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पाक के साथ टेंशन के बीच चीन का एक जासूसी जहाज़ भारत के समुद्री क्षेत्र के पास पहुंचा, जानकारी इकट्ठा करना उद्देश्य

बीजिंग भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के माहौल में चीन का एक जासूसी जहाज़ ‘दा यांग यी हाओ’ भारत के समुद्री क्षेत्र के पास पहुंच रहा है। यह जानकारी ओपन-सोर्स खुफिया विशेषज्ञ डेमियन साइमन ने दी है। इस जहाज़ को चीन “वैज्ञानिक अनुसंधान पोत” बताता है, लेकिन भारत और अन्य देशों का मानना है कि इसका असली उद्देश्य खुफिया जानकारी इकट्ठा करना  है। यह जहाज़ समुद्र की सतह को स्कैन करने,  मिसाइल टेस्ट ट्रैक करने और पनडुब्बियों की गतिविधियों की निगरानी  करने में सक्षम है। इसकी गतिविधियाँ अक्सर सामान्य वैज्ञानिक अभियानों की आड़ में की जाती हैं। कहां से आया यह जहाज़? डेमियन साइमन द्वारा साझा किए गए नक्शे के अनुसार, यह जहाज़ मलक्का जलडमरूमध्य  से होकर भारत के दक्षिण में श्रीलंका के पास  पहुंच रहा है।इस तरह के जहाज़ आमतौर पर भारत के मिसाइल परीक्षणों और समुद्री सैन्य गतिविधियों के दौरान आसपास देखे जाते हैं।   वैज्ञानिक जहाज़ या जासूस? पिछले साल भी ‘Xiang Yang Hong 01’ नामक एक अन्य चीनी जासूसी जहाज़ भारत के अग्नि-5 मिसाइल परीक्षण** के समय क्षेत्र में देखा गया था।इसके अलावा, कुछ जहाज़ भारतीय पनडुब्बियों की ध्वनि पहचानने और ITR परीक्षण स्थल (एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप) पर हो रही गतिविधियों की निगरानी करते पाए गए हैं। यह जानकारी बाद में  चीनी उपग्रहों को भेजी जाती है जिससे वह विस्तृत जासूसी कर सकें। अंडरवाटर निगरानी भारत के लिए  खतरे की घंटी इन जहाज़ों में मौजूद मानवरहित जल-नीचे वाहनों (UUVs)  के ज़रिए समुद्र के भीतर मौजूद रक्षा तंत्र,  सी माइंस** और अन्य सैन्य ढांचों  की भी निगरानी की जाती है। साल 2021 में एक और चीनी जहाज़ ‘Da Yang Hao’ को  पलाऊ के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में बिना अनुमति घुसने पर रोका गया था। उस समय रिपोर्ट में कहा गया था कि वह क्षेत्र भविष्य के पनडुब्बी युद्ध संचालन  के लिहाज़ से रणनीतिक रूप से अहम है। भारत के पड़ोस में चीन के इस तरह के जहाज़ों की मौजूदगी सिर्फ वैज्ञानिक उद्देश्य नहीं, बल्कि  सैन्य जासूसी  और  रणनीतिक निगरानी का हिस्सा मानी जा रही है। यह भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।

फायर इंजीनियरिंग में है शानदार करियर

हाल के दिनों में आगजनी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। चलती कारों में आग लग जाती है, तो बड़े-बड़े मॉल्स, काफी हद तक सुरक्षित मानी जानी वाली ऊंची-ऊंची इमारत भी पूरी तरप सुरक्षित नहीं है। यदि आग अनियंत्रित हो जाए, तो जान-माल का भी काफी नुकसान होता है। ऐसी स्थिति में फायर इंजीनियरिंग से जुड़े लोगों की जरूरत होती है, जो आग पर काबू करना अच्छी तरह जानते हैं। क्या है फायर इंजीनियरिंग:- फायर इंजीनियरिंग में पब्लिक के बीच रहकर ही काम करना होता है। सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एनवॉयर्नमेंटल इंजीनियरिंग जैसे विषयों से तो इसका सीधा जुडाव होता ही है, आग लगने पर पब्लिक का कैसा व्यवहार हो, पब्लिक के साथ इन लाइफ गार्ड्स का क्या व्यवहार हो, इन सब पर भी जोर दिया जाता है। इसके अलावा ढेर सारी तकनीकी बातें होती हैं, जो इसे बाकी क्षेत्रों से अलग करती हैं, मसलन-आग बुझाने के यंत्रों की तकनीकी जानकारी, स्प्रिंक्लर सिस्टम, अलार्म, पानी की बौछार का सबसे सटीक इस्तेमाल और कम से कम समय और संसाधनों में ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान और माल के बचाव के साइंटिफिक फॉर्मूले। सबसे बडी बात है क्राइसिस मैनेजमेंट। इस करियर में आप इसे भी सीखते हैं। बडे-बडे मॉल्स या मेले तो आग के मामले इतने खतरनाक होते हैं कि एक साथ सैकडों की जान जाती है। जैसा कि कुछ समय पहले मेरठ के मेले में हुआ था। इस वजह से आज फायर इंजीनियरों की मांग काफी बढ गई है। फायर इंजीनियरों की मांग को पूरा करने के लिए आज कई सरकारी व निजी संस्थान खुल गए हैं। साथ ही, देश के कई विश्वविद्यालयों ने इस कोर्स को अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया है। चुनौतियों तमाम:- कार्य के दौरान फायर इंजीनियर का सामना कई तरह की चुनौतियों से भरा होता है। इसके लिए साहस के साथ-साथ समाज के प्रति प्रतिबद्धता होनी भी जरूरी है। फायर इंजीनियर का कार्य इंजीनियरिंग डिजाइन, ऑपरेशन व प्रबंधन से संबंधित होता है। फायर इंजीनियर की प्रमुख जिम्मेदारी दुर्घटना के समय आग के प्रभाव को सीमित करना होता है। इसके लिए वे अग्निसुरक्षा के विभिन्न तरीकों को इस्तेमाल करते हैं। इसके अतिरिक्त अग्निशमन के आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल व उसके रख-रखाव की तकनीक में सुधार करना भी इनकी जिम्मेदारी होती है। कोर्स और पाठ्यक्रम:- कुशल फायर इंजीनियर बनने के लिए बेचलर इन फायर इंजीनियरिंग की डिग्री या उप-फायर-अधिकारी या सर्टिफिकेट कोर्स इन फायर टेक्नोलॉजी एंड सेफ्टी, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन फायर प्रोटेक्शन इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी, डिप्लोमा इन फायर इंजीनियरिंग कोर्स के अलावा फायर इंजीनियरिंग में अन्य छोटे-छोटे कोर्स भी उपलब्ध हैं। योग्यता:- विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए योग्यताएं भी अलग-अलग होती हैं। फायर इंजीनियरिंग में अधिकांश कोर्स ग्रेजुएट स्तर पर उपलब्ध हैं, जिसके लिए साइंस विषयों में बारहवीं पास होना जरूरी है। इसके अलावा इन कोर्सो में प्रवेश के लिए कई संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार आदि भी आयोजित करते हैं। बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग के अलावा आप इस क्षेत्र में स्नातकोत्तर स्तर पर मास्टर और डॉक्टरेट की पढ़ाई भी कर सकते हैं। शारीरिक योग्यता:- इन पाठ्यक्रमों में फिजिकल फिटनेस के अंक भी जोड़े जाते हैं। पुरूष के लिए 50 किलो के वजन के साथ 165 सेमी लंबाई और आईसाइट 6/6, सीना सामान्य रूप से 81 सेमी और फुलाने के बाद 5 सेमी फैलाव होना जरूरी है। महिला का वजन 46 किलो और लंबाई 157 सेमी और आईसाइट 6/6 होनी चाहिए। प्रशिक्षण:- इस पाठ्यक्रम के तहत आग बुझाने के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी जाती है। इसमें बिल्डिंग निर्माण के बारे में भी जानकारी दी जाती है। ताकि, आग लगने की स्थिति में उसे बुझाने में ज्यादा परेशानी न हो। उन्हें आग लगने के कारणों और उसे बुझाने के उपायों के बारे में भी विस्तार से बताया जाता है। संभावनाएं:- इस संबंध में दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग के चेयरमैन वीरेन्द्र गर्ग कहते हैं कि इसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। पहले जहां अवसर केवल सरकारी फायर बिग्रेड में ही होते थे, वहीं बदलते दौर के साथ फायर इंजीनियरिंग कोर्स करने वालों के लिए ढेरों नए विकल्प भी सामने आ गए हैं। इनमें प्रमुख इस प्रकार हैं… कंसल्टेंसी:- जब से हर बडी इमारत के साथ आग से जुडे खतरों के लिए कुछ जरूरी नियमों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है, इस फील्ड में कंसल्टेंट्स की मांग बढ गई है। कंसल्टेंसी की कंपनियां धीरे-धीरे बिल्डर्स का भरोसा जीत रही हैं और उनकी संख्या बढ रही है। रिसर्च:- फायर प्रोक्टेशन के फील्ड में रिसर्च पहले भारत में नहीं होता था, लेकिन अब यहां भी होने लगा है। हालांकि, ऐसा अभी बहुत कम कंपनियों ने किया है, लेकिन बडे कैंपस वाली कंपनियां अब फायर प्रोटेक्शन इंजीनियरिंग की स्थाई भर्ती करने लगी हैं। इंश्योरेंस:- जैसे-जैसे आग लगने के मामले बढ रहे हैं, वैसे-वैसे आग से जुडी बीमा पॉलिसियों की भी मांग बढ गई है। इसके साथ ही ऐसे लोगों की जरूरत भी बढ गई है, जो आग से होने वाले नुकसान का ठीक-ठीक अनुमान लगा सकें। मैन्युफैक्चरिंग अब हर बडे निर्माण में आग बुझाने के उपकरणों को रखना भी अनिवार्य कर दिया गया है। इससे उपकरणों का उत्पादन भी बढ गया है। उनके उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक के फील्ड में फायर इंजीनियर्स की मांग बढ गई है। अब सारे सिटी प्लानर भी फायर इंजीनियर्स को साथ रखकर ही टाउन प्लानिंग करते हैं। सैलरी पैकेज:- सरकारी अथवा गैर सरकारी संगठनों में फायरकर्मियों के वेतन का आधार अलग-अलग होता है। दोनों में पर्याप्त भिन्नाता देखने को मिलती है। सरकारी संस्थानों में जहां एक फायरमैन की तनख्वाह दस हजार रुपये प्रतिमाह होती है। वहीं, फायर इंजीनियर को बीस हजार रुपये और मुख्य अग्निशमन अधिकारी को इससे अधिक वेतन मिलता है। इसकी तुलना में प्राइवेट संस्थाएं अपने यहां कार्यरत फायरमैन को 12000 से 14000, फायर इंजीनियर को 20000 तथा अग्निशमन अधिकारी को 25000 से 30000 रुपये प्रतिमाह तक का सैलरी पैकेज देती हैं। प्राइवेट संस्थान अपने यहां कुछ वर्ष का अनुभव रखने वाले लोगों को ही वरीयता देते हैं। वैसे निजी संस्थाओं में वेतन का आधार स्वयं की काबिलियत और अनुभव रखता है। अलग-अलग कंपनियां अपनी क्षमता के अनुसार वेतन तय करती हैं। इंस्टीट्यूट वॉच… -दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग, नई दिल्ली -इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, खड़गपुर -राष्ट्रीय … Read more

आज सरकार की पहली मासिक डेटा सीरीज ने अप्रैल में बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत रहने का लगाया अनुमान

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने गुरुवार को कहा कि अप्रैल के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 55.6 प्रतिशत थी। इसी आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए एलएफपीआर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 58 प्रतिशत थी और शहरी क्षेत्रों में 50.7 प्रतिशत थी। एलएफपीआर एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो रोजगार की स्थिति को दर्शाता है। यह दर बताती है कि श्रम बल में कितने लोग सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी मासिक आंकड़ों पर आधारित नई सीरीज के अनुसार, डेटा में पहली बार ग्रामीण रोजगार के आंकड़े भी शामिल हैं, जो कवरेज को व्यापक बनाते हैं। अप्रैल में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच सीडब्ल्यूएस में बेरोजगारी दर (यूआर) 5.1 प्रतिशत थी, घरेलू स्तर पर पुरुष यूआर 5.2 प्रतिशत थी, जबकि महिला यूआर 5.0 प्रतिशत थी। तिमाही आधार पर संकलित पुरानी सीरीज के अक्टूबर-दिसंबर- 2024 के दौरान शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर (यूआर) 6.4 प्रतिशत थी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों के लिए सीडब्ल्यूएस में एलएफपीआर क्रमशः 79 प्रतिशत और 75.3 प्रतिशत थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के बीच एलएफपीआर अप्रैल के दौरान 38.2 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच सीडब्ल्यूएस में श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) 55.4 प्रतिशत था। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल के दौरान समान आयु वर्ग के व्यक्तियों के बीच शहरी क्षेत्रों में डब्ल्यूपीआर 47.4 प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर समग्र डब्ल्यूपीआर 52.8 प्रतिशत रहा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए डब्ल्यूपीआर महीने के दौरान क्रमशः 36.8 प्रतिशत और 23.5 प्रतिशत थी और देश के स्तर पर समान आयु वर्ग की समग्र महिला डब्ल्यूपीआर 32.5 प्रतिशत देखी गई। बढ़ी हुई कवरेज के साथ उच्च आवृत्ति श्रम बल संकेतकों के निर्माण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) की नमूना पद्धति को जनवरी 2025 से नया रूप दिया गया है। पुनर्निर्मित पीएलएफएस डिजाइन की परिकल्पना अखिल भारतीय स्तर पर सीडब्ल्यूएस में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए मासिक आधार पर प्रमुख रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों (श्रम बल भागीदारी दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात और बेरोजगारी दर) का अनुमान लगाने के लिए की गई है। मासिक परिणाम पीएलएफएस के मासिक बुलेटिन के रूप में जारी करने की योजना है। वर्तमान मासिक बुलेटिन अप्रैल 2025 महीने के लिए सीरीज में पहला है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए पीएलएफएस में जनवरी 2025 से एक रोटेशनल पैनल सैंपलिंग डिजाइन अपनाया गया है। इस रोटेशनल पैनल योजना में, प्रत्येक चयनित घर का लगातार चार महीनों में चार बार दौरा किया जाता है।

DRDO की कानपुर स्थित लैब ने समंदर से मीठा पानी निकालने वाली देसी तकनीक तैयार, 8 महीने में कर दिया कमाल

नई दिल्ली ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए DRDO ने ऐसा कमाल कर दिखाया है जो देश के तटीय इलाकों और रक्षा क्षेत्र दोनों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। DRDO की कानपुर स्थित लैब ने महज 8 महीने में एक नैनोपोरस मल्टीलेयर्ड पॉलीमर मेम्ब्रेन तकनीक विकसित की है, जो खारे समुद्री पानी को पीने योग्य मीठे पानी में बदल सकती है। यह तकनीक खास तौर पर भारतीय तटरक्षक बल के जहाजों के लिए तैयार की गई है। तटरक्षक जहाजों पर सफल ट्रायल इस स्वदेशी तकनीक को भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के ऑफशोर पेट्रोलिंग वेसल (OPV) पर ट्रायल के लिए लगाया गया है। शुरुआती सुरक्षा और परफॉर्मेंस टेस्ट में यह पूरी तरह सफल रही है। अब 500 घंटे की ऑपरेशनल टेस्टिंग के बाद इसे अंतिम मंजूरी दी जाएगी। जल संकट दूर करने में भी कारगार दरअसल, समुद्री पानी में मौजूद क्लोराइड आयन सामान्य झिल्लियों को नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन DRDO की यह नई तकनीक इस असर से पूरी तरह सुरक्षित है। यह तकनीक ना सिर्फ भारतीय तटरक्षक बल के लिए उपयोगी है, बल्कि यह भविष्य में भारत के उन इलाकों के लिए जल जीवन मिशन जैसा वरदान साबित हो सकती है, जहां पानी की भारी किल्लत है। आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम DRDO पहले ही तेजस लड़ाकू विमान, अग्नि-पृथ्वी मिसाइल, पिनाका रॉकेट सिस्टम और आकाश एयर डिफेंस जैसे स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के निर्माण में अग्रणी रहा है। अब यह नई मेम्ब्रेन तकनीक जल सुरक्षा में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नया आयाम जोड़ेगी।

अपरा एकादशी के दिन घर पर कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा? जानें पूजा विधि और महत्व

अपरा एकादशी का महत्व हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और विशेष रूप से पापों के नाश, आत्मिक शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति के लिए किया जाता है. माना जाता है कि इस व्रत को करने से ब्रह्म हत्या, गोत्र हत्या, गर्भस्थ शिशु की हत्या, परनिंदा और परस्त्रीगमन जैसे बड़े पापों से भी मुक्ति मिल जाती है. इस व्रत के पुण्य से अपार धन, समृद्धि और प्रसिद्धि मिलती है. इसे सहस्र गोदान के फल के समान माना गया है.यह व्रत जीवात्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति में सहायक माना जाता है. यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है और उनकी पूजा-अर्चना करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है. कब है अपरा एकादशी? वैदिक पंचांग के अनुसार, जेष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी की शुरुआत 23 मई को देर रात 1 बजकर 12 मिनट 12 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 23 मई को रात्रि 10 बजकर 29 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत 23 मई को रखा जाएगा. अपरा एकादशी के दिन घर पर कैसे करें पूजा? व्रत के दिन सुबह जल्दी उठें और ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. यदि संभव हो तो स्नान के पानी में गंगाजल मिलाएं. फिर स्नान के बाद साफ और धुले हुए कपड़े पहनें. भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. घर के मंदिर या पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें. एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. भगवान को चंदन, पीले फूल, तुलसी दल, धूप, और दीप अर्पित करें. भगवान विष्णु को फल, मिठाई और तुलसी पत्र डालकर भोग लगाएं. ध्यान रखें कि भोग में केवल सात्विक चीजें ही शामिल हों.भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें, जैसे – “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”. आप विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं. अपरा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें. आखिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें. पूजा समाप्त होने के बाद भोग को प्रसाद के रूप में सभी में वितरित करें.अपनी क्षमतानुसार गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें. अपरा एकादशी व्रत के नियम दशमी के दिन सात्विक भोजन करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए. भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए. दिन में सोना नहीं चाहिए और बुरे विचारों से दूर रहना चाहिए. द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए और फिर खुद भी भोजन करके व्रत खोलना चाहिए. अपरा एकादशी व्रत का महत्व अपरा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है. माना जाता है कि इस व्रत को करने से मनुष्य बड़े-बड़े पापों से मुक्त हो जाता है. कहा जाता है कि इस व्रत के पुण्य से मनुष्य को अपार धन, समृद्धि और प्रसिद्धि मिलती है. यह भी मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से प्रेत योनि से भी मुक्ति मिल जाती है. इस दिन भगवान वामन की पूजा भी विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है.

सीएम योगी समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा- ‘सेना की वर्दी ‘जातिवादी चश्मे’ से नहीं देखी जाती

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव को विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर दिए गए विवादित बयान पर घेरते हुए कहा कि सेना की वर्दी ‘जातिवादी चश्मे’ से नहीं देखी जाती है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा एक वीरांगना बेटी को जाति की परिधि में बांधना न केवल उनकी पार्टी की संकुचित सोच का प्रदर्शन है, बल्कि सेना के शौर्य और देश की अस्मिता का भी घोर अपमान है। सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सेना की वर्दी ‘जातिवादी चश्मे’ से नहीं देखी जाती है। भारतीय सेना का प्रत्येक सैनिक ‘राष्ट्रधर्म’ निभाता है, न कि किसी जाति या मजहब का प्रतिनिधि होता है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा एक वीरांगना बेटी को जाति की परिधि में बांधना न केवल उनकी पार्टी की संकुचित सोच का प्रदर्शन है, बल्कि सेना के शौर्य और देश की अस्मिता का भी घोर अपमान है।” उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, “यह वही मानसिकता है, जो तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति में राष्ट्रभक्ति तक को बांटने का दुस्साहस करती है। इस विकृत जातिवादी सोच को जनता फिर जवाब देगी।” दूसरी तरफ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी सपा महासचिव रामगोपाल पर वार करते हुए एक्स पोस्ट में लिखा, ”जाति व धर्म से परे होती है सेना। सेना का एक ही धर्म होता है ‘देश की रक्षा’। इसलिए सेना में जाति व धर्म देखना ‘ओछी मानसिकता’ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना में भी महिला सशक्तीकरण पर खासा जोर दिया है। सबको उन पर भरोसा करना चाहिए।” दरअसल, मुरादाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में नियमित रूप से ब्रीफिंग करने वाली वायु सेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह को लेकर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। इस दौरान उन्होंने सेना के अन्य अधिकारियों की जातियां भी बताईं। रामगोपाल यादव ने अपनी टिप्पणी में व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी सहित अन्य सैन्य अधिकारियों की जाति का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “युद्ध एक मुसलमान, एक जाटव और एक यादव ने लड़ा। ये तीनों पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (पीडीए) वर्ग से आते हैं। ऐसे में भाजपा इस अभियान का श्रेय कैसे ले सकती है।”

मेड इन इंडिया में दादासाहेब फाल्के की भूमिका निभायेंगे जूनियर एनटीआर

मुंबई, मैन ऑफ मासेस जूनियर एनटीआर आगामी फिल्म ‘मेड इन इंडिया’ में भारतीय सिनेमा के जनक दादासाहेब फाल्के की भूमिका निभाने जा रहे हैं। यह फिल्म एक पैन-इंडिया रिलीज़ के तौर पर तैयार की जा रही है और इसे भारतीय सिनेमा की शुरुआत और विकास पर आधारित बायोपिक के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। वर्ष 2023 में एस.एस. राजामौली ने इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी, जिसे वरुण गुप्ता (मैक्स स्टूडियोज़) और एस.एस. कार्तिकेय (शोइंग बिज़नेस) द्वारा प्रोड्यूस किया जाएगा। तब से इस फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम चल रहा था और अब इसकी फाइनल ड्राफ्ट लॉक कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में एस.एस. राजामौली, एस.एस. कार्तिकेय और वरुण गुप्ता ने यह स्क्रिप्ट जूनियर एनटीआर को सुनाई, जिन्होंने तुरंत ही फिल्म के लिए अपनी स्वीकृति दे दी। वह दादासाहेब फाल्के की अनजानी कहानियों से बेहद प्रभावित हुए। यह कहानी भारतीय सिनेमा के जन्म और विकास पर आधारित है, और इसकी बारीकियों ने जूनियर एनटीआर को चौंका दिया। स्क्रिप्ट सुनने के बाद, उन्होंने स्क्रीनप्ले और उसके ट्रीटमेंट पर विस्तार से चर्चा की। यह फिल्म उन्हें एक्शन से हटकर एक ऐसा किरदार निभाने का मौका देगी, जो उन्होंने पहले कभी नहीं किया। ‘मेड इन इंडिया’ एस.एस. राजामौली, एस.एस. कार्तिकेय और वरुण गुप्ता की रचनात्मक दृष्टि के साथ भारतीय सिनेमा के इतिहास में गहराई से उतरने का प्रयास करेगी। यह फिल्म दादासाहेब फाल्के की नज़र से भारतीय सिनेमा की शुरुआत को दिखाएगी और दर्शकों को एक ऐसा सिनेमाई अनुभव देगी जो पहले कभी नहीं देखा गया।  

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद केंद्र सरकार ने तुर्की की कंपनियों से जुड़े सभी समझौते और परियोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी

नई दिल्ली भारत और तुर्की के बीच वर्षों से चल रहे व्यापारिक और रणनीतिक संबंध अब एक नई दिशा की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद केंद्र सरकार ने तुर्की की कंपनियों से जुड़े सभी समझौते और परियोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। भारत में निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग, एविएशन, मेट्रो रेल और आईटी जैसे क्षेत्रों में सक्रिय तुर्की की कंपनियों की भूमिका को दोबारा परखा जा रहा है। यह कदम तुर्की के कश्मीर मुद्दे पर बार-बार टिप्पणी और पाकिस्तान के साथ उसकी बढ़ती निकटता के मद्देनजर उठाया गया है। भारत ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (IBEF) की फरवरी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-तुर्की के बीच द्विपक्षीय व्यापार 10.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक भारत में तुर्की से कुल 240.18 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एफडीआई आया है, जिससे तुर्की एफडीआई इक्विटी फ्लो में 45वें स्थान पर रहा। इन निवेशों का विस्तार गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली जैसे राज्यों तक है। मेट्रो रेल, सुरंग निर्माण, और एयरपोर्ट सेवाओं से लेकर शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में कई समझौते और साझेदारियां की गई थीं। उदाहरण के तौर पर, 2020 में अटल टनल के इलेक्ट्रोमैकेनिकल हिस्से का कार्य एक तुर्की कंपनी को सौंपा गया था, जबकि 2024 में रेलवे विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने मेट्रो परियोजना के लिए एक तुर्की कंपनी के साथ समझौता किया। तुर्की के ऑपरेटरों ने की पाकिस्तान की मदद लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और उसके बाद की घटनाओं ने भारत सरकार को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। तुर्की ने न केवल पाकिस्तान को सैन्य ड्रोन उपलब्ध कराए, बल्कि यह भी सामने आया कि तुर्की के ऑपरेटरों ने पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में सहायता की। यह प्रमुख वजह है कि अब सभी तुर्की कंपनियों से जुड़े प्रोजेक्ट्स की गहन समीक्षा की जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “सरकार सभी तुर्की परियोजनाओं और समझौतों को फिर से जांच रही है, भले ही वे समाप्त हो चुके हों। हर सौदे और परियोजना का पूरा डेटा इकट्ठा किया जा रहा है।” सरकार के इस कदम के पीछे एक बड़ा कारण तुर्की का लगातार कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बयानबाजी करना और पाकिस्तान के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियां हैं। भले ही अब तक किसी भी परियोजना को औपचारिक रूप से रद्द नहीं किया गया है, लेकिन संकेत साफ हैं- भारत अपनी विदेश नीति में ‘जरूरी बदलाव’ की ओर बढ़ रहा है। वाणिज्य मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने बताया, “कुछ दीर्घकालिक समझौते तत्काल प्रभाव से प्रभावित नहीं हो सकते, लेकिन ताजा परिस्थितियां और तुर्की का रवैया भविष्य के निवेश और साझेदारियों को प्रभावित कर सकता है।” कई परियोजनाओं में तुर्की की कंपनियां भागीदार भारत में तुर्की की मौजूदगी को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। लखनऊ, पुणे और मुंबई जैसे शहरों में मेट्रो परियोजनाओं में तुर्की की कंपनियां भागीदार हैं। गुजरात में एक संयुक्त उद्यम के तहत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी स्थापित की गई है। इसके अलावा, एक प्रमुख तुर्की विमानन कंपनी भारतीय हवाई अड्डों पर सेवाएं प्रदान कर रही है। तुर्की की कंपनी सलेबी एविएशन भारत के आठ प्रमुख हवाई अड्डों पर कार्गो हैंडलिंग जैसे हाई-सिक्योरिटी कार्यों में शामिल है। इनमें हवाई अड्डों में दिल्ली, मुंबई और चेन्नई शामिल हैं। इस लिहाज से पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई में तुर्की ऑपरेटरों के शामिल होने के खुलासे ने भारत में सुरक्षा चिंताएं बढ़ी दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन संवेदनशील क्षेत्रों में तुर्की की भागीदारी को देखते हुए, भारत सरकार इन सौदों की गहन जांच कर सकती है ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। कम शोर, सख्त संदेश 2017 में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मीडिया, शिक्षा और कूटनीतिक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए कई समझौते हुए थे। लेकिन आठ साल बाद अब ये समझौते कागजों पर ही सिमटते नजर आ रहे हैं। सरकार की मौजूदा रणनीति कम शोर, सख्त संदेश वाली प्रतीत हो रही है। फिलहाल किसी परियोजना को आधिकारिक रूप से समाप्त नहीं किया गया है, लेकिन अंदरखाने एक ठोस बदलाव की तैयारी चल रही है। भारत अब अपने रणनीतिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए ऐसे व्यापारिक रिश्तों पर पुनर्विचार कर रहा है जो देश की विदेश नीति और सुरक्षा नीतियों से मेल नहीं खाते। तुर्की का हर मोर्चे पर बहिष्कार जारी अखिल भारतीय सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने फिल्म शूटिंग और सांस्कृतिक सहयोग के लिए तुर्की का “पूर्ण बहिष्कार” करने की घोषणा की है। AICWA ने X पर कहा, “तुर्की में तत्काल प्रभाव से कोई भी बॉलीवुड या भारतीय फिल्म प्रोजेक्ट शूट नहीं किया जाएगा। किसी भी भारतीय निर्माता, प्रोडक्शन हाउस, निर्देशक या फाइनेंसर को तुर्की में कोई भी फिल्म, टेलीविजन या डिजिटल कंटेंट प्रोजेक्ट ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।” 

सैयामी खेर ने शूटिंग से लिया ब्रेक, नासिक पहुंची आयरनमैन 70.3 ट्रायथलॉन की तैयारी के लिए

मुंबई, बॉलीवुड अभिनेत्री और एथलीट सैयामी खेर ने मुंबई की भागदौड़ और अपनी शूटिंग की व्यस्तता से ब्रेक लिया है और अब वह नासिक पहुंच गई हैं, जहां वह अपनी आने वाली आयरनमैन ट्रायथलॉन रेस के लिए गंभीर तैयारी कर रही हैं। यह दुनिया की सबसे कठिन एंड्योरेंस रेस में से एक मानी जाती है। वर्ष 2024 में उन्होंने पहली बार इसमें हिस्सा लिया था और आधी मैराथन पूरी कर इतिहास रचा था। अब वह लगातार दूसरे साल इस अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में हिस्सा लेने जा रही हैं। फिटनेस के प्रति अपनी लगन और अनुशासित जीवनशैली के लिए पहचानी जाने वाली सैयामी मानती हैं कि नासिक, उनका होमटाउन, शांति और प्राकृतिक वातावरण के कारण ट्रेनिंग के लिए सबसे सही जगह है। नासिक लौटने और अपनी तैयारी के बारे में बात करते हुए सैयामी ने कहा,”मैं एक नई साउथ फिल्म की शूटिंग कर रही थी (जिसका अभी ऐलान नहीं हुआ है) और आईपीएल के दौरान क्रिकबज़ पर भी व्यस्त थी। मुझे एक ब्रेक की ज़रूरत थी, आराम के लिए नहीं, बल्कि अपनी आयरनमैन की तैयारी को पूरा ध्यान देने के लिए। मेरा अगला आयरनमैन 70.3 रेस, जो यूरोपियन चैंपियनशिप है, स्वीडन में है और अब वह सिर्फ दो महीने दूर है। मुझे पता था कि यह रेस पिछली बार से कहीं ज़्यादा कठिन होने वाली है। इसका ट्रैक, चढ़ाई, सबकुछ बहुत अलग है। नासिक आकर मुझे एहसास हुआ कि मुझे कितनी ज्यादा मेहनत करनी है। झील में तैराकी करना, पहाड़ियों पर साइक्लिंग और लंबी दौड़, ये सब मुझे अपनी सीमाएं दिखा रही हैं। मैं हर दिन चार घंटे से ज्यादा की ट्रेनिंग कर रही हूं, ये बहुत थका देने वाला है लेकिन बेहद फायदेमंद भी। मैं पूरी आयरनमैन रेस के बारे में सोचने से पहले एक और हाफ ट्रायथलॉन करना चाहती थी। उम्मीद कर रही हूं कि सब अच्छा हो!”  

सुशासन तिहार : मुख्यमंत्री साय पहुंचे बस्तर संभाग के अतिदूरस्थ और आदिवासी बहुल ग्राम मुलेर

 रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर संभाग के अतिदूरस्थ और आदिवासी बहुल ग्राम मुलेर का दौरा किया। यह गांव दंतेवाड़ा जिले की सीमा पर स्थित अंतिम गांवों में से एक है, जहाँ अब नियद नेल्लानार योजना के तहत समावेशी विकास कार्य तेज़ी से हो रहे हैं।  मुख्यमंत्री साय का ग्रामीणों ने महुआ, आमपत्ती से बने पारंपरिक हार और गौर मुकुट पहनाकर आत्मीय स्वागत किया। मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह और पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम का भी छिंद पत्तों से बने पारंपरिक गुलदस्तों से अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री साय ने इमली के पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर ग्रामवासियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की ज़मीनी समस्याएं सुनीं और विकास की प्राथमिकताओं पर चर्चा की। उन्होंने राशन दुकान का निरीक्षण किया, जहां हितग्राहियों से बातचीत कर राशन वितरण की नियमितता, गुणवत्ता, और उपयोग की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने खाद्यान्न का वजन भी मौके पर करवाया और एक हितग्राही का राशन कार्ड देखा। मुख्यमंत्री साय ने आंगनबाड़ी में बच्चों से आत्मीय वार्तालाप कर उनके अक्षर ज्ञान, रंग-पहचान आदि की जानकारी ली और बच्चों को चॉकलेट वितरण किया।  मुख्यमंत्री साय ने मौके पर ही कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं, जिनमें अंदल कोसम माता मंदिर निर्माण के लिए 4 लाख रूपए की स्वीकृति, ग्राम में उप स्वास्थ्य केन्द्र स्थापना, नाहाड़ी तक संपर्क सड़क का निर्माण तथा गांव के सभी पारा को जोड़ने हेतु पुलिया और सीसी सड़क निर्माण के लिए 5 लाख रूपए की स्वीकृति शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि जल्द ही शिविर लगाकर वनाधिकार मान्यता पत्र, आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड बनाने की कार्यवाही की जाएगी।  मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर प्रदेश की 10वीं बोर्ड परीक्षा में 9वां स्थान प्राप्त करने वाली दंतेवाड़ा की छात्रा रमशिला नाग से भेंट की, उसे पुष्पगुच्छ भेंटकर और मिठाई खिलाकर सम्मानित किया, और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।  ग्राम मुलेर में मुख्यमंत्री साय का यह दौरा न केवल सुशासन की संवेदनशीलता का प्रतीक रहा, बल्कि यह भी साबित करता है कि राज्य सरकार प्रदेश के हर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के लिए कटिबद्ध है। दंतेवाड़ा जिले की ग्राम पंचायत मुलेर: योजनाओं के क्रियान्वयन से हो रहा सर्वांगीण विकास  उल्लखेनीय है कि छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की दूरस्थ ग्राम पंचायत मुलेर विकास की नई इबारत लिख रही है। सीमित संसाधनों के बावजूद विभिन्न सरकारी योजनाओं के कुशल क्रियान्वयन ने इस गांव को सशक्तिकरण, स्वावलंबन और सेवा की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान किया है।  बड़े बचेली विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मुलेर जिला मुख्यालय से लगभग 90 किमी दूर स्थित है। कुल 112 परिवारों में 474 लोग निवासरत हैं, जिनमें 100 प्रतिशत माड़िया जनजाति के लोग हैं। गांव में दो आंगनबाड़ी केन्द्र (बाल्केपारा व पटेलपारा) संचालित हैं। गांव में 6 महिला स्व-सहायता समूह कार्यरत हैं, जिनमें लक्ष्मी समूह को डीएमएफ मद से ट्रैक्टर प्रदाय किया गया है। इसका उपयोग खेती के साथ-साथ किराए पर भी किया जा रहा है। बीपीएल कार्डधारी परिवारों को राशन की नियमित आपूर्ति की जा रही है। गांव में सौर ऊर्जा से होम लाइटिंग की व्यवस्था है। महतारी वंदन योजना अंतर्गत ग्राम मुलेर में महिलाएँ महतारी वंदन योजना से लाभान्वित हो रही हैं, जिससे उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ आत्मसम्मान का अनुभव हो रहा है। मुलेर ग्राम पंचायत सुदूर आदिवासी क्षेत्र में सरकारी योजनाओं की जमीनी पहुँच और सुचारू क्रियान्वयन का एक अनुकरणीय उदाहरण है। यहां जनभागीदारी और प्रशासनिक तत्परता से विकास की दिशा में सतत और ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

जोस बटलर गुजरात टाइटन्स के आखिरी तीन लीग मैच खेलने के नहीं खेलेंगे, प्लेऑफ में कमी खलेगी

नई दिल्ली इंग्लैंड के टी20 स्टार खिलाड़ी जोस बटलर गुजरात टाइटन्स के आखिरी तीन लीग मैच खेलने के बाद राष्ट्रीय टीम में शामिल होने के लिए रवाना हो जाएंगे क्योंकि इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) प्लेऑफ उनके देश की 29 मई से वेस्टइंडीज के खिलाफ शुरू हो रही सफेद गेंद की श्रृंखला के दौरान ही होंगे। गुजरात टाइटन्स 11 मैच में 16 अंक के साथ लीग चरण के बाद शीर्ष दो टीमों में शामिल रहेगी क्योंकि उसके दिल्ली कैपिटल्स (18 मई), लखनऊ सुपर जायंट्स (22 मई) और चेन्नई सुपर किंग्स (25 मई) के खिलाफ तीन मैच बचे हैं। रिपोर्ट के अनुसार श्रीलंका के कुसल मेंडिस प्लेऑफ चरण के दौरान बटलर की जगह लेंगे। इंग्लैंड के अन्य मुख्य खिलाड़ियों में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के मोईन अली के अलावा जोफ्रा आर्चर (राजस्थान रॉयल्स), सैम करन और जेमी ओवरटन (दोनों चेन्नई सुपर किंग्स) भी वापस नहीं आ रहे हैं। हालांकि लियाम लिविंगस्टोन ऑस्ट्रेलिया के टिम डेविड के साथ टूर्नामेंट के बचे हुए हिस्से के लिए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) में शामिल हो रहे हैं। पता चला है कि मोईन अली चोट से जूझ रहे हैं। बुधवार को पीटीआई ने बताया था बांग्लादेश के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान का आईपीएल में खेलना संदिग्ध बना हुआ है जबकि दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें जेक फ्रेजर मैकगुर्क के जगह शामिल किया था। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर को अभी तक बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिला है और वह इस समय 17 से 30 मई के बीच संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान के खिलाफ पांच टी20 मैच खेलने के लिए यूएई में हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लघंन नहीं किया जा सकता है जिससे यह देखना दिलचस्प होगा कि BCB मुस्तफिजुर की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अनुपस्थिति को मंजूरी देता है या नहीं। हालांकि अब भी कुछ समय बचा है और दिल्ली कैपिटल्स को उम्मीद है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड की मदद से एक निश्चित समझौते पर पहुंचा जा सकता है। वहीं दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज मार्को यानसेन पंजाब किंग्स टीम में फिर से शामिल होंगे। पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल की तैयारी के लिए राष्ट्रीय टीम में शामिल होने से पहले बचे हुए लीग मैच में ही खेलेंगे। दक्षिण अफ्रीका के सभी खिलाड़ियों को उनके क्रिकेट बोर्ड ने फाइनल की पूर्व तारीख के एक दिन बाद 26 मई तक वापस रिपोर्ट करने के लिए कहा था। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के कारण आईपीएल को एक सप्ताह के निलंबित करने बाद 17 मई से फिर शुरू किया गया है जिससे अब आईपीएल फाइनल तीन जून को होगा।

यूपी सरकार ने गरीबों की थाली तक राशन पहुंचाने के लिए खोला खजाना, 179.42 करोड़ रुपए किये स्वीकृत

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार हर जरूरतमंद तक राशन पहुंचाने की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दे रही है। योगी सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के अंतर्गत उचित दर वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए 179.42 करोड़ रुपए की बड़ी धनराशि स्वीकृत की है। यह धनराशि उठाई, धराई और अंतर्राज्यीय संचालन से लेकर उपभोक्ताओं तक राशन सामग्री के सुचारू वितरण के लिए स्वीकृत की गई है, जो खाद्य एवं रसद विभाग की कार्यक्षमता को नई गति देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के गरीबों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत योगी सरकार एक-एक पात्र गरीब को चिन्हित कर राशन कार्ड जारी कर रही है। प्रदेश में अंत्योदय कार्ड लाभार्थियों की संख्या 1.29 करोड़ से अधिक है। अब तक प्रदेश में 3.16 करोड़ से अधिक परिवारों के पात्र गृहस्थी राशन कार्ड और 40.73 लाख से अधिक परिवारों के अंत्योदय राशन कार्ड बनाए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य हर जरूरतमंद तक राशन पहुंचाना है और इसके लिए अभियान चलाकर पात्रता की पहचान की जा रही है। उपर्युक्त धनराशि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ली गई है, जिसके अंतर्गत केंद्रांश और राज्यांश का अनुपात 50-50 रखा गया है। इस योजना का उद्देश्य राज्य भर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को और अधिक पारदर्शी, सक्षम और व्यापक बनाना है, ताकि लाभार्थियों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके। इसमें अंतर्राज्यीय परिवहन, भंडारण, सामग्री की लदान-उतरान, उचित दर दुकानों तक राशन की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था शामिल है। यह राशि खाद्य भंडारण एवं आपूर्ति श्रृंखला की बुनियादी संरचना को मजबूत करने के लिए खर्च की जाएगी, जिससे किसी भी स्तर पर खाद्यान्न वितरण में बाधा न आए। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी आयुक्त, खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा की जाएगी, जिन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि योजना पारदर्शी तरीके से लागू हो और इसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। योगी सरकार ने निर्देश दिया है कि पूर्व में दी गई वित्तीय स्वीकृतियों और योजनाओं से कोई दोहराव न हो तथा हर तिमाही में आवश्यकतानुसार बजट का निर्धारण कर खर्च किया जाए। योगी सरकार गरीबों, जरूरतमंदों और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक राशन और पोषण पहुंचाने को लेकर पूरी तरह गंभीर है। योगी सरकार ने राशन वितरण में किसी भी तरह का घपला नहीं हो, इसके लिए ई-केवाईसी और आधार सत्यापन प्रणाली लागू की है। इसके तहत राशन कार्डधारकों को अब देश के किसी भी उचित दर दुकान पर ई-केवाईसी कराने की सुविधा मिल रही है। राशन वितरण में ई-पॉस मशीनों के उपयोग ने पारदर्शिता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। इन मशीनों के जरिए अन्न का वितरण सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है। यह तकनीकी नवाचार न केवल समय पर राशन उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि गरीबों के लिए खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत कर रहा है। पात्र कार्डधारकों को प्रति यूनिट 5 किलो गेहूं और चावल दिया जा रहा है। पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट 2 किलो गेहूं और 3 किलो चावल (कुल मिलाकर 5 किलो) फ्री में दिया जा रहा है। वहीं, अंत्योदय कार्ड धारक को एकमुश्त 14 किलो गेहूं और 21 किलो चावल (कुल 35 किलो) दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय का बस्तर दौरा, बदलता बस्तर हेजटैग के साथ सोशलमीडया पर दिन भर टॉप ट्रेंड किया

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आज का बस्तर दौरा सोशल मीडिया प्लेटफार्म ’एक्स’ पर #BadaltaBastar के साथ दिन भर टॉप पर ट्रेंड करता रहा। मुख्यमंत्री साय आज सवेरे दंतेवाड़ा जिले के मुलेर पंहुचने के साथ ही सोशल मीडिया एक्स  में टेªंड करना शुरू हो गया और लगातार दिन भर टॉप 6 हजार से अधिक पोस्ट के साथ टॉप पर बना रहा।  उल्लेेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के बीजापुर के कर्रेगुट्टा पहाड़ियों पर जवानों के सबसे लम्बे सफल आपरेशन के बाद जवानों के बीच पंहुचने …

25 हजार की रिश्वत लेते एसीबी की टीम ने तहसीलदार को किया गिरफ्तार

अलवर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) कोटा ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए चेचट तहसीलदार भरत कुमार यादव को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह रिश्वत एक व्यक्ति से जमीन की रजिस्ट्री कराने के एवज में मांगी गई थी। शिकायत के बाद ACB कोटा ने जाल बिछाकर तहसीलदार को गिरफ्तार किया। इसके बाद ACB ने अलवर में भी तहसीलदार के घर पर छापेमारी की और वहां से जो भी दस्तावेज मिले, उन्हें जब्त कर लिया। दरअसल, चेचट तहसीलदार भरत कुमार यादव की गिरफ्तारी के बाद कोटा और अलवर ACB की संयुक्त टीम ने तहसीलदार के अंसल टाउन के मकान पर देर रात तक तलाशी अभियान चलाया। ASP महेंद्र कुमार मीणा के नेतृत्व में चल रही इस कार्रवाई में कई अहम दस्तावेज और फाइलें बरामद हुई हैं। टीम ने मकान से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रजिस्ट्री संबंधी रिकॉर्ड और अन्य कागजात जब्त किए हैं। रिश्वतखोरी का यह मामला कितने समय से चल रहा था, इसकी जांच भी ACB ने शुरू कर दी है। इसमें और कौन-कौन अधिकारी या दलाल शामिल हो सकते हैं, इसके बारे में भी पूछताछ की जा रही है। एसीबी जल्द ही पूरे मामले का खुलासा कर सकती है।  

नोएडा में अब तक 2 लाख फ्लैट खरीदारों को कब्जा दिया, लेकिन 18 हजार की ही रजिस्ट्री, DM ने बिल्डरों को भेजा नोटिस

नई नोएडा नोएडा के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में फ्लैट की रजिस्ट्री में देरी पर ऐक्शन की तैयारी में है। डीएम ने 95 बिल्डरों को नोटिस जारी करते हुए तलब किया है। इस मामले में जिला प्रशासन ने एक बैठक बुलाई है जिसमें फ्लैट की रजिस्ट्री न होने की शिकायत करने वाले खरीदारों को भी बुलाया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अब तक 2 लाख फ्लैट खरीदारों को कब्जा तो दे दिया गया है, लेकिन रजिस्ट्री को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। कई फ्लैट मालिक तो पिछले 10 सालों से इसका इंतजार कर रहे हैं। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित अमिताभ कांत समिति की सिफारिशें लागू होने के बावजूद कई बिल्डर खरीदारों को उनके फ्लैट का कब्जा तो दे रहे हैं लेकिन फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं हुई है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में लगभग दो लाख खरीदारों को फ्लैट का कब्जा मिल चुका है, लेकिन अब तक केवल 18 हजार फ्लैट की ही रजिस्ट्री हो पाई है। कई खरीदार करीब एक दशक से इंतजार कर रहे हैं और बिल्डरों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही दिया जा रहा है। अब डीएम के नोटिस के बाद बिल्डरों पर ऐक्शन शुरू हो सकता है इस बारे में पूछे जाने पर सहायक पुलिस महानिदेशक बृजेश कुमार ने मीडिया को बताया कि लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि बिल्डर जानबूझकर रजिस्ट्री में देरी कर रहे हैं। इस संबंध में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण क्षेत्र के लगभग 95 बिल्डरों को नोटिस जारी किया गया हैं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा आयोजित बैठक में बिल्डरों को खरीदारों के सवालों का जवाब देना होगा। उनके अनुसार, अगर कोई बिल्डर बैठक में शामिल नहीं होता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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