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नैंसी त्यागी ने Cannes में पहनी ड्रेस पर विवाद, नेहा भसीन ने खोली पोल

मुंबई कान्स फिल्म फेस्टिवल 2025 में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर नैंसी त्यागी ने दूसरी बार अपने फैशन का जलवा दिखाया. पिछले साल कान्स पहुंचकर उन्होंने देश का नाम गर्व से ऊंचा किया था. यूपी के बागपत की रहने वाली नैंसी अपनी ड्रेसेस खुद बनाकर सोशल मीडिया पर फ्लॉन्ट करती हैं. इस हुनर ने उन्हें कान्स तक पहुंचाया. सक्सेस एंजॉय कर रही नैंसी ने दूसरी बार भी कान्स में डंका बजाया. लेकिन इस बीच अपनी एक ड्रेस को लेकर वो विवादों में आ गई हैं. नैंसी की ड्रेस पर विवाद दरअसल, नैंसी ने कान्स में दूसरे दिन रेड कारपेट पर सिल्वर बेज कलर टोन की क्रिस्टल पर्ल कॉर्सेट मिनी ड्रेस पहनी थी. इस आउटफिट को उन्होंने ड्रामेटिक लॉन्ग ट्रेल संग अटैच किया. नैंसी ने दावा किया था कि ये ड्रेस उन्होंने खुद डिजाइन की है. पोस्ट में उन्होंने लिखा था- ये कलर मेरी मम्मी का फेवरेट है. इसलिए इस बार फैसला किया कि इसी कलर में ड्रेस डिजाइन करूं. इसे बनाने में पूरा 1 महीना लगा. आखिर पल तक मैं तैयारी में लगी रही. क्योंकि ड्रेस काफी हैवी थी. उन सभी का दिल से शुक्रिया जो इस जर्नी का हिस्सा रहे. नैंसी की खुली पोल लेकिन सामने आया है नैंसी ने झूठ बोला है. सिंगर नेहा भसीन ने इंस्टा पर अपनी कुछ तस्वीरें शेयर की हैं जिनमें उन्होंने सेम कॉर्सेट ड्रेस पहनी है. नेहा ने इस ड्रेस को दिसंबर 2024 में अपने एक कॉन्सर्ट में पहना था. नेहा ने इंस्टा पर अपनी फोटोज शेयर कर लिखा- ये कॉर्सेट काफी जाना पहचाना सा लग रहा है. बस हैरानी हो रही है. नैंसी और अपनी कॉर्सेट ड्रेस का कोलाज शेयर कर नेहा ने लिखा- सेम सेम. सिंगर ने ये भी बताया कि उनकी ये कॉर्सेट ड्रेस मुंबई के एक फैशन स्टोर ‘द सोर्स बॉम्बे’ से ली गई थी. वो लिखती हैं- I rest my case. फैशन स्टोर का दावा द फ्री प्रेस जर्नल संग बातचीत में फैशन स्टोर की फाउंडर और स्टाइलिस्ट सुरभि गुप्ता ने कंफर्म किया कि नैंसी ने ये ड्रेस उनके स्टोर से खरीदी थी. उन्होंने कहा- नैंसी ने दावा किया कि उन्होंने ये ड्रेस खुद सिली थी. लेकिन ये उन्होंने हमसे खरीदी थी. ये उन्होंने हमारे मुंबई के स्टोर से ली थी. वो जो कहना चाहती हैं कह सकती हैं. लेकिन वो हमारा डिजाइन है. हम बार्टर और कोलेबोरेट नहीं करते. उन्होंने वो ड्रेस नहीं बनाई थी. हां, जो कैप उन्होंने बनाई थी वो हमारी नहीं है. वो शायद उन्होंने खुद बनाई थी. सुरभि ने बताया कि नैंसी ने ये आउटफिट कान्स में जाने से पहले उनके स्टोर से 25 हजार रुपये में खरीदी थी. नेहा भसीन की पोस्ट नैंसी पर अपना खुलासा करने के बाद नेहा ने पोस्ट कर बताया कि सच सामने लाने का उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं था. बल्कि किसी की मेहनत और काम को अपना कहने के वो खिलाफ हैं. हर कोई इंडस्ट्री में सेल्फ मेड है. किसी के काम को अपना बताना गलत है. नैंसी की तरफ से अभी तक इस पूरे विवाद पर कोई रिएक्शन नहीं आया है. फैंस इस खुलासे के बारे में जानकर हैरान जरूर हैं. नैंसी के कान्स लुक की तारीफ करने वाले यूजर्स अब उन्हें ट्रोल करते दिख रहे हैं.

मंत्री विजय शाह केस में SIT का गठन, टीम में इकलौती महिला IPS अधिकारी वाहिनी सिंह को शामिल किया

भोपाल  मध्य प्रदेश डीजीपी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मंत्री विजय शाह मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी एसआईटी में इकलौती महिला IPS अधिकारी वाहिनी सिंह को शामिल किया गया है। वाहिनी सिंह की गिनती मध्य प्रदेश में तेजतर्रार अधिकारी के रूप में होती है। अभी वह डिंडोरी जिले में एसपी हैं। कौन हैं आईपीएस अफसर वाहिनी सिंह वाहिनी सिंह 2014 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। 2013 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास की थी। पहले ही अटेम्पट में वाहिनी सिंह को 173वीं रैंक आई थी। एक इंटरव्यू के दौरान वाहिनी सिंह ने कहा था कि इसकी उम्मीद मुझे नहीं थी। वाहिनी ने ग्रेजुएशन बॉयोटेक में किया है। इसके बाद फायनेंस में एमबीए किया है। उनका जन्म 19 मार्च 1988 में हुआ था। बचपन में बनना चाहता था डॉक्टर आईपीएस वाहिनी सिंह ने कहा था कि ऐसा नहीं था कि मैं शुरू से ही आईएएस या आईपीएस बनना चाहती थी। बचपन में मैं डॉक्टर बनना चाहती थी, फिर पायलट बनने की भी चाहत हुई। साथ ही लगता था कि मैं अच्छे से पढ़ाई कर विदेश में जाकर नौकरी करूं। मेरे पिता राजस्थान स्टेट सर्विस के अधिकारी हैं। उनका सम्मान मैंने लोगों में देखा है। इसके बाद मेरे मन में यह जरूर था कि मैं एक दिन परीक्षा दूंगी। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद ही मैंने यूपीएससी देने का मन बनाया। इसके बाद दिल्ली जाकर तैयारी शुरू कर दी। चयन के बाद मिला पंजाब कैडर वहीं, आईपीएस बनने के बाद वाहिनी सिंह को पंजाब कैडर मिला था। उन्होंने कुछ दिनों तक पंजाब में काम भी किया। दिसंबर 2015 में शादी के नाम पर वाहिनी सिंह का कैडर ट्रांसफर हो गया। इसके बाद वह एमपी कैडर की आईपीएस अधिकारी बन गईं। वाहिनी सिंह ने कुछ साल पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि यह जॉब नाइन टू फाइव की नहीं है। हमेशा चुनौती भरा काम रहता है। पति भी हैं आईपीएस अफसर डिंडोरी एसपी वाहिनी सिंह की शादी मध्य प्रदेश में हुई है। उनके पति आईपीएस नागेंद्र सिंह हैं। नागेंद्र सिंह 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। अभी वह बालाघाट के एसपी हैं। डिंडोरी और बालाघाट आसपास ही हैं। पति के कारण पड़ चुकी है डांट वहीं, आईपीएस वाहिनी सिंह को कुछ साल पहले तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान से पति के कारण डांट पड़ चुकी है। तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान सभी कलेक्टर्स और एसपी की मीटिंग ले रहे थे। उस समय वाहिनी सिंह निवाड़ी की एसपी थीं और उनके पति नागेंद्र सिंह भिंड एसपी थे। तब शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि आपके लाइफ पार्टनर आपके सरकारी काम में इंटरफियर करते हैं। नागेंद्र सिंह पर रेत माफिया से सांठगांठ के आरोप लगे थे। हालांकि फटकार की बात पर वाहिनी सिंह ने चुप्पी साथ ली थी। वाहिनी सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मुझे हसबैंड से बहुत सपोर्ट मिलता है। डिंडोरी में एसपी रहते हुए उन्होंने एक अलग मिसाल पेश की है। वाहिनी सिंह सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जागरूक भी करती हैं। साथ ही उन्हें मोटिवेट करती हैं। 8 दिन में सौंपना होगी जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को 28 मई तक जांच करने के आदेश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने शाह को गिरफ्तारी से राहत देते हुए जांच में सहयोग करने के लिए भी कहा है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह को फटकार लगाई है. कोर्ट ने सरकार और पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि एफआईआर के बाद आपने क्या किया? जांच कहां पहुंची? पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को कुछ और ठोस कदम उठाने चाहिए थे. इस बयान से बढ़ीं विजय शाह की मुश्किलें मंत्री विजय शाह की मुश्किलें 11 मई को उनके द्वारा दिए गए बयान से बढ़ी हैं. उन्होंने महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर मंच से बयान दिया था. उन्होंने नाम लिए बिना कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकियों की बहन बता दिया था. उन्होंने कहा था कि, उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी तैसी करने उनके घर भेजा.” हाई कोर्ट ने लिया था संज्ञान मंत्री का वीडियो वायरल हुआ तो जबलपुर हाईकोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया. हाईकोर्ट ने 14 मई को 4 घंटे में मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए. हालांकि मामले में FIR तो दर्ज हुई, लेकिन हाईकोर्ट ने FIR को खाना पूर्ति बताया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि अब इस मामले में कोर्ट ही पुलिस जांच की निगरानी करेगी. हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी कैविएट दायर की है. यानी आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के मामले को भी सुना जाएगा. विजय शाह मामले में कब क्या हुआ     11 मई को मंत्री विजय शाह, महू के रायकुंडा गांव पहुंचे और यहां एक कार्यक्रम में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान दिया. बयान में मंत्री ने कर्नल सोफिया को अतंकियों की बहन बता दिया.     13 मई को मंत्री का विवादित बयान वाला वीडियो वायरल होने के बाद मामला गरमाता देख मंत्री विजय शाह ने बयान को लेकर माफी मांगी.     13 मई को वायरल वीडियो बीजेपी नेताओं तक पहुंचा. इसको लेकर पार्टी संगठन ने मंत्री विजय शाह को कड़ी फटकार लगाई. शाम 7 बजे मंत्री विजय शाह बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से मिलने उनके बंगले पर पहुंचे.     14 मई को कांग्रेस नेताओं ने इसको लेकर विरोध जताया. कांग्रेस ने बीजेपी से मंत्री पर मामला दर्ज कराने और बर्खास्त करने की मांग की.     14 मई को मंत्री विजय शाह के विवादित बयान को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 4 घंटे में FIR दर्ज करने के आदेश दिए.     14 मई की रात करीबन सवा 11 बजे इंदौर के मानपुर थाने में विजय शाह के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया.     15 मई को मंत्री की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई. सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें फटकार मिली. उधर जबलपुर हाईकोर्ट ने दर्ज की गई एफआईआर पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे कमजोर और असंतोषजनक बताया. कोर्ट ने अपने आदेश को … Read more

सिविल जज जूनियर डिविजन के पद के लिए उम्मीदवार को तीन साल कम से कम बतौर वकील प्रैक्टिस करना जरूरी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आज मंगलवार को एक अहम फैसले में कहा कि सिविल जज जूनियर डिविजन के पद के लिए उम्मीदवार को तीन साल कम से कम बतौर वकील प्रैक्टिस करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रैक्टिस की अवधि प्रोविजनल नामांकन की तारीख से मानी जा सकती है, सर्वोच्च अदालत ने साफ किया कि यह शर्त आज से पहले उच्च न्यायालयों द्वारा शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया पर लागू नहीं होगी, यह शर्त केवल भविष्य की भर्तियों पर लागू होगी। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की तीन सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में कहा कि देखा गया है कि जो नए लॉ ग्रेजुएट न्यायपालिका में नियुक्त होते हैं, उनके कारण कई समस्याएं हुई हैं। ऐसे में सभी उम्मीदवारों को न्यायपालिका में दाखिल होने के लिए कम से कम तीन साल बतौर वकील प्रैक्टिस करना जरूरी होगा। दिखाना होगा ऐसा सर्टिफिकेट सुप्रीम कोर्ट ने कहा शर्त पूरी करने के लिए उम्मीदवार को 10 साल तक प्रैक्टिस कर चुके वरिष्ठ वकील या तय न्यायिक अधिकारी द्वारा जारी सर्टिफिकेट को दिखाना होगा। कोर्ट ने ये भी कहा कि यदि  कोई वकील सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहा है तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट में 10 साल तक प्रैक्टिस कर चुके वकील या तय न्यायिक अधिकारी द्वारा जारी सर्टिफिकेट दिखाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रैक्टिस की अवधि नामांकन की तारीख से मानी जा सकती है। अदालत ने साफ किया कि यह आदेश उच्च न्यायालयों में हो चुकी नियुक्तियों पर लागू नहीं होगा यह शर्त केवल भविष्य की भर्तियों पर लागू होगी। और क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने? CJI ने कहा कि सभी राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करने के लिए नियमों में संशोधन करेंगी कि सिविल जज जूनियर डिवीजन के लिए उपस्थित होने वाले किसी भी उम्मीदवार के पास न्यूनतम 3 साल का अभ्यास होना चाहिए, इसे बार में 10 वर्ष का अनुभव वाले वकील द्वारा प्रमाणित और समर्थित किया जाना चाहिए, कोर्ट ने एक सुविधा देते हुए कहा कि जजों के विधि लिपिक के रूप में अनुभव को भी इस संबंध में गिना जाएगा।

प्रोफेसर जयंत नार्लीकर नहीं रहें, पूरे वैज्ञानिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति

रायपुर आज की सुबह एक दुखद खबर लेकर आई है। प्रसिद्ध खगोल वैज्ञानिक पदम् विभूषण जयंत विष्णु नार्लीकर हमारे बीच नहीं रहे। आज भोर में उनका सोते सोते निधन का दुःख भरा समाचार प्राप्त हुआ है।ज्ञात हो कि प्रोफेसर जयंत नार्लीकर कई बार छत्तीसगढ़ आए हैं और यहां के विद्यार्थियों और शिक्षकों के अलावा आम लोगों से भी सीधे संवाद किया है। उनकी गणितज्ञ पत्नी मंगला नार्लीकर के साथ उन्होंने रायपुर से लेकर धमतरी, कांकेर जगदलपुर बस्तर से दूरदराज स्थित दरभा घाटी के स्कूल तक में बच्चों से वैज्ञानिक सोच और खगोल विज्ञान पढ़ने की जरूरत पर बातचीत की थी। रायपुर और भिलाई में जब उनका लेक्चर हुआ था तो हाल में खड़े होने के लिए भी जगह नहीं थी और लोग खिड़कियों से सटकर उनका व्याख्यान सुन रहे थे। उनसे प्रश्न पूछने के लिए होड़ लगी हुई थी।  छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के सम्माननीय सदस्यों को उनके इन सात दिवसीय दौरे में उनका अच्छा सानिध्य मिला था। उन्होंने आम जनमानस से अंधश्रद्धा मिटाने के लिए अपनी आवाज उठाई, विश्वविद्यालयों में ज्योतिष पढ़ाए जाने का खुलकर विरोध किया और महाराष्ट में काला जादू विरोधी कानून बनाने के लिए संघर्षों की अगुवाई की। छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा उनके दुःखद निधन पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देती है। आज  20 मई 2025 की शाम सात बजे प्रोफेसर जयंत नार्लीकर को श्रद्धांजलि देने के लिए छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा द्वारा  एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की जा रही है जिसमें  पीआरएसयू के पूर्व कुलपति और खगोलभौतिकविद प्रोफेसर एस के पाण्डेय,  प्रसिद्ध टेक्सोनॉमिस्ट प्रो एम एल नायक, आल इंडिया पीपुल साइंस मूवमेंट के कोषाध्यक्ष डॉ एस आर आजाद  सहित कई शिक्षाविदों और वैज्ञानिक सोच के लिए काम करने वाले साथियों द्वारा अपने विचार व्यक्त किए जाएंगे।

पूर्व मंत्री पर दहेज प्रताड़ना का मामला हुआ दर्ज, बहू बोली-MBA बताकर कराई शादी, पति निकला 8वीं फेल, लगाए ये आरोप

 कुक्षी धार जिले के कुक्षी से विधायक और पूर्व पर्यटन मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल की बहू ने उनके परिवार के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया है। बहू ने एक वीडियो भी जारी किया जिसमें उन्होंने यह जानकारी दी। पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है। पुलिस मंगलवार को पूर्व मंत्री और उनके परिवार के आरोपित सदस्यों को नोटिस देगी। दहेज प्रताड़ना के सारे मामले जमानती हैं, इसलिए आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। पुलिस नोटिस भेजकर मामला कोर्ट में पेश करेगी। बहू का आरोप है कि पूर्व मंत्री और उनके परिवार वालों ने उसे धोखा दिया। उन्होंने बताया कि उसे यह कहा गया था कि उसका पति एमबीए पास है और वह परिवार का व्यापार संभालता है, लेकिन असल में वह सिर्फ आठवीं पास है। यह मामला भोपाल के महिला थाना में दर्ज किया गया है। एसीपी महिला अपराध निधि सक्सेना ने बताया कि काम्या सिंह (पति देवेंद्र सिंह) ने शिकायत की है कि विधायक सुरेंद्र सिंह बघेल, उनकी पत्नी शिल्पा सिंह बघेल, मां चंद्रकुमार सिंह बघेल और बहन शीतल सिंह बघेल ने मिलकर उसके पति के बारे में गलत जानकारी दी। शादी से पहले बताया गया था कि देवेंद्र एमबीए कर चुका है और व्यापार संभालता है। लेकिन शादी के बाद पता चला कि वह एमबीए नहीं है, सिर्फ आठवीं पास है। वह शराब भी पीता है और परिवार के व्यवसाय या संपत्ति में उसकी कोई हिस्सेदारी नहीं है। मारपीट और दहेज प्रताड़ना का आरोप कांग्रेस विधायक और अन्य सभी आरोपियों पर मारपीट करने, दहेज में स्काॉर्पियो कार मांगने, प्रताड़ित करने और असली जानकारी छिपाकर शादी कराने के आरोप हैं. पुलिस इस मामले में मंगलवार को सभी आरोपियों को गिरफ्तारी नोटिस जारी करने की तैयारी में हैं. शिकायतकर्ता की ओर से पुलिस को मारपीट और धमकाते हुए वीडियो भी सौंपे गए थे. जिनके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है. सभी धाराएं जमानती बताई जा रही हैं. बहू ने लगाए आरोप बहू काम्या सिंह बघेल के अनुसार, वह 34 साल की हैं. शीतल सिंह बघेल ने उनकी शादी कराई थी. शादी से पहले बताया गया था कि पति देवेंद्र सिंह एमबीए हैं, उनका अच्छा बिजनेस है. शादी के बाद पता लगा कि पति 8वीं फेल हैं. पारिवारिक बिजनेस से उन्हें दूर रखा जाता है, क्योंके वे शराब पीने के आदि हैं. जब पति की सच्चाई सामने आई तब जेठ और सास से इस बारे में बात की तो उन्होंने धमकाना शुरू कर दिया. आए दिन मारपीट की जाने लगी. घर से निकाला, केस में फंसाने की धमकी दी काम्या सिंह के मुताबिक, पति दबाव बनाकर तलाक के पेपर साइन कराना चाहते थे. जब इनकार किया तो मेरे खिलाफ षड्यंत्र किए जाने लगे. मुझे और मेरे मायके वालों को झूठे एससी-एसटी के केस में फंसाने की धमकी दी जाने लगी. काम्या ने आरोप लगाया कि उन्हें घर से निकाल दिया गया. परेशान करने के लिए बच्चों की स्कूल फीस तक देना बंद कर दी गई. इसके बाद थाने में शिकायत की. जांच के बाद भोपाल की महिला थाना पुलिस ने केस दर्ज कर दिया है. गिरफ्तारी के लिए नोटिस जारी करेगी पुलिस एसीपी महिला अपराध निधि सक्सेना ने बताया कि विधायक हनी सिंह बघेल सहित पांच लोगों पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है. केस की जांच कराई जा रही है. जल्द गिरफ्तारी के लिए नोटिस जारी किए जाएंगे. काम्या ने लगाए ये आरोप काम्या ने कहा है कि उन्हें गलत जानकारी देकर शादी कराई गई। जब उन्होंने इस शादी के खिलाफ बात की तो परिवार के लोग उनके साथ गलत व्यवहार करने लगे और धमकी देने लगे ताकि वह चुप रहें। उसके साथ रोज मारपीट भी होती है और उनके बच्चों की स्कूल फीस भी नहीं दी जा रही है। जब काम्या ने आवाज उठाई तो उन्हें घर से भी निकाल दिया गया। काम्या का यह भी कहना है कि उन पर दबाव बनाया गया कि वे तलाक के कागजात पर जबरदस्ती दस्तखत करें, लेकिन वे ऐसा करने से मना कर दिया। उनके मायके वालों को झूठे एससी एसटी केस में फंसाने की धमकी भी दी गई। कुछ दिन पहले तक काम्या भोपाल में थीं, लेकिन अब वह धार जिले के कुक्षी में हैं। काम्या ने इस मामले की जानकारी देने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया है।  

व्यापमं मामले के आरोपी डॉ सुधीर शर्मा को एमपी हाईकोर्ट से बड़ी राहत, चारों FIR रद्द

भोपाल  व्यापमं घोटाले की जांच के बाद सीबीआई ने डॉ सुधीर शर्मा को चार प्रकरण में आरोपी बनाते हुए न्यायालय में उनके खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चार याचिकाएं दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने दायर याचिकाओं की संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए चारों एफआईआर को निरस्त करने के आदेश जारी किए है। विस्तृत आदेश फिलहाल प्रतिक्षित है। एसआईटी ने सुधीर शर्मा को जांच में पाया था दोषी दरअसल, व्यापमं घोटाले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने डॉ सुधीर शर्मा को प्रारंभिक जांच में दोषी माना था। इसके बाद चार मामलों में दोषी पाते हुए उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था। इसके बाद व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआई को सौंप दी गयी थी। चार परीक्षाओं से जुड़े थे केस सुधीर शर्मा पर व्यापमं घोटाले के तहत वर्ष 2011 से 2013 के बीच हुई विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं- संविदा शिक्षक वर्ग-2 (2011), उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा (2012), पुलिस कांस्टेबल परीक्षा (2012) और वनरक्षक परीक्षा (2013) में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर चार अलग-अलग केस दर्ज किए गए थे। दो साल जेल में रहे थे सुधीर शर्मा बता दें कि व्यापमं घोटाले का खुलासा वर्ष 2013 में हुआ था। आरोपी बनाए जाने के बाद खनन कारोबारी और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सुधीर शर्मा ने जुलाई 2014 में भोपाल जिला अदालत में आत्मसमर्पण किया था। करीब दो वर्षों तक जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था। शर्मा का संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और विज्ञान भारती जैसे संगठनों से भी रहा है। CBI को सौंपी गई थी जांच व्यापमं घोटाले की शुरुआती जांच विशेष जांच टीम (SIT) कर रही थी, लेकिन बढ़ते दबाव और राष्ट्रीय स्तर पर मामला गूंजने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। शर्मा पर परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी की नियुक्ति में सिफारिश करने और परीक्षा प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे, लेकिन कोर्ट ने पाया कि इन आरोपों के समर्थन में कोई निर्णायक साक्ष्य नहीं हैं। इन मामलों में बनाया था आरोपी सीबीआई ने उनके खिलाफ सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2012, पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 2012, संविदा शाला शिक्षक भर्ती वर्ग 2 परीक्षा 2011 और वन रक्षक भर्ती परीक्षा 2013 में हुई धांधली में आरोपी बनाते हुए न्यायालय के समक्ष चालान प्रस्तुत किया था। जिसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिकाकर्ता के वकील की दलील याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता कपिल शर्मा ने युगलपीठ को बताया कि याचिकाकर्ता ने सभी चार मामलों में किसी भी व्यक्ति से आर्थिक संव्यवहार नहीं किया गया है। सीबीआई की चार्जशीट और एक्सेल शीट में इस बात का कहीं उल्लेख नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता ने किसी तरह का आर्थिक लाभ अर्जित किया है। दर्ज किए गए प्रकरण कुछ गवाहों के मेमोरेंडम के आधार पर दर्ज किए गए हैं। आर्थिक लाभ अर्जित करने के कोई साक्ष्य नहीं होने के कारण दर्ज एफआईआर निरस्त करने के योग्य है। युगलपीठ ने प्रकरण में साक्ष्यों के अभाव में चारों प्रकरण में एफआईआर निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं।

MP में आज भी जारी रहेगा आंधी-बारिश का दौर, 40 जिलों में बारिश का अलर्ट, भीगेंगे ये बड़े शहर

भोपाल मध्यप्रदेश में सात सिस्टम की एक्टिविटी है। एक टर्फ तो प्रदेश के बीचों बीच से गुजर रही है। इस वजह से आंधी-बारिश का दौर शुरू हो गया है। मंगलवार को भी आंधी-बारिश का दौर जारी रहेगा। मौसम विभाग ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत 40 जिलों में तेज आंधी चलने और बारिश होने का अलर्ट जारी किया है। हालांकि, ग्वालियर-चंबल में पहले लू का अलर्ट जारी किया गया था, लेकिन सिस्टम की एक्टिविटी की वजह से अगले 4 दिन तक बारिश होने के आसार है। सोमवार को 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। आज इन जिलों में अलर्ट मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए जिन जिलों में अलर्ट जारी किया है, उनमें भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, रीवा, सीधी, सिंगरौली, पन्ना, दमोह, मंडला, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, सीहोर, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार, अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर और नीमच शामिल हैं। यहां 30 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा तक आंधी चल सकती है। कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश भी होगी। इधर, रीवा के जवा तहसील के चटेह गांव में आज सुबह करीब 7 बजे बिजली की तार की चपेट में आने से 59 साल के किसान गोपीकृष्ण मिश्रा की मौत हो गई। हादसे में उनकी दो भैंसें भी मर गईं। स्थानीय लोगों ने मुताबिक सोमवार को आए आंधी-तूफान में कई पेड़ों के साथ बिजली के पोल और लाइनें टूट गई थीं। इसमें चटेह गांव के पास से गुजर रही 11 केवी की विद्युत लाइन भी टूटकर जमीन पर गिर गई थी। इससे पहले सोमवार को 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। इंदौर के महू और बड़वानी में तो घरों की टिन शेड भी उड़ गईं। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में सात सिस्टम की एक्टिविटी है। एक टर्फ तो प्रदेश के बीचोंबीच से गुजर रही है। इस वजह से आंधी-बारिश का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, ग्वालियर-चंबल में पहले लू का अलर्ट जारी किया गया था, लेकिन सिस्टम की एक्टिविटी की वजह से अगले 4 दिन तक बारिश होने के आसार है। 30 से 50Km/प्रतिघंटा रहेगी आंधी की रफ्तार मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए जिन जिलों में अलर्ट जारी किया है, उनमें भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, रीवा, सीधी, सिंगरौली, पन्ना, दमोह, मंडला, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, सीहोर, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार, अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर और नीमच शामिल हैं। यहां 30 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा तक आंधी चल सकती है। कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश भी होगी। इंदौर के महू में घरों की टिन उड़ी, 15 जिलों में बारिश इससे पहले सोमवार को भी आंधी, बारिश का दौर जारी रहा। इंदौर के महू में आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि घरों की टिन उड़ गईं। भोपाल में तेज आंधी के साथ बारिश हुई। देवास, दमोह, गुना सागर, छिंदवाड़ा, रायसेन, बड़वानी, मऊगंज, रतलाम और बीना में भी पानी गिरा। सीधी में सवा इंच पानी गिर गया। शिवपुरी में आधा इंच बारिश हुई। बड़वानी के सेंधवा ब्लॉक के बिजासन घाट क्षेत्र में आधे घंटे आंधी से कई कच्चे मकानों की छतें उड़ गईं। मंदिर क्षेत्र में लगी गुमटियां भी उड़ गईं। एक मकान की दीवार भी गिर गई। दमोह में तेज हवा की वजह से बिजली गुल हो गई। महू में मध्य भारत अस्पताल में एक पेड़ शेड पर गिर गया। जिससे दो युवक घायल हो गए। सीधी जिले में एक नाबालिग बालक आकाशीय बिजली की चपेट में आ गया। हादसे में गंभीर रूप से झुलस गया। खजुराहो में पारा रिकॉर्ड 46 डिग्री पहुंचा प्रदेश में सोमवार को तेज गर्मी, आंधी और बारिश का दौर रहा। छतरपुर जिले के खजुराहो में पारा रिकॉर्ड 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सीजन में पहली बार इतना पारा पहुंचा है। वहीं, नौगांव में 44.7 डिग्री, टीकमगढ़ में 44.6 डिग्री, शिवपुरी में 44 डिग्री रहा। इसी तरह सतना में 43.2 डिग्री, ग्वालियर में 43.1 डिग्री, दमोह में 43 डिग्री, सीधी में 42.8 डिग्री, गुना में 42.7 डिग्री, सागर में 41.7 डिग्री, रीवा में 41.4 डिग्री, मंडला में 41 डिग्री, शाजापुर में 40.8 डिग्री, उमरिया में 40.5 डिग्री, रतलाम में 40.4 डिग्री और नर्मदापुरम में 40.2 डिग्री रहा। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 40.2 डिग्री, इंदौर में 38.6 डिग्री, उज्जैन में 40.5 डिग्री, जबलपुर में 40.7 डिग्री सेल्सियस रहा। मध्य प्रदेश में अगले चार दिन ऐसा रहेगा मौसम   20 मई: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, मुरैना, भिंड,दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, रीवा, सीधी, सिंगरौली, पन्ना, दमोह, मंडला, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, सीहोर, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार, अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर और नीमच में बारिश होने की संभावना है। यहां हवा की रफ्तार 30 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा तक हो सकती है। 21 मई: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, छतरपुर,रीवा, सीधी, सिंगरौली, पन्ना, दमोह, मंडला, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, सीहोर, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार, अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर, शिवपुरी, अशोकनगर, गुना, राजगढ़, आगर-मालवा, सतना, मैहर, मऊगंज, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी और नीमच में बारिश होने की संभावना है। इन जिलों में तेज आंधी भी चल सकती है। 22 मई: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, टीकमगढ़, छतरपुर, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार, अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर, श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर, गुना, राजगढ़, आगर-मालवा, सतना, मैहर, मऊगंज, कटनी, पन्ना, दमोह, मंडला, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, सीहोर, जबलपुर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी और नीमच में बारिश होने का अलर्ट है। हवा की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रह सकती है। 23 मई: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, रीवा, सीधी, सिंगरौली, पन्ना, दमोह, मंडला, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, सीहोर, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार, अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर, श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर, गुना, राजगढ़, आगर-मालवा, सतना, मैहर, मऊगंज, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी और नीमच में बारिश होने की संभावना है।

अहमदाबाद नगर निगम ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ दूसरे चरण का अभियान शुरू किया, 8 हजार अवैध निर्माण होंगे ध्वस्त

अहमदाबाद  गुजरात के अहमदाबाद शहर में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का एक्शन जारी है। अहमदाबाद नगर निगम ने अवैध अधिक्रमण हटाने के लिए दूसरे चरण का अभियान शुरू कर दिया है। इसके तहत 2.5 लाख वर्ग मीटर की भूमि से अतिक्रमण हटाया जाना है। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, चंदोला क्षेत्र में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का काम शुरू भी कर दिया है। मौके पर भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है। बता दें कि पहले चरण के अभियान में 1.5 लाख वर्ग मीटर की जमीन से अतिक्रमण हटाया गया था। बांग्लादेशी नागरिकों का ठिकाना बन चुका है चंडोला तालाब पुलिस कमिश्नर जीएस मलिक ने कहा कि ये अवैध निर्माण अवैध बांग्लादेशी नागरिकों का ठिकाना बन चुके थे. पिछले महीने शहर में 250 अवैध बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए थे, जिनमें से 207 चंडोला तालाब के अवैध निर्माणों में रहते थे और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े थे. इससे पहले साल 2009 में 95 अवैध बांग्लादेशी पकड़े गए थे, तब भी यहां डिमोलिशन किया गया था. डिमोलिशन के दूसरे चरण के दौरान एक जेसीपी, एक एडीसीपी, 6 डीसीपी, एसीपी, और पीआई सहित कुल 3 हजार से ज्यादा पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे. 25 एसआरपी कंपनियां भी मौजूद रहेंगी. पहले चरण के दौरान स्थानीय लोगों ने गुजरात हाईकोर्ट में जाकर डिमोलिशन रोकने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने तालाब पर बने सभी निर्माणों को अवैध बताते हुए  डिमोलिशन पर रोक नहीं लगाई थी. इसके बाद प्रशासन ने 4 हजार अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिए थे. अब दूसरे चरण में बाकी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करके तालाब का हिस्सा खाली करवाया जाएगा. प्रशासन यह भी सुनिश्चित करेगा कि इस खाली जगह पर दोबारा कोई अवैध निर्माण न हो.     शहर के पुलिस कमिश्नर जीएस मलिक ने बताया कि दो शिफ्ट में पुलिस के करीब 3000 कर्मियों और एसआरपी की 25 कंपनियों को तैनात किया गया है। अतिक्रमण हटाए जाने की प्रक्रिया अगले 3-4 दिनों तक चल सकती है।     प्रभावित क्षेत्रों में दो दिन से लाउडस्पीकर से घोषणा कर लोगों से घर खाली करने की अपील की गई थी। चंदोला क्षेत्र में बिना कानूनी दस्तावेज के काफी अवैध बांग्लादशी रहते थे। इसमें से अधिकतर को अब डिपोर्ट किया जा चुका है।     दावा था कि क्षेत्र के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल अवैध गतिविधियां संचालित करने के लिए भी किया जा रहा था। 2010 से पहले क्षेत्र में रहने वाले लोगों को ईडब्ल्यूएस आवास के लिए वार्ड कार्यालय से फॉर्म लेने को कह दिया गया है। सुरक्षाबल इलाके में गश्त कर रहे हैं। अधिकारियों ने दी जानकारी अहमदाबाद के डीसीपी रवि मोहन सैनी ने कहा, ‘ये पूरा तालाब का एरिया है। इसमें जो भी निर्माण किया गया है, वो अवैध है। इसलिए आज इसे हटाया जा रहा है। पहले चरण में हमने जब अतिक्रमण हटाया था, तब कई अवैध बांग्लादेशी प्रवासी पकड़े गए थे। उनके खिलाफ डिपोर्टेशन की कार्रवाई शुरू की गई थी। ज्यादातर मकान अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के बता दें कि इससे पहले 29 और 30 अप्रैल को अभियान के पहले चरण में लगभग 3 हजार अवैध मकानों को ध्वस्त किया गया था, जिनमें ज्यादातर अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के थे। दूसरे चरण में भी प्रशासन ढाई हजार से ज्यादा अवैध निर्माणों को निशाना बना रहा है। बता दें कि गुजरात पुलिस ने पिछले कुछ हफ्तों में हजारों अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है, जिनमें से बड़ी संख्या में अहमदाबाद में रह रहे बांग्लादेशी भी शामिल हैं। चंदोला लेक इलाके में चल रही इस कार्रवाई का मकसद अवैध कब्जों को हटाना और घुसपैठियों पर नकेल कसना है। अवैध कब्जे की शुरुआत 1970-80 के दशक में हुई चंदोला लेक का इलाका लंबे समय से अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों का गढ़ बना हुआ था, जहां मानव तस्करी और जाली दस्तावेजों का जाल फैला हुआ था। इस इलाके में अवैध कब्जे की शुरुआत 1970-80 के दशक में हुई, जब यहां बड़ी संख्या में प्रवासी बस्तियां बसाई गईं। 2002 में एक NGO ने इस क्षेत्र में सियासत नगर नाम से बस्ती बसाई थी। इसके बाद 2010 से 2024 के बीच चंदोला झील की जमीन पर अवैध कब्जों में तेजी आई। प्रशासन के अनुसार, इस इलाके में लोगों ने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण किए, जिनमें कई अवैध बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल थे। अवैध कब्जे की शुरुआत कब हुई? लंबे समय से चंदोला लेक का इलाका अवैध बांग्लादेशियों का गढ़ बना हुआ था, जहां ह्यूमन ट्रैफिकिंग और फेक डॉक्यूमेंट्स का जाल फैला था। अवैध कब्जे की शुरुआत 1970 में हुई, जब यहां बड़ी संख्या में माइग्रेंट के लिए बस्तियां बसाई गईं। 2002 में एक NGO ने इस एरिया में सियासत नगर नाम से एक बस्ती बसाई थी। इसके बाद 2010 से लेकर 2024 के बीच चंदोला झील की जमीन पर अवैध कब्जे बढ़ोतरी होने लगी। प्रशासन के मुताबिक, इस इलाके में लोगों ने कई बड़े अवैध निर्माण किए, जिनमें कई बांग्लादेशी नागरिक भी मौजूद थे। स्थानीय लोगों ने की थी ये मांग गुजरात हाईकोर्ट में पहली स्टेज के दौरान लोकल लोगों ने जाकर डिमोलिशन रोकने को लेकर मांग की थी, लेकिन गुजरात कोर्ट ने तालाब पर बने सभी निर्माणों को अवैध करार देते हुए डिमोलिशन पर रोक नहीं लगाई थी। इसके बाद प्रशासन ने 4 हजार अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिए थे। अब दूसरी स्टेज में बाकी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करके तालाब का हिस्सा खाली करवाया जाएगा। प्रशासन यह भी नजर रखेगा कि खाली जगह पर फिर दोबारा कोई अवैध निर्माण न हो।

‘सिलिकॉन सिटी’ के घर-दफ्तरों में पानी, साल की सबसे अधिक बारिश, 6 घंटे बरसते रहे मेघ

बेंगलुरु बेंगलुरु में साल की सबसे भारी बारिश ने सोमवार को तीन लोगों की जान ले ली। छह घंटे की मूसलाधार वर्षा ने बारिश के कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। सबसे दुखद हादसा BTM लेआउट में हुआ, जहां एक अपार्टमेंट परिसर में जमा पानी निकालते समय 63 वर्षीय एक बुजुर्ग और 12 साल के लड़के की करंट लगने से मौत हो गई। इससे पहले वाइटफ़ील्ड में भारी बारिश के चलते एक मकान की दीवार गिर गई, जिसमें 35 वर्षीय महिला हाउसकीपर की मौत हो गई। रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात शहर में छह घंटे से अधिक समय तक भारी बारिश हुई, जिससे कई इलाकों में सड़कों, बेसमेंट और निचले इलाकों में जलभराव हो गया। जानकारी के अनुसार, हादसा सोमवार शाम करीब 6 बजे हुआ। मृतकों की पहचान मन्मोहन कामत (63) और दिनेश (12) के रूप में हुई है। दिनेश नेपाली मूल के एक कर्मचारी का बेटा था, जो उसी अपार्टमेंट में कार्यरत है। DCP साउथ ईस्ट डिवीजन सारा फातिमा ने बताया, “कामत ने बाहर से मोटर मंगवाई थी और उसे बिजली से जोड़कर बेसमेंट में जमा पानी निकालने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान शॉर्ट सर्किट से उन्हें करंट लग गया। दिनेश जो उनकी मदद कर रहा था, उसे भी करंट लग गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।” दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सेंट जॉन्स अस्पताल भेजा गया है। वाइटफ़ील्ड में महिला की मौत बारिश के कारण वाइटफ़ील्ड में एक कंपाउंड वॉल गिर गई, जिसकी चपेट में आकर 35 वर्षीय महिला हाउसकीपर की मौत हो गई। उधर मामले में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि बेंगलुरु में 210 बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिनमें से 166 में समस्या का समाधान हो चुका है। 24 स्थानों पर काम जारी है और शेष 20 पर जल्द काम शुरू होगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने 197 किमी लंबी स्टॉर्म वॉटर ड्रेन बनाई है और इसके लिए ₹2000 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। ट्रैफिक पुलिस ने 132 जलभराव वाले स्थानों की सूची दी है, जिनमें से 82 ठीक किए जा चुके हैं, जबकि 41 पर कार्य प्रगति पर है। शिवकुमार ने कहा, “बारिश हमारे नियंत्रण में नहीं है, लेकिन हम बाढ़ वाले इलाकों की पहचान कर समाधान कर रहे हैं और लोगों को राहत पहुंचाने पर ध्यान दे रहे हैं।”  

CM रेखा गुप्ता सरकार ने MLA का LAD फंड 15 करोड़ से घटाकर 5 करोड़ किया, AAP सरकार ने पिछले ही साल बढ़ाया था

नई दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के बाद परिवर्तनों का दौर चल रहा है. रेखा गुप्ता की अगुवाई वाली सरकार ने अब विधायकों के लिए लोकल एरिया डेवलपमेंट (एलडीए) फंड पर कैंची चला दी है. दिल्ली सरकार ने अब विधायकों की विकास निधि 15 करोड़ से घटाकर 5 करोड़ कर दिया है. विधायक निधि में कटौती का दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने आधिकारिक ऐलान कर दिया है. दिल्ली सरकार के शहरी विकास विभाग ने विधायक निधि कम किए जाने से संबंधित आदेश जारी कर दिया है. शहरी विकास विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक हर विधानसभा क्षेत्र के लिए विधायक निधि को पांच करोड़ रुपये वार्षिक करने का निर्णय 2 मई को हुई कैबिनेट मीटिंग में लिया गया था. विभाग की ओर से कहा गया है कि कैबिनेट निर्णय संख्या 3187, दिनांक 2 मई 2025 के अनुपालन के क्रम में विधायकों को क्षेत्र के विकास के लिए पांच करोड़ रुपये वार्षिक फंड दिया जाएगा. विधायक निधि में कटौती करने का रेखा गुप्ता कैबिनेट का यह फैसला चालू वित्त वर्ष (वित्तीय वर्ष 2025-26) से लागू होगा. शहरी विकास विभाग की ओर से जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि यह एक अनटाइड फंड है. इस फंड का उपयोग विधायक पूंजीगत प्रकृति के स्वीकृत कार्यों के साथ ही बिना किसी सीमा के संपत्तियों की मरम्मत और रखरखाव के लिए खर्च किया जा सकता है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक बीजेपी के एक विधायक ने कहा कि विधायक निधि के लिए सरकार ने 350 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसे 70 विधायकों में बांटा जाना है. प्रत्येक विधायक को पांच करोड़ क्षेत्र के विकास के लिए मिलेंगे. गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी की पिछली सरकार के समय वित्तीय वर्ष 2021-22 और 2022-23 में विधायकों को एलएडी फंड के तहत चार-चार करोड़ रुपये मिले थे. वित्तीय वर्ष 2023-24 में एलएडी फंड के तहत दी जाने वाली धनराशि सरकार ने बढ़ाकर सात करोड़ रुपये कर दिया था. 2024-25 में एलएडी फंड 10 करोड़ हुआ और पिछले ही साल दिल्ली विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले आम आदमी पार्टी की सरकार ने इसे 10 करोड़ से बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये वार्षिक करने का ऐलान कर दिया था.  

उप्र में दो ट्रेनों को डिरेल करने की साजिश हुई नाकाम, लोको पायलट की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

हरदोई उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में अराजकतत्वों द्वारा दो ट्रेनों को डिरेल करने की बड़ी साजिश को लोको पायलट की सजगता से नाकाम कर दिया गया है. यह पूरी घटना दलेलनगर और उमरताली स्टेशन के बीच घटी है. वहीं घटना की सूचना मिलते ही एसपी ने मौके पर पहुंच कर घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए हैं. दोनों ट्रेनों को डिरेल करने की यह घटना दलेलनगर और उमरताली स्टेशन के बीच की है. यहाx राजधानी एक्सप्रेस (20504) जब लखनऊ की ओर जा रही थी तभी अराजकतत्वों ने डाउन ट्रैक पर अर्थिंग वायर से लकड़ी का गुटखा बांधकर ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिश की लेकिन लोको पायलट ने समय रहते खतरे को देखते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया और ट्रैक से अवरोध हटाने के बाद रेल अधिकारियों को सूचना दी. इसके बाद जब राजधानी एक्सप्रेस सकुशल गुजर गई तो पीछे आ रही काठगोदाम एक्सप्रेस (15044) को भी डिरेल करने की कोशिश की गई है. हालांकि, इस बार भी लोको पायलट की सूझबूझ और तत्परता से हादसा टल गया. घटना की सूचना मिलते ही जीआरपी,आरपीएफ और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है. फिलहाल पूरे मामले की छानबीन जारी है. इस मामले में पुलिस ने प्रेस नोट जारी करते हुए बताया है कि कछौना थाना क्षेत्र के दलेलनगर और उमर ताली रेलवे स्टेशन के बीच ट्रेन की पटरी पर लकड़ी का टुकड़ा पड़े होने की सूचना प्राप्त हुई थी सूचना पर जीआरपी वह स्थानीय पुलिस द्वारा घटनास्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया गया. जांच करने के दौरान लकड़ी का एक टुकड़ा लोहे की पट्टी से बना हुआ था प्रकरण के संबंध में रेलवे विभाग स्थानिक पुलिस द्वारा घटना के समस्त बिंदुओं पर गहनता से जांच की जा रही है साथी ही पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन के द्वारा भी घटनास्थल का निरीक्षण किया गया और आसपास के रहने वाले व्यक्तियों से घटना के संबंध में जानकारी ली गई एवं संबंधित को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं.  

पाकिस्तान हाफिज सईद को भारत के हवाले नहीं करेगा, तब तक जारी रहेगा ऑपरेशन सिंदूर

 येरूशलम  पहलगाम आतंकी हमले के बाद आतंकियों के खात्में के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया। भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर के बाद सरकार और सेना कई बार साफ कर चुके हैं कि ऑपरेशन सिंदूर जारी रहेगा। वहीं, अब इजराइल में भारत के राजदूत ने एक बार फिर ऑपरेशन सिंदूर पर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर को कुछ समय के लिए रोका गया है, यह ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। इजराइल में भारतीय राजदूत जेपी सिंह का कहना है कि जब तक पाकिस्तान हाफिज सईद, साजिद मीर, जाकिउर्र रहमान लखवी समेत सभी खूंखार आतंकियों को भारत को नहीं सौंप देता, तब तक ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं होगा। आतंकियों ने धर्म पूछकर गोली मारी: जेपी सिंह इजराइली टीवी i24 को दिए एक साक्षात्कार में जेपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ चलाया गया था। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादियों ने लोगों को धर्म के आधार पर गोली मारी। उन्होंने गोली मारने से पहले पर्यटकों का धर्म पूछा और 26 मासूमों की जान ले ली। ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ: जेपी सिंह सीजफायर पर बात करते हुए जेपी सिंह ने कहा कि, “सीजफायर अभी भी लागू है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर पर हम पहले ही साफ कर चुके हैं कि इसे रोका गया है, खत्म नहीं किया गया है। आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी। हमने एक न्यू नॉर्मल सेट करते हुए आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। आतंकवादी चाहे जहां भी हों हम उन्हें मारेंगे और उनकी इमारतों को भी तबाह कर देंगे। तो अभी सब खत्म नहीं हुआ है। ” “आतंकवाद रुकना चाहिए”, भारतीय राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की संधि लागू होनी चाहिए और पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद रोकना चाहिए. भारत में पाकिस्तान से शुरू हुए आतंकी हमलों की एक लंबी लिस्ट का हवाला देते हुए जेपी सिंह ने कहा कि “मूल कारण ये दो समूह हैं – जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा”. उन्होंने कहा कि मुंबई हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा के नेता खुलेआम घूम रहे हैं, जिसमें कई यहूदी भी मारे गए थे. राजदूत जेपी सिंह ने जोर देकर कहा, “उन्हें एक बहुत ही सरल चीज करने की जरूरत है – जब प्रस्तावना में सद्भावना और दोस्ती शामिल है, तो उन्हें बस इन आतंकवादियों को हमें सौंपने की जरूरत है.” उन्होंने कहा कि हाल ही में अमेरिका ने मुंबई हमले में शामिल तहव्वुर हुसैन राणा को प्रत्यर्पित किया था. इसी से सीखकर इस्लामाबाद भी ऐसा कर सकता है. उन्होंने जोर देकर कहा, “जब अमेरिका इन दोषियों को सौंप सकता है, तो पाकिस्तान क्यों नहीं सौंप सकता? उन्हें बस हफीज सईद, लखवी, साजिद मीर को सौंपना होगा और चीजें खत्म हो जाएंगी.” यह तर्क देते हुए कि आतंकवाद एक वैश्विक खतरा है, भारतीय दूत ने चुनौती का सामना कर रहे देशों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया. पाकिस्तान में मचा हड़कंप नूर खान एअरबेस की बात करते हुए जेपी सिंह ने कहा कि 10 मई की सुबह पाकिस्तान में हड़कंप मच गया था। उनके DGMO ने भारत में फोन करके सीजफायर करने की मांग रखी। पानी के बदले पाक ने आतंकवाद दिया: जेपी सिंह सिंधु जल समझौते पर बात करते हुए जेपी सिंह कहते हैं, “सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) 1960 में साइन की गई थी। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच दोस्ती बरकरार रखा था। मगर पिछले कई सालों से देखा गया है कि हम पाकिस्तान को पानी देते हैं और बदले में पाकिस्तान हमारे देश में आतंकी हमले करवाता है। इसे लेकर लोगों में बेहद गुस्सा था। हमारे प्रधानमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि अब पानी और खून एकसाथ नहीं बहेगा।” आतंक के खिलाफ भारत का युद्ध है ऑपरेशन सिंदूर जेपी सिंह ने पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान चाहता है कि सिंधु जल समझौता कायम रहे तो उसे आतंकवाद खत्म करना होगा। ऑपरेशन सिंदूर भारत का आतंकवाद के खिलाफ युद्ध है। पाकिस्तान में आतंकवाद के लिए दो अहम संगठन जिम्मेदार हैं – जैश-ए-मोहम्म और लश्कर-ए-तैयबा।

गुना जिले में एक सरपंच ने अपनी ग्राम पंचायत ही ठेके पर दे दी, इसके लिए 100 रुपये के स्टांप पर बाकायदा करार लिखा गया

गुना अभी तक आपने पंचायतों को निजी फर्मों को काम कराने का ठेका देते सुना होगा। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गुना जिले में एक सरपंच ने अपनी ग्राम पंचायत ही ठेके पर दे दी। इसके लिए 100 रुपये के स्टांप पर बाकायदा करार लिखा गया। इसमें ठेका लेने वाले ने सरपंच का 20 लाख का कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी ली, वहीं निर्माण कार्य की लागत का पांच प्रतिशत कमीशन सरपंच को देने की गारंटी दी। शिकायत पर जांच के बाद जिला पंचायत ने ठेका लेने वाले व्यक्ति के खिलाफ कैंट थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज करा दिया है। पंच और सरपंच ने मिलकर कर डाला सौदा     जनपद पंचायत गुना को शिकायत मिली थी कि करोद ग्राम पंचायत (Karod Gram Panchayat) की सरपंच ने पंचायत का संचालन ठेके पर दे दिया है। जनपद पंचायत ने जांच कराई तो सामने आया कि 28 नवंबर 2022 को सरपंच लक्ष्मी बाई ने पंच रणवीर सिंह कुशवाह के साथ एक करारनामे की नोटरी कराई है। 100 रुपये के स्टांप वाले शपथ पत्र पर इस करारनामे के अनुसार सरपंच ने पंचायत के संचालन की जिम्मेदारी रणवीर सिंह कुशवाह को सौंप दिया था। गांव के किसी व्यक्ति ने अप्रैल में इसकी शिकायत जनपद पंचायत से की। जांच हुई, सरपंच के बयान हुए। जनपद पंचायत ने रिपोर्ट जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भेज दी। नौ मई को जिला पंचायत सीईओ ने जनपद पंचायत को एफआईआर कराने के निर्देश दिए। जनपद पंचायत ने 13 मई को कैंट थाना प्रभारी को प्रकरण दर्ज करने पत्र लिखा। शुरुआती तथ्य लेने के बाद कैंट थाने में 17 मई को एफआईआर दर्ज कर ली गई। भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा में केस जनपद पंचायत गुना के समन्वयक सुनील खालको की शिकायत पर कैंट थाने में रणवीर सिंह कुशवाह के खिलाफ धारा 420, 419 और भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा (8) के तहत मामला दर्ज किया गया है। – अनूप भार्गव, थाना प्रभारी कैंट

कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी करने वाले मंत्री शाह के खिलाफ जांच करेगी 3 सदस्यीय SIT टीम, जानें पूरा मामला

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ राज्य के मंत्री विजय शाह की टिप्पणी की जांच के लिए सोमवार देर रात तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन कर दिया है. विशेष जांच दल (एसआईटी) में पुलिस महानिरीक्षक प्रमोद वर्मा, उप महानिरीक्षक कल्याण चक्रवर्ती और पुलिस अधीक्षक वाहिनी सिंह शामिल हैं. सुप्रीम ने सोमवार को कर्नल कुरैशी पर की गई ‘‘अभद्र” टिप्पणी के लिए विजय शाह को फटकार लगाई और उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से जुड़े मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन करने का निर्देश दिया. कोर्ट के दखल के बाद पुलिस ने गठित की एसआईटी शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को मंगलवार सुबह 10 बजे तक आईजी रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी गठित करने को कहा था, जिसमें एक महिला अधिकारी भी शामिल हो, जो मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज प्राथमिकी से जुड़े मामले की जांच करेगी.  मंत्री ने अपनी टिप्पणी के लिए प्राथमिकी दर्ज करने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी. सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि वह एक सार्वजनिक व्यक्ति और अनुभवी राजनेता हैं और इसलिए उनके शब्दों में कुछ वजन होना चाहिए. इस मामले में CID ​​ने आदेश जारी कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2025 को कुंवर विजय शाह बनाम मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय एवं अन्य के मामले में यह आदेश जारी किया था, जो एफआईआर क्रमांक 188/2025 से जुड़ा हुआ है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 152, 196 (1) (बी) एवं 197 (1) (सी) के तहत अपराध दर्ज किया गया है. गठित एसआईटी में पुलिस महानिरीक्षक सागर जोन प्रमोद वर्मा, उप पुलिस महानिरीक्षक विशेष सशस्त्र बल भोपाल कल्याण चक्रवर्ती, पुलिस अधीक्षक डिंडोरी वाहिनी सिंह जांच करेंगे. CID के आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अक्षरशः एवं निर्धारित समय सीमा में पालन किया जाए. क्या है पूरा मामला दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह के मामले में जांच करने के लिए एसआईटी गठन करने का आदेश दिया था. कुछ दिनों पहले मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर की विवादित टिप्पणी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में आईपीएस अधिकारियों की विशेष जांच समिति (एसआईटी) बनाने का आदेश दिया था. साथ ही पीठ ने विजय शाह की याचिका पर मध्य प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी किया था. कोर्ट ने मंत्री की लगाई फटकार पीठ ने कहा कि हमें ऐसी माफी नहीं चाहिए. आप पहले गलती करते हैं, फिर कोर्ट चले आते हैं. आप जिम्मेदार राजनेता हैं. आपको सोच-समझकर बोलना चाहिए, लेकिन आपने बहुत घटिया भाषा अपनाई है. इस पर विजय शाह के वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि वह माफी मांग चुके हैं और माफी का वीडियो भी जारी कर चुके हैं. विजय शाह मेरी पार्टी में होते तो उन्हें निकाल देता: चिराग पासवान कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह की टिप्पणी की निंदा करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को कहा कि अगर भाजपा नेता उनकी पार्टी में होते तो उन्हें ‘‘जीवन भर के लिए निष्कासित कर दिया जाता.” लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे. वह अपने गृह राज्य बिहार के दौरे पर हैं. हाजीपुर से सांसद ने कहा, ‘‘हमें अपने सैन्यकर्मियों पर गर्व है, जो कोई भी उनकी तुलना आतंकवादियों से करता है, वह निंदा का पात्र है। अगर ऐसा कोई व्यक्ति मेरी पार्टी में होता, तो उसे जीवन भर के लिए निष्कासित कर दिया जाता.” चिराग की पार्टी भाजपा की सहयोगी है. शाह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में मीडिया को जानकारी देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को ‘‘आतंकवादियों की बहन” कहकर विवाद खड़ा कर दिया था. हालांकि, भाजपा ने अभी तक शाह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है, जो दावा कर रहे हैं कि यह ‘‘जुबान फिसलने” के कारण हुआ. मध्यप्रदेश के मंत्री को राजग सहयोगियों के साथ-साथ विरोधियों की भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई. न्यायालय ने कहा कि शाह के बयानों से ‘‘पूरा देश शर्मसार हुआ है”. इसने साथ ही आदेश दिया कि इस संबंध में दर्ज प्राथमिकी की जांच तीन सदस्यीय विशेष जांच दल द्वारा की जाए. 8 दिन में सौंपना होगी जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को 28 मई तक जांच करने के आदेश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने शाह को गिरफ्तारी से राहत देते हुए जांच में सहयोग करने के लिए भी कहा है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह को फटकार लगाई है. कोर्ट ने सरकार और पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि एफआईआर के बाद आपने क्या किया? जांच कहां पहुंची? पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को कुछ और ठोस कदम उठाने चाहिए थे. इस बयान से बढ़ीं विजय शाह की मुश्किलें मंत्री विजय शाह की मुश्किलें 11 मई को उनके द्वारा दिए गए बयान से बढ़ी हैं. उन्होंने महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर मंच से बयान दिया था. उन्होंने नाम लिए बिना कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकियों की बहन बता दिया था. उन्होंने कहा था कि, उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी तैसी करने उनके घर भेजा.” हाई कोर्ट ने लिया था संज्ञान मंत्री का वीडियो वायरल हुआ तो जबलपुर हाईकोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया. हाईकोर्ट ने 14 मई को 4 घंटे में मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए. हालांकि मामले में FIR तो दर्ज हुई, लेकिन हाईकोर्ट ने FIR को खाना पूर्ति बताया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि अब इस मामले में कोर्ट ही पुलिस जांच की निगरानी करेगी. हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी कैविएट दायर की है. यानी आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के मामले को भी सुना जाएगा. विजय शाह मामले में कब क्या हुआ     11 मई को मंत्री विजय शाह, महू के रायकुंडा गांव पहुंचे और यहां एक कार्यक्रम … Read more

महाराष्ट्र सरकार में फिर से मंत्री बने NCP नेता छगन भुजबल, सूबे में हैं OBC का बड़ा चेहरा

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पांच महीने पुराने राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार किया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता छगन भुजबल की मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. उन्होंने आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और अजित पवार की उपस्थिति में शपथ ली. शपथ के दौरान मजेदार वाकया हुआ. शपथ से पहले सभी ने उनको गुलदस्ता दे कर अभिनंदन किया, मगर जैसे ही उनके पास अजित पवार पहुंचे तो सभी लोग हंसने लगे. बता दें कि सीएम फडणवीस ने अपने 5 महीने पुराने कैबिनेट का विस्तार किया है. पिछले साल दिसंबर में उनको मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी. मगर, सोमवार को विस्तार के दौरान उनको शामिल किया गया. सोमवार रात को ही भुजबल ने जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार, 20 मई को फडणवीस सरकार की कैबिनेट की शपथ लेंगे. आज सुबह उन्होंने राजभवन में राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी में उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली.     भुजबल ने पहले ही बता दिया था सोमवार को देर जानकारी देते हुए भुजबल ने कहा था, ‘उन्हें मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाले महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा. मुझे सूचित किया गया है कि मुझे राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा. शपथ ग्रहण समारोह मंगलवार सुबह 10 बजे होगा.’ भाजपा ने पुष्टि कर दी थी वहीं, राज्य में सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन का नेतृत्व कर रही भाजपा के सूत्रों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की थी. राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रमुख चेहरे भुजबल (77) को पिछले साल दिसंबर में मुख्यमंत्री फडणवीस के मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया था. राकांपा के एक वरिष्ठ नेता धनंजय मुंडे ने मार्च में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद संभावित रूप से भुजबल को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा है. ताकतवर ओबीसी नेता छगन भुजबल का राजनीतिक कद महाराष्ट्र में किसी से छिपा नहीं है. वे न केवल येवला से विधायक हैं, बल्कि ओबीसी समुदाय के बीच उनकी मजबूत पकड़ है. उनके समर्थक लंबे समय से मांग कर रहे थे कि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए. सूत्रों का कहना है कि गठबंधन सरकार ने उनकी नाराजगी को दूर करने और ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया है. निकाय चुनावों से पहले की चाल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भुजबल का मंत्रिमंडल में शामिल होना एनसीपी और गठबंधन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है. खासकर, आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए ओबीसी समुदाय को साधने की कोशिश साफ नजर आ रही है. भुजबल के अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण विभाग मिलने की भी संभावना जताई जा रही है. काम आई भुजबल की पॉलिटिक्स? राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शरद पवार को मेंटर मानने वाले छगन भुजबल समता परिषद के जरिए यह संदेश देने में सफल रहे कि उनकी नाराजगी से एनसीपी को नुकसान हो सकता है, अजित पवार के साथ उनके पिछले छह महीने में संबंध सामान्य ही रहे, हालांकि दूसरी ओर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ नजदीकी बढ़ाते रहे। एक्सपर्ट कहते हैं कि यह प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा था। इसी बीच जब बीड के सरंपच की हत्या में धनंजय मुंडे का इस्तीफा हुआ तो भुजबल के लिए मंत्रीमंडल में लौटने की उम्मीद बढ़ गई क्योंकि फडणवीस सरकार में एनसीपी के कोटे की एक बर्थ खाली हो गई। भुजबल की क्यों हुई वापसी? राजनीतिक हलकों में अटकलें हैं कि स्थानीय निकाय चुनाव को देखते हुए अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी ने छगन भुजबल को मंत्री बनाकर खुश करने की कोशिश की है। छगन भुजबल की अगुवाई वाली समता परिषद की ओबीसी वर्ग में अच्छी पैठ है। भुजबल के मंत्री बनने से अच्छा संदेश जाएगा। एक्सपर्ट कहते हैं कि अजित पवार ने भुजबल की वापसी कराकर जहां ओबीसी वर्ग को खुश करने की कोशिश की है तो वहीं उन्होंने भुजबल को भी यह संदेश दे दिया है कि वह चाहे तो किसी को भी बाहर बैठा सकते हैं। उन्होंने ऐसा करके अपनी पावर दिखा दी है। ऐसा कहा जा रहा है कि जब केंद्र सरकार देश में जाति जनगणना के लिए आगे बढ़ रह है तब अजित पवार पार्टी के सबसे बड़े ओबीसी चेहरे को और नाराज नहीं रख सकते थे। तब अजित के साथ ली थी शपथ भुजबल महाराष्ट्र के उन कुछ नेताओं में शामिल हैं जो 75 पार होने के बाद भी राजनीतिक में खुद को प्रासंगिक बनाए हुए हैं। पिछले साल दिसंबर में जब फडणवीस ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था तब भुजबल के साथ एनसीपी के ही दिलीप वाल्से पाटिल तथा बीजेपी के मुनगंटीवार और विजयकुमार गावित को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी। इसके बाद सिर्फ भुजबल ही मंत्रिमंडल में लौटे हैं। भुजबल ने राजनीति की शुरुआत शिवसेना से की थी। 1991 से 1999 तक शिवसेना में रहने के बाद वह 1999 में एनसीपी में आए थे। इसके बाद से वह एनसीपी में हैं। अजित पवार ने जब चाचा शरद पवार का साथा छोड़ा था। तब भुजबल भी अजित के साथ चले गए थे और फिर शिंदे सरकार में मंत्री बने थे। भुजबल की अहमियत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उन्होंने अजित पवार के साथ शपथ ली थी। भुजबल दो बार राज्य के डिप्टी सीएम भी रह चुके हैं। वह राज्य के गृह विभाग के साथ पीडब्ल्यूडी विभाग को संभाल चुके हैं।

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