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पेड़ से टकराई अनियंत्रित बाइक, तीन युवकों की मौत

बलरामपुर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. तीन युवक भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गए. दरअसल, वाड्रफनगर पुलिस चौकी क्षेत्र के पेंडारी गांव में तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई. दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई है. जानकारी के मुताबिक, तीन व्यक्ति एक बाइक पर सवार होकर आर्केस्ट्रा प्रोग्राम देखने के लिए गए हुए थे. जहां से देर रात लौटने के दौरान पेंडारी गांव के पास उनकी बाइक अनिंयत्रित हो गई और सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई. टक्कर के बाद तीनों छिटककर फेका गए. दुर्घटना में बाइक के आगे का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, हेडलाइट बुरी तरह टूट गया. तीनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई. सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मर्ग कायम कर तीनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. फिलहाल तीनों व्यक्ति की शिनाखती नहीं हो पाई. पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई में जुट गई है.

भगोरिया आदिवासी नृत्य, गोंड आदिवासी चित्रकला और नर्मदा परिक्रमा को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची में किया शामिल

मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की पहल यूनेस्को की नोडल एजेंसी संगीत नाटक अकादमी ने राष्ट्रीय सूची में किया शामिल   भोपाल मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयासों को सफलता प्राप्त हुई है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की पहल पर यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल आर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) की नोडल एजेंसी संगीत नाटक अकादमी ने मध्य प्रदेश की तीन विरासतों को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची में सम्मिलित किया है। इन विरासतों में भगोरिया आदिवासी नृत्य, गोंड आदिवासी चित्रकला और नर्मदा परिक्रमा हैं। आगामी वर्षों में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की अंतर्राष्ट्रीय सूची में इन्हें सम्मिलित किया जा सकता है। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति और प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने इस उपलब्धि पर हर्ष जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में हम मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासतों को विश्व पटल पर पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। इन्हीं प्रयासों के फलस्वरूप यह उपलब्धि हासिल हुई है। यह प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। सूची में नामांकित होने से यह अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेंगे। यह होती हैं अमूर्त सांस्कृतिक विरासत अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में वे परंपराएं, प्रथाएं, ज्ञान और कौशल शामिल हैं, जो हमारे पूर्वजों से विरासत में मिले हैं और भविष्य की पीढ़ियों को दिए गए हैं। मूर्त विरासतों में स्मारक या भौतिक कलाकृतियां शामिल होती हैं, वहीं अमूर्त सांस्कृतिक विरासत एक संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्तियों को संदर्भित करती है। इसमें मौखिक परंपराएं, कलाएंं, सामाजिक अनुष्ठान, उत्सव के कार्यक्रम, प्रकृति के बारे में ज्ञान और पारंपरिक शिल्प शामिल होते हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने किया था आवेदन भारत के किसी भी हिस्से से किसी भी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की मान्यता के लिए आवेदन यूनेस्को की नोडल एजेंसी संगीत नाटक अकादमी को प्रस्तुत किए जाते हैं। यह एजेंसी राष्ट्रीय सूची को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होती है। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची में शामिल करने के लिए मध्य प्रदेश के भगोरिया आदिवासी नृत्य, नर्मदा परिक्रमा और गोंड आदिवासी चित्रकला इंटेजिबल कल्चरल हेरीटेज (आईसीएच) को नामांकित करने के लिए आवेदन विगत वर्ष 2024 में किया था। गोंड आदिवासी चित्रकला, पाटनगढ़ पाटनगढ़ की गोंड आदिवसी चित्रकला, कला का ऐसा रूप से जो स्थानीय गोंड जनजाति द्वारा 1400 वर्षों से अधिक समय से सहेजी गई है। यह कला प्रकृति और संस्कृति के बीच गहरे संबंधों को दर्शाती है। दीवार के भित्त चित्र हों या जीवन शैली के उत्पाद, इन सभी को जीवंत रंगों, जटिल रचनाओं और मनमोहक अभिव्यक्ति के माध्यम से तैयार किया जाता है। चूंकि यह समुदाय प्रकृति के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है, इसलिए उनसे प्रेरणा लेकर वे इसे चित्रकला में प्रदर्शित भी करते हैं। परंपरागत रूप से यह कला एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुंचती हैं। इन चित्रकलाओं में जहां पेड़–पौधों को कैनवास पर उकेरा जाता है वहीं पशुओं के साथ–साथ आकाश, सूर्य, चंद्रमा आदि का भी सुंदर चित्रण देखने को मिलता है। आकार और प्रयोग में लाई गई जटिलताओं के आधार पर इन्हें बनाने में 2 दिन से लेकर 2 महीने तक का समय लगता है। कई बार बड़ी कलाकृतियों को समूहों में तैयार किया जाता है।     नर्मदा परिक्रमा यह एक पवित्र आध्यात्मिक तीर्थयात्रा है, जिसमें देवी के रूप में पूजनीय मां नर्मदा नदी के चारों ओर 3500 किलोमीटर नंगे पैर परिक्रमा की जाती है। यह यात्रा भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है। यह ऐतिहासिक घाटों, मंदिरों और पवित्र शहरों से होकर गुजरती है। नर्मदा परिक्रमा की यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जिसका वर्णन महाकाव्यों और प्राचीन पवित्र ग्रंथों में मिलता है। यह परिक्रमा छह से आठ महीनों की अवधि में की जाती है। नर्मदा का तट ध्यान और तपस्या की भूमि भी रहा है, जिसे सांस्कृतिक रूप से कई महान ऋषियों और संतों की तपोभूमि के रूप में जाना जाता है। श्रद्धालु चलते समय लगातार मां नर्मदा की स्तुति करते हुए “नर्मदे हर!” का जाप करते हैं। यात्रा अमरकंटक स्थित मां नर्मदा के उद्गम से शुरू होकर पुन: उस बिंदु पर वापस आने के बाद पूरी मानी जाती है। तीर्थयात्रा पूरी होने के बाद, भक्तों को ओंकारेश्वर मंदिर जाना होता है जो भगवान शिव को समर्पित है और बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है।   भगोरिया आदिवासी नृत्य भगोरिया आदिवासी नृत्य और महोत्सव भील जनजाति के बीच खुशी, एकता और परंपरा का एक जीवंत उत्सव है। भगोरिया आदिवासी नृत्य भील समुदाय के भगोरिया त्यौहार का एक अभिन्न अंग है, जो होली के त्यौहार से सात दिन पहले मनाया जाता है। यह त्यौहार पूरे समुदाय व रिश्तेदारों से मिलने के साथ–साथ आनंद से सराबोर होने का अवसर होता है। यह त्यौहार फसल कटाई के मौसम का भी प्रतीक है। भील समुदाय के साथ-साथ भीलाला और पटेलिया जैसे स्थानीय आदिवासी समुदाय भी यह त्यौहार मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह त्यौहार भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करने की परंपरा के रूप में शुरू हुआ था। गांव भगोर में भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित एक मंदिर भी मौजूद है (ऐसा माना जाता है कि यह नाम शिव और पार्वती के लिए एक और नाम भाव-गौरी से लिया गया है)। इस दौरान सभी गांवों के निवासी अपनी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर पैदल आते हैं। पुरुष धोती और सिर पर साफा पहनते हैं। वे अपने पारंपरिक हथियार और कमर में घंटी की बेल्ट भी पहनते हैं। महिलाएं दुपट्टे के साथ घाघरा और पोल्की पहनती हैं। जनजातीय पुरुष और महिलाएं चांदी के पारंपरिक आभूषण पहनते हैं। समूह पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों जैसे मांदर, कुंडी, पीतल की थाली और बांसुरी का वादन करते हुए समूह नृत्य करते हैं।

वाई-फाई के फुल सिग्नल के लिए आजमाएं ये आसान हैक्स

नई दिल्ली आज वाई-फाई सभी घरों में बेहद आम है लेकिन इसके साथ आने वाली एक समस्या भी आम तौर पर सभी घरों में मिलती है। दरअसल कई बार ऐसा होता है कि वाई-फाई के सिग्नल सही से पूरे घर में नहीं आते। इसकी वजह से इंटरनेट स्लो हो जाता है या बार-बार रुकने लगता है। ऐसी समस्या हो सकता है आप भी झेल रहे हों और घर के किसी भी कोने में आपको भी वाई-फाई के कम सिगनल मिल रहे हों। ऐसा खासकर पर तब होता है जब घर बड़ा हो या दीवारें मोटी हों। लोग इसे ठीक करने के लिए नया राउटर या महंगे डिवाइस पर पैसे खर्च करने के बारे सोचने लगते हैं लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं है। कुछ आसान और घरेलू तरीकों से भी वाईफाई के सिग्नल को बेहतर किया जा सकता है। आज हम ऐसे ही 5 तरीके बताएंगे, जिन्हें कोई भी खुद घर पर बिना किसी टेक्निकल जानकारी के आजमा सकते हैं और अपने वाई-फाई को कहीं ज्यादा तेज और मजबूत बना सकते हैं। राउटर की जगह सोच कर चुनें घर में वाईफाई के सिग्नल अच्छे से आ पाएं इसके लिए राउटर को हमेशा घर के बीचों बीच और खुली जगह पर रखने की सलाह दी जाती है। अगर आपने राउटर किसी कोने में या अलमारी के अंदर रखा है, तो सिग्नल को पूरे घर में ट्रैवल करने में समस्या आएगी। एक्सपर्ट कहते हैं कि राउटर को ऊंचाई पर रखना चाहिए, जैसे किसी मेज या ऊंचे शेल्फ पर। आज चाहें तो इसे छत पर भी अटैच करवा सकते हैं। अक्सर दफ्तरों में राउटर सीलिंग के साथ अटैच करके इस्तेमाल किए जाते हैं। एक ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि राउटर के आस-पास माइक्रोवेव, वायरलेस फोन या बड़े मेटल के सामान न रखें हों क्योंकि ये सिग्नल को जाम करते हैं। अगर आप राउटर को सही जगह पर रखते हैं, तो सिग्नल पूरे घर में आसानी से पहुंच पाएगा। पुराने राउटर का सॉफ्टवेयर अपडेट करें जैसे मोबाइल में सॉफ्टवेयर अपडेट जरूरी होता है, वैसे ही वाईफाई राउटर का फर्मवेयर अपडेट करना भी जरूरी होता है। राउटर के लिए आने वाले अपडेट में बेहतर सिक्योरिटी और तेज नेटवर्क फीचर्स दिए जाते हैं। अगर आपके राउटर में स्पीड या सिग्नल से जुड़ी को समस्या आ रही है, तो हो सकता है कि कंपनी उसे नए अपडेट में ठीक कर चुकी हो। ऐसे में अगर आपका राउटर बहुत पुराने सॉफ्टवेयर पर चल रहा है, तो उसकी परफॉर्मेंस कमजोर हो सकती है। आप राउटर की सेटिंग्स में जाकर उसका फर्मवेयर अपडेट कर सकते हैं।​ राउटर को रीस्टार्ट करते रहें अक्सर देखा गया है कि लोग एक बार राउटर को लगाने के बाद उसे कभी ऑफ नहीं करते। इससे वाईफाई की स्पीड धीमी हो जाती है क्योंकि राउटर में बहुत ज्यादा लोड या छोटे-छोटे एरर आ जाते हैं। जैसे इंसानों को लगातार काम करने से थकावट होती है वैसे ही आपका राउटर भी थक कर स्लो हो जाता है। इसे ठीक करने के लिए हफ्ते में एक बार राउटर को बंद करके 1-2 मिनट बाद फिर से चालू करना चाहिए। ऐसा करने से राउटर का सिस्टम रिफ्रेश होता है और नेटवर्क की छोटी-मोटी दिक्कतें अपने आप ठीक हो जाती हैं। अगर आपके राउटर में ऑटोमैटिक रीस्टार्ट का ऑप्शन है, तो उसे ऑन रखना चाहिए। वाईफाई रिपीटर या बूस्टर का इस्तेमाल करें अगर आपका घर काफी बड़ा है और सिग्नल एक कोने से दूसरे कोने तक नहीं पहुंच पाता, तो वाईफाई रिपीटर या बूस्टर का इस्तेमाल करें। इस डिवाइस की मदद से आप राउटर के सिग्नल की पहुंच को बढ़ा सकते हैं। इसे प्लग में लगाकर आसानी से सेट किया जा सकता है। इसकी मदद से घर के दूर-दराज के हिस्सों में भी तेज वाईफाई सिग्नल पहुंच सकते हैं। यह तरीका बड़े घरों, दफ्तरों या दो मंजिल वाले मकानों के लिए बहुत अच्छा रहता है। बता दें कि आप पुराने राउटर को भी रिपीटर या बूस्टर के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।​ बेकार के डिवाइस नेटवर्क से हटाएं घर में जब बहुत सारे डिवाइस एक साथ वाईफाई से जुड़े रहते हैं, तो नेटवर्क पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में वाइफाई की परफॉर्मेंस कमजोर होना लाजमी है। ऐसे में जिन डिवाइसेज की जरूरत न हो, उन्हें वाईफाई से डिस्कनेक्ट कर देना बेहतर होता है। आप राउटर की सेटिंग में जाकर चेक कर सकते हैं कि कौन-कौन से डिवाइस उससे कनेक्ट हैं। इसके बाद आप आसानी से उन डिवाइसेज को राउटर से डिस्कनेक्ट कर सकते हैं जो बेकार ही आपके राउटर का लोड बढ़ा रहे हैं।

हिरण के सींग के साथ वन विभाग की टीम ने 2 शिकारियों को किया गिरफ्तार

रायपुर राजधानी रायपुर में वन विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है. विभागीय टीम ने मोवा इलाके में हिरण के सींग और अवशेषों के साथ 2 आरोपियों नाम यासिर खान और फराज खान को गिरफ्तार किया है. इस दौरान आरोपियों ने गिरफ्तारी का काफी विरोध किया, लेकिन वन विभाग की टीम ने किसी तरह उन्हें काबू में कर लिया. इस पूरे ऑपरेशन का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें टीम की सक्रियता साफ देखी जा सकती है. यह कार्रवाई प्रधान मुख्य वन संरक्षक व वन बल प्रमुख राव साहब के निर्देशन और रायपुर वन मंडलाधिकारी व संयुक्त वन मंडलाधिकारी के नेतृत्व में की गई. ऑपरेशन में उड़नदस्ता अधिकारी और रायपुर रेंजर दीपक तिवारी की अगुवाई में BFO अमृत पाल सिंह, BFO भूपेंद्र खैरवार, BFO दीपक वर्मा, BFO गोस्वामी और सहयोगी यशपाल शामिल रहे. वन विभाग की इस त्वरित और सटीक कार्रवाई को वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बड़ी सफलता माना जा रहा है. विभाग ने टीम को इस साहसिक अभियान के लिए बधाई दी है.

पहलगाम हमले के बाद देशभर में अलर्ट, दिल्ली में हाईलेवल बैठक

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद देशभर में आक्रोश का महौल है। साथ ही सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी सिलसिले में मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने की। इसमें बीएसएफ, एनएसजी और असम राइफल्स के प्रमुखों के साथ-साथ एसएसबी और सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी। बैठक में शामिल हुए ये अधिकारी बैठक में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के प्रमुख ब्रिघु श्रीनिवासन, असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेरा और एसएसबी की अतिरिक्त महानिदेशक अनुपमा नीलेकर चंद्रा मौजूद थीं। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों का एक्शन वहीं सोमवार को जम्मू और कश्मीर पुलिस ने डोडा जिले में 13 स्थानों पर छापे मारे, ताकि आतंकवादी ठिकानों का पर्दाफाश किया जा सके और आतंक गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही, श्रीनगर पुलिस ने शहर के कई स्थानों पर ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के सहयोगियों के घरों पर व्यापक छापेमारी की। मामले में जारी पुलिस विज्ञप्ति के अनुसार श्रीनगर पुलिस ने 63 व्यक्तियों के घरों की तलाशी ली। इन कारणों से की जा रही छापेमारी मीडिया रिपोर्ट की माने तो यह छापेमारी कानूनी प्रक्रिया के तहत और जम्मू और कश्मीर पुलिस के अधिकारियों की निगरानी में की गई, ताकि हथियार, दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण आदि जमा किए जा सकें और किसी भी संभावित आतंकवादी गतिविधि को रोकने के लिए सबूत जुटाए जा सकें। पहलगाम आतंकी हमला, एज नजर पहलगाम में मंगलवार 22 अप्रैल को आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा कर 26 लोगों की नृशंस हत्या कर दी थी। सेना की वर्दी में आए दहशतगर्दों ने पहलगाम की बायसरन घाटी में पर्यटकों से पहले उनका धर्म पूछा, परिचय पत्र देखे और फिर हिंदू हो कहकर गोली मार दी। 26 मृतकों में ज्यादातर पर्यटक हैं, जबकि दो विदेशी और दो स्थानीय नागरिक शामिल हैं। टीआरएफ ने ली हमले की जिम्मेदारी तीन जुलाई से शुरू होने जा रही श्रीअमरनाथ यात्रा से पहले इस कायराना हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े गुट द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है। फरवरी, 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद से जम्मू-कश्मीर में यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है। उस हमले में सीआरपीएफ के 47 जवान मारे गए थे। 

सीएम साय का बड़ा बयान, बोले-पानी नहीं, छाया नहीं, फिर भी 44 डिग्री तापमान में जवानों ने संभाला है मोर्चा

रायपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर में माओवादियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई जारी है. कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर जवानों ने नक्सलियों को घेर रखा है. ऑपरेशन में जवानों ने 3 महिला नक्सलियों को ढेर किया है. इस बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सबसे बड़े एंटी नक्सल ऑपरेशन को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने रणभूमि पर डटे जवानों के हौसले को सराहा है. प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर जारी एंटी नक्सल ऑपरेशन पर आज कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ और तेलंगाना बॉर्डर के कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर चल रहे सबसे बड़े एंटी नक्सल ऑपरेशन को लेकर अधिकारियों से चर्चा कर जानकारी ली है. रणभूमि में हमारे वीर जवान 44 डिग्री की तीव्र गर्मी, पानी की कमी और बिना छांव जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच भी डटे हुए हैं। उन्होंने जवानों के शौर्य और पराक्रम को नमन करते हुए सराहना की है. बता दें कि छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के सरहदी इलाके के कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर जवानों और नक्सलियों के बीच काफी दिनों तक मुठभेड़ चली. अभी भी जवानों ने नक्सलियों को घेर रखा है. मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने 5 नक्सलियों को मार गिराया है, जिनमें से 3 के शव और हथियार बरामद किए गए हैं. हीटवेव के शिकार हो चुके 40 जवान बड़े नक्सली लीडर की सूचना मिलते ही तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ की फोर्स को मिलाकर एक स्पेशल ऑपरेशन प्लान किया गया. युवा और जांबाज जवानों की टीम तैयार की गई, जो इन दुर्गम पहाड़ियों में टिक सके, लड़ सके और जीत सके. अब तक इस ऑपरेशन को 7 दिन हो चुके हैं. जवानों ने चारों तरफ से पहाड़ियों को घेर लिया है और धीरे-धीरे चोटी की ओर बढ़ रहे हैं. हालांकि गर्मी ने भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. अब तक 40 जवान हीटवेव का शिकार हो चुके हैं, जिन्हें एयरलिफ्ट कर इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. इस ऑपरेशन को सफल बनाने बिहार, झारखंड से भी सुरक्षा बल के जवानों को बुलाया गया है. नक्सलियों के पास महीनेभर का है राशन करीब 1 महीने का राशन और पहाड़ पर प्राकृतिक पानी के स्रोत नक्सलियों को ताकत दे रहे हैं. ऑपरेशन के दौरान जवानों को एक गुफा भी मिली, जिसमें एक शिवलिंग स्थापित था, लेकिन वहां कोई नक्सली नहीं मिला. कर्रेगट्टा की पहाड़ियों पर ये बड़े नक्सली लीडर हैं मौजूद सूत्रों के मुताबिक, कर्रेगट्टा की पहाड़ियों पर नक्सली लीडर हिड़मा, दामोदर, बल्ली प्रकाश, आजाद ये सभी बड़े सीसी मेंबर मौजूद हैं. इनके साथ चंद्रन्ना, सुजाता, विकल्प, विज्जा, उर्मिला, गंगा, अभय, पापा राव और देवा के अलावा बटालियन नंबर 1 और 2 के लगभग सभी बड़े नक्सली भी वहां मौजूद हैं. यानी अगर ये ऑपरेशन सफल होता है तो बस्तर में नक्सलवाद की कमर टूट जाएगी. नक्सल ऑपरेशन पर पूरे देश की नजर फिलहाल पुलिस और सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन को निर्णायक दौर में पहुंचा दिया है. हर दिन नक्सलियों के लिए आखिरी सुबह साबित हो रही है. कुछ दिन पहले ही पुलिस ने तीन महिला नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि की थी. साथ ही कई हथियार भी बरामद किए गए थे. पुलिस ने साफ कह दिया है कि जब तक नतीजा नहीं निकलेगा ऑपरेशन जारी रहेगा. यह बस्तर के इतिहास का सबसे बड़ा ऑपरेशन है और अब पूरे देश की नजर इस निर्णायक लड़ाई पर टिकी है.

बाल विवाह की रोकथाम के लिये निकाली गई जागरूकता रैली, ली गई शपथ

अनूपपुर कलेक्टर हर्षल पंचोली के निर्देशानुसार महिला एवं बाल विकास परियोजना अनूपपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत, आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा विद्यालयों में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत एक भी बाल विवाह न हो सके, इसके लिये विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। जिसमें बाल विवाह के रोक थाम हेतु जागरूकता रैली निकालने के साथ ही नारे लेखन का कार्य किया गया तथा शपथ भी ली गई। जिसके माध्यम से ग्रामीणजनों को बताया गया कि लड़के की उम्र 21 वर्ष व लड़की की उम्र 18 वर्ष पूर्ण होने के बाद ही विवाह करना चाहिये।

सुलतानपुर से मुंबई के मध्य समर स्पेशल ट्रेन , भोपाल मंडल के बीना, रानी कमलापति, इटारसी स्टेशनों से होकर गुजरेगी

 भोपाल  रेल प्रशासन द्वारा समर के दौरान अतिरिक्त यात्री यातायात को क्लियर करने और उनकी यात्रा मांग को पूरा करने के उद्देश्य से सुलतानपुर जंक्शन-लोकमान्य तिलक टर्मिनस-सुलतानपुर जंक्शन साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन विशेष किराये पर 08-08 ट्रिप चलाने का निर्णय लिया गया है। इस गाड़ी में शयनयान श्रेणी एवं सामान्य श्रेणी के कोच रहेंगे। यह स्पेशल ट्रेन पश्चिम मध्य रेल के बीना, रानी कमलापति एवं इटारसी स्टेशनों से होकर गन्तव्य को जाएगी।  सुलतानपुर जंक्शन-लोकमान्य तिलक टर्मिनस-सुलतानपुर जंक्शन साप्ताहिक समर स्पेशल ट्रेन (16 सेवाएं)  गाड़ी संख्या 04212 सुलतानपुर-एलटीटी साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन दिनांक 05 मई से 23 जून 2025 तक प्रत्येक सोमवार को सुलतानपुर जंक्शन स्टेशन से भोर 04:00 बजे प्रस्थान कर, बीना शाम 17:30 बजे, रानी कमलापति रात 20:00 बजे, इटारसी 22:20 बजे पहुँचकर, अगले दिन अन्य स्टेशनों से होते हुए मंगलवार दोपहर 14:00 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन पहुंचेगी। (08 ट्रिप)  गाड़ी संख्या 04211 एलटीटी-सुलतानपुर साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन दिनांक 06 मई से 24 जून 2025 तक प्रत्येक मंगलवार को लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन से शाम 16:35 बजे प्रस्थान कर, अगले दिन इटारसी सुबह 06:00 बजे, रानी कमलापति 07:45 बजे, बीना 10:50 बजे, पहुँचकर, अन्य स्टेशनों से होते हुए बुधवार रात्रि 23:00 बजे सुलतानपुर जंक्शन स्टेशन पहुंचेगी। (08 ट्रिप) ठहराव:- लखनऊ, कानपूर सेन्ट्रल, उरई, वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी, बीना, रानी कमलापति, इटारसी, खण्डवा, भुसावल, नासिक रोड, कल्याण एवं ठाणे। रेल यात्रियों से अनुरोध है कि समर स्पेशल ट्रेन की विस्तृत जानकारी स्टेशन, रेल मदद 139 अथवा ऑनलाइन वेबसाइड से प्राप्त कर सकते हैं।

कैबिनेट का फैसला :पराली जलाने वाले किसानों पर केस दर्ज होने पर अनाज समर्थन मूल्य पर खरीदा नही जाएगा

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक मई से 30 मई तक तकादले हो सकेंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में तबादला नीति को मंजूरी दी गई। ई- ऑफिस से ही तबादले आवेदन लिए जाएंगे। विभाग अपनी सुविधा अनुसार तबादला नीति बना भी सकेंगे। कैबिनेट की बैठक में हुए निर्णयों की जानकारी देते हुए नगरीय विकास, आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि परली जलाने पर संबधित किसान की सम्मान निधि एक साल के लिए रुकी जाएगी। पराली जलाने वाले किसानों पर केस दर्ज होने पर उस किसान का अनाज समर्थन मूल्य पर खरीदा नही जाएगा। इन प्रस्तावों पर लगी कैबिनेट की मुहर पराली जलाने के मामले में सरकार ने सख्त निर्णय लिया है। अगर कोई किसान पराली जलाएगा तो किसान सम्मान निधि एक साल के लिए रोक दी जाएगी और अगले साल उपज खरीदी नहीं जाएगी। इससे किसानों को नुकसान से बचना होगा। शासकीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की किस्त देने के मुख्यमंत्री के फैसले पर कैबिनेट ने अनुसमर्थन दिया है। अब कर्मचारियों को 55 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले भत्ते के बराबर हो गया है। सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के ट्रांसफर अब 1 मई से 30 मई 2025 के बीच हो सकेंगे। इसके लिए अधिकारी- कर्मचारियों को ऑनलाइन 30 मई तक ई-ऑफिस में ट्रांसफर के लिए अप्लाई करना होगा। 30 मई के बाद तबादले के लिए आवेदन करने वालों का ट्रांसफर नहीं हो सकेगा। विभाग अपने व्यवस्था के अनुसार ट्रांसफर नीति बना सकता है। कैबिनेट ने तबादला नीति में जो प्रस्ताव तय किए हैं उसके अनुसार मंत्री और प्रभारी मंत्री तबादले कर सकेंगे। इसके लिए विभागों में पद वार तबादलों का प्रतिशत भी तय किया गया है। 200 पद के लिए 20 प्रतिशत 201 से 1000 से 15 प्रतिशत 1001 से 2000 तक 10 प्रतिशत 2001 से अधिक पर 5 प्रतिशत तबादले होंगे। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि ग्रीन एनर्जी पर फोकस मोहन सरकार ने किया है।  इसलिए एमपी और यूपी सरकार की बिजली डिमांड को ध्यान रखते हुए प्लान तैयार किया गया है। एमपी में बरसात में बिजली की डिमांड कम हो जाती है जबकि यूपी में बरसात के दौरान डिमांड बढ़ जाती है। आगे मंत्री ने कहा कि कैबिनेट ने तय किया है कि तीन हजार मेगावाट का सोलर प्लांट लगाया जाएगा। एक हजार मेगावाट कंपोजिट प्लान में रहेगी जबकि 2 हजार मेगावाट यूपी को दी जा सकेगी। यह प्लांट चंबल में लगाया जाएगा। केंद्र सरकार की यूनिफाइड पेंशन योजना (यूपीएस) के लिए छह अधिकारियों की कमेटी बनी है। यह कमेटी कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक रूप पेंशन स्कीम का प्रस्ताव तैयार करेगी। इस कमेटी में अशोक बर्णवाल, मनीष रस्तोगी, लोकेश जाटव, तन्वी सुंद्रियाल, अजय कटेसरिया, जेके शर्मा इस कमेटी में शामिल हैं। कमेटी भारत की गाइडलाइन का अध्ययन कर रिपोर्ट देगी। भारत सरकार की गाइडलाइन के आधार पर यह कमेटी बनाई गई है।     विजयवर्गीय ने बताया कि राज्य सरकार अब केंद्र सरकार के समान शासकीय कर्मचारियों को 55 प्रतिशत महंगाई भत्ता देगी।     इससे राज्य सरकार पर 3.50 हजार करोड़ वित्तीय भार आएगा। कैबिनेट की बैठक में ग्रीन एनर्जी को लेकर भी निर्णय लिया गया।     मप्र और उत्तर प्रदेश अपनी अपनी डिमांड के अनुरूप ग्रीन एनर्जी बिजली का उपयोग करेंगे। ग्रीन एनर्जी संयंत्र मध्य प्रदेश में लगेगा और इससे उत्तर प्रदेश को भी बिजली मिलेगी।     मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश की बिजली मांग की अवधि एक दूसरे की पूरक होने के कारण मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में पूरक आधार पर विद्युत प्रदाय के लिए मध्य प्रदेश में 2000 मेगावाट सौर पार्क व 1000 मेगावाट कंपोजिट ऊर्जा भंडारण परियोजना स्थापित किए जाने के प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन किया गया।     इस परियोजना से दोनों राज्यों द्वारा पृथक-पृथक छः महीनों के लिए बिजली ली जाएगी। इसके अलावा पेंशन योजना के लिए कमेटी गठित की गई। यूनीफाइड पेंशन योजना देने पर यह कमेटी विचार करेगी।    

टॉम क्रूज की ‘टॉप गन: मेवरिक’ के मेकर्स पर मुकदमा दर्ज

लॉस एंजिल्स टॉम क्रूज जहां एक ओर अपनी अपकमिंग फिल्‍म ‘मिशन: इम्‍पॉसिबल – द फाइनल रेकनिंग’ को लेकर चर्चा में हैं, वहीं उनकी ‘टॉप गन: मेवरिक’ के मेकर्स कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। अमेरिकी फिल्म प्रोडक्‍शन और डिस्‍ट्र‍िब्‍यूशन कंपनी पैरामाउंट पिक्चर्स पर यह केस दर्ज किया गया है। यह मुकदमा फिल्‍म के स्‍क्र‍िप्‍ट राइटर एरिक सिंगर के चचेरे भाई शॉन ग्रे ने दायर किया है। उन्‍होंने आरोप लगाया गया है कि इस ब्लॉकबस्टर सीक्वल के सबसे रोमांचक सीन्‍स को गढ़ने में उन्‍होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन फिर भी उन्हें न तो इसका क्रेडिट मिला और ना ही मुआवजा। ‘पीपुल्स मैगजीन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी याचिका में शॉन ग्रे ने दावा किया है कि उन्होंने एरिक सिंगर और डायरेक्‍टर जोसेफ कोसिंस्की के साथ स्‍क्रीनप्‍ले पर पांच महीने काम किया था। यही नहीं, फिल्‍म के कुछ सबसे महत्वपूर्ण सीन्‍स उन्‍होंने ही लिखे हैं, जो बाद में ‘टॉप गन 2’ के सबसे यादगार एक्शन सीक्वेंस बन गए। इन्‍हीं सीन्‍स की वजह से फिल्‍म इतनी बड़ी हिट बनी। लेकिन उन्‍हें इसका क्रेडिट नहीं मिला। याचिका के साथ सबूत के तौर पर फाइल्‍स और ईमेल कानूनी दावे में आगे कहा गया है, ‘शॉन ग्रे ने बड़ी सावधानी से, फाइल्‍स और ईमेल बनाकर रखे हैं, जो फिल्‍म के इन सीन्‍स में उनकी राइटिंग और स्‍क्र‍िप्‍ट में उनके योगदान को दिखाते हैं।’ शॉन ग्रे ने मांगा है हर्जाना अपनी याचिका में शॉन ग्रे ने खुद को एक कुशल पटकथा लेखक बताया है। साथ ही तर्क दिया है कि उन्हें ‘हॉलीवुड के बड़े और पावरफुल लोगों ने बरगलाया और उनका शोषण किया गया।’ शॉन ग्रे ने अदालत से न्याय की गुहार लगाई है साथ ही हर्जाने की भी मांग की है, क्‍योंकि मेकर्स ने उनकी क्रिएटिविटी का दुरुपयोग किया और इससे बहुत अधिक लाभ कमाया।’ ‘टॉप गन: मेवरिक’ पर पहले भी दर्ज हुआ था एक केस बहरहाल, टॉम क्रूज की ‘टॉप गन: मेवरिक’ को लेकर पैरामाउंट का यह पहला कानूनी विवाद नहीं है। स्टूडियो पर पहले शोश और युवल योनय ने मुकदमा दायर किया था, जो दिवंगत एहू योनय के रिश्तेदार हैं। उनके 1983 के लेख के आधार पर ही पहली वाली ‘टॉप गन’ फिल्म बनी थी। एहू योनय ने तर्क दिया था कि पैरामाउंट ने बिना कॉपीराइट लिए 2022 में सीक्वल फिल्‍म का काम पूरा किया। यह कॉपीराइट एक्‍ट और अधिकारों का हनन है। इस मामले को भी शॉन ग्रे की ओर से केस लड़ रहे वकील मार्क टोबेरोफ ने ही संभाला था। अदालत ने पिछले साल इस मुकदमे को खारिज कर दिया, जिसके बाद अपील दायर की गई है। पैरामाउंट ने कहा- आरोप बेबुनियाद, ये केस भी खारिज होगा अब शॉन ग्रे के इस नए दावे और मुकदमे पर ‘पैरामाउंट’ ने भी प्रतिक्रिया दी है। प्रोडक्‍शन कंपनी ने इस दावों को खारिज करते हुए इसे बेबुनियाद बताया है। मेकर्स की ओर से कहा गया है, ‘यह मुकदमा, ‘टॉप गन: मेवरिक’ की सफलता का फायदा उठाने की कोश‍िश है। वकील टोबेरोफ पहले भी इस तरह के मुकदमे कर चुके हैं। हमें भरोसा है कि कोर्ट में इस दावे को भी खारिज कर दिया जाएगा।’ ‘टॉप गन 2’ ने कमाए थे 12,778 करोड़, 1 ऑस्‍कर भी जानकारी के लिए बता दें कि 2022 में रिलीज हाई-ऑक्टेन सीक्वल ‘टॉप गन: मेवरिक’ में टॉम क्रूज ने पर्दे पर लेफ्ट‍िनेंट पीट मेवरिक मिशेल के रूप में वापसी की थी। फिल्‍म में माइल्स टेलर, ग्लेन पॉवेल और वैल किल्मर जैसे दिग्‍गज एक्‍टर्स थे। इस फिल्‍म को 95वें ऑस्‍कर अवॉर्ड्स में 6 नॉमिनेशन मिले थे। जबकि इसने बेस्‍ट साउंड का एक एकेडमी अवॉर्ड अपने नाम किया था। ‘टॉप गन: मेवरिक’ ने वर्ल्‍डवाइड 1.5 बिलियन डॉलर यानी 12,778 करोड़ रुपये की कमाई की थी। एक्‍टर की ‘म‍िशन: इम्‍पॉस‍िबल – द फाइनल रेकन‍िंग’ भारत में अगले महीने 17 मई 2025 को होगी र‍िलीज।

भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने पूर्व सीएम बघेल समेत कांग्रेसी नेताओं के बयान का पलटवार किया

रायपुर  जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर देश में सियासत गरमाई हुई है. एक तरफ जहां कांग्रेस सुरक्षा में चूंक और आतंकियों की पहचान को लेकर लगातार केंद्र सरकार को घेरने में लगी है. वहीं भाजपा नेता भी कांग्रेस पर जमकर पलटवार कर रहे हैं. आज भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने पूर्व सीएम बघेल समेत कांग्रेसी नेताओं के बयान का पलटवार किया है. भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा कि कांग्रेस नेता बेफिजूल का बयान दे रहे हैं. खरगे, सिद्धरमैया, वाड्रा, भूपेश का बयान देख लीजिए, कांग्रेस नेताओं के बयान को ही पाकिस्तान दोहराता है. भूपेश बघेल के बयान को उठाकर पाकिस्तानी रक्षा मंत्री बयान देते हैं. पाकिस्तानी मंत्री ने छत्तीसगढ़ में आंतरिक आतंकवाद की बात कही है. भूपेश बघेल झीरम और पहलगाम में समानता बताते हैं. आखिर कांग्रेस के नेता बताना क्या चाह रहे हैं ? बता दें, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए दर्दनाक आतंकी हमले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल ही में प्रेस वार्ता में कहा था कि इस हमले ने न सिर्फ 26 परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे देश को शोक में डुबो दिया है. बघेल ने इस आतंकी घटना को ‘झीरम घाटी की घटना’ से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए. भूपेश बघेल ने कहा कि झीरम में भी नाम पूछ-पूछ कर मारा गया था. वहां भी 33 लोग मारे गए थे और पहलगाम में भी 26 लोगों की जान गई. पहलगाम में भी पुलिस बल और अर्धसैनिक बल मदद के लिए सामने नहीं आया. इस घटना ने झीरम घाटी की घटना की याद ताज़ा कर दी. हमारे सभी नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की, शोक व्यक्त किया और केंद्र सरकार को समर्थन देने की बात कही. लेकिन भाजपा की सोशल मीडिया टीम ने सिर्फ ‘धर्म पूछ-पूछ कर मारा’ को ही मुख्य मुद्दा बना दिया. पूर्व सीएम ने सवाल उठाते हुए कहा कि वहां सहायता क्यों नहीं पहुंची? इसका जिम्मेदार कौन है? इंटेलिजेंस फेलियर का जिम्मेदार कौन है?

मार्च 2026 तक पूरा प्रदेश नक्सल मुक्त होगा, सरकार और जवान नक्सलियों के सामने शक्ति से कार्रवाई कर रहे : मंत्री तोखन साहू

रायपुर  छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ा एंटी नक्सल ऑपरेशन 8 वें दिन भी जारी है। नक्सलियों के बड़े लीडरों को जवानों ने कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में घेर रखा है। इस मुठभेड़ में फ़ोर्स को बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद है। इस बीच नक्सलवाद के खात्मे को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने बड़ा बयान दिया है। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खात्मे की ओर है, लेकिन कुछ नेता और दल माओवाद को सपोर्ट करने में लगे हैं। तेलंगाना की एक पार्टी ऑपरेशन रोकने की अपील कर रही है। लेकिन केंद्रीय अमित शाह ने टारगेट तय कर दिया ऑपरेशन रुकेगा नहीं। मार्च 2026 तक पूरा प्रदेश नक्सल मुक्त होगा। सरकार और जवान नक्सलियों के सामने शक्ति से कार्रवाई कर रहे हैं। कांग्रेस के संविधान बचाओ रैली पर बोला केंद्रीय राज्य मंत्री का हमला केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कांग्रेस के संविधान बचाओ रैली पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने संविधान की हत्या की है। भाई भतीजा वाद करने वाले संविधान की बात क्या करेंगे। प्रदेश में प्रदर्शन करने भ्रमित करने कांग्रेस पार्टी आती है। कांग्रेस के सिर्फ नेताओं की सक्रियता सिर्फ प्रदर्शन करने के लिए दिखती है। कांग्रेस के मन में सेवा भाव नहीं है। बता दें कि तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों ने बड़ी संख्या में जवानों ने डेरा डाला हुआ है। हेलीकॉप्टर से इलाके की निगरानी रखी जा रही है। यहां नक्सलियों के बड़े लीडरों के होने की आशंका है। जिसके मद्देनजर फ़ोर्स ने भी पूरी तैयारी के साथ घेराबंदी कर ली है। फिलहाल तीन महिला नक्सलियों के शव बरामद कर लिए गए हैं, जिन पर 8-8 लाख का इनाम घोषित था। 

नक्सल विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन कगार’ आठवें दिन भी जारी, 24,000 जवान माओवादी समूहों को खत्म करने में जुटे

बस्तर छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के पास 800 वर्ग किलोमीटर के बड़े क्षेत्र में आठवें दिन भी नक्सल विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन कगार’ जारी है। इसमें कर्रेगुट्टा की पहाड़ियां भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ और केंद्रीय बलों के 24,000 से अधिक जवान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मिशन में भाग ले रहे हैं। ये माओवादी समूह शामिल ‘ऑपरेशन कगार’ का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र को कई नक्सल समूहों के नियंत्रण से मुक्त करना है, जिसमें दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी), तेलंगाना राज्य समिति (टीएससी), पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) बटालियन नंबर-1, सीआरसी कंपनी और अन्य माओवादी समूह शामिल हैं। ये समूह इस क्षेत्र का उपयोग हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में कर रहे हैं, जिसेस निर्दोष स्थानीय लोगों की जान को खतरा है। जारी रहेगा अभियान कुछ हफ्ते पहले नक्सली घटना में कई नागरिक घायल हो गए थे और उसर इलाके में एक महिला की मौत हो गई थी। अधिकारियों ने कहा कि यह सुरक्षाबलों की जिम्मेदारी है कि वे इलाके को खाली करवाएं और सुनिश्चित करें कि यह स्थानीय आबादी के लिए सुरक्षित है। अधिकारियों ने कहा है कि जब तक सभी अवैध माओवादी समूहों को क्षेत्र से हटा नहीं दिया जाता, तब तक ऑपरेशन जारी रहेगा। अब तक तीन नक्सली ढेर उन्होंने नक्सल सदस्यों से हिंसा छोड़ने और आत्मसमर्पण करने का भी आग्रह किया, उन्हें सामान्य जीवन में लौटने और समाज का हिस्सा बनने का मौका देना का वादा किया। वहीं, अब तक तीन नक्सली मारे गए हैं और उनेक शव बरामद किए गए हैं। ऑपरेशन के दौरान दो सुरक्षाकर्मियों को मामूल चोटें आई हैं। पहली घटना 24 अप्रैल को हुई पहली घटना 24 अप्रैल की रात को हुई, जब एक एसटीएफ जवान आईईडी विस्फोट के के कारण घायल हो गया। जवान के टखने में चोट आई। दूसरा विस्फोट 26 अप्रैल को हुआ, जिसमें एक डीआरजी जवान को मामूल चोट आई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि दोनों जवानों की हालत स्थिर है और उनका इलाज जारी है। उम्मीद है कि वे जल्द ठीक हो जाएंगे। हिडमा, दामोदर और देवा जैसे मोस्ट वांटेड नक्सली मौजूद पुलिस सूत्रों के अनुसार, हिडमा, दामोदर, देवा जैसे मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडरों और अन्य नक्सली नक्सली सहित शीर्ष नक्सली नेताओं की मौजूदगी के बारे में सटीक खुफिया जानकारी के मिलने के बाद छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना के सुरक्षाबलों को छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के पास बीजापुर के जंगल और कर्रेगुट्टा पहाड़ी की घेराबंदी करने के लिए भेजा गया। छत्तीसगढ़ के डीआरजी, बस्तर फाइटर, एसटीएफ, कोबरा और सीआरपीएफ के सुरक्षाकर्मी अब तक के सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियान में हिस्सा ले रहे हैं। भाजपा सरकार में 365 नक्सली मारे गए छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद तीन दिसंबर 2023 से अब तक सुरक्षाबलों ने अलग-अलग मुठभेड़ों में 365 नक्सलियों को मार गिराया है और 1382 नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 2306 नक्सली समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए लाला आंदोलन छोड़ चुके हैं। 2025 में अब 144 नक्सली ढेर 2025 में अब तक 144 नक्सलियों को मार गिराया गया है। वहीं, 367 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही 476 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल पहुंचे अमरकंटक, मां नर्मदा के किए दर्शन

अमरकंटक छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल आज सुबह धरमपानी रेस्ट हाउस से सीधे मध्यप्रदेश के अमरकंटक पहुचे जहा पर वे माँ नर्मदा उदगम मंदिर पहुचकर माता रानी के दर्शन किये,,और विधि विधान से पूजा अर्चना की। छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल रमेन डेका अपनी दो दिवसीय दौरे पर जीपीएम जिले में हैं। और आज उनके दौरे का दूसरा दिन है। राज्यपाल आज सुबह धरमपानी रेस्ट हाउस से सीधे मध्यप्रदेश के अमरकंटक पहुंचे। जहां पर वे मां नर्मदा उदगम मंदिर में विधि विधान से मां नर्मदा की पूजा अर्चना की। मां नर्मदा से छत्तीसगढ़ प्रदेश वासियों के लिए सुख समृद्धि की प्राथना की। पूजा अर्चना के बाद राज्यपाल महोदय अमरकंटक से सीधे जीपीएम के गौरेला ब्लॉक के पकरिया गांव पहुचेंगे। जहां पर वे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए। ग्रामीण आदिवासियों के घर का निरीक्षण करने के बाद पकरिया गांव में ही संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पहुचकर। वहां का भी निरीक्षण करेंगे। जिसके बाद वे वहां से सीधे पेंड्रारोड़ रेलवे स्टेशन पहुंचकर ट्रेन से रायपुर के लिए रवाना होंगे।  

एमेजॉन की सैटेलाइट इंटरनेट एंट्री, 27 सैटेलाइट इंटरनेट का पहला बैच अंतरिक्ष में पहुंचाया

नई दिल्ली सैटेलाइट इंटरनेट की दुनिया में अबतक हमने सिर्फ एलन मस्‍क की इंटरनेट कंपनी स्‍टारलिंक का नाम सुना है या कहें ज्‍यादा सुना है। स्‍टारलिंक, भारत में भी अपनी सेवाएं शुरू करना चाहती है और उसने जियो व एयरटेल के साथ पार्टनरशिप की है। कई और कंपनियां जैसे- वनवेब भी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस दुनिया तक पहुंचा रही हैं। अब इस क्षेत्र में एमेजॉन ने एंट्री कर ली है। एमेजॉन बरसों से अपने प्रोजेक्‍ट कुइपर (Project kuiper) को पूरा करने का ख्‍वाब देख रही थी। वह एक-दो नहीं, बल्कि 3 हजार से ज्‍यादा सैटेलाइट्स को पृथ्‍वी की निचली कक्षा में पहुंचाएगी। इसकी शुरुआत सोमवार को हो गई, जब कंपनी ने 27 सैटेलाइट इंटरनेट का पहला बैच अंतरिक्ष में पहुंचाया। 2019 में ऐलान, अब फ्लोरिडा से लॉन्‍च रिपोर्टों के अनुसार, एमेजॉन ने साल 2019 में प्रोजेक्‍ट कुइपर का ऐलान किया था। साेमवार को कंपनी ने इसकी शुरुआत की। 27 इंटरनेट टर्मिनल्‍स को लो-अर्थ ऑर्बिट में पहुंचा दिया। एमेजॉन का यह प्रोजेक्‍ट करीब 10 अरब डॉलर का है। कंपनी कुल 3236 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में पहुंचाने का लक्ष्‍य रखती है। इस क्षेत्र में उसका सीधा मुकाबला एलन मस्‍क की कंपनी स्‍टारलिंक से होगा। प्रोजेक्‍ट कुइपर का मकसद क्‍या है जिस तरह से स्‍टारलिंक दुनियाभर में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं उपलब्‍ध कराती है। उसी तरह से एमेजॉन भी कुइपर प्रोजेक्‍ट के जरिए यह काम करेगी। रिपोर्टों के अनुसार, वह उन इलाकों तक सैटेलाइट इंटरनेट पहुंचाएगी, जहां इंटरनेट की पहुंच नहीं है। सोमवार को हुए लॉन्‍च के दौरान कंपनी ने स्‍टारलिंक से कोई मदद नहीं ली। उसने अपने सैटेलाइट को बोइंग और लॉकहीड मार्टिन की कंपनी यूनाइटेड लॉन्च एलायंस (ULA) की मदद से अंतरिक्ष में भेजा। एटलस रॉकेट के जरिए सैटेलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचाया गया। देरी से लॉन्‍च हुआ है प्रोजेक्‍ट एमेजॉन अपने प्रोजेक्‍ट कुइपर को पिछले साल ही लॉन्‍च कर देना चाहती थी, लेकिन इसमें देरी होती गई। अमेरिका के फेडरल कम्‍युनिकेशंस कमीशन ने कंपनी से कहा है कि वह तेजी से काम करे। अगले साल जून तक कम से कम आधे सैटेलाइट लॉन्‍च कर दे। यानी कंपनी को 15 सौ से ज्‍यादा सैटेलाइट लॉन्‍च करने होंगे। स्‍टारलिंक से मुकाबले के लिए यह जरूरी भी है। अगर कंपनी और देर करती है तो वह एलन मस्‍क की कंपनी से पिछड़ सकती है। मस्‍क की स्‍टारलिंक अब अमेरिका से बाहर निकलकर अफ्रीकी देशों, एशियाई देशों में अपनी सर्विस पहुंचा रही है। एमेजॉन को अमेरिका से शुरुआत करनी होगी और सिर्फ 27 सैटेलाइटों के दम पर यह नहीं हो पाएगा। ज्‍यादा से ज्‍यादा टर्मिनल्‍स को समय रहते स्‍पेस में पहुंचाना होगा।

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