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पंजाब ने मुंबई को 7 विकेट से धोया,श्रेयस अय्यर की टीम टेबल टॉपर बनी

 जयपुर पंजाब किंग्स ने मुंबई इंडियंस को 2 विकेट से हरा दिया है. इस जीत के साथ पंजाब अब पॉइंट्स टेबल (IPL 2025 Points Table) में पहले स्थान पर पहुंच गई है. इस मैच में मुंबई ने पहले खेलते हुए 184 रन बनाए थे, जिसके जवाब में पंजाब ने 18वें ओवर में ही अपनी जीत सुनिश्चित कर ली. पंजाब किंग्स के लिए प्रियांश आर्य और जोश इंग्लिश ने अर्धशतकीय पारी खेली. पंजाब किंग्स को 185 रनों का लक्ष्य मिला था, जिसके जवाब में टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही क्योंकि प्रभसिमरन सिंह केवल 13 रन बनाकर आउट हो गए. उसके बाद प्रियांश आर्य और जोश इंग्लिश, दोनों MI के गेंदबाजों पर कहर बनकर टूटे. प्रियांश और इंग्लिश के बीच 109 रनों की विशाल साझेदारी हुई, इस बीच 15वें ओवर में प्रियांश 62 रन बनाकर आउट हो गए. उन्होंने 62 रन की पारी में 9 चौके और 2 छक्के लगाए. जोश इंग्लिश दूसरे छोर से डटे रहे और 42 गेंद में 73 रनों की शानदार पारी खेली. ऐसी रही पंजाब की बल्लेबाजी 185 रनों के जवाब में उतरी पंजाब की शुरुआत अच्छी नहीं रही. पांचवे ओवर में बुमराह ने प्रभसिमरन को चलता किया. प्रभसिमरन के बल्ले से 13 रन ही आए. लेकिन इसके बाद प्रियांश आर्य और जोस इंग्लिस के बीच अच्छी साझेदारी हुई. दोनों ने 9वें ओवर में टीम का स्कोर 80 के पार पहुंचा दिया. 10 ओवर के बाद मुंबई का स्कोर 90-1 है. प्रियांश आर्य और जोस इंग्लिस दोनों ने ही तूफानी फिफ्टी जमाई. लेकिन 14वें ओवर में प्रियांश आर्य 62 रन बनाकर आउट हो गए. लेकिन इंग्लिस दूसरे छोर पर टिके रहे. श्रेयस अय्यर ने भी उनका बखूबी साथ दिया. इंग्लिस का विकेट 18वें ओवर में गिरा. इंग्लिस ने 42 गेंद में 73 रनों की शानदार पारी खेली. जब इंग्लिस आउट हुए तो पंजाब को जीत के लिए 15 गेंद में 14 रनों की दरकार थी. आखिरकार पंजाब ने ये मैच 7 विकेट से जीत लिया. गुजरात को पछाड़कर पंजाब अब अंक तालिका में टॉप पर पहुंच गई है. पंजाब के अब 14 मैच में 19 अंक हैं. जबकि गुजरात के 18 प्वाइंट हैं. ऐसे रही मुंबई की बल्लेबाजी पहले बल्लेबाजी करने के लिए उतरी मुंबई की शुरुआत बेहद शानदार रही. रोहित शर्मा और रेयान रिकेल्टन ने आतिशी अंदाज में पारी का आगाज किया. लेकिन छठे ओवर में मुंबई को पहला झटका लगा जब रेयान रिकेल्टन अपना विकेट गंवा बैठे. 45 के स्कोर पर मुंबई को ये झटका लगा. रेयान ने 27 रनों की पारी खेली. लेकिन इसके बाद सूर्यकुमार यादव और रोहित शर्मा में अच्छी साझेदारी हुई. 9 ओवर में मुंबई का स्कोर 79-1 था. लेकिन 10वें ओवर में मुंबई को दूसरा झटका लगा जब रोहित शर्मा 24 रन बनाकर आउट हो गए. इसके बाद 11वें ओवर में तिलक वर्मा भी आउट हो गए. तिलक ने केवल एक रन बनाया. वहीं, 13वें ओवर में विल जैक्स भी आउट हो गए. जैक्स ने 17 रन बनाए. वहीं, 17वें ओवर में हार्दिक पंड्या 26 रन बनाकर आउट हो गए. लेकिन इसके बाद सूर्या ने 33 गेंद में फिफ्टी जड़ दी. वहीं, नमन धीर ने भी शानदार अंदाज में बल्लेबाजी की. नमन ने 11 गेंद में 20 रन बनाए. इसके दम पर मुंबई ने पंजाब के सामने 185 रनों का लक्ष्य दिया है. 

गर्मियों की छुट्टी में बच्चों को वेद और रामायण के बारे में जानकारी के लिए लगेगी कार्यशाला : हाईकोर्ट ने लगाई मुहर

प्रयागराज प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद से संबद्ध स्कूलों में गर्मी की छुट्टियों के दौरान रामायण और वेद पर आधारित कार्यशालाओं के आयोजन का रास्ता साफ हो गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस पहल को सही ठहराते हुए देवरिया निवासी डॉ. चतुरानन ओझा की जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना कि याचिका दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होती है और याची खुद अपनी विधिक हैसियत स्थापित नहीं कर सका। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि याची यह स्पष्ट नहीं कर सका कि रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान, अयोध्या द्वारा जारी निर्देश उसके पास कैसे पहुंचे। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि इस प्रकार की याचिकाएं प्रशासनिक कार्यों में बाधा डालने के प्रयास के रूप में देखी जा सकती हैं। बता दें कि 5 मई 2025 को निदेशक, अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान ने प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को पत्र भेजकर 75 जिलों में 5 से 10 दिन की रामायण-वेद कार्यशाला आयोजित कराने के निर्देश दिए थे। इन कार्यशालाओं में रामलीला, क्ले मॉडलिंग, मुख सज्जा, वेदगान व सामान्य ज्ञान जैसे सत्र प्रस्तावित हैं। सरकारी अधिवक्ता राजीव कुमार सिंह ने याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि यह कार्यक्रम बच्चों में भारतीय संस्कृति, लोककला और अध्यात्म के प्रति रुचि विकसित करने का एक प्रयास है। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें किसी प्रकार की बाध्यता नहीं है और अभिभावकों की सहमति से ही बच्चे प्रतिभाग करेंगे। याची ने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता व जागरूक नागरिक बताया। संविधान के अनुच्छेद 51ए (एच) का जिक्र करते हुए कहा कि रामायण कार्यशाला वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर हमला है। यह न केवल संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है बल्कि जातिगत, लैंगिक भेदभाव को बढ़ावा देने वाली कार्यशाला है। धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान की पहचान है। लिहाजा, स्कूलों में धार्मिक कार्यशाला का आयोजन नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी कार्यशाला के जरिए बच्चों में सांस्कृतिक, संस्कार व कला के प्रति रुचि बढ़ाई जाएगी। बच्चों का नैतिक विकास होगा। प्रभु श्री राम के आदर्शों से नई पीढ़ी परिचित होगी। कोर्ट ने याचिक खारिज कर दी। साथ ही कहा कि याची अपनी विधिक हैसियत साबित करने में विफल रहा। साथ ही याची यह भी नहीं बता सका कि अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान, अयोध्या का आलोच्य आदेश उसे कैसे मिला है।

याचिका एवं अभ्यावेदन समिति की बैठक में शामिल हुए विधायक

आष्टा  आष्टा विधायक श्री गोपालसिंह इंजीनियर आज मप्र विधानसभा भवन के कक्ष क्र 6 में आयोजित याचिका एवं अभ्यावेदन समिति की बैठक में शामिल हुए । बैठक में अध्यक्ष एवं सभी सदस्यो के सामने रखे गये प्रस्तावों,आवेदनों का सभी ने बारीकी से परीक्षण कर चर्चा की एवं सम्बंधित विभाग प्रमुख से उसको लेकर किये कार्य एवं लिये निर्णयों की जानकारी ली एवं समीक्षा कर निर्देश दिये ।

अमेरिकी अधिकारियों का एक दल आएगा भारत , अंतरिम व्यापार समझौते पर होगी बातचीत

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते पर अगले दौर की चर्चा के लिए अमेरिकी अधिकारियों का एक दल आने वाले हफ्तों में भारत का दौरा कर सकता है। एक सूत्र के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों की यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और अमेरिका 9 जुलाई से पहले एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति बना सकते हैं। इस बातचीत में नई दिल्ली घरेलू वस्तुओं पर 26 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ से पूर्ण छूट की मांग कर रहा है। एक सूत्र ने बताया, “व्यापार वार्ता के लिए अमेरिकी टीम के भारत आने की उम्मीद है। वार्ता तेज गति से आगे बढ़ रही है।” भारत के मुख्य वार्ताकार, वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल ने पिछले सप्ताह अपनी चार दिवसीय वाशिंगटन यात्रा पूरी की। उन्होंने प्रस्तावित समझौते पर अपने अमेरिकी समकक्ष के साथ बातचीत की। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी व्यापार वार्ता को गति देने के लिए पिछले सप्ताह वाशिंगटन में थे। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक से दो बार मुलाकात की। अमेरिका ने 2 अप्रैल को भारतीय वस्तुओं पर 26 प्रतिशत का अतिरिक्त पारस्परिक शुल्क लगाया था, लेकिन बाद में इसे 90 दिनों के लिए 9 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया। हालांकि, भारतीय वस्तुओं पर अभी भी अमेरिका द्वारा लगाया गया 10 प्रतिशत बेसलाइन शुल्क लागू है।

गुना जिले में 1855 सरकारी स्कूल, इनमें से सिर्फ 241 स्कूलों ने ही शिक्षकों की तस्वीर जानकारी के साथ प्रदर्शित की

गुना फर्जी शिक्षकों की स्कूलों में एंट्री रोकने के लिए शासन के 13 माह पुराने आदेश की जिले में धज्जियां उड़ाई जा रही है। प्रत्येक स्कूल के बाहर वहां पदस्थ नियमित शिक्षकों की तस्वीर प्रदर्शित करने के निर्देश शासन ने दिए थे। लेकिन जिले के 1613 स्कूलों में इस आदेश का पालन नहीं हुआ। आखिर यहां के शिक्षकों को अपना चेहरा दिखाने में किस बात का संकोच है? दरअसल, कई स्थानों पर वहां पदस्थ शिक्षकों की बजाय उनके रिश्तेदार या अन्य व्यक्तियों को ठेके पर रख लेने की शिकायत मिलने के बाद सरकारी स्तर पर यह आदेश जारी हुआ था कि सभी स्कूलों में वहां पदस्थ शिक्षकों के फोटो लगाए जाएं। गुना जिले में 1855 सरकारी स्कूल हैं। इनमें से सिर्फ 241 स्कूलों ने ही शिक्षकों की तस्वीर जानकारी के साथ प्रदर्शित की है। इसमें भी ज्यादातर हाईस्कूल और हायर सेकंडरी शामिल हैं। वहीं 1613 स्कूलों ने तो शिक्षकों की तस्वीर स्कूल में लगाई ही नहीं। 3000 से 5000 रुपए में भाड़े पर रखे शिक्षक सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षक मोटा वेतन लेते हैं, लेकिन कई शिक्षक अपनी जगह किसी दूसरे पढ़े-लिखे व्यक्ति को 3000 से 5000 रुपए तक में किराए पर बच्चों को पढ़ाने के लिए रख लेते हैं। पूर्व में ऐसे शिक्षकों को सिर्फ नोटिस देकर शिक्षा अधिकारियों ने मामले को रफादफा कर दिया गया था। वर्तमान में एक सहायक शिक्षक का वेतन भी कम से कम 75 हजार रुपए है। कई शिक्षक ऐसे हैं, जिनके दूसरे कारोबार भी चलते हैं। या अपने रुतबे के कारण वे अपनी जगह किसी अन्य को स्कूल में पढ़ाने भेज देते हैं। नियमित शिक्षकों की जगह भाड़े के शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे थे शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल प्रदेश के कई जिलों के स्कूलों की जांच कराई गई थी तब नियमित शिक्षकों की जगह एवज या भाड़े के शिक्षक पढ़ाते हुए मिले थे। गुना में भी कुछ स्कूलों में फर्जी शिक्षक मिले थे। इस खुलासे के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी स्कूलों को आदेश दिए थे कि स्कूलों में पदस्थ प्रत्येक शिक्षकों का नाम, मोबाइल नंबर और विषयवार जानकारी के साथ उनका फोटो प्रदर्शित किया जाए। ताकि छात्र-छात्रा और उनके अभिभावक शिक्षकों के बारे में जानकारी हो। अगर उनकी जगह कोई दूसरा शिक्षक स्कूल में पढ़ाने आए तो पहचान हो सके। भाड़े के शिक्षकों को सबक सिखाने और उनकी पहचान को लेकर यह व्यवस्था लागू की गई है। लेकिन जिले में अभी तक यह फर्जीवाड़ा नहीं रुक पाए। लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश को जारी हुए 13 माह बीत चुके हैं। लेकिन जिले में 87 फीसदी सरकारी स्कूलों ने इसका पालन नहीं किया। शिक्षा विभाग के अफसर अक्सर स्कूलों का निरीक्षण करते हैं, लेकिन इस तरफ उन्होंने भी ध्यान नहीं दिया। जिला शिक्षा अधिकारी अब इस बारे में कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं। नियमों का पालन करवाएंगे डीईओ चंद्रशेखर सिसौदिया ने बताया स्कूलों में पदस्थ शिक्षक की तस्वीर, उनकी योग्यता एवं विषयवार जानकारी नोटिस बोर्ड या फिर स्कूल के बाहर प्रदर्शित करनी है। पूर्व में लोकशिक्षण संचालनालय ने आदेश जारी किए थे। ज्यादातर स्कूलों ने जानकारी प्रदर्शित नहीं की है। आपके द्वारा जानकारी संज्ञान में लाई गई है, हम इसका पालन कराएंगे।  

SC ने यौन शिक्षा में सुधार और POCSO मामलों की रियल-टाइम ट्रैकिंग के सुझावों पर केंद्र सरकार से राय मांगी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई को सरकार को निर्देश दिया कि वह बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों से निपटने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर POCSO कोर्ट बनाए। कोर्ट ने कहा कि कई राज्यों ने स्पेशल POCSO कोर्ट बनाए हैं, लेकिन तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में केस पेंडेंसी के चलते और ज्यादा कोर्ट बनाए जाने की जरूरत है। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के मामलों के लिए स्पेशल कोर्ट कम होने के कारण मामले की जांच करने के लिए डेडलाइन का पालन नहीं हो पा रहा है। कोर्ट ने पॉक्सो केस के लिए निर्धारित डेडलाइन के अंदर ट्रायल पूरा करने के अलावा निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट और एमिकस क्यूरी वी गिरी और सीनियर एडवोकेट उत्तरा बब्बर को POCSO कोर्ट की स्थिति पर राज्यवार डीटेल देने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उसने “बाल बलात्कार की घटनाओं की संख्या में खतरनाक वृद्धि” को हाइलाइट करते हुए एक्शन लिया था। कोर्ट ने राज्य सरकारों से उन जिलों में दो कोर्ट बनाने को कहा जहां POCSO अधिनियम के तहत बाल शोषण के पेंडिंग मामलों की संख्या 300 से ज्यादा है। कोर्ट ने कहा POCSO एक्ट के तहत 100 से ज्यादा FIR वाले हर जिले में एक कोर्ट बनाने के जुलाई 2019 के निर्देश का मतलब था कि डेजिगनेटेड कोर्ट केवल कानून के तहत ऐसे मामलों से निपटेगा। पहले जानिए क्या है पॉक्सो एक्ट भारत में बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए पॉक्सो एक्ट, 2012। अगर कोई 18 साल से कम उम्र का यौन शोषण करता है तो उसे इस कानून के तहत सजा मिलती है। बच्चों को गलत तरीके से छूना, उन्हें गलत तरीके से छूने के लिए कहना, या उनके साथ यौन संबंध बनाना, बच्चों को अश्लील चीजें दिखाना, उन्हें वेश्यावृत्ति या पोर्नोग्राफी में शामिल करना, या इंटरनेट पर उनसे गलत बातें करना भी बाल यौन शोषण (CSA) है। पॉक्सो एक्ट के तहत पुरुष और महिला आरोपी दोनों के खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट का हाल बहरहाल, इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्श फंड (ICPF) की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में CSA के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन इन मामलों को निपटाने की रफ्तार बहुत धीमी है। इसी वजह से भारत सरकार ने अक्टूबर 2019 में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने योजना शुरू की। इसके तहत, देश भर में 1,023 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) बनाए गए हैं। ये कोर्ट CSA के मामलों की तेजी से सुनवाई करते हैं। भारत के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में FTSC को 1 अप्रैल, 2023 से 31 मार्च, 2026 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इस पर कुल 1952.23 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (ICPF) की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में पॉक्सो एक्ट के तहत मामलों को निपटाने की क्या स्थिति है। पूरे देश में, 2022 में सिर्फ 3% मामलों में ही दोषियों को सजा मिली। मतलब 2,68,038 मामलों में से सिर्फ 8,909 मामलों में ही आरोपियों को दोषी पाया गया। हर FTSC ने 2022 में औसतन सिर्फ 28 पॉक्सो मामलों का निपटारा किया। 2022 में, हर पॉक्सो मामले को निपटाने में औसतन 2.73 लाख रुपये खर्च हुए। इसी तरह, हर सफल सजायाफ्ता पॉक्सो मामले पर सरकारी खजाने से औसतन 8.83 लाख रुपये खर्च हुए। अगर कोई नया मामला नहीं आता है, तो भी भारत को 31 जनवरी, 2023 तक लंबित पॉक्सो मामलों के बैकलॉग को खत्म करने में लगभग नौ (9) साल लगेंगे। अभी 2.43 लाख पॉक्सो मामले पेंडिंग हैं। इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि हर जिले में स्थिति का दोबारा आकलन किया जाए और जरूरत पड़ने पर नए ई-पॉक्सो कोर्ट बनाए जाएं। योजना के अनुसार, सभी 1,023 स्वीकृत फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट को तुरंत पूरी तरह से चालू किया जाना चाहिए। ट्रायल की समय-सीमा तय की जाए रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़ित के लिए न्याय की लड़ाई लोअर कोर्ट में सजा होने के बाद भी खत्म नहीं होती है। यह लड़ाई तब तक जारी रहती है जब तक कि अपील की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। इसलिए, अपील/ट्रायल के समय को तय किया जाना चाहिए ताकि जल्द न्याय मिल सके। इस संबंध में नीतियां बनाई जानी चाहिए, और हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर समयबद्ध ढांचे बनाए जाने चाहिए ताकि लंबित पॉक्सो मामलों का निपटारा तेजी से हो सके। विशेष अदालतें स्थापित करने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने 16 दिसंबर, 2019 को एक विस्तृत आदेश पारित किया था। इसमें राज्य सरकारों को पॉक्सो एक्ट, 2012 के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने के निर्देश दिए गए थे। यह 25 जुलाई, 2019 के आदेश के क्रम में था, जिसमें सभी राज्यों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि हर जिले में 60 दिनों के भीतर एक विशेष पॉक्सो अदालत स्थापित की जाए, जिसमें 100 से अधिक पॉक्सो मामले लंबित हैं। कानून और न्याय मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर कार्रवाई की और जनवरी 2020 में बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के मामलों के त्वरित निपटान के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) की योजना लेकर आया. इस योजना में FY 2021-22 के अंत तक पूरे भारत में बलात्कार और पॉक्सो मामलों के त्वरित निपटान के लिए 389 एक्सक्लूसिव पॉक्सो कोर्ट (EPC) सहित 1,023 FTSC स्थापित करने की परिकल्पना की गई थी। इस विश्लेषण के माध्यम से, इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (ICPF) पॉक्सो एक्ट के तहत मामलों और शिकायतों के संबंध में भारत की स्थिति पर प्रकाश डालता है। इस व्यापक कानून के बनने के एक दशक बाद भी, पीड़ितों और उनके परिवारों की उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं, जिन्हें पहले के कानूनों द्वारा पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया था। हालांकि, जिस गति से मामलों को निपटाया जा रहा है, वह बहुत निराशाजनक है। केस बैकलॉग की चौंकाने वाली स्थिति रिपोर्ट में केस बैकलॉग की एक चौंकाने वाली प्रवृत्ति का पता चला। … Read more

इजरायल ने दो महीने के भीतर गाजा पट्टी के 75 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा करने की योजना बनाई

यरुशलम  इजरायल ने दो महीने के भीतर गाजा पट्टी के 75 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा करने की योजना बनाई है। इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने  ये जानकारी दी है। इजरायली सेना इसके लिए बड़ा जमीनी हमला शुरू करने की तैयारी में है, जिसमें फिलिस्तीनी आबादी को गाजा में तीन छोटे क्षेत्रों में धकेल दिया जाएगा। अगर फिलिस्तीनी आतंकी समूह हमास बंधकों को छोड़ने के लिए सहमत नहीं होता है तो इस अभियान को जल्द शुरू किया जा सकता है। इन इलाकों में रहेगी आबादी जिन क्षेत्रों में फिलिस्तीनी आबादी को भेजा जाना है, उसमें दक्षिणी पट्टी के कट पर मावासी में नया सुरक्षित क्षेत्र है, जहां इजरायल ने पहले एक मानवीय क्षेत्र घोषित किया था। इसके अलावा मध्य गाजा का दीर अल-बलाह और नुसेरात में जमीन की एक पट्टी है। तीसरा क्षेत्र गाजा सिटी का केंद्र, जहां इस साल की शुरुआत में युद्ध विराम के दौरान कई फिलिस्तीनी वापस लौटे थे। 20 लाख आबादी रहेगी छोटे से हिस्से में इजरायली सेना के अनुसार, वर्तमान में मवासी क्षेत्र में करीप 700,000 फिलिस्तीनी रह रहे हैं, जबकि 3 से 3.5 लाख मध्य गाजा और गाजा शहर में करीब 10 लाख लोग हैं। इसका मतलब है कि जब आईडीएफ अपना जमीनी अभियान शुरू करेगी तो गाजा की 20 लाख आबादी को पट्टी के 25 फीसदी हिस्से में धकेल दिया जाएगा। कब्जे वाले हिस्से के लिए बना प्लान इसके बाद सेना गाजा के बाकी हिस्से पर कब्जा कर लेगी। हमास के बुनियादी ढांचे को हटा दिया जाएगा। अधिकांश इमारतों को ध्वस्त किया जाएगा और निकट भविष्य तक उस पर कब्जा बनाए रखा जाएगा। इस कब्जे वाले क्षेत्र में राफा, खान यूनिस और गाजा शहर के उत्तर में स्थित सभी शहर शामिल होंगे। इजरायल का हवाई हमला जारी इस बीच सोमवार को गाजा पट्टी में इजराइली हमलों में कम से कम 46 लोगों की मौत हो गई जिनमें से 31 लोग आश्रय स्थल के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे एक स्कूल में हुए हमले में मारे गए। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि लोग सो रहे थे तभी स्कूल पर हमला किया गया जिससे उनके सामान में आग लग गई। इजराइली सेना ने कहा कि उसने स्कूल से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे चरमपंथियों को निशाना बनाया। स्थानीय स्वास्थ्य मंत्रालय की आपातकालीन सेवा के प्रमुख फहमी अवाद ने बताया कि उत्तरी गाजा में स्कूल पर हुए हमले में 55 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं। इस बीच शिफा अस्पताल ने बताया कि सोमवार को एक मकान पर हुए हमले में एक ही परिवार के 15 लोग मारे गए जिनमें पांच महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। ऑनलाइन उपलब्ध फुटेज में बचावकर्मियों को जले हुए शवों को निकालते और आग बुझाने के लिए संघर्ष करते देखा जा सकता है।

नए बिजली कनेक्शन के लिए ऑनलाइन कंपनी की वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना होगा

भोपाल बिजली कनेक्शन लेने को लेकर नई खबर सामने आई है। बता दें कि सरकारी कार्यालयों को अब महज पांच रुपए में बिजली का नया कनेक्शन दिया जा रहा है। कंपनी अफसरों के अनुसार शासकीय, अर्धशासकीय विभागों तथा निगम मंडलों को महज पांच रुपए में नया बिजली कनेक्शन लेने के लिए मैदानी अफसरों को निर्देश दिए गए हैं। ये विभागों से समन्वय बनाएंगे।  एमपी के भोपाल शहर में नए कनेक्शन के लिए ऑनलाइन कंपनी की वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना होगा। कंपनी के वितरण केन्द्र जाकर, टोल फ्री नंबर 1912 पर कॉल करने के साथ एमपी ऑनलाइन- कॉमन सर्विस सेंटर से भी आवेदन कर सकते हैं। विकलांग का बिजली कनेक्शन काटा वहीं दूसरी ओर भीषण गर्मी के इस दौर में बिजली विभाग की अमानवीयता का मामला सामने आया है। कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला और कार्यकर्ता बिजली विभाग की इस कार्रवाई का विरोध करने चांदबड़ बिजली दफ्तर पहुंचे। अफसरों द्वारा गलती नहीं मानने पर कांग्रेस नेताओं ने जमकर हंगामा किया। शुक्ला ने बताया कि नरेला निवासरत पैरालिसिस की गंभीर बीमारी से पीड़ित मुनीर अहमद कच्चे मकान में रहते हैं। उन्हें अनाप-शनाप बिजली बिल भेजा गया। पर राशि को जमा नहीं किया तो बिजली कंपनी ने उनका कनेक्शन काट दिया और बिजली चोरी का प्रकरण भी बना दिया। पीड़ित परिवार भीषण गर्मी में बेतहाशा परेशान हो रहा था जिसकी सूचना मिलने पर दफ्तर जाकर इसकी शिकायत की गई। आरोप है कि बिजली कंपनी के अफसरों ने बात सुनने की बजाए पीड़ित को आरोपी बताना शुरु कर दिया जिस पर विवाद हो गया। व्हीलचेयर पर पीड़ित को लेकर पहुंचे कांग्रेस नेताओं ने मौके पर नारेबाजी की।

इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेसवे 713 किमी लंबा होगा, प्रोजेक्ट की लागत 15 हजार करोड़

 इंदौर छोटे शहर को बड़े शहरों से जोड़ने के लिए और  देश की रोड कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार लगातार सक्रिय है. अब तक भारत में कई बड़े एक्सप्रेसवे बनाए जा चुके हैं. वहीं भारतमाला परियोजना के तहत मध्यप्रदेश को दूसरे राज्य से जोड़ने के लिए एक प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है, जो जल्द पूरा होने जा रहा है. इंदौर से हैदराबाद को जोड़ने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 713 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है, जिससे हैदराबाद और इंदौर की दूरी महज़ कुछ ही घण्टे का हो जाएगा. 15 हजार करोड़ रुपए आएगा खर्च अधिकारियों के अनुसार, इंदौर-हैदराबाद के बीच बन रहे 713 किलोमीटर के एक्सप्रेस-वे में कई जगहों पर स्टेट हाईवे है, जिसे एनएचएआई के द्वारा नेशनल हाईवे की तरह ही बनाया जा रहा है. साथ ही यह कई स्टेट हाइवे और नेशनल हाईवे से जुड़ेगा. इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 15 हजार करोड़ रुपए है. अगर अभी देखा जाए, तो हैदराबाद से इंदौर की दूरी करीब 900 किलोमीटर की है. ये एक्सप्रेसवे बन जाने के बाद ये दूरी करीब 188 कम होकर 713 किलोमीटर की रह जाएगी. इसके चलते सिर्फ 10 घंटे के भीतर ही इंदौर से हैदराबाद पहुंचा जा सकेगा. इन शहरों से गुजरेगा एक्सप्रेस-वे यह हाईवे एमपी के इंदौर, बुरहानपुर और बड़वाह होते हुए मुक्तईनगर, जलगांव, अकोला, हिंगोली और नांदेड वहीं तेलंगाना के मंगलूर, रामसनपल्ली, संगारेड्डी होते हुए हैदराबाद तक जाएगा. इसके बन जाने के बाद लोकल व्यापार को लाभ मिलने वाला है. इस एक्सप्रेसवे की मदद से व्यापारी अपना सामान आसानी से बड़े शहरों तक पहुंचा सकेंगे.  

प्रदेश में पंचायतों में उपचुनाव से जुड़ी बड़ी खबर, 1 महीने में होगा यह काम, तैयारियां पूरी

भोपाल मध्य प्रदेश में पंचायत राज संस्थाओं में उपचुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं, जिन पंचायतों में उपचुनाव होना है, वहां हलचल जारी है, ऐसे में राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची का कार्यक्रम भी जारी कर दिया है. जिसमें इलेक्शन कमीशन की तरफ से कहा गया है कि 1 जनवरी 2025 को आधार मानकर नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएं, यानि 1 जनवरी 2025 से जो लोग 18 साल के होंगे उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा, जहां रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ग्राम पंचायतों में मतदाता सूची का आखिरी प्रकाशन करेंगे. ताकि उपचुनाव की स्थिति पर काम किया जा सके. आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार सभी रजिस्ट्रीकरण अधिकारी आज शाम तक अधिकारियों को प्रशिक्षण देने और शिफ्टिंग सूची के सत्यापन का कार्य करेंगे। इसके बाद मतदाता सूची तैयार किए जाने का काम शुरू होगा। इसके लिए जो भी कर्मचारी तैनात किए जाएंगे उन्हें आयोग द्वारा तय समय सीमा में मतदाता सूची में बदलाव कर देना होगा ताकि चुनाव कार्यक्रम तय किए जा सकें। ऐसे अपडेट होगी मतदाता सूची मतदाता सूची अपडेट के लिए 30 मई को शिफ्टिंग के साथ-साथ जांच और संशोधन के लिए  चेकलिस्ट रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को सौंपी जाएगी. फिर 5 जून को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन होगा, इस संबंध में मतदाताओं और जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी जाएगी, फिर 5 और 6 जून को स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित होगी, जिसमें दावे-आपत्तियां 5 से 11 जून तक ली जाएगी, फिर 17 जून तक दावे और आपत्तियों का निराकरण किया जाएगा. इसके बाद 20 जून को चेकलिस्ट तैयार होगी और 21 जून को वेण्डर भी उपलब्ध करा दिया जाएगा, जिसके बाद 23 जून को फोटो युक्त मतदाता सूची जारी कर दी जाएगी, जिसे 23 जून को ही निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया जाएगा. बता दें कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में पंचायतों में उपचुनाव की स्थिति बन रही है, ऐसे में निर्वाचन आयोग ने पंचायत उपचुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसलिए वोटर लिस्ट को अपडेट करने की प्रक्रिया निर्वाचन आयोग की तरफ से शुरू हो गई है. ऐसे चलेगा कार्यक्रम     मतदाता सूची बनाने वाले वेण्डर 30 मई को शिफ्टिंग, जांच और संशोधन के लिए चेकलिस्ट रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को देंगे।     दाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन 5 जून को किया जाएगा। इस संबंध में मतदाताओं तथा जनप्रतिनिधियों को जानकारी देने के लिए 5 और 6 जून को स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित की जाएंगी।     मतदाता सूची के संबंध में दावे-आपत्तियां 5 से 11 जून तक प्राप्त की जाएंगी।     दावे आपत्तियों का निराकरण 17 जून तक किया जाएगा। इसकी चेकलिस्ट 20 जून तक तैयार करके चेकलिस्ट में सुधार के बाद 21 जून को वेण्डर को उपलब्ध करा दिया जाएगा। फोटोयुक्त मतदाता सूची 23 जून तक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं वेण्डर द्वारा जनरेट की जाएगी। इसे 23 जून को ही वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।

जापान में चावल की कीमत में पिछले साल की तुलना में 98.4% तेजी आई

टोक्यो कभी अमेरिका की इकॉनमी के लिए मुश्किलें पैदा करने वाले जापान आज भारत से भी पिछड़ गया है। जापान को पछाड़कर भारत दुनिया की चौथी बड़ी इकॉनमी बन गया है। उधर जापान की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। देश में महंगाई ने कई साल का रेकॉर्ड तोड़ दिया है। अप्रैल में चावल की कीमत में पिछले साल की तुलना में 98.4% तेजी आई जो 1971 के बाद इसकी सबसे बड़ी मासिक उछाल है। मार्च में यह तेजी 92.1 फीसदी रही थी। इसी तरह एनर्जी की कीमत देश में 9.3% बढ़ गई। अप्रैल में देश में महंगाई 3.5% बढ़ी जो मार्च में 3.2 फीसदी बढ़ी थी। देश में लगातार पांचवें महीने महंगाई में तीन फीसदी से ज्यादा तेजी आई है। इस बीच पहली तिमाही में जापान की इकॉनमी में 0.7% गिरावट आई। 2024 की पहली तिमाही के बाद जापान की इकॉनमी में पहली बार गिरावट आई है। चावल जापान का मुख्य आहार है। लेकिन हाल में इसमें काफी तेजी आई है। इसके कई कारण हैं। 2023 में खराब मौसम के कारण चावल की पैदावार प्रभावित हुई। इस बीच देश में रेकॉर्ड पर्यटकों के आने से चावल की डिमांड बढ़ी है। इस बीच सरकार ने आपूर्ति बढ़ाने के लिए चावल की खेप बाजार में जारी की लेकिन इसका कोई असर देखने को नहीं मिला। जापान वर्सेज जर्मनी कुछ साल पहले जापान को पछाड़कर जर्मनी दुनिया की तीसरी बड़ी इकॉनमी बना था। लेकिन दोनों देशों की इकॉनमी में एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। बैंक ऑफ जापान का पॉलिसी रेट अभी 0.50 परसेंट है और जापान का डेट-टु-जीडीपी रेश्यो 250% है। उधर यूरोप की सबसे बड़ी इकॉनमी जर्मनी का पॉलिसी रेट 2.25 फीसदी और डेट-टु-जीडीपी रेश्यो 62 फीसदी है। यानी जर्मनी की पॉलिसी रेट जापान से 4.5 गुना है जबकि डेट-टु-जीडीपी रेश्यो एक चौथाई है। दोनों देशों के 30 साल की मैच्योरिटी अवधि वाले सरकारी बॉन्ड्स पर यील्ड 3.1 फीसदी है। 1990 के दशक से पहले जापान की इकॉनमी रॉकेट की स्पीड से दौड़ रही थी और माना जा रहा था कि वह अमेरिका को पछाड़ देगा। लेकिन उसके बाद वह ऐसे गर्त में फंसी कि उसे बाहर निकलने में कई दशक लग गए। 25 साल से भी अधिक समय तक देश डिफ्लेशन में की स्थिति रही। हालात ऐसी हो गई है कि देश के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने हाल में कहा कि जापान की हालत ग्रीस से भी बदतर हो गई है। ग्रीस पिछले कई साल से आर्थिक संकट से जूझ रहा है।  

बीजेपी का ट्रेनिंग कैंप पचमढ़ी में लगेगा, जेपी नड्डा और अमित शाह भी होंगे शामिल

पचमढ़ी मध्य प्रदेश के नेताओं के द्वारा हाल में की गई बयानबाजी के बाद पार्टी ने नेताओं को ट्रेनिंग देने का फैसला किया। 14 से 16 जून तक भारतीय जनता पार्टी का स्पेशल प्रशिक्षण शिविर आयोजित होगा। यह ट्रेनिंग कैंप हिलस्टेशन पचमढ़ी में लगेगा। कार्यक्रम में राज्य के सभी बीजेपी विधायक, मंत्री, लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को अनिवार्य रूप से शामिल होना है। जेपी नड्डा और अमित शाह भी पहुंचेंगे     तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा करेंगे। ट्रेनिंग कैंप के समापन सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मौजूद रहेंगे। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में यह शिविर बीजेपी नेताओं को अनुशासन का पाठ सिखाने का प्रयास माना जा रहा है। विधायकों, सांसदों को 5 साल में दिया जाता है प्रशिक्षण विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बाद नवनिर्वाचित विधायकों, सांसदों को भाजपा 5 साल में एक बार प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम आयोजित करती है। यह ट्रेनिंग कैंप इस साल की शुरुआत में होना था। लेकिन संगठन चुनाव के चलते इसे आगे बढ़ा दिया गया था। लगातार आए विवादित बयान, प्रशिक्षण का एक कारण ये भी 11 मई को जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान दिया। इसके बाद डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, विधायक नरेंद्र प्रजापति के बयानों से भी विवाद बढ़ा। ऐसे में लगातार आ रहे विवादित बयानों के बाद पार्टी अब सभी विधायकों और सांसदों को प्रशिक्षण देने जा रही है। भाजपा के संविधान के अनुसार हर पांच साल में विधायकों और सांसदों को प्रशिक्षण दिया जाता है। यह प्रक्रिया चुनाव के बाद नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों यानी सांसद, विधायकों को दी जाती है। ट्रेनिंग का उद्देश्य उन्हें पार्टी की विचारधारा, कार्यशैली और जनहित के मुद्दों को समझाना होता है। साल की शुरुआत में यह ट्रेनिंग प्रस्तावित थी, लेकिन संगठन चुनाव के चलते इसे आगे बढ़ाना पड़ा था। अब परिस्थिति अनुकूल होने पर इसे पचमढ़ी में आयोजित किया जा रहा है। विवादित बयानों के बाद पार्टी ने चुनी ये रणनीति हाल के दिनों में पार्टी नेताओं के कई विवादित बयानों ने संगठन की छवि पर असर डाला है। 11 मई को जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह का बयान सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादों में रहा। इसके बाद डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और विधायक नरेंद्र प्रजापति के बयानों से स्थिति और गंभीर हो गई। इन घटनाओं को देखते हुए पार्टी ने तय किया है कि सभी विधायकों और सांसदों को एक बार फिर अनुशासन, संवेदनशीलता और जनता के बीच बयानबाजी को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। पीएम ने भी दी संभल कर बोलने की सलाह रविवार को NDA की बैठक में पीएम मोदी ने भी पार्टी के नेताओं को संभल कर बोलने की सलाह दी। पीएम मोदी ने कहा कहीं भी कुछ भी बोलने से नेताओं को बचना चाहिए। इससे पार्टी की छवि खराब होती है।

यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा नष्ट करने की प्रक्रिया जारी, एक माह में जहरीले कचरे का नामोनिशान खत्म

भोपाल /इंदौर  भोपाल में दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी के लिए जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा नष्ट करने की प्रक्रिया जारी है. पीथमपुर के रामकी संयंत्र में कचरे का निस्तारण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार किया जा रहा है. इसकी रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को लगातार दी जा रही है. बड़ी बात ये है कि इस जहरीले कचरे को लेकर खतरनाक प्रदूषण फैलने की आशंकाएं न के बराबर हो गई हैं. दावा है कि प्रदूशण नियंत्रण बोर्ड ने जहरीले कचरे से होने वाले प्रदूषण को सामान्य बताया है. एक माह में जहरीले कचरे का नामोनिशान खत्म इंदौर संभाग आयुक्त दीपक सिंह का कहना है “यूनियन कार्बाइड का कचरा विशेषज्ञों की निगरानी में जलाया जा रहा है, जो अगले 30 से 35 दिन में पूरी तरीके से नष्ट कर दिया जाएगा. इसके निष्पादन प्रक्रिया की पूरी निगरानी की जा रही है. कचरे के निष्पादन के हरेक चरण की रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई है. वर्तमान में पीथमपुर के आसपास के इलाकों में प्रदूषण का स्तर भी सामान्य है. यूनियन कार्बाइड के कचरे में कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड के अलावा नैप्थलीन और पार्टिकुलेट मैटर पाया गया. इसके अलावा कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन क्लोराइड समेत हाइड्रोजन फ्लुराइड का उत्सर्जन हुआ. प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों के मुताबिक सामान्य प्रदूषण श्रेणी का था.” भोपाल से लेकर इंदौर तक दहशत का दौर दरअसल, 3 दिसंबर 1984 की सुबह भोपाल में यूनियन कर्बाइड से निकली मिथाइल आइसोसाइनाइड गैस से 5000 से ज्यादा मौत हुई थीं. इस जहरीली गैस के दुष्प्रभाव के कारण करीब डेढ़ दशक में 15000 लोगों की अलग-अलग बीमारियों से मौत हो गई. तभी से यूनियन कार्बाइड में इस गैस के अवशेष के रूप में यह कचरा परिसर में मौजूद था. लगातार कई सालों से इस कचरे को गैस की तरह ही घातक और प्रदूषण की वजह बताया जा रहा था. भोपाल गैस कांड के 40 साल बाद हाई कोर्ट जबलपुर के आदेश के तहत कचरे को इंदौर के पास पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित रामकी एनवायरो प्लांट में जलाकर नष्ट करने पर सहमति बनी. पीथमपुर में जहरीले कचरे को जलाने की प्रक्रिया जारी इसके बाद 2 जनवरी को 12 कंटेनर में इस कचरे को भरे जाने के बाद एक विशेष प्रकार के ग्रीन कॉरिडोर को तैयार कर 230 किलोमीटर दूर पीथमपुर लाया गया. कचरे को पीथमपुर में जलाए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर भारी विरोध हुआ. फिर 10 मार्च 2025 को कचरा जलाने की प्रक्रिया शुरू की गई. फिलहाल यहां 50 से ज्यादा मजदूर प्रति घंटा 90 किलोग्राम कचरे को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की टीम की निगरानी मे जलाकर नष्ट कर रहे हैं. तीन ट्रायल रन में 6570 किलोग्राम कचरे को नष्ट किए जाने के बाद लगातार शेष कचरे को जलने की प्रक्रिया जारी है.

कोलार सिक्सलेन रोड 15 किलोमीटर लंबी सड़क को नगर निगम प्रशासन ग्रीन कॉरिडोर के तौर पर विकसित करेगा

भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में कोलार सिक्सलेन रोड यानी कोलार गेस्ट तिराहे से लेकर गोल जोड़ तिराहे तक करीब 15 किलोमीटर लंबी सड़क को नगर निगम प्रशासन ग्रीन कॉरिडोर के तौर पर विकसित कर रहा है।  राजधानी की सबसे पहली और बड़ी सिक्सलेन सड़क पर नगर निगम प्रशासन करीब 10 करोड़ रुपए की राशि से 15 किलोमीटर के दायरे में लगभग 20 हजार से अधिक पौधे लगाएंगी। यह काम नगर निगम प्रशासन अगले महीने यानी जून से शुरू करने वाली है। नगर निगम प्रशासन करेगा काम सेन्ट्रल वर्ज में ये पौधे लगाए जाएंगे और इनकी सुरक्षा को लेकर करीब तीन फीट ऊंची रैलिंग भी लगाई जाएगी। नगर निगम प्रशासन ने इस काम को लेकर अपनी कार्ययोजना बना ली है। इस संबंध में काम करने के लिए योजना के हिसाब से काम अंतिम चरणों में काम चल रहा है। जल्द ही इसे मूर्त रुप देने के लिए नगर निगम प्रशासन काम शुरू करेगा। लगातार हो रही हैं बैठकें, जल्द शुरू होगा काम हाल ही में ग्रीन कॉरिडोर विकसित करने के लिए विधायक रामेश्वर शर्मा ने निगम प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। गौरतलब है कि करीब छह महीने पहले कोलार सिक्सलेन सड़क बनकर तैयार हो चुकी है, यहां से लगातार आवाजाही भी सुचारू हो गई है। लेकिन अब तक इसका औपचारिक शुभारंभ नहीं हुआ है। ऐसे में अभी इस रोड पर बचे हुए कामों को पूरा किया जा रहा है। लगभग 325 करोड़ रुपए की राशि से कोलार सिक्सलेन सड़क को विकसित किया गया है।

रातापानी टाइगर रिजर्व में वन्य जीवों के निर्बाध आवागमन के लिए अंडरपास, 12KM का साउंडप्रूफ कॉरिडोर

रायसेन रातापानी अभ्यारण्य के जंगलों से गुजरे हाइवे के 12 किलोमीटर रोड को पूरी तरह से साउंडप्रूफ कॉरिडोर के रूप में तैयार किया गया है. 12 किमी के दौरान वन्य जीवों के लिए 7 अंडरपास बनाए गए हैं. चारों ओर हरा-भरा जंगल और सड़क के दोनों तरफ 3-3 मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल बनाई गई हैं, जोकि पूरी तरह साउंड प्रूफ हैं. इससे रातापानी के जंगल के वन्य जीवों को जहां काफी राहत मिली है तो वहीं, यहां से गुजरने वाले वाहनचालकों को भी अद्भुत अहसास होता है. वन्य जीवों के निर्बाध आवागमन के लिए अंडरपास गौरतलब है कि रायसेन जिला स्थित रातापानी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए 12.3 किलोमीटर लंबा साउंड प्रूफ गलियारा तैयार किया गया है. यह कॉरिडोर राजधानी के पास वन्य प्राणियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर है, जिसमें वन्य जीवों के निर्बाध आवागमन के लिए अंडरपास बनाए गए हैं. कॉरिडोर के ऊपर से वाहनों का आवागमन होगा तो वहीं, अंडरपास से टाइगर और अन्य वन्य जीव आसानी से वन्य क्षेत्र में आराम से विचरण कर सकेंगे. कॉरिडोर की बाउंड्री वॉल में लगाए नोइज बैरियर कॉरिडोर में 5 बड़े और 2 छोटे अंडरपास बनाए गए हैं. कॉरिडोर से वाहनों से निकलने वाली तेज आवाज को कम करने के लिए नॉइस बैरियर लगाए गए हैं, जिससे वाहनों के शोरगुल को कम किया जा सकता है, इसमें इंसुलेशन मैटेरियल का उपयोग किया गया है और पॉलीकार्बोनेट सीट से नोइज बैरियर लगाए गए हैं. NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवांश नवल ने बताया ” रातापानी टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले कॉरिडोर की सड़क 18 मीटर चौड़ी है. कॉरिडोर से आधे घंटे का सफर अब 10 मिनट में पूरा किया जा सकता है. पहले इस सड़क की चौड़ाई कम होने और जगह-जगह टर्निंग पॉइंट होने की वजह से यहां पर अधिक समय लगता था.” हाल ही में रोड पर तेंदुए की मौत से चिंताएं बढ़ी अब्दुल्लागंज वन मंडल के डीएफओ हेमंत कुमार रैकवार का कहना है “कॉरिडोर की समीक्षा की जा रही है कि इससे कितना लाभ वन्य जीवों को हो सकता है. हाल ही में एक लैपर्ड के कॉरिडोर के बीच में दुर्घटना के चलते मौत हो गई थी. इसलिए फिलहाल यह कहना संभव नहीं है कि इस कॉरिडोर के बनने से जानवरों को पूरी सुरक्षा मिली है. लेकिन कॉरिडोर बनने से जानवरों के वन्य क्षेत्र में ध्वनि का प्रदूषण नहीं होगा और ना ही वाहन सड़क से उतरकर वन्य क्षेत्र में जा पाएंगे.” बता दें कि ये कॉरिडोर भोपाल-नर्मदापुरम रोड पर बरखेड़ा रेंज के पास बनाया गया है. ज्यादातर इसी क्षेत्र में वन्यजीवों की दुर्घटना में मौत होती थी.

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