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CM बोले ‘हमें सम्मेलन में 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले,क्रियान्वयन से 75,000 नौकरियां पैदा होंगी

इंदौर  मध्य प्रदेश सरकार को प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिससे राज्य में 75,000 नौकरियां पैदा होने की संभावना है. मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव  इंदौर में “मध्य प्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025” में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने कहा कि ”हमें इस सम्मेलन में लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं. इन प्रस्तावों के क्रियान्वयन से लगभग 75,000 नौकरियां पैदा होंगी.” 500 से अधिक कंपनियों ने लिया कार्यक्रम में भाग मोह यादव ने कहा कि, ”प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में 500 से अधिक कंपनियों ने भाग लिया. इस सम्मेलन के दौरान निवेशकों को एकीकृत सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक प्रोत्साहन पोर्टल पेश किया गया. इसके अलावा, राज्य की वैश्विक क्षमता केंद्र नीति, सेमीकंडक्टर नीति, एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स, विस्तारित वास्तविकता नीति और ड्रोन नीति के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए.” 6 शहरों में बन रहा आईटी पार्क मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने घोषणा की कि, ”राज्य सरकार अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उपक्रमों को बढ़ावा देने के लिए अपनी स्वयं की अंतरिक्ष-तकनीक नीति तैयार करेगी. विभिन्न कंपनियों से राज्य को मिले निवेश प्रस्तावों के आधार पर 6 प्रमुख शहरों में आईटी पार्क विकसित करने का काम शुरू हो चुका है.” मुख्यमंत्री ने कहा कि, ”आईटी पार्क इंदौर के परदेशीपुरा क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के आधार पर लगभग 250 करोड़ रुपये के निवेश से 3 एकड़ के भूखंड पर विकसित किया जाएगा.” Tech एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट के नये केंद्र खुलेंगे CM ने कहा, ”लोकमाता देवी अहिल्या बाई की पावन नगरी में आयोजित IT सेक्टर का यह महाकुम्भ रोजगार के नये अवसरों के सृजन का माध्यम बनेगा. साथ ही स्टार्टअप एवं नवाचारों को प्रोत्साहन देगा. डिजिटल इंफास्ट्रक्चर के विकास में तेजी लाएगा, ग्लोबल इंवेस्टमेंट को आकर्षित करेगा और मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश के गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करेगा.” सीएम ने कहा, ”IT सेक्टर की ग्रोथ से प्रदेश में Tech एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट के नये केंद्र खुलेंगे. हम प्रदेश के युवाओं को विश्वस्तरीय आईटी एजुकेशन एवं डिजिटल स्किल देकर उन्हें रोजगारोन्मुखी बनाने हेतु संकल्पित हैं.” इससे पहले, सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीएम मोहन यादव ने कहा कि, ”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हर क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन हुए हैं, जिससे देश आगे बढ़ रहा है. अब भारत के पारंपरिक दुश्मन पाकिस्तान के लोग भी कह रहे हैं कि अगर मोदी उनके पीएम होते, तो वे इतनी मुश्किलों में नहीं पड़ते.” पिछली कांग्रेस सरकारों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, “1947 में भारत की आजादी के बाद, प्रशासन चलाने के लिए जिम्मेदार लोगों ने देश की क्षमता, योग्यता और उद्यमशीलता का सही इस्तेमाल नहीं किया. इससे देश को नुकसान हुआ है.” उद्योगों की स्थापना मंदिर निर्माण के समान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि, ”उद्योगों की स्थापना मंदिर निर्माण के समान है. उद्योग ऐसे मंदिर हैं जो ईश्वरीय आशीर्वाद की तरह श्रम की शक्ति से लाखों लोगों को आजीविका और समृद्धि प्रदान करते हैं. आज के तकनीकी युग में छोटे-छोटे देश भी उल्लेखनीय प्रगति कर रहे हैं और युद्धों के कारण पीछे छूट गए देश उद्यमिता के माध्यम से आगे बढ़ रहे हैं.” डॉ. यादव ने कहा कि, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम एक बदलते भारत को देख रहे हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से विकास कर रहा है. इंदौर ने औद्योगिक विकास में एक मील का पत्थर स्थापित किया है और आईटी क्षेत्र की राजधानी बन गया है. अतुल पंचशील जैसे उद्यमी इंदौर में असाधारण कार्य कर रहे हैं.” मुख्यमंत्री ने बताया कि, ”मध्य प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं. कोरिया जैसे देश, जिनके साथ भारत के गहरे सांस्कृतिक संबंध हैं, भी राज्य में निवेश करने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं.” आज के सम्मेलन में कोरिया और जापान के प्रतिनिधि मौजूद थे. डॉ. यादव ने घोषणा की कि इस सम्मेलन के माध्यम से लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लगभग 75,000 रोजगार सृजित होने की उम्मीद है.

आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने रक्षा मंत्री को सलाह दी कि हम तो रक्षा मंत्री से भी कहेंगे कि हमारी शक्ति का सदुपयोग करें

छतरपुर  जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों को मार दिया गया. जबकि कई टूरिस्ट घायल हुए थे. इस घटना के बाद देशभर में आक्रोश है. आम जनता से लेकर तमाम पॉलिटिकल पार्टी, सेलिब्रिटी आतंकी घटना का विरोध जता रहे हैं और मृतकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त कर रहे हैं. वहीं इस घटना पर छतरपुर के बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री भी अपनी प्रतिक्रिया पहले दे चुके हैं. अब उन्होंने देश के रक्षा मंत्री को अपनी शक्तियों की मदद लेने की बात कही है. देश के हित में अपनी शक्तियां लगाएंगे धीरेंद्र शास्त्री नरसिंहपुर जिले में भक्तों को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने बयान दिया. जहां उन्होंने कहा कि “हम तो देश के रक्षा मंत्री को भी कहेंगे, आप हमारी शक्ति की मदद ले सकते हैं. इस बीच उन्होंने कहा देखो मैं ऑफिशियल अफसर तो नहीं बन सकते, क्योंकि पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन हमारे पास जो चेतना है और हनुमानजी की कृपा है, आप उसका सदुपयोग करिए. आने वाले समय में कहां कौन सी संभावित घटना हो सकती है, उस पर आप हमारी शक्ति का सदुपयोग करिए. इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा लेकिन मैं अपनी शक्तियों को गोपनीय तरीकों से बताऊंगा, क्योंकि खुलकर बताएंगे, तो कई मुझे ही उड़ा देगा. उन्होंने कहा कि गोपनीय तरीके से वह राष्ट्रहित में काम शुरू कर रहे हैं, जिससे देश का भला हो. उन्होंने कहा कि सिर्फ मन की बता बता देने भर से राष्ट्र का भला होने वाला नहीं है. पहलगाम आतंकी हमले पर धीरेंद्र शास्त्री का बयान बता दें पहलगाम आतंकी घटना पर धीरेंद्र शास्त्री पहले भी विरोध जता चुके हैं. उन्होंने कहा था कि ” पहलगाम में जो घटना घटी, वो इस सदी की सबसे निंदनीय घटना है. आंतकियों ने ये नहीं पूछा कि तुम ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो या सेवक हो. उन्होंने ये नहीं पूछा कि तुम एससी, एसटी, ओबीसी या सवर्ण हो, बल्कि उन्होंने पूछा कि तुम हिंदू हो और गोली मार दी. उन्होंने कहा इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा. हिंदूओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये हो गई है कि हिंदुस्तान में हिंदू होना खतरा है. प्रदीप बोले-शस्त्र जरूरी धीरेंद्र शास्त्री के अलावा पंडित प्रदीप मिश्रा ने भी “हिंदुओं की सजग रहने रहने की सलाह दी थी. उन्होंने कहा था कि हिंदुओं के घर में शास्त्र न हो, लेकिन शस्त्र जरूर होना चाहिए. हमारे सनातन धर्म के किसी भी देवता के हाथ खाली नहीं होते, फिर हमारा घर क्यों खाली हो?”

rskmp.in पोर्टल पर लॉग इन कर पुनर्गणना विंडो को ओपन कर कक्षा 5 और 8 का चयन किया जा सकता

कक्षा 5 और 8 की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना के संबंध में निर्देश प्रदेश में 5 और 8  परीक्षा सत्र 2024-25 की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना प्रक्रिया के संबंध में राज्य शिक्षा केन्द्र ने दिशा-निर्देश जारी  rskmp.in पोर्टल पर लॉग इन कर पुनर्गणना विंडो को ओपन कर कक्षा 5 और 8 का चयन किया जा सकता राज्य शिक्षा केन्द्र ने जारी किये निर्देश भोपाल प्रदेश में कक्षा 5 और 8 वार्षिक मुख्य परीक्षा सत्र 2024-25 की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना प्रक्रिया के संबंध में राज्य शिक्षा केन्द्र ने दिशा-निर्देश जारी किये हैं। निर्देशों में बताया गया है कि कक्षा 5 और 8 के परीक्षा परिणाम की घोषणा के 5 दिन बाद 3 अप्रैल 2025 से परीक्षा पोर्टल पर पुनर्गणना की सुविधा लाइव की जा चुकी है। पुनर्गणना के लिये विद्यालय के माध्यम से छात्रों के पुनर्गणना के आवेदन पोर्टल पर पंजीकृत किये जा रहे हैं। विद्यालयों से कहा गया है कि rskmp.in पोर्टल पर लॉग इन कर पुनर्गणना विंडो को ओपन कर कक्षा 5 और 8 का चयन किया जा सकता है। जिन छात्रों द्वारा विद्यालय के समक्ष उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना के लिये ऑफ लाइन आवेदन प्रस्तुत किये गये हैं, उनके संबंध में पोर्टल में पंजीकरण करते हुए पुनर्गणना के चयनित विषयों को सबमिट किया जाये। छात्रवार एक से अधिक विषय की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना करायी जा सकती है। निर्धारित समयावधि के बाद किसी भी परिस्थिति में पुनर्गणना के लिये आवेदन स्वीकार नहीं किये जायेंगे। प्रक्रिया में 21 अप्रैल 2025 तक विद्यालय के माध्यम से छात्रों के पुनर्गणना के आवेदन पोर्टल पर पंजीकृत किये जायेंगे। 21 अप्रैल 2025 रात्रि 12 बजे के बाद यह सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी। मूल्यांकन केन्द्र अधिकारी पुनर्गणना के लिये समस्त आवेदनों की पुनर्गणना के बाद संशोधित प्राप्तांकों की एंट्री पोर्टल पर 28 अप्रैल तक करने के लिये कहा गया है। इस तिथि का पालन न करने पर मूल्यांकन अधिकारी के विरूद्ध कार्रवाई की जायेगी। उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना की प्रक्रिया में 21 अप्रैल तक आवेदन पोर्टल पर पंजीकृत करने के लिये समस्त शालाओं को सूचित करने का उत्तरदायित्व डीपीसी, बीआरसीसी और जनशिक्षकों का संयुक्त रूप से निर्धारित किया गया है।  

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना “पर ड्रॉप-मोर क्रॉप” 13 हजार 500 कृषकों को स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रदेश में 30 मार्च से प्रारंभ किये गये जल गंगा संवर्धन अभियान में उद्यानिकी विभाग द्वारा गाँव-गाँव में आयोजित की जा रही “पानी चौपाल” आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बन गई है। “पानी चौपाल” में मैदानी अमले द्वारा गाँव के किसानों को जल संरक्षण के साथ, कम पानी से होनी वाली फसलों, कृषि के साथ उद्यानिकी फसलों को जोड़कर अधिक लाभ कमाने और नवीन उद्यानिकी तकनीकियों की समझाइश दी जा रही है। इसके साथ ही अभियान के दौरान ही फलोद्यान,‍ड्रिप लाइन, प्लास्टिक मलचिंग, सब्जी क्षेत्र, मसाला क्षेत्र, पुष्प क्षेत्र विस्तार योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिये उद्यानिकी विभाग के ऑनलाइन पोर्टल से पंजीयन भी कराया जा रहा है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना “पर ड्रॉप-मोर क्रॉप” अंतर्गत 13 हजार 500 कृषकों को 76.68 करोड़ रूपये की लागत स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। लगभग 5 हजार हैक्टेयर में फलदार पौधों का रोपण, सभी विकासखंड में उपलब्ध जल से सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से उचित प्रबंधन पर कार्यशालाओं का आयोजन करने तथा अभियान के लिये 25 लाख से अधिक फलदार पौधे उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिये “पानी चौपाल” में ही किसानों को ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की जानकारी भी प्रदान की जा रही है। “पानी-चौपाल” गुना जिले के गुना विकासखंड ग्राम अकावदा में, विकासखंड चाचौड़ा की ग्राम पंचायत उकविदा, शिवपुर, टीकमगढ़ जिले के विकासखंड जतारा के नतोवली ग्राम पंचायत सेवार, रतलाम जिले के सैलाना विकासखंड के ग्राम सलवानिया और ग्राम सोहौला, छतरपुर जिले के लवकुश नगर विकासखंड के ग्राम में, अशोक नगर जिले के विकासखंड मुगांवली की शासकीय संजय निकुंज गोपालिया में, नर्मदापुरम के विकासखंड माखननगर, मैहर जिले के विकासखंड मुख्यालय के ग्रामों में, सिवनी जिले के विकासखंड केवलारी के ग्राम खैराजी सहित प्रदेश के सेकड़ों ग्रामों में पानी चौपालों का आयोजन लगातार जारी है। पानी चौपाल में किसानों के आये सुझाव और समास्याओं पर अमल व निराकरण एक साथ किया जाएगा।  

नई शिक्षा नीति के तहत अब सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी

भोपाल नई शिक्षा नीति के तहत अब निजी स्कूलों को टक्कर देने के लिए सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी हो चुकी है। आगामी 16 जून से नए शिक्षा सत्र में जिले के 226 स्कूलों में नर्सरी की कक्षाएं शुरू होंगी, जिसके चलते सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चों को नर्सरी से शिक्षा उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए तीन वर्ष की उम्र वाले विद्यार्थियों को संस्था में प्रवेश दिया जायेगा। यह सभी स्कूल सांदिपनी विद्यालय से अलग होंगे। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्कूलों में यह सभी व्यवस्था लागू होंगी। जिला परियोजना समन्वयक रमेश राम उईके ने बताया कि जिले के 226 सरकारी स्कूलों में नए शिक्षा सत्र 16 जून से नर्सरी की कक्षाएं शुरू होंगी। इन कक्षाओं को नियमित किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में पीपी-2 और पीपी-3 की कक्षाएं होंगी, जो केजी-1 अन्य कक्षाओं को नियमित किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में पीपी-2 और पीपी-3 की कक्षाएं होंगी, जो केजी-1 और केजी-2 के समकक्ष हैं। नर्सरी के विद्यार्थियों को शिक्षा देने के लिए डाइट के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जायेगा, जिससे कि शिक्षक विद्यार्थियों को शुरुआती दौर में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का ज्ञान दे सकें। इसके अतिरिक्त शिक्षक बच्चों को नाच-गाकर भी पढ़ाएंगे, जिससे कि विद्यार्थियों को आसानी से अक्षर का ज्ञान हो सकेगा। नर्सरी में प्रवेश के लिए तीन साल की उम्र निर्धारित नई शिक्षा नीति के अनुसार पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 6 से साढ़े 7 वर्ष व नर्सरी में प्रवेश के लिए तीन साल की उम्र निर्धारित की गई हैं। निजी स्कूलों में पहले से ही नर्सरी की कक्षाएं संचालित हैं। इन स्कूलों को टक्कर देने के लिए ही सरकारी स्कूलों में यह पहल शुरु की जा रही है। 226 स्कूलों के बाद आगामी समय में जिले के अन्य सभी स्कूलों में इस व्यवस्था को लागू किया जायेगा। डीपीसी के मुताबिक प्राइवेट स्कूल की तर्ज पर अब शिक्षक नर्सरी के बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाएंगे। पिछले वर्ष के आगे की कक्षा में भेजे जाएंगे और अभिभावकों को शिक्षक घर-घर जाकर सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षा में प्रवेश दिलाने के लिए प्रेरित करेंगे। नए प्रयोग से मजबूत होगी बच्चों की नींव डीपीसी आरआर उइके के मुताबिक स्कूल शिक्षा विभाग का यह तर्क है कि सरकारी स्कूलों से अधिक से अधिक बच्चों को जोड़ा जाए। यदि प्रारंभिक दौर में नर्सरी के बच्चों को स्कूल से जोड़ा जाएगा तो वह आगे की कक्षा में भी सरकारी स्कूलों में ही अध्ययन करेंगे। शिक्षक नाच-गाकर नर्सरी के बच्चों को अक्षर का ज्ञान सिखाएंगे ऐसे में विद्यार्थी कक्षा पहली तक आते-आते अक्षर व शब्द लिखना पूरी तरह सीख जाएंगेे। ऐसे में बच्चों की शिक्षा की राह आसान होगी ओर उनकी नींव भी पूरी तरह मजबूत होगी। विभाग ने इसके लिए नियम लागू कर दिए हैं। शिक्षकों को घर-घर जाकर सर्वे करने के निर्देश भी जारी किये गए हैं। बच्चों के लिए करें व्यवस्था राज्य शिक्षा केंद्र ने जिला कलेक्टरों को जारी दिशा-निर्देश में कहा है कि प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए स्कूल में टाट पट्टी, पीने का पानी और शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए. जिस विद्यालय में प्रवेश दिया जाना है, वहां कम से कम दो कक्षाओं में प्रवेश पाने वाले बच्चों की कक्षा संचालन की सुविधा हो और बाहर खेलने के लिए मैदान पर्याप्त जगह वाला हो.  

9 किलोमीटर के वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के कारण फंसा 495 करोड़ का हाईवे प्रोजेक्ट! 8 महीने से अटका काम

 श्योपुर मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में बन रहे 155 किमी के राष्ट्रीय राजमार्ग 52 (NH 52) में भले ही पहले दो भाग (पाली-गोरस और गोरस-श्यामपुर) काम चल रहा है, लेकिन तीसरे भाग श्यामपुर-सबलगढ़ का काम टेंडर होने के 8 महीने बाद भी अटका हुआ है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस भाग में 9 किलोमीटर का वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का क्षेत्र आ रहा है, लिहाजा अभी काम की अनुमति नहीं मिली है। हालांकि एनएच के अफसर आवेदन कर चुके हैं, लेकिन अभी एनओसी का इंतजार है।  यही वजह है कि पिछले दिनों श्योपुर आए प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला भी समीक्षा बैठक में वन विभाग के अधिकारियों को इसकी प्रक्रिया गंभीरता से पूरी कराने के निर्देश दे गए हैं। उल्लेखनीय है कि जिले में नेशनल हाइवे के 155 किमी में पाली श्योपुर-गोरस के भाग में 60 फीसदी काम हो गया है, जबकि गोरस-श्यामपुर के भाग में प्रारंभिक काम शुरु हो गया है। बीच में नौ किमी का वाइल्डलाइफ कॉरिडोर यूं तो श्यामपुर से सबलगढ़ तक फुल 55 किलोमीटर के हाइवे निर्माण होना है, लेकिन इसमें किलोमीटर का हिस्सा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का आ रहा है। जिसमें श्योपुर कूनो नेशनल पार्क और राजस्थान के कैलादेवी अभयायरण्य के बीच का ये हिस्सा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के रूप में संरक्षित है, यही वजह है कि हाइवे निर्माण के लिए एनओसी की जरुरत है। बताया गया है कि श्यामपुर-सबलगढ़ हाइवे में नए एलाइनमेंट के अनुसार वीरपुर कस्बे के बाहर से हाइवे निर्माण होगा। वहीं वीरपुर के आगे जाकर ब्रॉडगेज रेल लाइन के ऊपर से ओवरब्रिज भी बनाया जाएगा। 495 करोड़ में बनना है ये 55 किमी का मार्ग नेशनल हाइवे 552 (एक्सटेंशन) पाली-श्योपुर-गोरस-श्यामपुर-सबलगढ़ का 3 भाग में काम हो रहा है। इसी के तहत ये तीसरा भाग श्यामपुर से सबलगढ़ का है। 55 किलोमीटर के इस भाग के लिए गत वर्ष सितंबर माह में ही टेंडर हो चुके हैं, जिसमें इसके निर्माण की लागत 495 करोड़ रुपए है। लेकिन टेंडर होने के 8 महीने बाद भी काम शुरु होना तो दूर अभी तक संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ एग्रीमेंट भी नहीं हुआ है। यही वजह है कि फिलहाल सड़क निर्माण अधर में लटका है। इस मामले में एनएच-पीडब्ल्यूडी श्योपुर के सब इंजीनियर विजय अवस्थी ने बताया कि ‘एनएच के तहत श्यामपुर-सबलगढ़ के निर्माण के लिए टेंडर तो पिछले साल हो गए थे, लेकिन इसके बीच वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का हिस्सा आ रहा है, जिसकी एनओसी के लिए हमने आवेदन किया हुआ है। एनओसी मिलते ही इसका काम शुरू हो जाएगा।’

MP में सरकारी नौकरी पर भर्ती के लिए परीक्षा का तरीका बदलेगा, पीएससी और चयन मंडल की परीक्षाएं अब एक बार, बढ़ेगी पारदर्शिता

 भोपाल मध्य प्रदेश की मोहन सरकार सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली भर्ती और चयन परीक्षा में बड़ा परिवर्तन करने जा रही है। राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से होने वाली भर्ती परीक्षाएं अब बार-बार नहीं होंगी। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तर्ज पर वर्ष में केवल एक बार परीक्षा होगी और सभी श्रेणी के पदों के लिए प्रावीण्य सूची बना ली जाएगी। प्रतीक्षा सूची भी एक ही रहेगी। इसके लिए पदों की संख्या सभी विभागों से वर्ष में एक बार पूछ ली जाएगी और उसके आधार पर सितंबर में आगामी वर्ष के लिए कैलेंडर निर्धारित हो जाएगा। जनवरी, 2026 से भर्ती-चयन की यह प्रक्रिया लागू करने की तैयारी सामान्य प्रशासन विभाग कर रहा है। कैलेंडर के हिसाब से परीक्षाएं होती है आयोजित प्रदेश में द्वितीय और कार्यपालिक तृतीय श्रेणी के पदों की भर्ती पीएससी के माध्यम से होती है। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के लिए कर्मचारी चयन मंडल परीक्षाएं कराता है। अभी जैसे-जैसे विभागों की ओर से पद उपलब्ध होते हैं, वैसे-वैसे दोनों एजेंसियां अपने कैलेंडर के हिसाब से परीक्षाएं आयोजित करती हैं। बार-बार फीस और परीक्षा देनी पड़ती है इसमें न केवल अधिक समय लगता है बल्कि अभ्यर्थियों को बार-बार फीस और परीक्षा देनी पड़ती है। एजेंसियों को भी हर परीक्षा के लिए मानव संसाधन से लेकर अन्य व्यवस्थाएं करनी होती हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को परिवर्तित करने के निर्देश दिए थे। इसके अनुरूप सामान्य प्रशासन विभाग ने पीएससी और कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं के साथ विभागीय भर्ती नियम सहित अन्य प्रक्रियाओं में परिवर्तन का खाका तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा ही तरह की परीक्षा से विभिन्न श्रेणी के उपलब्ध पदों के लिए मेरिट के हिसाब से चयन किया जाएगा। एक बार बनाई जाएगी प्रतीक्षा सूची विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अभ्यर्थियों से आवेदन के समय विकल्प मांगे जाते हैं। मेरिट के हिसाब से यदि उसका चयन दो पदों के लिए हो जाता है और ऐसे में वह जिस पद का चयन करता है तो दूसरा पद प्रतीक्षा सूची वाले को मिल जाएगा। प्रतीक्षा सूची एक बार बनाई जाएगी। पद उपलब्ध होते ही इस सूची के अभ्यर्थी को मौका मिलता रहेगा। दरअसल, अभ्यर्थी एक साथ कई परीक्षाएं देते हैं और अलग-अलग पद पर चयन होने पर वे किसी एक सेवा का चयन करते हैं। ऐसे में अन्य पद रिक्त रह जाते हैं। नियम से लेकर परीक्षा का ब्योरा रहेगा ऑनलाइन सूत्रों का कहना है कि पारदर्शिता के लिए नियम से लेकर परीक्षा का पूरा ब्योरा ऑनलाइन रहेगा। अभी पीएससी के माध्यम से होने वाली परीक्षा में कई बातें सार्वजनिक नहीं की जाती हैं, जिससे अभ्यर्थी कोर्ट चले जाते हैं। परीक्षा परिणाम या चयन सूची पर रोक लगा जाती है। पूरी प्रक्रिया रुक जाती है। आगे ऐसा न हो, इसके लिए सभी जानकारियां ऑनलाइन की जाएंगी ताकि किसी को सूचना के अभाव में कोई संदेह न रहे। एक जैसे होंगे विभागों के भर्ती नियम विभागों के भर्ती नियम भी अब एक जैसे होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ही इन्हें बनाकर अधिसूचित करने के लिए देगा। यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि एकरूपता रहे। इसमें समान प्रकृति के पदों के लिए एक जैसे नियम हो जाएंगे। साथ ही यह लाभ भी होगा कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों को विज्ञापन निकालते समय विभागीय भर्ती नियम के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा और समय पर विज्ञापन जारी हो जाएंगे। दो-ढाई लाख पदों पर होंगी भर्तियां प्रदेश में आगामी दो-तीन साल में दो से ढाई लाख सरकारी पदों पर भर्तियां होनी हैं। इसमें रिक्त पदों के साथ पदोन्नति होने पर खाली होने वाले पद भी शामिल हैं। ये सभी पद समयसीमा में भर जाएं, इसके लिए चयन प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन किया जा रहा है। बार-बार नहीं देनी होगी परीक्षा     मुख्यमंत्री की मंशा है कि परीक्षाएं समय पर और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। विवाद की स्थिति नहीं बननी चाहिए और अभ्यर्थी को बार-बार परीक्षा भी न देनी पड़े। इसके लिए नियमों में संशोधन करके पूरी व्यवस्था में ही परिवर्तन किया जा रहा है। प्रयास यह है कि सितंबर तक यह प्रक्रिया पूरी करके जनवरी, 2026 से लागू कर दिया जाए।- संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग  

एनसीईआरटी की कक्षा 7वीं की इतिहास की पाठ्यपुस्तक से मुगलों और दिल्ली सल्तनत से संबंधित सभी संदर्भ हटाया

नई दिल्ली नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 7 की सामाजिक विज्ञान की किताब में बड़ा बदलाव किया है. NCERT ने इस किताब में से मुगलों और दिल्ली सल्तनत से जुड़ा पूरा हिस्सा हटा दिया है. इसकी जगह पर ‘पवित्र स्थल’, ‘महाकुंभ’ और ‘सरकारी योजनाओं’ पर जोर दिया गया है. इस बदलाव को न्यू एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCFSE) 2023 के अनुरूप बताया गया है, जिसका मकसद शिक्षा में भारतीय ज्ञान, परंपराओं और स्थानीय सोच को जोड़ना है. क्लास 7 की सामाजिक विज्ञान की किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ (Exploring Society: India and Beyond) है.  रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें अब मौर्य, शुंग, सातवाहन जैसे प्राचीन भारतीय राजवंशों पर फोकस किया गया है. वहीं मुगलों, तुगलकों, खिलजियों, ममलूक और लोधी वंश जैसे मध्यकालीन शासकों का अब कोई जिक्र नहीं है. मुगलों को इतिहास से बाहर करने की कोशिश? प्रोफेसर अली नदीम रिजवी ने इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “देश का माहौल इस तरह से बदल रहा है कि मुगलों को इतिहास से गायब करने की कोशिश की जा रही है. इतिहास चाहे अच्छा हो या बुरा, वह इतिहास होता है और उसे बदला नहीं जा सकता. हां, अगर नए तथ्य सामने आते हैं, तो उन्हें शामिल किया जा सकता है, लेकिन इतिहास से किसी भी महत्वपूर्ण संदर्भ को हटा देना सही नहीं है.” प्रोफेसर रिजवी ने यह भी कहा कि इतिहास का या किसी भी विषय का सिलेबस बार-बार संशोधित किया जा सकता है, लेकिन इतिहास के कुछ पन्नों को गायब करना चिंताजनक है. उनका मानना है कि अगर नई जानकारी मौजूद है, तो उसे पाठ्यपुस्तकों में जोड़ा जा सकता है, लेकिन इतिहास के कुछ हिस्सों को हटाना या नजरअंदाज करना देश के लिए हानिकारक हो सकता है. क्या मुगलों का योगदान मिटाने की कोशिश हो रही है? प्रोफेसर रिजवी ने यह भी कहा कि यह बदलाव देखकर ऐसा लगता है कि मुगलों के योगदान को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को यह पता न चले कि मुगलों ने देश के इतिहास और संस्कृति में क्या योगदान दिया था. उन्होंने आशंका जताई कि यह बदलाव कहीं ना कहीं उस वातावरण का हिस्सा हो सकता है, जिसमें इतिहास को फिर से लिखा जा रहा है और कुछ हिस्सों को जानबूझकर हटा दिया जा रहा है. प्रोफेसर रिजवी ने इस बारे में विस्तार से बताया कि अगर पाठ्यपुस्तकों में भारतीय संस्कृति, सभ्यता या समाज के बारे में बात की जा रही है, तो महाकुंभ, मेक इन इंडिया, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे विषयों को वहां शामिल किया जा सकता है, क्योंकि ये हमारे समाज और संस्कृति का हिस्सा हैं. लेकिन जहां तक इतिहास की बात है, तो इतिहास को सिर्फ इतिहास तक सीमित रखा जाना चाहिए. इतिहास को बदलने की कोशिश करना या उसमें हेरफेर करना, उनके मुताबिक, निंदनीय है. नया पाठ्यक्रम: संस्कृति और इतिहास का सही संतुलन प्रोफेसर रिजवी ने इस संदर्भ में कहा कि यदि किताबें संस्कृति और सभ्यता के बारे में बात करती हैं, तो उन्हें महाकुंभ और अन्य सांस्कृतिक संदर्भों को शामिल करने की आज़ादी होनी चाहिए. लेकिन इतिहास को इतिहास ही रहने देना चाहिए, और उसे बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. उनका कहना था कि मुगलों को ‘इनविजिबल’ करने की जो कोशिश हो रही है, वह भारत के इतिहास को समझने में एक बड़ी बाधा साबित हो सकती है. कौन-से चैप्टर हटाए गए? दिल्ली की NCERT की नई पाठ्यपुस्तकों में कक्षा 7 की किताबों से मुगल और दिल्ली सल्तनत के चैप्टर्स हटा दिए गए हैं. इन बदलावों के तहत नए अध्यायों में भारतीय राजवंश, ‘पवित्र भूगोल’, महाकुंभ और सरकारी योजनाओं पर जोर दिया गया है. NCERT अधिकारियों के मुताबिक, ये पाठ्यपुस्तक का पहला हिस्सा है और दूसरा हिस्सा आने वाले महीनों में जारी किया जाएगा. हालांकि, उन्होंने यह पुष्टि नहीं की कि पहले हटाए गए हिस्से वापस जोड़े जाएंगे या नहीं. कोविड-19 महामारी के दौरान 2022-23 में NCERT ने पहले ही मुगल और दिल्ली सल्तनत पर आधारित हिस्सों को कम कर दिया था, लेकिन अब नई पाठ्यपुस्तक ने इन्हें पूरी तरह हटाने का फैसला किया गया है. ‘Exploring Society: India and Beyond’ नाम के सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में नए अध्याय शामिल हैं जो प्राचीन भारतीय राजवंशों जैसे मगध, मौर्य, शुंग और सातवाहन पर केंद्रित हैं. महाकुंभ का जिक्र नई पाठ्यपुस्तक में ‘पवित्र भूगोल’ नाम के अध्याय भी शामिल हैं जिसमें भारत के पवित्र स्थानों और तीर्थयात्राओं के बारे में विस्तार से बताया गया है. इसमें 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम यात्रा, और शक्ति पीठों का वर्णन किया गया है. महाकुंभ मेला, जो इस साल प्रयागराज में आयोजित हुआ, उसे भी पाठ्यपुस्तक में शामिल किया गया है, जिसमें बताया गया है कि इस में लगभग 660 मिलियन यानी 66 करोड़ लोग शामिल हुए थे. एक नया चैप्टर ‘हाउ दी लैंड बिकम्स सेक्रेड’ (How the Land Becomes Sacred) भी जोड़ा गया है. इसमें बताया गया है कि भारत और दूसरे देशों में कैसे जमीन को पवित्र माना जाता है. इस चैप्टर में इस्लाम, ईसाई, यहूदी, पारसी, हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म जैसे धर्मों के लिए भारत और विदेश में पवित्र माने जाने वाले स्थानों और तीर्थस्थलों के बारे में भी बताया गया है. इसके अलावा, चार धाम यात्रा, 12 ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ और पवित्र नदियों के संगम की चर्चा है. साथ ही यह भी बताया गया है कि किस तरह बद्रीनाथ से कन्याकुमारी तक भारत को ‘तीर्थों की भूमि’ माना गया है.

प्राइवेट स्कूलों में 5 मई से होंगे आरटीई से एडमिशन, टाइमटेबल घोषित, 7 मई से 21 मई तक होंगे आवेदन

भोपाल  आर्थिक रूप से कमजोर व वंचित वर्ग के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में नि: शुल्क शिक्षा पाने का अवसर खुल गया है। सत्र 2025-26 के लिए आरटीई अधिनियम में नि: शुल्क प्रवेश प्रक्रिया कार्यक्रम घोषित कर दिया है। सीटें होंगी आरक्षित योजना में प्रदेश के मान्यता प्राप्त निजी गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी। आवेदन प्रक्रिया 7 से 21 मई तक पूरी तरह ऑनलाइन रहेगी। स्कूलों का आवंटन 29 मई को लॉटरी के माध्यम से होगा। प्रक्रिया पारदर्शी व डिजिटल होगी। शिक्षा विभाग 5 मई को मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों और आरक्षित सीटों की जानकारी वेबसाइट पर जारी करेगा। आवेदन के साथ जन्म, निवास, बीपीएल प्रमाण-पत्र तथा माता-पिता के पहचान-पत्र को अपलोड करना अनिवार्य रहेगा। आवेदन के बाद 7 से 23 मई तक दस्तावेजों का मूल सत्यापन संबंधित जनशिक्षा केंद्रों पर होगा। सूची होगा तैयार सत्यापन उपरांत योग्य अभ्यर्थियों की सूची तैयार होगी। स्कूल आवंटन के बाद अभिभावकों को एसएमएस के माध्यम से सूचना मिलेगी। इसके बाद 2 से 10 जून तक विद्यार्थियों को उपस्थिति दर्ज करानी होगी तथा मोबाइल एप के माध्यम से रिपोर्टिंग भी करनी होगी। योजना का लाभ केवल मप्र के मूल निवासी बीपीएल या वंचित समूह के बच्चों को मिलेगा। इस प्रकार तय किए गए नर्सरी: 3 वर्ष से 4 वर्ष 6 माह, केजी-14 वर्ष से 5 वर्ष 6 माह, केजी-2: 5 वर्ष से 6 वर्ष 6 माह व कक्षा-1:6 वर्ष से 7 वर्ष 6 माह। गलत जानकारी देने या अधूरे दस्तावेज प्रस्तुत करने पर आवेदन निरस्त हो जाएगा। दिन 1-5: इम्पॉर्टन्ट सब्जेक्ट्स कवर करें सभी इम्पॉर्टन्ट सब्जेक्ट्स निकालें सबसे पहले उन विषयों को चुनें जो आपके लिए सबसे इम्पॉर्टन्ट हैं और जिन्हें आप अच्छे से समझते हैं। उदाहरण के तौर पर, गणित, रसायनशास्त्र और भौतिकी के कुछ महत्वपूर्ण चैप्टर्स जैसे मैट्रिक्स, काइनेमैटिक्स, वर्क एंड एनर्जी, और आर्गेनिक केमिस्ट्री पर ध्यान दें। इन विषयों को पहले मजबूत करें। सिंपल टॉपिक्स को प्रायोरिटी दें जिन टॉपिक्स को आपने पहले अच्छी तरह से पढ़ा है, उन पर रिवीजन करें। यदि कोई टॉपिक थोड़ा कठिन लगता है, तो उसे छोड़कर अपने मजबूत विषयों पर ध्यान केंद्रित करें। टाइम मैनेजमेंट हर विषय के लिए 2-3 घंटे का समय निर्धारित करें और अपनी समय सारणी का पालन करें। यह सुनिश्चित करें कि आप हर दिन समय पर काम समाप्त कर सकें। दिन 6-10: मॉक टेस्ट और प्रैक्टिस पेपर मॉक टेस्ट लेना शुरू करें इन 5 दिनों के दौरान मॉक टेस्ट लें और हर एक टेस्ट के बाद उसे अच्छे से एनालिसिस करें। यह आपको यह जानने में मदद करेगा कि आप कहां कमजोर हैं और किसे और मजबूत करना है। नोट्स बनाएं उन टॉपिक्स के लिए छोटे-छोटे नोट्स तैयार करें जिनमें आपको मुश्किल आ रही है। इन नोट्स को दिन में एक बार रिवीजन करने की आदत डालें। स्पीड और एक्युरेसी पर ध्यान दें मॉक टेस्ट में समय सीमा का पालन करते हुए अपनी स्पीड और एक्युरेसी को सुधारने पर ध्यान दें। सही उत्तर की संख्या ज्यादा महत्वपूर्ण है, समय से पहले सभी सवाल हल करने की कोशिश करें। दिन 11-13: कमजोर क्षेत्रों पर फोकस केवल कठिन टॉपिक्स पर काम करें इन तीन दिनों में केवल उन्हीं टॉपिक्स पर काम करें जिनमें आप कमजोर हैं। जैसे भौतिकी के कुछ खास टॉपिक्स या रसायनशास्त्र के किसी विशेष चैप्टर पर ध्यान केंद्रित करें। डाउट्स क्लियर करें अपने टीचर्स या ट्यूटर्स से डाउट्स को क्लियर करें। अब आखिरी समय में जो भी शंका है, उसे तुरंत दूर करें। दिन 14-15: रिवीजन और फाइनल प्रैक्टिस किसी भी नई चीज़ को न सीखें अंतिम दो दिन केवल रिवीजन के लिए रखें। नए टॉपिक्स को अब सीखने का कोई फायदा नहीं है। केवल पहले से पढ़े हुए विषयों की समीक्षा करें। मॉक टेस्ट और मॉक इंटरव्यू दिन में एक या दो मॉक टेस्ट लें और उनकी जाँच करें। मॉक टेस्ट से यह भी पता चलेगा कि परीक्षा में किस तरह के प्रश्न आ सकते हैं। मनोबल बनाए रखें परीक्षा से एक दिन पहले मन को शांत रखें। थोड़ी देर के लिए ध्यान या हल्का-फुल्का शारीरिक व्यायाम करें, जिससे आपका मन प्रसन्न रहे। एक्सट्रा टिप्स स्वस्थ आहार और पर्याप्त नींद परीक्षा से पहले शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों में स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। अच्छा आहार लें और सही नींद लें ताकि आप परीक्षा के दिन ताजगी महसूस करें। पॉजिटिव मानसिकता रखें खुद पर विश्वास रखें। सकारात्मक सोच आपकी परीक्षा में सफलता की कुंजी है।

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