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भगवान महावीर के सत्य, अहिंसा के सिद्धांतों से होगा समाज का होगा कल्याण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री ने दिगंबर जैन महाकुंभ में मुनियों से लिया आशीर्वाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान महावीर स्वामी के सत्य, अहिंसा अपरिग्रह के सिद्धांतों पर चलकर ही समाज का कल्याण किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में दिगंबर जैन महाकुंभ में उपस्थित जन-समुदाय को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने महाकुंभ में पधारे जैन मुनियों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। नगरीय विकास, आवास एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, क्षेत्रीय सांसद श्री शंकर लालवानी, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव एवं विधायक गण उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर में जैन मुनियों के महाकुंभ से मालवा की धरती धन्य हो गई है। मालवा क्षेत्र के लिए यह एक अद्भुत एवं अद्वितीय अवसर है। दिगंबर जैन मुनियों का पट्टाभिषेक कार्यक्रम का यह एक वृहद आयोजन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जैन मुनि अपने आचरण से समाज को सदाचरण का संदेश देते हैं। दिगंबर साधु प्रकृति के साथ जीवन यापन करना भी सीखते हैं। उनका आचरण हमारी धर्म के प्रति आस्था को और मजबूत बनाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों पर शराब की बिक्री नहीं करने का निर्णय लिया है और इसे अमल में भी लाया जा रहा है। राज्य सरकार ने तय किया है कि खुले में मांस की बिक्री नहीं होगी और इसका पालन भी कराया जा रहा है। राज्य सरकार गौशालाओं के निर्माण को प्रोत्साहन दे रही है। गौपालन को प्रोत्साहन देने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना बनाई गई है। इस योजना में 25 से ज्यादा गाय पालने पर शासन द्वारा 25 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का दिगंबर महाकुंभ कार्यक्रम के संयोजक मनीष गोधा ने सम्मान कर उनका आभार व्यक्त किया।  

प्रदेश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे का सीएम योगी ने किया निरीक्षण, 120 की स्पीड में चला सकेंगे गाड़ी

हरदोई  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को हरदोई पहुंचे. जहां उन्होंने बिलग्राम तहसील के हसनपुर गोपाल में गंगा एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया. ये एक्सप्रेसवे मेरठ से लेकर प्रयागराज तक बनेगा और इसकी कुल लंबाई 650 किलोमीटर होगी, जो उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो रहा है. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. निरीक्षण के दौरान आबकारी राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी, सांसद, विधायकगण, एमएलसी और जिलाध्यक्ष समेत कई प्रमुख नेता भी उपस्थित रहे. मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया, जो राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होगी. बता दें कि गंगा एक्सप्रेसवे हापुड़,मेरठ, बुलन्दशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ शामिल हैं. कानपुर-लखनऊ रूट पर सोनिक स्टेशन के पास गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए रेलवे लाइन पर पुल निर्माण के बाद स्टील गर्डर लगाने का काम चल रहा है. गंगा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की अनुमति होगी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गंगा एक्सप्रेसवे की अनुमानित लागत 36230 करोड़ रुपये है. गंगा एक्सप्रेसवे, मेरठ-बुलंदशहर हाईवे पर बिजौली गांव से शुरू होगा और प्रयागराज में एनएच 19 पर जुदापुर दादू गांव के पास खत्म होगा. एक्सप्रेसवे पर उतारे जा सकते हैं हेलीकॉप्टर जानकारी के मुताबिक गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के 12 जिलों के 518 गांवों से होकर गुजरेगा. इनमें मेरठ, हापुड़, बुलन्दशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ शामिल है. इस एक्सप्रेसवे पर 28 फ्लाईओवर, 381 अंडरपास और 126 छोटे पुल बनाए गए हैं. इतना ही नहीं इस एक्सप्रेसवे पर इमरजेंसी में फाइटर जेट और हेलीकॉप्‍टर भी इस पर उतारे जा सकेंगे. इसके लिए शाहजहांपुर में साढ़े 3 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी बनाई जा रही है.

आतंकी हमले के बाद भी जैसलमेर में बिक रही सेना जैसी वर्दियां, तत्काल रोक और सख्त निगरानी नहीं की गई तो गंभीर खतरा

जैसलमेर भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों और केंद्र सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद सेना जैसे कपड़े आम लोगों को बेचे जा रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस पर तत्काल रोक और सख्त निगरानी नहीं की गई तो राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में सेना की वर्दी पहनकर किए गए आतंकी हमले ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता खड़ी कर दी है। इस भयावह घटना के बाद पूरे देश में सुरक्षा मानकों को लेकर बहस छिड़ी हुई है। वहीं, दूसरी ओर राजस्थान के संवेदनशील सीमा जिले जैसलमेर में बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आज भी सेना और अर्द्धसैनिक बलों जैसी वर्दियों की खुलेआम बिक्री जारी है। यह लापरवाही न केवल सेना की गरिमा को चोट पहुंचा रही है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी बन सकती है। सेना जैसी वर्दी पहनकर हमला, सुरक्षा में बड़ी सेंध 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम इलाके में आतंकियों ने सेना की वर्दी में आकर सुरक्षाबलों पर हमला कर दिया था। आतंकियों ने सेना की वर्दी का सहारा लेकर पहले खुद को सुरक्षाबलों के बीच मिला लिया और फिर अचानक हमला कर दिया। इस हमले ने यह साफ कर दिया कि यदि किसी असामाजिक तत्व को सेना या पुलिस जैसी वर्दी आसानी से उपलब्ध हो जाए तो वह कितनी बड़ी चुनौती बन सकता है। इस घटना के बाद देशभर में इस बात पर गंभीर चिंता जताई जा रही है कि सेना और सुरक्षा बलों की वर्दी जैसी पोशाकें बाजारों में कैसे बिक रही हैं। जैसलमेर में बाजारों में मिल रही वर्दियां जैसलमेर जैसे संवेदनशील सरहदी जिले, जहां से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा कुछ ही किलोमीटर दूर है, वहां भी बाजारों में सेना, बीएसएफ, और पुलिस जैसी वर्दियां बिना रोक-टोक बिक रही हैं। कई दुकानों पर कॉम्बैट प्रिंट के कपड़े, जैकेट, टी-शर्ट और टोपी खुलेआम बेची जा रही हैं। हालांकि दुकानदार दावा करते हैं कि वे पहचान और सत्यापन के बाद ही सामान बेचते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि कोई भी व्यक्ति आसानी से ये वर्दी जैसे कपड़े खरीद सकता है। दोषी पाए जाने पर 500 रुपये जुर्माना भारतीय दंड संहिता की धारा 140 और 171 के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना की वर्दी या उसके जैसी दिखने वाली यूनिफॉर्म को अनाधिकृत रूप से पहनना या बेचना अपराध की श्रेणी में आता है। दोषी पाए जाने पर 500 रुपये जुर्माना और अधिकतम तीन महीने तक की सजा हो सकती है। सेना जैसी वर्दी का उत्पादन केवल कुछ अधिकृत मिलों को ही करने की अनुमति है, जिनमें पंजाब के फगवाड़ा और महाराष्ट्र की दो मिलें प्रमुख हैं। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को आदेश दिया था कि कॉम्बैट प्रिंट कपड़े बनाने, बेचने और पहनने पर सख्त निगरानी रखी जाए, खासकर संवेदनशील इलाकों में। सेना के पुराने आदेश भी हवा में पठानकोट हमले के बाद सेना ने खासतौर पर निर्देश दिया था कि आम जनता को सेना जैसे कपड़े न बेचे जाएं और निजी सुरक्षा एजेंसियों को भी कॉम्बैट पैटर्न की यूनिफॉर्म इस्तेमाल न करने को कहा गया था। इसके बावजूद आज जैसलमेर जैसे सीमावर्ती जिले में आधा दर्जन से ज्यादा दुकानों पर यह कपड़ा आसानी से उपलब्ध है। न कोई सख्त निगरानी है न ही प्रशासन की ओर से कोई सघन अभियान चलाया जा रहा है। जांच और निगरानी की सख्त जरूरत जैसलमेर जैसे सीमावर्ती जिले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस को बाजारों में सेना की वर्दी जैसे कपड़ों की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत है। साथ ही ऐसे कपड़े बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, यदि पहलगाम जैसी घटनाओं से सबक नहीं लिया गया तो सीमावर्ती जिलों में भी आतंकी तत्व सेना या सुरक्षा बलों की वर्दी का दुरुपयोग कर सकते हैं। ऐसे में समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं।  

29 करोड़ साल पुराने समुद्री जीवाश्मों का अनोखा संग्रह, जुरासिक रॉक गार्डन का मंत्री जयसवाल ने किया उद्घाटन

मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़ अपने ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां एक ऐसा स्थान भी है जो करोड़ों साल पहले के पृथ्वी के इतिहास को दर्शाता है। यह स्थान है गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क, जो मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में स्थित है। आज स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल ने इस अनूठे फॉसिल पार्क में जुरासिक रॉक गार्डन का उद्घाटन किया। यह पार्क छत्तीसगढ़ का पहला जुरासिक रॉक गार्डन है और एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा समुद्री जीवाश्म पार्क है। गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क जिस स्थान पर है वहां करीब 29 करोड़ वर्ष पुराने समुद्री जीवाश्म मिले हैं। भारत में ऐसे जीवाश्म केवल चार अन्य स्थानों – सुबांसुरी (अरुणाचल प्रदेश), राजहरा (झारखंड), दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) और खेमगांव (सिक्किम) में पाए जाते हैं। गोंडवाना फॉसिल पार्क इन सभी में सबसे बड़ा और पुराना है। हसदेव नदी के किनारे लगभग 1 किमी के क्षेत्र में जीवों के जीवाश्म फैले हुए हैं। इसे राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक का दर्जा भी प्राप्त है। इस स्थान की खोज 1954 में भूवैज्ञानिक एसके घोष ने कोयला खनन के दौरान की थी। गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क से द्विपटली (बायवेल्व) जीव, गैस्ट्रोपॉड, ब्रैकियोपॉड, क्रिनॉइड और ब्रायोजोआ जैसे प्राचीन समुद्री जीवों के जीवाश्म मिले हैं। इसके चलते यह देशभर के शोधार्थी और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है। इसकी पुष्टि 2015 में बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलेंटोलॉजी, लखनऊ द्वारा की गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह क्षेत्र पर्मियन युग के समय समुद्र में डूबा हुआ था, और बाद में समुद्र का जलस्तर घटने से जीवाश्मों के रूप में परिवर्तित हो गए। 5 साल पहले वन विभाग ने की संरक्षण की पहल गौरतलब है कि 5 साल पहले तक यह क्षेत्र बिना संरक्षण के खाली पड़ा हुआ था। वन विभाग ने इसके संरक्षण की पहल की। मनेंद्रगढ़ डीएफओ मनीष कश्यप (आईएफएस 2015 बैच) ने इस क्षेत्र को पर्यटन के दृष्टिकोण से विशेष रूप से विकसित किया है। यह क्षेत्र गुजरात और झारखंड के डायनासोर फॉसिल पार्क की तर्ज पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है। हसदेव नदी के किनारे प्राकृतिक हार्ड ग्रेनाइट रॉक्स को काटकर प्राचीन जीवजंतुओं की कला कृतियाँ बनाई गई हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क में बनाई गई है 35 प्राचीन जानवरों की मूर्तियाँ इस पार्क में अब तक 35 प्राचीन जानवरों की मूर्तियाँ बनाई जा चुकी हैं, जो यह दर्शाती हैं कि पृथ्वी में पहले किस तरह के विशालकाय जानवर रहते थे। इसके अलावा, एक इंटरप्रिटेशन सेंटर भी बनाया गया है, जहाँ पर्यटक फॉसिल की प्रक्रिया और पृथ्वी के 450 करोड़ साल के बदलावों को जान सकते हैं। पार्क में कैक्टस गार्डन, बम्बू सेट और बम्बू राफ्टिंग जैसी सुविधाएँ भी विकसित की जा रही हैं। वन विभाग की यह अभिनव पहल गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क को छत्तीसगढ़ के बड़े पर्यटन स्थल के रूप में पहचान दिलाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ने वन विभाग की तारीफ करते हुए कहा कि आने वाले समय में यह पार्क छत्तीसगढ़ का सबसे प्रमुख पर्यटन स्थल होगा।

शिक्षा निदेशालय आगजनी पर अखिलेश ने उठाए सवाल, बोले – आग तकनीकी कारणों से लगी, या जानबूझकर लगाई गई?

लखनऊ अखिलेश यादव ने प्रयागराज स्थित शिक्षा निदेशालय में आगजनी की घटना को लेकर सवाल उठाए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया X पर पोस्ट करते हुए पूछा है कि “क्या यह आग तकनीकी कारणों से लगी, या जानबूझकर लगाई गई? अखिलेश यादव ने इस घटना की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ताकि इस मामले की असली वजह सामने आ सके. अखिलेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘प्रयागराज में शिक्षा निदेशालय में आग लगी है या लगाई गई है, ये तकनीकी कारणों से घटित हादसा है या वजह कुछ और है, शंका समाधान के लिए उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो’. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि प्रयागराज शिक्षा निदेशालय में लगी आग अब महज हादसा नहीं लग रही. क्या एडेड स्कूल की भर्तियों के रिकॉर्ड को जलाने की साजिश हुई ? अब तक विभाग ने स्थिति साफ नहीं की. अखिलेश ने बड़े अफसरों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. बता दें कि रविवार सुबह शिक्षा निदेशालय में आग लग गई. फायर ब्रिगेड टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर जैसे तैसे काबू पाया. लेकिन इससे पहले ही यहां के दो कमरों में रखी महत्वपूर्ण फाइलें जलकर राख हो चुकी थी. इसके अलावा डिग्री कॉलेज से संबंधित आने वाले चिट्ठी-पत्र के जलने की बात सामने आई है.

जाने कब है अक्षय तृतीया, 29 या 30 अप्रैल को

हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व माना जाता है, जिसे आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है यानी अक्षय तृतीया के दिन कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करने के लिए किसी शुभ मुहूर्त को देखने जरूरत नहीं होती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, अक्षय तृतीया के मौके पर सभी कार्यों को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है. अक्षय तृतीया के दिन सोना और चांदी खरीदना बहुत शुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन कुछ खास चीजों का दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस बार अक्षय तृतीया की तिथि दो दिन पड़ रही है, जिससे लोगों में कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है कि आखिर अक्षय तृतीया 29 अप्रैल को मनाई जाएगी या फिर 30 अप्रैल को. ऐसे में चलिए आपका यह कंफ्यूजन दूर करते हुए बताते हैं कि इस साल 2025 में अक्षय तृतीया कब है. 2025 में अक्षय तृतीया कब है? पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अप्रैल को शाम 5:31 मिनट से शुरू होकर 30 अप्रैल 2025 को दोपहर 2:12 मिनट तक रहेगी. हिंदू धर्म में उदया का महत्व है, इसलिए उदयातिथि के अनुसार, इस साल 2025 में अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को मनाई जाएगी. अक्षय तृतीया 2025 शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन पूजा करने का शुभ मुहूर्त 30 अप्रैल को सुबह 5:41 मिनट से लेकर दोपहर 12:18 मिनट तक है. ऐसे में आप इस दौरान किसी भी समय पूजा-अर्चना कर सकते हैं.     ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 4:15 मिनट से 4:58 मिनट तक.     अभिजीत मुहूर्त – कोई नहीं है.     विजय मुहूर्त – दोपहर 2:31 मिनट से 3:24 मिनट तक.     सर्वार्थ सिद्धि योग – पूरे दिन रहेगा.     गोधूलि मुहूर्त – शाम 6:55 मिनट से 7:16 मिनट तक. अक्षय तृतीया का महत्व अक्षय तृतीया के अवसर पर दान करने का विशेष महत्व माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन दान करने से सुख-समृद्धि का आगमन होता है और मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है. पौराणिक कथा के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी अक्षय तृतीया से ही सतयुग की शुरुआत हुई थी. ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन से वेद व्यास जी ने महाभारत लिखने की शुरुआत की थी.

विजय देवरकोंडा ने कहा- पाहलगाम हमले पर नाराजगी, उन्होंने देशवासियों से एकजुट होने की अपील की

इंदौर तमिल सिनेमा के सुपरस्टार सूर्या की रोमांटिक एक्शन ड्रामा फिल्म ‘रेट्रो’ के प्री-रिलीज इवेंट में तेलुगु अभिनेता विजय देवरकोंडा ने मुख्य अतिथि बनकर आए। शनिवार रात हैदराबाद में आयोजित इस भव्य समारोह में फिल्म की स्टारकास्ट और क्रू के साथ विजय ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इस दौरान उन्होंने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पाहलगाम में हुए आतंकी हमले पर नाराजगी जताई। उन्होंने देशवासियों से एकजुट होने की अपील की। पाहलगाम आतंकी हमले पर विजय का बयान विजय देवरकोंडा ने पाहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। बाइसारन वैली (मिनी स्विट्जरलैंड) में 26 पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। यह हमला धार्मिक आधार पर हुआ। ईसाई और हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया गया। विजय ने कहा कि कश्मीर भारत का हिस्सा है। कश्मीरी हमारे अपने हैं। धर्म के नाम पर लोगों को भटकने से रोकने की जरूरत है। वे ऐसा करके क्या हासिल करेंगे? उन्होंने तेलुगु और अंग्रेजी में अपनी बात रखते हुए कहा कि दो साल पहले मैंने कश्मीर में ‘खुशी’ की शूटिंग की थी। वहां के लोगों के साथ मेरी बहुत अच्छी यादें हैं। कश्मीर को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। यह भारत का हिस्सा है। पाकिस्तान पर साधा निशाना विजय ने पाकिस्तान की स्थिति पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने देश में बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया नहीं कर पा रहा है। वे यहां क्या करने आएंगे? भारत को पाकिस्तान पर हमला करने की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि वहां के लोग अपनी सरकार से त्रस्त हैं। वह खुद ही अपनी सरकार के खिलाफ खड़े हो जाएंगे। उन्होंने आतंकवादियों के तौर-तरीकों को 500 साल पुराने जनजातीय व्यवहार से जोड़ते हुए कहा कि भारत को एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा। शिक्षा और एकता पर जोर विजय ने शिक्षा को आतंकवाद का जवाब बताते हुए कहा कि हमें अपने लोगों को शिक्षित करना होगा, जिससे वे गलत रास्ते पर न जाएं। एकजुटता और प्यार ही हमें आगे ले जाएगा। हमें अपने माता-पिता को खुश रखना चाहिए। खुशी के साथ प्रगति करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया     विजय के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने फिल्मी इवेंट में राजनीतिक मुद्दे उठाने के लिए उनकी आलोचना की। कई यूजर्स ने उनके साहस की सराहना की है।     एक यूजर ने लिखा कि विजय ने सच कहा है। कश्मीर भारत का है। हमें एकजुट रहना होगा। उनके इस बयान को सलाम। विजय और ‘रेट्रो’ का काम     विजय देवरकोंडा हाल ही में मृणाल ठाकुर के साथ ‘द फैमिली स्टार’ (2024) में नजर आए थे। उन्होंने प्रभास की ‘कल्कि 2898 एडी’ में अर्जुन के रूप में कैमियो भी किया।     उनकी अगली फिल्म राहुल संकृत्यायन और गौतम तिन्नानूरी की ‘किंगडम’ है, जिसका शीर्षक अभी तय नहीं हुआ है। दूसरी ओर कार्तिक सुब्बराज के निर्देशन में बनी ‘रेट्रो’ 1 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।  

जेनेटिक इंजीनियरिंग में करियर

        जेनेटिक इंजीनियरिंग विज्ञान का एक अत्याधुनिक ब्रांच है। जिसमें सजीव प्राणियों के डीएनए कोड में मौजूद जेनेटिक को अत्याधुनिक तकनीक केजरिए परिवर्तित किया जाता है। यह क्षेत्र बायोटेक्नोलॉजी के अंतर्गत ही आता है। जेनेटिक इंजीनियरिंग का कमाल कुछ वर्ष पहले ही दुनिया देख चुकी है, जब इयान विल्मुट और उनके सहयोगी रोसलिन ने जेनेटिक तरीके से भेड़ का बच्चा तैयार किया, जिसे डोली दिया था। यह हुबहु भेड़ का जेनेटिक कॉपी था। इन दिनों जेनेटिक इंजीनियर की डिमांड इंडिया के साथ-साथ विदेश में तेजी से बढ़ रहा है। क्या है जेनेटिक इंजीनियरिंग जेनेटिक तकनीक के जरिए जींस की सहायता से पेड़-पौधे, जानवर और इंसानों में अच्छे गुणों को विकसित किया जाता है। जेनेटिक तकनीक के द्वारा ही रोग प्रतिरोधक फसलें और सूखे में पैदा हो सकने वाली फसलों का उत्पादन किया जाता है। इसके जरिए पेड़-पौधे और जनवरों में ऐसे गुण विकसित किए जाते हैं, जिसकी मदद से इनके अंदर बीमारियों से लडने की प्रतिरोधिक क्षमता विकसित की जाती है। इस तरह के पेड़-पौधे जीएम यानी जेनेटिकली मोडिफाइड फूड के रूप में जाने-जाते हैं। बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में जेनेटिक इंजीनियरिंग का इस्तेमाल बृहत पैमाने पर होता है, क्योंकि यह इंडस्ट्री फॉमास्युटिकल प्रोडक्ट जैसे कि इंश्युलीन और दूसरे दवाइयों के लिए एक हद तक जेनेटिक पर ही निर्भर रहती है। योग्यता और कोर्स योग्य जेनेटिक इंजीनियर उसे ही माना जा सकता है, जिनके पास जेनेटिक और इससे संबंधित फील्ड में ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट डिग्री हो, जैसे कि बायोटेक्नोलॉजी, मोलिक्युलर बायोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री। इस कोर्स में एंट्री के लिए 12वीं बायोलॉजी, केमिस्ट्री और मैथ से पास होना जरूरी है। इस समय अधिकतर यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट में जेनेटिक इंजीनियरिंग के लिए अलग से कोर्स ऑफर नहीं किया जाता है, लेकिन इसकी पढ़ाई बायोटेक्नोजी, माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री में सहायक विषय के रूप में होती है। बायोटेक्नोलॉजी के अडंर ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट में जेनेटिक इंजीनियरिंग में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। गेेजुटए कोर्स, बीईध्बीटेक में एंट्री प्रवेश परीक्षा के आधार पर होता है। एमएससी इन जेनेटिक इंजीनियरिंग में एडमिशन के लिए जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी हर साल 120 सीटों के लिए संयुक्त परीक्षा का आयोजन करती है। तकरीबन 20 हजार छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं। उगा अंको के आधार पर 20 छात्र को जेएनयू परिसर, नई दिल्ली में एडमिशन दे दिया जाता है। जेनेटिक डिग्री कोर्स के लिए भी यहां कुछ सीटें निश्चित हैं। इसके लिए भी एंटे्रस टेस्ट में बैठना जरूरी है। रोजगार के अवसर जान-मानी करियर एक्सपर्ट परवीन मलहोत्रा कहती हैं कि जेनेटिक इंजीनियर के लिए भारत के साथ-साथ विदेश में भी जॉब के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। इनके लिए मुख्यत रोजगार के अवसर मेडिकल व फार्मास्युटिकल कंपनी, एग्रीकल्चर सेक्टर, प्राइवेट और सरकारी रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर में होते हैं। टीचिंग को भी करियर ऑप्शन के रूप में आजमा जा सकता है। इसके अलावा, इनके लिए रोजगार के कई और भी रास्ते हैं। बायोटेक लेबोरेटरी में रिसर्च, एनर्जी और एंवायरनमेंट से संबंधित इंडस्ट्री, एनिमल हसबैंड्री, डेयरी फार्मिंग, मेडिसन आदि में भी रोजगार के खूब मौके हैं। कुछ ऐसे संस्थान भी हैं, जो जेनेटिक इंजीनियर को हायर करती है, जैसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी, नई दिल्ली, सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंट ऐंड डाइग्नोस्टिक, हैदराबाद, बायोकेमिकल इंजीनियरिंग रिसर्च ऐंड प्रोसेस डेवलॅपमेंट सेंटर, चंडीगढ़, द इंस्टीट्यूट ऑफ जिनोमिक ऐंड इंटेग्रेटिव बायोलॉजी, दिल्ली आदि। सैलॅरी पैकेज जेनेटिक इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री रखने वाले स्टूडेंट्स को शुरुआती दौर में आठ से 12 हजार रुपये प्रति माह सैलॅरी मिलने लगती है। यदि आपके पास डॉक्ट्रोरल डिग्री है, तो सैलॅरी 15-25 हजार रुपये शुरुआती महीनों में हो सकती है। इंस्टीट्यूट वॉच… -इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास, खडगपुर -आईआईटी गुवाहाटी -आईआईटी, दिल्ली -दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली -उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद -पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना -राजेंद्र एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, समस्तीपुर, बिहार -जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली -बनारस हिंदु यूनिवर्सिटी, वाराणसी -ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, नई दिल्ली    

तेज रफ्तार चार पहिया वाहन की टक्कर से एक 3 वर्षीय मासूम की मौत, मोहल्ले में मातम का माहौल

सतना मैहर शहर की बोस कॉलोनी में शनिवार की शाम एक तेज रफ्तार चार पहिया वाहन की टक्कर से एक 3 वर्षीय मासूम की मौत हो गई है। मासूम की मौत के बाद पूरे मोहल्ले में मातम का माहौल रहा। उधर, बच्चे की मां ने अपने जिगर के टुकड़ें का शव लेकर मैहर थाना पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। दरअसल, मैहर के बॉस कॉलोनी में रहने वाले अमित सिंह चौहान का 3 वर्षीय बेटा शिवांश सिंह चौहान घर के ही सामने अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इस दौरान कॉलोनी से निकलते हुए एक तेज रफ्तार चार पहिया वाहन बच्चे को जोरदार ठोकर मारते हुए निकल गया। चार पहिया वाहन की ठोकर से शिवांश गंभीर रुप से घायल हो गया, जिसे आनन-फानन में सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। इलाज के दौरान शिवांश ने दम तोड़ दिया। शव को गोद में लेकर मां पहुंची थाना इलाज के दौरान मासूम शिवांश की मौत के बाद बच्चें की मां शव को गोद में लिए मैहर थाने पहुंच गईं। मां ने आरोपितों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग करते हुए हत्या का प्रकरण दर्ज करने की मांग की। हालंकि पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार जब्त कर ली है। वाहन चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने व हत्या का प्रकरण दर्ज कर लिया है। ड्राइविंग सीखने के दौरान हुई घटना घटना के संबंध में प्राप्त जानकारी के मुताबिक आरोपित विनोद सेन (55) कार से कार ड्राइविंग सीख रहा था। इसी दौरान अचानक कार की रफ्तार बढ़ गई। बच्चे को टक्कर लग गई। घटना के बाद आरोपी विनोद सेन ने ही कार से मासूम को अस्पताल पहुंचाया।

जानिए प्रेगनेंसी के दौरान कौन से मेडिकल टेस्ट है जरूरी

गर्भधारण के दौरान समय-समय पर कई तरह की जांच की जाती हैं। इससे मां और बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी मिलती है। साथ ही कोई कंप्लीकेशन ना हो इसकी जानकारी भी चिकित्सक को मिल जाती है। यदि कोई कंप्लीकेशन होती भी है तो चिकित्सक समय रहते उसका इलाज कर बच्चे और मां को किसी भी परेशानी से बचाया जा सकता है। आइये जानते हैं कि गर्भधारण के दौरान डिलिवरी तक कौन-कौन सी चिकित्सा जांच की जाती हैं सीबीसी यानी कम्पलीट ब्लड काउंट टेस्ट डॉक्टर आपका सीबीसी टेस्ट आपके गर्भवती होने के बाद करेगा। इससे आपके रक्त में लाल और सफेद कोशिकाओ का पता लगाया जाता है । इसके साथ ही हीमोग्लोबिन, हेमैटक्रीट और प्लेटलेट्स कणों को भी काउंट किया जाता है। हीमोग्लोबिन रक्त में मौजूद प्रोटीन होता है जो कि सेल्स को ऑक्सीजन देता है और हेमैटक्रीट शरीर में लाल रक्त कणों को जांचने का माप है। दोनों में से किसी के भी कम होने पर एनीमिया कहा जाता है। प्लेटलेट्स रक्त में थक्का जमने में सहायता करती हैं। महिला नार्मल डिलिवरी के दौरान तकरीबन आधा लीटर रक्त खो देती है। ऐसे में रक्त की कमी होने पर बच्चे और मां दोनों के लिए स्थिति खतरनाक हो सकती है। आरएच फैक्टर टेस्ट आरएच फैक्टर टेस्ट में लाल रक्त कणों के सरफेस में प्रोटीन की मात्रा देखने को किया जाता है। अगर प्रोटीन होता है तो इसे आरएच पॉजिटिव कहा जाता है अन्यथा नेगेटिव। यह टेस्ट लगभग 85 प्रतिशत महिलाओं में पॉजिटिव ही आता है। यूरिन टेस्ट डॉक्टर यूरिन टेस्ट से ही गर्भवती महिला के स्वास्थ्य की सही जानकारी लगा पाते हैं। इसमें मुख्यत शुगर की जांच की जाती है। इसके साथ ही किडनी के इन्फेक्शन का पता लगाने के लिए यूरिन में प्रोटीन की मात्रा, जांच की जाती है। इस टेस्ट के माध्यम से बैक्टीरिया की जांच की जाती है जिससे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का पता चल पता  है। केटोन्स की भी जांच होती है जिससे यह पता लगता  है कि शरीर कार्बोहाइड्रेट की जगह वसा का  इस्तेमाल ऊर्जा के लिए तो नहीं कर रहा है। रक्तचाप की जांच गर्भवती महिला के रक्तचाप की जांच की जाती है ताकि रक्तचाप ज्यादा या कम दोनों ही होने की स्तिथी में महिला को किसी भी प्रकार की हानि से बचाया जा सके। भ्रूण का अल्ट्रासाउंड भ्रूण के शारीरिक विकास को देखने के लिए समय समय पर अल्ट्रासाउंड किया जाता है। इसमें प्लेसेंटा की स्थिति और बच्चे के शरीर का हर माप देखा जाता है। बच्चे की मूवमेंट और अन्य क्रियाओं का भी पता अल्ट्रासाउंड से ही चलता है। मल्टीपल मार्कर स्क्रीनिंग यह दो तरह का होता है। ट्रिपल स्क्रीन टेस्ट और क्वाड स्क्रीन टेस्ट। यह आहार नाल न्यूरल टयूब में किसी भी तरह के डिफेक्ट को देखने के लिए किया जाता है। भ्रूण की हृदय गति मापना हर महीने भ्रूण की हृदय गति में बदलाव आता है। जन्म के समय भी यह बदल जाती है। डॉक्टर समय-समय पर जांच कर यह चेक करते हैं की हार्ट बीट सामान्य है या नहीं। यदि ह्रदय गति कम आये तो माना जाता है कि बच्चे को ऑक्सीजन कम मिल रही है।  

हार्ट अटैक से बचने के उपाय

दिल की सेहत पर ही निर्भर करती है, हमारे शरीर की सेहत। और दिल को सेहतमंद रखने के लिए बहुत जरूरी है कि हम संतुलित जीवनशैली अपनाएं और नियमित व्याहयाम करें। पर्याप्त नींद हार्वर्ड के 70,000 महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, नींद हमारे दिल को सेहमतमंद रखने में काफी मदद करती है। इस अध्य यन में पाया गया कि जो लोग रात को एक घंटा अधिक सोते हैं, उन्हेंु दिल की बीमारी अन्यव लोगों की तुलना में कम होती है। वहीं सात घंटे से कम सोने वाले लोगों को दिल की बीमारी होने की आशंका अधिक होती हैद्य कोलेस्ट्रॉल कम करें रक्त में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल धमनियों की भीतरी दीवारों पर जम जाता है। इससे धमनियां सिकुड़ जाती हैं और परिणामस्वॉरूप दिल तक कम मात्रा में खून पहुंचता है। इसलिए आपको चाहिए कि अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखें और इसकी नियमित जांच भी करवाते रहें। उच्च रक्त कोलेस्ट्रॉल, कोरोनरी हृदय रोग विकसित होने की संभावना को बढ़ा देता है। नियमित रूप से व्यायाम करें नियमित रूप से व्यायाम स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करता है। इससे मधुमेह होने की आशंका भी कम हो जाती है। मधुमेह रोगियों के बीच हार्ट अटैक का खतरा ज्याकदा होता है। गैर इंसुलिन निर्भर मधुमेह के रोगियों में सभी मौतों में से लगभग आधी दिल की बीमारी के कारण होती हैं। फैट से बचें भोजन में तेल का प्रयोग कम कर ताजी हरी सब्जियों और फल की मात्रा बढ़ाएं। ये रेशेदार और एंटी ऑक्सीडेंट्स के स्रोत हैं जो खून की वाहिकाओं में खराब कोलेस्ट्रोल के असर को कम करती हैं। इनके प्रतिदिन प्रयोग से दिल की बीमारी से बचा जा सकता है। साथ ही जंक फूड का सेवन कम से कम करें। भोजन समय पर करें। धूम्रपान न करें सिगरेट पीना महिलाओं में दिल की बीमारी का सबसे प्रमुख कारण है। मध्य म वर्ग की महिलाओं में तंबाकू के कारण लगभग 50 प्रतिशत हार्ट अटैक के मामलें देखने को मिलते हैं। वैज्ञानिकों द्वारा यह बात सिद्ध की जा चुकी है कि धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में दिल का दौरा या आकस्मिक हृदय रोग से मृत्यु होने का खतरा आम व्यक्तियों की तुलना में दोगुनी होता है। धूम्रपान छोड़ देने के 10 वर्षो के अंदर इन बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। वजन को नियंत्रित करें यदि आपका वजन अधिक है तो आपके हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उसे तेजी से धड़कना पड़ता है। अधिक वजन का कारण असंतुलित भोजन और व्यायाम की कमी है, जिससे कई अन्य रोग भी जन्म लेते हैं। इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है, रेशे वाले अनाजों तथा उच्च किस्म के सलादों का सेवन। साथ ही नियमित रूप से आधे घंटे टहलना। यह आपके अच्छे कोलेस्ट्रोल यानी एचडीएल कोलेस्ट्रोल को बढ़ाने में आपकी मदद कर सकता है। तनाव में कमी मनोवैज्ञानिक तनाव को हार्ट अटैक की मुख्य वजह मानते हैं। तनाव के प्रभाव को कम करने के और दैनिक आधार पर सामना करने वाले तनाव का प्रबंधन के लिए स्वस्थ तरीके खोजें। इसके अलावा, पौष्टिक आहार योजना और नियमित रूप से व्यायाम आपके स्वापस्य्नी  पर पड़ने वाले तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। शराब का सेवन कम अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, शराब का अत्यधिक सेवन हाई बीपी ओर दिल की बीमारियों का नेतृत्व कर सकता हैं। हालांकि, कुछ अध्ययनों से पता चला है कि कम मात्रा में शराब के सेवन से कोलेस्ट्रॉल सही रहता है और इसलिए यह दिल के लिए फायदेमंद है।  

इंदौर को अगर मास्को जैसा ट्रैफिक चाहिए, तो पहले मास्को जैसी सड़कें बनानी होंगी: महापौर पुष्यमित्र

इंदौर। रूस के दौरे से लौटे महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर को अगर मास्को जैसा ट्रैफिक चाहिए, तो पहले मास्को जैसी सड़कें बनानी होंगी। मास्को के इंफ्रास्ट्रक्चर को देखकर महापौर ने इंदौर के लिए बड़े विजन की बात कही है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने रूस की राजधानी मास्को में हुए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया। सम्मेलन में ब्रिक्स देशों और रूस के कई बड़े शहरों के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा का फोकस स्मार्ट सिटी, टिकाऊ विकास और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहा। ट्रैफिक नियम तोड़ने पर फौरन ऑटो डेबिट चालान इंदौर लौटकर महापौर ने बताया कि मास्को शहर में हर सड़क और हर गली का डिजिटल मैप तैयार है। ट्रैफिक नियम तोड़ने पर फौरन ऑटो डेबिट चालान कटते हैं। ट्रैफिक कंट्रोल इतना सख्त है कि बिना ट्रैफिक जाम के लोग सड़क और फुटपाथ दोनों का बेहतर इस्तेमाल करते हैं। महापौर ने कहा कि मास्को के विजनरी लीडर्स ने सौ साल पहले चौड़ी और मजबूत सड़कें बनाई थीं, जो आज भी काम आ रही हैं। इंदौर के लिए एक मिसाल बन सकती अगर इंदौर को भी मास्को जैसा ट्रैफिक मैनेजमेंट चाहिए, तो हमें सड़कें भी उसी स्तर की बनानी होंगी। मास्को की सफाई व्यवस्था भी इंदौर के लिए एक मिसाल बन सकती है। महापौर के मुताबिक वहां साल भर चाहे बर्फ गिरे या बारिश हो, सड़कों की सफाई हर दिन होती है। सड़क से बर्फ हटाने का एक पूरा मैनेजमेंट सिस्टम तैयार है, जिससे यातायात कभी बाधित नहीं होता। सोच और सिस्टम दोनों बदलने होंगे महापौर ने रूस सरकार के इंटरनेशनल डिपार्टमेंट और मास्को नगर निगम से तकनीकी सहयोग पर भी सहमति बनने की बात कही। वेस्ट मैनेजमेंट, ड्रेनेज सिस्टम और आईटी सेक्टर में एक्सपर्टीज साझा की जाएगी। यह भी कहा कि मास्को की सड़कों पर डस्टबिन या कचरा नजर नहीं आता। लोग खुद जिम्मेदारी से सफाई रखते हैं। इंदौर को भी ऐसी ही आदतें अपनानी होंगी। साफ है, अगर इंदौर को वैश्विक स्तर का शहर बनाना है, तो सोच और सिस्टम दोनों बदलने होंगे।

सरकार ने Sarvam नाम की कंपनी को भारत का पहला स्वदेशी AI मॉडल तैयार करने के लिए चुना

नई दिल्ली इंडिया AI मिशन में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने Sarvam नाम की कंपनी को भारत का पहला स्वदेशी AI मॉडल तैयार करने के लिए चुना है। यह कंपनी देश का पहला LLM यानी कि लार्ज लेंग्वेज मॉडल बनाएगी। यह अपने आप में एक ऐसा AI मॉडल बनाने की पहली कोशिश होगी जो भारतीय भाषाओं को समझने में माहिर हो, रीजनिंग कर सकता हो और जिसे भारत जितने बड़े देश की जनसंख्या के लिए ऑप्टिमाइज किया गया हो। बता दें कि इसकी घोषणा खुद आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की और उन्होंने AI मॉडल तैयार करने के लिए आए 67 प्रपोजल में से Sarvam को चुना। देश का पहला AI मॉडल इस बारे में आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश का पहला AI फाउंडेशनल मॉडल तैयार करने के लिए Sarvam AI नाम के स्टार्टअप को चुना गया है, आने वाले समय में दो से तीन और स्टार्टअप इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकते हैं। बता दें कि Sarvam AI नाम का यह स्टार्टअप पहले ही मेटा के LLAMA2-7B पर आधारित हिंदी भाषा में काम करने वाला भाषा मॉडल तैयार किया था। इतना ही नहीं यह मॉडल हिंदी, इंग्लिश और हिंग्लिश में माहिर है और यह ChatGPT 3.5 जितनी परफॉर्मेंस दे सकता है। सरकार का समर्थन सरकार Sarvam AI को करीब 200 करोड़ के GPU उपलब्ध कराएगी ताकि वह अपने प्रोजेक्ट को पूरा कर सकें। इससे AI की ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाले डेटा को भारत में रखने में भी मदद मिलेगी और यह भारत के AI सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करेगा। Sarvam AI नाम का यह स्टार्टअप विवेक राघवन और प्रतीयुष कुमार ने साल 2023 में शुरू किया था और इसी साल अपनी सीरीज ए फंडिंग राउंड में 41 मिलियन डॉलर जुटाने में कामियाब रहे थे। विवेक राघवन और प्रतीयुष कुमार इंफोसिस के सह संस्थापक नंदन निलेकणी के AI4Bharat में भी काम कर चुके हैं। विवेक राघवन ने इस मौके पर बताया कि “Sarvam AI भारतीय उद्यमों के डेटा का इस्तेमाल करेंगा और खास डोमेन वाले AI मॉडल तैयार करेगा।” ये है लक्ष्य Sarvam AI का लक्ष्य है कि वह भारतीय भाषाएं समझने वाला AI मॉडल तैयार करे। यह स्वास्थय, शिक्षा और कृषि जैसी जगहों में मददगार साबित होगा। इस तरह से देखा जाए, तो Sarvam देश के AI सेक्टर की वह पहली सीढ़ी साबित होगा, जो आगे जाकर भारत को इस क्षेत्र के विश्व गुरू के तौर पर स्थापिक कर सके।

दिल्ली में लू के थपेड़े, मौसम विभाग ने हीट वेव को लेकर जारी किया येलो अलर्ट

नई दिल्ली दिल्ली-NCR में हाल के दिनों से गर्मी ने लोगों को परेशान कर रखा है. दिन में सूरज की तीव्रता से तापमान बढ़ रहा है, जबकि रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही है. शनिवार को लू के थपेड़े भी महसूस किए गए, और यह दिन इस सीज़न का सबसे गर्म दिन रहा, जब अधिकतम तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो औसत से 4 डिग्री अधिक है. न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. आज भी दिल्ली-एनसीआर में हीटवेव के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, और मौसम विभाग के अनुसार, एक मई तक गर्मी से राहत मिलने की कोई संभावना नहीं है. ऐसे में लोगों को सलाह दी जाती है कि वे आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें. मौसम विभाग ने रविवार, 27 अप्रैल के लिए दिल्ली में लू का अलर्ट जारी किया है. आज अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान लगभग 24 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है. दिल्ली में आसमान साफ रहेगा, लेकिन दोपहर में धूल भरी हवाएं चल सकती हैं, जिनकी गति 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहने की संभावना है. कब से कब तक चलेंगी गर्म हवाएं दिल्ली में 28 और 29 अप्रैल को बादल छाने की संभावना है, जिससे तापमान में थोड़ी कमी आ सकती है. हालांकि, इस दौरान दिल्लीवासियों को अधिक राहत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. 29 अप्रैल से एक मई तक, दिल्ली में दिन के समय तेज और गर्म हवाएं चलने की संभावना है. तापमान औसत से 4 डिग्री ज्यादा पिछले 24 घंटों में दिल्ली का अधिकतम तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो औसत से 4 डिग्री अधिक है. वहीं, न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो औसत से 1 डिग्री कम है. गर्मी के कारण दिल्ली में आद्रता का स्तर काफी कम, केवल 24 प्रतिशत दर्ज किया गया. गर्मी बढ़ने के साथ AQI भी खराब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सोमवार को शहर की वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में रही, जिसमें AQI का स्तर 258 दर्ज किया गया. इससे पहले, 24 अप्रैल को दिल्ली का एक्यूआई शाम 4 बजे 227 था. वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के अनुसार, 0 से 50 के बीच AQI को अच्छा, 51 से 100 को संतोषजनक, 101 से 200 को मध्यम, 201 से 300 को खराब, 301 से 400 को बहुत खराब और 401 से 500 को गंभीर माना जाता है.

कट्टरपंथी इस्लामिक समूह बांग्लादेश ने मोहम्मद यूनुस को शेख हसीना जैसा ही अंजाम करने की धमकी दी

ढाका बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने सत्ता का मजा लूटने के लिए इस्लामिक कट्टरपंथियों को खूब खुली छूट दी, लेकिन अब वही कट्टरपंथी उनके लिए भस्मासुर साबित होने वाले हैं। कट्टरपंथी इस्लामिक समूह हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश ने मोहम्मद यूनुस को शेख हसीना जैसा ही अंजाम करने की धमकी दी है। हिफाजत-ए-इस्लाम महिलाओं के लिए सुधार लागू करने के खिलाफ अड़ गया है। इसने कहा है कि अगर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को महिला मामलों के सुधार आयोग के इस्लाम विरोधी प्रस्तावों को लागू करने के लिए आगे बढ़ती है, तो उनका हश्र भी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना जैसा ही किया जाएगा। आयोग के प्रस्तावों को बताया कुरान विरोधी हिफाजत-ए-इस्लाम के नेताओं ने प्रस्तावों की निंदा की और कहा कि ये कुरान और सुन्नत के सीधे विरोध में हैं। महिला मामलों के सुधार आयोग को समाप्त करने की मांग कर रहे हिफाजत नेता ने घोषणा की कि समूह 3 मई को ढाका के सुहरावर्दी उद्यान में एक सामूहिक रैली करेगा। इस्लामी समूह ने शुक्रवार को चटगांव के अंदरकिल में एक विरोध रैली और जुलूस का आयोजन भी किया। शेख हसीना जैसा हाल करने की धमकी नारायणगंज में चशारा सेंट्रल शहीद मीनार में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए हिफाजत के संयुक्त महासचिव मामुनुल हक ने इसे लागू किए जाने का विरोध किया। हक ने कहा, ‘यूनुस साहब ने इसे जल्दी लागू करने की बात की है। वे इस्लामी विरासत कानून के खिलाफ खड़े हुए हैं। हमने उन्हें बहुत सम्मान दिया है, लेकिन अगर वे इस रास्ते पर चलते हैं, तो हम उनके साथ हसीना से अलग व्यवहार नहीं कर सकते।’ कट्टरपंथियों का यूनुस के खिलाफ ऐलान इसके अलावा, एक अन्य कट्टरपंथी इस्लामी राजनीतिक पार्टी, खिलाफत मजलिश ने चेतावनी दी कि अगर आयोग के प्रस्तावों को लागू किया गया तो वे एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। पार्टी ने सुधार आयोग की आलोचना की और इसे खत्म करने की मांग की। खिलाफत मजलिश ने कहा, ‘आयोग का गठन नास्तिकों और पश्चिमी समर्थकों के एक समूह ने किया था।’ ढाका में बैतुल मुकर्रम राष्ट्रीय मस्जिद के गेट पर एक विरोध रैली में बोलते हुए, पार्टी के महासचिव अहमद अब्दुल कादर ने आरोप लगाया कि आयोग का गठन ‘नास्तिकों और पश्चिमी समर्थकों के एक समूह ने किया है, जिनका मुख्य लक्ष्य बांग्लादेश के धार्मिक और पारिवारिक मूल्यों को कमजोर करना है।’ उन्होंने कहा, ‘आयोग ने सभी धर्मों की महिलाओं के लिए एक समान पारिवारिक कानून प्रस्तावित किया है – जिसमें विवाह, तलाक, विरासत और भरण-पोषण शामिल है। यह सीधे तौर पर कुरान और सुन्नत के खिलाफ है और मुसलमानों की आस्था पर एक ज़बरदस्त हमला है। हम इस तरह की इस्लाम विरोधी गतिविधियों को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।’

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