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अब भारत आतंकवाद के खात्मे को एक लक्ष्य मानता है, पाकिस्तान सेना मौजूदा समय में आईसीयू में है : तरुण चुघ

नई दिल्ली भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान सेना मौजूदा समय में आईसीयू में है। तरुण चुघ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि गुजरात के गांधीनगर में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन से यह साफ है कि अब भारत आतंकवाद के खात्मे को एक लक्ष्य मानता है। प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के गांधीनगर में अपने संबोधन में पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमने पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को महज 20 मिनट में ध्वस्त कर दिया। इसे हमने वीडियो में भी कैद कर लिया, ताकि अगर कोई सबूत मांगे, तो उसे दिखा सकें। पाकिस्तान इस बात को जानता है कि वह हमसे जीत नहीं सकता, इसलिए वह सीमापार से आतंकवादी भेजकर यहां पर माहौल को अव्यवस्थित करना चाहता है, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। भाजपा नेता तरुण चुघ ने प्रधानमंत्री के इस संबोधन को 140 करोड़ देशवासियों की आवाज बताया। कहा कि आज की तारीख में देशवासी नहीं चाहते हैं कि कोई भी आतंकवादी अपना फन उठाए। पाकिस्तान को हर हमले की कीमत चुकानी होगी। साथ ही, तरुण चुघ ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को ‘बारात’ कहने पर शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिवसेना (यूबीटी) के नेता सेना की बहादुरी पर सवाल उठा रहे हैं और सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के संबंध में विवादित टिप्पणी कर रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तारीफ की। बोले, अगर बाला साहेब ठाकरे जिंदा होते, तो प्रधानमंत्री मोदी को गले लगाते। ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारतीय सेना ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) पर हिंदुत्व की विचारधारा से समझौता किए जाने की निंदा की। कहा कि पहले जो नेता हिंदुत्व की बातें किया करते थे, अब वह पार्टी हनुमान चालीसा पढ़ने वालों को जेल भेज रही है। अब इन लोगों को आपत्ति हो रही है कि आखिर कोई कैसे हनुमान चालीसा पढ़ सकता है। अब यह पार्टी मुस्लिम लीग की विचारधारा पर चल रही है, जिसे हिंदू और हिंदुत्व से कोई लेना-देना नहीं रह गया है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बारे में अलग-अलग देशों में पहुंचे सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को ‘बारात’ कहा था। उन्होंने कहा था कि इस बारात को भेजने की कोई ज़रूरत नहीं थी। प्रधानमंत्री कमजोर हैं। भाजपा ने ऑपरेशन सिंदूर का राजनीतिकरण कर दिया है। उन्हें हर चीज में राजनीति करने की आदत है। इंडिया ब्लॉक को इस ‘बारात’ का बहिष्कार करना चाहिए। इसके अलावा, शिवसेना (यूबीटी) के संपादकीय में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को आड़े हाथों लिए जाने पर तरुण चुघ ने कहा, “शिवसेना की विरासत मौजूदा समय में उन लोगों के हाथों में है, जो आतंकवाद के मारे जाने पर दुख जाहिर करते हैं और वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों की मौत पर तंज कसते हैं। यह ‘सामना’ नहीं, बल्कि शर्म का दस्तावेज है। उद्धव ठाकरे के लोग ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भी राजनीति कर रहे हैं। यह शर्मनाक है। ऐसे लोगों से आत्मबल की अपेक्षा नहीं की जा सकती है।” इसके अलावा, भाजपा नेता तरुण चुघ ने झारखंड के पलामू में नक्सली कमांडर के मारे जाने पर कहा कि भारत के खिलाफ काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त लोगों को हम बिल्कुल भी नहीं बख्शेंगे। बता दें कि झारखंड के पलामू में सुरक्षाबलों ने नक्सल विरोध अभियान के तहत नक्सलियों के टॉप कमांडर तुलसी भुइयां को मार गिराया है।

राह-वीर योजना को लेकर केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने जारी की गाइडलाइन

भोपाल सड़क दुर्घटनाओं में होनी वाली मृत्युदर में कमी लाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गत केबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय अनुसार ‘राह-वीर’ योजना शुरू की गई है। योजना की गाईड लाईन जारी कर दी गई है। गाईड लाईन के अनुसार सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को गोल्डन आवर (दुर्घटना से एक घंटे के भीतर का समय) में अस्पताल पहुंचाने वाले ‘राह-वीर’ को 25 हजार रूपये की नगद प्रोत्साहन राशि एवं प्रशस्ति-पत्र दिया जायेगा।इसके साथ ही चुने हुए ‘राह-वीरों’ में से सबसे योग्य 10 राह-वीरों को राष्ट्रीय स्तर पर एक-एक लाख रुपये पुरस्कार स्वरूप दिये जायेंगे। ‘राह-वीर’ के लिए पात्रता कोई भी व्यक्ति जो मोटर यान सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल/ट्रामा केयर सेंटर तत्परता से पहुँचाकर जान बचाता है ऐसे सभी व्यक्ति ‘राह-वीर’ योजना के लिए पात्र होंगे। गोल्डन ऑवर अर्थात दुर्घटना होने के एक घंटे के भीतर गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराना है। कैसे चुने जाएंगे ‘राह-वीर’ कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा पुलिस थाना, अस्पताल/ट्रामा केयर सेंटर से प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रकरणों की समीक्षा की जाएगी। इसकी प्रति संबंधित ‘राह-वीर’ को भी भेजी जाएगी। मूल्यांकन समिति में संबंधित जिले के जिला मजिस्ट्रेट, एसएसपी, सीएमएचओ, आरटीओ (परिवहन विभाग) शामिल होंगे। ये समिति मासिक आधार पर प्रस्तावों की समीक्षा कर उन्हें मंजूरी देगी। चुने हुए राह वीर को राज्य परिवहन आयुक्त द्वारा सीधे बैंक खाते में प्रोत्साहन राशि का अंतरण किया जाएगा। राज्य स्तर पर इसकी निगरानी के लिए प्रमुख सचिव (गृह) की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय निगरानी समिति बनाई जाएगी। जो हर तीन महीने में योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे। योजना 21 अप्रैल 2025 से प्रभावशील है। ‘राह-वीर’ की जानकारी केवल अवार्ड प्रदाय के लिए उपयोग की जाएगी, अन्य किसी कार्य के लिए नहीं। एक ‘राह-वीर’ को वर्षभर में अधिकतम 5 प्रकरणों में अवार्ड दिया जा सकेगा। इस योजना के तहत दिए जाने वाले सम्मान की राशि परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा वहन की जाएगी।  

डिप्टी CM ने बताया- 676 कोविड कार्मिकों के समायोजन का आदेश स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया

लखनऊ कोविड महामारी के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में अस्थाई, अल्पकालीन, संविदा और आउटसोर्स के माध्यम से अपनी सेवाएं देने वाले 676 कोविड कार्मिकों के समायोजन का आदेश स्वास्थ्य विभाग ने जारी कर दिया है। एक महीने के अंदर इन सभी का समायोजन हो जाएगा। इससे पूर्व 1834 कोविड कार्मिकों का समायोजन किया जा चुका है। यह जानकारी देते हुए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया है कि जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा एक माह में इन कार्मिकों को समायोजित किया जाएगा। कोविड महामारी के दौरान प्रदेश की विभिन्न स्वास्थ्य इकाइयों में अस्थाई रूप से इन कार्मिकों को भर्ती किया गया था। पिछले कुछ महीनों से इनसे कोई काम नहीं लिया जा रहा था। उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने समायोजन के लिए सभी जिलाधिकारियों (अध्यक्ष, जिला स्वास्थ्य समिति), सभी प्रधानाचार्य राजकीय-स्वशासी मेडिकल कालेज, सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सचिव, जिला स्वास्थ्य समिति) तथा सभी मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को पत्र लिखा है।   समायोजन में कोविड कार्मिकों को उनकी योग्यता के अनुसार तैनाती दी जाएगी। ब्लाक पब्लिक हेल्थ यूनिट में डाटा एनालिस्ट, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विभिन्न कार्यक्रमों में लैब असिस्टेंट, आपरेशन थिएटर टेक्नीशियन, आयुष मेडिकल आफिसर, बीडीएस मेडिकल आफिसर, स्वीपर, वार्ड ब्वाय, वार्ड आया, नान मेडिकल साइंटिस्ट, माइक्रो बायोलाजिस्ट, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में लैब टेक्नीशियन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्टाफ नर्स व अन्य पदों पर पर समायोजन होगा। इन 676 कोविड कार्मिकों को जिला स्तर पर जिला स्वास्थ्य समिति से अनुबंधित आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से रखा जाएगा। शैक्षिक योग्यता के आधार पर संविदा के पदों की रिक्तियों के सापेक्ष आउटसोर्सिंग के माध्यम से कोविड काल के दौरान दिए गए मानदेय पर फिर से काम पर रखे जाएंगे। जिला स्वास्थ्य समिति को समायोजन को यह काम एक माह के अंदर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी जिले में आवश्यक रिक्तियां नहीं हैं तो इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा तत्काल मंडलीय अपर निदेशक को सूचित किया जाएगा। मंडलीय अपर निदेशक अपने मंडल के अधीन के जिलों में उपलब्ध रिक्तियों पर इनका समायोजन कराएंगे।

1947 में हुए देश विभाजन के बाद देश के जो हालात थे, उनको संभालने के लिए नेहरू और पटेल ने कायम किया था भाईचारा

भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत विभाजन के बाद हालातों को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल सहित अन्य नेताओं ने संभाला था और भाईचारा कायम किया था। पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर दिग्विजय सिंह सहित कांग्रेस नेताओं ने उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 में हुए देश विभाजन के बाद देश के जो हालात थे, उनको संभालने के लिए जिस प्रकार का नेतृत्व पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभ पटेल और और उनके साथ सभी वरिष्ठ कांग्रेसजन और अन्य दलों के नेताओं ने दिया वह मिसाल है। ये वैसे नेता थे जिन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में योगदान दिया था। सभी लोगों ने मिलकर भाईचारे को स्थापित किया। उन्होंने कहा कि पं. जवाहरलाल नेहरू ने सिंचाई के क्षेत्र में, खेती के क्षेत्र में, शिक्षा के क्षेत्र में, उद्योग के क्षेत्र में और अधोसंरचना के क्षेत्र में जो महत्वपूर्ण फैसले लिए, जो आज स्वतंत्र भारत के मंदिर हैं, उसी के कारण आज देश के करोड़ों लोग विदेश में रोजगार पा रहे हैं और अच्छे से अच्छे पदों पर हैं। इस सबका श्रेय पं. जवाहरलाल नेहरू को जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, “पं. नेहरू एक दूरदर्शी व्यक्ति थे, जिन्होंने अपनी कुशल योजना, आर्थिक नीतियों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों के माध्यम से देश को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। आईआईटी, आईआईएम, एम्स, डीआरडीओ, ओएनजीसी, एलआईसी सहित देश के अनेक औद्योगिक संस्थानों की उन्होंने स्थापना की। कमलनाथ ने कहा, “आधुनिक भारत के तीर्थ के रूप में बांध, सार्वजनिक उपक्रम से लेकर परमाणु संस्थान और अंतरिक्ष कार्यक्रम तक सब कुछ पंडित नेहरू की भविष्य-उन्मुखी दृष्टि के कारण ही स्थापित हुए हैं। आज पंडित नेहरू की विरासत का ही कमाल है कि भारत एक अग्रणी वैश्विक शक्ति के रूप में विश्व पटल पर खड़ा है।”

तहव्वुर राणा ने विशेष एनआईए कोर्ट में याचिका दायर कर फोन पर परिवार से बात करने के लिए अनुमति मांगी

नई दिल्ली पाकिस्तानी-कनाडाई नागरिक और मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा ने मंगलवार को विशेष एनआईए कोर्ट में याचिका दायर कर जेल से अपने परिवार के सदस्यों से फोन पर बात करने की अनुमति मांगी है। एनआईए की विशेष अदालत बुधवार को उसकी याचिका पर सुनवाई कर सकती है। अपनी याचिका में राणा ने दावा किया कि परिवार के सदस्यों से उसकी बातचीत जरूरी है, क्योंकि वे उसके बारे में चिंतित होंगे। पिछले महीने, राणा द्वारा दायर इसी तरह के अनुरोध को एनआईए कोर्ट ने खारिज कर दिया था। 24 अप्रैल को विशेष न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने राणा की अपने परिवार से बात करने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। एनआईए द्वारा उसकी याचिका का विरोध करने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया था। सुनवाई के दौरान, एनआईए ने तर्क दिया कि अगर राणा को अपने परिवार के सदस्यों से बात करने की अनुमति दी जाती है, तो वह बातचीत के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कर सकता है। पाकिस्तानी सेना के मेडिकल कोर के पूर्व अधिकारी राणा को हाल ही में 26/11 मुंबई आतंकी हमले में मुकदमा चलाने के लिए अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया था, जिसमें 26 नवंबर, 2008 को 166 लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे। 9 मई को विशेष अदालत ने राणा को 6 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था, जिससे एनआईए द्वारा पूछताछ में एक अस्थायी विराम लग गया था। एक अधिकारी ने बताया कि 3 मई को एनआईए ने न्यायाधीश की मौजूदगी में राणा की आवाज़ और हस्तलिपि के नमूने एकत्र किए थे, ताकि 26/11 के सह-आरोपी डेविड कोलमेन हेडली के साथ उसकी टेलीफोन पर हुई चर्चाओं की रिकॉर्डिंग से उनका मिलान किया जा सके। संदेह है कि राणा ने हेडली को हाथ से लिखे नोट दिए थे, जिसमें निर्देश और नक्शे साझा किए गए थे, जिनका इस्तेमाल 26/11 के लक्ष्यों की टोह लेने के लिए किया गया था। एनआईए रिमांड के दौरान राणा से मुंबई पुलिस अधिकारियों ने भी पूछताछ की थी। पूछताछ के दौरान, राणा ने दावा किया कि हमले की योजना या निष्पादन से उसका “कोई संबंध नहीं” था। उसने यह भी दावा किया कि उसका बचपन का दोस्त और सह-आरोपी हेडली 26/11 की रेकी करने और योजना के पहलुओं के लिए पूरी तरह जिम्मेदार था। हेडली वर्तमान में अमेरिका की जेल में है। मामले में सरकारी गवाह बने हेडली ने पहले लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की ओर से मुंबई सहित पूरे भारत में टोही मिशन चलाने की बात स्वीकार की थी। पूछताछ के दौरान राणा ने बताया कि मुंबई और दिल्ली के अलावा वह केरल भी गया था। जब उससे केरल जाने का मकसद पूछा गया तो उसने दावा किया कि वह वहां अपने किसी परिचित से मिलने गया था और उसने एजेंसी को उस व्यक्ति का नाम और पता भी बताया था।

सेटेलाइट से होगी खनिजों के अवैध उत्खनन की निगरानी : प्रमुख सचिव श्री उमराव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश में खनिजों के अवैध उत्खनन पर नियंत्रण के लिये सेटेलाइट (उपग्रह) आधारित खनन निगरानी प्रणाली विकसित की गयी है। प्रमुख सचिव खनिज श्री उमाकांत उमराव ने सेटेलाइट (उपग्रह) आधारित खनन निगरानी प्रणाली को लागू किये जाने के संबंध में जिला कलेक्टर्स को आदेश जारी कर दिये हैं। प्रमुख सचिव श्री उमराव ने बताया कि इस व्यवस्था के अंतर्गत प्रदेश की समस्त खदानों को जियो टैग किया गया है तथा इसे पॉयलेट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है। विभाग द्वारा निर्मित पोर्टल URL – https://mines.mp.gov.in/Surveillance/ पर क्लिक कर एक्सेस किया जा सकता है। प्रमुख सचिव ने बताया कि इस पोर्टल से सेटेलाइट के माध्यम से अवैध उत्खनन की पहचान कर एलर्ट्स जारी किये जा रहे हैं, जिसे पोर्टल पर जिला कलेक्टर एवं जिला खनिज अधिकारी द्वारा लॉग इन कर देखा जा सकता है। लॉग इन की जानकारी पृथक से विभागीय ई-मेल आईडी में दी गयी है। जिला कलेक्टर एवं खनिज अधिकारी को एलर्ट की जानकारी एसएमएस द्वारा प्रत्येक माह पोर्टल के माध्यम से दी जायेगी। जिले के अंतर्गत जारी किये गये एलर्ट मैप पर चिन्हित रहेंगे, जिनका अन्य स्थापित खदानों, जियो लॉजिकल लेयर एवं खसरे की जानकारी के आधार पर परीक्षण किया जा सकता है। जारी किये गये एलर्ट को खनिज अधिकारी द्वारा फील्ड वेरिफिकेशन कर मोबाइल ऐप के माध्यम से वेरीफाई किया जायेगा। फील्ड वेरिफिकेशन के बाद अवैध उत्खनन पाये जाने पर मध्यप्रदेश अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भण्डारण नियम-2022 के अंतर्गत कार्रवाई की जायेगी। पोर्टल के संबंध में वीसी के माध्यम से समस्त जिला कार्यालयों में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। प्रमुख सचिव खनिज द्वारा जिला कलेक्टर्स को सेटेलाइट आधारित खनन निगरानी प्रणाली का जिले में तत्परता से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा अवैध उत्खनन पाये जाने पर परिवहन एवं भण्डारण नियम के अंतर्गत कार्यवाही करने के निर्देश जारी कर दिये गये हैं।  

राज्य कर्मचारियों का बीमा भी कराएगी सरकार, तिरंगा यात्रा में भी शामिल हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मंगलवार को मंत्रालय परिसर में मंत्रालय कर्मचारी परिवार द्वारा आत्मीय स्वागत व सम्मान किया गया। मंत्रालय परिवार ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कमल पुष्प की रजत प्रतिकृति भेंट कर सम्मानित किया।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी राज्यकर्मी सम्मान और साधुवाद के पात्र हैं, क्योंकि इनकी कर्मठता और सामूहिक परिश्रम से ही मध्यप्रदेश आज देश के अग्रणी राज्य के रूप में पहचाना जा रहा है। राज्यकर्मी सच्चे अर्थों में कर्म योगी है। ये प्रदेश की शासन और प्रशासन व्यवस्था की धुरी हैं। राज्यकर्मी पूरी निष्ठा और मेहनत से अपने पदीय दायित्व निभाएं, इनके सभी हितों और अनुलाभों (इंसेंटिव्स) का सरकार पूरा-पूरा ध्यान रखेगी। उन्होंने कहा कि सरकार सभी रिक्त पदों को क्रमश: भरने की दिशा में आगे बढ़ रही है। जल्दी ही सभी रिक्त पद भरे जाएंगे। पदोन्नति वाले मसले पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस मामले से जुड़े दोनों पक्षों के साथ चर्चा कर शासकीय सेवकों को पदोन्नति देने के लिए राज्य सरकार पूरी गंभीरता से सभी जरूरी कदम उठा रही है। जल्द ही मामले का सकारात्मक समाधान निकालकर पात्रों को पदोन्नति दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार सभी राज्य कर्मचारियों का बीमा कराने की मंशा से आगे बढ़ रही है। सरकार की मंशा है कि सभी राज्य कर्मियों के खुद के मकान भी हों। राज्य कर्मियों को अपने बच्चों को पढ़ाने-लिखाने में सरकार मदद करना चाहती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर कर्मचारी-अधिकारी की क्षमता और योग्यता का पूरा लाभ लेंगे और प्रदेश की बेहतरी के लिए उसका सदुपयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी राज्यकर्मी शासन व्यवस्था का अभिन्न अंग है इसलिए इनके हित संवर्धन के लिए सरकार कोई कसर नहीं रखेगी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हित में प्रदेश का हित है और प्रदेश के हित में ही राष्ट्र का हित है। कार्यक्रम के संयोजक श्री सुभाष वर्मा द्वारा स्वागत उद्बोधन देकर केन्द्र सरकार के समान राज्य कर्मियों को महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, सचिवालय भत्ता व अन्य सभी कर्मचारी हितैषी निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार जताया और अपना मांग पत्र भी सौंपा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलन एवं भारत माता के चित्र पर मार्ल्यापण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंत्रालय परिवार द्वारा पुष्पगुच्छ एवं पौधा भेंटकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय परिवार द्वारा आयोजित तिरंगा यात्रा में भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तिरंगा लेकर यात्रा का नेतृत्व किया और यात्रा को उसके गंतव्य स्थल की ओर रवाना किया। कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री तथा भोपाल जिले के प्रभारी मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप, क्षेत्रीय विधायक श्री भगवान दास सबनानी के अलावा श्री कुलदीप गुर्जर, श्री घनश्याम दास भकोरिया, श्री संजय राठौर, श्री जी.पी. सिंह सहित मंत्रालयीन अधिकारी कर्मचारी संघों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष,अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में मंत्रालय के कर्मचारी बन्धु उपस्थित थे।  

तकनीकी शिक्षा मंत्री परमार ने रोजगारोन्मुखी डिप्‍लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश संबंधी प्रचार रथ को हरी दिखाई झंडी

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने मंगलवार को भोपाल स्थित सरदार वल्लभ भाई पॉलीटेक्निक महाविद्यालय से, रोजगारोन्‍मुखी डिप्‍लोमा पाठ्यक्रमों में शत-प्रतिशत प्रवेश के संबंध में प्रचार-प्रसार एवं विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से तैयार “प्रचार रथ” को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ 10वीं पास विद्यार्थियों के लिए लाभदायक होंगे। यह प्रचार रथ, भोपाल शहर एवं आस-पास के गांवों में तकनीकी शिक्षा अंतर्गत संचालित विभिन्‍न पाठ्यक्रमों, प्रवेश की प्रक्रिया एवं अन्‍य जानकारियों से विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को अवगत कराएगा। ज्ञातव्य है कि संचालनालय तकनीकी शिक्षा द्वारा सत्र 2025-26 के लिए तकनीकी एवं व्‍यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ की जा चुकी है। इस अवसर पर आयुक्‍त तकनीकी शिक्षा श्री अवधेश शर्मा सहित विभिन्न अधिकारीगण, महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।  

स्टील्थ फाइटर जेट ने उड़ाई दुश्मनों की नींद, चीन-पाक डम-डम के बीच भारत का बड़ा दांव

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना को पांचवी जेनरेशन के अति आधुनिक डीप पेनेट्रेशन एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को स्वदेश में ही विकसित करने की मेगा परियोजना का रास्ता साफ हो गया है। नए फाइटर जेट को मंजूरी: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पांचवी जनरेशन के एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम (एएमसीए) परियोजना के कार्यान्वयन माडल को मंगलवार को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना को एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) उद्योग भागीदारी के माध्यम से क्रियान्वित करने के लिए तैयार है। कितनी लगेगी लागत: परियोजना की शुरुआती विकास लागत करीब 15000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। घरेलू फर्म बनाएंगी: रक्षा मंत्रालय का यह कदम देश की सरकारी और निजी कंपनियों के लिए संयुक्त भागीदारी में देश में पांचवी पीढ़ी के आधुनिक लड़ाकू विमानों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।  एएमसीए के कार्यान्वयन मॉडल को रक्षा क्षेत्र से जुड़ी सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की कंपनियों के लिए बेहतर बताते हुए रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इसमें निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों को प्रतिस्पर्धी दृष्टिकोण से समान अवसर मिलेगा। विश्व के बदलते सामरिक परिदृश्य में युद्ध के बदलते आयामों में भारत के लिए पांचवी पीढ़ी के आधुनिक लड़ाकू जेट अनिवार्य जरूरत नजर आ रहे हैं। भारत अपनी वायु शक्ति क्षमता को बढ़ाने के लिए एडवांस्ड स्टील्थ फीचर्स के साथ मीडियम वेट डीप पेनेट्रेशन फाइटर जेट विकसित करने की महत्वाकांक्षी एएमसीए परियोजना पर काम कर रहा है। निजी कंपनियों की भागीदारी: निजी और सरकारी क्षेत्र की कंपनियां स्वतंत्र रूप से या संयुक्त उद्यम या कांर्सोटियम के रूप में बोली लगा सकती हैं। हालांकि, इसमें शर्त होगी कि संयुक्त उद्यम में बोलीदाता एक कंपनी अनिवार्य रूप से भारतीय होनी चाहिए जो देश के कानूनों और नियमों का अनुपालन करती हो। स्क्वाड्रन की कमी दूर होगी: भारतीय वायुसेना के पास मौजूदा समय में 31 स्क्वाड्रन हैं, जो स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन से काफी कम हैं। इसलिए भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और एक मजबूत घरेलू एयरोस्पेस औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्वदेशी इंजन का विकास: भारत का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अपने स्वदेशी विमान इंजन GTRE GTX-35VS कावेरी इंजन प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। यह इंजन मुख्य रूप से  लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस के लिए है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह एएमसीए विमानों का प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए स्वदेशी विशेषज्ञता, क्षमता और सामर्थ्य का उपयोग करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। चीन की बढ़ती ताकत: हमारा पड़ोसी देश चीन अपनी वायुसेना का तेजी से विस्तार कर रहा है। इसके साथ ही वह हमारे दुश्मन देश पाकिस्तान की भी खुलकर मदद कर रहा है। चीन ने अपनी छठवीं पीढ़ी का विमान J-36 बनाकर इसका परीक्षण भी कर लिया है। ऐसे में देश की सुरक्षा के लिए भारतीय वायुसेना का मजबूत करने के लिए यह जरूरी है। यह एयरोस्पेस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। बता दें कि कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति ने पिछले साल लड़ाकू जेट विकास कार्यक्रम को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। परियोजना की शुरुआती विकास लागत करीब 15000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। भारतीय वायुसेना एएमसीए परियोजना की दीर्घकालिक आवश्यकता को देखते हुए इस पर जोर दे रही है। लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस के विकास के बाद एएमसीए के तहत लड़ाकू विमान विकास परियोजना का अगला चरण है।

विभागीय परामर्शदात्री समिति की बैठक में मंत्री चेतन्‍य काश्‍यप का उदबोधन

एमएसएमई क्षेत्र को नई ऊंचाईयों पर ले जाने और संभाव्‍य क्‍लस्‍टरों को कॉमन फेसिलिटेशन सेंटर की तरह सुविधाएं दिलाने के प्रयास भोपाल सू‍क्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्री श्री चेतन्‍य कुमार काश्‍यप ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र के विकास के लिए नई नीतियों के निर्माण सहित कई महत्‍वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और संभाव्‍य क्‍लस्‍टरों को कॉमन फेसिलिटेशन सेंटर की तरह सुविधाएं दिलाने के प्रयास हो रहें है। मंत्री श्री काश्‍यप आज मंत्रालय वल्‍लभ भवन में विभागीय परामर्शदात्री समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने विभागीय उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि गत वित्‍त वर्ष में विभाग का बजट 700 करोड़ रूपये का था, लेकिन मुख्‍यमंत्री के सहयोग से विभाग को 2100 करोड़ रुपये मिले, जिससे अनुदान सहायता की सभी लंबित देनदारियों का भुगतान संभव हो पाया। नव उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए नई स्‍टार्ट अप नीति में उद्योग लगाने का विचार आने से लेकर उसे धरातल पर उतारने तक उद्यमियों को वित्‍तीय और तकनीकी सहायता उपलब्‍ध कराने के प्रावधान किये गये हैं। भारत सरकार के पोर्टल पर पं‍जीयन स्‍वीकृत होने पर नव उद्यमी को 10,000 रूपये प्रतिमाह की सहायता एक साल तक उपलब्‍ध कराने के प्रावधान किये गये हैं। यही नहीं माल निर्यात हेतु परिवहन व्‍यय पर अनुदान का प्रावधान भी किया गया है। प्रदेश में नए औद्योगिक क्षेत्रों/क्‍लस्‍टरों के निर्माण और विकास के प्रयासों में तेजी लाई गई हैं। इन पर मिलने वाले अनुदान का युक्‍तियुक्‍तकरण किया गया है, जिससे अनुदान में एकरूपता आई है। जबलपुर के रेडीमेड गारमेंट और छतरपुर के फर्नीचर क्‍लस्‍टर का उल्‍लेख करते हुए श्री काश्‍यप ने कहा कि वर्तमान में केन्‍द्र सरकार से वर्तमान क्‍लस्‍टरों में कॉमन फेसिलिटेशन सेंटर की जो सहायता मिलती है, वह संभावना वाले क्‍लस्‍टरों को नहीं मिलती है। हम प्रयास कर रहे हैं कि संभावना वाले क्‍लस्‍टरों को भी यह सुविधा मिल सके। खिलौना उद्योग के क्षेत्र में उन्‍होंने आक्रामकता और हिन्‍सक प्रवृत्ति को वढ़ावा देने वाले खिलौने के निर्माण को हतोत्‍साहित कर सकारात्‍मक रचनात्‍मकता को बढ़ावा देने वाले खिलौने के निर्माण को प्रोत्‍साहित करने का सुझाव दिया। सामाजिक सुधार के लिए यह जरूरी है। बैठक में यह विषय पूर्व मंत्री श्री ओम प्रकाश सखलेचा ने उठाया, उनका यह कहना था कि बच्‍चों में आक्रामकता फैलाने वाले खिलौनों के कारण हिंसक प्रवृत्ति बढ़ रही है इसे रोकने के लिए आवश्‍यक कदम उठाना जरूरी है। श्री सखलेचा ने विभागीय उपलब्धियों की सराहना करते हुए श्री काश्‍यप और अधिकारियों को बधाई दी। बैठक में देवास की विधायक श्रीमती गायत्री राजे पवार भी उपस्थित थीं। मंत्री श्री काश्‍यप के उद्बोधन से पूर्व एमएसएमई विभाग के प्रमुख सचिव श्री राघवेन्‍द्र सिंह और सचिव दिलीप कुमार ने विभागीय उपलब्धियों एवं भविष्‍य की कार्ययोजना पर प्रजेन्‍टेशन दिया।  

प्रदेश में एक पेड़ माँ के नाम अभियान 5 जून से 30 सितम्बर तक चलेगा: प्रमुख सचिव डॉ. कोठारी

भोपाल एक पेड़ माँ के नाम भारत शासन का जन एवं सामुदायिक सहयोग से एक राष्ट्रव्यापी अभियान है। इस अभियान का शुभारंभ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून, 2024 को एक पौधा रोपित कर किया गया था। प्रमुख सचिव पर्यावरण श्री नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि इस वर्ष यह अभियान प्रदेश में 5 जून से 30 सितम्बर तक पूर्ण उत्साह एवं व्यापक रूप से मनाया जाना है। इस संबंध में जिला कलेक्टर्स को अपने जिले में “एक पेड़ माँ के नाम’’ अभियान की कार्य-योजना तैयार करने के निर्देश जारी कर दिये गये हैं।  

पूर्व सांसद आनंद परांपजे ने कहा- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर संजय राउत का राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण

मुंबई शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को विफल बताने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफा मांगने पर एनडीए नेता हमलावर हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता एवं पूर्व सांसद आनंद परांपजे ने मंगलवार को उन पर राजनीति करने का आरोप लगाया और इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। पूर्व सांसद आनंद परांपजे ने कहा, “शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के बुद्धि पर मुझे तरस आता है कि पूरी दुनिया में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में हमने दुनिया को दिखा दिया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंकवादियों के नौ ठिकानों को हमने ध्वस्त किया। इसके अलावा पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ भारत सरकार ने जो बड़े कदम उठाए हैं, पूरी दुनिया को इसे बताने के लिए कूटनीति भी की जा रही है। भारत सरकार ने सारे विपक्ष को साथ लेते हुए सांसदों के डेलिगेशन विदेशों में भेजे हैं।” पार्टी लाइन से अलग हटकर बयान देने का अंदेशा जताते हुए उन्होंने कहा, “इस अवसर पर संजय राउत का यह बयान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इस समय पूरे देश को, चाहे उसमें सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, एक साथ खड़ा होना चाहिए। लेकिन इस वक्त एक जिम्मेदार नेता का ऐसा बयान देना शोभा नहीं देता। राउत की पार्टी के कुछ सांसद भी ऑल पार्टी डेलिगेशन के सदस्य हैं, जिसमें प्रियंका चतुर्वेदी भी हैं। ऐसे में संजय राउत जो बयान दे रहे हैं क्या उसको शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे का समर्थन है या नहीं, यह सवाल भी उठ रहा है।” परांपजे ने कहा, “पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ हम जो लड़ाई लड़ रहे हैं। उसमें हमारे सैनिकों का मनोबल किसी राजनीतिक बयानबाजी के कारण नीचे नहीं आए, यह भी एक राजनीति पार्टी की जिम्मेदारी बनती है। संजय राउत की तरफ से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर राजनीति करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।” उल्लेखनीय है कि मुंबई में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा था, ” ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सबसे पहले तो एक असफल ऑपरेशन है, लेकिन राष्ट्रहित में विपक्ष इसका और अधिक राजनीतिकरण नहीं करना चाहता है। असली सवाल यह है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जरूरत क्यों पड़ी।” इसके साथ ही उन्होंने अमित शाह से इस्तीफे की मांग की।

श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग : पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाया अनूठा कदम

भोपाल मध्यप्रदेश के खंडवा जिले का पवित्र तीर्थ स्थल, श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आध्यात्मिकता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अनूठा कदम उठाया गया है। श्री ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने जिला प्रशासन और ‘पुष्पांजलि इकोनिर्मित’ के सहयोग से मंदिर में अर्पित फूलों और बेलपत्रों के पुनर्चक्रण की एक अभिनव पहल शुरू की है, जो न केवल स्वच्छता को बढ़ावा दे रही है, बल्कि स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रतिदिन मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले फूलों और अन्य पूजन सामग्री को अब बेकार नहीं जाने दिया जाता। ट्रस्ट द्वारा इन फूलों को एकत्रित कर स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों के हाथों में सौंपा जा रहा है। ये इन फूलों को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदल रही हैं। ‘पुष्पांजलि इकोनिर्मित’ संस्था इन महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, मशीनें और आवश्यक सहयोग प्रदान कर रही है। इससे वे अगरबत्ती, धूपबत्ती, हवन सामग्री, प्राकृतिक जैविक खाद और प्राकृतिक रंग जैसे उत्पाद तैयार कर रही हैं। स्व-सहायता समूह के यह उत्पाद न केवल मंदिर परिसर में, बल्कि स्थानीय बाजारों में भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, जिससे इन महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है। मंदिर में चढ़ावे के फूलों को भगवान का प्रसाद मानकर उपयोगी संसाधन में बदलकर यह मॉडल ‘स्वच्छ भारत मिशन’ को भी सशक्त रूप से समर्थन दे रहा है। श्री ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के इस प्रयास को जिला प्रशासन का भी पूर्ण समर्थन प्राप्त है। यह साझेदारी न केवल पर्यावरण की रक्षा कर रही है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है। यह मॉडल तीर्थ स्थल पर आस्था, पर्यावरण और आत्मनिर्भरता के संगम को दर्शाता है। श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग अब केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि एक ऐसा उदाहरण बन रहा है जो यह साबित करता है कि आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चल सकते हैं। इस राह पर चलकर महिलाएं समाज की नई शक्ति बनकर उभर रही हैं।  

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2001 बैच के दारोगाओं और वर्तमान में पुलिस निरीक्षक पद पर कार्यरत इंस्पेक्टरों को बड़ी राहत दी

प्रयागराज इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2001 बैच के दारोगाओं और वर्तमान में पुलिस निरीक्षक पद पर कार्यरत इंस्पेक्टरों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने इनकी प्रशिक्षण अवधि सेवा में जोड़ने और जिनकी सेवा 16 वर्ष पूरी हो चुकी है, उन्हें द्वितीय प्रोन्नत वेतनमान ग्रेड-पे 5400 रुपये देने के संबंध में छह सप्ताह में कानून के अंतर्गत स्पष्ट आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने पुलिस इंस्पेक्टर जगदम्बा सिंह व अन्य की याचिका निस्तारित करते हुए दिया है। याचीगण की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम एवं श्याम शरण ने बहस की। कहा कि हाई कोर्ट के पूर्व आदेशों और बाद में जारी शासनादेशों के बावजूद विभाग कुछ नहीं कर रहा है। याची पुलिस निरीक्षकों की नियुक्ति वर्ष 2001 में दारोगा पद पर हुई थी। वर्ष 2016 में निरीक्षक पद पर पदोन्नति प्रदान की गई। सभी की सेवाएं 16 वर्षों से ज्यादा हो चुकी हैं, नियमानुसार वे द्वितीय प्रोन्नत वेतनमान पाने के हकदार हैं, लेकिन उन्हें द्वितीय वेतनमान ग्रेड-पे 5400 रुपये (यह पुलिस उपाधीक्षक का है) नहीं दिया जा रहा है। उनके ट्रेनिंग अवधि को भी सेवा में नहीं जोड़ा गया। 26 अगस्त, 2015 के संशोधित शासनादेश में यह व्यवस्था है कि ऐसे राज्य कर्मचारी जिन्होंने सीधी भर्ती के पद पर प्रथम नियुक्ति की तिथि से 16 वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली है, उन्हें द्वितीय वेतनमान / ग्रेड पे प्रदान किया जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, अपर पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद के 17 मार्च, 2012 के सर्कुलर में स्पष्ट कहा गया है कि आरक्षी के पद का ग्रेड वेतन 2000, मुख्य आरक्षी पद का 2400, उपनिरीक्षक पद का ग्रेड वेतन 4200 तथा निरीक्षक के पद का ग्रेड वेतन 4600 एवं पुलिस उपाधीक्षक पद का 5400 रुपये अनुमन्य है।

विभिन्न कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में 64,121 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की

लखनऊ विभिन्न कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में 64,121 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। हीरानंदानी समूह के अध्यक्ष डा. निरंजन हीरानंदानी ने सबसे ज्यादा 28,440 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। यह निवेश नोएडा में सेमीकंडक्टर चिप के निर्माण को लेकर किया जाएगा। वहीं अवाडा समूह के उपाध्यक्ष सिंदूर मित्तल ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में 20,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक केसी झंवर ने अलीगढ़, शाहजहांपुर व टांडा में 1,981 करोड़ रुपये का निवेश करने का भरोसा इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों को दिया है। टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड के सीईओ संजय बंगा ने 13,700 करोड़ रुपये से बुंदेलखंड सहित कई क्षेत्रों में 800 मेगावाट अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल पावर इकाईयों को स्थापित करने की घोषणा की है।   मंगलवार को मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में इन्वेस्ट यूपी की तरफ से निवेशकों के साथ आयोजित गोल मेज सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने सरकार की निवेश से संबंधित योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत का सबसे आकर्षक निवेश गंतव्य बनकर उभरा है। राज्य सरकार तेज व पारदर्शी निवेश माहौल सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन्वेस्ट यूपी के मुख्यकार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद ने कहा कि निवेशकों की सुविधा के लिए कार्यशैली में बदलाव किया गया है। बलरामपुर चीनी मिल्स के सीएफओ प्रमोद पतवारी ने सरकार के निरंतर सहयोग की प्रशंसा की और बायोप्लास्टिक जैसे नवाचार में निवेश की रुचि दिखाई। यूपीडीएफ के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने लखनऊ में निवेशक सम्मेलन और दुबई में रोड शो का प्रस्ताव रखा। श्रीकृष्णानंद समूह के कपिल तिवारी ने लखनऊ और नोएडा में 25 करोड़ रुपये के रेडी मिक्स प्लास्टर प्लांट की परियोजना पर चर्चा की। ईएन कम्युनिकेशन के राजीव रंजन सिंह ने वाईईडीए में 1,500 करोड़ रुपये के महाभारत संग्रहालय का प्रस्ताव रखा है। बैठक में रिमेंस डीएसपी इंफ्रा के अर्नव गुप्ता ने लखनऊ में पांच करोड़ रुपये के कोल्ड इमल्शन-आधारित रोड पैच मिक्स प्लांट के विस्तार करने का लक्ष्य रखा। लार्ड्स ग्रुप के सचिदानंद उपाध्याय ने आइवीडी, मेडटेक और रूफ टाप सोलर के लिए 1,500 करोड़ रुपये की इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव रखा और डायसिस इंडिया के सचिन सिंह ने 10 करोड़ रुपये के निवेश से अपने प्लांट की क्षमता को दोगुना करने का प्रस्ताव दिया।

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