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चीफ जस्टिस बोले- सम्मान से विदाई की हकदार हैं, जस्टिस बेला त्रिवेदी को वकीलों ने नहीं दिया फेयरवेल

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट की महिला जस्टिस बेला त्रिवेदी शुक्रवार को चुपचाप ही रिटायर हो गईं। उनके रिटायरमेंट के मौके पर बार काउंसिल की ओर से कोई औपचारिक फेयरवेल आयोजित नहीं किया गया। इसे लेकर चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह ने आपत्ति जताई। आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन की ओर से जजों के रिटायरमेंट पर फेयरवेल आयोजित किए जाते हैं। लेकिन जस्टिस बेला त्रिवेदी के आखिरी कार्यदिवस के मौके पर ऐसा कोई प्रोग्राम नहीं हुआ। इस पर जजों ने आपत्ति जताई और कहा कि ऐसा कोई आयोजन न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। रिटायरमेंट के मौके पर सेरेमोनियल बेंच भी बैठी। इस बेंच के सामने कपिल सिब्बल और रचना श्रीवास्तव मौजूद रहे। कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और रचना श्रीवास्तव उपाध्यक्ष हैं। बेंच में शामिल रहे जस्टिस गवई ने कहा, ‘मैं कपिल सिब्बल और रचना श्रीवास्तव की यहां मौजूदगी की सराहना करता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जो स्टैंड लिया है, वह सही नहीं है। मैं खुलकर बात करने वाला व्यक्ति हूं, इसलिए स्पष्ट कह रहा हूं कि यह गलत है। उन्होंने कहा कि बेंच के सामने फुल हाउस की मौजूदगी बताती है कि फैसला सही है। जस्टिस बेला त्रिवेदी एक शानदार जज रही हैं।’ जस्टिस गवई ने कहा कि अलग-अलग तरह के जज होते हैं। लेकिन जस्टिस त्रिवेदी ने अपने पूरे जज के करियर में स्पष्टता के साथ बात रखी। बिना किसी भय के फैसले दिए और खूब मेहनत की। वह सुप्रीम कोर्ट की एकता और अखंडता में यकीन रखने वाली जज रही हैं। वहीं जस्टिस मसीह ने अपनी स्पीच में कहा कि जस्टिस त्रिवेदी को बार एसोसिएशन द्वारा विदाई दी जानी चाहिए थी। उन्होंने जस्टिस त्रिवेदी द्वारा जज के रूप में दिखाए गए स्नेह की भी सराहना की। उन्होंने कहा, ‘अजीब बात है और इस बारे में चीफ जस्टिस पहले ही कह चुके हैं। मुझे खेद है, मुझे यह नहीं कहना चाहिए, लेकिन परंपराओं का पालन किया जाना चाहिए और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। मुझे यकीन है कि अच्छी परंपराएं हमेशा जारी रहनी चाहिए। मैं बहन (जस्टिस त्रिवेदी) को जीवन में सफलता की शुभकामनाएं देता हूं। मुझे यकीन है कि वह कई लोगों के लिए मार्गदर्शक बनेंगी।’  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहीदों को श्रध्दांजली अर्पित कर घोड़े पर सवार होकर तिरंगा यात्रा की शुरूआत की

भोपाल भोपाल भारतीय सेना द्वारा आतंकियों के विरूद्ध ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर भारतीय सेना के शौर्य एवं पराक्रम के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए शुक्रवार को उज्जैन में भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शहीद पार्क से प्रारंभ हुई भव्य तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहीद पार्क स्थित जय स्तम्भ पर शहीदों को श्रध्दांजली अर्पित कर घोड़े पर सवार होकर तिरंगा यात्रा की शुरूआत की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व  में भारत की सेना ने पाकिस्तान में दाखिल होकर दुश्मनों से बदला लिया। भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अदम्य साहस पर संपूर्ण देश को गर्व है। ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया के सामने हमारी सेनाओं ने अदम्य साहस और शौर्य का प्रमाण दिया हैं। हमने एकजुट होकर विश्व को यह संदेश दिया कि दुश्मन कितना ही चालाक क्यों न हो हम अपनी एकता को अक्षुण्ण रखेंगे। राष्ट्रीय एकता सर्वोपरी है, इसे यदि शत्रु ने हानि पहुचाने की कोशिश की तो उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उज्जैन भगवान श्री महाकालेश्वर की नगरी है, यह सम्राट विकमादित्य के पराक्रम की नगरी है। लगभग 2000 हजार साल पहले सम्राट विकमादित्य ने विदेशी आक्रमणकारियों को पराजित कर देश से खदेड दिया था, आज फिर से हमारी सेना ने वही शौर्य और पराक्रम दिखाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्र की वेदी पर अपने चिराग न्योछावर करने वाले शहीदों के परिजनों को प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि तिरंगा हमारे देश कि आन, बान और शान है इसकी मर्यादा का सदैव ध्यान रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार तिरंगा यात्राओं के माध्यम से पूरी दुनिया में संदेश जा रहा है कि हम सभी भारतीय एक जुट हो कर समय आने पर देश कि रक्षा के लिए सर्वस्व बलिदान कर सकते है । भव्य तिरंगा यात्रा में शहिदों के परिजन पूर्व सैनिक, राज्यसभा सांसद बालयोगी श्री उमेशनाथ जी महाराज, सांसद श्री अनिल फिरोजिया, प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, विधायक श्री अनिल जैन कालुहेड़ा, विधायक श्री सतीश मालवीय, महापौर श्री मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री सत्यनारयण जटिया, शहरकाजी खलीकुर्रहमान, श्री संजय अग्रवाल, श्री रवि सोलंकी, श्री जगदीश पांचाल, श्री मुकेश यादव, श्री अनिल शिंदे, श्री दिनेश जाटवा, श्री कल्याण शिवहरे, श्री सुहास वैद्य, श्री इकबाल सिंह गांधी शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और गणमान्य नागरिकों ने भी बढ़-चढ़ कर सहभागिता की।  भव्य तिरंगा यात्रा शहीद पार्क से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों चामुण्डा माता चौराहा, देवास गेट चौराहा, मालीपुरा,दौलतगंज चौराहा से होती हुई फव्वारा चौक पर समाप्त हुई। यात्रा में शहीदों के परिजन बग्गियों पर सवार होकर शामिल हुए। यात्रा में पुलिस बैण्ड, बोहरा समाज के बैण्ड और अन्य बैण्ड शामिल हुए। यात्रा के दौरान देश भक्ति के गीतों की भावविभोर प्रस्तुतियां दी गई। सभी धर्म और समाज के लोगों ने देश भक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना से ओत-प्रोत होकर उत्साह पूर्ण माहौल में यात्रा में सहभागिता की। विभिन्न स्थानों पर बनाएं गये स्वागत मंच के द्वारा यात्रा का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। यह यात्रा उन जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए भी निकाली गई जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। मुख्यमंत्री ने फ्रीगंज स्थित श्री अखंड ज्योति हनुमान मंदिर में दर्शन कर देश-प्रदेश की सुख समृद्धि की कामना की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के फ्रीगंज स्थित श्री अखंड ज्योति हनुमान मंदिर पर दर्शन कर पूजन अर्चन किया और देश-प्रदेश की सुख समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूजन कर कहा कि देश प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में दुश्मनों को नेस्तनाबूद कर विकास की नित नई ऊंचाइयां छू रहा है।

आवारा कुत्तों ने दौड़ाया, बचने के लिए इमारत की तीसरी मंजिल पर चढ़ गई गाय, क्रेन और सुरक्षा बेल्ट से उतारा

पुणे महाराष्ट्र में पुणे की पारंपरिक इमारत ‘वाड़ा’ के लोगों की नींद शुक्रवार सुबह उस समय शोरगुल से खुल गई, जब आवारा कुत्तों से बचने के लिए एक गाय इमारत की तीसरी मंजिल पर चढ़ गई। दमकल विभाग के अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह घटना रविवार पेठ इलाके के परदेसी वाड़ा में सुबह करीब 6 बजे की है। दमकल विभाग के अधिकारी ने कहा, ‘आवारा कुत्तों के पीछा किए जाने पर एक जर्सी गाय इमारत के परिसर में घुस गई। वह एक संकरी लकड़ी की सीढ़ी से तीसरी मंजिल पर चढ़ गई।’ दमकल विभाग के अधिकारी ने बताया कि जब स्थानीय लोग गाय को नीचे नहीं उतार सके तो उन्होंने दमकल विभाग को फोन किया। उन्होंने कहा, ‘गाय को सीढ़ियों से नीचे नहीं लाया जा सका। अंतिम उपाय के रूप में, हमने उसे सुरक्षित बाहर निकालने के लिए क्रेन और सुरक्षा बेल्ट का इस्तेमाल किया।’ इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा रही है और यूजर्स तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं। लोगों ने आवारा कुत्तों से निजात पाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने की मांग रखी है। उनका कहना है कि इस दिशा में लल्द से जल्द कदम उठाया जाना चाहिए। आवारा कुत्तों ने 7 साल की बच्ची को मार डाला इसी महीने, महाराष्ट्र के जालना शहर में आवारा कुत्तों के झुंड ने 7 साल की बच्ची पर हमला कर दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई। गांधी नगर इलाके में घटित इस घटना के बाद जालना महानगर पालिका आयुक्त ने कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में स्वच्छता निरीक्षक को निलंबित कर दिया। मृतक संध्या पटोले अपने घर के पास आंगन में खेल रही थी और तभी कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। घटना के बारे में बात करते हुए उसके चाचा राम पटोले ने कहा, ‘परिवार पहले से ही एक रिश्तेदार की मौत हो जाने के कारण शोक मना रहा था और अपने घर पर इकट्ठा हुआ था। इस सब के बीच, संध्या बाहर निकल गई और एक खुले भूखंड के पास खेलने लगी, तभी कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। उसे कुछ दूर तक घसीटते हुए ले गए। उसके गले और पेट पर बेरहमी से हमला किया गया।’  

सोमवती अमावस्या पर करें स्नान-दान

सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है. सोमवार के दिन अमावस्या का पड़ना बहुत दुर्लभ होता है. अगर सोमवार के दिन अमावस्या तिथि होती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं. वैसे तो सोमवार के दिन भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दिन भोलेनाथ की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. साथ ही मान्यता है कि अमावस्या पर स्नान-दान करने से पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होती हैं. वहीं पिंडदान करने पर पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है, जिससे सभी ग्रह दोष समाप्त होते हैं. सोमवती अमावस्या तिथि पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 26 मई को दोपहर 12 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी. वहीं तिथि का समापन 27 मई को शाम 54 बजकर 27 मिनट पर होगा. ऐसे में सोमवती अमावस्या 26 मई को है. सोमवती अमावस्या स्नान दान का शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन स्नान दान का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 3 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. वहीं दूसरा मुहूर्त सुबह 4 बजकर 24 मिनट से लेकर सुबह 5 बजकर 25 मिनट तक रहेगा. अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. इन चीजों का दान करने से मिलेगा पुण्य सोमवती अमावस्या के दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए वस्त्र, मिठाई तथा किसी गरीबों को भोजन का दान करना चाहिए. इसके अलावा चावल, दूध मिश्री, चीनी या अन्य सफेद रंग की वस्तुओं का दान करना लाभदायक हो सकता है.

डीजल टैंकर पलटा, लगी आग, आग लगने से ड्राइवर और हेल्पर घायल

धमतरी नेशनल हाईवे 30 पर एक डीजल टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे टैंकर में भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई. इस हादसे में ड्राइवर और हेल्पर आग की चपेट में आए. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को कुरुद अस्पताल में भर्ती कराया. हादसे के बाद हाईवे पर जाम की स्थिति बनी रही. यह हादसा बिरेझर चौकी क्षेत्र के कोड़ेबोड़ में हुआ. जानकारी के मुताबिक, तेज रफ्तार टैंकर रायपुर की ओर जा रहा था, अचानक संतुलन बिगड़ा और वाहन सड़क किनारे पलट गया. हादसे के बाद टैंकर में भीषण आग लगी, जिससे ड्राइवर और हेल्पर आग की चपेट में आए. स्थानीय लोगों और पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों को बाहर निकाला. फायर ब्रिगेड टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया. घायलों को कुरूद अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां इलाज जारी है. इस हादसे के बाद कुछ देर के लिए NH-30 मार्ग पर यातायात बाधित रहा. पुलिस ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर स्थिति को नियंत्रित किया.

विधायक देवेंद्र जैन ने स्थानीय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, कहा- बच्चों का आहार हड़प गए, हाईकोर्ट जाऊंगा

शिवपुरी शिवपुरी जिले में सत्ताधारी बीजेपी के विधायकों ने स्थानीय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वह विधानसभा से लेकर हाईकोर्ट तक का दरवाजा खटखटाएंगे। इससे पहले पिछोर विधायक प्रीतम लोधी भी पुलिस अधीक्षक पर आरोप लगाकर दिल्ली तक कूच करने की बात कह चुके हैं। प्रेसवार्ता में जैन ने लगाए गंभीर आरोप शुक्रवार को प्रेसवार्ता में देवेंद्र जैन ने कहा कि क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ईमानदारी चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवपुरी में भूदान और विक्रय-वर्जित जमीनों की अवैध रजिस्ट्रियां हो रही हैं। पोषण आहार केंद्र में भी गड़बड़ी जैन ने पोषण आहार केंद्रों में बच्चों के लिए मिलने वाला आहार हड़पने का सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। हाईकोर्ट तक जाएंगे जैन जैन ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो वह विधानसभा में मुद्दा उठाएंगे और जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट का रुख करेंगे। जिले में बढ़ते भ्रष्टाचार पर सत्ताधारी विधायकों की यह मुखरता चर्चा का विषय बनी हुई है।

छत्तीसगढ़ में पहले आओ, पहले पाओ पद्धति से जमीन का आवंटन बंद, अब बोली के जरिए मिलेगी उद्योगों की जमीन

रायपुर छत्तीसगढ़ में उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को अब पहले आओ, पहले पाओ पद्धति से जमीन का आवंटन नहीं होगा. राज्य सरकार ने 2015 के नियम में संशोधन करते हुए अब बोली के माध्यम से उद्योगों को जमीन आवंटन करने का प्रावधान किया है. साय सरकार ने छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम 2015 में संशोधन करने का निर्णय लिया है. नियमों में संशोधन से औद्योगिक क्षेत्रों, लैंड बैंक तथा अन्य भूमि खंडों के आवंटन की प्रक्रिया में और अधिक स्पष्टता व पारदर्शिता आएगी. इसके साथ औद्योगिक निवेशकों को भूमि आवंटन प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने व लाभ उठाने में सुविधा होगी. माकूल स्थान पर ले सकेंगे जमीन राज्य सरकार के द्वारा नियम बदले जाने पर औद्योगिक क्षेत्र की जमीनों पर राजस्व की प्राप्ति होगी. साथ ही निर्धारित अवधि में औपचारिकताओं की पूर्ति जैसे भू-भाटक और अन्य शुल्कों की राशि का भुगतान न करने के मामले कम होंगे. जिन लोगों को अपना उद्योग लगाना है, वह अपने इकाई की स्थापना के अनुसार, उन क्षेत्रों में जमीन ले सकेंगे, जो उनके लिए उपयुक्त होगी. समयसीमा में लगाना होगा उद्योग प्रदेश में ऐसे उद्योगपति जिन्होंने विभाग से सब्सिडी दर पर जमीन तो ले ली, लेकिन समय सीमा खत्म होने के बाद भी उत्पादन शुरू नहीं किया है. ऐसी प्रवृत्तियों पर इस संशोधन के बाद रोक लगेगी. अब इस प्रक्रिया से ऐस जरूरतमंद लोग ही आगे आएंगे, जो वास्तव में उद्योग लगाना चाहते हैं. नई उद्योग नीति को लेकर प्रदेश सरकार लगातार निवेश को बढ़ाने का प्रयास कर रही है. ऐसे में लैंड बैंक और भूमि आवंटन को लेकर कोई परेशानी न हो इसे देखते हुए नियमों में परिवर्तन किया जा रहा है. श्रमिक कल्याण नियम में भी संशोधन राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने और श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है. फरवरी में ही इसका अनुमोदन किया गया था. औद्योगिक इकाइयों के लिए पट्टे पर दी गई भूमि के उपयोग और औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक आवास निर्माण को लेकर नए अवसर प्रदान करता है. इस कदम को राज्य की औद्योगिक नीति को और अधिक निवेशक- अनुकूल बनाने और स्थानीय श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है. उद्योगों को आकर्षित करने प्रयास नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद साय सरकार लगातार निवेशक सम्मेलन कर उद्योगों को राज्य में आकर्षित करने का प्रयास कर रही है. इसी कड़ी में राज्य सरकार ने नई औद्योगिक नीति में कई संशोधन किए हैं. संशोधन के माध्यम से उद्योगपतियों को राज्य में “अच्छा और पारदर्शी माहौल मिले इसके प्रयास किए जा रहे हैं.

चिरमिरी-नागपुर रोड हॉल्ट रेल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया प्रारंभ

रेल मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी, 6 ग्रामों की भूमि होगी अधिग्रहित एमसीबी मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला के अपर कलेक्टर एवं सक्षम प्राधिकारी (भू-अर्जन) के आदेशानुसार चिरमिरी-नागपुर रोड हॉल्ट रेल परियोजना के अंतर्गत 17 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित रेल मार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। इस परियोजना के अंतर्गत ग्राम चिरईपानी, सरोला, बंजी, खैरबना, सरभोका एवं चित्ताझोर की ओर आने वाली निजी भूमि को अधिग्रहित किया जाएगा। भूमि अधिग्रहण हेतु रेलवे एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा सर्वेक्षण किया गया। इसके पश्चात अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मनेन्द्रगढ़, जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (छत्तीसगढ़) द्वारा दिनांक 07 अप्रैल 2025 को पत्र क्रमांक 1047/वाचक-1/2025 के माध्यम से चिरमिरी-नागपुर रोड हॉल्ट रेल परियोजना के लिए प्रतिवेदित भूमि सूची उप मुख्य अभियंता (निर्माण)-1, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, नार्थ बिलासपुर को भेजी गई। इसके आधार पर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के कार्यालय से पत्र क्रमांक 1876/अप. कले./वाचक/रे. परि./2025, दिनांक 01 मई 2025 को प्रेषित किया गया, जिसके माध्यम से अधिग्रहण संबंधी सूचना राजपत्र में प्रकाशन हेतु भेजी गई। तदनुसार भारत सरकार के राजपत्र में रेल मंत्रालय (दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे) द्वारा अधिसूचना संख्या 2074 दिनांक 09 मई 2025 को प्रकाशित की गई है, जो रेल अधिनियम 1989 की धारा 20 (ए) के अंतर्गत जारी की गई है। राजपत्र में प्रकाशन की तिथि 09 मई 2025 से 09 जून 2025 तक कोई भी व्यक्ति, जो उक्त अधिग्रहित की जाने वाली भूमि में हितबद्ध है, वह रेल अधिनियम की धारा 20 (घ) की उपधारा (1) के अंतर्गत इस भूमि के अर्जन और उपयोग से संबंधित कोई भी दावा या आपत्ति सक्षम प्राधिकारी को लिखित रूप में प्रस्तुत कर सकता है। यह दावा या आपत्ति अपर कलेक्टर न्यायालय, कक्ष क्रमांक 19, जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (छ.ग.) में 09 जून 2025 की शाम 5 बजे तक प्रस्तुत किया जा सकता  है।

भोपाल: तहज़ीब, तालीम, तरक्क़ी और तासीर का शहर

दुआ है कि गंगा-जमुनी तहज़ीब को कभी कोई बुरी नज़र न लगे और इसकी खूबसूरती बनी रहे •    ताहिर अली यदि मंदिरों से घंटियों की मधुर आवाज़ और मस्जिदों से बुलंद अज़ान एक साथ गूंजे, तो समझ लीजिए आप उस शहर में हैं, जहाँ सदियों से गंगा-जमुनी तहज़ीब ने अपने खूबसूरत रंग बिखेरे हैं। यह शहर है भोपाल – झीलों की नगरी, नवाबी संस्कृति की परछाईं, प्राकृतिक सौंदर्य की मिसाल और ऐतिहासिक धरोहरों का सजीव संग्रह। तहज़ीब और भाईचारा भोपाल की सबसे बड़ी खासियत इसकी साझा संस्कृति है। यहाँ तालाब के बीचों-बीच मंदिर, मस्जिद और मजारों का साथ-साथ दिखना आम बात है। यही वह शहर है, जहाँ सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक – ताजुल मस्जिद है, तो वहीं विश्व की सबसे छोटी मस्जिद मानी जाने वाली ‘ढाई सीढ़ी मस्जिद’ भी यहीं स्थित है। भोपाल में उर्दू भाषा का उपयोग लगभग सभी समुदाय के लोग करते हैं। भोपाल की सड़कों पर चलते हुए अगर कोई राहगीर किसी मोहल्ले का पता पूछ ले, तो भोपाली उसे दरवाजे तक छोड़कर आते हैं। यही इसकी तहज़ीब है, यही इसकी पहचान है। भोपाल की एक बात ओर मशहूर है कि जो भी भोपाल आता है यहां के लोग उसे सीने से लगा लेते हैं। हिन्दुस्तान के किसी भी कोने से जो भोपाल आया जैसे नौकरीपेशा या कोई भी व्यवसाय के लिए यहीं का होकर रह गया। भेल कारखाना इसका जीता-जागता उदाहरण है। ज्यादातर नौकरी पेशा अधिकारी एवं कर्मचारी रिटायर होने के बाद भोपाल को ही अपना मानकर यहीं बस गए। काफी लोग कारोबार करने के उद्देश्य से यहीं आकर आबाद हो गये। भोपाल की मज़ेदार ‘उर्फ़ियत’ – नाम के पीछे नाम की दुनिया! भोपाल, भोपाली और भोपालियत की पहचान  केवल ताल-ता‍लैया और ऐतिहासिक इमारतों आबोहवा, तहजीब और संस्‍क़ति तक सीमित नहीं है,  बल्कि अपनी अनोखी और मज़ेदार ‘उर्फ़ियतों’ के लिए भी मशहूर है। जब किसी मोहल्ले में एक ही नाम के कई लोग हों, तो पहचान बनाने के लिए नाम के पीछे कुछ जोड़ना लाज़मी हो जाता है, फिर चाहे वो पहनावे से जुड़ा हो, बोलचाल से, शौक से या किसी मज़ेदार किस्से से – हर भोपाली को मिल जाता है उसका ख़ास “उर्फ़ी टाइटल”। तो मिलिए भोपाल की इस अनोखी नामावली से – तारिक़ टाई, जो हमेशा टाई में दिखते थे, तारिक़ चपटे, जिनके गाल खुद गवाही देते हैं, तारिक़ होंठ कटे, जिनके होंठों की कहानी हर गली जानती है, और तारिक़ झबरे, जिनकी आंखें ही उनकी पहचान हैं। आरिफ़ अंडे का नाश्ता शहर भर में मशहूर है, तो आरिफ़ बुलबुल अपने गले से सबको दीवाना बना देते हैं। बाबूलाल 501 नाम की सिगरेट की तरह मशहूर हैं, और सेठ छगनलाल, जिनका “सेठपना” मोहल्ले में आज भी कायम है। रविंद्र सिंह लखरत, बाबूलाल लठमार, चांदमल हिटलर, मोहन पंचायती, लाला मुल्कराज, सरदारमल लालवानी, नाहर सिंह सूरमा भोपाली, कन्हैयालाल ‘बीड़ी’ और के. अमीनउद्दीन-301 तो अपनी शान और रसूख़ के लिए पहचाने जाते हैं। अखिलेश अग्रवाल गफूरे और वहीद अग्रवाल की उर्फ़ियतें उनकी दोस्ती और कारोबार की दास्तान सुनाती हैं। हफ़ीज़ पाजामे और चांद कटोरे का नाम सुनते ही भोपाल मुस्कुरा उठता है, वहीं चांद चुड़वे मोहल्ले की कहानियों के नायक हैं। सुरेश 501, अनिल अग्रवाल पटीये, और देवेश सिमहल वकील साहब अपने नाम से ही काफ़ी असरदार हैं। बाबू साहब घोड़े और बाबू साहब नाम की सादगी में गजब की शान है। आलू बड़े, ज़ायकों की दुनिया के हीरो हैं, और लोक सिंह ताल ठोंकू हर बहस में जीत की गारंटी हैं। रईस भूरा, मुन्ने मॉडल ग्राउंड, मुन्ने पेंटर, मुईन क़द्दे और माहिर मदीना – ये नाम जैसे ही कान में पड़ें, पूरा मोहल्ला मुस्करा उठता है। भोपाल की गलियों में लोग नाम से कम और उर्फ़ियत से ज़्यादा जाने जाते हैं। जावेद चपटे और जावेद चिराटे जैसे नामों में मज़ाकिया तंज है, तो बन्ने पहलवान और बन्ने लखेरा में मोहल्ले की दो अलग-अलग शख्सियतें झलकती हैं। कल्लू अट्ठे, बाबू भड़भुजे, मुन्ने फुक्की, ईरानी और डूंड जैसे नाम रोज़मर्रा की आदतों, मज़ाक या पेशे से जुड़े हैं। सईद बुल, छुटकटे, वहीद ढेलकी, आरिफ पिस्स, और अनफिट भोपाल की उस खास तासीर को दर्शाते हैं, जहां हर नाम के पीछे एक किस्सा है — हँसी, अपनापन और तंज से भरा। यही भोपाल की असली पहचान है — उर्फ़ियतों में बसी यारी और यादें। भोपाल की इन मज़ेदार उर्फ़ियतों में वो अपनापन है, जो किसी GPS में नहीं मिलता – सिर्फ मोहल्लों की यादों और बातों में ही जिंदा रहता है। भोपाल में हिंदू-मुस्लिम एकता : सांस्कृतिक सह-अस्तित्व की मिसाल भोपाल की सांस्कृतिक विरासत की सबसे मजबूत कड़ी उसकी हिंदू-मुस्लिम एकता है, जो सिर्फ सामाजिक सौहार्द का प्रतीक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक संघर्षों के बीच पनपी सहिष्णुता और साझेदारी की अनूठी मिसाल है। जब देश के अन्य हिस्सों में अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ नीति ने सांप्रदायिक तनाव को जन्म दिया, तब भी भोपाल ने अपनी गंगा-जमुनी तहज़ीब को संजोए रखा। हर वर्ग के लोगों ने एक दूसरे से बहुत प्यार मोहब्बत के साथ दिली लगाव रखा। सन 1812 की लड़ाई में हिंदू योद्धाओं जैसे डांगर सिंह, जय सिंह, और अमन सिंह पटेल ने भोपाल की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहां तक कि युद्ध में महिलाओं ने भी सक्रिय भागीदारी की, यह दिखाते हुए कि भाईचारा केवल धार्मिक स्तर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के स्तर पर भी जीवित था। भोपाल रियासत के प्रशासन में हर कालखंड में हिंदुओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही। दीवान (प्रधानमंत्री) जैसे उच्च पदों पर लाला घानी राम, लाला फूलानाथ, राजा अवध नारायण जैसे हिंदू अधिकारी रहे। यह समावेशिता केवल औपचारिक नहीं थी — ये अधिकारी नवाबों के विश्वासपात्र भी थे। नवाब क़ुदसिया बेग़म के दरबार में एक हिंदू, एक मुसलमान और एक ईसाई मंत्री नियुक्त थे — यह उस समय की धार्मिक विविधता के प्रति सम्मान का प्रतीक था। रियासत के इंजिमाम (शामिल करने) के बाद शरीफ़ शरणार्थियों में (उच्च परिवार के शरणार्थी) सरदार गुरबख्श सिंह भी थे, जिनके बेटे अमरीक सिंह रंजीत होटल चलाते हैं। वे बहू मियाँ के साथ ईद पर नवाब साहब को सलाम करने जाते। एक बार नवाब साहब ने पूछा कि भोपाल कैसा लग रहा है, तो सरदार साहब ने हाथ जोड़कर कहा कि जहाँ गरीब परवर सरकार का साया हो, वहाँ कोई कैसे … Read more

यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि: संदिग्ध गतिविधियों पर आरपीएफ की सख्त कार्रवाई

भोपाल मंडल रेल प्रबंधक श्री देवाशीष त्रिपाठी के मार्गदर्शन में भोपाल मंडल में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। रेलवे सुरक्षा बल द्वारा स्टेशन परिसरों में संदिग्ध गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जा रही है तथा आवश्यकतानुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। इसी क्रम में, वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त श्री प्रशांत यादव के निर्देशन में आरपीएफ टीम ने भोपाल रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त एक व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई की। दिनांक 16 मई 2025 को प्रातः 6:00 बजे, प्लेटफॉर्म क्रमांक 02 पर आरक्षक आरिफ खान ने एक युवक को संदिग्ध स्थिति में घूमते हुए पकड़ा, जिसकी नीयत यात्री सामान की चोरी प्रतीत हुई। पूछताछ में उक्त व्यक्ति की पहचान रफीक (आयु 20 वर्ष) के रूप में हुई। उसके पास कोई वैध यात्रा टिकट अथवा पहचान पत्र उपलब्ध नहीं था। घटना स्थल पर कोई प्रत्यक्ष शिकायतकर्ता नहीं होने के बावजूद, संदिग्ध गतिविधियों और रेलवे परिसर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आरपीएफ ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय रेलवे अधिनियम की धारा 145 (अशांति फैलाना) एवं धारा 137 (बिना टिकट यात्रा) के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे पूरी तरह से सतर्क है। स्टेशन परिसरों में हर प्रकार की संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने यात्रियों से भी अपील की कि यदि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि को देखें, तो तत्काल इसकी सूचना नजदीकी रेलवे स्टाफ या आरपीएफ को दें, ताकि आवश्यक कार्रवाई तत्काल सुनिश्चित की जा सके। रेल प्रशासन यात्रियों को सुरक्षित, सुगम एवं निर्बाध यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए संकल्पबद्ध है।

सीतगांव में उतरा सीएम साय का हेलीकॉप्टर, ग्रामीणों से योजनाओं का लेंगे फीडबैक

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन तिहार का तीसरा चरण जारी है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज औचक निरीक्षण पर मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मानपुर ब्लॉक में सेक्टर सीतगांव पहुंचे हैं. उनके आगमन पर अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने गुलाब फूल भेंटकर स्वागत किया. यहां सीएम पेड़ के नीचे चौपाल लगाएंगे और ग्रामीणों से योजनाओं का फीडबैक लेंगे. मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर आज मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मानपुर विकासखंड अंतर्गत महाराष्ट्र सीमा से सटे सीतागांव में उतरा. मुख्यमंत्री यहां समाधान शिविर में शामिल होने और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक ले रहे हैं. उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी उनके साथ मौजूद हैं. सीतागांव को सीएम की सौगात सीएम विष्णुदेव साय आए, साथ सौगात लाए… सुशासन तिहार के तीसरे चरण में मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के सीतागांव पहुंचे सीएम ने लोगों को सौगात दी है. उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा करने के बाद बिजली की समस्या खत्म करने के लिए सब स्टेशन के स्थापना के साथ अन्य घोषणाएं की है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की ये घोषणाएं :-     सीतागांव उप स्वास्थ्य केंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में होगा उन्नयन     मोहला में बस स्टैंड और छात्रावास का होगा निर्माण     सीतापुर में हाइ स्कूल का हायर सेकेंडरी स्कूल में होगा उन्नयन     अंबागढ़ चौकी क्षेत्र में 132 केवी सब स्टेशन की होगी स्थापना बता दें कि 5 मई से ‘सुशासन तिहार’ के तीसरे चरण की शुरुआत हो चुकी है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 31 मई तक आकस्मिक दौरे पर निकलेंगे। इस विशेष अभियान के दौरान मुख्यमंत्री किसी भी समय, किसी भी जिले या गांव में अचानक पहुंच सकते हैं. सीएम साय का दौरा पूरी तरह गोपनीय रखा गया है. स्थानीय प्रशासन से लेकर आम जनता तक, किसी को भी इस बात की जानकारी नहीं होगी कि मुख्यमंत्री साय कब और कहां पहुंचेंगे. सीएम साय किसी भी जिले में पहुंचकर आमजनों से सीधे संवाद करेंगे और ग्रामीणों से मिलकर योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक लेंगे. वे समाधान शिविरों में भी शामिल होंगे और लोगों की समस्याओं को मौके पर ही सुनकर समाधान की दिशा में कार्य करेंगे.

पूर्व सीएम बघेल ने भाजपा सरकार पर जमकर साधा निशाना

बीजापुर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने अपने बीजापुर दौरे के दौरान प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। एक दिवसीय प्रवास पर बीजापुर पहुंचे बघेल ने भोपालपटनम के कुचनूर स्थित कोरंडम खदान का निरीक्षण किया और वहां से लौटकर बीजापुर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ खनन नीति बल्कि नक्सल ऑपरेशन और आदिवासियों के प्रति सरकार के रवैये पर भी अपनी बात रखी। आदिवासियों की जमीन और संसाधनों की लूट करवा रही भाजपा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि कोरंडम खदान की शुरुआत बिना ग्रामसभा की अनुमति के की जा रही है, जो सीधे तौर पर कानून की अनदेखी व खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में तेंदूपत्ता तुड़ाई पर पाबंदी है, वहीं खनन कार्य शुरू किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार खदानों को निजी हाथों में सौंपकर आदिवासियों की जमीन और संसाधनों की लूट करवा रही है। नक्सल मुक्त गांव योजना को बताया अव्यवहारिक पूर्व सीएम बघेल ने नक्सल मुक्त गांवों के लिए एक करोड़ रुपये की योजना को अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि इससे गांव के मुखिया और ग्रामीणों की जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने करेगुट्टा नक्सल ऑपरेशन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मारे गए 31 नक्सलियों के शव कई दिनों तक क्यों रखे गए, इसकी जानकारी मीडिया को क्यों नहीं दी गई। सैकड़ों ग्रामीणों को नक्सली मामलों में जबरन फंसाया जा रहा पूर्व सीएम ने कहा कि नक्सली हिंसा में मारे गए ग्रामीणों को मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। सैकड़ों ग्रामीणों को नक्सली मामलों में जबरन फंसाया जा रहा है, उन पर एनआईए की धाराएं लगाई जा रही हैं। कई बेगुनाह आदिवासी जेलों में बंद हैं और पुलिस कार्रवाई के डर से गांव छोड़ने को मजबूर हैं। ‘भाजपा सरकार के कार्यकाल में आदिवासी हो रहे पलायन को मजबूर’ बघेल ने कहा कि भाजपा की सरकार में हर बार आदिवासी पलायन कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी विवादित मामलों की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। ‘विकास सिर्फ नारों और होर्डिंग्स तक सीमित’ उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार केवल प्रचार में व्यस्त है, जबकि कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई जनहित योजनाओं को बंद कर दिया गया है। इससे साफ है कि वर्तमान सरकार को विकास से कोई लेना-देना नहीं है।

मुंबई क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई जोगेश्वरी इलाके में 4 करोड़ की ड्रग्स बरामद, दो ड्रग्स सप्लायरों को किया गिरफ्तार

मुंबई मुंबई क्राइम ब्रांच ने नशे के सौदागरों के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। क्राइम ब्रांच की यूनिट 5 ने जोगेश्वरी इलाके में दो ड्रग्स सप्लायरों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 2 किलोग्राम एमडी ड्रग्स बरामद किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस ड्रग्स की कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये आंकी गई है। जानकारी के अनुसार, क्राइम ब्रांच की टीम को जोगेश्वरी बस डिपो के पास दो संदिग्ध व्यक्तियों पर शक हुआ। तलाशी लेने पर उनके पास से भारी मात्रा में एमडी ड्रग्स मिला। दोनों आरोपियों के खिलाफ अंबोली पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया। मुंबई क्राइम ब्रांच अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि यह ड्रग्स कहां से लाया गया था और इसे किन-किन लोगों तक पहुंचाने की योजना थी। पुलिस को शक है कि यह एक बड़े ड्रग्स रैकेट का हिस्सा हो सकता है। बता दें कि पिछले माह अप्रैल में भी क्राइम ब्रांच को मुंबई से सटे मीरा-भायंदर इलाके में एक बड़ी सफलता हाथ लगी थी। तब ‘ड्रग्स क्वीन’ के नाम से कुख्यात सबीना शेख को भारी मात्रा में कोकीन और नकदी के साथ गिरफ्तार किया गया। मीरा-भायंदर-वसई विरार पुलिस आयुक्तालय की क्राइम ब्रांच यूनिट-1 (काशीमीरा) की इस कार्रवाई में कुल 14.868 किलोग्राम कोकीन बरामद की गई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 22.33 करोड़ रुपए आंकी गई थी। सबीना की गिरफ्तारी के बाद मामले की छानबीन आगे बढ़ाई गई, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए थे। सबीना की निशानदेही पर क्राइम ब्रांच ने नाइजीरियाई नागरिक एंडी उबाबुदिके ओनींसे को गिरफ्तार किया, जिसके घर से 2.604 किलोग्राम कोकीन (कीमत 3.90 करोड़ रुपए) और बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की गई थी। इसके बाद पुलिस ने वसई के एवरशाइन नगर से एक विदेशी महिला क्रिस्टाबेल एनजेई को भी गिरफ्तार किया था। उसके पास से 64.98 लाख रुपए की कोकीन, भारतीय मुद्रा और विदेशी करेंसी (अमेरिकन डॉलर समेत) बरामद की गई थी। क्रिस्टाबेल एनजेई के बारे में पता चला कि वह कैमरून की नागरिक है। सबीना का नेटवर्क मुंबई, नवी मुंबई, पालघर, पुणे और नासिक तक फैला हुआ है। वह भारतीय नागरिक होने के कारण बिना शक के बड़े नेटवर्क को संभालती थी और विदेशी सप्लायर्स के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर काम करती थी।

रायपुर में ट्रक ने स्कूटी सवार की युवती को रौंद, हुई मौत

रायपुर राजधानी रायपुर के तेलीबांधा रिंग रोड पर आज सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया. एक ट्रक ने स्कूटी सवार 27 साल की युवती को रौंद दिया, जिससे उसकी की मौत हो गई. इस घटना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई. वहीं राष्ट्रीय मार्ग जाम हो गया है. मौके पर पहुंची पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है. साथ ही मौके से फरार वाहन चालक को भी पुलिस ने कुछ ही देर में गिरफ्तार कर लिया है. जानकारी के मुताबिक मृतिका की पहचान तान्या रेड्डी (27 साल) के रूप में हुई है. वह स्कूटी पर सवार होकर तेलीबांधा से जा रही थी, तभी पीछे से आ रही ट्रक ने स्कूटी को रौंद दिया. इस हादसे में स्कूटी सवार युवती की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं घटना के बाद रिंग रोड पर भारी जाम लग गया, जिसे हटाकर पुलिस रास्ता बहाल करने में जुटी हुई है.

माउंट एवरेस्ट पर भारतीय पर्वतारोही की मौत, ‘नीचे ही नहीं उतर रहे थे’, इस सीजन पहली बार हुआ ऐसा

काठममांडु दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर मौजूदा मार्च-मई पर्वतारोहण सीजन के दौरान दो पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि हुई है। इन मृतकों में एक भारत से और दूसरा फिलीपींस से था। यह जानकारी शुक्रवार को नेपाल के पर्वतारोहण अधिकारियों ने दी।45 वर्षीय भारतीय पर्वतारोही सुब्रत घोष ने एवरेस्ट के 8,849 मीटर (29,032 फीट) ऊंचे शिखर को सफलतापूर्वक फतह तो किया, लेकिन गुरुवार को हिलेरी स्टेप के नीचे लौटते समय उनकी मौत हो गई। नेपाल के स्नोई होराइजन ट्रेक्स एंड एक्सपेडिशन कंपनी के आयोजक बोधराज भंडारी ने बताया, “वह हिलेरी स्टेप से नीचे आने के लिए तैयार नहीं थे। वहीं उनकी मौत हो गई। उनके शव को बेस कैंप तक लाने का प्रयास किया जा रहा है। मौत का कारण पोस्टमॉर्टम के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।” हिलेरी स्टेप को ‘डेथ जोन’ भी कहा जाता है। यह 8,000 मीटर (26,250 फीट) से ऊपर का इलाका है। यहां प्राकृतिक ऑक्सीजन का स्तर इंसान के जीवित रहने के लिए पर्याप्त नहीं होता। दूसरी ओर, फिलीपींस के 45 वर्षीय पर्वतारोही फिलीप II सैंटियागो की मौत बुधवार देर रात साउथ कोल में हुई। नेपाल पर्यटन विभाग के अधिकारी हिमाल गौतम ने बताया कि “वह चौथे उच्च शिविर (हाई कैंप) तक पहुंचे, लेकिन अत्यधिक थकान के कारण जब वह अपने टेंट में आराम कर रहे थे, तभी उनकी मृत्यु हो गई।” दोनों पर्वतारोही एक ही अंतरराष्ट्रीय अभियान दल का हिस्सा थे, जिसका आयोजन बोधराज भंडारी द्वारा किया गया था। नेपाल ने इस सीजन के लिए 459 पर्वतारोहण परमिट जारी किए हैं। इस हफ्ते लगभग 100 पर्वतारोही और उनके गाइड पहले ही शिखर तक पहुंच चुके हैं। गौरतलब है कि पर्वतारोहण, ट्रेकिंग और पर्यटन नेपाल के लिए प्रमुख आय और रोजगार के स्रोत हैं। यह देश आर्थिक रूप से अभी भी दुनिया के सबसे गरीब देशों में शामिल है। हिमालयन डाटाबेस और पर्वतारोहण अधिकारियों के अनुसार, पिछले 100 वर्षों में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान अब तक कम से कम 345 लोगों की जान जा चुकी है। खराब मौसम, ऑक्सीजन की कमी, और अत्यधिक थकान इस पर्वत पर सबसे बड़े खतरे हैं। गुरुवार को अचानक मौसम खराब होने की वजह से कई पर्वतारोहियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।  

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