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पासपोर्ट बना हुआ आसान, घर में ही होगी बायोमेट्रिक स्कैनिंग और दस्तावेजों की जांच

रायपुर समय के साथ सुविधाएं लोगों को घर-द्वार में मिल रही हैं. इस कड़ी में पासपोर्ट भी शामिल हो गया है, जिसके लिए अब आपको कार्यालय का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं, बल्कि घर बैठे ही पासपोर्ट से जुड़े काम हो जाएंगे. सरकार ने अब घर बैठे ही फिंगर प्रिंट्स और बायोमेट्रिक स्कैनिंग मशीन, दस्तावेजों की जांच, फोटो खींचने समेत सभी तरह की सुविधाएं मुहैया कराने जा रही है. विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट बनाने में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए लोगों को सुविधा के लिहाज से पासपोर्ट मोबाइल वैन चला रही है. इस हाईटेक वैन में पासपोर्ट बनाने की पूरी प्रक्रिया संपन्न होगी. इस वैन को अलग-अलग इलाकों में हफ्ते में एक बार पहुंचाया जाएगा. लोगों को केवल इस वैन तक पहुंचना होगा. बाकी के काम वैन में तैनात कर्मचारी और अफसर कर लेंगे. मध्यप्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों में यह सुविधा शुरू भी हो गई है. अब इस विदेश मंत्रालय की इस महती योजना में छत्तीसगढ़ को भी शामिल कर लिया गया है. जल्द ही छत्तीसगढ़ पासपोर्ट दफ्तर को पहली वैन मिलने वाली है. यहां वैन कहां-कहां जाएगी, इसका रूट भी तैयार किया जा रहा है. तीन दिन में तत्काल पासपोर्ट दरअसल, बिना पासपोर्ट के विदेश जाना संभव नहीं है. विदेश जाने वालों की संख्या भी हर साल बढ़ रही है. पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया भी आसान हुई है. तत्काल पासपोर्ट तीन दिन में उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके लिए शुल्क 3500 रुपए ही है. सामान्य पासपोर्ट के लिए 1500 रुपए शुल्क लिया जाता है. सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दो हफ्ते में इसे जारी कर दिया जाता है. क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी गौरव गर्ग ने बताया कि लोगों की सुविधा के लिए मोबाइल वैन शुरू की जा रही है. इसमें पासपोर्ट बनाने के सारे काम होंगे. लोगों को सेंटर तक नहीं जाना होगा. शुरुआत में इस वैन को वहां चलाया जाएगा जहां पासपोर्ट दफ्तर नहीं है. ताकि लोग घरों के सामने ही पासपोर्ट बनवा सकें. 19 साल में 6 लाख पासपोर्ट रायपुर में 2007 में पासपोर्ट दफ्तर खुलने के पहले तक लोगों को नया पासपोर्ट बनवाने के लिए भोपाल जाना पड़ता था. पहली बार दफ्तर खुला तो उस वर्ष 45 पासपोर्ट बने थे. इसके बाद हर साल पासपोर्ट बनवाने वालों की संख्या बढ़ती गई. पिछले तीन साल से हर साल 50 हजार से ज्यादा लोग पासपोर्ट बनवा रहे हैं. जहां दफ्तर नहीं, वहां सुविधा पहले क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी गौरव गर्ग ने बताया कि लोगों की सुविधा के लिए मोबाइल वैन शुरू की जा रही है. इसमें पासपोर्ट बनाने के सारे काम होंगे. लोगों को सेंटर तक नहीं जाना होगा. शुरुआत में इस वैन को वहां चलाया जाएगा, जहां पासपोर्ट दफ्तर नहीं है. ऑनलाइन पता चलेगा कब-कहां आएगी गाड़ी     मोबाइल वैन से पासपोर्ट बनवाने के लिए लोगों को अलग से अपॉइंटमेंट दिया जाएगा     लोग सुविधा के अनुसार टाइम स्लॉट बुक करा सकेंगे. दिन भी चुन सकेंगे.     अपॉइंटमेंट बुक करने से लेकर दस्तावेज सत्यापन तक की प्रक्रिया सरल और तेज होगी. ऐसे करेंगे आवेदन     आवेदकों को passportindia.gov.in वेबसाइट पर लॉग इन कर स्लॉट बुक करना होगा.     अलग-अलग प्रक्रियाओं में मोबाइल वैन के ऑप्शन को सिलेक्ट करना होगा.     स्लॉट बुक होने के बाद वैन तय समय पर इलाके में पहुंचेगी. जहां प्रक्रिया पूरी की जाएगी.  

इलेक्ट्रिक वाहन पर बड़ा दांव लगाने की तैयारी में टाटा मोटर्स , कई नए मॉडल उतारेगी

नई दिल्ली, टाटा मोटर्स का लक्ष्य घरेलू यात्री वाहन बाजार में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को मुख्यधारा में लाने का है। अपनी इस योजना के तहत कंपनी ईवी श्रृंखला को मजबूत करने और साथ ही मौजूदा मॉडल के लिए मूल्य को बढ़ाने का प्रयास कर रही है। मुंबई की यह प्रमुख वाहन कंपनी चालू वित्त वर्ष में हैरियर.ईवी और उसके बाद सिएरा.ईवी उतारने की तैयारी कर रही है। साथ ही कंपनी अपने मौजूदा मॉडल में भी कई तरह के सुधार करने की योजना बना रही है। टाटा मोटर्स ने 2024-25 में करीब 65,000 इलेक्ट्रिक वाहन बेचे हैं। यह आंकड़ा 2023-24 की तुलना में 10 प्रतिशत कम है। तिमाही नतीजों के बाद निवेशक प्रस्तुतीकरण में कंपनी ने कहा, ”हम नए मॉडल के साथ ईवी पोर्टफोलियो को मजबूत करने जा रहे हैं। साथ ही मौजूदा मॉडल के लिए भी मूल्य बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।” कंपनी का इरादा इलेक्ट्रिक वाहनों को मुख्यधारा में लाने है। इसके लिए कंपनी बाजार विकास और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगी। आंतरिक दहन इंजन यानी परंपरागत वाहन खंड पर, कंपनी ने कहा कि उसका लक्ष्य हैच और एसयूवी में उत्पाद में सुधार के साथ अपने सबसे मजबूत और सबसे नए पोर्टफोलियो का लाभ उठाना है।” कंपनी का लक्ष्य व्यापक विपणन अभियान और ब्रांड जुड़ाव के माध्यम से ब्रांड के विचार को बढ़ाना है, ताकि ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाया जा सके। टाटा मोटर्स ने कहा कि वह प्रमुख बाजारों में अपने बिक्री नेटवर्क का विस्तार करने की भी योजना बना रही है। इसके तहत बड़े आकार के फॉर्मेट स्टोर पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके अलावा कंपनी कठिन माहौल में प्रतिस्पर्धात्मकता और लाभप्रदता सुनिश्चित करने के लिए लागत में कमी की दिशा में भी काम कर रही है। वाणिज्यिक वाहन कारोबार के बारे में कंपनी ने कहा कि उसे बेड़े के उपयोग में सुधार और बेहद वृहद आर्थिक संकेतकों के साथ एक स्थिर धारणा की उम्मीद है। कंपनी ने कहा, ”हम वैश्विक बाधाओं के बावजूद निरंतर वद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।” चालू वित्त वर्ष में कंपनी का ध्यान मूल्य सृजन के साथ-साथ ट्रक में एसी के विनियमन की ओर सुचारू तरीके से बदलाव सुनिश्चित करने पर है।  

सीमावर्ती क्षेत्रों में धूल भरी हवाएं, कई जगह हल्की बारिश की आशंका

जयपुर,  राजस्थान के अधिकतर इलाकों में जारी भीषण गर्मी के बीच राज्य के पूर्वी हिस्से में कई जगह हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग ने बताया कि बीते 24 घंटे में पूर्वी राजस्थान में कहीं-कहीं हल्की वर्षा दर्ज की गई। सर्वाधिक 27 मिलीमीटर वर्षा झालरापाटन (झालावाड़) में दर्ज की गई। पश्चिमी राजस्थान भीषण गर्मी की चपेट में है। यहां सर्वाधिक अधिकतम तापमान गंगानगर (46.0 डिग्री सेल्सियस) में दर्ज किया गया जो सामान्य से 3.3 डिग्री अधिक है। मौसम विभाग के अनुसार, आगामी दो से तीन दिन जोधपुर, बीकानेर संभाग के सीमावर्ती क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी हवाएं चलने का अनुमान है। इसी तरह बीकानेर एवं श्रीगंगानगर जिलों में 20 मई तक अधिकतम तापमान 45-46 डिग्री सेल्सियस दर्ज होने एवं कहीं-कहीं लू चलने और शेष अधिकतर भागों में अधिकतम तापमान 42-44 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। राज्य के उत्तरी भागों में आज और 20 मई को कुछ स्थानों पर दोपहर बाद हल्की बारिश हो सकती है।  

देश के 17 सांसदों को संसद रत्न पुरस्कार 2025 से किया जाएगा सम्मानित

नई दिल्ली संसद में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 17 सांसदों और 2 संसदीय स्थायी समितियों को संसद रत्न पुरस्कार 2025 के लिए चुना गया है। ये पुरस्कार संसद में सक्रियता, बहस में भागीदारी, प्रश्न पूछने और विधायी कामकाज में योगदान के आधार पर दिए जाते हैं। यह पुरस्कार प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन की तरफ से शुरू किया गया है। इस वर्ष के विजेताओं का चयन जूरी कमेटी ने किया, जिसकी अध्यक्षता हंसराज अहीर, (राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष) ने की। उन्होंने कहा कि ये पुरस्कार उन सांसदों को दिए जाते हैं जिन्होंने लोकतंत्र को मजबूती देने के लिए संसद में उत्कृष्ट योगदान दिया है। लगातार उत्कृष्ट कार्य के लिए- चार सांसदों को विशेष सम्मान चार सांसदों को संसदीय लोकतंत्र में उत्कृष्ट और सतत योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन के अनुसार, ये चारों सांसद 16वीं और 17वीं लोकसभा में भी संसद में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहे हैं और अपनी मौजूदा कार्यकाल में भी लगातार सक्रिय हैं।     भर्तृहरि महताब (भाजपा)     सुप्रिया सुले (एनसीपी-एसपी)     एन. के. प्रेमचंद्रन (आरएसपी)     श्रीरंग अप्पा बारणे (शिवसेना) अन्य संसद रत्न पुरस्कार विजेता सांसद बाकी 13 सांसदों को भी उनके विशिष्ट संसदीय कार्यों के लिए चुना गया है। इनमें कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इन सांसदों ने संसद में प्रश्न पूछने, चर्चा में भाग लेने और विधेयकों पर सुझाव देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।   स्मिता वाघ (भाजपा)                      अरविंद सावंत (शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट) नरेश गणपत म्हास्के (शिवसेना) वर्षा गायकवाड़ (कांग्रेस) मेधा कुलकर्णी (भाजपा) प्रवीण पटेल (भाजपा) रवि किशन (भाजपा) निशिकांत दुबे (भाजपा) बिद्युत बारन महतो (भाजपा) पी. पी. चौधरी (भाजपा) मदन राठौर (भाजपा) सी. एन. अन्नादुरै (डीएमके) दिलीप सैकिया (भाजपा)     दो संसदीय समितियों को भी मिला सम्मान इस वर्ष दो संसदीय स्थायी समितियों को भी संसद रत्न पुरस्कार से नवाजा जाएगा। वित्त पर स्थायी समिति अध्यक्ष: भर्तृहरि महताब इस समिति ने वित्तीय नीतियों पर कई प्रभावशाली और व्यावहारिक रिपोर्टें संसद में प्रस्तुत की हैं। कृषि पर स्थायी समिति अध्यक्ष: चरणजीत सिंह चन्नी (कांग्रेस) इस समिति ने किसानों की समस्याओं और कृषि सुधारों पर ठोस सुझाव संसद में रखे हैं। क्या है संसद रत्न पुरस्कार? संसद रत्न पुरस्कार की शुरुआत 2010 में हुई थी और यह पुरस्कार उन सांसदों को दिए जाते हैं जो पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती देने के लिए संसद में सक्रिय रहते हैं। इसका उद्देश्य सांसदों को प्रोत्साहित करना और जनता के बीच संसदीय कार्यवाही को लोकप्रिय बनाना है।

मौसम विभाग ने 37 जिलों में बारिश के साथ तेज आंधी की संभावना जताई, अगले हफ्ते दिखेगा लू का असर

भोपाल मध्यप्रदेश में बारिश-आंधी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजधानी भोपाल में गर्मी का असर देखने को मिला। वहीं मंदसौर, राजगढ़ और विदिशा में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। मौसम विभाग ने 37 जिलों में बारिश के साथ तेज आंधी की संभावना जताई है।   एमपी में गरज चमक के साथ तेज बारिश की चेतावनी जारी मौसम विशेषज्ञ ने बताया कि बताया कि इन दिनों प्रदेश में तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव है। जिसके कारण प्रदेश में आंधी-बारिश हो रही है। अगले हफ्ते के शुरुआती दिनों में बारिश के साथ आंधी और लू का असर देखने को मिल सकता है। इन 37 जिलों में बारिश के साथ दिखेगा आंधी का असर मौसम विभाग की रिपोर्ट की मानें तो भोपाल, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, आगर, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पांढुर्णा जिलों में बारिश के तेज 50-60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। वहीं, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनुपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, मैहर जिलों में 40-50 किलोमीटर प्रतिघंटे हवाएं चलने की संभावना है। 20 मई को कैसा रहेगा मौसम भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, सीहोर, बैतूल, धार, खरगोन, राजगढ़, शाजापुर, रीवा, मऊगंज, सीधी, देवास, नर्मदापुरम, रायसेन, विदिशा और सिंगरौली में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती है। वहीं, 21 मई को भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर, सागर, रीवा, शहडोल, जबलपुर संभाग में बारिश और तेज हवाएं चलने का अलर्ट है।

400 पदों पर भर्ती के लिए कर्मचारी चयन मंडल को भेजा प्रस्ताव, इस साल पुलिस मुख्यालय में लिपिकीय संवर्ग में होगी भर्ती

भोपाल पुलिस मुख्यालय में लिपिकीय संवर्ग में सात वर्ष बाद 400 पदों पर भर्ती होने जा रही है। अभी इन रिक्त पदों पर जिला पुलिस बल के जनरल ड्यूटी वाले पुलिसकर्मियों को पदस्थ कर काम लिया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए कर्मचारी चयन मंडल को प्रस्ताव भेजा गया है। इसके पहले वर्ष 2018 में इन पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। कर्मचारी चयन मंडल इसी वर्ष इन पदों पर नियुक्तियां करेगा। इसका बड़ा लाभ यह होगा कि लिपिकीय कार्यों के लिए दक्ष कर्मचारी मिल सकेंगे। इन्हें कंप्यूटर का ज्ञान भी रहेगा। इनकी पदस्थापना होने के बाद जिला पुलिस बल के जिन पुलिसकर्मियों को पुलिस मुख्यालय में लगाया गया है, उन्हें वापस जिलों में भेज दिया जाएगा, जिससे जिलों में पुलिस बल की कमी पूरी की जा सकेगी। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यालय की हर शाखा में आवश्यकता के अनुसार इन्हें पदस्थ किया जाएगा। प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे वह अपना काम पूरी दक्षता के साथ कर सकें। बता दें कि इस संवर्ग में आरक्षक पद से भर्ती होने के बाद जिला पुलिस बल की तरह पदोन्नति दी जाती है।

भारत बना जन्मभूमि, चीन को छोड़ा पीछे, दुनिया का सबसे ज्यादा बच्चे पैदा करने वाला देश बना भारत

नई दिल्ली दुनिया की आबादी तेजी से बढ़ रही है और 2025 तक यह 8.23 अरब के पार पहुंच गई है। जनसंख्या के मामले में भारत, चीन जैसे देश टॉप पर हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि किस देश में सबसे ज्यादा बच्चे पैदा होते हैं? एक नई रिपोर्ट में इस दिलचस्प सवाल का जवाब दिया गया है। भारत बना जन्मभूमि, चीन को छोड़ा पीछे विजुअल कैपिटलिस्ट के आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया का वह देश है जहां हर घंटे सबसे ज्यादा बच्चे जन्म लेते हैं। 2023 के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत में हर घंटे औसतन 2,651 बच्चे पैदा हो रहे थे। यह आंकड़ा हमारे पड़ोसी देश चीन से काफी आगे है जहां इसी अवधि में हर घंटे 1,016 बच्चे जन्म ले रहे थे। भारत और चीन के बाद सबसे ज्यादा बच्चे पैदा होने वाले देशों की सूची में नाइजीरिया तीसरे स्थान पर है जहां हर घंटे 857 बच्चे पैदा हुए। चौथे स्थान पर हमारा दूसरा पड़ोसी देश पाकिस्तान रहा जहां 2023 में हर घंटे 786 बच्चे जन्म ले रहे थे। इसके बाद इंडोनेशिया (512 बच्चे प्रति घंटा), कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) (499 बच्चे प्रति घंटा), इथोपिया (469 बच्चे प्रति घंटा), संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) (418 बच्चे प्रति घंटा) और बांग्लादेश (398 बच्चे प्रति घंटा) का स्थान आता है। इन आंकड़ों से साफ है कि बच्चों के जन्म के मामले में भारत दुनिया में पहले नंबर पर है। रिपोर्टों के अनुसार अकेले 2023 में भारत में 2 करोड़ 32 लाख 19 हजार 489 बच्चों का जन्म हुआ था। फर्टिलिटी रेट में कौन है आगे? भारत नहीं है नंबर वन हालांकि अगर प्रति महिला बच्चे पैदा करने की औसत दर यानी फर्टिलिटी रेट की बात करें तो भारत इस मामले में पहले स्थान पर नहीं है। स्टेटिस्टा (statista) की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा फर्टिलिटी रेट अफ्रीकी देश चाड में है। दक्षिण अफ्रीका का यह देश प्रति महिला औसतन 5.94 बच्चे पैदा करने की दर के साथ पहले स्थान पर है। चाड के बाद सोमालिया का नंबर आता है जहां महिलाएं औसतन 5.91 बच्चों को जन्म देती हैं। इसके बाद कांगो का स्थान है जहां महिलाएं औसतन 5.9 बच्चे पैदा करती हैं। सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक और नाइजर भी उच्च फर्टिलिटी रेट वाले देशों में शामिल हैं। इस तरह बच्चों के कुल जन्म की संख्या के मामले में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है जबकि प्रति महिला बच्चे पैदा करने की औसत दर के मामले में अफ्रीकी देश आगे हैं। यह आंकड़े दुनिया की जनसंख्या गतिशीलता और भविष्य की जनसांख्यिकी को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।  

जबलपुर का खुड़ावल गांव जहा र दूसरे घर से निकलता है देश का रखवाला, अब तक तीन सपूत बलिदान दे चुके

जबलपुर जबलपुर के मझौली ब्लाक का खुड़ावल गांव देशभक्ति की अनूठी मिसाल पेश करता है। इस गांव की मिट्टी में देशप्रेम इस कदर रचा-बसा है कि यहां लगभग हर दूसरे घर से एक युवा देश की रक्षा में प्रण-प्राण से जुटा है। 2019 में पुलवामा हमले में वीरगति को प्राप्त हुए सीआरपीएफ के जवान अश्विनी कुमार काछी भी इसी गांव के थे। जवान का बलिदान आज भी युवाओं को प्रेरित करता है। अश्विनी का परिवार उनके बलिदान को यादकर रोजाना पूजता है। सेवानिवृत्त सैनिक युवाओं को देशभक्ति की प्रेरणा देते हैं और उन्हें राष्ट्र की रक्षा के लिए तैयार भी करते हैं।   गांव के तीन सपूत देश की रक्षा के लिए दे चुके हैं बलिदान जिला मुख्यालय से 53 किलोमीटर दूर इस गांव के लोगों की रगों में देशभक्ति का जुनून इस कदर समाया है कि भारतीय सेना में होने वाली हर भर्ती में यहां का युवा अवश्य शामिल होता है। अब तक इस गांव के तीन सपूत देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। आज भी यहां के युवा सुबह-शाम सैन्य भर्ती के लिए गांव में पसीना बहाते देखे जा सकते हैं।   यहां की बेटियों में भी जज्बा कम नहीं लगभग तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में आज भी सेवानिवृत्त सैनिक युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण देकर देश सेवा के लिए तैयार करते हैं। वर्तमान में इस गांव के लगभग 50-55 युवा भारतीय सेना, सीआरपीएफ और अन्य सशस्त्र बलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इतने ही सेवानिवृत्त वीर सपूत इस गांव में हैं। अब तो यहां की बेटियां भी देश की रक्षा के लिए आगे आने को आतुर हैं। ऐसी ही यहां कि बेटी पूजा पटैल है का हाल ही में सीआरपीएफ में चयन हुआ है। पहलगाम बाद देश में उमड़े आक्रोश ने खुड़ावल के हर व्यक्ति के मन में नया जोश भर दिया है। खुड़ावल वीर जवानों का गांव कहलाता है। उनकी याद में गांव में बलिदानी स्मारक भी बनवाया गया है।

20 मई को राजवाड़ा में लगेगा मप्र सरकार का दरबार, सीएम यादव अपने मंत्रिमंडल के साथ लेंगे अहम निर्णय

इंदौर देवी अहिल्याबाई होलकर ने इंदौर के राजवाड़ा से सुशासन की नींव रखी थी। उनके बाद होलकर वंशजों ने इंदौर सहित होलकर राज्य के विकास के बड़े निर्णय राजवाड़ा के दरबार हाल में हुई बैठकों में लिए। आजादी के पहले जिस राजवाड़ा में दरबार सजा करता था, स्वतंत्र भारत में पहली बार उसी राजवाड़ा में मोहन सरकार का दरबार लगने वाला है। 20 मई को राजवाड़ा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने मंत्रिमंडल के साथ इंदौर सहित प्रदेश के विकास के कई अहम निर्णय लेंगे। कैबिनेट बैठक की तैयारी के लिए गणेश हाल और दरबार हाल को सजाया जा रहा है। यशवंतराव तृतीय ने आजादी के पहले की थी यहां बैठक होलकरकालीन ऐतिहासिक राजवाड़ा में आजादी के पहले यशवंतराव तृतीय ने दरबार हाल में अपने मंत्रिपरिषद के सदस्यों के साथ बैठक की थी। उस ऐतिहासिक क्षण का चित्र इंदौर के संग्रहालय में सहेजकर रखा हुआ है। राजवाड़ा के गणेश हॉल में जहां होलकर राजा संगीत कार्यक्रम, रंगपंचमी की गेर, ताजिये का जुलूस व खास मौकों पर बैठक करते थे। अब उसी स्थान पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में कैबिनेट की बैठक होगी। वहीं राजवाड़ा परिसर के प्रथम मंजिल पर दरबार हाल में जहां होलकर महाराज मंत्रियों के साथ अपनी रियासत के अहम मुद्दों पर चर्चा करते थे, वहां मुख्यमंत्री व कैबिनेट मंत्रियों का भोज होगा। अस्थायी सचिवालय बनेगा कैबिनेट बैठक के दौरान राजवाड़ा पर अस्थायी सचिवालय की स्थापना की जा रही है, जहां बैठक के संबंध में सभी प्रशासनिक गतिविधियां संचालित होंगी। सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस दल तैनात किए जाएंगे। मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए लाइजनिंग अधिकारी नियुक्त होंगे। शासन की विभिन्न योजनाओं और इंदौर के विकास की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। सामने के गार्डन को भी संवारा जा रहा है।   मालवी परंपरा और संस्कृति की दिखेगी झलक राजवाड़ा को होलकरकालीन पारंपरिक शैली में सजाया जा रहा है। बाहर और भीतर मालवी संस्कृति की झलक दिखाई देगी। मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों का स्वागत-सत्कार मालवी परंपरा से किया जाएगा। बैठक के बाद प्रथम तल पर पारंपरिक मालवी भोज का आयोजन किया गया है, जिसमें स्थानीय व्यंजन विशेष रूप से दाल-बाटी, दही बड़ा, मावा बाटी आदि परोसे जाएंगे।  

भस्म आरती की सामान्य बुकिंग श्रावण में शनिवार, रविवार और सोमवार को कैंसल रह सकती है

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण मास में सप्ताह के तीन दिन भस्म आरती की सामान्य बुकिंग सुविधा स्थगित रह सकती है। मंदिर समिति शनिवार, रविवार व सोमवार यानी भीड़ वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या सीमित करने पर विचार कर रही है। बता दें इन दिनों के लिए भस्म आरती की ऑनलाइन बुकिंग सुविधा को पहले ही ब्लॉक कर दिया गया है। यानी इन तीन दिनों में ऑफलाइन, ऑनलाइन व्यवस्था की कुल 700 सीटों पर बुकिंग नहीं होगी। महाकाल मंदिर में 11 जुलाई से श्रावण मास की शुरुआत होगी।   3 से 4 लाख श्रद्धालु पहुंचेंगे महाकाल के दर्शन को पंचांग की गणना के अनुसार 9 अगस्त तक चलने वाले इस पुण्य पवित्र मास में प्रतिदिन 3 से 4 लाख भक्तों के भगवान महाकाल के दर्शन करने आने का अनुमान है। देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के मन में भगवान महाकाल की भस्म आरती के दर्शन की प्रबल इच्छा रहती है। भक्तों की इसी मंशा का पूरा करने के लिए मंदिर समिति भस्म आरती में चलायमान दर्शन व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने की योजना बना रही है। इसके लिए कार्तिकेय मंडपम को पूरी तरह रिक्त रखा जाएगा। नंदी व गणेश मंडपम में बैठकर भस्म आरती दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बेहद सीमित रहेगी। खासकर शनिवार, रविवार व सोमवार को अत्यधिक भीड़ वाले दिनों में भस्म आरती की सामान्य बुकिंग सुविधा को भी बंद रखा जाएगा। भस्म आरती बुकिंग के अभी यह विकल्प ऑनलाइन – 400 स्थान ऑफलाइन – 300 स्थान प्रोटोकाल – 700 स्थान पुजारी, पुरोहित के यजमान – 400 स्थान प्रतिदिन कुल – 1800 सीट की बुकिंग इस बार श्रावण में चार सोमवार 11 जुलाई से शुरू हो रहे श्रावण मास का समापन 9 अगस्त रक्षा बंधन के दिन होगा। इस बार श्रावण मास में चार सोमवार रहेंगे। श्रावण का पहला सोमवार 14 जुलाई, दूसरा 21 जुलाई, तीसरा 28 जुलाई तथा चौथा सोमवार 4 अगस्त को रहेगा। रात 2.30 बजे खुलेंगे मंदिर के पट श्रावण मास में भगवान महाकाल भक्तों के लिए समान्य दिनों की जल्दी जागेंगे। श्रावण मास में प्रत्येक रविवार को रात 2.30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे। पश्चात भगवान महाकाल की भस्म आरती होगी। सप्ताह के शेष दिनों में रात 3 बजे मंदिर के पट खोले जाएंगे।

जल गंगा संवर्धन अभियान: मध्यप्रदेश सरकार ने इस अभियान’ से जल संकट के समाधान के लिये गंभीर पहल की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान पर्यावरण और जल संरक्षण, जल संरचनाओं के पुनरुत्थान और सांस्कृतिक चेतना का समवेत संगम बन गया है। मध्यप्रदेश सरकार ने इस अभियान’ से जल संकट के समाधान के लिये गंभीर पहल की है। जल संकट देश-प्रदेश ही नहीं पूरी दुनिया की चिंता का विषय है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए तो यह जीवन-मृत्यु का विषय है। भविष्य की चिंताओं का समाधान आज के अभियान में जल संवर्धन के प्रयासों में निहित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रारंभ किया गया जल गंगा संवर्धन अभियान एक बहुस्तरीय आयोजन है। इसका उद्देश्य राज्य के जल स्रोतों जैसे नदियों, तालाबों, झीलों, बावड़ियों, पुराने कुओं और जलधाराओं को पुनर्जीवित करना और उन्हें सतत रूप से संरक्षित करना है। यह अभियान सरकारी योजना से आगे बढ़कर अब जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है। जल गंगा संवर्धन अभियान में पुराने जल-स्त्रोतों का पुनरूद्धार पुनीत कार्य- उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने जल गंगा संवर्धन अभियान में जबलपुर जिले में जल स्त्रोतों के संरक्षण के लिये संचालित की जा रही गतिविधियों का निरीक्षण किया। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने जनपद पंचायत कुंडेश्वर धाम के गुरैया गांव में बने खेत तालाब, कूप रिचार्ज निर्माण और बघराजी गांव में में लैगून पद्धति से जोगी तालाब के विस्तार एवं सुदृढीकरण के कार्य का निरीक्षण किया। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने बघराजी में जन समुदाय को संबोधित करते हुए जल संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में तत्परता से कार्य करने के लिए प्रशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान प्रदेश भर में ताल, तलैया, कुएं एवं बावड़ी सहित विभिन्न जल स्रोतों को संरक्षित करने के साथ ही प्राचीन जलस्रोतों को सूचीबद्ध कर उन्हें पुनर्जीवित किये जाने का पुनीत कार्य हो रहा है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कुंडेश्वर धाम के साथ ही हनुमान ताल में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों का निरीक्षण भी किया। हनुमान ताल के उन्नयन के लिए अमृत योजना के तहत 55 लाख 09 हजार 514 रूपए की लागत से डी-सिल्टिंग, फेंसिंग और एरिएशन के कार्य किए जा रहे हैं। ताप्ती नदी से निकाली गाद, हटाया कचरा, प्लास्टिक काई जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत बुरहानपुर में नया खेड़ा गांव के ताप्ती घाट छोटे पुल पर स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से आयोजित श्रमदान में नेपानगर विधायक सुश्री मंजू दादू, जनपद अध्यक्ष श्री राकेश सोलंकी, जनप्रतिनिधिगण, जिला पंचायत सीईओ सुश्री लता शरणागत, अपर कलेक्टर श्री वीरसिंह चौहान, एसडीएम श्री वाखला, जनपद सीईओ श्रीमती वंदना कैथल, जिला परियोजना प्रबंधक श्रीमति संतमति खलखो, पंचायत विभाग के समस्त अधिकारी-कर्मचारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका सहित अन्य विभागों के अधिकारीगणों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। श्रमदान करने वालों ने ताप्ती नदी में उतरकर गाद, नदी पुराने कपड़े और प्लास्टिक कचरे को बाहर निकाला। नदी में जमी हरी काई को भी साफ किया गया। सीहोर जिले में जल गंगा अभियान से जगाई जन जागरुकता की अलख  अभियान में जल संरक्षण के प्रति नागरिकों और ग्रामवासियों को जागरुक बनाने के लिए अनेक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। अभियान में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता जगाने के लिए दीवार लेखन, जागरूकता रैली, पोस्टर-बैनर, रंगोली, ग्राम सभाएं, कलश यात्राएं, शपथ-ग्हण सहित अनेक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। जिले के गांवों में कुओं की मरम्मत, तालाबों का जीर्णोद्धार, डैम्स की साफ-सफाई सहित अनेक कार्य किए जा रहे हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने ग्राम पंचायत जताखेड़ा के खोखरी गांव में जल संरक्षण के प्रति जन जागरूकता जगाने के लिए शिविर आयोजित किया गया। मुरैना में खिरावली तालाब का श्रमदान से जीर्णोद्धार जल संसाधन विभाग के कर्मचारियों ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत खिरावली तालाब के बंड पर उगे जंगल की सफाई जन सहयोग से की। कर्मचारियों और जन भागीदारी के परिश्रम से इस तालाब को पुनर्जीवन मिला है। अब यह ग्रीष्म ऋतु में भी भरा रहेगा। साथ ही आने वाले मानसून में इस पर्याप्त मात्रा में जल संग्रह होगा और स्थानीय जल स्रोतों में भी भू-जल रिचार्ज रहेगा। हरदा में प्राचीन बावड़ी का हुआ जीर्णोद्धार ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत जल स्रोतों के गहरीकरण एवं जीर्णोद्धार जैसे कार्य किए जा रहे हैं। अभियान में हरदा के कालू बाबा परिसर में स्थित प्राचीन बावड़ी में जीर्णोद्धार संचालित किया जा रहा है। इस कार्य का निरीक्षण करते हुए जिले के कलेक्टर मुख्य नगर पालिका अधिकारी को निर्माण वर्षा शुरू होने से पहले पूर्ण कराने के निर्देश दिये। प्राचीन बावड़ी का इतिहास एक बोर्ड पर लिखवाने के लिए भी कलेक्टर ने निर्देश दिया। जनभागीदारी से जन्मा भागीरथी संकल्प का प्रतीक यह अभियान भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित, समृद्ध और जल-सम्पन्न मध्यप्रदेश में जुटा जन-आंदोलन बन गया है।  

सीहोर जिले में सिविल डिफेंस वॉलंटियर में 2641 स्वयंसेवकों का नामांकन किया गया, आपातकालीन समय में करेंगे काम

सीहोर भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले दिनों बने युद्ध जैसे हालात को देखते हुए देश में आंतरिक सुरक्षा की भी तैयारी की जा रही है। युद्ध होने की स्थिति में सीमा पर सेना जंग लड़ेगी और सिविल डिफेंस की टीम भी गृह युद्ध, दंगे और आपात स्थितियों के लिए तैयार रहेगी। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में सिविल डिफेंस वॉलंटियर संगठन को मजबूत करने का अभियान सफल रहा। जिले में 2641 स्वयंसेवकों का नामांकन किया गया। 12 से 17 मई के बीच 2345 स्वयंसेवकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण में स्वयंसेवकों को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के गुर सिखाए गए। भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले दिनों बने युद्ध जैसे हालात को देखते हुए देश में आंतरिक सुरक्षा की भी तैयारी की जा रही है। युद्ध होने की स्थिति में सीमा पर सेना जंग लड़ेगी और सिविल डिफेंस की टीम भी गृह युद्ध, दंगे और आपात स्थितियों के लिए तैयार रहेगी। जिला प्रशासन ने सिविल डिफेंस की टीम बनाने के लिए देशभक्ति और समाजसेवा में रुचि रखने वाले युवाओं को प्रशिक्षित किया। कलेक्टर बालागुरू के. और  एसपी दीपक कुमार शुक्ला के निर्देशानुसार, प्रशिक्षण के तहत सीहोर जिले में कुल 2641 सिविल डिफेंस वॉलंटियर नामांकित किए गए हैं। इसके तहत 12 मई से 17 मई तक आयोजित प्रशिक्षण में 2345 सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों को गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में स्वयंसेवकों ने उत्साह से भाग लिया और देश की सेवा के लिए पूरी तत्परता से कार्य करने की कसम खाई। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के गुर सिखाए इस प्रशिक्षण सत्र का मुख्य उद्देश्य स्वयंसेवकों को विभिन्न आपातकालीन स्थितियों, जैसे युद्ध के समय हवाई हमले, आगजनी अथवा किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं के दौरान, अपनी और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के तरीकों से अवगत कराना था। प्रशिक्षण में स्वयंसेवकों को सिखाया गया कि इन विषम परिस्थितियों में वे किस प्रकार अपनी और अपने समुदाय की सुरक्षा को प्रभावी ढंग से संभाल सकते हैं। प्लाटून कमांडर महेंद्र वर्मा, अशोक पाटीदार एवं एएसआई सीएस चंदेरिया ने बताया कि यह पहल मध्यप्रदेश सरकार की आपदा प्रबंधन तैयारियों को मजबूत करने और आम नागरिकों को आपातकालीन स्थितियों में प्राथमिक प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मध्य प्रदेश में शिक्षकों के करीब 10 हजार पदों पर नियुक्तियां होना है, नियुक्तियां हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन

जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति द्वारिकाधीश बंसल की एकलपीठ ने माध्यमिक व प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा के तहत होने वाली नियुक्तियों को इस याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन कर दिया है। इस अंतरिम आदेश के साथ की स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव, आयुक्त लोक शिक्षण, आयुक्त आदिवासी विभाग व कर्मचारी चयन आयोग के संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। याचिकाकर्ता सतना निवासी प्रदीप कुमार पांडे की ओर से आर्यन उरमलिया ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि माध्यमिक शिक्षक (संस्कृत) पद के लिए भर्ती प्रक्रिया में पात्रता नियमों में अचानक संशोधन कर दिया गया। पात्रता शर्तों में संशोधन कर दिया याचिकाकर्ता ने वर्ष 2023 में आयोजित माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में सफलता प्राप्त की थी और सभी आवश्यक योग्यताएं भी पूरी की थीं। लेकिन राज्य सरकार ने वर्ष 2024 में नया परीक्षा संचालन मैनुअल जारी किया, जिसमें माध्यमिक शिक्षक (संस्कृत) पद के लिए पात्रता शर्तों में संशोधन कर दिया गया। 10 हजार पदों पर होना है नियुक्तियां करीब 10 हजार पदों पर नियुक्तियां होना है। वर्ष 2018 के नियमों के अनुसार, माध्यमिक शिक्षक (संस्कृत) पद के लिए शास्त्री उपाधि (द्वितीय श्रेणी) संस्कृत साहित्य/व्याकरण के साथ अनिवार्य थी। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने 2023 में आयोजित पात्रता परीक्षा में भाग लिया और उसे सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया। वर्ष 2024 में जारी नए पात्रता मानदंड को संशोधित कर दिया, जिससे याचिकाकर्ता अयोग्य हो गया। इधर जिला शिक्षा अधिकारी कटनी का आदेश निरस्त हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने जिला शिक्षा अधिकारी कटनी के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता को गलत श्रेणी में विभाजित कर वेतनमान तय किया था। कोर्ट ने मामला वापस डीईओ को भेजने और उपयुक्त वेतनमान प्रदान करने के निर्देश दिए। इसके लिए 90 दिन की मोहलत दी है। याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी अनिल कुमार गर्ग की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति वर्ष 1984 में विकासखण्ड मंझौली में समयपाल (टाइम कीपर) के पद पर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में की गई थी। दलील दी गई कि डीईओ कटनी द्वारा 12 सितंबर 2017 को आदेश जारी कर याचिकाकर्ता को अकुशल श्रेणी के वेतनमान पर नियमित किया गया।

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