LATEST NEWS

836 करोड़ की लागत से भोपाल के 16 KM लंबे अयोध्या बाइपास मार्ग के चौड़ीकरण का काम 1 जून से

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रत्नागिरी इलाके से लेकर आशाराम तिराहे तक 16 किलोमीटर लंबे अयोध्या बाइपास मार्ग के चौड़ीकरण का काम 1 जून 2025 से शुरू होने जा रहा है। काम की लागत 836 करोड़ रुपए आने की संभावना है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंयक कल्याण राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने इस संबंध में मंत्रालय में निर्माण एजेंसी एनएचएआई के अधिकारियों और संबंधित विभागों के अन्य अधिकारियों निर्माण कार्य की प्रगति को लेकर समीक्षा बैठक की।  इस दौरान प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवांश नरवाल ने बताया कि, सबसे पहले सर्विस रोड बनाई जाएगी, ताकि यातायात बाधित न हो। चौड़ीकरण में आने वाले पेड़ों को हटाया जाएगा। साथ ही, इनके बदले में इसी सड़क पर चार गुना से ज्यादा पेड़ लगाए जाएंगे। सड़क चौड़ीकरण में आने वाले बिजली पोल- पाइप लाइन को शिट करने के लिए भी समय सीमा तय की गई है। 6 प्लस 2 यानी 8 लेन होगी सड़क राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने बताया कि, करीब 2 साल में इस परियोजना को पूरा किया जाएगा। निर्माण कार्य का दायित्व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सौंपा गया है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 836 करोड़ रुपए है। चौड़ीकरण का काम 1 जून से शुरू होगा। मुख्य सड़क निर्माण से पहले सर्विस रोड बनाई जाएगी, ताकि शहर का यातायात बाधित न हो। यह बायपास वर्तमान में 6 लेन है। 2 सर्विस रोड निर्माण के बाद यह 8 लेन हो जाएगा। आनंद नगर में बनेगा फ्लाई ओवर बैठक में आनंद नगर लाई ओवर निर्माण, रत्नागिरी तिराहे पर मैट्रो रेल लाई ओवर निर्माण व अन्य निर्माण कार्यों उकी समीक्षा की गई। आनंद नगर फ्लाई ओवर निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण अगले एक सप्ताह में पूरा करने के निर्देश दिए गए। मेट्रो के लिए भी यहां काम होगा और एलिवेटेड लेन बनेगी। उन्होंने बायपास चौड़ीकरण के दौरान 8 हजार पेड़ों की कटाई के बदले 4 गुना अधिक पौधों का रोपण करने का दावा किया हैं। इस बायपास के दोनों ओर 8 हजार पेड़ काटे जाएंगे। यह प्रदेश की आदर्श सड़क बनेगी राज्यमंत्री गौर ने स्पष्ट कहा हैं कि निर्माण में किसी भी प्रकार की अड़चन को जल्द रूप से हल किया जाएं। कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो जल्द से जल्द कार्य को पूरा करना हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रदेश की एक आदर्श सड़क बनेगी, जिसमें फ्लाईओवर और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी शामिल होंगी।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और रीजनल कॉन्क्लेव के निवेशकों को MP में प्लॉट लेना महंगा हो गया

भोपाल  मध्यप्रदेश में मई में निवेशक और उद्योगपति औद्योगिक क्षेत्रों में प्लॉट के लिए आवेदन कर सकेंगे। अब नई कलेक्टर गाइडलाइन के रेट लागू होने के बाद प्लॉट 30 से 50% तक महंगे हो गए हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और रीजनल कॉन्क्लेव में आए निवेशकों को भी प्लॉट लेना महंगा हो गया है। मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने अपने औद्योगिक पार्कों में 319 प्लॉट निकाले हैं। एमएसएमई पोर्टल के जरिए प्लॉट आवंटन प्रक्रिया एक मई से शुरू होने जा रही है। इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्ययम उद्यमों के लिए लगभग 1100 प्लॉट उपलब्ध होंगे। एमएसएमई में प्रक्रिया में बदलाव के चलते पिछले करीब सात माह से प्लॉट(Property Rate) आवंटन बंद था। इस संबंध में उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार ने बताया कि भूमि आवंटन के लिए पोर्टल बनाया गया है। इसी पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। ऑनलाइन ही प्रस्ताव मंगाकर ई-ऑक्शन के माध्यम से प्लॉट आवंटन किया जाएगा। अब पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर प्लॉट आवंटन बंद कर दिया गया है। प्लॉट्स की नई दरें जारी कर दी गई हैं। इसी के अनुसार आवंटन होगा। पीथमपुर में जमीन सबसे ज्यादा महंगी नई कलेक्टर गाइडलाइन में प्रदेश में जमीन के औसतन रेट 30% तक बढ़े हैं। कुछ स्थानों पर 50% तक। एमपीआइडीसी के इंदौर, पीथमपुर, उज्जैन, देवास, जबलपुर, ग्वालियर के औद्योगिक क्षेत्रों में रेट ज्यादा बढ़े हैं। पीथमपुर में 50% तक रेट बढ़े हैं। जीआइएस, रीजनल कॉन्क्लेव में इन्हीं क्षेत्रों में निवेश के प्रस्ताव ज्यादा आए हैं। निवेशक यदि अब जमीन आवंटन कराएंगे तो 50% ज्यादा रेट देना होगा। एमएसएमई के औद्योगिक क्षेत्रों में भी मक्सी, उज्जैन, ग्वालियर, सुभाषनगर सागर, भोपाल के गोविंदपुरा आदि क्षेत्रों मेंरेट ज्यादा बढ़े हैं। एमपीआइडीसी के प्लॉट 15 जिलों में एमपीआइडीसी ने धार, झाबुआ, भिण्ड, मुरैना, ग्वालियर, उज्जैन, नीमच, रतलाम, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, राजगढ़, विदिशा, कटनी, मंडला और जबलपुर जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों में कुल 319 प्लॉट निकाले हैं। एमपीआइडीसी से प्लॉट आवंटन के लिए 9 मई को ऑनलाइन ऑक्शन होगा।

नक्सली सफाए अभियान के अंतर्गत तेंदूपत्ता ठेकेदार सूचना दिए बगैर जंगल में कैश और वाहन नहीं ले जा सकेंगे

बालाघाट एमपी की बालाघाट पुलिस ने तेंदूपत्ता सीजन में नक्सलियों के फंडिंग रोकने के लिए विशेष प्लान बनाया है. अब ठेकेदार पुलिस को सूचना दिए बगैर जंगल में कैश और वाहन नहीं ले जा सकेंगे. दरअसल, बालाघाट जिले में इस बार 21 ठेकेदार और 58 से अधिक तेंदूपत्ता समितियां काम करेंगी. करीब 720 फड़ों में तुड़ाई और संग्रहण का काम होगा. पुलिस ने 250 तेंदूपत्ता फड़ को नक्सल प्रभावित संवेदनशील श्रेणी में शामिल किया है. नक्सली तेंदूपत्ता के सीजन में अवैध वसूली करते हैं. लेकिन इस पर अंकुश लगाने के लिए बालाघाट पुलिस-प्रशासन ने 2026 नक्सली सफाए अभियान के अंतर्गत विशेष कार्य योजना बनाई है. बता दें कि जिले के दक्षिण और उत्तर सामान्य वनमंडल में तेंदूपत्ता तुड़ाई और संग्रहण का काम होता है. इस काम से स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों को रोजगार मिलता है. शासन के निर्देश पर मजदूरों को बोनस भी दिया जाता है. बालाघाट का तेंदूपत्ता अच्छी क्वालिटी का होने से महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के ठेकेदार वहां आते हैं.

धन कुबेर सौरभ के करीबियों पर भी कसेगा शिकंजा, एक इंस्पेक्टर व चार आरक्षकों को लोकायुक्त ने भेजा नोटिस

भोपाल  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बहुचर्चित RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा (Saurabh Sharma)  से मिली अकूत सम्पत्ति के मामले में भले ही उसके परिजनों को कोर्ट से जमानत की राहत मिल गई हो, लेकिन अब लोकायुक्त की रडार पर सौरभ के करीबी भी आ रहे हैं. इसी कड़ी में मंगलवार को लोकायुक्त (Loka Yukta) ने प्रदेश के विभिन्न  RTO चेक पोस्टों पर तैनात रहे एक इंस्पेक्टर और चार आरक्षकों को लोकायुक्त ने नोटिस भेजकर इस मामले में पूछताछ के लिए तलब किया है. एक मई को पेश होने के दिए आदेश लोकायुक्त भोपाल के जांच अधिकारी डीएसपी वीरेंद्र सिंह ने परिवहन विभाग जरिए  सौरभ शर्मा मामले में परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर किशोर सिंह बघेल, सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर वीरेश कुमार और तुमराम सहित 4 आरक्षकों को  नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है. सौरभ शर्मा के नजदीकी कहे जाने परिवहन आरक्षकों में गौरव पाराशर, हेमंत जाटव, धनंजय चौबे, नरेंद्र सिंह भदौरिया को भी लोकायुक्त ने नोटिस जारी किया है.   इस नोटिस में कहा गया है कि सौरभ शर्मा प्रकरण में जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि आपसे तथ्यों के सम्बन्ध और परिस्थितियों को सुनिश्चित करने के लिए प्रश्न पूछने के पास ठोस युक्तियुक्त आधार है. लिहाजा, आपको एक मई को सुबह 11 बजे युक्तियुक्त कार्यालय भोपाल में उपस्थित हों.  गौरतलब है कि भोपाल के जंगल में एक कार में 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये कैश मिलने के बाद भोपाल आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा सुर्खियों में आए थे. इसके बाद उनके खिलाफ लोकायुक्त, ईडी और इनकम टैक्स की जांच चल रही है. फिलहाल शर्मा अपने सहयोगियों के साथ जेल में बंद है. 

देश में 12 नदियों को पुनर्जीवित करने वाले ‘जलपुरूष’ राजेन्द्र सिंह आज राजधानी भोपाल में

भोपाल भारत समेत दुनियाभर में ‘जलपुरूष’ के नाम से मशहूर राजेन्द्र सिंह आज  यानी 1 मई को भोपाल प्रवास पर रहेंगे। इन्होंने 12 नदियों को पुनर्जीवित किया, जल संरक्षण के लिए 60 देशों की यात्रा की। यहां तक कि राजेन्द्र सिंह ने सरकारी नौकरी छोड़ अपना जीवन जल संरक्षण के कार्यों में लगा दिया। इनके प्रयासों के ही कारण देशभर में अरवरी, रुपारेल, सरसा, भगानी, महेश्वरा, साबी, तबिरा, सैरनी, जहाजवाली, अग्रणी, महाकाली व इचनहल्ला समेत 12 नदियों को नया जीवन मिला। बता दें कि राजेंद्र सिंह को जल संचयन और जल प्रबंधन में समुदाय-आधारित प्रयासों में अग्रणी कार्य के लिए 2001 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 1 मई को राजेन्द्र सिंह राजधानी भोपाल में रहेंगे। सुबह साढ़े दस बजे मानस भवन श्यामला हिल्स में राजेन्द्र सिंह ,”जल संसाधन, संरक्षण और संवर्धन पर व्याख्यान देंगे। ऐसे हुई बड़ी शुरूआत बता दें कि 1975 में राजेंद्र सिंह ने राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में अग्निकांड पीड़ितों की सेवा के लिए ‘तरुण भारत संघ’ की स्थापना की थी। इसी दौरान जब वह अलवर के एक गांव पहुंचे तो उन्हें एक बुजुर्ग ने बड़ी चुनौती दे डाली। दरअसल बुजुर्ग ने उनसे कहा कि अगर गांव का इतना ही विकास करना है तो बातें छोड़ गेंती और फावड़ा पकड़ो। हम लोगों की मदद ही करनी है तो गांव में पानी लाओ। राजेंद्र सिंह(Waterman Rajendra Singh) ने यह चुनौती स्वीकार कर ली और अपने दोस्तों के साथ फावड़ा पकड़ इस काम में जुड़ गए। उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि राजस्थान में 11800 जल संरचनाएं बनवाई गई। इसके साथ ही उन्होंने 60 देशों में जल संरक्षण के लिए यात्रा भी की।

मई में 11 दिन बैंकों में रहेगा अवकाश, देख लीजिए पूरी लिस्ट

नई दिल्ली आज  गुरुवार को बैंक बंद रहने वाले हैं। 1 मई 2025 को बैंक देश के ज्यादतर राज्यों में बंद रहेंगे। यानी ग्राहक गुरुवार को बैंक जाकर अपना काम नहीं निपटा सकते।  यहां जानें RBI ने कल गुरुवार 1 मई 2025 की छुट्टी क्यों दी है और किन राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं। 1 मई को क्यों बंद रहेंगे बैंक? गुरुवार 1 मई को बैंक महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, कोलकाता, गोवा, आंधप्रदेश जैसे तमाम राज्यों में बंद रहेंगे। महाराष्ट्र में बैंक महाराष्ट दिवस के कारण बैंक बंद हैं। वहीं, बाकि सभी राज्यों में बैंक लेबर डे के कारण नहीं खुलेंगे। यहां बैंक लेबर डे के कारण बंद हैं। 1 मई को बंद रहेंगे बैंक 1 मई (गुरुवार) – मजदूर दिवस / महाराष्ट्र दिवस: बेलापुर, बेंगलुरु, चेन्नई, गुवाहाटी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, इंफाल, कोच्चि, कोलकाता, मुंबई, नागपुर, पणजी, पटना और तिरुवनंतपुरम में बैंक बंद रहेंगे। मई में छुट्टियों की पूरी लिस्ट 4 मई (रविवार) – रविवार 9 मई (शुक्रवार) – रवींद्रनाथ टैगोर जयंती: कोलकाता में बैंक बंद रहेंगे। 10 मई (शनिवार) – मई महीने का दूसरा शनिवार 11 मई (रविवार) – रविवार 12 मई (सोमवार) – बुद्ध पूर्णिमा: अगरतला, आइज़ोल, बेलापुर, भोपाल, देहरादून, ईटानगर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, रायपुर, रांची, शिमला और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे। 16 मई (शुक्रवार) – राज्य दिवस: गंगटोक में बैंक अवकाश रहेगा। 18 मई (रविवार) – रविवार 24 मई (शनिवार) – चौथा शनिवार 25 मई (रविवार) -रविवार 26 मई (सोमवार) – काजी नजरुल इस्लाम की जयंती: अगरतला में बैंक बंद रहेंगे। 29 मई (गुरुवार) – महाराणा प्रताप जयंती: शिमला में बैंक बंद रहेंगे। क्या ऑनलाइन बैंकिंग सर्विस मिलेंगी? हालांकि बैंक शाखाएं इन छुट्टियों पर बंद रहेंगी, लेकिन ग्राहकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे UPI, IMPS, नेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप्स सामान्य रूप से काम करते रहेंगे। ग्राहक फंड ट्रांसफर, बिल पेमेंट और अन्य ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी बैंक शाखा से जुड़े काम समय से पहले निपटा लें, ताकि छुट्टियों के दौरान कोई असुविधा न हो। 46 दिन तक स्कूलों में छूट्टी मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों(School Holiday) में गर्मी की छु‌ट्टी की घोषणा कर दी है। इस बीच छात्रों को गर्मी से राहत मिलेगी और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन छुट्टियों की घोषणा हुई है। 1 मई से लेकर 15 जून तक स्टूडेंट्स को 46 दिन की छुट्टी मिलने वाली है। जबकि शिक्षकों को एक महीने की छुट्टी मिलेगी

राजधानी भोपाल में 100 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी, मैनिट के एक्सपर्ट ने तैयार किया रूट प्लान

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 100 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड और मैनिट के एक्सपर्ट हैदराबाद की तर्ज पर भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मॉडल तैयार कर रहे हैं। पिछले दिनों हैदराबाद से लाकर कुछ बसों को ट्रॉयल किया गया।   24 लाख आबादी के बीच 200 बसें करीब 24 लाख की आबादी वाले भोपाल शहर में अभी 200 लो लोर बसें संचालित हैं। इनके अलावा कुछ बसें स्थानीय ऑपरेटर्स संचालित करते हैं, इन बसों में क्षमता से 3 गुना ज्यादा यात्री सफर करते हैं। इलेक्ट्रिक बसों के सीमित संख्या में चलते यह समस्या और बढ़ सकती है। अरेरा हिल्स, राज भवन और न्यू मार्केट मैनिट के विशेषज्ञ यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि भोपाल के पहाड़ी इलाकों में ओवरलोडेड बसों के संचालन में कोई समस्या न हो। खासकर, अरेरा हिल्स, राज भवन और न्यू मार्केट जैसे चढ़ाई वाले रूट पर इलेक्ट्रिक बसों को आने जाने में परेशनी न हो।    मैनिट के विशेषज्ञों की टीम शहर के पहाड़ी इलाकों के हिसाब से इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की पूरी संख्या भरने के बाद लोडेड व्हीकल को पहाड़ी की ऊंचाई पर चलने योग्य रूट का चयन करेगी। अरेरा हिल्स, राज भवन, न्यू मार्केट जैसे घाट क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों ने बेहतर प्रदर्शन किया था। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड अब इस बात को सुनिश्चित करना चाह रहा है की दोगुनी संख्या में यात्रियों को लेकर चलने के दौरान इन बसों के संचालन में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो। इसलिए परीक्षण जरूरी भोपाल शहर 24 लाख की आबादी वाला शहर है। इसके मुकाबले भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड एकमात्र ऐसी संस्था है जो सस्ता पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम उपलब्ध कराती है। शहर में बीसीएलएल के अलग-अलग ठेकेदार 200 लो लोर बसों को संचालित करते हैं जिनमें क्षमता से तीन गुना तक ज्यादा यात्री सफर करते हैं। इलेक्ट्रिक बसों के सीमित संख्या में चलने के बाद भी यही हश्र हो सकता है। बीसीएलएल चला रही लो फ्लोर बसें भोपाल में लो फ्लोर बसों के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही कंपनी बीसीएलएल के डायरेक्टर मनोज राठौर ने ई-बसों के संचालन की तैयारियां की जा रही हैं। विषय विशेषज्ञों से भी इसके लिए सलाह ली जा रही है। EV हब बनेंगे इंदौर-भोपाल मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल और इंदौर को ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) हब के रूप में विकासित करने का ऐलान किया है। इन शहरों में ई-रिक्शा और ई-बसों के संचालन पर जोर दिया जा रहा है। आम नागरिकों को भी ई-कार और ई-बाइक खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इनके लिए चार्जिंग स्टेशन सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराए जाने का प्रयास जारी है।

भेल की 4 हजार एकड़ जमीन पर लगेंगे उद्योग, मोहन सरकार ने जमीन लेने के लिए बनाई कार्ययोजना

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के बीचों-बीच हजारों एकड़ जमीन खाली पड़ी है। इस पर चाहकर भी मध्यप्रदेश सरकार विकास कार्य नहीं कर पा रही है। यहां पर हजारों एकड़ भूमि खुले रूप में मौजूद है। जिस पर अवैध कब्जा हो चुका है। लेकिन अब प्रदेश सरकार ने इसे लेने के लिए नए सिरे से प्रयास शुरू कर दिया है। दरअसल, यह भूमि भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) की है। पूर्व में यह जमीन सरकार मांग चुकी है, लेकिन भेल ने इसे देने से मना कर दिया। अब सरकार इस जमीन को भेल से लेकर उसका पुनर्विकास करने का प्लान बना रही है। मुख्य सचिव अनुराग जैन की निगरानी में यहां प्लान तैयार हो रहा है। 4000 एकड़ पर विकास कार्य का मॉडल यह जमीन थोड़ी बहुत नहीं, बल्कि 4 हजार एकड़ है। जब तक जमीन नहीं मिल जाती, तब तक विकास मॉडल के आधार पर यहां काम किया जाएगा। ये ऐसे मॉडल होंगे, जिनमें भेल की अतिक्रमण वाली खाली पड़ी जमीनों पर भोपाल के विकास से जुड़े प्रोजेक्ट जैसे हाईराइज बिल्डिंग व औद्योगिक इकाईयों का निर्माण किया जाएगा। सीएम मोहन यादव ने कहा कि यह पहल भोपाल के विकास के साथ भेल को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में काम करेगी। राजस्व का होगा 50-50 बंटवारा सरकार भेल से यह जमीन यूं ही नहीं लेने वाली। इसके बदले में जमीन का कुछ हिस्सा भेल को भी विकसित करके दिया जाएगा। यही नहीं, इस जमीन में लगने वाले उद्योग या अन्य साधनों से मिलने वाले राजस्व को भेल और शासन के बीच 50-50 फीसदी बांटे जाने का प्लान है। क्या है भेल करीब 62 वर्ष पहले भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (भेल) को भोपाल में 6000 एकड़ जमीन मिली थी। इसमें से करीब 764 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है। करी 700 एकड़ पर निजी खेती की जा रही है। 90 एकड़ जमीन पर जंबूरी मैदान है और करीब 12 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से अन्ना नगर बसा है। कुछ वर्ष पहले राज्य शासन ने भेल से जमीन मांगी थी, लेकिन भेल प्रशासन ने साफ-साफ मना कर दिया था। केंद्र सरकार से ऐसे मांगेगे जमीन दरअसल, भोपाल को मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने की दिशा में कार्य चल रहा है। लेकिन भोपाल के एक ओर वन क्षेत्र की बड़ी सीमा है, जिसे टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया है। यहां विकास नहीं किया जा सकता। दूसरा भोपाल झीलों की नगरी है, बड़ा तालाब रामसर साइट है। यह भोपाल की बड़ी सीमा को घेरता है। दूसरे तालाब व नदियां भी हैं, उन्हें प्रभावित नहीं किया जा सकता। वहीं, भोपाल का बड़ा हिस्सा भेल को दी जमीन से लगा है। उक्त जमीन का बड़ा हिस्सा खाली है। भोपाल से लगे बाकी जो क्षेत्र बचे हैं, उनमें लगातार विकास हो रहा है, आबादी बस रही है। ऐसे में भेल की जमीन सरकार के लिए उपयोगी हो सकती है। यहां विकास के ऐसे कार्य किए जाए जिससे राजस्व की प्राप्ति हो सके। खाली जमीन पर हो रहा अतिक्रमण भेल को मिली 6 हजार एकड़ जमीन में से अभी तक 2000 एकड़ जमीन खाली पड़ी है। इस खाली पड़ी जमीन पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है। भेल की 700 अधिक अतिक्रमण वाली जमीन पर निजी लोग खेती कर रहे हैं। वहीं, यहां के खाली पड़े जर्जर आवासों का लोग अवैध तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं।

भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का काम अब सिर्फ BDA द्वारा ही नहीं कराया जाएगा, PWD को प्लानिंग बनाने का जिम्मा

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का काम अब सिर्फ भोपाल विकास प्राधिकरण द्वारा ही नहीं कराया जाएगा। बीडीए की वित्तीय और तकनीकी तौर पर बदहाल स्थिति को देखते हुए अब टीएंडसीपी, हाउसिंग बोर्ड, पीडब्ल्यूडी को भी इसमें काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मेट्रोपॉलिटन रीजन की प्लानिंग टीएंडसीपी की सुनीता सिंह के निर्देशन में होगी। जन-उपयोगी भवन व अन्य निर्माण के लिए हाउसिंग बोर्ड काम करेगा, जबकि क्षेत्रों के आपसी जुड़ाव को बेहतर करने के लिए पीडब्ल्यूडी को प्लानिंग बनाने के लिए कहा गया है।  गौरतलब है कि, बीडीए के पास प्लानिंग शाखा में कोई नहीं है, जबकि इंजीनियरिंग में अधीक्षण यंत्री स्तर के दो ही इंजीनियर बचे हुए हैं। आउटसोर्स व निजी एजेंसियों से यहां काम कराया जा रहा है। ऐसे में प्रोजेक्ट को पूरी तरह से बीडीए के हवाले नहीं किया गया। मेट्रोपॉलिटन रीजन की तय की जा रही प्लानिंग में भोपाल से पास के जिलों से 2000 हेक्टेयर जमीन निकाली जानी है। भोपाल की बढ़ती आबादी को इसी 2000 हेक्टेयर में नई टाउनशिप में बसाया जाएगा। मेट्रो प्रस्तावित करेंगे, अभी रोड से ही कनेक्टिविटी तय प्लानिंग के अनुसार पीडब्ल्यूडी को भोपाल से किनारे जिलों की सड़कों पर प्लानिंग के लिए कहा गया है। करीब 600 किमी लंबाई की सड़कों को लेकर प्लानिंग होगी। सड़कों की चौड़ाई औसतन 24 मीटर करने का कहा गया है। मेट्रोपॉलिटन रीजन वाले क्षेत्र तक ये बनेगी, उसके बाद संबंधित जिले के विभागों का जिमा होगा कि वे आगे कहां तक लेकर जाते हैं। शासन ने कहा- जनप्रतिनिधियों को दें प्रजेंटेशन बीडीए मेट्रोपॉलिटन रीजन जैसे महत्वपूर्ण काम की प्लानिंग अपने ही स्तर पर करने की कोशिश कर रहा था। बीडीए ने अपना बजट भी जाहिर नहीं किया। इसकी शिकायत शासन स्तर पर हुई। इसके बाद सीईओ श्यामबीर सिंह और टीम को पूरी प्लानिंग जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकर करने का कहा गया। प्लानिंग किसी एक एजेंसी के जिम्में नहीं- PS इस संबंध में शहरी आवास एवं विकास के पीएस संजय शुक्ला का कहना है कि, मेट्रोपॉलिटन रीजन की प्लानिंग किसी एक एजेंसी के जिम्में नहीं रखी जाएगी। समग्रता के साथ काम किया जाएगा, जिसका लाभ सबको मिलेगा।

MP में पराली जलाने वाले किसानों को सम्मान निधि योजना की वित्तीय सहायता एक साल के लिए निलंबित

भोपाल मध्य प्रदेश कैबिनेट ने पराली जलाने वाले किसानों को किसान सम्मान निधि योजना के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता एक साल के लिए निलंबित करने को मंजूरी दे दी है. इस बात की जानकारी एक मंत्री ने एक न्यूज एजेंसी को दी है. जिसके मुताबिक कैबिनेट ने यह भी फैसला किया है कि ऐसे किसानों की उपज एक साल तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के हिसाब से नहीं खरीदी जाएगी. शहरी विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने  कैबिनेट की बैठक के बाद कहा कि राज्य सरकार प्रदूषण फैलाने वाली पराली जलाने पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठा रही है. सरकार पराली जलाने वाले किसानों को किसान सम्मान निधि योजना के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता निलंबित करेगी और उनकी उपज एक साल तक एमएसपी के हिसाब से नहीं खरीदी जाएगी. मध्य प्रदेश सरकार किसानों को किसान सम्मान निधि के तौर पर हर साल 12000 रुपये देती है. इसमें से 6000 रुपये प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत और इतनी ही राशि राज्य सरकार देती है. राज्य सरकार किसानों को दंडित नहीं करना चाहती. लेकिन हमारे किसान भाइयों को छोटे-मोटे लाभ के लिए बड़ा नुकसान नहीं उठाना चाहिए. क्योंकि अगर पर्यावरण प्रभावित हुआ तो उनके अपने बच्चे भी इसका शिकार होंगे. पर्यावरण संरक्षण के लिए यह निर्णय आवश्यक था. विजयवर्गीय ने कहा कि मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने राज्य सरकार के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए नई स्थानांतरण नीति को भी मंजूरी दी है. बैठक में कई अन्य निर्णय भी लिए गए, जिसमें राज्य सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में पांच प्रतिशत की वृद्धि और इसे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर लाना शामिल है, जैसा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले घोषणा की थी. पर्यावरण संरक्षण के लिए फैसला जरूरी- कैलाश विजयवर्गीय शहरी विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि सरकार पराली जलाने वाले किसानों की किसान सम्मान निधि योजना के तहत आर्थिक सहायता को रोक देगी। इसके साथ ही ऐसे किसानों की फसल को एमएसपी पर नहीं खरीदा जाएगा। विजयवर्गीय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए यह फैसला जरूरी था। कितनी मिलती है आर्थिक सहायता? मध्य प्रदेश की सरकार किसानों को किसान सम्मान निधि के रूप में प्रति वर्ष 12,000 रुपये की आर्थिक सहायता देती है। इस रकम में से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 6,000 रुपये और राज्य सरकार की ओर से 6000 रुपये दिए जाते हैं। अब अगर किसानों ने पराली जलाई तो उन्हें ये पैसे मिलने में समस्या हो सकती है।  

श्रमिकों की आशा बने मुख्यमंत्री साय जिले में हो रही बदलाव की नई बयार

रायपुर अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस, एक मई, एक ऐसा दिन है जो श्रम की महत्ता, मेहनतकश हाथों के सम्मान और सामाजिक न्याय की भावना को उजागर करता है। यह दिवस न केवल इतिहास में दर्ज है बल्कि 1886 के शिकागो आंदोलन को भी याद दिलाता है, जिसमें मजदूरों ने 8 घंटे काम, 8 घंटे विश्राम और 8 घंटे आत्म विकास के अधिकार की मांग की थी, बल्कि यह आज भी उस संघर्ष को व्यक्त करता है जो श्रमिक अपने अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा के लिए हर दिन करते हैं । एमसीबी जिले में श्रमिक कल्याण योजनाओं का दिख रहा प्रभाव छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला जो छत्तीसगढ़ के नए जिलों में से एक है, यहाँ के मेहनतकश श्रमिकों की मेहनत और लगन इस क्षेत्र की आर्थिक धड़कन बन चुकी है। इस जिले की सड़कों से लेकर निर्माण स्थलों तक, खेतों से लेकर खदानों तक श्रमिकों का पसीना इस इलाके की तरक्की में संजीवनी की तरह काम करता है। जब हम इस क्षेत्र में पंजीकृत श्रमिकों की संख्या को देखते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि यह जिला श्रमिक शक्ति का केंद्र बन चुका है। मंडल स्तर पर भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल (BOC) के अंतर्गत 30,534 श्रमिक पंजीकृत हैं और असंगठित कर्मकार कल्याण मंडल में 30,118 श्रमिकों का नाम दर्ज है। जिला गठन के बाद भी भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल में 6,257 और असंगठित क्षेत्र में 4,601 श्रमिकों का पंजीकरण हुआ है। कुल मिलाकर 71,510 श्रमिकों का पंजीकरण होना इस बात का प्रमाण है कि सरकार की योजनाएं लोगों तक पहुँच रही हैं और श्रमिक अपने हक के प्रति जागरूक हो रहे हैं। ब्लॉक स्तर पर बात करें तो मनेंद्रगढ़ में 26,065 श्रमिक पंजीकृत हैं, वहीं खड़गवां ब्लाक में 22,847 और भरतपुर ब्लाक में 10,739 श्रमिक पंजीकृत है, ये आँकड़े न केवल प्रशासनिक सक्रियता को दर्शाते हैं बल्कि यह भी प्रमाणित करते हैं कि श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी कितनी अहम है। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन और भारत सरकार के संयुक्त प्रयासों से अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिकों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाएं है लागू छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों के लिए संचालित योजनाएं श्रम की गरिमा को बढ़ावा देने और जीवन स्तर सुधारने की दिशा में सराहनीय पहल हैं। महतारी जतन योजना के तहत अब तक 1,351 श्रमिक महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं। यह योजना गर्भवती महिलाओं को पोषण और प्रसवपूर्व देखभाल हेतु वित्तीय सहायता देती है, ताकि मातृत्व और शिशु जीवन सुरक्षित और स्वस्थ रह सके। मुख्यमंत्री सायकल सहायता योजना के तहत 2,672 विद्यार्थियों को साइकिल प्रदान की गई है, जिससे उन्हें स्कूल जाने में सुविधा हो और शिक्षा बाधित न हो। मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना के अंतर्गत 1,887 श्रमिकों को उनके कार्य के अनुरूप औजार उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर होकर कार्य में दक्षता ला सकें। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 306 महिलाओं को स्वरोजगार हेतु सिलाई मशीन दी गई है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही है। वहीं श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना शुरू की गई, जिसके तहत 3,536 बच्चों को छात्रवृत्ति मिली है। इससे शिक्षा की ओर रुझान बढ़ा है और भविष्य की राहें खुली हैं। मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना में 211 छात्र-छात्राओं को बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर कौशल विकास योजना में 1,031 श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर उन्हें नई तकनीकों और कार्य दक्षता की जानकारी दी गई है, जिससे वे बेहतर रोज़गार के अवसर प्राप्त कर सकें। सुरक्षा उपकरण सहायता योजना के अंतर्गत 1,230 निर्माण श्रमिकों को हेलमेट, जैकेट, सेफ्टी शूज़ आदि दिए गए, जिससे उनके कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। वही मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत 78 श्रमिक परिवारों को राहत दी गई, जिनके सदस्य या तो दिव्यांग हुए या जिनकी मृत्यु कार्य के दौरान हो गई हो । मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना के तहत 494 लड़कियों को विवाह, शिक्षा या स्वरोजगार हेतु आर्थिक सहायता दी गई। वृद्ध श्रमिकों को भी सरकार ने नहीं भुलाया, उन्हें मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना के अंतर्गत पेंशन स्वरूप 56 लाभार्थियों को सहायता दी जा रही है । इसके अतिरिक्त बच्चों को निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक कॉपी सहायता योजना से 507 छात्र लाभान्वित हुए, जिससे वे गरिमामय तरीके से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे श्रमिक बच्चों को निःशुल्क कोचिंग सहायता योजना के अंतर्गत 8 छात्रों को संसाधन व मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया है। निर्माण श्रमिकों को आवास हेतु मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत 7 श्रमिकों को घर बनाने में मदद मिली है । केंद्र सरकार की श्रमिक कल्याण योजना से भी हो रहे है लाभान्वित केंद्र सरकार की योजनाओं की बात करें तो प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत 709 श्रमिकों को नाममात्र प्रीमियम पर 2 लाख का जीवन बीमा कवर प्रदान किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत 1,412 श्रमिकों को दुर्घटना बीमा का लाभ मिला है, जिसमें आकस्मिक मृत्यु या स्थायी विकलांगता की स्थिति में 2 लाख तक की सहायता दी जाती है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार की एक और उल्लेखनीय पहल है “शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न सहायता योजना“ जिसका शुभारंभ 29 मार्च 2025 को मनेंद्रगढ़ नगर पालिका परिषद परिसर में किया गया। इस योजना के अंतर्गत प्रतिदिन 200 से 250 श्रमिकों को मात्र 05 रुपए में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जाता है। यह न केवल भूख की समस्या का समाधान है, बल्कि यह श्रमिकों को आत्मसम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने की राह भी देता है। छत्तीसगढ़ सरकार विशेषकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में श्रमिकों के कल्याण हेतु प्रतिबद्ध है। इस अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर हम सभी का कर्तव्य बनता है कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करें, उन्हें सम्मान दें और उनके जीवन को बेहतर बनाने में सहभागी बनें। क्योंकि जब श्रमिक मुस्कुराता है, तो समाज मुस्कुराता है। जब श्रमिक सुरक्षित होता है, तो राष्ट्र सशक्त होता है। और जब श्रमिक प्रगति करता है, तो देश आगे बढ़ता है।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet