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अगर आप भी यूएस से लेना चाहते है डिग्री, तो जाने की कितने तरह की मिलती है डिग्री

वॉशिंगटन विदेश में कॉलेज जाकर डिग्री हासिल करना आपके लिए अवसरों से नए दरवाजे खोल सकता है। डिग्री होने पर ना सिर्फ नौकरी के ऑप्शन बढ़ जाते हैं, बल्कि सैलरी में भी इजाफा होता है। अगर आपके पास अमेरिका से मिली डिग्री है, तो फिर जॉब मार्केट में आपकी वैल्यू और भी ज्यादा बढ़ जाएगी। अमेरिका का एजुकेशन सिस्टम भारत से बिल्कुल अलग है, जिस वजह से यहां पढ़ने जाने वाले छात्र यूएस की डिग्रियों को लेकर कंफ्यूज रहते हैं। आइए जानते हैं कि अमेरिका में कितने तरह की डिग्रियां दी जाती हैं। एसोसिएट डिग्री: अगर आप हायर एजुकेशन की शुरुआत कर रहे हैं या फिर कुछ वर्क एक्सपीरियंस हासिल करना चाहते हैं, तो एसोसिएट डिग्री आपके लिए सही हो सकती है। एसोसिएट डिग्री को 2 साल की डिग्री के रूप में जाना जाता है और ये हाई स्कूल डिप्लोमा या उसके बराबर की एजुकेशन हासिल करने के बाद प्राप्त की जा सकने वाली पहली डिग्री है। इसका मतलब है कि ये डिग्री आपको बेसिक जानकारी देती है और आगे की पढ़ाई के लिए तैयार करती है। बैचलर्स डिग्री: बैचलर डिग्री प्रोग्राम आपको कई तरह के करियर के लिए जरूरी नॉलेज और स्किल सिखाते हैं। बैचलर डिग्री 4 साल की अंडरग्रेजुएट डिग्री है। ये डिग्री आपको किसी खास विषय में गहराई से जानकारी देती है। बैचलर डिग्री शुरू करने के लिए आपको एसोसिएट डिग्री की जरूरत नहीं है। आप सीधे 12वीं के बाद ये डिग्री कर सकते हैं। बैचलर ऑफ साइंस (BS) और बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA) जैसी डिग्रियां आपको किसी खास विषय पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देती हैं। मास्टर्स डिग्री: मास्टर डिग्री हासिल करना आपके करियर में आगे बढ़ने का एक शानदार तरीका हो सकता है। मास्टर डिग्री बैचलर डिग्री के बाद ली जाती है। यह आपको किसी खास सब्जेक्ट में विशेष नॉलेज और स्किल प्रदान करती है। इसे पूरा करने में आमतौर पर 12 से 18 महीने लगते हैं। मास्टर डिग्री रिसर्च-आधारित, सिखाए गए कोर्स या दोनों का मिक्स हो सकती है। मास्टर ऑफ साइंस (MS) या मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) जैसी मास्टर डिग्री कई सब्जेक्ट में उपलब्ध हैं। डॉक्टोरल डिग्री: अगर आप कॉलेज में सबसे ऊंची डिग्री हासिल करना चाहते हैं, तो डॉक्टरेट डिग्री आपके लिए सही हो सकती है। इंडस्ट्री और करियर के लक्ष्यों के आधार पर कई प्रकार की डॉक्टरेट डिग्रियां हैं। डॉक्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (DBA), डॉक्टर ऑफ एजुकेशन (EdD) और डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (PhD) इनमें से ही कुछ एक हैं। डॉक्टरेट की डिग्री पूरी करने में 7 साल तक लग सकते हैं।

2030 तक अमर हो सकते हैं इंसान, मशहूर भविष्यवक्ता रे कुर्जवील का दावा

वॉशिंगटन अमरता यानी कभी न मरने का सपना इंसानों की सोच में कई हजार सालों से बसा हुआ है। कभी इसे कहानियों में अमृत के रूप में देखा गया, तो कभी साइंस फिक्शन फिल्मों में दिखाया गया कि इंसान टेक्नोलॉजी मदद से मौत को मात दे सकता है। अब तक सिर्फ कल्पना में ही सच लगने वाला यह सिद्धांत जल्द हकीकत बन सकता है। दरअसल तेजी से बढ़ती टेक्नोलॉजी जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जेनेटिक इंजीनियरिंग और नैनोटेक्नोलॉजी इंसान को बहुत ही जल्द अमर बना देंगी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट् के मुताबिक यह कहना है मशहूर भविष्यवक्ता या भविष्य वैज्ञानिक और गूगल के पूर्व इंजीनियर रे कुर्जवील का। कुर्जवील ने हाल ही में दावा किया है कि इंसान 2030 तक अमर हो सकते हैं। उनके इस बयान ने दुनिया भर में एक बार फिर अमरता को लेकर चर्चा छेड़ दी है। इसके पीछे उन्होंने किसी चमत्कार नहीं बल्कि टेकनोलॉजी को ही आधार बताया है। चलिए जानते हैं कुर्जवील के दावों के पीछे कितना दम है? कौन हैं रे कुर्जवील रे कुर्जवील के दावों के बारे में जानने से पहले जान लेते हैं कि रे कुर्जवील हैं कौन। दरअसल कुर्जवील टेक्नोलॉजी से जुड़े बड़े-बड़े दावों के लिए जाने जाते हैं, और हैरानी की बात यह है कि उनके ज्यादातर दावे सच भी साबित हुए हैं। यही वजह है कि उन्हे भविष्यवक्ता या भविष्य वैज्ञानिक कहा जाता है। उन्होंने कई साल पहले इंटरनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोलॉजी व कंप्यूटर के मेल जैसी चीजों की भविष्यवाणी की थी। समय के साथ यह सब सच साबित हुआ है। बता दें कि उनकी 147 में से करीब 86% भविष्यवाणियां सही साबित हुई हैं। इसी के चलते उन्हें 1999 में अमेरिका का सबसे बड़ा तकनीकी सम्मान ‘नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी’ भी मिला। उनकी खुद की नई-नई तकनीकों पर रिसर्च और काम की वजह से ही उनकी बातों को गंभीरता से लिया जाता है। नैनोबॉट्स का कमाल प्रसिद्ध भविष्य वैज्ञानिक रे कुर्जवील का कहना है कि 2030 तक इंसान जैविक रूप से अमर हो सकते हैं। यह बात सुनने में भले विश्वास के लायक न लगे, लेकिन इसके पीछे मजबूत वैज्ञानिक आधार हैं। कुर्जवील के मुताबिक, भविष्य की चिकित्सा प्रणाली में नन्हें रोबोट्स यानी नैनोबॉट्स का अहम रोल होगा। ये नन्हें-नन्हें रोबोट हमारे शरीर की नसों में घूमते रहेंगे और शरीर के अंदर से हेल्थ की निगरानी करेंगे। इनका काम टूटी हुई कोशिकाओं की मरम्मत करना और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को उल्टा करना होगा। अगर यह तकनीक सच साबित होती है, तो न सिर्फ बीमारियों को पहले ही ठीक किया जा सकेगा, बल्कि बुढ़ापे को भी रोक दिया जाएगा। एक हो जाएगा इंसानी और मशीनी दिमाग रे कुर्जवील का कहना है कि आने वाले सालों में न सिर्फ इंसानों का शरीर बदलेगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कि AI भी एक नए दौर में पहुंच जाएगा। उनके अनुसार, साल 2029 तक मशीनें इंसानों जैसी बुद्धि हासिल कर लेंगी और ट्यूरिंग टेस्ट पास कर सकेंगी। ट्यूरिंग टेस्ट का मतलब है कि मशीनें इंसानों जैसा व्यवहार करने लगेंगी जिसमें फर्क करना मुश्किल हो जाएगा। उनका दावा है कि भविष्य में इंसान और AI सिर्फ साथ-साथ काम नहीं करेंगे बल्कि वह एक ही हो जाएंगे। जब इंसानी दिमाग और AI का मेल होगा, तब हमारी याददाश्त, सोचने की क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति हमारी सोच से भी कहीं आगे बढ़ जाएगी। 2045 तक बदल जाएगी मानव सभ्यता रे कुर्जवील की भविष्यवाणी “सिंग्युलैरिटी” के सिद्धांत से जुड़ी है। दरअसल सिंग्युलैरिटी का मतलब उस समय से है जब तकनीकी विकास इतनी तेजी से होगा कि वह पूरी मानव सभ्यता को बदल देगा। कुर्जवील का मानना है कि यह बदलाव साल 2045 तक आएगा। उस समय इंसानी बुद्धि अरबों गुना बढ़ जाएगी, क्योंकि हम अपनी बनाई तकनीकों से पूरी तरह जुड़ जाएंगे। तब चेतना सिर्फ आपके शरीर तक सीमित नहीं रहेगी। इसे डिजिटल रूप में अपलोड किया जा सकेगा और अमर बनाया जा सकेगा। क्या है वर्तमान स्थिति दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। 2023 में Google और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियों ने एडवांस AI चैटबॉट लॉन्च किए, जिन्होंने लोगों को हैरान भी किया और डराया भी। आज जो AI हमारे बीच मौजूद है वह खुद सीखता है, सुधार करता है और इंसानों के नियंत्रण से बाहर भी जा सकता है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि यह आधुनिकता भविष्य में कौन सा रास्ता लेती है।

राज्य के 3 लाख 60 हजार से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को मिला पीएम आयुष्मान वय-वंदना कार्ड

रायपुर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की  गई  पीएम आयुष्मान वय-वंदना योजना से 70 वर्ष व अधिक आयु के नागरिकों को निः शुल्क इलाज मिल रहा है। छत्तीसगढ मे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अगुवाई और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में राज्य के 3 लाख 60 हजार  से अधिक 70 वर्ष व अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के आयुष्मान वय-वंदना कार्ड बन चुके हैं। इसकी वजह से छत्तीसगढ़ पूरे देश में वय वंदना कार्ड बनाने के मामले में  पांचवें स्थान पर पहुँच गया है। इस मामले में राज्य ने राजस्थान, महाराष्ट्र , ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों से आगे निकलकर कीर्तिमान रच दिया है । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर राज्य के सभी जिलों में विशेष अभियान चलाकर लगातार आयुष्मान वय-वंदना कार्ड बनाए जा रहे हैं। जिससे कि कोई भी पात्र वरिष्ठ नागरिक योजनांतर्गत् निःशुल्क इलाज लाभ पाने से वंचित ना रह जाए।  जिलों में आयुष्मान वय-वंदना पंजीयन हेतु विभिन्न शासकीय विभागों के अतिरिक्त, सामाजिक संस्थाओं, पेंशनर संथाओं, शियान-सदन, वरिष्ठ-जन कल्याण संघों, वृद्धाश्रमों, निजी आवासीय सोसायटियों, इत्यादि से लगातार संपर्क कर शिविर लगाए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि, कोई भी व्यक्ति जिसके माता-पिता या अन्य सदस्य यदि 70 वर्ष व अधिक आयु के हैं एवं उनके पास आधार कार्ड उपलब्ध है तो वे नजदीकी शासकीय चिकित्सालय, सी.एम.एच.ओ./ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय या शासकीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता के माध्यम से निःशुल्क आयुष्मान कार्ड बनवा सकते हैं या टोल फ्री टेलीफोन नंबर 104 पर बात कर अधिक जानकारी ले सकते हैं। व्यक्ति चाहे तो गूगल प्ले स्टोर से आयुष्मान भारत एप व आधार फेस आई.डी. एप डाउनलोड कर आधार वेरीफिकेशन से अपना सामान्य आयुष्मान कार्ड या घर के वरिष्ठ सदस्य का आयुष्मान वय-वंदना कार्ड दोनों पंजीयन स्वयं भी कर सकता है। उल्लेखनीय है कि माह अक्टूबर 2024 से देश में प्रारंभ वय-वंदना कार्ड पंजीयन में राज्य में नवंबर के बाद तेजी से कार्य किया जा सका है। राज्य शासन द्वारा 6 जिलों जहां 60 प्रतिशत से अधिक आयुष्मान वय-वंदना कार्ड पंजीयन कवरेज कर लिया गया है, को “वय-मित्र” जिलों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके तहत् इन जिलों में वरिष्ठ नागरिकों को जिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ‘वय-मित्र स्वास्थ्य परीक्षण शिविर’ का आयोजन, ‘मोबाइल मेडिकल यूनिट’ के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन, आयुष्मान-आरोग्य मंदिर में टेली-मेडिसीन व मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग व प्रत्येक बृहस्पतिवार ‘शियान-जतन शिविर’ का आयोजन, आयुष पद्धति से इलाज की सुविधा, मोतियाबिंद जांच, इत्यादि विशेष स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।

आज से प्रदेश के पूर्वी, तराई और वाराणसी मंडल में तेज हवाएं और वज्रपात के आसार

लखनऊ उत्तर प्रदेश में तेज हवाओं और बूंदाबांदी के असर से तपिश भरी गर्मी से राहत मिली है।  इस बार 25 मई से दो जून के बीच नौतपा के दौरान तपिश और गर्मी मध्यम दर्जे वाली रहने के संकेत हैं। आज से प्रदेश के पूर्वी, तराई और वाराणसी मंडल में  तेज हवाएं चलने और कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ वज्रपात की संभावना है।  प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों संभागों में कहीं भी लू की परिस्थितियां नहीं रहीं। हालांकि पूर्वा हवाओं में पर्याप्त मात्रा में नमी की वजह से उमस भरी चिपचिपी गर्मी बरकरार है। रविवार को पश्चिमी यूपी के ज्यादातर इलाकों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं के साथ दिल्ली एनसीआर से सटे जिलों नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, मेरठ समेत अगरा, अलीगढ़, बरेली,  सहारनपुर परिक्षेत्र में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिली। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि सोमवार से अगले तीन दिन तराई और पूर्वी इलाकों में नमी युक्त पूर्वा हवाओं के साथ बादलों का आना-जाना बना रहेगा। वहीं तराई और दक्षिणी यूपी के इलाकों व वाराणसी परिक्षेत्र में कहीं कहीं बूंदाबादी की परिस्थितियां बन सकती हैं। मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि  प्रदेश में बंगाल की खाड़ी की तरफ से आने वाला मानसून अपनी सामान्य तिथि 18 जून से करीब चार दिन पहले दस्तक दे सकता है। हालांकि, इसका सही आकलन मानसून के पूर्वोत्तर भारत पहुंचने के बाद ही किया जा सकता है। इन जिलों मेघगर्जन के साथ वज्रपात होने की संभावना चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, देवरिया, गोरखपुर, संतकबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ में मेघगर्जन के साथ वज्रपात होने की संभावना है।

गुजरात में आज PM मोदी का मेगा रोड शो, तीन जनसभा भी संबोधित करेंगे, विकासकार्यों का लोकार्पण भी करेंगे

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार गुजरात दौरे पर आ रहे हैं. आज और कल मई को पीएम मोदी गुजरात में रहेंगे. दो दिवसीय गुजरात दौरे के दौरान पीएम मोदी वडोदरा, दाहोद, भुज, अहमदाबाद और गांधीनगर में मौजूद रहेंगे. इन सभी जगहों पर पीएम के स्वागत की विशेष तैयारी की जा रही है. साथ ही पीएम तीन जनसभा भी संबोधित करेंगे. इसी के साथ पीएम कई विकासकार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण भी करेंगे. 26 मई के दिन पीएम मोदी का सुबह 10 बजे वडोदरा में आगमन होगा. वडोदरा में पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया जाएगा, जिसके बाद पीएम मोदी 11 बजे दाहोद पहुंचेंगे. दोपहर बाद भुज के लिए पीएम मोदी रवाना होंगे. दाहोद और भुज में पीएम मोदी का स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया है, दोनों ही जगह पीएम जनसभा को संबोधित करके कई विकासकार्यों का शुभारंभ और शिलान्यास करेंगे. अहमदाबाद में पीएम का रोड शो 26 मई की शाम पीएम मोदी अहमदाबाद पहुंचेंगे. अहमदाबाद में पीएम मोदी के स्वागत के लिए भव्य रोड शो का आयोजन किया गया है, जिसके बाद पीएम गांधीनगर स्थित राजभवन पहुंचेंगे और 27 मई के दिन पीएम मोदी गांधीनगर में आयोजित कार्यक्रम के मौजूद रहकर विविध विकासकार्यो का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे. वडोदरा में पीएम का रोड शो ऑपरेशन सिंदूर के बाद पीएम पहलीबार गुजरात में और वडोदरा पहुंच रहे है. जिसके मद्देनजर सुबह 10 बजे पीएम के रोड शो का आयोजन किया जा रहा है. पीएम के स्वागत में महिला कार्यकर, पदाधिकारियों की मौजूदगी रहेगी. महिलाओं को पीएम के स्वागत के लिए लाल साड़ी और विवाहित महिलाओं को मांग में सिंदूर के साथ उपस्थित रहने के लिए अनुरोध किया गया है. वडोदरा में स्वागत कार्यक्रम बाद पीएम दाहोद रवाना होंगे. 11 बजे दाहोद पहुंचकर पीएम मोदी का भव्य स्वागत जनसभा स्थल तक किया जाएगा. पीएम दाहोद में जनसभा संबोधित करेंगे. 24,000 करोड़ से अधिक के विकासकार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास दाहोद से पीएम मोदी राज्य सरकार के विविध विभागों के 24,000 करोड़ से अधिक के विकासकार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगें, जिसमें 21,405 करोड़ के खर्च से बने लोको मैनुफैक्चरिंग शॉप – रोलिंग स्टॉक वर्कशॉप का लोकार्पण समेत रेलवे से जुड़े विकासकार्यों का लोकार्पण शामिल है. दाहोद में पीएम मोदी 9000 HP के पहले लोकोमोटिव इंजन देश को समर्पित करेंगे. दाहोद में निर्मित रेलवे प्रोडक्शन यूनिट से दस हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है. दाहोद में निर्मित लोकोमोटिव इंजन 4600 टन माल ले जाने में सक्षम होगा. अगले 10 वर्षों में लगभग 1200 इंजन बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा पीएम 181 करोड़ की जल विभाग की चार योजनाओं का लोकार्पण करेंगे, जिससे 193 गांवो में फ़ायदा मिलेगा. इसके साथ ही पीएम नरेन्द्र मोदी दाहोद स्मार्ट सिटी के तहत दाहोद में नगरपालिका भवन, आदिवासी म्यूजियम सहित सार्वजनिक सुविधाओं और जन कल्याण के लिए 233 करोड़ रुपये के विकासकार्यों को जनता को समर्पित करेंगे. 53 करोड़ रुपये की लागत वाले पुलिस आवास कार्यों का उद्घाटन करेंगे. भुज में पीएम का रोड शो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 मई को दोपहर दो बजे गुजरात के कच्छ जिले में स्थित भुज में पहुंचेंगे. भुज में भी पीएम के रोड शो की तैयारी की जा रही है. रॉड शो के बाद पीएम जनसभा को संबोधित करेंगे. इस दौरान पीएम ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स विभाग, मार्ग और मकान विभाग, जल विभाग, पवित्र यात्रा धाम विकास बोर्ड, पावर ग्रिड और दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी समेत 53,414 करोड़ के कुल 33 विकास कार्यों का लोकार्पण और शीलान्यास करेंगे. भुज में रॉड शो और जनसभा के बाद पीएम मोदी अहमदाबाद के लिए रवाना होंगे. अहमदाबाद एयरपोर्ट से इंदिरा ब्रिज सर्किल तक पीएम के स्वागत के लिए भव्य तैयारी की जा रही है. इस दो किलोमीटर के दरमियान पीएम मोदी रॉड शो करेंगे. पीएम के स्वागत में अलग अलग कटआउट्स और 15 से अधिक स्टेज बनाये गए हैं. पीएम के कटआउट्स के साथ सेना के जवानों की भी तस्वीरें है. रोड शो के रूट पर एलईडी, ब्रह्मोस मिसाइल, S400 डिफेंस सिस्टम, फाइटर प्लेन के कटआउट्स लगाये गए है. ऑपरेशन सिंदूर के कटआउट्स के साथ बाउल जिसमें सिंदूर रखा गया है. पूरे रोड पर तिरंगे लगाए गए है साथ ही में रोड के दोनों तरफ ट्राई कलर के पट्टे लगाए गए हैं. अहमदाबाद के रोड शो के बाद पीएम गांधीनगर स्थित राजभवन पहुंचेंगे और दिन के सभी आधिकारिक कार्यक्रम समाप्त होंगे. पीएम मोदी 27 मई के दिन गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर से 5,536 करोड़ के विकासकार्यो का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे. जिनमें 1,006 करोड़ की लागत से PMAY के तहत निर्मित 22,055 घरों का उद्घाटन करेंगे और 1,000 करोड़ की लागत से निर्मित साबरमती रिवरफ्रंट चरण-3 की आधारशिला रखेंगे. पीएम स्वर्णिम जयंती मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना के तहत नगर निकायों को 3,300 करोड़ के चेक वितरित करेंगे. पीएम जल संसाधन विभाग के अंतर्गत 888 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली थराद धनेरा पाइपलाइन और 678 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली दियोदर लाखणी पाइपलाइन का शिलान्यास भी करेंगे.  

यूपी में पंचायत चुनाव अगले साल, जून में शुरू होगा मतदाता सूचियों में संशोधन का काम

लखनऊ त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए तैयारियों का आगाज हो चुका है। जून में मतदाता सूचियों को संशोधित करने का अभियान शुरू होगा। अगले साल मई में ग्राम पंचायतों और जुलाई में क्षेत्र व जिला पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होगा। प्रदेश में 57691 ग्राम पंचायतें, 826 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला पंचायत क्षेत्र हैं। पिछला चुनाव वर्ष 2021 में हुआ था। अगले चुनाव अप्रैल-मई 2026 में संभावित हैं। इन चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतों की मतदाता सूचियों का बड़े पैमाने पर पुनरीक्षण कराने का फैसला किया है। इसके तहत नाम जोड़ने और हटाने का काम होगा। ऐसा अंतिम रूप से करने से पहले आम लोगों से आपत्तियां भी मांगी जाएंगी। राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम को अंतिम रूप दे रहा है। जल्द ही इसे जारी किया जाएगा। मतदाता सूचियों को संशोधित करने में न्यूनतम छह माह लगेंगे। यानी, जून से दिसंबर के बीच इस काम को पूरा किया जाएगा। इसके बाद पंचायतों में पदों को आरक्षित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नगर पालिकाओं का अगला चुनाव ईवीएम से कराने की तैयारी प्रदेश में नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों का अगला चुनाव ईवीएम से कराने की तैयारी है। इसके लिए शासन ने प्रस्ताव तैयार करा लिया है। वर्ष 2023 में नगर निगम चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल किया गया था। नगर निकायों के चुनाव वर्ष 2028 में होने हैं, लेकिन प्रदेश में इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर जुटाने की कवायद अभी से प्रारंभ हो गई है। प्रदेश में नगर निकायों की कुल संख्या 762 है। इनमें 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषद और 545 नगर पंचायत क्षेत्र हैं। सभी 745 नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अगला चुनाव ईवीएम से कराने का निर्णय लिया गया है। इससे अपेक्षाकृत कम समय में चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। नगर निकायों का अगला चुनाव वर्ष 2028 में होगा। शासन के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, अभी इन चुनावों में काफी समय है। तब तक ईवीएम और जरूरी इन्फास्ट्रक्चर जुटा लिया जाएगा।  

कैंसर रोगियों के जीवन में प्रसन्नता का संचार करता बिराट हॉस्पिटल

भोपाल साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी का जबलपुर में स्थापित विराट हॉस्पिटल ‘स्वालम्बी नारी, सशक्त राष्ट्र’ की अवधारणा को साकार कर रहा है। कैंसर की जंग हार चुके रोगियों के उपचार और उनकी सेवा के लिए इस हॉस्पिटल का समर्पण सराहनीय है। साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने विराट हॉस्पिटल को प्रारंभ से ही कैंसर रोगियों के लिये सेवा और उपचार के आदर्श केन्द्र की स्थापना के संकल्प की सिद्धि की साधना स्थली बनाया। इस समर्पण भाव के कारण विराट हॉस्पिटल कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में विशिष्ट स्थान औऱ सम्मान अर्जित कर सका है। साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी का यह प्रकल्प असाध्य रोगों के उपचार और सेवा सुश्रूषा की प्रेरणा स्थली बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को जबलपुर प्रवास के दौरान इस अस्पताल का अवलोकन करेंगे। कैंसर रोगियों के जीवन में प्रसन्नता का संचार करता बिराट हॉस्पिटल कैंसर मरीजों की जीवन के अंतिम समय में विराट हॉस्पिटल में की जा रही देखभाल की ऐसे ही तारीफ नहीं की जाती, बल्कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रशिक्षण के दौरान यहां भेजा जाना इसका प्रमाण है। कैंसर रोगियों के चेहरे पर यहां सेवाभाव से की जा रही देखभाल को लेकर संतोष देखा जा सकता है। ज्ञानेश्वरी दीदी ने बताया कि शुरूआत में लगता था कि ऐसे कैंसर मरीजों की देखभाल कैसे की जा सकेगी, जिनके बचने की कोई उम्मीद नहीं है, डॉक्टर भी जबाब दे चुके हैं और परिवार भी उनका साथ छोड़ चुका है, लेकिन लोगों, दानदाताओं और कॉरपोरेट कंपनियों के सहयोग से धीरे-धीरे सारी व्यवस्थाएं होती गई और पिछले करीब बारह वर्षों में ढाई हजार से अधिक कैंसर मरीजों की सेवा की जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि विराट हॉस्पिटल में कैंसर मरीजों को चाय, दूध, नास्ता और दोनों समय का भोजन उपलब्ध कराया जाता है। मरीज के परिवार के एक सदस्य को भी यहॉं रहने की अनुमति है उनके भोजन आदि की व्यवस्था भी हॉस्पिटल की ओर से की जाती है। भोजन पौष्टिक हो इसका विशेष ध्यान रखा जाता है। भोजन पकाने में बायो गैस का इस्तेमाल किया जा रहा है। परिसर में उगाई गई आर्गेनिक सब्जियां ही भोजन में परोसी जाती हैं। परिसर स्थित गौशाला की गायों का दूध मरीजों को दिया जाता है। साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने बताया कि करीब सवा तीन एकड़ में फैले विराट हॉस्पिटल का पूरा परिसर इको फ्रेंडली है। यहाँ सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। हॉस्पिटल परिसर से निकला प्रदूषित पानी माँ नर्मदा में न मिले इसके लिये यहाँ दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाये गये हैं। इनसे साफ किया गया पानी परिसर में लगे पेड़-पौधों की सिंचाई और निस्तार में इस्तेमाल किया जाता है। अब उपचारात्मक सुविधाएं देने की तैयारी, बनेगा कैंसर अस्पताल कैंसर से जंग हार चुके मरीजों की जीवन के अंतिम समय में देखभाल करने वाले विराट हॉस्पिटल परिसर में अब कैंसर के नये मरीजों को उपचारात्मक सेवाएं देने 75 बिस्तरों का तीन मंजिला अस्पताल भी बनाया जा रहा है। विराट हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ अखिलेश गुमास्ता ने बताया कि अस्पताल का भूतल बनकर तैयार हो चुका है। दान दाताओं और कार्पोरेट्स के सहयोग से यहाँ ब्रेकी थेरेपी जैसी अत्याधुनिक मशीन लगाई गई है इससे कैंसर मरीजों का उपचार शुरू भी कर दिया गया है। भाभा एटमिक रिसर्च सेंटर से अनुमति मिलते ही यहाँ स्थापित कोबाल्ट मशीन से भी कैंसर मरीजों की रेडियो थेरेपी शुरू की जाएगी। सर्जरी की जरूरत वाले कैंसर मरीजों के लिये इस नये भवन में सर्जिकल वार्ड भी बनाया जा रहा है। विराट हॉस्पिटल की संस्थापक ज्ञानेश्वरी दीदी मूल रूप से हरियाणा के पिंजौर की रहने वाली हैं। अपने गुरु ब्रह्मर्षि विश्वात्मा बावराजी महाराज से दीक्षा लेने के बाद साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने समाजसेवा के लिए अलग-अलग शहरों में भ्रमण किया। नर्मदा नदी के किनारे बसा जबलपुर शहर पसंद आया और इसे ही उन्होंने अपना कर्मक्षेत्र बना लिया। साध्‍वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने बताया कि उनकी इच्छा एक ऐसा परिसर बनाने की थी, जहां जीवन के अंतिम समय में कैंसर मरीजों को पारिवारिक माहौल में रखकर इलाज और सेवा की जा सके।  

मातृभाषा को प्राथमिक शिक्षा का माध्यम बनाने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूलों को दिए निर्देश

नई दिल्ली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 22 मई को गाइडलाइंस जारी की है। बोर्ड ने स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए मातृभाषा को प्राथमिक शिक्षा का माध्यम बनाने का निर्देश जारी किया है। नई गाइडलाइन के अनुसार, अब 3 से 11 साल तक यानी प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 5वीं तक के बच्चों की पढ़ाई उनकी मातृभाषा, घरेलू भाषा या क्षेत्रीय भाषा में कराई जाएगी। सीबीएसई के इस फैसले की नींव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा स्कूल शिक्षा 2023 (NCFSE 2023) पर आधारित है, जो शुरुआती शिक्षा में मातृभाषा के उपयोग को सबसे ज्यादा प्रभावशाली मानते हैं। CBSE ने स्कूलों को दिए निर्देश सीबीएसई के 22 मई को जारी सर्कुलर में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी संबद्ध स्कूलों को छात्रों की मातृभाषा को जल्द से जल्द मैप करना होगा और इसके अनुसार शिक्षण व्यवस्था तैयार करनी होगी। जुलाई 2025 से यह नई नीति लागू हो सकती है।     प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक की शिक्षा को “फाउंडेशनल स्टेज” कहा गया है। इसमें पढ़ाई मातृभाषा या घरेलू भाषा में अनिवार्य की गई है।     कक्षा 3 से 5वीं तक के छात्रों के लिए भी मातृभाषा में पढ़ाई की सलाह दी गई है, हालांकि यहां माध्यम बदलने का विकल्प खुला रखा गया है। मातृभाषा में पढाई क्यों है जरूरी? सर्कुलर में कहा गया है कि छोटे बच्चे अपने घर की भाषा में ही सबसे तेजी से और गहराई से कॉन्सेप्ट को समझ पाते हैं। इसलिए शुरुआती शिक्षा में मातृभाषा का उपयोग बच्चे की सीखने की क्षमता, आत्मविश्वास और समझ को कई गुना बढ़ा सकता है। बता दें कि, UNESCO की मार्च 2024 में ‘लैंग्वेज मैटर-ग्लोबल गाइडेंस ऑन मल्टीलिंग्वल एजुकेशन’ रिपोर्ट में बताया गया कि दुनियाभर में 40% बच्चों और युवाओं के पास उनकी मदर-टंग में पढ़ने की सुविधा नहीं है। यही वजह है कि दुनिया के कई हिस्सों में बच्चे स्कूल तो जा रहे हैं लेकिन वो सिंपल टेक्स्ट नहीं पढ़ पाते और सिंपल मैथ्स सॉल्व नहीं कर पाते। इस रिपोर्ट में बताया गया कि, साल 2016 में 617 मिलियन बच्चे फाउंडेशनल लिट्रेसी और न्यूमरेसी नहीं सीख रहे थे। इनमें से दो तिहाई स्कूल जाते थे। कोविड महामारी से पहले लो और मिडल इनकम देशों के 57% 10-वर्षीय-बच्चे सिंपल टेक्स्ट नहीं पढ़ पा रहे थे। ये आंकड़ा कोविड महामारी के बाद 70% हो गया। राजस्थान के डुंगरपुर जिले में कारगर रहा एक्सपेरिमेंट राजस्थान के डुंगरपुर जिले में गुजरात में बोली जाने वाली वागड़ी भाषा काफी बोली जाती हैं। साल 2019 में यहां टीचर्स ने बच्चों को वागड़ी भाषा में ही पढ़ाना शुरू किया। इसके कुछ दिन बाद जब बच्चों का असेसमेंट लिया गया तो सामने आया कि उनकी रीडिंग स्किल्स पहले से काफी बेहतर थी। यूरोप और अफ्रीका में भी ऐसे ही नतीजे सामने आए हैं। इसके अलावा मातृभाषा में अगर बच्चे को बेसिक एजुकेशन दी जाए तो उसके लिए दूसरी भाषाएं सीखनी भी आसान हो जाती हैं। जल्द बनेगी NCF कार्यान्वयन समिति CBSE ने सभी स्कूलों को मई 2025 के अंत तक ‘एनसीएफ कार्यान्वयन समिति’ (NCF Implementation Committee0 गठित करने को कहा है। ये समिति छात्रों की मातृभाषा की पहचान करेगी और भाषा संसाधनों की मैपिंग करेगी। साथ ही, स्कूलों को लैंग्वेज मैपिंग एक्सरसाइज भी जल्द से जल्द पूरी करने के लिए कहा गया है।

आज से 28 मई तक नरसिंहपुर समागम में नवाचार, निवेश और रोजगार की संभावनाओं के खुलेंगे द्वार

भोपाल मध्यप्रदेश में “उद्योग एवं रोजगार वर्ष” के अंतर्गत “कृषि उद्योग समागम 2025” प्रदेश के कृषि क्षेत्र को उद्योग, नवाचार और निवेश से जोड़ने की ऐतिहासिक पहल बनकर सामने आया है। त्रि-दिवसीय समागम का शुभारंभ आज नरसिंहपुर में कृषि उपज मंडी के समीप उप राष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ करेंगे। इस अवसर पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादवसहित किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल, सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन कल्याण, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाहा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री राव उदय प्रताप सिंह, सूक्ष्म,लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप, स्थानीय सांसद, क्षेत्रीय विधायक, जनप्रतिनिधि, कृषि उद्यमी, निर्यातक समूह के प्रतिनिधि, कृषि नवाचार कंपनियां, एफपीओ, किसान संगठन और बड़ी संख्या में किसान भाई उपस्थित रहेंगे। समागम 28 मई तक चलेगा। समागम से खुलेंगे रोजगार के नये द्वार ‘कृषि उद्योग समागम 2025’ का उद्देश्य प्रदेश की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन से जोड़ते हुए निवेश, नवाचार और नौकरियों के नए द्वार खोलना है। मध्यप्रदेश अब गेहूं, दलहन, तिलहन, दुग्ध उत्पादन से लेकर एग्री-टेक तक कृषि से जुड़ी संभावनाओं का राष्ट्रीय केंद्र बनता जा रहा है। नरसिंहपुर की तुअर दाल को “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” योजना के तहत राज्य की पहचान के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है, जो स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने की दिशा में सार्थक कदम है। यह समागम नीतिगत घोषणाओं को जमीनी क्रियान्वयन और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में बदलने का सशक्त उदाहरण बनेगा। शुगर उद्यमियों से मुख्यमंत्री करेंगे संवाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गन्ना उत्पादक किसानों के हित में शुगर इंडस्ट्री निवेशकों से संवाद करेंगे। निवेशकों को नरसिंहपुर अंचल में शुगर इंडस्ट्रीज की स्थापना और उसके संबंध में राज्य शासन की प्रोत्साहन नीतियों पर चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को हितलाभ प्रदान करेंगे और कृषि निवेश से जुड़े समूहों से भी संवाद करेंगे। नरसिंहपुर अंचल को चीनी उद्योग का केंद्र बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम होगा। तकनीक व नवाचार का प्रदर्शन समागम स्थल पर एग्री-हॉर्टी एक्सपो के तहत आधुनिक कृषि यंत्र, ड्रोन, एआई आधारित उपकरण, पॉलीहाउस, जैविक व नैनो उर्वरक, दुग्ध एवं गौशाला उत्पाद, और जल कृषि मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। प्राकृतिक व जैविक खेती के लाइव मॉडल भी लगाए जाएंगे। खेती, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात से जुड़े विषयों पर व्याख्यान आयोजित किए जायेंगे। इसके अलावा समागम में विषय विशेषज्ञों द्वारा किसानों को तकनीकी ज्ञान व परामर्श प्रदान करने के लिये औषधीय फसलों, एफपीओ और निर्यातकों के लिए विशेष नेटवर्किंग सेशन व संगोष्ठियाँ आयोजित की जाएंगी। राज्य स्तरीय 90 स्टॉल समागम में आठ विभागों द्वारा कृषि नवाचारों पर आधारित 90 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे, जो किसानों को आधुनिक तकनीक व सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे।नरसिंहपुर जिले के किसानों के नवाचारों को वीडियो क्लिप्स के माध्यम से भी प्रदर्शित किया जाएगा।  

अब नहीं होगी UPI से ठगी, भारत सरकार के दूरसंचार विभाग ने FRI नाम से एक नया सिक्योरिटी सिस्टम किया लॉन्च

नई दिल्ली आज के समय में डिजिटल पेमेंट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। Paytm, Google Pay, PhonePe जैसे UPI ऐप्स के जरिए हम रोजाना कई लेनदेन करते हैं। लेकिन जैसे-जैसे डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है, जिससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम और ज्यादा सिक्योर हो सकेगा। सरकार की नई पहल भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने Financial Fraud Risk Indicator (FRI) नाम से एक नया सिक्योरिटी सिस्टम लॉन्च किया है। इसका मकसद है – ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाओं पर समय रहते रोक लगाना। इस सिस्टम की मदद से ऐसे मोबाइल नंबरों की पहचान की जाएगी जो किसी साइबर अपराध या धोखाधड़ी में शामिल हो सकते हैं। कैसे काम करता है FRI सिस्टम? FRI एक डिजिटल निगरानी प्रणाली है जो रियल टाइम में संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान करता है। जैसे ही कोई ऐसा नंबर बैंकिंग या UPI लेनदेन में शामिल होता है जो पहले से धोखाधड़ी में लिप्त हो सकता है, तो यह सिस्टम उस नंबर को तुरंत फ्लैग कर देता है। इसके बाद संबंधित बैंक या डिजिटल पेमेंट ऐप को अलर्ट भेज दिया जाता है ताकि उस नंबर से आगे किसी तरह का फ्रॉड न हो पाए। बैंक और UPI ऐप्स को मिलेगा सीधा फायदा इस नए सिस्टम का फायदा सिर्फ बैंकों तक सीमित नहीं है। Paytm, PhonePe, Google Pay और BHIM जैसे नॉन-बैंकिंग UPI ऐप्स को भी इससे मदद मिलेगी। ये ऐप्स अब उन मोबाइल नंबरों को पहले ही पहचान पाएंगे जो फ्रॉड में शामिल हो सकते हैं, जिससे लाखों यूजर्स सुरक्षित रहेंगे। FRI किन नंबरों को फ्लैग करेगा? FRI सिस्टम खासतौर पर उन मोबाइल नंबरों पर नजर रखेगा जिनमें निम्नलिखित गतिविधियां होंगी: जिन नंबरों का KYC पूरा नहीं हुआ है जो पहले से किसी धोखाधड़ी या फ्रॉड में इस्तेमाल हो चुके हैं जिन पर बार-बार नियमों का उल्लंघन हो रहा है जिन नंबरों से फर्जी कॉल या लिंक भेजे जा रहे हैं ऐसे नंबरों को पहचानकर या तो सतर्क किया जाएगा या जरूरत पड़ने पर ब्लॉक कर दिया जाएगा। FRI सिस्टम क्यों है जरूरी? पिछले कुछ वर्षों में UPI के जरिए फ्रॉड के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। कहीं किसी बुजुर्ग से OTP पूछकर पैसे उड़ा लिए जाते हैं, तो कहीं किसी फेक लिंक पर क्लिक कर यूजर्स का खाता खाली कर दिया जाता है। FRI जैसी प्रणाली की मदद से अब ऐसे मामलों में पहले से सतर्कता बरती जा सकेगी, जिससे धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी। यूजर्स के लिए जरूरी सलाह सरकार ने यह तो सुनिश्चित किया है कि सिस्टम लेवल पर सुरक्षा मजबूत की जाए, लेकिन आपकी सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। नीचे दिए गए सुझावों को अपनाकर आप भी सुरक्षित रह सकते हैं:     हमेशा अपने मोबाइल नंबर और UPI ऐप्स को वेरिफाई करें     अनजान नंबरों से आए कॉल या SMS पर यकीन न करें     किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले सोचें और जांचें     कोई भी संदिग्ध लेनदेन दिखे तो तुरंत अपने बैंक या ऐप कस्टमर केयर से संपर्क करें     ऐप्स को हमेशा अपडेटेड वर्जन में रखें     फर्जी ऑफर्स और इनाम जैसी बातों से सावधान रहें DoT की यह पहल डिजिटल इंडिया को एक सुरक्षित इकोसिस्टम की ओर ले जा रही है। इससे जहां आम लोगों का भरोसा डिजिटल लेनदेन पर बढ़ेगा, वहीं धोखेबाजों की गतिविधियों पर भी लगाम लगेगी। अगर आप भी UPI ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो यह जरूरी है कि आप खुद भी जागरूक और सतर्क रहें।  

देवी अहिल्या की जयंती पर भोपाल में बड़ा सम्मेलन, पीएम मोदी होंगे शामिल

इंदौर देवी अहिल्या की जयंती पर भोपाल में बड़ा सम्मेलन हो रहा है। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हो रहे है। प्रधानमंत्री उनकी जयंती पर 300 रुपये का एक विशेष सिक्का भी जारी कर रहा है। इसका नोटिफिकेशन हो चुका है देवी अहिल्या की 300 वीं जयंती 31 मई को आ रही है। इसे लेकर 28 मई से 31 मई तक शहर में अलग-अलग आयोजन होने जा रहे है। नगर निगम इस जयंती को इंदौर गौरव दिवस के रूप में बना रहा है। गौरव दिवस पर गायक जुबिन नौटियाल का एक शो भी इंदौर में होने जा रहा है। इसके अलावा अहिल्या बाई के जीवन पर आधारित एक नाटिका का मंचन भी इंदौर में होगा। देवी अहिल्या की जयंती पर भोपाल में बड़ा सम्मेलन हो रहा है। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हो रहे है। प्रधानमंत्री उनकी जयंती पर 300 रुपये का एक विशेष सिक्का भी जारी कर रहा है। इसका नोटिफिकेशन हो चुका है। इंदौर में उल्लेखनीय काम करने वालों को नगर निगम की तरफ से इंदौर गौरव सम्मान भी दिया जाएगा। इसके अलावा गौरव दिवस पर प्रमुख स्थानों पर आतिशबाजी भी होगी। मेट्रो का संचालन होगा शुरू देवी अहिल्या की जयंती पर इंदौर मेट्रो ट्रेन का संचालन भी होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर इसकी शुरुआत करेंगे। मेट्रो ट्रेन शहर के सात किलोमीटर हिस्से में चलेगी। शहर के अन्य सामाजिक संगठन व संस्थाएं भी अलग-अलग आयोजन 28 मई से करने जा रहे है। इंदौर के राजवाड़ा पर प्रदेश सरकार 20 मई को कैबिनेट बैठक भी कर चुकी है।  

1 जुलाई से दिल्ली में पुरानी गाड़ियों को तेल मिलना होगा बंद

 नई दिल्ली  दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए बड़े कदम उठा रही है। सरकार 1 जुलाई 2025 से दिल्ली में 10 साल से ज्यादा पुरानी डीजल गाड़ियों और 15 साल से पुरानी पेट्रोल वाहनों को पेट्रोल पंपो पर फ्यूल नहीं मिलेगा। यह फैसला कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के निर्देशों के तहत लिया गया है। आइए इसके मुख्य नियमों के बारे में जानते हैं। नियम की प्रमुख बातें CAQM के निर्देशों के तहत 10 साल से ज्यादा पुरानी डीजल वाहन और 15 साल से ज्यादा पुरानी पेट्रोल वाहनों को पेट्रोल पंप पर फ्यूल नहीं दिया जाएगा। इसकी निगरानी के लिए पेट्रोल पंपों पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों को लगाया जा रहा है, जो गाड़ियों की उम्र की पहचान करने के साथ ही उन्हें फ्यूल नहीं देने में मदद करेगा। इस नियम का उल्लंघन करने पर वाहन को जब्त किया जा सकता है और मोटर वाहन अधिनियम, 1989 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। क्या है मामला? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में दिल्ली में 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लगाया था। NGT ने 2014 में ऐसे वाहनों को सार्वजनिक स्थानों पर पार्क करने पर भी रोक लगाई थी। अब, ऐसी गाड़ियों को फ्यूल देने से रोकने के लिए यह नया कदम उठाया गया है। वहीं, इस कदम को दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए उठाया गया है। यह उन वाहन मालिकों के लिए एक चुनौती भी है, जिन्हें अब अपने पुराने वाहनों के ऑप्शन देखने होंगे। इस नियम के लागू होने से दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। ऐसे में वाहन मालिकों क्या करना होगा? 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों के मालिकों को अपनी पुरानी गाड़ी को स्क्रैप करने के लिए आधिकारिक स्क्रैपिंग सेंटर्स से संपर्क करना होगा। वहीं, अगर आप अपनी गाड़ी को दिल्ली-एनसीआर से बाहर लेकर जाना चाहते हैं, तो उसके लिए आपको NOC लेना होगा। क्या है नियम? दरअसल, अप्रैल 2025 में ‘कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट’ (CAQM) ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि 1 जुलाई से सभी ‘एंड ऑफ लाइफ’ (EoL) यानी तय उम्र पार कर चुकी गाड़ियों को फ्यूल देना बंद किया जाए. इसमें डीजल गाड़ियों के लिए 10 साल और पेट्रोल गाड़ियों के लिए 15 साल की समयसीमा तय की गई है. कैमरे की भूमिका ANPR कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट पढ़कर उसकी उम्र की पहचान करेंगे. अगर कोई गाड़ी तय समय सीमा से ज्यादा पुरानी पाई गई, तो उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा. आगे क्या होगा? – पुरानी गाड़ियों के मालिकों को एनओसी लेना होगा या गाड़ी को स्क्रैप करना होगा. – मोटर व्हीकल एक्ट, 1989 के तहत कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. परिवहन विभाग ने एक सार्वजनिक सूचना में कहा है कि अगर कोई वाहन कैमरे से या किसी अन्य निगरानी प्रणाली से पुराने वाहन के रूप में चिह्नित होता है, तो उसे फ्यूल नहीं मिलेगा. इसके अलावा वाहन मालिक को या तो उस गाड़ी एनओसी लेना होगा. कैमरा इंस्टॉलेशन की स्थिति अब तक लगभग सभी पेट्रोल और सीएनजी पंपों पर कैमरे लगाए जा चुके हैं. सिर्फ 10-15 पंप ही बचे हैं, जहां ये काम बाकी है. दिल्ली में लगभग 400 पेट्रोल पंप और 160 सीएनजी स्टेशन हैं.

पश्चिम रेलवे ने लिया फैसला, अब रेलवे चलाएगा सुपरफास्‍ट तेजस स्‍पेशल ट्रेन

नई दिल्ली भारतीय रेलवे मुंबई सेंट्रल-राजकोट और मुंबई सेंट्रल-गांधीधाम के बीच सुपरफास्ट तेजस स्‍पेशल ट्रेनें चलाने जा रहा है. यात्रियों की सुविधा के लिए और खासतौर से गर्मी के मौसम में यात्रा की मांग को पूरा करने के लिए पश्चिम रेलवे ने ये फैसला लिया है. इसके अलावा, यात्रियों की मांग को पूरा करने के लिए पश्चिम रेलवे ने स्‍पेशल किराए पर दो जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के फेरे भी बढ़ाए हैं. 1. ट्रेन सं. 09005/09006 मुंबई सेंट्रल – राजकोट तेजस सुपरफास्ट द्वि-साप्ताहिक विशेष [18 यात्राएं] ट्रेन नंबर 09005 मुंबई सेंट्रल-राजकोट स्पेशल हर बुधवार और शुक्रवार को मुंबई सेंट्रल से 23.20 बजे रवाना होगी और अगले दिन 11.45 बजे राजकोट पहुंचेगी. यह ट्रेन 30 मई से 27 जून, 2025 तक चलेगी. इसी तरह, ट्रेन नंबर 09006 राजकोट-मुंबई सेंट्रल स्पेशल हर गुरुवार और शनिवार को राजकोट से 18.30 बजे रवाना होगी और अगले दिन 07.30 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी. यह ट्रेन 31 मई से 28 जून, 2025 तक चलेगी. 2. ट्रेन नं. 09017/09018 मुंबई सेंट्रल – गांधीधाम तेजस सुपरफास्ट साप्ताहिक स्पेशल [10 ट्रिप] ट्रेन संख्या 09017 मुंबई सेंट्रल-गांधीधाम स्पेशल हर सोमवार को मुंबई सेंट्रल से 23.20 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन 12.55 बजे गांधीधाम पहुंचेगी. यह ट्रेन 02 जून से 30 जून, 2025 तक चलेगी. इसी तरह, ट्रेन संख्या 09018 गांधीधाम-मुंबई सेंट्रल स्पेशल हर मंगलवार को गांधीधाम से 18.55 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन 07.30 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी. यह ट्रेन 03 जून, 2025 से 01 जुलाई, 2025 तक चलेगी. कुछ ट्रेनों का विस्तार भी किया गया है 1. ट्रेन संख्या 09067 उधना-जयनगर अनारक्षित स्पेशल को 29 जून, 2025 तक विस्तारित किया गया है 2. ट्रेन संख्या 09068 जयनगर-उधना अनारक्षित स्पेशल को 30 जून, 2025 तक विस्तारित किया गया है 3. ट्रेन संख्या 09069 उधना-समस्तीपुर स्पेशल को 28 जून, 2025 तक विस्तारित किया गया है 4. ट्रेन संख्या 09070 समस्तीपुर-उधना स्पेशल को 30 जून, 2025 तक बढ़ा दिया गया है. ट्रेन संख्या 09005, 09006, 09017 और 09018 के लिए बुकिंग 25.05.2025 से शुरू होगी और ट्रेन संख्या 09069 की विस्तारित यात्राओं के लिए बुकिंग 27.05.2025 को सभी पीआरएस काउंटरों और आईआरसीटीसी वेबसाइट पर शुरू होगी.  

उज्जैन जिला पंचायत सीईओ द्वारा शुरू किया गया ‘तीन रंगों वाला हैंडपंप मॉडल’ अब पूरे प्रदेश में लागू होने जा रहा

उज्जैन जल संकट की समस्या से निजात पाने के लिए प्रदेश को उज्जैन से एक नई राह मिली है। यहां की जिला पंचायत सीईओ जयति सिंह द्वारा शुरू किया गया ‘तीन रंगों वाला हैंडपंप मॉडल’ अब पूरे प्रदेश में लागू होने जा रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरी ने इसे राज्यव्यापी नीति के तौर पर अपनाने के निर्देश दिए हैं। यह मॉडल महज रंगों का खेल नहीं है, बल्कि वर्षों से उपेक्षित हैंडपंपों की हालत बताने और सुधार की ठोस कार्ययोजना की नींव है। बंद हैंडपंपों को चालू कर देना हो या सीमित जल वाले पंपों की गहराई बढ़ाकर उन्हें उपयोगी बनाना, यह सब अब रंग देखकर तय हो रहा है। नवाचार के सकारात्मक परिणामों से ग्रामीण बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि ये नवाचार पूरे राज्य के लिए एक मिसाल है।   जल संकट समाधान की ओर तीन रंगों का चमत्कार जयति सिंह ने मार्च-अप्रैल 2025 के बीच ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के सहयोग से जिले के शासकीय हैंडपंपों की जियो टैगिंग करवाई। इसके बाद इन सभी को तीन रंगों में श्रेणीबद्ध किया। हरा हैंडपंप, जिनमें सालभर जल उपलब्ध रहता है। पीला हैंडपंप जिनमें गर्मी के महीनों में जल स्तर घटता है और सुधार की जरूरत होती है। लाल हैंडपंप जो पूरी तरह बंद हो चुके हैं और जिन्हें रिचार्ज या अन्य तकनीकी हस्तक्षेप की आवश्यकता है। अब विभाग इन्हीं रंगों के आधार पर मरम्मत, गहराई बढ़ाने, जल रिचार्ज जैसी जरूरी कार्यवाही कर रहा है। यह मॉडल जलप्रबंधन को सिर्फ वैज्ञानिक ही नहीं, व्यावहारिक भी बना रहा है।   9440 हैंडपंपों पर सफलता, अब पूरे प्रदेश में विस्तार उज्जैन जिले की 609 पंचायतों में 1101 गांव हैं, जिनमें 9440 हैंडपंप हैं। इनमें 8500 चालू और 940 बंद हालात में हैं। पहले इनमें से किसमें पानी है, किसमें नहीं, इसका कोई व्यवस्थित रिकार्ड नहीं होता था, लेकिन अब रंगीन कोडिंग के कारण न केवल ग्रामीणों को जानकारी मिल रही है, बल्कि प्रशासनिक मानिटरिंग भी आसान हो गई है। जियो टैगिंग और गूगल अर्थ आधारित निगरानी से प्रत्येक हैंडपंप का यूनिक कोड तैयार किया गया है। इससे रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो गई है। जलस्तर, उपयोगिता और सुधार की ज़रूरत जैसी सूचनाएं अब एक क्लिक पर उपलब्ध हैं। रिपोर्ट के अनुसार 6500 हैंडपंप हरे श्रेणी के, दो हजार हैंडपंर पीले श्रेणी के और 940 हैंडपंप लाल श्रेणी के पाए गए हैं। जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने की ठोस कार्ययोजना पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने शोक पिट, वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, परकोलेशन टैंक और कुआं रिचार्ज जैसे उपायों को भी अपनाया है। खासतौर पर पीले रंग वाले हैंडपंप, जो गर्मियों में सूखने लगते हैं, उनके पास जलस्रोत पुनर्भरण कार्य तेजी से चल रहे हैं। इस मॉडल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह समस्या की पहचान से लेकर समाधान तक की एक पूर्ण श्रृंखला बनाता है- मूल्यांकन, वर्गीकरण, सुधार और मॉनिटरिंग। कंट्रोल रूम से 24 घंटे में निवारण ग्रामीण क्षेत्रों में जल से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए जिला और जनपद स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, जहां नल-जल और हैंडपंप से जुड़ी शिकायतों का 24 घंटे के भीतर समाधान किया जा रहा है।

एक से नौ जून तक कैंसल रहेंगी 18 ट्रेनें, चिरमिरी–रीवा एक्सप्रेस तीन, पांच एवं सात जून को कैंसल रहेगी

रायपुर एक जून से नौ जून तक तकरीबन 18 ट्रेनें रद रहेंगी। ट्रेन रद होने की वजह से हजारों यात्रियों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ेगी। आए दिन रेल यात्रा में लोगों को राहत मिलने के बजाय ट्रेन रद होने की समस्या झेलनी पड़ रही है। बिलासपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले झलवारा स्टेशन में अधोसंरचना विकास के लिए नान-इंटरलाकिंग कार्य किया जाएगा। इसकी वजह से 18 ट्रेने रद रहेंगी और दो ट्रेनों का मार्ग परिवर्तन किया गया है। इस कार्य के तहत कटनी ग्रेड सेपरेटर लाइन (कटनी-मुड़वारा से) और सिंगरौली दिशा की ओर टाइ-लाइन की कनेक्टिविटी को इरकोन के माध्यम से जोड़ा जाएगा। कार्य की वजह से एक से नौ जून के बीच रेल परिचालन पर असर पड़ेगा।   ये ट्रेनें रहेंगी कैंसल 1. ट्रेन नंबर 18236 बिलासपुर- भोपाल एक्सप्रेस एक से सात जून तक रद्द रहेगी। 2. 18235 भोपाल – बिलासपुर एक्सप्रेस तीन से नौ जून तक रद्द रहेगी। 3. 11265 जबलपुर – अम्बिकापुर एक्सप्रेस दो से सात जून तक रद्द रहेगी। 4. 11266 अम्बिकापुर – जबलपुर एक्सप्रेस तीन से आठ जून तक रद्द रहेगी। 5. 11751 रीवा – चिरमिरी एक्सप्रेस : दो, चार एवं छः जून को रद रहेगी। 6. 11752 चिरमिरी – रीवा एक्सप्रेस तीन, पांच एवं सात जून को रद रहेगी। 7. 12535 लखनऊ – रायपुर एक्सप्रेस दो एवं पांच जून को रद रहेगी। 8. 12536 रायपुर – लखनऊ एक्सप्रेस तीन एवं छः जून को रद रहेगी। 9. 22867 दुर्ग – निजामुद्दीन एक्सप्रेस तीन एवं छ जून को रद रहेगी। 10. 22868 निजामुद्दीन – दुर्ग एक्सप्रेस चार एवं सात जून को रद रहेगी। 11. 18213 दुर्ग – अजमेर एक्सप्रेस एक जून को रद रहेगी। 12. 18214 अजमेर – दुर्ग एक्सप्रेस दो जून को रद रहेगी। 13. 18205 दुर्ग – नवतनवा एक्सप्रेस पांच जून को रद रहेगी। 14. 18206 नवतनवा – दुर्ग एक्सप्रेस सात जून को रद रहेगी। 15. 51755 चिरमिरी – अनुपपुर पैसेंजर तीन, पांच और सात जून को रद रहेगी। 16. 51756 अनुपपुर – चिरमिरी पैसेंजर तीन, पांच और सात जून को रद रहेगी। 17. ट्रेन नंबर 61601 कटनी – चिरमिरी पैसेंजर दो और सात जून को रद रहेगी। 18. ट्रेन नंबर 61602 चिरमिरी – कटनी पैसेंजर तीन और आठ जून तक रद रहेगी। ये ट्रेनें परिवर्तित मार्ग से चलेंगी     ट्रेन नंबर 15231 बरौनी–गोंदिया एक्सप्रेस दो से छ जून तक परिवर्तित मार्ग बरौनी–कटनी–जबलपुर–नैनपुर–बालाघाट–गोंदिया होते हुए चलेगी।     ट्रेन नंबर 15232 गोंदिया–बरौनी एक्सप्रेस दो से छ जून तक परिवर्तित मार्ग गोंदिया–बालाघाट–नैनपुर–जबलपुर–कटनी–बरौनी होते हुए चलेगी।

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