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WWE Backlash :रैंडी ऑर्टन बैकलैश में जॉन सीना से लड़ने की तैयारी कर रहे

नई दिल्ली रेसलमेनिया के बाद वाला मंडे नाइट रॉ (Monday Night Raw) बहुत ही धमाकेदार रहा। इसमें पुरानी दुश्मनी फिर से शुरू हुई। एक बड़ा उलटफेर हुआ, नए चैंपियन बने, एक बड़ा सितारा वापस आया और WWE ने अपने सबसे बड़े आकर्षण को मेन इवेंट में शामिल किया। रेसलमेनिया 41 के बाद वाला मंडे नाइट रॉ यादगार रहा। बैकलेश पर फैंस की निगाहें अब सबकी निगाहें आगे आने वाले मुकाबलों पर हैं। रेसलमेनिया बैकलैश (WrestleMania Backlash) कुछ ही हफ्तों में होने वाला है। उसके कुछ हफ्तों बाद सैटरडे नाइट्स मेन इवेंट (Saturday Night’s Main Event) होगा। ऐसे आइए बैकलेश मुकबलों की लाइव स्ट्रीमिंग से जुड़ी सभी जानकारियों के बारे में जानते हैं। बैकलेश मुकाबलों की लाइव स्ट्रीमिंग से जुड़ी सभी जानकारियां     बैकलैश कब है? WWE बैकलैश का आयोजन शनिवार, 10 मई को होगा।     बैकलैश किस समय शुरू होगा? भारतीय दर्शकों के लिए यह कार्यक्रम भारतीय समयानुसार सुबह 3:00 बजे से शुरू होगा। वहीं मेन इवेंट शुरू होने से पहले एक घंटे के प्री शो का आयोजन किया जाएगा।     बैकलैश कहां हो रहा है? बैकलैश का आयोजन सेंट लुईस के एंटरप्राइज सेंटर में होगा।     भारत में कहां देख सकेंगे बैकलेश के मुकाबले? भारतीय दर्शकों के लिए यह कार्यक्रम नेटफ्लिक्स पर लाइव स्ट्रीम किया जाएगा। बैकलेश में होंगी दमदार कहानियां मंडे नाइट रॉ में बहुत कुछ हुआ। एक पुरानी दुश्मनी फिर से शुरू हो गई। इसका मतलब है कि कुछ पुराने दुश्मन एक बार फिर आमने-सामने होंगे। कुछ बड़े उलटफेर हुआ, जिससे कई लोग हैरान रह गए। नए चैंपियन बने, जिन्होंने अपने विरोधियों को हराकर खिताब जीता। एक बड़ा सितारा वापस आया, जिसे देखकर दर्शक बहुत खुश हुए। अब देखते हैं कि बैकलैश में कौन-कौन से पहलवान लड़ सकते हैं। मंडे नाइट रॉ के बाद यह कहना मुश्किल है, लेकिन कुछ संभावित नाम सामने आ रहे हैं। रेसलमेनिया 41 के बाद वाला मंडे नाइट रॉ बहुत ही रोमांचक था। अब देखना यह है कि बैकलैश में क्या होता है।

जापान को पीछे छोड़ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा भारत, अब सिर्फ ये देश आगे

नई दिल्ली भारत की जीडीपी 2025 में जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की ओर से जारी किए गए वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अप्रैल 2025 में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत की नॉमिनल जीडीपी बढ़कर 4,187.017 अरब डॉलर हो जाएगी। वहीं, जापान की जीडीपी का आकार 4,186.431 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। भारत मौजूदा समय में दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जीडीपी में अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान, भारत से आगे हैं। आईएमएफ के अनुमानों के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन सकता है। 2027 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर सकती है और इस दौरान जीडीपी का आकार 5,069.47 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। वहीं, 2028 तक भारत की जीडीपी का आकार 5,584.476 अरब डॉलर होगा जबकि इस दौरान जर्मनी की जीडीपी का आकार 5,251.928 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। आईएमएफ के अनुमानों में कहा गया कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका और चीन 2025 के साथ आने वाले करीब एक दशक तक अपनी रैंकिंग बरकरार रख सकते हैं। आईएमएफ ने 2025 के लिए भारत की जीडीपी विकास दर को घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले जनवरी आउटलुक रिपोर्ट में यह आंकड़ा 6.5 प्रतिशत पर था रिपोर्ट में बताया गया कि विकास दर में कमी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ की अनिश्चितताओं के कारण है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनी हुई है। अगले दो वर्षों में दुनिया की एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था होगी, जो कि 6 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा, “हमारे अप्रैल 2025 के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक में 2.8 प्रतिशत की कमजोर वैश्विक वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जिसमें 127 देशों की वृद्धि दर में गिरावट शामिल है, जो विश्व जीडीपी का 86 प्रतिशत है।

उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग ने सुव्यवस्थित और सुनियोजित विकास के लिए 54 नगर पालिकाओं और 124 नगर पंचायतों के साथ किया मंथन

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने नगर सुराज संगम में आज भी प्रशिक्षण की कमान खुद संभाली और नगर पालिकाओं तथा नगर पंचायतों के अध्यक्षों को पीपीटी (Power Point Text) के जरिए शहरों के विकास एवं जनसुविधाएं विकसित करने का रोडमैप समझाया। उन्होंने नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के अध्यक्षों के साथ ही मुख्य नगर पालिका अधिकारियों और अभियंताओं से संवाद कर अगले पांच वर्षों की कार्ययोजना पर चर्चा की। साव ने डेढ़ घंटे के अपने प्रेजेंटेशन में अटल विश्वास पत्र के प्रमुख बिंदुओं, नगरीय निकायों की चुनौतियों, नागरिकों की अपेक्षाओं, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी, स्वच्छता एवं साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा, शहरी वानिकी, शहरी परिवहन, स्ट्रीट लाइटिंग, कर संग्रहण और सिटी डेव्हलपमेंट प्लान के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए राजधानी रायपुर में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम-सह-कार्यशाला के दूसरे दिन के प्रथम सत्र में नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के अध्यक्षों से कहा कि आप लोग शहर के प्रथम नागरिक हैं, आपका शहर आपका घर है। शहरवासियों को अपना परिजन मानते हुए उनकी चिंता करें, उनकी बेहतरी के लिए काम करें। शहर का विकास, साफ-सफाई और जन सुविधाएं विकसित करना आपकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कार्यशाला में सहभागिता कर रहे सभी लोगों से पूरे मनोयोग से कार्यशाला में मौजूद रहने को कहा। यहां सिखाई जा रही बातों को एकाग्रता और तन्मयता से आत्मसात करने को कहा। साव ने नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आपके निकाय उभरते हुए शहर हैं। उन्हें विकास के पथ पर दौड़ाना है। सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास से ही शहर स्वच्छ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनेंगे। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि आप लोग अपने शहरों में ऐसा काम करें जो यादगार हो, शहर को नई दिशा देने वाला हो, नागरिकों की सुख-सुविधाएं बढ़ाने वाला हो, शहर को सुंदर, स्वच्छ और सुविधापूर्ण बनाने वाला हो। साव ने शहरों के प्रत्येक घर में रोज पर्याप्त जल की आपूर्ति को बड़ी चुनौती बताते हुए रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर कड़ाई से अमल करने को कहा। साव ने पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से संसाधनों के बेहतर उपयोग, नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा शहर को सुविधापूर्ण बनाने देश-विदेश में स्थानीय स्वशासनों द्वारा किए जा रहे नवाचारों और श्रेष्ठ प्रथाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने पार्षदों के लिए भी संभागीय स्तर पर इस तरह के प्रबोधन कार्यक्रम-सह-कार्यशाला के आयोजन की बात कही। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. ने ’’नगर सुराज संगम’’ में प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि नगरीय निकायों के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को केंद्र व राज्य सरकार तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) की योजनाओं की जानकारी देने इसका आयोजन किया गया है। इस दौरान नगरीय निकायों से संबंधित अधिनियमों और उनके महत्वपूर्ण प्रावधानों की भी जानकारी दी जाएगी। यह संगम दोनों तरफ से संवाद का मंच है। इस मंच के माध्यम से आप लोग नगरीय प्रशासन और विकास से जुड़ी अपनी शंकाओं और जिज्ञासाओं का समाधान कर सकते हैं। इस कार्यशाला का आप लोग पूरा लाभ उठाएं। नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक आर. एक्का और सुडा के सीईओ शशांक पाण्डेय भी कार्यशाला में मौजूद थे।

MP में गेहूं खरीद को लेकर बड़ा अपडेट, इन किसानों को 9 मई तक मिलेगा फसल बेचने का मौका, अब तक 76 लाख मीट्रिक टन गेहूं

भोपाल  मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद का आंकड़ा 85 लाख मीट्रिक टन (एमटी) रहने का अनुमान है। यह सरकार की ओर से निर्धारित किए गए खरीद के लक्ष्य 80 लाख एमटी से अधिक है। सरकार ने मंगलवार को बताया कि करीब 8.76 लाख पंजीकृत किसानों से 76 लाख एमटी गेहूं की खरीद की जा चुकी है। खरीद प्रक्रिया जिसमें केवल पंजीकृत किसानों से ही तौल करना शामिल है, अतिरिक्त पांच दिनों तक जारी रहेगी। राज्य ने 15 मार्च को गेहूं खरीद अभियान शुरू किया था और अपने 4,000 निर्धारित खरीद केंद्रों पर 2,600 रुपए प्रति क्विंटल की कीमत की पेशकश की थी। पिछले साल मध्य प्रदेश में 5.85 लाख किसानों से 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था। जल्द ही अपडेटेड आंकड़े आने की उम्मीद है, मंगलवार तक खरीद 81 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुकी है। सरकार को अब इस सीजन में कुल 85 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद होने की उम्मीद है। घर बैठे करा सकते हैं नामांकन इसके अलावा सरकार ने घोषणा की कि अब तक किसानों को उनकी उपज के भुगतान के लिए 16,472 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं। कार्यों को सुव्यवस्थित करने के लिए राज्य सरकार ने एसएमएस के माध्यम से किसानों को पंजीकृत किया और एक समर्पित वेब या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर से नामांकन करने का विकल्प प्रदान किया। किसान ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और तहसील कार्यालयों में स्थित सुविधा केंद्रों पर भी पंजीकरण करा सकते हैं। 175 रुपए का मिलेगा बोनस केंद्र सरकार ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को भी संशोधित किया है, इसे 2025-26 के रबी मार्केटिंग सीजन के लिए 150 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर 2,425 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है। हालांकि, मध्य प्रदेश 2,600 रुपए प्रति क्विंटल का खरीद मूल्य प्रदान करेगा, जिसमें 175 रुपए प्रति क्विंटल की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी शामिल है। मध्य प्रदेश में सीहोर, उज्जैन, नर्मदापुरम, हरदा, रायसेन और देवास जिलों में मालवा पठार के कम वर्षा वाले क्षेत्र में शरबती और डरम जैसी कुछ कम सिंचित उच्च उपज वाली किस्में उगाई जाती हैं। इन सभी किस्मों में से शरबती सबसे पसंदीदा किस्म है क्योंकि इसमें उच्च प्रोटीन होता है।  किसानों को 9 मई तक मिलेगा फसल बेचने का मौका मध्‍य प्रदेश में गेहूं की एमएसपी पर सरकारी खरीद की प्रक्रिया 5 मई को खत्‍म हो गई, लेकिन सरकार ने अभी भी कई किसानों को 9 मई तक गेहूं बेचने का मौका दिया है. ऐसे में जानिए आखिर पूरा मामला क्‍या है और कौन-से किसान फसल बेचने के लिए पात्र हैं… दरअसल, ऐसे किसान जिन्‍होंने स्‍लॉट तो बुक किए थे, लेकिन उनकी वैलिड‍िटी खत्‍म हो गई है, उन्‍हें 9 मई तक अपनी फसल बेचने का मौका दिया गया है. इसके लिए अफसरों को डीएसओ लॉगिन के जरिए स्‍लॉट की अवधि‍ बढ़ाने के लिए कहा गया है. इसे लेकर खाद्य विभाग ने अफसरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. गेहूं की सबसे ज्‍यादा सरकारी कीमत MP में वहीं, सरकार ने 5 मई तक खरीद के लिए 30 अप्रैल तक स्‍लॉट बुक करने की मोहलत दी थी, लेकिन खरीद के अंतिम दिन भी किसानों को ऑफलाइन स्‍लॉट बुक करने का ऑप्‍शन दिया गया और वे फसल बेच सके. मालूम हो कि प्रदेश में गेहूं खरीद की प्रक्रिया 15 मार्च से 5 मई तक चली. इस दौरान किसानों को 2425 रुपये प्रत‍ि क्विंटल एमएसपी और 175 रुपये प्रत‍ि क्विंटल बोनस का भुगतान किया गया यानी 2600 रुपये प्रति क्विंटल. हालांकि, उपज में नमी और क्‍वालिटी के चलते कीमत में अंतर आना सामान्‍य है. प्रदेश में हुआ गेहूं का बंपर उत्‍पादन मध्‍य प्रदेश में इस साल ग‍ेहूं की अच्‍छी फसल हुई है, जिसके चलते मंडियों में नई फसल की बंपर आवक दर्ज की गई. राज्‍य के सीएम मोहन यादव ने दावा किया कि प्रदेश में किसानों को गेहूं की जितनी कीमत मिल रही है, वह सभी राज्‍यों के मुकाबले सबसे ज्‍यादा है. व्‍यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि एमएसपी और बोनस मिलने के कारण किसानों ने निजी व्‍यापारियों की जगह सरकारी एजेंसियाे को गेहूं बेचना पसंद किया. बीते हफ्ते ही केंद्र ने मध्‍य प्रदेश का गेहूं खरीद लक्ष्‍य मिल‍ियन टन बढ़ा दिया था. 312 LMT है खरीद का अनुमानित लक्ष्‍य वहीं, देश के अन्‍य राज्‍यों में भी केंद्रीय पूल के तहत गेहूं की खरीद चल रही है. पिछले महीने केंद्र सरकार ने सभी प्रमुख राज्‍यों में गेहूं खरीद को लेकर आंकड़े जारी किए थे. इसमें 30 अप्रैल 2025 तक रबी मार्केटिंग सीजन यानी आरएमएस 2025-26 के दौरान गेहूं की खरीद के लिए तय 312 लाख मीट्रिक टन के अनुमानित लक्ष्य की तुलना में केंद्रीय पूल में 256.31 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है. इस साल 30 अप्रैल तक खरीदे गए गेहूं की मात्रा पिछले साल की इसी तारीख को हुई कुल खरीद 205.41 लाख मीट्रिक टन से 24.78 प्र‍तिशत ज्‍यादा है. प्रमुख गेहूं उत्‍पादक राज्‍यों पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्‍यादा खरीद हुई है.

अखाड़े में बदला स्कूल प्राँगण, प्रिंसिपल-लाइब्रेरियन की मारपीट का वीडियो वायरल

 खरगोन मध्य प्रदेश के एक स्कूल में प्रिंसिपल और लाइब्रेरियन के बीच झगड़ा हो गया। झगड़ा इतना बढ़ गया कि दोनों आपस में हाथापाई करने लगीं। दोनों ने एक दूसरे को थप्पड़ मारे और बाल खींचे। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद दोनों महिलाओं को नौकरी से निकाल दिया गया है। दोनों ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। एमपी के खरगोन की घटना घटना मध्य प्रदेश के खरगोन के एकलव्य आदर्श स्कूल में हुई। यह जगह भोपाल से लगभग 300 किलोमीटर दूर है। वीडियो में दोनों महिलाएं बहस करती हुई दिखाई दे रही हैं। गुस्से में प्रिंसिपल ने लाइब्रेरियन को थप्पड़ मार दिया और उसका फोन छीनकर जमीन पर फेंक दिया। इसके बाद दोनों के बीच जमकर मारपीट हुई। दोनों को फिलहाल असिस्टेंट कमिश्नर प्रशांत आर्य के ऑफिस में ट्रांसफर कर दिया गया है। पहले फोन तोड़ा, टोकने पर दोबारा फेंका वीडियो में लाइब्रेरियन प्रिंसिपल से पूछती है, ‘मैडम, आपकी हिम्मत कैसे हुई? आपने मुझे थप्पड़ कैसे मारा? आपकी हिम्मत कैसे हुई?’ वह शिकायत करती है कि उसका फोन टूट गया है। प्रिंसिपल फोन उठाती है और उसे फिर से फेंक देती है, जिससे वह और भी बुरी तरह टूट जाता है। लाइब्रेरियन पूछती है, ‘आपने मेरा फोन कैसे तोड़ा? आपकी हिम्मत कैसे हुई मुझे थप्पड़ मारने की?’ प्रिंसिपल का दुपट्टा खींचा फिर शुरु हुई ‘कैटफाइट’ इसके बाद प्रिंसिपल अपने फोन में बहस रिकॉर्ड करने लगती है। लाइब्रेरियन प्रिंसिपल के हाथ पर थप्पड़ मारती है, जिससे दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो जाती है। लाइब्रेरियन प्रिंसिपल का दुपट्टा खींचती है। जवाब में प्रिंसिपल उसे पकड़ लेती है और उसे खूब मारती है। लाइब्रेरियन बार-बार पूछती है, ‘तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे छूने की?’ दोनों एक दूसरे के बाल खींचती रहती हैं और एक दूसरे को मारती रहती हैं। जुबानी जंग के बाद हुई हाथापाई सूत्रों के अनुसार पहले दोनों के बीच जुबानी जंग चल रही थी। अचानक से विवाद इतना बढ़ा कि प्रिंसिपल ने लाइब्रेरियन के गाल पर तमाचा जड़ दिया। यही नहीं प्रिंसिपल प्रवीण दाहिया ने मधुरानी का फोन छीनकर भी फेंक दिया और मधुरानी पर एक के बाद एक लगातार थप्पड़ों की बौछार कर दी। पुलिस में लिखवाई शिकायत इस मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मारपीट के बाद दोनों प्रिंसिपल और लाइब्रेरियन ने एक-दूसरे के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने दोनों को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। इस दौरान प्रिंसिपल ICU में भर्ती हो गईं और लाइब्रेरियन मधुरानी को भी वार्ड में भर्ती किया गया। कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश खरगोन की कलेक्टर भव्या मित्तल ने इस पूरे मामले के जांच के आदेश दिए हैं। बता दें कि एकलव्य आदर्श आवासीय परिसर को दिल्ली से संचालित किया जाता है। इस स्कूल में बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल के लिए हर साल लगभग 5 करोड़ रुपए भेजे जाते हैं। महिला सफाई कर्मचारी ने कराया बीच-बचाव वीडियो में पीछे से एक लड़का कहता हुआ सुनाई देता है, ‘मम्मा, रहने दो।’ कोई भी बीच-बचाव नहीं करता है, जब तक कि एक महिला शांति से दोनों लड़ रही महिलाओं को पीछे हटने के लिए नहीं कहती। सोशल मीडया पर हो रही चर्चा सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने इसे ‘बिल्ली की लड़ाई’ बताया, तो दूसरे ने तीसरी महिला की तारीफ की जिसने झगड़ा रोकने की कोशिश की। एक यूजर ने X पर लिखा, ‘सबसे अच्छी तो सफाई करने वाली महिला है, जिसने उन्हें अलग करने की कोशिश की। बाकी दोनों पढ़ी-लिखी हो सकती हैं, लेकिन वह ज्यादा समझदार है।’

कोरंडम खदान एक बार फिर चर्चा में, भारी पैमाने पर वनक्षेत्र साफ किया जा रहा , वन विभाग की प्रतिक्रिया

बीजापुर भोपालपटनम ब्लाक के कुचनूर क्षेत्र की वर्षों पुरानी कोरंडम खदान एक बार फिर चर्चा में है। इस बार खनन से पहले सैकड़ों पेड़ों की चुपचाप कटाई को लेकर इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है। बात यह है कि जहां मौके पर भारी पैमाने पर वनक्षेत्र साफ किया गया है। वहीं वन विभाग और खनिज विभाग दोनों ही इस गतिविधि से अनभिज्ञ होने का दावा कर रहे हैं। करीब तीन दशक से बंद पड़ी खदान को लेकर हाल के दिनों में गतिविधियां तेज हुई हैं। भारी वाहनों की आवाजाही, मजदूरों की हलचल और वन क्षेत्र में साफ-सफाई जैसी गतिविधियां देखने को मिली हैं। लेकिन, इस पूरे स्थल पर न तो कोई सूचना बोर्ड है, न ही यह स्पष्ट है कि किस एजेंसी या ठेकेदार के अधीन यह कार्य हो रहा है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्य छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CMDC) के अंतर्गत किया जा रहा है। जिसने रायपुर के एक ठेकेदार को खदान संचालन की जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि, यहां न तो CMDC का कोई स्थानीय कार्यालय मौजूद है, न ही उसके कोई कर्मचारी है। पेड़ों की कटाई पर गंभीर सवाल स्थानीय निवासियों का कहना है कि खदान क्षेत्र के आसपास सैकड़ों सागौन व अन्य कीमती पेड़ काटे जा चुके हैं। दो साल पहले  300 पेड़ों की कटाई की अनुमति ली गई थी, लेकिन अब बिना किसी सार्वजनिक सूचना या प्रक्रिया के दोबारा भारी कटाई की गई है। यह भी गौर करने वाली बात है कि खदान स्थल तक पहुँचने का रास्ता वन विभाग के नाके के पास से होकर गुजरता है, बावजूद इसके वन अमला इस कटाई से अनजान बना हुआ है। वन विभाग की प्रतिक्रिया इस विषय में जब आईटीआर के रेंजर रामायण मिश्रा  से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र ‘उत्पादन विभाग’ को हैंडओवर किया जा चुका है और पेड़ों की कटाई की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वे स्थल का निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करेंगे। खनिज विभाग भी अनभिज्ञ स्थानीय खनिज अधिकारियों ने भी इस काम के बारे में किसी प्रकार की आधिकारिक जानकारी होने से इनकार किया है। यदि वास्तव में कोई कानूनी प्रक्रिया के तहत खनन कार्य शुरू हुआ है, तो उसकी जानकारी और दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध क्यों नहीं हैं? प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह मुद्दा उठाया है कि क्या खदानों से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव अब भी बना हुआ है? यदि यह कार्य CMDC के माध्यम से किया जा रहा है, तो क्या जिले के अधिकारियों को सूचना देना जरूरी नहीं था?  

डिजिटल गवर्नेंस, आधार-अनुप्रयोग और तकनीकी नवाचारों पर होगा मंथन

भोपाल मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम एवं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग द्वारा 8 और 9 मई 2025 को “AI भारत @ MP – कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आधार और डिजिटल गवर्नेंस में नवाचार” विषय पर कार्यशाला का आयोजन भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में किया जाएगा। दो दिवसीय कार्य़शाला प्रातः 9:30 से सांय काल 5:30 बजे तक आयोजित होगी। कार्यशाला डिजिटल गवर्नेंस को अधिक प्रभावी, समावेशी और नागरिकोन्मुखी बनाने के लिये ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (AI) और ‘आधार’ (UIADI) के प्रयोग की संभावनाओं पर केंद्रित होगी। कार्यशाला में नीति-निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सरकारी प्रतिनिधियों की भागीदारी से नॉलेज शेयर और विचार-विमर्श किया जायेगा। कार्यशाला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अपर मुख्य सचिव संजय दुबे राज्य की डिजिटल रणनीति पर प्रकाश डालेंगे। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के सीईओ नंद कुमारम, डिजिटल नीति पर राष्ट्रीय दृष्टिकोण साझा करेंगे। मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के प्रबंध संचालक आशीष वशिष्ठ कार्यशाला के उद्देश्यों की जानकारी देंगे। कार्यशाला का पहला दिन 8 मई कार्यशाला का पहले दिन प्रशासन को गतिशील बनाने में AI नवाचार और आधार के प्रयोग पर केंद्रित रहेगा। इसमें IIT इंदौर की प्रो. अरुणा तिवारी और IIM इंदौर के डीन प्रो. प्रशांत सलवान AI अनुसंधान में शिक्षा जगत की भूमिका पर चर्चा करेंगे। UIDAI के डीडीजी आमोद कुमार और DBT सचिवालय के अपर सचिव सौरभ कुमार तिवारी आधार-सक्षम लाभ वितरण पर जानकारी देंगे। AWS, Oracle और India AI Mission जैसे तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञ भी वास्तविक AI अनुप्रयोगों को प्रस्तुत करेंगे। कार्यशाला में प्रयागराज कुंभ जैसे बड़े आयोजनों में AI के प्रयोग, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, अधोसंरचना और सुरक्षा क्षेत्रों में इसके प्रभाव और भविष्य की दिशा पर केंद्रित सत्र होंगे। कार्यशाला में AI मोरल्स और सरकारी विभागों में AI की मदद से कैपेसिटी बिल्डिंग पर विशेष चर्चा की जायेगी। कार्यशाला का दूसरा दिन 9 मई कार्यशाला के दूसरे दिन “डिजिटल इंडिया स्टेट कंसल्टेशन वर्कशॉप” आयोजित की जायेगी, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए संवाद और सहयोग पर बल दिया जाएगा। कार्यशाला में DigiLocker, API Setu, UMANG, मेरी पहचान और myScheme जैसे प्रमुख एप पर विशेष प्रेजेंटेशन सत्र आयोजित किये जायेंगे। साथ ही प्रमाणीकरण सेवाओं, साइबर सुरक्षा, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम 2023, eSanjeevani, DIKSHA, और MSH प्लेटफ़ॉर्म्स पर भी सत्रों के माध्यम से गहन चर्चा की जायेगी। कार्यशाला का उद्देश्य उभरती तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना और मध्यप्रदेश को तकनीकी रूप से सक्षम व फ्यूचर-रेडी राज्य के रूप में स्थापित करना है।  

मेड इन इंडिया ₹3.36 लाख करोड़ के iPhone! Apple का FY26 तक का बड़ा टारगेट

मुंबई दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी एप्पल की योजना भारत में अपने उत्पादन को बढ़ाकर वित्त वर्ष 26 के अंत तक 40 अरब डॉलर (करीब 3.36 लाख करोड़ रुपए) तक ले जाने की है। टेक्नोलॉजी दिग्गज की ओर से भारत में उत्पादन ऐसे समय पर शिफ्ट किया जा रहा है, जब ट्रेड टैरिफ और भू-राजनीतिक तनाव के कारण चीन और अमेरिका के बीच संबंध बढ़ रहे हैं। अप्रैल-जून की अवधि में अमेरिका में बेचे जाने वाले ज्यादातर फोन भारत में बने होंगे इंडस्ट्री अनुमानों के मुताबिक, इस कदम से एप्पल अमेरिका में पैदा होने वाली 80 प्रतिशत आईफोन मांग को पूरी कर पाएगा और साथ ही भारत की बढ़ती घरेलू मांग को पूरा किया जा सकता है। हाल ही में एप्पल के सीईओ टिम कुक ने बताया था कि अप्रैल-जून की अवधि में अमेरिका में बेचे जाने वाले ज्यादातर फोन भारत में बने होंगे। एप्पल की ओर से अमेरिका में भारत में बने आईफोन बेचने पर फोकस किया जा रहा है। इसकी वजह अमेरिकी सरकार की ओर से चीन पर बड़ी मात्रा में रेसिप्रोकल टैरिफ लगाना है। चीन अमेरिका के बाहर बेचे जाने वाले अधिकांश एप्पल उत्पादों का मुख्य सोर्स बना रहेगा चीन अमेरिका के बाहर बेचे जाने वाले अधिकांश एप्पल उत्पादों का मुख्य सोर्स बना रहेगा। वहीं, भारत और वियतनाम प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। उदाहरण के लिए, कुक ने कहा कि अमेरिका में बेचे जाने वाले लगभग सभी आईपैड, मैक, एप्पल वॉच और एयरपॉड्स अब वियतनाम से आएंगे। एप्पल को चालू तिमाही में अमेरिकी टैरिफ से 900 मिलियन डॉलर का प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, हालांकि लंबी अवधि का प्रभाव अभी अनिश्चित हैं। वित्त वर्ष 25 में स्मार्टफोन भारत की शीर्ष निर्यात कैटेगरी रही है और 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निर्यात किया है कुक ने कहा कि हम टैरिफ के प्रभाव का सटीक अनुमान लगाने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि हम भविष्य की संभावित कार्रवाइयों के बारे में अनिश्चित हैं। वित्त वर्ष 25 में स्मार्टफोन भारत की शीर्ष निर्यात कैटेगरी रही है और 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निर्यात किया है। कंपनी ने बताया कि हाल ही में भारतीय बाजार में तिमाही बिक्री का रिकॉर्ड बनाया है।

केन्द्र और राज्य के समन्वय से 471 जनजातीय बसाहट क्षेत्रों में अभी 1097.29 किमी सड़कों के लिये 833.98 करोड़ रूपये स्वीकृत किये

पीएम जनमन भोपाल जनजातीय कार्य एवं गैस राहत मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) के जरिये जनजातीय क्षेत्रों में आवागमन को सहज और सुगम बनाने के लिये लगभग 1100 किमी सड़कों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। केन्द्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश में जनजातीय क्षेत्रों में चिन्हित 1295 बसाहटों के लिये 1800 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई है। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा देश भर में जनजातीय वर्ग के लोगों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास के लिये प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से सड़क, शिक्षा, बिजली, पानी और पक्की छत उपलब्ध करवाने के लिये कार्य योजना बनाकर काम किये जा रहे हैं। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा जनजातीय संवर्ग के उत्पाद के लिये चलाई जा रही योजनाओं के लिये त्रैमासिक स्तर पर राशि स्वीकृत की जा रही है। उन्होंने बताया कि केन्द्र और राज्य सरकार के समन्वय से 471 जनजातीय बसाहट क्षेत्रों में अभी 1097.29 किमी सड़कों के लिये 833.98 करोड़ रूपये स्वीकृत किये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि 630 बसाहटों वाले क्षेत्रों में 1187 किमी की सड़कों के निर्माण लिये प्रस्ताव पर स्वीकृति मिली है। इसके अलावा 194 बसाहटों पर कार्यवाही शीघ्र प्रारंभ की जायेगी। गांव-गांव तक सड़क मंत्री डॉ. शाह ने बताया किगांव-गांव तक सड़क योजना का लाभ घर-घर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके अंतर्गत 110.29 किमी सड़कें पूर्ण की जा चुकी है। इसमें सर्वाधिक 23.49 किमी की सड़क बालाघाट जिले में पूर्ण की गई है। दूसरे नंबर पर मंडला जिले में 21.37 किमी सड़कों का काम पूरा कर लिया गया है। मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जनजातीय संवर्ग के उत्थान और विकास के लिये केन्द्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों को मुर्तरूप दिया जा रहा है। इसके लिये जनजातीय कार्य विभाग दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने कहा कि जनजातीय बसाहट क्षेत्रों में सड़कों की सुगमता से सामान्य जन का जीवन एवं काम-धंधे, व्यापार-व्यवसाय सुगम एवं सुलभ हो सकेगा।  

‘ब्लैकआउट’ एक ऐसा कदम, जो दुश्मन की आंखों पर परदा डालता है …….

भोपाल / रायपुर पहलगाम हमले के बाद भारत-पाक के बीच बढ़ते तनाव और जंग के हालात के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देशभर के 244 जिलों में आज 7 मई को राष्ट्रव्यापी मॉक ड्रिल करने के निर्देश राज्यों को दिए हैं। इसके तहत सिविल डिफेंस के लोग आमजन को यह जानकारी और ट्रेनिंग देंगे कि युद्ध की स्थिति में किस तरह से बचाव करना है और क्या-क्या तैयारी करनी है। 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध के बाद पहली बार इस तरह की मॉक ड्रिल होने जा रही है। इस बीच, सूत्रों के मुताबिक, भाजपा संसदीय दल कार्यालय ने सभी भाजपा सांसदों से इस ड्रिल में आम नागरिकों की तरह भाग लेने और स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करने को कहा है। प्रदेश अध्यक्षों से भी अनुरोध किया गया है कि वे वरिष्ठ पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों के साथ मिलकर इस ड्रिल को सुचारू रूप से क्रियान्वित करें। केंद्रीय गृह सचिव आज करेंगे समीक्षा दूसरी तरफ, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन (मंगलवार को) नागरिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने की तैयारियों की समीक्षा करेंगे जिसमें हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाने संबंधित ‘मॉक ड्रिल’ आयोजित करना, लोगों को ‘शत्रु के हमले’ की स्थिति में खुद को बचाने के लिए प्रशिक्षित करना और बंकरों की सफाई करना शामिल है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच उभरे ‘नए और जटिल खतरों’ को देखते हुए गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों से बुधवार को मॉक ड्रिल करने को कहा है। 244 जिलों में मॉक ड्रिल की तैयारी एक सूत्र ने कहा, ‘‘गृह सचिव 244 जिलों में की जा रही नागरिक सुरक्षा की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। सभी राज्यों के मुख्य सचिव और नागरिक सुरक्षा प्रमुख वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक में हिस्सा लेंगे।’’ गृह मंत्रालय के अनुसार मॉक ड्रिल के दौरान किए जाने वाले उपायों में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन का संचालन, लोगों को ‘‘शत्रु के हमले’’ की स्थिति में खुद को बचाने के लिए सुरक्षा पहलुओं पर प्रशिक्षण देना और बंकरों की सफाई करना शामिल है। दुर्घटना की स्थिति में ‘ब्लैकआउट’ के उपाय अन्य कदमों में दुर्घटना की स्थिति में ‘ब्लैकआउट’ के उपाय, महत्वपूर्ण संयंत्रों और प्रतिष्ठानों की रक्षा तथा निकासी योजनाओं को अद्यतन करना एवं उनका पूर्वाभ्यास करना शामिल है। ‘मॉक ड्रिल’ में वायुसेना के साथ हॉटलाइन और रेडियो-संचार लिंक का संचालन, नियंत्रण कक्षों और छाया नियंत्रण कक्षों की कार्यक्षमता का परीक्षण भी शामिल है। अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड महानिदेशालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है, ‘‘मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य में नये और जटिल खतरे/चुनौतियां उभरी हैं, इसलिए यह समझदारी होगी कि राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों में हर समय इष्टतम नागरिक सुरक्षा तैयारियां रखी जाएं।’’ इसमें कहा गया है कि सरकार ने सात मई को देश के 244 वर्गीकृत नागरिक सुरक्षा जिलों में नागरिक सुरक्षा अभ्यास और रिहर्सल आयोजित करने का निर्णय लिया है। पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत द्वारा अपने विकल्पों पर विचार करने के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई उच्चस्तरीय बैठकें कर रहे हैं। इस हमले में 26 नागरिक मारे गए थे, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे। मोदी ने हमले को अंजाम देने वालों और इसकी साजिश रचने वालों का ‘‘पृथ्वी के आखिरी छोर तक पीछा करने’’ और उन्हें ‘‘उनकी कल्पना से भी बड़ी’’ सजा देने का संकल्प जताया है। मप्र में मॉक ड्रिल की व्यापक तैयारी पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच टेंशन बढ़ गई है। आतंकवाद को खत्म करने के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी ने साफ संकेत दे दिए हैं और पाकिस्तान के साथ कई समझौतों को रद्द कर दिया है। हालात काफी नाजुक बने हुए हैं और युद्ध की संभावना बढ़ती जा रही है इसी बीच कल यानी 7 मई को देश के 244 सिविल डिफेंस जिलों में मॉक ड्रिल की जाएगी। इन 244 जिलों में मध्यप्रदेश के भी 5 जिले शामिल हैं। हवाई हमले के अलर्ट में बजेंगे सायरन.. भारत सरकार व केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 7 मई को देश के 244 सिविल डिफेंस जिलों में मॉक ड्रिल किए जाने के आदेश जारी किए हैं। इनमें जो भी शहर शामिल हैं उनमें हवाई हमले की चेतावनी वाले सायरन बजेगें और पूरे शहर में एक साथ ब्लैकआउट कर दिया जाएगा। मॉकड्रिल का मकसद लोगों को युद्ध जैसे हालात के लिए तैयार करना है। साथ ही जंग जैसे हालात में वे खुद को कैसे सुरक्षित रखें ये बताना भी है। एमपी के इन 5 जिलों में बजेंगे सायरन जो आदेश जारी हुआ है उसके मुताबिक मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर के साथ ही कटनी जिले में 7 मई को मॉकड्रिल का आयोजन किया जाएगा। बता दें कि देश में पिछली बार ऐसी मॉक ड्रिल 1971 में हुई थी। तब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था और तभी ऐसी मॉक ड्रिल युद्ध के बीच हुई थी। मप्र और छत्तीसगढ़ समेत देश के कई राज्यों मॉक ड्रिल की व्यापक तैयारी  जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी राज्यों को सिविल डिफेंस के लिए मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इस निर्देश के तहत MP, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों ने व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। विशेष रूप से महाराष्ट्र में 16 स्थानों पर मॉक ड्रिल की योजना बनाई गई है, जिसमें मुंबई, ठाणे, पुणे, नासिक, रायगढ़, उरण, तारापुर और कोंकण तट शामिल हैं। वहीं, नागपुर, जोधपुर और अन्य शहरों में भी आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने पहलगाम घटना के बाद उत्पन्न संभावित खतरों को देखते हुए पूरे राज्य में हाई अलर्ट घोषित किया है। प्रशासन ने सभी संबंधित एजेंसियों को चौकस रहने के सख्त निर्देश दिए हैं। राज्य के पालक मंत्रियों और अन्य मंत्रियों को प्रशासन के साथ निरंतर संपर्क में रहने को कहा गया है। मॉक ड्रिल के लिए 16 प्रमुख स्थानों का चयन किया गया है। खासकर कोंकण तट पर मॉक ड्रिल को विशेष रूप से आयोजित करने के आदेश दिए गए हैं, क्योंकि यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से संवेदनशील है। महाराष्ट्र सरकार ने आंतरिक गतिविधियों में … Read more

विष्णुदेव साय का दिल्ली का घर कहलाता था मिनी एम्स, मरीज के परिजनों के लिए करता था खाने की व्यवस्था

रायपुर  दस साल की उम्र में पिता को खोने के बाद छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय के पास खेल-कूद और मौज-मस्ती के लिए समय ही नहीं था। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण उन्होंने तुरंत परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली थी। सीएम साय ने बताया कि शायद इसीलिए वह कभी व्यक्तिगत रूचियों पर ध्यान नहीं दे पाए और अब उन्हें केवल सामाजिक कार्यों में ही सुकून मिलता है। 26 साल की उम्र में बने सरपंच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने परिवार और अपनी राजनीतिक यात्रा के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि युवावस्था में ही वह गांव के पंच चुन लिए गए थे और पांच साल बाद वह 1990 में 26 साल की उम्र में सरपंच बन गए। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं सरपंच बनूंगा।’’ हालांकि, इसके बाद उनका राजनीतिक सफर आगे बढ़ता रहा। साय तीन बार विधायक और चार बार सांसद चुने गए। साल 2023 में वह सत्ता के शिखर पर पहुंचे, जब उन्हें छत्तीसगढ़ का पहला आदिवासी मुख्यमंत्री चुना गया। उन्होंने कहा, ‘‘पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को भी आदिवासी मुख्यमंत्री कहा जाता है लेकिन उनके निधन तक उनका आदिवासी दर्जा विवाद में रहा।’’ 10 साल की उम्र में हो गया था निधन सीएम साय ने बताया कि ‘‘बचपन में मुझे खेल-कूद का मौका नहीं मिला क्योंकि 10 साल की उम्र में मेरे पिता का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई क्योंकि मैं चार भाइयों में सबसे बड़ा था। मेरा सबसे छोटा भाई तब दो महीने का था। मेरे पिता के तीन भाई थे और वे सभी अलग-अलग गांवों में रहते थे। मुझे अपने छोटे भाइयों और मां की देखभाल के साथ-साथ हमारे गांव बगिया में खेती-किसानी का काम भी करना था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘तब मैंने खेती-किसानी करके अपने भाइयों को शिक्षित करने का फैसला किया ताकि वे जीवन में सफल हो सकें। मैंने कभी सरपंच बनने के बारे में नहीं सोचा था।’’ साय ने कहा कि उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी और स्थानीय ग्रामीणों के कहने पर अपने गांव के पंच बन गए। उन्होंने कहा, ‘‘गांव के कुछ लोगों ने मुझे पंच बनने के लिए कहा और मैंने यह जिम्मेदारी संभाल ली। पांच साल तक मेरा काम देखने के बाद उन्होंने 1990 में मुझे निर्विरोध सरपंच चुन लिया।’’ बीजेपी ने दिया टिकट उन्होंने कहा कि सरपंच बनने के छह महीने के भीतर ही राज्य में विधानसभा चुनाव हुआ और भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव में उतारा गया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं तब 25-26 साल का था और सीख रहा था। मैंने पार्टी से कहा कि ‘मैं विधायक बनने के लायक नहीं हूं।’ मैंने 1990 में तत्कालीन मध्य प्रदेश के जशपुर जिले की तपकारा सीट से चुनाव लड़ा और जीता। यह विधायक के रूप में मेरी यात्रा की शुरुआत थी।’’ साय 1993 में लगातार दूसरी बार तपकारा से चुने गए। 1998 में, उन्होंने पड़ोस के पत्थलगांव सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। बाद में वह लगातार चार बार – 1999, 2004, 2009 और 2014 में रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। 2014 में केंद्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद, उन्हें केंद्रीय इस्पात और खान राज्य मंत्री नियुक्त किया गया। मौजूदा विधानसभा में वह कुनकुरी सीट से विधायक हैं। कैसा रहा राजनीति सफर उन्होंने 2006 से 2010 तक और फिर जनवरी 2014 से उसी वर्ष अगस्त तक छत्तीसगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। राज्य में 2018 में भाजपा की सत्ता जाने के बाद, उन्हें 2020 में फिर से प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पार्टी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने राजनीति में ‘जनसेवा’ के लिए प्रवेश किया। लोगों की बात सुनना और उनकी समस्याओं को हल करने का प्रयास करना अच्छा लगता है। जब मैं बीमार लोगों की मदद करता हूं तब मुझे बहुत संतुष्टि मिलती है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं राजनेता बनूंगा। मुझे जो भी जिम्मेदारी सौंपी गईं, मैंने उन्हें पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया।’’ दिल्ली का घर कहलाता था मिनी एम्स सांसद रहते हुए दिल्ली में अपने आवास को ‘‘मिनी एम्स’’ कहे जाने को याद करते हुए, साय ने कहा, ‘‘दिवंगत भाजपा नेता दिलीप सिंह जूदेव दिल्ली में मेरे फ्लैट पर आते थे और वहां एम्स दिल्ली में भर्ती लोगों के रिश्तेदारों को ठहरा हुआ देखकर कहते थे कि आपने अपना घर ‘मिनी एम्स’ बना लिया है।’’ मरीज के परिजनों के लिए करता था खाने की व्यवस्था उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं केंद्र में राज्य मंत्री था, तब मैं रोजाना 70-80 लोगों के भोजन की व्यवस्था करता था, जिनके परिजन अस्पताल में भर्ती होते थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी मैंने यहां कुनकुरी सदन की स्थापना की है, जहां राज्य भर से इलाज के लिए रायपुर आने वाले लोगों को विभिन्न प्रकार की सहायता और मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।’’ परिवार के कई सदस्य राजनीति में साय राजनीतिक परिवार से आते हैं। उन्होंने बताया, ‘‘मेरा परिवार शुरू से ही राजनीति में रहा है। आजादी के बाद, मेरे दादा दिवंगत बुधनाथ साय 1947 से 1952 तक मनोनीत विधायक थे। मेरे चाचा (दादा के छोटे भाई के बेटे) दिवंगत नरहरि प्रसाद साय ने तीन बार विधायक के रूप में कार्य किया और सांसद (1977-79) भी चुने गए। उन्होंने जनता पार्टी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। बाद में मेरे चचेरे भाई रोहित साय भी विधायक चुने गए।’’ मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके पिता के बड़े भाई दिवंगत केदारनाथ साय भी जनसंघ सदस्य के रूप में तपकारा से विधायक चुने गए थे।

कोरोना महामारी में पैरोल पर छूटे 70 कैदी वापस नहीं लौटे, हाईकोर्ट ने दिए यह निर्देश

रायपुर  रायपुर सेंट्रल जेल से सात ऐसे बंदी हैं, जो पैरोल पर छूटने के बाद वापस नहीं लौटे। एक बंदी दिसंबर 2002 से गायब हैं। इनमें अधिकतर बंदी हत्या के प्रकरण में जेल में बंद थे। जेल और पुलिस प्रशासन ने इन बंदियों की कई बार तलाश की, लेकिन अब तक उनका कोई पता नहीं चला। प्रदेशभर में ऐसे बंदियों की संख्या करीब 70 है। भी तक 70 कैदी वापस नहीं लौटे हैं। हाईकोर्ट की सख्ती दिखाने के बाद जेल डीजी ने शपथपत्र में यह जानकारी दी है।हालांकि, जेल प्रबंधन ने ऐसे फरार कैदियों के खिलाफ थानों में केस भी दर्ज कराया है। जिनकी तलाश की जा रही है। 10 को गिरफ्तार किया गया, 3 की मौत दरअसल, हाईकोर्ट ने पैरोल पर छोड़े गए कैदियों को लेकर हाईकोर्ट ने जेल डीजी से शपथपत्र के साथ जवाब मांगा था। जिसके बाद जेल डीजी की तरफ से हाईकोर्ट को जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक प्रदेश की पांच सेंट्रल जेलों के 83 कैदी पैरोल से नहीं लौटे थे, जिनमें से 10 को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, 3 की मृत्यु हो गई है। अभी भी प्रदेशभर की जेलों से करीब 70 बंदी पैरोल से छूटने के बाद वापस नहीं लौटे हैं। एक बंदी दिसंबर 2002 से गायब हैं। इनमें अधिकतर बंदी हत्या के प्रकरण में जेल में बंद थे। जेल प्रशासन का दावा- फरार कैदियों की तलाश जारी जेल प्रशासन का दावा है कि पुलिस के साथ मिलकर उन्होंने फरार कैदियों की तलाश की। लेकिन, अब तक उनका कोई पता नहीं चला है। अब जेल प्रशासन इन बंदियों की वापसी की राह ताक रहा है। सूचना के अधिकार के तहत रायपुर जेल के वारंट अधिकारी ने 7 बंदियों के पैरोल पर छोड़े जाने के बाद से नहीं लौटने की जानकारी दी है। जेल प्रबंधन ने दर्ज कराया है केस बिलासपुर जेल में इस तरह 22 बंदी नहीं लौटे हैं। उनके परिजन को बार-बार सूचना देने के बाद भी जब बंदी नहीं लौटे, तो जेल प्रबंधन ने उनके खिलाफ संबंधित थानों में केस दर्ज कराया है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए दी गई पैरोल बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान फैलते संक्रमण को देखते हुए जेल प्रशासन ने अच्छे आचरण वाले बंदियों को पैरोल पर भेजा था। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के दौरान पैरोल की अवधि कई बार बढ़ाई गई थी। नहीं लौटने वालों में इनकी ही संख्या अधिक है। अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया था छत्तीसगढ़ में कुल पांच सेंट्रल जेल रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर और अंबिकापुर में हैं। इसके अलावा 12 जिला और 16 उपजेल हैं। केंद्रीय जेलों के अलावा इन जेलों में भी बंदियों को राहत दी गई थी। कई बंदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया था। इनकी संख्या और वापसी की पुख्ता जानकारी नहीं है। जानकार बताते हैं कि अंतरिम जमानत पर जेल के बाहर गए ज्यादातर बंदियों ने कोर्ट से अपनी जमानत करवा ली है। ऐसे में इन बंदियों की निश्चित संख्या की जानकारी जेल प्रबंधन के पास भी नहीं है।

वुलर झील के किनारे शिकारा मालिक और पर्यटन पर निर्भर परिवार अब आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे

श्रीनगर पहलगाम आतंकी हमले का सबसे बुरा असर कश्मीर के पर्यटन उद्योग पर हुआ है. शिकारा मालिकों और अन्य पर्यटन व्यवसायियों की आजीविका संकट में आ गई है. कश्मीर के सोपोर में स्थित एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की झील वुलर झील हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पर्यटन के लिहाज से सूनी पड़ी है. 22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले ने कश्मीर घाटी के पर्यटन उद्योग को गहरा झटका दिया है. वुलर झील के किनारे शिकारा मालिक और पर्यटन पर निर्भर परिवार अब आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि पर्यटकों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है. पर्यटकों से अपील घाटी आएं आजीविका के लिए पर्यटकों पर निर्भर रहने वाले शिकारा मालिक हसन ने कहा, “हम पूरे दिन इंतजार करते हैं, लेकिन कोई नहीं आता. कश्मीर अपने आतिथ्य के लिए जाना जाता है. हम शांति और पर्यटन की बहाली की मांग करते हैं. पहलगाम हमले की हम कड़ी निंदा करते हैं, यह मानवता पर हमला है.” वहीं स्थानीय निवासी मंजूर अहमद, जो पहले प्रतिदिन 1500 रुपये तक कमा लेते थे, अब मुश्किल से 100 रुपये कमा पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम पर्यटकों से अपील करते हैं कि वे घाटी में फिर से आएं और वुलर झील सहित कश्मीर की छिपी प्राकृतिक सुंदरता को देखें. पहलगाम हमले के बाद बर्बाद हुए लोकल? पहलगाम आतंकी हमले के बाद कश्मीर में पर्यटन उद्योग पर गहरा असर पड़ा है. अप्रैल-मई में वुलर झील और अन्य पर्यटन स्थलों पर रोजाना हजारों पर्यटक आते थे, लेकिन हमले के बाद पर्यटकों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. जिससे शिकारा मालिकों, टैक्सी चालकों और होटल मालिकों को भारी नुकसान हुआ है. वहीं होटल, रेस्तरां और स्थानीय हस्तशिल्प व्यवसायों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. सुरक्षा व्यवस्‍था कड़क, मॉक ड्रिल के निर्देश इस बीच, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) ने श्रीनगर की डल झील में मॉक ड्रिल का आयोजन किया, ताकि आपातकालीन तैयारियों को परखा जा सके.केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 7 मई को देशभर में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का निर्देश दिया है. दूसरी ओर, नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना द्वारा 12 दिनों तक संघर्ष विराम उल्लंघन के बाद, पुंछ जिले में सुरक्षा बलों ने सतर्कता बढ़ा दी है. पुलिस, सीआरपीएफ और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने नाकेबंदी, वाहन जांच और गश्त तेज कर दी है, ताकि सीमा पार से संभावित आतंकी घुसपैठ को रोका जा सके.

OIC ने अब भारत को चेतावनी देने की हिमाकत, कश्मीर को आत्मनिर्णय के अधिकार से वंचित किया जा रहा

न्यूयॉर्क गाजा पट्टी में युद्ध रूकवाने में नाकाम रहने वाले इस्लामिक देशों के संगठन OIC ने अब भारत को चेतावनी देने की हिमाकत की है। OIC ने पाकिस्तान के खिलाफ भारत के लगाए गये आरोपों को “निराधार” बताते हुए कहा है कि इससे दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ रहा है। इसके अलावा OIC ने अपनी हदों को पार करते हुए कहा है कि “कश्मीर को आत्मनिर्णय के अधिकार से वंचित किया जा रहा है, जिसकी गारंटी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों में दी गई है।” OIC का ये लहजा धमकाने वाला है लेकिन इसकी औकात कितनी है, और इसकी बातों का कितना असर होता है, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि ना तो ये गाजा पट्टी में युद्ध को रूकवा पाया है और ना ही इजरायल को गाजा में विनाशक हमला करने से रोक पाया है। TRT वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक न्यूयॉर्क में इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने “दक्षिण एशिया में बिगड़ते सुरक्षा माहौल पर गहरी चिंता” जताई है जिसमें भारत के “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान के खिलाफ निराधार आरोपों” को क्षेत्र में तनाव को बढ़ाने वाला एक प्रमुख फैक्टर बताया गया है। आपको बता दें कि OIC में 57 देश हैं, जिनमें 48 मुस्लिम बहुल देश हैं। 57 सदस्य देशों वाले संगठन OIC ने कहा कि “इस तरह के आरोपों से पहले से ही अस्थिर स्थिति और खराब होने का खतरा है, और “आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ अपनी सैद्धांतिक स्थिति और निंदा को दोहराया, चाहे वह किसी भी व्यक्ति द्वारा और कहीं भी किया गया हो।” कश्मीर पर OIC ने फिर लांघी सीमा रेखा TRT वर्ल्ड की रिपोर्ट मं कहा गया है कि इसके अलावा OIC ने कश्मीर को लेकर फिर से अपनी हदें लांघने की गुस्ताखी की और कहा कि “अनसुलझा विवाद दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा को प्रभावित करने वाला मुख्य मुद्दा बना हुआ है। जम्मू और कश्मीर के लोगों को उनके आत्मनिर्णय के अविभाज्य अधिकार से वंचित किया जा रहा है, जैसा कि प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों में निहित है।” इसके अलावा ओआईसी ने अपने बयान में कहा है कि “OIC, संयुक्त राष्ट्र महासचिव (एंटोनियो गुटेरेस) द्वारा की गई सहायता की पेशकश की सराहना करता है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और प्रभावशाली राज्यों सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आह्वान करता है कि वे स्थिति को कम करने के लिए तत्काल और विश्वसनीय उपाय करें।” आपको बता दें कि पिछले महीने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चरम पर तनाव है। भारत ने एक्शन लेते हुए सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया है और आशंका है कि भारत, पाकिस्तान पर हमला कर सकता है। भारत का मानना है कि आतंकवादी हमले के बीच पाकिस्तान है। जबकि पाकिस्तान ने हमेशा की तरफ आरोपों का खंडन किया है। इसके अलावा दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ कूटनीतिक कदम उठाए हैं, जिसमें एक-दूसरे के नागरिकों के वीजा रद्द करना और राजनयिक कर्मचारियों को वापस बुलाना शामिल है। OIC का डबल स्टैंडर्ड हालांकि OIC के पाकिस्तान को समर्थन करने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन इससे OIC के डबल स्टैंडर्ड का एक बार फिर से खुलासा होता है। OIC ने अपने बयान में कहा है कि “भारत द्वारा पाकिस्तान पर लगाए जा रहे बेबुनियाद आरोप दक्षिण एशिया में तनाव को बढ़ा रहे हैं। हम कश्मीरियों को उनका आत्मनिर्णय का अधिकार दिलाने की मांग दोहराते हैं, जैसा कि UN प्रस्तावों में गारंटी दी गई है।” लेकिन ये वही ओआईसी है जो चीन में उइगर मुस्लिमों के खिलाफ होने वाले अत्याचार को लेकर चुप्पी साधे रखता है। ये वही ओआईसी है, जो अफगानिस्तान में तालिबान के क्रूर इस्लामिक शासन और महिलाओं को घर में बंधक बनानए जाने की नीति को लेकर चुप्पी साधे रखता है। ये वही ओआईसी है जो पाकिस्तान में शिया, अहमदिया और हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति पर कभी कुछ नहीं कहता। लेकिन जब भारत की बात आती है तो यही ओआईसी अचानक से मानवाधिकार का चैंपियन बन जाता है। भारत ने अब ओआईसी को मुंह लगाना बंद कर दिया है। भारत पहले भी ओआईसी से दो टूक शब्दों में कह चुका है कि “कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है” और ऐसे संगठनों को पाकिस्तान के प्रोपेगेंड टूलर का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि OIC एक पक्षपाती मंच है जो आतंकवाद को शह देने वाले देश के साथ खड़ा रहता है। भारत ऐसे बयानों को पूरी तरह खारिज करता रहा है। कई ओआईसी के सदस्य देश इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान का समर्थन करते हैं। जबकि पाकिस्तान ने ओआईसी को अपने प्रोपेगेंडा फैलाने का मंच बना दिया है। लिहाजा ओआईसी का ये समर्थन कोई मायने नहीं रखता है।

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