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बिलासपुर : सुशासन तिहार में रीना यादव और सीमा बघेल को मिला नया राशनकार्ड सुशासन तिहार में

बिलासपुर : सुशासन तिहार में रीना यादव और सीमा बघेल को मिला नया राशनकार्ड सुशासन तिहार में त्वरित निराकरण के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का जताया आभार बिलासपुर छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन तिहार से आम लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान मिल रहा है, सुशासन तिहार के तहत आयोजित समाधान शिविरों में पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ सरल, पारदर्शी एवं त्वरित रूप से प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में सुशासन तिहार में आवेदन करने पर निगम क्षेत्र की दो हितग्राहियों रानी यादव और सीमा बघेल को त्वरित रूप से नवीन राशनकार्ड प्रदान किए गए।     नगर निगम क्षेत्र के जोन क्रमांक 2 की निवासी श्रीमती रानी यादव ने प्राथमिकता श्रेणी के अंतर्गत राशनकार्ड हेतु आवेदन किया था। जांच में पाया गया कि वह असंगठित क्षेत्र में श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं और उनका नाम श्रमिक कार्ड में मजदूर (रेजा, कूली) के रूप में दर्ज है। पात्रता की पुष्टि के बाद उन्हें नवीन प्राथमिकता राशनकार्ड प्रदान किया गया।       इसी तरह श्रीमती सीमा बघेल ने सामान्य राशनकार्ड के लिए आवेदन दिया था, जांच में यह पाया गया कि वह संयुक्त एवं सामान्य परिवार से संबंध रखती हैं, और उनके पति श्री सतीश बघेल भारतीय रेलवे में लोको पायलट के रूप में कार्यरत हैं।समाधान शिविर में आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि के बाद उन्हें नवीन सामान्य राशनकार्ड जारी किया गया।         दोनों हितग्राहियों ने राज्य शासन की सुशासन तिहार की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से उन्हें बिना किसी कठिनाई के सरकारी सुविधा का लाभ प्राप्त हुआ है। रानी यादव ने बताया कि पहले कई बार प्रयास के बावजूद राशनकार्ड नहीं बन सका था, लेकिन इस योजना ने उनके परिवार की बड़ी समस्या का समाधान कर दिया। वहीं सीमा बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जनसाधारण के लिए सुशासन की जो पहल शुरू की है उससे आम लोगों को राहत मिल रही है।       उल्लेखनीय है कि ‘ सुशासन तिहार ‘ का उद्देश्य राज्य के प्रत्येक पात्र नागरिक तक सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शिता एवं प्रभावशीलता के साथ पहुंचाना है। राशनकार्ड, पेंशन, श्रमिक कार्ड, स्वास्थ्य बीमा के साथ ही साफ सफाई,बिजली और पेयजल समस्याओं का इस पहल के माध्यम से तेजी से समाधान किया जा रहा है। सुशासन तिहार से प्रशासन और नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय का स्थापित हो रहा है और आम लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो रहा है।

3 साल के अभिनेता ने 1 साल में बनाई 36 फिल्में, तोड़ा अक्षय-सलमान का रिकॉर्ड, बेटा भी रह गया पीछे, नेटवर्थ उड़ा देगी नींद

मुंबई आजकल कई फिल्में प्रोडक्शन में देरी और स्पेशल इफेक्ट की वजह से बनने में सालों लग जाते हैं। कुछ एक्टर्स एक ही फ़िल्म पर लंबे समय तक ध्यान देते हैं, जबकि कुछ जल्दी-जल्दी एक प्रोजेक्ट से दूसरे प्रोजेक्ट पर चले जाते हैं। लेकिन एक एक्टर ऐसा भी है जिसने एक साल में सबसे ज़्यादा फ़िल्मों में काम करके रिकॉर्ड बनाया है। वह एक्टर ममूटी हैं। उन्होंने 1971 में ‘अनुभवंगल पालीचाकल’ में एक छोटे से रोल के साथ एक्टिंग की शुरुआत की। उनकी पहली लीड रोल वाली फिल्म ‘मेला’ (1980) थी। जल्द ही, वे मलयालम सिनेमा के सबसे बड़े एक्टर्स में से एक बन गए। बेटे को लग गए 13 साल साल 1982 में ममूटी ने 24 फिल्मों में काम किया। 1983 से 1986 तक उन्होंने हर साल 36, 34, 28 और 35 फिल्मों में काम करके अपना सिलसिला जारी रखा। उनके समर्पण ने उन्हें इंडस्ट्री के सबसे मेहनती एक्टर्स में से एक बना दिया। ममूटी ने 400 से ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया है। 1983 में उन्होंने एक साल में 36 फ़िल्मों में काम किया था, जबकि उनके बेटे दुलकर सलमान को इतने ही फ़िल्मों में काम करने में 13 साल लग गए। उनकी फिल्म बन गई सबसे बड़ी हिट उनकी 1983 की फिल्म ‘आ रात्री’ 1 करोड़ रुपये कमाने वाली पहली मलयालम फिल्मों में से एक बन गई। कूडेविडे और अडियोझुक्ककल जैसी हिट फिल्मों ने उनकी प्रतिभा को उजागर किया। उन्होंने आई.वी. ससी और एम.टी. वासुदेवन नायर जैसे टॉप डायरेक्टर्स के साथ काम किया। ममूटी ने मथिलुकल के लिए अपना पहला नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीता। उन्होंने विधेयन और पोंथन माडा के लिए फिर से पुरस्कार जीता। डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर (2000) में उनके रोल ने उन्हें एक और राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया। ममूटी की नेट वर्थ 340 करोड़ रुपये की कुल नेट वर्थ के मालिक ममूटी की शानदार लाइफस्टाइल उनकी महंगी चीजों में से एक है। ममूटी ममूटी, साउथ के जाने-माने एक्टर हैं। उन्हें उनके शानदार अभिनय और फिल्मों के लिए जाना जाता है। वो आज भी स्क्रीन पर आते हैं तो बवाल ही मचा जाते हैं। उनके नाम एक साल में 35 फिल्में देने का रिकॉर्ड है। साउथ कैसेट के इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार, एक्टर ने साल 1986 में 35 फिल्में की थी। इनमें से कई हिट साबित हुई थीं। इस साल वो छा गए थे। मोहनलाल साउथ एक्टर मोहनलाल आज भी जब स्क्रीन पर आते हैं तो उनकी फिल्मों पर फैंस खूब प्यार लुटाते हैं। उनकी किसी भी फिल्म की अनाउंसमेंट होती तो फैंस के लिए ये किसी तोहफे से कम नहीं है। ऐसे में मोहनलाल के नाम एक साल में 34 फिल्में करने का रिकॉर्ड है। साउथ कैसेट के इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार, उन्होंने साल 1986 में 34 फिल्मों में काम किया था और उनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई भी की थी। कृष्णा एक्टर कृष्णा, साउथ के बेहतरीन कलाकारों में से एक हैं। उन्होंने एक बार सालभर में 18 फिल्मों में किया था, जिसमें अधिकतर हिट रही थीं। साउथ कैसेट के इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार, साल 1972 में कृष्णा की 18 फिल्में रिलीज हुई थीं। प्रेम नाजिर इस लिस्ट में अगर किसी के नाम एक साल में सबसे ज्यादा फिल्में देने का रिकॉर्ड दर्ज है तो वो हैं मलयाली एक्टर प्रेम नाजिर। उन्होंने 1979 में इतनी फिल्में बनाई थी कि सोच भी पाना मुश्किल होगा। साउथ कैसेट के इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार, प्रेम नाजिर ने एक साल में 41 फिल्में की थी। इस लिहाज से एक महीने में करीब 3-4 फिल्में की होती हैं।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि इस उपलब्धि के लिए रीवा संभाग की चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही

रीवा उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि जिद, जुनून एवं जज्वे से बड़े से बड़े लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। मध्यप्रदेश की प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले रीवा संभाग के विद्यार्थियों ने यह साबित कर दिया है कि विन्ध्य का भविष्य सुनहरा है और आने वाले दिनों में यह विद्यार्थी अपना योगदान देंगे। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय रीवा परिसर के सभागार में माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल की 10वीं एवं 12वीं की परीक्षा में प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले रीवा संभाग 66 विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। “आपरेशन निखार” की सराहना की उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि इस उपलब्धि के लिए रीवा संभाग की चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। उन्होंने प्रतिभाशाली बच्चों को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की तथा कहा कि संस्कारवान शिक्षा ही सर्वोत्तम है। शिक्षित होकर संस्कारवान बनें और आगे बढ़ते रहें। श्री शुक्ल ने कहा कि जीवन में निराश न हों। सफलतायें एवं असफलतायें मिलती रहती हैं अपने लक्ष्य के लिए हमेशा प्रयासरत रहें। उन्होंने कहा कि इन बच्चों ने जो अपने अनुभव बताये हैं उससे यह सिद्ध होता है कि इन्हें आगे बढ़ने का मंत्र प्राप्त हो गया है। आगे की शिक्षा में इसी लगन और मेहनत से लगे रहे। उन्होंने रीवा संभाग के कमिश्नर श्री बीएस जामोद द्वारा शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए संभाग में प्रारंभ किये गये “आपरेशन निखार” की प्रशंसा की जिसके सार्थक परिणाम सामने आये हैं। उन्होने कहा कि प्रशासन के साथ-साथ शिक्षा विभाग के शिक्षकों व अन्य अधिकारियों ने रीवा संभाग में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए समन्वित प्रयास किया है जो बधाई के पात्र हैं। उन्होंने अपेक्षा की कि प्रतिभाशाली बच्चों से अन्य बच्चे भी प्रेरणा लेगें। सांसद श्री जनार्दन मिश्र ने कहा कि विद्यार्थियों में घमण्ड व अतिरेक की भावना न जागृत हो। आत्मविश्वास कायम रहे जीवन में सफलता के लिए विनम्रता, लगन एवं निष्ठा आवश्यक है जो विद्यार्थियों को समग्रता देती है। श्री मिश्र ने कहा कि समाज में इन प्रतिभाओं की आग्रणी भूमिका रहेगी। उन्होंने अपेक्षा की कि प्रतिभावान छात्र अन्य विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन दें और उनको भी आगे बढ़ाने में मददगार हों। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल ने कहा कि शिक्षकों और गुरूजनों के प्रयासों से ही बच्चों ने सफलता प्राप्त की है और विन्ध्य का नाम रोशन किया है जिससे हम सब गौरवांवित महसूस कर रहे हैं। कमिश्नर रीवा संभाग श्री जामोद ने कहा कि रीवा का इतिहास शिक्षा के क्षेत्र में समृद्धशाली रहा है। इन प्रतिभावान विद्यार्थियों ने इसमें और चार चाँद लगा दिये हैं। उन्होंने कहा कि सम्मान समारोह में सभी को गौरव का अनुभव हो रहा है। छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं उनके परिजन को इस सफलता के लिए बहुत-बहुत बधाई। कमिश्नर ने कहा कि संभाग के 66 बच्चों ने मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। आप सभी मंजिल पर कायम रहते हुये लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सतत प्रयत्नशील रहें। इससे पूर्व कक्षा 10वीं एवं कक्षा 12वीं में प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में सिंगरौली की प्रज्ञा जायसवाल, सतना की प्रियल द्विवेदी, सीधी के दिव्यांशु तिवारी तथा रीवा के अंकुर यादव ने अपने अनुभव बताते हुए सफलता के लिए माता-पिता व गुरूजनों के योगदान का श्रेय दिया। कक्षा 10वीं की प्रदेश की प्रावीण्य सूची में संभाग के 39 तथा कक्षा 12वीं की सूची में संभाग के 27 विद्यार्थियों ने अपना स्थान बनाया है। स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी और उनके परिजन उपस्थित रहे।  

स्कूल शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष-2024-25 में प्रावधान किये गये कुल बजट का 95 प्रतिशत हिस्सा स्कूल शिक्षा के सुधार में दिया

स्कूल शिक्षा को भारतीय मूल्यों, संस्कृति आधारित शिक्षा से जोड़ने के लिये किये गये प्रभावी प्रयास एक वर्ष की रही है उल्लेखनीय उपलब्धियाँ भोपाल प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 21वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है, जिसका उद्देश्य भारत के सतत् विकास के लिये आवश्यक शैक्षिक सुधारों को साकार करना प्रमुख रहा है। इसी उद्देश्य को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का स्कूल शिक्षा में प्रभावी रूप से क्रियान्वयन कर रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय परम्परा और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाये रखते हुए, आधुनिक, वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप शिक्षा प्रणाली में समग्र परिवर्तन को प्रस्तावित करती हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति कहती है कि शैक्षिक प्रणाली का उद्देश्य अच्छे इंसानों का विकास करना है, जो तर्कसंगत विचार और कार्य करने में सक्षम हो, जिसमें करूणा और सहानुभूति, साहस और लचीलापन, वैज्ञानिक चिंतन, रचनात्मक कल्पना शक्ति, नैतिक मूल्य और आधार हो। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखते हुए समावेशी शिक्षा के दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 स्थानीय और वैश्विक आवश्यकताओं के बीच संतुलन भी बनाती है। प्रदेश में उठाये गये उल्लेखनीय कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के लिये स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में विभागीय अधिकारियों, शिक्षाविदों, शासकीय-अशासकीय विद्यालयों के 43 सदस्यीय टॉस्क फोर्स का गठन प्रदेश में किया जा चुका है। टॉस्क फोर्स के गठन के बाद नीति के क्रियान्वयन की समीक्षा एवं सुझाव के लिये टॉस्क फोर्स की 3 बैठकों का आयोजन भी किया जा चुका है। इसके साथ ही निरन्तर समीक्षा के लिये 13 समितियों का गठन भी किया जा चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी शासकीय व अशासकीय विद्यालयों में जुलाई 2024 में गुरूपूर्णिमा के महत्व एवं पारम्परिक गुरू-शिष्य संस्कृति पर प्रार्थना सभा में बातचीत एवं शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा गुरू संस्मरण का आयोजन भी किया गया है। प्रदेश की शालाओं में जन्माष्टमी पर्व पर आयोजन अगस्त 2024 में किया गया। आयोजन में श्रीकृष्ण की शिक्षा एवं मित्रता के प्रसंग तथा जीवन दर्शन पर आधारित विभिन्न विषयों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं व्याख्यान आयोजित किये गये। लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयन्ती के आयोजन को देखते हुए भाषा भारती कक्षा-7 पाठ 18 सुरभि संस्कृत कक्षा 8 में लोकमाता के जीवन पर केन्द्रित पाठ्यक्रम को शामिल किया गया। स्कूलों में बालिकाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने के लिये निरन्तर कैम्प भी आयोजित किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में 26 से 29 नवम्बर 2024 के मध्य श्रीमद् भागवत गीता आधारित मूल्य शिक्षा क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। 11 दिसम्बर 2024 को गीता जयन्ती के अवसर पर विद्यालयों में गीताकर्म पर आधारित व्याख्यान एवं स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। स्कूलों में मकर संक्रांति पर्व, संस्कृत भाषा के विकास के लिये महाकवि कालिदास के व्यक्तित्व और कृतित्व पर श्लोक पाठ और नृत्य-नाटिका आयोजित की गई। प्रदेश में स्थानीय जनजातीय भाषा गोंडी, भीली, सहरिया, बारेली, निमाड़ी, बुंदेली और बघेली में तैयार की गई त्रिभाषा पुस्तकें 21 जिलों के 89 जनजातीय विकासखंडों में उपलब्ध कराई गई। बजट का समुचित उपयोग स्कूल शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष-2024-25 में प्रावधान किये गये कुल बजट का 95 प्रतिशत हिस्सा स्कूल शिक्षा के सुधार में दिया। प्रदेश में 10वीं बोर्ड परीक्षा में इस वर्ष 74 प्रतिशत परिणाम आया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा का परिणाम इस वर्ष 74 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 10 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। बोर्ड की कक्षा 10 और 12 में 53 प्रतिशत विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की है। प्रदेश में बोर्ड जीरो पेपर लीक के साथ सम्पन्न हुई। योजनाओं का क्रियान्वयन प्रदेश में स्कूल शिक्षा की लोक कल्याण योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक योजना में शासकीय विद्यालय में पढ़ाई कर रहे 82 लाख विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक वितरित की गई। छात्रवृत्ति योजना में कक्षा एक से 12वीं में अध्ययनरत एससी, एसटी, ओबीसी और बीपीएल के 66 लाख छात्रों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 332 करोड़ रूपये की राशि अंतरित की गई। नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना में कक्षा 6 एवं 9 के 4 लाख 75 हजार विद्यार्थियों को नि:शुल्क साइकिल वितरित की गई। प्रतिभाशाली छात्र प्रोत्साहन योजना में कक्षा 12 में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 89 हजार 801 विद्यार्थियों को डीबीटी के माध्यम से 224 करोड़ 25 लाख रूपये की राशि ट्रांसफर की गई। सांदीपनि विद्यालय योजना में पहले चरण में 276 सांदीपनि विद्यालय प्रारंभ किये जा चुके हैं। इन विद्यालयों में 2 लाख 62 हजार 613 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। विनोवा सांदीपनि रतलाम विद्यालय में नवाचार की श्रेणी में वर्ल्ड बेस्ट स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त किया। केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में मध्यप्रदेश में 787 पीएमविद्यालय संचालित किये जा रहे हैं। मॉडल स्कूलों का संचालन प्रदेश में 145 मॉडल स्कूलों में से 143 मॉडल स्कूल स्वयं के भवन निर्मित हो चुके हैं। प्रदेश में मॉडल स्कूलों में 50 हजार विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। इसी के साथ प्रत्येक जिला मुख्यालय एवं विकासखंड मुख्यालय पर स्थापित चयनित एक शासकीय विद्यालय को उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश में 43 जिला मुख्यालयों एवं 96 विकासखंड स्तर पर उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हैं। शिक्षकों को प्रशिक्षण और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिये शैक्षिक संवाद का आयोजन किया जा रहा है। व्यावसायिक शिक्षा नई शिक्षा नीति के अनुरूप प्रदेश के 2383 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित की जा रही है, जिसमें 4 लाख विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिन्हें 12 ट्रेड्स में शिक्षा दी जा रही है। विद्यालयों में कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये भी 465 विद्यालयों में कृषि ट्रेड्स संचालित किये जा रहे हैं। स्किल कैरियर काउंसलिंग के माध्यम से करीब डेढ़ लाख विद्यार्थियों को कैरियर संबंधी सलाह दी गई। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये एक लाख 84 हजार प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को टैबलेट प्रदान किये गये।  

बेतवा नदी के संरक्षण और शुद्धिकरण के लिए जिला प्रशासन वृहद परियोजना तैयार कर रहा

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को सिद्ध करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 30 मार्च से ‘जल गंगा सवंर्धन अभियान’ प्रारंभ किया गया है। अभियान का समापन गंगा दशहरा, 30 जून को होगा। जन-जन के जीवन से जुड़ा यह महत्वपूर्ण अभियान में नये तालाब बनाये जा रहे हैं, पुराने तालाबों, बावड़ियों और कुँओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है और नदियों को साफ-स्वच्छ किया जा रहा है। अभियान में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले तालाबों, जल स्रोतों तथा देवालयों में भी जल संरक्षण के कार्य भी किये जा रहे हैं। विदिशा जिले की जीवनदायिनी बेतवा नदी की दीर्घकालिक सुरक्षा एवं पुर्नजीवन जल गंगा संवर्धन अभियान के उद्धेश्यों की प्राप्ति एवं सतत जल प्रबंधन लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। बेतवा नदी के संरक्षण और शुद्धिकरण के लिए जिला प्रशासन वृहद परियोजना तैयार कर रहा है। परियोजना को मूर्तरूप देने के लिए विशेषज्ञों को क्षेत्र का भ्रमण कराया जा रहा है। बेतवा नदी के संरक्षण और शुद्धिकरण पर आधारित परियोजना को मूर्तरूप दिया जा रहा है। परियोजना में नदी में मिलने वाले सॉलिड और लिक्विड वेस्ट को नियंत्रित करने और नदी के प्राकृतिक प्रवाह एवं पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने पर फोकस किया जा रहा है। इससे नदी के क्षरण को रोका जा सकेगा। इसके लिए इन्दौर आईआईटी के विशेषज्ञों की टीम ने बेतवा नदी के घाटों, एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और नालों का गहन सर्वेक्षण किया। आईआईटी इन्दौर की टीम ने नदी के विभिन्न घाटों, नालों और एसटीपी की वस्तु-स्थिति का आकलन किया और गंदगी के स्त्रोतों की पहचान की। आगामी चरण में टीम नदी के बहाव क्षेत्र का भ्रमण कर एक विस्तृत वैज्ञानिक डीपीआर तैयार करेगी।  सीहोर में जल संरक्षण जन जागरुकता और बुधनी में तालाब का गहरीकरण एवं साफ-सफाई जल गंगा संवर्धन अभियान में सीहोर जिले में जन अभियान परिषद ने प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों तथा नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया तथा जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। जिले के बुधनी में जन अभियान परिषद के सदस्यों ने मांजरकुई गांव में जल संरक्षण के उद्देश्य से तालाब के गहरीकरण एवं साफ सफाई का कार्य किया गया। इस कार्य में सभी सदस्यों एवं आमजनों ने श्रमदान किया। इस अवसर पर सभी को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। शहडाेल के गांवों में श्रमदान से बोरी बंधान खेत तालाबों का हो रहा निर्माण आओ बचाएं जल, करें सुरक्षित कल और पानी बचाओ कल के लिये, पानी की बर्बादी जीवन की बर्बादी जैसे नारों के साथ शहडोल के गांवो में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। जन भागीदारी संस्थाओं, जन प्रतिनिधियों, जन अभियान परिषद के सदस्यों, समाजसेवी और ग्रामीणों के सहयोग से जल संग्रहण संरचनाओं के जीर्णोद्धार, नदी नालों की सफाई, बोरी बंधान तालाबों का गहरीकरण औऱ नये खेत तालाब जैसे कार्य निरंतर किये जा रहे हैं। जिले के जनपद पंचायत जयसिंहनगर के कतिरा गांव में पानी की सहजेने के लिए, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, समाजसेवी सहित अन्य लोगों ने बोरी बंधान एवं नदी-नाला सफाई में उत्साहपूर्वक सहभागिता करत् हुए श्रमदान किया। जिले की जनपद पंचायत बुढार के गांव कुम्हारी, कदमहा, गिरवा, मझौली में नए खेत तालाबों का निर्माण किया गया। के कार्य किए गए। जिले के ही पोनांग तालाब में श्रमदान के माध्यम से सफाई की गई। क्षिप्रा नदी को स्वच्छ और प्रवहमान रखने की शपथ के साथ जल स्रोतों की सफाई के लिए श्रमदान देवास में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जन-जन के सहयोग से जन अभियान बन रहा है। जिले के नूतन हायर सेकेंडरी स्कूल (संकुल) के अंतर्गत आने वाले सभी हाई स्कूल, मिडिल स्कूल एवं प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों ने ग्राम हवनखेड़ी में क्षिप्रा नदी की साफ-सफाई की। इस अवसर पर स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर महेश सोनी ने सभी शिक्षकों को जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल स्रोतों को साफ रखने और रिचार्ज करने प्रति सप्ताह एक घंटा श्रमदान करने की शपथ दिलाई। नदी की साफ-सफाई और गहरीकरण होने से बारिश के दिनों में पानी का संग्रहित होगा तथा वाटर लेवल भी बढ़ेगा, जिससे पेयजल के साथ खेती करने के लिए भी पानी मिल सकेगा। ग्रामीणों ने क्षिप्रा नदी को स्वच्छ बनाए रखने का संकल्प लिया।  

पहलगाम हमले में बहनों का सिंदूर उजाड़ने वालों का भारत ने किया हिसाब चुकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी ने किया आतंकवाद के विरूद्ध भारत की नीति का उद्घोष : मुख्यमंत्री डॉ. यादव यह युग आतंकवाद का नहीं है, यह एक वाक्य काफी है भारत का संदेश समझने को: मुख्यमंत्री डॉ. यादव देश की जनता प्रधानमंत्री मोदी का आभार मानती है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहलगाम हमले में बहनों का सिंदूर उजाड़ने वालों का भारत ने किया हिसाब चुकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री की विकास यात्रा में कदम से कदम मिलाकर चलने को है तैयार प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रतिक्रिया भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नागरिकों को संबोधित करते हुए भारत की आतंकवाद के विरूद्ध नीति का उद्घोष किया है। भारत ने आपरेशन सिंदूर सिर्फ स्थगित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि यह युग युद्ध का नहीं है, लेकिन यह युग आतंकवाद का भी नहीं है। यह एक वाक्य भारत का संदेश समझने के लिए काफी है। भारत ने पहलगाम की घटना में जिन बहनों का सिंदूर उजड़ा उसका हिसाब पाकिस्तान से चुकता करने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत एक मजबूत अर्थ व्यवस्था बना है, साथ ही राष्ट्रवासियों ने धारा 370 को समाप्त होते देखा है। राष्ट्रहित से जुड़े ऐसे कठिन निर्णय प्रधानमंत्री मोदी ने लिए, जिनकी कल्पना नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि जो मार भारत ने पाकिस्तान पर मिसाइलों से की उससे कहीं अधिक मार आज प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों से हुई है और इस संबोधन ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सेना अध्यक्ष सहित अन्य दुश्मनों की जमीन खिसका दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्र को दिए गए संबोधन के बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि दुनिया बदलते दौर का भारत देख रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है और उन्हें आत्मविश्वास से भर दिया है। ऊर्जा से लबरेज कर दिया है। उन्होंने उत्साह और उमंग से सेनाओं का हौसला भी बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सक्षम नेतृत्व में सेना ने सिर्फ 5 दिन में जबरदस्त प्रतिकार करते हुए पाकिस्तान की कमर तोड़ने का कार्य किया है। आज प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों से यह स्पष्ट हो गया है कि आतंकवाद को भारत कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाते हुए यह भी कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को खाद-पानी देता रहा है। आतंकवादियों के जनाजे पर पाकिस्तान का झंडा चढ़ते हुए देखा गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने मेड इन इंडिया की दृष्टि से भारत की सर्वोच्च सुरक्षा का आव्हान किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि जब बात होगी तो पीओके (पाक ऑक्युपाईड कश्मीर) पर होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में न्यूक्लियर बम के नाम पर पाकिस्तान द्वारा ब्लैक मेल किया जाना असंभव है। प्रधानमंत्री मोदी के एक-एक शब्द से प्रत्येक भारतीय का सीना छप्पन इंच करने का कार्य किया है।  

प्रदेश में 13 मई से सभी यात्री और शैक्षणिक संस्था वाहनों की होगी चेकिंग

प्रदेश में 13 मई से सभी यात्री और शैक्षणिक संस्था वाहनों की होगी चेकिंग परिवहन विभाग ने जारी किये निर्देश भोपाल प्रदेश में यात्री बसों, शैक्षणिक संस्थानों की बसों और स्कूल बसों की सघन चेकिंग किये जाने का निर्णय लिया गया है। यह विशेष अभियान 13 मई से प्रदेश में एक साथ शुरू होगा। अभियान में पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल होंगे। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक और जिला परिवहन कार्यालय को निर्देश जारी किये गये हैं। जाँच अभियान में जिन बिंदुओं को शामिल किया गया है। उनमें – •सभी वाहनो में केन्द्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 118 अनुसार गति नियंत्रक लगा होना चाहिये। •सभी यात्री बसों में सभी वीएलटीडी डिवाइस लगा होना आवश्यक है। शैक्षणिक वाहनों में AIS 140 अनुरूप व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस (VLTD), केमरे तथा पेनिक बटन लगे हों। VLTD का परिवहन विभाग के सेन्ट्रल सर्वर से एन्टीग्रेशन अनिवार्यतः हो तथा वाहन में परिवहन किये जाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं सम्बंधित शैक्षणिक संस्था को इसका ऐक्सेस प्रदान करना भी आवश्यक होगा। •सभी वाहनो में प्रथम उपचार पेटी (फर्स्टएड बॉक्स) अनिवार्य रूप से रखा जाये। •एक अक्टूबर 2023 के बाद निर्मित शैक्षणिक वाहनो में केन्द्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 1250 के प्रावधान अनुसार AIS-135 अनुरूप FAPS लगा होना चाहिए तथा शेष शैक्षणिक वाहनों में वाहन अनुसार उचित मात्रा का अग्निशमन यंत्र लगा होना चाहिए। •वाहनों की खिड़कियों पर काले कॉच या परदे नहीं लगे होगें तथा वाहनो के अंदर की गतिविधि सदैव वाहन के बाहर से स्पष्ट रूप से दिखना चाहिये। •वाहन के साथ वैध बीमा प्रमाण-पत्र, फिटनेस प्रमाण-पत्र, परमिट होना अनिवार्य है। •यदि वाहन फिटनेस प्रमाण-पत्र होने के उपरांत अनफिट पाई जाती है तो फिटनेस जारीकर्ता अधिकारी / ATS के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। •वाहन चालक एवं परिचालक के पास वैध लाइसेंस होना चाहिए। •बस के सभी प्रकार के कर (टैक्स) पूर्ण रूप से जमा होना चाहिए। •बस के विरुद्ध पूर्व के चालान की जानकारी भी आवश्यक रूप से ली जाए। •बस में किसी भी प्रकार के ओवरलोड अर्थात परमिट से अधिक यात्री न हो। बसों में माल ले जाने की परंपरा बहुत अधिक बढ़ रही है इसकी सघन चेकिंग की जायेगी। निर्धारित मात्रा से अधिक माल का परिवहन यात्री बसों द्वारा न किया जाए। दोषी वाहन चालकों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जायेगी।  

मध्यप्रदेश 9 स्वर्ण, 5 रजत और 10 कांस्य सहित कुल 24 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर

खेलो इण्डिया यूथ गेम्स 2025 बिहार मध्यप्रदेश 9 स्वर्ण, 5 रजत और 10 कांस्य सहित कुल 24 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर आज मध्यप्रदेश ने अर्जित किया 04 कांस्य खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई भोपाल दिनांक 4 से 15 मई 2025 तक खेलो इण्डिया यूथ गेम्स 2025 का आयोजन बिहार में किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश के खिलाड़ी खेल का शानदार प्रदर्शन कर रहें है। प्रतियेागिता में मध्यप्रदेश 9 स्वर्ण, 5 रजत और 10 कांस्य सहित कुल 24 पदकांे के साथ पांचवें स्थान पर है। आज मध्यप्रदेश टीम ने वेटलिफ्टिंग, योग, एथेलेटिक्स (पोल वॉल्ट), एथेलेटिक्स (3000 मी.) में बेहतर खेल प्रदर्शन कर 01-01 कांस्य सहित कुल 04 पदक अर्जित किये। प्रतियोगिता में आज म.प्र. के खिलाड़ियों द्वारा खेले गये मुकाबलों में अर्जित पदकों की जानकारी का विस्तृत विवरण इस प्रकार है:-     वेटलिफ्टिंग:– हिमांशु कुशवाह ने 73 किग्रा. पुरूष वर्ग में स्नैच में 115 कि.ग्रा और क्लीन एण्ड जर्क 140 कि.ग्रा. सहित कुल 255 कि.ग्रा. भार उठाकर कांस्य पदक प्राप्त किया।     योगासनः- रिया ने टेªडिशनल योगासन इवेन्ट में 60.58 अंक प्राप्त कर कांस्य पदक अपने नाम किया।     पोल वॉल्ट:– आशीष कुमार यादव ने एथेलेटिक्स (पोल वॉल्ट) में 4.10 मी. छलांग लगाकर कांस्य पदक अर्जित किया।     एथेलेटिक्स (3000 मी.):- श्रृष्टि ने महिला वर्ग के 3000 मी. इवेन्ट मंे 10ः29.50 का समय लेकर कांस्य पदक प्राप्त किया।  दिनांक 13.5.2025 को एथेलेटिक्स, बॉक्सिंग, फेंसिंग, वेटलिफ्टिंग, कलरिपयट्टू, योगासन, कुश्ती, थांग-ता और हॉकी के मुकाबले खेले जायेंगे। प्रदेश के खेल मंत्री मान. विश्वास कैलाश सारंग ने बिहार में आयोजित खेलो इण्डिया यूथ गेम्स में प्रदेश के खिलाड़ियों के खेल प्रदर्शन की सराहना की है। उन्होंने पदक विजेता खिलाड़ियों बधाई देते हुये, खिलाड़ियों को और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्माणाधीन पीडब्ल्यूडी भवन का किया निरीक्षण

रीवा उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा में निर्माणाधीन पीडब्ल्यूडी भवन का निरीक्षण किया तथा इसको शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये। उन्होंने कोठी कम्पाउण्ड स्थित मनकामेश्वर मंदिर के सौन्दर्यीकरण कार्य का अवलोकन कर अद्यतन निर्माण प्रगति की जानकारी प्राप्त की तथा शीघ्रता से कार्य करने के निर्देश दिये।  

घरेलू क्रिकेट लीग में पहली बार DRS का इस्तेमाल, जून में होगी छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग

रायपुर छत्तीसगढ़ के क्रिकेट प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। आगामी जून महीने से CCPL यानी छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग के दूसरे सीजन का आगाज होने जा रहा है। पिछले सीजन की तुलना में इस बार कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ इसकी अंतिम तैयारियों में जुटा हुआ है। नवा रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की सुविधाओं को भी अपग्रेड किया जा रहा है, ताकि आयोजन की गुणवत्ता और दर्शकों का अनुभव दोनों ही बेहतर हो। बता दें कि CCPL में इस बार अंतरराष्ट्रीय मैचों की तर्ज पर DRS (डिसीजन रिव्यू सिस्टम) सिस्टम लागू किया जाएगा। यह अब तक केवल अंतरराष्ट्रीय मैचों और इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में देखने को मिलता था। इस सिस्टम के तहत, प्रत्येक टीम को तीन रिव्यू मिलेंगे, जिनका उपयोग वे ग्राउंड अंपायर के फैसले को चैलेंज करने के लिए कर सकते हैं। यह पहली बार है जब घरेलू क्रिकेट लीग में इस अत्याधुनिक तकनीकी प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे खेल के फैसले और भी निष्पक्ष और सटीक होंगे। BCCI पैनल के होंगे अंपायर, इंटरनेशनल कमेंटेटर करेंगे कमेंट्री CCPL में इस बार इंटरनेशनल कमेंटेटर्स की कमेंट्री होगी, जो पहले ही अंतरराष्ट्रीय मैचों में काम कर चुके हैं। लीग के लिए 10 अंतरराष्ट्रीय कमेंटेटरों की सूची तैयार की गई है, जिनमें से 3 से 4 कमेंटेटरों को फाइनल किया जाएगा। इसके साथ ही, बीसीसीआई पैनल के अंपायरों को इस लीग के मैचों में अपनी अंपायरिंग सेवा देने के लिए बुलाया जाएगा, जिससे मैचों की गुणवत्ता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के मीडिया प्रभारी राजेश दवे ने बताया कि हम छत्तीसगढ़ क्रिकेट प्रीमियर लीग का यह सीजन और बेहतर करने जा रहे हैं। इस बार डीआरएस सिस्टम, इंटरनेशनल कमेंटेटर और बीसीसीआई पैनल के अंपायर आयोजन में शामिल होंगे। दर्शकों के बैठने के लिए भी बेहतर व्यवस्था रहेगी। सीसीपीएल का स्टैंडर्ड बेहतर कर इसे एक ब्रांड बनाएंगे। इन 6 टीमों के बीच होगी भिड़ंत CCPL में पिछले सीजन की तरह इस बार भी 6 टीमें हिस्सा लेंगी। इन टीमों में रायपुर राइनोस, बिलासपुर बुल्स, सरगुजा टाइगर्स, बस्तर बाइसनस, रायगढ़ लायंस और राजनांदगांव पैंथर्स शामिल हैं। पिछले सीजन के फाइनल में रायपुर राइनोस ने बिलासपुर बुल्स को हराकर CCPL का खिताब अपने नाम किया था। नए खिलाड़ियों का भी होगा चयन CCPL के पिछले सीजन में टीम बनाने के लिए प्रदेशभर से 450 खिलाड़ियों को चुना गया था। इनमें से 280 खिलाड़ी शॉर्टलिस्ट हुए थे। इसके बाद फिर इनमें से 6 टीमों के लिए 120 खिलाड़ियों का चयन किया गया था, लेकिन इस बार उन खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा जिन्होंने पिछले सीजन में अच्छा प्रदर्शन किया। खराब प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को बाहर किया जा सकता है, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मौका मिलेगा। TV पर होगा लाइव प्रसारण, स्टेडियम में मिलेगी फ्री एंट्री गौरतलब है कि इस बार भी CCPL के सभी मैचों का प्रसारण सोनी टीवी पर किया जाएगा। दर्शकों के लिए इस बार स्टेडियम में फ्री एंट्री होगी और उनकी बैठने की सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा। स्टेडियम में आने वाले दर्शकों के लिए एक पास सिस्टम भी लागू किया जाएगा।

पाकिस्तान की मिसाइलें फुस्स, सीमावर्ती फलौदी के युवक मलबे के साथ सेल्फी लेकर बना रहे मजाक

जोधपुर पहलगाम हमले के बाद आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर से लेकर गुजरात तक फैली भारत की हजारों किलोमीटर लंबी सीमा पर स्थित महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और आम नागरिक इलाकों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए। राजस्थान में तीन रातों तक पाकिस्तान की ओर से लगातार एक ही तरह की बड़ी मिसाइल दागी गई। ये वही मिसाइलें थीं, जिन पर पाकिस्तान अक्सर नाज करता है और जिनके नाम गौरी, गजनवी, अब्दाली, नस्र और शाहीन जैसे रखकर उन्हें दुनिया की ताकतवर मिसाइलों में गिनाता है लेकिन भारतीय सेना ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से इन सभी मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया। 9 मई को दोपहर में पाकिस्तान की ओर से दागी गई कई मिसाइलें सीमावर्ती फलौदी क्षेत्र के गांवों के खेतों में आकर गिरीं। हालांकि प्रशासन और सेना ने पहले ही चेतावनी दी थी कि मिसाइल या ड्रोन के मलबे के पास न जाएं, क्योंकि इनमें लगे वारहेड या विस्फोटक कई बार सक्रिय अवस्था में रह जाते हैं और अचानक फट सकते हैं, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है लेकिन इन चेतावनियों को दरकिनार करते हुए कुछ स्थानीय युवकों ने इन मिसाइलों को एक तरह से खिलौना ही बना डाला। सेना और प्रशासन के मौके पर पहुंचने से पहले ही कुछ ग्रामीणों ने मिसाइलों को उलट-पलटकर देखा, किसी ने कहा कि अगर इसमें कुछ काम की चीज हो तो निकाल लो तो किसी ने इनके साथ सेल्फी लेना शुरू कर दिया। कुछ युवक तो इन मिसाइलों को सामान्य वस्तु समझकर ट्रैक्टर-ट्रॉली या बोलेरो कैंपर में रखकर दूसरी जगह ले गए। हालांकि बाद में भारतीय वायुसेना के जवान मौके पर पहुंचे और मिसाइलों के मलबे को जब्त कर लिया लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान की मिसाइलों का भारत के नागरिकों पर कोई डर नहीं है। फलौदी के युवाओं ने अपने व्यवहार से यह दिखा दिया कि उन्हें पाकिस्तान के मिसाइलों से कोई भय नहीं, भले ही उनके नाम शाहीन, गौरी या गजनवी क्यों न हों। हमारी सेना इतनी सक्षम हैं कि पाकिस्तान की दागी मिसाइलें भारत की धरती पर कोई नुकसान नहीं कर सकतीं।

नागरिकों की सुरक्षा के लिये वाहनों की फिटनेस की जाँच के लिये चलाएं अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नागरिकों की सुरक्षा के लिये वाहनों की फिटनेस की जाँच के लिये चलाएं अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पुलिस महानिदेशक को दिये गये निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में नागरिकों की सुरक्षा के लिये सड़क पर चलने वाले सभी वाहनों विशेषकर परिवहन वाहनों के आवश्यक कागजों समेत फिटनेस, परमिट और रजिस्ट्रेशन वैधता की जाँच के लिये 13 मई से विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा को परिवहन विभाग के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई करने के लिये कहा है। निर्देश में कहा गया है कि आवश्यक कागज न होने पर दोषी वाहन चालकों और मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाये।  

दुनिया की सबसे महंगी कार, सिर्फ इन 3 धनकुबेरों के पास

नई दिल्ली दुनिया में कई अमीर लोग हैं, जिनके पास कई लग्जरी कारें होती हैं. इनमें से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें नई-नई कारें खरीदने का बहुत शौक होता है और वे लग्जरी कारों का कलेक्शन रखते हैं, लेकिन क्या आपने कभी यह जानने की कोशिश की है कि दुनिया की सबसे महंगी कार कौन सी है और किन लोगों के पास यह कार है? आज हम आपको इसी बारे में जानकारी देने जा रहे हैं. आइए जानते हैं. जब भी लग्जरी कारों का नाम आता है, तो सबसे पहले रोल्स रॉयस का नाम दिमाग में आता है. रोल्स रॉयस एक ब्रिटिश कार मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है, जिसकी कारें शानदार और बेहद महंगी होती हैं. दुनिया की सबसे महंगी कार भी रोल्स रॉयस की ही है, जिसका नाम है रोल्स रॉयस बोट टेल. यह कार दुनिया की सबसे महंगी और लग्जरी कार मानी जाती है. अगर हम दुनिया की सबसे महंगी कार रोल्स रॉयस बोट टेल की कीमत की बात करें, तो यह इतनी महंगी है कि किसी का भी होश उड़ सकता है. इस कार की कीमत है 28 मिलियन डॉलर, यानी करीब 239 करोड़ रुपये. इसका नाम और डिजाइन क्लासिक याच (नाव) से मिलता-जुलता है, इसलिए इसे बोट-टेल नाम दिया गया है. रोल्स रॉयस कंपनी ने अपनी बोट टेल कार की सिर्फ 3 यूनिट्स बनाई हैं, जिनके मालिक दुनिया में केवल तीन लोग हैं. इनमें शामिल हैं:     रैपर जेड और उनकी पत्नी पॉप आइकन बियॉन्से.     अर्जेंटीना के फुटबॉलर माउरो इकार्डी.     पर्ल इंडस्ट्री के एक उद्योगपति, जिनका नाम सार्वजनिक नहीं है. यह कार इन तीनों के पास है, और यह इनकी खास लक्जरी लाइफस्टाइल का प्रतीक है.

‘ब्रह्मोस’ मिसाइल जमीन, हवा और समुद्र से की जा सकती है लॉन्च

   नई दिल्ली भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने नूर खान (चकलाला) में एयरबेस सहित पाकिस्तान के कई प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों और एयरबेसों को निशाना बनाया। सूत्रों का कहना है कि भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल तब किया, जब पाकिस्तान ने अपनी फतह 11 बैलिस्टिक मिसाइलों से नई दिल्ली को निशाना बनाने की कोशिश की। हालांकि, फतह को हरियाणा के सिरसा के पास एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया था।   सूत्रों ने बताया कि क्रूज मिसाइल का सामरिक उपयोग पाकिस्तान की परमाणु ताकत की छवि को कमजोर करने के लिए किया गया था। यह एक ऐसा मोड़ था, जिसने पाकिस्तान को झकझोर कर रख दिया और सेना प्रमुख असीम मुनीर सहित सैन्य नेतृत्व को कदम पीछे खींचने पर मजबूर किया। एक दिन पहले भारत ने लाहौर में वायु रक्षा प्रणाली पर हमला किया था। इससे पाकिस्तान की कमजोरियां उजागर हो गई थीं कि भारत की मिसाइलें उसके क्षेत्र में बहुत अंदर तक सटीकता से लक्ष्य को भेद सकती हैं। ब्रह्मोस समेत भारत की मिसाइलों ने रफीकी, मुरीदके, नूर खान, रहीम यार खान, सुक्कुर, चुनियन, स्कार्दू, भोलारी, जैकबाबाद में भारी नुकसान पहुंचाया। ‘दागो और फिर भूल जाओ’ का सिद्धांत ब्रह्मोस दो-चरणीय मिसाइल है। इसे रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इसका नाम दो नदियों भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा से मिलाकर रखा गया है। यह भारत-रूस साझेदारी का प्रतीक भी है। मिसाइल ठोस ईंधन बूस्टर के साथ लॉन्च होती है जो उड़ान भरने के बाद अलग हो जाता है। इसके बाद तरल ईंधन से चलने वाला रैमजेट इंजन इसे मैक 3 की गति से आगे बढ़ाता है। 10 मीटर की ऊंचाई पर भी हमला कर सकती है मिसाइल यह 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकती है और जमीन से 10 मीटर की ऊंचाई पर भी हमला कर सकती है। इसे दागो और भूल जाओ के सिद्धांत पर डिजाइन किया गया है। एक बार लॉन्च होने के बाद इसे किसी और मार्गदर्शन की जरूरत नहीं होती। मिसाइल का कम रडार सिग्नेचर और उच्च गतिज ऊर्जा के कारण इसे रोकना बेहद कठिन हो जाता है। 290 किमी है मानक रेंज ब्रह्मोस मिसाइलों की मानक मारक क्षमता 290 किलोमीटर है। हालांकि, हाल ही में 450 किलोमीटर से अधिक और 800 किलोमीटर तक की विस्तारित मारक क्षमता वाले संस्करणों का सफलतापूर्वक परीक्षण भी किया गया है। भविष्य के वेरिएंट का लक्ष्य 1,500 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्यों पर हमला करना है। 24 वर्ष पहले हुआ था ब्रह्मोस का पहला परीक्षण ब्रह्मोस का पहला परीक्षण 12 जून, 2001 हुआ था। भारतीय नौसेना ने 2005 में आईएनएस राजपूत पर अपना पहली ब्रह्मोस प्रणाली शामिल की थी। भारतीय सेना ने 2007 में अपनी रेजिमेंट के साथ इसे शामिल किया और बाद में वायुसेना ने सुखोई-30एमकेआई विमान से हवाई-लॉन्च वाले संस्करण को शामिल किया। 2025 तक इसके दो संस्करण सेवा में हैं।  

रायपुर, भिलाई समेत आठ निकायों में बीपीसीएल और गेल कंपनी लगाएगी प्लांट

   रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु  देव  साय की पहल पर छत्तीसगढ़ के सभी नगरीय निकायों में जैव अपशिष्ट सह  कृषि अपशिष्ट के प्रसंस्करण के  लिए बायो-सीएनजी प्लांट लगाए जाएंगे। रायपुर, भिलाई समेत आठ निकायों में जमीन का चिन्हांकन किया जा चुका है। इन स्थानों पर बीपीसीएल और गेल 800 करोड़ का प्लांट लगाएंगे।  उल्लेखनीय  है  कि  पिछले 17 अप्रैल 2025  को  मुख्यमंत्री   श्री  विष्णु  देव  साय की  अध्यक्षता  में  आयोजित कैबिनेट की  बैठक  में  बायो- सीएनजी संयंत्रों के  लिए  सार्वजानिक  उपक्रमों  को  एक  रुपये  प्रति  वर्गमीटर  की  रियायती  दर  पर  भूमि  आबंटित किए  जाने  का  निर्णय  लिया  गया  था। कैबिनेट के निर्णय  के  बाद  नगरीय  प्रशासन  विभाग  द्वारा सभी  कलेक्टरों  को    जमीन  आबंटन  को  लेकर  निर्देश  जारी  कर  दिए  गए  हैं।   बीपीसीएल और गेल कंपनी को एक रुपए वर्गमीटर में 10 एकड़ जमीन 25 साल की लीज पर दी जाएगी। जैव अपशिष्ट सह  कृषि अपशिष्ट का  प्रसंस्करण इन संयंत्रों  में  किया  जाएगा। भारत में उपयोग होने वाले सीएनजी का लगभग 46 फीसदी वर्तमान में आयात किया जाता है और सरकार का लक्ष्य बायो-सीएनजी के उत्पादन और खपत के माध्यम से इस निर्भरता को कम करना है। बायो सीएनजी, जिसे बायो कंप्रेस्ड नेचुरल गैस भी कहा जाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से वाहनों के ईंधन आऔर घरेलू ऊर्जा के रूप में किया जाता है। साथ ही सीएनजी वाहनों को ईंधन देने के लिए, एलपीजी के विकल्प के रूप में खाना पकाने और हीटिंग के लिए, बिजली उत्पादन के लिए, कुछ उद्योगों में हीटिंग और अन्य प्रक्रियाओं के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का अनुमान है कि भारत में बायो-सीएनजी उत्पादन की क्षमता लगभग 70 मिलियन मीट्रिक टन है। इसका उत्पादन बाजार की मांग के अनुरूप है, जिससे यह आर्थिक रूप से पूरी तरह व्यवहारिक है। क्या है बायोसीएनजी? बायोसीएनजी का उत्पादन जैविक अपशिष्ट पदार्थों जैसे पशु अपशिष्ट, खाद्य अपशिष्ट और औद्योगिक कीचड़ को बायोगैस और डाइजेस्टेट में तोड़कर किया जाता है। यह प्रक्रिया एक सीलबंद, ऑक्सीजन रहित टैंक में होती है, जिसे एनारोबिक डाइजेस्टर भी कहा जाता है। फिर बायोगैस को संसाधित किया जाता है, जिससे 95 फीसदी शुद्ध मीथेन गैस प्राप्त होती है। इस प्रक्रिया से उच्च गुणवत्ता वाला सांद्रित तरल उर्वरक प्राप्त होता है। महीनेभर के भीतर टेंडर की प्रक्रिया की जाएगी शुरू नगरीय प्रशासन  विभाग  के  अनुसार प्रदेश के आठ स्थानों पर जमीन का चिन्हांकन कर लिया गया है। इसके लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। एक महीने के भीतर ही इसका टेंडर फाइनल करने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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