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आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने रक्षा मंत्री को सलाह दी कि हम तो रक्षा मंत्री से भी कहेंगे कि हमारी शक्ति का सदुपयोग करें

छतरपुर  जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों को मार दिया गया. जबकि कई टूरिस्ट घायल हुए थे. इस घटना के बाद देशभर में आक्रोश है. आम जनता से लेकर तमाम पॉलिटिकल पार्टी, सेलिब्रिटी आतंकी घटना का विरोध जता रहे हैं और मृतकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त कर रहे हैं. वहीं इस घटना पर छतरपुर के बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री भी अपनी प्रतिक्रिया पहले दे चुके हैं. अब उन्होंने देश के रक्षा मंत्री को अपनी शक्तियों की मदद लेने की बात कही है. देश के हित में अपनी शक्तियां लगाएंगे धीरेंद्र शास्त्री नरसिंहपुर जिले में भक्तों को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने बयान दिया. जहां उन्होंने कहा कि “हम तो देश के रक्षा मंत्री को भी कहेंगे, आप हमारी शक्ति की मदद ले सकते हैं. इस बीच उन्होंने कहा देखो मैं ऑफिशियल अफसर तो नहीं बन सकते, क्योंकि पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन हमारे पास जो चेतना है और हनुमानजी की कृपा है, आप उसका सदुपयोग करिए. आने वाले समय में कहां कौन सी संभावित घटना हो सकती है, उस पर आप हमारी शक्ति का सदुपयोग करिए. इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा लेकिन मैं अपनी शक्तियों को गोपनीय तरीकों से बताऊंगा, क्योंकि खुलकर बताएंगे, तो कई मुझे ही उड़ा देगा. उन्होंने कहा कि गोपनीय तरीके से वह राष्ट्रहित में काम शुरू कर रहे हैं, जिससे देश का भला हो. उन्होंने कहा कि सिर्फ मन की बता बता देने भर से राष्ट्र का भला होने वाला नहीं है. पहलगाम आतंकी हमले पर धीरेंद्र शास्त्री का बयान बता दें पहलगाम आतंकी घटना पर धीरेंद्र शास्त्री पहले भी विरोध जता चुके हैं. उन्होंने कहा था कि ” पहलगाम में जो घटना घटी, वो इस सदी की सबसे निंदनीय घटना है. आंतकियों ने ये नहीं पूछा कि तुम ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो या सेवक हो. उन्होंने ये नहीं पूछा कि तुम एससी, एसटी, ओबीसी या सवर्ण हो, बल्कि उन्होंने पूछा कि तुम हिंदू हो और गोली मार दी. उन्होंने कहा इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा. हिंदूओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये हो गई है कि हिंदुस्तान में हिंदू होना खतरा है. प्रदीप बोले-शस्त्र जरूरी धीरेंद्र शास्त्री के अलावा पंडित प्रदीप मिश्रा ने भी “हिंदुओं की सजग रहने रहने की सलाह दी थी. उन्होंने कहा था कि हिंदुओं के घर में शास्त्र न हो, लेकिन शस्त्र जरूर होना चाहिए. हमारे सनातन धर्म के किसी भी देवता के हाथ खाली नहीं होते, फिर हमारा घर क्यों खाली हो?”

rskmp.in पोर्टल पर लॉग इन कर पुनर्गणना विंडो को ओपन कर कक्षा 5 और 8 का चयन किया जा सकता

कक्षा 5 और 8 की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना के संबंध में निर्देश प्रदेश में 5 और 8  परीक्षा सत्र 2024-25 की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना प्रक्रिया के संबंध में राज्य शिक्षा केन्द्र ने दिशा-निर्देश जारी  rskmp.in पोर्टल पर लॉग इन कर पुनर्गणना विंडो को ओपन कर कक्षा 5 और 8 का चयन किया जा सकता राज्य शिक्षा केन्द्र ने जारी किये निर्देश भोपाल प्रदेश में कक्षा 5 और 8 वार्षिक मुख्य परीक्षा सत्र 2024-25 की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना प्रक्रिया के संबंध में राज्य शिक्षा केन्द्र ने दिशा-निर्देश जारी किये हैं। निर्देशों में बताया गया है कि कक्षा 5 और 8 के परीक्षा परिणाम की घोषणा के 5 दिन बाद 3 अप्रैल 2025 से परीक्षा पोर्टल पर पुनर्गणना की सुविधा लाइव की जा चुकी है। पुनर्गणना के लिये विद्यालय के माध्यम से छात्रों के पुनर्गणना के आवेदन पोर्टल पर पंजीकृत किये जा रहे हैं। विद्यालयों से कहा गया है कि rskmp.in पोर्टल पर लॉग इन कर पुनर्गणना विंडो को ओपन कर कक्षा 5 और 8 का चयन किया जा सकता है। जिन छात्रों द्वारा विद्यालय के समक्ष उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना के लिये ऑफ लाइन आवेदन प्रस्तुत किये गये हैं, उनके संबंध में पोर्टल में पंजीकरण करते हुए पुनर्गणना के चयनित विषयों को सबमिट किया जाये। छात्रवार एक से अधिक विषय की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना करायी जा सकती है। निर्धारित समयावधि के बाद किसी भी परिस्थिति में पुनर्गणना के लिये आवेदन स्वीकार नहीं किये जायेंगे। प्रक्रिया में 21 अप्रैल 2025 तक विद्यालय के माध्यम से छात्रों के पुनर्गणना के आवेदन पोर्टल पर पंजीकृत किये जायेंगे। 21 अप्रैल 2025 रात्रि 12 बजे के बाद यह सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी। मूल्यांकन केन्द्र अधिकारी पुनर्गणना के लिये समस्त आवेदनों की पुनर्गणना के बाद संशोधित प्राप्तांकों की एंट्री पोर्टल पर 28 अप्रैल तक करने के लिये कहा गया है। इस तिथि का पालन न करने पर मूल्यांकन अधिकारी के विरूद्ध कार्रवाई की जायेगी। उत्तर पुस्तिकाओं की पुनर्गणना की प्रक्रिया में 21 अप्रैल तक आवेदन पोर्टल पर पंजीकृत करने के लिये समस्त शालाओं को सूचित करने का उत्तरदायित्व डीपीसी, बीआरसीसी और जनशिक्षकों का संयुक्त रूप से निर्धारित किया गया है।  

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना “पर ड्रॉप-मोर क्रॉप” 13 हजार 500 कृषकों को स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रदेश में 30 मार्च से प्रारंभ किये गये जल गंगा संवर्धन अभियान में उद्यानिकी विभाग द्वारा गाँव-गाँव में आयोजित की जा रही “पानी चौपाल” आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बन गई है। “पानी चौपाल” में मैदानी अमले द्वारा गाँव के किसानों को जल संरक्षण के साथ, कम पानी से होनी वाली फसलों, कृषि के साथ उद्यानिकी फसलों को जोड़कर अधिक लाभ कमाने और नवीन उद्यानिकी तकनीकियों की समझाइश दी जा रही है। इसके साथ ही अभियान के दौरान ही फलोद्यान,‍ड्रिप लाइन, प्लास्टिक मलचिंग, सब्जी क्षेत्र, मसाला क्षेत्र, पुष्प क्षेत्र विस्तार योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिये उद्यानिकी विभाग के ऑनलाइन पोर्टल से पंजीयन भी कराया जा रहा है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना “पर ड्रॉप-मोर क्रॉप” अंतर्गत 13 हजार 500 कृषकों को 76.68 करोड़ रूपये की लागत स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। लगभग 5 हजार हैक्टेयर में फलदार पौधों का रोपण, सभी विकासखंड में उपलब्ध जल से सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से उचित प्रबंधन पर कार्यशालाओं का आयोजन करने तथा अभियान के लिये 25 लाख से अधिक फलदार पौधे उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिये “पानी चौपाल” में ही किसानों को ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की जानकारी भी प्रदान की जा रही है। “पानी-चौपाल” गुना जिले के गुना विकासखंड ग्राम अकावदा में, विकासखंड चाचौड़ा की ग्राम पंचायत उकविदा, शिवपुर, टीकमगढ़ जिले के विकासखंड जतारा के नतोवली ग्राम पंचायत सेवार, रतलाम जिले के सैलाना विकासखंड के ग्राम सलवानिया और ग्राम सोहौला, छतरपुर जिले के लवकुश नगर विकासखंड के ग्राम में, अशोक नगर जिले के विकासखंड मुगांवली की शासकीय संजय निकुंज गोपालिया में, नर्मदापुरम के विकासखंड माखननगर, मैहर जिले के विकासखंड मुख्यालय के ग्रामों में, सिवनी जिले के विकासखंड केवलारी के ग्राम खैराजी सहित प्रदेश के सेकड़ों ग्रामों में पानी चौपालों का आयोजन लगातार जारी है। पानी चौपाल में किसानों के आये सुझाव और समास्याओं पर अमल व निराकरण एक साथ किया जाएगा।  

नई शिक्षा नीति के तहत अब सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी

भोपाल नई शिक्षा नीति के तहत अब निजी स्कूलों को टक्कर देने के लिए सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी हो चुकी है। आगामी 16 जून से नए शिक्षा सत्र में जिले के 226 स्कूलों में नर्सरी की कक्षाएं शुरू होंगी, जिसके चलते सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चों को नर्सरी से शिक्षा उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए तीन वर्ष की उम्र वाले विद्यार्थियों को संस्था में प्रवेश दिया जायेगा। यह सभी स्कूल सांदिपनी विद्यालय से अलग होंगे। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्कूलों में यह सभी व्यवस्था लागू होंगी। जिला परियोजना समन्वयक रमेश राम उईके ने बताया कि जिले के 226 सरकारी स्कूलों में नए शिक्षा सत्र 16 जून से नर्सरी की कक्षाएं शुरू होंगी। इन कक्षाओं को नियमित किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में पीपी-2 और पीपी-3 की कक्षाएं होंगी, जो केजी-1 अन्य कक्षाओं को नियमित किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में पीपी-2 और पीपी-3 की कक्षाएं होंगी, जो केजी-1 और केजी-2 के समकक्ष हैं। नर्सरी के विद्यार्थियों को शिक्षा देने के लिए डाइट के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जायेगा, जिससे कि शिक्षक विद्यार्थियों को शुरुआती दौर में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का ज्ञान दे सकें। इसके अतिरिक्त शिक्षक बच्चों को नाच-गाकर भी पढ़ाएंगे, जिससे कि विद्यार्थियों को आसानी से अक्षर का ज्ञान हो सकेगा। नर्सरी में प्रवेश के लिए तीन साल की उम्र निर्धारित नई शिक्षा नीति के अनुसार पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 6 से साढ़े 7 वर्ष व नर्सरी में प्रवेश के लिए तीन साल की उम्र निर्धारित की गई हैं। निजी स्कूलों में पहले से ही नर्सरी की कक्षाएं संचालित हैं। इन स्कूलों को टक्कर देने के लिए ही सरकारी स्कूलों में यह पहल शुरु की जा रही है। 226 स्कूलों के बाद आगामी समय में जिले के अन्य सभी स्कूलों में इस व्यवस्था को लागू किया जायेगा। डीपीसी के मुताबिक प्राइवेट स्कूल की तर्ज पर अब शिक्षक नर्सरी के बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाएंगे। पिछले वर्ष के आगे की कक्षा में भेजे जाएंगे और अभिभावकों को शिक्षक घर-घर जाकर सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षा में प्रवेश दिलाने के लिए प्रेरित करेंगे। नए प्रयोग से मजबूत होगी बच्चों की नींव डीपीसी आरआर उइके के मुताबिक स्कूल शिक्षा विभाग का यह तर्क है कि सरकारी स्कूलों से अधिक से अधिक बच्चों को जोड़ा जाए। यदि प्रारंभिक दौर में नर्सरी के बच्चों को स्कूल से जोड़ा जाएगा तो वह आगे की कक्षा में भी सरकारी स्कूलों में ही अध्ययन करेंगे। शिक्षक नाच-गाकर नर्सरी के बच्चों को अक्षर का ज्ञान सिखाएंगे ऐसे में विद्यार्थी कक्षा पहली तक आते-आते अक्षर व शब्द लिखना पूरी तरह सीख जाएंगेे। ऐसे में बच्चों की शिक्षा की राह आसान होगी ओर उनकी नींव भी पूरी तरह मजबूत होगी। विभाग ने इसके लिए नियम लागू कर दिए हैं। शिक्षकों को घर-घर जाकर सर्वे करने के निर्देश भी जारी किये गए हैं। बच्चों के लिए करें व्यवस्था राज्य शिक्षा केंद्र ने जिला कलेक्टरों को जारी दिशा-निर्देश में कहा है कि प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए स्कूल में टाट पट्टी, पीने का पानी और शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए. जिस विद्यालय में प्रवेश दिया जाना है, वहां कम से कम दो कक्षाओं में प्रवेश पाने वाले बच्चों की कक्षा संचालन की सुविधा हो और बाहर खेलने के लिए मैदान पर्याप्त जगह वाला हो.  

9 किलोमीटर के वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के कारण फंसा 495 करोड़ का हाईवे प्रोजेक्ट! 8 महीने से अटका काम

 श्योपुर मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में बन रहे 155 किमी के राष्ट्रीय राजमार्ग 52 (NH 52) में भले ही पहले दो भाग (पाली-गोरस और गोरस-श्यामपुर) काम चल रहा है, लेकिन तीसरे भाग श्यामपुर-सबलगढ़ का काम टेंडर होने के 8 महीने बाद भी अटका हुआ है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस भाग में 9 किलोमीटर का वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का क्षेत्र आ रहा है, लिहाजा अभी काम की अनुमति नहीं मिली है। हालांकि एनएच के अफसर आवेदन कर चुके हैं, लेकिन अभी एनओसी का इंतजार है।  यही वजह है कि पिछले दिनों श्योपुर आए प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला भी समीक्षा बैठक में वन विभाग के अधिकारियों को इसकी प्रक्रिया गंभीरता से पूरी कराने के निर्देश दे गए हैं। उल्लेखनीय है कि जिले में नेशनल हाइवे के 155 किमी में पाली श्योपुर-गोरस के भाग में 60 फीसदी काम हो गया है, जबकि गोरस-श्यामपुर के भाग में प्रारंभिक काम शुरु हो गया है। बीच में नौ किमी का वाइल्डलाइफ कॉरिडोर यूं तो श्यामपुर से सबलगढ़ तक फुल 55 किलोमीटर के हाइवे निर्माण होना है, लेकिन इसमें किलोमीटर का हिस्सा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का आ रहा है। जिसमें श्योपुर कूनो नेशनल पार्क और राजस्थान के कैलादेवी अभयायरण्य के बीच का ये हिस्सा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के रूप में संरक्षित है, यही वजह है कि हाइवे निर्माण के लिए एनओसी की जरुरत है। बताया गया है कि श्यामपुर-सबलगढ़ हाइवे में नए एलाइनमेंट के अनुसार वीरपुर कस्बे के बाहर से हाइवे निर्माण होगा। वहीं वीरपुर के आगे जाकर ब्रॉडगेज रेल लाइन के ऊपर से ओवरब्रिज भी बनाया जाएगा। 495 करोड़ में बनना है ये 55 किमी का मार्ग नेशनल हाइवे 552 (एक्सटेंशन) पाली-श्योपुर-गोरस-श्यामपुर-सबलगढ़ का 3 भाग में काम हो रहा है। इसी के तहत ये तीसरा भाग श्यामपुर से सबलगढ़ का है। 55 किलोमीटर के इस भाग के लिए गत वर्ष सितंबर माह में ही टेंडर हो चुके हैं, जिसमें इसके निर्माण की लागत 495 करोड़ रुपए है। लेकिन टेंडर होने के 8 महीने बाद भी काम शुरु होना तो दूर अभी तक संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ एग्रीमेंट भी नहीं हुआ है। यही वजह है कि फिलहाल सड़क निर्माण अधर में लटका है। इस मामले में एनएच-पीडब्ल्यूडी श्योपुर के सब इंजीनियर विजय अवस्थी ने बताया कि ‘एनएच के तहत श्यामपुर-सबलगढ़ के निर्माण के लिए टेंडर तो पिछले साल हो गए थे, लेकिन इसके बीच वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का हिस्सा आ रहा है, जिसकी एनओसी के लिए हमने आवेदन किया हुआ है। एनओसी मिलते ही इसका काम शुरू हो जाएगा।’

MP में सरकारी नौकरी पर भर्ती के लिए परीक्षा का तरीका बदलेगा, पीएससी और चयन मंडल की परीक्षाएं अब एक बार, बढ़ेगी पारदर्शिता

 भोपाल मध्य प्रदेश की मोहन सरकार सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली भर्ती और चयन परीक्षा में बड़ा परिवर्तन करने जा रही है। राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से होने वाली भर्ती परीक्षाएं अब बार-बार नहीं होंगी। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तर्ज पर वर्ष में केवल एक बार परीक्षा होगी और सभी श्रेणी के पदों के लिए प्रावीण्य सूची बना ली जाएगी। प्रतीक्षा सूची भी एक ही रहेगी। इसके लिए पदों की संख्या सभी विभागों से वर्ष में एक बार पूछ ली जाएगी और उसके आधार पर सितंबर में आगामी वर्ष के लिए कैलेंडर निर्धारित हो जाएगा। जनवरी, 2026 से भर्ती-चयन की यह प्रक्रिया लागू करने की तैयारी सामान्य प्रशासन विभाग कर रहा है। कैलेंडर के हिसाब से परीक्षाएं होती है आयोजित प्रदेश में द्वितीय और कार्यपालिक तृतीय श्रेणी के पदों की भर्ती पीएससी के माध्यम से होती है। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के लिए कर्मचारी चयन मंडल परीक्षाएं कराता है। अभी जैसे-जैसे विभागों की ओर से पद उपलब्ध होते हैं, वैसे-वैसे दोनों एजेंसियां अपने कैलेंडर के हिसाब से परीक्षाएं आयोजित करती हैं। बार-बार फीस और परीक्षा देनी पड़ती है इसमें न केवल अधिक समय लगता है बल्कि अभ्यर्थियों को बार-बार फीस और परीक्षा देनी पड़ती है। एजेंसियों को भी हर परीक्षा के लिए मानव संसाधन से लेकर अन्य व्यवस्थाएं करनी होती हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को परिवर्तित करने के निर्देश दिए थे। इसके अनुरूप सामान्य प्रशासन विभाग ने पीएससी और कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं के साथ विभागीय भर्ती नियम सहित अन्य प्रक्रियाओं में परिवर्तन का खाका तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा ही तरह की परीक्षा से विभिन्न श्रेणी के उपलब्ध पदों के लिए मेरिट के हिसाब से चयन किया जाएगा। एक बार बनाई जाएगी प्रतीक्षा सूची विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अभ्यर्थियों से आवेदन के समय विकल्प मांगे जाते हैं। मेरिट के हिसाब से यदि उसका चयन दो पदों के लिए हो जाता है और ऐसे में वह जिस पद का चयन करता है तो दूसरा पद प्रतीक्षा सूची वाले को मिल जाएगा। प्रतीक्षा सूची एक बार बनाई जाएगी। पद उपलब्ध होते ही इस सूची के अभ्यर्थी को मौका मिलता रहेगा। दरअसल, अभ्यर्थी एक साथ कई परीक्षाएं देते हैं और अलग-अलग पद पर चयन होने पर वे किसी एक सेवा का चयन करते हैं। ऐसे में अन्य पद रिक्त रह जाते हैं। नियम से लेकर परीक्षा का ब्योरा रहेगा ऑनलाइन सूत्रों का कहना है कि पारदर्शिता के लिए नियम से लेकर परीक्षा का पूरा ब्योरा ऑनलाइन रहेगा। अभी पीएससी के माध्यम से होने वाली परीक्षा में कई बातें सार्वजनिक नहीं की जाती हैं, जिससे अभ्यर्थी कोर्ट चले जाते हैं। परीक्षा परिणाम या चयन सूची पर रोक लगा जाती है। पूरी प्रक्रिया रुक जाती है। आगे ऐसा न हो, इसके लिए सभी जानकारियां ऑनलाइन की जाएंगी ताकि किसी को सूचना के अभाव में कोई संदेह न रहे। एक जैसे होंगे विभागों के भर्ती नियम विभागों के भर्ती नियम भी अब एक जैसे होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ही इन्हें बनाकर अधिसूचित करने के लिए देगा। यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि एकरूपता रहे। इसमें समान प्रकृति के पदों के लिए एक जैसे नियम हो जाएंगे। साथ ही यह लाभ भी होगा कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों को विज्ञापन निकालते समय विभागीय भर्ती नियम के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा और समय पर विज्ञापन जारी हो जाएंगे। दो-ढाई लाख पदों पर होंगी भर्तियां प्रदेश में आगामी दो-तीन साल में दो से ढाई लाख सरकारी पदों पर भर्तियां होनी हैं। इसमें रिक्त पदों के साथ पदोन्नति होने पर खाली होने वाले पद भी शामिल हैं। ये सभी पद समयसीमा में भर जाएं, इसके लिए चयन प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन किया जा रहा है। बार-बार नहीं देनी होगी परीक्षा     मुख्यमंत्री की मंशा है कि परीक्षाएं समय पर और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। विवाद की स्थिति नहीं बननी चाहिए और अभ्यर्थी को बार-बार परीक्षा भी न देनी पड़े। इसके लिए नियमों में संशोधन करके पूरी व्यवस्था में ही परिवर्तन किया जा रहा है। प्रयास यह है कि सितंबर तक यह प्रक्रिया पूरी करके जनवरी, 2026 से लागू कर दिया जाए।- संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग  

एनसीईआरटी की कक्षा 7वीं की इतिहास की पाठ्यपुस्तक से मुगलों और दिल्ली सल्तनत से संबंधित सभी संदर्भ हटाया

नई दिल्ली नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 7 की सामाजिक विज्ञान की किताब में बड़ा बदलाव किया है. NCERT ने इस किताब में से मुगलों और दिल्ली सल्तनत से जुड़ा पूरा हिस्सा हटा दिया है. इसकी जगह पर ‘पवित्र स्थल’, ‘महाकुंभ’ और ‘सरकारी योजनाओं’ पर जोर दिया गया है. इस बदलाव को न्यू एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCFSE) 2023 के अनुरूप बताया गया है, जिसका मकसद शिक्षा में भारतीय ज्ञान, परंपराओं और स्थानीय सोच को जोड़ना है. क्लास 7 की सामाजिक विज्ञान की किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ (Exploring Society: India and Beyond) है.  रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें अब मौर्य, शुंग, सातवाहन जैसे प्राचीन भारतीय राजवंशों पर फोकस किया गया है. वहीं मुगलों, तुगलकों, खिलजियों, ममलूक और लोधी वंश जैसे मध्यकालीन शासकों का अब कोई जिक्र नहीं है. मुगलों को इतिहास से बाहर करने की कोशिश? प्रोफेसर अली नदीम रिजवी ने इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “देश का माहौल इस तरह से बदल रहा है कि मुगलों को इतिहास से गायब करने की कोशिश की जा रही है. इतिहास चाहे अच्छा हो या बुरा, वह इतिहास होता है और उसे बदला नहीं जा सकता. हां, अगर नए तथ्य सामने आते हैं, तो उन्हें शामिल किया जा सकता है, लेकिन इतिहास से किसी भी महत्वपूर्ण संदर्भ को हटा देना सही नहीं है.” प्रोफेसर रिजवी ने यह भी कहा कि इतिहास का या किसी भी विषय का सिलेबस बार-बार संशोधित किया जा सकता है, लेकिन इतिहास के कुछ पन्नों को गायब करना चिंताजनक है. उनका मानना है कि अगर नई जानकारी मौजूद है, तो उसे पाठ्यपुस्तकों में जोड़ा जा सकता है, लेकिन इतिहास के कुछ हिस्सों को हटाना या नजरअंदाज करना देश के लिए हानिकारक हो सकता है. क्या मुगलों का योगदान मिटाने की कोशिश हो रही है? प्रोफेसर रिजवी ने यह भी कहा कि यह बदलाव देखकर ऐसा लगता है कि मुगलों के योगदान को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को यह पता न चले कि मुगलों ने देश के इतिहास और संस्कृति में क्या योगदान दिया था. उन्होंने आशंका जताई कि यह बदलाव कहीं ना कहीं उस वातावरण का हिस्सा हो सकता है, जिसमें इतिहास को फिर से लिखा जा रहा है और कुछ हिस्सों को जानबूझकर हटा दिया जा रहा है. प्रोफेसर रिजवी ने इस बारे में विस्तार से बताया कि अगर पाठ्यपुस्तकों में भारतीय संस्कृति, सभ्यता या समाज के बारे में बात की जा रही है, तो महाकुंभ, मेक इन इंडिया, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे विषयों को वहां शामिल किया जा सकता है, क्योंकि ये हमारे समाज और संस्कृति का हिस्सा हैं. लेकिन जहां तक इतिहास की बात है, तो इतिहास को सिर्फ इतिहास तक सीमित रखा जाना चाहिए. इतिहास को बदलने की कोशिश करना या उसमें हेरफेर करना, उनके मुताबिक, निंदनीय है. नया पाठ्यक्रम: संस्कृति और इतिहास का सही संतुलन प्रोफेसर रिजवी ने इस संदर्भ में कहा कि यदि किताबें संस्कृति और सभ्यता के बारे में बात करती हैं, तो उन्हें महाकुंभ और अन्य सांस्कृतिक संदर्भों को शामिल करने की आज़ादी होनी चाहिए. लेकिन इतिहास को इतिहास ही रहने देना चाहिए, और उसे बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. उनका कहना था कि मुगलों को ‘इनविजिबल’ करने की जो कोशिश हो रही है, वह भारत के इतिहास को समझने में एक बड़ी बाधा साबित हो सकती है. कौन-से चैप्टर हटाए गए? दिल्ली की NCERT की नई पाठ्यपुस्तकों में कक्षा 7 की किताबों से मुगल और दिल्ली सल्तनत के चैप्टर्स हटा दिए गए हैं. इन बदलावों के तहत नए अध्यायों में भारतीय राजवंश, ‘पवित्र भूगोल’, महाकुंभ और सरकारी योजनाओं पर जोर दिया गया है. NCERT अधिकारियों के मुताबिक, ये पाठ्यपुस्तक का पहला हिस्सा है और दूसरा हिस्सा आने वाले महीनों में जारी किया जाएगा. हालांकि, उन्होंने यह पुष्टि नहीं की कि पहले हटाए गए हिस्से वापस जोड़े जाएंगे या नहीं. कोविड-19 महामारी के दौरान 2022-23 में NCERT ने पहले ही मुगल और दिल्ली सल्तनत पर आधारित हिस्सों को कम कर दिया था, लेकिन अब नई पाठ्यपुस्तक ने इन्हें पूरी तरह हटाने का फैसला किया गया है. ‘Exploring Society: India and Beyond’ नाम के सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में नए अध्याय शामिल हैं जो प्राचीन भारतीय राजवंशों जैसे मगध, मौर्य, शुंग और सातवाहन पर केंद्रित हैं. महाकुंभ का जिक्र नई पाठ्यपुस्तक में ‘पवित्र भूगोल’ नाम के अध्याय भी शामिल हैं जिसमें भारत के पवित्र स्थानों और तीर्थयात्राओं के बारे में विस्तार से बताया गया है. इसमें 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम यात्रा, और शक्ति पीठों का वर्णन किया गया है. महाकुंभ मेला, जो इस साल प्रयागराज में आयोजित हुआ, उसे भी पाठ्यपुस्तक में शामिल किया गया है, जिसमें बताया गया है कि इस में लगभग 660 मिलियन यानी 66 करोड़ लोग शामिल हुए थे. एक नया चैप्टर ‘हाउ दी लैंड बिकम्स सेक्रेड’ (How the Land Becomes Sacred) भी जोड़ा गया है. इसमें बताया गया है कि भारत और दूसरे देशों में कैसे जमीन को पवित्र माना जाता है. इस चैप्टर में इस्लाम, ईसाई, यहूदी, पारसी, हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म जैसे धर्मों के लिए भारत और विदेश में पवित्र माने जाने वाले स्थानों और तीर्थस्थलों के बारे में भी बताया गया है. इसके अलावा, चार धाम यात्रा, 12 ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ और पवित्र नदियों के संगम की चर्चा है. साथ ही यह भी बताया गया है कि किस तरह बद्रीनाथ से कन्याकुमारी तक भारत को ‘तीर्थों की भूमि’ माना गया है.

प्राइवेट स्कूलों में 5 मई से होंगे आरटीई से एडमिशन, टाइमटेबल घोषित, 7 मई से 21 मई तक होंगे आवेदन

भोपाल  आर्थिक रूप से कमजोर व वंचित वर्ग के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में नि: शुल्क शिक्षा पाने का अवसर खुल गया है। सत्र 2025-26 के लिए आरटीई अधिनियम में नि: शुल्क प्रवेश प्रक्रिया कार्यक्रम घोषित कर दिया है। सीटें होंगी आरक्षित योजना में प्रदेश के मान्यता प्राप्त निजी गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी। आवेदन प्रक्रिया 7 से 21 मई तक पूरी तरह ऑनलाइन रहेगी। स्कूलों का आवंटन 29 मई को लॉटरी के माध्यम से होगा। प्रक्रिया पारदर्शी व डिजिटल होगी। शिक्षा विभाग 5 मई को मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों और आरक्षित सीटों की जानकारी वेबसाइट पर जारी करेगा। आवेदन के साथ जन्म, निवास, बीपीएल प्रमाण-पत्र तथा माता-पिता के पहचान-पत्र को अपलोड करना अनिवार्य रहेगा। आवेदन के बाद 7 से 23 मई तक दस्तावेजों का मूल सत्यापन संबंधित जनशिक्षा केंद्रों पर होगा। सूची होगा तैयार सत्यापन उपरांत योग्य अभ्यर्थियों की सूची तैयार होगी। स्कूल आवंटन के बाद अभिभावकों को एसएमएस के माध्यम से सूचना मिलेगी। इसके बाद 2 से 10 जून तक विद्यार्थियों को उपस्थिति दर्ज करानी होगी तथा मोबाइल एप के माध्यम से रिपोर्टिंग भी करनी होगी। योजना का लाभ केवल मप्र के मूल निवासी बीपीएल या वंचित समूह के बच्चों को मिलेगा। इस प्रकार तय किए गए नर्सरी: 3 वर्ष से 4 वर्ष 6 माह, केजी-14 वर्ष से 5 वर्ष 6 माह, केजी-2: 5 वर्ष से 6 वर्ष 6 माह व कक्षा-1:6 वर्ष से 7 वर्ष 6 माह। गलत जानकारी देने या अधूरे दस्तावेज प्रस्तुत करने पर आवेदन निरस्त हो जाएगा। दिन 1-5: इम्पॉर्टन्ट सब्जेक्ट्स कवर करें सभी इम्पॉर्टन्ट सब्जेक्ट्स निकालें सबसे पहले उन विषयों को चुनें जो आपके लिए सबसे इम्पॉर्टन्ट हैं और जिन्हें आप अच्छे से समझते हैं। उदाहरण के तौर पर, गणित, रसायनशास्त्र और भौतिकी के कुछ महत्वपूर्ण चैप्टर्स जैसे मैट्रिक्स, काइनेमैटिक्स, वर्क एंड एनर्जी, और आर्गेनिक केमिस्ट्री पर ध्यान दें। इन विषयों को पहले मजबूत करें। सिंपल टॉपिक्स को प्रायोरिटी दें जिन टॉपिक्स को आपने पहले अच्छी तरह से पढ़ा है, उन पर रिवीजन करें। यदि कोई टॉपिक थोड़ा कठिन लगता है, तो उसे छोड़कर अपने मजबूत विषयों पर ध्यान केंद्रित करें। टाइम मैनेजमेंट हर विषय के लिए 2-3 घंटे का समय निर्धारित करें और अपनी समय सारणी का पालन करें। यह सुनिश्चित करें कि आप हर दिन समय पर काम समाप्त कर सकें। दिन 6-10: मॉक टेस्ट और प्रैक्टिस पेपर मॉक टेस्ट लेना शुरू करें इन 5 दिनों के दौरान मॉक टेस्ट लें और हर एक टेस्ट के बाद उसे अच्छे से एनालिसिस करें। यह आपको यह जानने में मदद करेगा कि आप कहां कमजोर हैं और किसे और मजबूत करना है। नोट्स बनाएं उन टॉपिक्स के लिए छोटे-छोटे नोट्स तैयार करें जिनमें आपको मुश्किल आ रही है। इन नोट्स को दिन में एक बार रिवीजन करने की आदत डालें। स्पीड और एक्युरेसी पर ध्यान दें मॉक टेस्ट में समय सीमा का पालन करते हुए अपनी स्पीड और एक्युरेसी को सुधारने पर ध्यान दें। सही उत्तर की संख्या ज्यादा महत्वपूर्ण है, समय से पहले सभी सवाल हल करने की कोशिश करें। दिन 11-13: कमजोर क्षेत्रों पर फोकस केवल कठिन टॉपिक्स पर काम करें इन तीन दिनों में केवल उन्हीं टॉपिक्स पर काम करें जिनमें आप कमजोर हैं। जैसे भौतिकी के कुछ खास टॉपिक्स या रसायनशास्त्र के किसी विशेष चैप्टर पर ध्यान केंद्रित करें। डाउट्स क्लियर करें अपने टीचर्स या ट्यूटर्स से डाउट्स को क्लियर करें। अब आखिरी समय में जो भी शंका है, उसे तुरंत दूर करें। दिन 14-15: रिवीजन और फाइनल प्रैक्टिस किसी भी नई चीज़ को न सीखें अंतिम दो दिन केवल रिवीजन के लिए रखें। नए टॉपिक्स को अब सीखने का कोई फायदा नहीं है। केवल पहले से पढ़े हुए विषयों की समीक्षा करें। मॉक टेस्ट और मॉक इंटरव्यू दिन में एक या दो मॉक टेस्ट लें और उनकी जाँच करें। मॉक टेस्ट से यह भी पता चलेगा कि परीक्षा में किस तरह के प्रश्न आ सकते हैं। मनोबल बनाए रखें परीक्षा से एक दिन पहले मन को शांत रखें। थोड़ी देर के लिए ध्यान या हल्का-फुल्का शारीरिक व्यायाम करें, जिससे आपका मन प्रसन्न रहे। एक्सट्रा टिप्स स्वस्थ आहार और पर्याप्त नींद परीक्षा से पहले शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों में स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। अच्छा आहार लें और सही नींद लें ताकि आप परीक्षा के दिन ताजगी महसूस करें। पॉजिटिव मानसिकता रखें खुद पर विश्वास रखें। सकारात्मक सोच आपकी परीक्षा में सफलता की कुंजी है।

29 अप्रैल 2025 मंगलवार सूर्य की तरह चमकेगा इन राशियों का भाग्य

मेष: आज के दिन आपको अपनी फैमिली के साथ कुछ वक्त बिताना चाहिए। इससे आपको स्ट्रेस को कम करने में मदद मिलेगी। खर्च कम करें। कुछ लोगों को मौसमी बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए अपनी सेहत का खास ख्याल रखें। सेल्फ-केयर को समय दें। वृषभ: आज अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। आने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए सावधान रहें। ये बदलाव आपकी ग्रोथ का कारण बन सकते हैं। आज खुले दिमाग से काम लें, जो आपके लिए लाभदायक साबित होगा। मिथुन: आज मिथुन राशि वाले अवसरों और चुनौतियों का मिश्रण महसूस कर सकते हैं। अपनी लाइफ में संतुलन बनाए रखने पर ध्यान दें। रिलेशनशिप में बातचीत बढ़ाएं। अपने करियर पर फोकस रखें। पैसों को स्मार्ट तरीके से मैनेज करें। कर्क: आज लव लाइफ में बैलेंस बनाएं। पैसों के मामले में भी आपको कई मौके मिलने वाले हैं। इसलिए अपनी आंखें खुली रखें। स्ट्रेस को मैनेज करने और एनर्जेटिक बने रहने के लिए अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना याद रखें। सिंह: आज अपनी सेहत पर पूरा ध्यान दें। स्वस्थ रहने के लिए जरूरी कदम उठाएं। करियर और वित्तीय मामलों में रोमांचक अवसर सामने आएंगे। इस बदलाव भरे दिन को सफलतापूर्वक पार करने के लिए संतुलित रहें और खुद की देखभाल को प्राथमिकता दें। कन्या: आज कुछ जातकों को मेडिकल देखभाल की आवश्यकता होगी। जो लोग यात्रा कर रहे हैं, उन्हें भी ऑनलाइन पेमेंट करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। किसी संपत्ति विवाद को सुलझाने के लिए आप पहल कर सकते हैं। तुला: तुला राशि के जातकों आज आपको बदलावों से भरपूर एक्सपीरियंस मिल सकते हैं। चाहे लव लाइफ, पैसों का मामला, या हो करियर, आपको चैलेंजे और मौके दोनों मिलेंगे। इन बदलावों को अपनाएं, जिससे आपको किस तरह प्रॉफिट हो सकता है, इस पर नजर रखें। वृश्चिक: आज छोटी-छोटी बातों पर बहस में न पड़ें। प्रेम जीवन में छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। ऑफिस की राजनीति से दूर रहें। छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याएं उम्रदराज नागरिकों को परेशान कर सकती हैं। धनु: आज कार्यालय में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने के लिए पूरा प्रयास करें। रिश्ते में किसी भी तरह के गलत व्यवहार से बचें। आपका पेशेवर जीवन अच्छा रहेगा और आप वित्त और स्वास्थ्य के मामले में भी भाग्यशाली रहेंगे। मकर: चाहे वह रिलेशन हो, करियर हो, आर्थिक मामले हो या स्वास्थ्य हो, खुद को पॉजिटिव बनाए रखें। आज की चुनौतियों और अवसरों को पार करने में आपकी स्किल्स मददगार साबित होंगी। प्रेम जीवन में किसी भी परेशानी को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। कुम्भ: आज आपको अपने प्रदर्शन से समस्याओं पर काबू पाने की जरूरत है। शरीर को फिट रखने के लिए आपको सब्जियां और फल भी अधिक खाने चाहिए। लव लाइफ में पार्टनर को समय दें। इस राशि के जातकों को जीवन में बैलेंस बनाने की सलाह दी जाती है। मीन: आज प्रेम-संबंधी मुद्दों को संभालते समय डिप्लोमेटिक बने रहें। धूम्रपान न करें क्योंकि यह आपके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। कुछ लॉन्ग डिस्टेंस के प्रेम संबंधों में परेशानी हो सकती है। व्यापार में अच्छा रिटर्न देखने को मिलेगा।

बारदाने की आपूर्ति करने सागर पहुंचेगी 2 विशेष ट्रेन, किसानों को 118 करोड़ का भुगतान

भोपाल. किसानों की आर्थिक उन्नति और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी, किसानों के नवाचार का सम्मान और मिलेट्स उत्पादन को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ सागर में दो दिवसीय जिला स्तरीय मिलेट्स फूड फेस्टिवल सह कृषि मेला का शुभारंभ हुआ। प्रदेश के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने मेले का उद्घाटन कर किसानों से संवाद किया। कार्यक्रम में सांसद श्रीमती लता वानखेडे, विधायक शैलेंद्र जैन, जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह सहित जनप्रतिनिधि एवं किसान शामिल हुए। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि अब तक समर्थन मूल्य पर उपार्जन किए गए अनाज का 118 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। शेष भुगतान की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है। किसानों को बारदाने की कमी न हो, इसके लिए विशेष पहल करते हुए सागर जिले के लिए दो स्पेशल ट्रेनें भेजी जा रही हैं। इससे उपार्जन में आ रही परेशानियों का समाधान होगा। सुपरसीडर और हैप्पीसीडर का उपयोग कर किसानों को किया प्रेरित मंत्री राजपूत ने किसानों से अपील की कि वे खेतों में नरवाई जलाने की प्रथा को बंद करें। इससे भूमि की उर्वरकता खत्म होती है और पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। उन्होंने किसानों को सुपरसीडर और हैप्पीसीडर जैसे यंत्रों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया, जो नरवाई को भूसे में बदलकर खेत में मिलाते हैं। मंत्री स्वयं प्रदर्शनी में इन यंत्रों पर बैठे और किसानों से इन तकनीकों को अपनाने की अपील की। मंत्री राजपूत ने कहा कि हमारे पूर्वज मोटे अनाज का सेवन कर स्वस्थ और दीर्घायु जीवन जीते थे। उन्होंने किसानों से मोटे अनाज (मिलेट्स) के उत्पादन और उपभोग को बढ़ाने का आग्रह किया। नवाचारशील किसानों का हुआ सम्मान मंत्री राजपूत ने सागर जिले के नवाचारशील किसान आकाश चौरसिया और आनंद जैन का उदाहरण देते हुए किसानों से अपील की कि वे इनके फॉर्म हाउस का अवलोकन करें और आधुनिक तथा प्राकृतिक खेती की तकनीकें सीखें। इस अवसर पर कई उन्नत किसानों को प्रमाण-पत्र, शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। सागर जिले में आयोजित मिलेट्स फूड फेस्टिवल और कृषि मेले ने यह संदेश दिया कि सरकार किसानों की समृद्धि के लिए न केवल नीतियाँ बना रही है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए भी प्रयासरत है। प्राकृतिक खेती, मिलेट्स उत्पादन और सौर ऊर्जा जैसी पहलें भविष्य में किसानों की आर्थ‍िक स्थिति को और सशक्त बनाएंगी। मिलेट्स को दें बढ़ावा, स्वास्थ्य के साथ आमदनी भी बढ़ाएं : डॉ. लता वानखेड़े सागर संसदीय क्षेत्र की सांसद श्रीमती लता वानखेड़े ने भी किसानों को मिलेट्स उत्पादन को बढ़ावा देने तथा नई तकनीकों को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2023 को ‘अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष’ घोषित किया गया था, जिसके तहत देशभर में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। प्राकृतिक खेती और सौर ऊर्जा को अपनाएं : शैलेंद्र जैन विधायक शैलेंद्र जैन ने किसानों को सुझाव दिया कि वे रासायनिक दवाओं का कम से कम उपयोग करें और अधिक से अधिक औषधीय फसलों का उत्पादन करें। उन्होंने सौर ऊर्जा के उपयोग पर भी बल दिया। विधायक ने कहा कि सौर ऊर्जा से न केवल सिंचाई में सुविधा होगी, बल्कि बिजली की लागत भी बचेगी, जिससे किसानों की आमदनी दोगुनी हो सकती है। कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र मेले में कृषि यंत्रों और तकनीकों की विशेष प्रदर्शनी लगाई गई थी। इसमें किसानों ने सुपरसीडर, हैप्पीसीडर, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम, जैविक खाद निर्माण तकनीक सहित अन्य नवीनतम साधनों की जानकारी प्राप्त की।

औद्योगिक शिविर 30 अप्रैल को होगा आयोजित, ऋण आवेदन पत्रावलियां तैयार करवा कर मौके पर ही स्वीकार कर ली जाएगी

जयपुर राजस्थान वित्त निगम द्वारा 30 अप्रैल को जयपुर में एक औद्योगिक शिविर का आयोजन किया जाएगा। यह शिविर जयपुर के शाखा कार्यालय में प्रातः 10 बजे से शाम 5:30 बजे तक चलेगा। इस कैंप में ऋण आवेदन पत्रावलियां तैयार करवा कर मौके पर ही स्वीकार कर ली जाएगी। राजस्थान वित्त निगम ने उद्यमियों को राहत पहुंचाने की दृष्टि से अपनी नीतियों में सकारात्मक बदलाव किए है। उपप्रबंधक(इंचार्ज) ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि युवा उद्यमिता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 45 वर्ष से कम आयु से सीनियर सेकेंडरी, स्नातक, डिप्लोमाधारी, तकनीकी स्नातक युवाओं को ब्याज सबमिशन की लिमिट को ऋण राशि डेढ़ सौ लाख से बढ़ाकर दो सौ लाख कर दी गई है। निगम के गुड बोरोवर्स के लिए गुड बोरोवर स्कीम में पुनर्भुगतान समय को 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष किया गया है। 10 करोड़ से अधिक के ऋण के लिए एप्लीकेशन फीस अधिकतम 1 लाख रुपए की गई है। प्रोसेसिंग चार्जेज 0.50 प्रतिशत से घटाकर 0.25 प्रतिशत किया गया है। फ़्लेक्सी योजना के अंतर्गत पात्रता ऑपरेटिव/ डीलिंग 4 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष एवं फ्लेक्सी योजना में ब्याज दर को 10.74 प्रतिशत से घटाकर 10.25 प्रतिशत किया गया है। सरल स्कीम के अंतर्गत पूर्व में भूमि व भवन की ऋण की पात्रता 60 प्रतिशत थी जिसे बढ़ाकर 70 प्रतिशत किया गया है। इसी प्रकार सीए पात्रता धारी को व्यवसाय सहयोगी के रूप में नियुक्त कर निगम को प्राप्त प्रोसेसिंग फीस का 50 प्रतिशत भुगतान प्रोत्साहन राशि के रूप में किया जाना तय किया गया है। एमएसएमई टेक एक नई योजना निगम द्वारा प्रारंभ की गई है, जिसमें उद्यमी पुराने या नए प्रोजेक्ट में किसी भी प्रकार की तकनीकी सुधारकर्ता है या ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट लगाता है तो निगम 20 करोड़ तक का ऋण 9.50 प्रतिशत की दर से उपलब्ध कराएगा।

नर्मदा परिक्रमा पथ पर आश्रय स्थलों के निर्माण कार्यों में लाए गति : मंत्री पटेल

भोपाल. पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नर्मदा परिक्रमा पथ पर आश्रय स्थलों के निर्माण कार्यों में गति लाएं। उन्होंने पौधरोपण के फेंसिंग कार्य को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। सोमवार को मंत्रालय स्थित कार्यालय में मंत्री पटेल ने विभागीय कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री पटेल ने निर्माणाधीन ग्राम पंचायत भवनों एवं सामुदायिक भवनों के कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए द्वितीय किश्त शीघ्र जारी करने के निर्देश अधिकारियों को दिए, ताकि निर्माण कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण हो सके। इसके साथ ही, माह जुलाई में 23, 24 एवं 25 तारीख को विगत वर्ष की भांति तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित करने का निर्णय लिया गया। मंत्री पटेल ने कार्यशाला की रूपरेखा शीघ्र तैयार कर आवश्यक तैयारियों को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री पटेल ने सभी अधिकारियों को कार्यों की गुणवत्ता एवं समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के लिये भी निर्देशित किया। बैठक के दौरान भवन विहीन जिला एवं जनपद पंचायतों के लिए नवीन भवनों की स्वीकृति के लिए डिजाइन पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

प्रदेश में लागू नियमों के अनुसार ही भोपाल में हाई राइज बिल्डिंग निर्माण की अनुमति दी जाए

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विरासत के संरक्षण के साथ भोपाल के विकास का समुचित नियोजन किया जाए। भोपाल के समृद्ध अतीत को शहर की प्लानिंग का भाग बनाते हुए भोजपुर जाने वाले मार्ग पर राजभोज की स्मृति में तथा उज्जैन की ओर जाने वाले मार्ग पर सम्राट विक्रमादित्य को समर्पित द्वार निर्मित होगा। शीघ्र ही इन दोनों द्वारों के निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन किया जाएगा। प्रदेश के विभिन्न अंचलों की झलक राजधानी में अभिव्यक्त हो, इस दृष्टि से भोपाल @2047 के विकास के बारे में विचार करना आवश्यक है। इसके साथ ही भोपाल को मेट्रोपॉलिटन एरिया के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से पश्चिम में आगरा-मुम्बई रोड और विदिशा, रायसेन व सीहोर तक आवागमन का नेटवर्क विकसित करते हुए कार्य योजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में भोपाल जिले के विकास कार्यों की समीक्षा में य‍ह निर्देश दिए। बैठक में सूक्ष्म, लघु और उद्यम तथा जिले के प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप, खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर तथा मुख्य सचिव अनुराग जैन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भोपाल से बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने के लिए जनप्रतिनिधियों ने आभार माना। उन्होंने कहा कि इससे भोपाल में सड़क दुर्घटनाओं में कमी आई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने भोपाल को उद्योग-व्यापार के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित किया है। एजुकेशन, मेडिकल, टूरिज्म, इंडस्ट्री आदि के क्षेत्र में गतिविधियों का लगातार विस्तार हो रहा है। भोपाल में आवागमन के लिए सड़क परिवहन के साधनों तथा मैट्रो सुविधा का परस्पर लिंकेज स्थापित करते हुए समग्रता में प्लान क्रियान्वित किया जाए। बहुउद्देशीय उपयोग सुनिश्चित करते हुए परिवहन अधोसंरचना का निर्माण हो। मार्गों की प्लानिंग में जन-प्रतिनिधियों के सुझावों को अवश्य शामिल किया जाए। शहर के नियोजन में सैटेलाइट सर्वे का उपयोग सुनिश्चित करते हुए अवैध बसाहटों के निर्माण पर भी नजर रखी जाए। स्वीकृत कालोनियों में सीसीटीवी कैमरा लगाना अनिवार्य किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल शहर में ऊंचे भवनों के निर्माण की अनुमति के संबंध में कहा कि इस संबंध में जो नियम प्रदेश में लागू हैं, भोपाल में भी उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहर को झुग्गी मुक्त बनाने के उद्देश्य से विकसित आवासीय सुविधाएं किराये पर नहीं जाएं, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अवैध कालोनियों और झुग्गियों के निर्माण के संबंध में सतर्क रहें, संबंधित क्षेत्र में इस प्रकार की गतिविधियां होने पर उस क्षेत्र के राजस्व और नगर निगम अधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बीएचईएल क्षेत्र के भूमि प्रबंधन के संबंध में त्वरित कार्यवाही करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के सभी शासकीय भवनों पर प्राथमिकता से सोलर पैनल लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य से कार्य किया जाए कि सौर ऊर्जा के उपयोग में राजधानी भोपाल, देश के सामने एक आदर्श प्रस्तुत करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल जिले में असामाजिक तत्वों पर नियंत्रण करते हुए प्रभावी पुलिस व्यवस्था स्थापित करने और बेहतर यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए स्मार्ट पुलिसिंग का उदाहरण प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि भोपाल में एम्स से करोंद चौराहा और भदभदा चौराहा से रत्नागिरी तिराहा मार्ग के दो कॉरीडोर पर मैट्रो कार्य प्रगति पर है। बीएचईएल की भूमि का उपयोग 50-50 मॉडल पर शहर के विकास तथा बीएचईएल के हित में करने के संबंध में भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय तथा प्रदेश के नगरीय प्रशासन विभाग के मध्य सैद्धांतिक सहमति हुई है। बैठक में बताया गया कि अचारपुरा क्षेत्र में उद्योगों की निरंतर मांग के दृष्टिगत ग्राम हज्जामपुरा की 31.21 हैक्टयर भूमि पर 32.29 करोड़ रुपए लागत से औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इसी प्रकार कोलार क्षेत्र के ग्राम सतगढ़ी में 69.91 हेक्टयर भूमि पर रेडीमेड गारमेंट हौजरी पार्क विकसित करने की योजना है। बैठक में महापौर मालती राय, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवान दास सबनानी एवं विष्णु खत्री सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

एकात्म धाम प्रकल्प के लिए संकल्पित हैं राज्य सरकार-राज्य मंत्री लोधी

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एकात्म धाम प्रकल्प के लिए मध्यप्रदेश सरकार संकल्पित है। आगामी वर्षों में एकात्म धाम का निर्माण कार्य पूर्ण होगा। यह बात संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने ओंकारेश्वर में एकात्म पर्व के भव्य शुभारंभ अवसर पर कही। राज्य मंत्री लोधी ने कहा कि पहले चरण में जगतगुरू आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। दूसरे चरण में जगतगुरू आदि शंकराचार्य के जीवन दर्शन पर आधारित संग्रहालय और अद्वैत लोक का निर्माण कार्य किया जाएगा। तीसरे चरण में अद्वैत वेदांत दर्शन के अध्ययन, शोध एवं विस्तार के लिए आचार्य शंकर अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान की स्थापना की जाएगी। यह अद्वैत वेदांत संस्थान का संदर्भ केंद्र होगा और अंतिम चरण में शंकर निलायम आवासीय परिसर का निर्माण किया जाएगा। राज्य मंत्री लोधी ने जगतगुरू आदि शंकराचार्य के पावन चरणों में और पुण्यभूमि ओंकारेश्वर को नमन किया। ओंकारेश्वर में माँ नर्मदा के पवित्र तट पर आज 5 दिवसीय एकात्म पर्व का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक अनुष्ठान और कलश यात्रा से हुई, जो पारंपरिक वाद्य यंत्रों और संकीर्तन के साथ ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग और गुफा मंदिर के दर्शन के लिए पहुंची और फिर अभय घाट पर संपन्न हुई। यात्रा के समापन के बाद मांधाता पर्वत स्थित एकात्म धाम में उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। समग्र दिवस में अनेक संतों का दिव्य संगम रहा, जिनमें स्वामी विवेकानंद पुरी, माँ पूर्णप्रज्ञा, स्वामी वेदत्वानंद पुरी, स्वामी योग प्रताप सरस्वती, स्वामिनी सद्विद्यानंद सरस्वती, स्वामी शैलेंद्र सरस्वती प्रमुख रहे। “अद्वैतामृतम्” सत्र की श्रृंखला में ‘ओंकार’ विषय पर माँ पूर्णप्रज्ञा ने साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि दार्शनिक सत्य की प्राप्ति के लिए गुरु की शरण अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से आदि शंकराचार्य ने सुदूर दक्षिण से ओंकार पर्वत तक की कठिन यात्रा की थी। माँ पूर्णप्रज्ञा ने आगे बताया कि चित्त की आसक्ति से निवृत्ति के बिना वैराग्य संभव नहीं है। आत्मा प्रत्यक्ष है और ब्रह्म परोक्ष प्रतीत होता है, लेकिन वास्तव में आत्मा ही चैतन्य स्वरूप है — यही अद्वैत वेदांत का सार है। अद्वैत का अर्थ किसी मत का तिरस्कार नहीं, बल्कि वैचारिक मतभेदों का शमन है। ॐकार का अर्थ प्रत्येक जीव में अभिन्यता और सभी आकृतियों का परिष्कार है। मांडूक्य उपनिषद में इस गूढ़ रहस्य का सुंदर वर्णन मिलता है। ॐकार में लीन होकर ही प्रणव अवस्था प्राप्त की जा सकती है, क्योंकि एक व्यक्ति के चित्त की शांति सम्पूर्ण ब्रह्मांड को प्रभावित करती है। यह दार्शनिक सत्य ही सनातन संस्कृति की मूल आत्मा है। स्वामी विवेकानंद पुरी ने कहा कि यह भूमि आद्य शंकराचार्य की गुरु भूमि है, और यहाँ उनका पुनः प्रतिष्ठित होना अत्यंत गौरव और आनंद का विषय है। संवाद सत्रों के दौरान संतों ने देश-विदेश से आए प्रतिभागियों के जिज्ञासा समाधान के लिये शंकरदूत दीक्षा प्रक्रिया का मार्गदर्शन किया। परमार्थ साधक संघ के स्वामी प्रणव चैतन्य पुरी ने “अद्वैतामृतम्” सत्र में आचार्य शंकर के जीवन और दर्शन पर विस्तृत प्रकाश डाला, जिसमें उन्होंने आचार्य शंकर के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और वैश्विक एकात्मता में योगदान को रेखांकित किया। मार्कंडेय संन्यास आश्रम के स्वामी प्रवानंद सरस्वती ने मार्कंडेय संन्यास परंपरा के ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रकाश डाला। सुमधुर स्तोत्र गायन से झूम उठे श्रोता एकात्म पर्व के प्रथम दिवस के समापन पर सुप्रसिद्ध स्तोत्र गायिका और प्रशिक्षक माधवी मधुकर झा द्वारा आचार्य शंकर रचित स्तोत्रों का मधुर गायन प्रस्तुत किया गया। उनके स्वर में कल्याण वृष्टि स्तोत्र, लिंगाष्टकम्, भज गोविंदम, अर्धनारीश्वर स्तोत्र आदि की प्रस्तुतियाँ हुईं, जिसने उपस्थित श्रोताओं को भक्ति में सराबोर कर दिया। एकात्म पर्व के अंतर्गत अद्वैत लोक प्रदर्शनी, अद्वैत शारदा पुस्तक स्टॉल और वैदिक अनुष्ठान जैसी विविध गतिविधियाँ मांधाता पर्वत पर प्रतिदिन की जा रही हैं, जो सभी आगंतुकों के लिए अद्वैत वेदांत और सनातन संस्कृति का जीवंत अनुभव दे रही हैं। आज भी अद्वैत वेदांत पर आधारित संवाद सत्रों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन जारी रहेगा।

पश्चिम मप्र में सूरज की किरणों से बिजली उत्पादन अब 29000 स्थानों पर : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल. ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि पश्चिम मप्र यानि मालवा निमाड़ में सूरज की किरणों से बिजली उत्पादन करने वालों की संख्या में सतत बढ़ोत्तरी हो रही है। अप्रैल के चौथे सप्ताह तक कुल 29000 स्थानों पर रूफ टॉप सोलर नेट मीटर यानि सौर ऊर्जा के माध्यम से मौजूदा बिजली उपभोक्ता बिजली उत्पादन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से 14100 उपभोक्ता जुड़े हैं। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह ने बताया कि सौर ऊर्जा को लेकर मालवा और निमाड़ के बिजली उपभोक्ताओं में व्यापक उत्साह बना हुआ हैं। पीएम सूर्य़घर मुफ्त बिजली योजना के तहत तीन किलो वॉट तक के संयंत्र पर 78 हजार तक की सब्सिडी मिलने से सूरज की किरणों से बिजली तैयार करने वाले प्रत्येक जिलों में प्रति माह बढ़ते जा रहे हैं। इंदौर शहर सीमा में सबसे ज्यादा करीब 15700 उपभोक्ता बिजली तैयार कर रहे हैं। इसके बाद उज्जैन, रतलाम, देवास और खरगोन जिले में अपेक्षाकृत ज्यादा उपभोक्ता रूफ टॉप सोलर योजना से जुड़े हैं। अन्य जिलों में 100 से लेकर 300 उपभोक्ता सूरज की किरणों से बिजली तैयार कर रहे हैं। अब तक करीब 11300 उपभोक्ताओं को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 90 करोड़ रूपए से ज्यादा की सब्सिडी प्राप्त हो चुकी है।

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