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मध्‍यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड 559 Student Trainee पदों के लिए भर्ती, मिलेगा 10 हजार रुपए स्टाइपेंड

जबलपुर मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी प्रदेश के 559 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण का मौका देगी। इस एकवर्षीय प्रशिक्षण में युवाओं को स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। कम्पनी ने यह पहल मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना के तहत की है। इन्सके लिए आवेदन जमा कराए जाएंगे।  10 हजार रुपए तक स्टाइपेंड कम्पनी की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार इंजीनियरिंग अथवा नॉन-इंजीनियरिंग आईटीआई व स्नातक एवं डिप्लोमा इंजीनियरिंग के अभ्यर्थी आवेदन कर सकेंगे। अधिकतम आयु 29 वर्ष के युवाओं का चयन प्रशिक्षण के लिए हो जाने के बाद साढ़े आठ हजार रुपए से लेकर 10 हजार रुपए तक स्टाइपेंड दिया जाएगा। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के मुख्य अभियंता मानव संसाधन व प्रशासन ने जानकारी दी कि एकवर्षीय प्रशिक्षण हेतु वर्तमान में कुल 559 रिक्तियां हैं। यह रिक्तियां जबलपुर, सारनी, बिरसिंगपुर, चचाई, खंडवा, मंदसौर, नागपुर, सिरमौर, उमरिया, अशोकनगर, शहडोल, रीवा, सतना, शिवपुरी में हैं। मेरिट आधार में चयन इंजीनियरिंग अथवा नॉन इंजीनियरिंग में प्राप्तांकों के प्रतिशत के आधार पर वरीयता क्रम (मेरिट आधार) में चयन किया जाएगा। समान अंक होने पर अधिक आयु वाले अभ्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। आवश्यकता होने पर वेटिंग लिस्ट से चयन किया जायेगा। चयन होने पर चयनित अभ्यार्थी को मुख्यमंत्री सीखों कमाओ योजना के आनलाईन पोर्टल पर आनलाईन कांट्रैक्ट ऑफर किया जाएगा। मध्‍यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड एक पूर्ण स्‍वामित्‍व वाली कंपनी है, जो कि मध्‍यप्रदेश शासन के अधीन मध्‍यप्रदेश राज्‍य में विद्युत उत्‍पादन में क्रियाशील है। यह मध्‍यप्रदेश राज्‍य विद्युत मण्‍डल की उत्‍तरवर्ती कंपनी है। यह कंपनी संचारण एवं संधारण के साथ ही मध्‍यप्रदेश राज्‍य में विद्युत उत्‍पादन क्षमता वृद्धि हेतु नये विद्युत गृहों का निर्माण भी कर रही है. मध्‍य्रप्रदेश राज्‍य में विद्युत क्षेत्र सुधार कार्यक्रम लागू करने के फलस्‍वरूप म.प्र.शासन द्वारा म.प्र.पा.जन.कं.लि. का गठन किया गया । कंपनी द्वारा विद्युत उत्‍पादन संबंधी गतिविधि का दायित्‍व म.प्र.रा.वि.मं. से अधिग्रहीत किया गया । कंपनी म.प्र.शासन की पूर्ण स्‍वामित्‍व की सार्वजनिक क्षेत्र की एक इकाई है । कंपनी का प्रादुर्भाव दिनांक 22.11.2001 को हुआ । कंपनी द्वारा व्‍यावसायिक क्रियाकलाप संबंधी प्रमाण पत्र दि.16.07.2007 को प्राप्‍त किया गया। कंपनी का पंजीकृत कार्यालय शक्ति भवन, रामपुर जबलपुर में स्थित है । कंपनी की प्राधिकृत पूंजी वर्तमान में रू. 10,000 करोड़ है, जो कि रू. 100/- प्रत्‍येक के 10,000,00,000 करोड़ शेयरों में विभक्‍त हैं। वर्तमान में कंपनी के अंशदान प्रदत्‍त पूंजी रू..5325,54,68,800 (रू.पॉंच हजार तीन सौ पच्‍चीस करोड़ चौवन लाख अड़सठ हजार आठ सौ मात्र) है, जो कि रू. 100/- प्रत्‍येक के 5,3255,4,688 शेयरों में विभक्‍त है । MPPGCL पता संचालन पावर हाउस क्रमांक 2 अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई जिला अनुपपुर (म . प्र ) – 484220 फ़ोन: 07659263464 वेबसाइट: http://www.mppgcl.mp.gov.in/

अगस्त 2025 में मेट्रो का कमर्शियल रन यात्रियों के साथ होगा शुरू, स्टेशन से 500 मीटर दायरे में मिलेगी पार्किंग

भोपाल  मेट्रो ट्रेन स्टेशन पहुंचने के बाद वाहन कहां पार्क करें। इसके लिए अब संबंधित स्टेशन के पास के क्षेत्रों में पार्किंग स्थल की तलाश की जा रही है। ये पार्किंग स्थल स्टेशन से 500 मीटर के दायरे में होंगे। इस माह आखिर तक इसके लिए योजना तय होगी। इसका लाभ ये होगा कि लोग अपने वाहन से स्टेशन तक पहुंचेंगे, स्टेशन से कुछ दूरी पर वाहन पार्क कर मेट्रो में बैठ जाएंगे। कंप्रेहेंसिव मोबिलिटी प्लान के तहत मेट्रो रेल कारपोरेशन को इसके लिए शासन ने निर्देश दिए थे। इसी प्लान में इन पार्किंग स्थलों को भी शामिल करना है। इसलिए जरूरी मेट्रो ट्रेन(Bhopal Metro) के सामने अब यात्रियों की चुनौती होगी। भोपाल में कमजोर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की वजह से लोगों को बाजार, कार्यालय के लिए निजी वाहनों का उपयोग करना ही होता है। ऐसे में स्टेशन से 500 मीटर दायरे में भी पार्किंग मिली तो वे लाभ लेंगे, जिससे मेट्रो को यात्री मिलेंगे। एमडी एस कृष्ण चैतन्य का कहना है कि मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को लेकर हम लगातार काम कर रहे हैं। यात्रियों को मेट्रो तक लाने की प्लानिंग भी अभी से की जा रही। गौरतलब है कि अगस्त 2025 में मेट्रो का कमर्शियल रन यानि यात्रियों के साथ सफर शुरू करने की योजना है। भोपाल में आठ स्टेशन के साथ 6.22 किमी की लाइन तैयार लगभग तैयार है। ● एस मेट्रो स्टेशन(Bhopal Metro) के लिए शक्तिनगर व साकेतनगर में पार्किंग विकसित होगी। ● इसके बाद अलकापुरी स्टेशन के लिए भी शक्तिनगर की ओर पार्किंग क्षेत्र रहेगा। ● डीआरएम ऑफिस स्टेशन में भी रेलवे कॉलोनी व उससे लगे क्षेत्र में पार्किंग तय करेंगे। ● रानी कमलापति के लिए रेलवे की पार्किंग के साथ सात नंबर अरेरा कॉलोनी या फिर मानसरोवर कॉप्लेक्स के पास जगह तय होगी। ● प्रगति स्टेशन में एमपी नगर के सरगम टॉकीज वाले क्षेत्र में पार्किंग होगी। ● बोर्ड ऑफिस वालों के लिए मल्टीलेवल पार्किंग में जगह तय कराएंगे। यहां ज्योति की ओर अंडरग्राउंड पार्किंग को भी खोला जा सकता है। ● केंद्रीय विद्यालय स्टेशन की पार्किंग के लिए अरेरा हिल्स व सुभाष नगर के लिए डिपो की तरफ पार्किंग तय की जाएगी।  

एम्स भोपाल में एक और नई सुविधा शुरु, 3 डी प्रिंटिंग तकनीक से होगा हड्डी रोग का निशुल्क इलाज

भोपाल  एम्स भोपाल में एक और नई सुविधा शुरु हो गई है, जो अब तक देश के चुनिंदा अस्पतालों में ही थी. इस सुविधा के शुरु होने से एम्स भोपाल में हड्डी रोग के मरीजों का अधिक सटीकता के साथ इलाज किया जा सकेगा. इसमें ऑपरेशन का खर्च निशुल्क रहेगा और मरीज को ज्यादा दवाइयां भी नहीं लेनी पड़ेगी. एम्स भोपाल के डाक्टरों ने बताया कि, इस तकनीक से हड्डी रोग के इलाज में नई क्रांति आएगी. मध्य प्रदेश समेत आसपास के लोगों को उपचार की बेहतर सुविधा मिलेगी. 3 डी प्रिंटिंग तकनीक से किया सफल इलाज एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर अजय सिंह ने बताया कि, ”ऑर्थोपेडिक्स विभाग में अब इन-हाउस 3 डी प्रिंटिंग सुविधा की शुरुआत की गई है, जो चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. हाल ही में इस तकनीक का उपयोग करते हुए एक डिस्टल फीमर मैलयून के जटिल मामले का सफलतापूर्वक सर्जिकल सुधार किया गया है. इस प्रक्रिया के लिए रोगी-विशिष्ट 3-डी प्रिंटेड कटिंग गाइड का निर्माण एम्स भोपाल में ही किया गया, और यह पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किया गया, जिससे मरीज पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ा.” पेशेंट फर्स्ट के आधार पर होगा इलाज 3-डी प्रिंटिंग तकनीक की मदद से हड्डियों की सर्जरी अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी बनती है. यह मरीजों को उनकी विशेष शारीरिक संरचना के अनुसार कस्टमाइज्ड उपचार उपलब्ध कराती है, जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में बेहतर परिणाम देती है. इस तकनीक का उपयोग भविष्य में कई अन्य जटिल मामलों में भी किया जाएगा. प्रो. सिंह ने बताया कि, ”एम्स भोपाल में इन-हाउस 3 डी प्रिंटिंग सुविधा की शुरुआत चिकित्सा विज्ञान में एक बड़ी प्रगति है. यह तकनीक हमें हर मरीज के लिए व्यक्तिगत और सटीक उपचार की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करती है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सुविधा मरीजों को बिना किसी आर्थिक बोझ के उपलब्ध कराई जा रही है, जो हमारे पेशेंट फर्स्ट दृष्टिकोण को दर्शाती है.” 3 डी प्रिंटिंग तकनीकी से ये होगा फायदा अब तक हड्डी रोग की सर्जरी में धातु प्रत्यारोपण और दान की गई हड्डी का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें सर्जन मरीज के शारीरिक रचना के अनुसार उसमें ऊतक प्रदान करते हैं. लेकिन कई बार यह मरीज की शारीरिक संरचना के अनुसार फिट नहीं होता है. अब इन समस्याओं को दूर करने के लिए 3 डी प्रिंटर तकनीकी का इस्तेमाल किए जाने से हड्डी की जगह धातु की प्लेट लगाने की जरुरत नहीं होती. इससे संक्रमण का खतरा भी नहीं रहेगा.

मुख्यमंत्री मोहन यादव मझौली में एक कार्यक्रम में लाडली बहना योजना की 24वीं किस्त की राशि जारी करेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश की महिलाओं के लिए एक अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 24वीं किस्त 15 मई 2025 को जारी होगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव सीधी जिले के मझौली में एक कार्यक्रम में यह राशि जारी करेंगे। इस योजना के तहत, लाखों बहनों के खातों में ₹1250 की अगली किस्त डाली जाएगी। साथ ही, उज्ज्वला योजना के तहत गैस सब्सिडी की राशि भी 25 लाख से ज्यादा महिलाओं के खातों में भेजी जाएगी। 24वीं किस्त होगी जारी लाडली बहना योजना की 24वीं किस्त 15 मई 2025 को जारी की जाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव सीधी जिले के मझौली में राज्य स्तरीय सम्मेलन में योजना की राशि जारी करेंगे। इस दिन लाखों बहनों के खाते में ₹1250 की किस्त ट्रांसफर की जाएगी। सीधी में तैयारी तेज मुख्यमंत्री लाडली बहना सम्मेलन की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। प्रशासनिक स्तर पर इसकी पुष्टि हो चुकी है। सीएम मोहन यादव लाडली बहनों से बात भी करेंगे। उज्ज्वला योजना के तहत गैस सब्सिडी की राशि भी 25 लाख से ज्यादा महिलाओं के खातों में ट्रांसफर की जाएगी। पहले 10 तारीख को आती थी राशि लाडली बहना योजना की राशि पहले हर महीने 10 तारीख को आती थी। सरकार ने फैसला किया है कि हर महीने की 15 तारीख को लाडली बहनों को किस्त की राशि दी जाएगी। अप्रैल में 16 तारीख को 23वीं किस्त भेजी गई थी। अब मई में 15 तारीख को 24वीं किस्त जारी होने जा रही है। इस योजना के तहत महिलाओं हर महीने ₹1250 की आर्थिक मदद मिल रही है। नहीं जुड़ रहे नए नाम वहीं, लाडली बहना योजना की राशि से महिलाओं की जिंदगी में बदलाव आ रहे हैं। हालांकि योजना शुरू होने के बाद से अब तक लाभार्थियों की संख्या घटते जा रहे हैं। वहीं, नए नाम अभी इस योजना में नहीं जोड़े जा रहे हैं। अब योजना की शुरुआत के दो साल हो गए हैं लेकिन नए नाम नहीं जोड़े गए हैं। कब हुई थी शुरुआत मध्य प्रदेश सरकार की ओर से तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना की शुरुआत की. इसकी घोषणा 28 जनवरी 2023 को हुई थी जिसे 5 मार्च से लागू किया गया. इसके तरह हर महीने राज्य की महिलाओं को 1250 रुपये उनके खाते में दिए जाते हैं. सरकार ने इसे महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक स्वावलम्बन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है. योजना का लाभ पाने के लिए क्या हैं शर्तें? महिला मध्य प्रदेश की स्थायी निवासी हो. शादीशुदा हो या विधवा, तलाकशुदा महिलाएं इसमें शामिल हैं. आवेदक की आयु 21 वर्ष से 60 वर्ष के बीच की हो. बहरहाल, महिलाओं के खाते में 24वीं किस्त सीएम मोहन यादव ट्रांसफर करने वाले हैं. बता दें कि यह राज्य की सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक है. इस योजना की चर्चा पूरे देश में होती है. कई राज्यों ने मध्य प्रदेश की तर्ज पर अपने-अपने राज्यों की बहनों के लिए इस तरह की योजनाओं की शुरुआत की है.

ऑपरेशन सिंदूर भारतीय नौसेना के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ, कराची के निकट अरब सागर में 36 युद्धपोतों की तैनाती

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में सैन्य शक्ति प्रदर्शन को केंद्र में ला दिया है. ऑपरेशन सिंदूर, जिसे मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया, भारतीय नौसेना के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ. इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने कराची के निकट अरब सागर में 36 युद्धपोतों की तैनाती की, जिसमें स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत, 7 विध्वंसक, 7 फ्रिगेट, पनडुब्बियां और तेज हमलावर नौकाएं शामिल थीं. यह तैनाती भारत की समुद्री ताकत का शानदार प्रदर्शन थी, जिसने पाकिस्तान को रक्षात्मक स्थिति में धकेल दिया. ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकी हमले ने भारत को निर्णायक कार्रवाई के लिए प्रेरित किया. इस हमले को पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों से जोड़ा गया. जिसके बाद भारत ने त्रि-आयामी दबाव (सेना, वायुसेना और नौसेना) के जरिए जवाबी कार्रवाई शुरू की. ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकी ठिकानों को नष्ट करना. पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देना था कि भारत किसी भी आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब दे सकता है. इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने कराची के निकट अरब सागर में अभूतपूर्व तैनाती की. इस तैनाती ने पाकिस्तान नौसेना को पूरी तरह से निष्क्रिय कर दिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया. भारतीय नौसेना की तैनाती: एक ऐतिहासिक प्रदर्शन 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट और ऑपरेशन पायथन के दौरान कराची बंदरगाह पर हमला करने के लिए केवल 6 युद्धपोतों का उपयोग किया था. उस हमले ने पाकिस्तान की समुद्री रसद को तबाह कर दिया था. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में, भारतीय नौसेना ने 36 युद्धपोतों की तैनाती की जो 1971 की तुलना में छह गुना अधिक है. 1. INS विक्रांत और कैरियर बैटल ग्रुप INS विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत, इस तैनाती का केंद्रबिंदु था. 40,000 टन का यह युद्धपोत मिग-29K लड़ाकू विमान, कामोव हेलीकॉप्टर और उन्नत हवाई चेतावनी प्रणालियों से लैस है. कैरियर बैटल ग्रुप: विक्रांत के साथ 8-10 युद्धपोतों का एक समूह तैनात किया गया, जिसमें विध्वंसक, फ्रिगेट और सहायक जहाज शामिल थे. इस समूह ने अरब सागर में कराची के निकट एक अभेद्य समुद्री दीवार बनाई, जिसने पाकिस्तानी नौसेना और वायुसेना को तट पर ही सीमित कर दिया. रणनीतिक प्रभाव: मिग-29K विमानों ने हवाई निगरानी और हमले की क्षमता प्रदान की, जबकि हेलीकॉप्टरों ने पनडुब्बी-विरोधी युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 2. सात विध्वंसक: बहुआयामी ताकत भारतीय नौसेना ने सात विध्वंसक तैनात किए, जो ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (MRSAM) और वरुणास्त्र भारी टॉरपीडो से लैस थे. ये विध्वंसक समुद्री सतह, हवा और पनडुब्बी-विरोधी लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम थे. ब्रह्मोस मिसाइल, जो 450 किमी की रेंज और 2.8 मैक की गति से हमला कर सकती है. कराची बंदरगाह और अन्य रणनीतिक लक्ष्यों को तुरंत नष्ट करने की क्षमता रखती थी. उदाहरण: कोलकाता-श्रेणी के विध्वंसक जैसे INS कोलकाता और INS चेन्नई, इस तैनाती में शामिल थे, जो अपनी उन्नत रडार और हथियार प्रणालियों के लिए जाने जाते हैं. 3. सात स्टील्थ फ्रिगेट: चपलता और शक्ति सात स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट, जिनमें हाल ही में शामिल INS तुशिल भी तैनात की गईं. ये फ्रिगेट उन्नत रडार, मिसाइल प्रणालियों और स्टील्थ तकनीक से लैस थीं, जो हवाई और समुद्री खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकती थीं. इन फ्रिगेट्स ने पश्चिमी तट के साथ एक रक्षात्मक और आक्रामक समुद्री दीवार बनाई, जिसने पाकिस्तानी नौसेना को कोई जवाबी कार्रवाई करने से रोक दिया. INS तुशिल: यह नवीनतम तलवार-श्रेणी का फ्रिगेट है, जिसे रूस के सहयोग से भारत में निर्मित किया गया और 2024 में नौसेना में शामिल किया गया. 4. पनडुब्बियां: अदृश्य खतरा अनुमानित छह पनडुब्बियां, जिनमें परमाणु-संचालित INS अरिहंत और पारंपरिक स्कॉर्पीन-श्रेणी की पनडुब्बियां (जैसे INS कलवारी) शामिल थीं ने अरब सागर में गुप्त रूप से संचालन किया. ये पनडुब्बियां स्टील्थ ऑपरेशन्स में माहिर थीं. पाकिस्तानी नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ संभावित हमलों के लिए तैयार थीं. रणनीतिक महत्व: INS अरिहंत की परमाणु मिसाइल क्षमता ने भारत की दूसरी हमले की क्षमता (second-strike capability) को मजबूत किया, जो परमाणु निरोध में महत्वपूर्ण है. 5. तेज हमलावर नौकाएं और मिसाइल बोट कई तेज हमलावर नौकाएं और मिसाइल बोट भी तैनात की गईं, जो त्वरित और सटीक हमलों के लिए डिज़ाइन की गई थीं. ये छोटे लेकिन घातक जहाज कराची बंदरगाह जैसे लक्ष्यों पर तुरंत हमला करने में सक्षम थे. इनकी तैनाती ने भारतीय नौसेना की ताकत को और बढ़ाया, जिससे कुल युद्धपोतों की संख्या 36 तक पहुंच गई. पाकिस्तानी नौसेना की स्थिति: रक्षात्मक मुद्रा पाकिस्तानी नौसेना की तुलना में भारतीय नौसेना की तैनाती कहीं अधिक प्रभावशाली थी. पाकिस्तान के पास वर्तमान में 30 से कम युद्धपोत हैं, जिनमें चार चीनी-निर्मित टाइप 054A/P फ्रिगेट, कुछ पुरानी फ्रिगेट, और सीमित पनडुब्बियां शामिल हैं.ऑपरेशन सिंदूर के दौरानपाकिस्तानी नौसेना के जहाज मुख्य रूप से कराची बंदरगाह के भीतर या तट के बहुत करीब सीमित रहे. NAVAREA चेतावनी: भारतीय नौसेना की भारी तैनाती के डर से पाकिस्तान ने समुद्री क्षेत्र में NAVAREA (Navigational Area) चेतावनी जारी की, जिसमें संभावित नौसैनिक हमले की आशंका जताई गई. पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: पाकिस्तानी नौसेना ने दावा किया कि उनकी सतर्कता ने भारतीय नौसेना को उनके जल क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका. हालांकि, भारतीय नौसेना ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल निवारक मुद्रा बनाए रखना था, न कि सक्रिय हमला करना. सीमित क्षमता: पाकिस्तानी नौसेना की कमजोर समुद्री ताकत और पुराने उपकरणों ने उसे भारतीय नौसेना के सामने जवाबी कार्रवाई करने में असमर्थ बना दिया. अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रभाव भारतीय नौसेना की इस विशाल तैनाती ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रभाव छोड़े… समुद्री यातायात पर असर: कराची के आसपास उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के कारण अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों को अपने मार्ग बदलने पड़े। इससे पाकिस्तान की समुद्री अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा. वैश्विक ध्यान: इस तैनाती ने वैश्विक शक्तियों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन का ध्यान आकर्षित किया. भारत की समुद्री ताकत ने हिंद महासागर क्षेत्र में इसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया. पाकिस्तान पर दबाव: भारतीय नौसेना की तैनाती ने पाकिस्तान को न केवल सैन्य, बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चों पर भी दबाव … Read more

Russia और China मिलकर चांद पर बनाएंगे Nuclear Power … संयंत्र बनाने की डील तय

मॉस्को चीन और रूस ने चंद्रमा पर एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो 2036 तक पूरा होने की उम्मीद है. यह संयंत्र अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान स्टेशन (ILRS) को ऊर्जा प्रदान करेगा, जिसका नेतृत्व चीन और रूस संयुक्त रूप से कर रहे हैं. यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने 2026 के बजट प्रस्ताव में चंद्रमा पर एक कक्षीय स्टेशन की योजना को रद्द करने की बात कही है. यह कदम चीन और रूस की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को और मजबूत करता है, जबकि अमेरिका की आर्टेमिस कार्यक्रम में देरी और बजट कटौती ने इसे चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. चीन-रूस का चंद्र परमाणु संयंत्र: एक क्रांतिकारी कदम चीन और रूस ने हाल ही में एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत वे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक स्थाई, मानव-नियंत्रित चंद्र आधार (लूनर बेस) स्थापित करने के लिए एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाएंगे. यह संयंत्र ILRS को ऊर्जा प्रदान करेगा, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और दीर्घकालिक मानव रहित संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें भविष्य में मानव उपस्थिति की संभावना भी शामिल है. निर्माण प्रक्रिया: रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के महानिदेशक यूरी बोरिसोव के अनुसार, इस संयंत्र का निर्माण “मानव उपस्थिति के बिना” स्वचालित रूप से किया जाएगा. यह तकनीकी रूप से कैसे संभव होगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन बोरिसोव ने दावा किया कि तकनीकी कदम “लगभग तैयार” हैं. समयसीमा: संयंत्र का निर्माण 2030 से 2035 के बीच शुरू होगा और 2036 तक पूरा हो जाएगा. ILRS की आधारशिला 2028 में चीन की चांग-ई-8 मिशन के साथ रखी जाएगी, जो पहली बार चीनी अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारेगी. अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान स्टेशन (ILRS): एक वैश्विक परियोजना ILRS एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसे चीन और रूस ने जून 2021 में पहली बार घोषित किया था. यह स्टेशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थापित किया जाएगा. इसमें 17 देश शामिल हो चुके हैं, जिनमें मिस्र, पाकिस्तान, वेनेजुएला, थाईलैंड और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं. रोडमैप: ILRS का निर्माण पांच सुपर हेवी-लिफ्ट रॉकेट लॉन्च के माध्यम से 2030 से 2035 तक किया जाएगा. इसके बाद, 2050 तक इस स्टेशन का विस्तार किया जाएगा, जिसमें एक कक्षीय अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्रमा के भूमध्य रेखा और इसके दूर के हिस्से पर दो नोड्स शामिल होंगे. ऊर्जा स्रोत: स्टेशन को सौर, रेडियो आइसोटोप और परमाणु जनरेटरों से ऊर्जा मिलेगी. इसके अलावा, चंद्रमा-पृथ्वी और चंद्र सतह पर उच्च गति संचार नेटवर्क, चंद्र वाहन और मानवयुक्त रोवर भी होंगे. उद्देश्य: ILRS का लक्ष्य वैज्ञानिक अनुसंधान, दीर्घकालिक मानव रहित संचालन, और मंगल पर मानव लैंडिंग के लिए तकनीकी आधार तैयार करना है चीन की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाएं चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम पिछले एक दशक में तेजी से विकसित हुआ है. 2013 में चांग-ई-3 मिशन के साथ चीन ने चंद्रमा पर अपना पहला रोवर उतारा. इसके बाद, उसने चंद्रमा और मंगल पर और रोवर भेजे, चंद्रमा के निकट और दूर के हिस्सों से नमूने एकत्र किए और चंद्र सतह का मानचित्रण किया. 2030 का लक्ष्य: चीन का लक्ष्य 2030 तक अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारना और अंतरिक्ष अनुसंधान में वैश्विक नेता बनना है. 2050 की योजना: ILRS को 2050 तक एक विस्तृत नेटवर्क में बदलने की योजना है, जो चंद्रमा के विभिन्न हिस्सों को जोड़ेगा और मंगल मिशनों के लिए आधार प्रदान करेगा. नासा का आर्टेमिस कार्यक्रम: चुनौतियों का सामना चीन और रूस की इस घोषणा के ठीक बाद, नासा ने अपने 2026 के बजट प्रस्ताव में आर्टेमिस कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण कटौती की घोषणा की. आर्टेमिस का लक्ष्य 2027 में आर्टेमिस III मिशन के माध्यम से अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को 50 वर्षों बाद चंद्रमा पर वापस लाना है. हालांकि बजट कटौती ने इस कार्यक्रम को जोखिम में डाल दिया है. लूनर गेटवे का रद्द होना: नासा की योजना एक कक्षीय चंद्र स्टेशन, लूनर गेटवे को 2027 तक लॉन्च करने की थी. लेकिन 2026 के बजट प्रस्ताव ने इस मिशन को रद्द कर दिया, साथ ही स्पेस लॉन्च सिस्टम और ओरियन कार्यक्रमों को भी आर्टेमिस III के बाद समाप्त करने की बात कही. बजट कटौती: नासा के बजट में 24% की कटौती प्रस्तावित है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए 500 मिलियन डॉलर की कमी शामिल है. प्रभाव: इन कटौतियों ने नासा की चंद्र महत्वाकांक्षाओं को कमजोर किया है, जिससे चीन और रूस को अंतरिक्ष दौड़ में बढ़त मिल सकती है. चीन-रूस बनाम अमेरिका: अंतरिक्ष दौड़ में नया मोड़ चीन और रूस का यह समझौता अंतरिक्ष अनुसंधान में एक नई प्रतिस्पर्धा का संकेत देता है. जहां नासा आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति स्थापित करने की योजना बना रहा था, वहीं बजट कटौती और देरी ने इसकी गति को धीमा कर दिया है. दूसरी ओर चीन और रूस की ILRS परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसमें 17 देशों का समर्थन और स्पष्ट रोडमैप शामिल है. चीन-रूस की ताकत: दोनों देशों की परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता ILRS को एक मजबूत आधार प्रदान करती है. चीन की चांग’ए मिशन और रूस की स्वचालित निर्माण तकनीक इस परियोजना को गति दे सकती है. अमेरिका की चुनौतियां: नासा के सामने न केवल बजट की कमी है, बल्कि तकनीकी देरी और राजनीतिक अनिश्चितता भी है। आर्टेमिस III की 2027 की समयसीमा पहले ही 2026 से स्थगित हो चुकी है. वैश्विक प्रभाव और भविष्य चीन और रूस का चंद्र परमाणु संयंत्र वैज्ञानिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है. यह न केवल चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति को संभव बनाएगा, बल्कि मंगल मिशनों के लिए भी आधार तैयार करेगा.यह परियोजना हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दर्शाती है. वैज्ञानिक लाभ: ILRS चंद्रमा की सतह, संसाधनों और अंतरिक्ष पर्यावरण के अध्ययन को बढ़ावा देगा. रणनीतिक प्रभाव: यह परियोजना चीन और रूस को अंतरिक्ष में वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर सकती है, विशेष रूप से तब जब अमेरिका अपनी योजनाओं में पीछे रह रहा है. भारत की भूमिका: भारत, जो अपने चंद्रयान मिशनों के लिए जाना जाता है, भविष्य में ILRS या आर्टेमिस जैसे कार्यक्रमों में सहयोग कर सकता है, लेकिन अभी तक इस परियोजना में शामिल नहीं हुआ … Read more

भारत की एक कंपनी से भी छोटा है पाकिस्तान का पूरा शेयर बाजार, जानिए कैसे किया यह कमाल!

मुंबई बीते कुछ दिनों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की वजह से दोनों देश के स्टॉक एक्सचेंज उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरे हैं। इस दौरान भारत के मुकाबले पाकिस्तान के स्टॉक एक्सचेंज की हालत बदतर हो गई थी। हालात ये हो गए कि पाकिस्तान के कराची स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग कुछ देर के लिए बंद करनी पड़ी। पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज की ऐतिहासिक गिरावट की वजह से मार्केट कैपिटल भी गिर गया। स्थिति ये है कि भारत की कई बड़ी कंपनियों का मार्केट कैपिटल पाकिस्तान के कराची स्टॉक एक्सचेंज से ज्यादा है। किस कंपनी का कितना मार्केट कैपिटल अकेले मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैपिटल पाकिस्तान के कुल कैपिटल से कई गुना अधिक है। सप्ताह के दूसरे दिन मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर की कीमत 1415 रुपये के स्तर पर थी। वहीं, मार्केट कैपिटल करीब 19.17 लाख करोड़ रुपये पर है। एचडीएफसी बैंक के शेयर की कीमत 1923.10 रुपये पर है। वहीं, मार्केट कैपिटल 14.75 लाख करोड़ रुपये है। टाटा की कंपनी टीसीएस के शेयर मंगलवार को 3515 रुपये पर थे। वहीं, मार्केट कैपिटल 12.73 लाख करोड़ रुपये था। इसी तरह, एयरटेल और आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैपिटल क्रमश: 10.38 लाख करोड़ रुपये और 10.20 लाख करोड़ रुपये है। ये सभी आंकड़े भारतीय रुपये में हैं। बता दें कि इंफोसिस समेत कई अन्य लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटल भी पाकिस्तन स्टॉक एक्सचेंज से ज्यादा है। पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज का हाल भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम होने के बाद अब पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज रिकवरी मोड में है। बीते सोमवार को इस स्टॉक एक्सचेंज में करीब 9.5 प्रतिशत की रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई। मंगलवार को भी निवेशकों का भरोसा बरकरार रहा और एक्सचेंज ने 1.5 प्रतिशत की छलांग लगाई। मंगलवार को कराची स्टॉक एक्सचेंज 1,18,700 अंक के स्तर पर कारोबार कर रहा था। पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैपिटल बढ़कर ₹15 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये के पार पहुंच गया है। आपको बता दें कि 1 पाकिस्तानी रुपये भारत के 0.30 पैसे के बराबर हैं। इस आधार पर देखें तो पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैपिट 4.55 लाख करोड़ भारतीय रुपये के करीब है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार भारत में 5,000 से अधिक लिस्टेड कंपनियां हैं। वहीं, पाकिस्तान में केवल 600 से भी कम कंपनियां सूचीबद्ध हैं। भारतीय शेयर बाजार 5 ट्रिलियन डॉलर के वैल्युएशन के साथ मार्केट कैपिटल के मामले में दुनिया भर में शीर्ष मार्केट में से एक है। पिछले सप्ताह किस कंपनी का क्या हाल बीते सप्ताह मार्केट कैपिटल के लिहाज से शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम रही। इसके बाद क्रमश: एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, इन्फोसिस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फाइनेंस और आईटीसी का स्थान रहा। भारत से 250 गुना छोटा है पाकिस्तान का शेयर बाजार सबसे पहले आंकड़ों की बात करें तो, भारत के शेयर बाजार की गिनती आज दुनिया के टॉप 5 शेयर बाजारों में होती है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बाजार पूंजीकरण यानी मार्केट कैप आज करीब 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की तरफ देखें, तो ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, कराची स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैप इस समय सिर्फ 20.36 अरब डॉलर है। यानी भारत का शेयर बाजार पाकिस्तान के मुकाबले करीब 250 गुना ज्यादा बड़ा है। भारतीय शेयर बाजार में जहां 5000 से ज्यादा कंपनियां लिस्टेड हैं, वहीं पाकिस्तान में ये संख्या महज 500 के आसपास है। इससे साफ है कि भारतीय बाज़ार में कंपनियों की विविधता और निवेश के मौके पाकिस्तान के मुकाबले काफी अधिक हैं। भारत का शेयर बाजार केवल विदेशी निवेशकों पर ही निर्भर नहीं है। भारतीय बाजार को मजबूत बनाते हैं यहां के घरेलू निवेशक, रिटेल निवेशक और SIP जैसे निवेश के साधन, जिससे बाजार को किसी भी उतार-चढ़ाव के समय स्थिरता यानी सपोर्ट देते हैं। इससे बाजार में पैनिक सेलिंग बहुत कम देखने को मिलती है। वहीं पर पाकिस्तान का शेयर बाजार ज्यादा भावनात्मक और कम लिक्विडिटी वाला माना जाता है। ऐसे में किसी भी जियोपॉलिटिकल घटना का असर वहां तुरंत और तेजी से दिखता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से ही पाकिस्तान का शेयर बाजार बुरी तरह हिल हुआ है। कराची स्टॉक मार्केट में आज 8 मई को कुछ देर के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। उसका KSE-30 इंडेक्स एक झटके में 7.2 फीसदी टूट गया। वहीं उसके सबसे प्रमुख इंडेक्स, KSE-100 में 9 फीसदी की भारी गिरावट आई। साल 2008 के बाद यह पहली बार है, जब कराची स्टॉक मार्केट में इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिली। इससे पहले 7 मई को भी पाकिस्तानी शेयर बाजार में हाहाकार की स्थिति रही। KSE-100 इंडेक्स 7 मई को कारोबार के दौरान 6500 अंक या करीब 6 फीसदी टूटकर बंद हुए। यह भी कराची स्टॉक मार्केट में साल 2021 की सबसे बड़ी गिरावट थी। यह गिरावट आई भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद, जिसके तहत सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद 9 आंतकी ठिकानों को नेस्तानाबूत करके पहलगाम हमले का बदला लिया। भारत की इस कार्रवाई में 100 आंतकियों के मारे जाने की खबरें हैं। अब बात करते हैं भारत के शेयर बाजार की। भारत के शेयर बाजार ने पिछले 2 दिनों में काफी स्थिरता दिखाई है। बीएसई सेंसेक्स आज 8 मई को जरूरत 400 अंक टूटकर बंद हुआ। लेकिन इस पहले 7 मई को इसमें 105 अंकों की तेजी देखने को मिली थी। निफ्टी भी 34 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ था। आज के कारोबार के पहले हाफ दोनों इंडेक्स लगभग सपाट कारोबार कर रहे थे। यानी सीमा पर तनाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार अभी तक स्थिर और भरोसेमंद बना हुआ है। 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद से पाकिस्तान का KSE 100 इंडेक्स अब तक करीब 13 फीसदी गिर चुका है। वहीं पर KSE-30 इंडेक्स में 14 फीसदी की गिरावट आई है। जबकि दूसरी ओर सेंसेक्स और निफ्टी इस दौरान लगभग एक फीसदी ऊपर हैं। भारत और पाकिस्तान के शेयर बाजार के रिटर्न की बात करें तो, पिछले 2 साल पाकिस्तान के लिए अच्छे रहे हैं। लेकिन बाकी सालों में अधिकतर बार भारतीय शेयर बाजार ने ही अच्छा … Read more

बिना गिरवी वाले कर्ज में डिफॉल्ट का खतरा बढ़ रहा, RBI नियमों को और सख्त करने की तैयारी में

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बिना गिरवी रखे दिए जाने वाले व्यक्तिगत कर्ज, जैसे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड के नियमों को और सख्त करने की तैयारी में है। बिना गिरवी वाले कर्ज में डिफॉल्ट का खतरा बढ़ रहा है। इससे आरबीआई चिंतित है। नवंबर 2023 में RBI ने इन कर्जों पर रिस्क वेट 100% से बढ़ाकर 125% कर दिया था, लेकिन अब और कड़े कदम जरूरी हैं। क्रेडिट स्कोर के आधार पर लोन: आरबीआई ने बैंकों को अपनी कर्ज देने की नीतियों को सख्त करने के निर्देश दिए हैं। कर्ज लेने वालों की क्रेडिट स्कोर के आधार पर ऋण की अधिकतम सीमा तय करना होगा। अगर कोई व्यक्ति पहले से होम लोन या ऑटो लोन ले चुका है, तो बैंकों को पर्सनल लोन देते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। रिटेल लोन के तेजी से बढ़ने से आरबीआई चिंतित: बैंकों से बातचीत के आधार पर एनडीटीवी प्रॉफिट को पता चला है कि RBI को रिटेल लोन के तेजी से बढ़ने और इसमें छिपे जोखिमों को लेकर चिंता है। मार्च 2024 में पर्सनल लोन में वार्षिक वृद्धि 14% रही (पिछले साल इसी समय 17.6% थी)। प्राइवेट बैंक अभी भी तेजी से ये कर्ज दे रहे हैं, जबकि सरकारी बैंकों का फोकस कम है। RBI की रिपोर्ट का अहम बिंदु: दिसंबर 2023 की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, प्राइवेट बैंकों में कर्ज माफ करने (राइट-ऑफ) की संख्या तेजी से बढ़ी है, जो जोखिम का संकेत है। आरबीआई का अगला कदम: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जल्द ही (अगले 15 दिनों में) इन नए दिशा-निर्देशों का ड्राफ्ट जारी कर सकता है। बैंकों से अपेक्षा है कि वे इन कर्जों को लेकर अधिक सतर्कता बरतेंगे और केवल योग्य उधारकर्ताओं को ही ऋण देंगे। आरबीआई का यह कदम आम लोगों को जरूरत से ज्यादा कर्ज लेने से रोकने और बैंकिंग व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए है। एक से ज्यादा पर्सनल लोन लेना अब आसान नहीं! अब पर्सनल लोन (Personal Loan) लेने वालों के लिए मल्टीपल लोन लेना मुश्किल होने वाला है. RBI ने एक नया नियम लागू कया है, जिससे कर्ज लेने और देने दोनों में बड़ा बदलाव आने वाला है. इस नियम के मुताबिक अब लेंडर्स को क्रेडिट ब्यूरो में लोन की जानकारी 1 महीने की जगह 15 दिन के अंदर अपडेट करनी होगी. इससे कर्ज देने वालों को डिफॉल्ट और पेमेंट रिकॉर्ड की सटीक जानकारी जल्दी मिल सकेगी. इससे कर्ज लेने वालों के जोखिम का बेहतर आकलन हो सकेगा और मल्टीपल लोन लेने वालों पर लगाम लगाई जा सकेगी. मल्टीपल लोन (Multiple Loan) पर लगेगी रोक! अगस्त 2024 में जारी किए गए इन निर्देशों को 1 जनवरी 2025 से लागू किया गया है. रिजर्व बैंक का मानना है कि इससे कर्ज देने वालों को रिस्क मैनेजमेंट में मदद मिलेगी. अभी तक EMI चुकाने की तारीखें अलग-अलग होने की वजह से महीने में एक बार रिपोर्टिंग करने से पेमेंट रिकॉर्ड में 40 दिनों की देरी हो सकती थी. लेकिन अब हर 15 दिन में अपडेट होने से ये देरी खत्म हो जाएगी और कर्ज देने वालों को असल समय में जानकारी मिलेगी. कुल मिलाकर अब EMI रिपोर्टिंग में देरी कम होगी और पेमेंट-डिफॉल्ट की सही जानकारी जल्दी मिलेगी. मल्टीपल कर्ज लेने की आदत लगाम! मल्टीपल कर्ज लेने की आदत पर भी ये नियम लगाम लगाएगा. नए लोन लेने वालों को कई जगहों से ज्यादा लोन मिल जाते हैं जो उनकी चुकाने की क्षमता से ज्यादा होता है. बैंकों ने ही रिकॉर्ड को ज्यादा बार अपडेट करने का सुझाव दिया था, जिससे कर्ज लेने वालों की सही जानकारी उपलब्ध हो सके. अब अगर कोई शख्स मल्टीपल लोन लेता है और उसकी EMI अलग-अलग तारीखों पर होती है, तो उसकी आर्थिक गतिविधियां 15 दिनों के अंदर क्रेडिट ब्यूरो के सिस्टम में दिखाई देंगी. इससे कर्ज देने वालों को कर्ज लेने वालों की आर्थिक स्थिति का सटीक और ताजा डेटा मिलेगा. ‘एवरग्रीनिंग’ पर रोक लगेगी! लेंडर्स का मानना है कि इस बदलाव से ‘एवरग्रीनिंग’ जैसी हरकतों पर भी रोक लगेगी. इसमें कर्ज लेने वाले पुराने कर्ज नहीं चुका पाने पर नया कर्ज ले लेते हैं, जिससे उनकी असल स्थिति छिपी रहती है. रिपोर्टिंग समय घटाने से क्रेडिट ब्यूरो और लेंडर्स को ज्यादा भरोसेमंद डेटा मिलेगा और कर्ज देने का सिस्टम मजबूत होगा. RBI के इस नए नियम से कर्ज देने का सिस्टम और ज्यादा पारदर्शी और मजबूत बनेगा और ये देखना दिलचस्प होगा कि इससे लोन लेने वालों पर क्या असर पड़ता है. पर्सनल लोन के फायदे व्यक्तिगत ऋण (Personal Loan) का लाभ उठाना आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक नायाब सुविधा बन गया है. इसका प्रमुख फायदा यह है कि इसे बिना किसी गारंटी के लिया जा सकता है. पर्सनल लोन  की विशेषता यह है कि इसका इस्तेमाल अनेकों आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है, जैसे कि आपातकालीन चिकित्सा खर्च, शिक्षा, शादी, घर की मरम्मत या अन्य व्यक्तिगत जरूरतें. पर्सनल लोन आसानी से मिल जाता है. अधिकतर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं में ऑनलाइन आवेदन की सुविधा होती है, जिससे समय की बचत होती है और दस्तावेजी प्रक्रिया भी सरल हो जाती है. इसके अलावा, ऋण राशि भी कुछ ही दिनों में आपके खाते में ट्रांसफर हो जाती है, जिससे आपकी आवश्यकताओं को त्वरित रूप से पूरा किया जा सकता है. Personal Loan के नकारात्मक पहलू जब पैसों की तात्कालिक जरूरत होती है, तो अधिकतर लोग पर्सनल लोन की तरफ भागते हैं, क्योंकि आसानी से मिल जाता है. पर्सनल लोन को सबसे बड़ा निगेटिव प्वाइंट्स ये है कि इसका ब्याज काफी ज्यादा होता है. पर्सनल लोन का टेन्योर बहुत कम होता है, और किसी कारण से समय पर भुगतान नहीं करने से बैंक मजबूरी का फायदा उठाता है. बिना सूझ-बूझ के पर्सनल लोन से आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है. यही नहीं, अगर आपने समय पर EMI नहीं चुकाई, तो यह आपके क्रेडिट स्कोर को भी बिगाड़ सकता है.  

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