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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रथम फील्ड मार्शल स्व. करिअप्पा की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

भोपाल       मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय सेना के प्रथम कमांडर इन चीफ, फील्ड मार्शल स्व. के.एम. करिअप्पा की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है।       मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर फील्ड मार्शल करिअप्पा के राष्ट्र निर्माण में योगदान को नमन करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत को सशक्त बनाने और सेना की सुदृढ़ता के लिए किए गए उनके प्रयास अविस्मरणीय रहेंगे। देश सेवा के आदर्श के रूप में वे सदैव जवानों के प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।       मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा और गौरव के लिए स्व. करिअप्पा का जीवन हम सभी के लिए प्रेरक है। उनके योगदान का सदैव स्मरण किया जाएगा।       उल्लेखनीय है कि फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर इन चीफ थे, जिन्होंने 15 जनवरी 1949 को ब्रिटिश जनरल फ्रांसिस बुचर से कमान संभाली थी। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने न केवल पेशेवर मजबूती हासिल की, बल्कि अनुशासन और समर्पण के नए मानक भी स्थापित किए।  

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्वोत्तर क्षेत्र को भविष्य के विकास का केंद्र बताया

नई दिल्ली केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पाने में पूर्वोत्तर राज्यों की अहम भूमिका होगी। ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर समिट’ के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम “हमारे अद्भुत ‘अष्ट लक्ष्मी’- आठ राज्यों को प्रदर्शित करेगा।” प्रधानमंत्री मोदी का संकल्प और प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करते हैं कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भविष्य में विकास का प्रमुख केंद्र बने केंद्रीय मंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प, प्रतिबद्धता और उनका विजन यह सुनिश्चित करना है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भविष्य के विकास और भारत के भविष्य के मार्ग का केंद्र बने, क्योंकि देश 2047 तक विकसित भारत के अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।” पूर्वोत्तर जिसे एक दशक पहले तक भारत का दूरस्थ क्षेत्र माना जाता था, आज भारत के विकास का केंद्र बन गया है सिंधिया ने कहा कि सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) का 10 प्रतिशत (लगभग एक लाख करोड़ रुपए) प्रति वर्ष पूर्वोत्तर को दिया जाता है। इसने रीजन के विकास में अहम भूमिका निभाई है। पूर्वोत्तर जिसे एक दशक पहले तक भारत का दूरस्थ क्षेत्र माना जाता था। आज भारत के विकास का केंद्र बन गया है। आज पूर्वोत्तर को आर्थिक शक्ति के रूप में उभरने के लिए मंच तैयार कर दिया है, जो न केवल भारत के लिए बल्कि विश्व के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है उन्होंने कहा, “पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संसाधनों का भंडार और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति ने इस क्षेत्र को दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली प्रवेश द्वार में बदल दिया है।” उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षों के प्रतिबद्ध निवेश, बुनियादी ढांचे पर प्रधानमंत्री के पिछले 10 वर्षों के संकल्प, स्वास्थ्य देखभाल, पनडुब्बी केबल पर शिक्षा ने आज पूर्वोत्तर को आर्थिक शक्ति के रूप में उभरने के लिए मंच तैयार कर दिया है, जो न केवल भारत के लिए बल्कि विश्व के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है।” 23-24 मई को होने वाला ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर समिट’ क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देगा 23-24 मई को होने वाला ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर समिट’ क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देगा।शिखर सम्मेलन का फोकस पर्यटन और आतिथ्य, कृषि-खाद्य प्रसंस्करण और उससे जुड़े हुए क्षेत्र, कपड़ा, हथकरघा और हस्तशिल्प, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कौशल विकास, आईटी/आईटीईएस, इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स, एनर्जी और मनोरंजन एवं खेल पर होगा।

आतंकवादियों की फैक्‍ट्री चलाने वाले पाकिस्‍तान को भारत ने दिया जवाब, तीसरे देश की मध्‍यस्‍तता को नकारा

डॉ राघवेंद्र शर्मा ऑपरेशन सिंदूर ने और उसे अंजाम देने वाली भारतीय सेना ने देश के प्रत्येक नागरिक का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। वहीं यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस कार्रवाई को एक ऐसे मुकाम तक पहुंचा दिया है, जिसके परिणाम स्वरूप भविष्य में पाकिस्तान और वहां बैठे आतंकी भारत पर हमला करना तो दूर उसकी ओर आंख उठा कर देखने का दुस्साहस भी ना कर सकेंगे। प्रधानमंत्री की मंशा अनुरूप हमारी सेना के जांबाज सिपाहियों ने भी पाकिस्तान की नापाक हरकतों का मुंह तोड़ जवाब दे कर यह जता दिया कि पहले हम किसी को छेड़ते नहीं, और यदि कोई हमें छेड़े तो फिर उसे हम छोड़ते नहीं। हालांकि भारत सरकार ने शत्रु देश का काफी नुकसान करने के बावजूद अपनी सैन्य कार्रवाई को औपचारिक रूप से युद्ध का नाम नहीं दिया। किंतु जिस प्रकार से हमारी सीमाओं के आसपास पड़ोसी देश के ड्रोन देखे गए, मिसाइलें गिराने की असफल कोशिशें हुईं। जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सैन्य संसाधनों को हवा में ही नष्ट किया और शत्रु देश के अनेक एयरबेस उड़ाने में सफल रही। पाकिस्तान में संचालित आतंकियों के अनेक प्रशिक्षण केंद्रों को ध्वस्त किया गया। इस कार्रवाई में 100 से अधिक ऐसे आतंकवादी मारे गए, जो भारत सहित दुनिया की अनेक आतंकवादी घटनाओं में शामिल थे या फिर अनगिनतआतंकवादी घटनाओं के रणनीतिकार रहे। भारत की जवाबी कार्रवाई में अनेक ऐसे लोग भी मारे गए जो पाकिस्तान सरकार और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर वहां आतंकवाद की फैक्ट्री चला रहे थे। उपरोक्त स्थानों पर आतंकवादियों को प्रशिक्षित कर उन्हें दुनिया भर में शांति भंग करने के लिए निर्यात कर रहे थे। भारतीय सेना की आक्रमकता को देखते हुए तत् समय ही यह स्पष्ट हो गया था कि परिस्थितियां औपचारिक युद्ध के मार्ग पर कदम आगे बढ़ा चुकी थीं। इसी से भयाक्रांत होकर पाकिस्तानी हुक्मरान अमेरिकी दरबार में ढोक लगाने को मजबूर हुए। यही वजह रही कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों के बीच स्वस्फूर्त मध्यस्थता करने के लिए प्रयासरत दिखाई दिए। हालांकि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और तीनों सेनाओं के भारतीय प्रमुखों ने प्रेस वार्ताओं के माध्यम से तत्काल यह स्पष्ट कर दिया कि यह विशुद्ध दो देशों के बीच का मामला है, इसमें भारत को किसी तीसरे देश की मध्यस्थता कतई स्वीकार नहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी भली भांति जानते हैं कि भारत पाकिस्तान की अकल ठिकाने लगाने के मूड में है और वह इस मामले में किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा। यही वजह रही की ट्रंप केवल दावा करते दिखाई दिए कि भारत पाकिस्तान सीज फायर के लिए तैयार हो गए हैं।  यह बात भी अब स्पष्ट हो चुकी है कि पाकिस्तान के शीर्ष सेना अधिकारी और वहां के हुक्मरान भारत से सीज फायर की गुहार लगा चुके हैं ।  इसे भारत का बड़प्पन ही कहा जाएगा कि उसने पाकिस्तान की गिड़गिड़ाहट को नजरअंदाज नहीं किया। फल स्वरुप कुछ देर के लिए दुनिया ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीज फायर की स्थिति भी देखी। लेकिन हमारी सरकार और सेना ने इस बीच एहतियाती इंतजाम ढीले नहीं किये और पाकिस्तान की ओर से होने वाली हरकतों पर नजर बनाए रखी। जैसी कि पुख्ता धारणा है, पाकिस्तान अस्तित्व में आने के बाद से ही भरोसेमंद देश नहीं रहा है। इस बार भी उसने गैर भरोसेमंद काम ही किया। एक ओर वह अमेरिका को माध्यम बनाकर भारत सरकार की बारगाह में सैन्य कार्यवाही रोकने की गुहार लगाता रहा, तो दूसरी ओर उसने भारतीय सीमा के भीतर एक बार फिर सशस्त्र ड्रोन भेजने की हिमाकत कर डाली। अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि शांति की गुहार लगाकर भारतीय सीमाओं में ड्रोन भेजने की स्थिति पाकिस्तानी सेना और वहां की चुनी हुई सरकार के बीच उठा पटक मचने के चलते बनी होगी। क्योंकि पाकिस्तान का इतिहास रहा है, वहां के हुक्मरान आवाम की चिंता किए बगैर खुद की सलामती सुनिश्चित करने और अपना राजनीतिक उल्लू साधने में संलग्न बने रहते हैं। जबकि पाकिस्तान की सेना हमेशा इस ताक में बनी रहती है कि कब सरकार गलती करे और कब उसका तख्ता पलट कर पाकिस्तान में सैन्य शासन स्थापित किया जाए। खैर, यह उनका अंदरूनी मामला है। हमारा काम तो केवल इतना सा है कि हमारी सेना ने उन सभी ड्रोन को या तो हवा में ही नष्ट कर दिया या फिर उन्हें निष्क्रिय करके वापस पाकिस्तान की ओर भागने को मजबूर किया। यानि एक बार फिर सिद्ध हुआ कि पाकिस्तान कहता कुछ और है, करना कुछ और चाहता है। इससे भी ज्यादा हास्यास्पद बात यह है कि उसकी अपेक्षाओं से विपरीत जाकर हो कुछ और ही जाता है। जहां तक भारत से मुकाबले की बात है तो इस मामले में पाकिस्तान ने हमेशा मुंह की ही खाई है।  यदि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार आगे बढ़ रहे नए भारत की बात की जाए तो इसी कालखंड में सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के माध्यम से पाकिस्तान की अकल ठिकाने लगाई जा चुकी है। अब जब एक बार फिर पाकिस्तान ने अपनी नापाक हरकतों से जम्मू कश्मीर की भूमि को रक्त रंजित किया, तो भारत का कोप उस पर कुछ ज्यादा ही भारी पड़ गया। पाकिस्तान में स्थित आतंकवाद के अड्डों और वहां सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण जगहों पर भारतीय सेना ने एक  प्रकार से आफत ही बरसा दी । यानि परिस्थितियां कुछ ऐसी निर्मित हुईं कि प्रत्येक भारतीय नागरिक  पाकिस्तान को ठिकाने लगाने के मूड में आ गया। यह बात अपनी जगह सही भी है कि जब दो देश युद्ध लड़ते हैं, तब लड़ाई केवल दो सेनाओं के बीच नहीं होती। और फिर भारत जैसे जिम्मेदार देश को तो एक साथ अनेक मोर्चों पर युद्ध लड़ना होता है। उसे अपनी सैन्य कार्रवाई एकदम सटीक निशाने पर करनी होती है, जिसका अपेक्षित परिणाम शत प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति करता हो। इसी के साथ उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वही  प्रामाणिकता प्रदर्शित करनी होती है, जैसा वह चाहता है अथवा जैसा उसने सोच रखा होता है। इसी के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुश्मन की नापाक हरकतों  को ठीक तरह से एक्सपोज … Read more

तुर्किए में शांति वार्ता आज राष्ट्रपति पुतिन ने बैठक से बनाई दूरी

अंकारा  व्लादिमीर पुतिन ने जब हाल ही में तुर्की में वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ शांति वार्ता में शामिल होने पर अपनी सहमति दी तो दुनिया को लगा कि रूस और यूक्रेन के बीच वर्षों से जारी संघर्ष का अंत हो सकता है। लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है वह परेशान करने वाली है। कहा जा रहा है कि पुतिन ने तुर्की में प्रस्तावित यूक्रेन-रूस शांति वार्ता में फिलहाल शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, जेलेंस्की ने भी अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा है कि जब तक पुतिन नहीं आते हैं तो वह भी इस वार्ता में शामिल नहीं होंगे। पुतिन के इस निर्णय के पीछे मुख्य वजह यह मानी जा रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस वार्ता में शामिल होने की कोशिश कर रहे थे। अगर दोनों देशों के बीच सहमति बनती है तो वह इसका श्रेय लेने की कोशिश करते। सूत्रों का मानना है कि पुतिन ट्रंप को कूटनीतिक स्तर पर किसी भी तरह की बढ़त नहीं देना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने न केवल खुद को इस वार्ता से दूर रखा, बल्कि अपने वरिष्ठ राजनयिकों को भी वार्ता में शामिल नहीं होने दिया। हालांकि, डिप्टी स्तर के कुछ मंत्रियों और अधिकारियों को जरूर भेजने की बात कही है। 14 मई को क्रेमलिन द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, रूस ने शांति वार्ता के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी कर दी है। इसमें ना तो पुतिन शामिल हो रहे हैं और ना ही विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव। रूसे ने किसी वरिष्ठ अधिकारी को भी इसमें भेजना का फैसला टाल दिया है। हालांकि एक प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात जरूर कही है। जिसमें राष्ट्रपति के सलाहकार और प्रचार रणनीतिकार व्लादिमीर मेडिंस्की, उप विदेश मंत्री मिखाइल गैलुजिन, सैन्य खुफिया प्रमुख इगोर कोस्त्युकोव और उप रक्षा मंत्री अलेक्जेंडर फोमिन शामिल होंगे। पुतिन के अलावा किसी से बात नहीं करेंगे जेलेंस्की पुतिन के इस फैसल पर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने तुर्की में व्लादिमीर पुतिन के साथ संभावित बैठक से पहले यह कहकर दांव बढ़ा दिया कि वह राष्ट्रपति के अलावा किसी अन्य रूसी प्रतिनिधि से बातचीत नहीं करेंगे। जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पुतिन से मिलने के आग्रह के बाद ही तुर्की की यात्रा करेंगे। सीएनएन ने जब उनसे बैठक के एजेंडे के बारे में पूछा तो जेलेंस्की ने कहा कि युद्धविराम समझौते के अलावा कुछ भी विफल ही साबित होगा। ऐसे में अगर दोनों देशों के प्रमुख के बगैर यह वार्ता होती भी है तो इसका खास संदेश नहीं जाएगा। यह भी एक कारण हालांकि एक तर्क भी दिया जा रहा है कि पुतिन द्वारा स्वयं को वार्ता से दूर रखना इस बात का संकेत हो सकता है कि रूस फिलहाल वार्ता को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया के रूप में देख रहा है, ना कि वास्तविक समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम है। 2022 वाली वार्ता फिर से होगी शुरू? पुतिन ने युद्ध विराम के आह्वान को अस्वीकार करा और युद्ध विराम लागू होने से पहले शांति वार्ता शुरू करने पर दोर दिया है. वहीं जवाब में, ज़ेलेंस्की ने कहा है कि वह शांति वार्ता के लिए तुर्की जाएंगे और उन्होंने पुतिन को वहां मिलने के लिए आमंत्रित किया है. लेकिन पुतिन आज तुर्की नहीं जा रहे हैं. रूस ने कहा है कि 15 मई की वार्ता, फरवरी 2022 में यूक्रेन के खिलाफ रूस के पूर्ण पैमाने पर युद्ध की शुरुआत के समय तुर्की में आयोजित 2022 शांति वार्ता की बहाली होगी. जिससे अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रभाव की वजह से यूक्रेन पीछे हट गया था. क्या थी 2022 की डील? लीक हुए 2022 शांति मसौदा प्रस्ताव के मुताबिक दोनों पक्ष क्रीमिया को संधि से बाहर करने पर सहमत हुए, जिससे वह रूसी कब्जे में रहेगा और यूक्रेन उस पर रूसी संप्रभुता को मान्यता नहीं देगा. अन्य रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति का निर्णय बाद में राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और पुतिन के बीच होने वाली वार्ता में किया जाना था. इस संधि के तहत यूक्रेन कथित तौर पर नाटो या किसी अन्य सैन्य गठबंधन में शामिल होने की आकांक्षाओं को त्याग देगा, लेकिन यूरोपीय संघ में प्रवेश की अनुमति देगा. रूस ने सभी प्रतिबंधों को हटाने, कीव के भाषा और राष्ट्रीय पहचान से संबंधित कानूनों को निरस्त करने और यूक्रेन की सशस्त्र सेनाओं को सीमित करने की भी मांग की थी.

IPL पर दक्षिण अफ्रीका बोर्ड ने कुर्बान कर दी WTC फाइनल मैच की तैयारी, बदल दी प्रैक्टिस की डेट

नई दिल्ली क्रिकेट साउथ अफ्रीका ने कुछ ही घंटे पहले इस बात का ऐलान किया था कि उनके वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025 फाइनल के लिए टीम में शामिल खिलाड़ियों को IPL 2025 के प्लेऑफ्स के मुकाबले छोड़कर नेशनल ड्यूटी पर लौटना होगा। 26 मई तक वे आईपीएल में हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि, अब इस फैसले को बोर्ड ने पलट दिया है और फाइनल तक खिलाड़ियों को आईपीएल में खेलने की अनुमति है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 11 जून से लंदन के लॉर्ड्स में होने वाले WTC Final के लिए टीम 3 जून से ट्रेनिंग शुरू करेगी। बीसीसीआई ने 12 मई को इस बात की जानकारी दी थी कि 17 मई से आईपीएल फिर से शुरू होगा। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के खिलाड़ियों को लेकर असमंजस की स्थिति थी, क्योंकि उनको 11 जून से WTC फाइनल खेलना था। ये स्थिति उस सम और गहरा गई, जब आईपीएल 2025 फाइनल को 25 मई से सीधे 3 जून तक खींच दिया गया। सीएसए ने पहले डब्ल्यूटीसी फाइनल की तैयारियों के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उन्होंने बीसीसीआई को बताया था कि खिलाड़ी 26 मई को लौट आएंगे। सीएसए के नेशनल टीम और हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर एनोच एनक्वे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “वापस लौटना, खेलना या जारी रखना, यह स्पष्ट रूप से एक व्यक्तिगत निर्णय है, लेकिन एक बात हमने स्पष्ट कर दी है, और हम आईपीएल और बीसीसीआई के साथ इस पर अंतिम रूप दे रहे हैं कि डब्ल्यूटीसी की तैयारियों के मामले में हम अपनी मूल योजना पर कायम रहेंगे। टेस्ट खिलाड़ियों के वापस आने की आखिरी तारीख 26 मई है। मूल योजना में कोई बदलाव नहीं हुआ है, क्योंकि नंबर 1 प्राथमिकता WTC फाइनल है।” हालांकि, वेस्ट ऑस्ट्रेलियन टुडे की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एनक्वे अपने बयान से पलट गए और कहा कि वापसी की तारीख बदल दी गई है। एनक्वे ने कहा कि सीएसए, बीसीसीआई और आईपीएल फ्रेंचाइजी के बीच कार्यकारी और बोर्ड स्तर पर चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा, “टीम अब 3 जून को खेल के लिए ट्रेनिंग शुरू करेगी। इस मामले पर मुझसे ऊपर चर्चा की जा रही है। जमीनी स्तर पर, हम WTC फाइनल की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।” साउथ अफ्रीका के करीब एक दर्जन खिलाड़ी आईपीएल 2025 का हिस्सा हैं। इनमें से 8 खिलाड़ी ऐसे हैं, जो WTC फाइनल के लिए चुने गए हैं। इनमें कगिसो रबाडा (गुजरात टाइटन्स), लुंगी एनगिडी (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु), ट्रिस्टन स्टब्स (दिल्ली कैपिटल्स), एडेन मार्करम (लखनऊ सुपर जायंट्स), रयान रिकेल्टन (मुंबई इंडियंस), कॉर्बिन बॉश (एमआई), मार्को जेनसन (पंजाब किंग्स) और वियान मुल्डर (सनराइजर्स हैदराबाद) का नाम शामिल है। वियान मुल्डर 25 मई को फ्री हो जाएंगे, क्योंकि उनकी टीम प्लेऑफ्स की रेस से बाहर है। इसके अलावा 26 मई को ये पता चल जाएगा कि कौन-कौन सी टीम आगे बढ़ रही है। उस हिसाब से कुछ और खिलाड़ी फ्री हो जाएंगे। एलिमिनेटर के बाद भी कुछ खिलाड़ियों के फ्री होने की उम्मीद होगी। आईपीएल 2025 के प्लेऑफ्स 29 मई से 3 जून तक हैं।

ICC का ऐलान- WTC फाइनल से चूका भारत फिर भी हुई छप्परफाड़ कमाई, फिसड्डी पाकिस्तान भी हुआ मालामाल

नई दिल्ली ICC ने आज यानी गुरुवार, 15 मई को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2023-25 की प्राइज मनी का ऐलान कर दिया है। इस बार की प्राइज मनी देख हर कोई हैरान है। दरअसल, यह पिछले दो संस्करणों की तुलना में दोगुना से भी अधिक है। ICC ने WTC 2023-25 फाइनल के लिए कुल 5.76 मिलियन डॉलर की प्राइज मनी का ऐलान किया है जो भारतीय रुपए के हिसाब से 49 करोड़ 29 लाख रुपए से भी अधिक बैठती है। WTC के फाइनल में इस बार साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया की टीम पहुंची है। खिताबी मुकाबला लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान पर 11 जून से खेला जाना है। WTC फाइनल के अलावा भी ICC ने टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाली सभी 9 टीमों के लिए प्राइज मनी का ऐलान किया है। विजेता टीम को 3.6 मिलियन डॉलर डॉलर (लगभग 30.79 करोड़) की प्राइज मनी से नवाजा जाएगा, वहीं उप-विजेता को 2.16 मिलियन डॉलर (लगभग 18.47) मिलेंगे। वहीं तीसरे नंबर पर रही टीम इंडिया की भी छप्पड़फाड़ कमाई हुई है। भारतीय टीम WTC 2023-25 के फाइनल में पहुंचने से चूक गई और टीम तीसरे पायदान पर रही। भारत को 1.44 मिलियन डॉलर की प्राइज मनी से नवाजा गया है जो भारतीय रुपए के हिसाब से लगभग 12.31 करोड़ रुपए बैठती है। वहीं इस संस्करण की सबसे फिसड्डी टीम रही रही पाकिस्तान पर भी पैसों की बरसात हुई है, 9वें नंबर पर रहने के बावजूद टीम की 0.48 मिलियन डॉलर (लगभग 4.10 करोड़) की कमाई हुई है।

कान समारोह में ‘मिशन इम्पॉसिबल 8’ का प्रीमियर के दौरान हुआ कुछ ऐसा कि टॉम क्रूज काफी भावुक हो गए

कान्स कान फिल्म फेस्टिवल 2025 का दूसरा दिन हॉलीवुड स्टार टॉम क्रूज और उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मिशन इम्पॉसिबल: फाइनल रेकनिंग’ के नाम रहा। दूसरे दिन जब टॉम क्रूज कान की रेड कार्पेट पर पहुंचे तो लोगों का शोर काफी बढ़ गया। इसके बाद ‘मिशन इम्पॉसिबल: फाइनल रेकनिंग’ का प्रीमियर हुआ। फिल्म को कान में जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। ‘मिशन इम्पॉसिबल: फाइनल रेकनिंग’ को स्टैंडिंग ओवेशन मिला और काफी देर तक लोग फिल्म की तारीफ में तालियां बजाते रहे। जिसे देखकर टॉम क्रूज भावुक हो गए। टॉम क्रूज ने लोगों का जताया आभार कान में ‘मिशन इम्पॉसिबल: फाइनल रेकनिंग’ को मिली प्रतिक्रिया से फिल्म की पूरी टीम काफी खुश और भावुक हो गई। मिशन इम्पॉसिबल फ्रेंचाइजी की आखिर कड़ी के साथ इस फ्रेंचाइजी को अलविदा कहते हुए टॉम क्रूज इमोशनल हो गए। दर्शकों के भारी समर्थन के लिए टॉम क्रूज ने उनका शुक्रिया अदा किया। इस मौके पर हॉलीवुड स्टार ने कहा, “यह प्रतिक्रिया ही है जिसकी वजह से हम ऐसा करते हैं। आप ही हैं जिसकी वजह से हम ऐसा करते हैं। ये बड़े पर्दे का अनुभव ही है जिसकी वजह से हम ऐसा करते हैं।” निर्देशक क्रिस्टोफर मैकक्वेरी ने की टॉम क्रूज की तारीफ ‘मिशन इम्पॉसिबल: फाइनल रेकनिंग’ के निर्देशक क्रिस्टोफर मैकक्वेरी ने इस दौरान कहा, “यहां आने और हमारा समर्थन करने के लिए आप सभी का धन्यवाद। मैं इस असाधारण और कमाल के कलाकार को धन्यवाद देना चाहता। जब मैं आपको बताता हूं कि वे कितने असाधारण हैं, तो यह सिर्फ हर दिन काम पर आने के लिए नहीं था। यह फिल्म एक महामारी और दो इंडस्ट्री के हड़तालों के दौरान बनाई गई थी। ये दोनों फिल्में सात साल के समय में बहुत ही मुश्किलों के बीच बनाई गई थीं। यह फिल्म यहां खड़े इन सभी लोगों की कड़ी मेहनत के बिना संभव नहीं होती। यह दुनिया की सबसे असाधारण कास्ट है।” फिल्म के प्रीमियर के दौरान फिल्म की पूरी कास्ट नजर आई। भारत में 17 मई को रिलीज होगी फिल्म ‘मिशन इम्पॉसिबल: फाइनल रेकनिंग’ भारत में दुनियाभर में रिलीज होने से छह दिन पहले 17 मई को रिलीज हो रही है। इस फिल्म के लिए टॉम ने अपने स्टंट का लेवल और अपग्रेड कर दिया है। भारत में फिल्म को लेकर दर्शकों के उत्साह का अंदाजा इसी से लगाया दा सकता है कि  फिल्म की एडवांस बुकिंग शुरू होते ही महज 24 घंटों के अंदर 11,000 से ज्यादा टिकट बिक चुके हैं। कुल मिलाकर अब तक फिल्म के 45 हजार टिकट बिक चुके हैं।    

सिरोही में जमीन विवाद में हुई हत्या, पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

सिरोही सिरोही जिले की शिवगंज पुलिस ने  बीती 12 मई को कानाकोलर गांव में बादला मार्ग पर कुल्हाड़ी और लाठियों से पीटकर की गई एक व्यक्ति की हत्या के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आवश्यक कार्रवाई के बाद आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। अब पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। शिवगंज थानाधिकारी बाबूलाल राणा की अगुवाई में पुलिस ने कानाकोलर, जिला सिरोही निवासी नेनाराम पुत्र लुम्बाराम मीणा, सोनाराम पुत्र लुम्बाराम मीणा और गुलाबराम को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों से घटना को लेकर पूछताछ की जा रही हैं। पुलिस के अनुसार, जोधपुर एम्स अस्पताल में भर्ती हनुमानाराम जाट ने पुलिस को बताया गया था कि 11 मई को उसके दोस्त जसवंत सांखला ने फोन कर उसे बताया कि शिवगंज के पास उसके सहयोगी की जमीन है, वहां पर जमीन की सार-संभाल करनी है, इसलिए शिवगंज चलना है। 12 मई की सुबह करीब 9 बजे जसवंत सांखला की कार में एक अन्य दोस्त जितेंद्र जैन और कार चालक ओमाराम के साथ जोधपुर से रवाना होकर 11 बजे कानाकोलर, शिवगंज पहुंचे थे। यहां पहुंचने के बाद रघुनाथसिंह राजपूत व नेनाराम मीणा उनके पास आए और वहां चल रही साफ-सफाई पर आपत्ति जताते हुए जाने को कहा। आरोपियों को उनके द्वारा दो बार समझा-बुझाकर वापस भेजा गया, लेकिन शाम करीब 4:30 बजे के आसपास नेनाराम मीणा 2-3 अन्य लोगों के साथ आया। उन्होंने उनके मित्र जसवंत सांखला पर कुल्हाड़ी व लाठियों से हमला कर दिया। इस पर उन्होंने व ड्राइवर ओमाराम ने बीच-बचाव किया तो उन लोगों ने उनके ऊपर भी कुल्हाड़ी और लाठियों से हमला कर दिया। इस दौरान ओमाराम और जितेंद्र जैन जान बचाकर वहां से भागे, लेकिन हमले में जसवंत सांखला के शरीर पर गंभीर चोटें आने से वे वहीं गिर गए और उनकी मौत हो गई।   टीमों का गठन कर की गई  आरोपियों की तलाश घटना के बाद पुलिस टीम द्वारा मृतक के शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया गया था। इसके बाद मौके से फरार आरोपियों की तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर दबिश दी गई। आरोपियों को दस्तयाब कर पूछताछ की गई, तो उन्होंने एकराय होकर जसवंत सांखला की हत्या करना स्वीकार किया।

PM शरीफ ने टैंक के ऊपर ही असीम मुनीर और एयर मार्शल बाबर की पीठ ठोकी, तो सेना के अधिकारी उन्हें सैल्यूट दागे

इस्लामाबाद  भारतीय सशस्त्र बलों के हाथों चार दिनों तक लगातार पिटाई के बाद अब पाकिस्तान डींगे मार रहा है। ये तब है जब पूरी दुनिया में इस बात की चर्चा है कि भारत ने किस तरह से पाकिस्तान में घुसकर उसे नुकसान पहुंचाया है। कई दिनों के बाद अब अमेरिकी अखबारों ने भी सैटेलाइट तस्वीरों को छापकर बता दिया है कि किस तरह भारत ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। बावजूद इसके पाकिस्तानी नेता इसे अपनी जीत बता रहे हैं। हद तो तब हो गई जह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ बुधवार को कह दिया कि पाकिस्तान ने 1971 में भारत के हाथों हार का बदला ले लिया है। शहबाज शरीफ ने ये बात सियालकोट स्थित पसरूर छावनी परिसर में कही है। ये वही छावनी है, जिसे भारत ने जवाबी कार्रवाई के दौरान निशाना बनाया था। इस दौरान अपने संबोधन में शहबाज ने पाकिस्तानी सैनिकों से कहा, आपने 1971 की जंग का बदला ले लिया है। अब पूरा देश आपके साथ खड़ा है। इस दौरान शहबाज शरीफ ने भारत को गीदड़भभकी दी तो कश्मीर और पानी विवाद पर बातचीत की पेशकश भी कर डाली। भारत को गीदड़भभकी शहबाज शरीफ ने पीएम मोदी को गीदड़भभकी देते हुए कहा, ‘अगर आप हम पर फिर से हमला करेंगे, तो आप सब कुछ खो देंगे…” उन्होंने कहा, ‘हम युद्ध और बातचीत के लिए तैयार हैं। अब चुनाव आपका है।’ शहबाज ने पीएम मोदी के हालिया संबोधन के संदर्भ में कहा, पानी हमारी लाल रेखा है। हमारे पानी को मोड़ने के बारे में सोचना भी मत। हां, पानी और खून एक साथ नहीं बहते। आपने हमारी नीलम-झेलम जल परियोजना को भी नुकसान पहुंचाया है। कश्मीर और जल संधि पर बातचीत की पेशकश इस दौरान शहबाज ने पीएम मोदी से मतभेदों को दूर करने के लिए बातचीत की पेशकश की। उन्होंने कहा, आइए हम इस आग को बुझाएं। आइए हम कश्मीर और पानी पर बात करने के लिए एक साथ बैठें। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। 1960 में हुई संधि के तहत पाकिस्तान को तीन नदियों का पानी मिलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत पानी रोकता है तो पाकिस्तान में हाहाकार मच सकता है। मोदी की नकल करने निकले शहबाज पाकिस्तानी पीएम का पसरूर दौरा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नकल था। पीएम मोदी ने आदमपुर एयरबेस का दौरा किया था, जिसे पाकिस्तान ने निशाना बनाने का दावा किया था। इस दौरान पीएम मोदी के पीछे ही एस-400 एयर डिफेंस और राफेल विमान खड़ा नजर आया, जो पाकिस्तान के दावों की पोल खोलने के लिए काफी था। इसके उलट जब शहबाज शरीफ पसरूर सैन्य अड्डे पर पहुंचे तो एयरबेस के हिस्से को दिखाया ही नहीं गया, ताकि पाकिस्तान की रही सही इज्जत भी न जाने पाए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नेने जारी की लाडली बहना योजना की 24वीं किस्‍त, महि‍लाओं के खाते में पहुंचे 1552 करोड़ रुपये

सीधी मध्‍य प्रदेश में आज 1 करोड़ 27 लाख महि‍लाओं का लाडली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) की 24वीं किस्‍त का इंतजार खत्‍म हो गया. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज सीधी जिले की तहसील गोपदबनास (सीधी खुर्द) से मई महीने की किस्‍त जारी की. सीएम ने लाभार्थी महिलाओं के खाते में 1551.89 करोड़ रुपये (करीब 1552 करोड़) ट्रांसफर किए. योजना के तहत प्रतिमाह हर लाडली बहन को खाते में 1250 रुपये भेजे जाते हैं. साल 2023 में यह योजना मह‍िलाओं की आर्थ‍िक रूप से सशक्‍त करने के लिए शुरू की गई थी. इस महीने इसके 24 महीने यानी दो साल पूरे हो गए हैं. सिलेंडर रिफ‍िलिंंग के लिए 57 करोड़ रुपये जारी गोपदबनास तहसील में आयोज‍ित कार्यक्रम में सीएम ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना और सिलेंडर रिफिलिंग योजना की मई महीने की राशि भी लाभ‍ार्थ‍ियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की. साथ ही कार्यक्रम में सीधी के धोहनी में विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन भी किया. सीएम ने 56 लाख 83 हजार सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों के खातों में 341 करोड़ रुपये से ज्‍यादा ट्रांसफर किए और 26 लाख से अधिक बहनों को सिलेंडर गैस रिफिलिंग की 30.83 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की सब्सिडी राशि भी उनके खातों में सिंगल क्लिक से ट्रांसफर की. अब तक इतनी राशि हुई ट्रांसफर मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश की एक करोड़ 27 लाख लाड़ली बहनों के खातों में लाड़ली बहना योजना की मई माह की किस्त 1552 करोड़ 38 लाख रूपये अंतरित किया. लाड़ली बहनों को मिलने वाली यह 24वीं किस्त है. योजना में प्रत्येक लाड़ली बहना को प्रत्येक माह 1250 रूपये की राशि उनके खातों में अंतरित की जाती है. मध्य प्रदेश में जून 2023 से अप्रैल 2025 तक ₹35 हजार 329 करोड़ से अधिक राशि ट्रांसफर की गई है. जबकि 1 करोड़ 29 लाख बहनों के खातों में जनवरी 2024 से अप्रैल 2025 तक ₹25 हजार 332 करोड़ से अधिक की राशि का अंतरण हुआ है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में 56 लाख 68 हजार सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों के खातों में 340 करोड़ रूपए की राशि अंतरित की. साथ ही मुख्यमंत्री 25 लाख से अधिक बहनों को सिलेंडर रिफिलिंग की 57 करोड़ रुपए की राशि भी उनके खातों में सिंगल क्लिक से अंतरित की. ये सौगातें भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रीवा जिले के जवा में आयोजित हुए कार्यक्रम में बैकुंठपुर में नया महाविद्यालय बनाने समेत कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की. सीएम ने कहा कि जहां-जहां भगवान राम और श्रीकृष्ण के चरण पड़े हैं. मध्यप्रदेश के उन सभी स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा. मोहन यादव ने जवा, रीवा में जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण व शिलान्यास कर क्षेत्रवासियों को अनेकों सौगात दीं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज रीवा जिले के दिव्यगवां में शासकीय बिरसा मुंडा महाविद्यालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण कर क्षेत्रवासियों को बधाई दी. सीएम मोहन ने कहा “आज रीवा जिले के दिव्यगवां में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ अंतर्गत आयोजित ‘जनसंवाद एवं विभिन्न विकास कार्यक्रमों के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम’ में सहभागिता कर ₹7.50 करोड़ की लागत से निर्मित 501 खेत-तालाबों एवं मुनगा वन का शुभारंभ किया. साथ ही ₹2 करोड़ 75 लाख की लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं ₹47 करोड़ 98 लाख लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण किया. इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं. ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को जनक्रांति बनते देख गर्व की अनुभूति हो रही है. विभिन्न योजनाओं और अभियानों के माध्यम से जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रबंधन के लिए हम सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं. निश्चित ही हम सभी के सम्मिलित प्रयासों से जल संकट की चुनौतियों का समाधान होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी.” योजना की राशि बढ़ाने की मांग विपक्ष राज्‍य सरकार से लाडली बहना योजना की राश‍ि बढ़ाए जाने की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार ने फिलहाल इस योजना के तहत मिलने वाली राश‍ि को बढ़ाने पर विचार नहीं कर रही है. मालूम हो कि 2023 में विधानसभा चुनाव के दौरान सत्‍तारूढ़ पार्टी बीजेपी ने योजना के तहत मिलने वाली राशि को बढ़ाकर 3 हजार रुपये प्रत‍ि माह करने का ऐलान किया था. लेकिन तब से सरकार ने किस्‍त 3000 हजार रुपये करने के बारे में कोई बात नहीं की है, जबकि‍ विपक्ष बार-बार इसपर सरकार काे घेरता है. पिछले महीने हुई थी राशि भेजने में देरी पिछले महीने ही सरकार को नियत 10 तारीख पर योजना की कि‍स्त न जारी कर पाने पर विपक्षी दल कांग्रेस की आलोचना झेलनी पड़ी थी. राज्‍य सरकार ने 23वीं कि‍स्त 16 अप्रैल को जारी की थी. यानी 6 दिन की देरी से जारी की गई थी. हालांकि, राज्‍य सरकार ने अब इसे हर महीने की 15 तारीख के आसपास जारी करने का फैसला किया है. कई राज्‍यों में छाई योजना मध्‍य प्रदेश में लागू हुई यह योजना इतनी लोकप्र‍िय हुई है कि यह कई राज्‍यों में अलग-अलग नाम से चलाई जा रही है. खासकर योजना का जादू विधानसभा चुनावों के दौरान देखने को मिला, जहां कई राज्‍यों में इसने सरकार बनाई तो कुछ में सरकार को बचाए रखने में महत्‍वपूर्ण भूम‍िका निभाई. विभ‍िन्‍न राज्‍यों में योजना के तहत अलग-अलग राशि‍ महि‍लाओं के खाते में भेजी जाती है.

जीजा – साले को बिजली विभाग की गाड़ी ने कुचला, जीजा की मौत, साला गंभीर

अलवर अलवर जिले के रामगढ़ थाना अंतर्गत बिजली विभाग की गाड़ी ने दो युवकों को टक्कर मार दी। हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतक के भाई अजय कुमार ने बताया कि बुधवार शाम को विजय और पुष्पेंद्र गोविंदगढ़ और रामगढ़ के मोड़ पर सड़क पार कर रहे थे, टक्कर लगने के बाद दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए रामगढ़ अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां से गंभीर अवस्था के चलते दोनों को अलवर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। अलवर लाने के बाद विजय कुमार की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि मृतक विजय मिलकपुर का निवासी था और गाड़ी चलाने का कार्य करता था। मृतक की उम्र 25 वर्ष थी और उसके दो छोटे बच्चे हैं। मृतक के भाई ने बिजली विभाग के ड्राइवर पर शराब पीकर गाड़ी चलाने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा कि ड्राइवर ने शराब पी रखी थी, जिस कारण यह हादसा हुआ। इस घटना में घायल पुष्पेंद्र को अंदरूनी चोटें आई हैं और वह अभी स्थिर अवस्था में है। आज गुरुवार सुबह रामगढ़ थाना पुलिस ने परिजनों की मौजूदगी में मृतक का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा। पुलिस ने बिजली विभाग की गाड़ी के चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में पुष्पेंद्र के बयान लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।  

मध्यप्रदेश में कर्मचारी चयन मंडल ने MPESB की पहली शिफ्ट की परीक्षा की कैंसिल, छात्रों में आक्रोश

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है। जहां गुरुवार को मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) की पहली शिफ्ट की परीक्षा कैंसिल हो गई है। सुबह 9 बजे से लेकर 12 बजे तक परीक्षा होनी थी। मगर, अचानक से परीक्षा कैंसिल कर दी गई। सुबह 9 बजे लेकर 12 बजे तक होनी थी। जिसमें छात्रों की एंट्री 8 बजे की करा ली गई थी। छात्रों के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लेकर प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई, लेकिन ढाई घंटे बाद परीक्षर्थियों को जानकारी दी गई कि उनका एग्जाम कैंसिल हो गया है। यह सिर्फ एक सेंटर में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में हुआ है। पत्रिका से बातचीत में परीक्षार्थी अमर राज ने बताया कि 197 पदों पर भर्ती निकाली गई थी और 28 पद बाद में कैंसिल कर दिए गए थे। सुबह की शिफ्ट में 9 बजे से लेकर 12 बजे तक पेपर होना था। गेट क्लोजिंग टाइम 8 बजे था। हम लोगों को 8 बजे से लेकर 11 बजे तक सेंटर के अंदर बैठाया गया। ढाई घंटे बैठने के बावजूद जब आधे घंटे का समय बचा था। तब वहां से हमें कहा गया कि आप लोगों का पेपर रद्द हो चुका है। ये पेपर एमपीईएसबी के द्वारा बाद में कराया जाएगा। साथ ही हमें बताया कि एमपीईएसबी के प्रदेश में सारी पहली शिफ्ट की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट में सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 को लेकर सुनवाई

जयपुर विवादित सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 को लेकर आज राजस्थान हाईकोर्ट में बेहत महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। भर्ती परीक्षा रद्द होगी या नहीं इसे लेकर आज कोई बड़ा फैसला आने की संभावना है। पिछले दिनों हाईकोर्ट इस मामले में सुनवाई करते हुए सरकार को निर्देश दिए थे कि वह अगली सुनवाई तक अपना जवाब पेश कर दे कि भर्ती परीक्षा रद्द होगी अथवा नहीं। साथ ही यह चेतावनी भी दी कि सरकार निर्णय नहीं करती है तो हाईकोर्ट इस बारे में फैसला देगा। इधर, सरकार ने पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट को बताया था कि 13 मई को एसआई भर्ती को लेकर कैबिनेट सब कमेटी की बैठक बुलाई जाएगी। लेकिन 13 मई को बुलाई गई बैठक में सिर्फ अध्यक्ष जोगाराम पटेल और सदस्य मंजू वाघमार ही उपस्थित रहे। शेष सदस्य बैठक में शामिल नहीं हो पाए। इसके लिए अगली बैठक 21 मई को प्रस्तावित कर दी गई। जबकि हाईकोर्ट ने 15 तक की डेडलाइन दे रखी है। पिछली सुनवाई में सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह ने कोर्ट को बताया था कि 21 फरवरी को जारी कोर्ट के निर्देशों की पालना में अब तक कोई निर्णय नहीं हो पाया। फरवरी में कोर्ट ने सरकार को कार्रवाई के लिए 2 महीने का समय दिया था। इसके बाद हुई सुनवाई में सरकारी पक्ष ने 13 मई को सब कमेटी की बैठक का हवाला देते हुए समय मांगा। हालांकि जस्टिस समीर जैन ने सरकार को 15 मई का समय देते हुए यह चेतावनी दी थी कि तय समय के अंदर सरकार कोई निर्णय नहीं करती है तो हाईकोर्ट इस बारे में अपना फैसला सुना देगा।

भोपाल की 25वीं बटालियन में मॉक ड्रिल के दौरान एक हैंड ग्रेनेड फटने से दो पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल

  भोपाल राजधानी भोपाल की 25वीं बटालियन में गुरुवार को मॉक ड्रिल के दौरान एक बड़ा हादसा हुआ। सुरक्षा अभ्यास के दौरान एक हैंड ग्रेनेड अचानक फट गया, जिससे दो पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में प्रधान आरक्षक विशाल सिंह और आरक्षक संतोष कुमार शामिल हैं। चिकित्सकों के अनुसार, विशाल सिंह की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। दोनों घायल जवानों का उपचार चूनाभट्टी स्थित बंसल अस्पताल में चल रहा है। मॉक ड्रिल के दौरान हादसा कैसे हुआ?     हाल ही में पाकिस्तान द्वारा किए गए सीमापार हमलों के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने के लिए प्रदेश में लगातार मॉक ड्रिल आयोजित कर रही है। इसी श्रृंखला में भोपाल की 25वीं बटालियन में सुरक्षा अभ्यास आयोजित किया गया था। अभ्यास के दौरान अचानक एक हैंड ग्रेनेड फट गया, जिससे प्रधान आरक्षक विशाल सिंह और आरक्षक संतोष कुमार को गंभीर चोटें आईं। विस्फोट की तेज आवाज ने आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। घायल जवानों की स्थिति घायलों को तुरंत बंसल अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि विशाल सिंह की हालत नाजुक है और वे विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में हैं। संतोष कुमार की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। दोनों घायल जवानों का उपचार जारी है और अस्पताल प्रशासन उन्हें हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहा है। जांच के आदेश जारी इस गंभीर घटना के बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले की पूरी जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। घटना की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय इंक्वायरी कमेटी गठित की जा सकती है, जो मॉक ड्रिल के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल में हुई चूक की पूरी विवेचना करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कड़े सुरक्षा नियम बनाए जाएंगे। मॉक ड्रिल क्यों होती है? मॉक ड्रिल (Mock Drill) सुरक्षा बलों के लिए एक आवश्यक अभ्यास होता है, जिसका उद्देश्य जवानों को वास्तविक स्थिति के लिए तैयार करना होता है। यह अभ्यास सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने और सामरिक कौशल को निखारने के लिए आयोजित किया जाता है। प्रदेशभर में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के चलते मॉक ड्रिल का महत्व और भी बढ़ गया है।

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