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अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस से विश्व बाघ दिवस तक की अवधि के लिये एक नया अभियान बाघदेव प्रारंभ किया गया

भोपाल सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस से विश्व बाघ दिवस तक की अवधि के लिये एक नया अभियान “बाघदेव’’ प्रारंभ किया गया है। “बाघदेव’’ को आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में देवता के रूप में पूजा जाता है और उनसे मन्नतें मांगी जाती हैं। यह परम्परा आज भी प्रचलित है। उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 22 मई को जबकि बाघ दिवस 29 जुलाई को मनाया जाता है। उप संचालक पेंच टाइगर रिजर्व श्री रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि “बाघदेव’’ अभियान में बफर क्षेत्र की सभी 130 ईको विकास समितियों में मिट्टी के बाघ बनाये जायेंगे। ईको विकास समितियों के सदस्य एवं ग्राम पंचधार के मिट्टी के बर्तन और खिलौने बनाने वाले विशेषज्ञ कुम्हार भी सहायता करेंगे। पेंच प्रबंधन द्वारा समिति सदस्यों को पोस्टर के माध्यम से जागरूक किया जायेगा। ग्रामीणजन मिट्टी के बाघ बनाकर उससे प्रकृति के इन तत्वों को वरदान के रूप में लेते हैं। मिट्टी के बाघों को पार्क प्रबंधन द्वारा एकत्रित करा कर भट्टी में पकाया जाता है, जिन्हें खबासा में निर्माणाधीन स्टील स्क्रेप से बन रही बाघ कलाकृति के पास स्थापित कर नये आस्था स्थल में संजोया जायेगा। पेंच प्रबंधन का प्रयास है कि इस वर्ष टेराकोटा (मिट्टी) की कलाकृति बनायी जाये। उन्होंने बताया कि इस अभियान में ईको विकास समितियों के साथ पर्यटक एवं अन्य बफर क्षेत्र के बाहर के रहवासी भी जुड़ सकते हैं और अपने हाथ से बाघ बनाकर उसमें अपना नाम लिखकर “बाघदेव’’ से मनोकामना मांग सकेंगे, इससे बाघ संरक्षण में समुदायों के भावनात्मक जुड़ाव के साथ ही पंचधार के मूर्तिकारों के लिये रोजगार के नये अवसर भी प्राप्त होंगे।  

भारत का साफ कहना है कि पाक ने आतंकवाद के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की, FATF की ग्रे लिस्ट में हो शामिल

नई दिल्ली आतंकवाद को पालने वाले पाकिस्तान के खिलाफ भारत एक बार फिर बड़ा ऐक्शन लेने की तैयारी में है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) से पाकिस्तान को फिर से ग्रे लिस्ट में शामिल करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। मालूम हो कि पाकिस्तान को साल 2018 में एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल किया गया था। इसके चलते उसे आतंकवाद वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग पर नियंत्रण की कमी के लिए कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, 2022 में 34 बिंदुओं के कार्य योजना को पूरा करने के बाद पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर निकाल दिया गया। ऐसे में उसकी वैश्विक ऋणदाताओं के बीच इस्लामाबाद की साख बढ़ गई और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और अन्य संस्थानों से आर्थिक सहायता प्राप्त करने में आसानी हुई। भारत का साफ कहना है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की है। नई दिल्ली ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की ओर से प्राप्त वित्तीय सहायता का उपयोग आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। ऐसे में, भारत न केवल एफएटीएफ में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में वापस लाने की मांग कर रहा है, बल्कि विश्व बैंक से पाकिस्तान को दी जाने वाली आगामी सहायता का भी विरोध करेगा। पहलगाम हमले के बाद भारत ने अपनी रणनीति को और सख्त कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, भारत अन्य एफएटीएफ सदस्य देशों का समर्थन हासिल करने के लिए सबूत जुटा रहा है ताकि पाकिस्तान को फिर से ग्रे लिस्ट में डाला जा सके। ग्रे लिस्ट में शामिल होने से कितना बड़ा नुकसान एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल होने से पाकिस्तान के विदेशी निवेश और कर्ज मिलने पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जो उसकी आर्थिक स्थिति को और ज्यादा कमजोर कर देगा। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने अपने राहत कार्यक्रम की अगली किस्त जारी करने के लिए पाकिस्तान पर 11 नई शर्तें लगा दी हैं। आईएमएफ ने पाकिस्तान को चेताया कि भारत के साथ तनाव से योजना के लक्ष्यों के लिए जोखिम बढ़ सकते हैं। पाकिस्तान पर लगाई गई नई शर्तों में 17,600 अरब रुपये के नए बजट को संसद की मंजूरी, बिजली बिलों पर ऋण भुगतान अधिभार में वृद्धि और तीन साल से अधिक पुरानी कारों के आयात पर प्रतिबंध को हटाना शामिल है।  

राजा कोलंदर को सीबीआई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई, इंसानी खोपड़ी का सूप बनाकर पीता था, कई हत्याएं भी की

लखनऊ राजा कोलंदर उर्फ राम निरंजन को लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। सुनियोजित तरीके से साजिश रचकर चारबाग इलाके से टाटा सूमो बुक कर मालिक तथा ड्राइवर की हत्या कर शव को शत विक्षिप्त हालत में फेकने के मामले में दोषी पाया गया। उम्रकैद भोगने सहित ढाई लाख रुपए का जुर्माना भी भरना पड़ेगा। पत्नी फूलन देवी सहित 4 लोगों को भी इसी मामले में पहले ही उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। 23 मई को हुए इस फैसले में दोहरे हत्याकांड के मामले में सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश (आयुर्वेद प्रकरण) रोहित सिंह ने राजा कोलंदर तथा बच्छराज कोल को सजा सुनाई है। ये है पूरा मामला इस मामले में वादी शिव हर्ष सिंह ने 27 जनवरी 2000 में थाना नाका में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया गया कि उनकी टाटा सूमो यूपी 32 जेड 2423 उनका भतीजा मनोज कुमार सिंह तथा ड्राइवर रवि श्रीवास्तव लखनऊ इलाहाबाद रोड पर सवारियों को ढोने के लिए चलाते थे। उक्त वाहन को 23 जनवरी 2000 को दिन में एक महिला समेत 6 लोग सवार होकर चाकघाट रीवा (मध्य प्रदेश) ले गए, तब से न गाड़ी वापस आई और न ही दोनों लोग।  उक्त सभी व्यक्तियों को उन लोगो ने स्वयं अपने हरचनपुर स्थित घर में देखा था, जहां वे लोग रीवा जाते समय नाश्ते पानी के लिए रुके थे। जिसके बाद पुलिस ने गाड़ी तथा व्यक्तियों के अपहरण का मुकदमा दर्ज कर जांच प्रारंभ की। विवेचना के दौरान मामले के अभियुक्त राजा कोलंदर उर्फ राम निरंजन, उसकी पत्नी फूलन देवी, उनका 1 नाबालिग बेटा, बच्छराज कोल, दिलीप गुप्ता तथा दद्दन सिंह कोल के नाम प्रकाश में आए। सभी अभियुक्त प्रयागराज के ही निवासी थे, तथा कोल जाति से आते थे। अपहृत व्यक्तियों के परिजनों द्वारा खोजबीन करने पर 3 दिन बाद पता चला कि शंकरगढ़ स्थित जंगल में कुछ अज्ञात लोगों की क्षत विक्षिप्त लाशे पड़ी है। वहां जाने पर परिजनों ने मृतकों की पहचान की, जिसके बाद 30 जनवरी 2000 को दोनों मृतकों की लाशें पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दी गईं। इसी दौरान इलाहाबाद (प्रयागराज) में 19 दिसंबर 2000 को पत्रकार धीरेन्द्र प्रताप सिंह के अपहरण और हत्या के मामले में राजा कोलंदर तथा उसके साथियों की गिरफ्तारी हुई। पुलिस को दोषी के पास मृतक मनोज कुमार सिंह की टाटा सूमो यूपी 32 जेड 2423 तथा उसके घर से मृतक रवि श्रीवास्तव का कोट भी बरामद हुआ, जिसे मृतकों के परिजन ने पहचाना। पुलिस द्वारा गहन जांच पड़ताल करने पर दोषी राजा कोलंदर की अनेक शहरों में ऐसे ही लगभग 10 अपराधों में संलिप्ता पाई गई थी। पत्रकार हत्या मामले में राजा कोलंदर तथा बच्छराज कोल को अपर सत्र न्यायधीश इलाहाबाद द्वारा 30 नवंबर 2012 को उम्र कैद की सजा सुनाई जा चुकी है। दोषी के लंबे आपराधिक इतिहास के ऊपर ओटीटी प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स पर 1 सीरीज भी बनाई जा चुकी है।

जाति जनगणना को लेकर बड़ा अभियान चलाएगी कांग्रेस: मल्लिकार्जुन खरगे

नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को पार्टी प्रवक्ताओं का आह्वान किया कि वे जाति जनगणना के विषय को संवेदनशीलता के साथ और निडर होकर जनता के बीच ले जाएं तथा इसे सिर्फ चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि वैचारिक प्रतिबद्धता समझें। खरगे ने यहां कांग्रेस प्रवक्ताओं के लिए आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा, ‘आज जब देश जातीय न्याय की बात कर रहा है, तब कांग्रेस पार्टी का यह दायित्व बनता है कि वह इस विमर्श को दिशा दे, उसे नारे से नीति तक ले जाए और ‘जितनी आबादी, उतना हक’ को केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प बनाए।’ उन्होंने प्रवक्ताओं का आह्वान किया, ‘साथियों, हम सभी जानते हैं कि जातिगत जनगणना का मुद्दा कोई नया नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने इसे लगातार उठाया है, हमारे घोषणापत्रों में, संसद में, सड़कों पर और हर उस मंच पर जहां सामाजिक न्याय की बात होनी चाहिए।’ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने अप्रैल 2023 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर यह मांग दोहराई थी कि जाति जनगणना तत्काल शुरू की जाए, क्योंकि जब तक सही आंकड़े नहीं होंगे, तब तक कोई भी सरकार यह दावा नहीं कर सकती कि वह सबको न्याय दिला रही है। खरगे ने कहा, ‘आज हमें यह पूछना है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), दलित और आदिवासी समुदायों की देश की सत्ता, संस्थानों में क्या भागीदारी है? क्या वे मीडिया, नौकरशाही, न्यायपालिका, कॉरपोरेट क्षेत्र और उच्च शिक्षण संस्थानों में अपनी आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व रखते हैं? अगर नहीं, तो इसका कारण क्या है? और समाधान क्या है?’ उन्होंने कहा कि इसका समाधान है सच्चाई को सामने लाना, आंकड़ों को सार्वजनिक करना और फिर नीतियों का पुनर्निर्माण करना। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘यही कारण है कि हम जाति जनगणना को केवल आंकड़ों की कवायद नहीं मानते, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र का नैतिक दायित्व है।’ उन्होंने कांग्रेस प्रवक्ताओं से यह मांग पुरजोर तरीके से उठाने का आह्वान किया कि संविधान के अनुच्छेद 15(5) को तुरंत लागू किया जाए, जिससे ओबीसी, दलित और आदिवासी छात्रों को निजी शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण मिले। खरगे ने कहा, ‘हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा पर अब नये आंकड़ों के आलोक में पुनर्विचार हो। जब सामाजिक वास्तविकताएं बदल चुकी हैं और आंकड़े नयी तस्वीर पेश कर रहे हैं, तो हमारी नीतियों में भी उसी के हिसाब से बदलाव होना चाहिए। आरक्षण की मौजूदा सीमा को आंकड़ों और न्याय दोनों के बीच संतुलन के लिहाज से देखा जाना चाहिए, ताकि ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों को उनका वास्तविक हक मिल सके।’ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि तेलंगाना के जाति सर्वेक्षण ने एक मॉडल पेश किया, जिसमें समाज, विशेषज्ञ और सरकार सभी की भागीदारी रही। उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार भी ऐसा ही जन-संवादी और पारदर्शी मॉडल अपनाए। हम इस प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।’ खरगे ने इस बात पर जोर दिया, ‘आप सभी हमारी पार्टी के प्रवक्ता हैं, हमारे विचारों की आवाज हैं। आज जब देश जाति जनगणना को लेकर जागरूक हो रहा है, तब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम तथ्यों के साथ, संवेदनशीलता के साथ और निडर होकर इस विषय को जनता के बीच ले जाएं। यह न केवल सामाजिक न्याय की, बल्कि संविधान की आत्मा की रक्षा की भी लड़ाई है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं आपसे अपील करता हूं कि इस अभियान को केवल चुनावी मुद्दा न समझें, यह हमारी वैचारिक प्रतिबद्धता है। आज का यह संवाद, इस दिशा में हमारी एकजुटता का प्रमाण है।’  

घर में सो रही 5 वर्षीय बालिका से रिश्तेदार ने किया दुष्कर्म, नाबालिग बालिकाओं के साथ दुष्कर्म के मामले दर्ज

खंडवा मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में बालिकाओं के खिलाफ अपराधों की दो भयावह घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें पिपलोद और खालवा थाना क्षेत्रों में नाबालिग बालिकाओं के साथ दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए हैं। दोनों ही मामलों में आरोपी पीड़िताओं के परिचित निकले, जिसने समाज में सुरक्षा और विश्वास पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस ने दोनों मामलों में जल्द कार्रवाई करते हुए आरोपियों को हिरासत में लिया है। मामलों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में ले जाने का निर्णय लिया है।   पिपलोद में पांच वर्षीय बालिका से दुष्कर्म पिपलोद थाना क्षेत्र के एक गांव में पांच वर्षीय मासूम बालिका के साथ उसके ही रिश्तेदार ने दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। घटना तड़के सुबह तीन से साढ़े तीन बजे के बीच की है, जब बालिका अपने घर में सो रही थी। शादी समारोह में शामिल होने आए रिश्तेदार ने मौके का फायदा उठाकर घर में घुसकर अपराध किया। पीड़िता के रोने की आवाज सुनकर परिजनों को घटना का पता चला, जिसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने आरोपी को सुबह ही हिरासत में ले लिया। उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की। खंडवा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) मनोज कुमार राय ने बताया कि इस संवेदनशील मामले की जांच महिला अधिकारी टीआई एजके को सौंपी गई है।

21 मई को 27 माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में मिली ऐतिहासिक कामयाबी पर मुख्यमंत्री साय ने जवानों को दी बधाई

नारायणपुर, प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज ओरछा ब्लॉक के ग्राम बासिंग स्थित बीएसएफ कैम्प पहुंचे, जहां पर उन्होंने 21 मई को हुई डीआरजी-बीएसएफ और जिला बल के द्वारा माओवादियों के विरूद्ध नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बीजापुर की सरहदी पहाड़ियों में चलाए गए नक्सल विरोधी ऑपरेशन में 27 नक्सलियों को मार गिराने वाले जवानों की हौसला-अफजाई की। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा, वन एवं जल संसाधन मंत्री श्री केदार कश्यप विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने बासिंग कैम्प में जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि यह माओवाद के विरूद्ध अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है जिसमें सुरक्षा बलों ने हार्डकोर माओवादी बसवा राजू सहित 27 को मार गिराया। मुख्यमंत्री साय ने जवानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों ने जिस तरह उच्च स्तरीय रणनीति बनाकर ऑपरेशन को अंजाम दिया और कामयाबी हासिल की वह काबिले-तारीफ है। फोर्स के इस अदम्य साहस और शौर्य को नमन है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब बस्तर के माथे ने माओवाद का कलंक पूरी तरह से मिट जाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने मार्च 2026 को माओवाद को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया है, वह पूरा होता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि वह दिन दूर नहीं जब बस्तर विकास से पूरी तरह जुड़ जाएगा। उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा कि बस्तर के अंदरूनी इलाके, जहां कुछ साल पहले तक जाना भी संभव नहीं था, वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अधोसंरचना संबंधी कार्यों में अब गति आएगी। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि माओवाद प्रभावित क्षेत्रों को शासन की योजनाओं से जोड़ने नियद नेल्लानार, पीएम जनमन जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसका सकारात्मक बदलाव अब बस्तर में दिखने लगा है। माओवाद की समाप्ति के साथ ही बस्तर विकास की ओर तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने ऑपरेशन में शामिल सभी जवानों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए उनकी बहादुरी के लिए बधाई दी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि इस ऑपरेशन और जवानों की बड़ी और ऐतिहासिक सफलता की सराहना राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। उन्होंने कहा कि अब बस्तर में बड़ा और सकारात्मक परिवर्तन होने जा रहा है जो विकास और प्रगति की राह ले जाएगा। गृह मंत्री श्री शर्मा ने उम्मीद जताते हुए कहा कि आने वाले समय में बस्तर अंचल में स्कूल आंगनबाड़ी भवन, सड़कों का विस्तार एवं बिजली की सुविधाओं से गांवों को रोशन किया जाएगा। इस अवसर पर वन मंत्री श्री कश्यप ने भी जवानों की पराक्रम की सराहना करते हुए इसे माओवाद के विरूद्ध ऐतिहासिक कामयाबी बताया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कैम्प के जवानों को एलईडी सेट और प्रशस्ति पत्र भेंट किया तथा नक्सल ऑपरेशन में शामिल जवानों को ऑउट ऑफ टर्न प्रमोशन पर जल्द विचार करने की बात भी कही। इस अवसर पर जवानों ने की गई तैयारियों और रणनीति की जानकारी मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री को दी। इसके पहले, जवानों ने मुठभेड़ के बाद माओवादियों से बरामद किए गए हथियारों का प्रदर्शन किया, जिसमें बीजीएल लॉन्चर, 12 बोर बंदूक, .303 बंदूक, 7.62 रायफल, 5.56 एमएम इंसास, एके-47, 9 एमएम कार्बाइन सहित विभिन्न प्रकार के हथियार सम्मिलित थे। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, एडीजी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, सुबोध कुमार सिंह, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी, डीआईजी अमित तुकाराम काम्बले, आयुक्त जनसंपर्क डॉ. रवि मित्तल, कलेक्टर नारायणपुर प्रतिष्ठा ममगाईं, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नाबालिक लडकी से छेडछाड व पाक्सो एक्ट के फरार आरोपी को तखतपुर पुलिस ने किया गिरफ्तार

 बिलासपुर     मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 21-04-2025 को प्रार्थी थाना उपस्थित आकर रिपोर्ट दर्ज कराया कि पीडिता नाबालिक लडकी को दिनांक 01.02.2025 को शिक्षक अशोक कुर्रे द्वारा बेड टच किया है । प्रार्थी की रिपोर्ट पर अपराध कायम कर विवेचना कार्यवाही मे लिया गया। आरोपी गिरफतारी से बचने हेतु फरार था। प्रकरण महिला संबंधी गंभीर अपराध होने मामले को गंभीरता पूर्वक लेते हुए श्रीमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय बिलासपुर श्री रजनेश सिंह (भापुसे) के द्वारा आरोपी को जल्द से जल्द  गिरफतारी  का निर्देश दिया गया। जिसके परिपालन में अतिरिक्त पुलिस पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्रीमती अचर्ना झा, श्रीमान अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) कोटा श्रीमती नूपूर उपाध्याय के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी देवेश सिंह राठौर  के नेतृत्व में टीम द्वारा  कार्यवाही करते हुए फरार अरोपी अशोक कुमार कुर्रे पिता भागचंद कुर्रे स.शि.एल.बी.साकिन शरन नगर पडरिया रोड तखतपुर जो बिलासपुर मे छिप कर रह रहा है सूचना पर तत्काल बिलासपुर पहुचकर घेराबंदी कर दबिश देकर आरोपी को पुलिस अभिरक्षा मे थाना तखतपुर लाया गया आरोपी के विरूध अपराध सबुत पाये जाने पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया ।          उक्त कार्यवाही मे निरीक्षक देवेश सिंह राठौर, आरक्षक आशीष वस्त्रकार, रवि श्रीवास, का सुनील सूर्यवंशी का महत्वपूर्ण योगदान रहा ।

पड़ोसी देश 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान उसके निर्माण में बीएसएफ की बड़ी भूमिका को नजरअंदाज न करे: अमित शाह

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पड़ोसी देश बांग्लादेश के रोज-रोज के नए पैंतरों पर स्पष्ट चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि उसका जन्म कैसे हुआ है और उसके निर्माण में भारत के सीमा सुरक्षा बल (BSF) की क्या भूमिका थी। उन्होंने दो टूक लहजे में कहा कि पड़ोसी देश 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान उसके निर्माण में बीएसएफ की बड़ी भूमिका को नजरअंदाज न करे। बांग्लादेश के निर्माण में भारत के ऐतिहासिक सहयोग की याद दिलाते हुए शाह ने BSF की महत्वपूर्ण भागीदारी पर भी जोर दिया। शाह ने ये बातें 22वें सीमा सुरक्षा बल अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मारक व्याख्यान को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश को अपने निर्माण में बीएसएफ द्वारा निभाई गई बड़ी भूमिका को नहीं भूलना चाहिए।” इसके साथ ही शाह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों पर भारत की सैन्य कार्रवाई के विरोध में और आतंकवादियों के समर्थन में भारत पर जवाबी कार्रवाई करने से दुनिया भर में पाकिस्तान की पहचान आंतकवाद का समर्थन करने वाले देश की बन गयी है और वह पूरी तरह बेनकाब हो गया है। ऑपरेशन सिंदूर से बेनकाब हुआ पाकिस्तान उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बार-बार दावा करता रहा है कि वह आतंकवाद को समर्थन नहीं देता है लेकिन ऑपरेशन सिन्दूर के बाद के घटनाक्रमों ने उसे दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में शुरू किए गए ऑपरेशन सिन्दूर में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान में केवल नौ आतंकवादी अड्डों को तबाह किया था और सैन्य तथा असैनिक अड्डों को निशाना नहीं बनाया था लेकिन पाकिस्तान ने बौखलाहट में आकर भारतीय सैन्य ठिकानों और असैनिक ठिकानों को निशाना बनाने की नाकाम कोशिश की। आतंकवाद को प्रश्रय दे रहा पाकिस्तान गृह मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की नाकाम कोशिशों ने साबित कर दिया है कि वह आतंकवाद का समर्थन करता है और आतंकवादियों को शह दे रहा है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर के बाद के घटनाक्रम से पाकिस्तान का पूरी तरह पर्दाफाश हो गया है कि वह आतंकवाद को प्रश्रय दे रहा है। पूरी दुनिया ने देखा कि किस तरह पाकिस्तान सेना के अफसरों ने आतंकवादियों के जनाजों में नमाज पढ़ी। भारतीय सेनाओं की सराहना की जानी चाहिए: शाह उन्होंने कहा कि दूसरी ओर भारतीय सेनाओं की सराहना की जानी चाहिए कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान के केवल सैन्य अड्डों को ही निशाना बनाया और असैनिक क्षेत्रों में हमला नहीं किया। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने भी अपनी वीरता का परिचय देते हुए पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। केंद्रीय गृह मंत्री ने बांग्लादेश के साथ लगती सीमा सहित अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा में बीएसएफ की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि पड़ोसी देश बांग्लादेश को अपने निर्माण में बीएसएफ की बड़ी भूमिका को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह देश के लिए जान कुर्बान करने के लिए तैयार रहने की भावना के साथ अपने कर्तव्य पथ पर 1965 से 2025 तक निडरता से चलते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले 2,000 से अधिक सीमा प्रहरियों को पूरे देश की ओर से नमन करते हैं। बीएसएफ की स्थापना 1965 में हुई थी के एफ रुस्तमजी बीएसएफ के संस्थापक और पहले महानिदेशक थे। बीएसएफ दुनिया का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल है, जिसमें लगभग 2.75 लाख कर्मी हैं। ये कर्मी पश्चिम में पाकिस्तान और पूर्व में बांग्लादेश के साथ भारतीय सीमाओं की रक्षा करने की जिम्मेदारी उठाते हैं। बीएसएफ की स्थापना 1965 में हुई थी।

बेंगलुरु ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया

 नई दिल्ली आईपीएल 2025 का 65वां मुकाबला शुक्रवार को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच खेला जा रहा है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम जारी सीजन में 17 अंक के साथ दूसरे स्थान पर मौजूद है। हालांकि अगर आज रजत पाटीदार के नेतृत्व वाली बेंगलुरु की टीम मैच जीतने में कामयाब होती है तो वह टेबल टॉपर बन जाएगी। वहीं सनराइजर्स हैदराबाद अपने अभियान का जीत के साथ समापन करना चाहेगी। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु प्लेइंग इलेवन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (प्लेइंग इलेवन): फिलिप सॉल्ट, विराट कोहली, मयंक अग्रवाल, जितेश शर्मा (विकेटकीपर/कप्तान), टिम डेविड, रोमारियो शेफर्ड, क्रुणाल पंड्या, भुवनेश्वर कुमार, यश दयाल, लुंगी एनगिडी, सुयश शर्मा सनराइजर्स हैदराबाद प्लेइंग इलेवन सनराइजर्स हैदराबाद (प्लेइंग इलेवन): अभिषेक शर्मा, ट्रैविस हेड, ईशान किशन (विकेटकीपर), नितीश कुमार रेड्डी, हेनरिक क्लासेन, अनिकेत वर्मा, अभिनव मनोहर, पैट कमिंस (कप्तान), हर्षल पटेल, जयदेव उनादकट, ईशान मलिंगा रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने टॉस जीतकर चुनी गेंदबाजी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के नियमित कप्तान रजत पाटीदार बतौर इम्पैक्ट प्लेयर खेलेंगे। जितेश शर्मा ने उनकी जगह टीम की कमान संभाली है। बेंगलुरु ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया है।

जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा- इस साल अब तक कोटा से छात्रों की आत्महत्या के 14 मामले सामने आए

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कोटा शहर में छात्रों की आत्महत्याओं के बढ़ते मामले को लेकर राजस्थान सरकार को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने स्थिति को गंभीर बताया। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि इस साल अब तक कोटा से छात्रों की आत्महत्या के 14 मामले सामने आए हैं। जस्टिस पारदीवाला ने राजस्थान राज्य की ओर से पेश वकील से पूछा कि एक राज्य के तौर पर आप क्या कर रहे हैं? ये बच्चे आत्महत्या क्यों कर रहे हैं और वह भी केवल कोटा में ही क्यों? क्या आपने एक राज्य के तौर पर इस पर विचार नहीं किया? इस पर वकील ने कहा कि आत्महत्या के मामलों की जांच के लिए राज्य में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। शीर्ष अदालत आईआईटी, खड़गपुर में पढ़ने वाले 22 साल के छात्र की मौत के मामले की सुनवाई कर रही थी। छात्र 4 मई को अपने छात्रावास के कमरे में लटका हुआ पाया गया था। कोर्ट यह एक अन्य मामले की भी सुनवाई कर रही थी, जिसमें नीट की तैयारी कर रही एक लड़की कोटा में अपने कमरे में लटकी हुई पाई गई थी। वह अपने माता-पिता के साथ रहती थी। पीठ को पता चला कि आईआईटी, खड़गपुर के छात्र की मौत के सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने 8 मई को दर्ज की गई प्राथमिकी में चार दिन की देरी पर सवाल उठाया। पीठ ने कहा कि इन बातों को हल्के में न लें। ये बहुत गंभीर बातें हैं। पीठ ने शीर्ष अदालत के 24 मार्च के फैसले का हवाला दिया, जिसमें उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या के बार-बार होने वाले मामलों पर संज्ञान लिया गया था। छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया गया था। शुक्रवार को पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज करना जरूरी है। पीठ ने अदालत में मौजूद संबंधित पुलिस अधिकारी से पूछा, “आपको एफआईआर दर्ज करने में चार दिन क्यों लगे?” अधिकारी ने कहा कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच चल रही है। पीठ ने कहा कि आप कानून के अनुसार जांच जारी रखें। यह बात रिकॉर्ड में आई कि आईआईटी खड़गपुर के अधिकारियों ने आत्महत्या के बारे में पता चलने के बाद पुलिस को इसकी जानकारी दी। हालांकि, बेंच आईआईटी खड़गपुर के वकील और पुलिस अधिकारी के स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं थी। पीठ ने कहा, “हम इस मामले में बहुत सख्त रुख अपना सकते थे। हम संबंधित थाने के प्रभारी पुलिस अधिकारी के खिलाफ अवमानना ​​का मुकदमा भी चला सकते थे।” पीठ ने कहा कि जांच सही दिशा में तेजी से की जानी चाहिए। कोटा आत्महत्या मामले में पीठ ने एफआईआर दर्ज न करने को गलत ठहराया। राज्य के वकील ने कहा कि मामले की जांच जारी है और एसआईटी को राज्य में आत्महत्या के मामलों की जानकारी है। पीठ ने वकील से पूछा कि कोटा में अब तक कितने युवा छात्र मर चुके हैं? वकील द्वारा 14 छात्रों की संख्या बताए जाने पर पीठ ने पलटकर पूछा कि ये छात्र क्यों मर रहे हैं? पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित टास्क फोर्स न्यायालय को समग्र रिपोर्ट देने से पहले अपना समय लेगी। पीठ ने राजस्थान के वकील से पूछा, “आप हमारे फैसले की अवमानना ​​कर रहे हैं। आपने एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की?” पीठ ने कहा कि छात्रा अपने संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए गए आवास में नहीं रह रही थी। उसने नवंबर 2024 में उसे छोड़ दिया था और अपने माता-पिता के साथ रहने लगी थी। पीठ ने कहा, “हमारे निर्णय के अनुसार एफआईआर दर्ज करना और जांच करना संबंधित पुलिस का कर्तव्य था। संबंधित थाने के प्रभारी अधिकारी अपने कर्तव्य में विफल रहे हैं। उन्होंने इस अदालत द्वारा जारी निर्देशों का पालन नहीं किया है। नतीजतन, पीठ ने कोटा मामले में संबंधित पुलिस अधिकारी को 14 जुलाई को स्थिति स्पष्ट करने के लिए तलब किया।  

69000 शिक्षक भर्ती : गलत दस्तावेज लगाकर नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों पर लगातार कार्रवाई जारी, अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग

लखनऊ 69000 शिक्षक भर्ती में गलत दस्तावेज लगाकर नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों पर लगातार कार्रवाई जारी है। ऐसे अभ्यर्थियों को जिलों में नौकरी से बर्खास्त किया जा रहा है। इसी क्रम में इस भर्ती में नौकरी के लिए आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि गलत तरीके से नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों की संख्या बड़ी है। विभाग के अधिकारी अब भी उनका बचाव कर रहे हैं, जो गलत है। उन्होंने सरकार से मांग की कि गलत तरीके से नौकरी पाने वाले लोगों को बाहर किया जाए, साथ ही उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए, जिन्होंने यह भ्रष्टाचार का खेल किया है।

अरुणाचल में फिर शुरू हुआ विरोध- चीन से टक्कर के लिए भारत भी उसी नदी पर बना रहा बांध

ईंटानगर अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों में शुक्रवार को सैकड़ों लोगों ने सड़कों पर उतरकर सियांग नदी पर प्रस्तावित ‘सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट’ (SUMP) के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। दरअसल इस प्रोजेक्ट के सर्वेक्षण के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की तैनाती की गई है। इससे लोग बेहद नाराज नजर आ रहे हैं। यह विवादास्पद परियोजना ईस्ट सियांग जिले के बेगिंग क्षेत्र में प्रस्तावित है। भारत सरकार का दावा है कि यह परियोजना चीन द्वारा तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर बनाए जा रहे विशाल जलविद्युत बांध से उत्पन्न संभावित खतरे का मुकाबला करने के लिए जरूरी है। यारलुंग त्सांगपो नदी को भारत के अरुणाचल प्रदेश में सियांग और असम में ब्रह्मपुत्र के नाम से जाना जाता है। स्थानीय विरोध और तैनाती से तनाव बढ़ा स्थानीय लोग नवंबर 2024 से इस परियोजना के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं और सर्वेक्षण के प्रयासों को लगातार रोकते आ रहे हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने विरोध को काबू में करने और सर्वे कार्य को पूरा कराने के लिए अर्धसैनिक बलों की तैनाती की, जिससे नया विरोध भड़क गया। पासीघाट के निवासी निथ परोन ने बताया, “प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। लेकिन जब सैकड़ों लोग एकत्र हुए, तो थोड़ी अफरा-तफरी मच गई, जिससे नदी पर बना एक झूलता पुल क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस या सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग नहीं किया है।” 100,000 से अधिक लोगों के विस्थापन की आशंका सियांग, ऊपरी सियांग और पूर्वी सियांग जिलों में स्थानीय निवासियों, विशेष रूप से आदि समुदाय के लोगों, ने इस प्रोजेक्ट का विरोध किया है, क्योंकि उनका मानना है कि यह उनकी आजीविका, कृषि भूमि और सांस्कृतिक विरासत को खतरे में डालेगा। सियांग नदी के दीते डाइम, परोंग और उग्गेंग क्षेत्रों में बनने वाली इस परियोजना से कम से कम एक लाख लोगों के विस्थापित होने की आशंका है। पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं, क्योंकि यह परियोजना जैवविविधता से भरपूर क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है। सरकार ने दी राष्ट्रीय सुरक्षा की दलील अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने नवंबर में कहा था कि चीन द्वारा तिब्बत में बनाए जा रहे बांध से उत्पन्न खतरे- जैसे अचानक बाढ़ आना और जल संकट को देखते हुए भारत को तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा, “अगर हमने अभी कदम नहीं उठाया, तो हम बाहरी शक्तियों की दया पर निर्भर हो जाएंगे। यह परियोजना जल भंडारण कर बाढ़ नियंत्रण और जल संकट से निपटने में मदद करेगी।” खांडू ने कहा, “चीन का यारलुंग त्सांगपो पर बन रहा 60,000 मेगावाट का बांध अरुणाचल, असम और बांग्लादेश में तबाही मचा सकता है। SUMP इस खतरे का मुकाबला करने के लिए एक रणनीतिक कदम है।” ‘दिबांग रेजिस्टेंस’ ने दी कड़ी प्रतिक्रिया गुरुवार को ‘डिबांग रेजिस्टेंस’ नामक एक स्थानीय समूह ने बयान जारी कर कहा, “शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद सशस्त्र बलों की तैनाती न केवल गलत है, बल्कि उन लोगों की आवाज को दबाने जैसा है जो इस परियोजना से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को जमीन के वास्तविक मालिकों से सीधे संवाद करना चाहिए और उनकी चिंताओं को समझते हुए समाधान निकालना चाहिए। बयान में आगे कहा गया, “हमें एक साथ मिलकर ऐसा रास्ता खोजना होगा जो लोगों के अधिकारों और दृष्टिकोण को मान्यता देता हो। यह एक अनुचित और दमनकारी कदम है। हम अपने समुदाय के साथ खड़े हैं और न्याय की मांग करते रहेंगे।” चीन के बांध से क्षेत्रीय असंतुलन की आशंका दिसंबर 2024 में चीन ने दुनिया के सबसे बड़े जलविद्युत बांध के निर्माण को मंजूरी दी थी, जो तिब्बत के पूर्वी क्षेत्र में स्थित है। इसका अनुमानित बजट 137 बिलियन डॉलर है और यह सालाना 300 अरब किलोवॉट-घंटा बिजली उत्पन्न करेगा- जो वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े ‘थ्री गॉर्जेस डैम’ से तीन गुना अधिक है। भारत और बांग्लादेश को निचले क्षेत्रों में इसके असर को लेकर गंभीर चिंता है।  

सीएम साय पहुंचे नारायणपुर के बासिंग स्थित BSF कैंप, DRG जवानों के साथ खाया खाना

नारायणपुर बस्तर के नक्सल इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में चलाया गया, जिसमें नक्सली लीडर बवस राजू समेत 27 नक्सली मारे गए। इस ऐतिहासिक अभियान के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज नारायणपुर के बासिंग स्थित BSF कैंप पहुंचे, जहां उन्होंने जवानों का हौसला बढ़ाया। इस दौरान DRG के जवानों को गश्त के लिए 200 मोटरसाइकिलें वितरित की गईं। मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन में शहीद हुए जवानों के परिवारों से मुलाकात की और DRG के जवानों के साथ बैठकर भोजन भी किया, जिससे उनका मनोबल और भी ऊंचा हुआ। DRG की महिला कमांडो ने बताया कि पहली बार कोई मुख्यमंत्री उनके बीच आया, उनके साथ बैठकर भोजन किया और यह अनुभव उनके लिए गर्व का क्षण रहा। इस अभियान में उन्हें कठिन परिस्थितियों के बावजूद सफलता मिली और बीती रात उन्होंने अपनी जीत का जश्न भी मनाया। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को नारायणपुर के एसपी ने बताया कि यह सफलता किस तरह कठिन परिस्थितियों में हासिल हुई, कैसे उन्होंने 15 घंटे में 32 किलोमीटर का पैदल सफर तय किया, नदी-नालों को पार किया और सीधे बसव राजू के डेरे तक पहुंचे। इस अभियान की रणनीति और साहसिकता की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने आपका सरकार, आपका ग्राम अभियान के तहत जनचौपाल लगाकर स्थानीय ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों से पूछा कि क्या उन्हें राशन मिल रहा है, बिजली की व्यवस्था है या नहीं, क्या महतारी वंदन योजना का लाभ उन्हें समय पर मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे यही देखने और सुनने के लिए आए हैं कि सरकार की योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर पहुंच रहा है या नहीं। मुख्यमंत्री ने नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील दोहराई सीएम साय ने कहा कि यह क्षेत्र नक्सलवाद से लंबे समय से प्रभावित रहा है। जब से उनकी सरकार सत्ता में आई है वे शांति बहाली के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, लेकिन नक्सल प्रभाव के कारण विकास अवरुद्ध था। अब जब केंद्र और राज्य दोनों में उनकी सरकार है तो बाकी क्षेत्रों की तरह यहां भी विकास होगा। उन्होंने नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील दोहराई और बताया कि अब तक 1300 लोग नक्सली विचारधारा छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। महिलाओं ने हाथ उठाकर कहा – महतारी वंदन योजना का मिल रहा लाभ मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जवानों की प्रतिबद्धता से उन्हें पूरा विश्वास है कि यह क्षेत्र जल्द ही नक्सलमुक्त होगा और सरकार का संकल्प 31 मार्च 2026 तक पूर्ण विकास और शांति की स्थापना अवश्य पूरा होगा। ग्रामीणों को अपने मंत्रियों से परिचय कराते हुए मुख्यमंत्री ने पूछा कि क्या सरकार बनने के बाद उन्हें योजनाओं का लाभ मिल रहा है। ग्रामीणों ने हाथ उठाकर महतारी वंदन योजना की पुष्टि की। एक महिला माहेश्वरी ने बताया कि उन्होंने महतारी वंदन योजना की राशि से सिलाई मशीन खरीदी और अब 4,000 से 5,000 तक की मासिक आमदनी कर रही है। सीएम साय ने ग्रामीणों को दी ये सौगातें मुख्यमंत्री ने मौके पर ही विकास कार्यों की कई घोषणाएं की। पुलिया निर्माण के लिए 20 लाख, खेल मैदान के लिए 10 लाख, सीसी रोड के लिए 25 लाख और घोटुल के लिए 15 लाख कुल 1 करोड़ 4 लाख की योजनाएं घोषित की। इसके अलावा गढ़ बंगाल से डोनर तक 30 किलोमीटर सड़क और डोंगरगढ़ से ओरछा तक सड़क निर्माण की भी घोषणा की।

भारतीय डेलिगेशन के मॉस्को पहंचने से पहले भी यही स्थिति बनी रही, यहां घंटों ड्रोन अटैक की कोशिश की गई

रूस रूस ने बताया कि उसे पिछले तीन दिनों में देश भर में कम से कम 485 ड्रोन हमले का सामना करना पड़ा है। अकेले मॉस्को और इसके आसपास के इलाके में 63 ड्रोन अटैक की कोशिश की गई। आज भारतीय डेलिगेशन के मॉस्को पहंचने से पहले भी यही स्थिति बनी रही। यहां घंटों ड्रोन अटैक की कोशिश की गई। एयरपोर्ट को बंद करना पड़ गया। इसके कारण भारतीय सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को लेकर रूस यात्रा पर निकली फ्लाइट को घंटों तक हवा में चक्कर लगाना पड़ा। ऐसा कहा जा रहा है कि ड्रोन हमले के कारण एयरपोर्ट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई डीएमके सांसद कनिमोझी कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन द्वारा किए गए ड्रोन हमले के कारण कई घंटों तक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों का संचालन स्थगित रहा। इसके कारण सांसद कनिमोझी के नेतृत्व वाले डेलिगेशन को उतरने की अनुमति नहीं दी गई। इसके कारण फ्लाइट हवा में ही चक्कर लगाती रही। काफी देरी के बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई। रूस में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने हवाई अड्डे पर सर्वदलीय सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उन्हें सुरक्षित रूप से उनके होटल तक पहुंचाया। कनिमोझी रूस, स्पेन, ग्रीस, स्लोवेनिया और लातविया में एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं। यह डेलिगेशन इन देशों को 22 अप्रैल के पहलगाम हमलों के जवाब में पाकिस्तान के खिलाफ भारत द्वारा हाल ही में शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी देगा। साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर भारत का रुख भी स्पष्ट करेगा।  

सुप्रीम कोर्ट के जज रिटायरमेंट के दिन आमतौर पर कोई फैसला नहीं सुनाते, लेकिन आखिरी दिन भी सुनाए 11 फैसले

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के जज रिटायरमेंट के दिन आमतौर पर कोई फैसला नहीं सुनाते, लेकिन जस्टिस एएस ओका ने इस पुरानी रवायत को बदल दिया है। उन्होंने शुक्रवार को अपने आखिरी कार्यदिवस पर कई बेंचों में हिस्सा लिया और 11 फैसले दिए। ऐसा उन्होंने तब किया है, जब उनकी मां का एक दिन पहले ही निधन हुआ था। वह गुरुवार को ही अपनी मां के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए मुंबई गए थे और फिर लास्ट वर्किंग डे पर काम करने के लिए दिल्ली लौट आए। शुक्रवार को शीर्ष अदालत में उनका आखिरी दिन था और इस मौके पर भी वह सिर्फ विदाई समारोह के आयोजनों में ही नहीं रहे बल्कि 11 फैसले सुनाए। उनका शनिवार को लास्ट डे रहेगा, लेकिन आज आखिरी कार्यदिवस था। उन्होंने पहले ही कहा था कि वह रिटायरमेंट शब्द से नफरत करते हैं। इसके अलावा उनका कहना था कि जजों को आखिरी दिन भी फैसले सुनाने चाहिए और बेंच का हिस्सा बनना सही रहता है। इसी के तहत उन्होंने कई सुनवाई में हिस्सा लिया और फिर अंत में प्रतीकात्मक बेंच का भी हिस्सा बने, जिसका नेतृत्व चीफ जस्टिस बीआर गवई कर रहे थे। किसी भी जज के रिटायरमेंट पर प्रतीकात्मक जज चीफ जस्टिस के नेतृत्व में बैठती है। ऐसा जस्टिस को सम्मानजनक विदाई के लिए किया जाता है और यह परंपरा शीर्ष अदालत में दशकों से चली आ रही है। जस्टिस ओका बोले- आखिरी दिन भी करना चाहिए पूरा काम बता दें कि 21 मई को जस्टिस ओका के लिए फेयरवेल समारोह आयोजित हुआ था। इसका आयोजन सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन की ओर से किया गया था। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि मैं इस परंपरा को सही नहीं मानता कि रिटायरमेंट के दिन जज काम ही न करें। मैं पसंद करूंगा कि आखिरी कार्यदिवस पर भी काम करूं और कुछ फैसलों का हिस्सा बनूं। इसके अलावा उनका कहना था कि रिटायर होने वाले जज के लिए गार्ड ऑफ ऑनर 1:30 बजे दिया जाता है, जिसमें थोड़ी देरी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आखिरी दिवस पर कम से कम शाम को 4 बजे तक तो काम करना ही चाहिए। जिला अदालत से की थी शुरुआत और SC तक आ पहुंचे उन्होंने कहा था कि मैं तो रिटायरमेंट शब्द से ही नफरत करता हूं। बता दें कि जस्टिस ओका ने यूनिवर्सिटी ऑफ बॉम्बे से लॉ की पढ़ाई करने के बाद जून 1983 से वकालत शुरू की थी। उन्होंने अपने पिता श्रीनिवास ओका के ठाणे जिला अदालत स्थित चेंबर से वकालत शुरू की थी और वहां से लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज तक का सफर तय किया। उनकी 29 अगस्त, 2003 को बॉम्बे हाई कोर्ट में एंट्री हुई थी। तब वह अस्थायी जज थे और फिर 2005 में परमानेंट हुए। वह कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस 10 मई, 2019 को बने थे। फिर वह 31 अगस्त, 2021 को सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर आए। उनका कार्य़काल शीर्ष अदालत में करीब 4 साल का रहा है।  

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