख निरोगी काया को माना गया है। आज के वैश्विक दौर में युवाओं में मानसिक तनाव मुख्य रूप से देखने को मिल रहा है। इसकी प्रमुख वजहव्यावहारिक जीवन में भारी चिंता, असीमित प्रतिस्पर्धा, असफल होने का डर और अत्यधिक मोबाइल समेत अन्य डिजिटल उपकरणों का उपयोग करना प्रमुख है। ऐसे माहौल में मनोचिकित्सकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि दुनिया में हर वर्ष करीब 10 लाख लोगों की आत्महत्या के प्रकरण चिंता का विषय हैं। श्री शुक्ल ने कहा कि इन सब का उपाय भारत की प्राचीन परांपरा में समाहित है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि अनेक संस्थाएँ ध्यान और योग की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। इन सबके और विस्तार की संभावनाएँ है। मनोरोग के उपचार में राज्य सरकार के प्रयास उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रत्येक जिला अस्पताल में मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के उपचार और सलाह के लिये विशेष कक्ष में सेवाएँ शुरू की है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के साथ-साथ मनोरोगी के साथ लगातार संवाद भी जरूरी है। समाज में फोबिया, युवाओं में मानसिक बीमारियाँ, चिंता रोग, सिजोफ्रेनिया और ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर के रोगी सामने आ रहे है। इन सबसे निपटने में मनोचिकित्सक समर्पण भाव को प्रदर्शित करे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन म.प्र. की संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने बताया कि प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में मानसिक रोग के उपचार को विशेष स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि मनोरोगी के उपचार के पहले उसके परिवेश को समझा जाये तो समस्या का बेहतर तरीके से निदान किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में टेली-मानस हेल्पलाइन पर 24X7 पर नि:शुल्क परामर्श दिये जाने की व्यवस्था की गई है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने बताया कि इस हेल्पलाइन पर 3 लाख कॉल पर परामर्श दिया गया। कार्यक्रम को भोपाल गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता सिंह, इंडिया एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट साइकियाट्री (आईएपीपी) के पदाधिकारी डॉ. आर.एन. साहू, डॉ. मृगेश वैष्णव ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. समीक्षा साहू ने किया। रैली का आयोजन राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरूआत में गांधी मेडिकल कॉलेज से इकबाल मैदान तक रैली निकाल कर मनोरोग के प्रति जन-जागरूकता और इससे सावधान रहने का संदेश दिया गया। रैली में मनो चिकित्सक और गांधी मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी शामिल थे।  

मोहन भागवत ने कहा- भारत की शास्त्रार्थ परंपरा सत्य को सहमति से स्थापित करती है, पड़ोसियों को तंग नहीं करते

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत की शास्त्रार्थ परंपरा सत्य को सहमति से स्थापित करती है। हिंदू मैनिफेस्टो इसी उद्देश्य से प्रस्तावित है, जो व्यापक चर्चा और सहमति के लिए प्रमाणित पुस्तक है। यह विश्व को नया रास्ता देने का भारत का कर्तव्य है, क्योंकि 2000 वर्षों के आस्तिक, नास्तिक और जड़वादी प्रयोग असफल रहे। भौतिक सुख बढ़ा, लेकिन असमानता और पर्यावरण हानि भी बढ़ी। एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि भारत की प्राचीन दृष्टि पर आधारित जीवन व्यवस्था स्थापित होनी चाहिए। पुस्तक में आठ सूत्र पूर्ण हैं, लेकिन भाष्य काल और परिस्थिति के अनुसार बदलते हैं। पिछले 1500 वर्षों से नया शास्त्र नहीं आया, जिसके कारण जाति व्यवस्था जैसे दोष समाज में आए। वेदों का सही भाष्य आज आवश्यक है। शास्त्रों में अस्पृश्यता या जाति का कोई स्थान नहीं, जैसा उडुपी के संत समाज ने भी कहा। आततायियों को सबक सिखाना भी हमारा धर्म: भागवत उन्होंने जोर दिया कि अहिंसा हमारा स्वभाव है, लेकिन आततायियों को सबक सिखाना भी धर्म है। पड़ोसियों को तंग नहीं करते, लेकिन उपद्रव करने वालों को दंड देना राजा का कर्तव्य है। भ्रष्टाचारियों को छोड़ना उचित नहीं, क्योंकि धर्म में अर्थ और काम को मर्यादा में रखना जरूरी है। धर्म को केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं करना चाहिए; यह सत्य, करुणा और सुचिता है। हिंदू समाज को अपने धर्म को समझने की जरूरत: भागवत हिंदू समाज को अपने धर्म को समझने की जरूरत है। हिंदू मैनिफेस्टो शास्त्रार्थ के माध्यम से शुद्ध परंपरा को सामने लाएगा और कालानुरूप स्वरूप स्थापित करेगा। यह पुस्तक विश्व कल्याण के लिए है, और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे ‘एमपी टेक ग्रोथ’ कॉन्क्लेव-2025’ का शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 27 अप्रैल को मध्यप्रदेश को टेक्नोलॉजी और डिजिटल नवाचार का केन्द्र बनाने के उद्देश्य से आयोजित ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव-2025’ का शुभारंभ इंदौर के ‘ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर’ में करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कॉन्क्लेव देश-दुनिया के टेक दिग्गजों के लिए निवेश का स्वर्णिम अवसर सिद्ध होगा। राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का यह आयोजन जीआईएस-भोपाल में आए निवेश प्रस्तावों को मूर्त रूप देने का महत्वपूर्ण प्रयास है। ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव’ प्रदेश का पहला पूर्णतः सेक्टर आधारित टेक-कॉन्क्लेव होगा, जो फरवरी में भोपाल में आयोजित जीआईएस में प्राप्त निवेश प्रस्तावों को धरातल पर साकार करने का मंच बनेगा। कार्यक्रम में Google, Microsoft, NVIDIA जैसी बिग-टेक कंपनियों सहित 300 से अधिक तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योगपति, नीति-निर्माता और निवेशक शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कॉन्क्लेव में प्रदेश की चार नई तकनीकी नीतियों – GCC नीति, ड्रोन नीति, सेमीकंडक्टर नीति एवं AVGC-XR नीति की गाइडलाइन्स जारी करेंगे।यह नीतियां नवाचार, अनुसंधान और निर्माण को प्रोत्साहित कर प्रदेश में क्षेत्रीय स्तर तक तकनीकी उद्य्मिता और क्षमताओं को नई ऊँचाइयाँ देंगी। कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव नए IT पार्क, स्किल डेवलपमेंट सेंटर्स और स्टार्ट-अप इन्क्यूबेटरों का भूमि-पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कॉन्क्लेव में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ और इन्क्यूबेशन हब का शुभारंभ करेंगे, प्रमुख निवेशकों के साथ एमओयू और आवंटन-पत्रों पर हस्ताक्षर करेंगे। इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन पोर्टल का शुभारंभ करेंगे। इस पोर्टल से निवेशकों को प्रोजेक्ट्स की रियल-टाइम ट्रैकिंग और सिंगल विंडो सिस्टम की सुविधा मिलेगी। कॉन्क्लेव में सेक्टर-स्पेसिफिक राउंड टेबल मीटिंग्स, सूचना प्रौद्योगिकी सलाहकार बोर्ड से वीसी संवाद और मुख्यमंत्री की टेक-लीडर्स के साथ वन-टू-वन बैठकें भी होंगी। मध्यप्रदेश को भविष्य के डिजिटल भारत में अग्रणी बनाने और जीआईएस-भोपाल की निवेश प्रतिबद्धताओं को साकार करने की दिशा में ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव-2025’ एक निर्णायक पहल सिद्ध होगी।  

मध्यप्रदेश अब देश का डिजिटल स्टेट बनने की ओर तेजी से अग्रसर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बढ़ते विश्वास के साथ आईटी क्षेत्र में निवेश के सकारात्मक रूझान और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए लागू की गई नई नीतियों से मध्यप्रदेश अब देश का डिजिटल स्टेट बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। पिछले एक वर्ष में हुई रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव , देश के विभिन्न महानगरों के साथ अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर यूके, जर्मनी और जापान में रोड-शो के जरिये उद्योगपतियों और निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया गया। इसी के साथ गत फरवरी माह में भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) के सफल परिणामों ने मध्यप्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र को नई ऊंचाइयां प्रदान की हैं। इसमें सबसे प्रमुख रहा आईटी सेक्टर, जो प्रदेश को आईटी क्षेत्र में एक नई पहचान देने का माध्यम बना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इसी पहल के तहत रविवार को इंदौर के ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में प्रदेश के पहले “एमपी टेक ग्रोथ” कॉन्क्लेव-25 का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें देश-दुनिया के टेक दिग्गज शामिल होंगे। मध्यप्रदेश डिजिटल नवाचार की दिशा में आगे बढ़ते हुए राज्य के 02 शहरों को AI सिटी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल पर विकसित करने जा रहा है। इस पायलेट प्रोजेक्ट को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। राज्य में अभी एग्रीटेक, स्कूल एजुकेशन, वन, बिजली और पुलिस महकमें में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जा रहा है।    ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैनुफैक्चरिंग जोन (TMZ),12 हजार करोड़ के निवेश और 5 हजार नौकरियों के साथ जल्द आकार लेगा। यह TMZ देश में अपनी तरह का पहला जोन होगा। इसमें सिम, चिप, एंटीना और अन्य उपकरण निर्मित होंगे। यहाँ सभी एसेसरीज सिस्टम्स, कम्पोनेंटस, वाइ-फाई, ऑप्टिकल्स, मोबाइल डिवाइसेज, सिमकार्ड, एंटीना, टेलीकॉम चिप्स सहित टेलीकॉम सेक्टर में नई 6जी टेक्नॉलाजी के लिए अनुसंधान एवं विकास के कार्य भी किए जाएंगे। टेलीकॉम सेक्टर की डिक्सॉन, वॉयकॉन, आईबीएम, निक्सन एवं एरिक्सन जैसी सभी बड़ी कम्पनियां यहां निवेश करने के लिए आएंगी। ग्वालियर आईटी पार्क में लगभग 70 एकड़ एवं साडा ग्वालियर क्षेत्र में 300 एकड़ भूमि की मांग निवेशकों द्वारा की गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर साडा ग्वालियर की 271 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को हस्तांतरित करने का निर्णय हो चुका है। नवीन आईटी नीतियां मध्यप्रदेश में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बेहद अनुकूल हैं। टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में उभरते सभी अवसरों का लाभ उठाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी) 2.0 देश में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक अग्रणी पहल है। यह योजना एक गेम चेंजर है और निश्चित रूप से इस क्षेत्र को अगले स्तर पर ले जाएगी। ईएमसी 2.0 योजना में  भोपाल के बैरसिया रोड पर बांदीखेड़ी में और जबलपुर में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर डेवलप होगा । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जीआईएस – भोपाल में प्रदेश में बेहतर निवेश के लिए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं। इस तारतम्य में लिए गए निर्णयों का नतीजा है नीति क्रियान्वयन और आधारभूत संरचना विकास। विभागीय सक्रियता ने राज्य को आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम क्षेत्रों में एक संभावित निवेश स्थल से वास्तविक और समृद्ध निवेश-स्थल में परिवर्तित कर दिया है। जीआईएस- भोपाल में लगभग 100 आईटी कंपनियों के लगभग 34 हजार करोड़ राशि के निवेश प्रस्ताव से दो लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इनमें से 28 प्रोजेक्ट दो माह में मूर्तरूप ले रहे हैं। राज्य के दो उभरते तकनीकी केंद्र इंदौर और भोपाल इन क्षेत्रों में निवेश के लिये आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग और नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग (केपीओ), बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) और डाटा सेंटर की स्थापना के लिए निवेशकों को आकर्षित किया है। राज्य में डाटा सेंटर के क्षेत्र में कंपनियां आ रहीं हैं , जिससे निवेश का आकार लगातार बढ़ रहा है। सेन्ट्रल ऑफ एक्सीलेंस, इन्क्यूबेशन सेन्टर और आईटी स्टार्ट-अप का मध्यप्रदेश में बेहतर ईको सिस्टम विकसित हो रहा है। “एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव – 2025” में स्टेक होल्डर डिजिटल एक्सपर्टस एवं निवेशकों को प्रदेश के तकनीकी और डिजिटल नवाचार और उससे संबंधित आर्थिक दृष्टिकोण बारे में बताया जायेगा। इस अवसर पर नीतिगत घोषणाएं , ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर्स, सेमीकंडक्टर्स, कॉमिक्स और एक्सटेन्डेड रियलिटी और ड्रोन्स से संबंधित गाइडलाइन्स जारी की जाएंगी। राज्य की जीसीसी, आईटी, आईटीईस, सेमीकंडक्टर्स, ड्रोन्स और एवीजीस-एक्सआर पॉलिसी मध्यप्रदेश को देश के डिजिटल स्टेट के रूप में उभारने में बेहद कारगर होंगी। एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव-2025, जहाँ डिजिटल भारत की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाएगा वहीं प्रदेश देश का डिजिटल स्टेट बनकर उभरेगा। डिजिटल इंडस्ट्री के क्षेत्र में कार्य कर रहे उद्योगपतियों के साथ समन्वय, स्टार्ट-अप में उद्यमिता की संस्कृति को विकसित करने, प्राकृतिक गैस पर टैक्स कम करने और प्रदेश में स्टार्ट-अप कम्युनिटी को बढ़ावा देने का काम कर रही है। वॉक-टू-वर्क सुविधा के साथ आईटी पार्क विकसित करने, प्रदेश में डिजिटल इकोनॉमी मिशन प्रारंभ करने के साथ ही AI -आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित गतिविधियों की अन्य उद्योगों में स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में भी राज्य सरकार कार्य कर रही है। एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव डिजिटल इंडस्ट्री के क्षेत्र में कार्य कर रहे उद्योगपतियों के बीच मजबूत रिश्तों का आधार बनेगी और सबके सहयोग से मध्यप्रदेश आईटी सेक्टर में अपनी विशेष पहचान स्थापित करेगा।

जमीन का कब्जा दिलाने पहुंचे कोर्ट कर्मी पर हमला, पुलिस ने 3 महिलाओं समेत 6 आरोपियों को भेजा जेल

गरियाबंद ज़िले के अमलीपदर थाना क्षेत्र में न्यायालय के आदेश पर ज़मीन का कब्जा दिलाने मूढ़गेलमाल के माहुलपारा पहुंचे कोर्ट कर्मचारी के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना 24 अप्रैल 2025 की है, जब आदेशिका वाहक रामराव सोलंके ज़मीन कब्जा से संबंधित न्यायालयीन कार्यवाही के तहत मौके पर पहुंचे थे। जानकारी के अनुसार, कब्जा दिलाने के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और रामराव सोलंके पर लात, घूंसे, लाठी से जानलेवा हमला कर दिया। इस दौरान हमलावरों ने बैग छीनकर दस्तावेज़ को फाड़ने की भी कोशिश की। मारपीट से कर्मी के शरीर में कई चोटें आई हैं। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बता दें कि अब इस मामले में पीड़ित रामराव सोलंके द्वारा थाना अमलीपदर में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। उनके अनुसार, यह हमला न्यायिक कार्य में बाधा उत्पन्न करने की नीयत से किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों में राजस्व विभाग के अधिकारी, कोटवार, पटवारी और ग्रामीण भी शामिल थे, जिन्होंने बीच-बचाव का प्रयास किया। थाना प्रभारी फैजुल शाह ने बताया कि रिपोर्ट पर आरोपी मेघनाथ यादव, चूलेश्वर यादव, दिलेश्वरी यादव, चयमनी यादव, गौमनी यादव, खमयबाई यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 126(2), 221, 121(1), 132, 296, 351(2), और 191(2) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध कर उन्हें गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद सभी को जेल भेज दिया गया है।

आयुक्त चिकित्सा शिक्षा शिखा राजपूत तिवारी ने अम्बेडकर अस्पताल का किया निरीक्षण

रायपुर, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा शिखा राजपूत तिवारी ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय का निरीक्षण कर मरीजों को प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल के रजिस्ट्रेशन काउंटर, रेडियो डायग्नोसिस (एक्स-रे) विभाग, डीएसए ब्लॉक, स्त्री एवं प्रसूति रोग वार्ड, नियोनेटल केयर यूनिट (नर्सरी), एचडीयू वार्ड, कैंसर ओपीडी, कीमोथेरेपी कक्ष सहित प्रस्तावित एकीकृत 700 बिस्तरों वाले अस्पताल स्थल का अवलोकन भी किया। उन्होंने विभिन्न विभागों में स्थापित चिकित्सा उपकरणों की स्थिति और उनकी कार्यक्षमता के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों को उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं तथा भोजन व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने अस्पताल के किचन का निरीक्षण कर किचन की स्वच्छता और भोजन की गुणवत्ता का जायजा लिया। साथ ही अस्पताल के विभिन्न विभागों में चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, टेक्नीशियनों एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भरे एवं रिक्त पदों के संबंध में भी विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सालय के ऐसे विभाग, जहां मानव संसाधन की तत्काल आवश्यकता है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तहत संविदा नियुक्ति के सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ चर्चा की। आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी ने कहा कि चिकित्सा एक अत्यंत आवश्यक सेवा है, और अस्पताल के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों  को मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करने के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध रहना चाहिए। निरीक्षण के दौरान चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. विवेक चौधरी, अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर सहित अस्पताल के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

ननकीराम कंवर ने पीएम मोदी को पत्र लिख सीसीएफ श्रीनिवास राव पर भ्रष्टाचार के लगाए गंभीर आरोप

रायपुर पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर एक बार फिर से पत्र को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. अबकी बार उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने प्रधान मुख्य वनसंरक्षक श्रीनिवास राव पर कांग्रेस का एजेंट बनकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कैम्पा योजना में भारी भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है. इसके साथ 1628 वनरक्षकों की भर्ती में किए गए भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करने की मांग की है. ननकीराम कंवर ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि कैम्पा योजना के मुख्य पद पर रहते हुए श्रीनिवास राव ने केन्द्र सरकार के बजट एवं दिशा निर्देशों की अवहेलना करते हुए अपने करीबी रिश्तेदारों एवं चहेतों को मनमर्जी तरीके से कई सौ करोड़ का काम दिया, जिसमें बाजार दर से अधिक दर पर निर्माण सामग्रियों की आपूर्ति के साथ स्तरहीन कार्य कराया. इसके अतिरिक्त अधिकतर दूरस्थ स्थानों पर कार्य के नाम पर आवंटन का अगर सत्यापन किया जाएगा, तो यहां कार्य होना ही नहीं पाया जाएगा. इसके अलावा कंवर ने वनरक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए बताया कि राज्य में वन रक्षकों (फारेस्ट गार्ड) की भर्ती हेतु लगभग 1500 पदों पर नवम्बर 2024 से दिसम्बर 2024 के बीच फीजिकल टेस्ट विभिन्न वन मंडलों में किया गया. 4 लाख 25 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. भर्ती के लिए शारीरिक परीक्षण डीएफओ बालोद, सरगुजा, महासमुंद समेत अन्य ने लिया. जो 16 नवंबर 2024 से प्रारंभ होकर 17 दिसम्बर 2024 तक मंडलवार अलग-अलग तिथियों में संपन्न हुआ. राज्य शासन के शारीरिक क्षमता परीक्षा सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच पर्याप्त रोशनी में कराई जाने के निर्देश के बावजूद कुछ जिलों में कृत्रिम प्रकाश में यह कार्रवाई नियम विरुद्ध की गई. श्रीनिवास राव पर अपने पद का दुरूपयोग कर कमीशनखोरी करने की नियत से भारी भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ वन अधिकारी के साथ उनके रिश्ते-नातेदार की चल-अचल संपत्ति की भी जांच कराने की मांग की है.

मुहांसों से बचने के लिए अपनाए ये 8 कारण

क्या चेहरे पर जब-तब उभर आने वाले मुहांसो का कारण आप जानते हैं। सिर्फ ऑइली फूड खाने से ही नहीं बल्कि इन 5 कारणों से भी हो सकते हैं मुहांसे। मुहांसों के यह 8 कारण आप नहीं जानते होंगे, लेकिन मुहांसों से बचने के लिए इन्हें जानना जरूरी है… 1 तनाव – जी हां तनाव भी मुहांसों का एक कारण हो सकता है। दरअसल जब आप तनाव में होते हैं तो शरीर में कार्टिसोल हार्मोन का स्त्राव होता है। कार्टिसोल, सिबेकस द्वारा त्वचा पर सीबम या तेल के उत्पादन को प्रोत्साहित करता है जिसके कारण त्वचा पर मुहांसे होने लगते हैं। 2 कुछ कॉस्मेटिक उत्पाद भी त्वचा पर मुहांसों का कारण बनते हैं, जैसे कोल्ड क्रीम, फाउंडेशन, चिकनाई युक्त उत्पाद, तेल आदि के कारण त्वचा पर मुहांसे हो सकते हैं, खास तौ से तब, जब आपकी त्वचा तैलीय है। 3 कभी-कभी कुछ विशेष दवाओं का सेवन भी आपकी त्वचा पर मुहांसे पैदा कर सकता है। स्टीरॉयड्स, लिथियम, आयोडाइड्स के कारण त्वचा पर मुहांसों की संभावना बढ़ जाती है। 4 तापमान और मौसम में परिवर्तन के कारण भी अक्सर त्वचा पर मुहांसों की समस्या होती है। खास तौर से गर्म या नमीयुक्त मौसम पसीने के साथ ही बैक्टीरिया पैदा करता है, जो मुहांसों का भी कारण बनता है।   5 शरीर में हार्मोन परिवर्तन के कारण मुहांसों का उभरना बेहद सामान्य घटना है। महिलाओं में मासिकधर्म के पहले या उस दौरान मुहांसे होना इसका ही एक उदाहरण है, जब हार्मोन्स परिवर्तत या असंतुलित होते हैं। 6 कई बार मुहांसों का लगातार होना अनुवांशिकता भी हो सकता है। अगर आपके माता-पिता या दादा-दादी को यह समस्या रही है, तो हो सकता है कि आपको यह समस्या अनुवांशिक रूप से प्राप्त हुई हो। 7 अत्यधिक तेल व मसालेदार भोजन करना और फास्ट फूड का सेवन त्वचा पर मुहांसे पैदा करने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके अलावा पेट खराब होना या पाच संबंधी समस्याएं भी मुहांसों का एक कारण है। 8 त्वचा पर किसी भी प्रकार की गंदगी, चाहे वह धूल मिट्टी या मृत त्वचा के जमाव के कारण हो, त्वचा पर मुहांसे पैदा करने में अहम भूमिका निभाती है। इसके लिए त्वचा की सफाई का विशेष ध्यान रखें।  

पर्वतीय चुनौती और प्राकृतिक खतरों के बीच भारत की सबसे लंबी रेल सुरंग परियोजना पर मंडराया संकट

हिमालय हिमालय की कठोर पर्वतीय चुनौती और प्राकृतिक खतरों के बीच भारत की सबसे लंबी रेल सुरंग देवप्रयाग से जनासू तक का निर्माण कार्य अब सफलता के मुकाम पर पहुँच चुका है। यह न केवल इंजीनियरिंग की एक अनोखी मिसाल है, बल्कि परियोजना के दौरान आई कठिनाइयों और खतरों को मात देने की एक प्रेरक गाथा भी है। लगभग 14.57 किलोमीटर लंबी यह सुरंग ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का हिस्सा है और इसे दुनिया में सबसे तेज़ गति से बनी सुरंगों में गिना जा रहा है। भयावह क्षण: जब सुरंग ढहने का बना खतरा इस मेगाप्रोजेक्ट के पीछे कार्यरत कंपनी लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड के परियोजना निदेशक राकेश अरोड़ा ने बताया कि सुरंग बोरिंग मशीन (TBM) “शक्ति” को जब सुरंग के करीब 5 किलोमीटर अंदर भेजा गया था, तभी 1,500 लीटर प्रति मिनट की दर से पानी का अत्यधिक बहाव शुरू हो गया। इस वक्त सुरंग के भीतर करीब 200 लोग मौजूद थे। अरोड़ा के शब्दों में, “यह हमारे लिए सबसे कठिन और डरावने क्षणों में से एक था। उस समय सुरंग में बाढ़ आने या उसके ढहने का गंभीर खतरा मंडरा रहा था।” महीनों तक चला संघर्ष, इंजीनियरों ने खोजा समाधान खतरे को देखते हुए टीम ने फौरन सुधारात्मक उपाय शुरू किए। लेकिन परिस्थिति इतनी जटिल थी कि लगभग एक महीने तक कोई खास सुधार नहीं दिखा। अंततः इंजीनियरों ने सीमेंट ग्राउटिंग और रासायनिक मिश्रणों का इस्तेमाल कर सुरंग की रिंग और आसपास की चट्टानों को स्थिर करना शुरू किया। इससे पानी का दबाव कम हुआ और स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रित हुई। चट्टानों का दबाव और टीबीएम की भूमिका प्राकृतिक तौर पर हिमालय की चट्टानें बेहद नरम और अस्थिर होती हैं। ऐसे में बोरिंग मशीन पर भारी दबाव आया, जिससे निर्माण बाधित होने का खतरा पैदा हो गया। टीम ने स्थिति से निपटने के लिए बेंटोनाइट का उपयोग करते हुए टीबीएम के खुदाई कार्य को तेज किया। इसके चलते सुरंग निर्माण फिर से पटरी पर आया। विश्व रिकॉर्ड: पहली बार हिमालय में प्रयोग हुआ सिंगल शील्ड हार्ड रॉक टीबीएम यह परियोजना इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि पहली बार हिमालय की पहाड़ियों में खुदाई के लिए 9.11 मीटर व्यास वाली सिंगल शील्ड हार्ड रॉक टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल किया गया। इससे न केवल समय की बचत हुई, बल्कि जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सका। औपचारिक शुरुआत और ऐतिहासिक उपलब्धि 16 अप्रैल को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में सुरंग के अंतिम ब्रेक-थ्रू की घोषणा की गई। देवप्रयाग और जनासू के बीच बनी यह सुरंग भारत की सबसे लंबी रेल सुरंग बन गई है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का हिस्सा देवप्रयाग-जनासू सुरंग 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए बनाई जा रही है। इस रेल लिंक के माध्यम से न केवल चारधाम यात्रा को सरल बनाया जा सकेगा, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। कठिनाइयों के बीच सफलता की मिसाल इस परियोजना में जिस प्रकार प्राकृतिक आपदाओं और तकनीकी चुनौतियों को मात देकर लक्ष्य प्राप्त किया गया, वह भारतीय इंजीनियरिंग कौशल, समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। देवप्रयाग-जनासू सुरंग केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि भविष्य की राह को प्रशस्त करने वाली एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

युवाओं को लुभा रहा है ब्रांड मैनेजमेंट

किसी खास उत्पाद, उत्पाद लाइन या ब्रांड में मार्केटिंग तकनीकों के अनुप्रयोग को ब्रांड मैनेजमेंट कहते हैं। इसका उपयोग उत्पाद की उपभोक्ताओं में प्रचलित वेल्यू को बढ़ाने के लिए किया जाता है, जिससे ब्रांड फ्रेंचाइज के साथ-साथ ब्रांड इक्विटी भी बढ़ती है। सामान्यतः बाजारों में मार्केट्स द्वारा किसी भी ब्रांड को एक ऐसे आश्वासन के रूप में माना जाता है, जिसकी गुणवत्ता के स्तर की ग्राहकों को अपेक्षा होती है। इसी गुण के आधार पर ब्रांड वेल्यू तय होती है, जो भविष्य की खरीदी में निर्णायक भूमिका निभाती है। इसके द्वारा प्रतिस्पर्धी उत्पादों से अपने उत्पाद की तुलना कर विक्रय बढ़ाया जाता है। जैसे कि मेरी शर्ट से इसकी शर्ट सफेद क्यों? ब्रांड वेल्यू के आधार पर ही निर्माता अपने उत्पाद की अधिक कीमत वसूल करता है। ब्रांड की वेल्यू का निर्धारण निर्माता के लिए निर्मित लाभ की राशि के आधार पर किया जाता है। इसे विक्रय में वृद्धि तथा कीमत में वृद्धि कर हासिल किया जा सकता है अथवा बेचे जाने वाले उत्पाद की लागत घटाकर भी प्राप्त किया जा सकता है। अधिक प्रभावी मार्केटिंग निवेश से भी यह प्राप्त होता है। इन सभी कयासों से किसी ब्रांड की लाभप्रदता बढ़ाई जा सकती है और इस तरह ब्रांड मैनेजर किसी भी ब्रांड की लाभ-हानि के जिम्मेदार होते हैं। इस संदर्भ में ब्रांड मैनेजमेंट की रणनीतियुक्त भूमिका मार्केटिंग से अधिक व्यापक होती है। ब्रांडनेम की विशेषताएं… -किसी भी ब्रांडनेम में निम्नलिखित विशेषताएं होना चाहिए -उसे ट्रेडमार्क कानून के तहत संरक्षित किया जाना चाहिए या वह कम से कम ऐसा होना चाहिए कि जिसे संरक्षित रखा जा सके। -ब्रांडनेम उच्चारण करने में आसान होना चाहिए। -ब्रांडनेम आसानी से याद रखने लायक होना चाहिए। -ब्रांडनेम आसानी से पहचाना जा सकने जैसा होना चाहिए। -ब्रांडनेम बाजारों में जहां ब्रांड का उपयोग किया जाएगा, वह सभी भाषाओं में अनुवादित करने लायक होना चाहिए। – ब्रांडनेम से कंपनी या उत्पाद का अनुमान लग जाना चाहिए। -ब्रांडनेम आकर्षक होना चाहिए। ब्रांडों की किस्में:- बाजार में कई किस्मों के ब्रांड उपलब्ध हैं। आमतौर पर प्रीमियम ब्रांड की कीमत उसी श्रेणी के अन्य ब्रांडों से ज्यादा होती है, जबकि इकॉनॉमी ब्रांड बाजार के आम ग्राहकों को लक्षित होता है। फाइटिंग ब्रांड को विशेष रूप से प्रतिस्पर्धात्मक खतरों का सामना करने के लिए बनाया जाता है। जब किसी कंपनी का नाम उत्पाद के ब्रांड नाम के रूप में उपयोग में लाया जाता है, उसे फैमेली ब्रांडिंग कहा जाता है। जब कंपनी के सभी उत्पादों को अलग-अलग ब्रांडनेम दिए जाते हैं, उसे इनडिविजुअल अथवा वैयक्तिक ब्रांड कहकर पुकारा जाता है। जब कोई कंपनी नए ब्रांड को प्रस्तुत करने के लिए मौजूदा ब्रांड के साथ ब्रांड इक्विटी का उपयोग करती है, उसे ब्रांड लिवेरेजिंग कहा जाता है। जब कोई बड़ा रिटेलर किसी निर्माता से थोक मात्रा में कोई उत्पाद खरीदकर उन पर अपना ब्रांडनेम डाल देता है, उसे प्राइवेट ब्रांडिंग, स्टोर ब्रांड, व्हाइट लेबलिंग, प्राइवेट लेबल या ओन ब्रांड (यूके) कहा जाता है। प्राइवेट ब्रांडों को निर्माता के ब्रांडों से अलग किया जा सकता है। जब दो या अधिक ब्रांड अपने उत्पाद को मार्केट करने के लिए एकसाथ काम करते हैं, इसे को-ब्रांडिंग कहा जाता है। कोई भी एम्प्लायमेंट ब्रांड तब निर्मित होता है, जब कोई कंपनी संभावित प्रत्याशियों के साथ जागरूकता निर्मित करना चाहती है। कई मामलों में यह ब्रांड उनके ग्राहकों के लिए एक अटूट विस्तार बन जाता है। क्या होता है ब्रांड आर्किटेक्चर:- किसी कंपनी के स्वामित्व वाले अलग-अलग किस्म के ब्रांड ब्रांड आर्किटेक्चर के माध्यम से एक-दूसरे से संबंधित होते हैं। प्रॉडक्ट ब्रांड आर्किटेक्चर में कंपनी कई अलग-अलग उत्पादों को सहायता प्रदान करती है, जिसमें प्रत्येक उत्पाद का अपना एक अलग नाम तथा उसे अभिव्यक्त करने की शैली जुदा होती है, लेकिन ग्राहकों को कंपनी कहीं भी दिखाई नहीं देती है। कई लोगों का मानना है कि प्रॉक्टर एंड गैम्बल उत्पाद ब्रांडिंग का निर्माण करती है, जबकि टाइड, पैम्पर्स, आइवोरी तथा पेंटिन जैसे कई कंजूमर ब्रांडों का आपस में कोई संबंध नहीं है। कंपनी कुछ ब्रांडों के साथ अपना नाम इसलिए भी जोड़ देती है, ताकि उन्हें मदर ब्रांड का फायदा मिल सके और कंपनी का मार्केटिंग खर्च बच सके। तीसरे मॉडल में सारे उत्पादों के साथ ब्रांड नेम का ही उपयोग किया जाता है और सारे विज्ञापन एक स्वर में इसके गुणगान करते हैं। ब्रांड आर्किटेक्चर का एक अच्छा उदाहरण है यूके स्थित सम्पिण्डित वर्जिन। वर्जिन द्वारा अपने सारे उत्पादों के साथ वर्जिन का उपयोग किया जाता है जैसे कि वर्जिन मेगास्टोर, वर्जिन एटलांटिक, वर्जिन ब्राइडस आदि। इन सारे उत्पादों के साथ एक ही स्टाइल में वर्जिन को प्रदर्शित किया जाता है, ताकि दूर से भी देखने वाला इसे पहचान सके। ब्रांड तकनीक:- कभी-कभी कंपनियां उनके द्वारा मार्केट करने वाले ब्रांडों की संख्या घटाना चाहती है। इस प्रक्रिया को ब्रांड राशनेलाइजेशन कहा जाता है। कुछ कंपनियों की प्रवृत्ति ब्रांड के अंदर ही ज्यादा ब्रांड तथा उत्पाद अंतर निर्मित करने की होती है। कभी-कभी वह लक्षित प्रत्येक बाजारों के लिए कतिपय विशिष्ट सेवा अथवा उत्पाद ब्रांड का निर्माण करेंगी। प्रॉडक्ट ब्रांडिंग के मामले में इसका उद्देश्य खुदरा विक्रेताओं को लाभान्वित करना है। चुनौतियां ब्रांड मैनेजरों की:– ब्रांड मैनेजरों के सामने ये चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं कि ब्रांड के संदेश को ताजा तथा प्रासंगिक बनाए रखते हुए एकसंगत ब्रांड का निर्माण करें। पुराने ब्रांड की पहचान परिष्कृत बाजारों के साथ जोड़ने से गड़बड़ी हो सकती है। इसके लिए उसे दोबारा विजन स्टेटमेंट तथा मिशन स्टेटमेंट आरंभ करने की आवश्यकता होगी। इससे जनसांख्यिकीय विकास से उनके लक्षित बाजार में ब्रांड पहचान गुम हो सकती है। इसके लिए ब्रांड को दोबारा स्था पित करने की आवश्येकता होती है। इस प्रक्रिया को रिब्रांडिंग कहा जाता है। क्याय करता है ब्रांड मैनेजर:- ब्रांड मैनेजर का सबसे पहला काम अपने उत्पारद को इस तरह से निर्मित करना है कि वह उपभोक्ताहओं के बीच आसानी से लोकप्रिय हो जाए तथा उत्पातद की पहचान बन जाए। कभी-कभार ब्रांड मैनेजर अपना कार्य सीमित कर वित्तीय और बाजार के निष्पाएदन लक्ष्यों  पर ज्यानदा ध्याबन देते हैं। अधिकांश ब्रांड मैनेजर अल्प कालीन लक्ष्यर निर्धारित करते हैं, क्योंिकि उपनका कंपनसेशन पैकेज अल्प कालीन व्यपवहार के लिए ही उपयुक्त होता है। अल्पलकालीन लक्ष्यों  को दीर्घकालीन लक्ष्यों  की दिशा में मील के पत्थवर के रूप में देखा जाता … Read more

सतना में अवैध क्‍लीनिकों पर 2010 की धारा 41 के अंतर्गत उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से सील करने कार्रवाई की गई

सतना मरीजों के स्वास्थ्य के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है। इसकी एक बानगी शनिवार को उस वक्त देखने को मिली। जब सिटी एसडीएम व स्वास्थ्य विभाग का अमलें ने क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एवं रेगुलेशन) एक्ट, 2010 के तहत से विपरीत संचालित पांच क्लिीनिक पकड़े। यह कार्रवाई अनुविभागीय दंडाधिकारी रघुराजनगर राहुल सिलाडिया के नेतृत्व में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय अरख, सीएमएचओ कार्यालय के लिपिक आशुतोष प्यासी एवं पुलिस बल की उपस्थिति में की गई। इस दौरान जिले में अवैध रूप से संचालित पांच क्लीनिकों पर व्यापक एवं संगठित कार्रवाई की गई। यह सभी क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एवं रेगुलेशन) एक्ट, 2010 के विपरीत संचालित होना पाए गए।सभी प्रतिष्ठानों पर क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010 की धारा 41 के अंतर्गत उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से सील करने कार्रवाई की गई है। अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी प्रकरण पंजीबद्ध किए जाने की कार्रवाई प्रचलन में है। सभी क्लिनिक पर इंजेक्शन का अवैध प्रयोग और लापरवाही पूर्ण डिस्पोजल करना पाया गया।   स्थल पर जांच के दौरान न तो कोई वैध चिकित्सकीय डिग्री प्रस्तुत की गई और न ही कोई चिकित्सकीय योग्यता प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। क्लीनिक में एक व्यक्ति जो स्वयं को सफाईकर्मी बता रहा था, वही मरीजों का उपचार एवं दवाओं का वितरण करता पाया गया। मरीजों से ली गई फीस एवं वितरित दवाइयों का रिकॉर्ड बरामद कर जब्त किया गया। क्लीनिक को तत्काल प्रभाव से सील किया गया। बड़ी संख्या में एलोपैथिक दवाइयाँ बिना किसी विधिवत पंजीकृत चिकित्सक की उपस्थिति में पाई गईं। क्लीनिक का संचालन एक अनधिकृत व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था। क्लीनिक सील कर अग्रिम विधिक कार्यवाही हेतु रिपोर्ट तैयार की गई। निरीक्षण में पाया गया कि प्रतिष्ठान के पास क्लीनिक रजिस्ट्रेशन नहीं था तथा स्वघोषित डॉक्टर केवल बीएससी और एमए (गैर-चिकित्सा विषय) की डिग्री रखता था। चिकित्सकीय सेवा हेतु वैध योग्यता प्रमाणित नहीं थी। हॉस्पिटल को तत्काल प्रभाव से सील कर आगे विधिक प्रक्रिया शुरू की गई। एक कथित बंगाली चिकित्सक द्वारा संचालित इस क्लीनिक से भारी मात्रा में इंजेक्शन व अन्य दवाइयाँ बरामद हुईं। दो मरीज भी उपचाररत पाए गए, जिन्हें सरकारी अस्पताल भेजा गया। क्लीनिक बिना पंजीयन पाया गया एवं त्वरित प्रभाव से सील किया गया।

मुख्यमंत्री साय बोले- सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों का सर्वोच्च प्राथमिकता से करें निराकरण

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में राजस्व विभाग के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए आम नागरिकों को राजस्व सेवाओं का त्वरित और सहज लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने फौती–नामांतरण की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने और समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि विधिक वारिसान के पक्ष में फौती नामांतरण समय पर सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टरों को निर्देशित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तय समय सीमा में नामांतरण न होने पर संबंधित पटवारियों की जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्यवाही करें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आरबीसी 6-4 के अंतर्गत पीड़ित परिवारों को तात्कालिक सहायता उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए कार्यवाही में विलंब न हो, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक भटकना न पड़े। उन्होंने अधिकारियों को इसकी सतत निगरानी करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि राजस्व विभाग का सीधा संबंध आम जनता से है, अतः मैदानी अमले की लापरवाही शासन की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। उन्होंने सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त आवेदनों के निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखने और सभी आवेदनों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व न्यायालय का संचालन सप्ताह में न्यूनतम दो दिन अनिवार्य रूप से किया जाए और दो पेशी में ही प्रकरणों का निराकरण हो। अति आवश्यक परिस्थितियों को छोड़कर पेशी की तिथि बढ़ाने से बचा जाए। मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल तकनीक का अधिकतम उपयोग कर डायवर्सन प्रक्रिया को सरल और सहज बनाने पर भी बल दिया। उन्होंने अविवादित नामांतरण और बंटवारे के मामलों में अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। डिजिटल क्रॉप सर्वे की समीक्षा करते हुए उन्होंने राजस्व, कृषि, खाद्य तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभागों की संयुक्त टीम गठित कर भूमि और फसल से संबंधित सटीक जानकारी एकत्रित करने के निर्देश दिए। राजस्व सचिव अविनाश चंपावत ने विभागीय कार्यों और गतिविधियों की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भूमि अभिलेखों का कंप्यूटरीकरण, पंजीयन का डिजिटलीकरण तथा मॉडर्न रिकॉर्ड रूम का कार्य पूर्णता की ओर है। साथ ही उन्होंने  राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली के डिजिटलीकरण, किसान पंजीयन, डिजिटल क्रॉप सर्वे और जियो-रेफरेंसिंग कार्यों की प्रगति से भी अवगत कराया। श्री चंपावत ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री साय के पूर्व निर्देशों के अनुरूप जिलों में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ पटवारियों का स्थानांतरण नियमित रूप से किया जा रहा है। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने समीक्षा बैठक में कहा कि शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुरूप ही जमीन की खरीदी-बिक्री सुनिश्चित की जाए और राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण कर भू-धारकों को शीघ्र राहत दी जाए। इस अवसर पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, राहुल भगत, डॉ. बसवराजू, चिप्स के सीईओ प्रभात मलिक तथा राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे। “राजस्व विभाग का कार्य सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है, इसलिए विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, त्वरित निष्पादन और समयबद्धता अत्यंत आवश्यक है। आम नागरिकों को राजस्व सेवाओं का त्वरित और सहज लाभ मिले, इसके लिए सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों का सर्वोच्च प्राथमिकता से निराकरण किया जाए। फौती–नामांतरण सहित सभी राजस्व प्रकरणों में अनावश्यक विलंब न हो, पीड़ित परिवारों को समय पर सहायता मिले, और राजस्व न्यायालयों का संचालन सप्ताह में न्यूनतम दो दिन नियमित रूप से किया जाए। मैदानी अमले की लापरवाही शासन की छवि को प्रभावित करती है, इसलिए अविवादित नामांतरण,  बंटवारे सहित अन्य राजस्व मामलों के निराकरण में अनावश्यक देरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल तकनीक का अधिकतम उपयोग कर डायवर्सन प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए।” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय “शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुरूप ही जमीन की खरीदी-बिक्री सुनिश्चित की जाए। राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण कर भू-धारकों को शीघ्र राहत प्रदान करें। आम नागरिकों को न्याय और सुविधा देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा  

प्रतिदिन कॉफी के सेवन से घटाएं वजन, जानिए कैसे

अगर आप वजन घटाने के लिए जिम जाना, वॉक करना एवं कई तरह की कवायदें कर रहे हैं, तो कॉफी आपके इस मिशन में काफी मददगार साबित होगी। जरूर जानिए कॉफी कैसे करेगी आपकी मदद, वजन कम करने में –   -अगर आप वजन घटाने के लिए जिम जा रहे हैं, तो जूस, फल या हल्के नाश्ते के बजाए 1 कप कॉफी पीकर जाएं। यह आपको जिम में एक्सरसाइज के लिए अतिरिक्त ऊर्जा देगी और आप नियमित दिनचर्या से ज्यादा और बेहतर तरीके से एक्सरसाइज कर पाएंगे, जो वजन घटाने की प्रक्रिया को और आसान करेगा। -प्रतिदिन एक्सरसाइज या वॉक करने से पहले कॉफी का सेवन आपके शरीर के तापमान को बढ़ाएगा और आप एक्सरसाइज के दौरान पहले से अधिक पसीना बहा पाएंगे। इससे शरीर से हानिकारक तत्व और केलोरी शरीर से बाहर होंगे।   -कॉफी का सेवन न केवल आपको ऊर्जा देगा, बल्कि मस्तिष्क को भी ऊर्जा देगा। इससे आपको एक्सरसाइज के दौरान सजग रहकर एक्सरसाइज करने में मदद मिलेगी और बेहतर परिणाम मिलेंगे। -एक्सरसाइज के बाद अगर आपको जल्दी भूख लगती है तो कॉफी पीने की यह आदत मददगार साबित होगी। कॉफी आपकी भूख को कुछ समय के लिए कम कर देती है, जिसका फायदा आपको एक्सरसाइज के बाद मिलेगा।   -सामान्य कॉफी तो सेहत के लिए फायदेमंद होती ही है, आजकल ग्रीन कॉफी भी बाजार में उपलब्ध है जो तेजी से वजन कम करने के लिए जानीजर रही है। आप इसका प्रयोग करके भी आसानी से वजन कम कर सकते हैं।  

48 घंटे में देश छोड़ने के फरमान का असर आजमगढ़ में भी देखने को मिला, शॉर्ट टर्म वीजा पर कोई पाक नागरिक नहीं: SSP

आजमगढ़ जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद सरकार के पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में देश छोड़ने के फरमान का असर आजमगढ़ में भी देखने को मिला है, पूरे जनपद में हाई अलर्ट है। आजमगढ़ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने पुलिस की अभिसूचना इकाई से जांच के बाद आज बताया कि आजमगढ़ में भी 4 पाकिस्तानी नागरिक मिले हैं, लेकिन वह लॉन्ग टर्म वीजा पर यहां रह रहे हैं आजमगढ़ में शॉर्ट टर्म वीजा पर कोई पाक नागरिक नहीं: SSP मिली जानाकरी के मुताबिक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हेमराज मीणा ने बताया कि आजमगढ़ में अभी तक शार्ट टर्म वीजा पर कोई पाकिस्तानी नागरिक नहीं रह रहा है, जो लोग यहां रह रहे हैं वह सरकार की गाइडलाइन के दायरे में नहीं है। बाकी अन्य गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। नोरी वीजा पर रह रहीं पाक महिलाएं, एक BDS डॉक्टर ने मांगी नागरिकता मीणा के अनुसार जो 4 नागरिक यहां रह रहे हैं उन्हें नो ऑब्लीगेशन टू रिटर्न टू इंडिया(नोरी) वीजा की सुविधा भी प्राप्त है। यह सभी महिलाएं हैं, जो शादी के बाद यहां आईं है । जो महिलाएं यहां निवास कर रही हैं उनमें शहर के एक मुहल्ले में एक परिवार की बेटी की शादी पाकिस्तान में हुई थी। इसी महिला ने अपने जेठ की बेटी की शादी अपने भाई से 14 वर्ष पहले कराई थी। शादी के बाद वह भारत आई, यह महिला पेशे से दांत की डाक्टर(बीडीएस) है और इनकी 3 बेटी हैं। यह महिला शादी के बाद से लॉन्ग टर्म वीजा पर आजमगढ़ में रह रही है । परिवार ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया है। 70 साल की पाक बहनों की भी जनपद में शादी, जांच में सबकुछ क्लियर मीणा के अनुसार इसी तरह 3 अन्य पाकिस्तान की महिलाओं की शादी भी जनपद में हुई है जिसमें 2 सगी बहनें हैं और एक ही परिवार में उनकी शादी हुई है। दोनों की उम्र 70 वर्ष से अधिक है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद फिलहाल अभी तक कोई ऐसा पाकिस्तानी नागरिक नहीं है जो सरकार की गाइडलाइन के दायरे में है।

यदि आपके पास हैं ये चीजें, तो खुद को समझे बहुत किस्मतवाला

अक्सर हम किसी इंसान से मिलते हैं और हमारे मन में यही आता है कि ये इंसान वाकई कितना भाग्यशाली है। दरअसल हम सभी की भाग्यशाली होने की परिभाषा बड़ी अलग-अलग होती है। किसी को एक अच्छी नौकरी होना भाग्यशाली होने की निशानी लगता है तो किसी को पुश्तैनी धन-दौलत होना या शानदार लव लाइफ होना। खैर, ये लोगों के अपने-अपने पैमाने हैं। हालांकि महान विद्वान और कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने भी अपनी नीति में कुछ ऐसे व्यक्तियों का जिक्र किया था, जो उनकी नजरों में वाकई बेहद भाग्यशाली होते हैं। आचार्य कहते हैं कि जिन लोगों के पास ये कुछ चीजें मौजूद हैं उन्हें तो खुद को किस्मत वाला ही समझना चाहिए क्योंकि हर इंसान के नसीब में यह नहीं होता। तो चलिए जानते हैं आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को भाग्यवान बनाने वाली ये चीजें कौन सी हैं। जिसके पास हो दान-पुण्य करने का सामर्थ्य आचार्य चाणक्य अपने एक श्लोक में इस बात का जिक्र करते हैं कि जिस व्यक्ति में दान-पुण्य करने का सामर्थ्य है, वो भी बहुत किस्मतवाला ही होता है। दरअसल कोई भी व्यक्ति दान-पुण्य करने में सामर्थ्य तब होता है, जब उसके पास पर्याप्त धन होता है और उसे खर्च करते हुए, व्यक्ति को ज्यादा सोचना नहीं पड़ता। आचार्य कहते हैं कि पिछले कई जन्मों के पुण्य के कारण ही मनुष्य को ये सौभाग्य प्राप्त होता है। जिसका साथ दे उसकी सेहत आचार्य चाणक्य के अनुसार जिन लोगों की सेहत उनका साथ देती है, उनसे ज्यादा भाग्यशाली भी दूसरा कोई नहीं। इस दुनिया में सबसे बड़ी दौलत इंसान की सेहत ही होती है। यदि व्यक्ति स्वास्थ्य ना हो और कोई ना कोई रोग उसे घेरे रहे, तो लाखों की धन संपदा भी बेकार ही जान पड़ती है। आचार्य कहते हैं कि अगर आप भरपेट भोजन कर पा रहे हैं और उसे पचाने में आपको कोई परेशानी भी हो रही है; तो आपको खुद को किस्मतवाला ही समझना चाहिए। अच्छे जीवनसाथी का होना है सौभाग्य की निशानी आचार्य चाणक्य के अनुसार एक अच्छे जीवनसाथी का मिलना भी सौभाग्य की निशानी है, जो हर किसी की किस्मत में नहीं होता। एक अच्छा जीवनसाथी आपके हर सुख-दुख में साथ खड़ा मिलता है और उसके साथ जीवनयात्रा थोड़ी आसान हो जाती है। अगर किसी व्यक्ति के जीवन में एक अच्छा पार्टनर है और उसका दांपत्य जीवन सुखी है, तो वो इंसान यकीनन ही बेहद भाग्यशाली हैं। मेहनत से बना सकते हैं अपना भाग्य इन सभी बातों के साथ ही आचार्य चाणक्य का कहना यह भी है कि अगर किसी इंसान को किस्मत का साथ ना भी मिले, तो वो अपनी मेहनत के बल पर खुद को भाग्यवान बना सकते है। अपनी नीति में आचार्य कहते हैं कि मेहनत का कोई दूसरा विकल्प नहीं है और जो व्यक्ति मेहनत करने से पीछे नहीं हटता, वो अपनी किस्मत खुद चमका देता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में कुछ बहुत बड़ा करते हैं, जो शायद सिर्फ भगवशाली लोगों के बस की भी बात नहीं।

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